Category: Gazab

  • 150 से ज्यादा ‘बॉयफ्रेंड’ नहीं, ब्लैकमेलिंग का था खेल! खूबसूरती के जाल में फंसाती, वीडियो बनाती और फिर केस की धमकी देकर वसूलती थी लाखों..​​​​​​

    150 से ज्यादा ‘बॉयफ्रेंड’ नहीं, ब्लैकमेलिंग का था खेल! खूबसूरती के जाल में फंसाती, वीडियो बनाती और फिर केस की धमकी देकर वसूलती थी लाखों..​​​​​​

    गोरखपुर में एक लड़की की गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर उसके बारे में कई तरह की बातें सामने आने लगीं। कोई उसे ‘लेडी डॉन’ कह रहा था तो कोई दावा कर रहा था कि उसके 150 से ज्यादा बॉयफ्रेंड थे। लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, कहानी कुछ और ही सामने आती दिखी।

    आरोप है कि लड़की लोगों से दोस्ती करती, उन्हें अपने भरोसे में लेती और फिर वीडियो कॉल के दौरान उनकी निजी रिकॉर्डिंग कर लेती थी। इसके बाद शुरू होता था धमकी और पैसों की मांग का सिलसिला। सामने वाले को डराया जाता कि अगर उसने रकम नहीं दी तो उसके खिलाफ दुष्कर्म या पॉक्सो एक्ट जैसे गंभीर मामलों में शिकायत कर दी जाएगी।

    बताया जा रहा है कि लड़की मूल रूप से गोरखपुर के हरपुर बुदहट थाना क्षेत्र की रहने वाली है। परिवार से विवाद के बाद उसने संतकबीर नगर के खलीलाबाद में किराये का मकान ले लिया था। यहीं से उसने सोशल मीडिया के जरिए लोगों से संपर्क बढ़ाना शुरू किया।

    शुरुआत में बातचीत सामान्य होती थी। सामने वाले को लगता था कि वह एक युवती से दोस्ती कर रहा है। धीरे-धीरे बातचीत निजी होने लगती और फिर वीडियो कॉल तक पहुंच जाती। आरोप है कि इसी दौरान निजी पलों की रिकॉर्डिंग कर ली जाती थी। बाद में उसी वीडियो को दिखाकर पैसे मांगे जाते।

    पुलिस जांच में करीब 150 लोगों को निशाना बनाए जाने की बात सामने आई है। इनमें आम लोगों के साथ कुछ पुलिसकर्मियों के नाम भी बताए जा रहे हैं। अयोध्या में तैनात एक सीओ समेत करीब 15 पुलिसकर्मियों को भी कथित तौर पर इस जाल में फंसाने का दावा किया गया है।

    यह सिलसिला वर्ष 2021 के आसपास शुरू होने की बात कही जा रही है। पहला मामला देवरिया के एक युवक से जुड़ा बताया गया है। आरोप है कि उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के बाद समझौते के नाम पर रकम ली गई। इसके बाद इसी तरीके से दूसरे लोगों को भी डराकर पैसे वसूलने का आरोप है।

    हर मामले में तरीका लगभग एक जैसा बताया जा रहा है। पहले सोशल मीडिया पर संपर्क, फिर दोस्ती और भरोसा, उसके बाद वीडियो कॉल और अंत में मुकदमे में फंसाने की धमकी।

    खलीलाबाद में रहने के दौरान भी लड़की का विवादों से नाता जुड़ा रहा। मकान मालिक ने देर रात युवकों के आने-जाने पर आपत्ति जताई थी। आरोप है कि मकान खाली करने के बदले उससे दो लाख रुपये लिए गए।

    इसी दौरान सूरज सिंह समेत पांच लोगों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कराने की बात सामने आई। आरोप है कि बाद में समझौते के नाम पर उनसे पैसे मांगे गए। खलीलाबाद के ही प्रियांशु सिंह से भी फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी देकर 50 हजार रुपये लेने का आरोप लगाया गया है।

    सोशल मीडिया पर भले ही इसे 150 बॉयफ्रेंड की कहानी बताया जा रहा हो, लेकिन जांच में इसे प्रेम संबंधों के बजाय कथित ब्लैकमेलिंग नेटवर्क के रूप में देखा जा रहा है। आरोप है कि लड़की ने कई लोगों से संपर्क बनाए, लेकिन उसका मकसद रिश्ते बनाना नहीं, बल्कि निजी जानकारी और वीडियो के जरिए उन्हें डराकर पैसे वसूलना था।

    गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब उसके मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट, चैट और बैंक खातों की जांच कर रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि वह इस काम में अकेली थी या उसके साथ कोई और भी शामिल था।

    अगर जांच में आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला सिर्फ एक लड़की की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सोशल मीडिया के जरिए चलाए जा रहे एक बड़े हनीट्रैप और सेक्सटॉर्शन नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।

    इस मामले ने यह भी दिखाया है कि सोशल मीडिया पर शुरू हुई दोस्ती कितनी जल्दी खतरे में बदल सकती है। निजी बातचीत और वीडियो साझा करने से पहले सावधानी न बरतने पर लोग ब्लैकमेलिंग का शिकार हो सकते हैं। हालांकि, लगाए गए सभी आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

  • खुदाई में मिली 200 साल पुरानी शराब फैक्ट्री, पहाड़ों की गहराई में होता था धंधा..

    खुदाई में मिली 200 साल पुरानी शराब फैक्ट्री, पहाड़ों की गहराई में होता था धंधा..

    Featured Image

    स्कॉटलैंड की दुर्गम पहाड़ियों और गहरे नालों के बीच पुरातत्वविदों ने एक ऐसा राज खोज निकाला है, जो पिछले 200 सालों से दुनिया की नजरों से ओझल था. पर्थशायर के ‘बेन लॉयर्स नेशनल नेचर रिजर्व’ में खुदाई के दौरान एक अवैध व्हिस्की डिस्टिलरी (शराब बनाने का कारखाना) के अवशेष मिले हैं. यह खोज उस दौर की याद दिलाती है, जब टैक्स से बचने के लिए लोग गुपचुप तरीके से पहाड़ों के बीच व्हिस्की तैयार किया करते थे. इस सीक्रेट जगह से तांबे के स्टिल का एक हिस्सा, पत्थर की संरचनाएं और लकड़ी के खंभे बरामद हुए हैं. जानकारों का मानना है कि यह एक बोथी (Bothy) यानी एक छोटा सा झोंपड़ा था, जिसे विशेष रूप से शराब बनाने के उपकरणों को छिपाने के लिए बनाया गया था.

    बता दें कि 1788 के एक्साइज एक्ट के बाद जब छोटे घरेलू उपकरणों पर प्रतिबंध लगा दिया गया, तब 18वीं और 19वीं शताब्दी के दौरान स्कॉटलैंड में अवैध व्हिस्की का व्यापार चरम पर था. नेशनल ट्रस्ट फॉर स्कॉटलैंड (NTS) के पुरातत्वविदों के अनुसार, इस कारखाने को बहुत ही चालाकी से ‘लॉयर्स बर्न’ नामक झरने के पास एक संकरे नाले में बनाया गया था. जगह का चुनाव इस तरह किया गया था कि झरने का मोड़ इसे ऊपर और नीचे दोनों तरफ से पूरी तरह ढंक लेता था. खुदाई में पत्थर के फर्श के नीचे एक नाली, एक चूल्हा और छत को सहारा देने वाला लकड़ी का खंभा मिला है. सबसे रोमांचक खोज तांबे के मिश्र धातु का वह टुकड़ा है, जो शराब बनाने वाली मशीन के दो हिस्सों को जोड़ने के काम आता था.

    जल्दबाजी में छूटा सबूत: तस्करों और अधिकारियों के बीच चूहे-बिल्ली का खेल
    पुरातत्व प्रमुख डेरेक अलेक्जेंडर का कहना है कि यह खोज शराब तस्करों और आबकारी अधिकारियों के बीच चलने वाले दिमागी युद्ध की गवाह है. अगर अधिकारियों ने इस ठिकाने पर छापा मारा होता, तो वे पूरे उपकरण को नष्ट कर देते. लेकिन वहां तांबे का हिस्सा मिलना यह संकेत देता है कि तस्करों को अधिकारियों के आने की भनक लग गई थी और वे जल्दबाजी में अपना सामान समेटकर भाग निकले. अफरा-तफरी में वे मशीन का यह छोटा सा हिस्सा वहीं भूल गए, जो आज 200 साल बाद इतिहास की गवाही दे रहा है. उस दौर में पहाड़ियों में अवैध व्हिस्की बनाना केवल एक व्यापार नहीं, बल्कि सरकारी कानूनों के खिलाफ ‘सामुदायिक प्रतिरोध’ का एक तरीका माना जाता था. तस्कर बहुत कम सामान के साथ यात्रा करते थे ताकि पकड़े जाने पर कोई सबूत न मिले, इसलिए ऐसे अवशेषों का मिलना बेहद दुर्लभ है.

    स्कॉटलैंड के अन्य हिस्सों में भी दबे मिले हैं ऐसे ही राज
    यह पहली बार नहीं है जब स्कॉटलैंड की धरती ने अपने नशीले इतिहास को उगला हो. इससे पहले 2008 में ग्लेन एफ्रिक में वानिकी कर्मचारियों को एक छोटी इमारत की नींव मिली थी, जिसे बाद में राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित किया गया. वहीं 2019 में लोच लोमोंड नेशनल पार्क में भी दो पुराने फार्मस्टेड की पहचान अवैध डिस्टिलरी के रूप में की गई थी. बेन लॉयर्स रिजर्व में अब तक पांच ऐसे ठिकाने मिल चुके हैं, लेकिन यह पहली बार है जब किसी साइट से व्हिस्की स्टिल का कोई वास्तविक हिस्सा बरामद हुआ है. ऐसे में ये खोजें साबित करती हैं कि स्कॉटलैंड की पहाड़ियों में सदियों पहले तस्करी का एक समानांतर साम्राज्य फलता-फूलता था.

  • अजब है ये पक्षी! सांपों का शौकीन और किसानों का रखवाला, नाम सुन यकीन नहीं होगा​..

    अजब है ये पक्षी! सांपों का शौकीन और किसानों का रखवाला, नाम सुन यकीन नहीं होगा​..

    Featured Image

    Neelkanth Bird: भारत में कई ऐसे पक्षी हैं, जिनका संबंध सिर्फ प्रकृति से नहीं बल्कि धार्मिक मान्यताओं से भी जुड़ा हुआ है। नीलकंठ पक्षी भी इनमें से एक है। अपनी खूबसूरत उड़ान और नीले रंग वाले पंखों के कारण यह लोगों का ध्यान खींचता है। खास बात यह है कि नीलकंठ को किसानों के लिए भी काफी उपयोगी माना जाता है, क्योंकि यह खेतों में मौजूद कई तरह के कीड़े-मकोड़ों को खाता है।

    नीलकंठ को लेकर बुंदेलखंड में खास मान्यता

    बुंदेलखंड में नीलकंठ को लेकर एक पुरानी मान्यता प्रचलित है। कहा जाता है कि अगर किसी व्यक्ति को नीलकंठ दिखाई दे जाए और वह मन से कोई प्रार्थना करे, तो उसकी मनोकामना पूरी हो सकती है।

    इसी वजह से नीलकंठ को शुभ संकेत और सौभाग्य से जोड़कर देखा जाता है। दशहरे के दिन इसके दर्शन को तो विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

    महादेव से जुड़ा है नीलकंठ का नाम

    नीलकंठ का नाम भगवान शिव से भी जोड़ा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को भगवान शिव ने अपने कंठ में धारण किया था, जिसके कारण उनका कंठ नीला हो गया और उन्हें नीलकंठ कहा गया।

    इसी धार्मिक जुड़ाव की वजह से इस पक्षी को भी शुभ और पवित्र माना जाने लगा। हालांकि पक्षी का पूरा कंठ नीला नहीं होता। उड़ान के दौरान जब यह अपने पंख फैलाता है, तो उनमें मौजूद नीला रंग बेहद खूबसूरत दिखाई देता है।

    किसानों के लिए भी काफी मददगार

    नीलकंठ को किसानों का दोस्त भी कहा जाता है। यह खेतों के आसपास पाए जाने वाले कई तरह के कीड़े-मकोड़े और झींगुर खाता है। इससे फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों की संख्या कम करने में मदद मिल सकती है।

    इसके भोजन में छोटे जीव और कुछ छोटे सांप भी शामिल हो सकते हैं। यही वजह है कि खेतों के आसपास नीलकंठ की मौजूदगी किसानों के लिए फायदेमंद मानी जाती है।

    भारत समेत कई इलाकों में पाया जाता है

    नीलकंठ को इंडियन रोलर के नाम से भी जाना जाता है। यह भारत के अलावा एशिया के कई हिस्सों में पाया जाता है। इसकी खूबसूरत बनावट और उड़ते समय नजर आने वाले नीले पंख इसे दूसरे पक्षियों से अलग बनाते हैं।

    बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों में भी यह पक्षी दिखाई देता है, हालांकि इसकी आबादी कम होने की वजह से पहले की तुलना में इसके दर्शन आसान नहीं रहे हैं।

    दशहरे पर नीलकंठ दिखना क्यों माना जाता है शुभ?

    नीलकंठ को दशहरे से जोड़ने वाली धार्मिक मान्यता भगवान राम से संबंधित है। कहा जाता है कि भगवान राम ने रावण के वध से पहले नीलकंठ पक्षी के दर्शन किए थे। इसके बाद उन्होंने रावण का वध किया।

    इसी मान्यता के चलते दशहरे के दिन नीलकंठ का दिखाई देना शुभ माना जाता है। लोकविश्वास है कि इस दिन इसके दर्शन होने से व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि आती है, धन लाभ के अवसर बनते हैं और भाग्य का साथ मिलता है।

    हालांकि, नीलकंठ के दर्शन से धन लाभ या किस्मत बदलने की बातें धार्मिक और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं, इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाता।

  • इलाज के पैसे खत्म हुए तो पिता ने खोदी 2 साल की बेटी की कब्र, सालों बाद उसी जगह खिले सूरजमुखी के फूल..?

    इलाज के पैसे खत्म हुए तो पिता ने खोदी 2 साल की बेटी की कब्र, सालों बाद उसी जगह खिले सूरजमुखी के फूल..?

    Featured Image

    जिंदगी और मौत की जंग से जुड़ी कभी-कभी ऐसी कहानियां सामने आ जाती हैं, जो इंसान की हिम्मत और उम्मीद पर भरोसा पक्का कर देती हैं. एक ऐसा ही मामला इन दिनों लोगों की आंखों से आंसू छलका रहा है. दरअसल, चीन (China) के सिचुआन प्रांत के नीजियांग में रहने वाले झांग लियॉन्ग की 2 साल की बेटी झांग शिनलेई (Zhang Xinlei) गंभीर थैलेसीमिया (thalassaemia) बीमारी से जूझ रही थी. इलाज के लिए हर महीने खून (blood) चढ़ाना पड़ता था, लेकिन फैक्ट्री में मामूली मजदूरी करने वाले पिता के पास जब सारे पैसे खत्म हो गए, तो उन्होंने एक ऐसा कदम उठाया, जिसने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया. पढ़ें पूरी खबर.

    साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट (SCMP) के मुताबिक, जून 2017 में जब मेडिकल बिल 1,40,000 युआन से ऊपर चले गए, तो मजबूर पिता ने अपनी जमीन पर एक कब्र खोदी. वो रोजाना अपनी बेटी को वहां ले जाते और उसके साथ लेटकर खेलते थे, ताकि अगर कल को मौत आ भी जाए, तो मासूम डर न महसूस करे. इस दर्दनाक तस्वीर के सामने आते ही कुछ लोगों ने पिता के दर्द को समझा, तो कई लोगों ने इसे गलत भी बताया, लेकिन इंटरनेट पर वायरल हुई इस लाचारी ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया.

    Latest and Breaking News on NDTV

    सोशल मीडिया पर खबर फैलते ही क्राउडफंडिंग के जरिए मदद का सैलाब आ गया. इसके साथ ही स्थानीय सरकार ने भी मेडिकल खर्च उठाया. इसी बीच अगस्त 2017 में शिनलेई की छोटी बहन का जन्म हुआ. वैज्ञानिकों ने छोटी बहन के कॉर्ड ब्लड से स्टेम सेल का ट्रांसप्लांट किया. 8 घंटे तक चले इस मुश्किल ऑपरेशन के बाद शिनलेई की सेहत में ऐसा सुधार हुआ कि, उसे अब बार-बार खून चढ़ाने की जरूरत ही नहीं पड़ती. आज शिनलेई प्राइमरी स्कूल में पढ़ती है, पेंटिंग करती है और डांस भी सीखती है. जिस जगह कभी पिता ने बेबसी में उसकी कब्र खोदी थी, आज वहां उसके माता-पिता ने सूरजमुखी का एक खूबसूरत बगीचा बना दिया है, जिसे वो मैजिक गार्डेन कहते हैं.

  • यूपी में बेटे की सरकारी नौकरी लगते ही पिता ने दिखाई राजाओं वाली शान, हाथी पर बैठाकर निकाला जुलूस

    यूपी में बेटे की सरकारी नौकरी लगते ही पिता ने दिखाई राजाओं वाली शान, हाथी पर बैठाकर निकाला जुलूस

    Featured Image

    उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद में हरैया थाना क्षेत्र के अंतर्गत केशवपुर गांव के रहने वाले अवनीश पाण्डेय ने ग्राम पंचायत अधिकारी के पद पर चयनित होकर पूरे जिले का नाम रोशन किया है. बेटे की इस शानदार सफलता पर पिता महेंद्र कुमार पाण्डेय की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. अपनी इस खुशी का इजहार करने के लिए पिता ने एक अनोखा और शाही तरीका अपनाया, जिसकी चर्चा अब पूरे इलाके में हो रही है. 

    संसारीपुर चौराहे पर गाजे-बाजे के साथ एक भव्य स्वागत समारोह आयोजित किया गया. यहां पिता महेंद्र कुमार पाण्डेय ने नवचयनित अधिकारी बेटे अवनीश को बाकायदा हाथी पर बैठाकर पूरे गाजे-बाजे के साथ विजय जुलूस निकाला. ढोल-नगाड़ों की थाप और ग्रामीणों के उल्लास के बीच निकला यह जुलूस हर किसी के लिए कौतूहल और आकर्षण का केंद्र बना रहा.

    स्थानीय लोगों ने फूल-मालाओं से किया स्वागत 

    स्थानीय लोगों ने इस खुशी के मौके पर बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जगह-जगह फूल-मालाओं से अवनीश का स्वागत किया और परिजनों को बधाइयाँ दीं. सोशल मीडिया पर भी पिता-पुत्र के इस खास पल का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे लोग एक पिता के गर्व और सफलता के जश्न का सबसे खूबसूरत दृश्य बता रहे हैं. अवनीश की यह उपलब्धि स्थानीय युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है.

    पूरे गांव में जश्न सा माहौल 

    ग्राम पंचायत अधिकारी के पद पर चयनित हुए अवनीश पाण्डेय को जब उनके पिता महेंद्र कुमार पाण्डेय ने संसारीपुर चौराहे पर हाथी पर बैठाकर ढोल-नगाड़ों के साथ गाँव में प्रवेश कराया, तो यह केवल एक पारिवारिक जश्न भर नहीं रहा. यह ग्रामीण समाज में सफलता, संघर्ष और सम्मान के बदलते आयामों को बयां करती एक ऐतिहासिक घटना बन गई. भारतीय समाज में, विशेषकर ग्रामीण अंचलों में, एक पिता अपनी पूरी ज़िंदगी बच्चों की पढ़ाई और उनके भविष्य को संवारने में खपा देता है. जब वर्षों की वह तपस्या रंग लाती है, तो खुशी का बाँध टूटना स्वाभाविक है.

    पिता का यह बादशाही अंदाज दिखावा नहीं, बल्कि उस अथक परिश्रम और उम्मीदों की जीत का उत्सव है, जो एक साधारण परिवार ने वर्षों तक संजोया था. हाथी की सवारी कोई धन-दौलत का प्रदर्शन नहीं, बल्कि उस असीम गर्व की अभिव्यक्ति है जो एक पिता को उसके बेटे की योग्यता ने दी है.

    औरों के लिए बने प्रेरणा 

    यह वायरल होता वीडियो उन सभी युवाओं की आँखों में एक नया सपना बोता है कि अगर मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो एक दिन उनके माता-पिता का मस्तक भी इसी तरह गर्व से ऊँचा होगा. ग्राम पंचायत अधिकारी के रूप में अवनीश अब व्यवस्था का एक हिस्सा बनने जा रहे हैं. मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि उनकी इस सफलता का सच्चा उत्सव तब और सार्थक होगा जब वह अपने इस पद का उपयोग अपने गाँव और क्षेत्र के विकास के लिए पूरी निष्ठा से करेंगे. फिलहाल, यह पल एक पिता के त्याग और बेटे के समर्पण की उस जीत का है, जिसने बस्ती ही नहीं, पूरे प्रदेश के युवाओं को प्रेरित किया है.

  • ओडिशा के गांव में बिगड़ी अमेरिकी टूरिस्ट की तबीयत, इलाज के बाद बिल देखकर रह गए दंग,

    ओडिशा के गांव में बिगड़ी अमेरिकी टूरिस्ट की तबीयत, इलाज के बाद बिल देखकर रह गए दंग,

    अमेरिकी फिल्म निर्देशक माइक नून की ओडिशा यात्रा के दौरान अचानक से तबीयत खराब हो गई। उन्हें तत्काल एक सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनको उचित देखभाल समय पर मिली। माइक ने बताया कि यदि यह स्थिति अमेरिका में होती, तो इलाज की लागत हजारों डॉलर तक पहुंच सकती थी। यह अनुभव भारत की ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करता है।

    माइक नून की ओडिशा यात्रा के दौरान तबीयत बिगड़ गई

    भारत घूमने आए अमेरिकी फिल्ममेकर माइक नून की ओडिशा यात्रा का एक अनुभव सोशल मीडिया पर चर्चा में है। घूमने के दौरान उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और उन्हें इलाज के लिए एक ग्रामीण सरकारी अस्पताल ले जाया गया। जहाँ एक तरफ वह अस्पताल की सुविधाओं और भाषा से बिल्कुल अनजान थे, वहीं दूसरी तरफ उन्हें समय पर इलाज मिला। ठीक होने के बाद उन्होंने इस अनुभव को सोशल मीडिया पर साझा किया और भारत में इलाज की लागत की तुलना अमेरिका से की।

    माइक के मुताबिक़, भारत आने के महज़ पाँचवें दिन उनकी तबीयत बिगड़ी। करीब 12 घंटे तक उन्हें लगातार उल्टियाँ होती रहीं और एक समय ऐसा आया जब लगभग हर 15 मिनट में उल्टी हो रही थी। इसके बाद उन्हें ओडिशा के एक ग्रामीण सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में उन्हें आईवी फ्लूइड, उल्टी रोकने की दवा और इंजेक्शन दिए गए। इलाज के दौरान उन्होंने अस्पताल के बिस्तर से वीडियो बनाकर अपनी स्थिति के बारे में बताया।

    गाँव के अस्पताल तक कैसे पहुँचा अमेरिकी पर्यटक?

    माइक ने बताया कि वह जिस अस्पताल में पहुँचे, वह ग्रामीण इलाक़े में था और वहाँ लिखी भाषा तक उनके लिए समझना मुश्किल थी। इसके बावजूद उन्हें इलाज मिला और उनकी हालत में सुधार हुआ। उन्होंने यह भी साफ़ किया कि उनकी तबीयत खराब होने की वजह फूड पॉइज़निंग नहीं थी। उनके मुताबिक़, उन्हें स्थानीय खाना इतना पसंद आया कि उन्होंने जरूरत से ज़्यादा खा लिया। इसके बाद उन्हें उल्टी और दूसरी परेशानियां शुरू हो गईं।

    यह अनुभव इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि आम तौर पर ग्रामीण सरकारी अस्पतालों को लेकर चर्चा स्थानीय आबादी की स्वास्थ्य सुविधाओं और पहुँच के संदर्भ में होती है। इस मामले में एक विदेशी पर्यटक ने भी ऐसे ही अस्पताल में इलाज मिलने का अपना अनुभव सामने रखा।

    इलाज के बाद अमेरिका के खर्च से की तुलना

    माइक ने वीडियो में बताया कि भारत में इलाज मिलने के बाद उन्हें सबसे ज़्यादा हैरानी इसके खर्च को लेकर हुई। उन्होंने कहा कि अमेरिका में आईवी फ्लूइड, उल्टी रोकने वाली दवा और इंजेक्शन जैसी चिकित्सा सुविधाओं पर उन्हें हज़ारों डॉलर तक खर्च करना पड़ सकता था। इसके उलट, उनके मुताबिक़ जिस ग्रामीण सरकारी अस्पताल में उनका इलाज हुआ, वहां उनसे इलाज के लिए कोई पैसा नहीं लिया गया। उन्होंने इस बात को अपने अंदाज़ में बताया और भारतीय स्वास्थ्य व्यवस्था की तुलना अमेरिका की महंगी चिकित्सा व्यवस्था से की।

    सोशल मीडिया पर वायरल हुआ अनुभव

    माइक के इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी आने लगीं। कई यूज़र्स ने भारत में कम लागत वाली सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की तारीफ़ की। कुछ लोगों ने उन्हें ओडिशा में मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं के बारे में बताया, तो कुछ ने बीमारी के बाद खान-पान को लेकर सलाह दी। हालांकि, इस एक अनुभव के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि हर विदेशी नागरिक को भारत के हर सरकारी अस्पताल में हर तरह का इलाज मुफ़्त मिलता है। अस्पताल और इलाज के प्रकार के हिसाब से नियम और शुल्क अलग हो सकते हैं।

    ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की भी दिखी एक तस्वीर

    माइक का अनुभव केवल एक वायरल वीडियो की कहानी नहीं है। यह ग्रामीण भारत के सरकारी अस्पतालों की उस भूमिका की ओर भी ध्यान खींचता है, जहाँ स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आने वाले लोगों को भी ज़रूरत पड़ने पर चिकित्सा सहायता मिल सकती है।

    ओडिशा में घूमने आए एक विदेशी पर्यटक का ग्रामीण अस्पताल तक पहुँचना और वहाँ इलाज पाना इस बात को सामने लाता है कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाएँ ग्रामीण इलाक़ों में कितनी अहम भूमिका निभाती हैं। माइक के लिए यह यात्रा का एक अप्रत्याशित पड़ाव था, लेकिन उनके अनुभव ने सोशल मीडिया पर भारत की ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था और इलाज की लागत को लेकर एक नई चर्चा जरूर शुरू कर दी है।

  • लेह पैलेस जाते समय पहाड़ पर दिखी ‘हनुमानजी की गदा’! शहर से पहाड़ों में शिफ्ट हुए कपल ने बनाया वीडियो..

    लेह पैलेस जाते समय पहाड़ पर दिखी ‘हनुमानजी की गदा’! शहर से पहाड़ों में शिफ्ट हुए कपल ने बनाया वीडियो..

    Featured Image

    शहर की जिंदगी छोड़कर हिमालय के गांव में शिफ्ट हुए एक कपल ने 14 सेकंड का एक वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर किया है, जिसमें पहाड़ पर ‘हनुमान जी की गदा’ दिखाई दे रही है. यह वीडियो उन्होंने लेह पैलेस जाते समय रास्ते में बनाया है, जिसे देखकर हर कोई हैरान हो रहा है. कपल का भी कहना है कि जब उन्होंने इस नजारे को देखा तो पहली बार में उन्हें भी अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हुआ.

    14 सेकंड के वीडियो में क्या दिखा रहा है?

    Two Vagabond Monks नाम के इंस्टाग्राम अकाउंट से यह वीडियो 3 अगस्त को पोस्ट किया गया है, जिसमें कंधे पर बैग टांगकर हाइकिंग करते हुए अंकुर इस नजारे को अपने कैमरे में कैद करते  नजर आ रहे हैं. उनका कहना है कि यह दृश्य उन्होंने लेह पैलेस के ठीक सामने देखा है. वीडियो में पहाड़ पर पड़ रही सूरज की रोशनी और परछाई से ये दृश्य बना है, जो लोगों को खूब पसंद आ रहा है.

    यहां देखें वीडियो

     

    ‘आप जो कुछ भी सोच सकते हैं, वह सच है’

    इस वीडियो को देखने के बाद ज्यादा लोग इसे अद्भुत बता रहे हैं. एक यूजर ने कमेंट में लिखा है कि हनुमानजी हर जगह हैं. जबकि दूसरे यूजर पाब्लो पिकासो का नाम लेकर कहते हैं कि आप जो कुछ भी सोच सकते हैं, वह सच है. तीसरे यूजर ने कहा कि प्रकृति हमेशा अपनी सुंदरता से आपको हैरान कर देती है.

    JKSRTC बसे से ट्रैवल करके जा रहे लद्दाख

    ये कपल इस मनाली के एक गांव में रहता है और समय-समय पर ट्रैवल करते हुए लोगों के लिए ऐसे वीडियो बनाता है जो उनके काम आते हैं. इस वक्त वे जम्मू और कश्मीर स्टेट एंड रोड ट्रांसपोर्ट की बस में सफर करते हुए लद्दाख घूम रहे हैं और अपनी जर्नी का एक्सपीरियंस शेयर कर रहे हैं.

  • 35 साल की शादी और बेमिसाल मोहब्बत, पत्नी की एक पुरानी ख्वाहिश के लिए पति ने बेच दिया घर, किया ऐसा काम..दुनिया कर रही है सलाम..?

    35 साल की शादी और बेमिसाल मोहब्बत, पत्नी की एक पुरानी ख्वाहिश के लिए पति ने बेच दिया घर, किया ऐसा काम..दुनिया कर रही है सलाम..?

    Featured Image

    कहते हैं अगर प्यार (love story) सच्चा हो तो इंसान नामुमकिन को भी मुमकिन बना देता है. बड़े से बड़े पहाड़ को काट देता है. हाल ही में चीन के सिचुआन प्रांत के रहने वाले झोउ शाओलिन (Zhou Xiaolin) ने अपनी पत्नी यिन जी (Yin Jie) के लिए कुछ ऐसा ही कर दिखाया है. साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट (SCMP) के मुताबिक, 2013 में यिन जी ने बस यूं ही अपने पति के सामने बचपन के फेवरेट हॉलीहॉक फूलों का जिक्र कर दिया था, जिसके बाद झोउ ने उनसे वादा किया कि एक दिन वो उनके लिए एक पूरा बाग तैयार करेंगे. अपनी पत्नी की बचपन की यादों को संजोने के लिए झोउ ने 80 हेक्टेयर बंजर जमीन को दुनिया के सबसे बड़े हॉलीहॉक गार्डन में बदल दिया.

    Latest and Breaking News on NDTV

    बिना किसी गार्डनिंग एक्सपीरियंस के झोउ ने अपना घर तक बेच दिया और ट्रुआनलोंग टाउन में जमीन खरीद ली. उन्होंने 10 साल तक कड़ी मेहनत की, देसी और विदेशी बीजों को ढूंढा और 80 हेक्टेयर की बंजर घाटी को फूलों से सजा दिया. आज ये जगह दुनिया की सबसे बड़ी हॉलीहॉक गार्डन बन चुकी है. इसमें हॉलीहॉक की 700 से ज्यादा किस्में, 1.5 लाख लिली और 1 लाख हिबिस्कस के पौधे मौजूद हैं.

    दोनों (कपल) की पहली मुलाकात 1985 में हुई थी, जब झोउ एक ट्रेनी टूर गाइड थे. 5 साल तक चिट्ठियों के जरिए बातें करने के बाद दोनों ने आखिरकार शादी कर ली. तिब्बत ट्रिप के दौरान भयानक बर्फबारी में फंसने पर झोउ अपनी पत्नी को पीठ पर लादकर गुफा तक ले गए थे, जहां उन्होंने तीन दिन बिताए. यिन जी मानती हैं कि ऐसे लाइफ पार्टनर के साथ जिंदगी का हर लम्हा खूबसूरत हो जाता है. आज शादी के 35 साल बाद भी ये कपल अपने इस खूबसूरत बाग में पालतू डॉग्स और बिल्लियों के साथ रहता है. कपल के बच्चे नहीं हैं. दोनों हर जन्मदिन और एनिवर्सरी पर एक-दूसरे को हाथ से लिखे खत देते हैं. चीन के केंद्रीय टेलीविजन (CCTV) पर दिखाए जाने के बाद ये जोड़ा देशभर में ‘ड्रीम कपल’ के नाम से फेमस हो चुका है.

  • ना पेट्रोल की समस्या ना चार्जिंग का सिर दर्द, शख्स की जुगाड़ बाइक हुई..

    ना पेट्रोल की समस्या ना चार्जिंग का सिर दर्द, शख्स की जुगाड़ बाइक हुई..

    Featured Image

    Viral News : देश में जुगाड़ बनाने वाले वालों की कमी नहीं है। अपने दिमांग का इस्तेमाल कर कर लोग समस्या का समाधान निकालने के लिए जुगाड़ लगा ही लेते हैं। सोशल मीडिया पर आज कई मजेदार जुगाड़ के वीडियो वायरल हो रहे हैं। ऐसा ही एक देसी जुगाड़ सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जिसने तहलका मचा रखा है। यह वायरल जुगाड़ देख कई लोग हैरत में पड़ गए तो कुछ लोग इसे बनाने वाले के दिमांग की तारीफ करते नहीं थक रहे। दरअसल एक शख्स ने गधे के सर पर बाइक ही हैडलाइट लगाकर दी। इसके साथ ही उसकी पीठ पर बाइक की सीट को भी बांध दिया। शख्स ने अपने जुगाड़ का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया है। जिसे देखने के बाद लोग तमाम तरीके की प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

    सर पर हेडलाइट और साइड इंडिकेटर्स भी लगाए

    देश में बढ़ती महंगाई और पेट्रोल-डीजल के दामों में लगातार होने वाली वृद्धि को देखते हुए एक शख्स ने अपने जुगाड़ से लोगों को हैरान कर दिया है। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि रात के समय बाजार में सड़क के किनारे एक गधे को देख हर कोई हंसकर लोटपोट हो रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस अतरंगी जुगाड का जमकर मचा ले रहे हैं। दरअसल वीडियो में दिखाई देने वाला गधा कोई साधारण नहीं बल्कि उसे बाइक का अवतार दिया गया है। गधे की पीठ पर मोटरसाइकिल की लंबी सीट बंधी है। सिर पर हेडलाइट और साइड इंडिकेटर्स लगे हैं। मतलब गधा अगर रात के समय चलेगा तो उसपर सवार शख्स हेडलाइट जलाकर चल सकता है।

    गधा भी नहीं रहा गधा बना जुगाड़

    वायरल वीडियो को देख कुछ लोगों ने इसपर अपनी प्रतिक्रिया दी है। वीडियो देखने वाला इसे फ्यूचरिस्टिक बाइक भी बोल रहे हैं। वीडियो देखने के बाद कई लोगों ने प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि इस बंदे ने ऐसा जुगाड़ बनाकर दिमाग ही चकरा दिया। एक अन्य शख्स ने लिखा है कि बिना पेट्रोल के चलने वाली टिकाऊ गाड़ी। तो वहीं एक अन्य शख्स ने लिखा कि इस गाड़ी को चलाने के लिए किसी तरह का लाइसेंस भी नहीं बनवाना पडेगा। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो को देखने के बाद कुछ लोगों ने यह भी कहा कि गधा भी अब गधा नहीं रहा बल्कि बन गया है बेहतरीन जुगाड़!

  • 3 करोड़ साल से यहां लिपटे पड़े हैं 4 सांप, आज भी जिंदा है नर्क के दानव का श्राप..

    3 करोड़ साल से यहां लिपटे पड़े हैं 4 सांप, आज भी जिंदा है नर्क के दानव का श्राप..

    S सोचिए, करीब 3.8 करोड़ साल पहले के चार सांप एक ही जगह दबे रह गए और इतने लंबे वक्त बाद उनके कंकाल वैज्ञानिकों के हाथ लगे. अमेरिका के व्योमिंग में मिले इन दुर्लभ अवशेषों ने सांपों की पुरानी दुनिया को समझने का एक नया रास्ता खोल दिया है. वैज्ञानिकों ने इन अवशेषों की जांच के बाद एक नई प्रजाति Hibernophis breithaupti की पहचान की है. इसके करीब चार लगभग पूरे कंकाल मिले हैं. इनमें से तीन सांप एक साथ, बिल जैसी संरचना में दबे हुए थे, जबकि चौथा सांप उसी चट्टानी परत में थोड़ी अलग जगह से मिला. अब सवाल उठता है कि ये सांप एक साथ वहां पहुंचे कैसे? यही इस खोज को खास बनाता है.

    जमीन से निकला करोड़ों साल पुराना राज

    ये फॉसिल अमेरिका के Wyoming स्थित White River Formation की चट्टानों से मिले हैं. इनकी उम्र शुरुआती Oligocene काल की बताई गई है, यानी ये 3 करोड़ साल से भी ज्यादा पुराने. भूगर्भीय साक्ष्यों के आधार पर इस क्षेत्र की चट्टानों की न्यूनतम उम्र करीब 32 मिलियन साल आंकी गई है. जीवाश्म जिस बारीक रेतीली मिट्टी वाली चट्टान में मिले, उसके बारे में वैज्ञानिकों का मानना है कि यह किसी छोटी बाढ़ के दौरान जमा हुई होगी. मिट्टी, पानी और ज्वालामुखीय राख से जुड़े इस वातावरण ने सांपों के अवशेषों को असाधारण तरीके से सुरक्षित रखने में मदद की.

    एक नहीं, तीन सांप एक साथ मिले

    इस खोज की सबसे खास बात यह है कि तीन सांप एक ही जगह पर साथ-साथ मिले. वैज्ञानिकों को ये तीनों सांप चट्टान के दो ऐसे हिस्सों में मिले, जो आपस में जुड़े हुए थे. यानी ऐसा लग रहा था जैसे ये किसी एक जगह पर साथ मौजूद थे और फिर उसी दौरान मिट्टी और चट्टान के नीचे दब गए. पहली नजर में चट्टान के ऊपर सिर्फ दो सांपों के कंकाल दिखाई दे रहे थे. लेकिन जब वैज्ञानिकों ने इसका CT स्कैन किया, तो चट्टान के अंदर छिपा तीसरा सांप भी सामने आ गया. वहीं, चौथा सांप इसी इलाके की दूसरी जगह से मिला.

    मजेदार बात यह है कि इन सांपों का यह अजीब तरीके से एक साथ मिलना नया नहीं था. वैज्ञानिकों की नजर इन पर करीब 40 साल पहले, 1986 में ही पड़ गई थी. उस समय Brent H. Breithaupt और David Duvall ने अनुमान लगाया था कि शायद ये सांप ठंड से बचने के लिए किसी साझा बिल या आश्रय में एक साथ जमा हुए थे. इसे वैज्ञानिक भाषा में हाइबरनेकुलम कहा जाता है.

    अब नई रिसर्च में वैज्ञानिकों ने इन कंकालों की हड्डियों और शरीर की बनावट को बारीकी से जांचा. इसके बाद पता चला कि ये पहले से पहचानी गई किसी प्रजाति के सांप नहीं, बल्कि एक नई प्रजाति के सदस्य थे. Hibernophis breithaupti के UW-11990 नमूने की तस्वीर। इमेज क्रेडिट: Zoological Journal of the Linnean Society

    वैज्ञानिकों ने दिया नया नाम

    रिसर्चर्स ने इस प्राचीन सांप को Hibernophis breithaupti नाम दिया है. इसके नाम में ‘hibernare’ यानी सर्दियों में रहना और ग्रीक शब्द ‘ophis’ यानी सांप शामिल है. रिसर्च के मुताबिक इसकी खोपड़ी और रीढ़ की हड्डियों की बनावट पहले से पहचाने गए कुछ जीवाश्म सांपों से अलग है. इसी आधार पर इसे एक अलग प्रजाति माना गया है.

    क्या ये सांप सच में साथ रहते थे?

    तीन सांपों का एक साथ और बिल जैसी जगह में मिलना देखकर वैज्ञानिकों को लगता है कि शायद ये ठंड से बचने के लिए किसी साझा ठिकाने में रहते थे. आज भी सांपों की कुछ प्रजातियां ठंड के मौसम में एक साथ बिलों या सुरक्षित जगहों पर जमा होती हैं. लेकिन यहां एक जरूरी बात समझना भी जरूरी है. करोड़ों साल पुराने कंकालों को देखकर यह पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता कि ये सांप साथ में हाइबरनेट ही कर रहे थे. हो सकता है कि किसी दूसरी वजह से तीनों एक ही जगह पर पहुंचे हों और बाद में वहीं दब गए हों. इसलिए वैज्ञानिक इसे संभावित communal sheltering behaviour का संकेत मानते हैं, पक्के सबूत के तौर पर नहीं.