उत्तर प्रदेश के भदोही से एक बेहद गंभीर और शर्मनाक मामला सामने आया है। यहां एक डिजिटल लाइब्रेरी के टॉयलेट की दीवार में छात्राओं को छोटा सा छेद दिखाई दिया। शुरुआत में उन्हें यह सामान्य नहीं लगा, जिसके बाद उन्होंने आसपास के छात्रों को इसकी जानकारी दी। जांच करने पर मामले की गंभीरता सामने आई।
आरोप है कि मकान मालिक के कमरे और छात्राओं के टॉयलेट के बीच की दीवार में छेद किया गया था। शिकायत के मुताबिक, इसी रास्ते से छात्राओं की निजी गतिविधियों को रिकॉर्ड करने की कोशिश की जा रही थी। घटना सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपी युवक को हिरासत में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी।
छात्राओं को छेद देखकर हुआ शक
जानकारी के मुताबिक, गोपीगंज क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग-19 के पास एक मकान में कई वर्षों से डिजिटल लाइब्रेरी संचालित हो रही है। इसी लाइब्रेरी के टॉयलेट की दीवार में छात्राओं को एक छोटा सा छेद नजर आया।
छात्राओं को शक हुआ तो उन्होंने अन्य छात्रों को इसकी जानकारी दी। इसके बाद मामले की जांच की गई। शिकायत के अनुसार, दीवार के दूसरी तरफ मकान मालिक का कमरा था। छात्रों ने वहां पहुंचकर आरोपी से पूछताछ की और उसके मोबाइल की जांच की।
मोबाइल की जांच के बाद बढ़ी चिंता
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मोबाइल में छात्राओं से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री मिली। मामले की जानकारी लाइब्रेरी संचालक को दी गई, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। घटना की खबर मिलते ही छात्र-छात्राओं के परिजन भी मौके पर पहुंच गए।
पुलिस ने आरोपी युवक को गिरफ्तार कर उसका मोबाइल अपने कब्जे में ले लिया है। अब डिवाइस की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसमें मौजूद सामग्री कब और किस तरीके से तैयार की गई थी।
पुलिस कर रही मामले की जांच
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी के मोबाइल और अन्य संभावित साक्ष्यों की जांच की जा रही है। जांच का एक अहम हिस्सा यह भी है कि कहीं इस सामग्री को किसी दूसरे व्यक्ति तक भेजा तो नहीं गया या किसी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर साझा तो नहीं किया गया।
मामले में भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस अब पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
छात्राओं की सुरक्षा पर उठे सवाल
घटना ने शैक्षणिक संस्थानों और लाइब्रेरी जैसी जगहों पर छात्राओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे मामलों में पीड़ितों की निजता बनाए रखना और किसी भी निजी सामग्री को आगे साझा न करना बेहद जरूरी है। मामले की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि आरोपी ने कितने समय से ऐसी हरकत की थी और इसमें कोई अन्य व्यक्ति शामिल था या नहीं।
पुलिस ने एक ऐसे कथित साइबर ठग को गिरफ्तार किया है, जिसने देशभर में 500 से अधिक महिलाओं को प्यार, शादी और भरोसे का झांसा देकर ठगी का शिकार बनाया। 35 वर्षीय आरोपी डेटिंग ऐप्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फर्जी पहचान बनाकर महिलाओं से संपर्क करता था। पुलिस के अनुसार, वह खुद को कभी डॉक्टर, कभी बिजनेसमैन और कभी किसी प्रतिष्ठित कंपनी का अधिकारी बताकर लोगों का विश्वास जीतता था।
आरोपी पहले महिलाओं से लगातार बातचीत करता था और उनकी निजी परेशानियों, पारिवारिक स्थिति तथा आर्थिक हालात के बारे में जानकारी जुटाता था। कुछ समय बाद वह भावनात्मक रिश्ता कायम कर शादी का वादा करता। भरोसा बनने के बाद वह मेडिकल इमरजेंसी, कारोबार में नुकसान, बैंक खाते में समस्या या किसी जरूरी भुगतान का बहाना बनाकर पैसे मांगता था।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी बातचीत के दौरान बेहद सावधानी बरतता था। वह अलग-अलग महिलाओं के लिए अलग नाम, फोटो और पेशे का इस्तेमाल करता था। कई मामलों में उसने खुद को विदेश में रहने वाला व्यक्ति बताया और दावा किया कि वह जल्द ही भारत आकर पीड़िता से शादी करेगा। इसके बाद वह यात्रा, कस्टम ड्यूटी, इलाज या कारोबार से जुड़ी जरूरतों के नाम पर रकम मांगता था।
एक मामले में आरोपी ने कथित तौर पर एक महिला से करीब 7 लाख रुपये ठगे। महिला ने जब रकम वापस मांगनी शुरू की तो आरोपी ने उससे संपर्क तोड़ दिया। इसके बाद उसने खुद को बचाने के लिए अपनी मौत की झूठी कहानी तक गढ़ दी। पुलिस को शक है कि इसी तरह कई अन्य महिलाओं को भी अलग-अलग बहानों से आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया।
जांच के दौरान पुलिस को आरोपी के कई फर्जी नाम, ईमेल आईडी और सोशल मीडिया अकाउंट मिले। वह एक साथ कई मोबाइल नंबर और सिम कार्ड इस्तेमाल करता था, ताकि किसी एक पहचान के सामने आने पर दूसरी पहचान के जरिए ठगी जारी रख सके। पुलिस ने आरोपी के पास से 4 स्मार्टफोन, 8 सिम कार्ड, कई डेबिट कार्ड और सोने के आभूषण बरामद किए हैं।
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने अलग-अलग राज्यों में 500 से अधिक महिलाओं को निशाना बनाया और करीब 2 करोड़ रुपये की ठगी या वसूली की। जांच में यह भी सामने आया है कि वह कुछ महिलाओं की निजी तस्वीरों और वीडियो का इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग के लिए करता था। वह तस्वीरें सार्वजनिक करने या परिवार के सदस्यों को भेजने की धमकी देकर अतिरिक्त रकम मांगता था।
पुलिस अब आरोपी के बैंक खातों, डिजिटल लेनदेन, मोबाइल रिकॉर्ड और सोशल मीडिया गतिविधियों की जांच कर रही है। अधिकारियों को आशंका है कि इस मामले में आरोपी के साथ कुछ अन्य लोग भी जुड़े हो सकते हैं, जो फर्जी सिम, बैंक खाते या डिजिटल भुगतान की व्यवस्था करते थे।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि ऑनलाइन रिश्तों में जल्दबाजी न करें और किसी अनजान व्यक्ति को निजी तस्वीरें, बैंक संबंधी जानकारी या पैसे न भेजें। यदि कोई व्यक्ति लगातार आर्थिक मदद मांगता है या भावनात्मक दबाव बनाता है, तो इसकी सूचना तुरंत साइबर क्राइम पोर्टल या नजदीकी पुलिस थाने में देनी चाहिए।
शादी के लिए रिश्ता तलाश रहे लोगों को अब सिर्फ पारंपरिक ठगी से ही नहीं, बल्कि तकनीक के सहारे तैयार किए गए फर्जी रिश्तों से भी सावधान रहने की जरूरत है। कानपुर में सामने आए एक साइबर ठगी के मामले ने इस पूरे खेल का चौंकाने वाला तरीका उजागर किया है। आरोप है कि एक संगठित गिरोह ने फर्जी मैट्रिमोनियल कंपनियों और कॉल सेंटर की मदद से देशभर में शादी की तलाश कर रहे लोगों को निशाना बनाया।
गिरोह का तरीका बेहद सुनियोजित बताया जा रहा है। पहले शादी की इच्छा रखने वाले युवकों की जानकारी सोशल मीडिया और मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म से जुटाई जाती थी। इसके बाद आकर्षक महिला प्रोफाइल तैयार कर उनसे संपर्क किया जाता था। कई मामलों में तस्वीरों को एडिट करने और AI तकनीक की मदद लेने की बात भी जांच में सामने आई।
पहले दिखाया जाता था खूबसूरत रिश्ता
ठगी का खेल एक सामान्य मैट्रिमोनियल बातचीत की तरह शुरू होता था। युवक को किसी महिला की प्रोफाइल दिखाई जाती और फिर फोन पर बातचीत शुरू कराई जाती। दूसरी तरफ से महिला कर्मचारी लड़की बनकर बात करती थीं।
घंटों बातचीत के जरिए धीरे-धीरे युवक का भरोसा जीता जाता था। जब सामने वाले को लगने लगता कि रिश्ता वास्तविक है और शादी की बात आगे बढ़ सकती है, तभी पैसों की मांग शुरू होती थी।
कभी रजिस्ट्रेशन तो कभी सुरक्षा राशि
गिरोह कथित तौर पर अलग-अलग बहानों से पैसे मांगता था। कभी रजिस्ट्रेशन फीस, कभी प्रोफाइल फीस तो कभी परिवार की सहमति या सुरक्षा जमा के नाम पर रकम मांगी जाती थी।
शुरुआत में रकम कम रखी जाती थी, लेकिन जैसे-जैसे पीड़ित का भरोसा बढ़ता जाता, पैसों की मांग भी बढ़ती जाती थी। कई लोग शादी का रिश्ता हाथ से निकल जाने के डर से बार-बार भुगतान करते रहते थे।
AI और एडिटेड तस्वीरों से तैयार होती थीं प्रोफाइल
इस ठगी का सबसे चौंकाने वाला पहलू कथित तौर पर फर्जी महिला प्रोफाइल तैयार करने का तरीका था। जांच में सामने आया कि आकर्षक तस्वीरों और AI तकनीक का इस्तेमाल करके ऐसी प्रोफाइल बनाई जाती थीं, जिससे पीड़ित को शक न हो।
फर्जी नामों और तस्वीरों के साथ प्रोफाइल तैयार करने के बाद कॉल सेंटर में मौजूद कर्मचारी फोन पर बातचीत करते थे। इस तरह पीड़ित को लगता था कि वह वास्तव में शादी के लिए किसी युवती से बात कर रहा है।
रिश्ता टूटने का डर बनता था सबसे बड़ा हथियार
ठगों की रणनीति सिर्फ पैसे मांगने तक सीमित नहीं थी। कथित तौर पर पीड़ितों पर भावनात्मक दबाव भी बनाया जाता था। उन्हें बताया जाता कि रिश्ता लगभग तय हो चुका है और अगर उन्होंने मांगी गई रकम समय पर नहीं दी तो शादी की प्रक्रिया रुक सकती है।
कई लोग शादी की उम्मीद में लगातार पैसे भेजते रहते थे। बाद में जब उन्हें ठगी का एहसास होता, तब तक काफी रकम उनके हाथ से निकल चुकी होती थी।
शिकायत करने पर भी बनाया जाता था दबाव
मामला सामने आने के बाद जांच में यह भी पता चला कि कुछ मामलों में पीड़ितों को शिकायत न करने या मामला खत्म करने के लिए मनाने की कोशिश की जाती थी। इसका मकसद कथित तौर पर गिरोह के बाकी सदस्यों और पूरे नेटवर्क को जांच से बचाना था।
कानपुर साइबर पुलिस ने मामले की जांच करते हुए इस कथित नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। जांच में फर्जी मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म, कॉल सेंटर और ऑनलाइन प्रोफाइल से जुड़े पहलुओं को खंगाला जा रहा है।
ऑनलाइन रिश्ते में इन बातों का रखें ध्यान
ऑनलाइन किसी से दोस्ती या शादी के लिए बातचीत करते समय जल्दबाजी में भरोसा करना भारी पड़ सकता है। अगर सामने वाला व्यक्ति बिना मिले ही पैसे मांगने लगे, रजिस्ट्रेशन या किसी अन्य फीस के नाम पर भुगतान का दबाव बनाए या लगातार भावनात्मक दबाव डालकर रकम ट्रांसफर करवाए, तो सावधान हो जाएं।
किसी भी ऑनलाइन रिश्ते में पैसे भेजने से पहले सामने वाले की पहचान और उसके दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना जरूरी है। खासकर AI से बनी या एडिट की गई तस्वीरों के दौर में सिर्फ फोटो देखकर किसी प्रोफाइल को असली मानना सुरक्षित नहीं है।
शादी का सपना दिखाकर भरोसा जीतना और फिर उसी भरोसे का इस्तेमाल पैसे ऐंठने के लिए करना साइबर ठगी का खतरनाक तरीका बनता जा रहा है। इसलिए ऑनलाइन रिश्तों में भावनाओं के साथ-साथ सतर्कता भी जरूरी है।
बिहार के गया से साइबर ठगी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें सोशल मीडिया पर हुई दोस्ती के बाद एक युवक को लाखों रुपये गंवाने पड़े। फेसबुक पर एक युवती से उसकी बातचीत शुरू हुई। धीरे-धीरे दोनों के बीच भरोसा बढ़ा और इसी भरोसे का फायदा उठाकर साइबर ठगों ने युवक को कथित तौर पर बड़े मुनाफे का लालच दिया।
पीड़ित का आरोप है कि ‘पल्लवी अग्रवाल’ नाम की युवती ने उसे बिजनेस में निवेश करने और अच्छा मुनाफा कमाने का झांसा दिया। बातों में आकर युवक ने अलग-अलग खातों में कुल 10.67 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। रकम पहुंचने के बाद कथित तौर पर संपर्क टूट गया और युवती समेत आरोपी फरार हो गए।
फेसबुक पर शुरू हुई थी बातचीत
बताया जा रहा है कि गया के युवक की फेसबुक पर एक युवती से दोस्ती हुई थी। बातचीत धीरे-धीरे आगे बढ़ी और युवती ने युवक के सामने बिजनेस से जुड़ा एक प्रस्ताव रखा। उसे बताया गया कि इस काम में पैसा लगाने पर अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है।
मुनाफे की उम्मीद में युवक कथित तौर पर आरोपी के बताए अलग-अलग बैंक खातों में पैसे भेजता रहा। उसे उम्मीद थी कि निवेश के बाद उसे रकम के साथ अच्छा रिटर्न मिलेगा।
10.67 लाख रुपये ट्रांसफर करने के बाद टूटा संपर्क
पीड़ित के मुताबिक, अलग-अलग लेनदेन के जरिए उसने कुल 10.67 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद जब उसने अपने पैसे और मुनाफे के बारे में जानकारी लेने की कोशिश की तो कथित तौर पर दूसरी तरफ से जवाब मिलना बंद हो गया।
काफी प्रयास के बाद भी संपर्क नहीं होने पर युवक को ठगी का शक हुआ। इसके बाद उसने पूरे मामले की शिकायत साइबर थाने में दर्ज कराई।
साइबर पुलिस कर रही मामले की जांच
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच में बैंक खातों में हुए लेनदेन, मोबाइल नंबर, सोशल मीडिया प्रोफाइल और पैसे ट्रांसफर किए गए खातों की जानकारी खंगाली जा सकती है।
पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस ठगी के पीछे कौन लोग शामिल थे और ‘पल्लवी’ नाम से संपर्क करने वाला व्यक्ति वास्तव में कौन था।
सोशल मीडिया दोस्ती में बरतें सावधानी
यह मामला एक बार फिर बताता है कि सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से दोस्ती करते समय सावधानी बेहद जरूरी है। साइबर ठग अक्सर पहले बातचीत के जरिए भरोसा कायम करते हैं और इसके बाद निवेश, नौकरी, बिजनेस, लॉटरी या किसी अन्य फायदे का लालच देकर पैसे ट्रांसफर करवाने की कोशिश करते हैं।
किसी अनजान सोशल मीडिया संपर्क के कहने पर बैंक खाते में पैसे भेजने या निवेश करने से पहले उसकी पूरी जानकारी की पुष्टि करें। खासकर अगर कोई व्यक्ति जल्दी पैसा कमाने या निश्चित मुनाफे का दावा कर रहा है, तो ऐसे प्रस्ताव से सतर्क रहना चाहिए।
नोट: यह खबर पीड़ित की शिकायत और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। मामले में आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
इंदौर के पास स्थित डाक विभाग की ‘डाक कॉलोनी’ में 11 जुलाई 2026 की सुबह एक ऐसा घटनाक्रम हुआ, जिसने एक परिवार की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी। घर में रहने वाली असिस्टेंट पोस्ट मास्टर उर्मिला सैनी की उसके पति अखिलेश ने कथित तौर पर चाकू से हत्या कर दी।
सबसे दर्दनाक बात यह थी कि वारदात के समय घर में सिर्फ पति-पत्नी थे। दोनों बच्चे स्कूल जा चुके थे। अखिलेश ने कथित तौर पर इसी मौके को हत्या के लिए चुना, ताकि घर में कोई मौजूद न हो।
उसे शायद अंदाजा था कि अगर बच्चों को कुछ पता चला तो उसकी योजना बिगड़ सकती है।
बच्चों के स्कूल जाते ही घर में छाया खौफ
उस सुबह रोज की तरह दोनों बच्चे स्कूल चले गए थे। उर्मिला घर पर थी और अखिलेश भी वहीं मौजूद था।
पुलिस जांच के अनुसार, अखिलेश ने कथित तौर पर पहले से पत्नी की हत्या की योजना बना रखी थी।
आरोप है कि बच्चों के घर से निकलते ही उसने उर्मिला पर चाकू से हमला कर दिया।
उर्मिला ने बचने की कोशिश की और चीख-पुकार मचाई होगी, लेकिन अखिलेश ने कथित तौर पर उसकी आवाज दबाने के लिए घर में टीवी की आवाज बहुत तेज कर दी।
बाहर से सब कुछ सामान्य दिखाई दे रहा था, जबकि घर के भीतर एक महिला की जिंदगी खत्म हो रही थी।
हत्या के बाद भी नहीं घबराया आरोपी
उर्मिला की हत्या के बाद अखिलेश ने कथित तौर पर खुद को बचाने की तैयारी शुरू कर दी।
उसने खून से सने कपड़े घर के पास बने एक चेंबर में छिपा दिए।
इसके बाद वह वापस घर आया और सामान्य तरीके से नहाया।
कपड़े बदले, माथे पर टीका लगाया और ऐसा व्यवहार किया जैसे घर में कुछ हुआ ही न हो।
लेकिन उसके अगले कदम ने इस पूरी घटना को और भी विचलित करने वाला बना दिया।
पत्नी का सामान लेकर बच्चों के स्कूल पहुंचा
अखिलेश ने कथित तौर पर उर्मिला का कीमती हार, एटीएम कार्ड, स्कूटी और घर की चाबी एक पॉलीथिन बैग में रख ली।
इसके बाद वह अपने बच्चों के स्कूल पहुंच गया।
वहां उसने बेटी को वह बैग देते हुए कहा कि इसमें उसकी मां का कीमती सामान रखा है और इसे संभालकर रखना।
बैग में घर की चाबी और एटीएम कार्ड के पिन से जुड़ा कागज भी होने की बात उसने बच्चों को बताई।
इसके बाद उसने बच्चों से कहा कि वह और उनकी मां जरूरी काम से भोपाल जा रहे हैं और अगले दिन तक वापस लौट आएंगे।
बच्चों को दिया ऐसा निर्देश, जिसका सच उन्हें बाद में पता चला
अखिलेश ने बच्चों से कहा कि स्कूल की छुट्टी के बाद वे छोटे भाई को साथ लेकर सीधे अपनी पूजा मौसी के घर चले जाएं।
यह कहकर वह वहां से निकल गया।
बच्चों के लिए उस समय यह सिर्फ पिता की कही एक सामान्य बात थी। उन्हें जरा भी अंदाजा नहीं था कि उनकी मां घर में अकेली नहीं बल्कि हमेशा के लिए खामोश हो चुकी है।
दोपहर में बच्चे घर लौटे तो पैरों तले जमीन खिसक गई
स्कूल की छुट्टी के बाद दोनों बच्चे बताए गए निर्देश के मुताबिक मौसी के घर जाने के बजाय अपने कपड़े बदलने के लिए घर पहुंच गए।
जैसे ही उन्होंने घर में कदम रखा, उनकी नजर उस दृश्य पर पड़ी जिसे वे जिंदगी भर नहीं भूल पाएंगे।
घर में उनकी मां उर्मिला का खून से लथपथ शव पड़ा था।
दोनों बच्चे घबरा गए और जोर-जोर से रोने लगे।
उनकी आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे।
पड़ोसियों ने जब घर के अंदर जाकर उर्मिला का शव देखा तो वे भी स्तब्ध रह गए।
कुछ ही देर पहले जिस घर में एक मां अपने बच्चों के लौटने का इंतजार कर रही होगी, उसी घर में अब उसका शव पड़ा था।
पति पर था पत्नी के चरित्र को लेकर शक
इस मामले में पुलिस के सामने पति अखिलेश के कथित शक की बात भी सामने आई।
बताया गया कि वह पत्नी को लेकर काफी शंकालु रहता था। पति के इसी संदेह और वैवाहिक तनाव ने कथित तौर पर रिश्ते को बेहद खराब कर दिया था।
हालांकि, किसी भी हत्या के पीछे वास्तविक कारण और आरोपी की भूमिका पुलिस जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्यों के आधार पर ही तय होती है।
लेकिन जिस तरह वारदात को अंजाम देने के बाद बच्चों को गुमराह करने की कोशिश की गई, उससे जांचकर्ताओं के सामने कई सवाल खड़े हो गए।
वारदात के बाद भी खुद को सामान्य दिखाने की कोशिश
इस घटना का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह था कि हत्या के बाद अखिलेश ने कथित तौर पर खुद को सामान्य दिखाने की पूरी कोशिश की।
खून से सने कपड़े छिपाना, नहाकर कपड़े बदलना, माथे पर टीका लगाना और फिर बच्चों के स्कूल पहुंचना—ये सभी कदम कथित तौर पर इस तरह उठाए गए जैसे कुछ हुआ ही न हो।
लेकिन घर में पड़ा उर्मिला का शव उसके बनाए पूरे झूठ को सामने ले आया।
दो बच्चों से एक साथ छिन गया पूरा परिवार
इस घटना का सबसे बड़ा खामियाजा दोनों बच्चों को भुगतना पड़ा।
एक तरफ उनकी मां की हत्या हो चुकी थी और दूसरी तरफ उनके पिता पर ही उस हत्या का आरोप लगा।
जिन बच्चों को उस सुबह स्कूल भेजते समय शायद यह पता भी नहीं था कि शाम तक उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल जाएगी, वे दोपहर में घर लौटे तो उनके सामने उनकी मां की लाश थी।
यह सिर्फ एक हत्या नहीं थी, बल्कि एक परिवार के टूट जाने की घटना थी।
शक जब रिश्ते पर भारी पड़ जाए
पति-पत्नी के बीच किसी भी तरह का शक रिश्ते में तनाव पैदा कर सकता है। लेकिन जब शक हिंसा का रूप ले लेता है तो उसका परिणाम बेहद भयावह हो सकता है।
उर्मिला और अखिलेश की यह कहानी भी इसी सवाल को सामने रखती है कि रिश्ते में पैदा हुए संदेह और विवाद को समय रहते बातचीत, परिवार या उचित सहायता के जरिए सुलझाना कितना जरूरी है।
एक परिवार, जिसमें मां नौकरी करती थी, पिता साथ था और दो बच्चे स्कूल जाते थे, कुछ ही घंटों में बिखर गया।
नोट: यह कहानी उपलब्ध सामग्री के आधार पर कहानी शैली में पुनर्लिखी गई है। हत्या और आरोपी की भूमिका से जुड़े आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्यों के आधार पर होगी।
छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार जिले के पलारी थाना क्षेत्र का छेरकापुर गांव। गांव की जिंदगी अपनी रफ्तार से चल रही थी। इसी गांव में भकला आडिल अपने परिवार के साथ रहता था। उसका बेटा सुमेर आडिल कभी गलत संगत में पड़कर बिगड़ गया था। गांव की बहू-बेटियों पर उसकी बुरी नजर रहने लगी थी। पिता को चिंता थी कि अगर उसे समय रहते जिम्मेदारी का एहसास नहीं कराया गया तो वह पूरी तरह बर्बादी की राह पर चला जाएगा।
इसी सोच के साथ भकला ने सुमेर की शादी पड़ोस के गांव की रहने वाली तोपबाई से कर दी।
भकला को उम्मीद थी कि शादी के बाद पत्नी और परिवार की जिम्मेदारी सुमेर को बदल देगी। उसकी यह उम्मीद काफी हद तक पूरी भी हुई।
नई दुल्हन आई और बदल गया सुमेर
शादी के बाद सुमेर का ज्यादातर समय घर में बीतने लगा। नई-नई शादी थी और पत्नी तोपबाई के साथ उसका लगाव बढ़ता गया। दोस्तों के साथ घूमने-फिरने और आवारागर्दी का सिलसिला कम हो गया।
करीब डेढ़ साल बाद घर में बेटी की किलकारी गूंजी। सुमेर पिता बन गया।
अब उसके ऊपर पत्नी के साथ बच्चे की जिम्मेदारी भी आ गई थी। धीरे-धीरे परिवार बढ़ता गया और देखते ही देखते सुमेर चार बच्चों का पिता बन गया।
जिस युवक को उसका पिता कभी गलत संगत से निकालने के लिए शादी के बंधन में बांधना चाहता था, वह अब एक बड़े परिवार की जिम्मेदारी संभाल रहा था।
पिता की मौत के बाद बढ़ गई जिम्मेदारियां
समय किसी के लिए नहीं रुकता। सुमेर के पिता भकला की भी मौत हो गई।
पिता के जाने के बाद परिवार की जिम्मेदारियां और बढ़ गईं। सुमेर अब घर-गृहस्थी और बच्चों के बीच पूरी तरह उलझ गया था।
उसकी पुरानी कई आदतें जरूर छूट गई थीं, लेकिन शराब पीने की आदत नहीं गई।
उधर उसके बच्चे भी बड़े होने लगे थे। उसकी बड़ी बेटी हेमलता 18 साल की हो चुकी थी।
सुमेर की जिंदगी अब घर, परिवार और अपनी आदतों के बीच गुजर रही थी।
उसे शायद अंदाजा भी नहीं था कि उसके घर के आसपास की दुनिया में एक ऐसा रिश्ता धीरे-धीरे आकार ले रहा है, जो आगे चलकर परिवार के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।
पड़ोस में रहता था दूध कारोबारी का परिवार
सुमेर के घर से कुछ दूरी पर संतरू यादव का घर था। संतरू दूध का कारोबार करता था।
उसका बेटा नरसिंह यादव उर्फ शेरा भी पिता के साथ इसी काम में हाथ बंटाता था।
नरसिंह का मन पढ़ाई में नहीं लगा तो संतरू ने उसकी पढ़ाई छुड़वा दी और उसे अपने दूध के कारोबार में लगा लिया।
संतरू का एक और बेटा था, जो रायपुर चला गया था और वहां किसी कंपनी में नौकरी करता था। उसके दूर चले जाने के बाद घर और कारोबार में शेरा ही पिता का मुख्य सहारा रह गया था।
सुमेर का परिवार और संतरू का परिवार पड़ोस में रहते थे। गांव में रहने वाले परिवारों के बीच मेलजोल होना कोई असामान्य बात नहीं थी।
लेकिन इसी पड़ोसी रिश्ते के बीच आगे चलकर ऐसी परिस्थितियां पैदा हुईं, जिन्होंने सुमेर और तोपबाई के दांपत्य जीवन को सवालों के घेरे में ला दिया।
घर की चारदीवारी के भीतर बदलने लगी कहानी
समय के साथ तोपबाई और नरसिंह के बीच नजदीकियों की चर्चा होने लगी।
पति-पत्नी के रिश्ते में जब किसी तीसरे व्यक्ति की मौजूदगी का शक पैदा होता है तो घर का माहौल बदलने लगता है। छोटी-छोटी बातों पर विवाद होने लगते हैं और पति-पत्नी के बीच भरोसा कमजोर पड़ने लगता है।
सुमेर के परिवार में भी परिस्थितियां इसी दिशा में बढ़ती दिखाई दीं।
जिस घर में कभी चार बच्चों की आवाजें और रोजमर्रा की जिंदगी की हलचल हुआ करती थी, वहां अब रिश्तों को लेकर तनाव का साया मंडराने लगा।
एक तरफ परिवार, दूसरी तरफ कथित प्रेम
तोपबाई के सामने एक तरफ उसका पति और चार बच्चों का परिवार था, तो दूसरी तरफ नरसिंह के साथ कथित नजदीकी की कहानी सामने आने लगी।
सुमेर के लिए यह स्थिति बेहद मुश्किल थी।
उसने जिंदगी का बड़ा हिस्सा परिवार की जिम्मेदारियां निभाते हुए गुजार दिया था। चार बच्चों की परवरिश और घर की जरूरतों के बीच उसकी अपनी जिंदगी भी बदल चुकी थी।
लेकिन पत्नी के कथित दूसरे रिश्ते की बात सामने आने के बाद उसके सामने सिर्फ पति-पत्नी का विवाद नहीं था, बल्कि पूरे परिवार के भविष्य का सवाल खड़ा हो गया।
गांव में रिश्तों की चर्चा होने लगी
गांव में ऐसी बातें ज्यादा देर तक छिपी नहीं रहतीं। लोगों के बीच कानाफूसी शुरू हो जाती है और एक घर की बात धीरे-धीरे पूरे गांव तक पहुंच जाती है।
सुमेर और तोपबाई के परिवार में भी कथित रिश्ते को लेकर चर्चाएं होने लगीं।
हालांकि, किसी भी रिश्ते या आरोप की सच्चाई को केवल चर्चाओं के आधार पर तय नहीं किया जा सकता। लेकिन इतना जरूर था कि पति-पत्नी के बीच विश्वास की स्थिति पहले जैसी नहीं रह गई थी।
कहानी यहां से हुई और भी गंभीर
सुमेर की जिंदगी में कभी गलत संगत थी, फिर शादी के बाद उसने खुद को परिवार में समेट लिया था। पत्नी के साथ उसका घर बसा, चार बच्चे हुए और जिम्मेदारियां बढ़ती गईं।
लेकिन अब वही परिवार एक नए संकट से घिर गया था।
तोपबाई की जिंदगी में नरसिंह की कथित मौजूदगी ने पति-पत्नी के रिश्ते को प्रभावित किया और घर का माहौल तनावपूर्ण होता चला गया।
एक तरफ सुमेर था, जिसने परिवार की जिम्मेदारियों में अपनी जिंदगी लगा दी थी। दूसरी तरफ पत्नी के कथित प्रेम संबंध की चर्चा थी।
आगे इस रिश्ते ने क्या मोड़ लिया और आखिरकार यह मामला किस खतरनाक अंजाम तक पहुंचा, यही इस कहानी का सबसे बड़ा सवाल था।
नोट: यह कहानी उपलब्ध मूल सामग्री के आधार पर पुनर्लिखी गई है। इसमें आगे की घटना से जुड़े ऐसे तथ्य नहीं जोड़े गए हैं जो आपके दिए गए स्रोत में मौजूद नहीं थे।
उत्तर प्रदेश के गोंडा में दिसंबर की एक रात एक परिवार के लिए जिंदगी भर न भूलने वाली घटना बन गई। कुछ दिन पहले ही जिस लड़की को परिवार ने धूमधाम से बहू बनाकर घर में प्रवेश कराया था, वही कथित तौर पर घर के लोगों को नशीला पदार्थ खिलाकर लाखों रुपये के जेवर और सामान लेकर फरार हो गई।
सुबह जब परिवार के लोगों को होश आया तो घर का नजारा देखकर उनके होश उड़ गए। बहू गायब थी और घर में रखा कीमती सामान भी नहीं था।
मामला पुलिस तक पहुंचा तो जांच शुरू हुई और धीरे-धीरे इस कथित ‘लुटेरी दुल्हन’ के पीछे चल रहे गिरोह की कहानी सामने आने लगी।
शादी के लिए परेशान था परिवार
गोंडा के खरगूपुर थाना क्षेत्र के रहने वाले बृजभूषण पांडेय की शादी लंबे समय से नहीं हो पा रही थी। परिवार चाहता था कि किसी तरह उनके घर में बहू आए।
इसी दौरान जोखू नाम का एक बिचौलिया उनके संपर्क में आया। उसने लखीमपुर खीरी की रहने वाली शिवानी उर्फ गोमती देवी नाम की युवती के बारे में बताया।
बात आगे बढ़ी और दोनों परिवारों के बीच शादी की सहमति बन गई।
17 दिसंबर को बृजभूषण और शिवानी की शादी धूमधाम से कर दी गई।
परिवार को उस समय जरा भी अंदाजा नहीं था कि शादी के कुछ ही दिनों बाद उनके घर में ऐसी घटना होने वाली है।
शादी के बाद शुरू हुए रस्मों के कार्यक्रम
शादी के बाद घर में सामान्य माहौल था। 21 दिसंबर को विवाह से जुड़े कुछ रस्मोरिवाजों का कार्यक्रम भी रखा गया।
इस दौरान नवविवाहिता की तरफ से उसका कथित भाई और कुछ अन्य लोग भी घर पहुंचे।
परिवार के लिए ये लोग मेहमान थे। किसी को उनके इरादों पर संदेह नहीं हुआ।
दिनभर घर में शादी की खुशियां और रस्मों का माहौल बना रहा।
लेकिन रात होते-होते कहानी ने अचानक दूसरा मोड़ ले लिया।
रात के खाने के बाद एक-एक कर बेहोश होने लगे लोग
पुलिस के मुताबिक, आरोप है कि रात में शिवानी ने अपने पति और ससुराल के दूसरे सदस्यों को खाने में नशीला पदार्थ मिला दिया।
खाना खाने के बाद परिवार के लोग धीरे-धीरे बेहोशी की हालत में पहुंच गए।
घर में जब कोई होश में नहीं था, उसी दौरान कथित तौर पर शिवानी ने अपने साथियों को बुलाया।
इसके बाद घर से शादी का सामान, नकदी और कीमती जेवर निकाल लिए गए।
आरोप है कि लाखों रुपये के जेवर लेकर नवविवाहिता अपने साथियों के साथ वहां से निकल गई।
सुबह आंख खुली तो दुल्हन और सामान दोनों गायब
जब परिवार के लोगों को होश आया तो उन्हें कुछ भी समझ नहीं आया।
घर में अफरातफरी मच गई।
सबसे पहले लोगों ने शिवानी को तलाशना शुरू किया, लेकिन वह कहीं नहीं मिली।
इसके बाद घर में रखे सामान की जांच हुई तो कीमती जेवर और अन्य सामान भी गायब था।
तब परिवार को समझ आया कि उनके साथ बड़ी धोखाधड़ी हो चुकी है।
उन्होंने तत्काल पुलिस से शिकायत की।
पुलिस ने शुरू की जांच
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने शादी से जुड़े लोगों, बिचौलिए और नवविवाहिता के संपर्कों की जानकारी जुटानी शुरू की।
जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को शक हुआ कि यह सिर्फ एक महिला का किया हुआ अपराध नहीं है।
मामले में कई लोग शामिल हो सकते हैं।
इसके बाद पुलिस ने शिवानी को गिरफ्तार कर लिया। उसके साथ चार अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया गया।
तलाशी में मिलीं नशीली गोलियां
पुलिस के अनुसार, आरोपियों के कब्जे से लूटे गए कथित जेवर और घर का सामान बरामद किया गया।
इसके अलावा करीब 350 नशीली गोलियां और एक मोबाइल फोन भी बरामद होने की बात सामने आई।
नशीली गोलियों की बरामदगी ने जांच को और गंभीर बना दिया, क्योंकि पुलिस को शक था कि परिवार को बेहोश करने के लिए इसी तरह के पदार्थ का इस्तेमाल किया गया था।
बरामद सामान को पुलिस ने जांच का हिस्सा बनाया और आरोपियों से पूछताछ शुरू की।
पूछताछ में सामने आया कथित गिरोह
पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि वे एक संगठित गिरोह के तौर पर काम करते थे।
आरोप है कि गिरोह शादी के लिए परिवार तलाशता था, फिर बिचौलियों के जरिए रिश्ता तय कराया जाता था।
शादी के बाद मौका देखकर घर में मौजूद लोगों को नशीला पदार्थ खिलाकर बेहोश करने और कीमती सामान लेकर फरार होने की योजना बनाई जाती थी।
अगर जांच में यह पूरा नेटवर्क सही साबित होता है, तो गोंडा की घटना किसी एक परिवार के साथ हुई अकेली वारदात नहीं बल्कि एक बड़े आपराधिक तरीके का हिस्सा हो सकती है।
कुछ दिनों की दुल्हन और फिर पुलिस की गिरफ्त
जिस लड़की को परिवार ने 17 दिसंबर को धूमधाम से बहू बनाकर घर में लाया था, वही कुछ दिनों बाद पुलिस की गिरफ्त में थी।
परिवार के लिए यह घटना इसलिए भी सदमे वाली थी क्योंकि उन्होंने जिस रिश्ते पर भरोसा करके शादी की थी, उसी रिश्ते के जरिए कथित तौर पर उनके घर को निशाना बनाया गया।
शादी के बाद घर में आई बहू पर परिवार ने भरोसा किया था। इसी भरोसे का कथित तौर पर फायदा उठाया गया।
शादी के नाम पर होने वाली ठगी से सावधान
ऐसे मामलों के बाद शादी के लिए रिश्ते तय करने वाले परिवारों के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वे सामने वाले व्यक्ति की पहचान और पारिवारिक पृष्ठभूमि की अच्छी तरह जांच करें।
सिर्फ किसी बिचौलिए की बात पर भरोसा करके शादी का फैसला करना जोखिम भरा हो सकता है। पहचान पत्र, स्थायी पता, परिवार और पुराने रिकॉर्ड की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना जरूरी है।
गोंडा की यह घटना भी यही बताती है कि कभी-कभी अपराधी रिश्ते और भरोसे जैसी भावनात्मक चीजों का इस्तेमाल ही अपने अपराध के लिए हथियार बना लेते हैं।
नोट: यह कहानी उपलब्ध पुलिस कार्रवाई और आरोपों के आधार पर पुनर्लिखी गई है। आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
उत्तर प्रदेश के बदायूं शहर में एक समय ऐसा परिवार था, जिसे देखकर किसी को अंदाजा नहीं होता था कि आने वाले दिनों में उसके भीतर इतनी बड़ी उथल-पुथल मचने वाली है। पति राजकुमार पादरी था और पत्नी निशा एक स्कूल में पढ़ाती थी। दोनों की जिंदगी अपनी दो बेटियों के साथ सामान्य तरीके से चल रही थी।
राजकुमार की ड्यूटी बदायूं जिला मुख्यालय से करीब 23 किलोमीटर दूर वजीरगंज की एक चर्च में थी। चर्च में जब काम ज्यादा होता तो उसे वहीं रात रुकना पड़ता था। दूसरी ओर निशा सिविल लाइंस इलाके के होली चाइल्ड स्कूल में पढ़ाती थी और स्कूल परिसर में मिले कमरे में परिवार के साथ रहती थी।
लेकिन जिस रिश्ते की शुरुआत पसंद और पारिवारिक सहमति से हुई थी, वह आगे चलकर गंभीर विवादों से घिर गया।
ट्रेनिंग के दौरान हुई थी पहली मुलाकात
राजकुमार और निशा की पहली मुलाकात लखनऊ में हुई थी। दोनों वहां पादरी के काम से जुड़ी ट्रेनिंग के सिलसिले में पहुंचे थे।
राजकुमार बरेली के रहने वाले रघुवीर मसीह का बेटा था। उसके पिता पुलिस विभाग में वायरलेस मैसेंजर के पद पर बदायूं में तैनात रह चुके थे।
निशा मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली थी और उसके पिता दयाशंकर भी पादरी थे।
दोनों की मुलाकातें बढ़ीं तो एक-दूसरे के प्रति लगाव पैदा हो गया। परिवारों के बीच भी पहले से रिश्तेदारी का संबंध था। निशा की बड़ी बहन शारदा की शादी राजकुमार के बड़े भाई दिलीप से हुई थी।
इसी पारिवारिक रिश्ते के कारण राजकुमार और निशा एक-दूसरे के करीब आए और दोनों ने अपनी पसंद की बात परिवार के सामने रख दी।
परिवार की सहमति से हुई शादी
राजकुमार ने लखनऊ में अपनी ट्रेनिंग पूरी कर ली, जबकि निशा किन्हीं कारणों से ट्रेनिंग बीच में ही छोड़कर वापस चली गई।
इसके बाद दोनों परिवारों की सहमति से वर्ष 2014 में राजकुमार और निशा की शादी हो गई।
शादी के बाद परिवार बढ़ा और दोनों दो बेटियों के माता-पिता बने। निशा ने स्कूल में नौकरी शुरू की और राजकुमार चर्च की जिम्मेदारियां संभालता रहा।
शुरुआती समय सामान्य तरीके से गुजरता रहा।
अलग-अलग जिम्मेदारियों के बीच बढ़ने लगी दूरी
राजकुमार की ड्यूटी अक्सर घर से दूर रहती थी। वजीरगंज की चर्च में काम होने पर वह रात में वहीं रुक जाता था।
निशा दूसरी ओर बदायूं में स्कूल की जिम्मेदारी संभालती थी। दोनों अपनी-अपनी जगह व्यस्त रहते थे।
ऐसे में पति-पत्नी के बीच समय कम मिलने लगा।
यहीं से रिश्ते में गलतफहमियों और तनाव की शुरुआत होने की बात सामने आती है।
फिर रिश्ते पर उठने लगे सवाल
समय बीतने के साथ राजकुमार और निशा के संबंधों में कथित तौर पर तनाव बढ़ता गया। पत्नी के किसी दूसरे व्यक्ति से संबंध होने का शक राजकुमार के मन में पैदा होने की बात कही गई।
यह शक कितना सही था और इसके पीछे वास्तविक कारण क्या थे, यह जांच का विषय रहा। लेकिन इतना जरूर था कि पति-पत्नी के बीच विश्वास कमजोर पड़ चुका था।
किसी भी रिश्ते में जब भरोसे की जगह शक ले लेता है तो छोटी-सी बात भी बड़े विवाद का कारण बन सकती है।
राजकुमार और निशा के मामले में भी हालात धीरे-धीरे गंभीर होते चले गए।
परिवार के बीच भी बढ़ने लगी बेचैनी
राजकुमार के परिवार में उसके तीन भाई और दो बहनें थीं। सबसे बड़े भाई रवि की शादी बाराबंकी निवासी अनुराधा से हुई थी। दूसरे भाई दिलीप की शादी निशा की बड़ी बहन शारदा से हुई थी।
यानी दोनों परिवार पहले से एक-दूसरे से जुड़े हुए थे।
इस वजह से पति-पत्नी के बीच होने वाले विवाद का असर सिर्फ दोनों तक सीमित नहीं रहता था। परिवार के दूसरे सदस्य भी इस तनाव से प्रभावित होते थे।
एक सामान्य परिवार अचानक चर्चा में आ गया
जिस घर में दो बेटियों की हंसी गूंजती थी, वहां अब पति-पत्नी के रिश्ते को लेकर सवाल उठने लगे।
राजकुमार चर्च में पादरी के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाता था और निशा स्कूल में अध्यापन करती थी। बाहर से दोनों का जीवन व्यवस्थित दिखाई देता था।
लेकिन अंदर ही अंदर रिश्ते में क्या चल रहा था, इसकी पूरी तस्वीर बाद की घटनाओं से सामने आई।
पति की मौत ने पूरे मामले को अचानक गंभीर बना दिया।
पत्नी पर लगे आरोपों ने मामले को और उलझाया
राजकुमार की मौत के बाद उसकी पत्नी निशा के कथित संबंधों को लेकर सवाल उठने लगे। आरोप लगाया गया कि पत्नी के किसी अन्य व्यक्ति से संबंध थे और इसी वजह से पति-पत्नी के बीच तनाव पैदा हुआ था।
हालांकि, किसी भी व्यक्ति पर लगाए गए ऐसे आरोपों को बिना जांच और कानूनी पुष्टि के सच नहीं माना जा सकता।
पुलिस जांच का उद्देश्य यही होता है कि मौत के पीछे वास्तविक कारण क्या था, किन परिस्थितियों में घटना हुई और उसमें कौन जिम्मेदार था।
इस कहानी का सबसे दर्दनाक हिस्सा दो बेटियां थीं
राजकुमार और निशा की दो बेटियां थीं।
पति की मौत और उसके बाद परिवार में पैदा हुए विवादों का सबसे गहरा असर इन्हीं मासूम बच्चों पर पड़ा।
बच्चों के लिए मां और पिता का विवाद समझना वैसे ही मुश्किल होता है, लेकिन जब मामला मौत तक पहुंच जाए तो उनकी पूरी दुनिया बदल जाती है।
एक परिवार, जिसकी शुरुआत आपसी पसंद और पारिवारिक सहमति से हुई थी, समय के साथ ऐसे मोड़ पर पहुंच गया जहां रिश्तों से ज्यादा सवाल और आरोप रह गए।
शक रिश्ते को किस हद तक ले जा सकता है?
राजकुमार और निशा की कहानी का सबसे बड़ा सवाल यही है कि किसी रिश्ते में शक पैदा होने के बाद उसे बातचीत और विश्वास से दूर किया जाए या आरोपों और टकराव से।
पति-पत्नी के रिश्ते में विश्वास टूटने के बाद हालात तेजी से बिगड़ सकते हैं। लेकिन किसी भी गंभीर घटना की जिम्मेदारी तय करने के लिए सिर्फ शक या आरोप पर्याप्त नहीं होते।
इस मामले ने परिवार, रिश्तों और भरोसे से जुड़े कई सवाल खड़े किए।
कभी जिस रिश्ते की शुरुआत दो लोगों की पसंद से हुई थी, उसी रिश्ते में बाद में अविश्वास की जगह बन गई। दो बेटियों के माता-पिता बने राजकुमार और निशा की जिंदगी जिस मोड़ पर पहुंची, उसने पूरे परिवार को झकझोर दिया।
नोट: यह कहानी उपलब्ध सामग्री के आधार पर कहानी शैली में पुनर्लिखी गई है। पत्नी के कथित संबंधों या किसी व्यक्ति की भूमिका से जुड़े आरोपों को न्यायिक पुष्टि के बिना तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।
गोरखपुर में एक लड़की की गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर उसके बारे में कई तरह की बातें सामने आने लगीं। कोई उसे ‘लेडी डॉन’ कह रहा था तो कोई दावा कर रहा था कि उसके 150 से ज्यादा बॉयफ्रेंड थे। लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, कहानी कुछ और ही सामने आती दिखी।
आरोप है कि लड़की लोगों से दोस्ती करती, उन्हें अपने भरोसे में लेती और फिर वीडियो कॉल के दौरान उनकी निजी रिकॉर्डिंग कर लेती थी। इसके बाद शुरू होता था धमकी और पैसों की मांग का सिलसिला। सामने वाले को डराया जाता कि अगर उसने रकम नहीं दी तो उसके खिलाफ दुष्कर्म या पॉक्सो एक्ट जैसे गंभीर मामलों में शिकायत कर दी जाएगी।
बताया जा रहा है कि लड़की मूल रूप से गोरखपुर के हरपुर बुदहट थाना क्षेत्र की रहने वाली है। परिवार से विवाद के बाद उसने संतकबीर नगर के खलीलाबाद में किराये का मकान ले लिया था। यहीं से उसने सोशल मीडिया के जरिए लोगों से संपर्क बढ़ाना शुरू किया।
शुरुआत में बातचीत सामान्य होती थी। सामने वाले को लगता था कि वह एक युवती से दोस्ती कर रहा है। धीरे-धीरे बातचीत निजी होने लगती और फिर वीडियो कॉल तक पहुंच जाती। आरोप है कि इसी दौरान निजी पलों की रिकॉर्डिंग कर ली जाती थी। बाद में उसी वीडियो को दिखाकर पैसे मांगे जाते।
पुलिस जांच में करीब 150 लोगों को निशाना बनाए जाने की बात सामने आई है। इनमें आम लोगों के साथ कुछ पुलिसकर्मियों के नाम भी बताए जा रहे हैं। अयोध्या में तैनात एक सीओ समेत करीब 15 पुलिसकर्मियों को भी कथित तौर पर इस जाल में फंसाने का दावा किया गया है।
यह सिलसिला वर्ष 2021 के आसपास शुरू होने की बात कही जा रही है। पहला मामला देवरिया के एक युवक से जुड़ा बताया गया है। आरोप है कि उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के बाद समझौते के नाम पर रकम ली गई। इसके बाद इसी तरीके से दूसरे लोगों को भी डराकर पैसे वसूलने का आरोप है।
हर मामले में तरीका लगभग एक जैसा बताया जा रहा है। पहले सोशल मीडिया पर संपर्क, फिर दोस्ती और भरोसा, उसके बाद वीडियो कॉल और अंत में मुकदमे में फंसाने की धमकी।
खलीलाबाद में रहने के दौरान भी लड़की का विवादों से नाता जुड़ा रहा। मकान मालिक ने देर रात युवकों के आने-जाने पर आपत्ति जताई थी। आरोप है कि मकान खाली करने के बदले उससे दो लाख रुपये लिए गए।
इसी दौरान सूरज सिंह समेत पांच लोगों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कराने की बात सामने आई। आरोप है कि बाद में समझौते के नाम पर उनसे पैसे मांगे गए। खलीलाबाद के ही प्रियांशु सिंह से भी फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी देकर 50 हजार रुपये लेने का आरोप लगाया गया है।
सोशल मीडिया पर भले ही इसे 150 बॉयफ्रेंड की कहानी बताया जा रहा हो, लेकिन जांच में इसे प्रेम संबंधों के बजाय कथित ब्लैकमेलिंग नेटवर्क के रूप में देखा जा रहा है। आरोप है कि लड़की ने कई लोगों से संपर्क बनाए, लेकिन उसका मकसद रिश्ते बनाना नहीं, बल्कि निजी जानकारी और वीडियो के जरिए उन्हें डराकर पैसे वसूलना था।
गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब उसके मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट, चैट और बैंक खातों की जांच कर रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि वह इस काम में अकेली थी या उसके साथ कोई और भी शामिल था।
अगर जांच में आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला सिर्फ एक लड़की की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सोशल मीडिया के जरिए चलाए जा रहे एक बड़े हनीट्रैप और सेक्सटॉर्शन नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।
इस मामले ने यह भी दिखाया है कि सोशल मीडिया पर शुरू हुई दोस्ती कितनी जल्दी खतरे में बदल सकती है। निजी बातचीत और वीडियो साझा करने से पहले सावधानी न बरतने पर लोग ब्लैकमेलिंग का शिकार हो सकते हैं। हालांकि, लगाए गए सभी आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
कुछ साल पहले तक किसी अनजान व्यक्ति से मिलने या किसी सेवा के लिए संपर्क करने के लिए लोगों को कई तरह के जोखिम उठाने पड़ते थे। लेकिन स्मार्टफोन और सोशल मीडिया ने पूरी तस्वीर बदल दी। अब दोस्ती, बातचीत और मुलाकात से लेकर पैसे के लेनदेन तक सब कुछ मोबाइल स्क्रीन पर हो सकता है।
इसी डिजिटल दुनिया में साइबर अपराधियों ने ठगी के नए तरीके भी खोज लिए हैं।
सोशल मीडिया पर आकर्षक तस्वीरों वाली प्रोफाइल, डेटिंग ऐप्स पर दोस्ती के प्रस्ताव और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर निजी बातचीत—इन सबका इस्तेमाल कई मामलों में लोगों को सेक्सटॉर्शन और ऑनलाइन ठगी के जाल में फंसाने के लिए किया जा रहा है।
यह कहानी किसी एक व्यक्ति या एक जगह की नहीं, बल्कि उस बदलते साइबर अपराध की है, जिसमें अपराधी लोगों की निजी इच्छाओं, जिज्ञासा और भरोसे को अपना हथियार बना लेते हैं।
एक साधारण फ्रेंड रिक्वेस्ट से शुरू होती है कहानी
मान लीजिए किसी व्यक्ति को सोशल मीडिया पर एक अनजान महिला की फ्रेंड रिक्वेस्ट आती है। प्रोफाइल पर आकर्षक तस्वीरें लगी हैं और कुछ सामान्य पोस्ट भी दिखाई देती हैं।
पहले बातचीत शुरू होती है।
कुछ दिनों तक सामान्य बातें होती हैं। सामने वाला व्यक्ति धीरे-धीरे भरोसा पैदा करता है। इसके बाद बातचीत निजी विषयों तक पहुंचने लगती है।
यहीं से असली जाल शुरू हो सकता है।
अपराधी सामने वाले की मानसिक स्थिति और उसकी रुचि को समझने के बाद उसे वीडियो कॉल का प्रस्ताव दे सकते हैं। कई बार बातचीत को जानबूझकर यौन विषयों की तरफ मोड़ा जाता है।
सामने वाले को लगता है कि वह किसी निजी और भरोसेमंद व्यक्ति से बात कर रहा है।
लेकिन दूसरी तरफ बैठे लोग उसकी हर गतिविधि रिकॉर्ड कर रहे होते हैं।
वीडियो कॉल के कुछ मिनट और फिर बदल जाता है पूरा खेल
कई साइबर ठगी के मामलों में आरोपियों द्वारा वीडियो कॉल का इस्तेमाल किया जाता है। कॉल के दौरान सामने वाले व्यक्ति को ऐसा माहौल दिया जाता है कि वह अपनी निजी गतिविधियां कैमरे के सामने करने लगे।
उसे लगता है कि यह बातचीत सिर्फ दोनों के बीच है।
लेकिन कॉल के दूसरी तरफ स्क्रीन रिकॉर्ड हो रही होती है।
कुछ देर बाद कॉल अचानक कट जाती है।
फिर फोन पर एक नया मैसेज आता है।
“तुम्हारी वीडियो हमारे पास है।”
इसके बाद धमकी शुरू होती है।
आरोपी कहते हैं कि अगर पैसे नहीं दिए गए तो वीडियो परिवार, दोस्तों या सोशल मीडिया पर भेज दी जाएगी।
जिस व्यक्ति ने कुछ मिनट पहले इसे निजी बातचीत समझा था, वह अचानक डर और शर्मिंदगी के बीच फंस जाता है।
पहले छोटा भुगतान, फिर बढ़ती जाती है रकम
कई मामलों में शुरुआत छोटी रकम से होती है।
आरोपी कहते हैं कि पैसे भेज दो तो वीडियो डिलीट कर दी जाएगी।
पीड़ित डरकर पैसे भेज देता है।
लेकिन इसके बाद मामला खत्म नहीं होता।
कुछ समय बाद फिर मैसेज आता है कि वीडियो की दूसरी कॉपी मौजूद है या उसे किसी और व्यक्ति तक भेज दिया गया है। फिर एक नई रकम मांगी जाती है।
पीड़ित दोबारा भुगतान कर देता है।
यही सिलसिला कई बार चलता रहता है।
अपराधियों को जब पता चलता है कि व्यक्ति डर चुका है और पैसे देने के लिए तैयार है, तो वे उसकी मजबूरी का फायदा उठाकर लगातार वसूली की कोशिश कर सकते हैं।
‘वीडियो कॉल’ के नाम पर एडवांस पेमेंट का खेल
साइबर ठगी का एक दूसरा तरीका भी सामने आया है।
सोशल मीडिया या मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर किसी महिला की तस्वीर लगाकर प्रोफाइल बनाई जाती है। बातचीत के बाद वीडियो कॉल या किसी निजी मुलाकात का प्रस्ताव दिया जाता है।
इसके लिए पहले एडवांस पैसे मांगे जाते हैं।
कहा जाता है कि भुगतान करते ही कॉल शुरू होगी या मुलाकात तय कर दी जाएगी।
जैसे ही पैसा भेजा जाता है, सामने वाला व्यक्ति गायब हो जाता है।
नंबर ब्लॉक कर दिया जाता है और सोशल मीडिया अकाउंट भी बंद कर दिया जाता है।
पीड़ित के पास केवल ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड और ठगी का एहसास बचता है।
आकर्षक प्रोफाइल के पीछे कौन है?
सबसे बड़ी समस्या यही है कि सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली तस्वीर हमेशा वास्तविक व्यक्ति की नहीं होती।
साइबर अपराधी किसी दूसरे व्यक्ति की तस्वीर चुराकर फर्जी प्रोफाइल बना सकते हैं। कई बार अलग-अलग लोगों की तस्वीरों और जानकारियों का इस्तेमाल करके पूरी नकली पहचान तैयार की जाती है।
अब एआई और डीपफेक तकनीक के दौर में यह खतरा और बढ़ गया है।
इसलिए सिर्फ तस्वीर देखकर किसी ऑनलाइन प्रोफाइल पर भरोसा करना खतरनाक हो सकता है।
ठगी का शिकार होने के बाद पीड़ित अक्सर चुप क्यों रहता है?
इस तरह के मामलों में सबसे बड़ी समस्या सिर्फ आर्थिक नुकसान नहीं है।
पीड़ित को डर रहता है कि अगर उसने पुलिस या परिवार को बताया तो उसकी निजी बातचीत या वीडियो सार्वजनिक हो सकती है।
शर्म और सामाजिक बदनामी का डर उसे चुप रहने पर मजबूर कर सकता है।
अपराधी इसी डर को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाते हैं।
वे पीड़ित को यह महसूस कराने की कोशिश करते हैं कि अगर उसने उनकी बात नहीं मानी तो उसकी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी।
लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे मामलों में अपराधियों को पैसे देना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। एक बार भुगतान करने के बाद भी वे दोबारा पैसे मांग सकते हैं।
डेटिंग ऐप से लेकर सोशल मीडिया तक फैला खतरा
आज साइबर ठगी के लिए किसी एक प्लेटफॉर्म की जरूरत नहीं है।
सोशल मीडिया, डेटिंग ऐप्स, मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और फर्जी वेबसाइटों के जरिए लोगों तक पहुंच बनाई जा सकती है।
अपराधी अलग-अलग तरीकों से लोगों का भरोसा जीतते हैं और फिर उन्हें निजी बातचीत या वीडियो कॉल की तरफ ले जाते हैं।
यही कारण है कि ऑनलाइन रिश्तों और अनजान लोगों से बातचीत करते समय सावधानी बेहद जरूरी है।
अगर ऐसी स्थिति में फंस जाएं तो क्या करें?
सबसे पहले घबराकर तुरंत पैसे भेजने से बचें। अपराधी अक्सर डर पैदा करके जल्दबाजी में फैसला करवाना चाहते हैं।
उनके संदेश, फोन नंबर, प्रोफाइल लिंक, भुगतान की जानकारी और स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें। चैट या वीडियो से जुड़े सबूतों को बिना सोचे डिलीट न करें, क्योंकि वे जांच में उपयोगी हो सकते हैं।
किसी भरोसेमंद परिवार के सदस्य या मित्र को जानकारी दें और साइबर अपराध की शिकायत संबंधित सरकारी साइबर क्राइम व्यवस्था के जरिए करें।
सबसे जरूरी बात यह है कि पीड़ित को खुद को दोषी मानकर चुप नहीं रहना चाहिए। सेक्सटॉर्शन और डिजिटल ब्लैकमेलिंग में अपराधी पीड़ित के डर का फायदा उठाते हैं।
डिजिटल दुनिया में सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव
इंटरनेट ने लोगों को एक-दूसरे से जोड़ना आसान बनाया है, लेकिन इसी सुविधा का इस्तेमाल अपराधी भी कर रहे हैं।
किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर निजी वीडियो साझा करना, कैमरे के सामने संवेदनशील गतिविधि करना, एडवांस पैसे भेजना या बैंकिंग जानकारी देना भारी पड़ सकता है।
आज डिजिटल दुनिया में भरोसा करने से पहले पहचान की पुष्टि करना उतना ही जरूरी है जितना वास्तविक जिंदगी में किसी अनजान व्यक्ति से सावधान रहना।
क्योंकि साइबर अपराध का यह नया चेहरा पहले दोस्ती का हाथ बढ़ाता है, फिर भरोसा जीतता है और अंत में उसी भरोसे को ब्लैकमेलिंग का हथियार बना देता है।
नोट: यह लेख साइबर अपराध के आम तौर-तरीकों को समझाने के उद्देश्य से पुनर्लिखा गया है। किसी विशेष व्यक्ति या घटना पर आरोप को तथ्य मानने से पहले संबंधित पुलिस या आधिकारिक रिकॉर्ड की पुष्टि जरूरी है।