Woman Comes Alive: मृत व्यक्ति के दोबारा से जिंदा होने की कहानियां तो आपने खूब सुनी होगी, लेकिन ऐसा ही एक वाकया सच में सामने आया है. अमेरिका में अंतिम संस्कार से ठीक पहले महिला जिंदा हो गई, जिसे डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था. माना जाता है कि डॉक्टरों की तरफ से मृत घोषित करने के बाद उसका जिंदा होना नामुमकिन है, लेकिन अमेरिका में ठीक इसके उल्टा हुआ है.
किसी अपने की मौत हो जाने के बाद लोग अक्सर चाहते हैं कि यह एक बार जिंदा हो जाता तो कुछ जरूरी बातें जो छूट गई थी उसे कह देते, लेकिन ऐसा होता नहीं है. अमेरिका के एक अंतिम संस्कार गृह में ऐसा ही हुआ और महिला फिर से जिंदा हो गई. अंतिम संस्कार के लिए लाई गई महिला की सांसें दोबारा से चलने लगी. घटनास्थल पर मौजूद लोग यह नजारा देखकर डर गए, लेकिन वे घबराए नहीं और महिला को अस्पताल दोबारा से पहुंचाए.
अंतिम संस्कार गृह में महिला की चल रही थी सांसेंडेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, कॉन्सटैंस ग्लैंज (Constance Glanz) नाम की एक 74 साल की महिला को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया था. महिला की बॉडी बैग अंतिम संस्कार स्थल पर पहुंचने के बाद उसे Love Funeral Home में रखा गया. इस बीच वहां पर मौजूद कर्मचारियों ने देखा कि महिला की सांसे चल रही हैं, जिसके बाद वो खौफ में आ गए और परिजनों को इसके बारे में जानकारी दी गई.
महिला कैसे हुई दोबारा जिंदा हो रही जांच?घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने घबराने के बजाय तुरंत फैसला लिया और महिला को दोबारा से अस्पताल ले गए. महिला को अस्पताल में मौजूद कर्मचारियों ने सीपाआर दिया और इमरजेंसी सेवा को कॉल किया. अस्पताल की डॉक्टर चीफ डिप्टी बेन हॉचिन ने बताया कि उन्होंने अपने 31 साल के करियर इस तरह का पहला वाकया देखा है. हालांकि, महिला को अस्पताल पहुंचने के कुछ देर बाद फिर से मृत घोषित कर दिया गया. महिला की दोबारा सांसे कैसे चलने लगी इस मसले की अब चिकित्सक जांच कर रहे हैं.
Lucky Children For Parents: हिंदू धर्म और भारतीय परंपरा में संतान को ईश्वर का आशीर्वाद माना गया है. मान्यता है कि बच्चे के जन्म के साथ परिवार के जीवन में नई ऊर्जा, खुशियां और सकारात्मक बदलाव आते हैं. वहीं अंक ज्योतिष में जन्म तारीख के अंकों को विशेष महत्व दिया गया है. न्यूमेरोलॉजी के अनुसार, कुछ तारीखों पर जन्म लेने वाले बच्चों के नंबर माता-पिता के लिए शुभ और उन्नति देने वाले माने जाते हैं. माना जाता है है कि इन खास तारीख में जन्मे बच्चे लाखों में एक होते हैं और अपने कार्यों से सभी को प्रभावित भी करते हैं. इन बच्चों में बचपन से खास व्यवहार देखने को मिल जाता है, जिससे इनके भविष्य के बारे में जानकारी मिलती है. आइए जानते हैं किन तारीख में जन्म लेने वाले बच्चे माता-पिता के लिए सौभाग्य लाते हैं…
किसी भी महीने की 1, 10, 19 और 28 तारीख को जन्मे लोगों का मूलांक 1 होता है और इन अंक के स्वामी ग्रहों के राजा सूर्यदेव हैं. सूर्य ग्रह की वजह से इस अंक को आत्मविश्वास, नेतृत्व और प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि 1, 10, 19 या 28 तारीख को जन्म लेने वाले बच्चे परिवार में महत्वाकांक्षा और आगे बढ़ने की ऊर्जा ला सकते हैं. ऐसे बच्चे माता-पिता को अपने करियर, आर्थिक स्थिति और सामाजिक सम्मान को बेहतर बनाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं. इनके आने के बाद परिवार में नई योजनाएं बन सकती हैं और रुके हुए कामों को पूरा करने की प्रेरणा मिल सकती है.
किसी भी महीने की 3, 12, 21 और 30 तारीख को जन्मे लोगों का मूलांक 3 होता है और इस अंक के स्वामी देवताओं के गुरु बृहस्पति देव हैं. अंक ज्योतिष में गुरु ग्रह को ज्ञान, शिक्षा, संस्कार और मार्गदर्शन के कारक माने जाते हैं. इसलिए 3, 12, 21 और 30 तारीख में जन्मे बच्चों को ज्ञान और सकारात्मक सोच से जुड़ा माना जाता है. मान्यता है कि ऐसे बच्चों के कारण परिवार में शिक्षा, संस्कार और धार्मिक गतिविधियों के प्रति रुचि बढ़ सकती है. माता-पिता को गुरुजनों, शिक्षकों या समाज के सम्मानित लोगों का सहयोग मिलने के योग बन सकते हैं.
किसी भी महीने की 6, 15 और 24 तारीख को जन्मे लोगों का मूलांक 6 होता है और इस अंक का संबंध शुक्र ग्रह से माना जाता है. अंक ज्योतिष में शुक्र ग्रह को प्रेम, सौंदर्य, सुख-सुविधा और पारिवारिक खुशियों का कारक माना जाता है. इसलिए 6, 15 और 24 तारीख को जन्मे बच्चों को परिवार में प्रेम और आपसी सामंजस्य बढ़ाने वाला माना जाता है. इनकी मौजूदगी से घर का माहौल अधिक खुशनुमा और भावनात्मक रूप से मजबूत हो सकता है. पारंपरिक मान्यता के अनुसार, ऐसे बच्चों के कारण माता-पिता के जीवन में सुख-सुविधाओं और पारिवारिक सहयोग की वृद्धि हो सकती है.
किसी भी महीने की 8, 17 और 26 तारीख को जन्मे लोगों का मूलांक 8 होता है और इस अंक का संबंध शनिदेव से माना जाता है. अंक ज्योतिष में शनि कर्म, अनुशासन, धैर्य और न्याय के प्रतीक माने जाते हैं. 8, 17 और 26 तारीख को जन्मे बच्चों के बारे में अंक ज्योतिष में माना जाता है कि इनकी सफलता धीरे-धीरे लेकिन मजबूत आधार पर आती है. ऐसे बच्चों के आने के बाद माता-पिता अपने भविष्य, धन और जिम्मेदारियों को लेकर अधिक अनुशासित हो सकते हैं. लंबे समय से अटके लक्ष्य पूरे करने की दिशा में परिवार को नई प्रेरणा मिल सकती है. इनका भाग्य अचानक मिलने वाले लाभ से ज्यादा मेहनत और धैर्य से जुड़ा माना जाता है.
किसी भी महीने की 9, 18 और 27 तारीख को जन्मे लोगों का मूलांक 9 होता है और इस अंक के स्वामी ग्रहों के सेनापति मंगल देव हैं. मंगल देव साहस, ऊर्जा, पराक्रम और आत्मविश्वास के प्रतीक माने जाते हैं इसलिए 9, 18 और 27 तारीख को जन्म लेने वाले बच्चों को साहसी और दृढ़ इच्छाशक्ति वाला माना जाता है. मान्यता है कि ऐसे बच्चे कठिन परिस्थितियों में परिवार का मनोबल बढ़ा सकते हैं. इनके कारण माता-पिता में संघर्ष करने की शक्ति, आत्मविश्वास और आगे बढ़ने की भावना मजबूत हो सकती है.
सोना शब्द सुनते ही दिमाग में सबसे पहले अंगूठी, हार, सिक्के या लॉकर में रखी छोटी-सी बिस्किट आती है, है ना? पर कभी सोचा है कि अगर सैकड़ों किलो सोने को इकट्ठा करके एक ही बड़ी ईंट बना दी जाए तो वो कैसी लगेगी? यकीन मानना थोड़ा मुश्किल है, पर ऐसा सच में हुआ है और वो भी ऑस्ट्रेलिया में. दरअसल ऑस्ट्रेलिया में सोने की एक ऐसी ईंट बनाई गई है जिसका वजन सुनकर ही होश उड़ जाए – पूरे 521.2 किलोग्राम, मतलब लगभग 1,149 पाउंड. ये कोई नॉर्मल सोने की बार नहीं है, ये दुनिया की सबसे बड़ी सोने की ईंट है और इसने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करा लिया है.
आप सोच भी नहीं सकते, इसे एक आदमी तो क्या, चार लोग मिलकर भी हिला नहीं सकते. उठाना तो बहुत दूर की बात है. इसका एक वीडियो खुद Guinness World Records ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल @guinnessworldrecords पर शेयर किया है. वीडियो आते ही इंटरनेट पर वायरल हो गया. लोग बार-बार उसी वीडियो को देख रहे हैं क्योंकि ऐसा नजारा रोज-रोज थोड़ी देखने को मिलता है. इस विशाल सोने की ईंट को बनाया है ऑस्ट्रेलिया के फेमस द पर्थ मिंट ने. पर्थ मिंट सोना-चांदी के सिक्के और बार बनाने के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है.
कितनी है सोने की ईंट का वजन
इसी मिंट ने ये कारनामा करके दिखाया और सीधा वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया. इतना सारा सोना एक ही जगह पर लाकर उसे एक परफेक्ट ईंट का शेप देना, अपने आप में बहुत बड़ी बात है. अब 521 किलो कितना होता है, इसका अंदाजा ऐसे लगाओ – गिनीज वालों के मुताबिक ये वजन लगभग 8 हट्टे-कट्टे आदमियों के बराबर है. जहाँ एक आम सोने की बिस्किट आप जेब में रख लेते हो, वहीं इसके सामने तो फोर्कलिफ्ट और बड़ी-बड़ी मशीनें भी छोटी पड़ जाएं. इसे छूने-उठाने के लिए पूरी सेफ्टी और स्पेशल मशीनों की जरूरत पड़ती है.
सबसे दिलचस्प बात है कि इतना सोना आया कहां से? बताया जा रहा है कि इसे बनाने के लिए किसी एक कंपनी ने नहीं, बल्कि ऑस्ट्रेलिया की 9 बड़ी गोल्ड माइनिंग कंपनियों ने मिलकर सोना दिया था. इसमें से 7 कंपनियां तो सिर्फ वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया की थीं. मतलब ये सिर्फ एक ईंट नहीं, बल्कि कई कंपनियों के साथ आने की कहानी है.
सबने थोड़ा-थोड़ा सोना डोनेट किया और तब जाकर ये रिकॉर्ड बन पाया और इसे बनाना भी कोई बच्चों का खेल नहीं था. 500 किलो से ज्यादा सोने को एक साथ पिघलाना, फिर उसे एक ही सांचे में ढालना, तापमान को कंट्रोल में रखना… हर स्टेप पर जरा सी चूक और लाखों-करोड़ों का नुकसान. इसीलिए पूरी टीम ने इसे बहुत ही संभल कर और एकदम कंट्रोल्ड माहौल में तैयार किया है.
अब आप सोचोगे कि इतनी कीमती चीज को तो किसी तिजोरी में बंद करके रखा होगा. पर यहाँ ट्विस्ट है. पर्थ मिंट ने इसे छुपाया नहीं है, बल्कि लोगों को दिखाने के लिए रखा है. अगर आप कभी पर्थ मिंट जाओ तो इस 521 किलो की चमचमाती ईंट को अपनी आंखों से देख सकते हो.
सोचो, एक ही जगह पर आधे टन से ज्यादा शुद्ध सोना ईंट के रूप में पड़ा हो, उसे देखना कितना क्रेजी एक्सपीरियंस होगा. इसीलिए ये ईंट सिर्फ अपनी कीमत की वजह से नहीं, बल्कि अपने साइज और रिकॉर्ड की वजह से पूरी दुनिया में सुर्खियों में है.
अक्सर कहा जाता है कि दिल टूटने का दर्द सबसे भयानक होता है, लेकिन कई बार वही ब्रेकअप इंसान को उसकी जिंदगी के सबसे बड़े और सच्चे प्यार तक पहुंचा देता है. अमेरिका के जॉर्जिया राज्य के लाफायेट शहर से एक ऐसी ही अनोखी और हैरान कर देने वाली प्रेम कहानी सामने आई है. यहां 29 साल की डेस्टिनी वॉचटर नाम की महिला को जब उसके ब्वॉयफ्रेंड ने चार साल के लंबे रिश्ते के बाद छोड़ दिया, तो वह पूरी तरह टूट चुकी थी. लेकिन किसे पता था कि इस दर्दनाक ब्रेकअप के बाद उसे अपने पूर्व ब्वॉयफ्रेंड की ही एक्स-गर्लफ्रेंड से सच्चा प्यार हो जाएगा. घटना की शुरुआत तब हुई जब निक नाम के शख्स ने डेस्टिनी और उसके आठ साल के मासूम बेटे को अकेला छोड़कर चार साल पुराना रिश्ता तोड़ दिया. इस धोखे से बेबस डेस्टिनी और उसका बच्चा गहरे सदमे में चले गए. डेस्टिनी को लगा कि उसकी हंसती-खेलती दुनिया उजड़ गई है और एक सिंगल मदर के रूप में दोबारा जिंदगी शुरू करना उसके लिए बहुत खौफनाक अनुभव था.
दोनों की इस अनोखी लव स्टोरी को देखकर उनके दोस्त और रिश्तेदार हैरान रह गए. हालांकि, इस रिश्ते के कारण डेस्टिनी के परिवार में कुछ दरारें भी आईं. उसके पिता और परिवार के कुछ सदस्यों ने इस समलैंगिक रिश्ते का विरोध किया, लेकिन लिब्बी का परिवार इस सगाई से बेहद खुश है और दोनों का पूरा सपोर्ट कर रहा है. पेशे से डांस टीचर और मेडिकल असिस्टेंट डेस्टिनी का मानना है कि निक से मिला धोखा असल में उसे लिब्बी तक पहुंचाने का एक जरिया था. दोनों अब 1 मई 2027 को शादी के बंधन में बंधने की तैयारी कर रही हैं. हालांकि, ब्रेकअप के बाद से निक के साथ उनका कोई संपर्क नहीं है, लेकिन डेस्टिनी का कहना है कि जब निक को पता चलेगा कि उसकी दोनों एक्स-गर्लफ्रेंड्स आपस में शादी करने जा रही हैं, तो उसकी आंखें फटी की फटी रह जाएंगी. सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद यह अनोखी लव स्टोरी तेजी से वायरल हो रही है और लोग इसे नियति का अनूठा खेल बता रहे हैं.
मौसमी बीमारियों का इलाज अक्सर डॉक्टर दवा की गोलियां देकर करते हैं, लेकिन अगर मरीज को डायरिया,इन्फेक्शन, पेट दर्द या बॉडी के किसी दूसरे हिस्से में गंभीर दर्द होता है तो मरीज को जल्दी आराम देने के लिए डॉक्टर इंजेक्शन लगाते हैं ताकि मरीज को दर्द और तकलीफ से जल्द आराम मिल सके। डॉक्टर मरीज का इंजेक्शन से इलाज और भी कई कारणों से करते हैं जैसे जब मरीज दवा मुंह से लेने की स्थिति में ना हो या मरीज पर दवा को जल्दी प्रभावी बनाना हो तो डॉक्टर इंजेक्शन से दवा देते हैं। इंजेक्शन की सूई चुभते ही दवा कुछ ही सेकंड्स में अपना काम शुरू कर देती है।
मेडिकल एक्सपर्ट्स और फार्माकोलॉजिस्ट के अनुसार, इंजेक्शन के जरिए दी जाने वाली दवा सीधे हमारे ब्लडस्ट्रीम में प्रवेश करती है, जिससे यह बिना पाचन तंत्र में जाए तेजी से काम करती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपके हाथ या कमर पर लगा इंजेक्शन सीधे उस अंग या बीमारी पर कैसे असर करता है जहां दर्द हो रहा है? कैसे इंजेक्शन लगते ही दवा पूरे शरीर में फैल जाती है। आइए मेडिकल रिसर्च से जानते हैं कि इंजेक्शन शरीर में किस तरह काम करता है।
इंजेक्शन की दवा को कैसे पता लगता है कि दर्द कहा है? रिसर्च से समझें
National Center for Biotechnology Information और ब्रिटिश फार्माकोलॉजिकल सोसाइटी के शोध के अनुसार, जब हम कोई गोली खाते हैं, तो वह पेट और लिवर (Liver) से होकर गुजरती है, जिससे दवा का एक बड़ा हिस्सा नष्ट हो जाता है, इसे First Pass Effect कहते हैं। इसके विपरीत मांसपेशियों (Intramuscular) में रक्त वाहिकाओं (Capillaries) का एक घना जाल होता है। फिक्स के विसरण नियम के तहत, इंजेक्शन की दवा तेजी से सीधे रक्त प्रवाह की निम्न सांद्रता की ओर सेकंड में ट्रांसफर हो जाती है। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की एक रिपोर्ट के अनुसार, दवा को यह नहीं पता होता कि दर्द कहां है, वह तो पूरे खून में तैर रही होती है। लेकिन दवा के मॉलिक्यूल्स इस तरह डिजाइन किए जाते हैं कि वे पूरे शरीर में घूमते हुए केवल उसी अंग या सेल्स से चिपकते हैं जहां गड़बड़ी होती है। इसे लॉक एंड की (ताला और चाबी) मॉडल कहते हैं।
Food and Drug Administration की गाइडलाइन के मुताबिक, हर दवा की एक ‘हाफ-लाइफ होती है। जैसे ही खून पूरे शरीर का चक्कर लगाकर लिवर में पहुंचता है, लिवर के एंजाइम दवा को तोड़कर निष्क्रिय कर देते हैं और किडनी उसे फिल्टर करके यूरिन के रास्ते बाहर निकाल देती है, जिससे शरीर में टॉक्सिसिटी नहीं फैलते।
इंट्रा मस्कुलर इंजेक्शन शरीर में किस तरह करता है काम
इंट्रा मस्कुलर इंजेक्शन में दवा को सीधे मांसपेशियों (Muscles) के अंदर दिया जाता है। मांसपेशियों में रक्त की अच्छी आपूर्ति होती है, इसलिए यहां से दवा सुरक्षित और प्रभावी तरीके से शरीर में अवशोषित हो पाती है।
मांसपेशियों के ऊतकों में फैलने लगती है दवा
इंजेक्शन लगने के बाद दवा आसपास के मांसपेशियों के ऊतकों में धीरे-धीरे फैलने लगती है। इसके बाद वहां मौजूद बेहद महीन रक्त वाहिकाएं दवा को अपने अंदर अवशोषित करना शुरू कर देती हैं।
रक्त के जरिए पूरे शरीर तक पहुंचती है दवा
जैसे ही दवा रक्त प्रवाह में पहुंचती है, वह शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचने लगती है। रक्त परिसंचरण (Blood Circulation) दवा को उन अंगों और ऊतकों तक ले जाता है, जहां उसकी जरूरत होती है।
हर दवा का होता है अलग लक्ष्य
हर इंजेक्शन का उद्देश्य अलग होता है। कुछ दवाएं संक्रमण से लड़ने के लिए दी जाती हैं, कुछ दर्द और सूजन कम करने के लिए, जबकि कुछ वैक्सीन के रूप में शरीर की इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने का काम करती हैं।
काम पूरा होने के बाद शरीर से बाहर निकल जाती है
जब दवा अपना काम पूरा कर लेती है, तो शरीर उसे हमेशा के लिए नहीं रखता। लीवर (Liver) दवा को तोड़ने और प्रोसेस करने का काम करता है, जबकि किडनी (Kidneys) उसे पेशाब के जरिए धीरे-धीरे शरीर से बाहर निकाल देती हैं।
यह प्रक्रिया शरीर का संतुलन बनाए रखती है
दवा का अवशोषण, असर और फिर शरीर से बाहर निकलना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। यही कारण है कि शरीर में दवा की मात्रा संतुलित बनी रहती है और जरूरत पूरी होने के बाद अतिरिक्त दवा बाहर निकल जाती है।
ध्यान रखें
हर इंजेक्शन का असर उसकी दवा, मात्रा और इंजेक्शन के प्रकार पर निर्भर करता है। इसलिए किसी भी इंजेक्शन का इस्तेमाल केवल डॉक्टर की सलाह पर ही करना चाहिए।
इस बात को भी समझें
इंजेक्शन का असर गोली के मुकाबले 10 गुना तेज होता है, क्योंकि यह सीधे आपके सर्कुलेटरी सिस्टम में प्रवेश करता है, जो महज 20 से 60 सेकंड में पूरे शरीर का एक चक्कर काट लेता है। लेकिन इसका एक पहलू यह भी है कि यदि गोली से कोई रिएक्शन हो, तो पेट साफ करके उसे रोका जा सकता है, मगर इंजेक्शन की दवा एक बार खून में चली गई, तो उसे वापस नहीं निकाला जा सकता। इसलिए बिना डॉक्टर की सख्त पर्ची और अस्पताल की देखरेख के कभी भी कोई भी इंजेक्शन नहीं लगवाना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। किसी भी दवा या इंजेक्शन का उपयोग हमेशा योग्य डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह पर ही करें।
Main Door Vastu: सनातन परंपरा में वास्तु शास्त्र का विशेष महत्व है। खासतौर पर घर का मुख्य द्वार बेहद अहम माना जाता है। माना जाता है कि यहीं से घर में हर तरह की ऊर्जा प्रवेश करती है। इसलिए लोग मुख्य द्वार को शुभ बनाए रखने के लिए कई उपाय करते हैं, ताकि घर की बरकत और पॉजिटिविटी बनी रहे। इन्हीं में से एक उपाय घोड़े की नाल लगाने का भी है। वास्तु और ज्योतिष में इस उपाय को सुख-समृद्धि और सकारात्मकता बढ़ाने में काफी प्रभावशाली माना गया है।
कारगर टोटका
मुख्य द्वार पर घोड़े की नाल लगाना शुभ होता है। अगर आप चाहते हैं कि आपके घर में सुख-शांति बनी रहे और नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश न कर सके, तो यह पारंपरिक वास्तु टोटका आपके लिए कारगर साबित हो सकता है। मान्यता है कि यह उपाय घर को बुरी नजर से बचाने में भी मदद करता है।
क्या होती है घोड़े की नाल?
घोड़े के पैरों की सुरक्षा के लिए लोहे से बनी यू (U Shape) आकार की एक पट्टी लगाई जाती है। यह घोड़े को चलने और दौड़ने में सहूलियत देती है। पुराने समय में जब यह नाल घिस जाती थी, तो लोग इसे घरों में वास्तु उपाय के रूप में इस्तेमाल करते थे।
वास्तु में क्यों माना जाता है शुभ?
वास्तु अनुसार, घोड़े की नाल का संबंध शनि ग्रह और लोहे तत्व से होता है। मान्यता है कि मुख्य द्वार पर घोड़े की नाल लगाने से घर के भीतर नकारात्मक शक्तियों और बुरी नजर का प्रभाव कम होता है।
किन दिशाओं में लगाना लाभकारी?
वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, अगर घर का मुख्य द्वार उत्तर, उत्तर-पश्चिम या पश्चिम दिशा में है, तो उसके ऊपर बाहर की ओर घोड़े की नाल लगाना शुभ होता है। काले घोड़े की नाल ज्यादा प्रभावशाली मानी जाती है।
घोड़े की नाल लगाने के फायदे
मुख्य द्वार पर घोड़े की नाल लगाने से घर में सकारात्मकता बढ़ने की मान्यता है।
कई लोग इसे नजर दोष से बचाव, आर्थिक परेशानियों से राहत पाने के लिए भी लगाते हैं।
ज्योतिषियों के मुताबिक, जिन लोगों की कुंडली में शनि से जुड़ी समस्याएं होती हैं, उनके लिए भी यह उपाय लाभकारी होता है।
घोड़े की नाल लगाने का सही तरीका
घोड़े की नाल को मुख्य द्वार पर इस तरह लगाएं कि उसका खुला हिस्सा ऊपर की ओर रहे, ताकि शुभ ऊर्जा घर के भीतर बनी रहे। शनिवार का दिन इसके लिए शुभ बताया है। इसे लगाने से पहले गंगाजल से शुद्ध करना भी अच्छा माना जाता है।
इन बातों का रखें ध्यान
घोड़े की नाल लगाते समय कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं। टूटी, मुड़ी हुई या अत्यधिक जंग लगी नाल का इस्तेमाल न करें। केवल सजावट के लिए बनाई गई नकली नाल प्रभावी नहीं मानी जाती। नाल को जमीन पर फेंकने या पैर लगाने से भी बचें। आज बाजार में कई तरह की नाल उपलब्ध हैं, लेकिन इस्तेमाल की हुई नाल अधिक असरदार मानी जाती है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
Charging Bull: न्यूयॉर्क शहर के वित्तीय (financial) जिले में स्थित है चार्जिंग बुल (Charging Bull) केवल एक कांस्य की मूर्ति भर नहीं है, बल्कि यह दुनियाभर में आर्थिक शक्ति, समृद्धि और उम्मीद का प्रतीक बन चुकी है.
New York के वॉल स्ट्रीट के पास स्थापित यह विशालकाय मूर्ति रोजाना सैकड़ों पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है. खास बात यह है कि, इस मूर्ति से जुड़ी एक अजीबोगरीब परंपरा भी समय के साथ विकसित हो गई है, जिसने इसे और ज्यादा चर्चा का विषय बना दिया है.
इसका स्थान और भव्यता इसकी लोकप्रियता बढ़ाती है।
साल 1989 में इटालियन मूर्तिकार आर्टुरो डि मोडिका ने इसे एक गुरिल्ला आर्ट इंस्टॉलेशन के रूप में न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज के सामने स्थापित किया था. शुरुआत में इसे अवैध मानकर हटा दिया गया, लेकिन स्थानीय लोगों ने इस बात का विरोध किया जिसके बाद इसे पास ही एक स्थायी स्थान पर स्थापित कर दिया गया. तब से लेकर आज तक चार्जिंग बुल की यह मूर्ति पूरी दुनिया के लिए एक अलग पहचान बन चुकी है.
Charging Bull शेयर मार्केट और मजबूती का प्रतीक
चार्जिंग बुल को अक्सर वॉल स्ट्रीट और शेयर मार्केट की मजबूती और तेजी से जोड़कर देखा जाता है. दुनियाभर से आने वाले पर्यटक इसे पैसा, ताकत और वित्तीय सफलता से जोड़ते हैं. हालांकि मूर्तिकार की सोच इससे थोड़ी अलग थी.
उनके मुताबिक, यह मूर्ति अमेरिका की मेहनत, हिम्मत और आगे बढ़ने की भावना को दर्शाती है. एक ऐसा संदेश जो हर व्यक्ति को प्रेरित करना का काम करता है कि वह कठिनाइयों को पार कर सफलता हासिल कर सकते हैं.
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Testicles छूने के पीछे लोकप्रिय मान्यता
बीतते समय के साथ इस मूर्ति के साथ एक लोकप्रिय मान्यता जुड़ती चली गई कि, इसे छूने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है. कई पर्यटक इस विश्वास के साथ मूर्ति के testicles को छूते हैं, ताकि उनका पोर्टफोलियो सही हो जाए और आर्थिक संपन्नता बरकरार रहे. यही वजह है कि, बड़ी संख्या में लोग इसे हिस्से को छूकर अपनी तस्वीरें खिंचवाते हैं.
हालांकि इस विश्वास का कोई ठोस ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है, लेकिन इसे शक्ति, ऊर्जा और ऊर्वरता के रूप में देखा जाता है. कई पर्यटक इसे आर्थिक संपन्नता और सफलता से जोड़कर देखते हैं, जबकि कुछ के लिए यह केवल एक अनोखा और यादगार अनुभव होता है.
चार्जिंग बुल की लोकप्रियता का बड़ा कारण?
इस तरह की मान्यताएं कोई नई बात नहीं है, बल्कि दुनिया भर में कई ऐतिहासिक मूर्तियों और स्मारकों के साथ भी ऐसी ही परंपराएं जुड़ी हुई हैं, जहां लोग किसी खास हिस्से को छूकर सौभाग्य और खुशहाली की कामना करते हैं. इस तरह की परंपराएं मानव स्वभाव का हिस्सा है, कि हम खास प्रतीकों को छूते हैं, तो हमारी नकारात्मक ऊर्जा पॉजिटिव एनर्जी में बदल जाती है.
चार्जिंग बुल की लोकप्रियता का एक बड़ा कारण उसका स्थान भी है. वॉल स्ट्रीट के पास होने के कारण यह आर्थिक गतिविधियों के केंद्र में खड़ा है, जो इसे और भी ज्यादा प्रासंगिक बनाते हैं. इसके साथ ही इसकी सभ्यता भव्यता और कलात्मक भी लोगों को अपनी और खींचती है.
गया का ये मंदिर क्यों है अलग? यहां के हर रिवाज से कुछ न कुछ सीखने को मिलता है!
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि Satyareport.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
Surya Parvat Par Til Hona:
हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, किसी भी व्यक्ति की हथेली में अनामिका अंगुली यानि रिंग फिंगर के नीचे के क्षेत्र को सूर्य पर्वत कहा जाता है. सूर्य का संबंध व्यक्ति के कार्यक्षेत्र, पद, प्रतिष्ठा, मान-सम्मान, धन, संपत्ति, राजकाज, सरकार से संबंध आदि को दर्शाता है. आज हम बात करने वाले हैं सूर्य रेखा पर तिल के बारे में. आमतौर पर हथेली पर तिल का होना शुभ नहीं होता है. तिल जहां पर होता है, उसके गुणों को दोषपूर्ण बना देता है, उसके प्रभावों को कम कर देता है. तिल का संबंध राहु से माना जाता है.
तिल जन्म से है या बाद में बना
हाथ में तिल दो प्रकार के होते हैं. एक जन्म के साथ ही हथेली पर तिल होता है. ऐसे तिल को अशुभ नहीं मानते हैं, लेकिन कोई तिल जन्म के बाद बना है तो उसका अशुभ प्रभाव होता है. उससे संभलकर रहने की जरूरत होती है.
सूर्य पर्वत या सूर्य रेखा पर तिल का निशान
यदि आपकी हथेली में सूर्य पर्वत पर या सूर्य की रेखा पर काले तिल का निशान है तो आपको अपने कार्यक्षेत्र में सावधान हो जाना चाहिए. करियर में लापरवाही न करें. इससे आपको हानि हो सकती है.
कार्यक्षेत्र में आप पर कोई झूठा या फिर सही का आरोप लगा सकता है.
इस समय में आपके सम्मान, पद, प्रतिष्ठा को ठेस पहुंच सकती है.
काले तिल के प्रभाव से आपको हड्डियों से जुड़ी कोई समस्या हो सकती है. पीठ और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी परेशानी हो सकती है.
सूर्य रेखा पर तिल का निशान होने से आपको चर्म रोग से सावधान रहना चाहिए.
कुछ लोगों के हाथ में हृदय रेखा पर काले तिल का निशान ठीक सूर्य पर्वत के नीचे हो तो उनको भी अपने पद, प्रतिष्ठा, स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए.
सूर्य पर्वत या सूर्य रेखा का तिल आपके पिता से संबंधों को भी प्रभावित कर सकता है.
सूर्य पर्वत के तिल का उपाय
सूर्य पर्वत या सूर्य रेखा पर काला तिल है तो उससे परेशान न हों. आप कुछ ज्योतिष उपायों को करके उसके दुष्प्रभावों को कम या दूर कर सकते हैं.
आप रविवार का व्रत रखें और सूर्य देव की पूजा करें. इस व्रत में नमक का सेवन न करें. इससे लाभ होगा.
प्रतिदिन सूर्य देव को जल से अर्घ्य दें और नमस्कार करें.
आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं. इससे सूर्य का प्रभाव बढ़ेगा.
सूर्य का संबंध पिता से होता है. ऐसे में आप अपने पिता की सेवा करें. पिता नहीं हैं तो पिता के समान किसी व्यक्ति की सेवा करें.
रविवार या संक्रांति के दिन सूर्य से संबंधित वस्तुओं जैसे गुड़, गेहूं, लाल फल, लाल रंग के कपड़े, तांबा या तांबे के बर्तन आदि का दान करें.
साल 2013 की बात है. लिन सैविनो और उनके पति माइकल के मन में एक अजीब लेकिन दिलचस्प सपना पल रहा था – मिशिगन के डेट्रॉइट शहर में खड़ी एक पुरानी, वीरान बैंक बिल्डिंग को अपना घर बनाने का. ये कोई आसान फैसला नहीं था, क्योंकि बिल्डिंग पूरी तरह बैंकिंग जरूरतों के हिसाब से डिजाइन की गई थी. न बेडरूम की जगह तय थी, न बाथरूम की, न खिड़कियों का कोई ठिकाना. फिर भी दोनों ने हिम्मत नहीं हारी और इसे खरीदने का फैसला कर लिया.
इस डील के लिए उन्हें 66,000 डॉलर चुकाने पड़े, और इतने में ही बगल की एक प्रॉपर्टी भी मिल गई जो पहले बार के तौर पर चलती थी. मजेदार बात यह है कि इस खरीदारी के लिए कपल को अपना पुराना घर तक बेचना पड़ा. पीपुल्स स्टेट बैंक की यह बिल्डिंग करीब दस साल से बंद पड़ी थी, और इससे पहले कुछ समय के लिए इसे एक क्लब के रूप में भी इस्तेमाल किया गया था.
बैंक को बना डाला खूबसूरत घर
बिल्डिंग की हालत उस वक्त काफी खराब थी, लेकिन कपल का इरादा पक्का था. मई 2014 में वे यहां रहने भी आ गए, हालांकि तब न किचन बना था और न ही लॉन्ड्री की कोई व्यवस्था थी. सैविनो ने तो अपना बिस्तर सीधे निर्माण कार्य के बीचोंबीच लगा लिया था और बाकी हिस्सों पर काम चलता रहता. उनके मुताबिक यह रेनोवेशन इतना बड़ा था कि एक पूरा महीना उन्होंने बिना नहाए गुजारा. अगले पांच महीनों तक किचन नहीं था, तो दोस्तों के घर जाकर नहाना-धोना और कपड़े धोना पड़ता था.
सैविनो को इस जगह की बनावट, यहां आने वाली रोशनी और खासतौर पर आधे गोल आकार की खिड़कियां बेहद पसंद आईं. उन्हें यकीन था कि इन खिड़कियों से छनकर आती धूप घर को अलग ही रौनक देगी. चूंकि माइकल पेशे से सीमेंट कॉन्ट्रेक्टर थे, इसलिए ज्यादातर निर्माण कार्य दोनों ने मिलकर खुद ही निपटाया. बाहरी बनावट को लगभग वैसा ही रखा गया, बस छत बदली गई. बिल्डिंग में एक वॉल्ट मेन फ्लोर पर था और दूसरा बेसमेंट में, जिसे बाद में वाइन रखने की जगह बना दिया गया.
केलर विलियम्स लिगेसी की रियल एस्टेट एजेंट एंड्रिना हलीली माल्कोव्स्की इस बिल्डिंग को बेहद अनोखा बताती हैं. आज इस घर में दो बेडरूम और दो बाथरूम हैं, और यह करीब 3000 स्क्वायर फीट में फैला हुआ है, डेट्रॉइट के एक पुराने इलाके में. 1925 में बनी इस बैंक बिल्डिंग की एक चीज आज भी वैसी ही है – इसकी कॉपर से बनी दहलीज, जिसकी कीमत सैविनो के अनुसार करीब 30,000 डॉलर आंकी जाती है. इसके अलावा खिड़कियों के नीचे लगा पुराना मार्बल भी सुरक्षित है.
दिलचस्प बात यह भी है कि जब यहां क्लब चलता था, तब पार्टी में आए लोगों के दस्तखत आज भी दीवारों पर मौजूद हैं. आज इस घर की कीमत करीब 1.3 मिलियन डॉलर (लगभग 13 करोड़ रुपये) है. जहां इस इलाके की बाकी प्रॉपर्टी की औसत कीमत 110 डॉलर प्रति स्क्वायर फीट है, वहीं सैविनो का यह अनोखा घर 433 डॉलर प्रति स्क्वायर फीट तक पहुंच चुका है.
ईंट गारे को उठाने तो कभी बोझा उठा कर मेहनत मजदूरी कर अपने परिवार का पालन पोषण करने वाले गरीब के घर का बिजली बिल लाखों में आने की वजह से उसकी नींद उड़ गई है. और अब वह सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटता हुआ फिर रहा है ताकि बिल में सुधार हो जाए, भगवानदास अहिरवार बिजली का बिल लाखों में आने से इतना दुखी है कि वह अपना दर्द बताते हुए रो पड़े और उन्हें दूसरे लोगों ने संभाल कर ढांढ़स बंधाया, भगवानदास चाहते हैं कि पहले उनका बिल ₹100 आता था उसी हिसाब से बिल लिया जाए क्योंकि 2 साल से मकान में ताला डाला हुआ है वह कभी कभार ही त्योहार के समय अपने घर वापस लौटते हैं. लेकिन इस बार बिजली बिल के चक्कर में वह मजदूरी करने भी नहीं जा पा रहे हैं इधर उतना कम मिलता नहीं हैं कि खर्च चल सके.
भगवान दास अहिरवार बताते हैं कि उनके परिवार में पत्नी और दो बच्चे हैं बच्चों की तबीयत ठीक नहीं रहती ऐसे में उनका इलाज बेहतर ढंग से हो सके इसके लिए वह 2 साल पहले मजदूरी करने के लिए परिवार के साथ दिल्ली चले गए थे. बीच-बीच में त्यौहार पर उनका आना-जाना होता रहता है. हालत इतनी खराब है कि घर में मोबाइल भी नहीं है लेकिन इसके बावजूद उनका बिजली बिल 241450 आ गया है. बिजली बिल देखने के बाद से ही कुछ समझ में नहीं आ रहा है क्या करना है क्या नहीं करना? बिजली ऑफिस भी गया था लेकिन उनका कहना है कि लाइट जलाई है इसलिए बिल तो भरना पड़ेगा. हमारे घर में दो एलईडी बल्ब और एक पंखा है और वह भी कभी-कभी उपयोग हुआ तो फिर 600-700 यूनिट बिल कैसे आता रहा? पहले कोई जानकारी नहीं दी गई, अचानक से 2 लाख 41450 का बिल थमा दिया गया है.
बिजली विभाग वाले कर रहे प्रताड़ित
हम इतने सक्षम नहीं है कि बिजली बिल लाखों रुपए भर सकें. पहले यही बिजली बिल ₹100 महीने आता था. अभी रक्षाबंधन के त्योहार पर हम लोग दिल्ली से वापस लौटे, तो बिजली कर्मचारियों के द्वारा अत्याचार किए जा रहे हैं. वह कभी भी किसी भी समय मनमर्जी से घर में घुस आते हैं चेकिंग करते हैं तलाशी लेते हैं लेकिन कुछ नहीं मिलता है. बार-बार ऐसा कर रहे हैं. हम लोगों को प्रताड़ित कर रहे हैं. कहते हैं जब तक बिजली बिल नहीं भरोगे ऐसा ही होता रहेगा. हमारी एक बच्चे को मिर्गी आई है जिसका इलाज चल रहा है. दूसरा बच्चा भी ठीक नहीं है जो कमाई करते हैं सारा पैसा इलाज में और घर खर्चे में ही चला जाता है, अब इतना बिजली का बिल कहां से भरूंगा.