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  • 35 लाख साल से जमीन में सोया था यह ‘जल-दानव’! जापान में मिली 3 हड्डियों ने उड़ाए वैज्ञानिकों के होश.

    35 लाख साल से जमीन में सोया था यह ‘जल-दानव’! जापान में मिली 3 हड्डियों ने उड़ाए वैज्ञानिकों के होश.

    35 लाख साल से जमीन में सोया था यह ‘जल-दानव’! जापान में मिली 3 हड्डियों ने उड़ाए वैज्ञानिकों के होश.

    35 लाख साल से जमीन के नीचे दफन था एक ऐसा रहस्य, जिसने वैज्ञानिकों की नींद उड़ा दी है. क्या आप जानते हैं कि जिस जापान को हम आज देखते हैं, लाखों साल पहले वहां खौफनाक और विशालकाय ‘जल-दानव’ राज करते थे? लगभग 30 साल पहले मिली 3 हड्डियों के विश्लेषण से अब एक ऐसा सच सामने आया है, जिसने जीव विज्ञान के इतिहास को बदल कर रख दिया है. आइए जानते हैं इस 35 लाख साल पुराने रहस्यमयी जीव की पूरी कहानी.

    30 साल पुराना रहस्य और अजिमू क्षेत्र का चमत्कार

    जापान के अजिमू (Ajimu) इलाके में 1995 से 1997 के बीच खुदाई के दौरान 3 दुर्लभ हड्डियां पाई गई थीं. ये अवशेष त्सुबुसुगावा फॉर्मेशन (Tsubusugawa Formation) नाम की प्राचीन झील की परतों में मिले थे. उस समय वैज्ञानिकों को अंदाजा नहीं था कि ये हड्डियां किसकी हैं, इसलिए इन्हें अस्थायी रूप से एंड्रियास जीनस (Andrias Genus) में रख दिया गया था. ये सैलामैंडर (Giant Salamanders) की एक बहुत बड़ी प्रजाति है. इसमें दुनिया के सबसे बड़े जीवित उभयचर शामिल हैं.

    रीढ़ की हड्डी से खुला नई प्रजाति का राज

    हाल ही में क्योटो यूनिवर्सिटी (Kyoto University) के शोधकर्ताओं ने आधुनिक तकनीक और व्यापक अध्ययनों की मदद से इन जीवाश्मों की बारीकी से जांच की. जांच में पता चला कि इस सैलामैंडर की बीच वाले शरीर की रीढ़ की हड्डी यानी Mid-Trunk Vertebra की बनावट अब तक मिले किसी भी विशाल सैलामैंडर से पूरी तरह अलग थी. इसी वजह से वैज्ञानिकों ने इसे एक बिल्कुल नई प्रजाति और जीनस घोषित किया और नाम दिया- ‘लिम्नोस्पोंडिलस अजिमुएन्सिस’ (Limnospondylus Ajimuensis).

    3.6 फीट लंबा विशालकाय उभयचर

    शोधकर्ताओं के अनुसार, यह रहस्यमयी जीव बहती नदियों की जगह शांत झीलों और दलदली इलाकों में रहता था. वैज्ञानिकों का मानना है कि यह जीव करीब 3.6 फीट यानी 1.1 मीटर तक लंबा रहा होगा. ये खोज एशिया के जीवाश्म रिकॉर्ड में पिछले 2 करोड़ सालों से चली आ रही कमी को पूरा करती है.

  • 1.5 करोड़ की नौकरी को मारी लात, अब महीने में कमा रही है सिर्फ ₹500! वायरल हुई स्टोरी…

    1.5 करोड़ की नौकरी को मारी लात, अब महीने में कमा रही है सिर्फ ₹500! वायरल हुई स्टोरी…

    1.5 करोड़ की नौकरी को मारी लात, अब महीने में कमा रही है सिर्फ ₹500! वायरल हुई स्टोरी…

    टोरंटो की प्रोडक्ट डिजाइनर हेइगी जियोंग ने 1.5 करोड़ की कॉर्पोरेट नौकरी छोड़कर कंटेंट क्रिएशन चुना. जानिए क्यों एक साल के इस जोखिम भरे फैसले की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है.

    क्या आप अपनी 1.5 करोड़ रुपए सालाना की आरामदायक नौकरी सिर्फ अपने शौक और क्रिएटिविटी के लिए छोड़ सकते हैं? ज्यादातर लोग ऐसा करने से पहले हजार बार सोचेंगे. लेकिन टोरंटो में रहने वाली एक प्रोडक्ट डिजाइनर हेइगी जियोंग (Heigi Jeong) ने बिना एक पल गंवाए यह बड़ा कदम उठा लिया.

    जून 2026 में जब हेइगी ने अपनी टेक कंपनी की सुरक्षित नौकरी छोड़ी, तो हर कोई हैरान रह गया. उनके पास 9 से 5 की एक बेहतरीन जॉब थी, जिसमें शानदार सैलरी 1,73,000 डॉलर (यानी करीब 1.5 करोड़ रुपए) मिलती थी, लाइफस्टाइल अच्छा था और छुट्टियों में घूमने की पूरी आजादी भी थी. फिर आखिर ऐसा क्या हुआ कि उन्होंने कॉर्पोरेट दुनिया को अलविदा कह दिया?

    क्यों छोड़ी 1.5 करोड़ की शानदार नौकरी?

    हेइगी को अपनी नौकरी से कोई दिक्कत नहीं थी, लेकिन उनकी लाइफ में काम बहुत ज्यादा बढ़ गया था. एक तरफ फुल-टाइम प्रोडक्ट डिजाइनर की नौकरी, दूसरी तरफ सोशल मीडिया के लिए कंटेंट बनाना और साथ में एक किताब लिखने का बड़ा प्रोजेक्ट भी चल रहा था.

    इन तीनों चीजों को एक साथ संभालना उनके लिए किसी मानसिक प्रताड़ना से कम नहीं था. उन्होंने खुद माना कि यह स्थिति तीन फुल-टाइम नौकरियां एक साथ करने जैसी हो गई थी. इसलिए उन्होंने अपने करियर के सबसे सुरक्षित हिस्से यानी कॉर्पोरेट जॉब को छोड़ने का फैसला किया.

    अब महीने में कमा रही हैं सिर्फ 500 रुपए!

    नौकरी छोड़ने के बाद हेइगी की जिंदगी पूरी तरह बदल चुकी है. कॉर्पोरेट के फिक्स और भारी-भरकम वेतन के उलट अब उनकी कमाई अनिश्चित हो गई है. जुलाई महीने में कंटेंट क्रिएशन से उन्हें सिर्फ 6 डॉलर (लगभग 500 रुपए) ही मिल पाए. हालांकि किताब के एडवांस पैसों से उन्हें थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन हर महीने मिलने वाले पैसों में भारी उतार-चढ़ाव रहता है. कभी कमाई शून्य होती है, तो कभी उम्मीद से ज्यादा. इसके बावजूद वह इसे अपनी नाकामी नहीं मानतीं.

    खुद को दिया है 1 साल का समय

    बिना किसी फिक्स सैलरी के रहना आसान नहीं है. इस्तीफे से पहले हेइगी को भी काफी घबराहट और चिंता हुई थी कि क्या उनका यह फैसला गलत साबित होगा. इस डर को कम करने के लिए उन्होंने खुद को एक साल की समय सीमा दी है.

     

     

     
     
  • Viral Video: रील बनाने के चक्कर में नदी में उतार दी SUV, तेज बहाव के बीच फंसी कार, ऐसे बची लोगों की जान..

    Viral Video: रील बनाने के चक्कर में नदी में उतार दी SUV, तेज बहाव के बीच फंसी कार, ऐसे बची लोगों की जान..

    Viral Video: रील बनाने के चक्कर में नदी में उतार दी SUV, तेज बहाव के बीच फंसी कार, ऐसे बची लोगों की जान..

    सोशल मीडिया पर वायरल होने और कुछ लाइक्स पाने के चक्कर में लोग कई बार ऐसी लापरवाही कर बैठते हैं, जो उनके लिए खतरनाक साबित हो सकती है। जम्मू-कश्मीर के सोनमर्ग से सामने आया एक ऐसा ही मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में है। यहां कुछ युवकों ने कथित तौर पर रील बनाने के लिए अपनी SUV को सिंध नदी के तेज बहाव में उतार दिया। कुछ ही देर में गाड़ी पानी के बीच फंस गई और उसमें सवार लोग खुद मुश्किल में घिर गए।

    तेज बहाव में फंस गई SUV

    वायरल वीडियो में एक महिंद्रा स्कॉर्पियो नदी के पानी के बीच फंसी हुई दिखाई दे रही है। आसपास पानी का बहाव काफी तेज नजर आ रहा है। बताया जा रहा है कि यह घटना होटल सिंध रिसॉर्ट्स के पास हुई।

    जानकारी के मुताबिक, युवक सोशल मीडिया के लिए कंटेंट बनाने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने SUV को नदी के तल में उतार दिया। लेकिन पानी का बहाव उनकी उम्मीद से कहीं ज्यादा तेज था। देखते ही देखते वाहन नदी के बीच फंस गया और उसमें मौजूद लोग भी परेशानी में पड़ गए।

    हालात बिगड़ने के बाद घटना की जानकारी पुलिस को दी गई।

    पुलिस और स्थानीय लोगों ने शुरू किया रेस्क्यू

    सूचना मिलने के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे। सभी ने मिलकर रेस्क्यू अभियान शुरू किया और SUV में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

    राहत की बात यह रही कि घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। बाद में SUV को भी नदी से बाहर निकाल लिया गया।

    वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने जताई नाराजगी

    घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद यूजर्स ने युवकों के इस कदम पर सवाल उठाए। कई लोगों ने इसे खतरनाक लापरवाही बताया। यूजर्स का कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने के लिए इस तरह अपनी और दूसरों की सुरक्षा को खतरे में डालना भारी पड़ सकता है।

    नदी और पहाड़ी इलाकों में पानी का बहाव अचानक तेज हो सकता है। ऐसे में किसी वाहन को नदी के भीतर उतारना बेहद जोखिम भरा हो सकता है। यह घटना भी इसी बात की याद दिलाती है

  • रानी एलिजाबेथ प्रथम के दौर में गुप्त कमरों में क्यों छिपते थे धर्मगुरु, जानिए

    रानी एलिजाबेथ प्रथम के दौर में गुप्त कमरों में क्यों छिपते थे धर्मगुरु, जानिए

    रानी एलिजाबेथ प्रथम के दौर में गुप्त कमरों में क्यों छिपते थे धर्मगुरु, जानिए

    लंदन. कल्पना कीजिए कि आप दीवार के भीतर बनी एक ऐसी तंग और अंधेरी कालकोठरी में खड़े हैं, जहां न आप ठीक से सांस ले सकते हैं और न ही हिल-डुल सकते हैं. बाहर आपकी तलाश में हथियारबंद शिकारी घूम रहे हैं, जो कमरों की नपाई कर रहे हैं. अगर आप जरा सा भी खांसे या जमीन पर पैर की सरसराहट हुई, तो सीधी मौत आपका इंतजार कर रही है. यह कोई थ्रिलर फिल्म की कहानी नहीं, बल्कि 16वीं सदी के इंग्लैंड की वह भयावह हकीकत है, जिसने प्रीस्ट होल्स (Priest Holes) यानी पादरियों के गुप्त ठिकानों को जन्म दिया. 16वीं शताब्दी में यूरोप धार्मिक कट्टरता की आग में जल रहा था. इंग्लैंड के राजा हेनरी आठवें और उनके बाद एडवर्ड छठे ने कैथोलिक चर्च से नाते तोड़कर प्रोटेस्टेंट धर्म को बढ़ावा दिया. लेकिन इसके बाद गद्दी पर बैठीं रानी मैरी, जिन्होंने बड़ी बेरहमी से प्रोटेस्टेंटों को जिंदा जलवा दिया और इतिहास में ‘ब्लडी मैरी’ के नाम से कुख्यात हुईं.

    मैरी के बाद उनकी बहन रानी एलिजाबेथ प्रथम सत्ता में आईं, तो पादरियों और कैथोलिकों पर कहर टूट पड़ा. पोप ने एलिजाबेथ को धर्मद्रोही घोषित कर दिया, जिसके बाद रानी को मारने की साजिशें रची जाने लगीं. गुस्से में आई रानी ने कैथोलिक पादरियों के इंग्लैंड में घुसने पर सख्त रोक लगा दी और जासूसों व प्रीस्ट हंटर्स का खौफनाक जाल बिछा दिया. जो भी पादरी पकड़ा जाता, उसे अमानवीय यातनाएं दी जातीं और सरेआम फांसी पर लटका दिया जाता. ऐसे दौर में पादरियों की जान बचाने के लिए रईस कैथोलिक परिवारों ने अपने बड़े-बड़े महलों और हवेलियों में गुप्त कमरे बनवाने शुरू किए, जिन्हें प्रीस्ट होल्स कहा गया. ये ठिकाने अक्सर सीढ़ियों के नीचे, अंगीठी के पीछे या नकली दीवारों के अंदर बनाए जाते थे. जब प्रीस्ट हंटर्स घर पर छापा मारते, तो वे हफ्तों तक वहीं डेरा डालते. वे कमरों की लंबाई-चौड़ाई नापते, ताकि गुप्त जगह का पता चल सके.

    इस दौरान पादरी उस बेहद तंग जगह में बिना हिले-डुले, अपनी सांसें रोककर कई दिनों तक पड़े रहते थे. कई बार खाने-पानी की कमी या ऑक्सीजन न मिलने के कारण पादरी उस गुप्त ठिकाने के अंदर ही तड़प-तड़पकर दम तोड़ देते थे. इन नामुमकिन से दिखने वाले सीक्रेट चेम्बर्स को बनाने के पीछे एक मास्टरमाइंड जेसुइट निकोलस ओवेन थे. ओवेन ने अपना पूरा जीवन इन गुप्त कमरों को तराशने में लगा दिया. उनकी कारीगरी इतनी बेमिसाल थी कि सदियों बाद भी मकानों के जीर्णोद्धार के दौरान ये कमरे आसानी से नहीं खोजे जा सके. ओवेन ने वॉर्स्टरशायर के हारविंगटन हॉल जैसे महलों में सात-सात प्रीस्ट होल्स बनाए. 1606 में अपने साथी पादरियों को बचाने के लिए ओवेन ने खुद को दुश्मनों के हवाले कर दिया और टॉवर ऑफ लंदन में यातनाएं सहते हुए दम तोड़ दिया. आज ये प्रीस्ट होल्स इतिहास के उस खूनी अध्याय की गवाही देते हैं.

  • मोबाइल की किस्त वसूलने का अजीब तरीका! युवक को बनाया बंधक, ब्लड बैंक ले जाकर निकलवाया खून..

    मोबाइल की किस्त वसूलने का अजीब तरीका! युवक को बनाया बंधक, ब्लड बैंक ले जाकर निकलवाया खून..

    मोबाइल की किस्त वसूलने का अजीब तरीका! युवक को बनाया बंधक, ब्लड बैंक ले जाकर निकलवाया खून..

    लखनऊ के निगोहां इलाके से मोबाइल की किस्त वसूली के नाम पर युवक को बंधक बनाने और उसका खून निकलवाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है. आरोप है कि राजारामखेड़ा गांव निवासी नेवल को मोबाइल दुकानदार के लोगों ने अपने साथ ले जाकर लखनऊ के एक ब्लड बैंक में उसका खून निकलवाया. इसके बाद उसे सदर इलाके के एक मकान में बंधक बनाकर कुछ दिनों तक जबरन मजदूरी भी कराई गई.

    पहली किस्त बकाया होने पर फोन छीना पीड़ित की मां बुजुर्ग जदूराई के मुताबिक, उनके छोटे बेटे नेवल ने करीब एक साल पहले निगोहां कस्बे की गीता मोबाइल शॉप से 21,500 रुपये का सैमसंग मोबाइल जीरो डाउन पेमेंट पर खरीदा था. इसकी 12 महीने की किस्त 2,799 रुपये तय हुई थी. आरोप है कि पहली किस्त बकाया होने पर दुकान के कुछ लोग उनके घर पहुंचे और मोबाइल छीनकर ले गए. इसके करीब एक साल बाद 8 सितंबर को दो लोग स्कूटी से गांव पहुंचे और नेवल को अपने साथ ले गए.

    फोन भी छीना और खून भी लिया नेवल का आरोप है कि उसे लखनऊ के एक ब्लड बैंक ले जाया गया, जहां उसका एक यूनिट खून निकलवाया गया. इसके बाद उसे सदर इलाके के एक मकान में बंधक बनाकर रखा गया और उससे जबरन मजदूरी कराई गई. इसी दौरान आरोपियों ने उसके बड़े भाई राजकुमार को फोन किया और मोबाइल की किस्त के नाम पर 2,799 रुपये ऑनलाइन मंगवा लिए. परिवार ने जब नेवल को छोड़ने की गुहार लगाई तो आरोपियों ने कथित तौर पर 12 हजार रुपये और मांगे.

    रैपिड कैब का किराया भी भरवाया परिजनों का आरोप है कि पैसे नहीं देने पर आरोपियों ने नेवल को जान से मारकर गोमती नदी में फेंकने की धमकी दी. डर के कारण परिवार ने निगोहां थाने में शिकायत की. आरोप है कि पुलिस के हस्तक्षेप के बाद पांचवें दिन नेवल को रैपिड कैब से थाने भेजा गया और उसका किराया भी उसके भाई से ही भरवाया गया. थाने पहुंचने पर नेवल बदहवास हालत में था. परिवार का दावा है कि जब उन्होंने कार्रवाई की मांग की तो उन्हें ही डराया गया और कहा गया कि कार्रवाई करने पर नेवल को भी फंसा दिया जाएगा.

    मुकदमा दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी के निर्देश घर लौटने के बाद नेवल ने परिजनों को पूरी आपबीती बताई, जिसके बाद उसकी बुजुर्ग मां सोमवार को डीसीपी दक्षिणी मोहम्मद मुश्ताक के पास पहुंचीं. उनका आरोप है कि निगोहां थाने में शिकायत के बावजूद उन्हें वहां से लौटा दिया गया. डीसीपी दक्षिणी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए निगोहां थाना प्रभारी को तत्काल मुकदमा दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी के निर्देश दिए हैं. साथ ही उन्होंने कहा कि पुलिस की लापरवाही की भी जांच कराई जाएगी.

    एक साल बाद पैसे के लिए दबाव बनाया पीड़ित के बड़े भाई राजकुमार ने बताया कि नेवल ने 21,500 रुपये का सैमसंग फोन लिया था और उसकी 2,799 रुपये की 12 महीने की किस्त बनी थी. राजकुमार के मुताबिक, फोन लेने के अगले ही महीने दुकान के लड़के मोबाइल वापस ले गए थे, लेकिन करीब एक साल बाद आरोपियों ने दोबारा परिवार पर दबाव बनाया. अब पुलिस पूरे मामले में आरोपियों की भूमिका, युवक को बंधक बनाए जाने, ब्लड बैंक में खून निकलवाने और कथित वसूली के आरोपों की जांच करेगी.

  • सितंबर को मंगल का पुष्य नक्षत्र में प्रवेश, इन 5 राशियों के शुरू होंगे राजसी ठाठ.

    सितंबर को मंगल का पुष्य नक्षत्र में प्रवेश, इन 5 राशियों के शुरू होंगे राजसी ठाठ.

    सितंबर को मंगल का पुष्य नक्षत्र में प्रवेश, इन 5 राशियों के शुरू होंगे राजसी ठाठ.

    ज्योतिष शास्त्रों में मंगल ग्रह को बड़ा बलवान माना जाता है. कहा जाता है कि जिसके जीवन में मंगल का उद्गम होता है, उसके जिंदगी में ऊर्जा, साहस, पराक्रम और संपत्ति की बढ़ोतरी होने लगती है. 24 सितंबर 2026 को सुबह 5:50 बजे के लगभग मंगल ग्रह पुष्य नक्षत्र में प्रवेश करने जा रहे हैं और 17 अक्टूबर तक इसी नक्षत्र में गोचर करते नजर आएंगे. पुष्य नक्षत्र के स्वामी शनि और अधिष्ठाता देवता बृहस्पति माने जाते हैं. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार मंगल के इस नक्षत्र परिवर्तन का असर कुछ राशियों पर पड़ने जा रहा है. इस परिवर्तन के कारण इन 5 राशियों का राजसी ठाठ जागने के योग हैं.

    मेष राशि मेष राशि के जातकों के लिए यह समय उनके पक्ष में रहेगा. सारे रुके हुए काम अपने आप बनते चले जाएंगे. संपत्ति से जुड़े मामलों में लाभ मिल सकता है. व्यापार जातकों को मुनाफा मिलने वाला है और कोई अच्छी खबर भी सामने आ सकती है. जिनके जीवन में परिवार का सहयोग नहीं है, उन्हें अपनों का सहयोग मिलेगा और जीवनसाथी के साथ भी समय अच्छा बीतेगा. मानसिक तनाव कम होने से राहत महसूस हो सकती है.

    कर्क राशि इस परिवर्तन के दौरान मंगल कर्क राशि में ही मौजूद रहेंगे और इसी दौरान पुष्य नक्षत्र में भी प्रवेश करेंगे. इस वजह से इस राशि के लोगों के लिए काम और निजी जीवन से जुड़े मामलों में पॉजिटिव बदलाव देखने को मिल सकता है. इस समय आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा. इसके साथ फैसले लेने का मौका मिलेगा. हालांकि, मंगल कर्क राशि में नीच अवस्था में माने जाते हैं, इसलिए जल्दबाजी से बचकर काम करें और ऐसे ही कोई फैसला न लें.

    वृश्चिक राशि वृश्चिक राशि वालों के लिए मंगल का यह बदलाव भाग्य से जुड़े मामलों में मददगार माना जा सकता है. कामकाज में मेहनत का अच्छा नतीजा मिल सकता है और आगे बढ़ने के नए रास्ते खुल सकते हैं. नौकरी और कारोबार में अपनी स्थिति मजबूत करने का मौका मिलेगा. परिवार और करीबी लोगों का सहयोग भी मिल सकता है.

    कन्या राशि कन्या राशि वालों के लिए मंगल का पुष्य नक्षत्र में जाना मान-सम्मान बढ़ाने वाला माना जा रहा है. नौकरी और व्यापार में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं. लंबे समय से अटके काम पूरे होने की उम्मीद है. रोजी-रोजगार में आगे बढ़ने के मौके मिल सकते हैं और परिवार में भी माहौल अच्छा बना रह सकता है.

    मकर राशि मकर राशि वालों के लिए भी यह समय आर्थिक मामलों में कुछ अच्छे मौके लेकर आ सकता है. कामकाज में मेहनत का फायदा मिल सकता है और व्यापार से जुड़े लोगों को लाभ के अवसर मिल सकते हैं. पुराने कामों को पूरा करने की दिशा में तेजी आ सकती है. धन से जुड़े फैसले लेते समय हालांकि सोच-समझकर आगे बढ़ना बेहतर रहेगा.

    क्या करें उपाय? इस दौरान मंगल से मिलने वाले लाभ पाने के लिए हनुमान जी की पूजा करें और मंगलवार को हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे तो सभी चीजें शुभ-शुभ होती चली जाएगी. जरूरतमंद व्यक्ति की मदद करना और अपनी क्षमता के अनुसार दान करना भी अच्छा रहेगा. साथ ही मंगल के प्रभाव में जल्दबाजी या गुस्से में कोई बड़ा फैसला लेने से बचें.

  • रोटी पर घी लगाकर खाना सेहत के लिए कितना सही है? क्या डायबिटीज में भी खा सकते हैं चिपड़ी रोटी, डायटीशियन से जानिए..

    रोटी पर घी लगाकर खाना सेहत के लिए कितना सही है? क्या डायबिटीज में भी खा सकते हैं चिपड़ी रोटी, डायटीशियन से जानिए..

    भारतीय थाली में गरम-गरम रोटी पर थोड़ा सा देसी घी लगाना सिर्फ स्वाद ही नहीं बढ़ाता, बल्कि सालों पुरानी एक सेहतमंद परंपरा भी मानी जाती है। लेकिन क्या डायबिटीज या हाई ब्लड शुगर जैसी स्थिति में रोटी पर घी लगाकर (चुपड़ी रोटी) खाना सेहत के लिए सुरक्षित है? अक्सर लोग मानते हैं कि घी खाने से मोटापा या शुगर बढ़ता है, वहीं न्यूट्रिशनिस्ट और डायटीशियन की राय इससे बिल्कुल अलग है।

    MOC कैंसर केयर एंड रिसर्च सेंटर, नई दिल्ली की ऑन्कोलॉजी डाइटिशियन Dt. यादव ने बताया घी से हेल्दी फैट्स और कुछ विटामिन मिलते हैं। घी फैट का एक स्रोत है और इसमें ऊर्जा के साथ कुछ वसा में घुलनशील विटामिन जैसे विटामिन A, E और K पाए जाते हैं। एक ग्राम फैट से करीब 9 किलो कैलोरी ऊर्जा मिलती है। हालांकि, घी को हमेशा सीमित मात्रा में ही डाइट में शामिल करना चाहिए। इसकी जरूरत और मात्रा व्यक्ति की कुल कैलोरी जरूरत और स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करती है। आइए एक्सपर्ट्स से समझते हैं कि रोटी पर घी लगाने का आपके मेटाबॉलिज्म पर क्या असर पड़ता है, डायबिटीज में इसे कैसे और कितनी मात्रा में खाना सही है, और इसके पीछे का असली साइंस क्या है।

    रोटी पर घी लगाकर खाना कितना सही?

    रोटी पर थोड़ी मात्रा में घी लगाकर खाना सामान्य तौर पर हानिकारक नहीं है। इससे रोटी में फैट और ऊर्जा जुड़ती है और रोटी का स्वाद बढ़ता है और रोटी नरम भी रहती है जिसे चबाना आसान होता है। खासतौर पर जिन लोगों को रोटी चबाने में परेशानी होती है, उनके लिए घी लगी नरम रोटी खाना आसान हो सकता है। हालांकि, इसे जरूरत से ज्यादा खाने से अतिरिक्त कैलोरी का सेवन बढ़ सकता है।

    घी पाचन पर कैसे करता है असर?

    घी भोजन में फैट की मात्रा बढ़ाता है, इसलिए यह पेट भरा हुआ महसूस कराने में योगदान दे सकता है। इससे कुछ लोगों को लंबे समय तक संतुष्टि महसूस हो सकती है। हालांकि, घी को भूख बढ़ाने या मेटाबॉलिज्म तेज करने वाला खाद्य पदार्थ मानने से पहले व्यक्ति की पूरी डाइट और हेल्थ कंडीशन को ध्यान में रखना जरूरी है।

    एक दिन में कितना घी खाना चाहिए?

    डायटीशियन के मुताबिक, एक सामान्य स्वस्थ व्यक्ति के लिए लगभग 1 से 2 छोटे चम्मच घी पूरे दिन में लिया जा सकता है। वहीं, रोटी पर घी लगाने की बात करें तो करीब आधा छोटा चम्मच घी दो चपातियों पर लगाया जा सकता है। हालांकि, यह एक सामान्य मात्रा है; व्यक्ति की कैलोरी जरूरत, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार मात्रा बदल सकती है।

    डायबिटीज में घी कितना सही?

    डायबिटीज या प्री-डायबिटीज वाले लोगों को घी पूरी तरह बंद करने की जरूरत हर व्यक्ति में नहीं होती, लेकिन इसे सीमित मात्रा में लेना जरूरी है। घी में कार्बोहाइड्रेट नहीं होता, इसलिए यह सीधे तौर पर ब्लड शुगर नहीं बढ़ाता। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि घी डायबिटीज को रोकता या ठीक करता है। डायबिटीज में रोटी की मात्रा, आटे का प्रकार, पूरी डाइट और कुल कैलोरी का ध्यान रखना ज्यादा जरूरी है।

    क्या घी लगाने से रोटी का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है?

    डायटीशियन मानसी के मुताबिक सिर्फ घी लगाने से रोटी का ग्लाइसेमिक लोड कम नहीं माना जा सकता। रोटी मुख्य रूप से कार्बोहाइड्रेट का स्रोत है और उसका ग्लाइसेमिक प्रभाव उसके आटे, मात्रा और भोजन के बाकी हिस्सों पर भी निर्भर करता है। इसलिए डायबिटीज वाले व्यक्ति को यह नहीं मानना चाहिए कि घी लगाने से रोटी ब्लड शुगर के लिए पूरी तरह सुरक्षित हो जाती है।

    कब्ज और पाचन के लिए कितना फायदेमंद?

    घी को पाचन और गट हेल्थ के लिए फायदेमंद माना जाता है और इसमें मौजूद फैटी एसिड शरीर को एनर्जी देता है। हालांकि, केवल घी को कब्ज का इलाज नहीं माना जा सकता। कब्ज से राहत के लिए पर्याप्त फाइबर, पानी, फल-सब्जियां और नियमित शारीरिक गतिविधि भी जरूरी हैं।

    इम्यूनिटी में क्या भूमिका है?

    घी में मौजूद फैट शरीर को वसा में घुलनशील विटामिनों के अवशोषण में मदद कर सकता है। विटामिन A जैसे पोषक तत्व सामान्य इम्यून फंक्शन में भूमिका निभाते हैं। हालांकि, सिर्फ घी खाने से इम्यूनिटी मजबूत होने का दावा नहीं किया जा सकता। इम्यून सिस्टम के लिए संतुलित का सेवन करना जरूरी है।

    मोटापा, फैटी लिवर और हाई कोलेस्ट्रॉल में सावधानी जरूरी

    जिन लोगों को मोटापा, फैटी लिवर या हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या है, उन्हें घी की मात्रा व्यक्ति की मेडिकल स्थिति और डाइट के अनुसार तय करनी चाहिए। डायटीशियन के अनुसार, ऐसे कुछ मरीजों में लगभग 5 ग्राम यानी एक छोटा चम्मच प्रतिदिन की सीमा रखी जा सकती है, जबकि कुछ लोगों को उनकी स्थिति के आधार पर घी से पूरी तरह बचने की सलाह भी दी जा सकती है। इसलिए इन स्थितियों में व्यक्तिगत डाइट प्लान ज्यादा महत्वपूर्ण है।

    हार्ट डिजीज में घी खाने से पहले बरतें सावधानी

    हार्ट से जुड़ी बीमारी वाले लोगों के लिए घी की मात्रा डॉक्टर या डायटीशियन की सलाह के अनुसार तय की जानी चाहिए। खासकर जिन लोगों का LDL कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ है या जिन्हें हृदय संबंधी बीमारी है, उन्हें डाइट में कुल सैचुरेटेड फैट का ध्यान रखना जरूरी है।

    मिलेट्स और मल्टीग्रेन रोटी के साथ भी ले सकते हैं घी

    बाजरा, ज्वार, रागी या अन्य मिलेट्स की रोटी के साथ थोड़ी मात्रा में घी लिया जा सकता है। इससे रोटी का स्वाद और सॉफ्टनेस बढ़ सकती है। हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि घी मिलाने से मिलेट्स के सभी पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ जाती है। संतुलित मात्रा में फैट कुछ वसा में घुलनशील पोषक तत्वों के अवशोषण में मदद कर सकता है।

    घी के साथ एक्सरसाइज भी जरूरी

    अगर डाइट में घी जैसे फैट शामिल किए जा रहे हैं, तो शारीरिक गतिविधि भी महत्वपूर्ण है। खासकर डेस्क जॉब या कम शारीरिक गतिविधि वाली जीवनशैली में जरूरत से ज्यादा घी और अन्य कैलोरी वाले खाद्य पदार्थ लेने से कुल कैलोरी सेवन बढ़ सकता है, जिससे वजन बढ़ने का जोखिम हो सकता है।

    घी खाएं, लेकिन मात्रा का ध्यान रखें

    घी को पूरी तरह खराब या पूरी तरह फायदेमंद मानना सही नहीं है। एक स्वस्थ व्यक्ति संतुलित डाइट के हिस्से के रूप में सीमित मात्रा में घी ले सकता है। वहीं डायबिटीज, मोटापा, फैटी लिवर, हाई कोलेस्ट्रॉल या हृदय रोग जैसी स्थितियों में घी की मात्रा व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति और पूरी डाइट के आधार पर तय की जानी चाहिए।

    डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। घी किसी बीमारी का इलाज या उसे रोकने की गारंटी नहीं देता। डायबिटीज, मोटापा, फैटी लिवर, हाई कोलेस्ट्रॉल या हृदय संबंधी बीमारी से जूझ रहे लोग घी की मात्रा अपने डॉक्टर या डायटीशियन की सलाह से तय करें।

  • तिरुमाला गर्भगृह में क्यों नहीं है कोई घंटी? जानिए वो दिव्य रहस्य, जिससे जन्मा था चमत्कारी बालक..

    तिरुमाला गर्भगृह में क्यों नहीं है कोई घंटी? जानिए वो दिव्य रहस्य, जिससे जन्मा था चमत्कारी बालक..

    तिरुमाला गर्भगृह में क्यों नहीं है कोई घंटी? जानिए वो दिव्य रहस्य, जिससे जन्मा था चमत्कारी बालक..

    विश्व प्रसिद्ध तिरुमाला स्थित भगवान श्री वेंकटेश्वर स्वामी (बालाजी) मंदिर अपनी भव्यता, चमत्कारों और अनूठी परंपराओं के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है. अमूमन हर हिंदू मंदिर के गर्भगृह में पूजा-आरती के समय बजाने के लिए छोटी घंटियां जरूर होती हैं, लेकिन तिरुमाला के मुख्य गर्भगृह में ऐसा नहीं है. गर्भगृह के भीतर घंटी न होने के पीछे जहां एक ओर भगवान के परम भक्त और वैष्णव संत श्री वेदांत देशिका से जुड़ी एक बेहद सुंदर लोककथा प्रचलित है. वहीं, दूसरी ओर इसके पीछे प्राचीन ‘वैखानस आगम’ शास्त्र के कड़े नियम भी शामिल हैं. आइए जानते हैं इस रहस्य की पूरी इनसाइड स्टोरी.

    पारंपरिक मान्यताओं और स्थानीय लोककथाओं के अनुसार, तिरुमाला के गर्भगृह में घंटी न होने का संबंध वैष्णव परंपरा के महान संत श्री वेदांत देशिका के जन्म से जुड़ा हुआ है. प्राचीन काल में द्रोथम्बा और अनंत सूर्य नामक एक परम भक्त विवाहित जोड़ा रहता था. विवाह के बारह वर्ष बीत जाने के बाद भी उन्हें कोई संतान नहीं हुई थी. संतान प्राप्ति की इच्छा लेकर दोनों ने तिरुमाला में भगवान वेंकटेश्वर की कड़ी आराधना की.

    उनकी निश्चल भक्ति से प्रसन्न होकर एक रात भगवान वेंकटेश्वर स्वामी ने दोनों को स्वप्न में दर्शन दिए. भगवान ने अपने हाथ की दिव्य घंटी द्रोथम्बा को प्रसाद स्वरूप देते हुए उसे निगलने का आदेश दिया और आशीर्वाद दिया कि उनके घर एक महान दिव्य पुत्र का जन्म होगा. सुबह जागने पर पति-पत्नी ने पाया कि दोनों को एक जैसा ही स्वप्न आया था.

    गायब हो गई मंदिर की मुख्य घंटी

    अगली सुबह जब मंदिर के पुजारियों ने पट खोले, तो गर्भगृह की मुख्य घंटी वहां से गायब थी. शुरुआत में पुजारियों को लगा कि दंपत्ति ने घंटी चुराई है. लेकिन तभी ध्यानमग्न मुख्य पुजारी को भगवान ने दर्शन देकर समझाया कि वह घंटी उन्होंने स्वयं द्रोथम्बा को दी है और उसी दिव्य अंश से एक महापुरुष का जन्म होगा. मान्यता है कि इसी घटना के बाद से तिरुमाला के गर्भगृह में दोबारा कोई छोटी घंटी नहीं रखी गई.

    घंटी के अवतार थे महान संत श्री वेदांत देशिका!

    भगवान के कहे अनुसार द्रोथम्बा और अनंत सूर्य के घर वेदांत देशिका नाम के अद्भुत बालक का जन्म हुआ, जिन्हें साक्षात भगवान की घंटी का अवतार माना गया. बालक देशिका ने बचपन से ही विलक्षण बुद्धि का प्रदर्शन किया. उन्होंने तमिल और संस्कृत में महान ग्रंथों की रचना की. जगद्गुरु रामानुजाचार्य के बाद उन्हें वैष्णव परंपरा को सुदृढ़ करने वाला सबसे महान स्तंभ माना गया. अपने मामा के निर्देश पर देशिका ने तमिलनाडु के तिरुवाहिंद्रपुरम की एक पहाड़ी पर गरुड़ मंत्र का कठोर जाप किया. गरुड़ देव ने प्रकट होकर उन्हें भगवान हयग्रीव (ज्ञान के देवता) की मूर्ति और मंत्र दिया. हयग्रीव देव के आशीर्वाद से उन्होंने तुरंत 32 श्लोकों वाली ‘हयग्रीव स्तुति’ रच दी, जिसके बाद उन्हें ‘कवितार्किक केसरी’ की उपाधि मिली.

    चमत्कारों से शत्रुओं को किया परास्त

    उन्होंने देवी लक्ष्मी की आराधना में श्री स्तुति का पाठ कर कनकधारा (सोने के सिक्कों) की वर्षा कराई. जब शत्रुओं ने उन्हें एक रात में हजार श्लोक रचने की चुनौती दी, तो उन्होंने भोर होने से पहले ही ‘पादुका सहस्रम्’ की रचना कर दी. जब शत्रुओं ने उन पर विषैला सांप छोड़ा, तो उन्होंने गरुड़ दंडकम का पाठ किया, जिसे सुनकर साक्षात गरुड़ पक्षी ने आकर सांप को उठा लिया. श्रीरंगम पर मुगलों के आक्रमण के दौरान उन्होंने शवों के ढेर के नीचे छिपकर पवित्र वैष्णव साहित्य की रक्षा की थी.

    वैज्ञानिक और आगम शास्त्र का क्या है विधिक नियम?

    लोककथाओं से इतर, यदि मंदिर के प्रशासनिक और शास्त्रीय पहलुओं को देखा जाए, तो गर्भगृह में घंटी न होने का एक ठोस तकनीकी कारण भी सामने आता है. तिरुमाला मंदिर प्रशासन (TTD) ने आधिकारिक रूप से घंटी न होने का कोई विशिष्ट कारण घोषित नहीं किया है. हालांकि, आगम शास्त्रों के अनुसार, हर मंदिर की निर्माण शैली और पूजा पद्धतियां अलग होती हैं. तिरुमाला मंदिर में प्राचीन वैखानस आगम परंपरा का अक्षरशः पालन किया जाता है, जिसके नियमों के तहत ही गर्भगृह की आंतरिक व्यवस्था का संचालन होता है.

    विजयनगर काल का घंटा मंडपम: जहां आज भी बजती हैं विशाल घंटियां

    भले ही मुख्य गर्भगृह के भीतर घंटी न हो, लेकिन मंदिर के ठीक बाहर एक ऐतिहासिक घंटा मंडपम मौजूद है, जिसे ‘महामणि मंडपम’ भी कहा जाता है. यह मंडपम मंदिर के ‘बंगारू वकीली’ (गोल्डन गेट) के ठीक सामने स्थित है. इसका निर्माण 1461 ईस्वी में विजयनगर साम्राज्य के तत्कालीन मंत्री चंद्रगिरि वासी मल्लन्ना ने करवाया था. इस मंडपम के दक्षिणी हिस्से में लकड़ी के चबूतरे पर लोहे की भारी जंजीरों से दो बहुत विशाल घंटियां लटकी हुई हैं. इन घंटियों को बजाने वाले विशेष ब्राह्मण को ‘घंटापानी’ कहा जाता है. जब भगवान वेंकटेश्वर स्वामी को महाप्रसाद (नैवेद्य) भोग लगाया जाता है, तब ये घंटियां जोर-शोर से बजाई जाती हैं.

    विजयनगर साम्राज्य के इतिहास के अनुसार, जब सम्राट चंद्रगिरि के किले में डेरा डालते थे, तो तिरुमाला से लेकर चंद्रगिरि तक की पहाड़ियों के बीच कई उप-घंटा मंडप बनाए गए थे. तिरुमाला में घंटी बजते ही श्रृंखला बद्ध तरीके से अन्य मंडपों की घंटियाँ बजती थीं. चंद्रगिरि किले में इन घंटियों की आवाज सुनकर ही राजा अपना भोजन ग्रहण करते थे. आज भी कई श्रद्धालु तिरुमाला में इन घंटियों के बजने के बाद ही भोजन करते हैं.

    डिस्क्लेमर: आध्यात्मिक और लोक मान्यताओं की दृष्टि से तिरुमाला गर्भगृह में घंटी न होने और संत वेदांत देशिका की यह कहानी बेहद रोचक और आस्था से भरी है. हालांकि, ऐतिहासिक और विधिक स्रोतों के अनुसार, इस कथा का कोई प्रामाणिक या लिखित दस्तावेज उपलब्ध नहीं है. यह कहानी तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के आधिकारिक इतिहास, वेंकटचल महात्म्यम, वराह पुराण या प्रामाणिक वैष्णव पारंपरिक ग्रंथों में दर्ज नहीं है. संत वेदांत देशिका की प्रामाणिक जीवनी में भी इस विशिष्ट घटना का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता है. इसलिए इसे ऐतिहासिक सत्य के बजाय भक्तों की अटूट आस्था और लोक-परंपरा का हिस्सा मानना ही न्यायसंगत होगा.

  • 75 की उम्र में जवानी पाने का ऐसा चस्का! ब्यूटी पार्लर में उड़ा दिए 4 करोड़ रुपए, बेटी के उड़े होश..

    75 की उम्र में जवानी पाने का ऐसा चस्का! ब्यूटी पार्लर में उड़ा दिए 4 करोड़ रुपए, बेटी के उड़े होश..

    75 की उम्र में जवानी पाने का ऐसा चस्का! ब्यूटी पार्लर में उड़ा दिए 4 करोड़ रुपए, बेटी के उड़े होश..

    जवानी और खूबसूरती बनाए रखने का क्रेज किस हद तक जा सकता है, इसकी एक हैरान करने वाली दास्तान चीन से सामने आई है. जहां एक 75 साल की बुजुर्ग महिला ने अपनी जिंदगीभर की कमाई यानी करीब 4 करोड़ रुपए सिर्फ ब्यूटी ट्रीटमेंट और सैलून के चक्कर में फूंक डाले. जब तक इस बात की भनक परिवार को लगी, तब तक बहुत देर हो चुकी थी.

    75 की उम्र में ब्यूटी पार्लर का अजीबोगरीब जुनून

    साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, शंघाई की रहने वाली 75 साल की ‘यू’ सरनेम की एक बुजुर्ग महिला को साल 2016 से एक स्थानीय सैलून और मेडिकल ब्यूटी क्लिनिक जाने की ऐसी लत लगी कि उन्होंने अपनी रिटायरमेंट की सारी सेविंग्स वहां लुटा दी. उन्होंने अपनी स्किन को टाइट रखने, थ्रेड लिफ्टिंग और मालिश जैसी कई कॉस्मेटिक प्रोसीजर पर आंख मूंदकर पैसे खर्च किए. मामला तब खुला जब उनकी बेटी ने घर में पड़े बिल और ट्रीटमेंट के कागजातों की फाइल खंगाली, जिसके बाद पैरों तले जमीन खिसक गई.

    मार्केट रेट से 20 गुना ज्यादा वसूले गए दाम

    इस हैरान करने वाले मामले का सबसे बड़ा पहलू यह है कि उस ब्यूटी सैलून ने बुजुर्ग महिला के भोलेपन का जमकर फायदा उठाया. बिलिंग रिकॉर्ड के मुताबिक, सैलून ने सामान्य बाजार दरों से 10 से 20 गुना ज्यादा कीमतें वसूलीं. सिर्फ एक बार के लिप टैटू सेशन के लिए महिला से 39,800 युआन (करीब 5.7 लाख रुपए) वसूले गए, जो कि आम कीमत से कई गुना ज्यादा था. आइब्रो टैटू और कई छोटी-मोटी थेरेपी पर भी लाखों रुपए पानी की तरह बहाए गए.

    इस अजीबोगरीब घटना पर छिड़ी बहस

    जब बेटी ने इस धोखाधड़ी के खिलाफ शंघाई के एक टीवी शो से मदद मांगी, तो यह मामला सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया. इस अजीबोगरीब घटना ने अब पूरी दुनिया में एक नई बहस छेड़ दी है. लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या बुजुर्ग ग्राहकों को ऐसे ठग सैलून से बचाने के लिए कोई कड़े उपभोक्ता संरक्षण कानून नहीं होने चाहिए? क्या अकेलेपन या उम्र के इस पड़ाव पर लोग ऐसी आक्रामक मार्केटिंग का आसानी से शिकार बन जाते हैं?

  • K2 की 8611 मीटर ऊंची चोटी पर पहुंचकर शेरपा ने किए Push-ups, देखकर लोग रह गए हैरान.

    K2 की 8611 मीटर ऊंची चोटी पर पहुंचकर शेरपा ने किए Push-ups, देखकर लोग रह गए हैरान.

    K2 की 8611 मीटर ऊंची चोटी पर पहुंचकर शेरपा ने किए Push-ups, देखकर लोग रह गए हैरान.

    दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटियों पर पहुंचना अपने आप में बड़ी उपलब्धि माना जाता है। लेकिन कुछ पर्वतारोही शिखर पर पहुंचने के बाद ऐसा कारनामा कर देते हैं, जो लंबे समय तक लोगों को याद रहता है। ऐसा ही एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा में है, जिसमें नेपाली पर्वतारोही छिरिंग नामगेल शेरपा K2 की चोटी पर पहुंचकर Push-ups करते नजर आ रहे हैं।

    बताया जा रहा है कि यह घटना साल 2021 की गर्मियों की है। उस दौरान K2 के शिखर पर पहुंचने के बाद छिरिंग नामगेल शेरपा ने कुछ Push-ups किए थे। इस पल का वीडियो अब सोशल मीडिया पर फिर से वायरल हो रहा है और इसे देखकर यूजर्स उनकी फिटनेस और हिम्मत की तारीफ कर रहे हैं।

    8611 मीटर की ऊंचाई पर किया Push-ups

    K2 समुद्र तल से 8,611 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और यह दुनिया की दूसरी सबसे ऊंची पर्वत चोटी है। इतनी ऊंचाई पर पहुंचना ही पर्वतारोहियों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण माना जाता है। ऐसे में शिखर पर पहुंचने के बाद Push-ups करना लोगों के लिए हैरानी की वजह बना हुआ है।

    वीडियो में शेरपा बर्फ से ढकी चोटी पर नीचे झुककर Push-ups करते दिखाई देते हैं। कुछ ही सेकंड का यह नजारा सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रहा है।

    K2 पर चढ़ाई आसान नहीं

    K2 पाकिस्तान और चीन की सीमा के पास काराकोरम पर्वत श्रृंखला में स्थित है। इस चोटी पर चढ़ाई के दौरान पर्वतारोहियों को बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। ऊंचाई बढ़ने के साथ ऑक्सीजन की उपलब्धता कम होती जाती है, जबकि तेज हवाएं, बर्फबारी, खड़ी चट्टानें और अचानक बदलता मौसम मुश्किलें और बढ़ा सकते हैं।

    ऐसे वातावरण में शरीर को सामान्य तरीके से काम करने में भी परेशानी हो सकती है। इसलिए K2 तक पहुंचने के लिए पर्वतारोहियों को लंबे समय तक प्रशिक्षण और कठिन परिस्थितियों में अभ्यास करना पड़ता है।

    कुछ सेकंड के वीडियो के पीछे लंबी तैयारी

    शिखर पर खड़े होकर Push-ups करना देखने में भले ही कुछ सेकंड का काम लगे, लेकिन K2 जैसे पर्वत की चढ़ाई पूरी करने के लिए जरूरी शारीरिक तैयारी और पर्वतारोहण का अनुभव काफी महत्वपूर्ण होता है।

    छिरिंग नामगेल शेरपा का यह वीडियो इसी वजह से सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रहा है। यूजर्स इस अनोखे पल को देखकर हैरानी जता रहे हैं और