सिंगापुर सरकार ने प्रधानमंत्री, मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की सैलरी बढ़ाने का फैसला किया है. इस फैसले के बाद प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग की सालाना कमाई में बड़ा इजाफा होने जा रहा है. नई व्यवस्था लागू होने के बाद उनका सालाना पैकेज करीब 36 लाख सिंगापुर डॉलर यानी लगभग 27 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है.
फिलहाल वोंग को करीब 22 लाख सिंगापुर डॉलर, यानी लगभग 16 करोड़ रुपये सालाना मिलते हैं. प्रस्तावित बढ़ोतरी के बाद उनकी कमाई में 60 फीसदी से ज्यादा का इजाफा होगा. इससे सिंगापुर के प्रधानमंत्री दुनिया में सबसे ज्यादा वेतन पाने वाले राजनीतिक नेताओं में और ऊपर पहुंच जाएंगे.
मंत्रियों की सैलरी भी बढ़ेगी
सिर्फ प्रधानमंत्री ही नहीं, बल्कि सिंगापुर के मंत्रियों के वेतन में भी बढ़ोतरी की गई है. अभी एक मंत्री को करीब 11 लाख सिंगापुर डॉलर यानी लगभग 8.20 करोड़ रुपये सालाना मिलते हैं. नई व्यवस्था में यह राशि करीब 12 लाख सिंगापुर डॉलर यानी लगभग 8.95 करोड़ रुपये हो जाएगी.
प्रधानमंत्री वोंग के मुताबिक, मौजूदा सरकार का कार्यकाल पूरा होने तक ज्यादातर मंत्रियों की सालाना कमाई करीब 13.5 लाख सिंगापुर डॉलर यानी लगभग 10 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है. खास बात यह है कि वेतन का कुछ हिस्सा सरकार के प्रदर्शन से भी जुड़ा रहेगा. यानी रोजगार बढ़ाने, लोगों की आय में सुधार और GDP ग्रोथ जैसे तय लक्ष्यों को हासिल करने पर मंत्रियों को कई लाभ मिल सकते है.
भ्रष्टाचार रोकने में मददगार है ज्यादा सैलरी
सिंगापुर सरकार लंबे समय से अपने नेताओं को ऊंची सैलरी देने की नीति का समर्थन करती रही है. सरकार का तर्क है कि अगर मंत्रियों को अच्छा वेतन दिया जाए, तो राजनीति में प्रतिभाशाली और योग्य लोग आने के लिए आकर्षित होंगे. साथ ही इससे भ्रष्टाचार से दूरी बनाए रखने में भी मदद मिल सकती है. सिंगापुर को दुनिया के कम भ्रष्ट देशों में गिना जाता है और सरकार अपनी वेतन व्यवस्था को इसके पीछे के महत्वपूर्ण कारणों में से एक मानती है.
आम लोगों के बीच उठे सवाल
हालांकि, इतनी बड़ी सैलरी बढ़ोतरी को लेकर देश में बहस भी शुरू हो गई है. आम नागरिकों की आय नेताओं के मुकाबले काफी कम है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सिंगापुर में औसत सालाना आय करीब 5,775 सिंगापुर डॉलर यानी लगभग 4.30 लाख रुपये बताई गई है.
सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि महंगाई, रोजगार और युवाओं की नौकरी जैसी समस्याओं पर ज्यादा ध्यान दिया जाना चाहिए. वहीं, कुछ लोग इस फैसले के समर्थन में भी हैं. उनका मानना है कि देश की जिम्मेदारी संभालने वाले लोगों को उनकी क्षमता और जिम्मेदारी के अनुरूप वेतन मिलना जरूरी है. हालाकि, यह खबर भी सोशल मीडिया पर उपलब्ध जानकारी पर आधारित है
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रात में जल्दी नींद नहीं आती तो अपनी कुछ आदतों में बदलाव करना जरूरी है. बेहतर नींद के लिए रोज एक समय पर सोना, सोने से पहले मोबाइल से दूरी बनाना और कमरे को शांत रखना मददगार हो सकता है. नींद का पूरा न होना शरीर पर गलत प्रभाव डाल सकता है.
आजकल बहुत से लोग रात में बिस्तर पर जाने के बाद भी जल्दी सो नहीं पाते. फोन चलाना, देर रात तक काम करना और सोने का समय बदलते रहना जैसे कारण नींद पर असर डाल सकते हैं. अच्छी नींद, शरीर और दिमाग दोनों के लिए जरूरी है. कुछ आसान आदतों को रोज के लाइफस्टाइल में शामिल करने से नींद की क्वालिटी को बढ़ाया जा सकता है.
नींद का बनाएं तय समय
अच्छी नींद के लिए सोने और उठने का समय तय रखना मददगार हो सकता है. कोशिश करें कि रोज लगभग एक ही समय पर बिस्तर पर जाएं और सुबह भी तय समय के आसपास उठें. इससे शरीर को सोने का एक नियमित समय समझने में मदद मिलती है.
सोने से पहले फोन से बनाएं दूरी
रात में बिस्तर पर लेटकर मोबाइल चलाने की आदत नींद में देरी कर सकती है. फोन, टीवी और कंप्यूटर की तेज रोशनी दिमाग को जागने का संकेत दे सकती है. इसलिए सोने से पहले कुछ समय स्क्रीन से दूर रहना बेहतर है.
रात में दिमाग को दें आराम
अगर सोने के समय दिमाग में दिनभर की बातें चलती रहती हैं, तो नींद आने में परेशानी हो सकती है. सोने से पहले खुद को शांत करने की कोशिश करें. हल्की किताब पढ़ना, शांत बैठना या आराम से सांस लेना जैसी आसान आदतें मदद कर सकती हैं.
सोने का माहौल आरामदायक रखें
बेडरूम में ज्यादा रोशनी और शोर नींद को प्रभावित कर सकते हैं. इसलिए कमरे को शांत और आरामदायक रखें. बिस्तर का इस्तेमाल मुख्य रूप से सोने के लिए करें. इससे दिमाग को आराम और नींद के बीच बेहतर संबंध बनाने में मदद मिल सकती है.
देर रात की आदतों पर दें ध्यान
सोने से ठीक पहले बहुत भारी खाना, ज्यादा कैफीन लेना या लंबे समय तक स्क्रीन देखना नींद में परेशानी पैदा कर सकता है. रात की लाइफस्टाइल को जितना सरल और शांत रखेंगे, शरीर को आराम मिलने में उतनी आसानी हो सकती है.
श्री कृष्ण कई चमत्कारी अस्त्र हैं. भगवान कृष्ण के सबसे प्रभावशाली अस्त्र सुदर्शन चक्र, बांसुनी और सम्मोहन है. जानिए कौन सा अस्त्र जीवन में मधुरता लाता है.
भगवान कृष्ण को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है. श्री हरि के अवतारों में कृष्ण को पूर्ण अवतार माना गया है. उनके जीवन में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिनसे उनकी दिव्य शक्ति का पता चलता है. कृष्ण अपने हर रूप से भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं. यही कारण है कि उन्हें कृष्ण कहा जाता है. मान्यता है कि वे भक्तों के दुख दूर करके उन्हें मुक्ति और मोक्ष का रास्ता दिखाते हैं.
श्रीकृष्ण के पास कई अस्त्र और शक्तियां थीं. लेकिन इनमें सुदर्शन चक्र, बांसुरी और सम्मोहन को खास माना जाता है. मान्यता है कि कृष्ण ने इनका सही समय पर उपयोग करके अधर्म का नाश किया और धर्म की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
सुदर्शन चक्र क्या है?
सुदर्शन चक्र को भगवान कृष्ण का सबसे शक्तिशाली अस्त्र माना जाता है. चक्र एक खास तरह का हथियार है, जिसका कई देवी-देवताओं से संबंध बताया जाता है. मान्यता के अनुसार सुदर्शन चक्र बेहद शक्तिशाली है और श्रीकृष्ण इसे धारण करते थे.
कहा जाता है कि सुदर्शन चक्र का निर्माण भगवान शिव ने किया था. इसे एक ऐसे चक्र के रूप में भी समझा जाता है, जो लक्ष्य पर प्रहार करने के बाद वापस लौट आता है. सुदर्शन चक्र को श्रीहरि के प्रतीक के रूप में भी पूजा जाता है. धार्मिक मान्यता है कि घर के मुख्य द्वार पर शंख और चक्र की आकृति लगाने से नकारात्मक प्रभाव और दुर्घटनाओं से रक्षा होती है.
भगवान कृष्ण की बांसुरी की क्या महिमा है?
कृष्ण को संगीत और कला का भी बड़ा ज्ञाता माना जाता है. उनकी बांसुरी उनके व्यक्तित्व का सबसे प्यारा प्रतीक है. बांस से बनी बांसुरी में हवा के जरिए मधुर आवाज निकलती है. कृष्ण की बांसुरी की धुन से जुड़ी कई धार्मिक मान्यताएं हैं.
मान्यता है कि बांसुरी की मधुर ध्वनि आसपास की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करती है. बांसुरी के छेदों को शरीर के चक्रों से भी जोड़ा जाता है. जन्माष्टमी पर कृष्ण को बांसुरी अर्पित करने से संतान सुख मिलने की मान्यता है. घर में बांसुरी रखने को भी शुभ माना जाता है.
क्या है कृष्ण का सम्मोहन?
सम्मोहन का अर्थ किसी व्यक्ति के मन और सोच को विशेष तरीके से प्रभावित करना माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं में भगवान कृष्ण के पास अद्भुत सम्मोहन शक्ति होने की बात कही जाती है. महाभारत में जयद्रथ वध की घटना को इसका उदाहरण माना जाता है.
कृष्ण की भक्ति करने वाले लोगों में भी आकर्षण और प्रभाव बढ़ने की मान्यता है. हालांकि, किसी भी शक्ति का गलत इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. शक्ति का सही उद्देश्य हमेशा धर्म, भलाई और दूसरों की सहायता होना चाहिए.
तीनों शक्तियों का महत्व
सुदर्शन चक्र कृष्ण की शक्ति का, बांसुरी उनके प्रेम और मधुरता का, जबकि सम्मोहन उनके प्रभाव का प्रतीक माना जाता है. यही तीनों रूप भगवान कृष्ण के अलग-अलग गुणों को सामने लाते हैं.
नहाने के सबसे पहले लोग तौलिया का इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में जरूरी है कि तौलिया सूखा और साफ जरूर हो. लेकिन कई बार समय की कमी के चलते लोग इसे साफ नहीं कर पाते. तो ऐसे में जान लें कि आपको इसे हफ्ते में कितनी बार साफ करना जरूरी है.
नहाने के बाद तौलिये से बॉडी को सुखाना हमारी रोज की आदत है. साथ ही हमारी चाह होती है तौलिया साफ सुथरी भी हो. लेकिन कई लोगों में आदत होती है कि वह कई दिनों तक एक ही तौलिये को इस्तेमाल करते हैं और फिर उसे हफ्ते में एक बार धोते हैं. लेकिन क्या यह सही तरीका है?
तौलिये को लंबे समय तक बिना धोए इस्तेमाल करना ठीक नहीं है. तौलिये में नमी, पसीना, स्किन की गंदगी और कई तरह के कीटाणु जमा हो सकते हैं. तो ऐसे में सवाल है कि क्या हमें तौलिये को रोज धोना चाहिए?
कितने दिन के गैप पर धोएं तौलिया?
आम तौर पर नहाने वाले तौलिये को 3 से 4 बार इस्तेमाल करने के बाद धोना चाहिए. अगर तौलिया हर बार इस्तेमाल के बाद पूरी तरह सूख जाता है, तो इसे कुछ और बार इस्तेमाल किया जा सकता है. लेकिन हफ्ते में कम से कम एक बार तौलिया धोना जरूरी माना जाता है. यानी रोज नहाने वाले व्यक्ति को सप्ताह में एक या दो बार तौलिया बदलना चाहिए.
क्यों गीला तौलिया नहीं है बॉडी के लिए ठीक
तौलिये को इस्तेमाल करने के बाद उसे अच्छी तरह सुखाना बहुत जरूरी है. गीला तौलिया लंबे समय तक पड़ा रहने पर उसमें बैक्टीरिया और फंगस तेजी से बढ़ सकते हैं. इसलिए तौलिये को मोड़कर या गंदे कपड़ों के ढेर में रखने के बजाय उसे पूरी तरह फैलाकर सुखाएं. तौलिया को बार पर फैलाकर रखना बेहतर रहता है. इससे वह दोनों तरफ से आसानी से सूख जाता है.
जल्दी-जल्दी बदलें हाथ और जिम वाला तौलिया
हाथ पोंछने वाले तौलिये को नहाने वाले तौलिये की तुलना में जल्दी बदलना चाहिए. इसका इस्तेमाल बार-बार होता है और कई लोग इसे छूते हैं. ऐसे में इसमें कीटाणु जमा होने के चांस ज्यादा होते हैं. जिम में इस्तेमाल होने वाले तौलिये को भी ज्यादा समय तक इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, खासकर जब उसमें पसीना लगा हो.
बीमारी में रोज बदलें तौलिया
अगर किसी व्यक्ति को स्किन इंफेक्शन, सर्दी-जुकाम या कोई दूसरी बीमारी है, तो तौलिया ज्यादा बार बदलना चाहिए. शरीर पर घाव, कट या स्किन से जुड़ी परेशानी होने पर भी साफ तौलिये का इस्तेमाल करना बेहतर है. ऐसे मामलों में तौलिया किसी दूसरे व्यक्ति के साथ शेयर नहीं करना चाहिए.
तौलिया धोते समय किन बातों का रखें ध्यान
तौलिया को केवल धोना काफी नहीं है. उसके लिए जितना जरूरी धोना है, उससे ज्यादा जरूरी ड्राय करना है. साथ ही धोते समय जरूरत से ज्यादा डिटर्जेंट या फैब्रिक सॉफ्टनर का इस्तेमाल न करें, क्योंकि इससे तौलिये की पानी सोखने की शक्ति कम हो सकती है. अगर तौलिये से बार-बार बदबू आती है, तो उसे अच्छी तरह धोने के साथ समय पर बदलना भी जरूरी है.
फिरोजाबाद में आशिकी ऐसी चढ़ी कि युवक एकतरफा प्यार ने युवती को बार-बार कॉल करता था. जिससे परेशान लड़की ने उसका नंबर ब्लॉक कर दिया. जिसके बाद आशिकी बदली गुस्से में और युवक ने चल दी गोली.
फिरोजाबाद के टूंडला थाना क्षेत्र के गांव उसायनी में मंगलवार दोपहर सनसनीखेज वारदात सामने आई. आरोप है कि एकतरफा प्यार में ग्राम प्रधान प्रतिनिधि ने घर में घुसकर एक युवती पर गोली चला दी गई. जानकारी के मुताबिक, आरोपी युवती को लगातार फोन कर परेशान करता था. जिससे परेशान होकर युवती ने उस नंबर को ब्लॉक लिस्ट में डाल दिया. लेकिन युवती की ये बात एकतरफे आशिक का नागवार गुजरी. इसी बात से नाराज होकर आरोपी कथित तौर पर अवैध पिस्टल लेकर युवती के घर पहुंच गया.
गुस्से में किए कर दी फायरिंग
वारदात के दिन गुस्साया आरोपी उस मकान की दूसरी मंजिल पर पहुंचा, जहां युवती बच्चों को ट्यूशन पढ़ा रही थी. आरोपी ने सिर गुस्सा इस कदर सवार था कि उसने युवती से बात सुलझाना भी ठीक नहीं समझा और उसने युवती को निशाना बनाकर लगातार तीन फायर किए. इनमें से एक गोली युवती के बाएं कंधे को चीरते हुए निकल गई, जबकि दो गोलियां कमरे के सोफे और दीवार में जा लगीं. गोली चलने की आवाज से घर में चीख-पुकार मच गई. वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया.
युवती का भाई है दरोगा, हो रही फरार आरोपी की दबिश
घायल युवती को तत्काल सरकारी ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, जहां उसका उपचार चल रहा है. बताया गया है कि घायल युवती का भाई उत्तर प्रदेश पुलिस में दरोगा है और वर्तमान में कन्नौज जनपद में तैनात है. घटना की सूचना मिलते ही सीओ टूंडला अरुण कुमार चौरसिया और थाना प्रभारी बैजनाथ सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे.
पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर मामले की जांच शुरू कर दी है. परिजनों की तहरीर के आधार पर आरोपी के खिलाफ जानलेवा हमले समेत संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही है. आरोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं.
हाथों पर सजने वाली मेहंदी सिर्फ खूबसूरती बढ़ाने का काम नहीं करती, यह कमाई भी करा सकती है. अमेरिका में रहने वाली एक भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने अपने इस हुनर को पार्ट टाइम काम बनाया और अब एक घंटे की मेहंदी के बदले मिलने वाली रकम जानकर लोग हैरान हैं.
कई बार कोई ऐसा हुनर, जिसे हम अपने आसपास बहुत हल्के में लेते हैं, विदेश में कमाई का शानदार जरिया बन जाता है. भारत में मेहंदी लगाना हमेशा से शादी-ब्याह और त्योहारों तक सीमित काम माना जाता है. लेकिन अमेरिका में रहने वाली एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने दिखाया है कि अगर हुनर में निपुणता हो, तो उससे अच्छी-खासी कमाई की जा सकती है. खास बात यह है कि वह दिन में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी करती हैं और खाली समय में प्रोफेशनल मेहंदी आर्टिस्ट के तौर पर काम करती हैं. दरअसल, इस महिला का नाम प्रियंका जैन है. उन्होंने अपने इंस्टाग्राम @priyancka.jaiin पर अपनी साइड इनकम के बारे में बताया, जिसे सुनकर कई लोग हैरान रह गए. उन्होंने बताया कि अमेरिका में मेहंदी डिजाइन बनाने के लिए वह करीब 100 डॉलर प्रति घंटे चार्ज करती हैं. भारतीय रुपये में यह रकम लगभग 9,000 से 10,000 रुपये प्रति घंटे बैठती है.
सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी, साथ में मेहंदी का काम
प्रियंका जैन अमेरिका में फुल-टाइम सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम करती हैं. उनकी मुख्य नौकरी से हर महीने के खर्च पूरे होते हैं, लेकिन मेहंदी का हुनर उनके लिए अतिरिक्त कमाई का जरिया बन गया है. उन्होंने एक इंस्टाग्राम पोस्ट में बताया कि वह पार्ट-टाइम प्रोफेशनल मेहंदी आर्टिस्ट के रूप में काम करती हैं. यानी एक तरफ वह कंप्यूटर पर कोडिंग करती हैं, वहीं दूसरी तरफ अपने हाथों से खूबसूरत मेहंदी डिजाइन बनाकर कमाई करती हैं. उनकी कहानी की खास बात यही है कि उन्होंने अपने शौक को सिर्फ शौक तक सीमित नहीं रखा. उन्होंने अपनी क्रिएटिविटी को एक ऐसे काम में बदल दिया, जिससे उन्हें अच्छी एक्स्ट्रा इनकम हो रही है.
1 घंटे की कमाई करीब 10 हजार रुपये
प्रियंका के मुताबिक, वह मेहंदी डिजाइनिंग के लिए करीब 100 डॉलर प्रति घंटे चार्ज करती हैं. भारतीय रुपये में यह रकम लगभग 9 से 10 हजार रुपये प्रति घंटे होती है. यानी अगर वह किसी ग्राहक के लिए सिर्फ दो घंटे काम करती हैं, तो उनकी कमाई करीब 18 से 20 हजार रुपये तक पहुंच सकती है. इसके अलावा ग्राहकों की तरफ से उन्हें टिप भी मिलती है. उन्होंने बताया कि कई बार ग्राहक बिल के ऊपर 20 फीसदी तक टिप भी दे देते हैं. इस तरह उनकी वास्तविक कमाई सिर्फ तय किए गए प्रति घंटे के रेट तक सीमित नहीं रहती.
ब्राइडल मेहंदी से एक दिन में करीब 1 लाख रुपये
मेंहंदी की कमाई तब और ज्यादा बढ़ जाती है, जब उन्हें किसी शादी या ब्राइडल बुकिंग का काम मिलता है. शादी के लिए दुल्हन की मेहंदी में काफी बारीक और डिटेल डिजाइन बनाए जाते हैं और इसमें कई घंटे लग सकते हैं. प्रियंका ने बताया कि एक डिटेल्ड 10 घंटे की वेडिंग असाइनमेंट से उन्हें करीब 1 लाख रुपये तक की कमाई हो सकती है. उन्होंने इसकी रकम 1,200 डॉलर से ज्यादा बताई. यानी एक ही दिन में मेहंदी का काम उन्हें इतनी कमाई दे सकता है, जो कई लोगों के लिए काफी बड़ी रकम है. प्रियंका ने सिर्फ अपनी कमाई के बारे में ही बात नहीं की, बल्कि भारत और अमेरिका में कलाकारों को मिलने वाले सम्मान को लेकर भी अपना अनुभव भी शेयर किया. उन्होंने कहा कि अमेरिका आने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि यहां कलाकारों को काफी महत्व और सम्मान दिया जाता है. उनके मुताबिक, भारत में कई बार मेहंदी आर्टिस्ट को एक अच्छा या प्रतिष्ठित पेशा नहीं माना जाता, जबकि अमेरिका में उन्हें एक कलाकार के तौर पर देखा और सम्मान दिया जाता है. उन्होंने अपने वीडियो में हिंदी में कहा- “मुझे कभी ऐसा महसूस नहीं होता कि मैं कोई छोटा काम कर रही हूं, क्योंकि यहां कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता. काम, काम होता है.” उनकी यह बात सोशल मीडिया पर भी लोगों को काफी पसंद आई.
वायरल हुआ वीडियो, करीब 1 करोड़ लोगों ने देखा
यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया. खबर लिखे जाने तक इसे वीडियो को करीब 1 करोड़ से ज्यादा लोगों ने देख लिया है. इसके बाद बड़ी संख्या में लोगों ने कमेंट करके अपनी प्रतिक्रिया दी. कई लोगों ने कहा कि अमेरिका में अलग-अलग पेशों और हुनर को जिस तरह सम्मान दिया जाता है, वह काफी अच्छी बात है. वहीं कुछ लोगों ने मजाकिया अंदाज में कहा कि अगर उन्हें भी अपने हुनर की ऐसी कीमत मिलती, तो आज वह करोड़पति होते. एक यूजर ने लिखा- “अमेरिका में हर प्रोफेशन और कलाकार को सम्मान मिलता है.” वहीं एक अन्य यूजर ने कहा- ” अगर भारत में भी मेहंदी आर्टिस्ट को इतनी कमाई मिलती, तो वह अब तक करोड़पति बन चुके होते.” एक यूजर ने भारतीय समाज में नौकरी और पेशे को लेकर सोच पर भी सवाल उठाया. उसने लिखा कि समाज में अक्सर सरकारी नौकरी को ही अच्छा करियर माना जाता है, भले ही उसकी सैलरी सिर्फ 10 हजार रुपये क्यों न हो. वहीं कुछ लोगों ने उनकी सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की नौकरी को लेकर भी सवाल पूछे. एक यूजर ने जानना चाहा कि वह सॉफ्टवेयर के किस क्षेत्र में काम करती हैं, उनके पास कितने साल का अनुभव है और वह किस कंपनी के जरिए अमेरिका गईं. साथ ही उनसे यह भी पूछा गया कि इस क्षेत्र में काम करने के लिए किन स्किल्स की जरूरत होती है.
खर्च भी अमेरिका में कम नहीं
हालांकि, प्रियंका ने अपनी मेहंदी से होने वाली कमाई को लेकर अच्छी तस्वीर दिखाई, लेकिन उन्होंने यह भी साफ किया कि अमेरिका में रहने का खर्च काफी ज्यादा है. यानी 1 घंटे में करीब 9 से 10 हजार रुपये की कमाई सुनने में भले ही बहुत बड़ी लगे, लेकिन वहां घर का किराया, खाना, ट्रांसपोर्ट और दूसरी जरूरतों पर भी काफी पैसा खर्च होता है. फिर भी उनकी कहानी यह जरूर बताती है कि अगर किसी के पास कोई खास हुनर है और वह उसे सही तरीके से पेश करना जानता है, तो वह नौकरी के साथ-साथ अपनी अतिरिक्त कमाई का रास्ता भी बना सकता है.
अक्सर लोग रात में बिस्तर पर सोने के लिए जाते हैं, लेकिन नींद आने के बजाय दिमाग में कई विचार आने लगते हैं. उसमें की हुई गलती, पास्ट और फ्यूचर के जुड़ी कई बाते होती हैं. ऐसे में हमें नींद नहीं आती और ओवरथिंक करते हैं.
दिनभर की भागदौड़ के बाद जब रात में हम सोने के लिए बिस्तर पर जाते हैं, तो अक्सर दिमाग में पुरानी बातें, गलतियां और आने वाले कल की चिंता घूमने लगती है. कई बार थकान के बावजूद नींद नहीं आती और एक ही बात बार-बार सोचने से तनाव बढ़ता रहता है. इसे ओवरथिंकिंग कहा जाता है. कुछ आसान आदतों की मदद से रात में दिमाग को शांत किया जा सकता है.
अपनी परेशानियां डायरी में लिखें
अगर रात में लगातार विचार आ रहे हैं, तो उन्हें दिमाग में रखने के बजाय एक कॉपी या डायरी में लिख दें. दिनभर की चिंता, जरूरी काम या परेशान करने वाली बातों को लिखने से मन हल्का महसूस कर सकता है. इससे बार-बार उसी बात को सोचने की आदत कम करने में मदद मिलती है.
4-7-8 ब्रीदिंग ट्राई करें
ओवरथिंकिंग के समय शरीर और दिमाग दोनों तनाव में आ सकते हैं. ऐसे में 4-7-8 ब्रीदिंग तकनीक मदद कर सकती है. इसमें 4 सेकंड तक नाक से सांस लें, 7 सेकंड तक सांस रोकें और फिर 8 सेकंड में धीरे-धीरे मुंह से सांस छोड़ें. इसे कुछ बार दोहराने से शरीर को आराम देने में मदद मिल सकती है.
सोने से पहले फोन से बनाएं दूरी
रात में सोने से ठीक पहले फोन चलाने और सोशल मीडिया देखने से दिमाग ज्यादा सक्रिय रह सकता है. इसलिए कोशिश करें कि सोने से कम से कम एक घंटे पहले मोबाइल और टीवी बंद कर दें. इसकी जगह हल्की किताब पढ़ना या शांत संगीत सुनना बेहतर विकल्प हो सकता है.
20 मिनट वाला नियम अपनाएं
अगर बिस्तर पर जाने के करीब 20 मिनट बाद भी नींद नहीं आती, तो जबरदस्ती सोने की कोशिश न करें. कुछ देर के लिए बिस्तर से उठकर धीमी रोशनी में किताब पढ़ें या शांत संगीत सुनें. जब नींद महसूस होने लगे, तभी वापस बिस्तर पर जाएं.
सोने और जागने का समय तय करें
हर दिन अलग-अलग समय पर सोने और उठने से नींद का रूटीन बिगड़ सकता है. इसलिए कोशिश करें कि रात में लगभग एक ही समय पर सोएं और सुबह भी तय समय पर उठें. नियमित रूटीन बनने से शरीर को सोने के समय की आदत डालने में मदद मिल सकती है.
शनि देव की ऐसी मूर्ति का दर्शन या पूजन न करें जिसमें उनकी आंखें हों. ऐसा करने पर शनि की दृष्टि पड़ने के कारण समस्या हो सकती है. यहां आप जान सकते हैं शनि देव को प्रसन्न करने के लिए क्या उपाय करना चाहिए?
शनि देव व्यक्ति के कर्म और उसके फल के स्वामी हैं. जीवन में हर कर्म के शुभ या अशुभ फल शनि देव ही प्रदान करते हैं. शनि देव की ऐसी मूर्ति का दर्शन या पूजन न करें जिसमें उनकी आंखें हों. ऐसा करने पर शनि की दृष्टि पड़ने के कारण समस्या हो सकती है. यहां आप जान सकते हैं शनि देव को प्रसन्न करने के लिए क्या उपाय करना चाहिए?
शनि देव को प्रसन्न करने की तीन विधियां शनि देव को प्रसन्न करने की तीन विधियां हैं. पहला आचरण से, दूसरा रत्न से और तीसरा मंत्र से. आचरण में आहार शुद्धि,व्यवहार-विचार तथा दान आदि आते हैं. रत्नों में जलीय या वायु तत्व के रत्न धारण करना श्रेष्ठ होगा. मंत्र जाप का तरीका सर्वश्रेष्ठ है जिससे शनि देव अतिशीघ्र प्रसन्न होते हैं. विभिन्न समस्याओं के निवारण के लिए शनि देव के विभिन्न मंत्रों का प्रयोग किया जाता है. अगर शुद्ध आचरण के साथ-साथ मंत्रों का जाप किया जाए तो अद्भुत परिणाम प्राप्त होंगे.
कब शनि के लिए मंत्र जाप करना सबसे ज्यादा होता है अच्छा जब शनि के कारण दुर्घटनाओं के या प्राण संकट के योग बने हों, जब शनि के कारण कदम-कदम पर संघर्ष करना पड़ रहा हो, जब अपना अधिकार नहीं मिल पा रहा हो, जब शनि की साढ़ेसाती या ढईया चल रही हो.
शनि देव को प्रसन्न करने के लिए मंत्र जाप की विधि शनि देव के मन्त्रों का जाप कोई भी कर सकता है, चाहे वो स्त्री हो या पुरुष. शनि देव के मंत्रो का जाप पूर्व-पश्चिम दिशा की तरफ मुंह करके करना उत्तम होगा. जाप का सही समय संध्या काल का होगा या मध्य रात्री का. रुद्राक्ष या रक्त चन्दन की माला शनि-देव के मंत्र जाप के लिए उत्तम होती है. घर में बिलकुल भी शनि देव का चित्र न लगाएं. बेहतर होगा मानसिक रूप से याद करके ही मंत्र जाप करें. मंत्र जाप के पूर्व अपने गुरु या भगवान शिव को अवश्य याद करें. तब मंत्र जाप करें. कोई भी गृहस्थ व्यक्ति काले वस्त्र धारण करके मंत्र जाप न करे. बेहतर होगा कि श्वेत वस्त्र या आसमानी वस्त्र धारण किया जाए.
शनि देव के मंत्र और उनके प्रयोग शनि देव का वैदिक मंत्र – ॐ शं शनैश्चराय नमः सामान्य रूप से इस मंत्र का जाप रोज शाम को करना चाहिए. इससे शनि कभी भी नाराज नहीं होते. उनकी बुरी दृष्टि नहीं पड़ती. शनि देव का तांत्रिक मंत्र ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः शनि की दशाओं में इस मंत्र का जाप करना चाहिए. इससे शनि की दशाएं लाभकारी हो जाती हैं. शनि देव का सर्वाधिक शक्तिशाली मंत्र सूर्यपुत्रो दीर्घ देहो विशालाक्ष: शिवप्रिय:, मंदचार: प्रसन्नात्मा पीड़ां हरतु में शनि: है. साढ़ेसाती और ढईया के समय यह मंत्र विशेष कारगर है. शनि की पीड़ा से बचने के लिए इस मंत्र का जाप लगातार 108 दिनों तक करना चाहिए.
नई दिल्ली । रात के समय आसमान में हरा, बैंगनी, गुलाबी, लाल और नीले रंगों की रोशनी को देखकर मन में जिज्ञासा होना लाजमी है। इस कमाल के जादू को ऑरोरा लाइट्स कहते हैं। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ऑरोरा लाइट्स के बारे में विस्तार से जानकारी देती है। ऑरोरा लाइट्स को उत्तरी इलाकों में नॉर्दर्न लाइट्स या ऑरोरा बोरेलिस और दक्षिणी इलाकों में सदर्न लाइट्स या ऑरोरा ऑस्ट्रेलिस कहते हैं।
यह प्रकृति का सबसे खूबसूरत नजारा है, जो चार्ज्ड पार्टिकल्स से बनता है। वैज्ञानिक इसे स्पेस वातावरण का बेहतरीन उदाहरण मानते हैं। सूरज से लगातार चार्ज्ड कणों से प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन का एक प्रवाह निकलता है, जिसे सोलर विंड कहते हैं। जब यह सोलर विंड पृथ्वी के पास आती है, तो पृथ्वी का चुंबकीय ढाल यानी मैग्नेटोस्फीयर इससे टकरा जाता है। इस टक्कर से ऊर्जा जमा होती है। जब यह ऊर्जा अचानक निकलती है, तो कण वायुमंडल में घुस जाते हैं और ऑक्सीजन, नाइट्रोजन जैसी गैसों से टकराते हैं। इन टक्करों से गैसें एक्टिव हो जाती हैं और रंगीन रोशनी छोड़ती हैं, यही ऑरोरा है।
अब सवाल उठता है कि इनके रंग अलग-अलग क्यों होते हैं? यह इस बात पर निर्भर करता है कि कौन सी गैस टकराई और वह कितनी ऊंचाई पर थी। हरा रंग सबसे ज्यादा दिखता है, जो 100-200 किमी ऊंचाई पर ऑक्सीजन से बनता है। लाल रंग ज्यादा ऊंचाई यानी 200 किमी से अधिक पर ऑक्सीजन से आता है। वहीं, नीला और बैंगनी नाइट्रोजन गैस से बनते हैं, खासकर 100-200 किमी ऊंचाई पर। गुलाबी या लाल-बैंगनी तब दिखता है जब नाइट्रोजन कम ऊंचाई या 100 किमी से नीचे पर उत्तेजित होता है।
कभी-कभी ये रंग मिलकर सफेद, बैंगनी या गुलाबी चमक भी बनाते हैं, जिससे आसमान में रंगों का जादू साफ दिखता है। जब सूरज बहुत सक्रिय होता है, जैसे सोलर फ्लेयर या बड़े विस्फोट से तो जियोमैग्नेटिक स्टॉर्म यानी चुंबकीय तूफान आते हैं। इन तूफानों में ज्यादा ऊर्जा वायुमंडल में गिरती है, जिससे बहुत दूर के इलाकों में भी शानदार ऑरोरा दिखाई देता है।
वैज्ञानिक ऑरोरा का अध्ययन जमीन पर लगे उपकरणों से करते हैं, जो मैग्नेटोमीटर चुंबकीय बदलाव मापते हैं, रडार ऊपरी वायुमंडल को देखते हैं और स्पेशल कैमरे रीयल-टाइम तस्वीरें लेते हैं। दुनिया भर की कई एजेंसियां मिलकर इसकी रिसर्च करती हैं।
आमतौर पर जब कोई व्यक्ति जमीन खरीदता है तो उसके मन में घर, खेत या किसी तरह का कारोबार शुरू करने का ख्याल होता है. लेकिन ऑस्ट्रेलिया की एनी शोएनबर्गर ने जमीन खरीदी तो उनका मकसद इन सबसे बिल्कुल अलग था. उन्होंने ऐसी जगह पर जंगल बसाने का सपना देखा, जहां कभी गन्ने की फसल हुआ करती थी. साल 2014 में एनी ने क्वींसलैंड में गन्ने की कटाई के बाद खाली पड़े करीब 18 एकड़ जमीन के एक बड़े हिस्से को खरीदा. उस वक्त शायद ही किसी ने सोचा होगा कि आने वाले कुछ सालों में यह जमीन अपना पूरा रूप बदल लेगी. जहां दूर-दूर तक खाली जमीन नजर आती थी, वहां एक दिन घना वर्षावन(Rain Forest) खड़ा होगा और हजारों जीवों को अपना घर मिलेगा.
खाली खेत पर शुरू हुई जंगल उगाने की मुहिम एनी ने जमीन खरीदने के बाद वहां कोई इमारत खड़ी नहीं की, बल्कि पेड़ लगाने का काम शुरू कर दिया. साल 2015 से जमीन को दोबारा हरा-भरा करने की कोशिश शुरू हुई. इसके लिए नाइटविंग्स रेनफॉरेस्ट सेंटर की मदद ली गई और धीरे-धीरे बड़ी संख्या में लोग इस मुहिम से जुड़ते चले गए. यह काम किसी एक दिन या एक मौसम में पूरा होने वाला नहीं था. पौधे लगाने के साथ उनकी देखभाल करना, जमीन को दोबारा जंगल के अनुकूल बनाना और लंबे समय तक इस काम को जारी रखना भी जरूरी था. एनी को इस सफर में सैकड़ों वालंटियर्स का साथ मिला.
एक साल में ही लगा दिए हजारों पौधे इस जंगल को तैयार करने में लोगों की भागीदारी कितनी बड़ी थी, इसका अंदाजा साल 2023 के आंकड़े से लगाया जा सकता है. उस साल 140 से ज्यादा वालंटियर्स ने मिलकर करीब 3,300 पेड़ लगाए थे. ऐसे ही लगातार कई वर्षों तक पौधे लगाए जाते रहे. धीरे-धीरे खाली पड़ी जमीन पर हरियाली बढ़ती गई और छोटे-छोटे पौधे पेड़ों में बदलने लगे. एक दशक की मेहनत के बाद यहां पेड़ों की संख्या बढ़कर 1,19,000 से ज्यादा हो गई. यानी जिस जमीन को कभी गन्ने की कटाई के बाद खाली छोड़ दिया गया था, वह अब एक घने वर्षावन का रूप ले चुकी है.
अब सिर्फ पेड़ नहीं, पूरा इकोसिस्टम बदल गया इस कहानी की सबसे खास बात सिर्फ 1,19,000 पेड़ उगाना नहीं है. असली बदलाव तो उस वक्त दिखाई दिया, जब इस इलाके में दोबारा जीव-जंतुओं की मौजूदगी बढ़ने लगी. आज यह जंगल कई तरह के जीवों का घर बन चुका है. यहां फ्लाइंग फॉक्स प्रजाति के खास चमगादड़ के साथ 75 से ज्यादा अन्य जीवों की प्रजातियां भी पाई जाती हैं. इनमें कुछ दुर्लभ प्रजातियां भी शामिल हैं. एक समय जिस जमीन का इस्तेमाल गन्ने की खेती के लिए किया जाता था, वही अब वन्यजीवों के लिए आश्रय बन चुकी है. पेड़ों के बढ़ने के साथ पक्षियों, चमगादड़ों और दूसरे जीवों के लिए भी रहने और भोजन का प्राकृतिक वातावरण तैयार हुआ. एनी और वालंटियर्स की सालों की मेहनत ने इस जगह को सिर्फ हरा-भरा ही नहीं बनाया, बल्कि इसका प्राकृतिक महत्व भी बढ़ा दिया. क्वींसलैंड सरकार ने इस क्षेत्र को हाई नेचर कंजर्वेशन वैल्यू का दर्जा दिया है. एनी शोएनबर्गर की कहानी इस बात की एक दिलचस्प मिसाल है कि किसी जमीन की कीमत सिर्फ इस बात से तय नहीं होती कि वहां क्या बनाया जा सकता है. कभी-कभी किसी खाली जमीन पर कुछ न बनाकर पेड़ लगाना ही उसे सबसे कीमती बना देता है. आज वहां खड़े 1,19,000 से ज्यादा पेड़ सिर्फ हरियाली नहीं हैं, बल्कि करीब एक दशक की मेहनत, धैर्य और प्रकृति को वापस उसका घर देने की कोशिश की कहानी भी हैं.