Category: Gazab

  • पानी में गिरा डिलीवरी बॉय का मोबाइल, घंटों तलाशने पर भी नहीं मिला तो रो पड़ा, बोला- इसी फोन से चलता है घर..

    पानी में गिरा डिलीवरी बॉय का मोबाइल, घंटों तलाशने पर भी नहीं मिला तो रो पड़ा, बोला- इसी फोन से चलता है घर..

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    मुजफ्फरनगर में मंगलवार को हुई तेज बारिश के बाद शहर के शिव चौक पर भारी जलभराव हो गया. सड़कों पर भरे पानी के बीच एक डिलीवरी बॉय का मोबाइल फोन गिर गया. युवक घंटों तक पानी में अपना फोन तलाशता रहा. काफी कोशिश के बाद भी जब फोन नहीं मिला तो उसकी आंखों से आंसू छलक पड़े. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

    पानी में गिरा मोबाइल, घंटों तलाशता रहा युवक
    पीड़ित युवक की पहचान रामपुरी निवासी विशाल के रूप में हुई है. विशाल डिलीवरी बॉय का काम करता है और इसी से अपने परिवार का खर्च चलाता है. मंगलवार को वह खाना लेकर डिलीवरी के लिए जा रहा था. इसी दौरान शिव चौक पर जलभराव के बीच उसका मोबाइल फोन पानी में गिर गया. मोबाइल गिरते ही विशाल ने पानी में उसे तलाशना शुरू कर दिया. वह कभी पानी में हाथ डालकर फोन खोजता तो कभी सड़क किनारे खड़े होकर पानी को देखता रहा. काफी देर तक तलाश करने के बाद भी जब मोबाइल नहीं मिला तो वह रोने लगा.

    45 हजार का फोन अभी सिर्फ 3 किस्तें चुकाई थीं
    विशाल के लिए यह मोबाइल सिर्फ महंगा फोन नहीं था, बल्कि उसकी रोजी-रोटी का अहम साधन था. डिलीवरी के ऑर्डर इसी मोबाइल पर आते थे. इन्हीं ऑर्डर को पूरा करके वह कमाई करता था. जानकारी के मुताबिक, विशाल ने करीब तीन महीने पहले ही लगभग 45 हजार रुपए का मोबाइल किस्तों पर खरीदा था. अब तक वह इसकी सिर्फ तीन किस्तें जमा कर पाया है.

    फोन ढूंढते युवक का वीडियो हुआ वायरल
    विशाल को पानी में मोबाइल तलाशते देख वहां मौजूद एक व्यक्ति ने उसका वीडियो बना लिया. वीडियो में विशाल जलभराव के बीच फोन तलाशता नजर आ रहा है. काफी देर तक फोन नहीं मिलने के बाद वह परेशान होकर रोता दिखाई देता है. वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों का ध्यान विशाल की परेशानी की ओर गया. जब उससे उसकी स्थिति के बारे में पूछा गया तो वह अपने आंसू नहीं रोक सका.

    नगरपालिका से आर्थिक मदद की गुहार
    विशाल ने बताया कि वह गरीब परिवार से है और डिलीवरी का काम करके घर चलाता है. मोबाइल उसके काम के लिए बेहद जरूरी है. फोन के बिना उसके सामने रोजगार का संकट खड़ा हो सकता है. विशाल ने अपनी आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए नगरपालिका से भी मदद की गुहार लगाई है. उसका कहना है कि अगर मोबाइल वापस नहीं मिलता या उसकी भरपाई नहीं होती तो उसके लिए परिवार का खर्च चलाना और बाकी किस्तें चुकाना मुश्किल हो जाएगा.

  • बहन की शादी के लिए कर्ज, मां बीमार, टीचर की नौकरी छोड़ी… नियुक्तियां रद्द होने से सड़क पर आने वालों का दर्द

    बहन की शादी के लिए कर्ज, मां बीमार, टीचर की नौकरी छोड़ी… नियुक्तियां रद्द होने से सड़क पर आने वालों का दर्द

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    रांची में जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्रों के प्रदर्शन के बाद झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने TDPL समेत कई दूसरी परीक्षाओं को रद्द कर दिया. सरकार ने परीक्षाएं रद्द किए जाने की अधिसूचना भी जारी कर दी है. लेकिन अब परीक्षाओं में पास हुए अभ्यर्थी सड़क पर उतर गए हैं. झारखंड मंत्रालय के बाहर सरकार द्वारा TDPL समेत अन्य परीक्षाओं के रद्द किए जाने के अधिसूचना के बाद माहौल बिल्कुल गमगीन है.

    पास अभ्यर्थियों का रो रोहकर बुरा हाल
    एक उम्मीदवार मनीषा का रो रो कर बुरा हाल है. पहले स्टेशन मास्टर के पद पर रेलवे में नियुक्ति मिली थी. वहां से नौकरी छोड़कर आई. मनीषा हमारी टीम के कैमरे के सामने ही बेहोश होकर गिर पड़ी. उनको दोस्तों ने संभालने की कोशिश की. इनका महिला सुपरवाइजर में भी नियुक्ति मिली थी. फिलहाल ASO वित्त विभाग में हैं. मनीषा हजारीबाग की रहने वाली हैं. 15दिनों से तनाव में थी. कर्नाटक में नौकरी में थी. ट्रेनिंग कर रही हैं. मानसिक तनाव इसलिए भी कि आरोप गड़बड़ी के लगे थे. यानी कलंक लगे थे. ब उसे मिटाना है. इळ्जाम और कलंक को झेलने में मुश्किल है.

    भीड़तंत्र में आगे झुक गई सरकार- उम्मीदवार
    एक उम्मीदवार का कहना है कि प्रतिभा रो रही है और भीड़तंत्र के दबाव में सरकार झुक रही है. गुड्डू कुमार राय साहेबगंज से हैं और पुलिस मुख्यालय में कार्यरत थे. सहायक प्रशाखा अधिकारी थे. लेकिन अब उसी दफ्तर में नहीं घुसने दिया जा रहा है. भारतीय रेल में सीनियर गुड्स ट्रेन मैनेजर की नौकरी छोड़कर आए थे. शादी हो गई है. कोर्ट ने कहा था, जिसके खिलाफ सबूत होंगे, उन्हीं को नौकरी से निकाला जाएगा. ये कोर्ट की अवमानना है.

    नौकरी छोड़कर बने थे अधिकारी- उम्मीदवार
    एक  उम्मीदवार पहले 2014 से ही  शिक्षक थे. लेकिन नौकरी छोड़कर ग्रामीण विकास विभाग में सहायक प्रशाखा अधिकारी बने थे. ये सोचकर कि ये नौकरी को मिनी IAS कहा जाता है. अब तक सड़क पर हैं.

    बहन की शादी के  लिए लिया कर्ज- उम्मीदवार
    श्याम सुंदर मंडल कहते है कि वो भी रेलवे में ऑफिस सुपरिंटेंडेंट थे. यहां एग्जाम दिया कि रांची में रहेंगे, लेकिन अब तो कहीं नहीं है. सबको नौकरी से निकाला जाएगा. शादी हुई है, लेकिन आगे पूरी जिंदगी है, पूरे परिवार का बोझ है, कैसे जीवन चलेगा, पता नहीं. बहन की शादी के लिए कर्ज भी ले रखा है. कोर्ट के शरण में जाएंगे.

    मां को नहीं बता सकता नौकरी चली गई- विकास
    हज़ारीबगा के विकास कुमार की भी कहानी मिलती जुलती है. ये लेबर इन्फोर्समेंट ऑफिसर थे. इनकी माँ की तबियत खराब रहती है. लिहाजा मां को नौकरी जाने की बात बताई ही नहीं है. अगर उन्हें पता चला तो सदमा लगेगा. हार्ट अटैक भी आ सकता है. उसकी जिम्मेवारी क्या सरकार लेगी?

  • रिश्ते में खुद को कम समझना छोड़ें, सीखें अपनी वैल्यू कराना दोबारा नहीं टूटेगा दिल, रिलेशनशिप वाले जरूर पढ़ें..?

    रिश्ते में खुद को कम समझना छोड़ें, सीखें अपनी वैल्यू कराना दोबारा नहीं टूटेगा दिल, रिलेशनशिप वाले जरूर पढ़ें..?

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    कुछ लोग बार-बार लोगों को माफ कर देते हैं, जो सबसे बड़ा कारण होता अपनी वैल्यू कम करवाने का. कई बार ऐसा भी होता है कि लोग आपकी माफी की इज्जत करते हैं, लेकिन कई बार ऐसा देखा गया है कि कुछ लोग इसे अपना हक समझकर आपको बार-बार परेशान करते हैं. वहीं बार-बार दिल टूटना सिर्फ रिश्ते को कमजोर नहीं करता, बल्कि इंसान का आत्मविश्वास और भरोसा भी कमजोर कर देता है. अगर आप चाहते हैं कि कोई आपको हल्के में न ले और आपकी भावनाओं से खिलवाड़ भी न करे, तो सबसे पहले आपको खुद की अहमियत समझनी होगी. रिश्ते तभी मजबूत रहते हैं, जब सामने वाला आपकी इज्जत करे और आप अपनी सीमाएं तय करना जानते हों.


    किसी भी रिश्ते में इतना भी मत खो जाइए कि सामने वाले को लगे आप उसके बिना नहीं रह सकते. अपनी भावना, समय और निजी जिंदगी की एक सीमा तय करें. जब लोग समझते हैं कि आप खुद की कद्र करते हैं, तो वे भी आपको हल्के में नहीं लेते.


    किसी दूसरे या तीसरे इंसान में भी अपनी खुशी ढूंढना बंद कर दें. जब दिल टूटता है तो दिल किसी और से वेलिडेशन चाहता है, ऐसे में आप फिर से गलत इंसान को चुन सकते हैं. जिससे बाहर के लोग ऐसे मौके का फायदा उठाते हैं. पहले खुद को वक्त दें. खुद को कभी भी किसी एक इंसान पर निर्भर मत होने दीजिए. जब आपकी दुनिया सिर्फ एक रिश्ते के इर्द-गिर्द घूमने लगती है, तब दिल टूटने का असर सबसे ज्यादा होता है. अपनी फैमिली, दोस्तों, काम और खुद के साथ भी उतना ही जुड़ाव बनाए रखें.


    अगर किसी ने आपका भरोसा तोड़ा है, तो बार-बार उसे समझाने या मनाने की बजाय खुद को समय दें. कम से कम 30 दिनों तक उससे कोई संपर्क न रखें. फोन, मैसेज और सोशल मीडिया से दूरी बनाएं. इससे आपका मन भी शांत होगा और सामने वाले को आपकी अहमियत का एहसास भी होगा.

    दर्द को दबाएं नहीं, बाहर आने दें
    दिल टूटने के बाद मजबूत बनने का मतलब यह नहीं कि आप रोएं ही नहीं. अगर रोना आता है तो रोइए, गुस्सा है तो उसे स्वस्थ तरीके से बाहर निकालिए. भावनाओं को दबाने से दर्द समय के साथ बढ़ता है, जबकि उन्हें स्वीकार करना आगे बढ़ने की पहली सीढ़ी होती है.

    खुद पर समय और मेहनत लगाइए
    ब्रेकअप या रिश्ते की तकलीफ को अपनी जिंदगी का अंत मत मानिए. अपना फोकस करियर, पढ़ाई, फिटनेस और नई स्किल सीखने पर लगाइए. जिम जाएं, किताबें पढ़ें, यात्रा करें या कोई नया शौक अपनाएं. जब आप खुद को बेहतर बनाने में जुटते हैं, तो आपका आत्मविश्वास अपने आप लौट आता है.

    अपनी कीमत पहचानिए
    याद रखिए, आपकी पहचान किसी रिश्ते से नहीं, बल्कि आपके व्यक्तित्व से बनती है. अगर कोई आपको बार-बार नजरअंदाज करता है, आपकी भावनाओं की कद्र नहीं करता या सिर्फ जरूरत पड़ने पर याद करता है, तो ऐसे लोगों से दूरी बनाना ही बेहतर है. जो इंसान आपकी इज्जत नहीं कर सकता, उसे अपनी जिंदगी में जगह देने की जरूरत नहीं है.

    मजबूत बनिए, बदला लेना नहीं है
    किसी को उसकी औकात दिखाने का सबसे अच्छा तरीका लड़ाई या बदला नहीं, बल्कि अपनी जिंदगी में आगे बढ़ जाना है. जब आप खुद को महत्व देना शुरू कर देते हैं, तब वही लोग आपकी अहमियत समझने लगते हैं जिन्होंने कभी आपको हल्के में लिया था. सबसे बड़ा जवाब आपकी चुप्पी, सफलता, आत्मसम्मान और सुकून भरी जिंदगी होती है. एक बार ये ट्राय करें, आप खुश रहना सिख जाएंगे और खुद को जिम्मेदार मानना बंद कर देंगे. 

  • बारिश में कमरे में है उमस और सीलन की बदबू? AC का Cool नहीं, ये Mode करेगा मिनटों में कमाल..

    बारिश में कमरे में है उमस और सीलन की बदबू? AC का Cool नहीं, ये Mode करेगा मिनटों में कमाल..

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    मानसून में बारिश भले ही गर्मी से राहत दिलाती है, लेकिन इसके साथ हवा में नमी भी काफी बढ़ जाती है. यही वजह है कि घर के अंदर चिपचिपाहट, सीलन की बदबू और घुटन जैसा माहौल बनने लगता है. ऐसे में ज्यादातर लोग AC को Cool Mode पर चलाते हैं, लेकिन कई बार कमरा ठंडा होने के बावजूद उमस कम नहीं होती. अगर आप भी बारिश के मौसम में इस परेशानी से जूझ रहे हैं, तो AC का एक खास मोड आपके काफी काम आ सकता है. आइए जानते हैं कि मानसून में AC को किस मोड पर चलाना सबसे सही रहता है और इसके क्या फायदे हैं.


    बारिश के मौसम में AC का Dry Mode सबसे ज्यादा उपयोगी माना जाता है. इस मौसम में असली परेशानी तेज गर्मी नहीं, बल्कि हवा में मौजूद अतिरिक्त नमी होती है. यही नमी कमरे को चिपचिपा बना देती है और सीलन की बदबू भी बढ़ा देती है. Dry Mode हवा से अतिरिक्त नमी को कम करने का काम करता है. इससे कमरे का वातावरण ज्यादा आरामदायक महसूस होता है और घुटन भी कम हो जाती है. अगर बाहर लगातार बारिश हो रही है या घर में सीलन महसूस हो रही है, तो यह मोड काफी फायदेमंद साबित हो सकता है.


    Dry Mode को खासतौर पर ज्यादा नमी वाले मौसम के लिए बनाया गया है. इस मोड में AC का कंप्रेसर और फैन लगातार तेज गति से नहीं चलते. जरूरत के अनुसार वे बीच-बीच में ऑन और ऑफ होते रहते हैं. इससे कमरे की नमी धीरे-धीरे कम होती है. साथ ही हल्की ठंडक भी बनी रहती है. इस वजह से कमरा आरामदायक महसूस होता है और हवा भी ताजा लगती है.


    Dry Mode का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह कमरे को जरूरत से ज्यादा ठंडा नहीं करता. Cool Mode की तुलना में इसमें तापमान संतुलित बना रहता है. इसलिए लंबे समय तक AC चलाने पर भी ज्यादा ठंड महसूस नहीं होती. इसके अलावा, क्योंकि इस मोड में कंप्रेसर लगातार नहीं चलता, इसलिए कई स्थितियों में बिजली की खपत भी Cool Mode की तुलना में कम हो सकती है. हालांकि यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि कमरे में नमी कितनी है और बाहर का मौसम कैसा है.


    अगर बाहर हल्की या लगातार बारिश हो रही है, कमरे में उमस महसूस हो रही है या सीलन की बदबू आ रही है, तो AC का Dry Mode इस्तेमाल करना बेहतर विकल्प हो सकता है. वहीं, अगर मौसम बहुत गर्म और उमस भरा है, तो पहले कुछ देर Cool Mode चलाकर कमरे का तापमान कम करें और बाद में Dry Mode का इस्तेमाल करें. इससे कमरा ठंडा भी रहेगा और नमी भी कम होगी.

  • 100 साल पुराने आम के बाग ने दिलाया इस किसान को अवॉर्ड, इनकी खूबियां भी जान लीजिए…

    100 साल पुराने आम के बाग ने दिलाया इस किसान को अवॉर्ड, इनकी खूबियां भी जान लीजिए…

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    लखनऊ में आयोजित प्रदेश स्तरीय आम महोत्सव में सहारनपुर के मुजफ्फराबाद ब्लॉक के गांव रणडौल के किसान बसंत कुमार ने जिले का नाम पूरे प्रदेश में रोशन कर दिया. बागवानी की बेहतरीन तकनीक, दुर्लभ आम की किस्मों के संरक्षण और प्राकृतिक तरीके से बागों की देखरेख के लिए उन्हें प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें ट्रॉफी, प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया. इस उपलब्धि से पूरे जिले में खुशी का माहौल है.

    100 साल पुराने पुश्तैनी बाग की करते हैं देखभाल
    72 वर्षीय बसंत कुमार ने बताया कि वे अपने बागों की देखभाल बच्चों की तरह करते हैं. उनके पास करीब ढाई एकड़ में फैला 100 साल से भी अधिक पुराना पुश्तैनी आम का बाग है, जिसे उनके पिता ने लगाया था और जो आज भी भरपूर फल दे रहा है. उन्होंने बताया कि वे बागों में प्रतिबंधित कीटनाशकों का प्रयोग नहीं करते. समय-समय पर जुताई, खरपतवार की सफाई और प्राकृतिक तरीकों से पौधों की सुरक्षा करते हैं. पुराने पेड़ों को बचाने के साथ-साथ उनकी कलम तैयार कर नई पौध भी विकसित कर रहे हैं, ताकि यह विरासत आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रह सके.

    1984 से तैयार किए 130 बीघा में आम के बाग
    बसंत कुमार ने बताया कि वर्ष 1984 से उन्होंने खुद बाग तैयार करने का काम शुरू किया था. आज उनके हाथों से करीब 130 बीघा क्षेत्र में आम के बाग विकसित हो चुके हैं. उनके बागों में आम की 20 से अधिक प्रजातियां मौजूद हैं. लखनऊ आम महोत्सव में वे अपने भतीजे योगेश और समधी विनोद पुंडीर के साथ 16 किस्म के आम लेकर पहुंचे थे. इनमें फजली, तोतापरी, मलियागिरि, मल्लिका, रामकेला, जाफरान, मालदा, लंगड़ा, चौसा, हाथीफूल समेत कई दुर्लभ और उत्कृष्ट किस्में शामिल थीं. जिला उद्यान अधिकारी द्वारा निरीक्षण और रिपोर्ट भेजे जाने के बाद लखनऊ से आई टीम ने भी उनके बाग का दौरा किया था.

    ‘यह सम्मान पूरे जिले और गांव के किसानों का है’
    सम्मान मिलने के बाद भावुक हुए बसंत कुमार ने कहा कि सबसे बड़ी खुशी इस बात की है कि मुख्यमंत्री ने मंच से सबसे पहले उनके गांव रणडौल और सहारनपुर का नाम लिया. उन्होंने कहा कि वे खुद को एक छोटा किसान मानते हैं, लेकिन यह सम्मान पूरे जिले और गांव के किसानों का सम्मान है. मुख्यमंत्री ने उन्हें शील्ड, प्रशस्ति पत्र और एक पौधा भी भेंट किया. बसंत कुमार का कहना है कि उनकी कोशिश रहेगी कि पारंपरिक बागवानी, आम की पुरानी दुर्लभ किस्मों के संरक्षण और प्राकृतिक खेती को आगे बढ़ाते हुए नई पीढ़ी को भी इससे जोड़ा जाए.

  • राखी भी, हरियाली भी! मथुरा जेल की महिला कैदियों की अनूठी पहल, राखी के बाद बन जाएगी पौधा​​​​

    राखी भी, हरियाली भी! मथुरा जेल की महिला कैदियों की अनूठी पहल, राखी के बाद बन जाएगी पौधा​​​​

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    मथुरा जिला कारागार में बंदियों के सुधार और उनके पुनर्वास के लिए अलग-अलग तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. इसी कड़ी में आगामी रक्षाबंधन पर्व को देखते हुए महिला बंदियों को इको-फ्रेंडली राखियां बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. एक सामाजिक संस्था की ओर से महिला बंदियों को यह प्रशिक्षण दिया जा रहा है.

    20 महिला बंदियों को दिया जा रहा प्रशिक्षण
    इस कार्यक्रम में जिला कारागार की 20 महिला बंदियां शामिल हैं. इन्हें इको-फ्रेंडली राखियां तैयार करना सिखाया जा रहा है. राखियां बनाने को लेकर महिला बंदियों में भी काफी उत्साह देखने को मिल रहा है. इस बार राखियां तैयार करने में एक खास तरह का प्रयोग भी किया जा रहा है. इनमें फूलों और सब्जियों के बीजों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे राखी रक्षाबंधन के बाद भी उपयोगी बनी रहे.

    राखी से तैयार हो सकेगा पौधा
    इन इको-फ्रेंडली राखियों की खासियत यह है कि त्योहार के बाद इन्हें फेंकने की जरूरत नहीं होगी. राखी में इस्तेमाल किए गए फूल और सब्जियों के बीजों को घर के गमले या गार्डन में लगा कर नया पौधा उगाया जा सकता है. ऐसा करने पर समय के साथ इन बीजों से फूल या सब्जियों का पौधा तैयार हो सकेगा. इस तरह राखी का इस्तेमाल होने के बाद भी उससे पौधा तैयार करने की कोशिश की जा रही है.

    रोज बन रही हैं 200 राखियां
    जिला कारागार अधीक्षक अंशुमान गर्ग के मुताबिक, इस समय महिला बंदियों को इको-फ्रेंडली राखियां बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. उन्होंने बताया कि 20 महिला बंदियां इस काम को सीख रही. फिलहाल प्रतिदिन करीब 200 राखियों का निर्माण किया जा रहा है. इस बार राखियों को पहले से अलग बनाने के लिए नया प्रयोग भी किया गया. इसमें मोतियों की मदद से आकर्षक राखियां तैयार की जा रही हैं.

    जेल के बाहर लगेगा राखियों का स्टॉल
    महिला बंदियों द्वारा तैयार की जा रही राखियों को आम लोगों तक पहुंचाने की भी व्यवस्था बनाई गई है. इन राखियों की बिक्री के लिए जिला कारागार के गेट के बाहर स्टॉल लगाया जाएगा. जिला कारागार अधीक्षक अंशुमान गर्ग ने बताया कि राखियों का स्टॉल मुलाकात घर के बाहर लगाया जाएगा. यहां आम जनमानस इन राखियों को खरीद सकेगा. राखियां लागत मूल्य पर बिक्री के लिए उपलब्ध कराई जाएंगी.

  • प्रेग्नेंसी समझकर लोग देते रहे बधाई, लेकिन पेट फूलने की असली वजह सामने आई तो मचा हड़कंप​​​​

    प्रेग्नेंसी समझकर लोग देते रहे बधाई, लेकिन पेट फूलने की असली वजह सामने आई तो मचा हड़कंप​​​​

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    फूलता ही जा रहा था महिला का पेट, लोग समझ रहे थे गर्भवती, डॉक्टर को दिखाया तो खिसकी पैरों तले जमीन!

    लंदन. यूके के स्विंडन शहर की रहने वाली 51 वर्षीय डेब्स डनहम की जिंदगी में कुछ साल पहले एक ऐसा खौफनाक मोड़ आया, जिसने उनकी सेहत, पहचान और आत्मविश्वास को पूरी तरह झकझोर कर रख दिया. साल 2020 में जब डेब्स 44 साल की थीं और अपनी नॉर्मल व हेल्दी लाइफ जी रही थीं, तब अचानक उनका पेट अजीब तरीके से बाहर निकलने लगा. जिम में साइकिल चलाते समय बार-बार उनका घुटना पेट से टकराने लगा. शुरुआत में उन्होंने इसे सामान्य मानते हुए मेनोपॉज का असर समझा. वे लगातार पुदीने की चाय पीने लगीं और पेट की गैस कम करने की दवाइयां निगलने लगीं. लेकिन पेट का आकार रुकने के बजाय दिन-ब-दिन बढ़ता ही गया. स्थिति इतनी बिगड़ गई कि बाहर निकलने पर लोग उन्हें गर्भवती समझने लगे. खुद उनके पति ने भी टोकते हुए कहा कि वे दिखने में प्रेग्नेंट लग रही हैं.

    डेब्स इतनी असहज महसूस करने लगीं कि उन्होंने शीशे के सामने जाना और पति के सामने कपड़े बदलना तक बंद कर दिया. जब कोई भी घरेलू नुस्खा काम नहीं आया और पेट गुब्बारे की तरह फूलता चला गया, तो वे डॉक्टर के पास पहुंचीं. डॉक्टरों ने तुरंत एमआरआई स्कैन और ब्लड टेस्ट किए. इसके बाद जब रिपोर्ट सामने आई तो डेब्स और उनके परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई. उनके पेट के अंदर 20 सेंटीमीटर बड़ा कैंसरयुक्त ट्यूमर तेजी से बढ़ रहा था. जान बचाने के लिए डॉक्टरों ने तुरंत सर्जरी कर पेट में जमा तरल पदार्थ को बाहर निकाला और गर्भाशय हटाने की प्रक्रिया को अंजाम दिया. सर्जरी पूरी तरह सफल रही और डेब्स कैंसर से मुक्त हो गईं. लेकिन इस गंभीर इलाज और सर्जिकल मेनोपॉज ने उनके शरीर पर भारी असर डाला. कैंसर के तनाव और बदले हुए हार्मोनल असंतुलन के कारण उनकी खाने-पीने की आदतें बुरी तरह बिगड़ गईं.

    डेब्स इसकी वजह से डिप्रेशन में चली गईं और बहुत ज्यादा खाना खाने लगीं, जिसके चलते उनका वजन बढ़कर लगभग 99 किलो तक पहुंच गया. उनके साइज के कपड़े छोटे पड़ने लगे. बीमारी के बाद ये भी एक ऐसा दौर था, जब वजन बढ़ने से डेब्स का आत्मविश्वास दोबारा डगमगाने लगा. लेकिन सितंबर 2023 में उन्होंने हार न मानते हुए खुद को बदलने का फैसला किया. उन्होंने वजन घटाने वाले इंजेक्शनों का सहारा लेने के बजाय संतुलित पोषण और सही पोर्शन कंट्रोल वाली डाइट प्लान की मदद ली. उन्होंने पोर्शन-कंट्रोल मील डिलीवरी का तरीका अपनाया और 9 महीनों के भीतर लगभग 29 किलो वजन कम कर लिया. आज 51 साल की उम्र में डेब्स पूरी तरह फिट हैं और उनकी शादीशुदा जिंदगी में भी पुरानी खुशियां लौट आई हैं.

  • डॉक्टर ने कहा- आपके ड्राइवर की सर्जरी सफल रही… मालिक बोला- ‘वह ड्राइवर नहीं, 15 साल से मेरा साथी है’, इलाज का खर्च भी उठाया..

    डॉक्टर ने कहा- आपके ड्राइवर की सर्जरी सफल रही… मालिक बोला- ‘वह ड्राइवर नहीं, 15 साल से मेरा साथी है’, इलाज का खर्च भी उठाया..

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    अक्सर लोग अपने ड्राइवर, घरेलू मदद या कर्मचारियों को सिर्फ स्टाफ मानते हैं. लेकिन मुंबई के एक कारोबारी ने यह सोच बदलने वाली मिसाल पेश की. जब उनके 15 साल पुराने ड्राइवर को हार्ट बायपास सर्जरी की जरूरत पड़ी, तो उन्होंने बिना एक पल सोचे इलाज का पूरा खर्च उठा लिया. इतना ही नहीं, जब डॉक्टर ने उन्हें धन्यवाद कहा, तो उनका जवाब हर किसी के दिल को छू गया. उन्होंने कहा- ‘वह मेरा ड्राइवर नहीं, मेरा सहयोगी है.’

    डॉक्टर ने सरकारी अस्पताल जाने की दी थी सलाह
    मुंबई के हार्ट सर्जन डॉ. प्रशांत मिश्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस घटना को साझा किया. उन्होंने बताया कि एक ड्राइवर को हार्ट बायपास सर्जरी की जरूरत थी. प्राइवेट अस्पताल में इस ऑपरेशन का खर्च करीब 4.25 लाख रुपए था. परिवार की आर्थिक स्थिति देखते हुए डॉक्टर ने सलाह दी कि वे सरकारी अस्पताल में इलाज कराएं, जहां खर्च कम होगा. लेकिन मरीज के बेटे ने साफ कहा कि इलाज इसी अस्पताल में होगा. अगले दिन डॉक्टर को पता चला कि मरीज के मालिक ने आरटीजीएस के जरिए पूरी रकम सीधे अस्पताल के खाते में भेज दी.

    ऑपरेशन के बाद डॉक्टर ने किया फोन
    सर्जरी सफल होने के बाद डॉ. मिश्रा ने मरीज के मालिक को फोन कर इसकी जानकारी दी. उन्होंने कहा, ‘आपके सहयोग के लिए धन्यवाद, श्री शुक्ला की सर्जरी सफल रही.’  इस पर सामने से जवाब आया,’धन्यवाद डॉक्टर, आपने मेरे सहयोगी का इतना अच्छा ख्याल रखा.’ डॉक्टर को यह सुनकर हैरानी हुई. उन्होंने पूछा, ‘क्या वह आपके ड्राइवर नहीं हैं?’

    हम दोनों काम करते हैं, बस जिम्मेदारियां अलग हैं
    मालिक का जवाब डॉक्टर के लिए जिंदगी का बड़ा सबक बन गया. उन्होंने कहा, ‘वह पिछले 15 साल से मेरे साथ हैं. मैं उन्हें सिर्फ ड्राइवर नहीं मानता. मैं भी काम करता हूं और वह भी काम करते हैं. हमारी जिम्मेदारियां अलग हैं, लेकिन हम एक ही टीम का हिस्सा हैं. इसलिए वह मेरे सहयोगी हैं.’ डॉक्टर ने कहा कि यह बात उनके दिल को छू गई और उन्हें एहसास हुआ कि किसी भी कर्मचारी का सम्मान उसके पद से नहीं, बल्कि उसके योगदान से होना चाहिए.

    डॉ. मिश्रा ने अपनी पोस्ट के आकिर में लिखा कि हमें अपने घरेलू सहायकों, ड्राइवरों और अन्य कर्मचारियों को सिर्फ नौकर नहीं समझना चाहिए. ये वही लोग हैं, जो हमारी रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाते हैं. इसलिए उन्हें भी बराबर सम्मान और गरिमा मिलनी चाहिए.

  • शानदार नौकरी और ₹2 लाख की सैलरी… फिर भी लड़की ने कहा ‘नहीं’! वजह ने सबको चौंकाया..

    शानदार नौकरी और ₹2 लाख की सैलरी… फिर भी लड़की ने कहा ‘नहीं’! वजह ने सबको चौंकाया..

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    Viral Post : आज के दौर में शादी सिर्फ दो लोगों का रिश्ता नहीं, बल्कि उनकी सोच, प्राथमिकताओं और जीवनशैली का भी मेल है. सोशल मीडिया पर इन दिनों नंदिनी नाम की एक वर्किंग महिला की कहानी चर्चा में है. नंदिनी आईटी सेक्टर में काम करती हैं और करीब 90 हजार रुपये महीने कमाती हैं. वह अकेले रहती हैं और अपनी स्वतंत्र जिंदगी को काफी पसंद करती हैं.

    नंदिनी ने अपने एक्स हैंडल पर एक मुलाकात से जुड़ा अनुभव साझा किया. उनके मुताबिक, परिवार के कहने पर वह एक ऐसे युवक से मिलने पहुंचीं, जिसकी मासिक आय करीब 2 लाख रुपये बताई गई. शुरुआत में सब कुछ सामान्य था, लेकिन बातचीत आगे बढ़ने के साथ दोनों की सोच में अंतर साफ दिखाई देने लगा.

    शादी के बाद नौकरी को लेकर हुई बात

    नंदिनी के अनुसार, युवक के माता-पिता आर्थिक रूप से उस पर निर्भर हैं. परिवार में एक शादीशुदा बहन भी है, जिसकी मदद की उम्मीद अक्सर रहती है. दूसरी तरफ नंदिनी की अपनी जिंदगी अलग है. वह अकेले रहती हैं और फिलहाल उन पर बड़ी पारिवारिक आर्थिक जिम्मेदारियां नहीं हैं.

    मुलाकात के दौरान युवक ने नंदिनी से पूछा कि अगर वह खुद को फेमिनिस्ट मानती हैं तो शादी के बाद परिवार के खर्चों में आधा योगदान करेंगी या नहीं. नंदिनी ने बिना झिझक कहा कि अगर दोनों काम कर रहे हैं तो वह अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार हैं.

    इसके बाद बातचीत ने नया मोड़ लिया. युवक ने उनसे पूछा कि क्या वह शादी के बाद नौकरी छोड़कर घर संभाल सकती हैं. नंदिनी ने साफ कर दिया कि वह अपनी नौकरी छोड़ने के पक्ष में नहीं हैं. बताया गया कि युवक ने आगे महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता पर भी सवाल उठाया. यही बात नंदिनी को सबसे ज्यादा असहज लगी.

    फ्रेंच फ्राइज खाते हुए दिया जवाब

    नंदिनी ने गुस्सा करने के बजाय बेहद शांत तरीके से अपनी बात रखी. उन्होंने सवाल किया कि अगर युवक को ऐसी पत्नी चाहिए जो घर संभाले और नौकरी न करे, तो वह ऐसी महिला की तलाश क्यों नहीं करता जो खुद भी यही जीवन चाहती हो?

    उनका कहना था कि किसी स्वतंत्र महिला को शादी के बाद उसकी इच्छा के खिलाफ अपनी नौकरी और आर्थिक आजादी छोड़ने के लिए मजबूर करना उचित नहीं है. बातचीत के अंत में युवक ने पूछा कि क्या नंदिनी उसे रिजेक्ट कर रही हैं. नंदिनी ने स्पष्ट रूप से हां कहा और बताया कि वह अपनी स्वतंत्रता और मौजूदा जीवनशैली को महत्व देती हैं. इसके बाद उन्होंने अपना हिस्सा खुद चुकाया और वहां से चली गईं. नंदिनी के मुताबिक, उनकी मां इस फैसले से करीब दो सप्ताह तक नाराज रहीं, लेकिन बाद में स्थिति सामान्य हो गई.

    सोशल मीडिया पर मिली प्रतिक्रिया

    नंदिनी की कहानी सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई. कई यूजर्स ने उनके फैसले का समर्थन किया. लोगों का कहना था कि शादी में दोनों पक्षों की अपेक्षाएं पहले से स्पष्ट होना बेहतर है.

    कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि अगर किसी व्यक्ति को गृहिणी जीवनसाथी चाहिए, तो उसे उसी तरह की सोच रखने वाले साथी की तलाश करनी चाहिए. वहीं, कई लोगों ने नंदिनी की स्पष्टता की तारीफ करते हुए कहा कि शादी समझौता जरूर हो सकती है, लेकिन अपनी पहचान और पसंद को पूरी तरह छोड़ देना जरूरी नहीं.  यह खबर सोशल मीडिया पर उपलब्ध वीडियो और जानकारी पर आधारित है. न्यूज18 इस वीडियो से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता है.

  • महंगाई ने रोमांस का बजट किया कम! अब कपल्स महंगे रेस्टोरेंट नहीं, कर रहे Low-Budget Date

    महंगाई ने रोमांस का बजट किया कम! अब कपल्स महंगे रेस्टोरेंट नहीं, कर रहे Low-Budget Date

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    आजकल डेट पर जाना सिर्फ क्या पहनें और कहां जाएं तक सीमित नहीं रह गया है. डेट से पहले कपड़े, ग्रूमिंग, कैब या पेट्रोल और फिर रेस्टोरेंट का बिल… हर चीज जेब पर भारी पड़ती है. यही वजह है कि Gen Z और मिलेनियल्स के बीच अब महंगी डेट के बजाय कम खर्च में साथ वक्त बिताने का ट्रेंड बढ़ रहा है. इसे Infladating या Dateflation कहा जा रहा है.

    डेटिंग पर समझदारी से पैसा खर्च करना
    Infladating दो शब्दों Inflation और Dating से मिलकर बना है. आसान भाषा में इसका मतलब है महंगाई को देखते हुए डेटिंग पर समझदारी से पैसा खर्च करना. यानी पहली मुलाकात के लिए महंगे रेस्टोरेंट, लग्जरी गिफ्ट या लंबी ड्राइव जरूरी नहीं. अब लोग पार्क में टहलने, कॉफी पीने, घर पर खाना बनाने या साथ फिल्म देखने जैसे सस्ते विकल्प चुन रहे हैं.

    अमेरिका में एक डेट का औसत खर्च 18 हजार रुपए तक पहुंचा
    महंगाई का असर डेटिंग पर कितना पड़ा है, इसका अंदाजा अमेरिका के आंकड़ों से लगाया जा सकता है. BMO Financial Group के 2026 Real Financial Progress Index के मुताबिक, अमेरिका में एक डेट का औसत खर्च करीब 189 डॉलर यानी लगभग 18 हजार रुपए तक पहुंच गया है. इसमें डेट पर होने वाले खर्च के साथ ग्रूमिंग, आने-जाने के लिए गैस आदि का खर्च भी शामिल है. रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में डेटिंग कर रहे लोगों ने साल में औसतन 12 डेट कीं, जबकि 2024 में यह संख्या 14 थी. यानी खर्च बढ़ने के साथ लोगों ने डेट की संख्या भी कम कर दी. एक सर्वे में Gen Z ने एक डेट पर औसतन 205 डॉलर और मिलेनियल्स ने 252 डॉलर खर्च किए. करीब 47% सिंगल्स का मानना था कि डेटिंग उनके लिए खर्च के हिसाब से बहुत महंगी पड़ रही है.

    अब महंगी डेट के बदले क्वालिटी टाइम जरूरी
    Infladating को सिर्फ पैसे बचाने का तरीका समझना सही नहीं होगा. रिलेशनशिप एक्सपर्ट्स का मानना है कि कम बजट वाली डेट कई बार रिश्ते के लिए ज्यादा बेहतर हो सकती है. महंगे डिनर की जगह पार्क में वॉक, घर पर साथ खाना बनाना, लाइब्रेरी जाना या फिल्म देखना लोगों को एक-दूसरे से बात करने और समझने का ज्यादा मौका देता है.

    पहली डेट पर जरूरत से ज्यादा खर्च भी रेड फ्लैग
    दिलचस्प बात यह है कि डेट पर बहुत ज्यादा पैसा खर्च करना अब हमेशा अच्छी बात नहीं मानी जा रही. पहली ही मुलाकात में महंगा डिनर, महंगे गिफ्ट या जरूरत से ज्यादा रोमांस सामने वाले को प्रभावित करने के बजाय सवाल खड़े कर सकता है. अगर किसी रिश्ते में शुरुआत से ही दिखावे और पैसों का दबाव ज्यादा हो, तो यह रेड फ्लैग भी हो सकता है.

    पैसे पर खुलकर बात करना भी डेटिंग का हिस्सा
    Infladating का एक फायदा यह भी है कि युवा अब रिश्तों में पैसों को लेकर ज्यादा खुलकर बात कर रहे हैं. पहले पार्टनर के सामने अपनी खर्च की आदतों पर बात करना अजीब माना जाता था. अब Financial Compatibility भी रिश्ते का अहम हिस्सा बन रही है.