Blog

  • रविवार को जरूर करें आदित्य ह्रदय स्तोत्र का पाठ, करियर में मिलेगी सफलता, पढ़ें संपूर्ण लिरिक्स.

    रविवार को जरूर करें आदित्य ह्रदय स्तोत्र का पाठ, करियर में मिलेगी सफलता, पढ़ें संपूर्ण लिरिक्स.

    रविवार को जरूर करें आदित्य ह्रदय स्तोत्र का पाठ, करियर में मिलेगी सफलता, पढ़ें संपूर्ण लिरिक्स.

    जीवन में सफलता और समृद्धि के लिए सूर्यदेव की उपासना करनी चाहिए. सूर्यदेव को आत्मविश्वास, पिता और मान-सम्मान का कारक माना जाता है. रविवार के दिन सूर्य की सूर्य करना बेहद शुभ होता है. यह दिन सूर्यदेव को समर्पित माना जाता है. आज रविवार के दिन सूर्यदेव को जल से अर्घ्य दें. इसके साथ ही आदित्य ह्रदय स्तोत्र का पाठ करें. आप यहां आदित्य ह्रदय स्तोत्र के संपूर्ण लिरिक्स पढ़ सकते हैं.

    आदित्य ह्रदय स्तोत्र (Aditya Hridaya Stotra Lyrics in Hindi)

    ततो युद्धपरिश्रान्तं समरे चिन्तया स्थितम् ।रावणं चाग्रतो दृष्टवा युद्धाय समुपस्थितम् ॥दैवतैश्च समागम्य द्रष्टुमभ्यागतो रणम् ।उपगम्याब्रवीद् राममगरत्यो भगवांस्तदा ॥राम राम महाबाहो श्रृणु गुह्यं सनातनम् ।येन सर्वानरीन् वत्स समरे विजयिष्यसे ॥आदित्यहृदयं पुण्यं सर्वशत्रुविनाशनम् ।जयावहं जपं नित्यमक्षयं परमं शिवम् ॥सर्वमंगलमांगल्यं सर्वपापप्रणाशनम् ।चिन्ताशोकप्रशमनमायुर्वधैनमुत्तमम् ॥रश्मिमन्तं समुद्यन्तं देवासुरनमस्कृतम् ।पूजयस्व विवस्वन्तं भास्करं भुवनेश्वरम् ॥सर्वदेवतामको ह्येष तेजस्वी रश्मिभावनः ।एष देवासुरगणाँल्लोकान् पाति गभस्तिभिः ॥एष ब्रह्मा च विष्णुश्च शिवः स्कन्दः प्रजापतिः ।महेन्द्रो धनदः कालो यमः सोमो ह्यपां पतिः ॥पितरो वसवः साध्या अश्विनौ मरुतो मनुः ।वायुर्वन्हिः प्रजाः प्राण ऋतुकर्ता प्रभाकरः ॥आदित्यः सविता सूर्यः खगः पूषा गर्भास्तिमान् ।सुवर्णसदृशो भानुहिरण्यरेता दिवाकरः ॥

    हरिदश्वः सहस्रार्चिः सप्तसप्तिर्मरीचिमान् ।तिमिरोन्मथनः शम्भूस्त्ष्टा मार्तण्डकोंऽशुमान् ॥हिरण्यगर्भः शिशिरस्तपनोऽहरकरो रविः ।अग्निगर्भोऽदितेः पुत्रः शंखः शिशिरनाशनः ॥व्योमनाथस्तमोभेदी ऋम्यजुःसामपारगः ।घनवृष्टिरपां मित्रो विन्ध्यवीथीप्लवंगमः ॥आतपी मण्डली मृत्युः पिंगलः सर्वतापनः ।कविर्विश्वो महातेजा रक्तः सर्वभवोदभवः ॥नक्षत्रग्रहताराणामधिपो विश्वभावनः ।तेजसामपि तेजस्वी द्वादशात्मन् नमोऽस्तु ते ॥नमः पूर्वाय गिरये पश्चिमायाद्रये नमः ।ज्योतिर्गणानां पतये दिनाधिपतये नमः ॥जयाय जयभद्राय हर्यश्वाय नमो नमः ।नमो नमः सहस्रांशो आदित्याय नमो नमः ॥नम उग्राय वीराय सारंगाय नमो नमः ।नमः पद्मप्रबोधाय प्रचण्डाय नमोऽस्तु ते ॥ब्रह्मेशानाच्युतेशाय सूरायदित्यवर्चसे ।भास्वते सर्वभक्षाय रौद्राय वपुषे नमः ॥तमोघ्नाय हिमघ्नाय शत्रुघ्नायामितात्मने ।कृतघ्नघ्नाय देवाय ज्योतिषां पतये नमः ॥

    तप्तचामीकराभाय हस्ये विश्वकर्मणे ।नमस्तमोऽभिनिघ्नाय रुचये लोकसाक्षिणे ॥नाशयत्येष वै भूतं तमेव सृजति प्रभुः ।पायत्येष तपत्येष वर्षत्येष गभस्तिभिः ॥एष सुप्तेषु जागर्ति भूतेषु परिनिष्ठितः ।एष चैवाग्निहोत्रं च फलं चैवाग्निहोत्रिणाम् ॥देवाश्च क्रतवश्चैव क्रतूनां फलमेव च ।यानि कृत्यानि लोकेषु सर्वेषु परमप्रभुः ॥एनमापत्सु कृच्छ्रेषु कान्तारेषु भयेषु च ।कीर्तयन् पुरुषः कश्चिन्नावसीदति राघव ॥पूजयस्वैनमेकाग्रो देवदेवं जगत्पतिम् ।एतत् त्रिगुणितं जप्तवा युद्धेषु विजयिष्ति ॥अस्मिन् क्षणे महाबाहो रावणं त्वं जहिष्यसि ।एवमुक्त्वा ततोऽगस्त्यो जगाम स यथागतम् ॥एतच्छ्रुत्वा महातेजा, नष्टशोकोऽभवत् तदा ।धारयामास सुप्रीतो राघवः प्रयतात्मवान् ॥आदित्यं प्रेक्ष्य जप्त्वेदं परं हर्षमवाप्तवान् ।त्रिराचम्य शुचिर्भूत्वा धनुरादाय वीर्यवान् ॥रावणं प्रेक्ष्य हृष्टात्मा जयार्थे समुपागमत् ।सर्वयत्नेन महता वृतस्तस्य वधेऽभवत् ॥अथ रविरवदन्निरीक्ष्य रामं मुदितनाः परमं प्रहृष्यमाणः ।निशिचरपतिसंक्षयं विदित्वा सुरगणमध्यगतो वचस्त्वरेति ॥

    कैसे करें आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ?

    आप सुुबह उठकर सूर्योदय के समय स्नान करके सूर्य देव को जल से अर्घ्य दें. इसके बाद पूर्व दिशा की ओर मुख करके खड़े हो जाएं. सूर्य के समक्ष खड़े होकर या आसन लगाकर बैठकर आप आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ कर सकते हैं.

    डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है.

  • वैवाहिक जीवन का तनाव दूर करने के लिए अपनाएं ये उपाय, रिश्तों में आएगी मधुरता..

    वैवाहिक जीवन का तनाव दूर करने के लिए अपनाएं ये उपाय, रिश्तों में आएगी मधुरता..

    वैवाहिक जीवन का तनाव दूर करने के लिए अपनाएं ये उपाय, रिश्तों में आएगी मधुरता..

    पति-पत्नी के रिश्ते में कभी-कभी छोटी-छोटी बातों को लेकर तनाव और मतभेद पैदा हो जाते हैं। लगातार विवाद होने से रिश्तों में दूरी भी बढ़ सकती है। ज्योतिष शास्त्र में वैवाहिक जीवन में प्रेम और आपसी तालमेल बढ़ाने के लिए कुछ आसान उपाय बताए गए हैं।

    मान्यता है कि घर में कुछ खास चीजों को सही दिशा में रखने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है और पति-पत्नी के बीच रिश्ते बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, ये उपाय धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं।

    बेडरूम में रखें जोड़े वाली तस्वीरें

    ज्योतिष और वास्तु से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार, वैवाहिक जीवन में प्रेम और मधुरता बढ़ाने के लिए बेडरूम में जोड़े वाली तस्वीरें या प्रतिमाएं रखी जा सकती हैं।

    मोर, हंस, बत्तख, तोता और हिरण के जोड़े की तस्वीरों को शुभ माना जाता है। ध्यान रखें कि तस्वीर या प्रतिमा में इन पक्षियों और पशुओं को शांत अवस्था में दिखाया गया हो। हिंसक या आक्रामक तस्वीरें बेडरूम में लगाने से बचने की सलाह दी जाती है।

    किस दिशा में रखें प्रतिमाएं?

    मान्यता के अनुसार, मोर, हंस, बत्तख, तोता या हिरण के जोड़े की प्रतिमाओं को घर की दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखा जा सकता है। प्रतिमाओं को इस तरह रखने की सलाह दी जाती है कि उनका मुख एक-दूसरे की ओर हो।

    ज्योतिषीय मान्यताओं में कहा जाता है कि ऐसा करने से पति-पत्नी के बीच प्रेम और आपसी समझ बढ़ सकती है। साथ ही, रिश्ते में चल रहे तनाव और मनमुटाव को कम करने में भी यह उपाय सहायक माना जाता है।

    रिश्तों में मधुरता के लिए रखें ध्यान

    सिर्फ ज्योतिषीय उपायों पर निर्भर रहने के बजाय पति-पत्नी के बीच खुलकर बातचीत, एक-दूसरे की भावनाओं को समझना और सम्मान बनाए रखना भी जरूरी है। रिश्तों में किसी भी तरह का गंभीर तनाव हो तो आपसी बातचीत या जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होता है।

    डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल जानकारी प्रदान करना है। इन उपायों की वैज्ञानिक पुष्टि नहीं की गई है।

  • घर में बिना तोड़फोड़ ऐसे दूर करें वास्तु दोष, इन 3 तस्वीरों को लगाने से मिलेंगे शुभ परिणाम.

    घर में बिना तोड़फोड़ ऐसे दूर करें वास्तु दोष, इन 3 तस्वीरों को लगाने से मिलेंगे शुभ परिणाम.

    घर में बिना तोड़फोड़ ऐसे दूर करें वास्तु दोष, इन 3 तस्वीरों को लगाने से मिलेंगे शुभ परिणाम.

    घर में वास्तु दोष है, तो इसे दूर करने के लिए लोग अक्सर अनेकों उपायों को करते हैं. रसोई और बाथरूम की गलत स्थिति होने पर कई बार इन्हें लोगों को तुड़वाकर सही करना पड़ता है. हालांकि, आप वास्तु के अनुसार घर में कुछ तस्वीरों को लगाकर वास्तु दोष को दूर कर सकते हैं. ऐसा करने से आपको घर में तोड़फोड़ करवाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. आइये वास्तु के मुताबिक इन शुभ तस्वीरों के बारे में जानते हैं.

    सूर्य की तस्वीर

    सूर्य को नई शुरुआत के प्रतीक के रूप में देखा जाता है. दिन की शुरुआत सूर्योदय के साथ होती है. घर में सूर्य की तस्वीर लगाने बेहद शुभ माना जाता है. घर में पूर्व दिशा में सूर्य की तस्वीर लगाने से शुभ परिणाम मिलते हैं. वास्तु की दृष्टि से यह बहुत ही अच्छा माना जाता है. सूर्य की तस्वीर लगाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और मान-सम्मान व तरक्की प्राप्त होती है. इससे वास्तु दोष से होने वाले अशुभ प्रभाव से बचे रह सकते हैं.

    झरने और नदी की तस्वीर

    उत्तर दिशा में झरने और नदी की तस्वीर लगाना शुभ माना जाता है. इस दिशा को जल तत्व की तस्वीर माना जाता है. यह दिशा करियर, उन्नति और आर्थिक वृद्धि से संबंधित मानी जाती है. इस दिशा में पानी से जुड़ी तस्वीर लगाना अच्छा होता है. ऐसा करने से जीवन में नए अवसर मिलते हैं. आप घर की उत्तर दिशा में यह तस्वीर लगा सकते हैं. इसके साथ ही इस दिशा में हल्का नीला, हरा या सफेद रंग करना अच्छा होता है.

    पहाड़ों की तस्वीर

    अक्सर लोग घरों में पहाड़ों की सुंदर सीनरी यानी हरी-भरी घाटियों की सुंदर फोटो लगाते हैं. घर की दक्षिण-पश्चिम दिशा में यह तस्वीर लगाना शुभ होता है. पहाड़ों को स्थिरता और मजबूती का प्रतीक मानते हैं. ऐसा करने से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है. धन में ठहराव आता है. वास्तु दोष के अशुभ प्रभाव को कम कर सकते हैं. आप वास्तु के अनुसार, घर में इन तस्वीरों को लगा सकते हैं.

    डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है.

  • महात्मा विदुर का ये श्लोक है मनी अट्रैक्ट करने का तरीका, इन बातों को अपनाने से होगा लाभ.

    महात्मा विदुर का ये श्लोक है मनी अट्रैक्ट करने का तरीका, इन बातों को अपनाने से होगा लाभ.

    महात्मा विदुर का ये श्लोक है मनी अट्रैक्ट करने का तरीका, इन बातों को अपनाने से होगा लाभ.

    महात्मा विदुर ने अपनी नीतियों और श्लोक के जरिए व्यक्ति के जीवन में फायदों के बारे में बताया है. विदुर नीति के श्लोक के जरिए सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त कर सकते हैं. उनके एक श्लोक में ऐसी आदतों के बारे में बताया गया है. जिन्हें अपनाने से लाभ मिल सकता है. इन्हें अपनाने से सफलता की राह आसान होगी. धन आकर्षित करने और मां लक्ष्मी की कृपा के लिए इन उपायों को करना चाहिए. आइये इस श्लोक और नियमों के बारे में जानते हैं.

    धृतिः शमो दमः शौचं कारुण्यं वागनिष्ठुरा।मित्राणां चानभिद्रोहः सप्तैताः समिधः श्रियः॥

    महात्मा विदुर के इस श्लोक में महत्वपूर्ण शिक्षाओं के बारे में बताया गया है. जीवन में सुख, समृद्धि और मान-सम्मान के लिए आपको इस श्लोक में बताई बातों को अपनाना चाहिए. आइये इसके बारे में जानते हैं.

    मां लक्ष्मी की कृपा के लिए इन 7 बातों का रखें ध्यान

    धैर्य – व्यक्ति को हर परिस्थिति में धैर्य रखना चाहिए. जल्दबाजी में अक्सर व्यक्ति के काम खराब होते हैं. आप लोगों को धैर्य के साथ काम करना चाहिए. धैर्यवान व्यक्ति पर मां लक्ष्मी की कृपा रहती है.

    इच्छाओं पर नियंत्रण – अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण रखना बहुत ही जरूरी होता है. अपनी भावनाओं और इच्छाओं को काबू में रखने की कोशिश करनी चाहिए. इससे जीवन में सुख-समृद्धि आती है.

    इंद्रियों पर संयम – इंद्रियों पर काबू रखकर सत्य और सदाचार के मार्ग पर चलना चाहिए. इससे जीवन में सुख-समृद्धि आती है. गलत काम को करने से बचना चाहिए.

    पवित्रता – शुद्धता का ध्यान रखना चाहिए. जहां सफाई होती है मां लक्ष्मी का वास वहीं होता है. इसलिए आपको घर को और अपने शरीर को स्वच्छ रखना चाहिए.

    दया दृष्टि – मनुष्य को सभी के प्रति दयादृष्टि का भाव रखना चाहिए. दूसरों के प्रति दयालुता रखना बहुत ही अच्छा होता है. ऐसे व्यक्ति पर मां लक्ष्मी की कृपा होती है.

    अच्छा बोलना – कड़वा बोलने और किसी से विवाद करने से बचना चाहिए. आप लोगों को गलत काम नहीं करना चाहिए. इससे रिश्तों में दरार आती है. सभी के साथ अच्छे संबंध रखें.

    दूसरों से वैर न रखें – कई लोग दूसरों की तरक्की देखकर जलते हैं. व्यक्ति का स्वभाव ऐसा नहीं होना चाहिए. आपको दूसरों के सुख में खुश होना चाहिए. मित्रों से द्वेष भावना नहीं रखनी चाहिए.

    डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है.

  • Bhog ke Niyam: पूजा में भोग चढ़ाने में कहीं आप भी तो नहीं करते ये भूल? जानें बीज वाले फल अर्पण की सही विधि

    Bhog ke Niyam: पूजा में भोग चढ़ाने में कहीं आप भी तो नहीं करते ये भूल? जानें बीज वाले फल अर्पण की सही विधि

    Bhog ke Niyam: पूजा में भोग चढ़ाने में कहीं आप भी तो नहीं करते ये भूल? जानें बीज वाले फल अर्पण की सही विधि

    भगवान की पूजा में बीज वाले फलों को केवल धोकर साबुत चढ़ाना कभी कभी पुण्य की जगह दोष का भागी बना सकता है. आइए जानते हैं, हिन्दू धर्म में बीज वाले फलों को अर्पित किए जाने के नियम क्या है?

    Written By: Shyamnandan|Updated: Sep 10, 2026 00:15

    Share :

    fb
    twitter
    whatsapp

    telegram
    bhog-ke-niyam

    Bhog ke Niyam: हिन्दू धर्म में देवी-देवताओं की पूजा में भोग लगाने महत्व बहुत अधिक है। इसमें भी फल अधिक अर्पित किए जाते हैं। लेकिन फल को लेकर अनजाने में वैसी भूल हो जाती है, पुण्य की जगह की अनकही दोष का भागी बना सकता है। इसमें भी बीज वाले फलों, जैसी- पपीता, संतरा, सेब, अनार, नाशपाती, बब्बूगोसा, नाक, खरबूज या तरबूज की आती है, तो व्रतराज आदि धर्म ग्रंथों में बेहद स्पष्ट नियम बताए गए हैं। आइए जानते हैं, फल को बाजार से लाने के बाद केवल धोकर चढ़ाने से भोग नहीं लग जाता है, कहीं ये लापरवाही खुशियों के लिए संकट न बन जाएं?

    कड़े बीज वाले फल

    जब हम खुद हम को और अपने अतिथि को पूरा पपीता या खरबूज-तरबूज खाने के लिए नहीं देते हैं, तो भगवान को इस प्रकार से कोई फल का भोग कैसे पेश कर सकते हैं। इसलिए जब कोई ऐसा फल भगवान को अर्पित करें, तो उसका बीज निकालकर और काटकर चढ़ाना चाहिए। भूल से भी इन फलों को कभी पूरा साबुत नहीं चढ़ाना चाहिए।

    छोटे बीज वाले फल

    अनार, संतरा, मौसम्बी, सेब आदि छोटे बीज वाले फलों को भी साबुत चढ़ाने के बजाय सही से सलीके से अर्पित करना चाहिए। संतरा-मौसम्बी के बीज निकाल के फांक में चढ़ाना चाहिए। अनार के दाने निकालकर चढ़ाना उत्तम है। इसी प्रकार, सेब, बब्बूगोसा और नाशपाती के बीज को निकालकर चढ़ाना चाहिए।

    आम, केला और अंगूर फल के नियम

    पूजा के फलों में आम, केला और अंगूर का विशेष स्थान है। इन बीज वाले फलों को हमेशा साबुत ही अर्पित करना चाहिए। इन्हें विशेष परिस्थितियों में ही काटकर अर्पित करना चाहिए। अंगूर को प्रायः दाना-दाना धोकर कटोरे में सलीके से अर्पित करना चाहिए। अमरूद को भी साबुत चढ़ा सकते हैं, लेकिन इसे सही से साफ कर लेना चाहिए।

    भोग के इन नियमों का रखें ध्यान

    • फल काटने के चाकू, हंसिया जैसे साधन शुद्ध और साफ होने चाहिए। ये तामसिक चीजें काटने वाली नहीं होनी चाहिए।
    • फल को ताजा ही काटकर चढ़ाना चाहिए। काटने से इसे फल को अवश्य धो लेना चाहिए। जो फल छीलकर काटने वाले हैं, उसे छील लेना चाहिए। बहुत देर पहले कटे फल नहीं चढ़ाना चाहिए।
    • भगवान को फल का भोग लगाने के लिए फल को हमेशा कांसा, पीतल, तांबा, सोना, चांदी और मिट्टी से शुद्ध और साफ बर्तनों में ही रखकर अर्पित करना चाहिए।
    • पूजा के भोग में सड़े-गले, दागदार, पक्षियों और कीड़ों द्वारा खाए गए फलों इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
    • भगवान विष्णु और उनके रूपों जैसे सत्यनारायण, राम, कृष्ण, वामन आदि को हमेशा तुलसी दल के फल का भोग लगाना चाहिए। ध्यान रहे कि शिवजी और गणेशजी को तुलसी नहीं चढ़ाया जाता है।

    डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है.

  • भगवान को भोग लगाने के बाद कितनी देर में उठाना चाहिए प्रसाद? भूलकर भी न करें ये गलती..

    भगवान को भोग लगाने के बाद कितनी देर में उठाना चाहिए प्रसाद? भूलकर भी न करें ये गलती..

    भगवान को भोग लगाने के बाद कितनी देर में उठाना चाहिए प्रसाद? भूलकर भी न करें ये गलती..

    प्रत्येक भक्त और साधक पूरी श्रद्धा और आस्था से भगवान की पूजा करता है और भोग लगाता है. भोग के रूप में भगवान शुद्ध और सात्विक चीजें, कुछ देवों को छोड़कर, अर्पित की जाती है. लेकिन हिन्दू धर्म में भोग को लेकर भी कई नियम हैं. शास्त्रों के मुताबिक, भगवान को भोग लगाने के बाद उसे एक निश्चित और सही अंतराल पर उठाना भी जरूरी होता है. इस सीमा के पार करने के बाद भोग भी नकारात्मक ऊर्जा का केंद्र बन सकता है, ऐसा व्रतराज जैसे ग्रंथों में वर्णन मिलता है. आइए जानते हैं, कितनी देर में भोग लगाने के बाद प्रसाद को उठा लेना चाहिए और कौन-सी गलती नहीं करनी चाहिए?

    भोग कितनी देर में उठाएं?

    ज्योतिषाचार्य और पंडित बताते हैं कि यदि भोग को लंबे समय तक या रात भर मंदिर या पूजा स्थल पर छोड़ दिया जाए, तो उसमें चांडाल या अदृश्य नकारात्मक शक्तियों को वास हो सकता है. इसलिए भगवान के भोग को कम से 5 मिनट भगवान के समक्ष अवश्य रखें और अधिकतम 15 से 20 मिनट के भीतर उस प्रसाद को अवश्य उठा लेना चाहिए और ग्रहण कर लेना चाहिए.

    न करें भोग-प्रसाद से जुड़ी ये गलतियां

    देर तक या रात भाग भोग न छोड़ें – कई बार भक्त-साधक जाने-अनजाने पूजा या आरती के बाद प्रसाद को रात भर भी छोड़ देते हैं. यह गलत है, क्योंकि शास्त्रों के अनुसार इससे प्रसाद के अमृत तत्व ‘दोषयुक्त’ हो सकते हैं, जो फलदायी नहीं रहता है.

    भोग को सीधे जमीन पर न रखें – भोग के पात्र को सीधे भूमि पर नहीं रखनी चाहिए. नियम के अनुसार, भोग को किसी थाली, स्टैन्ड और पूजा की चौकी पर ही रखना चाहिए.

    गलत पात्र (बर्तन) का इस्तेमाल – पंडित हर्षवर्द्धन शांडिल्य कहते हैं कि भगवान को एल्यूमिनीयम, कांच और प्लास्टिक आदि के पात्रों और बर्तनों में भोग नहीं लगाना चाहिए. जहां तक हो सके यह कांसा, पीतल, चांदी, तांबा और सोने के पात्रों में रखना चाहिए.

    भोग के बाद जरूर करें ये काम

    • प्रचलित मान्यता और पूजा-पाठ के नियमों के मुताबिक, जब भी भगवान को भोग लगाएं, तो उन्हें अवश्य ढक देना चाहिए. भोग के साथ जल रखना भी अनिवार्य है.
    • कुछ मिनटों के लिए मंदिर का पर्दा भी गिरा देना चाहिए, ताकि भगवान एकांत में भोग को ग्रहण कर सकें.
    • भोग उठाने के बाद उसे घर-परिवार और खानदान के सभी सदस्यों में श्रद्धापूर्वक वितरित कर देना चाहिए. प्रसाद को कभी छुपाकर नहीं रखना चाहिए.
    • यदि प्रसाद जमीन पर गिर जाए, तो उसे तुरंत उठा लेना चाहिए और उस जगह को साफ कर देना चाहिए, ताकि कि वह किसी पांव में न लगे.

    डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है.

  • रसोई के इन मसालों से दूर हो सकता है ग्रहों का अशुभ प्रभाव! जानिए ज्योतिषीय उपाय.

    रसोई के इन मसालों से दूर हो सकता है ग्रहों का अशुभ प्रभाव! जानिए ज्योतिषीय उपाय.

    रसोई के इन मसालों से दूर हो सकता है ग्रहों का अशुभ प्रभाव! जानिए ज्योतिषीय उपाय.

    Astro Tips: भारतीय रसोई में इस्तेमाल होने वाले मसाले केवल खाने का स्वाद ही नहीं बढ़ाते, बल्कि ज्योतिष शास्त्र में भी इनका विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि कुछ मसालों और अनाज का सेवन या उनसे जुड़े उपाय करने से ग्रहों के अशुभ प्रभाव को कम किया जा सकता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है।

    हल्दी, सौंफ, काली मिर्च और जौ जैसे खाद्य पदार्थों को अलग-अलग ग्रहों से संबंधित माना जाता है। हालांकि, ये सभी उपाय धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं।

    सौंफ और मिश्री का उपाय

    ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, सौंफ का संबंध शुक्र और चंद्रमा से माना जाता है। कहा जाता है कि सौंफ के साथ मिश्री का सेवन करने से शुक्र और चंद्रमा से जुड़े शुभ प्रभाव प्राप्त हो सकते हैं।

    वहीं, सौंफ के साथ गुड़ का सेवन मंगल ग्रह के अशुभ प्रभाव को कम करने वाला माना जाता है। इसे ज्योतिष में एक सरल और पारंपरिक उपाय के रूप में बताया गया है।

    काली मिर्च से जुड़ा शनि का उपाय

    काली मिर्च का इस्तेमाल आमतौर पर भोजन का स्वाद बढ़ाने के लिए किया जाता है। ज्योतिष शास्त्र में इसका संबंध शनि ग्रह से माना गया है। मान्यता है कि काली मिर्च का सेवन करने से शनि ग्रह से जुड़े नकारात्मक प्रभावों को कम करने में मदद मिल सकती है।

    हालांकि, किसी भी चीज का सेवन अपनी सेहत और जरूरत के अनुसार ही करना चाहिए।

    जौ से सूर्य और बृहस्पति को मजबूती

    जौ को भी ज्योतिषीय उपायों में काफी महत्वपूर्ण माना गया है। मान्यता है कि जौ का सेवन करने से सूर्य और बृहस्पति ग्रह से जुड़े शुभ प्रभाव बढ़ सकते हैं।

    इसके अलावा, दक्षिणावर्ती महाकाली की प्रतिमा के सामने बैठकर रुद्राक्ष की माला से मंत्र जाप करने का भी उल्लेख मिलता है। कुछ मान्यताओं के अनुसार, सिद्ध कुंजिका स्तोत्र के पांचवें मंत्र का जाप करना भी लाभकारी हो सकता है।

    आस्था के अनुसार करें उपाय

    इन सभी उपायों को धार्मिक आस्था और ज्योतिषीय परंपराओं से जोड़कर देखा जाता है। इन्हें अपनाने से पहले अपनी व्यक्तिगत परिस्थिति, स्वास्थ्य और आस्था का ध्यान रखना जरूरी है।

    डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल जानकारी प्रदान करना है। इन उपायों की वैज्ञानिक पुष्टि नहीं की गई है।

  • Kuber Story: कुबेर कैसे बने धन के देवता, क्यों होती है धनतेरस पर उनकी पूजा, जानिए धन देवता की कथा

    Kuber Story: कुबेर कैसे बने धन के देवता, क्यों होती है धनतेरस पर उनकी पूजा, जानिए धन देवता की कथा

    Kuber Story: कुबेर कैसे बने धन के देवता, क्यों होती है धनतेरस पर उनकी पूजा, जानिए धन देवता की कथा

    Kuber Story: कुबेर का नाम सुनते ही धन-दौलत के स्वामी की एक छवि मन-मस्तिष्क में बन जाती है. हिन्दू धर्म के पौराणिक कहानियों में भी उनका कई जिक्र हुआ है. वे देवताओं के कोषाध्यक्ष या खजांची हैं, जिसे अंग्रेजी में ट्रेजरर कहते हैं. वे धन के स्वामी और मैनेजर यानी प्रबंधक माने जाते हैं. आइए जानते हैं, कुबेर कौन हैं, वे धन के देवता कैसे बने और धनतेरस-दीवाली पर उनकी पूजा क्यों होती है?

    रावण के सौतेले भाई हैं कुबेर

    धन समृद्धि के देवता कुबेर यक्षों के राजा भी है और उन्हें यक्षराज भी कहते हैं. पौराणिक कथाओं के मुताबिक, उनके पिता महर्षि विश्रवा थे, जो रावण, कुंभकरण और विभीषण के पिता भी थे. लेकिन रावण और कुबेर सौतेले भाई थे और दोनों ही महादेव शिव के महभक्त हैं. कहते हैं, सोने की नगरी लंका का निर्माण देवशिल्पी विश्वकर्मा ने कुबेर के लिए किया था, लेकिन रावण ने उनसे यह छीन लिया. इसके बाद, कुबेर ने भगवान शिव के आशीर्वाद से कैलाश के पास अलकापुरी नगरी को अपना घर बनाया.

    कुबेर कैसे बने धन के देवता?

    शिव पुराण की एक कथा के अनुसार, अपने पूर्वजन्म में कुबेर गुणानिधि नामक एक चोर थे। एक दिन वे अनजाने में शिवमंदिर में चोरी के लिए घुस गए। घनघोर अंधेरा होने से उन्होंने अपने धोती का एक टुकड़ा जलाकर कर मंदिर में प्रकाश फैला दिया। उस दिन महाशिवरात्रि थी। इससे भगवान शिव बेहद प्रसन्न हुए और अगले जन्म वे महर्षि विश्रवा के पुत्र बने।

    इस जन्म में उन्होंने हजारों सालों तक ब्रह्मा जी पूजा कर अपनी दृढ़ निष्ठा और अटूट भक्ति से उन्हें प्रसन्न कर लिया। ब्रह्माजी ने उन्हें उत्तर दिशा का रक्षक यानी दिक्पाल बनाया। साथ ही भगवान शिव के सुझाव से देवताओं का धनाध्यक्ष यानी खजाने का रक्षक नियुक्त किया।

    धनतेरस पर क्यों होती है कुबेर की पूजा?

    धनतेरस का पर्व प्रकाश और धन के त्योहार दीवाली की शुरूआत माना जाता है। यह कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन विशेष रूप से कुबेर भगवान की पूजा की जाती है। इस दिन नई वस्तुओं, विशेषकर सोने-चांदी के आभूषण, जेवर, सिक्के और शुभ धातु के बर्तनों को कुबेर देव मानकर पूजा की जाती है। मान्यता है कि मां लक्ष्मी चंचला हैं, लेकिन कुबेर संग उनकी पूजा करने से धन और समृद्धि का वास होता है। इसलिए धनतेरस और दीवाली के दिन उनकी पूजा होती है।

    डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है.

  • मंदिर में भगवान की परिक्रमा क्यों करते हैं? जानिए प्रदक्षिणा की परंपरा का धार्मिक महत्व और लाभ.

    मंदिर में भगवान की परिक्रमा क्यों करते हैं? जानिए प्रदक्षिणा की परंपरा का धार्मिक महत्व और लाभ.

    मंदिर में भगवान की परिक्रमा क्यों करते हैं? जानिए प्रदक्षिणा की परंपरा का धार्मिक महत्व और लाभ.

    हिन्दू धर्म में हजारों सालों से मंदिर जाने, भगवान के समक्ष सिर झुकाने और दंडवत प्रणाम करने के साथ मूर्ति के चारों ओर घूमकर परिक्रमा करने की परंपरा चली आ रही है. भगवान के पूजा-पाठ के इन नियमों में आज भी कोई विशेष परिवर्तन नहीं हुआ है. लेकिन क्या आपने ये कभी सोचा या गौर किया है कि मंदिर और भगवान की प्रदक्षिणा या परिक्रमा क्यों की जाती है. यदि इसे आप सिर्फ एक रस्म मानते हैं, तो आपको धर्म ग्रंथों की लॉजिक और भक्तों-श्रद्धालुओं की बात एक बार जरूर समझनी चाहिए. आइए जानते हैं, इस परंपरा का महत्व और लाभ क्या है?

    किस देवी-देवता की कितनी परिक्रमा?

    हिन्दू धर्म के ग्रंथों में इसका स्पष्ट उल्लेख मिलता है कि किस देवी और देवता की कितनी परिक्रमा करनी चाहिए. नारद पुराण के एक श्लोक के मुताबिक, देवी चंडी यानी मां दुर्गा की एक, सूर्यदेव की सात, गणेश जी की तीन, भगवान विष्णु की चार और महादेव शिव की आधी परिक्रमा करनी चाहिए. आपको बता दें कि शिवलिंग के सोमसूत्र यानी जलहरी को नहीं लांघा जाता है. प्राचीन ऋषि-मुनियों ने इसे संचित कर्मों को काटने की विधि बताया है.

    प्रदक्षिणा का धार्मिक महत्व

    हिन्दू धर्म की मान्यता है कि मंदिर, पूजा स्थल या देवालय के गर्भगृह की सकारात्मक ऊर्जा के क्षेत्र में घूमने यानी परिक्रमा करने से व्यक्ति मात्र का आभामंडल शुद्ध होता है. ग्रंथों में उल्लेख है कि हमसे जाने-अनजाने इस जन्म या पिछले जन्मों में जो भी पाप या बुरे कर्म हुए हैं, वे प्रदक्षिणा के हर कदम के साथ नष्ट हो जाते हैं.

    परिक्रमा हमेशा दाईं ओर ही क्यों?

    ईश्वर की परिक्रमा को संस्कृत में ‘प्रदक्षिणा’ कहते हैं. यहां ‘प्र’ का अर्थ है- प्रमुख या मुख्य या प्रधान, वहीं ‘दक्षिणा’ का अर्थ है- दक्षिण दिशा और दाहिना भाग. दाहिनी ओर से परिक्रमा करने के कारण इसे ‘प्रदक्षिणा’ कहते हैं. दाहिनी ओर से परिक्रमा क्यों करनी चाहिए, इसके बारे में ऋग्वेद में कहा गया है कि हमारी दाहिनी ओर सकारात्मक ऊर्जा अधिक सक्रिय होती हैं. शास्त्रों में यह नियम भी मिलता है कि हमारे चलते समय भगवान को हमेशा दाहिनी ओर और हमें भगवान की बायीं ओर उनसे थोड़ा पीछे ही होना चाहिए.

    अश्वमेध यज्ञ जैसा फल

    स्कन्द पुराण के वैष्णव खंड के एक श्लोक में प्रदक्षिणा के महत्व और उसके लाभ को काफी अच्छे ढंग से समझाया गया है. इसके अनुसार, पदे पदे यानी परिक्रमा का हर कदम से भक्त को तत्काल अश्वमेध यज्ञ जैसा फल प्राप्त होता है. यह भी उल्लेख मिलता है कि इससे समस्त पापों का क्षय हो जाता है.

    डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है

  • मृत्यु से जुड़े अलग-अलग सपने आना देता है कई संकेत, स्वप्न शास्त्र से जानिए इसका मतलब

    मृत्यु से जुड़े अलग-अलग सपने आना देता है कई संकेत, स्वप्न शास्त्र से जानिए इसका मतलब

    मृत्यु से जुड़े अलग-अलग सपने आना देता है कई संकेत, स्वप्न शास्त्र से जानिए इसका मतलब

    Swapna Shastra: स्वप्न शास्त्र के अनुसार, नींद में आने वाले सपनों के संकेतों से भविष्य के बारे में जान सकते हैं. नींद में नजर आने वाले सपने भविष्य से जुड़े कई संकेत देते है. इसी प्रकार व्यक्ति को अगर मौत से जुड़े सपने आते हैं, तो यह शुभ-अशुभ घटनाओं की ओर इशारा करते हैं. मृत्यु से जुड़े अलग-अलग प्रकार के सपने देखने का क्या अर्थ होता है. आप इसके बारे में स्वप्न शास्त्र के अनुसार, विस्तार से जान सकते हैं.

    मृत व्यक्ति का सपने में दिखना

    आप किसी मृत पूर्वज को सपने में देखते हैं, तो यह इस ओर इशारा करता है कि आपकी कोई इच्छा पूरी होने वाली है. इस प्रकार का सपना आना उस व्यक्ति के साथ भावनात्मक जुड़ाव की ओर इशारा करता है. कई बार ऐसे सपने आना पुरानी यादों के कारण होता है. आपको ऐसे सपने आने पर शांत मन के लिए प्रार्थना और दान करना चाहिए.

    सपने में किसी की मृत्यु देखना

    जीवन में तनाव के कारण कई बार किसी व्यक्ति की मृत्यु का सपना आ सकता है. हालांकि, स्वप्न शास्त्र में किसी परिजन की मृत्यु का सपना देखना उनकी लंबी आयु या उनके जीवन में सुधार की ओर इशारा करता है. आप इस प्रकार के सपने आने से डरना नहीं चाहिए. यह सपना उस व्यक्ति के जीवन पर चल रहे संकट के टलने की ओर इशारा करता है.

    सपने में खुद की मृत्यु देखना

    स्वप्न शास्त्र के अनुसार, सपने में खुद की मृत्यु देखना सेहत में सुधार और लंबी उम्र होने की ओर इशारा करता है. स्वप्न शास्त्र में इस प्रकार का सपना उल्टा माना जाता है. इस प्रकार का सपना आना जीवन में सकारात्मक बदलावों का संकेत होता है.

    सपने में अर्थी देखना

    सपने में अर्थी देखने पर लोग अक्सर डर जाते हैं. हालांकि, ऐसा सपना आना जीवन की मुश्किलों के खत्म होने की ओर इशारा करता है. किसी बीमार व्यक्ति को अर्थी पर देखना उसके जल्दी सही होने का संकेत हो सकता है. इसके अलावा आपको कोई मृत व्यक्ति बार-बार सपने में दिखता है, तो यह उसकी इच्छा अधूरी रहने की वजह से हो सकता है. आपको ऐसी स्थिति में दान करना चाहिए.

    डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और स्वप्न शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है.