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  • मोटापे से कम हो सकती है उम्र? एक्सपर्ट ने बताए कंट्रोल करने के आसान उपाय..

    मोटापे से कम हो सकती है उम्र? एक्सपर्ट ने बताए कंट्रोल करने के आसान उपाय..

    मोटापे से कम हो सकती है उम्र? एक्सपर्ट ने बताए कंट्रोल करने के आसान उपाय..

    Obesity Can Shorten Your Life: मोटापा से आज पूरी दुनिया परेशान से है। मोटापा शरीर के वजन को बढ़ाने के साथ-साथ कई गंभीर और जानलेवा बीमारियों का खतरा भी बहुत अधिक बढ़ा देता है।

    Obesity Can Shorten Your Life: मोटापा से आज पूरी दुनिया परेशान से है। क्योंकि मोटापा शरीर के वजन को बढ़ाने के साथ-साथ कई गंभीर और जानलेवा बीमारियों का खतरा भी बहुत अधिक बढ़ा देता है। गलत लाइफस्टाइल, खान-पान और शारीरिक गतिविधियों की कमी की वजह से हर कोई मोटापे से जूझ रहा है। जानकारी के लिए बता दें, मोटापा अपने साथ डायबिटीज, हाई बीपी और दिल से जुड़ी गंभीर बीमारियां लेकर आता है। हालांकि समय रहते कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो बढ़ते वजन को नियंत्रित कर सकते हैं और इससे होने वाली गंभीर बीमारियों से बच सकते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि मोटापा आपकी उम्र कैसे कम कर सकता है।

    मोटापे से बढ़ सकता है इन बीमारियों का खतरा

    अधिक मोटापे की स्थिति में शरीर के अलग-अलग हिस्सों में सूजन और हार्मोनल बदलाव जैसी समस्याएं देखने को मिल सकती हैं। लंबे समय तक मोटापा रहने पर टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल और फैटी लिवर जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। इसके अलावा, मोटापा हृदय संबंधी बीमारियों के जोखिम से भी जुड़ा हुआ है। इसलिए वजन को नियंत्रित रखना स्वस्थ जीवनशैली का अहम हिस्सा है।

    मोटापा और उम्र का क्या है संबंध?

    यह कहना सही नहीं होगा कि केवल अधिक वजन होने से किसी व्यक्ति की उम्र कम हो जाती है। असल चिंता मोटापे के साथ जुड़ी बीमारियों की होती है। वजन में धीरे-धीरे कमी लाने और स्वस्थ आदतें अपनाने से इन बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

    मोटापा हमेशा सिर्फ गलत खान-पान की वजह से नहीं होता। परिवार की स्वास्थ्य हिस्ट्री, जीवनशैली और अन्य कारण भी इसमें भूमिका निभा सकते हैं। यदि परिवार में मोटापे की समस्या रही है, तो व्यक्ति को अपने वजन और स्वास्थ्य को लेकर अधिक सतर्क रहना चाहिए।

    डाइटिंग नहीं, आदतों में करें सुधार

    वजन कम करने के लिए बहुत सख्त डाइट अपनाने की बजाय रोजमर्रा की आदतों में छोटे बदलाव करना अधिक व्यावहारिक हो सकता है। रोज सुबह या शाम टहलने जाएं, शारीरिक गतिविधि बढ़ाएं और भोजन में पौष्टिक सब्जियों व अन्य संतुलित खाद्य पदार्थों को शामिल करें। कुछ समय के लिए तले-भुने और अत्यधिक कैलोरी वाले खाद्य पदार्थों से दूरी बनाएं।

    इसके साथ पर्याप्त और नियमित नींद लेना भी जरूरी है। वजन तेजी से घटाने के बजाय धीरे-धीरे और टिकाऊ तरीके से वजन कम करने पर ध्यान दें। यदि वजन बहुत अधिक है या कोई स्वास्थ्य समस्या पहले से मौजूद है, तो डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।

  • सामुद्रिक शास्त्र अनुसार ऐसी उंगलियों वाली लड़कियां पार्टनर के लिए होती हैं बेहद भाग्यशाली, सुख-समृद्धि के मिलते हैं संकेत

    सामुद्रिक शास्त्र अनुसार ऐसी उंगलियों वाली लड़कियां पार्टनर के लिए होती हैं बेहद भाग्यशाली, सुख-समृद्धि के मिलते हैं संकेत

    सामुद्रिक शास्त्र अनुसार ऐसी उंगलियों वाली लड़कियां पार्टनर के लिए होती हैं बेहद भाग्यशाली, सुख-समृद्धि के मिलते हैं संकेत

    भारतीय ज्योतिष परंपरा में सामुद्रिक शास्त्र का विशेष महत्व माना गया है। इसमें शरीर के विभिन्न अंगों की बनावट, आकार और विशेषताओं के आधार पर व्यक्ति के स्वभाव और जीवन से जुड़े कई संकेत बताए गए हैं। वहीं आपको बता दें कि हाथों की उंगलियों को भी सामुद्रिक शास्त्र में महत्वपूर्ण माना गया है। सामुद्रिक शास्त्र में कुछ खास तरह की उंगलियों वाली लड़कियां अपने जीवनसाथी के लिए सौभाग्यशाली मानी जाती हैं। माना जाता है कि ऐसी महिलाओं के जीवन में सुख-समृद्धि और पारिवारिक खुशहाली के योग रहते हैं। आइए जानते हैं इन उंगलियों के बारे में…

    लंबी और पलती उंगलियां मानी जाती हैं शुभ

    सामुद्रिक शास्त्र की मान्यताओं के अनुसार जिन लड़कियों की उंगलियां लंबी, पतली और सुडौल होती हैं, उन्हें शुभ माना जाता है। ऐसी बनावट को धैर्य, समझदारी और अच्छे व्यक्तित्व से जोड़कर देखा जाता है। ऐसी महिलाओं को जीवनसाथी के लिए भाग्यशाली बताया गया है।

    गोल और लंबी उंगलियां

    जिन महिलाओं की उंगलियां गोल और लंबी होती हैं, उन्हें सामुद्रिक शास्त्र में सौभाग्यशाली माना जाता है। मान्यता है कि ऐसी महिलाएं स्वभाव से मिलनसार होती हैं और परिवार के सदस्यों के साथ सामंजस्य बनाकर चलती हैं। ऐसी उंगलियों को पति के साथ सहयोग और वैवाहिक सुख से भी जोड़ा जाता है।

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    सीधी और चिकनी उंगलियां

    कुछ सामुद्रिक शास्त्र संबंधी मान्यताओं में सीधी, चिकनी और मांसल उंगलियों को भी शुभ संकेत माना गया है। ऐसी उंगलियों वाली महिलाओं को रिश्तों को महत्व देने वाली और परिवार के प्रति जिम्मेदार माना जाता है। पारंपरिक मान्यता के अनुसार इनके कारण परिवार में सुख-संपन्नता बढ़ने के संकेत मिल सकते हैं।

    उंगलियों के आगे का हिस्सा पतला हो तो

    अगर किसी लड़की की उंगलियों का आगे का हिस्सा पतला और बाकी के पोर लगभग समान हों, तो इसे भी सामुद्रिक शास्त्र में शुभ लक्षणों में गिना गया है। ऐसी महिलाओं को केयरिंग और परिवार का ध्यान रखने वाली बताया जाता है। मान्यता है कि इनका दांपत्य जीवन सुखमय रह सकता है।

    मोटी और भरी हुई उंगलियां

    सामुद्रिक शास्त्र की कुछ व्याख्याओं में मोटी और भरी हुई उंगलियों को रिश्तों के प्रति गंभीरता से जोड़ा गया है। ऐसी महिलाएं अपने संबंधों को महत्व देती हैं और परिवार के प्रति जिम्मेदारी निभाने वाली मानी जाती हैं। हालांकि, उंगलियों की बनावट के आधार पर किसी व्यक्ति के पूरे व्यक्तित्व या भविष्य का निश्चित आकलन नहीं किया जा सकता।

    क्या सच में बदल जाती है पार्टनर की किस्मत?

    सामुद्रिक शास्त्र की मान्यताओं में कुछ शारीरिक लक्षणों को सौभाग्य और समृद्धि से जोड़ा गया है। इसी वजह से ऐसी उंगलियों वाली महिलाओं को जीवनसाथी के लिए भाग्यशाली माना जाता है। हालांकि, यह ज्योतिषीय और पारंपरिक मान्यता है, इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। किसी व्यक्ति का वैवाहिक जीवन केवल उंगलियों की बनावट से तय नहीं होता।

    डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सामुद्रिक शास्त्र और प्रचलित ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। इन मान्यताओं की वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है। इन्हें निश्चित भविष्यवाणी के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए।

  • डेट से पहले न नहाना क्यों बना Gen-Z का नया ट्रेंड? क्या नेचुरल बॉडी ओडर सच में बढ़ाती है आकर्षण?

    डेट से पहले न नहाना क्यों बना Gen-Z का नया ट्रेंड? क्या नेचुरल बॉडी ओडर सच में बढ़ाती है आकर्षण?

    डेट से पहले न नहाना क्यों बना Gen-Z का नया ट्रेंड? क्या नेचुरल बॉडी ओडर सच में बढ़ाती है आकर्षण?

    आजकल सोशल मीडिया पर Gen-Z का एक नया ट्रेंड चर्चा में है, जिसे ‘फेरोमोन-मैक्सिंग’ कहा जा रहा है। इस ट्रेंड को फॉलो करने वाले कुछ युवा डेट पर जाने से पहले नहाने और डियोडोरेंट लगाने से बच रहे हैं। उनका मानना है कि शरीर की प्राकृतिक गंध दूसरे व्यक्ति को उनकी ओर आकर्षित कर सकती है।

    लेकिन सवाल यह है कि क्या शरीर की नेचुरल स्मेल वास्तव में आकर्षण बढ़ाती है? और क्या इसके पीछे कोई वैज्ञानिक आधार है?

    क्या है फेरोमोन-मैक्सिंग?

    फेरोमोन-मैक्सिंग का मतलब शरीर की प्राकृतिक गंध को पूरी तरह छिपाने की कोशिश न करना है। इस सोच को मानने वाले लोगों का दावा है कि शरीर से निकलने वाली प्राकृतिक गंध संभावित पार्टनर को आकर्षित करने में भूमिका निभा सकती है।

    इसी वजह से कुछ लोग डेट से पहले परफ्यूम या डियोडोरेंट लगाने से बचते हैं। सोशल मीडिया पर कुछ लोग इसे आगे बढ़ाकर कई घंटों तक न नहाने या पसीने वाले कपड़े पहनने को भी इस ट्रेंड से जोड़ रहे हैं।

    हालांकि, यह समझना जरूरी है कि सोशल मीडिया पर किसी ट्रेंड को फॉलो करना और उसके वैज्ञानिक रूप से सही होने में अंतर है।

    क्या इंसानों में भी फेरोमोन होते हैं?

    फेरोमोन ऐसे रासायनिक संकेत होते हैं, जिनका इस्तेमाल कई जानवर दूसरे जीवों तक व्यवहार या प्रजनन से जुड़े संकेत पहुंचाने के लिए करते हैं। जानवरों में इस तरह के संकेतों का वैज्ञानिक अध्ययन किया जा चुका है।

    इंसानों के मामले में तस्वीर इतनी स्पष्ट नहीं है। वैज्ञानिकों ने शरीर की गंध और इंसानी व्यवहार के बीच संभावित संबंधों पर कई अध्ययन किए हैं, लेकिन अभी तक इस बात का ठोस प्रमाण नहीं मिला है कि इंसानों में जानवरों की तरह कोई खास फेरोमोन आकर्षण को नियंत्रित करता है।

    क्या न नहाने से बढ़ सकता है आकर्षण?

    इसका सीधा जवाब है—इस बात का मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि न नहाने से कोई व्यक्ति ज्यादा आकर्षक हो जाता है।

    शरीर की प्राकृतिक गंध कई चीजों से प्रभावित होती है। इसमें जेनेटिक्स, हार्मोन, खान-पान, त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया, पसीना और व्यक्तिगत साफ-सफाई जैसी चीजें शामिल हैं।

    कुछ शोधों में प्राकृतिक शरीर की गंध और लोगों की पसंद के बीच संबंध के संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि नहाना छोड़ देना या शरीर की तेज गंध को बनाए रखना आकर्षण बढ़ाने का वैज्ञानिक तरीका है।

    फिर सोशल मीडिया पर क्यों वायरल है यह ट्रेंड?

    ‘फेरोमोन-मैक्सिंग’ को सोशल मीडिया की मैक्सिंग कल्चर से जोड़कर देखा जा रहा है। इस ऑनलाइन संस्कृति में लोग अपनी पर्सनैलिटी, फिटनेस, लुक्स और डेटिंग लाइफ को बेहतर बनाने के लिए अलग-अलग तरीके आजमाते हैं।

    ऐसे में प्राकृतिक बॉडी ओडर को लेकर बना यह नया ट्रेंड भी लोगों का ध्यान खींच रहा है। लेकिन सिर्फ ट्रेंड वायरल होने से यह साबित नहीं होता कि उसके पीछे वैज्ञानिक सच्चाई भी है।

    साफ-सफाई फिर भी जरूरी

    किसी डेट पर जाने से पहले नहाना, साफ कपड़े पहनना और व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखना सामान्य हाइजीन का हिस्सा है। प्राकृतिक गंध और साफ-सफाई दोनों को एक ही चीज समझना सही नहीं है।

    इसलिए अगर कोई व्यक्ति अपनी प्राकृतिक खुशबू को बनाए रखना चाहता है तो यह व्यक्तिगत पसंद हो सकती है, लेकिन न नहाने को आकर्षण बढ़ाने का वैज्ञानिक फॉर्मूला मानना सही नहीं होगा।

  • अगर गट हेल्थ  ठीक  करना चाहते है, तो आज ही अपने नाश्ते में शामिल करें ये 5  चीजें..

    अगर गट हेल्थ ठीक करना चाहते है, तो आज ही अपने नाश्ते में शामिल करें ये 5 चीजें..

    अगर गट हेल्थ  ठीक  करना चाहते है, तो आज ही अपने नाश्ते में शामिल करें ये 5  चीजें..

    आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर जंक फूड और अनहेल्दी चीजों का ज्यादा सेवन करने लगे हैं। रोजाना हम जो खाना खाते हैं, उसका सीधा असर हमारे पाचन तंत्र पर पड़ सकता है।

    Gut Health Tips: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर जंक फूड और अनहेल्दी चीजों का ज्यादा सेवन करने लगे हैं। रोजाना हम जो खाना खाते हैं, उसका सीधा असर हमारे पाचन तंत्र पर पड़ सकता है। हमारी आंतों में कई तरह के बैक्टीरिया मौजूद होते हैं, जो पाचन को सही रखने में मदद करते हैं।

    इसे ही आमतौर पर गट हेल्थ कहा जाता है। गट हेल्थ बेहतर रहने पर पाचन को सपोर्ट मिल सकता है और गैस, पेट फूलने जैसी सामान्य समस्याओं से राहत पाने में भी मदद मिल सकती है। इसलिए डाइट में फाइबर और पोषक तत्वों से भरपूर चीजों को शामिल करना जरूरी है। सुबह का नाश्ता इसके लिए एक अच्छा मौका हो सकता है।

    यें पांच चीजें आज ही नाश्ते में करें शामिल

    1. दही

    दही गट हेल्थ के लिए एक अच्छा विकल्प माना जाता है। इसमें प्रोबायोटिक्स पाए जाते हैं, जो आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया को सपोर्ट करने में मदद कर सकते हैं। सुबह एक कटोरी दही को पोहा, पराठे या दूसरे नाश्ते के साथ खाया जा सकता है। अगर दही आपको आसानी से पचता है, तो इसे डाइट में शामिल कर सकते हैं।

    2. ओट्स

    ओट्स फाइबर का अच्छा स्रोत है और पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद हो सकता है। इसे दूध या दही के साथ बनाकर इसमें केला, सेब और थोड़े ड्राई फ्रूट्स मिलाए जा सकते हैं। इससे नाश्ता स्वादिष्ट होने के साथ पौष्टिक भी बन जाता है।

    3. दलिया

    दलिया भी फाइबर से भरपूर नाश्ता है। आप इसे दूध के साथ मीठा बनाकर या गाजर, मटर और बीन्स जैसी सब्जियां डालकर नमकीन बना सकते हैं। नियमित रूप से फाइबर वाली चीजें खाना पाचन के लिए अच्छा हो सकता है।

    4, अंकुरित मूंग खाएं

    अंकुरित मूंग में फाइबर और प्रोटीन दोनों पाए जाते हैं। इसे सलाद की तरह खाया जा सकता है। इसमें खीरा, टमाटर, नींबू और हल्के मसाले मिलाकर स्वाद बढ़ाया जा सकता है।

    5. केला

    केला आसानी से मिलने वाला फल है और इसमें फाइबर मौजूद होता है। इसे सीधे खाने के अलावा ओट्स या दही के साथ भी लिया जा सकता है। सुबह जल्दी में हों, तो केला एक आसान नाश्ता हो सकता है।

  • गणेश उत्सव 2026: गणेश चतुर्थी पर गणपति बप्पा को बिल्कुल भी न चढ़ाएं ये चीजें, जानें धार्मिक मान्यता

    गणेश उत्सव 2026: गणेश चतुर्थी पर गणपति बप्पा को बिल्कुल भी न चढ़ाएं ये चीजें, जानें धार्मिक मान्यता

    Ganesh Chaturthi 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रतिवर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी पूरे देश में धूमधाम से मनाई जाती है। वैसे हो हर मास की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी पड़ती है लेकिन भादो मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि काफी खास है, क्योंकि इस दिन से 10 दिनों का गणेश उत्सव आरंभ हो जाता है। इस दौरान गणपति बप्पा की मूर्ति को विधि-विधान से घर और पंडालों में स्थापित करते हैं। इसके साथ ही अनंत चतुर्दशी के साथ बप्पा को अगले वर्ष आने की कामना करते हुए जल में प्रवाहित किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गणेश उत्सव के दौरान प्रथम पूज्य की पूजा करने से सुख, समृद्धि, सौभाग्य और शांति का वास होता है। भगवान गणेश अत्यंत सहज और सरलता से प्रसन्न होने वाले देवता हैं। अगर आप भी गणेश जी की पूजा कर रहे हैं, तो कुछ चीजों को उन्हें अर्पित करने की मनाही होती है। इस साल गणेश उत्सव 14 सितंबर 2026, सोमवार से आरंभ हो रहा है। आइए जानते हैं गणेश उत्सव के दौरान गणपति बप्पा को किन चीजों को चढ़ाने की मनाही होती है…

    गणेश जी को न चढ़ाएं तुलसी

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार,गणेश जी को तुलसी दल चढ़ाने की मनाही होती है। इसके पीछे एक पौराणिक कथा प्रचलित है। इसके अनुसार एक बार देवी तुलसी ने भगवान गणेश को अपने पति के रूप में पाने की प्रबल इच्छा प्रकट की और उनसे विवाह का प्रस्ताव रखा। किंतु गणपति बप्पा ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। क्रोध और आक्रोश में आकर तुलसी जी ने भगवान गणेश को श्राप दे दिया कि उनका दो विवाह होंगे। इस श्राप को सुनकर गणेश जी भी क्रोधित हो उठे। उन्होंने प्रतिश्राप देते हुए कहा कि, “हे तुलसी! तुम्हें भी राक्षस से विवाह करना होगा और मेरी पूजा में तुम्हारा उपयोग कभी नहीं किया जाएगा। इसी के कारण तुलसी का इस्तेमाल गणेश जी की पूजा में नहीं किया जाता है।

    केतकी का फूल

    शंकर जी के अलावा गणेश जी को भी केतकी का फूल चढ़ाने की मनाही होती है। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी में कौन श्रेष्ठ है? इस बात को लेकर युद्ध हो रहा था। तब शिव जी ने एक रास्ता निकाला था। लेकिन केतकी के फूल के साथ मिलकर ब्रह्मा जी ने छल करना चहा। भगवान शिव ने ब्रह्मा जी के इस छल को समझ लिया और अत्यंत क्रोधित हुए। तभी उन्होंने केतकी के फूल को श्राप दिया कि अब से उनकी पूजा में यह फूल स्वीकार नहीं किया जाएगा। चूंकि भगवान गणेश, भगवान शिव के पुत्र हैं, इसलिए गणेश पूजा में भी केतकी के फूल को अर्पित करना वर्जित माना गया है।

    टूटा हुआ चावल

    भगवान गणेश को अर्पित किए जाने वाले चावल यानी अक्षत चढ़ाते समय थोड़ा ध्यान रखने की जरूरत है। कभी भी गणेश जी को टूटा हुआ चावल नहीं चढ़ाना चाहिए, क्योंकि यह अपूर्णता और विघ्न का संकेत देता है।

    गणेश जी को न चढ़ाएं सफेद चीजें

    पौराणिक कथाओं के अनुसार, चंद्रदेव अपनी सुंदरता और तेज के लिए प्रसिद्ध थे। वे स्वयं को ब्रह्मांड का सबसे सुंदर और मनोहर मानते थे। इस बात का उन्हें काफी अहंकार था। ऐसे में उन्होंने एक बार गणेश जी का मजाक उड़ा दिया। भगवान गणेश ने चंद्रमा के इस व्यवहार से रुष्ट होकर उन्हें श्राप दे दिया कि आज से जो भी तुम्हारा दर्शन करेगा, वह कलंकित होगा। उसे समाज में अपमान और बदनामी का सामना करना पड़ेगा। यही कारण है कि गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा का दर्शन करना निषिद्ध माना गया है। इसके अलावा चंद्रमा का रंग सफेद है। ऐसे में सफेद रंग की वस्तुएं गणेश जी को नहीं चढ़ाई जाती है।

    डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं और प्रचलित परंपराओं पर आधारित है। अलग-अलग क्षेत्रों, संप्रदायों और परिवारों में पूजा-पद्धति एवं मान्यताओं में अंतर हो सकता है। इसलिए यहां बताई गई बातों को अंतिम या सर्वमान्य धार्मिक नियम न माना जाए। पूजा के दौरान अपने परिवार की परंपरा अथवा स्थानीय विद्वान/पंडित की सलाह को प्राथमिकता दें।

  • इंसानों से भी VIP लाइफ जीती हैं इस मॉडल की 4 बिल्लियां, हर महीने पानी की तरह बहाती है ₹2 लाख!

    इंसानों से भी VIP लाइफ जीती हैं इस मॉडल की 4 बिल्लियां, हर महीने पानी की तरह बहाती है ₹2 लाख!

    इंसानों से भी VIP लाइफ जीती हैं इस मॉडल की 4 बिल्लियां, हर महीने पानी की तरह बहाती है ₹2 लाख!

    क्या आप सोच सकते हैं कि कोई इंसान अपनी लग्जरी लाइफ या चमचमाती स्पोर्ट्स कारों को छोड़कर सिर्फ अपनी बिल्लियों पर हर महीने लाखों रुपए खर्च कर सकता है? सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन शिकागो की रहने वाली 28 साल की मॉडल कैमी चैन (Cami Chan) ऐसा सच में कर रही हैं. जहां लोग करोड़ों कमाकर महंगे ब्रांडेड कपड़े और गाड़ियां खरीदते हैं, वहीं कैमी अपनी चार प्यारी बिल्लियों को किसी राजकुमारियों जैसी जिंदगी दे रही हैं. आइए जानते हैं इस अनोखी बिल्ली प्रेमी की कहानी के बारे में.

    लग्जरी कार नहीं, बिल्लियां हैं असली पसंद

    नीड टू नो की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कैमी चैन हर महीने लगभग 50,000 पाउंड (लगभग 65 लाख रुपए) की तगड़ी कमाई करती हैं. अगर वह चाहतीं तो अपनी कमाई से दुनिया भर के डिजाइनर कपड़े, महंगे वेकेशन और सुपरकार खरीद सकती थीं. लेकिन उनका कहना है कि उन्हें इन सब चीजों से ज्यादा खुशी अपनी चार बिल्लियों Artemis, Kerrigan, Jupiter और Mercury की देखभाल करने में मिलती है. ऑनलाइन सफलता मिलने के बाद उन्होंने सबसे पहले एक शुद्ध नस्ल की रैगडॉल बिल्ली ही खरीदी थी.

    हर महीने ₹2 लाख से ज्यादा का खर्च

    कैमी अपनी इन चारों बिल्लियों पर हर महीने 2,000 पाउंड (करीब 2.5 लाख रुपए) से ज्यादा खर्च करती हैं. इस बजट में बिल्लियों का प्रीमियम खाना, लिटर, ग्रूमिंग, रेगुलर मेडिकल चेक-अप और उनके ढेर सारे खिलौने शामिल हैं. वह उनके खाने-पीने के मामले में कभी कंजूसी नहीं करतीं और हमेशा बेस्ट क्वालिटी की चीजें चुनती हैं. उनके पास बिल्लियों के लिए सुंदर कपड़े और डिजाइनर बेड भी मौजूद हैं.

    हेल्थ और ट्रैवल में नो कॉम्प्रोमाइज

    कैमी कहती हैं कि बिल्लियों की सेहत के मामले में पैसे की कोई सीमा नहीं है. अगर उनमें से किसी की भी तबीयत खराब होती है, तो वह तुरंत अच्छे डॉक्टर के पास ले जाती हैं. इतना ही नहीं, जब कभी कैमी को शहर से बाहर जाना पड़ता है, तो वह अकेले जाने के बजाय एक्स्ट्रा पैसे खर्च करके अपनी बिल्लियों को भी साथ ले जाती हैं, ताकि उन्हें अकेलापन न महसूस हो.

    ‘लोग पागल कहें या कुछ भी, मुझे फर्क नहीं पड़ता’

    कैमी जानती हैं कि बहुत से लोगों को बिल्लियों पर हर महीने इतना पैसा खर्च करना पागलपन लग सकता है. लेकिन उनका साफ कहना है कि ये बिल्लियां उनके परिवार का हिस्सा हैं. वह कड़ी मेहनत करती हैं और अपने शौक के लिए इन्हें पालकर बेहद खुश हैं. जहां कुछ लोगों का सपना लैम्बोर्गिनी खरीदने का होता है, वहीं कैमी का कहना है कि वह हर बार अपनी बिल्लियों को ही चुनेंगी.

  • ड्रिल मशीन से जींस साफ करने लगी महिला, देसी जुगाड़ देखकर लोग बोले- कमाल है!

    ड्रिल मशीन से जींस साफ करने लगी महिला, देसी जुगाड़ देखकर लोग बोले- कमाल है!

    ड्रिल मशीन से जींस साफ करने लगी महिला, देसी जुगाड़ देखकर लोग बोले- कमाल है!

    सोशल मीडिया पर देसी जुगाड़ के कई अनोखे तरीके सामने आते रहते हैं। अब एक महिला का ऐसा ही जुगाड़ लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। महिला ने जींस साफ करने के लिए ऐसा तरीका अपनाया, जिसे देखकर लोग हैरान रह गए।

    तस्वीरों में महिला पीले रंग की साड़ी पहने जमीन पर गीली जींस लेकर बैठी नजर आती है। आमतौर पर कपड़ों पर जमी गंदगी साफ करने के लिए हाथ या ब्रश का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन महिला ने इसके लिए पावर ड्रिल मशीन का इस्तेमाल किया।

    महिला ने ड्रिल मशीन के आगे एक गोल स्क्रब ब्रश लगा रखा था। इसके बाद जींस पर पानी और डिटर्जेंट डालकर ड्रिल मशीन की मदद से कपड़े को रगड़ना शुरू किया। मशीन की तेज रफ्तार से जींस पर जमा गंदगी जल्दी साफ होती नजर आती है।

    सोशल मीडिया पर लोगों ने लिए मजे

    महिला का यह देसी जुगाड़ सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है। कई लोगों ने इसे भारतीय जुगाड़ की शानदार मिसाल बताया। वहीं कुछ यूजर्स ने मजेदार कमेंट करते हुए कहा कि घर में रखी टूलकिट का आखिरकार सही इस्तेमाल हो गया।

    हालांकि, कुछ लोगों ने इस तरीके को लेकर सावधानी बरतने की सलाह भी दी। उनका कहना है कि ड्रिल मशीन पर ज्यादा दबाव पड़ने से कपड़ा खराब हो सकता है। बिजली से चलने वाली मशीन का इस्तेमाल पानी के आसपास करना भी जोखिम भरा हो सकता है।

    कुल मिलाकर, महिला का यह अनोखा तरीका लोगों का ध्यान खींच रहा है और सोशल मीडिया पर देसी जुगाड़ को लेकर खूब चर्चा हो रही है।

  • जब भैंस बनी इंसान की जिंदगी का सहारा! बाढ़ के तेज बहाव में युवक को सुरक्षित पहुंचाया..

    जब भैंस बनी इंसान की जिंदगी का सहारा! बाढ़ के तेज बहाव में युवक को सुरक्षित पहुंचाया..

    जब भैंस बनी इंसान की जिंदगी का सहारा! बाढ़ के तेज बहाव में युवक को सुरक्षित पहुंचाया..

    नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बीच इंसान और जानवर के बीच भरोसे की एक तस्वीर लोगों का ध्यान खींच रही है। तेज बहाव वाले पानी में एक युवक फंस गया था। ऐसे मुश्किल समय में एक भैंस उसके लिए सहारा बन गई।

    बताया जा रहा है कि युवक ने भैंस की पीठ पर बैठकर बाढ़ के पानी को पार किया। पानी का बहाव काफी तेज था और चारों तरफ मटमैला पानी दिखाई दे रहा था। इसके बावजूद भैंस धीरे-धीरे आगे बढ़ती रही और युवक को सुरक्षित दिशा में ले गई।

    तेज बहाव के बीच भैंस पर बैठा युवक

    तस्वीरों में युवक भैंस की पीठ पर बैठा नजर आ रहा है। आसपास पानी का बहाव इतना तेज था कि पैदल चलना बेहद मुश्किल दिखाई दे रहा था। युवक ने भैंस को मजबूती से पकड़ा हुआ था, जबकि भैंस लगातार आगे बढ़ती रही।

    इस मुश्किल परिस्थिति में भैंस ने जिस तरह पानी के बीच रास्ता बनाया, उसने लोगों का ध्यान खींच लिया।

    सोशल मीडिया पर लोग कर रहे तारीफ

    इस घटना की तस्वीर सामने आने के बाद लोग भैंस की तारीफ कर रहे हैं। कई लोगों ने इसे बाढ़ जैसी आपदा के बीच इंसान और जानवर के बीच भरोसे की मिसाल बताया।

    लोगों का कहना है कि मुश्किल वक्त में यही भैंस युवक के लिए सबसे बड़ा सहारा बनी। इस घटना ने एक बार फिर दिखाया कि जानवर भी अपने व्यवहार से इंसानों के लिए कितने मददगार साबित हो सकते हैं।

    बाढ़ जैसी स्थिति में हालांकि तेज बहाव वाले पानी को पार करना बेहद खतरनाक हो सकता है। ऐसे हालात में बिना प्रशिक्षित बचाव दल की मदद के पानी में उतरने से बचना चाहिए।

  • 21 साल की पलक के ब्रश से कैनवास पर उतरती है मुगल कला की बारीकी, पिता से विरासत में मिला हुनर अब बना पहचान..

    21 साल की पलक के ब्रश से कैनवास पर उतरती है मुगल कला की बारीकी, पिता से विरासत में मिला हुनर अब बना पहचान..

    21 साल की पलक के ब्रश से कैनवास पर उतरती है मुगल कला की बारीकी, पिता से विरासत में मिला हुनर अब बना पहचान..

    कैनवास पर ब्रश चलता है और देखते ही देखते सफेद रंग की खाली सतह पर तस्वीर जीवंत हो उठती है. कहीं चेहरे की आंखों में भाव नजर आते हैं तो कहीं रंगों की बारीकी पूरी तस्वीर को खास बना देती है. यह हुनर है मुजफ्फरपुर की 21 साल की पलक वर्मा का, जिन्होंने बचपन के शौक को अब अपनी पहचान बना लिया है.

    पलक को पेंटिंग का शौक LKG से ही था. शुरुआत स्केचिंग से हुई और धीरे-धीरे एक्रिलिक पेंटिंग समेत अलग-अलग आर्ट फॉर्म सीखती चली गईं. आज वह मुगल आर्ट और मॉडर्न आर्ट के साथ मिनिएचर, पोस्टर, नेचर और एब्सट्रैक्ट आर्ट में भी प्रयोग कर रही हैं.

    तस्वीर बनाने से पहले बारीकी से समझती हैं हर डिटेल पलक के लिए पेंटिंग सिर्फ कैनवास पर रंग भरना नहीं है. किसी तस्वीर को पेंटिंग में बदलने से पहले वह उसकी हर छोटी-बड़ी डिटेल को ध्यान से देखती हैं. खासकर पोर्ट्रेट बनाते समय चेहरे के भाव और आंखों की बारीकियों पर उनका सबसे ज्यादा ध्यान रहता है.

    एक स्केच या पेंटिंग को पूरा करने में उन्हें दो से तीन दिन तक लग जाते हैं. पलक कहती हैं कि फिनिशिंग और डिटेलिंग में काफी समय लगता है. उनका लक्ष्य अलग-अलग तरह की आर्ट सीखकर अपनी कला को और बेहतर बनाना है.

    पिता ज्वेलरी आर्टिस्ट, बेटी ने उनसे सीखी बारीकी पलक की कला के पीछे उनके पिता की सीख भी बड़ी वजह है. उनके पिता खुद ज्वेलरी आर्टिस्ट हैं. यानी बारीक डिजाइन और कारीगरी उनके परिवार का हिस्सा रही है. बचपन से ही पिता ने पलक की पेंटिंग में रुचि को पहचाना और उसे निखारने में मदद की.

    पिता सिर्फ बेटी की तारीफ नहीं करते थे, बल्कि पेंटिंग में कमी दिखने पर उसे सुधारने की सलाह भी देते थे. शुरुआत में पलक को लगता था कि शायद पापा को उनकी पेंटिंग पसंद नहीं आती, लेकिन बाद में उन्हें समझ आया कि गलतियां बताने वाला ही असल में बेहतर बनाने में मदद करता है.

    राजा रवि वर्मा से प्रेरणा, पोर्ट्रेट पेंटिंग में खास दिलचस्पी पलक मशहूर चित्रकार राजा रवि वर्मा की कला से भी काफी प्रभावित हैं. खासकर उनके पोर्ट्रेट पेंटिंग के काम ने पलक को आकर्षित किया. यही वजह है कि वह चेहरों के भाव और आंखों की बारीकियों को कैनवास पर उतारना पसंद करती हैं.

    सोशल मीडिया से मिला प्लेटफॉर्म, अब मिलने लगे ऑर्डर पलक की कला अब घर और स्टूडियो तक सीमित नहीं है. सोशल मीडिया ने उनके हुनर को लोगों तक पहुंचाने का काम किया. उनकी बनाई पेंटिंग्स को पसंद करने वाले लोग अब उनसे तस्वीरों को पेंटिंग में बदलने के ऑर्डर भी दे रहे हैं. इन ऑर्डर से होने वाली कमाई से पलक अपनी कला से जुड़े खर्च निकाल रही हैं.

    वह रोज करीब चार से पांच घंटे पेंटिंग की प्रैक्टिस करती हैं. अर्जेंट ऑर्डर मिलने पर कभी-कभी दिन-रात काम करना पड़ता है. अब पलक का अगला सपना अपनी पेंटिंग्स की बड़ी एग्जीबिशन लगाना है. मुजफ्फरपुर की यह युवा कलाकार मानती हैं कि पहचान सिर्फ हुनर से नहीं, बल्कि लगातार अभ्यास से बनती है. उनके ब्रश का हर स्ट्रोक इसी मेहनत और बड़े सपने की कहानी कहता है.

  • 100 घर, 1500 आबादी… आजादी के दशकों बाद इस गांव में पहुंचा नल का पानी, लड़कों की शादी होनी तक हो गई थी बंद

    100 घर, 1500 आबादी… आजादी के दशकों बाद इस गांव में पहुंचा नल का पानी, लड़कों की शादी होनी तक हो गई थी बंद

    100 घर, 1500 आबादी… आजादी के दशकों बाद इस गांव में पहुंचा नल का पानी, लड़कों की शादी होनी तक हो गई थी बंद

    उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के लहुरियादह गांव की कहानी लंबे समय तक पानी की कमी के संघर्ष से जुड़ी रही। करीब 100 घरों और 1500 की आबादी वाले इस गांव में लोगों को पीने के पानी के लिए कई किलोमीटर तक जाना पड़ता था। हालात इतने मुश्किल थे कि पानी की समस्या के कारण गांव के कई लड़कों की शादी तक रुक गई थी।

    अब गांव की तस्वीर बदल चुकी है। जल जीवन मिशन के तहत संचालित हर घर नल योजना के जरिए घर-घर तक पानी पहुंचने लगा है। जिन लोगों को कभी एक-एक बूंद पानी के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता था, वे अब अपने घर की टोटी खोलकर पानी प्राप्त कर रहे हैं।

    तीन दिन बाद आता था पानी का नंबर

    मिर्जापुर की लालगंज तहसील के ड्रमंडगंज क्षेत्र में पहाड़ी पर स्थित लहुरियादह में कभी पानी का कोई स्थायी इंतजाम नहीं था। ग्रामीण पहाड़ पर मौजूद एक जलस्रोत से पानी इकट्ठा करके अपनी जरूरत पूरी करते थे।

    जलस्रोत पर पानी भरने के लिए लोगों की बारी तय होती थी। कई बार एक परिवार का नंबर करीब तीन दिन बाद आता था। गर्मियों में हालात और भी खराब हो जाते थे। पानी की कमी इतनी बढ़ जाती थी कि प्रशासन को टैंकर भेजकर लोगों तक पानी पहुंचाना पड़ता था।

    पांच किलोमीटर दूर से लाना पड़ता था पानी

    पानी की जरूरत पूरी करने के लिए ग्रामीणों को कई बार करीब पांच किलोमीटर दूर तक जाना पड़ता था। आसपास के इलाकों और पहाड़ के नीचे से पानी लाकर परिवार अपनी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करते थे।

    गर्मी के दिनों में स्थिति इतनी गंभीर हो जाती थी कि एक व्यक्ति को कई दिनों के इस्तेमाल के लिए बेहद सीमित मात्रा में पानी मिल पाता था। पानी की इसी समस्या ने गांव के लोगों की जिंदगी मुश्किल बना दी थी।

    पानी की कमी से शादियों पर भी पड़ा असर

    लहुरियादह में पानी की समस्या सिर्फ रोजमर्रा की जिंदगी तक सीमित नहीं रही। गांव में पानी की कमी इतनी बड़ी समस्या बन गई थी कि कई परिवारों के लिए शादी-ब्याह भी मुश्किल हो गया था।

    लोगों का कहना था कि जब किसी परिवार में बहू आती तो उसके लिए भी पानी की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती बन जाता था। इसी वजह से गांव में लड़कों की शादी तक रुकने की बात सामने आई।

    हर घर में लगी टोटी, बदल गई जिंदगी

    जल जीवन मिशन के तहत हर घर नल योजना ने ग्रामीणों की इस परेशानी को काफी हद तक बदल दिया। 31 अगस्त 2023 को पहली बार गांव में पाइपलाइन के जरिए नल से पानी पहुंचा।

    अब गांव के ज्यादातर घरों में नल लगे हैं और सुबह-शाम पानी की सप्लाई होती है। ग्रामीणों को पानी के लिए पहाड़ों और जंगलों में जाने की जरूरत नहीं पड़ती।

    गांव की रहने वाली सुघरी देवी बताती हैं कि पहले पानी के स्रोत के पास ही रात-दिन लोगों की लाइन लगी रहती थी। अपनी बारी आने का इंतजार करना पड़ता था। अब घर में नल लगा है और टोटी खोलते ही पानी मिल जाता है।

    वहीं छमा देवी के मुताबिक, शादी के बाद जब वह गांव आई थीं, तब पानी की समस्या सबसे बड़ी परेशानी थी। खाना बनाने और घर के दूसरे कामों के लिए भी दूर पहाड़ी जलस्रोत तक जाना पड़ता था। अब घर में ही पानी मिलने से उनकी जिंदगी काफी आसान हो गई है।

    लहुरियादह के ग्रामीणों के लिए घर तक पानी पहुंचना सिर्फ एक सरकारी योजना का लाभ नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही परेशानी से बड़ी राहत है। जिस पानी के लिए कभी पूरा गांव संघर्ष करता था, वही पानी अब घर की टोटी से मिलने लगा है।