Category: Crime

  • खुद को भगवान का अवतार बताकर बनाता था शिकार, ‘मॉडर्न गुरुकुल’ में चलता था खौफ का खेल; यौनशोषण, ब्लैकमेलिंग और प्रताड़ना के आरोप में बाबा समेत 8 गिरफ्तार..​​​​​​

    खुद को भगवान का अवतार बताकर बनाता था शिकार, ‘मॉडर्न गुरुकुल’ में चलता था खौफ का खेल; यौनशोषण, ब्लैकमेलिंग और प्रताड़ना के आरोप में बाबा समेत 8 गिरफ्तार..​​​​​​

    पुणे के वाघोली में कथित आध्यात्मिक केंद्र पर पुलिस की छापेमारी से मचा हड़कंप, 15 साल से प्रताड़ना झेलने का महिला ने लगाया आरोप; सीसीटीवी से घिरा था आश्रम, गुप्त सुरंग और संदिग्ध दवाइयां मिलने से जांच और गहराई

    पुणे के वाघोली इलाके में 2026 को पुलिस की एक कार्रवाई ने एक कथित आध्यात्मिक केंद्र के पीछे छिपी ऐसी कहानी सामने ला दी, जिसने जांच अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। खुद को भगवान का अवतार बताने वाले राधामोहन मिश्रा उर्फ राधेश्याम मिश्रा और उसके सात सहयोगियों को पुलिस ने यौनशोषण, ब्लैकमेलिंग और अमानवीय प्रताड़ना के आरोपों में गिरफ्तार किया।

    पुलिस के सामने मामला तब आया, जब एक महिला ने शिकायत दर्ज कराई। महिला का आरोप था कि वह करीब 15 वर्षों से इस कथित बाबा के प्रभाव में थी और इस दौरान उसे मानसिक तथा शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया।

    जो जगह बाहर से आध्यात्मिक केंद्र या ‘मॉडर्न गुरुकुल’ के रूप में दिखाई देती थी, पुलिस की जांच में उसके भीतर कई ऐसी चीजें सामने आईं, जिनसे पूरे मामले पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।

    डॉक्टर परिवार की महिला ने दर्ज कराई शिकायत

    शिकायत करने वाली महिला उच्चशिक्षित बताई गई है और उसका संबंध डॉक्टर परिवार से था। महिला के अनुसार, वह वर्षों पहले बाबा के संपर्क में आई थी। धीरे-धीरे बाबा ने उस पर ऐसा मानसिक प्रभाव बना लिया कि वह उसके निर्देशों का विरोध करने की स्थिति में नहीं रही।

    महिला ने पुलिस को बताया कि उसके साथ लगातार मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना की जाती थी।

    आरोप है कि विरोध करने या बाबा की बात न मानने पर उसे बिजली के झटके दिए जाते थे। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि उसे अमानवीय तरीके से प्रताड़ित करते हुए बाबा का मूत्र पीने के लिए मजबूर किया जाता था।

    इन आरोपों ने पुलिस जांच को और गंभीर बना दिया।

    पति से तलाक और संपत्ति पर भी नजर

    महिला ने आरोप लगाया कि बाबा ने धीरे-धीरे उसका ब्रेनवॉश किया और उसे अपने पति से अलग होने के लिए मजबूर किया।

    इसके बाद कथित तौर पर उसकी संपत्ति और गहनों पर भी कब्जा कर लिया गया।

    महिला का दावा है कि बाबा और उसके सहयोगियों ने उसके निजी और आपत्तिजनक वीडियो भी बनाए थे। इन्हीं वीडियो का इस्तेमाल कथित तौर पर उसे ब्लैकमेल करने के लिए किया जाता था।

    यानी महिला के लिए यह सिर्फ धार्मिक आस्था का मामला नहीं रहा था। आरोपों के मुताबिक, धीरे-धीरे उसके निजी जीवन, रिश्तों और संपत्ति पर भी कथित तौर पर नियंत्रण स्थापित कर लिया गया।

    आश्रम में डर का माहौल बनाने का आरोप

    पुलिस के अनुसार, इस कथित आध्यात्मिक केंद्र में अनुयायियों पर मनोवैज्ञानिक नियंत्रण बनाए रखने के लिए डर का माहौल बनाया जाता था।

    आरोप है कि बाबा खुद को सामान्य इंसान नहीं बल्कि भगवान का अवतार बताता था। उसके अनुयायियों में ऐसी धारणा बनाई जाती थी कि उसके आदेशों पर सवाल उठाना या उसका विरोध करना नुकसानदायक हो सकता है।

    इसी मानसिक दबाव के कारण कई लोग कथित तौर पर लंबे समय तक उसके प्रभाव से बाहर नहीं निकल पाए।

    चारों तरफ लगे थे सीसीटीवी कैमरे

    पुलिस ने जब वाघोली स्थित कथित आश्रम में छापा मारा तो वहां सुरक्षा के नाम पर लगाए गए सीसीटीवी कैमरों की संख्या और उनकी व्यवस्था ने अधिकारियों का ध्यान खींचा।

    पूरे परिसर में कैमरे लगे होने की बात सामने आई। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन कैमरों का इस्तेमाल सामान्य सुरक्षा के लिए किया जाता था या फिर वहां रहने वाले लोगों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए।

    जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि क्या अनुयायियों और पीड़ितों को बाहरी दुनिया से संपर्क करने से रोकने के लिए इस व्यवस्था का इस्तेमाल किया जाता था।

    जमीन के नीचे बन रही थी गुप्त सुरंग

    छापेमारी के दौरान पुलिस को परिसर में एक गुप्त सुरंग भी मिली, जो निर्माणाधीन बताई गई।

    सुरंग का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाना था, यह अभी जांच का विषय है। पुलिस इस बात की पड़ताल कर रही है कि क्या इसका संबंध किसी संदिग्ध गतिविधि से था या इसके पीछे कोई दूसरा उद्देश्य था।

    सुरंग मिलने के बाद जांच अधिकारियों ने पूरे परिसर की संरचना और वहां मौजूद दूसरे कमरों की भी बारीकी से जांच शुरू की।

    सैकड़ों संदिग्ध दवाइयों की शीशियां मिलीं

    आश्रम से पुलिस को बड़ी संख्या में दवाइयों की शीशियां भी मिलीं। इन दवाइयों को लेकर भी जांच शुरू कर दी गई है।

    पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ये दवाइयां किसलिए इस्तेमाल होती थीं, किसने इन्हें मंगाया था और क्या वहां रहने वाले लोगों को इन्हें दिया जाता था।

    जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि कहीं अनुयायियों या कथित पीड़ितों को सुस्त या अचेत रखने के लिए किसी नशीले पदार्थ का इस्तेमाल तो नहीं किया जाता था।

    हालांकि, इसका सच फॉरेंसिक और मेडिकल जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

    बाहर से आध्यात्मिक केंद्र, अंदर से कथित नियंत्रण का तंत्र?

    मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, पुलिस कथित आश्रम की गतिविधियों और वहां रहने वाले लोगों के बीच संबंधों की भी पड़ताल कर रही है।

    सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो इतने वर्षों तक यह पूरा तंत्र कैसे चलता रहा और पीड़ित लोग समय रहते बाहर क्यों नहीं निकल पाए?

    मनोवैज्ञानिक नियंत्रण, डर, कथित ब्लैकमेलिंग और सामाजिक अलगाव जैसे तरीके किसी व्यक्ति को लंबे समय तक चुप रहने के लिए मजबूर कर सकते हैं। इसी पहलू को ध्यान में रखते हुए पुलिस आरोपों की अलग-अलग कड़ियों को जोड़ रही है।

    बाबा समेत आठ लोग गिरफ्तार

    पुणे पुलिस ने इस मामले में राधामोहन मिश्रा उर्फ राधेश्याम मिश्रा के साथ उसके सात सहयोगियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अब सभी आरोपियों से पूछताछ कर कथित आश्रम की गतिविधियों और शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच कर रही है।

    महिला द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के साथ-साथ पुलिस को मिले कथित इलेक्ट्रॉनिक और भौतिक साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।

    यह मामला एक बार फिर इस सवाल को सामने लाता है कि धार्मिक आस्था और अंधविश्वास के बीच की सीमा कब किसी व्यक्ति के शोषण का जरिया बन जाती है।

    किसी व्यक्ति को गुरु, साधु या आध्यात्मिक मार्गदर्शक मानना निजी आस्था का विषय हो सकता है, लेकिन जब कथित तौर पर डर, ब्लैकमेल, हिंसा या आर्थिक दबाव के जरिए किसी की जिंदगी पर नियंत्रण स्थापित किया जाए, तो मामला गंभीर अपराध का रूप ले सकता है।

    नोट: यह कहानी उपलब्ध शिकायतों, पुलिस कार्रवाई और लगाए गए आरोपों के आधार पर पुनर्लिखी गई है। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और अदालत के फैसले के बाद ही होगी।

  • एआई बना साइबर अपराधियों का नया हथियार, नकली आवाज से लेकर डीपफेक तक बढ़ा ठगी का खतरा; आने वाले समय में इंसान और मशीन में फर्क करना होगा मुश्किल​​​​​​

    एआई बना साइबर अपराधियों का नया हथियार, नकली आवाज से लेकर डीपफेक तक बढ़ा ठगी का खतरा; आने वाले समय में इंसान और मशीन में फर्क करना होगा मुश्किल​​​​​​

    बैंकिंग एक्सपर्ट्स ने जताई बड़ी चिंता: AI की मदद से साइबर ठगी हुई तेज, अपराधी कुछ ही समय में हजारों लोगों को बना सकते हैं निशाना; भारत में भी बढ़ रहे फ्रॉड के प्रयास

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई ने कुछ ही वर्षों में हमारी जिंदगी को काफी बदल दिया है। पढ़ाई से लेकर कारोबार, स्वास्थ्य, बैंकिंग और मनोरंजन तक, हर क्षेत्र में इसका इस्तेमाल बढ़ रहा है। लेकिन जिस तकनीक को इंसानों की सुविधा के लिए बनाया गया था, वही अब साइबर अपराधियों के हाथ में पहुंचकर एक गंभीर खतरा बनती जा रही है।

    पहले किसी व्यक्ति को ऑनलाइन ठगने के लिए अपराधियों को काफी तैयारी करनी पड़ती थी। उन्हें नकली संदेश लिखने, किसी की आवाज की नकल करने या लोगों का भरोसा जीतने में समय लगता था। अब एआई ने इन सभी कामों को काफी आसान बना दिया है।

    दुनिया भर के बैंक और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ इसी बदलते खतरे को लेकर चिंतित हैं।

    सर्वे में सामने आई चिंताजनक तस्वीर

    साइबर सुरक्षा कंपनी बायोकैच की ओर से 25 देशों के 1,440 बैंकिंग और धोखाधड़ी रोकथाम विशेषज्ञों के बीच किए गए एक सर्वे में एआई और साइबर अपराध को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें सामने आईं।

    सर्वे में 84 प्रतिशत विशेषज्ञों ने माना कि अगले एक साल में एआई आधारित एजेंट साइबर अपराधियों के लिए सबसे बड़ा हथियार बन सकते हैं।

    वहीं 88 प्रतिशत विशेषज्ञों का कहना था कि एआई ने धोखाधड़ी को पहले ही ज्यादा खतरनाक बना दिया है। करीब 72 प्रतिशत विशेषज्ञों को आशंका है कि आने वाले समय में इंसान और एआई के बीच अंतर करना बेहद मुश्किल हो सकता है।

    सर्वे में शामिल 60 प्रतिशत विशेषज्ञों ने यह चिंता भी जताई कि एआई के कारण मौजूदा सुरक्षा उपाय कमजोर पड़ सकते हैं। इसके अलावा 76 प्रतिशत विशेषज्ञों ने अपने क्षेत्र में धोखाधड़ी की गति तेजी से बढ़ने की बात कही।

    भारत में भी बढ़ रहा साइबर फ्रॉड

    भारत में भी स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। सर्वे में शामिल भारतीय बैंकिंग अधिकारियों के मुताबिक पिछले एक साल में धोखाधड़ी के प्रयासों में बढ़ोतरी हुई है।

    करीब 90 प्रतिशत भारतीय बैंकिंग अधिकारियों ने कहा कि उनके क्षेत्र में फ्रॉड के प्रयास बढ़े हैं। वहीं 84 प्रतिशत अधिकारियों ने बताया कि धोखाधड़ी से होने वाला आर्थिक नुकसान भी बढ़ा है।

    इसका एक बड़ा कारण यह है कि अब अपराधियों के पास लोगों को निशाना बनाने के लिए पहले से कहीं ज्यादा तकनीकी साधन मौजूद हैं।

    नकली आवाज सुनकर भी लोग कर रहे हैं भरोसा

    एआई की मदद से किसी व्यक्ति की आवाज की नकल करना अब पहले की तुलना में काफी आसान हो गया है। साइबर अपराधी सोशल मीडिया या इंटरनेट पर उपलब्ध आवाज के नमूनों का इस्तेमाल कर नकली आवाज तैयार कर सकते हैं।

    इसी तरह वीडियो में भी किसी व्यक्ति की शक्ल और आवाज की नकल करके ऐसा कंटेंट तैयार किया जा सकता है, जो पहली नजर में वास्तविक दिखाई दे।

    कल्पना कीजिए कि अचानक आपके फोन पर किसी करीबी रिश्तेदार की आवाज में कॉल आए और वह कहे कि वह मुश्किल में है और तुरंत पैसे चाहिए। अगर आवाज बिल्कुल उसी व्यक्ति जैसी सुनाई दे, तो कई लोग बिना ज्यादा सोचे पैसा ट्रांसफर कर सकते हैं।

    यही एआई आधारित ठगी का सबसे खतरनाक पहलू है।

    अब नकली संदेश पहचानना भी आसान नहीं

    पहले साइबर ठगों के संदेशों में भाषा की गलतियां और अजीब वाक्य अक्सर दिखाई देते थे। इसी वजह से लोगों को कई बार समझ आ जाता था कि संदेश फर्जी है।

    लेकिन एआई ने यह कमजोरी भी काफी हद तक खत्म कर दी है।

    अब अपराधी एआई की मदद से बेहद साफ और स्वाभाविक भाषा में संदेश तैयार कर सकते हैं। ईमेल, मैसेज या सोशल मीडिया चैट को इस तरह लिखा जा सकता है कि वह किसी बैंक, कंपनी, अधिकारी या परिचित व्यक्ति की ओर से आया हुआ लगे।

    इससे आम लोगों के लिए फर्जी और असली संदेश में अंतर करना और कठिन हो सकता है।

    एक साथ हजारों लोगों को निशाना बना सकते हैं बॉट

    एआई आधारित बॉट साइबर अपराधियों के लिए एक और बड़ा हथियार बन सकते हैं।

    जहां पहले किसी अपराधी को एक-एक व्यक्ति से संपर्क करना पड़ता था, वहीं ऑटोमेशन और एआई की मदद से एक साथ बड़ी संख्या में लोगों को संदेश भेजे जा सकते हैं।

    इन संदेशों को अलग-अलग लोगों की जानकारी के आधार पर बदला भी जा सकता है। यानी हर व्यक्ति को एक जैसा संदेश भेजने के बजाय उसके नाम, काम, रुचि या ऑनलाइन गतिविधि के हिसाब से ज्यादा भरोसेमंद संदेश तैयार किया जा सकता है।

    इससे ठगी का दायरा और उसकी गति दोनों बढ़ सकती हैं।

    सोशल मीडिया की जानकारी भी बन सकती है हथियार

    आज लोग सोशल मीडिया पर अपनी जिंदगी से जुड़ी काफी जानकारी साझा करते हैं। तस्वीरें, वीडियो, नौकरी, परिवार, दोस्तों के नाम, यात्रा की जानकारी और रोजमर्रा की गतिविधियां अक्सर सार्वजनिक रहती हैं।

    साइबर अपराधी इसी डिजिटल जानकारी का इस्तेमाल किसी व्यक्ति की प्रोफाइल तैयार करने में कर सकते हैं।

    एआई बड़ी मात्रा में उपलब्ध जानकारी का विश्लेषण करके किसी व्यक्ति की डिजिटल पहचान और व्यवहार को समझने में मदद कर सकता है। इसके बाद उसी जानकारी के आधार पर अधिक विश्वसनीय धोखाधड़ी का प्रयास किया जा सकता है।

    खतरा सिर्फ बैंक खातों तक सीमित नहीं

    एआई आधारित साइबर अपराध का खतरा केवल बैंकिंग सेक्टर तक सीमित नहीं है।

    आम नागरिकों के साथ-साथ कंपनियां, सरकारी संस्थान और बड़े संगठन भी इसका निशाना बन सकते हैं। नकली पहचान, डीपफेक, फर्जी दस्तावेज, सोशल इंजीनियरिंग और डिजिटल ठगी जैसे तरीकों का इस्तेमाल अलग-अलग क्षेत्रों में किया जा सकता है।

    भविष्य में एआई का इस्तेमाल गलत सूचना फैलाने और लोगों की राय को प्रभावित करने जैसे मामलों में भी किया जा सकता है। यही वजह है कि साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ इसे केवल आर्थिक अपराध का मुद्दा नहीं मान रहे हैं।

    विदेशों में फर्जी साइबर फ्रॉड नेटवर्क भी चिंता का विषय

    दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ देशों में साइबर फ्रॉड नेटवर्क को लेकर पहले भी गंभीर आरोप सामने आते रहे हैं। कंबोडिया, वियतनाम और म्यांमार जैसे देशों में भारतीय युवाओं समेत कई लोगों को नौकरी का लालच देकर साइबर फ्रॉड नेटवर्क में फंसाने और उनसे जबरन काम कराने की खबरें सामने आई हैं।

    ऐसे नेटवर्क में फंसाए गए लोगों से बड़े पैमाने पर ऑनलाइन ठगी कराई जाती है। कई मामलों में उनके परिवारों को भी दबाव और आर्थिक प्रलोभन के जरिए इस पूरे नेटवर्क से जोड़ने की कोशिश की जाती है।

    एआई के बढ़ते इस्तेमाल से ऐसे संगठित साइबर अपराध नेटवर्क की क्षमता और भी बढ़ने की आशंका है।

    एआई दुश्मन नहीं, उसका गलत इस्तेमाल असली खतरा

    यह समझना जरूरी है कि एआई अपने आप में न तो अच्छा है और न बुरा। यह एक शक्तिशाली तकनीक है, जिसका इस्तेमाल इंसानों की सुविधा और विकास के लिए किया जा सकता है।

    समस्या तब पैदा होती है जब इसी तकनीक का इस्तेमाल अपराधी लोगों को नुकसान पहुंचाने के लिए करने लगते हैं।

    जिस एआई से बैंकिंग सुरक्षा मजबूत की जा सकती है, उसी से नकली पहचान भी बनाई जा सकती है। जिस तकनीक से आवाज को बेहतर बनाया जा सकता है, उसी से किसी की आवाज की नकल भी की जा सकती है।

    इसलिए आने वाले समय में सिर्फ तकनीक का विकास ही जरूरी नहीं होगा, बल्कि उसके दुरुपयोग से बचने के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और लोगों में जागरूकता भी उतनी ही जरूरी होगी।

    आने वाला दौर और ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकता है

    बायोकैच के सर्वे में सामने आए आंकड़े इस बात की ओर इशारा करते हैं कि साइबर अपराध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। एआई ने अपराधियों को तेज, ज्यादा व्यक्तिगत और बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी करने की क्षमता दे दी है।

    अब जरूरत इस बात की है कि सरकारें, बैंक, टेक कंपनियां और आम नागरिक मिलकर साइबर सुरक्षा को मजबूत करें।

    आम लोगों के लिए सबसे जरूरी है कि किसी भी अचानक आए फोन, वीडियो कॉल या मैसेज पर तुरंत भरोसा न करें। रिश्तेदार या अधिकारी की आवाज सुनाई देने पर भी पैसे भेजने से पहले दूसरे माध्यम से उसकी पुष्टि करें।

    क्योंकि आने वाले समय में सवाल सिर्फ यह नहीं होगा कि “यह आवाज किसकी है?” बल्कि यह भी होगा कि “क्या दूसरी तरफ सच में वही इंसान है?”

    एआई का भविष्य कितना सुरक्षित होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि समाज इस शक्तिशाली तकनीक के इस्तेमाल और उसके दुरुपयोग के बीच कितनी मजबूत सुरक्षा दीवार खड़ी कर पाता है।

  • पत्नी के चरित्र पर शक ने उजाड़ दिया पूरा परिवार, पति ने पुराने मकान में रची हत्या की साजिश;  फिर 5 दिन तक करता रहा गुमशुदगी का नाटक..​​​​​​

    पत्नी के चरित्र पर शक ने उजाड़ दिया पूरा परिवार, पति ने पुराने मकान में रची हत्या की साजिश; फिर 5 दिन तक करता रहा गुमशुदगी का नाटक..​​​​​​

    सूरत की खौफनाक वारदात: बेरोजगारी, हीनभावना और शक ने पति के मन में ऐसा जहर घोला कि जिस पत्नी के साथ 16 साल बिताए, उसी की जान ले ली; अंत में 13 साल के बेटे को लिखे पत्र से खुला पूरा राज

    सूरत की उस शाम को देखकर कोई अंदाजा नहीं लगा सकता था कि कुछ ही घंटों बाद एक हंसता-खेलता परिवार हमेशा के लिए बिखरने वाला है। घर में दो बच्चे थे, मां शिल्पा अपने काम और परिवार को संभाल रही थी और पिता विशाल सालवी भी कभी नौकरी कर परिवार की जिम्मेदारियां निभाता था। लेकिन बेरोजगारी ने धीरे-धीरे उसके भीतर ऐसी हीनभावना और शक पैदा कर दिया, जिसने आखिरकार एक दिन उसे अपनी ही पत्नी का हत्यारा बना दिया।

    यह कहानी सिर्फ एक हत्या की नहीं, बल्कि उस शक की है जिसने पहले पति-पत्नी के रिश्ते को तोड़ा और फिर दो मासूम बच्चों से उनकी मां और पिता दोनों छीन लिए।

    शादी के बाद जिंदगी बिल्कुल सामान्य थी

    सूरत के विशाल सालवी और शिल्पा की शादी साल 2010 में हुई थी। शुरुआती वर्षों में दोनों की जिंदगी सामान्य और खुशहाल रही। शिल्पा एक निजी अस्पताल में डायटिशियन के तौर पर काम करती थी और अपना क्लीनिक भी चलाती थी। विशाल एक हीरा फर्म में नौकरी करता था।

    समय के साथ परिवार बढ़ा और दोनों दो बच्चों के माता-पिता बने। बाहर से देखने पर सब कुछ ठीक नजर आता था।

    लेकिन वक्त के साथ परिस्थितियां बदलने लगीं।

    नौकरी छूटने के बाद बदलने लगा विशाल

    कुछ समय बाद विशाल ने अपनी नौकरी छोड़ दी। इसके बाद लंबे समय तक उसे कोई स्थायी काम नहीं मिला। घर का खर्च और बच्चों की जिम्मेदारी धीरे-धीरे शिल्पा के कंधों पर आ गई।

    शिल्पा चाहती थी कि विशाल दोबारा काम शुरू करे। वह जब भी उसे नौकरी तलाशने के लिए कहती, दोनों के बीच बहस हो जाती।

    बेरोजगारी और आर्थिक तनाव ने विशाल के स्वभाव में चिड़चिड़ापन बढ़ा दिया। वह घर में ज्यादा समय बिताने लगा। इसी दौरान उसके मन में एक और चीज ने जगह बना ली—पत्नी के चरित्र को लेकर शक।

    कोई सबूत नहीं था, फिर भी शक बढ़ता गया

    विशाल को लगने लगा कि शिल्पा का किसी दूसरे व्यक्ति के साथ संबंध है। शिल्पा ने इन आरोपों को नकार दिया, लेकिन विशाल का शक कम नहीं हुआ।

    बताया जाता है कि दोस्तों और आसपास के लोगों की बातें भी उसके मन पर असर डाल रही थीं। अपनी बेरोजगारी और असफलता से पैदा हुई हीनभावना धीरे-धीरे पत्नी के प्रति अविश्वास में बदलती चली गई।

    शिल्पा के लिए पति के ऐसे आरोप बेहद परेशान करने वाले थे। लेकिन उसे शायद यह अंदाजा नहीं था कि यही शक एक दिन उसकी जान ले लेगा।

    20 अप्रैल की वह दोपहर

    20 अप्रैल 2026 को विशाल ने शिल्पा से कहा कि पुराने पुश्तैनी मकान से कुछ सामान लाना है। शिल्पा उसके साथ सलाबतपुरा स्थित उस मकान में चली गई।

    उसे शायद लगा होगा कि रोज की तरह यह भी एक सामान्य काम है।

    लेकिन उस पुराने मकान में उस दिन जो हुआ, उसने पूरे परिवार की जिंदगी बदल दी।

    वहां दोनों के बीच फिर पत्नी के कथित अवैध संबंधों को लेकर बहस शुरू हो गई। शिल्पा ने आरोपों को खारिज किया। बहस बढ़ती चली गई और गुस्से में विशाल ने कथित तौर पर उसका गला दबा दिया।

    कुछ ही देर में शिल्पा की जिंदगी खत्म हो चुकी थी।

    हत्या के बाद शव को बक्से में छिपाया

    हत्या के बाद विशाल घबराया जरूर होगा, लेकिन उसने कथित तौर पर पुलिस से बचने के लिए शव को ठिकाने लगाने की योजना बनाई।

    उसने शिल्पा के शव को लकड़ी के एक बड़े बक्से में रख दिया। इसके बाद बक्से पर सीमेंट की मोटी परत चढ़ा दी, ताकि शव बाहर से दिखाई न दे और बदबू भी कम हो।

    जिस घर में कभी परिवार का सामान रखा जाता था, उसी मकान में अब एक ऐसा राज दफन था, जिसका पता किसी को नहीं था।

    घर लौटकर ऐसे पेश आया जैसे कुछ हुआ ही नहीं

    हत्या के बाद विशाल ने खुद को सामान्य दिखाने की कोशिश की। वह रिश्तेदारों के घर गया और फिर अपने घर लौट आया।

    परिवार और बच्चों के सामने उसने दावा किया कि वह शिल्पा को अस्पताल के पास छोड़कर आया था।

    घरवालों को उस समय शायद उसके चेहरे पर छिपे डर का अंदाजा भी नहीं हुआ।

    लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई थी।

    अगले दिन खुद थाने पहुंचा

    अगले दिन विशाल अपने ससुर प्रदीप कोस्टा के साथ थाने पहुंचा और शिल्पा की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई।

    इसके बाद उसने करीब पांच दिनों तक पत्नी को खोजने का दिखावा किया। वह ऐसा व्यवहार करता रहा जैसे उसे सचमुच अपनी पत्नी के गायब होने की चिंता हो।

    लेकिन पुलिस के अनुसार, इसी दौरान वह चोरी-छिपे पुराने मकान में जाता था।

    उसे डर था कि कहीं शव से आने वाली बदबू किसी को शक न करा दे। इसलिए वह वहां जाकर कथित तौर पर बक्से से निकल रहे तरल पदार्थ को साफ करता और कमरे में रूम फ्रेशनर छिड़कता था।

    हर बार वह यही कोशिश करता कि उस घर के अंदर छिपा सच बाहर न आए।

    पांचवें दिन खुद ही टूट गया

    लगातार पांच दिनों तक यह सब करने के बाद शायद विशाल को एहसास होने लगा कि अब वह ज्यादा समय तक पुलिस से नहीं बच पाएगा।

    फिर उसने एक ऐसा कदम उठाया, जिसने पूरी वारदात का पर्दाफाश कर दिया।

    उसने अपने 13 साल के बेटे को एक हस्तलिखित पत्र दिया।

    पत्र में उसने कथित तौर पर अपनी पत्नी की हत्या की बात स्वीकार की और यह भी लिखा कि शव कहां और किस तरह छिपाया गया है।

    बेटे के हाथ में पहुंचा वह कागज दरअसल उस खौफनाक राज की चाबी बन चुका था, जिसे विशाल पांच दिनों से छिपाने की कोशिश कर रहा था।

    सीमेंट के नीचे मिला मां का शव

    पत्र मिलने के बाद पुलिस पुराने मकान तक पहुंची। वहां जांच शुरू हुई तो सीमेंट से ढका लकड़ी का बक्सा मिला।

    बक्से को खोला गया तो अंदर शिल्पा का सड़ चुका शव बरामद हुआ।

    पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू की। जांच में मोबाइल लोकेशन समेत अन्य साक्ष्यों को भी शामिल किया गया और आखिरकार विशाल को गिरफ्तार कर लिया गया।

    पूछताछ में उसने कथित तौर पर पत्नी की हत्या की बात स्वीकार की और पुलिस को बताया कि पत्नी के चरित्र पर शक तथा अपनी मानसिक कुंठा के कारण उसने यह कदम उठाया।

    एक शक ने दो बच्चों का पूरा संसार उजाड़ दिया

    इस घटना का सबसे दर्दनाक पहलू यह था कि शिल्पा के दो मासूम बच्चे देखते ही देखते अपनी मां और पिता दोनों से दूर हो गए।

    जिस मां के साथ वे रोज की जिंदगी जीते थे, उसकी हत्या हो चुकी थी। और जिस पिता को वे अपना सहारा समझते थे, वह अब जेल पहुंच चुका था।

    आखिरकार बच्चों के नाना प्रदीप कोस्टा उन्हें अपने साथ ले गए।

    एक परिवार जो कभी पति-पत्नी और दो बच्चों के साथ सामान्य जिंदगी जी रहा था, वह कुछ ही दिनों में पूरी तरह बिखर गया।

    इस घटना ने एक बार फिर दिखाया कि बिना किसी ठोस आधार का शक जब जुनून बन जाता है, तो वह सिर्फ रिश्ते नहीं तोड़ता—कभी-कभी पूरे परिवार की जिंदगी तबाह कर देता है।

    नोट: यह कहानी उपलब्ध घटनाक्रम और पुलिस जांच में सामने आए कथित तथ्यों पर आधारित पुनर्लेखन है। किसी आरोपी का दोष अदालत के अंतिम फैसले के बाद ही कानूनी रूप से सिद्ध माना जाएगा।

  • 9 साल तक साबरमती में दफन रहा पत्नी की हत्या का राज, पति ने रची थी गुमशुदगी की झूठी कहानी; दूसरी शादी कर जी रहा था बेफिक्र जिंदगी..​​​​​​

    9 साल तक साबरमती में दफन रहा पत्नी की हत्या का राज, पति ने रची थी गुमशुदगी की झूठी कहानी; दूसरी शादी कर जी रहा था बेफिक्र जिंदगी..​​​​​​

    2017 में नदी से मिला था अज्ञात युवती का शव, पहचान नहीं होने पर कर दिया गया था अंतिम संस्कार; 9 साल बाद मुखबिर की सूचना से खुला राज, पिता ने तस्वीर देखकर पहचानी बेटी

    अहमदाबाद में साल 2017 में सामने आया एक ऐसा मामला, जिसका सच करीब नौ साल तक पुलिस रिकॉर्ड और साबरमती नदी की लहरों में दबा रहा। एक युवती का शव नदी से बरामद हुआ था, लेकिन पहचान नहीं होने के कारण मामला अनसुलझा रह गया। परिवार बेटी के लौटने की उम्मीद लगाए रहा, जबकि उसका पति कथित तौर पर उसकी हत्या के बाद सामान्य जिंदगी जी रहा था।

    करीब नौ साल बाद जून 2026 में अहमदाबाद क्राइम ब्रांच को मिली एक अहम सूचना ने इस पुराने मामले की फाइल दोबारा खोल दी। जांच आगे बढ़ी तो सामने आया कि नदी में मिला अज्ञात शव किसी और का नहीं, बल्कि कोमल सोलंकी का था। पुलिस के मुताबिक, उसकी हत्या उसके पति मिनेश सोलंकी ने की थी और वारदात को छिपाने के लिए पत्नी की गुमशुदगी की झूठी कहानी रची गई थी।

    रथयात्रा के अगले दिन नदी में मिला था युवती का शव

    घटना 26 जून 2017 की है। अहमदाबाद में भगवान जगन्नाथ की 140वीं रथयात्रा के बाद हुई बारिश के कारण साबरमती नदी का जलस्तर बढ़ गया था। अगले दिन सुबह रिवरफ्रंट इलाके में गश्त कर रही फायर ब्रिगेड की मोटरबोट के कर्मचारियों को नदी में एक युवती का शव दिखाई दिया।

    सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को बाहर निकाला गया। पोस्टमार्टम कराया गया, लेकिन युवती के पास ऐसा कोई सामान या दस्तावेज नहीं मिला, जिससे उसकी पहचान हो सके।

    पुलिस ने आसपास के थानों में सूचना भेजी। गुमशुदगी की रिपोर्ट भी खंगाली गई और अखबारों में युवती की पहचान के लिए खबर प्रकाशित कराई गई। इसके बावजूद कई दिनों तक कोई परिवार शव की पहचान करने नहीं पहुंचा।

    करीब सात दिन बाद शव को लावारिस मानते हुए उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया और मामला ठंडे बस्ते में चला गया।

    नौ साल बाद मुखबिर ने दी अहम जानकारी

    जून 2026 में अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के एसआई आरसी शर्मा को एक विश्वसनीय मुखबिर से जानकारी मिली। दावा किया गया कि 2017 में साबरमती नदी से बरामद अज्ञात युवती का शव दरअसल कोमल सोलंकी का था।

    मुखबिर ने यह भी बताया कि कोमल की हत्या उसके पति मिनेश सोलंकी ने की थी। आरोप था कि हत्या के बाद मिनेश ने पत्नी के लापता होने की झूठी शिकायत दर्ज कर पुलिस को गुमराह किया और बाद में दूसरी शादी कर सामान्य जीवन जीने लगा।

    सूचना को गंभीरता से लेते हुए इंस्पेक्टर जेबलिया के निर्देश पर क्राइम ब्रांच ने पुराने रिकॉर्ड खंगालने शुरू किए।

    एक गुमशुदगी की रिपोर्ट ने जोड़ दिए पुराने मामले के तार

    जांच के दौरान पुलिस को कालूपुर थाने में दर्ज कोमल की गुमशुदगी की रिपोर्ट मिली। इसके बाद रिवरफ्रंट पुलिस स्टेशन में 2017 में मिले अज्ञात युवती के शव की फाइल से उसका मिलान किया गया।

    पोस्टमार्टम रिपोर्ट, पुराने दस्तावेज और शव की तस्वीरों की जांच की गई। पुलिस ने तस्वीरें कोमल के पिता को दिखाईं।

    तस्वीर देखते ही पिता की आंखों के सामने नौ साल पुराना दर्द फिर से जिंदा हो गया। उन्होंने शव की पहचान अपनी बेटी कोमल के रूप में की। जिस बेटी के वापस लौटने की उम्मीद परिवार ने वर्षों तक नहीं छोड़ी थी, उसकी मौत की सच्चाई आखिरकार सामने आ गई।

    पुलिस ने चुपचाप पति पर रखी नजर

    पहचान सामने आने के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करने के बजाय आरोपी तक पहुंचने के लिए सावधानी से जांच आगे बढ़ाई। क्राइम ब्रांच ने मिनेश पर निगरानी रखी और उसके पुराने बयानों तथा घटनाक्रम की दोबारा पड़ताल की।

    हिरासत में लेकर पूछताछ की गई तो मिनेश ने शुरुआत में वही पुरानी कहानी दोहराई कि उसकी पत्नी घर छोड़कर चली गई थी। लेकिन पुलिस ने जब उसके सामने पुराने रिकॉर्ड और उपलब्ध साक्ष्य रखे तो पूछताछ का रुख बदल गया।

    पुलिस के अनुसार, इसके बाद मिनेश ने कथित तौर पर हत्या की बात स्वीकार कर ली।

    प्रेम विवाह के बाद शुरू हुआ था विवाद

    पूछताछ में सामने आई कहानी के मुताबिक, मिनेश और कोमल ने प्रेम विवाह किया था। शादी के कुछ समय बाद दोनों के बीच विवाद बढ़ने लगे थे। पुलिस के अनुसार, घरेलू कलह और पत्नी के शक से परेशान होकर मिनेश ने कथित तौर पर उसे रास्ते से हटाने की योजना बनाई।

    25 जून 2017 को भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के दिन मिनेश कोमल को घुमाने के बहाने साबरमती रिवरफ्रंट ले गया। वहां उसने अपने साझा मित्र भावेश को भी बुलाया। बताया गया कि भावेश के सामने ऐसा माहौल बनाया गया, जैसे दोनों के बीच चल रहे विवाद को सुलझाने की कोशिश की जा रही हो।

    रात के अंधेरे में नदी में धक्का देने का आरोप

    पुलिस के मुताबिक, रात बढ़ने के साथ भावेश कुछ दूरी पर चला गया। इसी दौरान मिनेश ने कथित तौर पर कोमल को साबरमती नदी में धक्का दे दिया।

    आरोप है कि कोमल ने मदद के लिए गुहार लगाई, लेकिन मिनेश ने उसे बचाने की कोशिश नहीं की। जब भावेश को घटना का पता चला तो कथित तौर पर उसे भी धमकी दी गई कि अगर उसने किसी को कुछ बताया तो उसकी जान को खतरा होगा।

    डर के कारण भावेश इतने वर्षों तक चुप रहा।

    अगले दिन दर्ज कराई गुमशुदगी की रिपोर्ट

    पुलिस के अनुसार, घटना के बाद मिनेश ने पत्नी के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई। इसी दौरान साबरमती नदी से एक अज्ञात युवती का शव बरामद हुआ, लेकिन किसी को यह पता नहीं था कि वह कोमल थी।

    पहचान नहीं होने के कारण शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस तरह एक तरफ परिवार कोमल के लौटने का इंतजार करता रहा और दूसरी तरफ हत्या का राज सालों तक दबा रहा।

    भावेश ने भी पुलिस के सामने बताई पूरी कहानी

    क्राइम ब्रांच ने इस मामले में भावेश से भी पूछताछ की। पुलिस के अनुसार, भावेश ने घटना की पुष्टि की और बताया कि धमकी के कारण वह करीब नौ वर्षों तक सच सामने लाने की हिम्मत नहीं जुटा सका।

    उसके बयान, आरोपी के कथित कबूलनामे, पुरानी गुमशुदगी की रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों को जांच में शामिल किया गया। इसके बाद पुलिस ने मिनेश के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया।

    इस तरह करीब नौ साल तक अनसुलझा रहा कोमल की मौत का मामला फिर से सामने आया। जिस शव की 2017 में पहचान नहीं हो सकी थी, उसकी पहचान 2026 में हुई और पुलिस ने हत्या के आरोप में उसके पति को गिरफ्तार कर लिया।

    हालांकि, अंतिम दोष सिद्धि अदालत में साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगी।

  • असली डिब्बा… लेकिन दवा नकली! कैंसर मैडिसिन के नाम पर जहर परोस रहा था ‘डेथ सिंडिकेट’, पकड़े गए 17 आरोपी..?

    असली डिब्बा… लेकिन दवा नकली! कैंसर मैडिसिन के नाम पर जहर परोस रहा था ‘डेथ सिंडिकेट’, पकड़े गए 17 आरोपी..?

    असली डिब्बा... लेकिन दवा नकली! कैंसर मैडिसिन के नाम पर जहर परोस रहा था 'डेथ सिंडिकेट', पकड़े गए 17 आरोपी

    दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है. पुलिस के इंटर स्टेट सेल ने महंगी एंटी-कैंसर दवाओं की खरीद-फरोख्त करने वाले गिरोह के 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. यह गिरोह अवैध तरीके से अस्पतालों व सरकारी संस्थानों से निकाली गई कैंसर रोधी दवाओं के साथ ही नकली दवाओं को भी बेचते थे. पुलिस ने उनके ठिकानों से करीब 9 करोड़ रुपये कीमत की दवाएं बरामद की हैं.

    पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के पास से 588 भरी हुई एंटी-कैंसर इंजेक्शन की शीशियां, 6 खाली वायल, 7 खाली दवाओं के डिब्बे और दूसरी तरह की 3021 दवाएं मिली हैं. इसके अलावा करीब 50 लाख रुपये नकद, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, रजिस्टर, डायरी और दवाओं की पैकिंग में इस्तेमाल होने वाला सामान भी बरामद हुआ है.

    अस्पतालों से दवाएं निकालकर बाजार में बेचते थे

    जांच में सामने आया है कि गिरोह तीन तरीकों से महंगी कैंसर की दवाएं जुटाता था. कुछ दवाएं गैरकानूनी और अनधिकृत स्रोतों से खरीदी जाती थीं, जबकि कुछ दवाएं अस्पतालों में कैंसर मरीजों के लिए रखी होती थीं. उन्हें चोरी-छिपे बाहर निकालकर बेच दिया जाता था. इसके अलावा सरकारी संस्थानों और गोदामों से सप्लाई होने वाली दवाओं को भी अवैध तरीके से डायवर्ट किया जाता था.

    आरोपी बिना वैध बिल, खरीद रिकॉर्ड, ड्रग लाइसेंस और दूसरे जरूरी दस्तावेजों के दवाओं का कारोबार कर रहे थे. इन दवाओं को दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, हैदराबाद, हरियाणा, उत्तर प्रदेश समेत कई इलाकों में अलग-अलग लोगों के जरिए पहुंचाया जाता था.

    असली डिब्बों में पैक कर बाजार में खपाते थे

    पुलिस की जांच में यह भी पता चला कि गिरोह के सदस्य दवाओं के पुराने और खाली डिब्बों को संभालकर रखते थे. बाद में इन्हीं डिब्बों का इस्तेमाल दोबारा पैकिंग में किया जाता था. दवाओं की पहचान छिपाने के लिए बैच नंबर, एमआरपी और अन्य जानकारी को केमिकल की मदद से हटाने की कोशिश की जाती थी.

    दवाओं की खेप तैयार करने के लिए थर्माकोल बॉक्स, बबल रोल, टेप और पॉलीथिन जैसी पैकिंग सामग्री का इस्तेमाल किया जाता था. दवाओं की खरीद-बिक्री और नकद लेनदेन का हिसाब रजिस्टर और डायरियों में रखा जाता था.

    ऐसे खुला गिरोह का राज

    क्राइम ब्रांच को 22 जून 2026 को इस गिरोह के बारे में गुप्त सूचना मिली थी. जांच के दौरान ईस्ट दिल्ली, रोहिणी और मुंबई में कई संदिग्ध ठिकानों का पता चला. इसके बाद 11 जुलाई को इंटर स्टेट सेल की सात टीमों ने दिल्ली और नवी मुंबई में ड्रग्स विभाग तथा स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर एक साथ छापेमारी की.

    छापेमारी में Darzalex, Imfinzi, Erbitux, Opdyta, Gazyva, Bavencio, Adcetris और Keytruda जैसी महंगी एंटी-कैंसर दवाएं बरामद हुईं. इसके बाद मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई गई. गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और उनकी निशानदेही पर लगातार छापेमारी करते हुए अब तक 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया है.

    अस्पताल के कर्मचारी भी जांच के घेरे में

    जांच में अस्पतालों से जुड़े कुछ कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आई है. पुलिस के अनुसार, कुछ आरोपी अस्पतालों में काम करते थे और मरीजों के लिए रखे गए एंटी-कैंसर इंजेक्शन को बाहर निकालकर गिरोह के दूसरे सदस्यों तक पहुंचाते थे. एक नर्सिंग इंचार्ज और अस्पताल में काम करने वाले अन्य लोगों की गिरफ्तारी भी इसी कड़ी में हुई है.

    एक आरोपी अस्पताल के ऑन्कोलॉजिस्ट के निजी सहायक के तौर पर काम कर चुका था. उसके घर से 108 एंटी-कैंसर वायल और 6.50 लाख रुपये नकद बरामद किए गए.

    337 इंजेक्शन एक आरोपी के पास मिले

    जांच के दौरान नोएडा के एक आरोपी के ठिकाने से अकेले 337 एंटी-कैंसर वायल और बड़ी मात्रा में दूसरी दवाएं बरामद हुईं. वहीं गुरुग्राम के एक आरोपी के वाहन से 12 वायल, अन्य दवाएं, पैकिंग सामग्री और 16.50 लाख रुपये नकद मिले.

    पुलिस के मुताबिक, गिरोह में मेडिकल स्टोर संचालक, दवा कारोबारी, अस्पताल कर्मचारी और बिचौलिये शामिल थे. आरोपी एक-दूसरे के जरिए दवाओं की सप्लाई आगे बढ़ाते थे.

    मरीजों की जान से खिलवाड़

    पुलिस का कहना है कि इस पूरे नेटवर्क की सबसे गंभीर बात यह है कि इसमें ऐसी दवाओं का अवैध कारोबार किया जा रहा था, जिनका इस्तेमाल कैंसर मरीजों के इलाज में होता है. नकली या संदिग्ध दवा मरीज की जान के लिए बेहद खतरनाक हो सकती है. यही वजह है कि पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह ने अब तक कितनी दवाएं बाजार में खपाईं और इनके खरीदार कौन-कौन थे.

    क्राइम ब्रांच अब गिरोह के बाकी सदस्यों, दवाओं के असली स्रोत, सप्लाई की पूरी कड़ी और पैसों के लेनदेन का पता लगा रही है. पुलिस को आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां तथा बरामदगी होने की उम्मीद है.

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  • मुंबई में NRI के लॉकर से 82 लाख के सोने के गहने गायब, बैंक का डिप्टी मैनेजर गिरफ्तार..

    मुंबई में NRI के लॉकर से 82 लाख के सोने के गहने गायब, बैंक का डिप्टी मैनेजर गिरफ्तार..

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    मुंबई के कांदिवली में NRI के बैंक लॉकर से 82 लाख रुपये के सोने के गहने गायब होने से हड़कंप मच गया. इस मामले में पुलिस ने बैंक के डिप्टी ब्रांच मैनेजर कुलदीप साहनी को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस ने उसके कब्जे से गहने भी बरामद कर लिए हैं. पढ़ें इस मैनेजर की करतूत.

    पुलिस ने आरोपी डिप्टी मैनेजर को गिरफ्तार कर लिया है (फोटो-ITG)

    मुंबई के कांदिवली में एक निजी बैंक के लॉकर से 82 लाख रुपये के सोने के गहने गायब होने का मामला सामने आया है. इस मामले में पुलिस ने बैंक के डिप्टी ब्रांच मैनेजर कुलदीप साहनी को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि उसने बैंक लॉकर में रखे NRI के सोने के गहनों का गलत तरीके से इस्तेमाल किया और उन्हें अलग-अलग गोल्ड मॉर्गेज फर्मों के पास गिरवी रख दिया. पुलिस ने आरोपी के खिलाफ क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट यानी आपराधिक विश्वासघात का केस दर्ज किया है.

    पुलिस के मुताबिक, इस मामले में शिकायत करने वाले व्यक्ति की उम्र 72 साल है और वह पिछले पांच दशक से ज्यादा समय से अपने परिवार के साथ दुबई में रह रहे हैं. उनका मुंबई में एक निजी बैंक में अकाउंट है और कांदिवली में उनका एक फ्लैट भी मौजूद है. इसी बैंक की कांदिवली शाखा में उन्होंने अपना लॉकर लिया था. लंबे समय तक विदेश में रहने की वजह से वह नियमित रूप से लॉकर चेक नहीं कर पाए.

    शिकायतकर्ता ने मार्च 2024 में बैंक के लॉकर में करीब 610 ग्राम सोने के गहने रखे थे. उस समय इन गहनों की अनुमानित कीमत करीब 81.8 लाख रुपये थी, जो बाद में करीब 82 लाख रुपये बताई गई. करीब दो साल बाद जब वह मुंबई आए और बैंक की शाखा में जाकर लॉकर चेक किया, तो उनके होश उड़ गए. लॉकर में रखा पूरा सोना गायब था और इसकी जानकारी उन्होंने बैंक अधिकारियों से मांगी.

    बैंक से पूछताछ के बाद भी जब सोने के गहनों के बारे में कोई संतोषजनक जानकारी नहीं मिली, तो शिकायतकर्ता ने पुलिस का रुख किया. उन्होंने 12 अगस्त को इस मामले में शिकायत दर्ज कराई. इसके बाद कांदिवली पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू की. चूंकि गहने करीब दो साल पहले लॉकर से गायब हुए थे, इसलिए पुलिस के सामने पुरानी CCTV फुटेज हासिल करना एक बड़ी चुनौती थी.

    जांच के दौरान पुलिस ने बैंक के कर्मचारियों से पूछताछ की और लॉकर से जुड़े पुराने रिकॉर्ड खंगाले. जांच में सामने आया कि शिकायतकर्ता के लॉकर को बैंक की ओर से डिप्टी ब्रांच मैनेजर कुलदीप साहनी ने उपलब्ध कराया था. पुलिस को इस जानकारी के बाद साहनी की भूमिका पर शक हुआ. इसके बाद जांच टीम ने उसके पिछले दो साल के बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की बारीकी से पड़ताल शुरू की.

    डीसीपी की निगरानी में पुलिस टीम ने आरोपी के बैंक ट्रांजैक्शन की जांच की. जांच में पता चला कि पिछले दो वर्षों के दौरान उसके बैंक खाते से करीब 9 करोड़ रुपये तक के लेनदेन हुए थे. पुलिस के मुताबिक, इन ट्रांजैक्शन का बड़ा हिस्सा ऐसी कंपनियों के साथ था, जो सोने को गिरवी रखकर लोन या मॉर्गेज का कारोबार करती हैं. इससे पुलिस का शक और मजबूत हो गया.

    पुलिस ने उन सभी कंपनियों से संपर्क किया, जिनके साथ आरोपी के वित्तीय लेनदेन सामने आए थे. जांच टीम ने इन फर्मों से साहनी द्वारा गिरवी रखे गए सोने के गहनों की तस्वीरें मांगीं. तस्वीरों की जांच के दौरान पुलिस को ऐसे गहने दिखाई दिए, जो शिकायतकर्ता के लॉकर में रखे गहनों से मेल खाते थे. इसके बाद पुलिस ने इन गहनों की पहचान और बरामदगी की कार्रवाई शुरू की.

    पुलिस ने जांच आगे बढ़ाते हुए शिकायतकर्ता के सोने के गहनों को बरामद कर लिया. इसके साथ ही कुलदीप साहनी को भी गिरफ्तार कर लिया गया. पुलिस के मुताबिक, FIR दर्ज होने के महज चार दिन के भीतर आरोपी तक पहुंचने और गहने बरामद करने में सफलता मिली. फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस मामले में उसके साथ कोई और व्यक्ति या बैंक कर्मचारी भी शामिल था या नहीं.

  • मीट कारोबारी ने सोती हुई पत्नी और बेटी के काट डाले गले, गाजियाबाद के खोड़ा में डबल मर्डर से सनसनी..

    मीट कारोबारी ने सोती हुई पत्नी और बेटी के काट डाले गले, गाजियाबाद के खोड़ा में डबल मर्डर से सनसनी..

    गाजियाबाद के खोड़ा थाना क्षेत्र के लोकप्रिय विहार में शनिवार तड़के एक मीट कारोबारी ने अपनी पत्नी और बेटी की मीट काटने वाले धारदार हथियार ‘बुगदे’ से गला काटकर हत्या कर दी। इसके बाद उसने दूसरी बेटी पर भी हमला किया, लेकिन वह बचकर भाग गई। शोर सुनकर मौके पर पहुंचे पड़ोसियों द्वारा सूचना दिए जाने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने घायल बेटी को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया। पुलिस ने आरोपी व्यक्ति को भी हिरासत में ले लिया है।

    लोकप्रिय विहार में नूरानी मस्जिद के पास रहने वाला मोहम्मद राजा अंसारी मीट कारोबारी है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी का अपनी पत्नी 40 वर्षीय बेबी तबस्सुम से झगड़ा हुआ था। काफी देर तक हुए झगड़े के बाद सभी से गए। कुछ देर बाद आरोपी ने घर में रखा बुगदा निकाला और पहले पत्नी का गला काटा और फिर 18 वर्षीय बेटी सना तबस्सुम की भी गला काटकर हत्या कर दी। मां और बहन की चीख सुनकर छोटी बेटी जोया भी जाग गई। इसके बाद आरोपी ने उस पर भी हमला कर दिया, मगर वह बचकर वहां से भागने लगी तो आरोपी ने उस पर बुगदा फेंककर मारा, जो जोया की जांघ पर जा लगा। मगर वह किसी तरह से बचकर घर से बाहर निकली और अपनी जान बचाई।

    पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस और फोरेंसिक विभाग की टीमों ने घटनास्थल पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाए। पुलिस की अब तक की शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी का शुक्रवार रात पत्नी और बेटियों से किसी बात को लेकर विवाद हुआ था। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर छानबीन‌शुरू कर दी है।

  • छत्तीसगढ़ में दूल्हा-दुल्हन की ‘अग्निपरीक्षा’, अंगारों पर 7 फेरे; जानें वजह..

    छत्तीसगढ़ में दूल्हा-दुल्हन की ‘अग्निपरीक्षा’, अंगारों पर 7 फेरे; जानें वजह..

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    रायगढ़. छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के भूपदेवपुर से एक ऐसी अनोखी परंपरा सामने आई है, जिसे देखकर आप भी हैरान रह जाएंगे. जहां आज के आधुनिक दौर में शादी की रस्में बदल रही हैं, वहीं भूपदेवपुर के बिलासपुर गांव में सदियों पुरानी एक ऐसी परंपरा आज भी निभाई जा रही है, जिसमें नई नवेली दुल्हन को अपने ससुराल में प्रवेश करने से पहले जलते हुए अंगारों पर चलना पड़ता है. यहां राठिया परिवार में बहू का गृह प्रवेश किसी साधारण रस्म से नहीं बल्कि अग्नि परीक्षा से होता है. हाल ही में जयप्रकाश राठिया की शादी बाड़ादरहा गांव में संपन्न हुई और जब बारात दुल्हन को लेकर बिलासपुर गांव पहुंची, तो पूरे गांव की नजरें उस खास पल पर टिक गईं, जब दूल्हा-दुल्हन को घर के आंगन में बिछाए गए जलते अंगारों पर 7 फेरे लेने थे.

    परंपरा के अनुसार, बहू के आगमन से पहले परिवार उपवास रखता है, यहां तक कि पानी की एक बूंद तक ग्रहण नहीं की जाती. गांव पहुंचने पर नवविवाहित जोड़े का पारंपरिक स्वागत किया गया, नए वस्त्र और आभूषण भेंट किए गए और फिर शुरू हुई सबसे रोमांचक रस्म. दूल्हे के पिता मेहत्तर राठिया पर कथित रूप से देवता का आह्वान हुआ. उन्होंने मंडप के बीच दहकते अंगार बिछाए और खुद उनपर नृत्य किया. इसके बाद दूल्हा और दुल्हन ने हाथों में हाथ डालकर उन्हीं जलते अंगारों पर 7 फेरे लिए.

    परंपरा को पूरी श्रद्धा से निभा रहे गंधेल गोत्र के परिवार
    हैरानी की बात यह रही कि आग की तपिश और दहकते कोयलों के बावजूद दोनों पूरी तरह सुरक्षित रहे. गांववालों के मुताबिक, यह परंपरा 100 वर्षों से भी अधिक पुरानी है और गंधेल गोत्र के परिवार आज भी इसे पूरी श्रद्धा से निभा रहे हैं. मान्यता है कि जो नवविवाहित जोड़ा इस अग्नि परीक्षा को पार कर लेता है, वो जीवन की हर कठिनाई को साथ मिलकर पार करने की शक्ति प्राप्त करता है. आस्था, परंपरा और विश्वास का यह अद्भुत संगम रायगढ़ के बिलासपुर गांव को एक अलग पहचान देता है.

  • पहले हत्या फिर गोवा की सैर… लाखों के लालच में 2 छात्रों ने कर दी प्रिंसिपल की हत्या; दिल दहला देने वाली घटना

    पहले हत्या फिर गोवा की सैर… लाखों के लालच में 2 छात्रों ने कर दी प्रिंसिपल की हत्या; दिल दहला देने वाली घटना

    पहले हत्या फिर गोवा की सैर... लाखों के लालच में 2 छात्रों ने कर दी प्रिंसिपल की हत्या; दिल दहला देने वाली घटना

    तेलंगाना के नालगोंडा जिले से मानवता शर्मसार करने वाला मामला सामने आया था, जहां पर एक स्कूल की प्रिसिंपल का शव उसके ही फ्लैट पर मिला था. इस घटना ने इलाके में सनसनी फैला दी थी. इस हत्या की गुत्थी को पुलिस ने सुलझा लिया है. पुलिस ने प्रकरण को सुलझाते हुए दो छात्रों को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि इन दोनों छात्रों ने ही कथित तौर पर पैसे और आलीशान जीवन शैली के लिए अपराध की योजना बनाई थी.

    दरअसल, कोंडमल्लेपल्ली स्थित नागार्जुन पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्या कल्लू रूपा रेड्डी की शव अपने घर में मिला था. पुलिस ने पाया कि उनके शरीर पर कम से कम 27 बारत चाकू से हमला किया गया था. घटना के वक्त उनके पति घर पर नहीं थे. जब उन्होंने कई बार अपनी पत्नी के फोन पर कॉल किया, तो जवाब नहीं मिला. इसके बाद उन्होंने पड़ोसियों को बताया, जिसके बाद घटना की जानकारी सामने आई.

    पड़ोसियों ने पुलिस को दी जानकारी

    पड़ोसियों ने पूरे घटना की जानकारी पुलिस को दी. पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया. पुलिस ने पाया कि मृतका के शरीर पर 27 बार चाकू से वार किया गया. मामले की जांच के लिए पांच टीमें बनाईं और सीसीटीवी फुटेज, फोरेंसिक साक्ष्य, फिंगरप्रिंट, टेक्नीकल डेटा और संदिग्धों की गतिविधियों की जांच की. इस दौरान 80 से अधिक लोगों से पूछताछ की गई.

    छात्रों ने क्यों कर दी अपने ही शिक्षक की हत्या

    मामले की जांच कर रहे अधिकारियों को सुराग तब मिला, जब उन्हें पता चला कि फोन बंद होने से पहले रूपा रेड्डी ने अपनी चाची से फोन पर बात करते समय ‘बाबू’ शब्द का इस्तेमाल किया था. बुधवार को सीनियर पुलिस अधिकारी शरथ चंद्र पवार ने बताया कि उसकी बातचीत के दौरान रिकॉर्ड किया गया आखिरी शब्द ‘बाबू’ था. हमने इस बात की जांच की कि वह किसका जिक्र कर रही थी और इससे हमें स्कूल के छात्रों की ओर संकेत मिला.

    कैसे हत्यारों तक पहुंची पुलिस?

    इसके बाद पुलिस ने छात्रों से व्यक्तिगत रूप से पूछताछ की और कक्षा 10 के उन पांच छात्रों पर फोकस किया, जो घटना वाले दिन स्कूल नहीं आए थे. पुलिस ने इस दौरान पाया कि इनमें से दो छात्र पिछले कुछ समय में खूब पार्टियां कर रहे थे और पैसे खर्च कर रहे थे.

    पवार ने कहा कि उन दोनों छात्रों को बुधवार को हिरासत में लिया गया. पूछताछ के दौरान छात्रों ने कबूल किया कि उन्होंने ही एक योजना के अनुसार रूपा रेड्डी की हत्या की थी.

    क्यों प्रधानाचार्य को उतारा मौत के घाट

    मामले की जांच कर रहे अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों को कुछ दिन पहले प्रिंसिपल ने फटकार लगाई थी, जब उनके छात्रावास के बैग से कुछ नकदी और मोबाइल फोन मिला था. इसके बाद प्रिंसिपल ने छात्रों के माता-पिता को सूचित किया और उन्हें हॉस्टल से निकाल दिया गया. पुलिस को संदेह है कि इससे प्रधानाचार्य के प्रति असंतोष पैदा हुआ है और छात्रों ने यह कदम उठाया.

    दस्ताने खरीद कर छिपाई पहचान

    छात्रावास ने निष्कासित होने के बाद छात्रों ने पांच दिनों तक चोरी की योजना बनाई. बाद में उन्होंने अपने प्रिंसिपल के घर की रेकी की. सबसे खास बात है इन छात्रों ने अपनी पहचान छिपाने के लिए दस्ताने खरीदे, जिससे पुलिस को जांच के दौरान साक्ष्य न मिल सके. जिस दिन हत्या हुई, उस दिन एक छात्र बंदर टोपी और दस्ताने पहने हुए घर में घुसा. छात्र ने शयनकक्ष में रखे 25 लाख रुपये देखा और लेकर भागने लगा.

    हालांकि, बंदर टोपी फिसल गई और रूपा रेड्डी ने उसे पहचान लिया. उसे डर था कि वह उन्हें पहचान लेगी,इसलिए उसने अपनी प्रिंसिपल पर चाकू से 27 बार वार किया. हत्या के बाद आरोपियों ने नकदी ली और खून से सने कपड़े और टोपी को दफनाकर सबूत को मिटाने की कोशिश की. कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया वह गोवा की यात्रा पर गए थे.

    पुलिस ने नकदी बरामद की

    गौरतलब है कि पुलिस ने आरोपियों से करीब 1.54 लाख रुपये नकदी बरामद की है, जिसमें खून के धब्बे लगे कुछ नोट, आरोपियों की ओर से खींचा गया आईफोन और रूपा रेड्डी का फोन शामिल है. आरोपियों को हिरासत में लेने के बाद पुलिस आगे की जांच में जुट गई है.

  • पत्नी को वापस पाने की चाह में नरबलि; पड़ोसी की हत्या कर शव का सिर पूजा घर में दफनाया,

    पत्नी को वापस पाने की चाह में नरबलि; पड़ोसी की हत्या कर शव का सिर पूजा घर में दफनाया,

    ओडिशा के बोलांगीर जिले से एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां पत्नी को वापस पाने की इच्छा एक व्यक्ति को कथित तौर पर जघन्य अपराध की ओर ले गई. पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि अपनी पत्नी से अलग रह रहे एक व्यक्ति ने पड़ोसी गांव के रहने वाले एक व्यक्ति की हत्या कर दी और उसका सिर काटकर अपने घर के पूजा कक्ष में दफना दिया. मामला तब उजागर हुआ जब कई दिनों से लापता व्यक्ति का सिर कटा शव एक तालाब से बरामद हुआ. जांच आगे बढ़ी तो पुलिस आरोपी तक पहुंच गई और पूछताछ में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए.

    तालाब से मिला सिर कटा शव

    बोलांगीर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अभिलाष ने कहा कि “आरोपी और मृतक एक-दूसरे को पहले से नहीं जानते थे. संतोष खरसेल से मुलाकात के बाद शत्रुघ्न साहू उसे अपने घर ले गया और उसकी हत्या कर दी.”

    पुलिस के मुताबिक, तेबादामुंडा गांव के रहने वाले 45 वर्षीय संतोष खरसेल 18 अगस्त से लापता थे. परिजन और स्थानीय लोग उनकी तलाश कर रहे थे, लेकिन उनका कोई पता नहीं चल रहा था.

    पिछले सप्ताह मामला उस समय गंभीर हो गया, जब बगड़ा गांव के एक तालाब से संतोष खरसेल का सिर कटा शव बरामद हुआ. शव मिलने की सूचना के बाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की.

    आखिरी बार आरोपी के साथ देखा गया था मृतक

    जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि संतोष खरसेल को आखिरी बार 40 वर्षीय शत्रुघ्न साहू के साथ देखा गया था. इसी आधार पर पुलिस ने साहू को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की. प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि शराब के नशे में हुई बहस के दौरान हत्या हुई थी. हालांकि पुलिस ने जब उससे विस्तृत पूछताछ की तो कहानी का दूसरा पहलू सामने आया.

    पत्नी को वापस पाने की थी चाह

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ में शत्रुघ्न साहू ने स्वीकार किया कि उसकी पत्नी करीब तीन साल पहले उसे छोड़कर चली गई थी. आरोप है कि वह पत्नी को वापस पाने के लिए तंत्र-मंत्र और अंधविश्वास से जुड़ी गतिविधियों में शामिल हो गया था. इसी क्रम में उसने संतोष खरसेल की हत्या की और उसका सिर काटकर अपने पूजा घर में दफना दिया. पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि आरोपी ने यह कदम किसी अंधविश्वासी सलाह या तांत्रिक प्रभाव में उठाया था या नहीं.

    पूजा रूम से बरामद हुआ सिर

    आरोपी के बयान के आधार पर पुलिस उसके घर पहुंची. तलाशी के दौरान घर के पूजा कक्ष में खुदाई की गई, जहां से मृतक का सिर बरामद कर लिया गया. इसके बाद पुलिस ने आरोपी को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया और हत्या में इस्तेमाल हथियार भी बरामद कर लिया.

    पुलिस ने कहा नरबलि एंगल सामने आया

    एसपी ने कहा, “हमने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और हत्या में इस्तेमाल किया गया हथियार भी बरामद कर लिया है.” उन्होंने आगे बताया, “शुरुआत में हमें संदेह था कि आरोपी ने पुलिस को गुमराह करने के लिए मृतक का सिर कहीं फेंक दिया होगा. लेकिन पूजा कक्ष से खुदाई कर सिर बरामद होने के बाद मानव बलि (नरबलि) की आशंका से जुड़ा पहलू सामने आया.”