बस वो एक आवाज… और फिर हुआ दो बिछड़े भाइयों का मिलन. 35 साल से एक-दूसरे से दूर रह रहे दो भाइयों ने शायद सोचा भी नहीं होगा कि उनकी मुलाकात इतनी अचानक और इस तरह होगी. लेकिन हरियाणा के जींद में SIR के दौरान वोटर लिस्ट सत्यापन के बीच एक ऐसा सिलसिला शुरू हुआ, जिसने 35 साल पुरानी दूरी को पलभर में खत्म कर दिया. फोन पर जैसे ही एक भाई ने दूसरे की आवाज सुनी, उसने तुरंत पहचान लिया. इसके बाद जो हुआ, वहां मौजूद हर शख्स भावुक हो गया.
दरअसल, जींद के रहने वाले सीताराम करीब 35 साल पहले अपना परिवार छोड़कर पंजाब चले गए थे. वक्त गुजरता गया और परिवार से उनका संपर्क भी धीरे-धीरे खत्म हो गया. 35 साल का लंबा वक्त बीत गया, लेकिन दोनों भाइयों की मुलाकात नहीं हो पाई. हाल ही में सीताराम अपने गांव पहुंचे थे. उन्हें कुछ पुराने दस्तावेज लेने के लिए गांव के स्कूल जाना था. इसी दौरान वहां SIR यानी वोटर लिस्ट के सत्यापन का काम चल रहा था. स्कूल में उनकी मुलाकात BLO से हुई.
बातचीत के दौरान BLO ने सीताराम से उनके परिवार के बारे में पूछा. इसी बीच उनके भाई का जिक्र हुआ. BLO ने जब उनके भाई से फोन पर संपर्क किया, तो शायद किसी को अंदाजा नहीं था कि यह फोन कॉल पुरानी कहानी का अगला अध्याय लिखने वाली है. फोन पर दूसरी तरफ मौजूद भाई ने जैसे ही सीताराम की आवाज सुनी, वह उन्हें पहचान गया. इतने साल बीत जाने के बाद भी भाई की आवाज की पहचान दिल में कहीं बाकी थी.
इसके बाद दोनों भाइयों की मुलाकात हुई. जब दोनों आमने-सामने आए तो भावनाएं संभालना मुश्किल हो गया. दोनों ने एक-दूसरे को गले लगा लिया. इतने लंबे समय की दूरी जैसे उस एक पल में खत्म हो गई. एक तरफ 35 साल की जुदाई थी तो दूसरी तरफ भाई के वापस मिल जाने की खुशी. दोनों की आंखों में आंसू थे और चेहरे पर अपनेपन की वही पहचान, जो वक्त और दूरी भी मिटा नहीं सकी. फूट-फूट कर दोनों रोने लगे. एक-दूसरे के आंसू पोंछते फिर दोनों एक दूसरे को देखते. यहां देखें वीडियो…
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे खास बात यह रही कि दोनों भाइयों को मिलाने का जरिया कोई रिश्तेदार या पुराना परिचित नहीं, बल्कि SIR के दौरान चल रही वोटर लिस्ट सत्यापन प्रक्रिया बनी. सीताराम अगर उस दिन पुराने दस्तावेज लेने गांव नहीं पहुंचते, BLO उनसे परिवार के बारे में सवाल नहीं पूछते और फिर फोन पर भाई से संपर्क नहीं होता, तो शायद यह मिलन अभी और दूर होता.
लेकिन कभी-कभी रिश्तों को फिर से जोड़ने के लिए सालों की कोशिश नहीं, सिर्फ एक छोटी-सी वजह काफी होती है. जींद में भी ऐसा ही हुआ. एक सवाल पूछा गया, एक फोन कॉल हुआ और फिर एक आवाज ने 35 साल से बिछड़े दो भाइयों को हमेशा के लिए फिर से मिला दिया.
आमतौर पर डॉक्टर कहते हैं कि हमें 7-8 घंटे की गहरी नींद लेनी चाहिए. इतनी नींद हमारे शरीर के स्वास्थ्य के लिए बेहतर होती है. लेकिन बदलती जीवनशैली के साथ लोग अब इतनी नींद नहीं ले पा रहे हैं, जिसका सीधा असर उनके शरीर पर पड़ रहा है.
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में कई लोग रात की नींद कम ले पाते हैं. इसके पीछे की वजह होती है काम, मोबाइल, पढ़ाई या दूसरी कारण. इसी के चलते कुछ लोग रोज सिर्फ 5 घंटे ही सो पाते हैं. ऐसा होने पर शुरुआत में ऐसा लग सकता है कि शरीर कम नींद का आदी हो गया है. लेकिन लंबे समय तक ऐसा करना सेहत के लिए ठीक नहीं माना जाता. ज्यादातर एडल्ट्स को डॉक्टर खुद को कम से कम 7-8 घंटे की नींद लेने की बात कहते हैं. लेकिन सवाल उठता है कि कम नींद लेने से हमारे शरीर पर क्या असर पड़ता है.
दिमाग की एक्टिविटी पर पड़ता है गहरा असर
नींद कम होने का असर सबसे पहले दिमाग के काम करने की क्षमता पर पड़ता है. कम नींद के चलते फोकस करने, चीजें याद रखने और सही फैसला लेने में परेशानी हो सकती है. काम करने में ज्यादा समय लग सकता है और छोटी-छोटी गलतियां भी बढ़ सकती हैं. पर्याप्त नींद दिमाग को सीखने और याददाश्त मजबूत करने में मदद करती है.
दिनभर महसूस होती है थकान और नींद
रोज 5 घंटे सोने वाले व्यक्ति को दिन में थकान और नींद महसूस हो सकती है. सुबह उठने के बाद भी शरीर पूरी तरह तरोताजा नहीं महसूस होता. कई बार लोग कॉफी या चाय के सहारे खुद को एक्टिव रखने की कोशिश करते हैं. लेकिन कैफीन नींद की कमी को पूरा नहीं कर सकता.
मूड पर पड़ता है नेगेटिव इफेक्ट
कम नींद का असर आपके मूड पर भी पड़ सकता है. छोटी बातों पर गुस्सा या चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है. तनाव को संभालना मुश्किल लग सकता है. लंबे समय तक नींद की कमी का कनेक्शन चिंता और डिप्रेशन जैसी मानसिक समस्याओं से भी देखा गया है.
वजन और शुगर पर असर
नींद कम होने से भूख और पेट भरा होने का एहसास देने वाले हार्मोन का बैलेंस प्रभावित हो सकता है. इससे ज्यादा भूख लग सकती है. लंबे समय तक कम नींद लेने से ज्यादा भूख लग सकती है, जिससे वजन बढ़ने और शरीर में शुगर को संभालने की पावर पर असर पड़ता है.
कितने घंटे की नींद है जरूरी?
ज्यादातर एडलट्स के लिए हर रात 7 से 8 घंटे की अच्छी नींद बेहतर मानी जाती है. कभी-कभार 5 घंटे की नींद हो जाए तो अलग बात है, लेकिन इसे रोज की आदत बनाना ठीक नहीं है. अगर लगातार नींद कम हो रही है या दिनभर बहुत ज्यादा नींद आती है, तो इसकी वजह जानने के लिए डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है.
ड्राई फार्मिंग पानी की समस्या का कोई जादुई समाधान नहीं है. बहुत रेतीली या कम गहराई वाली मिट्टी, जिसमें पानी रोकने की क्षमता कम हो, वहां यह तरीका मुश्किल हो सकता है.
अमेरिका के ओरेगन के एक किसान ने खेती का ऐसा तरीका अपनाया, जिसमें फसलों को नियमित रूप से पानी देने की जरूरत ही नहीं पड़ी. किसान ने करीब 40 साल तक बिना सिंचाई के खेती करके दिखाया कि अगर मिट्टी में मौजूद पानी को सही तरीके से बचाया जाए तो उससे पूरे सीजन फसल उगाई जा सकती है. इस तकनीक को ड्राई फार्मिंग (Dry Farming) कहा जाता है. ओरेगन स्टेट यूनिवर्सिटी की 2014 की एक रिपोर्ट में किसान के करीब चार दशक के अनुभव को दर्ज किया गया था.
क्या होती है ड्राई फार्मिंग? ड्राई फार्मिंग का मतलब यह नहीं है कि खेत में पानी देना पूरी तरह बंद कर दिया जाए और पौधों को अपने हाल पर छोड़ दिया जाए. इसमें असली काम मिट्टी की नमी को संभालने का होता है. सर्दियों और वसंत में मिट्टी में जमा होने वाले पानी को इस तरह सुरक्षित रखा जाता है कि गर्म और सूखे मौसम में पौधों की जड़ों को वह नमी मिलती रहे.
किसान ने कैलिफोर्निया में इस तरीके से खेती शुरू की थी. बाद में 2007 में वह ओरेगन के वेनेटा के पास 9.6 एकड़ जमीन पर आ गया. इस जमीन पर उसके पास पानी का अधिकार नहीं था. इसके बावजूद उसने अपने परिवार के लिए खेती की और यूजीन की छोटी किराना दुकानों में अपनी उपज बेची. यहां उसने ऑर्गेनिक टमाटर, आलू, विंटर स्क्वैश, लहसुन और अलग-अलग तरह की बीन्स उगाईं.
मिट्टी तैयार करना था सबसे बड़ा काम इस खेती में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका मिट्टी की थी. किसान वसंत में बारिश के बाद आने वाले पहले अच्छे सूखे दौर का इंतजार करता था. जब मिट्टी इतनी नम होती कि दबाने पर एक साथ रहे, लेकिन इतनी सूखी भी हो कि आसानी से टूट जाए, तब वह उसकी जुताई करता था. इसके बाद खेत को दो-तीन हफ्तों के लिए छोड़ दिया जाता और फिर दोबारा मिट्टी तैयार की जाती. इस प्रक्रिया से ऐसी मिट्टी तैयार होती थी, जो पौधों की जड़ों के आसपास नमी को लंबे समय तक रोक सके. उसके खेत की मिट्टी मुख्य रूप से वेनेटा लोम थी, जबकि नीचे मौजूद चिकनी मिट्टी की परत पानी को रोकने में मदद करती थी. किसान ने मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के लिए भेड़, हंस और लेग्यूम कवर क्रॉप्स का भी इस्तेमाल किया.
पौधों के बीच ज्यादा दूरी, कम पानी की बर्बादी बीज बोने के बाद भी किसान नमी बचाने पर पूरा ध्यान देता था. बीजों को मिट्टी में डालकर उनके ऊपर पैर रखने से मिट्टी और बीज का संपर्क मजबूत होता था. पौधों के आसपास करीब 4 से 6 इंच तक मिट्टी को ढीला रखा जाता था, जिससे जड़ों को फैलने की जगह मिले और पानी जमीन के अंदर बना रहे. पौधों के बीच पर्याप्त दूरी भी रखी जाती थी, ताकि सीमित पानी और पोषक तत्वों के लिए पौधों में ज्यादा प्रतिस्पर्धा न हो. दिलचस्प बात यह थी कि दूरी इतनी रखी जाती थी कि किसान अपने ट्रैक्टर से आसानी से खेत में काम कर सके और ज्यादातर काम अकेले संभाल सके.
हर जगह काम नहीं करेगी यह तकनीक ड्राई फार्मिंग पानी की समस्या का कोई जादुई समाधान नहीं है. बहुत रेतीली या कम गहराई वाली मिट्टी, जिसमें पानी रोकने की क्षमता कम हो, वहां यह तरीका मुश्किल हो सकता है. कुछ फसलें भी बिना सिंचाई के अच्छी तरह नहीं उग पातीं. फिर भी पानी की कमी, महंगी सिंचाई और पानी के अधिकार से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे किसानों के लिए यह तरीका एक विकल्प हो सकता है. ओरेगन के किसान के 40 साल के प्रयोग ने दिखाया कि सही मिट्टी, सही फसल, उचित दूरी और नमी के बेहतर प्रबंधन से बिना नियमित सिंचाई के भी खेती मुमकिन है.
भारतीय परंपरा में ‘सोलह श्रृंगार’ केवल रूप-सौंदर्य तक सीमित नहीं है. धार्मिक व ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, सिर से पैर तक धारण किए जाने वाले ये आभूषण ग्रहों को मजबूती प्रदान करते हैं, सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाते हैं और सेहत को संतुलित रखते हैं.
हर महिला की एक ख्वाहिश होती है कि वह सुंदर और आकर्षक नजर आए. अपने रूप को निखारने के लिए वह कई तरह के श्रृंगार करती है, लेकिन भारतीय संस्कृति में श्रृंगार का मतलब सिर्फ सुंदर दिखना नहीं है. महिला और श्रृंगार का रिश्ता शारीरिक सुंदरता तक सीमित नहीं माना गया है, बल्कि इसका संबंध भारतीय संस्कृति, परंपरा और स्वास्थ्य से भी जुड़ा हुआ है. ज्योतिष के जानकारों की मानें तो महिलाओं के श्रृंगार का उनकी किस्मत से भी सीधा संबंध माना जाता है. कहा जाता है कि श्रृंगार करने से ग्रहों को मजबूती मिलती है और जीवन में खुशियों का संचार होता है.
इसी वजह से सनातन परंपरा में सोलह श्रृंगार को सुहागिन महिलाओं के लिए खास माना गया है. मान्यता है कि इन सोलह श्रृंगारों से न सिर्फ रूप-सौंदर्य में निखार आता है, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और नकारात्मक ऊर्जा से भी रक्षा होती है. तो आइए जानते हैं सोलह श्रृंगार में शामिल उन खास चीजों के बारे में, जिन्हें लेकर मान्यताएं प्रचलित है.
सुहागिनों का खास आभूषण है सोलह श्रृंगार भारतीय संस्कृति में सोलह श्रृंगार को विवाहित स्त्री के सुहाग और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है. सोलह तरह की ये श्रृंगार सामग्री अलग-अलग आभूषणों और वस्तुओं के रूप में होती है, जिन्हें सौभाग्यवती महिलाएं धारण करती हैं. मान्यता है कि सिर से लेकर पैर तक किए जाने वाले इन श्रृंगारों का संबंध महिला के रूप-सौंदर्य के साथ-साथ शरीर के संतुलन से भी है. इसी वजह से सोलह श्रृंगार को केवल सजने-संवरने की चीज नहीं माना गया है.
सिंदूर पति के प्रेम और समर्पण का प्रतीक सोलह श्रृंगार में सिंदूर का अपना खास स्थान माना जाता है. इसे पति के प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि सिंदूर मस्तिष्क को शांत रखने में भी मदद करता है. सुहागिन महिलाओं के लिए सिंदूर को उनके वैवाहिक जीवन और सुहाग से जोड़कर देखा जाता है.
बिंदी आज्ञा चक्र से जुड़ी मान्यता माथे के बीचों-बीच लगाई जाने वाली बिंदी भी सोलह श्रृंगार का अहम हिस्सा है. इसे दोनों भौहों के बीच लगाया जाता है. मान्यता है कि भौहों के बीच का यह स्थान आज्ञा चक्र से जुड़ा होता है और बिंदी इसे जागृत करने में सहायक मानी जाती है.
मांग टीका मन को एकाग्र करने वाला श्रृंगार मांग के बीचों-बीच पहना जाने वाला मांग टीका भी महिलाओं के श्रृंगार को पूरा करता है. इसे सिर्फ खूबसूरती बढ़ाने वाला आभूषण नहीं माना जाता. मान्यता के अनुसार, मांग टीका मन को नियंत्रित करने और एकाग्रता बढ़ाने से जुड़ा है.
काजल से बढ़ता है आंखों का सौंदर्य आंखों की खूबसूरती बढ़ाने के लिए काजल लगाया जाता है. इससे आंखों का आकर्षण और बढ़ जाता है. मान्यता है कि काजल महिलाओं को बुरी नजर से भी बचाता है. यही वजह है कि इसे भी पारंपरिक श्रृंगार का खास हिस्सा माना गया है.
नथ चेहरे की खूबसूरती में लगाती है चार चांद नाक में पहनी जाने वाली नथ महिला के चेहरे की सुंदरता को और बढ़ाती है. इसे खासतौर पर सुहागिनों के पारंपरिक श्रृंगार से जोड़कर देखा जाता है. मान्यता के अनुसार, नथ पहनने से पीड़ा में राहत मिलती है. इसके साथ ही यह चेहरे के रूप-सौंदर्य को भी निखारती है.
झुमके सुंदरता के साथ एक्यूप्रेशर से जुड़े कानों में पहने जाने वाले झुमके चेहरे की सुंदरता बढ़ाने वाले आभूषणों में शामिल हैं. पारंपरिक रूप से यह महिलाओं के श्रृंगार का अहम हिस्सा रहे हैं. मान्यता है कि झुमके एक्यूप्रेशर के माध्यम से भी लाभ पहुंचाते हैं. इसी वजह से इन्हें सिर्फ आभूषण नहीं, बल्कि श्रृंगार की खास सामग्री माना जाता है.
मंगलसूत्र पति-पत्नी के अटूट रिश्ते का प्रतीक मंगलसूत्र को पति-पत्नी के अटूट बंधन का प्रतीक माना जाता है. विवाहित महिलाओं के लिए इसका धार्मिक और पारंपरिक महत्व खास है. मान्यता है कि मंगलसूत्र सकारात्मक ऊर्जा से भरा होता है. इसे वैवाहिक जीवन और पति के साथ रिश्ते मजबूत होते हैं.
बाजूबंद रक्त संचार से जुड़ा है भुजाओं में पहना जाने वाला बाजूबंद भी सोलह श्रृंगार में शामिल माना जाता है. यह महिलाओं की पारंपरिक पोशाक और श्रृंगार को और आकर्षक बनाता है. मान्यता के अनुसार, बाजूबंद रक्त संचार को नियमित रखने में सहायक होता है.
मेहंदी सौभाग्य और प्रेम का प्रतीक हाथों और पैरों में रचाई जाने वाली मेहंदी महिलाओं के श्रृंगार को खास बना देती है. इसे सौभाग्य और प्रेम का प्रतीक माना जाता है. मेहंदी की ठंडक को तनाव दूर करने में सहायक माना जाता है. यही कारण है कि त्योहारों और खास मौकों पर महिलाओं के श्रृंगार में मेहंदी की खास जगह होती है.
चूड़ियां खुशहाली और ऊर्जा का प्रतीक हाथों में खनकती चूड़ियां महिलाओं के श्रृंगार की पहचान मानी जाती हैं. इन्हें खुशहाली, सौभाग्य और ऊर्जा के संचार से जोड़कर देखा जाता है. मान्यता है कि चूड़ियां रक्त संचार को बेहतर बनाने में भी सहायक होती हैं.
अंगूठी प्रेम और विश्वास का बंधन उंगली में पहनी जाने वाली अंगूठी प्रेम और विश्वास के बंधन को दर्शाती है. सोलह श्रृंगार में इसका भी खास महत्व बताया गया है. मान्यता के अनुसार, तर्जनी या अनामिका उंगली में पहनी जाने वाली अंगूठी रक्त संचार को सुधारने में सहायक होती है.
कमरबंद शरीर की ऊर्जा को संतुलित करता है कमर में पहना जाने वाला कमरबंद भी महिलाओं के पारंपरिक श्रृंगार का हिस्सा है. यह आभूषण सुंदरता बढ़ाने के साथ शरीर के पोस्चर से भी जुड़ा माना जाता है. मान्यता है कि कमरबंद शरीर का पोस्चर सही रखने और शरीर में ऊर्जा को संतुलित करने में मदद करता है.
पायल की मधुर आवाज भी है खास पैरों में पहनी जाने वाली चांदी की पायल चलने पर मधुर ध्वनि पैदा करती है. यही ध्वनि इसे महिलाओं के श्रृंगार में अलग पहचान देती है. मान्यता है कि चांदी शरीर की गर्मी को सोखती है और रक्त प्रवाह को संतुलित रखने में सहायक होती है.
बिछिया हार्मोनल संतुलन से जुड़ी मान्यता पैरों की उंगलियों में पहनी जाने वाली बिछिया भी सोलह श्रृंगार का हिस्सा मानी जाती है. खासतौर पर विवाहित महिलाओं के पारंपरिक श्रृंगार में इसका महत्व बताया गया है. मान्यता के अनुसार, बिछिया महिलाओं में हार्मोनल संतुलन बनाए रखने और मासिक चक्र को नियमित रखने में सहायक होती है.
गजरा देता है खुशबू और ताजगी बालों में लगाया जाने वाला गजरा प्राकृतिक सुगंध और ताजगी प्रदान करता है. फूलों से बनी इसकी खुशबू पूरे श्रृंगार को और आकर्षक बना देती है. मान्यता है कि गजरे की प्राकृतिक सुगंध स्नायु तंत्र को शांत करती है. इससे मन प्रसन्न और ऊर्जावान बना रहता है.
शुभ रंगों के वस्त्र भी हैं श्रृंगार का हिस्सा सोलह श्रृंगार को पूरा करने के लिए विशेष परिधान भी पहने जाते हैं. महिलाएं लाल, गुलाबी या पीले रंग के शुभ वस्त्र पहन सकती हैं. इन रंगों के वस्त्रों को भी पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है और महिला के पूरे श्रृंगार में इनका खास स्थान बताया गया है.
सोलह श्रृंगार से जुड़ी हैं कई मान्यताएं इस तरह सोलह श्रृंगार में शामिल हर सामग्री के साथ अपनी-अपनी मान्यताएं जुड़ी हुई हैं. कहीं इसे पति के प्रेम और वैवाहिक रिश्ते का प्रतीक माना जाता है तो कहीं स्वास्थ्य, सकारात्मक ऊर्जा, सौभाग्य और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है. ज्योतिष के जानकारों के मुताबिक, महिलाओं का श्रृंगार उनकी किस्मत को संवारने में भी भूमिका निभा सकता है. मान्यता है कि इससे ग्रहों को मजबूती मिलती है और जीवन में खुशियों का संचार होता है.
पुरी,। पुरी का जगन्नाथ मंदिर अपनी भव्यता और आस्था के लिए विश्व प्रसिद्ध है, लेकिन इससे जुड़े कई रहस्य और परंपराएं भी हैं जो आपको हैरान कर देंगी। इसी में से एक है इस मंदिर का झंडा जो हवा की दिशा के विपरीत लहराता है। आम तौर पर झंडा हवा के साथ उड़ता है, लेकिन यहां ऐसा नहीं होता।
यही बात इस मंदिर को रहस्यमयी और अद्भुत बनाती है। आज तक कोई पता नहीं लगा पाया है कि मंदिर का झंडा हवा के विपरीत दिशा में क्यों लहराता है। स्थानीय लोग इसे भगवान जगन्नाथ की दैवीय शक्ति का संकेत मानते हैं। कहा जाता है कि मंदिर के ऊपर लहराता झंडा नकारात्मक ऊर्जाओं को खत्म करता है और पूरे वातावरण में सकारात्मकता फैलाता है।
इस झंडे को हर दिन बदला जाता है, लेकिन यह काम कोई साधारण नहीं है, बल्कि भगवान के प्रति भक्ति और विश्वास का प्रतीक माना जाता है। हर शाम, लगभग सूर्यास्त के समय, पुराना झंडा उतारकर नया त्रिकोणीय झंडा लगाया जाता है। सर्दियों में यह काम करीब 5 बजे और गर्मियों में 6 बजे के आसपास किया जाता है। ऐसा भी है कि अगर किसी दिन झंडा नहीं बदला गया, तो मंदिर 18 सालों तक बंद हो सकता है। इसलिए चाहे बारिश हो या तूफान, यह परंपरा एक दिन के लिए भी नहीं रुकती।झंडा बदलने का यह कार्य एक विशेष परिवार, जिसे चुनरा सेवक या चोला परिवार कहा जाता है, के हाथों से ही होता है। इस परिवार के लोग लगभग पिछले 800 सालों से यह पवित्र जिम्मेदारी निभा रहे हैं। सबसे हैरानी की बात यह है कि वे बिना किसी सुरक्षा उपकरण के 214 फुट ऊंचे मंदिर के शिखर पर चढ़ते हैं और वहां झंडा बदलते हैं। कहा जाता है कि आज तक इस परिवार के किसी भी सदस्य को इस काम के दौरान कोई चोट नहीं लगी।
पुराने झंडे को नकारात्मक ऊर्जा को सोखने वाला माना जाता है, इसलिए हर दिन नया झंडा लगाकर भगवान जगन्नाथ के प्रति श्रद्धा व्यक्त की जाती है। यह झंडा केवल एक कपड़ा नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और सुरक्षा का प्रतीक है। जगन्नाथ मंदिर का यह रहस्य भले ही विज्ञान से परे हो, लेकिन श्रद्धालुओं के लिए यह भगवान की शक्ति और कृपा का जीवंत प्रमाण है।
आज के दौर में जहां अच्छी सैलरी को सफलता का पैमाना माना जाता है, वहीं एक 28 साल के युवक की कहानी ने सोशल मीडिया पर सनसनी मचा दी है. Reddit पर वायरल हुई इस पोस्ट ने उन लाखों कॉर्पोरेट कर्मचारियों के दर्द को बयां किया है जो भारी-भरकम सैलरी पाने के बाद भी महीने के आखिर में खुद को कंगाल पाते हैं. महज कुछ साल पहले 25,000 रुपए महीने कमाने वाले इस युवक की आज सैलरी 1.2 लाख रुपए है, लेकिन हालात ऐसे हैं कि महीने के अंत में उसके पास केवल 5 से 8 हजार रुपए ही बच पाते हैं.
किराया, SIP और अचानक आए खर्चे
युवक ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि जैसे-जैसे आमदनी बढ़ी, वैसे-वैसे खर्चे भी कई गुना बढ़ गए. आज उसकी सैलरी का बड़ा हिस्सा महंगे किराए, परिवार की जिम्मेदारियों, म्यूचुअल फंड एसआईपी और रोजमर्रा की भागदौड़ में खर्च हो जाता है. जो थोड़ी बहुत रकम बचती है, वह अचानक आने वाले मेडिकल या अन्य खर्चों की भेंट चढ़ जाती है. युवक यह दर्द साफ दिखाता है कि कैसे लाइफस्टाइल से जुड़ी महंगाई लोगों की जेब चुपचाप खाली कर रही है.
सोशल मीडिया पर यूजर्स की तीखी प्रतिक्रियाएं
यह पोस्ट सामने आते ही रेडिट पर बहस छिड़ गई. इंटरनेट यूजर्स ने इस समस्या पर खुलकर अपने विचार रखे और इसे मैनेज करने के कुछ तरीके भी सुझाए. एक यूजर ने सलाह दी कि लोग अक्सर बाहर खाने और छोटी-छोटी चीजों पर बिना सोचे-समझे हजारों रुपए उड़ा देते हैं. तीन महीने तक अपने हर एक खर्चे को ट्रैक करें, असली तस्वीर खुद-ब-खुद सामने आ जाएगी.
एक अन्य यूजर ने लिखा कि जब आपकी सैलरी अचानक बढ़े, तो कम से कम एक साल तक ऐसे जिएं जैसे आप पुरानी सैलरी पर ही जी रहे हैं. इससे खर्चों की आदतें नियंत्रण में रहती हैं. कई लोगों ने याद दिलाया कि एसआईपी (SIP) बचत का हिस्सा है, न कि खर्चा. इसलिए इसे अपनी कटौती में शामिल न करें.
महाराष्ट्र अपने पर्यटक स्थलों के कारण दुनिया में बहुत ही प्रसिद्ध है। अगर आप भी आगामी समय में कही पर घूमने का प्लान बना रहे हैं तो यहां पर जा सकते हैं। आज हम आपको यहां की एलीफेंटा गुफाओं के बारे में जानकारी देने जा रहे है, जो मुंबई शहर से लगभग 11 किलोमीटर की दूरी पर घारपुरी द्वीप पर स्थित हैं। इन्हें यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों की सूची में भी जगह मिल चुकी है।
इनमें आपको मध्ययुगीन काल से रॉक-कट कला और वास्तुकला का दीदार भी करने का मौका मिलेगा। इन्हें मूल रूप से घारपुरिची लेनि के नाम से भी जाना जाता हैं। इस गुफा मंदिर का अधिकांश भाग भगवान शंकर को समर्पित हैं। आप इन गुफाओं को देखकर हैरान रह जाएंगे।
मुंबई के गेटवे ऑफ इण्डिया से नौका यात्रा के माध्यम से आप एलीफेंटा की गुफा तक पहुंच सकते हैं। आपको आज ही यहां पर घूमने का प्लान बना लेना चाहिए। यहां का टूर आपके लिए यादगार साबित होगा।
आयोडीन का सबसे महत्वपूर्ण काम थायराइड हार्मोन के निर्माण में मदद करना है. ये हार्मोन शरीर में ऊर्जा के इस्तेमाल और मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने के साथ सामान्य शारीरिक विकास में भी अहम भूमिका निभाते हैं.
आयोडीन शरीर के लिए जरूरी खनिजों में शामिल है. इसकी जरूरत भले ही कम मात्रा में होती है, लेकिन शरीर को स्वस्थ रखने में इसकी भूमिका बेहद अहम है. आयोडीन थायराइड हार्मोन बनाने में मदद करता है, जो मेटाबॉलिज्म, ऊर्जा, विकास और शरीर के कई जरूरी कामों को नियंत्रित करते हैं. खासतौर पर बच्चों के दिमागी विकास और गर्भावस्था के दौरान आयोडीन की पर्याप्त मात्रा बेहद जरूरी मानी जाती है.
थायराइड के लिए क्यों जरूरी है आयोडीन आयोडीन का सबसे महत्वपूर्ण काम थायराइड हार्मोन के निर्माण में मदद करना है. ये हार्मोन शरीर में ऊर्जा के इस्तेमाल और मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने के साथ सामान्य शारीरिक विकास में भी अहम भूमिका निभाते हैं. बच्चों में पर्याप्त आयोडीन दिमाग के विकास और सीखने-समझने की क्षमता के लिए जरूरी होता है.
वहीं गर्भावस्था के दौरान इसकी कमी भ्रूण के विकास को प्रभावित कर सकती है.कमी होने पर दिख सकते हैं ये संकेत Cleveland Clinic के अनुसार, शरीर में लंबे समय तक आयोडीन की कमी रहने पर कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं. इसकी वजह से थायराइड ग्रंथि बढ़ सकती है, जिसे घेंघा कहा जाता है. इसके अलावा थायरॉइड हार्मोन कम बनने पर थकान, वजन बढ़ना और ठंड अधिक महसूस होना जैसी परेशानियां हो सकती हैं. बच्चों में आयोडीन की कमी उनके विकास और मानसिक क्षमता पर भी असर डाल सकती है.
एकाग्रता और याददाश्त से जुड़ी समस्याएं भी देखने को मिल सकती हैं.इन चीजों से मिलेगा आयोडीन आयोडीन की कमी से बचने का सबसे आसान तरीका आयोडीन युक्त नमक का इस्तेमाल करना है. हालांकि नमक का सेवन जरूरत से ज्यादा नहीं करना चाहिए. इसलिए अतिरिक्त नमक खाने के बजाय रोजाना के खाने में आयोडीन युक्त नमक का इस्तेमाल करना बेहतर विकल्प है.
समुद्री खाद्य पदार्थ भी आयोडीन के अच्छे स्रोत माने जाते हैं. मछली और समुद्री शैवाल में आयोडीन पाया जाता है. इसके अलावा दूध, दही और चीज जैसे डेयरी उत्पाद भी आयोडीन की जरूरत पूरी करने में मदद कर सकते हैं. अंडे में भी आयोडीन के साथ प्रोटीन पाया जाता है. आलू में भी कुछ मात्रा में आयोडीन मौजूद होता है.
गृह मंत्रालय की साइबर विंग द्वारा जारी एडवाइजरी के बीच मोबाइल फोन पर फर्जी ऐप्स, फिशिंग लिंक्स और थर्ड-पार्टी एपीके फाइलों के माध्यम से बढ़ते साइबर फ्रॉड और वित्तीय धोखाधड़ी पर विशेषज्ञों ने डिजिटल सुरक्षा से जुड़े नियमों व सावधानियों की जानकारी दी है.
विशेषज्ञों के अनुसार, सोशल मीडिया विज्ञापनों, फर्जी ट्रैफिक चालान या गैस पाइपलाइन बिल के नाम पर भेजे जाने वाले अनजान लिंक्स से फोन हैक कर कैमरा, माइक्रोफोन, एसएमएस और कॉल्स का एक्सेस ले लिया जाता है. इसके बाद
वेरिफिकेशन के नाम पर आधार, पैन कार्ड और यूपीआई पिन जैसी गोपनीय जानकारी हासिल कर बैंक खातों से धोखाधड़ी की जाती है. इसके साथ ही फर्जी लोन ऐप्स और डेटा ब्रीच से जुड़े खतरों से बचने के लिए अज्ञात स्रोतों से ऐप डाउनलोड न करने, ऐप परमिशन सीमित रखने, रेटिंग व रिव्यू जांचने और सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं.
समस्तीपुर: बिहार के समस्तीपुर में सड़क हादसे के बाद ऐसा मामला सामने आया, जिसने वहां मौजूद लोगों को हैरान कर दिया। एक कार सड़क किनारे गड्ढे में पलट गई। हादसे के बाद जब लोगों को पता चला कि कार के अंदर शराब के टेट्रा पैक भरे हुए हैं, तो मौके पर बड़ी संख्या में भीड़ जुट गई।
पुलिस के पहुंचने से पहले ही कई लोग कार से शराब के पैक निकालकर अपने साथ ले गए। जब पुलिस मौके पर पहुंची तो कार तो वहां मिली, लेकिन उसके अंदर शराब का कोई पैक नहीं बचा था।
तेज बारिश में अनियंत्रित होकर गड्ढे में पलटी कार
मामला समस्तीपुर के दलसिंहसराय थाना क्षेत्र में एनएच-28 पर पगड़ा गांव के पास का बताया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, एक कार समस्तीपुर की ओर से बरौनी की तरफ जा रही थी।
इसी दौरान तेज बारिश के कारण सड़क पर फिसलन थी। पगड़ा चौक के पास चालक ने कार से नियंत्रण खो दिया और वाहन अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बने गड्ढे में जा गिरा।
हादसे के बाद कार में सवार चालक और अन्य लोग वाहन को मौके पर छोड़कर वहां से निकल गए।
कार के अंदर शराब देखकर जुटने लगी भीड़
हादसे के बाद आसपास के लोग कार को देखने के लिए मौके पर पहुंचने लगे। इसी दौरान पता चला कि कार के अंदर शराब के टेट्रा पैक रखे हुए हैं।
यह जानकारी फैलते ही मौके पर लोगों की भीड़ बढ़ने लगी। इसके बाद कई लोग गड्ढे में उतरकर कार के अंदर से शराब के पैक निकालने लगे।
कुछ लोग एक-दो पैक लेकर वहां से निकल गए, जबकि कुछ लोग दोनों हाथों में कई पैक भरकर ले जाते नजर आए। देखते ही देखते कार के आसपास शराब लेने वालों की भीड़ जमा हो गई।
पुलिस पहुंची तो कार खाली मिली
घटना की सूचना मिलने के बाद दलसिंहसराय पुलिस मौके पर पहुंची। लेकिन तब तक कार से शराब के अधिकांश टेट्रा पैक निकाले जा चुके थे।
पुलिस को मौके पर कार मिली, लेकिन उसके अंदर शराब की एक भी बोतल या टेट्रा पैक नहीं मिला। इसके बाद कार को गड्ढे से बाहर निकालने के लिए क्रेन बुलाई गई।
काफी मशक्कत के बाद कार को बाहर निकाला गया और पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।
पुलिस ने लोगों से शराब लौटाने को कहा
दलसिंहसराय के अपर थानाध्यक्ष मनीष कुमार के मुताबिक, पुलिस को पगड़ा चौक के पास कार पलटने की सूचना मिली थी। टीम जब मौके पर पहुंची तो कार गड्ढे में पड़ी हुई थी।
पुलिस के अनुसार, वाहन को बाहर निकालने के दौरान उसमें शराब नहीं मिली। पुलिस के पहुंचने से पहले ही आसपास मौजूद लोग शराब के पैक लेकर जा चुके थे।
पुलिस ने लोगों से शराब वापस करने की अपील की है और चेतावनी दी है कि शराब अपने पास रखने या उसे वापस नहीं करने की स्थिति में कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कार में शराब कहां से लाई जा रही थी और इसे कहां पहुंचाया जाना था। मामले में कार मालिक, चालक और शराब की खेप से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है।