कर्नाटक के रायचूर जिले में 21 वर्षीय युवती की हत्या से सनसनी फैल गई. सिरवार थाना क्षेत्र के होकराणी गांव में अश्विनी घर से बाहर निकली थी, लेकिन वापस नहीं लौटी. अगले दिन उसका शव गांव के पास एक कुएं से मिला. परिवार की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है. प्राथमिकी में चार लोगों के नाम सामने आए हैं. पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर घटना के पीछे की पूरी वजह और परिस्थितियों का पता लगाने में जुटी है.
शौच के लिए घर से निकली थी युवती
पुलिस को दी शिकायत के मुताबिक अश्विनी 19 अगस्त की शाम खेतों में काम करके माता-पिता के साथ घर लौटी थी. इसके कुछ देर बाद उसने पेट दर्द की बात कही और शौच के लिए एक बर्तन लेकर घर के पास सरकारी जमीन की ओर चली गई. काफी देर तक वापस नहीं आने पर उसकी मां तलाश में निकली. वहां अश्विनी की चप्पलें और पानी का बर्तन मिला, जिसके बाद परिवार की चिंता बढ़ गई.
कुएं में मिला नग्न अवस्था में शव
परिवार ने रातभर अश्विनी की तलाश की. 20 अगस्त की सुबह उन्हें गांव के पास एक कुएं में शव मिलने की सूचना मिली. परिजन मौके पर पहुंचे और शव की पहचान अश्विनी के रूप में की. पुलिस के अनुसार उसके चेहरे पर चोट के निशान थे. ऊपरी होंठ पर भी चोट थी और शरीर के अलग-अलग हिस्सों पर घाव पाए गए. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू की.
चार लोगों के नाम प्राथमिकी में
पीड़िता के पिता थिमारेड्डी की शिकायत के आधार पर सिरवार पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की. इसमें गुंड्या, महंतेश, वीरेश और करीब 45 वर्षीय मुंडार्गी बसवराज के नाम दर्ज हैं. चारों उसी गांव के रहने वाले बताए गए हैं. पुलिस ने चारों संदिग्धों को हिरासत में लिया है. अधिकारियों के मुताबिक, इनमें से एक संदिग्ध ने अपराध में शामिल होने की बात स्वीकार की है. उसे आगे अदालत में पेश किया जाएगा.
पुलिस खंगाल रही घटना की पूरी कड़ी
पुलिस अब अश्विनी की मौत से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है. अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ और अन्य साक्ष्यों के आधार पर घटना की पूरी कड़ी सामने लाने की कोशिश की जा रही है. अश्विनी ने BA की पढ़ाई पूरी की थी और घटना से करीब एक महीने पहले उसकी सगाई हुई थी. पुलिस यह भी पता लगा रही है कि वारदात के पीछे क्या कारण था और इसमें किसकी क्या भूमिका रही.
जयपुर में 27 वर्षीय महेश मीणा की मौत का मामला अब हत्या के शक में बदल गया है. परिवार को पत्नी कविता के बताए घटनाक्रम पर संदेह हुआ तो परिजनों ने आसपास के CCTV फुटेज खंगाले. फुटेज और कुछ कथित वीडियो सामने आने के बाद उन्होंने पत्नी समेत चार लोगों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई.
दवा लेने निकला था महेश
5 अगस्त को महेश पत्नी कविता के साथ बाइक से दवा लेने निकला था. शाम तक दोनों के वापस नहीं लौटने पर परिवार परेशान हो गया. बाद में कविता ने महेश की तबीयत बिगड़ने की जानकारी दी और परिवार को विश्वकर्मा इलाके की 14 नंबर पुलिया के पास बुलाया. वहां महेश सड़क किनारे बेसुध मिला. उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया. शुरुआत में मौत को सामान्य मानकर मर्ग दर्ज की गई थी.
पिता को कहानी पर हुआ शक
महेश के पिता बाबूलाल मीणा को पत्नी के बयान पर भरोसा नहीं हुआ. उन्होंने परिवार के साथ मिलकर घटनास्थल के आसपास लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग देखी. परिवार का दावा है कि फुटेज में कविता अकेली महेश को बाइक से लाती हुई नहीं दिखी. आरोप है कि दो अन्य बाइक पर तीन युवक भी उनके साथ थे. परिजनों ने इन लोगों की पहचान गणेश, अजय मीणा और गोलू प्रजापत के रूप में की है.
हरिद्वार जाने के बाद बढ़ा संदेह
महेश के अंतिम संस्कार के बाद परिवार ने कविता को भी अस्थियां विसर्जित करने के लिए हरिद्वार भेजा. इसी दौरान परिजन CCTV फुटेज जुटाते रहे. परिवार का आरोप है कि कविता के कथित रूप से गणेश के साथ लंबे समय से संबंध थे और इसी वजह से महेश को रास्ते से हटाने की साजिश रची गई. कुछ कथित वीडियो भी पुलिस को सौंपे गए हैं, जिनमें परिवार के मुताबिक कविता की बातचीत और प्रतिक्रिया रिकॉर्ड है.
पुलिस कर रही हर पहलू की जांच
महेश के पिता ने 16 अगस्त को विश्वकर्मा थाने में पत्नी कविता समेत चार लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया. पुलिस ने कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर जांच शुरू कर दी है. डीसीपी प्रशांत किरण के अनुसार, मामले में CCTV फुटेज सामने आने के बाद संदेह गहरा हुआ. अब पोस्टमार्टम और मेडिकल रिपोर्ट, कॉल डिटेल, CCTV तथा कथित वीडियो की सत्यता की जांच की जा रही है. आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी.
आंध्र प्रदेश के कडप्पा जिले से शादी और प्यार के नाम पर ठगी का हैरान करने वाला मामला सामने आया है. आरोप है कि एक महिला ने युवक को प्यार के जाल में फंसाया और शादी का भरोसा देकर उससे करीब 6 लाख रुपये ले लिए. शादी वाले दिन महिला ने अपना फोन बंद कर दिया और गायब हो गई. ठगी का पता चलने के बाद युवक ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई.
जानकारी के मुताबिक, वेमपल्ली मंडल के कथुलुरु गांव में रहने वाले एक युवक की मुलाकात कडप्पा की एक महिला से हुई थी. महिला ने युवक को भरोसा दिलाया कि वह उससे प्यार करती है और उसी से शादी करना चाहती है. युवक ने उसकी बात पर विश्वास कर लिया.
इसके बाद महिला ने अलग-अलग जरूरतों और बहानों से युवक से धीरे-धीरे करीब 6 लाख रुपये ले लिए. युवक को उस पर पूरा भरोसा था, इसलिए उसने शादी की तैयारियां शुरू कर दीं. दोनों ने साथ में शादी की खरीदारी भी की. इससे युवक और उसके परिवार को लगा कि शादी पूरी तरह तय है.
शादी की सुबह फोन हुआ बंद
शादी के दिन जब दुल्हन के आने और शादी की रस्मों की तैयारी चल रही थी, तभी महिला का फोन बंद आने लगा. युवक और उसके परिवार ने उससे संपर्क करने की काफी कोशिश की, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला. काफी देर तक महिला की कोई जानकारी नहीं मिलने पर युवक को शक हुआ कि उसके साथ धोखा हुआ है.
उसे समझ आया कि शादी का भरोसा देकर उससे पैसे लिए गए और अब महिला गायब हो गई है. इसके बाद युवक ने मामले की जानकारी पुलिस को दी.
पुलिस ने महिला को हिरासत में लिया
पीड़ित युवक कडप्पा पुलिस स्टेशन पहुंचा और पुलिस को पूरी घटना बताई. उसने महिला के खिलाफ लिखित शिकायत भी दी. शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी महिला को हिरासत में ले लिया.
पुलिस फिलहाल महिला से पूछताछ कर रही है. जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि ठगी के 6 लाख रुपये कहां हैं और क्या इस मामले में महिला के साथ कोई और व्यक्ति भी शामिल है.
मुंबई के साकीनाका पुलिस स्टेशन की टीम ने 1985 के हत्या मामले में करीब चार दशकों से फरार चल रहे 68 वर्षीय आरोपी सुरेश चंदन अडागले को गिरफ्तार कर लिया है. आरोपी के खिलाफ सत्र न्यायालय ने स्थायी वारंट जारी किया था और पुलिस उसकी तलाश में लंबे समय से जुटी थी.
पुलिस ने आरोपी की तलाश में उसके पुराने ठिकानों और उपलब्ध रिकॉर्ड को खंगाला. सबसे पहले मुंबई के बोरीवली इलाके में उसकी तलाश की गई, लेकिन वहां उसका कोई सुराग नहीं मिला. इसके बाद स्थानीय स्तर पर की गई पूछताछ से जानकारी मिली कि वह अहिल्यानगर जिले के श्रीगोंदा तालुका के सुरेगांव में मिल सकता है.
पुलिस टीम सुरेगांव पहुंची, लेकिन तब तक आरोपी अपना ठिकाना बदल चुका था. जांच और स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस को उसके पुणे जिले के शिरूर तालुका स्थित रांजणगांव इलाके में होने का पता चला.
इसके बाद साकीनाका पुलिस की टीम रांजणगांव पहुंची और स्थानीय पुलिस की मदद से आरोपी की तलाश शुरू की. संकल्प सिटी स्थित एक इमारत से आरोपी को हिरासत में लिया गया. पुलिस ने 20 अगस्त 2026 को उसे गिरफ्तार कर लिया.
पुलिस के मुताबिक, आरोपी 1985 में दर्ज हत्या के मामले के बाद से लगातार कानून की पकड़ से बाहर था. करीब 40 वर्षों तक अलग-अलग ठिकानों पर रहने के बाद आखिरकार पुराने रिकॉर्ड, स्थानीय पूछताछ और तकनीकी जांच की मदद से पुलिस उस तक पहुंचने में सफल रही. अब 1985 के इस पुराने हत्या मामले में आरोपी के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है.
दिल्ली के निहाल विहार एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत की कहानी सामने आई है. एक बच्चे को दवाई लगाने की बात से विवाद हुआ. फिर पति-पत्नी में झगड़ा हुआ. पत्नी घर से बाहर गई. करीब 10 मिनट बाद वापस लौटी, लेकिन इस बार अकेली नहीं थी. उसके साथ मायके के लोग थे. कुछ देर बाद पड़ोसी एक शख्स को कंधे पर उठाकर घर से बाहर निकलता दिखा. वो शख्स था 31 साल का सॉफ्टवेयर इंजीनियर विनय. अस्पताल पहुंचने के बाद उसकी मौत हो गई.
अब इस मामले में विनय की पत्नी रेखा, उसके दो भाइयों और एक भाभी को गिरफ्तार किया गया है. विनय के परिवार ने ससुराल वालों पर हत्या का आरोप लगाया है.
विनय की उम्र 31 साल थी. IT सेक्टर में नौकरी. परिवार के मुताबिक, करीब 60 लाख रुपये का पैकेज. करीब साढ़े 3 साल पहले बुध विहार की रहने वाली रेखा से शादी हुई थी. दोनों के जुड़वा बच्चे हैं- एक बेटा और एक बेटी. जिंदगी की तस्वीर बाहर से ठीक-ठाक दिखती थी. नौकरी अच्छी, शादी को कुछ ही साल हुए और घर में दो बच्चे.
लेकिन विनय के परिवार का दावा है कि शादी के बाद से ही घर में रिश्ते सहज नहीं थे. छोटी-छोटी बातों पर विवाद होता था. रेखा की अपनी सास से भी कहासुनी होती थी. परिवार का आरोप है कि रेखा के भाई की तरफ से विनय को धमकी तक दी जाती थी.
विनय की मां के मुताबिक, घर में बच्चे को दवाई लगाने की बात को लेकर विनय और रेखा के बीच विवाद हुआ. बात बढ़ी तो विनय ने कथित तौर पर ऊंची आवाज में बात कर दी. रेखा नाराज हुई और घर से बाहर चली गई. परिवार के मुताबिक, लगभग 10 मिनट बाद रेखा वापस आई. लेकिन उसके साथ सिर्फ उसका कोई एक रिश्तेदार नहीं था. उसके दो भाई, भाभी, पिता और एक अन्य शख्स समेत कई लोग उसके साथ थे. यानी पति-पत्नी के झगड़े में अब मायके के लोग भी घर पहुंच चुके थे.
इस मामले से जुड़ा एक सीसीटीवी भी सामने आया है, जिसमें रेखा लाल सूट में दिखाई दे रही है. उसके साथ उसकी भाभी नीले सूट में नजर आती है. कार के पास रेखा के दो भाई, पिता और एक अन्य व्यक्ति भी दिखाई देता है. इसके बाद क्या हुआ, इसकी पूरी तस्वीर पुलिस की जांच से सामने आएगी. लेकिन विनय के परिवार का आरोप है कि घर के अंदर ससुराल वालों ने उसके साथ मारपीट शुरू कर दी.
परिवार का कहना है कि विनय अपने ससुराल वालों के लिए पानी तक लेकर आया था. लेकिन इसके बाद उसके साथ मारपीट की गई. आरोप है कि विनय का गला दबाया गया. उसकी छाती पर हाथ और पैर से वार किए गए. विनय के माता-पिता वहीं मौजूद थे. परिवार का दावा है कि उन्होंने बेटे को बचाने की कोशिश की, लेकिन उसकी हालत बिगड़ती चली गई.
बाहर आया तो पैरों पर खड़ा नहीं हो पा रहा था विनय
कुछ देर बाद एक पड़ोसी विनय को कंधे पर उठाकर घर से बाहर आता दिखाई देता है. विनय अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो पा रहा था. पड़ोसी ने उसे कुर्सी पर बैठाया. इसके बाद विनय को अस्पताल ले जाया गया. लेकिन डॉक्टरों की कोशिश काम नहीं आई और विनय की मौत हो गई.
विनय का परिवार आरोप लगा रहा है कि दोनों परिवारों के बीच पहले से तनाव था. परिवार का कहना है कि रेखा अक्सर उसकी मां से झगड़ा करती थी. छोटे-छोटे विवादों पर भी उसके भाई की तरफ से विनय को धमकी देने का आरोप है. परिवार का ये भी दावा है कि विनय को घर की तीसरी मंजिल पर अलग जगह दी गई थी और रेखा अलग खाना बनाती थी. विनय के परिवार का यह भी आरोप है कि रेखा ने घर के CCTV कैमरे बंद कर दिए थे.
पुलिस ने इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया है. इनमें विनय की पत्नी रेखा, उसके दो भाई और एक भाभी शामिल हैं. अब जांच में CCTV फुटेज, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, घटनास्थल से मिले सबूत और आरोपियों के बयान अहम होंगे. सवाल है कि क्या ये सिर्फ एक घरेलू झगड़ा था, जो अचानक बेकाबू हो गया? या फिर इसके पीछे लंबे समय से चल रहा कोई विवाद था? फिलहाल चार लोग गिरफ्तार हैं. इस पूरे मामले की जांच जारी है.
पुणे में एक आध्यात्मिक इन्फ्लुएंसर पर युवती को ‘नेगेटिव एनर्जी’ का डर दिखाकर उसकी अश्लील तस्वीरें मांगने का आरोप लगा है. कोंढवा पुलिस ने इस मामले में 23 वर्षीय आरोपी दिव्य जितेंद्र परमार को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि उसने युवती से कहा कि उसके शरीर पर नकारात्मक ऊर्जा का असर है और इसे दूर करने के लिए एक खास तरह की ‘फिजिकल एक्टिविटी’ करनी होगी. इसी बहाने उसने युवती से अपने मोबाइल फोन पर नग्न तस्वीरें भेजने के लिए कहा था.
पुलिस के मुताबिक, आरोपी दिव्य जितेंद्र परमार पुणे के कोंढवा बुद्रुक इलाके की पार्श्वनगर सोसाइटी का रहने वाला है. वह खुद को एक आध्यात्मिक इन्फ्लुएंसर के तौर पर पेश करता था और लोगों के लिए ऐसे सत्र आयोजित करता था. जिनका दावा मानसिक शांति और जीवन के प्रति सकारात्मक नजरिया विकसित करने में मदद करना था. शिकायतकर्ता युवती भी उसके ऐसे सेशन में शामिल होती थी. इसी दौरान आरोपी ने कथित तौर पर युवती से व्यक्तिगत बातचीत शुरू की.
युवती की शिकायत के अनुसार, परमार ने उसे बताया कि उसके शरीर पर ‘नेगेटिव एनर्जी’ का असर है. उसने कथित तौर पर दावा किया कि इस नकारात्मक ऊर्जा को एक विशेष शारीरिक गतिविधि के जरिए दूर किया जा सकता है. इसके बाद आरोपी ने युवती से ऐसी तस्वीरें भेजने के लिए कहा, जिनमें वह बिना कपड़ों के हो. पुलिस के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया को कथित तौर पर एक तरह की आध्यात्मिक गतिविधि के रूप में पेश किया गया था.
शिकायत में युवती ने आरोप लगाया कि आरोपी ने उसे इस तरह डराया कि वह दबाव में आ गई और उसने अपने मोबाइल फोन से तस्वीरें भेज दीं. पुलिस ने शिकायत के आधार पर कोंढवा थाने में मामला दर्ज किया है. आरोपी के खिलाफ महिला की गरिमा भंग करने से संबंधित कानूनी धाराओं के साथ-साथ महाराष्ट्र काला जादू और उससे जुड़ी प्रथाओं से संबंधित कानून के तहत भी कार्रवाई की गई है. पुलिस ने आरोपी दिव्य जितेंद्र परमार को गिरफ्तार कर लिया.
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपी का मोबाइल फोन और लैपटॉप भी जब्त कर लिया है. इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच के जरिए पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी ने युवती से किस तरह संपर्क किया और क्या इस मामले से जुड़े अन्य डिजिटल सबूत मौजूद हैं.
आरोपी को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे आगे की जांच के लिए दो दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया. पुलिस मामले की जांच कर रही है और अन्य पहलुओं को भी खंगाला जा रहा है.
जयपाल/वाराणसी: वाराणसी के सिगरा थाना क्षेत्र के शिवपुरवा इलाके से गत 6 अगस्त से लापता ईशू कन्नौजिया की उसके ही तीन दोस्तों ने बेरहमी से हत्या कर दी. आरोपियों ने शव की पहचान छिपाने और बदबू दबाने के लिए यूट्यूब पर वीडियो देखकर शव को 5 टुकड़ों में काटा और प्लास्टिक के बोरे में भरकर गोबर के गड्ढे में फेंक दिया. पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी प्रदीप, उसके सगे भाई रामकृष्ण और उनके मित्र रोहित को गिरफ्तार कर लिया है.
जानिए हत्या की वजह गत 3 अगस्त को शराब पीने के दौरान ईशू ने आरोपी प्रदीप की पिटाई कर दी थी. इसी रंजिश का बदला लेने के लिए प्रदीप ने अपने भाई और दोस्त के साथ मिलकर हत्या की खौफनाक साजिश रची.
ऐसे दिया वारदात को अंजाम 7 अगस्त की रात तीनों ने ईशू को अधिक मात्रा में शराब पिलाई. इसके बाद रोहित और रामकृष्ण ने उसके हाथ पकड़े और प्रदीप ने चापड़ से वार कर उसका गला काट दिया. पहचान छिपाने के लिए सिर और धड़ अलग कर शव के 5 टुकड़े किए गए. 6 अगस्त से लापता ईशू की 17 अगस्त को परिजनों ने सिगरा थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई थी.
यूट्यूब से सीखा तरीका मुख्य आरोपी प्रदीप ने यूट्यूब पर वीडियो देखकर शव ठिकाने लगाने का तरीका सीखा था. पहचान छिपाने और बदबू दबाने के लिए तीनों ने शव को प्लास्टिक के बोरे में भरा और गोबर से ढके गड्ढे में फेंक दिया.
सीडीआर और सीसीटीवी से खुलासा लापता ईशू की कॉल डिटेल (CDR) निकालने पर अंतिम कॉल प्रदीप की पाई गई. पुलिसिया पूछताछ और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर प्रदीप ने अपना जुर्म कबूल कर लिया.
शव की बरामदगी शुक्रवार रात करीब 10 बजे पुलिस ने लहरतारा-छातडीह पोखरी के पास रेलवे के खंडहरनुमा क्वार्टर में बने गोबर के गड्ढे से सड़ चुका शव बरामद किया. बोरे में गोबर भरे होने और कई दिन बीत जाने के कारण शव काफी हद तक सड़ चुका था. शव को मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा स्थित मोर्चरी में रखवाया गया, सिगरा पुलिस अग्रिम कार्रवाई में जुटी है.
क्या कहती है पुलिस.. वैभव बांगर, ADCP, काशी जोन ने बताया कि ये सारे एक साथ शराब का सेवन कर रहे थे. प्रदीप और ईशू के बीच कहासुनी हो गई और किसी धारदार हत्या से हमला किया. पुलिस ने बताया कि शव को बरामद कर लिया गया है.तीनों ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है. पुलिस ने बताया कि ईशू के दोस्तों ने हत्या के बाद बड़े ही सफाई से शव को ठिकाने लगाया. ऐसी जगह चुनी जहां किसी को शंका तक न हो सके। गोबर के गड्ढे में शव को प्लास्टिक के बोरे में भरकर फेंका गया ताकि आसपास के लोगों को दुर्गंध न महसूस हो सके. रेलवे के पास शव को दफन कर दिया.
बेंगलुरु में 29 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर के साथ लाखों रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। उसने आरोप लगाया कि स्वघोषित आयुर्वेदिक हीलर ने उसे सेक्सुअल समस्याओं के इलाज के नाम पर महंगी और हानिकारक हर्बल प्रोडक्ट्स बेचे। इसके लिए उसे 48 लाख रुपये चुकाने पड़े। शिकायतकर्ता ने बताया कि इन दवाओं के सेवन से उसकी तबीयत बिगड़ गई और किडनी में समस्या आने लगी। पीड़ित ज्ञानभारती इलाके में रहता है और शिवमोग्गा जिले का मूल निवासी है। वह पिछले तीन वर्षों से एक निजी फर्म में नौकरी कर रहा है। उसने ज्ञानभारती पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, मार्च में उसकी शादी हुई। पति-पत्नी पहले बसवेश्वरनगर में रहते थे। शादी के शुरुआती महीनों में उसे सेक्सुअल समस्याएं होने लगीं। वह केंगरी में मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में इलाज के लिए गया, जहां डॉक्टरों ने टेस्ट कराए और कुछ दवाएं लिखीं। इस साल मई को अस्पताल जाते समय उसने उल्लाल में लॉ कॉलेज के पास सड़क किनारे आयुर्वेदिक तंबू देखा। यहां लगे पोस्टर पर सेक्सुअल समस्याओं के तुरंत समाधान का दावा किया गया था। वह टेंट के अंदर चला गया, जहां उसे एक व्यक्ति मिला। पीड़ित ने अपनी समस्याएं उसे बताईं। उस शख्स ने कहा कि ‘विजय गुरुजी’ इसका तेजी से इलाज कर सकते हैं। उसने विजय से मिलने की व्यवस्था करने का वादा किया।
सड़क किनारे टेंट पर पड़ी नजर
रिपोर्ट के मुताबिक, उसी शाम एक व्यक्ति टेंट में आया और उसने खुद को विजय गुरुजी बताया। पीड़ित की जांच करने के बाद विजय ने कहा कि एक दुर्लभ दवा देवराज बूटि उसकी समस्या का इलाज कर देगी। उसने इसे यशवंतपुर में विजयलक्ष्मी आयुर्वेदिक मेडिसिन शॉप से खरीदने को कहा। उसने कहा कि यह दवा केवल उसी दुकान पर उपलब्ध है और वह इसे उत्तराखंड के हरिद्वार से लाता है। उसने कहा कि देवराज बूटि का एक ग्राम 1.6 लाख रुपये का है। उसने कहा कि दवा केवल नकद भुगतान से खरीदी जानी चाहिए। उसने सुझाव दिया कि पीड़ित अकेले जाए, क्योंकि दावा करते हुए कि अगर कोई साथ जाए तो उसकी शक्ति नष्ट हो जाएगी।
माता-पिता से उधार लिए पैसे
पीड़ित ने घर से नकद पैसे लिए और आयुर्वेदिक दुकान पर चला गया। वह दवा लेकर विजय के पास लौटा। स्वघोषित आयुर्वेदिक हीलर ने बताया कि देवराज बूटि का इस्तेमाल कैसे करना है और उसे खास तरह का तेल भी दिया। इस तेल की कीमत 76,000 रुपये प्रति ग्राम थी और 15 ग्राम तेल खरीदने को कहा। उसने हर हफ्ते अपनी पत्नी और माता-पिता से पैसे उधार लिए और कुल 17 लाख रुपये का भुगतान 15 ग्राम तेल और अन्य प्रोडक्ट्स के लिए किया।
मेडिकल जांच की रिपोर्ट से हैरान
विजय ने बाद में उसे अतिरिक्त 3 ग्राम देवराज बूटि’ खरीदने के लिए दबाव डाला। प्रत्येक ग्राम के लिए 1.6 लाख रुपये देने को कहा। पीड़ित ने बैंक से 20 लाख रुपये का लोन लिया और कुल 18 ग्राम देवराज बूटि खरीदी। बाद में उसे देवराज रसाबूटि नामक एक अन्य दवा खरीदने के लिए मनाया गया, जिसकी कीमत 2.6 लाख रुपये प्रति ग्राम थी। इसके लिए उसने दोस्त से 10 लाख रुपये उधार लिए और चार ग्राम देवराज रसाबूटि खरीदी। इस तरह पीड़ित ने विजयलक्ष्मी आयुर्वेदिक मेडिसिन शॉप से कुल 48 लाख रुपये देकर सभी दवाएं खरीदीं। सभी दवाओं का उपयोग करने के बावजूद कोई सुधार नहीं हुआ। जब पीड़ित ने मेडिकल जांच कराई तो ब्लड टेस्ट के नतीजे से किडनी में समस्याएं दिखीं। अब शिकायतकर्ता का आरोप है कि विजय गुरुजी की हर्बल दवाओं के सेवन से उसकी सेहत बिगड़ी। उसने विजय, दवा दुकान मालिक और उस टेंट वाले के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जिसने उसे विजय से मिलवाया था।
दुनिया में शायद ही कोई व्यक्ति होगा, जिसे जेल में रहना पसंद होगा. लेकिन एक व्यक्ति ऐसा है, जो दुनिया में सबसे लंबे वक्त से जेल में बंद आरोपी है. वह आरोपी हत्या के आरोप में 45 साल गुजार चुका है. उसे अब सरकार रिहा करना चाहती है लेकिन वह बाहर नहीं आना चाहता. वह सरकार से गुजारिश कर रहा है कि उसे बाहर न निकाला जाए, वरना वह फिर से मर्डर कर सकता है. अब उसकी अजीब गुजारिश के बाद सरकार असमंजस में है. उसे समझ नहीं आ रहा है कि वह क्या करे. वह उस अपराधी को रिहा करने पर विचार करे या जेल में ही सड़ता रहने दे.
ब्रिटेन में सबसे लंबे वक्त से बंद कैदी
डेली मिरर यूके की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया में सबसे लंबे वक्त से कैद इस अपराधी का नाम रोबर्ट जॉन मॉड्सले (Robert Maudsley) है. वह एक ऐसा कैदी है, जिसके खौफ से आज भी ब्रिटेन वासी कांपते हैं. उसके बारे में कहा जाता था कि वह लोगों की हत्या करने के बाद उनका दिमाग खा जाता था. पुलिस की जांच में ऐसे दावे गलत साबित हुए, लेकिन इससे लोगों में उसके प्रति डर कम नहीं हुआ. ब्रिटिश मीडिया ने इन अफवाहों की वजह से उसे हैनिबल द कैनिबल यानी दिमाग खाने वाला दानव नाम दिया था.
करीब 5 दशक पहले पुलिस ने उसे जब पकड़ा तो उसके खौफ की वजह से उसे जेल के एकांतवास में डाल दिया. उसके लिए जेल के बेसमेंट में विशेष रूप से कांच का बुलेटप्रूफ कमरा बनाया गया, जहां पर वो दिन के 23 घंटे बिल्कुल अकेले गुजारते था और महज 1 घंटे के लिए उसे खुले में लाया जाता था.
नारकीय बचपन से कातिल बनने का सफर
रिपोर्ट के मुताबिक, रोबर्ट मॉड्सले का जन्म 1953 में लिवरपूल में हुआ था. उसके शुरुआती दिन अनाथालय और पिता के खौफनाक उत्पीड़न के बीच बीते. उसके पिता हफ़्तों तक अंधेरे कमरे में बंद रखकर बेरहमी से पीटता था. बचपन की इन्हीं कड़वी यादों ने आगे चलकर उनके अंदर विकृत और हिंसक प्रवृत्ति को जन्म दिया. जवान होते ही वो नशे और अनैतिक गतिविधियों में शामिल हो गया. वर्ष 1974 में, 21 साल की उम्र में उसने पहली हत्या की. उसने एक ऐसे व्यक्ति को जान से मार डाला, जिसने उन्हें बच्चों के यौन शोषण की तस्वीरें दिखाई थीं. हत्या के बाद रोबर्ट ने खुद पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया और कहा कि उसे मानसिक इलाज की ज़रूरत है.
रोबर्ट को इलाज के लिए मानसिक चिकित्सालय ब्रोडमूर हॉस्पिटल भेजा गया. Broadmoor Hospital) भेजा गया, लेकिन असली तबाही तो अभी शुरू होनी बाकी थी. वहां पर वर्ष 1977 में रोबर्ट ने एक अन्य कैदी डेविज फ्रांसिस के साथ मिलकर बच्चों का यौन शोषण करने वाले एक आरोपी की हत्या कर दी. उसे इतनी बेरहमी से मारा गया कि पुलिस समेत सब लोग सहम कर रह गए.
जेल पहुंचने पर एक ही दिन में 2 कत्ल
इन दो हत्याओं के बाद लोगों में रोबर्ट मॉड्सले को लेकर खौफ बैठ गया. पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर हाई सिक्योरिटी वाली वेकफील्ड जेल जेल में भेजा. वहां पर उसने एक ही दिन में 2 कैदियों को मौत के घाट उतार दिया. उनमें से एक अपनी पत्नी की हत्या करके जेल पहुंचा था, जबकि दूसरा आरोपी एक मासूम बच्ची का उत्पीड़न करने वाला दरिंदा था.
जब जेल के गार्डों ने उसे काबू करके हत्याओं की वजह पूछी तो रोबर्ट ने कहा कि वह केवल उन्हीं लोगों को मारता है, जो बच्चों या महिलाओं के खिलाफ घिनौने अपराध करता है. वे ऐसे शैतानों को जिंदा नहीं छोड़ सकता. ऐसा करके वो लोगों को न्याय देने वाला स्वयंभू सरकार मानने लगा था.
कांच के बने स्पेशल सेल में पिछले 5 दशक से बंद
चार-चार हत्याओं के बाद ब्रिटिश जेल प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए. उन्हें लगा कि रोबर्ट को सामान्य कैदियों या सुरक्षा गार्डों के पास रखना भी खतरे से खाली नहीं है. इसके बाद 1983 में वेकफील्ड जेल में उनके लिए एक विशेष व्यवस्था की गई. उसके लिए बेसमेंट तैयार करवाकर वहां पर 5×4 मीटर का एक ऐसा कमरा तैयार किया गया. जिसकी दीवारें बुलेटप्रूफ कांच की थीं.
कमरे में कंक्रीट का एक बेड, टेबल और टॉयलेट बना था. खाना देने के लिए दरवाजे में एक छोटा सा छेद बनाया गया था. जब भी रोबर्ट को कमरे से बाहर निकाला जाता, तो कम से कम 5 से 6 सुरक्षा गार्ड कड़े सुरक्षा कवच और ढालों के साथ उन्हें घेरकर रखते थे. एक घंटे तक बाहर रखने के बाद उन्हें फिर से कांच के बने उस कमरे में ठूंस दिया जाता था.
‘ऐसा लगता है कि मुझे ज़िंदा दफना दिया गया’
ब्रिटिश इतिहास में रोबर्ट मॉड्सले सबसे लंबे समय तक एकांत कारावास झेलने वाले कैदी हैं. इस कैद ने रोबर्ट को अंदर तक तोड़ दिया. उसके कई रिपोर्ट्स और इंटरव्यू सामने आए, जिसमें उसने अकेलेपन से जुड़ी पीड़ा जाहिर की. उसने कहा, ‘मुझे ऐसा लगता है कि मुझे ज़िंदा दफना दिया गया है. मैं बस किसी इंसान से बात करना चाहता हूं, पक्षियों की चहचहाहट सुनना चाहता हूं.’
कोर्ट को भेजी याचिका में रोबर्ट ने लिखा, ‘मुझे टीवी, रेडियो या कम से कम एक छोटा सा तोता पालने की इजाज़त दी जाए ताकि उनका अकेलापन दूर हो सके. यदि मुझे यह सुविधा नहीं दी जा सकती, तो साइनाइड की गोली देकर हमेशा के लिए सुला दिया जाए.’
‘मुझे जेल से कभी रिहा न किया जाए’
जेल में दशकों तक एकांत कारावास में रहने के दौरान अच्छे व्यवहार की वजह से प्रशासन ने उन्हें टीवी, रेडियो जैसी कुछ बुनियादी चीजें मुहैया करवाईं. हालांकि, जेल अधिकारियों के साथ तलाशी को लेकर हुए विवाद के बाद यह सुविधाएं बंद कर दी गई. इसके विरोध में रोबर्ट ने भूख हड़ताल शुरू की, जिस पर प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अप्रैल 2025 में वेकफील्ड से ‘एचएमपी व्हिटमूर’ नामक कैटगरी-ए जेल में शिफ्ट कर दिया गया. तब से रोबर्ट उसी जेल में बंद हैं.
अब रोबर्ट इसी जिंदगी को अपनी नियति मान चुके हैं. अपने वकीलों के जरिए दिए पत्र में रोबर्ट मॉड्सले (Robert Maudsley) ने खुद को जेल से रिहा न करने की मांग की है. रोबर्ट का कहना है कि अगर उन्हें सामान्य कैदियों के साथ रखा गया या रिहा कर समाज में जाने दिया गया, तो वे फिर से हत्या कर सकते हैं. उसके मुताबिक, ‘जब मेरा सामना बच्चों या महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वाले अपराधियों से होता है तो मैं खुद पर काबू नहीं रख पाता हूं. ऐसी स्थिति में मैं हिंसक हो जाता हूं, जिसका अंजाम कुछ भी हो सकता है.’
‘अकेलापन असहनीय हो जाए तो मुझे मार देना’
अपनी मानसिक स्थिति को भांपते हुए मॉड्सले ने न केवल अपनी रिहाई की अर्जी देने से इनकार किया, बल्कि बची जिंदगी में भी कांच से बने बुलेटप्रूफ कमरे में कैद रहने की इच्छा जताई. उसका मानना है कि वे बाहर की दुनिया के साथ-साथ जेल के भीतर भी अन्य लोगों के लिए एक निरंतर खतरा हैं. खुद को समाज और सामान्य दुनिया के लिए अनुपयुक्त मानते हुए उसने कहा कि अगर उसके अकेलेपन का दर्द असहनीय हो जाए, तो जेल से आजाद करने के बजाय साइनाइड की गोली देकर उनका जीवन समाप्त कर दी जाए.
रोबर्ट मॉड्सले की इस कहानी पर ब्रिटिश समाज दो हिस्सों में बंटा हुआ है. एक हिस्सा रोबर्ट को हीरो मानता है, जिसने महिलाओं-बच्चों पर अत्याचार करने वाले दरिंदों को मारकर सही काम किया. वहीं, दूसरा वर्ग उन्हें खतरनाक अपराधी मानता है, जो हिंसक होने पर किसी भी जान ले सकता है. इन सब चर्चाओं से परे रोबर्ट जेल के तहखाने में बने उस कांच के बंद कमरे में बिना किसी उम्मीद के अपनी बची जिंदगी को गुजार रहा है.
एक वक्त था जब नेहा पच्चीसिया आसमान में उड़ान भरती थीं. नौकरी थी एयर होस्टेस की. फिर उन्होंने MPPSC का एग्जाम दिया, पुलिस सेवा में आईं और खाकी वर्दी पहन ली. लेकिन अब कहानी का सीन पूरी तरह बदल गया है. मध्य प्रदेश के कटनी में पदस्थ CSP नेहा पच्चीसिया के खिलाफ पुलिस ने FIR दर्ज की है. आरोप जमीन के एक सौदे में दबाव बनाने, धोखाधड़ी और आपराधिक सांठगांठ से जुड़े हैं. उनके साथ दो और लोगों के खिलाफ भी केस दर्ज हुआ है.
ये FIR कटनी के कुठला थाने में नेहा पच्चीसिया समेत तीन लोगों के खिलाफ दर्ज की गई है. यह कार्रवाई विभागीय जांच के बाद पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर हुई. कटनी SP अभिनय विश्वकर्मा ने FIR दर्ज होने की पुष्टि की है. यह कार्रवाई अचानक नहीं हुई. इसके पीछे शिकायतों, विभागीय जांच और एक हत्या के केस से जुड़ी जमीन की पूरी कहानी है. एयर होस्टेस से DSP बनीं नेहा पच्चीसिया की कहानी FIR तक कैसे पहुंची? नेहा पच्चीसिया ने अपने करियर की शुरुआत पुलिस से नहीं की थी.
नेहा पहले एयर होस्टेस थीं. लेकिन बाद में उन्होंने सरकारी नौकरी की तैयारी का फैसला किया. MPPSC की परीक्षा पास की और पुलिस सेवा में आ गईं. साल 2016 में उन्होंने MPPSC में 20वीं रैंक हासिल की. इसके बाद उनका सफर पुलिस विभाग में आगे बढ़ता गया.
यानी एक तरफ एविएशन की ग्लैमर वाली नौकरी से खाकी वर्दी तक का सफर था. लेकिन साल 2026 आते-आते उनके नाम के साथ विवादों की खबरें जुड़ने लगीं. जुलाई में एक ट्रांसपोर्ट व्यवसायी ने नेहा पच्चीसिया पर अवैध वसूली का आरोप लगाया.
शिकायत के बाद कटनी पुलिस ने कार्रवाई की. उनके ड्राइवर केशव सिंह को सस्पेंड कर दिया गया. नेहा पच्चीसिया से तीन थानों का प्रभार भी वापस ले लिया गया. मामले की जांच एक अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को दी गई. अब तक कहानी एक शिकायत और विभागीय कार्रवाई तक थी. लेकिन इसके बाद एक दूसरा मामला सामने आया.
एक युवक की हत्या के मामले में आकाश लोधी नाम के शख्स को गिरफ्तार किया गया था. बाद में उसे डिफॉल्ट बेल मिल गई. आरोप लगा कि हत्या के मामले में समय सीमा के भीतर चालान पेश नहीं किया गया था. जेल से बाहर आने के बाद आकाश लोधी ने एक और गंभीर आरोप लगाया. उसका कहना था कि गिरफ्तारी के बाद उसकी जमीन को लेकर उसके परिवार पर दबाव बनाया गया. और यहीं से कहानी पुलिस की कार्रवाई से निकलकर जमीन के सौदे तक पहुंचती है.
82 लाख की जमीन, रजिस्ट्री 18 लाख में?
मामला कटनी के कुठला थाना क्षेत्र के कन्हवारा गांव की जमीन से जुड़ा है. शिकायत और विभागीय जांच में सामने आए तथ्यों के मुताबिक, जमीन की सरकारी गाइडलाइन कीमत करीब 82 लाख 86 हजार रुपये थी. लेकिन आरोप है कि इसकी रजिस्ट्री सिर्फ 18 लाख 20 हजार रुपये में कराई गई. कागजों में करीब 15 लाख रुपये चेक से और 3.20 लाख रुपये नकद भुगतान दिखाया गया. अब यहां एक और रकम सामने आती है.
शिकायतकर्ता आकाश लोधी का दावा है कि जमीन का सौदा करीब 1 करोड़ 7 लाख रुपये में हुआ था. लेकिन रजिस्ट्री के वक्त उसे सिर्फ 15 लाख रुपये का चेक दिया गया और बाकी रकम सात दिन में देने की बात कही गई. लेकिन जब बाकी पैसा नहीं मिला तो परिवार ने शिकायत की.
आकाश लोधी का आरोप है कि उसके पिता रमेश लोधी को CSP नेहा पच्चीसिया के घर दो दिन तक बैठाकर रखा गया. इसके बाद सरकारी वाहन से उन्हें जमीन की रजिस्ट्री कराने के लिए ले जाया गया. परिवार का आरोप है कि पुलिसिया दबाव की वजह से जमीन का सौदा कराया गया. लेकिन जांच में पैसों का एक लेनदेन सामने आया, जिसने इस कहानी को और पेचीदा बना दिया.
जांच के मुताबिक, जमीन के खरीदार मारूफ अहमद हनफी के खाते में 15 लाख रुपये क्षितिज राज के अकाउंट से ट्रांसफर किए गए. शिकायत में क्षितिज राज को नेहा पच्चीसिया का कथित पार्टनर बताया गया है. यानी जमीन का खरीदार अलग, पैसा भेजने वाला अलग और आरोपों के केंद्र में पुलिस अधिकारी अलग. जांच करने वालों के सामने सवाल था- जमीन के इस सौदे में पैसा आखिर किसका था और किसके कहने पर ट्रांसफर हुआ?
रमेश लोधी ने पैसे नहीं मिलने पर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत की. जमीन के नामांतरण पर भी आपत्ति दर्ज कराई. इसके बाद शिकायतों का दायरा बढ़ा और मामले की जांच जबलपुर रेंज के IG के निर्देश पर IPS अनु बेनीवाल को सौंपी गई. जांच में जमीन के सौदे, पैसों के लेनदेन और दबाव बनाने के आरोपों को देखा गया. इसके साथ ही नेहा पच्चीसिया से जुड़े दूसरे मामलों की भी जांच चल रही थी.
अब 22 अगस्त से पहले की कार्रवाई में कहानी यहां पहुंची कि कटनी के कुठला थाने में नेहा पच्चीसिया समेत तीन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर दी गई. नेहा पच्चीसिया के अलावा क्षितिज राज और मारूफ अहमद हनफी को भी आरोपी बनाया गया है. कटनी SP अभिनय विश्वकर्मा ने FIR दर्ज होने की पुष्टि की है.