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  • OMG! किताबों में नहीं, अपनी आंखों से देखी दुनिया, 33 साल में घूमने के लिए बंदे ने खर्च किए 15 करोड़..

    OMG! किताबों में नहीं, अपनी आंखों से देखी दुनिया, 33 साल में घूमने के लिए बंदे ने खर्च किए 15 करोड़..

    OMG! किताबों में नहीं, अपनी आंखों से देखी दुनिया, 33 साल में घूमने के लिए बंदे ने खर्च किए 15 करोड़..

    Getty Images

    दुनिया घूमने का सपना बहुत से लोग देखते हैं, लेकिन उसे पूरा करने के लिए सालों तक लगातार सफर करते रहना हर किसी के बस की बात नहीं होती. चीन के 53 वर्षीय चेन जिनवेई ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है. उन्होंने 33 साल तक दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की यात्रा की और हाल ही में पेरू से लौटने के साथ 233 देशों, क्षेत्रों और इलाकों की अपनी यात्रा पूरी कर ली.

    चेन चीन के झेजियांग प्रांत के झूजी शहर के रहने वाले हैं और एक मशीनरी कंपनी चलाते हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन में अब तक करीब 70 लोग ही 233 देशों और क्षेत्रों की यात्रा कर पाए हैं. अपने इस लंबे सफर पर चेन ने करीब 10 मिलियन युआन यानी लगभग 15 लाख अमेरिकी डॉलर खर्च किए. उनकी दुनिया घूमने की शुरुआत साल 1993 में हुई थी. सबसे पहले उन्होंने सिंगापुर, मलेशिया और थाईलैंड की यात्रा की. उस दौर में इंटरनेट आज की तरह आम नहीं था. चेन बताते हैं कि उनके मन में हमेशा यह जानने की इच्छा थी कि दुनिया के दूसरे हिस्से में असल जिंदगी कैसी है. वह किताबों या दूसरों की बातों के बजाय खुद वहां जाकर चीजों को देखना चाहते थे.

    33 साल में घूम डाली पूरी दुनिया

    हालांकि, बिजनेस और परिवार की जिम्मेदारियां भी उनके साथ थीं. इसलिए उन्होंने अपने सफर का एक अलग तरीका बनाया. वह करीब एक महीना घर पर रहते और अगले महीने यात्रा पर निकल जाते. इस तरह उन्होंने धीरे-धीरे अपने काम, परिवार और दुनिया घूमने के सपने के बीच संतुलन बनाए रखा. चेन ने जानबूझकर कई मुश्किल जगहों को शुरुआत में ही अपनी लिस्ट में शामिल किया. इनमें ध्रुवीय इलाके भी थे. अंटार्कटिका पहुंचने की उनकी पहली कोशिश नवंबर 2015 में नाकाम हो गई.

    जिस फ्रांसीसी अभियान क्रूज जहाज से वह जा रहे थे, उसमें तीसरे दिन बिजली की समस्या आ गई और जहाज से काला धुआं निकलने लगा. उन्हें यात्रा बीच में ही छोड़नी पड़ी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. जनवरी 2016 में वह दोबारा निकले और इस बार सफलतापूर्वक अंटार्कटिका पहुंच गए. चेन के मुताबिक, न्यूजीलैंड का छोटा सा द्वीप क्षेत्र टोकेलाउ उनकी सबसे मुश्किल मंजिलों में से एक था. 2019 में तमाम तैयारियों और जरूरी प्रक्रियाओं के बावजूद उन्हें वहां की यात्रा रद्द करनी पड़ी. इस साल उन्होंने फिर कोशिश की और आखिरकार टोकेलाउ के एटोल पर कदम रख दिया. वहां पहुंचकर उन्होंने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि वह बेहद उत्साहित थे.

    इस लंबे सफर के दौरान चेन को कई मुश्किल हालातों का भी सामना करना पड़ा. अफ्रीका में उन्हें मलेरिया हो गया, जबकि ग्रीस में उन्होंने भूकंप तक झेला. उनका कहना है कि ऐसे अनुभवों ने उन्हें मुश्किल परिस्थितियों में खुद को संभालना सिखाया. वह कहते हैं कि किसी समस्या के सामने आने पर पहले शांत रहना चाहिए और फिर उसका हल सोचना चाहिए. चेन के लिए दुनिया घूमना सिर्फ मशहूर जगहों पर जाकर फोटो खिंचवाना नहीं था. वह जहां भी जाते, वहां की संस्कृति और लोगों को करीब से समझने की कोशिश करते और ज्यादा से ज्यादा समय बिताते. उन्होंने 198 देशों की मुद्राएं भी इकट्ठी कीं, जिन्हें बाद में शू शियाके मेमोरियल हॉल को दान कर दिया.

    चीन के मशहूर भूगोलवेत्ता और यात्री शू शियाके को चीन का शुरुआती ट्रैवल ब्लॉगर भी कहा जा सकता है. चेन खुद भी मानते हैं कि यात्रा और बिजनेस में काफी समानताएं हैं. उनके मुताबिक, जिंदगी में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन जो काम शुरू किया है, उसमें लगातार लगे रहना जरूरी है. दुनिया घूमने की इच्छा रखने वाले उन लोगों के लिए, जो अक्सर समय या पैसे की कमी का बहाना बनाते हैं, चेन की सलाह सीधी है कि इंतजार मत करो. समय किसी का इंतजार नहीं करता.

    अब 33 साल के इस सफर के बाद चेन अपने बच्चों और माता-पिता के साथ ज्यादा वक्त बिताना चाहते हैं. इसके अलावा उनकी योजना पर्यटन और आउटडोर इंडस्ट्री से जुड़े 100 प्रमुख लोगों का इंटरव्यू करने और उनकी जिंदगी की कहानियां दर्ज करने की भी है. हालांकि, इंटरनेट पर कुछ लोगों ने यह भी कहा कि चेन जैसा सफर पूरा करने के लिए समय और पैसा दोनों चाहिए, जो आम लोगों के लिए बड़ी सुविधाएं हैं.

  • कुदरत के ये 5 लाल फल किडनी और लिवर को रख सकते हैं दुरुस्त, रिसर्च से जानिए इनके फायदे

    कुदरत के ये 5 लाल फल किडनी और लिवर को रख सकते हैं दुरुस्त, रिसर्च से जानिए इनके फायदे

    कुदरत के ये 5 लाल फल किडनी और लिवर को रख सकते हैं दुरुस्त, रिसर्च से जानिए इनके फायदे

    Red Fruits Benefits in Hindi: खराब लाइफस्टाइल, अनहेल्दी खानपान और प्रदूषण के कारण आजकल शरीर में टॉक्सिन्स जमा होना एक आम समस्या बन चुका है। इसका सीधा बुरा असर हमारे शरीर के दो सबसे महत्वपूर्ण अंगों किडनी और लिवर पर पड़ता है। लिवर हमारे शरीर का सबसे बड़ा ठोस आंतरिक अंग है, जो अकेले 500 से ज्यादा जरूरी काम संभालता है। वहीं, किडनी हमारे शरीर की ‘छन्नी’ यानी फिल्टर है, जो पोषक तत्वों को रोककर बेकार लिक्विड को शरीर से बाहर निकालती है। जब इन दोनों अंगों पर गंदगी या टॉक्सिन्स का बोझ बढ़ता है, तो शरीर से एक्स्ट्रा केमिकल्स, सोडियम, कैल्शियम और पानी बाहर नहीं निकल पाते। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारी प्रकृति में कुछ ऐसे चमत्कारी और पोषक तत्वों से भरपूर फल मौजूद हैं, जो शरीर को अंदर से डिटॉक्स में मदद कर सकते हैं?

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों और कई रिसर्च के मुताबिक, लाल रंग के फलों जैसे अनार, सेब, और स्ट्रॉबेरी में भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स, विटामिन्स और आयरन पाए जाते हैं। ये फल न केवल किडनी और लिवर के फंक्शन को बेहतर बनाते हैं, बल्कि नसों में खून की कमी (Anemia) को दूर करने में भी बेहद मददगार साबित होते हैं। आइए जानते हैं कि वो कौन से 5 लाल फल हैं जिन्हें डाइट में शामिल कर आप एक हेल्दी और एक्टिव लाइफ जी सकते हैं।

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    अनार

    गहरे लाल दानों वाला अनार हर जरूरी पोषक तत्व से भरपूर होता है। इसमें अच्छी मात्रा में पोटैशियम पाया जाता है, जो किडनी को फिल्टर करने और उसकी गहराई से सफाई करने के लिए जाना जाता है। रोजाना अनार खाने से किडनी में स्टोन (पथरी) होने का खतरा टलता है और लिवर में जमा गंदगी आसानी से फ्लश आउट हो जाती है। Journal of Ethnopharmacology और U.S. National Institutes of Health (NIH) में प्रकाशित क्लिनिकल स्टडी के अनुसार, अनार का अर्क शरीर में मैक्रोफेज (Immunological Cells) को सक्रिय करता है जो लिवर की सूजन को घटाते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि नेफ्रोलॉजी की रिसर्च साबित करती है कि अनार किडनी में कैल्शियम ऑक्सालेट को आपस में चिपक कर क्रिस्टल बनने से रोकता है। इसका हाई-पोटैशियम खून से सोडियम के टॉक्सिक लेवल को यूरिन के रास्ते बाहर फ्लश आउट कर देता है।

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    लाल अंगूर

    हेल्थ रिपोर्ट्स के मुताबिक, गहरे लाल या रक्ताभ रंग के अंगूर किडनी को डिटॉक्स करने में बेहद असरदार हैं। इनमें खास तरह का ‘फ्लेवेनॉइड’ और कई ताकतवर एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो किडनी की सूजन को कम करते हैं और लिवर को अंदर से साफ रखकर उसे सुचारू रूप से काम करने में मदद करते हैं। Food and Chemical Toxicology Journal और World Journal of Gastroenterology के मुताबिक लाल और गहरे रंग के अंगूरों के छिलके में ‘रेस्वेराट्रोल’ (Resveratrol) नामक एक चमत्कारी एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है। क्लिनिकल ट्रायल्स में यह साबित हुआ है कि रेसवेराट्रॉल लिवर में फैट जमा होने की प्रक्रिया (Fatty Liver Disease) को रोकता है। किडनी के स्तर पर, यह फ्री-रेडिकल्स को नष्ट कर रीनल टिश्यूज के डैमेज को रिवर्स करने की क्षमता रखता है।

    बेरीज

    बेरीज परिवार के फल जैसे स्ट्रॉबेरी, क्रैनबेरी और रस्पबेरी अपने चटक लाल रंग और बेमिसाल फायदों के लिए जाने जाते हैं। इनके एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइटोकेमिकल्स लिवर-किडनी की कोशिकाओं की सूजन और तनाव को दूर करते हैं। स्ट्रॉबेरी को तो नेचुरल डिटॉक्स ड्रिंक माना जाता है, जबकि न्यूट्रिशन जर्नल के अनुसार, रोजाना क्रैनबेरी जूस पीने से यूरिन इन्फेक्शन (UTI) का खतरा पूरी तरह खत्म हो जाता है। The Journal of Nutrition और American Journal of Clinical Nutrition के मुताबिक क्रैनबेरी और स्ट्रॉबेरी पर की गई रिसर्च दर्शाती है कि इनमें ‘प्रोएन्थोसायनिडिन्स’ पाए जाते हैं। यह तत्व यूरिनरी ट्रैक्ट (मूत्र मार्ग) की दीवारों पर हानिकारक बैक्टीरिया (E. coli) को चिपकने नहीं देता, जिससे UTI (यूरिन इन्फेक्शन) का खतरा 40% तक कम हो जाता है। इसके अलावा, बेरीज का नियमित सेवन लिवर के एंटीऑक्सीडेंट एंजाइम ‘ग्लूटाथियोन’ (Glutathione) के स्तर को प्राकृतिक रूप से बढ़ा देता है।

    सिट्रस और हाइड्रेटिंग फ्रूट जूस

    हेल्थलाइन की रिपोर्ट के अनुसार, नींबू, संतरे और तरबूज का जूस किडनी और लिवर की सर्विसिंग के लिए बेस्ट है। इन रसीले फलों का जूस शरीर में लिक्विड बैलेंस (फ्लूइड) को बनाए रखता है। इसके नियमित सेवन से यूरिन के रास्ते टॉक्सिन्स बाहर निकल जाते हैं, जिससे किडनी में पथरी जमने का रिस्क न के बराबर हो जाता है। Nutrients Journal और European Urology की रिपोर्ट के मुताबिक नींबू, संतरे और मौसमी जैसे खट्टे फलों में ‘साइट्रिक एसिड’ (Citric Acid) उच्च मात्रा में होता है। मेडिकल साइंस के अनुसार, यूरिन में साइट्रेट का स्तर बढ़ने से यह किडनी में पहले से मौजूद छोटी पथरी को तोड़ देता है और नई पथरी बनने की प्रक्रिया को पूरी तरह ब्लॉक कर देता है। इसके अलावा, विटामिन-सी लिवर के डिटॉक्स की प्रक्रिया को तेज करता है।

    तरबूज

    अंदर से एकदम लाल दिखने वाला तरबूज पानी, मिनरल्स और खास एंटीऑक्सीडेंट्स का खजाना है। यह लिवर और किडनी की अंदरूनी सूजन को शांत करता है। तरबूज का सेवन किडनी में फॉस्फेट, ऑक्ज़ेलेट, साइट्रेट और कैल्शियम के स्तर को संतुलित रखता है, जिससे शरीर का पूरा फिल्टर सिस्टम दुरुस्त रहता है। International Journal of Food Sciences and Nutrition के मुताबिक तरबूज में प्रचुर मात्रा में पानी के साथ ‘एल-सिट्रूलीन’ (L-Citrulline) नामक एक महत्वपूर्ण अमीनो एसिड होता है। यह रिसर्च साबित करती है कि साइट्रुलिन शरीर में प्रोटीन के पाचन से बनने वाले खतरनाक ‘अमोनिया’ को यूरिक एसिड और यूरिया में बदलकर शरीर से सुरक्षित बाहर निकालने में लिवर की मदद करते है। यह किडनी पर बिना अतिरिक्त दबाव डाले यूरिन के फ्लो (Diuretic Effect) को बढ़ाता है, जिससे शरीर का पूरा फिल्टर सिस्टम साफ हो जाता है।

    डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जागरूकता और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध वैज्ञानिक शोधों (Scientific Research) पर आधारित है। यह किसी भी प्रकार से योग्य डॉक्टर, न्यूट्रिशनिस्ट या चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं है। लिवर और किडनी शरीर के बेहद संवेदनशील अंग हैं। यदि आप पहले से ही किडनी स्टोन, क्रोनिक किडनी डिसीज (CKD), फैटी लिवर, हाई पोटैशियम या किसी अन्य गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं, तो अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या इन फलों, जूस का नियमित सेवन शुरू करने से पहले अपने विशेषज्ञ डॉक्टर या क्लीनिकल डायटीशियन से सलाह अवश्य लें।

  • इस मुर्गी की कीमत है बाइक-कार जितनी, हजारों रुपये का मिलता है एक अंडा, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान.

    इस मुर्गी की कीमत है बाइक-कार जितनी, हजारों रुपये का मिलता है एक अंडा, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान.

    इस मुर्गी की कीमत है बाइक-कार जितनी, हजारों रुपये का मिलता है एक अंडा, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान.

    इंडोनेशिया की दुर्लभ आयाम सेमानी मुर्गी अपनी काली त्वचा और अनोखे रूप के लिए मशहूर है. चलिए आपको बताते हैं इसके अंडे की खासियत, कीमत और सेहत से जुड़े दावों के बारे में.

    अंडा सुनते ही आमतौर पर हमारे दिमाग में प्रोटीन और हेल्दी डाइट का ख्याल आता है. लेकिन क्या आपने कभी ऐसी मुर्गी के बारे में सुना है, जिसकी कीमत एक अच्छी मोटरसाइकिल या कार जितनी हो सकती है? जी हां, इंडोनेशिया की आयाम सेमानी (Ayam Cemani) ऐसी ही दुर्लभ मुर्गी है. इसे दुनिया की सबसे अनोखी नस्लों में गिना जाता है और इसकी खासियत के कारण इसे ‘लैंबोर्गिनी ऑफ चिकन’ भी कहा जाता है.

    इसकी कीमत और अंडों की खासियत इसे आम मुर्गियों से बिल्कुल अलग बनाती है.पूरी तरह काले रंग की होती है यह मुर्गी आयाम सेमानी मुर्गी को देखकर पहली नजर में ही इसकी अलग पहचान हो जाती है. इसके पंख, त्वचा, पैर, मांस और यहां तक कि हड्डियां और अंदरूनी अंग भी गहरे काले रंग के होते हैं.

    इसके पीछे फाइब्रोमेलानोसिस नाम का जेनेटिक बदलाव जिम्मेदार है. इसकी वजह से शरीर में मेलेनिन पिगमेंट का उत्पादन बहुत ज्यादा होता है, जिससे इसका शरीर काला दिखाई देता है. आयाम सेमानी को लेकर एक दिलचस्प बात यह है कि इसके अंडे मुर्गी की तरह काले नहीं होते. इनके अंडे आमतौर पर हल्के क्रीम या ऑफ-व्हाइट रंग के होते हैं. हालांकि, यह नस्ल दुर्लभ होने के कारण इसके अंडों की कीमत सामान्य अंडों की तुलना में काफी ज्यादा हो सकती है.क्या इसका अंडा ज्यादा पौष्टिक है?

    आयाम सेमानी के अंडे को लेकर कई जगहों पर इसे ज्यादा प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट वाला सुपरफूड बताया जाता है. हालांकि, इन दावों को लेकर मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं. इसलिए इसे सामान्य अंडे से कई गुना ज्यादा हेल्दी मानना सही नहीं होगा. अंडे में प्रोटीन, विटामिन और कई जरूरी पोषक तत्व जरूर पाए जाते हैं.शौकीनों के लिए है लग्जरी ब्रीड आयाम सेमानी मुर्गी कम संख्या में अंडे देती है और इसकी ब्रीडिंग भी आसान नहीं मानी जाती. इसकी दुर्लभता और अनोखे रूप के कारण दुनिया के कई हिस्सों में इसे शौक के तौर पर पाला जाता है. बड़े फार्म हाउस और ब्रीडिंग के शौकीन लोगों के बीच इसकी खास मांग है. यही वजह है कि इसे सिर्फ मुर्गी नहीं, बल्कि लग्जरी और स्टेटस सिंबल के तौर पर भी देखा जाता है.

  • हजारों दीपों से जगमगाएगी रामनगरी, 7 नवंबर को अयोध्या में दिखेगा दीपोत्सव का भव्य और दिव्य नजारा

    हजारों दीपों से जगमगाएगी रामनगरी, 7 नवंबर को अयोध्या में दिखेगा दीपोत्सव का भव्य और दिव्य नजारा

    हजारों दीपों से जगमगाएगी रामनगरी, 7 नवंबर को अयोध्या में दिखेगा दीपोत्सव का भव्य और दिव्य नजारा

    रामनगरी अयोध्या में इस साल 7 नवंबर को होने वाला दीपोत्सव भव्यता और आध्यात्मिकता का खास संगम बनने जा रहा है. दीपोत्सव को यादगार बनाने के लिए प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं.

    एक ओर जहां दीपों के जरिए नया विश्व कीर्तिमान बनाने की तैयारी है, वहीं दूसरी ओर सरयू घाटों को भी बेहद खूबसूरत बनाने की योजना पर काम चल रहा है. शाम होते ही दीपों की रोशनी से सरयू तट का नजारा बेहद खास दिखाई देगा.एक किलोमीटर तक सजेंगे सरयू के घाट दीपोत्सव के दौरान सरयू नदी के पुल से लेकर लक्ष्मण घाट तक करीब एक किलोमीटर लंबे घाट क्षेत्र को आकर्षक तरीके से सजाया जाएगा. घाटों पर रंग-बिरंगी लाइटिंग के साथ फूलों की विशेष सजावट की जाएगी. दीप जलने के बाद पूरा सरयू तट रोशनी से जगमगा उठेगा. प्रशासन की कोशिश है कि यहां आने वाले

    श्रद्धालुओं और पर्यटकों को एक अलग और यादगार अनुभव मिले.महाआरती में दिखेगी अवध की संस्कृति मुख्य आयोजन के दिन सरयू घाटों पर भव्य महाआरती भी प्रस्तावित है. इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच मां सरयू की आरती की जाएगी. हजारों दीपों की रोशनी और सरयू की लहरों का नजारा श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण रहेगा. महाआरती के जरिए अवध की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं की खूबसूरत झलक भी देखने को मिलेगी.घाटों के रिनोवेशन का काम जारी दीपोत्सव को लेकर अयोध्या पहुंचने वाले श्रद्धालुओं में अभी से उत्साह देखने को मिल रहा है. सरयू घाटों पर रिनोवेशन का काम भी जारी है. काम पूरा होने के बाद घाटों को और भव्य रूप देने की तैयारी है. इससे दीपोत्सव के दौरान सरयू तट की खूबसूरती और बढ़

    जाएगी.प्रशासन ने शुरू की तैयारियां जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी के मुताबिक, इस बार दीपोत्सव का आयोजन 7 नवंबर को किया जाना है. इसे लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. अधिकारियों की बैठकें हो रही हैं और अलग-अलग विभागों को जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं. प्रशासन का लक्ष्य है कि इस बार अयोध्या का दीपोत्सव भव्य आयोजन के साथ श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक और यादगार अनुभव भी बने.

  • रगड़-रगड़कर हो गए परेशान, नहीं​​​​​ जा रहे सोफे से जिद्दी दाग… एक बार ट्राय करें ये क्लीनिंग सॉल्यूशन, सब सामान मिलेगा किचन में ही

    रगड़-रगड़कर हो गए परेशान, नहीं​​​​​ जा रहे सोफे से जिद्दी दाग… एक बार ट्राय करें ये क्लीनिंग सॉल्यूशन, सब सामान मिलेगा किचन में ही

    रगड़-रगड़कर हो गए परेशान, नहीं​​​​​ जा रहे सोफे से जिद्दी दाग… एक बार ट्राय करें ये क्लीनिंग सॉल्यूशन, सब सामान मिलेगा किचन में ही

    सोफा हर घर में इस्तेमाल होने वाली एक आम चीज़ है. इसका इस्तेमाल लगभग रोज होता है, इस वजह से यह गंदा भी काफी होता है. साफ करलो लेकिन कुछ समय बाद उस पर धूल, मिट्टी और खाने-पीने के दाग दिखने लगते हैं. कई बार सोफे को साफ करने के लिए महंगे क्लीनर खरीदने पड़ते हैं.

    क्या आप जानते हैं कि आप चाहें तो घर में मौजूद कुछ चीजों की मदद से भी सोफे को साफ कर सकते हैं. इसके लिए बेकिंग सोडा, सिरका, डिश सोप और पानी का इस्तेमाल किया जा सकता है. ऐसी ही एक आसान सफाई का तरीका है, जिसमें गर्म पानी, सिरका, डिश सोप और बेकिंग सोडा मिलाकर मिक्सचर तैयार किया जाता है.

    सबसे पहले सोफे की धूल करें साफ

    सोफा साफ करने से पहले उसकी धूल और गंदगी हटाना जरूरी है. इसके लिए वैक्यूम क्लीनर का इस्तेमाल करें. अगर वैक्यूम क्लीनर नहीं है तो सूखे और साफ कपड़े से सोफे की सतह को अच्छी तरह पोंछ लें. इससे ऊपर जमी धूल निकल जाएगी और दाग साफ करना आसान होगा.

    घर पर ऐसे बनाएं सफाई का घोल

    एक स्प्रे बोतल लें. इसमें एक कप गुनगुना पानी डालें. अब इसमें एक बड़ा चम्मच सिरका और एक छोटा चम्मच डिश सोप मिलाएं. इसके बाद एक छोटा चम्मच बेकिंग सोडा डालें. सभी चीजों को अच्छी तरह मिलाएं. बेकिंग सोडा डालने पर झाग बन सकता है, इसलिए घोल तैयार करते समय ध्यान रखें.

    गंदे स्पॉट्स पर ऐसे करें इस्तेमाल

    तैयार घोल को सीधे पूरे सोफे पर ज्यादा क्वांटिटी में न डालें. पहले इसे दाग वाली जगह पर हल्का स्प्रे करें. अब मुलायम कपड़े या सॉफ्ट ब्रश की मदद से उस जगह को धीरे-धीरे रगड़ें. बहुत ज्यादा जोर से रगड़ने से कपड़े का रंग या बनावट खराब हो सकती है. सफाई के बाद गीले कपड़े से उस जगह को पोंछ दें.

    सबसे पहले करें पैच टेस्ट

    हर सोफे का कपड़ा अलग होता है. इसलिए सफाई का घोल इस्तेमाल करने से पहले सोफे के किसी छिपे हुए छोटे हिस्से पर इसे लगाकर देखें. अगर कपड़े का रंग नहीं बदलता और कोई नुकसान नहीं होता, तभी इसे बाकी हिस्से पर इस्तेमाल करें. सोफा साफ करने के बाद उसे अच्छी तरह सूखने दें. गीले सोफे पर तुरंत न बैठें, क्योंकि इससे नमी और बदबू की समस्या हो सकती है.

  • झारखंड में छिपी है ‘मंगल​​​​​ ग्रह जैसी’ अनोखी जगह! लाल चट्टानों और गहरी घाटी का नजारा देख हैरान रह गए लोग.

    झारखंड में छिपी है ‘मंगल​​​​​ ग्रह जैसी’ अनोखी जगह! लाल चट्टानों और गहरी घाटी का नजारा देख हैरान रह गए लोग.

    झारखंड में छिपी है ‘मंगल​​​​​ ग्रह जैसी’ अनोखी जगह! लाल चट्टानों और गहरी घाटी का नजारा देख हैरान रह गए लोग.

    झारखंड को अक्सर अपनी हरियाली, पहाड़ों और झरनों के लिए जाना जाता है, लेकिन यहां कुछ ऐसी जगहें भी हैं जिनका नजारा आपको धरती से कहीं दूर किसी दूसरे ग्रह की याद दिला सकता है। इन दिनों चतरा जिले की एक ऐसी ही खूबसूरत जगह का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर लोग इसे ‘वैली ऑफ मार्स’ यानी मंगल ग्रह की घाटी कह रहे हैं।

    लाल रंग की चट्टानें, गहरी घाटियां और उनके बीच बहता पानी इस जगह को बेहद अनोखा रूप देते हैं। वायरल तस्वीरों और वीडियो में इसका नजारा इतना अलग दिखाई देता है कि पहली नजर में कई लोगों को यकीन करना मुश्किल हो रहा है कि यह जगह झारखंड में ही मौजूद है।

    चतरा की ‘वैली ऑफ मार्स’ ने खींचा लोगों का ध्यान

    जिस जगह की चर्चा हो रही है, उसका नाम बंदारू खैवा जलप्रपात बताया जाता है। इसे स्थानीय तौर पर खैवा पिकनिक स्पॉट के नाम से भी जाना जाता है। यह झारखंड के चतरा जिले के लावालौंग क्षेत्र में स्थित है।

    यहां मौजूद लाल और खुरदरी चट्टानों का आकार बेहद अनोखा है। घाटी का पूरा दृश्य दूर से देखने पर किसी दूसरे ग्रह की सतह जैसा नजर आता है। यही वजह है कि स्थानीय स्तर पर इसे ‘वैली ऑफ मार्स’ के नाम से भी जाना जाता है।

    लाल चट्टानों के बीच बहती है फल्गु नदी

    इस जगह की खूबसूरती सिर्फ चट्टानों तक सीमित नहीं है। घाटी के बीच से फल्गु नदी बहती है, जो पूरे इलाके के प्राकृतिक सौंदर्य को और बढ़ा देती है।

    लाल रंग की चट्टानों और पानी के बीच बना यह प्राकृतिक दृश्य खासकर प्रकृति और एडवेंचर पसंद करने वाले लोगों को आकर्षित कर सकता है। स्थानीय मान्यताओं में यहां की चट्टानों को लेकर अलग-अलग बातें भी कही जाती हैं और कुछ लोग इन्हें भगवान विश्वकर्मा की अद्भुत रचना से जोड़कर देखते हैं।

    सोशल मीडिया पर वायरल हुआ नजारा

    इस जगह का वीडियो ट्रैवल क्रिएटर फहाद हैदर ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर किया था। इसके बाद यह क्लिप तेजी से लोगों का ध्यान खींचने लगी।

    वीडियो देखने के बाद कई यूजर्स ने हैरानी जताई कि झारखंड में इतनी अनोखी जगह मौजूद है, जिसके बारे में उन्हें जानकारी ही नहीं थी। कुछ लोगों ने चट्टानों की बनावट को देखकर इसे मंगल ग्रह की सतह जैसा बताया।

    हालांकि, सोशल मीडिया पर वायरल किसी भी वीडियो की तरह इसके जरिए दिखाई गई जगह और दावों को साझा करने से पहले स्थानीय जानकारी और आधिकारिक पर्यटन स्रोतों से पुष्टि करना बेहतर है।

    चतरा से कितनी दूर है यह जगह?

    जानकारी के मुताबिक, बंदारू खैवा जलप्रपात चतरा जिला मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर की दूरी पर बताया जाता है। वहीं राजधानी रांची से इसकी दूरी लगभग 150 किलोमीटर बताई गई है।

    इलाके तक पहुंचने वाला रास्ता कुछ हिस्सों में कच्चा और मुश्किल हो सकता है। खासकर बारिश के मौसम में सड़क और आसपास का इलाका फिसलन भरा हो सकता है। इसलिए यहां जाने वाले पर्यटकों को मौसम, सड़क की स्थिति और स्थानीय लोगों की सलाह का ध्यान रखना चाहिए।

    झारखंड में छिपा है प्रकृति का ये अनोखा नजारा

    झारखंड के जंगलों, पहाड़ों और झरनों के बीच ऐसी कई प्राकृतिक जगहें मौजूद हैं, जो अभी भी आम पर्यटकों की नजरों से दूर हैं। बंदारू खैवा का यह अनोखा भू-दृश्य भी इसी प्राकृतिक खूबसूरती की एक झलक पेश करता है।

    वायरल वीडियो ने एक बार फिर झारखंड के इस हिस्से को सोशल मीडिया पर चर्चा में ला दिया है। लाल चट्टानों और घाटी का अनोखा नजारा देखकर लोग इसे ‘धरती का मंगल ग्रह’ कह रहे हैं।

     

     

     

  • शाम होते ही लाइट के​​​​​ पास जमा हो जाते हैं कीड़े? इन उपायों से पाएं मच्छर-मक्खियों और कीड़ों से छुटकारा..

    शाम होते ही लाइट के​​​​​ पास जमा हो जाते हैं कीड़े? इन उपायों से पाएं मच्छर-मक्खियों और कीड़ों से छुटकारा..

    शाम होते ही लाइट के​​​​​ पास जमा हो जाते हैं कीड़े? इन उपायों से पाएं मच्छर-मक्खियों और कीड़ों से छुटकारा..

    मानसून का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है, लेकिन इस दौरान घर में छोटे-छोटे कीड़ों की परेशानी बढ़ जाती है. शाम होते ही लाइट के आसपास मच्छर, छोटी मक्खियां और दूसरे उड़ने वाले कीड़े मंडराने लगते हैं. कई बार ये कीड़े घर के अंदर भी पहुंच जाते हैं और खाने-पीने की चीजों पर बैठकर गंदगी के साथ बीमारियों का खतरा बढ़ा सकते हैं.

    हालांकि, कुछ आसान उपायों की मदद से इनकी परेशानी को काफी हद तक कम किया जा सकता है. चलिए जानते हैं कैसे…ऐसी लाइट का इस्तेमाल करें उड़ने वाले कीड़े रात के समय तेज रोशनी की ओर आकर्षित होते हैं. खासकर तेज सफेद रोशनी के आसपास इनकी संख्या ज्यादा दिखाई दे सकती है. ऐसे में बालकनी, दरवाजे या गार्डन में कम UV वाली LED लाइट लगाना बेहतर विकल्प हो सकता है. इसके अलावा, बाहर की जगहों पर वॉर्म या पीली रोशनी वाली LED का इस्तेमाल भी किया जा सकता है.नेचुरल रिपेलेंट आजमाएं कुछ पौधों और एसेंशियल ऑयल की तेज खुशबू कीड़ों को दूर रखने में मदद कर सकती है. लैवेंडर, पेपरमिंट, सिट्रोनेला और यूकेलिप्टस जैसे ऑयल का इस्तेमाल किया जा सकता है.

    इन्हें इस्तेमाल करने से पहले लेबल के निर्देश जरूर पढ़ें और त्वचा या पालतू जानवरों के संपर्क से बचाएं. बालकनी या गार्डन में तुलसी, रोजमेरी और लेमनग्रास जैसे पौधे लगाना भी एक आसान विकल्प है.पानी जमा न होने दें मानसून में घर के आसपास पानी जमा न होने दें. गमलों की प्लेट, बाल्टी, कूलर और पुराने डिब्बों में जमा पानी मच्छरों के लिए पनपने की जगह बन सकता है. इसलिए इन्हें नियमित रूप से खाली और साफ करते रहें.खिड़की-दरवाजों के गैप करें सील खिड़की, दरवाजे, दीवार या छत में छोटे गैप दिखाई दें तो उन्हें सील कर दें. साथ ही लाइट, खिड़की और आसपास की जगह को साफ रखें. इन आसान उपायों से मानसून में घर को साफ रखने के साथ कीड़ों की परेशानी भी कम की जा सकती है.

  • नदी में आराम कर रहा​​​​​ था बच्चा, तभी पास आ गया विशाल मगरमच्छ; आगे जो हुआ उसे देखकर हैरान रह गए लोग

    नदी में आराम कर रहा​​​​​ था बच्चा, तभी पास आ गया विशाल मगरमच्छ; आगे जो हुआ उसे देखकर हैरान रह गए लोग

    नदी में आराम कर रहा​​​​​ था बच्चा, तभी पास आ गया विशाल मगरमच्छ; आगे जो हुआ उसे देखकर हैरान रह गए लोग

    Viral Video: सोशल मीडिया पर एक हैरान करने वाला वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें एक बच्चा नदी के पानी में एक छोटे फ्लोटिंग बोर्ड पर आराम करता नजर आ रहा है। इसी दौरान एक मगरमच्छ तैरता हुआ उसके बेहद करीब पहुंच जाता है। इसके बाद बच्चे की प्रतिक्रिया देखकर लोग हैरान रह गए।

    पानी में आराम कर रहा था बच्चा, तभी पहुंचा मगरमच्छ

    वायरल वीडियो में दिखाई देता है कि बच्चा नदी के पानी में एक छोटी नाव के पास बने फ्लोटिंग बोर्ड पर लेटा हुआ है। वह बिल्कुल आराम से नजर आ रहा है और आसपास का माहौल भी शांत दिखाई देता है।

    तभी पानी में हलचल होती है और एक मगरमच्छ धीरे-धीरे तैरते हुए बच्चे की ओर बढ़ने लगता है। जैसे-जैसे मगरमच्छ बच्चे के करीब आता है, यह दृश्य देखने वालों के लिए काफी डरावना हो जाता है।

    मगरमच्छ के बेहद करीब पहुंच गया बच्चा

    वीडियो के अगले हिस्से में बच्चा मगरमच्छ के साथ बेहद सहज नजर आता है। वह उसके करीब जाता हुआ दिखाई देता है और मगरमच्छ भी कुछ समय तक शांत रहता है। इसी वजह से वीडियो देखने वाले लोग हैरान रह गए।

    हालांकि, वीडियो में दिखाई देने वाली स्थिति को देखकर इसे सुरक्षित व्यवहार नहीं माना जा सकता। मगरमच्छ जंगली और बेहद ताकतवर शिकारी होते हैं। उनका शांत दिखाई देना इस बात की गारंटी नहीं है कि वे इंसानों के लिए सुरक्षित हैं।

    सोशल मीडिया पर लोगों ने दिए अलग-अलग रिएक्शन

    वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ लोगों ने बच्चे के आत्मविश्वास को देखकर हैरानी जताई, जबकि कई यूजर्स ने उसकी सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की।

    लोगों का कहना है कि मगरमच्छ के साथ इस तरह करीब जाना बेहद जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे जंगली जानवरों से हमेशा सुरक्षित दूरी बनाए रखना जरूरी है।

    वायरल वीडियो देखकर न करें ऐसी गलती

    सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो में अक्सर पूरी परिस्थिति दिखाई नहीं देती। इसलिए किसी वीडियो को देखकर उसी तरह का स्टंट या प्रयोग करना खतरनाक हो सकता है।

    खासकर बच्चों को मगरमच्छ जैसे जंगली जानवरों से दूर रखना बेहद जरूरी है। जानवर शांत नजर आए, तब भी उसके व्यवहार में अचानक बदलाव आ सकता है।

     

     

     

    डिस्क्लेमर: यह खबर सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और उससे जुड़ी प्रतिक्रियाओं पर आधारित है। वीडियो में दिखाई देने वाली घटना की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है।

  • नारियल तेल असली है या​​​​​ मिलावटी? घर पर इन 4 आसान तरीकों से करें पहचान..

    नारियल तेल असली है या​​​​​ मिलावटी? घर पर इन 4 आसान तरीकों से करें पहचान..

    नारियल तेल असली है या​​​​​ मिलावटी? घर पर इन 4 आसान तरीकों से करें पहचान..

    नारियल तेल का इस्तेमाल लगभग हर घर में होता है, कोई इसे खाना बनाने के लिए रखता है, तो कोई बालों और त्वचा की देखभाल के लिए. लेकिन क्या जो नारियल तेल आप इस्तेमाल कर रहे हैं, वह वाकई शुद्ध है?

    बाजार में कई बार मिलावट वाला तेल भी मिल सकता है. तो चलिए आपको कुछ ऐसे तरीकों के बारे में बताते हैं जिससे आप असली और नकली नारियल तेल की पहचान कर सकते हैं.फ्रिज टेस्ट से करें जांच नारियल तेल को आप फ्रिज टेस्ट कर सकते हैं. इसके लिए थोड़ा सा तेल साफ कांच की कटोरी में डालकर कुछ घंटों के लिए फ्रिज में रखें. शुद्ध नारियल तेल ठंडे तापमान में जमने लगता है और सफेद या ठोस दिखाई देता है. हालांकि, केवल इस टेस्ट से तेल की शुद्धता तय नहीं की जा सकती,

    क्योंकि तापमान और तेल की प्रोसेसिंग का भी असर पड़ता है.रंग और बनावट पर दें ध्यान नारियल तेल सामान्य तौर पर साफ और एक समान दिखाई देता है. ठंडे मौसम में यह सफेद और ठोस हो सकता है, जबकि गर्म वातावरण में पारदर्शी या हल्का पीला नजर आ सकता है. तेल को पारदर्शी कांच के बर्तन में डालकर रोशनी में देखें. अगर इसमें असामान्य कण, गंदगी या बहुत ज्यादा अलग-अलग परतें नजर आएं, तो सावधान रहें.खुशबू से भी मिल सकता है संकेत वर्जिन या अनरिफाइंड नारियल तेल में नारियल की प्राकृतिक खुशबू होती है. थोड़ी मात्रा हथेली पर लेकर हल्का गर्म करें और इसकी गंध महसूस करें. अगर तेल से तेज केमिकल जैसी गंध, बासीपन या कोई असामान्य महक आ रही है, तो इसकी क्वालिटी पर सवाल उठ सकता है.

    वहीं, रिफाइंड नारियल तेल की खुशबू काफी हल्की हो सकती है.कागज पर डालकर देखें एक साफ सफेद कागज पर नारियल तेल की कुछ बूंदें डालकर थोड़ी देर छोड़ दें. इसके फैलने और बचे हुए अवशेष को देखें. अगर असामान्य रंग या गंदा अवशेष नजर आए, तो यह गुणवत्ता को लेकर संकेत हो सकता है. हालांकि, यह भी केवल शुरुआती घरेलू जांच है.तेल खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान नारियल तेल खरीदते समय पैकेट पर लिखे Ingredients जरूर पढ़ें. पैक की सील, एक्सपायरी डेट, बैच नंबर और FSSAI से जुड़ी जानकारी भी जांचें. सबसे जरूरी बात यह है कि घरेलू टेस्ट मिलावट की पक्की पुष्टि नहीं करते. अगर तेल की गंध, स्वाद या बनावट असामान्य लगे, तो खाने या त्वचा पर लगाने से बचें.

  • घर पर बनाएं कोका-कोला, डायबिटीज​​​​​ मरीज़ों के लिए भी सेफ.. जानें कैसे करें तैयार..

    घर पर बनाएं कोका-कोला, डायबिटीज​​​​​ मरीज़ों के लिए भी सेफ.. जानें कैसे करें तैयार..

    घर पर बनाएं कोका-कोला, डायबिटीज​​​​​ मरीज़ों के लिए भी सेफ.. जानें कैसे करें तैयार..

    गर्मी के मौसम लोग जहां तपिश से तप रहे होते हैं और पसीने से चू रहे होते हैं. ऐसे में वह ऐसी ड्रिंक्स की तलाश करते हैं, जो उनके शरीर तो ठंडक पहुंचा सकें. इसमें जूस, ठंडा पानी, कोल्ड ड्रिंक जैसी ड्रिंक शामिल होती हैं. सबसे आम ड्रिंक की बात करें तो वह कोल्ड ड्रिंक होती है. घर पर मेहमान आ जाएं तो फौरन मार्केट से एक कोल्ड ड्रिंक की बोतल आ जाती है. या फिर कहीं बाहर से आप आएं तो कोल्ड ड्रिंक पीने का मन करता है.

    बेशक कोल्ड ड्रिंक ठंडक देती है, लेकिन एक बात यह भी सच है कि कोल्ड ड्रिंक हमारी सेहत के लिए फायदेमंद नहीं. दरअसल इसमें केमिकल्स होते हैं और काफी ज्यादा मात्रा में शुगर होती है, जो हमारी सेहत पर एक बड़ा हथौड़ा मारती है. खासतौर पर डायबिटीज के पेशेंट्स के लिए यह बिलकुल भी फायदे का सौदा नहीं. ऐसे में आप घर पर खुद सेफ तरीके से कोल्ड ड्रिंक बना सकते हैं.

    किन इंग्रीडिएंट्स की है जरूरत

    घर पर कोल्ड ड्रिंक बनाने के लिए आपको 1 गिलास ठंडा पानी या सोडा, 1 छोटा चम्मच कॉफी, आधा छोटा चम्मच कोको पाउडर, 1 छोटा चम्मच शहद या स्टेविया, आधा छोटा चम्मच नींबू का रस, चुटकी भर काला नमक और कुछ बर्फ के टुकड़े चाहिए होंगे.

    कैसे आएगा कोला जैसा कलर

    सबसे पहले एक गिलास में कॉफी और कोको पाउडर डालें. अब इसमें थोड़ा सा गर्म पानी मिलाकर अच्छे से घोल लें. ध्यान रखें कि मिक्चर स्मूद और हल्का गाढ़ा हो जाए. यही बेस आपके ड्रिंक को कोला जैसा रंग और गहराई देता है. अब इस तैयार मिक्सचर में शहद या स्टेविया डालें और अच्छी तरह से मिक्स करें. यह ड्रिंक को हल्की और बैलेंस्ड मिठास देता है. आप अपनी पसंद के अनुसार मिठास को एडजस्ट कर सकते हैं.

    नींबू से ड्रिंक बनेगी रिफ्रेशिंग

    इसके बाद इसमें नींबू का रस और एक चुटकी काला नमक डालें. यह स्टेप ड्रिंक के फ्लेवर को पूरी तरह बराबर करता है और इसे और ज्यादा रिफ्रेशिंग बनाता है. अब धीरे-धीरे इसमें ठंडा सोडा डालें और हल्के हाथों से मिलाएं. ध्यान रखें कि ज्यादा जोर से न चलाएं, वरना सोडा की फिज खत्म हो सकती है.

    कैसे करें इसे सर्व

    आखिर में बर्फ के टुकड़े डालें और चाहें तो नींबू स्लाइस या पुदीने की पत्तियों से गार्निश करें. आपकी टेस्टी और हेल्दी देसी कोल्ड ड्रिंक तैयार है. आप इसे फौरन सर्व करें जिससे यह फ्रेश रहे और आप पूरा टेस्ट लें सकें.