शिमला : शिमला जिले के कुमारसैन थाना क्षेत्र में एक 15 वर्षीय नाबालिग लड़की से दुष्कर्म का मामला सामने आया है। पीड़िता 11वीं कक्षा में पढ़ती है। आरोप है कि कुमारसेन के एक युवक ने पीड़िता से कई बार दुष्कर्म किया। पीड़िता के पिता की शिकायत पर कुमारसेन पुलिस ने आरोपित युवक के विरुद्ध केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
शिकायतकर्ता ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उसकी बड़ी बेटी 15 वर्ष की है और कक्षा 11 में पढ़ती है। बेटी ने अपनी मां को बताया कि कुमारसैन के एक गांव के आशीष नामक युवक ने उसके साथ दुष्कर्म किया तथा यौन उत्पीड़न किया। शिकायतकर्ता के अनुसार यह घटना पहले भी कई बार हुई थी।
पुलिस के मुताबिक मामला भारतीय न्याय संहिता की धारा 65(1) तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के अंतर्गत दर्ज किया गया है और आरोपित के विरुद्ध कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।
Hamirpur :
चार वर्ष पहले कक्षा नौ की छात्रा को दिल्ली ले जाने और दुष्कर्म करने के मामले पर जीजा, साले को सजा सुनाई गई है। गुरुवार को पॉक्सो कोर्ट के जज अनिल कुमार खरवार ने जीजा राजकुमार को 20 वर्ष और उसके साले अंकित कुमार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। एडीजीसी रुद्र प्रताप सिंह ने बताया कि दोनों को 29,500 का अर्थदंड भी लगाया गया है। बताया कि आरोपित अंकित स्कूल छोड़ने के बहाने छात्रा को सुमेरपुर से दिल्ली ले गया था, वहां से अपनी बड़ी बहन के घर ले आया। घर में अकेले पाकर जीजा राजकुमार ने उसके साथ दुष्कर्म किया, जिसके बाद आरोपी अंकित उसे अपने गांव महुआ ले गया।
पीड़िता को नौ महीने तक बंधक बनाकर रखा गया। इस बीच शादी करने का झांसा देता रहा, और गर्भवती होने पर जबरन गर्भपात करवाया। छात्रा के पिता को फोन पर आपत्तिजनक फोटो और वीडियो भेजता रहा। किसी को कुछ बताने पर जान से मारने की धमकी भी दी। बताया कि पीड़िता के बयान के अनुसार अंकित ने बेल्टों से उसे कई बार मारा भी, और अंत में मारकर घर से भगा दिया।
जिसके बाद पीड़िता के पिता ने सुमेरपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई। बताया कि मामले की निरंतर सुनवाई चल रही थी। दोष सिद्ध होने पर सजा सुनाई गई है। आरोपी अंकित को 19,500 का अर्थदंड और उसके जीजा राजकुमार को 20 वर्ष कठोर कारावास के साथ 10,000 का अर्थदंड भी लगाया गया है।
Narsinghpur :
मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव में हुई एक अत्यंत जघन्य और दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। “मेरे अंदर शैतान जाग गया था…” यह खौफनाक कबूलनामा उस हैवान का है, जिसने अपनी हवस मिटाने के लिए आठ साल की एक मासूम बच्ची को मौत के घाट उतार दिया। आरोपी पहले बच्ची को उसके पिता के नाम पर झूठ बोलकर स्कूल से जंगल ले गया और फिर उसके साथ घिनौनी दरिंदगी की। जब मासूम दर्द से चीखने-चिल्लाने लगी, तो आरोपी ने गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद साक्ष्य छिपाने के लिए शव को पानी से भरे गड्ढे में फेंक दिया और खुद गांव वालों के साथ बच्ची को ढूंढने का नाटक करता रहा। इस घटना ने साल 2018 के जम्मू-कश्मीर के बहुचर्चित कठुआ कांड की दर्दनाक यादें ताजा कर दी हैं।
गुस्से में उबला गोटेगांव, सड़कों पर फूटा जनसैलाब
इस बर्बर और अमानवीय घटना के विरोध में स्थानीय लोगों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा है। न्याय की मांग को लेकर गोटेगांव पूरी तरह बंद है, विरोध प्रदर्शन के तहत कैंडल मार्च निकाले जा रहे हैं और हर तरफ आरोपी को फांसी दिए जाने की मांग गूंज रही है। स्थिति की अत्यधिक संवेदनशीलता और तनाव को देखते हुए पूरे गोटेगांव और आसपास के संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
पिता के नाम का झांसा देकर स्कूल से फुसलाकर ले गया था आरोपी
घटनाक्रम के अनुसार, 5 अगस्त की दोपहर आठ साल की बच्ची रोज की तरह स्कूल गई थी। छुट्टी के समय पड़ोस में रहने वाला युवक अनिल यादव उर्फ अन्नू स्कूल पहुंचा और उसने बच्ची से झूठ बोला कि उसके पिता ने उसे घर बुलाया है। मासूम ने अपने शिक्षक को भी यही बात बताई, अपना बैग क्लास में रखा और आरोपी के साथ चली गई। किसी को इस बात का दूर-दूर तक अंदाजा नहीं था कि यह उस बच्ची की जिंदगी का आखिरी सफर साबित होगा। जब काफी देर तक बच्ची घर नहीं लौटी, तो परिजनों की चिंता बढ़ने लगी। रिश्तेदारों और आसपास के इलाकों में काफी खोजबीन की गई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिलने पर परिजनों ने झौतेश्वर पुलिस चौकी पहुंचकर गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई।
मामले की गंभीरता को भांपते हुए पुलिस अधीक्षक (SP) डॉ. ऋषिकेश मीना खुद मौके पर पहुंचे। उनके साथ अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) संदीप भूरिया और आसपास के थानों की पुलिस टीम भी तुरंत गोटेगांव पहुंच गई। गांव वालों और पुलिस बल ने मिलकर रात में ही एक संयुक्त तलाशी अभियान शुरू किया। इस दौरान डॉग स्क्वॉड, एफएसएल (FSL) टीम और टेक्निकल सर्विलांस की मदद ली गई। सैकड़ों ग्रामीण हाथ में टॉर्च लेकर जंगलों और खेतों की खाक छानते रहे, क्योंकि सभी को यह उम्मीद थी कि बच्ची सही-सलामत मिल जाएगी। हालांकि, करीब आठ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद गांव से लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर जंगल में एक पानी से भरे गड्ढे के पास मासूम का शव बरामद हुआ। शुरुआती जांच में ही यह स्पष्ट हो गया कि बच्ची के साथ पहले दुष्कर्म किया गया और फिर उसकी बेरहमी से हत्या कर दी गई।
तलाश में शामिल होने का ढोंग और आरोपी का सनसनीखेज कबूलनामा
जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, शक की सुई सीधे उसी युवक अनिल यादव पर जा टिके जिसे आखिरी बार बच्ची के साथ देखा गया था। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर अनिल यादव को हिरासत में लिया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने मीडिया और पुलिस के सामने जो जुर्म कबूला, उसने सुनने वालों की रूह कंपा दी। आरोपी ने माना कि उसकी नीयत खराब हो गई थी और वह बच्ची को बहला-फुसलाकर जंगल ले गया था। उसने दावा किया कि उसकी मंशा हत्या करने की नहीं थी, लेकिन जब बच्ची दर्द और डर से चिल्लाने लगी, तो पकड़े जाने के डर से उसने उसका गला दबा दिया। हत्या के बाद उसने शव को पानी से भरे गड्ढे में फेंका और गांव लौटकर लोगों के साथ बच्ची को ढूंढने का नाटक करने लगा ताकि किसी को उस पर शक न हो।
डॉक्टरों का पैनल, पॉक्सो एक्ट और फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी सुनवाई
गुरुवार सुबह जिला अस्पताल में तीन डॉक्टरों की विशेष टीम द्वारा बच्ची के शव का पोस्टमार्टम किया गया। इस दौरान अस्पताल परिसर के बाहर भारी संख्या में लोग एकत्र हो गए और आरोपी को तुरंत फांसी दिए जाने की मांग पर अड़े रहे। पुलिस प्रशासन ने आरोपी अनिल यादव के खिलाफ पॉक्सो (POCSO) एक्ट, बलात्कार और हत्या जैसी गंभीर व गैर-जमानती धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि इस संवेदनशील मामले को ‘जघन्य और दुर्लभतम’ अपराध की श्रेणी में रखा गया है। मामले की विस्तृत और निष्पक्ष जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। पुलिस का दावा है कि जल्द से जल्द जांच प्रक्रिया पूरी कर अदालत में चार्जशीट पेश की जाएगी और इस केस को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाकर आरोपी को सख्त से सख्त सजा दिलाई जाएगी। फिलहाल पूरे क्षेत्र में तनाव को देखते हुए पुलिस पूरी तरह मुस्तैद है।
बेंगलुरु। पत्नी की फोन की लत और रील बनाने की आदत से परेशान पति ने ऐसा कदम उठा लिया, जिसके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता। उसने उसकी गला घोंटकर हत्या कर दी।
कर्नाटक की कुंबलगोडु पुलिस की स्पेशल टीम ने बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के रहने वाले धीरज कुमार को पत्नी रीमा कुमारी की हत्या के मामले में गिरफ्तार कर लिया।
पत्नी की मोबाइल लत से परेशान होकर की हत्या
पुलिस के मुताबिक, दोनों को प्यार हुआ था और उन्होंने करीब 10 महीने पहले शादी की थी। इसके बाद वह रीमा के परिवार को बताए बिना उसे लेकर बेंगलुरु चला गया था। वे बेंगलुरु के गेरुपल्या में किराए के कमरे में रह रहे थे।
पुलिस के अनुसार पूछताछ के दौरान, धीरज ने माना कि शादी के बाद रीमा की उसमें दिलचस्पी कम हो गई थी। रीमा ज्यादातर समय मोबाइल फोन पर लगी रहती थी।
अक्सर रील बनाती थी, उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने से मना करती थी। सिर्फ अपने लिए खाना बनाती थी और उसके काम से लौटने से पहले ही खाना खा लेती थी। उसने कहा कि वह खाना भी नहीं परोसती थी।
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पुलिस ने यह भी बताया कि रीमा, धीरज पर बेंगलुरु छोड़कर बिहार लौटने का लगातार दबाव बना रही थी, जो दोनों के बीच अक्सर होने वाली बहस की एक और वजह बन गया था।
आरोपित के कबूलनामे के मुताबिक, इन मुद्दों को लेकर दोनों के बीच तीखी बहस हुई। बहस के दौरान, रीमा ने धीरज को डंडे से मारा।
गुस्से में आकर, धीरज ने उसके दुपट्टे से गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी। हत्या के बाद, आरोपित ने उसके चेहरे को प्लास्टिक में लपेटा, शव को चादर से ढंका, उसे किराए के कमरे में ही छोड़ दिया और बिहार भाग गया।
दक्षिण-पश्चिम जिले की साइबर पुलिस ने विदेशी पार्सल में डॉलर और सोना होने का झांसा देकर एक लाख 46 हजार रुपये की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का गिरोह का पर्दाफाश किया है। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में एक नाइजीरियाई नागरिक समेत 4 आरोपियों को पकड़ा है। इस पूरे नेटवर्क के तार दिल्ली से लेकर तेलंगाना और आंध्र प्रदेश तक जुड़े मिले हैं। बता दें कि 31 मार्च को साउथ-वेस्ट साइबर थाने में एक शख्स ने शिकायत दी थी कि कुछ लोगों ने व्हाट्सऐप चैट और फोन कॉल के जरिए उससे संपर्क किया था और खुद को अमेरिका का रहने वाला बताया था।
आरोपियों ने पहले पीड़ित से दोस्ती की और उसका भरोसा जीता था, जिसके बाद उसे बताया गया कि उसके नाम से विदेश से एक पार्सल भारत भेजा गया है, जिसमें अमेरिकी डॉलर और सोना है। साथ ही फिर मनी डिक्लेरेशन सर्टिफिकेट, फ्लाइट टिकट, कस्टम क्लियरेंस और कथित तौर पर जब्त सोना रिलीज कराने के नाम पर अलग-अलग किस्तों में पैसे मांगे गए थे। पीड़ित ने आरोपियों की बातों पर भरोसा करते हुए अलग-अलग यूपीआई आईडी और बैंक खातों में करीब 1 लाख 46 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए थे। हालाकि शिकायत के बाद पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू कर दी थी। साथ ही डिजिटल एविडेंस, बैंक ट्रांजैक्शन और मोबाइल डिटेल की पड़ताल के दौरान पुलिस को आरोपियों के बारे में अहम सुराग हाथ लगे थे। हालाकि जांच दिल्ली से शुरू होकर तेलंगाना और फिर आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम तक पहुंच गई थी, जहां पुलिस की टीम ने सबसे पहले मैदान गढ़ी, दिल्ली से दीपक कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया है।
आरोपी के कब्जे से ठगी में इस्तेमाल एक मोबाइल फोन बरामद कर लिया गया है। इसके बाद तेलंगाना के जयशंकर भूपालपल्ली से कोंडा सागर और डुब्बापेटा से अजमीरा विनोद कुमार को गिरफ्तार किया गया है। साथ ही विनोद कुमार के कब्जे से 2 मोबाइल फोन बरामद हुए हैं। जांच करने पर पता चला है कि इस साइबर फ्रॉड के तार आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम से जुड़े हुए हैं।
दिल्ली पुलिस सूत्रो के मुताबिक,एक (22) वर्षीय साइमोन मिरेकल चिनोंसो, जो नाइजीरियाई नागरिक है। इस नेटवर्क का हिस्सा थी। दिल्ली पुलिस की टीम ने विशाखापट्टनम में कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार किया है। उसके कब्जे से ठगी में इस्तेमाल किए गए 4 मोबाइल फोन बरामद हुए हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी संगठित तरीके से साइबर ठगी को अंजाम दे रहे थे। पुलिस के मुताबिक, दीपक कुमार, कोंडा सागर और अजमीरा विनोद कुमार साइबर फ्रॉड सिंडिकेट को म्यूल बैंक अकाउंट उपलब्ध कराते थे, जिसके बदले मोटी कमीशन लेते थे। साथ ही नाइजीरियाई नागरिक साइमोन मिरेकल चिनोंसो व्हाट्सऐप चैट और फोन कॉल के जरिए खुद को इमिग्रेशन अधिकारी, कस्टम अधिकारी या दूसरी संस्थाओं का प्रतिनिधि बताकर लोगों से संपर्क करती थी।
हालाकि विदेशी पार्सल, कस्टम क्लियरेंस और कीमती सामान रिलीज कराने के नाम पर पीड़ितों से पैसे ट्रांसफर करवाए जाते थे, जिसके बाद ठगी की रकम को कई बैंक खातों के जरिए घुमाकर उसकी असली पहचान छिपाने की कोशिश की जाती थी। इस पूरे ऑपरेशन में पुलिस ने करीबन 4 आरोपियों को गिरफ्तार कर कुल सात मोबाइल फोन बरामद किए हैं। फिलहाल पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस सिंडिकेट ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है। इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं।
देश के सबसे बड़े मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने दिल्ली की स्पेशल कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है। सीबीआई की इस चार्जशीट ने देश को झकझोर कर रख दिया है। जांच में यह साफ हो गया है कि नीट पेपर लीक कोई छिटपुट या इकलौती घटना नहीं थी, बल्कि यह नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के अंदर से लेकर देश के कई राज्यों तक फैला हुआ एक बेहद संगठित और गहरा आपराधिक सिंडिकेट था। इस साजिश में NTA के अपने सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स से लेकर कोचिंग संचालक, बिचौलिए और राजस्थान से लेकर केरल तक का स्थानीय नेटवर्क पूरी तरह से जुड़ा हुआ था।
NTA के अंदर से ही लीक हुआ पेपर, तीन टीचर्स ने रची थी साजिश
इस पूरे महाघोटाले की नींव परीक्षा से कई हफ्तों पहले NTA के अत्यंत गोपनीय (Confidential) सवाल-सेटिंग और ट्रांसलेशन प्रक्रिया के दौरान ही रख दी गई थी। सीबीआई की चार्जशीट के मुताबिक, NTA द्वारा नियुक्त किए गए तीन प्रमुख सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स ने अपनी पहुंच का गलत इस्तेमाल करते हुए सिस्टम को धोखा दिया।
इन आरोपियों में केमिस्ट्री एक्सपर्ट प्रहलाद विट्ठलराव कुलकर्णी, बॉटनी एक्सपर्ट मनीषा गुरुनाथ मंधारे और फिजिक्स एक्सपर्ट मनीषा संजय हवलदार शामिल हैं। गोपनीय सेक्शन में चेकिंग और फ्रिस्किंग (तलाशी) न होने का पूरा फायदा उठाते हुए कुलकर्णी ने केमिस्ट्री के 135 सवालों के तीन सेट में से आसान सवालों को दिमाग में याद कर लिया और होटल लौटकर उन्हें लिख लिया। वहीं, मुश्किल सवालों के लिए हाथ से लिखकर छोटी-छोटी पर्चियां तैयार की गईं। इसके अलावा, एक्सपर्ट मनीषा मंधारे ने एनसीईआरटी की किताबों में उन तमाम पैराग्राफ्स को मार्क कर दिया जहां से सीधे सवाल बनाए गए थे। इन तीनों एक्सपर्ट्स ने मिलकर दिन-रात मेहनत कर फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी तीनों विषयों के पेपर्स को पूरी तरह से रिक्रिएट कर बाहर निकाल लिया था।
टेलीग्राम से लेकर सीकर और केरल तक फैला सिंडिकेट
चार्जशीट के अनुसार, NTA एक्सपर्ट से जुड़ी मनीषा संजय वाघमारे ने लीक किए गए सवाल धनंजय लोखंडे को सौंपे। इसके बाद लोखंडे ने इस गोपनीय पेपर को नासिक के शुभम खैरनार को 25 लाख रुपये में बेच दिया। खैरनार से यह पेपर आगे बढ़ते हुए यश यादव तक पहुंचा, जिसने टेलीग्राम ऐप के जरिए इसे राजस्थान के रहने वाले मांगीलाल बिवाल के पास भेजा। इस डील की पक्की गारंटी के तौर पर मांगीलाल बिवाल ने अपने क्लास 10वीं और 12वीं के ओरिजिनल एजुकेशनल सर्टिफिकेट्स और एक साइन किया हुआ खाली चेक सिक्योरिटी के रूप में गिरवी रखा था।
राजस्थान के सीकर और झुंझुनू बने मुख्य केंद्र: राजस्थान में पेपर बांटने का मुख्य ठिकाना सीकर और झुंझुनू जिले बने। झुंझुनू बाईपास पर एक काली हुंडई वरना कार में मांगीलाल बिवाल और दिनेश बिवाल तीनों सब्जेक्ट्स के प्रिंटेड सेट लेकर पहुंचे थे, जहां अमित कुमार मीणा और रोहित मावलिया पेपर रिसीव करने आए। यहां तक कि आर्थिक तंगी के चलते दिनेश के बेटे ऋषि बिवाल ने अमित को ऑफर दिया कि अगर वे 10 से 12 नए कैंडिडेट्स ले आएंगे, तो पेपर मुफ्त में दे दिया जाएगा। इस सौदे में भी कैश की बजाय 4 छात्रों की असली मार्कशीट बतौर सिक्योरिटी रखवाई गई थी। शर्त यह थी कि परीक्षा में 150 से ज्यादा सवाल मिलने पर ही पूरा पेमेंट किया जाएगा। हैरानी की बात तो यह है कि इस पूरी साजिश में शामिल खुद ऋषि बिवाल को नीट परीक्षा में 720 में से मात्र 107 अंक ही मिले।
केरल के हॉस्टल तक पहुंचे तार: यह नेटवर्क सिर्फ उत्तर भारत तक ही सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार दक्षिण भारत के केरल राज्य तक जुड़े हुए थे। सीकर की ‘आरके एजुकेशनल कंसल्टेंसी’ से व्हाट्सएप के जरिए आए 500 सवालों के पीडीएफ (PDF) केरल के अदूर स्थित माउंट जायन मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस छात्र लक्ष्य राज तक पहुंचे। लक्ष्य के दोस्त रजत चौधरी ने अपने भाई ऋषभ चौधरी के लिए फोनपे (PhonePe) के जरिए 30,000 रुपये ट्रांसफर किए। परीक्षा शुरू होने से कुछ ही घंटे पहले ऋषभ को 450 हल किए हुए सवालों की पीडीएफ फाइल मिल गई थी।
ऐसे हुआ इस बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा
इस पूरे रैकेट का भंडाफोड़ किसी बड़ी एजेंसी ने नहीं, बल्कि सीकर के एक सतर्क केमिस्ट्री टीचर शशिकांत सुथार की सजगता के कारण हुआ। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप पर धड़ल्ले से घूम रहे गेस पेपर को जब असली पेपर से हूबहू मिलते देखा, तो तुरंत NTA को ईमेल किया और राजस्थान पुलिस में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई।
इसके बाद राजस्थान एसओजी (SOG) की शुरुआती जांच के आधार पर 12 मई को सीबीआई ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर एसआईटी (SIT) का गठन किया। पुख्ता सबूत हाथ लगने के बाद 3 मई 2026 को परीक्षा रद्द कर दी गई और 21 मई को दोबारा री-एग्जाम कराया गया। फिलहाल, सीबीआई ने इस सनसनीखेज मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट में NTA के 3 प्रमुख एक्सपर्ट्स समेत कुल 13 मुख्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। इन सभी आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और पब्लिक एग्जाम एक्ट 2024 के तहत सख्त धाराओं में कानूनी शिकंजा कसा गया है।
नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम जिले की साइबर पुलिस ने विदेशी पार्सल में डॉलर और सोना होने का झांसा देकर एक लाख 46 हजार रुपये की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का गिरोह का पर्दाफाश किया है। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में एक नाइजीरियाई नागरिक समेत 4 आरोपियों को पकड़ा है। इस पूरे नेटवर्क के तार दिल्ली से लेकर तेलंगाना और आंध्र प्रदेश तक जुड़े मिले हैं। बता दें कि 31 मार्च को साउथ-वेस्ट साइबर थाने में एक शख्स ने शिकायत दी थी कि कुछ लोगों ने व्हाट्सऐप चैट और फोन कॉल के जरिए उससे संपर्क किया था और खुद को अमेरिका का रहने वाला बताया था।
आरोपियों ने पहले पीड़ित से दोस्ती की और उसका भरोसा जीता था, जिसके बाद उसे बताया गया कि उसके नाम से विदेश से एक पार्सल भारत भेजा गया है, जिसमें अमेरिकी डॉलर और सोना है। साथ ही फिर मनी डिक्लेरेशन सर्टिफिकेट, फ्लाइट टिकट, कस्टम क्लियरेंस और कथित तौर पर जब्त सोना रिलीज कराने के नाम पर अलग-अलग किस्तों में पैसे मांगे गए थे। पीड़ित ने आरोपियों की बातों पर भरोसा करते हुए अलग-अलग यूपीआई आईडी और बैंक खातों में करीब 1 लाख 46 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए थे। हालाकि शिकायत के बाद पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू कर दी थी। साथ ही डिजिटल एविडेंस, बैंक ट्रांजैक्शन और मोबाइल डिटेल की पड़ताल के दौरान पुलिस को आरोपियों के बारे में अहम सुराग हाथ लगे थे। हालाकि जांच दिल्ली से शुरू होकर तेलंगाना और फिर आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम तक पहुंच गई थी, जहां पुलिस की टीम ने सबसे पहले मैदान गढ़ी, दिल्ली से दीपक कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया है।
आरोपी के कब्जे से ठगी में इस्तेमाल एक मोबाइल फोन बरामद कर लिया गया है। इसके बाद तेलंगाना के जयशंकर भूपालपल्ली से कोंडा सागर और डुब्बापेटा से अजमीरा विनोद कुमार को गिरफ्तार किया गया है। साथ ही विनोद कुमार के कब्जे से 2 मोबाइल फोन बरामद हुए हैं। जांच करने पर पता चला है कि इस साइबर फ्रॉड के तार आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम से जुड़े हुए हैं।
दिल्ली पुलिस सूत्रो के मुताबिक,एक (22) वर्षीय साइमोन मिरेकल चिनोंसो, जो नाइजीरियाई नागरिक है। इस नेटवर्क का हिस्सा थी। दिल्ली पुलिस की टीम ने विशाखापट्टनम में कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार किया है। उसके कब्जे से ठगी में इस्तेमाल किए गए 4 मोबाइल फोन बरामद हुए हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी संगठित तरीके से साइबर ठगी को अंजाम दे रहे थे। पुलिस के मुताबिक, दीपक कुमार, कोंडा सागर और अजमीरा विनोद कुमार साइबर फ्रॉड सिंडिकेट को म्यूल बैंक अकाउंट उपलब्ध कराते थे, जिसके बदले मोटी कमीशन लेते थे। साथ ही नाइजीरियाई नागरिक साइमोन मिरेकल चिनोंसो व्हाट्सऐप चैट और फोन कॉल के जरिए खुद को इमिग्रेशन अधिकारी, कस्टम अधिकारी या दूसरी संस्थाओं का प्रतिनिधि बताकर लोगों से संपर्क करती थी।
हालाकि विदेशी पार्सल, कस्टम क्लियरेंस और कीमती सामान रिलीज कराने के नाम पर पीड़ितों से पैसे ट्रांसफर करवाए जाते थे, जिसके बाद ठगी की रकम को कई बैंक खातों के जरिए घुमाकर उसकी असली पहचान छिपाने की कोशिश की जाती थी। इस पूरे ऑपरेशन में पुलिस ने करीबन 4 आरोपियों को गिरफ्तार कर कुल सात मोबाइल फोन बरामद किए हैं। फिलहाल पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस सिंडिकेट ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है। इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं।
जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस और स्थानीय लोगों को हैरान कर दिया है। गलता गेट थाना क्षेत्र में एक युवक का शव फंदे से लटका मिला। हैरानी की बात यह थी कि युवक ने महिला के कपड़े पहन रखे थे। मृतक तीन बच्चों का पिता था। पुलिस अब इस मामले की जांच कर रही है कि आखिर उसने ऐसा कदम क्यों उठाया।
घटना की सूचना मिलते ही गलता गेट थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने कमरे की स्थिति, आसपास मौजूद सामान और अन्य साक्ष्यों की जांच की। मामले की गंभीरता को देखते हुए एफएसएल टीम को भी बुलाया गया, ताकि घटनास्थल से वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए जा सकें।
महिला के कपड़े पहनने की वजह बनी रहस्य
पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि युवक ने आत्महत्या से पहले महिला के कपड़े क्यों पहने थे। फिलहाल इस बारे में कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। पुलिस हर संभावित पहलू को ध्यान में रखकर जांच कर रही है।
जांच अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या युवक किसी मानसिक तनाव, पारिवारिक परेशानी या किसी अन्य विवाद से गुजर रहा था। इसके अलावा उसके व्यवहार में हाल के दिनों में आए बदलावों की भी जानकारी जुटाई जा रही है।
मौके से नहीं मिला कोई सुसाइड नोट
पुलिस के मुताबिक घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। ऐसे में युवक के इस कदम के पीछे की वजह का पता लगाना चुनौती बना हुआ है। पुलिस अब उसके परिवार, दोस्तों और आसपास रहने वाले लोगों से पूछताछ कर रही है।
इसके अलावा मृतक के मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड की भी जांच की जा सकती है, जिससे उसकी मानसिक स्थिति और हाल की गतिविधियों के बारे में जानकारी मिल सके।
पोस्टमार्टम और एफएसएल रिपोर्ट का इंतजार
गलता गेट थाना पुलिस का कहना है कि फिलहाल मामले को संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत मानकर जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और एफएसएल जांच के बाद ही मौत के कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि जांच पूरी होने से पहले किसी भी तरह की अफवाह या अनुमान पर भरोसा न करें।
ओडिशा के केंद्रापड़ा जिले में इंस्टाग्राम पर एक लड़की को मैसेज करना एक कॉलेज छात्र को भारी पड़ गया। आरोप है कि लड़की के पुरुष मित्र और उसके दोस्तों ने छात्र को रास्ते में रोककर उसकी बेरहमी से पिटाई कर दी। इस घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद मामला चर्चा में आ गया है। यह घटना राजनगर इलाके की बताई जा रही है। पीड़ित मदनपुर कॉलेज का छात्र है। वायरल वीडियो में कुछ युवक उसे घेरकर मारपीट करते हुए दिखाई दे रहे हैं।
घटना के बाद छात्र की मां ने पट्टामुंडई ग्रामीण थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि उनका बेटा, जो मदनपुर कॉलेज में पढ़ता है और गोबिंदपुर में अपने मामा के घर रहकर पढ़ाई करता है, कॉलेज जाने के बाद वापस घर नहीं लौटा। बाद में गांव के ही एक युवक ने उनके परिवार को एक वीडियो भेजा, जिसमें कुछ लड़के उनके बेटे की पिटाई करते नजर आ रहे थे। इसके बाद परिवार ने पुलिस से कार्रवाई की मांग की।
पुलिस ने दर्ज किया मामला
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने अपहरण और मारपीट का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। जांच के दौरान वायरल वीडियो में दिखाई देने वाले कुछ युवकों की पहचान के आधार पर तीन कॉलेज छात्रों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है।
पट्टामुंडई ग्रामीण थाना के आईआईसी श्रीकांत कुमार बारिक ने कहा, “शुरुआती जांच में मामला प्रेम प्रसंग से जुड़ा हुआ लग रहा है। पट्टामुंडई कॉलेज का एक छात्र, जो राजनगर थाना क्षेत्र के कुरुंडी गांव का रहने वाला है, अपनी ही कॉलेज की एक छात्रा के साथ प्रेम संबंध में था। आरोप है कि पीड़ित छात्र ने उसी लड़की को इंस्टाग्राम पर मैसेज भेज दिया था। इससे नाराज होकर लड़की के प्रेमी ने उससे सवाल किया कि उसने उसकी प्रेमिका को मैसेज या कॉल क्यों किया। इसके बाद उसने अपने साथियों के साथ मिलकर छात्र की पिटाई कर दी। वायरल वीडियो में दिखाई देने वाले लगभग सभी युवक कॉलेज के छात्र हैं और सभी नाबालिग हैं।”
आरोपियों में ज्यादातर नाबालिग
फिलहाल जिस छात्र के साथ मारपीट हुई है, उसका अभी तक पता नहीं चल पाया है। पुलिस का कहना है कि उन्हें जानकारी मिली है कि वह कहीं छिपा हुआ है। उसकी तलाश की जा रही है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी जारी है। सभी आरोपियों से पूछताछ की जा रही है और संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए जाएंगे। जांच पूरी होने के बाद ही घटना के पूरे घटनाक्रम की पुष्टि हो सकेगी। फिलहाल पुलिस ने हिरासत में लिए गए छात्रों और पीड़ित की पहचान सार्वजनिक नहीं की है क्योंकि सभी नाबालिग हैं। पुलिस का कहना है कि जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि ओडिशा में पहले भी इस तरह के मामले सामने आ चुके हैं।
उत्तर प्रदेश से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सभी को झकझोर दिया। एक युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद उसके परिजनों ने पत्नी, सास और एक अन्य युवक पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
परिजनों का आरोप है कि युवक काफी समय से पारिवारिक तनाव और मानसिक दबाव से गुजर रहा था। उनका कहना है कि उसकी पत्नी और सास कथित तौर पर उस पर लगातार आर्थिक और अन्य प्रकार का दबाव बना रही थीं। साथ ही एक परिचित युवक के साथ मिलकर उसे धमकाने और झूठे मुकदमे में फंसाने की बात भी कही जाती थी।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि युवक से बड़ी रकम की मांग की जा रही थी और उस पर पैतृक संपत्ति बेचने के साथ-साथ घर जमाई बनने का दबाव डाला जा रहा था। परिजनों के अनुसार, इन परिस्थितियों के चलते वह मानसिक रूप से बेहद परेशान रहने लगा था।
आरोप है कि लगातार तनाव और पारिवारिक विवाद के कारण युवक ने अपने घर में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
मृतक के भाई की शिकायत पर पुलिस ने पत्नी, सास और एक अन्य नामजद व्यक्ति के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि सभी आरोपों की जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
नोट: यह समाचार मृतक के परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों और पुलिस में दर्ज शिकायत पर आधारित है। मामले की जांच जारी है और आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।