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  • बेड के नीचे इन 5 चीजों को रखना माना जाता है अशुभ, जानिए वास्तु से जुड़े जरूरी नियम..

    बेड के नीचे इन 5 चीजों को रखना माना जाता है अशुभ, जानिए वास्तु से जुड़े जरूरी नियम..

    बेड के नीचे इन 5 चीजों को रखना माना जाता है अशुभ, जानिए वास्तु से जुड़े जरूरी नियम..

    Vastu Tips: वास्तु शास्त्र में चीजों की दिशा और दशाओं को लेकर कई नियम बताए गए है. वास्तु के अनुसार, घर में चीजों को यहां-वहां रख देने से वास्तु दोष लगता है. इसके कारण जीवन में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. कुछ गलतियां घर में नकारात्मकता को बढ़ाने का कारण बन सकती है. वास्तु के अनुसार, बेड के नीचे कई चीजों को रखने से बचना चाहिए. अक्सर लोग घर में बिस्तर के नीचे सामान रख देते हैं. लेकिन आप ऐसी भूल न करें.

    इन चीजों को रखने से होगा नुकसान

    वास्तु की दृष्टि से बिस्तर के नीचे कई चीजों को रखने से नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और वास्तु दोष लगता है. यह घर में अशांति और दुख का कारण बन सकती है. इसका सेहत के ऊपर भी बुरा असर पड़ सकता है. आप लोगों को किन चीजों को बेड के नीचे नहीं रखना चाहिए, इसके बारे में आप यहां विस्तार से जान सकते हैं.

    जूते-चप्पल – अक्सर घरों में जूते-चप्पलों को लोग बेड के नीचे रखते हैं. आपको ऐसी गलती करने से बचना चाहिए. इसके कारण तनाव बढ़ सकता है. वास्तु के अनुसार, यह अशुभ माना जाता है.

    खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान – बिजली के खराब हुए सामान को लोग घर में कहीं भी छोड़ देते हैं. कई बार लोग इसे बेड के नीचे रख देते हैं. ऐसा करने से बचना चाहिए. पुराने फोन, चार्जर या पंखा कोई भी बिजली का खराब सामान बिस्तर के नीचे न रखें.

    झाड़ू – आप घर में बेड के नीचे झाड़ू रखते हैं, तो इसके कारण घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है. आपको ऐसी गलती करने से बचना चाहिए. यह अनिद्रा और व्यर्थ के खर्च का कारण बन सकता है. इसके कारण रिश्तों में तनाव भी आता है.

    नुकीली चीजें और औजार – बेड के नीचे लोहे के औजार, कांच, कीलें, कैंची आदि नहीं रखना चाहिए. इन चीजों को रखने से आप लोगों को रिश्तों में तनाव का सामना करना पड़ सकता है. इसके कारण परिवार का माहौल तनावपूर्ण बनता है.

    पूजा का सामान – बेड के नीचे या पलंग के अंदर देवी-देवताओं की मूर्तियां और पूजा की सामग्री नहीं रखनी चाहिए. इससे भगवान नाराज होते हैं. आपको अशुभ परिणााम झेलने पड़ सकते हैं.

    डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है.

  • चीन-थाईलैंड समेत इन देशों में खाया जाता है मगरमच्छ का मांस, कई जगहों पर बाजार में मिलते हैं इसके व्यंजन.

    चीन-थाईलैंड समेत इन देशों में खाया जाता है मगरमच्छ का मांस, कई जगहों पर बाजार में मिलते हैं इसके व्यंजन.

    चीन-थाईलैंड समेत इन देशों में खाया जाता है मगरमच्छ का मांस, कई जगहों पर बाजार में मिलते हैं इसके व्यंजन.

    Amazing Facts: मगरमच्छ को आमतौर पर एक खतरनाक शिकारी के रूप में देखा जाता है, जिससे इंसान दूर रहना पसंद करते हैं। लेकिन दुनिया के कुछ हिस्सों में मगरमच्छ के मांस को खाने की परंपरा भी रही है। कुछ देशों में इसे खास व्यंजन के तौर पर परोसा जाता है, जबकि कुछ जगहों पर इसका मांस स्थानीय बाजारों और रेस्तरां में भी देखने को मिल सकता है।

    हालांकि, इसका सेवन हर देश में आम नहीं है और कई जगहों पर मगरमच्छों के शिकार, पालन और मांस की बिक्री को लेकर सख्त नियम भी लागू हैं।

    चीन में मगरमच्छ के मांस का इस्तेमाल

    चीन के कुछ क्षेत्रों में मगरमच्छ के मांस का इस्तेमाल पारंपरिक भोजन और स्थानीय व्यंजनों में किया जाता रहा है। यहां मगरमच्छों की कुछ प्रजातियों का व्यावसायिक पालन भी किया जाता है।

    कुछ जगहों पर इसके मांस को पकाकर परोसा जाता है। इसके अलावा मगरमच्छ के शरीर के अलग-अलग हिस्सों से जुड़े पारंपरिक उपयोगों का भी उल्लेख मिलता है।

    थाईलैंड में भी मिलता है मगरमच्छ का मांस

    थाईलैंड में मगरमच्छ पालन एक जाना-पहचाना व्यवसाय है। कुछ स्थानों पर मगरमच्छ के मांस को ग्रिल करके या अलग-अलग मसालों के साथ पकाकर बेचा जाता है।

    कुछ पर्यटन क्षेत्रों और स्थानीय बाजारों में मगरमच्छ के मांस से बने व्यंजन देखने को मिल सकते हैं। हालांकि, यह थाईलैंड के रोजमर्रा के भोजन का हिस्सा नहीं है और हर व्यक्ति इसे नहीं खाता।

    कंबोडिया और आसपास के इलाकों में भी इस्तेमाल

    दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ अन्य हिस्सों में भी मगरमच्छ पालन और इसके मांस के इस्तेमाल की जानकारी मिलती है। कंबोडिया जैसे देशों में कुछ क्षेत्रों में मगरमच्छों का पालन व्यावसायिक स्तर पर किया जाता है और मांस का उपयोग स्थानीय बाजारों में किया जाता रहा है।

    मगरमच्छ का मांस कैसा होता है?

    मगरमच्छ के मांस को कई जगहों पर चिकन और मछली के बीच के स्वाद जैसा बताया जाता है। इसे आमतौर पर ग्रिल, फ्राई या मसालों के साथ पकाकर खाया जाता है।

    हाल

  • अभी से घर में लगा लें ये 5 पौधे, एयर प्यूरीफायर भी हो जाएगा फेल और प्रदूषित हवा को करेगा साफ.

    अभी से घर में लगा लें ये 5 पौधे, एयर प्यूरीफायर भी हो जाएगा फेल और प्रदूषित हवा को करेगा साफ.

    अभी से घर में लगा लें ये 5 पौधे, एयर प्यूरीफायर भी हो जाएगा फेल और प्रदूषित हवा को करेगा साफ.

    जैसे ही बरसात का मौसम खत्म होता है, वैसे ही वायु की गुणवत्ता फिर से प्रभावित होने लगती है. ऐसे समय में घर के अंदर या आसपास लगे पौधे काफी अहम भूमिका निभा सकते हैं. ये हवा में मौजूद कुछ दूषित कणों और प्रदूषकों को कम करने में मदद करते हैं, जिससे घर के अंदर साफ हवा का प्रवाह बेहतर हो सकता है. यही वजह है कि ये पौधे सिर्फ घर की खूबसूरती बढ़ाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हवा को स्वच्छ रखने में भी मजबूत भूमिका निभाते हैं. आप इन्हें घर या अपने कमरे के अंदर भी लगा सकते हैं. इन पौधों को ज्यादा केयर की जरूरत नहीं पड़ती और ये कम रोशनी में भी अच्छे से ग्रो करते हैं.

    1. स्पाइडर प्लांट स्पाइडर प्लांट भले देखने में साधारण लगे, लेकिन इसकी पत्तियां चमत्कार की तरह काम करती हैं. अपने नाम के जैसा ही इस पौधे की पत्तियां हवा में मौजूद प्रदूषकों को खुद में सोख लेती है. न केवल पत्तियां बल्कि इसके जड़ें भी हवा में मौजूद फॉर्मल्डिहाइड जैसे प्रदूषकों को कम करने में मददगार साबित होती हैं और घर के अंदर साफ हवा लाने में मदद करती है.

    2. गोल्डन पोथोस गोल्डन पोथोस देखने में जितना खूबसूरत लगता है, हवा को साफ रखने में भी उतना ही मददगार माना जाता है. इसकी पत्तियां हवा में मौजूद हानिकारक प्रदूषकों को खुद में सोखने में मदद करती हैं. यह फॉर्मल्डिहाइड और बेंजीन जैसे प्रदूषकों को कम करने में मदद करता है और घर के अंदर की हवा को बेहतर बनाने में सहायक हो सकता है.

    3. पीस लिली पीस लिली सिर्फ अपने सफेद फूलों से घर की खूबसूरती नहीं बढ़ाती, बल्कि हवा को साफ रखने में भी मदद करती है. इसकी पत्तियां हवा में मौजूद कुछ VOCs को सोखने में मदद करती हैं. साथ ही यह फॉर्मल्डिहाइड जैसे प्रदूषकों को कम करने में भी मददगार हो सकती है, जिससे घर के अंदर की हवा बेहतर हो सकती है.

    4. एरेका पाम एरेका पाम घर के अंदर हरियाली बढ़ाने के साथ हवा की गुणवत्ता बेहतर करने में भी मदद कर सकता है. इसकी पत्तियां और पौधे की प्राकृतिक प्रक्रियाएं indoor हवा में मौजूद कुछ प्रदूषकों और गैसों के स्तर को कम करने में सहायक होती हैं. यानी यह पौधा घर को खूबसूरत बनाने के साथ हवा को बेहतर रखने में भी अपनी भूमिका निभाता है.

    5. स्नेक प्लांट स्नेक प्लांट देखने में भले ही साधारण लगे, लेकिन घर के अंदर की हवा के लिए यह काफी काम का पौधा है. इसकी पत्तियां हवा में मौजूद कुछ प्रदूषकों को सोखने में मदद करती हैं. यह फॉर्मल्डिहाइड जैसे प्रदूषकों को कम करने में भी सहायक हो सकता है और कमरे की हवा को बेहतर बनाने में मदद करता है.

  • मनी प्लांट के अलावा ये 5 पौधे घर में बढ़ाते हैं सुख-शांति, सोख लेती है नेगेटिव एनर्जी..

    मनी प्लांट के अलावा ये 5 पौधे घर में बढ़ाते हैं सुख-शांति, सोख लेती है नेगेटिव एनर्जी..

    मनी प्लांट के अलावा ये 5 पौधे घर में बढ़ाते हैं सुख-शांति, सोख लेती है नेगेटिव एनर्जी..

    Indoor Plant Vastu: जब भी घर के अंदर इंडोर प्लांट से सजावट, सुख-शांति और धन बढ़ाने की बात आती है, तो सबसे पहले ‘मनी प्लांट’ का नाम सामने आता है. लेकिन प्रकृति की गोद में कुछ ऐसे बेमिसाल पौधे भी हैं, जो मनी प्लांट से कई गुना तेजी में घर की नेगेटिव एनर्जी को सोख लेते हैं. आइए जानते हैं, ऐसे 5 जादुई इंडोर प्लांट के बारे में, जो न केवल घर को एक मॉडर्न लुक देते हैं, बल्कि जीवन में सुख, शांति और धन की आमद का रास्ता भी सुगम बनाने में मदद करते हैं.

    स्नेक प्लांट

    स्नेक प्लांट की खासियत यह है कि यह पौधा पीपल की तरह रात में भी ऑक्सीजन छोड़ता है. साथ ही यह हवा में व्याप्त टॉक्सिक यानी हानिकारक कणों को सबसे अधिक जल्दी से सोखता है. इससे घर में पाजिटिव एनर्जी बनी रहती है. मान्यता है कि इसे घर के पूर्वी, दक्षिणी और दक्षिणी-पूर्वी कोने में रखने से तनाव कम होता है.

    पीस लिली

    पीस लिली के बारे में कहा जाता है कि यह कार्बन डाइऑक्साइड के अलावा बेंजीन, फॉर्मेल्डिहाइड और जाइलीन के हानिकारक कणों को भी सोख लेता है. साथ ही यह भी रात में ऑक्सीजन बनाता है. कहते हैं, घर में पॉजिटिव झगड़ा-क्लेश दूर कर शांति के लिए पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखना चाहिए.

    जेड प्लांट

    जेड प्लांट को ‘धन का पौधा’ और ‘फ्रेंडशिप ट्री’ भी कहा जाता है. इसके बारे में मान्यता है कि यह वातावरण में ‘फ्रेशनेस’ बनाए रखता है. साथ ही यह मानसिक तनाव को पास फटकने भी नहीं देता है. लोग अपने घर में सुख-समृद्धि और धन की आमद बढ़ाने के लिए मुख्य द्वार के पास या उत्तर-पूर्व दिशा में रखते हैं.

    स्पाइडर प्लांट

    स्पाइडर प्लांट के बारे में कहा है कि यह 24 घंटे में हवा की 95 फीसदी नेगेटिव वाइब्स यानी अशुद्धियों को सोख लेता है. इस प्रकार हवा को शुद्ध बनाने में यह पौधा लाजवाब है. तनाव और नेगेटिव थॉट्स को दूर करने और रिश्तों में सुधार के लिए इस पौधे को घर उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व कोने में रखते हैं.

    लकी बैम्बू

    यह पौधा केवल पानी में उगाया जाता है, जो घर के भीतर की हवा को साफ कर वातावरण को सकारात्मक बनाता है. यह एक डंठल वाला पौधा है, जिसकी संख्या के आधार पर फल अलग-अलग होते हैं. कहते हैं, सुख-शांति के लिए 3 डंठल और धन-संपत्ति के लिए 5 डंठल वाले बैम्बू सबसे अधिक लकी होते हैं. कहते हैं, इसे घर की पूर्व या दक्षिण दिशा में रखने घर के सदस्यों की सेहत भी अच्छी रहती है.

    डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है.

  • यहां डस्टबिन से बातें करते हैं लोग! आवाज सुनकर समझता है बात, फिर अपने आप खोल देता है ढक्कन.

    यहां डस्टबिन से बातें करते हैं लोग! आवाज सुनकर समझता है बात, फिर अपने आप खोल देता है ढक्कन.

    यहां डस्टबिन से बातें करते हैं लोग! आवाज सुनकर समझता है बात, फिर अपने आप खोल देता है ढक्कन.

    डस्टबिन का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में ऐसी साधारण चीज की तस्वीर आती है, जिसमें कूड़ा डालने के बाद उसे सफाईकर्मी उठा ले जाते हैं। लेकिन तकनीक के इस दौर में अब डस्टबिन भी स्मार्ट हो रहे हैं। चीन से जुड़ी स्मार्ट टेक्नोलॉजी में ऐसे डस्टबिन का कॉन्सेप्ट सामने आया है, जो इंसान की आवाज को समझकर उसके निर्देश के मुताबिक काम कर सकता है।

    यानी अगर कोई व्यक्ति कूड़ा लेकर डस्टबिन के पास पहुंचे और उसे ढक्कन खोलने के लिए कहे, तो सिस्टम आवाज को पहचानकर ढक्कन खोलने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है। यही वजह है कि स्मार्ट डस्टबिन का यह कॉन्सेप्ट लोगों के बीच काफी दिलचस्प बना हुआ है।

    आखिर स्मार्ट डस्टबिन में ऐसा क्या लगा होता है?

    स्मार्ट डस्टबिन सामान्य कूड़ेदान से काफी अलग होता है। इसमें कई तरह के इलेक्ट्रॉनिक और तकनीकी उपकरण लगाए जा सकते हैं।

    इनमें माइक्रोफोन, सेंसर, कंट्रोल सिस्टम, मोटर और सॉफ्टवेयर जैसे हिस्से शामिल हो सकते हैं। जब कोई व्यक्ति डस्टबिन के पास बोलता है, तो माइक्रोफोन उसकी आवाज को कैप्चर करता है।

    इसके बाद सिस्टम आवाज में दिए गए निर्देश को समझने की कोशिश करता है। अगर कमांड ढक्कन खोलने की है, तो कंट्रोल यूनिट मोटर को सक्रिय कर सकती है। मोटर ढक्कन को ऊपर उठाती है और कचरा डालने के बाद ढक्कन दोबारा बंद हो सकता है।

    यानी डस्टबिन खुद से इंसानों की तरह नहीं सोचता, बल्कि कई तकनीकी सिस्टम मिलकर उसके निर्देशों को पूरा करते हैं।

    सिर्फ आवाज सुनना ही नहीं, कचरे को पहचानने की भी कोशिश

    स्मार्ट डस्टबिन की खासियत केवल वॉयस कमांड तक सीमित नहीं है। कुछ आधुनिक सिस्टम कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में बांटने की दिशा में भी काम कर सकते हैं।

    कचरे को आमतौर पर रिसाइकिल होने वाली चीजों, खाने के कचरे और दूसरे सामान्य कचरे में अलग करना जरूरी होता है। ऐसे में कुछ स्मार्ट डस्टबिन में अलग-अलग कम्पार्टमेंट दिए जा सकते हैं और सेंसर या सॉफ्टवेयर की मदद से सही हिस्से का चुनाव किया जा सकता है।

    हालांकि हर स्मार्ट डस्टबिन में ये सभी सुविधाएं मौजूद हों, यह जरूरी नहीं है। किसी मॉडल में केवल ऑटोमैटिक ढक्कन हो सकता है, जबकि दूसरे में आवाज पहचानने, सेंसर या कचरे की पहचान जैसी अतिरिक्त सुविधाएं मिल सकती हैं।

    चीन में तेजी से बढ़ रहा स्मार्ट सिटी का कॉन्सेप्ट

    चीन में पिछले कुछ वर्षों में स्मार्ट सिटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन और रोबोटिक्स से जुड़ी तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ा है।

    शहरी इलाकों में स्मार्ट कैमरे, ऑटोमेटेड मशीनें, डिजिटल पेमेंट सिस्टम और AI आधारित सेवाओं का इस्तेमाल देखने को मिलता है। अब इसी तरह की तकनीक का इस्तेमाल कचरा प्रबंधन को बेहतर और ज्यादा ऑटोमेटेड बनाने की दिशा में भी किया जा रहा है।

    रोजमर्रा की चीजें भी बन रही हैं स्मार्ट

    स्मार्ट डस्टबिन का कॉन्सेप्ट यह दिखाता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल सिर्फ मोबाइल फोन, चैटबॉट या कैमरा सिस्टम तक सीमित नहीं है।

    अब रोजमर्रा की बेहद साधारण चीजों में भी सेंसर, सॉफ्टवेयर और ऑटोमेशन जोड़े जा रहे हैं। आने वाले समय में कचरा प्रबंधन जैसे कामों में ऐसी तकनीक का इस्तेमाल और बढ़ सकता है।

    हालांकि किसी खास स्मार्ट डस्टबिन की वास्तविक क्षमता उसके मॉडल और तकनीकी सिस्टम पर निर्भर करती है। सभी स्मार्ट डस्टबिन इंसानी बातचीत को पूरी तरह समझने या हर तरह के कचरे की पहचान करने में सक्षम हों, ऐसा जरूरी नहीं है।

     

     
  • इस मंदिर में स्टाम्प पेपर पर मनोकामना लिख टांगते हैं भक्त, मन्नत पूरी होने पर चढ़ाते हैं ये चीज

    इस मंदिर में स्टाम्प पेपर पर मनोकामना लिख टांगते हैं भक्त, मन्नत पूरी होने पर चढ़ाते हैं ये चीज

    Temples-of-India

    भारत को मदिरों और आश्रमों का देश कहा जाता है। उत्तर से लेकर दक्षिण तक, पूरब से लेकर पश्चिम विविध प्रकार के देवता और उनके अनोखे मंदिर और उससे जुड़ी लाखों रहस्यमय कथा-कहानियां हैं, जहां के रीति-रिवाज और नियम भी अनूठे हैं। ऐसा ही एक मंदिर लोककथाओं और प्राकृतिक सुंदरता की नगरी अल्मोड़ा की घाटियों में है।

    चितई गोलू देवता मंदिर

    हिमालय की गोद में बसे इस मंदिर का नाम है चितई गोलू देवता मंदिर, जिसमें स्थानीय लोगों की जबरदस्त आस्था और विश्वास है। कुमाऊं क्षेत्र में चितई गोलू देवता को ‘न्याय का देवता और परम न्यायाधीश’ के रूप में इनकी पूजा की जाती हैं। कहते हैं, जब लोग हर जगह निराश हो जाते हैं, कोर्ट-कचहरी आदि से सब कुछ हार जाते हैं, तब लोग यहां आखिरी उम्मीद लेकर आते हैं।

    कौन थे चितई गोलू देवता?

    अल्मोड़ा के चंपावत (धूमाकोट) के इतिहासे के अनुसार, चितई गोलू देवता कत्यूरी राजवंश के राजकुमार थे, जो महादेव शिव के ‘गौर भैरव’ रूप के अवतार थे। उन्होंने न्यायप्रिय कत्यूरी राजा झाल राय की आठवीं रानी कालिंका के गर्भ से जन्म लिया था। लेकिन सात अन्य रानियों ने उसे षडयंत्र कर एक सन्दूक में बंद कर काली नदी की धारा में बहा दिया और राजा से कहा कि रानी ने पत्थर के सिलबट्टे को जन्म दिया है।

    मछुआरे ने किया पालन-पोषण

    नदी में बहता वह सन्दूक भाना नाम के मछुआरे को मिला, जिसने बालक का पालन-पोषण किया और नाम रखा गोलू। यह बालक विलक्षण था। बड़े होने पर एक दिन गोलू एक लकड़ी का घोड़ा लेकर राजा के घाट पर उसे पानी पिलाने पहुंचा। रानियों ने उपहास किया लकड़ी का घोड़ा पानी कैसे पी सकता है। तब गोलू ने पलट कर जवाब दिया, ‘जब एक रानी सिलबट्टे को जनम दे सकती है, तो लकड़ी घोड़ा पानी क्यों नहीं पी सकता है?’

    ऑन द स्पॉट निष्पक्ष न्याय

    जब यह बात राजा के पास पहुंची, तो राजा ने गहन जांच करवाई और अपनी भूल सुधारते हुए रानी कालिंका और उसके पुत्र गोलू को अपनाया। बाद में गोलू चंपावत के राजा बने और गोलू दरबार लगाकर लोगों को न्याय देते थे। कहते हैं, आज के फास्ट ट्रैक कोर्ट से अधिक फास्ट थे। वे ऑन द स्पॉट निष्पक्ष निर्णय करते थी और सही और सटीक न्याय देते थे। प्रजा-प्रेम और उनकी न्यायप्रियता से वे जन-जन के राजा बन गए और ‘न्याय के देवता’ के रूप में पूजे जानए लगे।

    क्या है स्टांप पर अर्जी लिखने का रहस्य

    कुमाऊं क्षेत्र के लोग गोलू देवता को अपना राजा और न्याय देने वाले देवता मानते हैं। कहते हैं, जब कोई आदमी अदालत का दरवाजा खट-खटा के परेशान और निराश हो जाता है, तो वह आखिरी उम्मीद लेकर इस ‘दिव्य न्यायालय’ में हाजिरी भरता है। मान्यता है कि लोगों की लिखित अर्जी सीधी के देवता का पहुंचती है। यह अर्जी स्टांप पेपर और सादे कागज पर भी लिखी जा सकती है।

    लाखों घंटियों का मंदिर

    चितई गोलू देवता का मंदिर का परिसर अर्जियों और घंटियों से भरा पड़ा है, जिसे आभार और न्याय की गूंज माना जाता है। मंदिर में प्रवेश करते ही छोटी-बड़ी लाखों घंटिया देख हृदय विस्मित हो जाता है। कहते हैं, ये घंटियां उन लोगों ने अर्पित की हैं, जिनकी अर्जियां और मनोकामनाएं पूरी हो गई थी।

    डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. 

  • सेहत का मतलब सिर्फ अच्छा खाना नहीं, हेल्दी रहने के लिए इन आदतों पर भी दें ध्यान..

    सेहत का मतलब सिर्फ अच्छा खाना नहीं, हेल्दी रहने के लिए इन आदतों पर भी दें ध्यान..

    सेहत का मतलब सिर्फ अच्छा खाना नहीं, हेल्दी रहने के लिए इन आदतों पर भी दें ध्यान..

    आज के समय में ज्यादातर लोग स्वस्थ रहने के लिए अपने खानपान पर सबसे ज्यादा ध्यान देते हैं। फल, सब्जियां, प्रोटीन और साबुत अनाज जैसी चीजों को डाइट में शामिल करना अच्छी आदत है, लेकिन सिर्फ अच्छा खाना ही पूरी सेहत की गारंटी नहीं देता।

    एक स्वस्थ शरीर के लिए आपकी पूरी लाइफस्टाइल का संतुलित होना जरूरी है। रोजाना की शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद, पानी पीने की आदत, तनाव को नियंत्रित करना और साफ-सफाई जैसी चीजें भी स्वास्थ्य पर असर डालती हैं।

    सिर्फ हेल्दी खाना काफी नहीं

    अगर कोई व्यक्ति पौष्टिक खाना खाता है, लेकिन दिनभर बैठा रहता है, नींद पूरी नहीं करता या लगातार तनाव में रहता है, तो उसकी लाइफस्टाइल को पूरी तरह हेल्दी नहीं कहा जा सकता।

    इसलिए अच्छी सेहत के लिए खानपान के साथ-साथ रोजमर्रा की आदतों में भी सुधार करना जरूरी है।

    रोजाना शरीर को एक्टिव रखें

    लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहना शरीर के लिए अच्छा नहीं माना जाता। इसलिए अपनी क्षमता और दिनचर्या के अनुसार रोजाना कुछ समय शारीरिक गतिविधि के लिए जरूर निकालें।

    आप तेज चाल से पैदल चल सकते हैं, योग कर सकते हैं, साइकिल चला सकते हैं या अपनी पसंद की कोई दूसरी एक्सरसाइज कर सकते हैं। नियमित रूप से एक्टिव रहने से शरीर को फिट रखने में मदद मिलती है।

    पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी

    शरीर के सामान्य कामकाज के लिए पानी बेहद जरूरी है। इसलिए दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की आदत बनानी चाहिए।

    हालांकि, हर व्यक्ति की पानी की जरूरत एक जैसी नहीं होती। मौसम, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य जैसी परिस्थितियों के अनुसार इसकी जरूरत बदल सकती है। इसलिए पूरे दिन नियमित रूप से पानी लेते रहना बेहतर आदत है।

    नींद से समझौता न करें

    हेल्दी लाइफस्टाइल में नींद की भी बड़ी भूमिका होती है। देर रात तक मोबाइल या दूसरी स्क्रीन देखते रहना, रोज अलग-अलग समय पर सोना और लगातार कम नींद लेना आपकी दिनचर्या को प्रभावित कर सकता है।

    कोशिश करें कि सोने और जागने का समय लगभग तय रहे। रात में सोने से पहले मोबाइल, टीवी या दूसरी स्क्रीन का इस्तेमाल कम करने से भी नींद की आदत बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

    तनाव को नियंत्रित करना सीखें

    लगातार तनाव में रहना भी अच्छी लाइफस्टाइल का हिस्सा नहीं है। इसलिए दिनभर की व्यस्तता के बीच अपने लिए थोड़ा समय निकालना जरूरी है।

    पैदल चलना, योग, ध्यान, पसंदीदा गतिविधियां करना या कुछ समय आराम करना तनाव को मैनेज करने में मदद कर सकता है। नियमित शारीरिक गतिविधि भी मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकती है।

    साफ-सफाई और फूड हाइजीन का रखें ध्यान

    पौष्टिक खाना तभी फायदेमंद हो सकता है जब उसे साफ-सफाई के साथ तैयार और सुरक्षित तरीके से रखा गया हो।

    खाना बनाने से पहले हाथ धोना, कच्चे और पके भोजन को अलग रखना, भोजन को अच्छी तरह पकाना और साफ बर्तनों का इस्तेमाल करना जरूरी है। खाने की गुणवत्ता के साथ यह भी मायने रखता है कि भोजन किस तरह तैयार और स्टोर किया गया है।

    हेल्दी रहने का मतलब सिर्फ वजन कम करना नहीं

    अच्छी सेहत का मतलब केवल वजन कम करना या पतला दिखना नहीं है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित खानपान के साथ नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद, सही मात्रा में पानी, तनाव पर नियंत्रण और साफ-सफाई जैसी आदतों पर भी ध्यान देना जरूरी है।

    इसलिए अगर आप अपनी सेहत बेहतर रखना चाहते हैं, तो केवल डाइट बदलने के बजाय अपनी पूरी दिनचर्या को धीरे-धीरे बेहतर बनाने की कोशिश करें।

    डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। किसी बीमारी, दवा, डाइट या व्यक्तिगत स्वास्थ्य समस्या के संबंध में डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित है।

  • रिश्तों में कड़वाहट घोल देती हैं ये 5 गलतियां, चाणक्य की इन बातों को हमेशा रखें ध्यान..

    रिश्तों में कड़वाहट घोल देती हैं ये 5 गलतियां, चाणक्य की इन बातों को हमेशा रखें ध्यान..

    रिश्तों में कड़वाहट घोल देती हैं ये 5 गलतियां, चाणक्य की इन बातों को हमेशा रखें ध्यान..

    Chanakya Niti: रिश्ते जिंदगी का बेहद अहम हिस्सा होते हैं। परिवार और रिश्तेदारों के साथ अच्छे संबंध बने रहें, इसके लिए सिर्फ प्यार और सम्मान ही नहीं, बल्कि व्यवहार का भी ध्यान रखना जरूरी है। कई बार हमारी छोटी-छोटी आदतें ही सामने वाले को बुरी लग जाती हैं और धीरे-धीरे रिश्तों में दूरी बढ़ने लगती है।

    आचार्य चाणक्य ने अपनी नीतियों में व्यक्ति के व्यवहार और सामाजिक जीवन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें बताई हैं। उनके अनुसार, दूसरों के घर जाते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। आइए जानते हैं ऐसी 5 गलतियों के बारे में, जिनसे रिश्तों में कड़वाहट पैदा हो सकती है।

    1. बिना बताए किसी के घर न पहुंचें

    किसी रिश्तेदार या परिचित के घर जाने से पहले उन्हें इसकी जानकारी देना बेहतर माना जाता है। बिना बताए अचानक पहुंचने से सामने वाला असहज हो सकता है या उसकी दिनचर्या प्रभावित हो सकती है।

    इसलिए अगर किसी के घर जाना हो तो पहले फोन या मैसेज करके बता देना चाहिए। इससे आपके रिश्ते में सम्मान और अपनापन बना रहता है।

    2. खाली हाथ जाने से बचें

    पुराने समय से ही किसी के घर जाते समय अपनी क्षमता के अनुसार कुछ लेकर जाने की परंपरा रही है। यह जरूरी नहीं कि उपहार महंगा ही हो। आप फल, मिठाई या घर में इस्तेमाल होने वाली कोई छोटी चीज भी ले जा सकते हैं।

    ऐसा व्यवहार सामने वाले के प्रति आपके सम्मान और अपनापन को दर्शाता है।

    3. दूसरों के निजी मामलों में दखल न दें

    रिश्तेदारों के घर जाकर उनके निजी मामलों में जरूरत से ज्यादा हस्तक्षेप करने से बचना चाहिए। परिवार के आपसी संबंध, घरेलू खर्च या किसी व्यक्तिगत फैसले पर बिना पूछे अपनी राय देना कई बार परेशानी खड़ी कर सकता है।

    अगर कोई व्यक्ति खुद आपसे सलाह मांगे, तभी अपनी बात रखें। हर मामले में अपनी राय देना रिश्ते में तनाव पैदा कर सकता है।

    4. किसी के घर जरूरत से ज्यादा न रुकें

    रिश्तेदारों के यहां जाना और समय बिताना अच्छी बात है, लेकिन लंबे समय तक रुकने से बचना चाहिए, खासकर तब जब सामने वाले की दिनचर्या प्रभावित हो रही हो।

    किसी के घर जाते समय उनकी सुविधा का भी ध्यान रखना जरूरी है। समय पर वापस लौटने से आपका सम्मान भी बना रहता है और सामने वाले को असुविधा भी नहीं होती।

    5. दिखावे और चुगली से दूर रहें

    रिश्तों में सबसे ज्यादा दूरी पैदा करने वाली आदतों में दिखावा और दूसरों की बुराई करना भी शामिल है। अपनी संपत्ति, कमाई या उपलब्धियों का जरूरत से ज्यादा प्रदर्शन करने से सामने वाला असहज महसूस कर सकता है।

    इसी तरह किसी तीसरे रिश्तेदार की बुराई उसके सामने करने से भी बचना चाहिए। सामने वाला यह सोच सकता है कि आप उसकी गैरमौजूदगी में उसकी बातें भी दूसरों से साझा कर सकते हैं।

    रिश्तों को मजबूत बनाने के लिए जरूरी है समझदारी

    रिश्ते सिर्फ बातचीत से नहीं, बल्कि हमारे व्यवहार से भी मजबूत होते हैं। इसलिए दूसरों की भावनाओं, निजी जीवन और सुविधाओं का सम्मान करना चाहिए। चाणक्य की इन बातों को आज के समय में भी व्यवहार और सामाजिक संबंधों के संदर्भ में समझा जा सकता है।

    डिस्क्लेमर: चाणक्य नीति से जुड़ी ये बातें पारंपरिक मान्यताओं और उपलब्ध व्याख्याओं पर आधारित हैं। इन्हें सामान्य जानकारी के तौर पर पढ़ें।

  • टमाटर खाने से किडनी में पथरी होती है? डॉक्टर ने बताया किन चीजों से हो सकता है खतरा..

    टमाटर खाने से किडनी में पथरी होती है? डॉक्टर ने बताया किन चीजों से हो सकता है खतरा..

    टमाटर खाने से किडनी में पथरी होती है? डॉक्टर ने बताया किन चीजों से हो सकता है खतरा..

    Kidney Stones Reasons: टमाटर भारतीय खाने में इस्तेमाल किया जाने वाला इंग्रीडिएंट है. इसका इस्तेमाल कई तरह से किया जाता है और सलाद से लेकर सब्जी, दाल और चटनी में स्वाद के लिए डाला जाता है. इसलिए कुछ लोग इसकी प्यूरी बनाकर स्टोर करके रख लेते हैं, लेकिन कुछ लोग खाने से परहेज करते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि उनका मानना है कि टमाटर खाने से पथरी की शिकायत हो सकती है. अगर जरूरत से ज्यादा कच्चा खाएंगे तो परेशानी बढ़ सकती है. इसलिए किडनी में पथरी की समस्या से जूझ रहे कई लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि क्या टमाटर खाने से पथरी का खतरा बढ़ सकता है? अक्सर टमाटर को ऑक्सलेट से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन हर इंसान को टमाटर छोड़ने की जरूरत नहीं होती. इसको लेकर किम्स किम्स हॉस्पिटल के डॉक्टर विश्वास एम आर क्या कहते हैं और टमाटर खाने से किडनी स्टोन बनने पर असर पड़ता है या नहीं, आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं.

    क्या टमाटर खाने से किडनी में पथरी होती है?

    ऐसा साफ तौर पर कहना जरूरी नहीं है. टमाटर को किडनी स्टोन होने का असल कारण मानना सही नहीं है. किडनी स्टोन कई कारणों से बन सकते हैं और उनके प्रकार भी अलग-अलग होता है. हालांकि, कैल्शियम ऑक्सालेट स्टोन सबसे आम प्रकार के किडनी स्टोन हैं. ऐसे मामलों में डॉक्टर जरूरत के हिसाब से डाइट में ऑक्सलेट की मात्रा, नमक, कैल्शियम और दूसरे पोषक तत्वों पर ध्यान देने की सलाह दे सकते हैं.

    किन चीजों से बढ़ सकता है पथरी का खतरा?

    शरीर में पानी की कमी होना- किडनी स्टोन से बचने के लिए पानी पीना सबसे जरूरी टिप्स में से एक है. पानी कम पीने से पेशाब ज्यादा गाढ़ा हो सकता है और उसमें मौजूद कुछ मिनरल्स आपस में मिलकर क्रिस्टल बना सकते हैं.

    ज्यादा नमक खाना- खाने में बहुत ज्यादा नमक लेने से पेशाब में कैल्शियम की मात्रा बढ़ सकती है, जिससे कुछ लोगों में कैल्शियम वाले किडनी स्टोन का खतरा बढ़ सकता है. इसलिए आप चिप्स, पैकेज्ड फूड, इंस्टेंट नूडल्स, प्रोसेस्ड मीट और ज्यादा नमक वाले सॉस को खाना नुकसानदायक हो सकता है.

    बहुत ज्यादा ऑक्सालेट वाली चीजें- अगर किसी व्यक्ति को कैल्शियम ऑक्सालेट स्टोन की समस्या है तो डॉक्टर या डाइटिशियन कुछ ज्यादा ऑक्सलेट वाली चीजों से दूरी बना लें. आप पालक, चुकंदर, रूबर्ब, कुछ नट्स और चॉकलेट जैसी चीजों से परहेज करें.

    क्या पथरी होने पर टमाटर पूरी तरह बंद कर दें?

    अगर आपको किडनी स्टोन है तो अपनी मर्जी से टमाटर या किसी दूसरी सब्जी को पूरी तरह डाइट से हटाने के बजाय डॉक्टर या डाइटिशियन से सलाह लें. किडनी स्टोन की डाइट इस बात पर डिपेंड करती है कि स्टोन किस प्रकार का है और आपके यूरिन या ब्लड टेस्ट में क्या सामने आया है.

    अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें.

  • सोफे के पीछे दीवार पर न टांगें ये 3 तस्वीरें, बन सकती हैं कंगाली और डिप्रेशन का कारण..

    सोफे के पीछे दीवार पर न टांगें ये 3 तस्वीरें, बन सकती हैं कंगाली और डिप्रेशन का कारण..

    सोफे के पीछे दीवार पर न टांगें ये 3 तस्वीरें, बन सकती हैं कंगाली और डिप्रेशन का कारण..

    वास्तु शास्त्र में घर से जुड़ी हर चीज के लिए नियम बेहद स्पष्ट हैं, चाहे वह पूजा घर, किचन, बेडरूम, बालकनी हो या लिविंग रूम. लिविंग रूम के बारे में यह शास्त्र कहता है कि यह घर की वह जगह है, जहां ऊर्जा का सबसे अधिक आदान-प्रदान होता है. इस रूम में सोफे के पीछे की जगह को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है. इसका कारण यह बताया जाता है कि यहां बैठने वाले लोगों और पूरे घर के माहौल पर इस दीवाल का डायरेक्ट असर पड़ता है. आइए वास्तु नियमों से जानते है कि लिविंग रूम में सोफे के पीछे वॉल पर कौन-सी 3 प्रकार की पेंटिंग भूल से भी नहीं टांगनी चाहिए?

    डूबता हुआ सूरज

    वास्तु शास्त्र में उगते हुए सूरज को नई शुरुआत, शुभ ऊर्जा, उत्थान और विकास का प्रतीक माना गया है. वहीं, डूबते सूरज को जीवन में पतन, ठहराव और निराश से जोड़ा गया है. डूबते सूरज वाली तस्वीरों में चीजों को अक्सर धुंधले और फीके पड़ते हुए प्रकाश और रंगों में दिखाया जाता है. ऐसी तस्वीरें सोफे के पीछे लगाने के घर मेम्बर का आपस में विश्वास कम हो सकता है. घर लोग बेवजह उदास या डिप्रेशन का शिकार हो सकते हैं. यह करियर और व्यापार में गिरावट का भी कारण भी बन सकता है.

    यद्ध, हिंसा या महाभारत की तस्वीर

    वास्तु शास्त्र में युद्ध और हिंसा को विनाश और क्रोध का प्रतीक माना गया है. मान्यता है कि इस प्रकार की तस्वीरें या पेंटिंग लगाने से घर के लोगों में अग्रेसिवनेस और नेगेटिविटी बढ़ सकती है. कलह और झगड़े हो सकते हैं. बेवजह तनाव रह सकता है, जो डिप्रेशन की ओर धकेल सकता है. महाभारत युद्ध की तस्वीर भी नहीं लगानी चाहिए, क्योंकि ये भी नकारात्मकता फैला सकती है.

    डूबते जहाज/नाव की तस्वीर

    किसी तूफान में फंसे नाव, पानी में डूबता जहाज, टाइटैनिक या टूटे हुए जहाज की फोटो को वास्तु शास्त्र में बेहद नेगेटिव असर वाला माना गया है. इस प्रकार को तस्वीरों और पेंटिंग को नुकसान, बर्बादी और बुरे वक्त का प्रतीक माना गया है. इसे सोफे के पीछे लगाने से मनःस्थिति और घर-परिवार की आर्थिक स्थति पर असर होता है. इससे घर में कंगाली भी आ सकती है. इस दीवाल पर मुरझाए फूल वाले चित्र, सूखे पेड़ और जंगल में आग लगने जैसे फोटो आदि भी नही लगाने चाहिए।

    ऐसी फोटो लाती है खुशहाली

    वास्तु शास्त्र के अनुसार, इस प्रकार की फोटो का सही विकल्प है सकारात्मक तस्वीर और पेंटिंग, जैसे- दौड़ते हुए 7 सफेद घोड़े, हरे भरे जंगल, ऊंचे ऊंचे पर्वत, उगता हुआ सूर्य. मान्यता है कि ये सुख-समृद्धि को घर-परिवार की आकर्षित करती हैं.

    डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है.