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  • बड़ी आंत के कैंसर के क्या लक्षण होते हैं? ये 2 Symptoms दिखें तो तुरंत डॉक्टर से मिलना है जरूरी..

    बड़ी आंत के कैंसर के क्या लक्षण होते हैं? ये 2 Symptoms दिखें तो तुरंत डॉक्टर से मिलना है जरूरी..

    बड़ी आंत के कैंसर के क्या लक्षण होते हैं? ये 2 Symptoms दिखें तो तुरंत डॉक्टर से मिलना है जरूरी..

    Badi Aant Ka Cancer: बाउल कैंसर बड़ी आंत से रेक्टम तक के हिस्से में होता है. बड़ी आंत पाचन तंत्र का वो हिस्सा है जो भोजन से वॉटर एब्जॉर्ब करता है और शरीर से वेस्ट पदार्थ को बाहर निकालता है. बाउल कैंसर कितना गंभीर है यह इस बात पर निर्भर करता है कि यह कैंसर कितना बड़ा है, कहां तक फैल गया है और मरीज की सेहत कैसी है. ऐसे में इस कैंसर के लक्षणों को जल्द से जल्द पहचानना और इलाज शुरू करना जरूरी होता है. नैशनल हेल्थ सर्विस (NHS) यूके ने बाउल कैंसर के ऐसे लक्षणों का जिक्र किया है जिन्हें इग्नोर नहीं करना चाहिए.

    बाउल कैंसर के क्या लक्षण होते हैं | Signs And Symptoms Of Bowel Cancer

    बाउल मूवमेंट्स में बदलाव होना, जैसे मल का अलग दिखना, लंबे समय तक डायरिया या कब्ज होना.

    अचानक से सामान्य से कम या ज्यादा बार मलत्याग करना भी आंत की किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है

    मल में खून नजर आना या मल का रंग लाल या काला दिखना

    मलद्वार से खून निकलना

    मलत्याग करने के तुरंत बाद ऐसा महसूस होना जैसे फिर से मलत्याग करने की जरूरत है

    पेट में दर्द होना

    पेट में गांठ बनना

    हमेशा पेट फूला हुआ रहना

    बिना कोशिश किए ही वजन का कम होना

    थका हुआ महसूस करना और सांस फूलना. यह बाउल कैंसर के कारण होने वाले अनीमिया का लक्षण हो सकता है.

    ये 2 लक्षण दिखें तो डॉक्टर से तुरंत मिलें

    अगर मल का रंग काला या गहरा लाल दिखे या फिर खून वाले दस्त होने लगें.

    अगर मलद्वार यानी रेक्टम से खून निकलने लगे या मल में बड़े खून के थक्के नजर आएं.

    इस बात का रखें खास ख्याल

    मल में खून या अन्य लक्षण किसी और समस्या के चलते भी हो सकते हैं. जब तक यह कंफर्म ना हो कि आपको बाउल कैंसर है पैनिक ना करें. डॉक्टर से मिलें और जांच कराकर समस्या की जड़ तक जाएं.

    बाउल कैंसर होने के क्या कारण होते हैं

    बाउल कैंसर होने के सटीक कारणों (Bowel Cancer Causes) का पता नहीं है लेकिन यह जेनेटिक चेंजेस, लाइफस्टाइल और एन्वायरमेंटल फैक्टर्स के चलते हो सकता है. इसके अलावा कुछ ऐसी कंडीशंस हैं जो आपको बाउल कैंसर का मरीज बना सकती हैं.

    जिन लोगों की उम्र 50 वर्ष से ज्यादा है, जो धूम्रपान करते हैं, जो मोटापे के शिकार हैं, जिनके करीबी रिश्तेदार को बाउल कैंसर हुआ है, जिन्हें बाउल पॉलीप्स की दिक्कत हो, जो इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज से पीड़ित हों उनमें बाउल कैंसर होने की संभावना ज्यादा होती है.

    अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें.

  • वराह जयंती कब है? भगवान विष्णु ने क्यों लिया जंगली सूअर का अवतार? जानें महत्व और पूजा विधि

    वराह जयंती कब है? भगवान विष्णु ने क्यों लिया जंगली सूअर का अवतार? जानें महत्व और पूजा विधि

    वराह जयंती कब है? भगवान विष्णु ने क्यों लिया जंगली सूअर का अवतार? जानें महत्व और पूजा विधि

    Varah Jayanti 2026: हिन्दू धर्म में भगवान विष्णु ने पाप का नाश करने और धर्म की संस्थापना के लिए बहुत अनोखे-अनोखे काम किए और ऐसे-ऐसे अवतार लिए हैं, जिनके बारे में सोचकर हैरत होती है। जरा कल्पना कीजिए, पूरी सृष्टि जलमग्न हो जाती और पृथ्वी का अस्तित्व खतरे में होता है। तब भगवान विष्णु एक बेहद आक्रामक और अनूठा रूप धारण करते हैं।

    भगवान विष्णु का वराह अवतार एक ऐसा ही अवतार है, जो रहस्यमय और आश्चर्यजनक है। वराह का अर्थ होता है- ‘जंगली सूअर’। इस अवतार में भगवान विष्णु की अदम्य शक्ति और इच्छा सामने उभर कर आती है, जिसमें आक्रामकता के साथ संरक्षण का भाव है। आइए जानते हैं, वर्ष 2026 में उनके इस अवतार की जयंती कब है और पूजा विधि और अनुष्ठान क्या हैं?

    वराह जयंती 2026 कब है?

    वराह जयंती हर साल भाद्रपद मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल यह तिथि रविवार 13 सितंबर 2026 को पड़ रही है। पंचांग के अनुसार, तृतीया तिथि की शुरुआत 13 तारीख की सुबह में 7 बजकर 8 मिनट पर हो रही है और इस तिथि का समापन 14 सितंबर को 7 बजकर 8 मिनट पर हो रही है।

    पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त: द्रिक पंचांग के अनुसार, भगवान विष्णु के वराह रूप की पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त मध्याह्न यानी दोपहर में है, जो 1 बजकर 30 मिनट से अपराह्न के 4 बजे तक है।

    भगवान ने क्यों लिया वराह अवतार?

    पौराणिक कथाओं के अनुसार, हिरण्याक्ष नामक असुर ने अपनी प्रचंड शक्ति से तीनों लोकों में हाहाकार मचा दिया था और देवताओं को भी स्वर्ग से निकाल दिया था। केवल इतना ही नहीं, उसने पृथ्वी को भी चुरा लिया था और उसे समुद्र के गर्भ में छिपा दिया था। इससे पूरी धरती पर भी त्राहि-त्राहि मची हुई थी। सृष्टि का संतुलन बिगड़ गया था।

    तब देवताओं के आह्वान पर भगवान विष्णु ने हिरण्याक्ष के अंत के लिए वराह अवतार लिया था। कहते हैं, हिरण्याक्ष ने ब्रह्मा जी से वरदान मांगा था कि वह किसी ज्ञात जीवों और पशुओं से नहीं मारा जाएगा, लेकिन वह वराह यानी जंगली शूकर या सूअर का नाम लेना भूल गया था। इसी का लाभ लेकर विष्णु जी ने एक विशाल और भयंकर वराह का अवतार लिया और हिरण्याक्ष का अंत कर पृथ्वी की रक्षा की।

    वराह जयंती पूजा विधि

    • वराह जयंती के दिन यानी 13 सितंबर 2026 को सुबह जल्दी उठकर स्नान-आचमन कर व्रत का संकल्प लें.
    • पूजा के समय जल से भरे एक कलश पर भगवान वराह की मूर्ति या फोटो स्थापित करें.
    • फिर, पंचामृत से वराह रूप भगवान विष्णु का अभिषेक करें.
    • भगवान को पीले वस्त्र, पीले पुष्प, मिष्टान्न और नैवेद्य चढ़ाएं.
    • पूजा के दौरान,’ॐ वाराहाय नमः’ मंत्र का जाप करें.

    डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. 

  • हर 30-60 मिनट में उठना क्यों जरूरी? लंबे समय तक बैठने पर शरीर में क्या होता है, NIH की रिसर्च से जानिए..?

    हर 30-60 मिनट में उठना क्यों जरूरी? लंबे समय तक बैठने पर शरीर में क्या होता है, NIH की रिसर्च से जानिए..?

    हर 30-60 मिनट में उठना क्यों जरूरी? लंबे समय तक बैठने पर शरीर में क्या होता है, NIH की रिसर्च से जानिए..?

    आजकल ऑफिस का काम, पढ़ाई, मोबाइल और टीवी की वजह से कई लोग दिन का बड़ा हिस्सा बैठे-बैठे गुजार देते हैं. समस्या सिर्फ यह नहीं है कि हम कितना व्यायाम करते हैं, बल्कि यह भी है कि हम लगातार कितनी देर तक बैठे रहते हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन और नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगर कोई लंबे वक्त तक बैठा रहता है तो उसे कई तरह की दिक्कतें होने लगती हैं. रिसर्च में बताया गया है कि दिल की बीमारी, टाइप 2 डायबिटीज और हेल्थ से जुड़ी परेशानियां होने लगती हैं. लगातार बैठे रहने से शरीर का सर्कुलेशन कम होने लगता है और फैट जमने लगता है. इसलिए डॉक्टर्स हर 30 मिनट में उठने की सलाह देते हैं.

    लंबे समय तक लगातार बैठने पर शरीर में क्या होता है?

    जब हम लंबे समय तक बिना उठे बैठे रहते हैं तो पैरों और शरीर का मेटाबॉलिज्म सुस्त पड़ जाता है. फिजिकल एक्टिविटी न होने की वजह से फैट और कोलेस्ट्रॉल जमा होने लगता है. इससे ब्लड सर्कुलेशन इफेक्ट होता है, जिससे आगे चलकर दिल की बीमारी होने का खतरा दोगुना बढ़ जाता है.

    ब्लड शुगर पर असर होना

    रिसर्च में पाया गया है कि लंबे समय तक बैठने और हर 30 मिनट में उठने का तरीका अलग अलग था. लगातार बैठने की वजह से भूख कम लगती है और वजन बढ़ने लगता है. इससे ब्लड शुगर का लेवल ऊपर नीचे होता रहता है.

    पैरों के ब्लड सर्कुलेशन में बदलाव

    लगातार बैठे रहने से पैरों का ब्लड सर्कुलेशन कम हो सकता है. रिसर्च में पाया गया है कि 4 घंटे लगातार बैठने के दौरान पैरों की सुपरफिशियल फेमोरल आर्टरी में ब्लड सर्कुलेशन कम हुआ, जबकि ब्रेक लेने वालों में कमी देखी गई.

    कितनी देर में उठना चाहिए?

    हर 60 मिनट में उठने से कई तरह के फायदे मिल सकते हैं. यह हर इंसान के ब्रेक लेने का तरीका अलग हो सकता है. इसलिए वक्त 60 से बढ़कर ज्यादा भी हो सकता है. बस आपको लगातार कुछ घंटों तक नहीं बैठना है. उठने के लिए आप चाय या पानी पीने के लिए ब्रेक ले सकते हैं. बाहर जाकर कुछ खा सकते हैं या अपने दोस्त के साथ टहलने का प्लान बना सकते हैं.

    अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें

  • भारत के इन मंदिरों में कंकड़-पत्थर अर्पित करने से पूरा होता अपना घर पाने का सपना..

    भारत के इन मंदिरों में कंकड़-पत्थर अर्पित करने से पूरा होता अपना घर पाने का सपना..

    भारत के इन मंदिरों में कंकड़-पत्थर अर्पित करने से पूरा होता अपना घर पाने का सपना..

    भारत में खुद का आशियाना बनाना हर व्यक्ति का एक सबसे बड़ा सपना होता है. देश में कुछ ऐसे अनोखे और पवित्र धार्मिक स्थल भी हैं, जहां ‘घर की मन्नत’ के लिए भारी भरकम दान या महंगे भोग की जरूरत नहीं पड़ती है? यहां सिर्फ कंकड़ पत्थर अर्पित करने से ही खुद के घर का सपना पूरा हो जाता है. आइए जानते हैं, इस देवस्थलों के बारे में विस्तार से

    Temples of India: आज की तेज-रफ्तार जिंदगी में भी परिवार और घर वह जगह है, जहां सुकून के दो पल मिल जाते हैं. भारतीय परिवेश में अपना घर होना हर व्यक्ति का सपना है. हर कोई चाहता है कि उसका खुद का अपना आशियाना हो, जहां वे सपरिवार रह सकें. इसके लोग अपनी जिंदगी भर की कमाई लगा देते हैं. लेकिन आप नहीं जानते होंगे कि भारत की धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत में कुछ स्थल ऐसे हैं, जहां ‘ईश्वर की इच्छा’ मायने रखती है. आइए यहां जानते हैं, देश के उन तीन मंदिरों के बारे में जहां जहां भारी-भरकम दान, प्रसाद या महंगे भोग नहीं, बल्कि स्वयं का घर बनाने का सपना कंकड़-पत्थर अर्पित करने से पूरा होता है. आइए जानते हैं, इन विशेष मंदिरों से जुड़ी प्रथाएं…

    बंगारु तिरुपति मंदिर

    यह मंदिर कर्नाटक के कोलार जिले में में एक पहाड़ी पर स्थित है. इसे ‘चिन्न तिरुपति’ भी कहते हैं, जिसका अर्थ है ‘छोटे तिरुपति’. भगवान वेंकटेश्वर को समर्पित इस मंदिर में भक्त और श्रद्धालु मंदिर परिसर में छोटे-छोटे कंकड़-पत्थर चुनकर एक निश्चित जगह पर सजाकर कर रखते हैं. कहते हैं, श्रद्धा और विश्वासपूर्वक की गई इस प्रक्रिया से अपना खुद का पक्का मकान पाने का सपना पूरा होता है.

    मां महामाया मंदिर

    मां महामाया मंदिर काफी एतिहासिक मंदिर है, जो छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के रतनपुर में स्थित है. इसे एक शक्तिपीठ भी माना जाता है. यहां 3 देवियों के रूप वाली मा दुर्गा की पूजा होती है. यहां की प्रथा बेहद खास है. कहते हैं कि जो भक्त-श्रद्धालु यहां की जमीन पर बिखरे पत्थरों को इकट्ठा कर 3 से 5 पत्थरों को एक-दूसरे के ऊपर सटीकता से संतुलन बनाकर एक घर या छोटी मीनार बना लेते हैं. उनका अपना घर पाने का सपना पूरा हो जाता है.

    हिमाचल प्रदेश के देवस्थान

    हिमाचल प्रदेश की कुल्लू, शिमला, मंडी आदि जगहों पर स्थापित हिडिंबा देवी मंदिर, बिजली महादेव जैसे स्थानीय मंदिरों और देवस्थलों में एक प्रथा काफी लोकप्रिय है. वह है, पहाड़ों में मिलने वाले चपटे पत्थरों से एक छोटा-सा कमरा या दो-तीन मंजिला घर तैयार करना. कहते हैं आस्था और विश्वास से बनाई गई पत्थर की यह आकृति अपने घर के सपने को जल्द पूरा करती है.

    डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. .

  • क्या नॉन शुगर स्वीटनर्स से डायबिटीज का खतरा कम होता है? जानिए WHO की गाइडलाइंस क्या कहती हैं

    क्या नॉन शुगर स्वीटनर्स से डायबिटीज का खतरा कम होता है? जानिए WHO की गाइडलाइंस क्या कहती हैं

    क्या नॉन शुगर स्वीटनर्स से डायबिटीज का खतरा कम होता है? जानिए WHO की गाइडलाइंस क्या कहती हैं

    Non Sugar Sweeteners And Diabetes: खानपान में चीनी को कम करने के लिए लेकिन फिर भी मीठा खाने की तलब के चलते नॉन शुगर स्वीटनर्स जैसे नेचुरल स्वीटनर्स और आर्टिफिशियल स्वीटनर्स का इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन, क्या सचमुच ये स्वीटनर्स हेल्दी होते हैं और क्या इनसे डायबिटीज का खतरा कम होता है? इसका जवाब दे रहा है विश्व स्वास्थ्य संगंठन (WHO). WHO से जानिए नॉन शुगर स्वीटनर्स का वेट कंट्रोल करने से लेकर डायबिटीज तक पर क्या असर होता है.

    नॉन शुगर स्वीटनर्स और डायबिटीज

    WHO का कहना है कि नॉन शुगर स्वीटनर्स (NSS) टाइप 2 डायबिटीज (Type 2 Diabetes) के खतरे को बढ़ा सकते हैं. डायबिटीज के मरीजों के लिए WHO की सलाह है कि वे डायबिटीज को बिना नॉन शुगर स्वीटनर्स का सेवन किए ही मैनेज कर सकते हैं.

    नॉन शुगर स्वीटनर्स के बारे में क्या कहता है WHO

    नॉन शुगर स्वीटनर्स लॉन्ग-टर्म वेट कंट्रोल में मदद नहीं करता है.

    आप नॉन-शुगर स्वीटनर्स का सेवन किए बिना ही खानपान से मिठास को कम करके भी शुगर का सेवन कंट्रोल कर सकते हैं

    नेचुरल शुगर स्वीटनर्स आर्टिफिशियल शुगर स्वीटनर्स से बेहतर नहीं होते हैं.

    डाइट में कितनी होनी चाहिए शुगर

    खानपान में कितनी शुगर लें और शुगर के सेवन में किन बातों का ध्यान रखें इसपर डबल्यूएचओ ने विशेष गाइडलाइंस जारी की हैं –

    फ्री शुगर्स का सेवन रोज के डेली एनर्जी इंटेक का 10 प्रतिशत ही होना चाहिए जोकि 50 ग्राम के करीब है. अगर शुगर को डाइट में 5% तक ही रखा जाए तो इससे सेहत को एक्स्ट्रा फायदे मिलते हैं.

    फ्री शुगर के सेवन से खासतौर से परहेज करना चाहिए. फ्री शुगर यानी सुक्रोज, फ्रुक्टोज और ग्लूकोज. इन्हें खाना या ड्रिंक्स बनाते हुए डाला जाता है. शहद, शुगर सिरप, फलों के जूस और फलों के जूस के कॉन्सन्ट्रेट्स में शुगर नेचुरली होती है.

    अगर फ्री शुगर के सेवन से बचना है तो नॉन शुगर का सेवन किए बिना इसे अपनी डाइट से हटाएं.

    ज्यादा शुगर खाने से क्या होता है

    अगर खानपान में जरूरत से ज्यादा शुगर शामिल की जाए तो इससे लॉन्ग टर्म हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं, जैसे वजन बढ़ना, टाइप 2 डायबिटीज और दिल की बीमारियां. इससे एनर्जी स्पाइक और एनर्जी क्रैश हो सकता है. ब्लड शुगर बढ़ना और एकदम से गिर जाना समस्या का सबब बन जाता है. डाइजेस्टिव सिस्टम पर भी इसका बुरा असर दिखता है और ज्यादा स्किन ब्रेकआउट्स हो सकते हैं.

    अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें.

  • गुरुग्राम में कामवाली बाई निकली मालकिन से ज्यादा अमीर! महीने में कमाती है ₹60,000, बेटी पढ़ रही बड़े स्कूल में;

    गुरुग्राम में कामवाली बाई निकली मालकिन से ज्यादा अमीर! महीने में कमाती है ₹60,000, बेटी पढ़ रही बड़े स्कूल में;

    गुरुग्राम में कामवाली बाई निकली मालकिन से ज्यादा अमीर! महीने में कमाती है ₹60,000, बेटी पढ़ रही बड़े स्कूल में;

    गुरुग्राम से एक ऐसी दिलचस्प कहानी सामने आई है, जिसे पढ़कर बड़े-बड़े ऑफिस वाले भी सोचने पर मजबूर हो गए हैं. यहां एक घर में काम करने वाली महिला हर महीने 60 हजार रुपए कमा रही है. ये खुलासा गुरुग्राम के रहने वाले शिव मित्तल ने किया है. उन्होंने लिंक्डइन पर अपनी पोस्ट में बताया कि उनकी हाउस हेल्प ने उन्हें पैसों का असली मतलब समझा दिया. उनकी पोस्ट अब खूब वायरल हो रही है.

    कैसे करती है इतनी कमाई?

    शिव मित्तल ने बताया कि वो महिला दिन में 5 से 6 घरों में काम करती है. महीने में सिर्फ 3 से 4 दिन की छुट्टी लेती है. इसी मेहनत से वो हर महीने करीब 60 हजार रुपए कमा लेती है.

    पैसे को करती है ऐसे मैनेज

    वायरल पोस्ट के मुताबिक, कामवाली बाई 60 हजार में से 10 हजार रुपए किराए पर देती है. वह अपनी बेटी को प्राइवेट स्कूल में पढ़ा रही है. इसके अलावा उसने अपने गांव में 6 लाख की जमीन ली है, जिसकी EMI भी वो इसी कमाई से भर रही है.

    बड़े-बड़े प्रोफेशनल्स फेल!

    शिव मित्तल ने लिखा, हम लोग महंगे फोन, कार और ब्रांडेड कपड़ों के लिए EMI भरते रहते हैं. वहीं इस महिला की कोई फिजूलखर्ची नहीं है. न PF है, न इंश्योरेंस, फिर भी उसे पता है कि पैसा कहां लगाना है. उसका एक ही सपना है, बस बेटी का भविष्य सुरक्षित करना.

    इस पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है. कई लोग बोल रहे हैं कि ये महिला तो हमसे ज्यादा समझदार है, हम दिखावे में पैसा उड़ाते हैं. वहीं कुछ लोग कह रहे हैं कि कॉर्पोरेट नौकरी जैसी मेडिकल सिक्योरिटी इन मेहनतकश लोगों के पास नहीं होती, एक बीमारी इनकी सारी बचत खा जाएगी, इसलिए दोनों की तुलना करना पूरी तरह सही नहीं है.

  • घर में ऐसे लगाएं एलोवेरा का पौधा, हमेशा मिलेगा ताजा जेल, जानें सही देखभाल का तरीका.

    घर में ऐसे लगाएं एलोवेरा का पौधा, हमेशा मिलेगा ताजा जेल, जानें सही देखभाल का तरीका.

    घर में ऐसे लगाएं एलोवेरा का पौधा, हमेशा मिलेगा ताजा जेल, जानें सही देखभाल का तरीका.

    एलोवेरा एक ऐसा पौधा है जिसे घर में आसानी से उगाया जा सकता है। इसका इस्तेमाल कई तरह के कॉस्मेटिक और घरेलू उत्पादों में किया जाता है। एलोवेरा का पौधा देखने में भी आकर्षक लगता है और इसकी पत्तियों में मौजूद जेल का इस्तेमाल त्वचा और बालों की देखभाल के लिए किया जाता है।

    अगर आप घर पर एलोवेरा का पौधा लगाना चाहते हैं तो इसके लिए बहुत ज्यादा मेहनत की जरूरत नहीं होती। बस मिट्टी, गमले और पानी की सही व्यवस्था का ध्यान रखना जरूरी है।

    कब लगाएं एलोवेरा का पौधा?

    एलोवेरा गर्म मौसम में अच्छी तरह बढ़ता है। इसे फरवरी से लेकर अक्टूबर-नवंबर तक लगाया जा सकता है। घर में इसे गमले, छत, बालकनी या आंगन में आसानी से उगाया जा सकता है।

    एलोवेरा की कई किस्में होती हैं। बार्बाडेन्सिस किस्म भी काफी लोकप्रिय है और इसकी पत्तियां अपेक्षाकृत बड़ी होती हैं।

    कैसी होनी चाहिए मिट्टी?

    एलोवेरा के लिए ऐसी मिट्टी बेहतर होती है जिसमें पानी ज्यादा देर तक जमा न रहे। इसके लिए सामान्य मिट्टी में थोड़ी रेत या बालू मिलाई जा सकती है।

    गमले में पानी की निकासी अच्छी होनी चाहिए, क्योंकि जड़ों में लगातार पानी जमा रहने से पौधा खराब हो सकता है।

    ऐसे लगाएं एलोवेरा

    सबसे पहले स्वस्थ और हरे रंग का छोटा एलोवेरा पौधा लें। ऐसा गमला चुनें जिसके नीचे पानी निकलने के लिए छेद जरूर हो।

    अब गमले में मिट्टी भरकर बीच में छोटा गड्ढा बनाएं और पौधे को सीधा लगा दें। इसके बाद जड़ों के आसपास मिट्टी डालकर हल्के हाथ से दबा दें। पौधा लगाने के बाद थोड़ी मात्रा में पानी दें।

    एलोवेरा की देखभाल कैसे करें?

    एलोवेरा को रोशनी पसंद है, लेकिन बहुत तेज और लगातार धूप में रखने से इसकी पत्तियां प्रभावित हो सकती हैं। इसलिए पौधे को ऐसी जगह रखें जहां पर्याप्त रोशनी मिले और जरूरत के मुताबिक धूप भी मिलती रहे।

    इस पौधे को रोज पानी देने की जरूरत

  • क्या हल्दी से कंट्रोल हो सकता है ब्लड शुगर? जानिए हालिया मेडिकल रिसर्च में क्या आया सामने..

    क्या हल्दी से कंट्रोल हो सकता है ब्लड शुगर? जानिए हालिया मेडिकल रिसर्च में क्या आया सामने..

    क्या हल्दी से कंट्रोल हो सकता है ब्लड शुगर? जानिए हालिया मेडिकल रिसर्च में क्या आया सामने..

    भारत में डायबिटीज के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में ब्लड शुगर को कंट्रोल रखने के लिए लोग डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं के साथ-साथ कई घरेलू नुस्खों का भी सहारा लेते हैं। इन्हीं में हल्दी का सेवन भी शामिल है। हल्दी हमारे किचन में इस्तेमाल होने वाला एक प्रमुख मसाला है, जिसमें करक्यूमिन (Curcumin) नामक सक्रिय यौगिक पाया जाता है। करक्यूमिन में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, जिनके संभावित स्वास्थ्य लाभों पर लगातार वैज्ञानिक शोध किए जा रहे हैं।

    हाल के कुछ अध्ययनों में करक्यूमिन के ब्लड शुगर, इंसुलिन सेंसिटिविटी और डायबिटीज से जुड़ी जटिलताओं पर संभावित प्रभावों की जांच की गई है। हाल ही में हुए एक शुरुआती अध्ययन में करक्यूमिन ने टाइप-1 डायबिटीज वाले चूहों में रक्त वाहिकाओं के स्वास्थ्य से जुड़े कुछ संकेतकों में सुधार दिखाया, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि इंसानों में भी इसका एक जैसा असर होगा। आइए जानते हैं कि रिसर्च के मुताबिक करक्यूमिन का डायबिटीज से जुड़े स्वास्थ्य पर क्या संभावित असर हो सकता है।

    रिसर्च से जानें करक्यूमिन डायबिटीज में रक्त वाहिकाओं को कैसे कर सकता है प्रभावित?

    Florida Institute of Technology के शोधकर्ताओं ने एक रिसर्च में यह जानने की कोशिश की कि हल्दी में पाए जाने वाले सक्रिय यौगिक करक्यूमिन का डायबिटीज से जुड़ी रक्त वाहिकाओं पर क्या असर पड़ता है। इसके लिए डायबिटीज से पीड़ित चूहों की तुलना उन चूहों से की गई, जिन्हें करक्यूमिन नहीं दिया गया था। शोधकर्ताओं ने चूहों की रक्त वाहिकाओं, खासकर महाधमनी यानी शरीर की सबसे बड़ी रक्त वाहिका, की बनावट और काम करने की क्षमता का अध्ययन किया। करीब एक महीने के उपचार के बाद करक्यूमिन दिए गए चूहों में रक्त वाहिकाओं के स्वास्थ्य से जुड़े कुछ संकेतकों में सुधार देखा गया। शोध में सूजन कम होने, कोशिकाओं में कैल्शियम के सामान्य तरीके से काम करने और HSP70 नामक प्रोटीन के स्तर में बदलाव जैसे प्रभाव सामने आए।

    HSP70 एक ऐसा प्रोटीन है जो कोशिकाओं को तनाव और नुकसान से बचाने में मदद करता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, करक्यूमिन ने रक्त वाहिकाओं में कैल्शियम से जुड़े असामान्य बदलाव को कम करने में मदद की। इसके अलावा, महाधमनी में कोलेजन के ज्यादा जमा होने में कमी और इलास्टिन के स्तर में सुधार देखा गया। इलास्टिन एक ऐसा प्रोटीन है जो रक्त वाहिकाओं को लचीला बनाए रखने में मदद करता है। इन बदलावों से संकेत मिलता है कि करक्यूमिन रक्त वाहिकाओं की सामान्य बनावट और काम करने की क्षमता को बनाए रखने में मदद कर सकता है। हालांकि, यह अध्ययन अभी चूहों पर किया गया है, इसलिए इंसानों में करक्यूमिन का यही असर होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। इसके लिए इंसानों पर क्लिनिकल स्टडी की जरूरत है।

    क्या है करक्यूमिन?

    करक्यूमिन हल्दी को उसका चमकीला पीला रंग देने वाला प्रमुख सक्रिय यौगिक है। इसे इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुणों के लिए लंबे समय से वैज्ञानिक शोध में शामिल किया जाता रहा है। नए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने यह समझने की कोशिश की कि क्या करक्यूमिन डायबिटीज के कारण रक्त वाहिकाओं में होने वाले बदलावों को कम करने में मदद कर सकता है। लंबे समय तक ब्लड शुगर बढ़ा रहने पर रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है। इससे आगे चलकर हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी जटिलताओं का जोखिम बढ़ सकता है। इसी वजह से शोधकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि डायबिटीज से जुड़ी रक्त वाहिकाओं की कार्यप्रणाली में होने वाली गड़बड़ी को कम करने के लिए कौन-से नए रास्ते उपयोगी हो सकते हैं।

    डायबिटीज में करक्यूमिन के क्या फायदे हो सकते हैं?

    हल्दी में पाए जाने वाले सक्रिय यौगिक करक्यूमिन के ब्लड शुगर और इंसुलिन सेंसिटिविटी पर संभावित प्रभावों को लेकर वैज्ञानिक शोध किए जा रहे हैं। कुछ अध्ययनों में करक्यूमिन के ब्लड ग्लूकोज को प्रभावित करने और इंसुलिन के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया को बेहतर करने की संभावनाओं की जांच की गई है। हालांकि, अभी इसे डायबिटीज में ब्लड शुगर कंट्रोल करने का प्रमाणित इलाज नहीं माना जा सकता। डायबिटीज में शरीर में लंबे समय तक हल्की सूजन बनी रह सकती है। ऐसे में करक्यूमिन के एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण सूजन से जुड़े बदलावों को प्रभावित कर सकते हैं। करक्यूमिन में एंटीऑक्सीडेंट गुण भी पाए जाते हैं, जो शरीर की कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से होने वाले नुकसान से बचाने में भूमिका निभा सकते हैं।

    डिस्क्लेमर: यह जानकारी उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों और रिसर्च पर आधारित है। हल्दी या इसमें मौजूद करक्यूमिन को डायबिटीज का इलाज नहीं माना जाना चाहिए। इसे डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं या उपचार का विकल्प न बनाएं। खासकर करक्यूमिन सप्लीमेंट का सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें, क्योंकि यह कुछ दवाओं के साथ इंटरैक्शन कर सकता है। किसी भी तरह के आहार या उपचार में बदलाव से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श करें।

  • हथेली पर मौजूद ये 3 निशान दिला सकते हैं राजनीति में सफलता, बनते हैं बड़े राजनेता..

    हथेली पर मौजूद ये 3 निशान दिला सकते हैं राजनीति में सफलता, बनते हैं बड़े राजनेता..

    हथेली पर मौजूद ये 3 निशान दिला सकते हैं राजनीति में सफलता, बनते हैं बड़े राजनेता..

    Palmistry: हस्तरेखा शास्त्र में हथेली की रेखाओं और पर्वतों को व्यक्ति के स्वभाव, करियर और जीवन में मिलने वाली प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि हथेली पर कुछ खास निशान मौजूद हों तो व्यक्ति में नेतृत्व करने, लोगों को प्रभावित करने और ऊंचा पद हासिल करने की क्षमता हो सकती है। ऐसे ही कुछ संकेत राजनीति और लीडरशिप क्वालिटी से जोड़ा जाता है।

    हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार राजनीति में सफलता के लिए केवल एक रेखा को नहीं देखा जाता, बल्कि गुरु पर्वत, भाग्य रेखा, सूर्य रेखा और हथेली पर बने विशेष चिह्नों का मिलान किया जाता है। खासतौर पर गुरु पर्वत का मजबूत होना, भाग्य रेखा का स्पष्ट होना और सूर्य रेखा का अच्छी स्थिति में होना नेतृत्व और सार्वजनिक प्रतिष्ठा के संकेत माने जाते हैं। आइए जानते हैं ऐसे निशानों के बारे में जो व्यक्ति को राजनीति में सफलता दिलाते हैं। साथ ही ऐसे लोगों के अंदर लीडरशिप क्वालिटी होती है।

    गुरु पर्वत पर त्रिशूल का निशान

    हथेली में तर्जनी उंगली के नीचे स्थित स्थान को गुरु पर्वत कहा जाता है। हस्तरेखा शास्त्र में गुरु पर्वत को महत्वाकांक्षा, नेतृत्व, सम्मान और अधिकार से जोड़ा जाता है।

    अगर इस पर्वत पर स्पष्ट त्रिशूल का निशान दिखाई दे तो इसे काफी शुभ माना जाता है। हस्तरेखा शास्त्र में त्रिशूल को प्रसिद्धि, प्रतिष्ठा और ऊंचा पद प्राप्त करने की क्षमता से जोड़ा गया है। ऐसे व्यक्ति में नेतृत्व करने और लोगों के बीच अपनी पहचान बनाने की प्रवृत्ति मानी जाती है।

    भाग्य रेखा से गुरु पर्वत की ओर जाती शाखा

    हथेली के निचले हिस्से से ऊपर की तरफ जाने वाली खड़ी रेखा को भाग्य रेखा कहा जाता है। अगर भाग्य रेखा स्पष्ट और मजबूत हो। साथ ही इससे कोई शाखा तर्जनी उंगली के नीचे स्थित गुरु पर्वत की ओर जाती दिखाई दे, तो हस्तरेखा शास्त्र में इसे अधिकार और नेतृत्व से जुड़ा संकेत माना जाता है।

    ऐसे योग को प्रशासनिक क्षमता, महत्वाकांक्षा और उच्च पद हासिल करने की इच्छा से जोड़ा जाता है। यदि इसके साथ गुरु पर्वत भी मजबूत हो तो राजनीति में उच्च पद की प्राप्ति होती है। ऐसे लोगों को मान- सम्मान की प्राप्ति होती है। साथ ही लोग ऐसे व्यक्ति को बात बहुत ध्यान से सुनते हैं और आदर, सत्कार करते हैं।

    स्पष्ट सूर्य रेखा और त्रिशूल का संयोग

    अनामिका उंगली के नीचे स्थित सूर्य पर्वत की ओर जाने वाली खड़ी रेखा को सूर्य रेखा या अपोलो लाइन कहा जाता है। हस्तरेखा शास्त्र में इसका संबंध नाम, यश, पहचान और सार्वजनिक प्रतिष्ठा से माना जाता है।

    यदि सूर्य रेखा साफ, गहरी और बिना ज्यादा रुकावट के हो तथा इसके ऊपरी हिस्से में त्रिशूल जैसा निशान बनता हो, तो इसे विशेष रूप से शुभ माना जाता है। ऐसी हथेली को प्रसिद्धि और लोगों के बीच पहचान मिलने से जोड़ा जाता है।

    डिस्क्लेमर: यह लेख हस्तरेखा शास्त्र की पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है। इसे वैज्ञानिक भविष्यवाणी या निश्चित परिणाम का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।

  • भोजपुरी गाने पर रोबोट का देसी डांस, गले में गेंदे की माला और लाल धोती पहनकर लगाए जमकर ठुमके.

    भोजपुरी गाने पर रोबोट का देसी डांस, गले में गेंदे की माला और लाल धोती पहनकर लगाए जमकर ठुमके.

    भोजपुरी गाने पर रोबोट का देसी डांस, गले में गेंदे की माला और लाल धोती पहनकर लगाए जमकर ठुमके.

    सोशल मीडिया पर रोबोट से जुड़े कई अनोखे प्रयोग सामने आते रहते हैं, लेकिन इस बार एक रोबोट अपने खास देसी अंदाज को लेकर चर्चा में है। आधुनिक ह्यूमनॉइड रोबोट ने भोजपुरी गाने की धुन पर ऐसा डांस किया कि समारोह में मौजूद लोग भी हैरान रह गए।

    इस दौरान रोबोट को लाल रंग की धोती पहनाई गई थी और उसके गले में गेंदे के फूलों की बड़ी माला नजर आई। पीछे लगे बैनर पर ‘श्री कृष्ण जन्माष्टमी मेला’ लिखा हुआ था। रोबोट का यह देसी रूप लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहा था।

    जैसे ही भोजपुरी गाना बजना शुरू हुआ, रोबोट ने बीट के साथ हाथ-पैर हिलाते हुए डांस करना शुरू कर दिया। उसके डांस स्टेप्स और शरीर की मूवमेंट देखकर वहां मौजूद लोग काफी उत्साहित नजर आए। मंच पर खड़ा एक व्यक्ति भी रोबोट के इस अंदाज को देखकर मुस्कुराता दिखाई दिया।

    सोशल मीडिया पर छाया रोबोट का देसी अंदाज

    रोबोट के इस अनोखे डांस को इंस्टाग्राम पर vivek_vlogs_ind नाम के पेज से शेयर किया गया है। पोस्ट सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स इस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

    कुछ यूजर्स ने मजाकिया अंदाज में कहा कि अब रोबोट पर भी भोजपुरी का रंग चढ़ गया है। वहीं कई लोगों ने इसे आधुनिक तकनीक और भारतीय लोक संस्कृति का मजेदार मेल बताया।

    तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच रोबोट का यह देसी अंदाज लोगों के लिए मनोरंजन का नया जरिया बन गया है।