मामला उज्जैन के कंठाल चौराहे से छत्री चौक तक होने वाले सड़क चौड़ीकरण से जुड़ा है. सिंहस्थ 2028 से पहले पुराने शहर के इस हिस्से को व्यवस्थित करने की तैयारी है. प्रशासन ने सड़क की जद में आ रहे मंदिर के भवन को तोड़ दिया लेकिन जब बात हनुमान प्रतिमा को सुरक्षित विस्थापित करने की आई, तो चुनौती बढ़ गई.
उज्जैन में सड़क बनाम आस्था
उज्जैन में सड़क बनाम आस्था
प्रतिमा को नुकसान पहुंचाए बिना सुरक्षित स्थान पर ले जाना जरूरी
प्रतिमा को नुकसान पहुंचाए बिना सुरक्षित स्थान पर ले जाना जरूरी
सिंहस्थ 2028 से पहले उज्जैन में सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने का काम तेजी से चल रहा है, लेकिन इसी विकास के बीच आस्था का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है. कंठाल चौराहे से छत्री चौक तक सड़क चौड़ीकरण के लिए प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर का भवन तोड़ दिया गया. अब जब हनुमान प्रतिमा को दूसरी जगह ले जाने की कोशिश की गई, तो मामला अटक गया. दावा है कि कई प्रयासों के बावजूद प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली. इसके बाद हिंदू संगठनों ने प्रतिमा हटाने का विरोध शुरू कर दिया है.
मंदिर का भवन टूटा, प्रतिमा टेंट के नीचे विराजमान सड़क चौड़ीकरण की जद में आने के कारण मंदिर का भवन हटाया जा चुका है. फिलहाल हनुमान प्रतिमा को टेंट की छत के नीचे रखा गया है. प्रशासन अब प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से दूसरी जगह विस्थापित करने का रास्ता तलाश रहा है. वहीं श्रद्धालुओं और हिंदू संगठनों का कहना है कि जब प्रतिमा को हटाने की कोशिश के बावजूद सफलता नहीं मिली, तो इसे अपनी जगह से हटाने की जरूरत ही क्या है.
मंगलवार को सैकड़ों लोगों ने की महाआरती विरोध के बीच मंगलवार शाम मंदिर स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटे. यहां महाआरती की गई, ढोल-ताशे बजाए गए और हनुमान चालीसा का पाठ हुआ. लोगों ने एकजुट होकर प्रशासन से मांग की कि सड़क चौड़ीकरण का काम किया जाए, लेकिन हनुमान प्रतिमा को उसकी मौजूदा जगह से न हटाया जाए. हिंदू संगठनों का दावा है कि प्रतिमा को हटाने की करीब चार बार कोशिश की जा चुकी है. हर बार प्रयास विफल रहा.
छेनी-हथौड़े से कोशिश, फिर भी नहीं हिली प्रतिमा बताया जा रहा है कि प्रतिमा को नीचे से हटाने के लिए भी प्रयास किए गए. छेनी-हथौड़े की मदद से उसे निकालने की कोशिश हुई, लेकिन प्रशासन को सफलता नहीं मिली. अब अधिकारियों की ओर से विशेषज्ञों की मदद लेने की तैयारी है, ताकि प्रतिमा को किसी तरह का नुकसान पहुंचाए बिना सुरक्षित तरीके से दूसरी जगह ले जाया जा सके.
इतिहासकार बोले- जगह का भी है ऐतिहासिक महत्व उज्जैन के इतिहास के जानकार भगवती लाल राजपुरोहित के मुताबिक यह प्रतिमा बेहद प्राचीन मानी जाती है. हालांकि लंबे समय से सिंदूर चढ़ाए जाने के कारण प्रतिमा की मूल भाव-भंगिमा पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाती. उनके अनुसार मंदिर का यह स्थान भी उज्जैन के ऐतिहासिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण माना जाता है. ऐसे में प्रतिमा को हटाने का मामला केवल निर्माण कार्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे धार्मिक और ऐतिहासिक भावनाएं भी जुड़ी हैं.
प्रशासन के सामने विकास और आस्था दोनों की चुनौती इंजीनियरिंग विशेषज्ञों के मुताबिक पुरानी और भारी प्रतिमाओं को आधुनिक तकनीक की मदद से सुरक्षित तरीके से दूसरी जगह ले जाना संभव है. लेकिन यहां चुनौती सिर्फ तकनीकी नहीं है. प्रतिमा प्राण-प्रतिष्ठित होने के कारण श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना भी जरूरी है.
अगर आप आगामी समय में किसी बीच पर घूमने का प्लान बना रहे हैं तो गुजरात के दक्षिणी तट के करीब स्थित केंद्र शासित प्रदेश दीव जा सकते हैं। दीव देश के अन्य समुद्र तट स्थलों से बहुत अलग है। इसे इसले ऑफ काम भी बोला जाता है।
इस दीव गोवा की तरह यहां पर पुर्तगल प्रभाव आपको देखने को मिलेगा। यहां पर आपको बहुत से खूबसूरत बीचेज का दीदार करने का मौका मिलेगा। यहां जाने से आपका टूर यादगार बन जाएगा। दीव शहर में घूमने के लिए कुछ बेहतरीन जगहें हैं। अब इसे स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है।
यहां पर ऐतिहासिक धरोहरों का दीदार करने के साथ ही आपको हॉट एयर बलून राइड, पैराग्लाइडिंग, स्कूबा डाइविंग, डॉलफिन ट्रिप और पैरासेलिंग जैसी रोमांचक एक्टिविटीज का मजा लेने का भी मौका मिलेगा। आप आज ही यहां पर घूमने का प्लान बना लें।
दर्द होने पर कई लोग तुरंत पेनकिलर ले लेते हैं. इससे कुछ समय के लिए राहत मिल सकती है, लेकिन हर बार इससे दर्द की असली वजह दूर नहीं होती.
आजकल कम उम्र में ही कमर, गर्दन, कंधे और घुटनों में दर्द की शिकायत आम हो गई है. ऑफिस में लगातार कुर्सी पर बैठना, घंटों मोबाइल चलाना, गलत तरीके से बैठना और शारीरिक गतिविधि कम होना इसके बड़े कारण हैं. घर का काम करने वालों में भी लगातार झुककर काम करने या एक ही मुद्रा में लंबे समय तक रहने से शरीर में खिंचाव और अकड़न हो सकती है. कई लोग इसे सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं या तुरंत दर्द की गोली ले लेते हैं. लेकिन अगर दर्द बार-बार हो रहा है, कई दिनों तक बना रहता है या रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगे हैं तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
सेंटर फॉर नी एंड हिप केयर, गाजियाबाद के फिजियोथेरेपी डिपार्टमेंट के HOD डॉ. इंद्रमणि उपाध्याय ने बताया कि लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहने से मांसपेशियों पर दबाव बढ़ता है. इससे मांसपेशियों में खिंचाव, जकड़न और दर्द की समस्या हो सकती है.
कम उम्र में ही क्यों बढ़ रहा है कमर और गर्दन का दर्द? पहले कमर या गर्दन के दर्द को उम्र बढ़ने से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन अब युवाओं में भी यह समस्या तेजी से देखने को मिल रही है. इसका एक बड़ा कारण हमारी रोजमर्रा की जीवनशैली है. ऑफिस में कई घंटे लगातार बैठना, लैपटॉप पर काम करते समय गर्दन झुकाए रखना, मोबाइल को नीचे रखकर लंबे समय तक देखना और एक्सरसाइज न करना शरीर पर असर डालता है. लगातार बैठे रहने से शरीर की कुछ मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं और रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है. लंबे समय में इससे गर्दन और कमर में अकड़न, मांसपेशियों में खिंचाव और बार-बार होने वाला दर्द परेशान कर सकता है. इसके अलावा तनाव भी मांसपेशियों में खिंचाव बढ़ा सकता है. यानी दर्द सिर्फ ज्यादा काम करने से नहीं, बल्कि गलत तरीके से बैठने और कम चलने-फिरने से भी हो सकता है.
घंटों बैठने के बाद दर्द होना सामान्य है या बीमारी का संकेत? अगर कोई व्यक्ति लगातार कई घंटे बैठा रहता है तो थोड़ी देर के लिए कमर, गर्दन या पैरों में भारीपन और अकड़न महसूस होना संभव है. इसकी वजह यह है कि मांसपेशियां लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहती हैं. लेकिन हर बार दर्द को सामान्य मान लेना सही नहीं है. अगर दर्द बार-बार हो रहा है, बहुत ज्यादा है या आराम करने के बाद भी ठीक नहीं हो रहा तो इसकी वजह जानना जरूरी है. ऑफिस में काम करने वाले लोग कुछ देर में अपनी सीट से उठें. लगातार एक ही जगह बैठे रहने के बजाय थोड़ी देर उठकर चलें. कुर्सी पर बैठते समय पीठ को उचित सहारा दें और मोबाइल या लैपटॉप इस्तेमाल करते समय गर्दन को लगातार नीचे झुकाने से बचें.
सुबह उठते ही कमर, गर्दन या घुटनों में अकड़न क्यों होती है?
सुबह उठने पर शरीर में थोड़ी अकड़न कई कारणों से हो सकती है. लंबे समय तक एक ही स्थिति में सोना, सोने की गलत मुद्रा या मांसपेशियों में खिंचाव इसकी वजह हो सकता है.
सुबह उठने पर शरीर में थोड़ी अकड़न कई कारणों से हो सकती है. लंबे समय तक एक ही स्थिति में सोना, सोने की गलत मुद्रा या मांसपेशियों में खिंचाव इसकी वजह हो सकता है.
ऐसे में उठते ही अचानक तेज एक्सरसाइज या झटके वाली गतिविधि करने से बचें. पहले धीरे-धीरे शरीर को हिलाएं और हल्की स्ट्रेचिंग करें. सोने की मुद्रा और गद्दे के आराम को भी ध्यान में रखना चाहिए.
ऐसे में उठते ही अचानक तेज एक्सरसाइज या झटके वाली गतिविधि करने से बचें. पहले धीरे-धीरे शरीर को हिलाएं और हल्की स्ट्रेचिंग करें. सोने की मुद्रा और गद्दे के आराम को भी ध्यान में रखना चाहिए.
अगर सुबह की अकड़न बहुत ज्यादा है, लगातार बनी रहती है, धीरे-धीरे बढ़ रही है या इसके साथ सूजन और कमजोरी भी महसूस हो रही है तो डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह लेना बेहतर है.
अगर सुबह की अकड़न बहुत ज्यादा है, लगातार बनी रहती है, धीरे-धीरे बढ़ रही है या इसके साथ सूजन और कमजोरी भी महसूस हो रही है तो डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह लेना बेहतर है.
क्या सिर्फ स्ट्रेचिंग से दर्द से बचा जा सकता है?
कई सामान्य दर्द और अकड़न से बचने में नियमित स्ट्रेचिंग और हल्की एक्सरसाइज मदद कर सकती है. इससे शरीर का लचीलापन बढ़ता है, मांसपेशियां मजबूत होती हैं और जोड़ों की मूवमेंट बेहतर रहती है.
कई सामान्य दर्द और अकड़न से बचने में नियमित स्ट्रेचिंग और हल्की एक्सरसाइज मदद कर सकती है. इससे शरीर का लचीलापन बढ़ता है, मांसपेशियां मजबूत होती हैं और जोड़ों की मूवमेंट बेहतर रहती है.
खासकर उन लोगों के लिए यह जरूरी है जो दिन का बड़ा हिस्सा कुर्सी पर बैठकर बिताते हैं. हर कुछ देर में उठना, थोड़ा चलना और शरीर की स्थिति बदलना मांसपेशियों पर पड़ने वाले लगातार दबाव को कम कर सकता है.
खासकर उन लोगों के लिए यह जरूरी है जो दिन का बड़ा हिस्सा कुर्सी पर बैठकर बिताते हैं. हर कुछ देर में उठना, थोड़ा चलना और शरीर की स्थिति बदलना मांसपेशियों पर पड़ने वाले लगातार दबाव को कम कर सकता है.
हालांकि एक्सरसाइज का तरीका सही होना भी जरूरी है. गलत तरीके से स्ट्रेचिंग या जरूरत से ज्यादा एक्सरसाइज करने से उल्टा चोट लग सकती है. इसलिए अगर पहले से दर्द है तो अपनी तरफ से कोई कठिन एक्सरसाइज शुरू करने के बजाय विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है.
हालांकि एक्सरसाइज का तरीका सही होना भी जरूरी है. गलत तरीके से स्ट्रेचिंग या जरूरत से ज्यादा एक्सरसाइज करने से उल्टा चोट लग सकती है. इसलिए अगर पहले से दर्द है तो अपनी तरफ से कोई कठिन एक्सरसाइज शुरू करने के बजाय विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है.
कौन सा दर्द फिजियोथेरेपी से ठीक या कम हो सकता है? फिजियोथेरेपी खासतौर पर मांसपेशियों, जोड़ों की मूवमेंट, कमजोरी, गलत पॉश्चर और शरीर की गतिविधियों से जुड़ी कई समस्याओं में उपयोगी हो सकती है. कमर और गर्दन में होने वाला दर्द, मांसपेशियों का खिंचाव, लंबे समय तक बैठने से होने वाली अकड़न और ऐसी समस्याएं जिनमें शरीर की मूवमेंट प्रभावित हो रही हो, उनमें फिजियोथेरेपी की मदद ली जा सकती है. फिजियोथेरेपिस्ट सिर्फ दर्द वाली जगह पर ध्यान नहीं देता, बल्कि यह भी देखता है कि दर्द क्यों हो रहा है. पॉश्चर, शरीर की मूवमेंट, मांसपेशियों की ताकत और कमजोरी को देखकर जरूरत के मुताबिक एक्सरसाइज और रिहैबिलिटेशन प्लान तैयार किया जा सकता है.
दर्द की गोली कब तक लेते रहना ठीक नहीं? दर्द होने पर कई लोग तुरंत पेनकिलर ले लेते हैं. इससे कुछ समय के लिए राहत मिल सकती है, लेकिन हर बार इससे दर्द की असली वजह दूर नहीं होती.
अगर दर्द कुछ दिनों से बना हुआ है, बार-बार लौट रहा है, रोजमर्रा के काम करने में परेशानी हो रही है या आराम के बावजूद मूवमेंट प्रभावित हो रही है तो सिर्फ दर्द की गोली लेकर उसे दबाते रहना सही तरीका नहीं है.
ऐसी स्थिति में डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह लेकर दर्द का कारण समझना जरूरी है. कई बार सही एक्सरसाइज, पॉश्चर में सुधार और मांसपेशियों को मजबूत करने से समस्या को लंबे समय तक नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है.
घर और ऑफिस में ये 5 आदतें अपनाएं
1. एक ही जगह लगातार न बैठें- कुछ समय के अंतराल पर उठकर थोड़ा चलें.
2. मोबाइल नीचे रखकर न देखें- स्क्रीन को आंखों के करीब उचित ऊंचाई पर रखें ताकि गर्दन ज्यादा न झुके.
3. बैठने का तरीका सुधारें- पीठ को सहारा दें और लंबे समय तक झुककर न बैठें.
4. रोज थोड़ा चलें-फिरें- शरीर को सक्रिय रखना मांसपेशियों और जोड़ों के लिए जरूरी है.
5. दर्द को बार-बार नजरअंदाज न करें- दर्द लगातार हो या रोजमर्रा के काम प्रभावित करे तो विशेषज्ञ से सलाह लें.
पिछले दिनों नई दिल्ली से जयनगर जा रही 12562 स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस के AC फर्स्ट क्लास से नेहा झा और उसके जीजा ईशान को 75 लीटर विदेशी शराब के साथ गिरफ्तार किया गया था.
स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस के AC फर्स्ट क्लास से करीब डेढ़ लाख रुपए की विदेशी शराब के साथ गिरफ्तार नेहा झा का मामला अब सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गया है. नेहा को उसके जीजा ईशान के साथ 75 लीटर शराब के मामले में गिरफ्तार किया गया था. गिरफ्तारी के बाद उसके वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए और लोगों ने उसके आत्मविश्वास और बेबाक अंदाज को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दीं. इसके बाद मामला इतना ट्रेंड हुआ कि सोशल मीडिया पर मीम्स बनने लगे. कुछ लोग AI की मदद से नेहा के माता-पिता, भाई-बहन की फर्जी तस्वीरें और जानकारी शेयर कर रहे हैं. इतना ही नहीं, दूसरी लड़की के डांस वीडियो को भी नेहा का बताकर वायरल किया जा रहा है. ऐसे में पुलिस ने लोगों से सोशल मीडिया पर सामने आ रही अपुष्ट जानकारी पर भरोसा न करने की अपील की है.
75 लीटर शराब के साथ हुई थी गिरफ्तारी पिछले दिनों नई दिल्ली से जयनगर जा रही 12562 स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस के AC फर्स्ट क्लास से नेहा झा और उसके जीजा ईशान को 75 लीटर विदेशी शराब के साथ गिरफ्तार किया गया था. इसके बाद जांच के दौरान सामने आए नेहा के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगे. कई यूजर्स को पहले यह विश्वास ही नहीं हुआ कि वीडियो में दिख रही महिला शराब तस्करी के मामले में गिरफ्तार आरोपी है. सोशल मीडिया पर कुछ लोग उसे जांच अधिकारी तक समझ बैठे. देखते ही देखते मामला शराब बरामदगी से आगे बढ़कर सोशल मीडिया की बहस बन गया.
जेल में VIP ट्रीटमेंट की भी चर्चा नेहा के जेल जाने के बाद सोशल मीडिया पर यह भी चर्चा होने लगी कि क्या उसे जेल में VIP सुविधा मिल रही है. कुछ लोग दावा कर रहे थे कि उसे बाहर से खाना भेजा जा रहा होगा. हालांकि, जेल सूत्रों के मुताबिक नेहा समस्तीपुर मंडल कारा के महिला सेल में अन्य महिला बंदियों की तरह ही रह रही है. उसे जेल मैनुअल के अनुसार खाना दिया जा रहा है. जेल में कैंटीन की सुविधा भी है, जहां बंदी समोसा, लिट्टी, मिठाई और दूध जैसी चीजें खरीद सकते हैं.
जेल में मिलता है तय मेन्यू जेल मैनुअल के मुताबिक सुबह चाय, बिस्किट, चना और गुड़ दिया जाता है. दोपहर और रात के खाने में रोटी, चावल, दाल और मौसमी हरी सब्जियां मिलती हैं. सप्ताह में मांसाहारी भोजन देने का भी प्रावधान है. मंडल कारा में बाहर से खाना भेजने पर रोक है, इसलिए नेहा को भी जेल का निर्धारित भोजन ही दिया जा रहा है.
शराब नेटवर्क की जांच करेगी SIT मामले के बढ़ते दायरे को देखते हुए रेल एसपी मुजफ्फरपुर वीणा कुमारी ने SIT का गठन किया है. टीम का नेतृत्व समस्तीपुर के रेल DSP करेंगे. पुलिस अब नेहा और उसके जीजा से आगे बढ़कर पूरे शराब नेटवर्क की जांच करेगी. जांच में परिवार के कुछ सदस्यों के पहले शराब से जुड़े मामलों में जेल जाने की जानकारी भी सामने आई है. SIT नेहा और ईशान के मोबाइल और संपर्कों की जांच कर यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि शराब कहां से आती थी, कहां सप्लाई होती थी और इस नेटवर्क में कौन-कौन लोग जुड़े हैं.
जानकारी के अनुसार,मूल रूप से बिहार का रहने वाला और हाल में कडोदरा में नौकरी करने वाला 21 वर्षीय मोनू अपने एक मित्र के साथ ओलपाड के कीम रेलवे ओवरब्रिज पर पहुंचा था. बताया जा रहा है कि दोनों युवक ब्रिज के पिलर के ऊपर चढ़ गए थे.
रील बनाने के चक्कर में रेलवे ओवरब्रिज से नीचे गिरा युवक
रील बनाने के चक्कर में रेलवे ओवरब्रिज से नीचे गिरा युवक
ब्रिज के नीचे खड़े ऑटो रिक्शा पर गिरने से बची जान
ब्रिज के नीचे खड़े ऑटो रिक्शा पर गिरने से बची जान
सोशल मीडिया पर वायरल होने के लिए युवा अक्सर खतरनाक स्टंट और जोखिम भरे वीडियो बनाने से भी पीछे नहीं हटते. कई बार कुछ सेकंड की रील के लिए उठाया गया जोखिम जानलेवा साबित हो सकता है. गुजरात के सूरत में ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां रेलवे ओवरब्रिज पर स्टंट करने के दौरान एक 21 वर्षीय युवक करीब 40 फीट नीचे जा गिरा. हादसे का सीसीटीवी वीडियो सामने आया है, जिसमें युवक ब्रिज से नीचे सड़क किनारे खड़ी ऑटो रिक्शा पर गिरता दिखाई दे रहा है. गनीमत रही कि रिक्शा पर गिरने के कारण उसकी जान बच गई.
ब्रिज के पिलर पर चढ़कर कर रहा था स्टंट मामला सूरत जिले के ओलपाड इलाके के कीम रेलवे ओवरब्रिज का है. जानकारी के मुताबिक बिहार का रहने वाला और कडोदरा में नौकरी करने वाला 21 वर्षीय मोनू अपने दोस्त के साथ ब्रिज पर पहुंचा था. बताया जा रहा है कि दोनों युवक रेलवे ओवरब्रिज के पिलर पर चढ़ गए थे. इसी दौरान मोनू ने सामने वाले पिलर की तरफ फ्लिप करने और स्टंट करने की कोशिश की. दोनों पिलरों के बीच लोहे का गैप था. युवक इसी गैप के बीच से नीचे उतरने या कूदने का प्रयास कर रहा था. तभी अचानक उसका संतुलन बिगड़ गया और वह सीधे नीचे जा गिरा.
40 फीट नीचे रिक्शा पर गिरा, बाल-बाल बचा सीसीटीवी फुटेज में युवक ब्रिज से गिरता हुआ दिखाई दे रहा है. नीचे सड़क किनारे दो ऑटो रिक्शा खड़ी थीं. युवक उनमें से एक रिक्शा के ऊपर जा गिरा. हादसे के बाद आसपास मौजूद लोग तुरंत उसकी मदद के लिए दौड़े. रिक्शा पर गिरने की वजह से युवक की जान बच गई, हालांकि ऑटो रिक्शा क्षतिग्रस्त हो गई. युवक को भी मामूली चोटें आईं. अगर वह सीधे सड़क या जमीन पर गिरता तो हादसा बेहद गंभीर हो सकता था.
पुलिस के बयान में सामने आई अलग कहानी कीम पुलिस थाने की पुलिस इंस्पेक्टर किरनबा जाडेजा ने आजतक को फोन पर बताया कि युवक स्टंट करने के दौरान ओवरब्रिज से नीचे गिरा था. हालांकि पुलिस को दिए अपने बयान में मोनू ने अलग वजह बताई है. मोनू के मुताबिक वह रेलवे स्टेशन पर टिकट लेने की जल्दी में था और समय बचाने के लिए ओवरब्रिज के नीचे से शॉर्टकट रास्ता अपनाने की कोशिश कर रहा था. इसी दौरान वह हादसे का शिकार हो गया.
गणेशोत्सव को लेकर भक्तों में उत्साह बढ़ने लगा है. भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से शुरू होने वाला यह पर्व भगवान गणेश को समर्पित है. मान्यता है कि गणपति बप्पा बुद्धि, सुख-समृद्धि देने वाले और सभी विघ्नों को दूर करने वाले देवता हैं33. इसी वजह से गणेश चतुर्थी पर बड़ी संख्या में लोग घर में गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करते हैं.
इस साल गणेशोत्सव 14 सितंबर से शुरू होगा और 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति विसर्जन के साथ इसका समापन होगा. अगर आप भी घर में बप्पा को विराजमान करने जा रहे हैं, तो मूर्ति की स्थापना करते समय कुछ वास्तु और धार्मिक मान्यताओं का ध्यान रखना जरूरी है.ईशान कोण में गणपति की स्थापना मानी जाती है
शुभ वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर की उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण को पूजा-पाठ के लिए बेहद शुभ माना जाता है. ऐसे में गणेश जी की मूर्ति को इस दिशा में रखना अच्छा माना जाता है. अगर ईशान कोण में जगह उपलब्ध नहीं है, तो उत्तर या पश्चिम दिशा में भी गणपति की स्थापना की जा सकती है.किस दिशा में होना चाहिए गणपति का मुख गणपति बप्पा की मूर्ति रखते समय उनके मुख की दिशा का भी ध्यान रखना चाहिए.
धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान गणेश का मुख घर के अंदर की ओर होना चाहिए. वहीं उनकी पीठ दीवार की तरफ होनी चाहिए. मान्यता है कि गणेश जी के सम्मुख भाग में सुख और समृद्धि का वास होता है. इसलिए मूर्ति को इस तरह रखना चाहिए कि उनकी पीठ घर के खुले हिस्से या मुख्य कमरे की ओर न हो.जमीन पर न रखें गणेश जी की मूर्ति गणपति की प्रतिमा को सीधे जमीन पर रखना उचित नहीं माना जाता है.
मूर्ति की स्थापना के लिए साफ चौकी या पाटे का इस्तेमाल करना चाहिए. चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर उसके ऊपर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें. पूजा की जगह भी साफ और पवित्र होनी चाहिए.कैसी हो गणपति की प्रतिमा घर में गणपति की स्थापना के लिए मिट्टी से बनी प्रतिमा को प्राथमिकता दी जाती है. ऐसी प्रतिमा का विसर्जन भी आसानी से किया जा सकता है.
प्रतिमा लाते समय उसके आकार और स्थापना के लिए उपलब्ध स्थान का भी ध्यान रखना चाहिए.स्थापना के बाद इन बातों का रखें ध्यान गणेश चतुर्थी के दिन स्नान करके साफ कपड़े पहनें और पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें. इसके बाद चौकी पर कपड़ा बिछाकर गणपति बप्पा को विराजमान करें. भगवान गणेश को दूर्वा, फूल और मोदक अर्पित करें. विधि-विधान से पूजा और आरती करें. गणपति के घर में रहने तक रोज सुबह- शाम आरती और भोग लगाना शुभ माना जाता है. साथ ही पूजा स्थल की साफ-सफाई और पवित्रता का विशेष ध्यान रखें.
क्या आप किसी ऐसे बार की कल्पना कर सकते हैं, जहां व्हिस्की की एक शॉट के साथ आपको बर्फ में जमा हुआ असली इंसानी अंगूठा परोसा जाए? सुनने में ही यह बात किसी हॉरर फिल्म का सीन या मनगढंत कहानी जैसी लगती है. लेकिन उत्तरी कनाडा के युकॉन इलाके में बसे डाउसन सिटी के एक मशहूर बार में ऐसा ही होता है. यहां के सॉरडफ सलून में अगर आप जाएंगे, तो आपको सॉरटो कॉकटेल नाम की एक खास ड्रिंक मिलेगी, जिसमें बर्फ से सुखाया गया असली इंसानी अंगूठा तैरता हुआ नजर आता है. पिछले 50 सालों से यह परंपरा यहां आने वाले पर्यटकों के लिए किसी साहसिक इम्तिहान की तरह बन चुकी है.
इस बेहद अजीबोगरीब परंपरा की शुरुआत 1920 के दशक के एक खौफनाक हादसे से हुई थी. शराब की तस्करी करने वाले दो भाई लुई लिंकन और ओटो लिंकन भीषण बर्फीले तूफान में फंस गए. ठंड इतनी ज्यादा थी कि लुई के पैर का अंगूठा बर्फ से पूरी तरह जम गया. शरीर में सड़न न फैले, इसलिए ओटो ने मजबूरी में कुल्हाड़ी से अपने भाई का जम चुका अंगूठा काट दिया. बाद में उन्होंने उस कटे हुए अंगूठे को शराब के एक जार में हमेशा के लिए संभालकर रख दिया. इसके ठीक 50 साल बाद कैप्टन डिक स्टीवेन्सन नाम के एक शख्स को एक पुरानी केबिन की सफाई करते समय वह जार मिला और वे उस कटे हुए अंगूठे को सीधे शहर के बार में ले आए, जहां से इस अनोखी ड्रिंक का जन्म हुआ.
हैरानी की बात यह है कि बार अब तक कम से कम 8 अलग-अलग इंसानी अंगूठे इस्तेमाल कर चुका है. ये सभी अंगूठे लोगों द्वारा दिए गए थे. इनमें से ज्यादातर अंगूठे या तो चोरी हो गए या फिर लोग अनजाने में या जानबूझकर गटक गए! पहली बार 1980 में एक खदान कर्मचारी ने 13वां पैग मारते हुए गलती से उस असली अंगूठे को निगल लिया था. इसके बाद बार प्रशासन ने कड़ा नियम बनाया कि जो भी अंगूठा निगलेगा, उस पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा. लेकिन 2013 में एक सनकी शख्स बार में आया, कॉकटेल मंगवाई, पूरा अंगूठा गटक गया और चुपचाप लगभग 40 हजार रुपए का जुर्माना भरकर बाहर निकल गया! इस घटना के बाद बार ने जुर्माना बढ़ाकर लगभग 2 लाख रुपये से अधिक कर दिया.
अब इस ड्रिंक को पीने के नियम बहुत सख्त और स्पष्ट हैं. यदि आप सॉरटो कॉकटेल क्लब का आधिकारिक सदस्य बनना चाहते हैं, तो शर्त यह है कि जब आप व्हिस्की का पैग पिएं, तो वह काला, सूखा इंसानी अंगूठा आपके होंठों को छूना बेहद जरूरी है. बार में एक मशहूर कहावत भी कही जाती है कि आप इसे जल्दी पिएं या धीरे-धीरे, लेकिन आपके होंठ उस अंगूठे को छूने ही चाहिए. आज दुनिया भर से हजारों पर्यटक केवल इस खौफनाक और मजेदार अनुभव को हासिल करने और इसका आधिकारिक सर्टिफिकेट पाने के लिए कनाडा के इस छोटे से शहर में खिंचे चले आते हैं. यकीन मानिए, ऐसा अनोखा बार दुनिया में शायद ही कोई दूसरा होगा.
पनीर प्रोटीन और कैल्शियम का एक बेहतरीन स्रोत माना जाता है, लेकिन कई लोगों के साथ यह समस्या होती है कि इसे खाते ही उन्हें भारीपन, गैस और ब्लोटिंग की परेशानी होने लगती है। बहुत से लोग पेट फूलने की इस असहजता के डर से पनीर खाना ही छोड़ देते हैं। गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट और डाइटीशियन के अनुसार हर किसी का पाचन तंत्र लैक्टोज और डेयरी फैट को एक जैसे नहीं पचा पाता। यदि पनीर खाने के बाद आपका पेट भी जरूरत से ज्यादा फूलने लगता है, तो इसके पीछे अपच, लैक्टोज इनटोलरेंस या फिर इसे खाने का गलत तरीका जिम्मेदार हो सकता है। कंसल्टेंट डायटीशियन और डायबिटीज एजुकेटर,कनिका मल्होत्रा के मुताबिक पनीर को प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत माना जाता है, खासकर शाकाहारी लोगों के लिए। न्यूट्रिशन एक्सपर्ट का कहना है कि समस्या पनीर में नहीं, बल्कि इस बात में है कि आप उसे किसके साथ और किस समय खाते हैं।
सर्टिफाइड न्यूट्रिशनिस्ट आयना सिंघल के अनुसार, अगर पनीर को जरूरत से ज्यादा कार्बोहाइड्रेट, मीठी सॉस या देर रात भारी भोजन के साथ खाया जाए तो इससे पाचन संबंधी समस्याएं जैसे पेट फूलना, भारीपन और कुछ लोगों में स्किन से जुड़ी परेशानियां भी हो सकती हैं। अब सवाल ये उठता है कि क्या पनीर के साथ कुछ फूड्स को कॉम्बिनेशन करके खाने से क्या ब्लोटिंग और गैस की परेशानी होती है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि ब्लोटिंग और गैस से बचाव के लिए पनीर का सेवन कैसे करें।
क्या पनीर के साथ कुछ फूड कॉम्बिनेशन से बचना चाहिए?
आयना सिंघल का कहना है कि पनीर के साथ कुछ भारी फूड कॉम्बिनेशन पाचन को धीमा कर सकते हैं इसलिए पनीर के साथ कुछ फूड्स को कॉम्बिनेशन करके खाने से परहेज करना चाहिए। एक्सपर्ट ने बताया पनीर के साथ एक ही समय में रोटी और चावल दोनों खाएंगे तो आपको ब्लोटिंग की परेशानी होगी। पनीर के साथ राजमा, छोले या दाल का अधिक सेवन ब्लोटिंग का कारण बनता है। पनीर के साथ मीठी सॉस या डेजर्ट का सेवन आपके पाचन को बिगाड़ सकता है। पनीक और डेयरी प्रोडक्ट्स लेने से भी पेट में गैस और ब्लोटिंग की समस्या होती है। ऐसा कॉम्बिनेशन कुछ लोगों में पेट फूलने और भारीपन की वजह बन सकता हैं।
क्या सच में पनीर और कुछ फूड कॉम्बिनेशन नुकसान पहुंचाते हैं?
कंसल्टेंट डाइटिशियन और डायबिटीज एजुकेटर कनिका मल्होत्रा बताती हैं कि फूड कॉम्बिनेशन थ्योरी, जिसमें कहा जाता है कि प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट या दूध और फलों को साथ नहीं खाना चाहिए, इसके स्पोर्ट में मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। एक्सपर्ट के मुताबिक हमारा पाचन तंत्र एक साथ प्रोटीन, वसा और कार्बोहाइड्रेट को पचाने वाले एंजाइम बनाता है। इसलिए ये कहना कि दो फूड्स को साथ खाना पाचन के लिए खतरा है, ये ठीक नहीं है क्योंकि इसके कोई वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद नहीं है।
पनीर खाने के बाद ब्लोटिंग होने के लिए है मेडिकल कंडीशन जिम्मेदार
फिर कुछ लोगों को पनीर खाने के बाद ब्लोटिंग होती है उसके लिए पनीर नहीं बल्कि उनकी मेडिकल कंडीशन जिम्मेदार हो सकती है। कनिका मल्होत्रा के अनुसार पनीर में कैसिन नामक प्रोटीन होता है, जो धीरे-धीरे पचता है। अगर इसे राजमा, छोले जैसे हाई FODMAP खाद्य पदार्थों या बहुत ज्यादा रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट के साथ खाया जाए, तो जिन लोगों को इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS), SIBO या पहले से पाचन संबंधी समस्या है उनमें गैस और ब्लोटिंग बढ़ सकती है। इसके अलावा कई भारतीयों में लैक्टोज असहिष्णुता (Lactose Intolerance) भी होती है, जिसकी वजह से पनीर खाने के बाद होने वाली परेशानी को लोग अक्सर गलत फूड कॉम्बिनेशन समझ लेते हैं।
क्या पनीर खाने के बाद वजन बढ़ता है?
डॉक्टर कनिका मल्होत्रा के अनुसार पनीर खाने से वजन बढ़ता है ये गलत है। वजन बढ़ने का मुख्य कारण पनीर के साथ खाए गए खाद्य पदार्थ नहीं, बल्कि कुल कैलोरी और पोर्शन साइज होता है। अगर पनीर को मक्खन, क्रीम और घी से बनी भारी ग्रेवी में या ज्यादा मात्रा में खाया जाए, तो इससे कैलोरी बढ़ जाती है और वजन बढ़ने का खतरा भी बढ़ सकता है।
पनीर पकाने का तरीका बनता है गैस और ब्लोटिंग की वजह
कनिका मल्होत्रा के मुताबिक पनीर को डीप फ्राई करने या क्रीम वाली ग्रेवी में पकाने से यह देर से पचता है और एसिडिटी, गैस और ब्लोटिंग का खतरा बढ़ सकता है। अगर आप पनीर को खाना चाहते हैं तो आप पनीर का सेवन ग्रिल करके, स्टीम करके, हल्का सा भूनकर (Light Sauté) करें। इस तरह पनीर का सेवन करने से पनीर आसानी से पच जाता है, गैस और ब्लोटिंग की समस्या कंट्रोल रहती है।
क्या रात में पनीर खाना सही है?
एक्सपर्ट का कहना है कि हर व्यक्ति के लिए रात में पनीर खाना नुकसानदायक नहीं होता। अगर कोई व्यक्ति मेटाबॉलिक रूप से स्वस्थ है और सोने से 2–3 घंटे पहले हल्का पनीर खाता है, तो आमतौर पर इससे कोई समस्या नहीं होती। हालांकि, जिन लोगों को एसिडिटी, इंसुलिन रेजिस्टेंस या देर रात भारी भोजन करने की आदत है उन्हें सावधानी बरतनी चाहिए।
पनीर खाने का सबसे हेल्दी तरीका
ताजा, कम फैट वाला या घर के बने पनीर का सेवन करें।
रोजाना लगभग 150–200 ग्राम पनीर पर्याप्त माना जाता है।
पनीर के साथ फाइबर से भरपूर सब्जियां शामिल करें।
एक समय में बहुत ज्यादा रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट लेने से बचें।
पनीर के साथ मीठे डेजर्ट खाने से बचें।
रात में पनीर के साथ जरूरत से ज्यादा क्रीम या घी का सेवन न करें।
हमेशा भरोसेमंद ब्रांड या अच्छी गुणवत्ता वाला पनीर खरीदें, क्योंकि मिलावटी पनीर पाचन संबंधी समस्याओं की बड़ी वजह हो सकता है।
डिस्क्लेमर : इस लेख में दी गई जानकारी और डॉक्टरों के परामर्श सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से लिखे गए हैं। यदि आपको गंभीर लैक्टोज इनटोलरेंस, आईबीएस (IBS) या पाचन संबंधी अन्य पुरानी बीमारियां हैं, तो अपनी डाइट में किसी भी बड़े बदलाव से पहले एक योग्य डाइटीशियन या चिकित्सक से व्यक्तिगत सलाह जरूर लें।
Shardiya Navratri 2026 Start Date: सालभर में 4 नवरात्रि आती हैं, जिसमें दो गुप्त नवरात्रि, एक चैत्र नवरात्रि और एक शारदीय नवरात्रि. शारदीय नवरात्रि का प्रारंभ आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होता है. शारदीय नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना के साथ व्रत का प्रारंभ होता है. प्रतिपदा से लेकर नवमी के 8 या 9 दिन मां दुर्गा के 9 स्वरूपों की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करते हैं. दसवें दिन विजयादशमी का उत्सव मनाया जाता है. वहीं शाम को दशहरा का रावण जलाते हैं.
आश्विन माह का कृष्ण पक्ष पितरों की पूजा, तर्पण, श्राद्ध के लिए समर्पित होता है. इसे पितृ पक्ष या श्राद्ध पक्ष कहते हैं. उसके बाद का शुक्ल पक्ष दुर्गा पूजा का होता है. शारदीय नवरात्रि में कुछ लोग पूरे 9 दिनों का व्रत रखते हैं, वहीं कुछ प्रतिपदा और अष्टमी का व्रत रखते हैं. दुर्गा अष्टमी और महानवमी के दिन कन्या पूजा करते हैं. आइए जानते हैं कि शारदीय नवरात्रि कब से है? कलश स्थापना का मुहूर्त क्या है?
शारदीय नवरात्रि शुभारंभ 2026 तारीख
वैदिक पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर दिन रविवार को रात 9 बजकर 19 मिनट पर शुरू हो रही है. प्रतिपदा तिथि का समापन 11 अक्टूबर दिन सोमवार को रात 9 बजकर 30 मिनट पर होगा. उदयातिथि की मान्यता के आधार पर शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ 11 अक्टूबर सोमवार से होगा.
शारदीय नवरात्रि 2026 कलश स्थापना मुहूर्त
शारदीय नवरात्रि के पहले दिन यानि प्रतिपदा को कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह में 6 बजकर 19 मिनट से सुबह 10 बजकर 12 मिनट तक है. सुबह में घटस्थापना के लिए आपको 3 घंटे 52 मिनट का शुभ समय प्राप्त होगा.
जो लोग किसी वजह से सुबह में कलश स्थापना न कर पाएं, वे अभिजीत मुहूर्त में दिन में 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 31 मिनट के बीच कर सकते हैं.
शारदीय नवरात्रि के पहले दिन बनेगा द्विपुष्कर योग
नवरात्रि की प्रतिपदा को द्विपुष्कर योग बन रहा है, जो रात में 9 बजकर 30 मिनट से रात 10 बजकर 32 मिनट तक रहेगा. इस योग में आप जो शुभ कार्य करते हैं, उसका दोगुना फल प्राप्त होता है.
नवरात्रि के पहले दिन वैधृति योग प्रात:काल से लेकर रात 9 बजकर 5 मिनट तक रहेगा. उसके बाद से विष्कम्भ योग बनेगा. वहीं चित्रा नक्षत्र प्रात:काल से लेकर रात 10 बजकर 32 मिनट तक है, उसके बाद से स्वाति नक्षत्र है. इस तरह से वैधृति योग और चित्रा नक्षत्र में शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ होगा.
शारदीय नवरात्रि का समापन 2026 तारीख
इस बार शारदीय नवरात्रि का समापन 20 अक्टूबर दिन मंगलवार को होगा. उस दिन नवरात्रि का हवन है और विजयादशमी मनाई जाएगी. इस दिन शाम को दशहरा के रावण का दहन होगा.
उत्तर प्रदेश के नोएडा में पुलिस ने एक चोर गिरोह का पर्दाफाश किया है. पुलिस ने कपल समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. ये कपल पहले कैफे चलाते थे, लेकिन कारोबार में नुकसान हुआ तो क्राइम का रास्ता अपना लिया. ये गिरोह पहले चोरी करते थे, उसके बाद बार-रेस्तरां में पार्टी करते थे.
उत्तर प्रदेश के नोएडा में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. एक प्रेमी जोड़ा पहले कैफे चलाता था. लेकिन जब कारोबार में नुकसान हुआ तो इस कपल ने अपराध का रास्ता चुन लिया. ये कपल चोरी की वारदातों को अंजाम देने लगा. अब प्रेमी जोड़े समेत 3 लोग पुलिस की गिरफ्त में हैं.
प्रेमी युगल समेत 3 गिरफ्तार- कैफे के कारोबार में नुकसान होने के बाद चोरी की वारदातों को अंजाम देने वाले एक प्रेमी जोड़े समेत तीन आरोपियों को नोएडा पुलिस ने गिरफ्तार किया है. थाना सेक्टर-113 पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चोरी की ज्वेलरी, 3.5 लाख रुपये नकद, पांच लैपटॉप, दो टैबलेट, छह मोबाइल फोन और वारदात में इस्तेमाल की जाने वाली एक अर्टिगा कार बरामद की है. कार पर कथित तौर पर फर्जी नंबर प्लेट लगी हुई थी.
एडीसीपी मनीषा सिंह ने बताया कि आरोपियों की पहचान कैलाश उर्फ दिवाकर, इरफान उर्फ इमरान और सोनाली के रूप में हुई है. पुलिस ने तीनों आरोपियों को सेक्टर-123 स्थित श्मशान घाट के पास से गिरफ्तार किया.
बंद पड़े घरों को बनाते थे निशाना- पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि आरोपी अर्टिगा कार में सवार होकर शहर के हाईराइज सोसाइटी और अन्य इलाकों में मकानों की रेकी करते थे. इसके बाद बंद पड़े घरों को निशाना बनाकर ज्वेलरी, नकदी, लैपटॉप और अन्य कीमती सामान चोरी कर लेते थे. फिर चोरी किए गए सामान और नकदी को तीनों आरोपी आपस में बांट लेते थे.
लिव-इन रिलेशन में रहते थे दो चोर- पुलिस जांच में सामने आया कि दिवाकर और सोनाली प्रेमी-प्रेमिका हैं और लिव-इन रिलेशनशिप में रहते हैं. पुलिस के अनुसार, सोनाली गैंग को लीड करने और रेकी के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थी, जबकि दिवाकर और उनका साथी इरफान चोरी की वारदातों को अंजाम देने में शामिल थे.
कैफे कारोबार में नुकसान ने बनाया चोर- पुलिस के अनुसार, प्रेमी जोड़े ने पहले गाजियाबाद और बाद में नोएडा में कैफे का कारोबार किया था. कैफे के बिजनेस में नुकसान होने के बाद दोनों आर्थिक संकट में आ गए और इसके बाद चोरी की घटनाओं को अंजाम देने लगे. जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी दिन के समय चोरी की वारदातों को अंजाम देते थे और रात में रेस्तरां और बार में पार्टी करते थे.
लैपटॉप, टैबलेट, फोन, कैश बरामद- पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चोरी की ज्वेलरी के अलावा पांच लैपटॉप, दो टैबलेट, छह मोबाइल फोन और 3.5 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं. इसके अलावा चोरी की घटनाओं में इस्तेमाल की जाने वाली अर्टिगा कार को भी कब्जे में लिया गया है. फिलहाल अब थाना सेक्टर-113 पुलिस आरोपियों के आपराधिक इतिहास और उनसे जुड़े अन्य चोरी के मामलों की जांच कर रही है.