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  • 40 की उम्र में महिलाओं की हड्डियां कैसे रहें मजबूत? जानिए सही डाइट

    40 की उम्र में महिलाओं की हड्डियां कैसे रहें मजबूत? जानिए सही डाइट

    40 की उम्र में महिलाओं की हड्डियां कैसे रहें मजबूत? जानिए सही डाइट

    महिला 40 की उम्र तक पहुंची है तो हड्डियां कमजोर होने लगती है। इसकी वजह से जॉइंट पेन, हड्डियों का घनत्व कम हो जाता है। ऐसे में महिलाओं को अपने खान-पान में बदलाव करना जरूरी है। क्योंकि शरीर को भरपूर मात्रा में कैल्शियम, विटामिन डी, मैग्नीशियम और प्रोटीन को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए। तो आज हम आपको बताएंगे अच्छी डाइट को अपने खाने में शामिल कर कैसे महिलाएं अपनी हड्डियों को रखें मजबूत?

    Women Health :  महिलाओं के शरीर में उम्र के हर पड़ाव का बदलाव देखने को मिलते हैं। 15 से 16 साल की उम्र में मासिक धर्म की शुरुआत होती है, जिससे हार्मोंस के साथ-साथ शरीर में भी अहम बदलाव देखने को मिलते हैं। शादी के बाद जब महिला गर्भवती होती है तो पहली डिलीवरी के बाद भी कई तरह की परेशानियां महिलाओं के सामने आती है। जैसे जैसे महिला 40 की उम्र तक पहुंची है तो हड्डियां कमजोर होने लगती है। इसकी वजह से जॉइंट पेन, हड्डियों का घनत्व कम हो जाता है। ऐसे में महिलाओं को अपने खान-पान में बदलाव करना जरूरी है। क्योंकि शरीर को भरपूर मात्रा में कैल्शियम, विटामिन डी, मैग्नीशियम और प्रोटीन को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए। तो आज हम आपको बताएंगे अच्छी डाइट को अपने खाने में शामिल कर कैसे महिलाएं अपनी हड्डियों को रखें मजबूत?

    हड्डियां खो देती हैं घनत्व

    उम्र के साथ-साथ महिलाओं में आम तौर पर कई बदलाव होते हैं। इसमें वजन बढ़ना गंभीर बीमारियों को बढ़ावा देता है। कई बार महिलाओं की हड्डियां भी कमजोर होने लगती है। 40 की उम्र तक पहुंचते ही हड्डियों का घनत्व (Bone Density) कम हो जाता है। पैरों में दर्द होना, जोड़ो में दर्द होना एक आम बात है, लेकिन कई बार यही दर्द बड़ी परेशानी का रूप ले लेता है। ऐसे में महिलाएं डॉक्टर के पास जाती है। 2 से 3 दिन दवा खाने के बाद दर्द से राहत तो मिलती है। लेकिन फिर से दर्द की वापसी होती है।

    सिर्फ कैल्शियम ही हड्डियों को नहीं बनाता मजबूत

    महिलाओं की कमजोर हड्डियों को लेकर डॉक्टर बेहतरीन डाइट लेने की सलाह देते हैं। क्योंकि कैल्शियम खोने से ही हड्डियां कमजोर नहीं होती है। इसमें कई कारण हो सकते हैं। क्योंकि हड्डियों को मजबूत रखने के लिए महज कैल्शियम ही जरूरी नहीं है प्रोटीन और कैल्शियम के साथ-साथ कई अन्य चीजें भी महिलाओं की हड्डियों को मजबूत बनाने का काम करती है।

    हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए कैसी डाइट अपनाएं

    डॉक्टरों की ज्यादातर सलाह यही रहती है कि महिलाओं को 40 की उम्र में दूध, दही पनीर को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए। इसके साथ-साथ प्रोटीन और फाइबर को भी अपनी डाइट में शामिल करना जरूरी है। फैट लेने से जितना बच सके उतना बचने की सलाह दी जाती है। हड्डियों के लिए विटामिन D भी शामिल है। मैक्स हॉस्पिटल में आर्थोपेडिक विभाग में डायरेक्टर डॉ. एल तोमर के मुताबिक महिलाओं को अच्छी डाइट लेना जीतना जरूरी है उतना ही विटामिन डी भी जरूरी है।

    विटामिन डी के लिए सुबह की धूप है बेहतर सप्लीमेंट

    अगर विटामिन डी को नजरअंदाज करना सही नही। विटामिन डी महिलाओं के शरीर में कैल्शियम अवशोषित करने में मददगार होता है। लेकिन शरीर में विटामिन डी सही नहीं होता तो कैल्शियम का भी कोई खास फायदा नहीं होता। ऐसे में विटामिन डी को लेने के लिए सुबह की पहली धूप शरीर को लगाना बेहद जरूरी है। पहली धूप विटामिन डी का बेहतर सप्लीमेंट है। जो एक मुफ्त स्पलीमेंट भी होता है। और सुबह की पहली धूप शरीर पर लगने से कई तरह की बीमरियों से भी बचा जा सकता है, इसलिए महिलाओं को पहली धूप लेने की सलाह दी जाती है।

    कम खाने की आदत से करे बचाव

    40 की उम्र में महिलाएं अपने वजन को कम करने के लिए खाने से समझौता करती है। लेकिन ऐसा बिलकुल भी नहीं करना चाहिए। महिलाओं को अपनी डाइट में सही मात्रा में खाना जरूरी है। कम कैलोरी वाली डाइट लंबे समय शरीर में प्रोटीन ऐर पोषक तत्वों की कमी करता है। इससे महिलाओं के शरीर में हड्डियों पर सबसे ज्यादा इसका असर दिखाई देता है। इसलिए अच्छी डाइट के साथ एक्सरसाइज जैसे तेज चलना, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग भी बोनस को हेल्थी बनाने के लिए महत्वपूर्ण होती है। महिलाओं को धूम्रपान और अत्यधिक शराब के सेवन से भी बचना चाहिए।

    हड्डियों को मजबूत रखने के महिलाओं को अपनी डाइट में क्या शामिल करें?

    दूध और डेयरी उत्पाद: दूध,दही और पनीर कैल्शियम और प्रोटीन के बेहतरीन स्रोत हैं जो हड्डियों को मजबूती देते हैं।

    हरी पत्तेदार सब्जियां: पालक, ब्रोकली और केल जैसी सब्जियों में कैल्शियम, मैग्नीशियम और विटामिन K पाया जाता है,जो हड्डियों की सेहत के लिए जरूरी है।

    रागी और मखाना: रागी और मखाने में भरपूर मात्रा में कैल्शियम और फास्फोरस होता है, जिसे खाने से महिलाओं के जोड़ों और हड्डियों को मजबूत करने में मदद मिलती है।

    तिल और मेवे:बादाम और तिल के बीज मैग्नीशियम और कैल्शियम दोनों पाए जाते हैं। इससे महिलाओं के शरीर में खनिजों का बेलेंस बना रहता है।

    विटामिन डी : धूप जो शरीर में कैल्शियम को सोखने का काम करती हैं।

  • नीब करौरी बाबा को मानते थे हनुमान जी का अवतार, जानें बाबा अपने पैर क्यों नहीं छुलवाते थे और कैंची धाम का रहस्य..

    नीब करौरी बाबा को मानते थे हनुमान जी का अवतार, जानें बाबा अपने पैर क्यों नहीं छुलवाते थे और कैंची धाम का रहस्य..

    नीब करौरी बाबा को मानते थे हनुमान जी का अवतार, जानें बाबा अपने पैर क्यों नहीं छुलवाते थे और कैंची धाम का रहस्य..

    नीब करौरी बाबा एक आध्यात्मिक संत थे और वह हनुमान जी को अपना आराध्य मानते थे। साथ ही लोग बाबा को हनुमान की का अवतार तक बताते हैं। वहीं बाबा के भक्तों में देश- विदेश के तमाम दिग्गज शामिल हैं। जिनमें एपल के सीईओ स्टीव जॉब्स से लेकर हॉलीवुड की दिग्गज एक्ट्रेस जूलिया रॉबर्ट्स तक शामिल हैं। नीम करोली बाबा ने अपने जीवनकाल में करीब 108 हनुमान मंदिरों का निर्माण कराया लेकिन उत्तराखंड के नैनीताल के पास स्थित कैंची धाम आज भी उनके नाम से जुड़े प्रमुख आध्यात्मिक स्थलों में शामिल है। नीम करोली बाबा भले ही दुनिया में न हों, लेकिन उनके आश्रम कैंची धाम में अब भी भक्तों-श्रद्धालुओं का वैसा ही मजमा लगता है। बताया जाता है कि कैंची धाम की स्थापना बाबा ने साल 1964 में की थी।

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    किसी से पैर नहीं छुलवाते थे

    बताया जाता है नीब करौरी बाबा किसी से अपना पैर नहीं छुलवाते थे, जो कोई भी भक्त बाबा के पैर छूने के लिए आगे बढ़ता था वो उसको रोक देते थे। वो कहते थे कि मेरी जगह हनुमान जी का पैर छुओ…वही कल्याण करेंगे।

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    स्टीव जॉब्स भी जा चुके हैं कैंची धाम

    एप्पल के पूर्व सीईओ स्टीव जॉब्स 1973 में भारत की यात्रा पर आए थे। साथ ही वह कैंची धाम नीम करोली बाबा के दर्शन करने पहुंचे थे, लेकिन बाबा देहांत हो चुका था। बताया जाता है स्टीव जॉब्स कुछ दिन आश्रम में रुके और ध्यान- योग किया।

    कैसे प्रसिद्ध हुआ कैंची धाम?

    नीब करौरी बाबा का नाम सबसे ज्यादा उत्तराखंड के कैंची धाम से जुड़ा है। नैनीताल-अल्मोड़ा मार्ग पर स्थित यह आश्रम नैनीताल से करीब 17 किलोमीटर दूर है। कैंची धाम में हनुमान मंदिर की स्थापना बाबा से जुड़ी है और 15 जून को यहां स्थापना दिवस के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

    नीब करोरी बाबा क्यों कहा जाता है?

    बाबा का बचपन का नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा रखा गया है। वहीं लक्ष्मी नारायण बड़े हुए तो गृहस्थ छोड़कर साधु बन गए। वहीं घर त्यागने के बाद वह उत्तर प्रदेश के ही फर्रुखाबाद जिले में ‘नीब करोरी’गांव पहुंचे। साथ ही फिर एक गुफा में कठिन तपस्या करने लगे थे। इसी गांव के नाम पर भक्त उन्हें नीब करोरी बाबा कहकर पुकारने लगे।

    जानिए कौन थे नीब करौरी बाबा

    नीब करौरी बाबा का मूल नाम लक्ष्मण नारायण शर्मा था। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के अकबरपुर में हुआ था। नीब करौरी महाराज के पिता का नाम श्री दुर्गा प्रसाद शर्मा था। साथ ही बाबा के बचपन का नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा था और बताया जाता। बाबा की प्रारंभिक शिक्षा अकबरपुर गांव में ही हुई थी। बाद में वे आध्यात्म की तरफ मुड़ गए। वहीं नीम करोली की मृत्यु 11 सितंबर 1973 को हुई थी। इस दिन बाबा की पुण्य तिथि मनाई जाती है।

  • मोबाइल पर नजरें गड़ाए चल रहा था शख्स, अगले ही पल सीधे छत से नीचे गिरा..

    मोबाइल पर नजरें गड़ाए चल रहा था शख्स, अगले ही पल सीधे छत से नीचे गिरा..

    मोबाइल पर नजरें गड़ाए चल रहा था शख्स, अगले ही पल सीधे छत से नीचे गिरा..

    सोशल मीडिया (Social Media) पर आए दिन ऐसे वीडियो वायरल होते रहते हैं, जिन्हें देखकर कुछ पल के लिए हम भी सोच में पड़ जाते हैं। इन दिनों ऐसा ही एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वायरल हो रहा है। वीडियो में एक शख्स के साथ कुछ ऐसा होता है, जिसे देखकर किसी की भी धड़कन बढ़ सकती है। यह वीडियो खास तौर पर उन लोगों के लिए एक चेतावनी जैसा है, जो चलते समय मोबाइल फोन में व्यस्त रहते हैं। वायरल वीडियो (Viral Video) को @gharkekalesh नाम के एक्स हैंडल से शेयर किया गया है। वीडियो के साथ लिखा गया है कि एक आदमी ऊपर की मंजिल से गिर गया। साथ ही लोगों को सावधानी से चलने और नीचे देखने की सलाह दी गई है।

    फोन ने भटकाया ध्यान, खुली जगह में जा गिरा शख्स

    वीडियो (Video) में देखा जा सकता है कि एक शख्स सीढ़ियों से ऊपर की ओर जा रहा है। उसके हाथ में मोबाइल फोन नजर आ रहा है। सीढ़ियां चढ़ते हुए एक पल के लिए उसका ध्यान मोबाइल की तरफ चला जाता है। इसके बाद जैसे ही वह आगे बढ़ता है, उसके कदम छत पर बनी एक खुली जगह की तरफ चले जाते हैं। अगले ही पल वह उस खुले हिस्से में जा गिरता है। घटना इतनी अचानक होती है कि वीडियो देखने वाला भी कुछ सेकंड के लिए हैरान रह जाता है। ऐसा लगता है कि मोबाइल पर ध्यान जाने की वजह से शख्स को सामने मौजूद खतरनाक जगह दिखाई नहीं दी। हालांकि, इस वीडियो में यह जानकारी नहीं दी गई है कि हादसे के बाद उस शख्स की हालत कैसी थी या उसके साथ आगे क्या हुआ इसलिए उसके बारे में किसी तरह का दावा करना सही नहीं होगा। वीडियो को शेयर करने का मकसद लोगों को सावधान करना ही नजर आता है।

    चलते हुए फोन चलाने की ऐसी कीमत? शख्स के साथ हुआ खतरनाक हादसा

    इस वीडियो (Video) के सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स भी अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि छत पर मौजूद इस तरह की खुली जगह को जाली या किसी मजबूत कवर से ढकना चाहिए था। वहीं, कुछ यूजर्स ने चलते समय मोबाइल इस्तेमाल करने की आदत को हादसे की बड़ी वजह बताया। कुछ लोगों ने निर्माण स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि ऐसी जगहों पर खुले हिस्सों को सुरक्षित तरीके से ढकना बेहद जरूरी है, ताकि किसी की नजर चूकने पर भी बड़ा हादसा न हो। फिर भी एहतियात के तौर पर लोगों को सीढ़ियों, छतों, सड़क या निर्माणाधीन जगहों पर चलते समय मोबाइल से दूरी बनाकर रहना चाहिए। कई बार सिर्फ एक सेकंड का ध्यान भटकना भी भारी पड़ सकता है।

    डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है। satyareport.com किसी भी प्रकार के दावे की पुष्टि नहीं करता है।

  • राम की नगरी अयोध्या में लगता है यमराज का मेला ! जानिए अनोखी परंपरा..

    राम की नगरी अयोध्या में लगता है यमराज का मेला ! जानिए अनोखी परंपरा..

    राम की नगरी अयोध्या में लगता है यमराज का मेला ! जानिए अनोखी परंपरा..

    अयोध्या, । भगवान श्रीराम की पावन नगरी अयोध्या वैसे तो हर दिन भक्ति, आस्था और अध्यात्म का केंद्र बनी रहती है, लेकिन दीपावली के तीसरे दिन यहां एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है। इस दिन भक्त यमराज यानी मृत्यु के देवता की पूजा करते हैं। यह अनोखा आयोजन न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है, बल्कि पौराणिक कथा और पारिवारिक प्रेम का भी प्रतीक है। मान्यता है कि जब भगवान श्रीराम ने पृथ्वी से वैकुंठ गमन का निश्चय किया, तब यमराज स्वयं उन्हें लेने अयोध्या आए थे।

    कहा जाता है कि उन्होंने जमथरा घाट पर विश्राम किया था और वहीं से आगे बढ़कर भगवान श्रीराम ने गुप्तार घाट पर जल समाधि ली थी। इसी स्मृति में हर वर्ष कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि, जिसे यम द्वितीया कहा जाता है, अयोध्या के सरयू तट स्थित यमथरा घाट पर भव्य पूजा और मेला आयोजित किया जाता है। प्रातःकाल से ही श्रद्धालु सरयू नदी में स्नान कर भयमुक्त और दीर्घायु जीवन की कामना करते हैं। भक्तों का विश्वास है कि इस दिन यमराज की पूजा करने से व्यक्ति को यमभय से मुक्ति और मृत्यु पर विजय का आशीर्वाद मिलता है।


    खासतौर पर बहनें इस दिन व्रत रखती हैं और अपने भाइयों की दीर्घायु और कल्याण के लिए यमराज से प्रार्थना करती हैं। यह दिन भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक भी माना जाता है।


    कहा जाता है कि यमराज ने यह तपोस्थली स्वयं अयोध्या माता से प्राप्त की थी, इसलिए यहां की पूजा का महत्व अन्य स्थानों से कहीं अधिक है। यमथरा घाट पर इस दिन भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है। आरती, भजन, दीपदान और मेला पूरे वातावरण को आध्यात्मिक बना देते हैं। दीपावली के तीसरे दिन अयोध्या का यह आयोजन सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि आस्था, प्रेम और पौराणिक इतिहास का संगम है।
    श्रद्धालु यह मानते हैं कि यमराज की आराधना करने से न केवल मृत्यु का भय दूर होता है, बल्कि जीवन में संतुलन, अनुशासन और कर्म की चेतना भी बढ़ती है।

  • अजनार नदी को साफ करने निकला MP का युवक, मेहनत की गूंज पहुंची विदेश तक..

    अजनार नदी को साफ करने निकला MP का युवक, मेहनत की गूंज पहुंची विदेश तक..

    अजनार नदी को साफ करने निकला MP का युवक, मेहनत की गूंज पहुंची विदेश तक..

    26 जनवरी को अजनार नदी की सफाई से शुरू हुई उनकी कोशिश कुछ ही महीनों में सोशल मीडिया की चर्चा बनी। फिर आनंद महिंद्रा ने तारीफ की, मुख्यमंत्री से मुलाकात हुई और अब The Ocean Cleanup के फाउंडर की ओर से काम करने का न्योता मिल गया।

    मध्य प्रदेश: कहते हैं कि बदलाव की शुरुआत किसी बड़े मंच से नहीं, बल्कि एक छोटी-सी कोशिश से होती है। मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा के रहने वाले सुरेंद्र सिंह चौधरी, जिन्हें सोशल मीडिया पर ‘Bittu Tabahi’ के नाम से जाना जाता है, ने इस बात को सच कर दिखाया है। जिस नदी में गंदगी और प्लास्टिक का अंबार देखकर लोग आगे बढ़ जाते थे, उसी नदी में यह युवक खुद उतर गया और सफाई का काम शुरू कर दिया। अजनार नदी की सफाई से शुरू हुई यह मुहिम देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। उनकी मेहनत की चर्चा देशभर में हुई और उद्योगपति आनंद महिंद्रा से लेकर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव तक ने उनके प्रयास की सराहना की। लेकिन कहानी का सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब उनकी मुहिम की चर्चा विदेश तक पहुंची और The Ocean Cleanup के फाउंडर और CEO Boyan Slat ने उन्हें अपनी संस्था के साथ काम करने का न्योता दे दिया।

    कौन हैं ‘Bittu Tabahi’?
    ‘Bittu Tabahi’ का असली नाम सुरेंद्र सिंह चौधरी है। वह मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा क्षेत्र से हैं और पढ़ाई के साथ पर्यावरण को लेकर काम कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर उनके सफाई अभियान के वीडियो सामने आने के बाद लोग उन्हें ‘Bittu Tabahi’ के नाम से पहचानने लगे। उनकी खासियत यह रही कि उन्होंने नदी की खराब हालत देखकर केवल शिकायत नहीं की, बल्कि खुद सफाई के लिए नदी में उतरने का फैसला किया।

    26 जनवरी से शुरू हुई सफाई की मुहिम
    रिपोर्ट्स के मुताबिक सुरेंद्र ने 26 जनवरी 2026 से अजनार नदी की सफाई का काम शुरू किया। नदी में प्लास्टिक की बोतलें, पॉलिथीन, कचरा और काई जैसी गंदगी जमा थी। उन्होंने धीरे-धीरे इसे अपने हाथों से निकालना शुरू किया। शुरुआत में कुछ दोस्तों ने भी उनका साथ दिया, लेकिन बाद में यह जिम्मेदारी लगभग अकेले सुरेंद्र ने संभाल ली। उनका मकसद सिर्फ नदी के किनारे को साफ करना नहीं था, बल्कि लोगों को यह समझाना भी था कि जिस नदी से उन्हें पानी और जीवन मिलता है, उसमें कचरा डालना आखिरकार उसी समाज के लिए नुकसानदायक है।

    अपनी जेब से खर्च किए हजारों रुपये
    इस मुहिम के दौरान सुरेंद्र ने सफाई से जुड़े सामान और डस्टबिन जैसी चीजों पर अपनी जेब से भी पैसा खर्च किया। रिपोर्ट्स में उनके करीब 30 हजार रुपये तक खर्च करने की बात सामने आई है। यानी न कोई बड़ा बजट, न कोई बड़ी टीम और न ही किसी बड़े अभियान का इंतजार। उन्होंने जितना संभव हुआ, उतना खुद किया और लगातार अपने काम के वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करते रहे।

    गंदे पानी और मुश्किलों के बीच भी नहीं छोड़ा काम
    नदी की सफाई करना कैमरे पर जितना आसान दिखाई देता है, असल में उतना ही मुश्किल है। गंदे पानी, कीचड़ और जमा कचरे के बीच घंटों काम करना पड़ता था। रिपोर्ट्स के मुताबिक सुरेंद्र को इस दौरान स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों और संक्रमण जैसी दिक्कतों का भी सामना करना पड़ा। यहां तक कि उन्हें नदी में सांपों का भी सामना करना पड़ा।

    पहले और बाद की तस्वीरों ने खींचा लोगों का ध्यान
    सुरेंद्र अपनी मुहिम के वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट करते रहे। वीडियो में नदी की पहले की हालत और सफाई के बाद आया बदलाव दिखाई देता था। यही तस्वीरें और वीडियो लोगों को सबसे ज्यादा प्रभावित करने लगे। धीरे-धीरे उनकी कहानी सोशल मीडिया पर वायरल हुई और देशभर में लोग उनके बारे में बात करने लगे।

    आनंद महिंद्रा ने भी की तारीफ
    जब सुरेंद्र की कहानी सोशल मीडिया पर तेजी से फैली तो यह उद्योगपति आनंद महिंद्रा तक भी पहुंची। उन्होंने उनके प्रयास की सराहना की और उनकी कहानी को प्रेरणादायक बताया। इसके बाद ‘Bittu Tabahi’ नाम सोशल मीडिया पर और ज्यादा चर्चा में आ गया। एक सामान्य युवा द्वारा अपने आसपास की समस्या के खिलाफ शुरू की गई मुहिम अब हजारों लोगों तक पहुंच चुकी थी।

    CM मोहन यादव से हुई मुलाकात
    सुरेंद्र की मुहिम की चर्चा मध्य प्रदेश सरकार तक भी पहुंची। इसके बाद उनकी मुलाकात मुख्यमंत्री मोहन यादव से हुई। मुख्यमंत्री ने उनके प्रयास की तारीफ की और नदी व जल स्रोतों को बचाने के लिए ऐसे प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया। इस मुलाकात ने सुरेंद्र की मुहिम को एक और बड़ा मंच दिया। लेकिन शायद उन्हें खुद भी अंदाजा नहीं था कि उनकी कहानी जल्द ही भारत की सीमाओं से बाहर जाने वाली है।

    विदेश से आया जिंदगी बदलने वाला ऑफर
    सुरेंद्र की कहानी का सबसे बड़ा मोड़ अब सामने आया है। दुनिया भर में नदियों और समुद्रों से प्लास्टिक प्रदूषण हटाने के लिए काम करने वाली संस्था The Ocean Cleanup के फाउंडर और CEO Boyan Slat ने सुरेंद्र के वीडियो और उनके काम को देखा। उनकी मेहनत से प्रभावित होकर Boyan Slat ने सुरेंद्र को अपनी संस्था के साथ काम करने का न्योता दिया। यानी जिस युवक ने अपने शहर की एक नदी को साफ करने से शुरुआत की थी, अब उसके काम पर दुनिया के एक बड़े पर्यावरण संगठन की नजर पड़ी है।

    हालांकि विदेशी ऑफर के बाद सुरेंद्र आगे क्या फैसला लेते हैं, यह अभी देखना बाकी है। लेकिन इतना जरूर है कि अजनार नदी के किनारे शुरू हुई एक युवक की छोटी-सी मुहिम अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंच चुकी है। और शायद यही इस कहानी की सबसे बड़ी सीख है—बदलाव के लिए हमेशा बड़ी टीम, बड़ा बजट या बड़ा पद जरूरी नहीं होता। कभी-कभी एक इंसान का पहला कदम ही पूरी कहानी बदल देता है।

  • रिटायरमेंट के 23 साल बाद भी फ्री में करते हैं इलाज, दान देते हैं पेंशन… मशहूर डॉ. लहरी के साथ मारपीट का आरोप..

    रिटायरमेंट के 23 साल बाद भी फ्री में करते हैं इलाज, दान देते हैं पेंशन… मशहूर डॉ. लहरी के साथ मारपीट का आरोप..

    रिटायरमेंट के 23 साल बाद भी फ्री में करते हैं इलाज, दान देते हैं पेंशन… मशहूर डॉ. लहरी के साथ मारपीट का आरोप..

    वाराणसी में बीएचयू के मशहूर डॉक्टर टीके लहरी के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है. उनके परिजनों ने आरोप लगाया है कि इलाज के दौरान उनके साथ डॉक्टर अरविंद पांडेय ने मारपीट की. परिवार का आरोप है कि इसकी के एक हफ्ते बाद तक भी बीएचयू प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की.

    लाखों मरीजों के जीवन को दान देने वाले गरीबों के मसीहा पद्मश्री तपन कुमार लहरी से कथित मारपीट का आरोप परिजनों ने लगाया है. लेकिन इसकी शिकायत काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति कुल सचिव सहित दर्जनों अधिकारियों को मेल करके दी गई है. अर्जुन ने आरोप लगाया कि 29 अगस्त की घटना है. हफ्ता भर हो जाने के बाद भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है. लोगों को घटना की जानकारी होते ही आक्रोश फैल गया. लोग कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं. वहीं, एसोसिएशन प्रोफेसर ने BHU के ऑफिशियल आईएमएस ग्रुप में शक्ति इस्तेमाल करने की बात की है, जबकि थप्पड़ मारने से इनकार किया है.

    इलाज के दौरान हुआ विवाद- पिछले कई महीने से बीमार होने के कारण डॉ. लहरी को BHU के कार्डियोलॉजिक विभाग के आईसीयू में भर्ती कराया गया था. जहां पर एसोसिएट प्रोफेसर की डॉक्टर लहरी से किसी बात को लेकर विवाद हुआ. जिसके बाद उनके साथ कथित मारपीट का आरोप परिजनों ने लगाया है. परिजनों ने एक फोटो जारी किया है. जिसमें डॉ. लहरी के गालों पर उंगलियों के निशान, आंखों में ब्लड और आंखों के ऊपर काले निशान दिखाई दे रहे हैं.

    आरोपी डॉक्टर पर कार्रवाई की हो रही मांग- डॉ. टीके लहरी के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं. आरोप है कि अस्पताल परिसर में उनके ही विभाग के चिकित्सक डॉ. अरविंद पांडेय ने डॉ. लहरी के साथ मारपीट की. घटना को लेकर शिकायत किए जाने के बावजूद करीब एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी प्राथमिकी दर्ज नहीं होने का आरोप लगाया जा रहा है. टीके लहरी के साथ मारपीट की घटना मीडिया में आने के बाद लोगों में आक्रोश है. इसको लेकर पुलिस में मुकदमा दर्ज करने कार्रवाई की मांग तेज हो गई है.

    BHU प्रशासन की भूमिका पर सवाल- इस पूरे मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. BHU के हृदय विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष एवं सीनरी कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर ओम शंकर ने आरोप लगाया जा रहा है कि BHU प्रशासन आरोपी चिकित्सक के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने के बजाय मामले को टालने का प्रयास कर रहा है. उन्होंने आगे कहा कि एसोसिएशन प्रोफेसर ने खुद आईएमएस के ग्रुप में बताया है कि वह लहरी के साथ सख्ती से पेश आए थे. लेकिन वह इस घटना से इनकार नहीं कर रहे हैं. इसका आशय है कि वह घटना के समय वहां पर थे, इसकी जांच किया जाना चाहिए कि कैसे इतनी गंभीर चोट टीके लहरी को आई है. अगर आईसीयू में सीसीटीवी लगा है तो सारी चीजें सामने आ सकती हैं, अब यह पता लगाना होगा कि सीसीटीवी वहां लगी है कि नहीं?

    रिटायर होने के बाद भी फ्री में करते हैं इलाज- काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) स्थित चिकित्सा संस्थान में पद्मश्री कार्डियोथोरेसिक सर्जन के रूप में कार्यरत 2003 रिटायर्ड है. उसके बाद भी वो लगातार BHU के सर सुंदरलाल अस्पताल में अपनी सेवाएं निशुल्क दे रहे हैं. यही नहीं, डॉक्टर लहरी अपनी पेंशन को भी काशी हिंदू विश्वविद्यालय को दान कर देते हैं. सिर्फ वह अपने खर्चे का पैसा अपने पास रखते हैं.

  • कैफे कारोबार में हुआ नुकसान तो उतरे जुर्म की दुनिया में… पहले वारदात, फिर करते थे पार्टी… लिव-इन में रहने वाले कपल का किस्सा..?

    कैफे कारोबार में हुआ नुकसान तो उतरे जुर्म की दुनिया में… पहले वारदात, फिर करते थे पार्टी… लिव-इन में रहने वाले कपल का किस्सा..?

    कैफे कारोबार में हुआ नुकसान तो उतरे जुर्म की दुनिया में… पहले वारदात, फिर करते थे पार्टी… लिव-इन में रहने वाले कपल का किस्सा..?

    उत्तर प्रदेश के नोएडा में पुलिस ने एक चोर गिरोह का पर्दाफाश किया है. पुलिस ने कपल समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. ये कपल पहले कैफे चलाते थे, लेकिन कारोबार में नुकसान हुआ तो क्राइम का रास्ता अपना लिया. ये गिरोह पहले चोरी करते थे, उसके बाद बार-रेस्तरां में पार्टी करते थे.

    उत्तर प्रदेश के नोएडा में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. एक प्रेमी जोड़ा पहले कैफे चलाता था. लेकिन जब कारोबार में नुकसान हुआ तो इस कपल ने अपराध का रास्ता चुन लिया. ये कपल चोरी की वारदातों को अंजाम देने लगा. अब प्रेमी जोड़े समेत 3 लोग पुलिस की गिरफ्त में हैं.

    प्रेमी युगल समेत 3 गिरफ्तार- कैफे के कारोबार में नुकसान होने के बाद चोरी की वारदातों को अंजाम देने वाले एक प्रेमी जोड़े समेत तीन आरोपियों को नोएडा पुलिस ने गिरफ्तार किया है. थाना सेक्टर-113 पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चोरी की ज्वेलरी, 3.5 लाख रुपये नकद, पांच लैपटॉप, दो टैबलेट, छह मोबाइल फोन और वारदात में इस्तेमाल की जाने वाली एक अर्टिगा कार बरामद की है. कार पर कथित तौर पर फर्जी नंबर प्लेट लगी हुई थी.

    एडीसीपी मनीषा सिंह ने बताया कि आरोपियों की पहचान कैलाश उर्फ दिवाकर, इरफान उर्फ इमरान और सोनाली के रूप में हुई है. पुलिस ने तीनों आरोपियों को सेक्टर-123 स्थित श्मशान घाट के पास से गिरफ्तार किया.

    बंद पड़े घरों को बनाते थे निशाना- पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि आरोपी अर्टिगा कार में सवार होकर शहर के हाईराइज सोसाइटी और अन्य इलाकों में मकानों की रेकी करते थे. इसके बाद बंद पड़े घरों को निशाना बनाकर ज्वेलरी, नकदी, लैपटॉप और अन्य कीमती सामान चोरी कर लेते थे. फिर चोरी किए गए सामान और नकदी को तीनों आरोपी आपस में बांट लेते थे.

    लिव-इन रिलेशन में रहते थे दो चोर- पुलिस जांच में सामने आया कि दिवाकर और सोनाली प्रेमी-प्रेमिका हैं और लिव-इन रिलेशनशिप में रहते हैं. पुलिस के अनुसार, सोनाली गैंग को लीड करने और रेकी के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थी, जबकि दिवाकर और उनका साथी इरफान चोरी की वारदातों को अंजाम देने में शामिल थे.

    कैफे कारोबार में नुकसान ने बनाया चोर- पुलिस के अनुसार, प्रेमी जोड़े ने पहले गाजियाबाद और बाद में नोएडा में कैफे का कारोबार किया था. कैफे के बिजनेस में नुकसान होने के बाद दोनों आर्थिक संकट में आ गए और इसके बाद चोरी की घटनाओं को अंजाम देने लगे. जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी दिन के समय चोरी की वारदातों को अंजाम देते थे और रात में रेस्तरां और बार में पार्टी करते थे.

    लैपटॉप, टैबलेट, फोन, कैश बरामद- पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चोरी की ज्वेलरी के अलावा पांच लैपटॉप, दो टैबलेट, छह मोबाइल फोन और 3.5 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं. इसके अलावा चोरी की घटनाओं में इस्तेमाल की जाने वाली अर्टिगा कार को भी कब्जे में लिया गया है. फिलहाल अब थाना सेक्टर-113 पुलिस आरोपियों के आपराधिक इतिहास और उनसे जुड़े अन्य चोरी के मामलों की जांच कर रही है.

  • आपको भी किताब खोलते ही आती है नींद? तो सुस्त या आलसी नहीं आप… ये 5 बातें भी हो सकती है कारण.

    आपको भी किताब खोलते ही आती है नींद? तो सुस्त या आलसी नहीं आप… ये 5 बातें भी हो सकती है कारण.

    आपको भी किताब खोलते ही आती है नींद? तो सुस्त या आलसी नहीं आप… ये 5 बातें भी हो सकती है कारण.

    कई लोगों के साथ होता है कि जैसे ही वह किताब खोलते हैं, उन्हें नींद आने लगती है. ऐसे में लोग कहते हैं कि ये तो आलसी है, पढ़ना ही नहीं चाहता. लेकिन दरअसल कई बार कुछ ऐसी वजह भी होती हैं, जो पढ़ाई और नींद के बीच कनेक्शन बनकर सामने आती है.

    अक्सर लोग जैसे ही पढ़ाई करने बैठते हैं, उन्हें नींद आने लगती है. यह कोई नई नहीं, बल्कि आम बात है. कई बार स्टूडेंट्स पूरे मन से पढ़ाई करना शुरू करते हैं. लेकिन कुछ देर बाद आंखें भारी होने लगती हैं. किताब सामने होती है, लेकिन ध्यान पढ़ाई से हटने लगता है. लेकिन किताबों और नींद के बीच का कनेक्शन आखिर क्या है?

    दिमाग पर बढ़ने लगता है प्रेशर

    जब हम लंबे समय तक पढ़ाई करते हैं तो हमारा दिमाग लगातार एक्टिवली काम करता रहता है. खासकर जब कोई नया और टफ सब्जेक्ट समझना हो, तब दिमाग को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. लगातार ध्यान लगाने से लोग मेंटली थक जाते हैं. इसका असर नींद और सुस्ती के रूप में दिखाई दे सकता है.

    सिर्फ रट्टू तोता बनना भी है परेशानी

    अगर आप लंबे समय तक केवल किताब पढ़ते हैं और खुद से सवाल नहीं करते, तो पढ़ाई थोड़ी बोरिंग लग सकती है. ऐसी पढ़ाई में दिमाग की एक्टिवनेस कम हो सकती है. इसी वजह से नींद आने लगती है. पढ़ाई को मजेदार बनाने के लिए जरूरी बातें लिखें, खुद से सवाल पूछें और पढ़े हुए टॉपिक को अपनी लैंग्वेज में समझाने की कोशिश करें.

    जगह का भी पड़ता है असर

    कई बार बिस्तर पर बैठकर या लेटकर पढ़ने से भी नींद जल्दी आ सकती है. बहुत आरामदायक जगह शरीर को आराम करने का इशारा देती है. इससे दिमाग पढ़ाई के बजाय आराम और नींद की तरफ जाने लगता है. इसलिए पढ़ाई के लिए टेबल और कुर्सी जैसी जगह बेहतर रहती है. ऐसी जगह बैठकर जब आप पढ़ते हैं, तो कमर सीधी रहते हैं, पोस्चर भी ठीक होता है और नींद भी नहीं आती.

    पढ़ाई के लिए नींद पूरी करना है जरूरी

    अगर रात में आपकी नींद पूरी नहीं हुई है तो दिन में पढ़ाई करते समय नींद आना आम बात है. लगातार कम सोने से शरीर की थकान जमा होती रहती है. इसका असर ध्यान लगाने और नई चीजें याद रखने की पावर पर साफ तौर पर दिखाई देता है. इसलिए एग्जाम की तैयारी के दौरान रातभर जागने के बजाय अच्छी नींद लेना जरूरी है.

    टेंशन हैं एक बड़ी वजह

    कई बार पढ़ाई का प्रेशर और एग्जाम की टेंशन भी शरीर और दिमाग को थका सकती है. कई बार टेंशन के कारण व्यक्ति खुद को लगातार थका हुआ महसूस करता है. ऐसे में किताब खोलते ही ध्यान लगाने में परेशानी हो सकती है और नींद आने लगती है.

  • भगवान कृष्ण को क्यों माना जाता है सबसे अच्छा मित्र? कैसे बनाएं उन्हें अपना दोस्त…?

    भगवान कृष्ण को क्यों माना जाता है सबसे अच्छा मित्र? कैसे बनाएं उन्हें अपना दोस्त…?

    भगवान कृष्ण को क्यों माना जाता है सबसे अच्छा मित्र? कैसे बनाएं उन्हें अपना दोस्त…?

    भगवान कृष्ण को मित्रता निभाने के लिए जाना जाता है. अर्जुन, सुदामा और उद्धव के साथ उनकी मित्रता काफी खास और गहरी थी. जानें कृष्ण से सच्चे दोस्त की तरह जुड़ने का आसान तरीका.

    भगवान कृष्ण को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है. मान्यता है कि कृष्ण अपने इस अवतार में सोलह कलाओं से पूर्ण थे. कृष्ण नाम का एक अर्थ ऐसा भी माना जाता है, जो पूरी सृष्टि को अपनी ओर आकर्षित करता है. उनके जीवन और व्यक्तित्व ने सच में लोगों को अपनी ओर खींचा. उन्होंने अलग-अलग रूपों में अपने भक्तों का साथ दिया और उनकी मनोकामनाएं पूरी कीं. इन सभी रूपों में मित्र के रूप में भगवान कृष्ण का स्वरूप सबसे अधिक करीब और अपनापन देने वाला माना जाता है.

    कृष्ण के साथ मित्रता का रिश्ता क्यों है खास?

    भगवान कृष्ण ने अपने जीवन में कई लोगों के साथ मित्रता निभाई. इनमें अर्जुन, उद्धव और सुदामा का नाम सबसे खास है. इन तीनों के साथ उनकी दोस्ती अलग-अलग रूप में दिखाई देती है. उद्धव के साथ कृष्ण की मित्रता ने जीवन और उसके सत्य को समझने का रास्ता दिखाया. वहीं सुदामा के साथ उनकी दोस्ती प्रेम और अपनापन की मिसाल बन गई. सुदामा जब कृष्ण से मिलने पहुंचे तो कृष्ण ने बिना किसी भेदभाव के अपने मित्र का स्वागत किया और उनकी गरीबी दूर कर दी.

    अर्जुन के साथ कृष्ण की मित्रता तो पूरी दुनिया के लिए ज्ञान का माध्यम बन गई. महाभारत के युद्ध के समय कृष्ण ने अर्जुन का मार्गदर्शन किया और उन्हें श्रीमद्भगवद्गीता का ज्ञान दिया. इस तरह कृष्ण के साथ मित्रता केवल प्रेम और भक्ति तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह ज्ञान और मुक्ति का रास्ता भी बनी.

    भगवान कृष्ण से मित्रता कैसे करें?

    कृष्ण को अपना मित्र बनाने के लिए सबसे जरूरी चीज ईमानदारी है. जिस तरह हम अपने सबसे अच्छे दोस्त से अपने मन की बात खुलकर कहते हैं, उसी तरह कृष्ण से भी अपनी परेशानियां, दुख और सुख साझा किए जा सकते हैं. उनसे बात करते समय मन में किसी तरह का दिखावा नहीं होना चाहिए.

    अपनी समस्याएं कृष्ण के सामने रखने के बाद मन को शांत करें और अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनें. जो समाधान भीतर से सही लगे, उसे स्वीकार करने की कोशिश करें. कृष्ण के साथ मित्रता का अर्थ अपनी हर इच्छा पूरी करवाना नहीं है. इस रिश्ते में विश्वास, सच्चाई और प्रेम होना जरूरी है.

    कृष्ण को मित्र बनाने का संदेश

    भगवान कृष्ण के साथ मित्रता हमें सिखाती है कि सच्चा मित्र वही है जो मुश्किल समय में सही रास्ता दिखाए. इसलिए कृष्ण को केवल भगवान के रूप में नहीं, बल्कि अपने सच्चे मित्र के रूप में याद करना भी मन को शांति और जीवन को सही दिशा दे सकता है.

  • डिलीवरी बॉय बना फरिश्ता, -20 डिग्री के फ्रीजर में फंसी थी महिला; जान बचाने वाले को मिला कंपनी में हिस्सा.

    डिलीवरी बॉय बना फरिश्ता, -20 डिग्री के फ्रीजर में फंसी थी महिला; जान बचाने वाले को मिला कंपनी में हिस्सा.

    डिलीवरी बॉय बना फरिश्ता, -20 डिग्री के फ्रीजर में फंसी थी महिला; जान बचाने वाले को मिला कंपनी में हिस्सा.

    कहते हैं कि सही समय पर की गई छोटी सी मदद किसी की जिंदगी बचा सकती है। चीन से सामने आई एक ऐसी ही घटना इन दिनों चर्चा में है, जहां एक डिलीवरी बॉय ने अपनी सूझबूझ और हिम्मत दिखाते हुए एक महिला की जान बचा ली। महिला एक बेहद ठंडे फ्रीजर के अंदर फंस गई थी और बाहर निकलने का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था। मदद करने वाले डिलीवरी बॉय को महिला ने बाद में ऐसा इनाम देने का फैसला किया, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।

    सामान की छंटाई के दौरान फ्रीजर में फंसी महिला

    मामला चीन के हुनान प्रांत का बताया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, चेन नाम की एक महिला अपनी कोल्ड-चेन लॉजिस्टिक्स कंपनी के फ्रीजर में सामान की जांच और छंटाई कर रही थी।

    महिला ने फ्रीजर का दरवाजा खोलकर अंदर काम करना शुरू किया था, लेकिन इसी दौरान दरवाजा अचानक लॉक हो गया। अंदर मौजूद बैकअप स्विच भी काम नहीं कर रहा था। सबसे बड़ी परेशानी यह थी कि महिला के पास मोबाइल फोन भी नहीं था, जिससे वह किसी को तुरंत मदद के लिए बुला सके।

    अंदर का तापमान था करीब -20 डिग्री

    जिस फ्रीजर में महिला फंसी थी, उसका तापमान लगभग -20 डिग्री सेल्सियस बताया गया है। महिला गर्मियों के कपड़ों में थी, इसलिए ठंड बढ़ने के साथ उसकी हालत लगातार खराब होने लगी।

    उसने बाहर निकलने के लिए आवाज लगाने और दरवाजा खटखटाने की कोशिश की, लेकिन शुरुआत में उसकी आवाज किसी तक नहीं पहुंची। काफी देर तक मदद का इंतजार करने के बाद उसकी परेशानी और बढ़ने लगी।

    डिलीवरी बॉय ने सुन ली मदद की आवाज

    इसी दौरान डिलीवरी बॉय लियू जू वहां से गुजर रहा था। बताया जाता है कि उसने फ्रीजर के अंदर से आने वाली आवाज सुनी। वह तुरंत वहां पहुंचा और महिला को बाहर निकालने की कोशिश शुरू कर दी।

    करीब 20 मिनट की मशक्कत के बाद वह फ्रीजर का दरवाजा खोलने में सफल रहा और महिला को बाहर निकाल लिया। बाहर आने के बाद महिला ठंड से बुरी तरह कांप रही थी। सामान्य स्थिति में लौटने में उसे करीब दो घंटे का समय लगा।

    महिला ने दिया ऐसा इनाम, सुनकर हर कोई हैरान

    जान बचने के बाद महिला ने डिलीवरी बॉय लियू जू का आभार जताया। उसने कहा कि अगर लियू ने समय रहते उसकी आवाज नहीं सुनी होती तो उसकी जान जा सकती थी।

    महिला ने अपनी कृतज्ञता जताने के लिए लियू को अपनी कंपनी में हिस्सेदारी देने का ऐलान किया। एक साधारण डिलीवरी बॉय के लिए यह सम्मान और इनाम बेहद खास माना जा रहा है।

    यह घटना सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है। कहानी यह भी दिखाती है कि किसी मुश्किल परिस्थिति में समय पर की गई मदद कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है।