Category: Crime

  • किचन के स्लैब के नीचे से आ रही थी बदबू, तोड़ने पर मिला महिला का शव..​​​​​​

    किचन के स्लैब के नीचे से आ रही थी बदबू, तोड़ने पर मिला महिला का शव..​​​​​​

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    ओडिशा के पुरी शहर के कुंभारपाड़ा इलाके में एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहां एक किराए के मकान की रसोई के स्लैब के नीचे से एक महिला का शव बरामद हुआ है। जानकारी के मुताबिक, महिला करीब दो महीने पहले अपने बेटे के साथ इस मकान में रहने आई थी। पुलिस को पता चला कि महिला की हत्या के बाद उसके शव को रसोई के स्लैब के नीचे छिपाने की कोशिश की गई।

    घर में बदबू आने पर पुलिस को दी सूचना

    मामला उस समय सामने आया जब मकान मालिक को घर की रसोई से तेज बदबू आने लगी। लगातार आ रही बदबू से मकान मालिक को संदेह हुआ और उन्होंने इसकी सूचना पुलिस को दी। बताया जा रहा है कि महिला का बेटा रविवार से इलाके से गायब है। वहीं, उसकी मां के बारे में भी कोई जानकारी नहीं मिल रही थी। रसोई की संदिग्ध स्थिति और वहां से आ रही तेज बदबू ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया।

    रसोई के स्लैब के आसपास संदिग्ध स्थिति दिखाई दे रही थी। वहां से गंदा पानी और अन्य कचरा फर्श पर बहता हुआ दिखाई दे रहा था। इसके साथ ही इलाके में तेज बदबू भी फैल रही थी। मकान मालिक को शक हुआ कि स्लैब के नीचे कुछ छिपाया गया हो सकता है। इसके बाद पुलिस को मामले की जानकारी दी गई। सूचना मिलने के बाद पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। मामले की जांच के लिए स्लैब को तोड़ा गया।

    एसपी ने दी ये जानकारी

    पुरी एसपी प्रतीक सिंह के अनुसार, स्लैब के अंदर से एक महिला का शव बरामद हुआ। एसपी प्रतीक सिंह ने बताया कि मामले की जांच के लिए एक टीम गठित की गई है। मौके पर वैज्ञानिक टीम को भी बुलाया गया। स्लैब तोड़ने के बाद उसके अंदर से महिला का शव बरामद किया गया। एसपी ने बताया कि वैज्ञानिक टीम ने घटनास्थल से कुछ सैंपल भी जुटाए हैं। इन सैंपलों और अन्य सबूतों के आधार पर पुलिस मामले की जांच आगे बढ़ा रही है।

    इस पूरे मामले में महिला के बेटे का रविवार से गायब होना भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फिलहाल उसके ठिकाने के बारे में जानकारी नहीं मिली है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि महिला की मौत किन परिस्थितियों में हुई और उसके बेटे की इसमें क्या भूमिका है। पुलिस जांच के बाद ही साफ हो पाएगा कि महिला की हत्या कैसे हुई और शव को रसोई के स्लैब के नीचे कब और किस तरह छिपाया गया। फिलहाल पुलिस ने घटनास्थल से सबूत जुटाकर जांच शुरू कर दी है। महिला की पहचान, मौत की सही वजह और उसके बेटे के बारे में आगे की जानकारी जांच पूरी होने के बाद सामने आने की उम्मीद है। इससे पहले ओडिशा के बलांगीर में नरबलि का मामला सामने आया था। देवगांव थाना क्षेत्र के बगड़ा गांव में एक शख्स की हत्या कर उस सिर धड़ से अलग कर दिया गया था।

  • “BRETISH AIRWAYS” के नाम पर ठगी का पर्दाफाश, नौकरी का लालच देकर बनाते थे निशाना..​​​​​​

    “BRETISH AIRWAYS” के नाम पर ठगी का पर्दाफाश, नौकरी का लालच देकर बनाते थे निशाना..​​​​​​

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    दिल्ली की सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट की साइबर पुलिस ने एयरलाइन में नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले बड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें गिरोह का मास्टरमाइंड, उसका साथी, एक वेबसाइट डेवलपर और तीन टेली-कॉलर्स शामिल हैं। जानकारी के मुताबिक साइबर थाने में एक शिकायत मिली थी कि उसने जून 2026 को इंस्टाग्राम पर “Bretish Airways” नाम से IGI एयरपोर्ट पर नौकरी का विज्ञापन देखा। फॉर्म भरने के बाद “करिश्मा, HR Bretish Airways” नाम की महिला का कॉल आया।

    आरोपियों ने बाकायदा ऑफर लेटर भी दिया

    आरोपियों ने व्हाट्सएप पर पैन कार्ड, आधार कार्ड, मार्कशीट और CV मंगवाए और कहा कि नौकरी के लिए “Future Wings Learning Institute” से डिप्लोमा करना जरूरी है। इसी नाम पर 7,000 रुपये UPI से ट्रांसफर करवा। इसके बाद आरोपियों ने पीड़ित को फर्जी एडमिशन स्लिप, NOC स्लिप और फर्जी ऑफर लेटर भेज दिया। बाद में पता चला कि Bretish Airways नाम की कोई एयरलाइन ही नहीं है। इसके बाद पीड़ित ने पुलिस के पास जाकर केस दर्ज कराया।

    नोएडा से चला रहे थे गिरोह

    मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने मोबाइल नंबर, IPDR, पेमेंट ट्रेल और वेबसाइट डिटेल खंगाली गई। जांच में आरोपियों का लोकेशन नोएडा में मिली। इसके बाद 18 अगस्त 2026 को गिरोह के मास्टरमाइंड संदीप कुमार और उसके साथी अखिल कुमार को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ। आरोपी संदीप पहले फर्जी एविएशन जॉब कंपनियों में टेली-कॉलर था, वहीं से उसने ठगी का तरीका सीखा। पहले उसने “प्रगति एयरवेज” नाम से ठगी शुरू की, फिर अखिल के साथ 50-50 पार्टनरशिप में गौर सिटी सेंटर मॉल, नोएडा से “Bretish Airways” और “Future Wings Learning Institute” नाम से फर्जी कंपनियां बनाईं।

    आरोपियों ने बनाई थी कई वेबसाइट

    आरोपी ने एक वेबसाइट डेवलपर से फर्जी वेबसाइट बनवाई, जॉब पोर्टल से डेटा खरीदा और लड़कियों को टेली-कॉलर के रूप में रखा, जो HR बनकर कॉल करती थीं। हर कैंडिडेट से 7,000 से 10,000 रुपये एडमिशन/रजिस्ट्रेशन फीस के नाम पर वसूलते थे और फर्जी सर्टिफिकेट और ऑफर लेटर भेजते थे। ये लोग पकड़े जाने से बचने के लिए ऑफिस, वेबसाइट, सिम कार्ड और फोन बदलते रहते थे। उन्होंने Bretish Airways पर शिकायत आने के बाद “शंख एयरवेज” और “एक्सीलेंस लर्निंग इंस्टिट्यूट” नाम से नई वेबसाइट बना ली थी।

    नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी

    पकड़े गए आरोपियों की पहचान संदीप कुमार, अखिल कुमार, राकेश कुमार, श्वेता, सपना और साक्षी के रूप में हुई है। इनके कब्जे से 2 लैपटॉप, 8 मोबाइल फोन, 8 सिम कार्ड और 2 रजिस्टर जिनमें जॉब सीकर का डेटा था, बरामद किए गए हैं। जांच में NCRP पोर्टल पर 10 शिकायतें इसी रैकेट से जुड़ी मिली हैं। पुलिस का कहना है कि छोटी रकम होने के कारण कई पीड़ितों ने शिकायत ही नहीं की। पुलिस अब इस बड़े नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर मिलने वाले जॉब ऑफर को सिर्फ ऑफिशियल वेबसाइट से वेरिफाई करें और नौकरी के नाम पर किसी भी तरह की फीस न दें। साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें।

  • क्या कार पर किस करने से भी कटता है चालान? जानें यह नियम..​​​​​​

    क्या कार पर किस करने से भी कटता है चालान? जानें यह नियम..​​​​​​

    आमतौर पर कार को अलग दिखाने के लिए लोग स्टिकर, रैप या दूसरे मॉडिफिकेशन करवाते हैं, लेकिन ग्वालियर में कार को सजाने का तरीका बिल्कुल अलग था. कार की बॉडी पर लिपस्टिक से हजारों किस के निशान बनाए गए थे. उनकी गर्लफ्रेंड को सोशल मीडिया से यह आइडिया मिला और उसने सफेद कार पर किस मार्क्स बनाने का फैसला किया. करीब साढ़े तीन घंटे की मेहनत के बाद कार पर लगभग 3400 निशान बनाए गए.

    जब यह कार सड़क पर उतरी तो राह चलते लोगों की नजर इस पर टिक गई और कुछ ही समय में यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया. बाद में ट्रैफिक पुलिस ने कार को रोककर 5,500 रुपये का चालान काट दिया. अब ऐसे में जानते हैं कि इस स्थिति में ट्रैफिक रूल्स क्या हैं?

    क्या चालान का है प्रावधान?

    • मोटर व्हीकल एक्ट की बात करें तो कार पर किस करने पर कोई विशेष ट्रैफिक नियम नहीं बनाया गया है.
    • अगर कार किसी पब्लिक प्लेस या सुनसान जगह पर खड़ी है और वहां कोई आपत्तिजनक काम किया जाता है तो पुलिस भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 294 के तहत कानूनी कार्रवाई या पूछताछ कर सकती है.
    • कार सड़क किनारे, मॉल या किसी पब्लिक पार्किंग में खड़ी है तो उसे कानूनन सार्वजनिक स्थान माना जाता है. बातचीत या साथ बैठना अपराध नहीं है, लेकिन आपत्तिजनक स्थिति होने पर पुलिस कार्रवाई कर सकती है जिसमें सजा का प्रावधान भी हो सकता है. पुलिस इस कंडीशन में 3 महीने तक की कैद या जुर्माना कर सकती है. एक चीज आपके लिए जानना जरूरी है कि ट्रैफिक पुलिस केवल यातायात नियमों के उल्लंघन जैसे गलत पार्किंग या स्टंट पर ही चालान काटती है.
    • सोशल मीडिया पर वायरल हो रही वीडियो में आदित्य सिकरवार नाम के शख्स की गर्लफ्रेंड ने इंस्टाग्राम पर एक विदेशी वीडियो देखा था, जिसमें कार को किस के निशानों से सजाया गया था. वीडियो देखने के बाद उसने भी इसी तरह अपनी कार को सजाने का फैसला किया.
    • कार पर किए गए ये निशान किसी कंपनी प्रमोशन या प्रोफेशनल मॉडिफिकेशन का हिस्सा नहीं थे, कथित तौर पर प्यार जताने के एक निजी आइडिया का हिस्सा थे. सफेद कार होने की वजह से लिपस्टिक के निशान उस पर और ज्यादा साफ नजर आ रहे थे.
    • कार को इस तरह सजाने में करीब 3 घंटे 30 मिनट लगे. इस दौरान कार की अलग-अलग जगहों पर लगभग 3400 किस के निशान बनाए गए. इसके लिए कई लिपस्टिक का इस्तेमाल करना पड़ा और काफी समय तक लगातार काम करना पड़ा.
    • इतनी बड़ी संख्या में निशान होने के चलते कार का पूरा बाहरी हिस्सा दूसरी कारों से बिल्कुल अलग दिखाई दे रहा था. सफेद बॉडी पर लिपस्टिक के निशान दूर से ही नजर आ रहे थे, इसलिए सड़क पर निकलते ही यह कार लोगों का ध्यान खींचने लगी, जिससे पूरा मामला सामने आया.
    • जब आदित्य यह कार लेकर ग्वालियर की सड़कों पर निकले तो इसका अलग लुक देखकर लोग हैरान रह गए. सड़क पर चलने वाली कारों के बीच हजारों किस मार्क्स वाली सफेद कार आसानी से अलग नजर आ रही थी. इसी वजह से लोगों ने इसे देखा और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आने लगा. लेकिन जो चीज शुरुआत में मनोरंजन और आकर्षण का कारण बनी थी, वही बाद में कार मालिक के लिए परेशानी का कारण बन गई. ट्रैफिक पुलिस ने कार को रोककर उसके खिलाफ कार्रवाई करते हुए 5,500 रुपये का चालान काटा.

  • शराब के नशे में पति बना कातिल, बीवी को कमरे में बंद कर ईंट से कूचा; बाहर चिल्लाते रहे बच्चे…​​​​​​

    शराब के नशे में पति बना कातिल, बीवी को कमरे में बंद कर ईंट से कूचा; बाहर चिल्लाते रहे बच्चे…​​​​​​

    UP News: यूपी के बस्ती से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जहां वाल्टरगंज थाना क्षेत्र स्थित बहेरिया गांव में एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी को कमरे में बंद कर ईंट से कूच दिया। शोर सुनकर सो रहे बच्चों की नींद खुली और उन्होंने पड़ोसियों से मदद मांगी। पड़ोसी दौड़कर पहुंचे लेकिन तब तक आरोपी पति दरवाजा खोलकर भाग चुका था। कमरे में महिला का शव पड़ा था। लोगों ने घटना की सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

    बहेरिया गांव निवासी फूलचंद की पत्नी किरण सिलाई-कढ़ाई करती थी। फूलचंद नशे का आदती था। वह अक्सर नशे की हालत में घर पहुंचता था और पत्नी किरण से मारपीट करता रहता था। रविवार की देर रात तकरीबन 11 बजे वह घर पहुंचा। बच्चे बरामदे में सो रहे थे। वह कमरे के अंदर गया और किसी बात को लेकर पत्नी किरण से कहासुनी करने लगा। शोर सुनकर बच्चों की नींद खुल गई। फूलचंद ने कमरे की कुंडी अंदर से बंद कर ली और पत्नी के सिर पर ईंट से तबाड़तोड़ प्रहार कर दिया। किरण चीखने-चिल्लाने लगी। उसकी चीख-पुकार बाहर बरामदे में मौजूद बेटा अमित ने दरवाजा खोलने का प्रयास किया लेकिन वह अंदर से बंद थे। अमित ने पड़ोस के लोगों को शोर मचाकर घटना की जानकारी दी और मदद की गुहार लगाई।

    अमित की पुकार सुनकर जब तक गांव वाले पहुंचते तो आरोपी फूलचंद दरवाजा खोलकर फरार हो चुका था। कमरे के अंदर फर्श पर खून में सना किरण का शव पड़ा था। ग्रामीणों ने घटना की सूचना पुलिस को दी। पुलिस तत्काल मौके पर पहुंच गई और महिला का शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। अमित ने थाने पर तहरीर दी जिसके आधार पर पुलिस ने उसके पिता फूलचंद के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया है।

    चित्रकूट से अगवा कर ई-रिक्शा चालक की हत्याकर झांसी में फेंका

    उधर, झांसी-मिर्जापुर नेशनल हाईवे से पांच दिन पहले अगवा किए गए ई-रिक्शा चालक की बेरहमी से हत्या कर शव को झांसी जिले के पहाड़ी डैम में फेंक दिया गया। सनसनीखेज वारदात का खुलासा कर पुलिस ने सगे भाई-भतीजे समेत सभी चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि संपत्ति के लालच में अगवा करने के बाद ई-रिक्शा चालक को पहले जमकर पीटा और फिर हाथ-पैर बांध गमछे से गला घोट दिया। अब पुलिस डैम में गोताखोरों की मदद से शव की तलाश कर रही है।

  • LBW आउट देने पर भड़का बैट्समैन, अंपायर को बैट से पीटा, 36 साल बाद हुआ गिरफ्तार​​​​​​

    LBW आउट देने पर भड़का बैट्समैन, अंपायर को बैट से पीटा, 36 साल बाद हुआ गिरफ्तार​​​​​​

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    मुंबई से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां 1990 से फरार चल रहे एक आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। जानकारी के मुताबिक क्रिकेट मैच के दौरान विवाद में आरोपी ने अंपायर पर हमला कर दिया था। इसके बाद से ही वह फरार चल रहा था। पुलिस ने उसके मोबाइल नंबर से उसकी लोकेशन निकाली और स्थानीय लोगों से पूछताछ शुरू की। बात में पता चला कि पुलिस जिससे पूछताछ कर रही थी, वही आरोपी था। इसके बाद उसे हिरासत में ले लिया गया। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है।

    1990 में आउट देने पर हुआ था विवाद

    दरअसल, मुंबई के बोरीवली में 1990 में क्रिकेट मैच के दौरान LBW के फैसले को लेकर विवाद हो गया था, जो देखते ही देखते हिंसक हो गया था। उस समय आउट दिए जाने से नाराज बल्लेबाज ने अंपायर के सिर पर क्रिकेट बैट से हमला कर दिया और मौके से फरार हो गया था। वहीं अब 36 साल बाद बोरीवली पुलिस ने आरोपी को मीरा रोड से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी की पहचान 55 वर्षीय ओमप्रकाश पासी के रूप में हुई है।

    हत्या के प्रयास का मामला दर्ज

    पुलिस के मुताबिक, 1990 में एक क्रिकेट टूर्नामेंट के दौरान अंपायर ने पासी को LBW आउट करार दिया था। फैसले को लेकर दोनों के बीच बहस हुई, जिसके बाद पासी ने कथित तौर पर अंपायर के सिर पर बैट से वार कर दिया। हमले में अंपायर को गंभीर चोटें आई थीं। शिकायत और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर बोरीवली पुलिस ने पासी के खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया था। उसके खिलाफ IPC की धारा 307 और 34 के तहत केस दर्ज हुआ था।

    जिससे पूछताछ कर रही थी पुलिस वही निकला आरोपी

    लंबे समय तक आरोपी पुलिस की गिरफ्त से दूर रहा। हाल ही में क्राइम प्रिवेंशन स्क्वॉड ने तकनीकी जांच के जरिए उसकी तलाश शुरू की। संचार साथी प्रणाली की मदद से पुलिस को आरोपी के नाम पर दर्ज मोबाइल नंबर मिला, जिसकी लोकेशन मीरा रोड में मिली। पुलिस टीम जब मीरा रोड पहुंची और स्थानीय लोगों से पासी के बारे में पूछताछ की, तो सामने आया कि जिस व्यक्ति से जानकारी ली जा रही थी, वही ओमप्रकाश पासी था। इसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लिया। पूछताछ में उसने कथित तौर पर 1990 की घटना में अपनी भूमिका स्वीकार की। मामले की जांच जारी है।

  • ‘स्पेशल 26’ की तर्ज पर दिल्ली में दो महिलाओं ने रची थी फर्जी CBI रेड की साजिश..​​​​​​

    ‘स्पेशल 26’ की तर्ज पर दिल्ली में दो महिलाओं ने रची थी फर्जी CBI रेड की साजिश..​​​​​​

    बॉलीवुड फिल्म ‘स्पेशल-26’ के वो सीन सबको जरूर याद होंगे, जहां कुछ लोगों द्वारा फर्जी सीबीआई अफसरों की टीम बनाकर नेताओं और कारोबारियों समेत कई जगह धड़ल्ले से रेड मारी जाती हैं। ठीक वैसी ही फिल्मी पटकथा को हकीकत बनाने के लिए राजधानी दिल्ली में दो महिलाएं निकली थीं।

    खाकी और मोनोग्राम वाली ड्रेस, गले में सीबीआई के फर्जी पहचान पत्र और चेहरे पर दबंग अफसरों जैसा रौब। दिल्ली के प्रशांत विहार में एक फर्नीचर कारोबारी के घर रेड मारने पहुंची इस नकली सीबीआई अफसरों की टीम का दिल्ली पुलिस ने भंडाफोड़ कर दिया है। रोहिणी जिला पुलिस ने फिल्मी स्टाइल में रची गई इस साजिश के पांच और शातिर सदस्यों को जम्मू-कश्मीर के अलग-अलग इलाकों से गिरफ्तार कर पूरी कहानी का पर्दाफाश कर दिया।

    होटल मालकिन और बार डांसर मास्टरमाइंड

    डीसीपी शशांक जायसवाल के मुताबिक, इस फिल्मी स्टाइल वाले फर्जी सीबीआई अफसरों के गिरोह की सरगना आसिफा और पूजा अग्रवाल थीं। आसिफा राजेंद्र प्लेस में होटल चलाती थी, लेकिन घाटे के बाद उसने वसूली का रास्ता चुना। उसे सीबीआई की कार्यप्रणाली की पूरी समझ थी, इसलिए उसने खुद फर्जी आईकार्ड और मोनोग्राम वाली वर्दी तैयार करवाई। वहीं, दूसरी आरोपी पूजा की मुलाकात एक पार्टी में 63 वर्षीय कुलदीप से हुई थी, जिसने फर्नीचर कारोबारी प्रथम अग्रवाल को सॉफ्ट टारगेट बताया था। इसके बाद पूजा के जीजा चंद्र प्रकाश ने शुभम, राजवीर और नितिन जैसे लड़कों को गिरोह में शामिल कर पूरी फर्जी सीबीआई अफसरों की टीम तैयार कर ली।

    शोर मचाने से खुली पोल

    11 अगस्त को दो महिलाओं और आठ पुरुषों की यह टीम जब कारोबारी प्रथम अग्रवाल के घर रेड मारने पहुंची, तो घर पर केवल प्रथम और उनकी मां थीं। कारोबारी को उन पर शक हुआ और उन्होंने दरवाजा खोलने के बजाय शोर मचा दिया। भेद खुलते ही सभी नकली अफसर वहां से भाग निकले। इसके बाद पुलिस द्वारा इस मामले की जांच के दौरान आरोपियों का सुराग मिलने पर पुलिस ने फर्जी सीबीआई अफसरों की टीम के कई सदस्यों को धर दबोचा। पुलिस को उनके पास से सीबीआई के फर्जी पहचान पत्र भी बरामद हुए हैं।

    पहले भी ऐसे मामले सामने आ चुके

    ● कुछ समय पहले करोल बाग के एक बड़े कारोबारी के यहां फर्जी प्रवर्तन निदेशालय की टीम बनकर पहुंचे बदमाशों ने करोड़ों के जेवर और नकदी लूटने की कोशिश की थी।

    ● रोहिणी इलाके में ही खुद को कस्टम और विजिलेंस विभाग का उच्च अधिकारी बताकर आयात-निर्यात व्यापारियों से करोड़ों की ठगी करने वाला एक अंतरराज्यीय सिंडिकेट पकड़ा गया था।

  • पाकिस्तान के पूर्व मंत्री के साथ लव, शादी और धोखा… एआई इमेज से हो गए फ्रॉड के शिकार,,​​​​​​

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    इस्लामाबाद। पाकिस्तान के सिंध प्रांत के एक पूर्व मंत्री गुलाम रसूल उन्नाड़ ने एक अजीबोगरीब मामला अदालत में दर्ज कराया है। उनका आरोप है कि सोशल मीडिया पर हुई उनकी शादी एक बड़े धोखे का शिकार थी।

    सोशल मीडिया पर मुलाकात

    गुलाम रसूल और उनकी पूर्व पत्नी की जान-पहचान सोशल मीडिया के जरिए हुई थी। इसके बाद दोनों ने वीडियो कॉल पर ही निकाह (शादी) कर लिया था।

    पूर्व मंत्री का आरोप है कि शादी से पहले उन्हें महिला की जो तस्वीरें दिखाई गईं, वे असली नहीं थीं। उन्हें गुमराह करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल एडिटिंग (मॉर्फिंग) का इस्तेमाल करके तस्वीरें बदली गई थीं, ताकि महिला असलियत से ज्यादा सुंदर या अलग दिखे।

    तलाक और उसके बाद की मुश्किलें

    मिली जानकारी के अनुसार, सच्चाई सामने आने के बाद मंत्री ने महिला को तलाक दे दिया। लेकिन उनका आरोप है कि तलाक के बाद भी महिला बाज नहीं आई और उन्हें परेशान करती रही।

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    धमकी और फर्जी पोस्ट का खेल

    इसके बाद पूर्व मंत्री का कहना है कि महिला ने उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर फर्जी पोस्ट शेयर किए, उन्हें गंदे मैसेज भेजे और जान से मारने की धमकियां भी दीं। फिलहाल अब इस मामले में न्याय पाने के लिए गुलाम रसूल ने कराची की एक सत्र अदालत में FIR दर्ज कराने की गुहार लगाई है।

  • क्या है पैरोल और फरलो? इन्हीं के सहारे बार-बार जेल से बाहर कैसे आ जाता है राम रहीम…​​​​​​

    क्या है पैरोल और फरलो? इन्हीं के सहारे बार-बार जेल से बाहर कैसे आ जाता है राम रहीम…​​​​​​

    डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम एक बार फिर जेल से बाहर है। उसे 31 दिन की फरलो मिली है। यह 2020 के बाद उसकी 17वीं फरलो या पैरोल है। इससे एक सवाल बार-बार उठता है- आखिर एक सजायाफ्ता कैदी इतनी बार जेल से बाहर कैसे आ सकता है? इसका जवाब समझने के लिए पहले पैरोल और फरलो का फर्क जानना जरूरी है।

    पैरोल क्या होती है?

    पैरोल का मतलब है कि किसी कैदी को उसकी सजा पूरी होने से पहले कुछ समय के लिए जेल से बाहर रहने की अनुमति दी जाती है। आमतौर पर इसके पीछे खास परिस्थितियां या मानवीय आधार हो सकते हैं। जैसे परिवार में किसी की मौत या बीमारी आदि में देखने जाना। कैदी को तय शर्तों का पालन करना होता है और निर्धारित अवधि खत्म होने के बाद जेल लौटना पड़ता है।

    हरियाणा के नियमों के तहत पैरोल एक सीमित अवधि के लिए दी जा सकती है। पैरोल पर बाहर बिताया गया समय आम तौर पर सजा की अवधि में नहीं जुड़ता, यानी वह समय जेल में काटी गई सजा के तौर पर नहीं गिना जाता।

    फिर फरलो क्या है?

    फरलो भी जेल से अस्थायी छुट्टी है, लेकिन इसका उद्देश्य पैरोल से अलग है। फरलो को लंबे समय की सजा काट रहे कैदियों को जेल के बाहर कुछ समय बिताने का अवसर देने की व्यवस्था के तौर पर समझा जा सकता है। यानी लंबे समय तक जेल में रहने वाले कैदियों को बिना किसी खास वजह के परिवार से संबंध बनाए रखने के लिए ‘फरलो’ (छुट्टी) दी जाती है। हरियाणा के कानून में पात्र कैदियों के लिए फरलो का प्रावधान है और निर्धारित शर्तें पूरी होने पर इसे मंजूर किया जा सकता है। एक बात ध्यान रहे- फरलो पर बिताया गया समय सजा की अवधि में गिना जाता है। यानी कैदी की सजा निरंतर चलती रहती है।

    राम रहीम को बार-बार छुट्टी कैसे मिलती है?

    राम रहीम को 2017 में दो साध्वियों से बलात्कार के मामले में 20 साल की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद से उसे कई बार पैरोल और फरलो मिल चुकी है। अक्टूबर 2020 में पहली बार जेल से बाहर आने के बाद अगस्त 2026 तक वह कुल 17 बार अस्थायी रूप से जेल से बाहर आ चुका है। इस दौरान उसे 21 दिन से लेकर 50 दिन तक की अलग-अलग अवधि की छुट्टियां मिलीं।

    यही वजह है कि राम रहीम की पैरोल लगातार चर्चा में रहती है। खास तौर पर 2024 और 2025 में उसकी कुछ रिहाइयां चुनावों के आसपास हुईं, जिस पर विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने सवाल उठाए। हालांकि, किसी कैदी को पैरोल या फरलो मिलना अपने आप में जेल से स्थायी रिहाई नहीं है। हर बार सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी और तय शर्तें लागू होती हैं।

  • हौज खास मेट्रो स्टेशन पर लड़की ने उठाया बड़ा कदम, महिला कांस्टेबल ने दौड़कर बचाई जान; CCTV में दिखी बहादुरी..​​​​​​

    हौज खास मेट्रो स्टेशन पर लड़की ने उठाया बड़ा कदम, महिला कांस्टेबल ने दौड़कर बचाई जान; CCTV में दिखी बहादुरी..​​​​​​

    दिल्ली के हौज खास मेट्रो स्टेशन पर एक महिला पुलिसकर्मी की सतर्कता और हिम्मत की वजह से एक बड़ा हादसा टल गया। 22 अगस्त को स्टेशन पर ड्यूटी के दौरान महिला कांस्टेबल ने एक 16 वर्षीय लड़की को पटरियों की तरफ जाते हुए देखा। उसे आशंका हुई कि लड़की खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर सकती है।

    महिला कांस्टेबल ने बिना देर किए लड़की की तरफ दौड़ लगाई और उसे सुरक्षित रोक लिया। बताया गया कि लड़की बार-बार पटरियों की ओर जाने का प्रयास कर रही थी, लेकिन पुलिसकर्मी ने उसे संभालते हुए वहां मौजूद अन्य कर्मचारियों की मदद ली।

    कुछ सेकंड की सतर्कता से टला हादसा

    पुलिस के मुताबिक, महिला कांस्टेबल ने लड़की को सुरक्षित स्टेशन के नियंत्रण कक्ष तक पहुंचाया। वहां उससे बातचीत की गई और उसके परिवार के बारे में जानकारी ली गई। इसके बाद पुलिस ने उसके पिता से संपर्क किया और उन्हें स्टेशन बुलाया।

    इस पूरी घटना से जुड़े CCTV फुटेज के सामने आने के बाद महिला कांस्टेबल की बहादुरी की सोशल मीडिया पर खूब तारीफ हो रही है। लोगों का कहना है कि समय रहते पुलिसकर्मी की नजर पड़ना लड़की के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ।

    लड़की के बारे में पूछताछ में क्या पता चला?

    पुलिस के अनुसार, पूछताछ में सामने आया कि नाबालिग का करीब एक साल से आरएमएल अस्पताल में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के लिए इलाज चल रहा था। पुलिस ने यह भी बताया कि इससे पहले भी वह खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर चुकी थी।

    आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद लड़की को उसके पिता के साथ भेज दिया गया। पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने एक संभावित गंभीर घटना को टालने में मदद की।

    महिला कांस्टेबल की हो रही तारीफ

    घटना का CCTV सामने आने के बाद लोग महिला पुलिसकर्मी की तत्परता और साहस की सराहना कर रहे हैं। ड्यूटी के दौरान स्थिति को तुरंत समझकर कार्रवाई करने से एक नाबालिग की जान बच गई।

    यह घटना यह भी बताती है कि संकट की स्थिति में आसपास मौजूद लोगों की सतर्कता और समय पर मदद कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है।

  • बाजार में रेलवे की चादर ओढ़े घूमते दिखे 3 लोग, 4 साल में करोड़ों का बेडरोल गायब होने का दावा​​​​​​

    रेलवे की ट्रेनों में यात्रियों को दी जाने वाली चादर और दूसरे बेडरोल सामान के गायब होने का मामला एक बार फिर चर्चा में है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें तीन लोग बाजार जैसी जगह पर सफेद चादरें ओढ़े नजर आ रहे हैं। इन चादरों पर ‘वेस्टर्न रेलवे’ लिखा हुआ दिखाई देता है।

    वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने दावा किया कि ये रेलवे के एसी कोच में यात्रियों को उपलब्ध कराई जाने वाली चादरें हो सकती हैं। हालांकि, वीडियो कहां का है और उसमें दिखाई दे रहे लोगों के पास ये चादरें कहां से आईं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए केवल वायरल पोस्ट के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना सही नहीं होगा।

    रेलवे के बेडरोल को लेकर सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े

    वायरल वीडियो के बीच रेलवे के बेडरोल सामान के गायब होने से जुड़े आंकड़े भी चर्चा में हैं। आरटीआई के जरिए रेलवे के अलग-अलग डिवीजनों से जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2022 से मई 2026 के बीच बड़ी संख्या में बेडरोल आइटम के चोरी या गायब होने की शिकायतें दर्ज हुईं।

    आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में करीब 1.27 करोड़ से ज्यादा बेडरोल आइटम गायब होने की जानकारी सामने आई। इन सामानों की अनुमानित कीमत 104.51 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है।

    गायब हुए सामान में करीब 46.54 लाख फेस टॉवल, 41.13 लाख बेडशीट, 23.59 लाख पिलो कवर, 12.95 लाख कंबल और 2.76 लाख तकिए शामिल बताए गए हैं।

    एसी कोच में रोजाना लाखों यात्री करते हैं सफर

    रेलवे के एसी कोच में सफर करने वाले यात्रियों को यात्रा के दौरान बेडरोल उपलब्ध कराया जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, हर रात करीब 8 लाख यात्री एसी कोच में सफर करते हैं।

    अधिकांश यात्री यात्रा पूरी होने के बाद चादर, कंबल और दूसरे सामान वापस कर देते हैं। हालांकि, आंकड़ों में ऐसे यात्रियों की संख्या भी सामने आती है जो इनमें से कुछ सामान अपने साथ ले जाते हैं।

    वायरल पोस्ट पर लोगों ने उठाए सवाल

    वायरल वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कई यूजर्स ने रेलवे की संपत्ति को निजी इस्तेमाल में लेने पर नाराजगी जताई। लोगों का कहना है कि सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल रेलवे की नहीं, बल्कि यात्रियों की भी है।

    कुछ यूजर्स ने बेडरोल की निगरानी मजबूत करने और सामान गायब होने की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की मांग की है। वहीं, कुछ लोगों ने सुझाव दिया कि रेलवे को महंगे सामान की सुरक्षा के लिए नई व्यवस्था पर विचार करना चाहिए।

    फिलहाल वायरल वीडियो में नजर आ रहे तीन लोगों की पहचान और वीडियो की जगह की पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में वीडियो को लेकर किए जा रहे दावों को तथ्यों की पुष्टि होने तक दावे के तौर पर ही देखना उचित होगा।