हथेली में सूर्य पर्वत और सूर्य रेखा पर तिल का क्या मतलब है? जानें ज्योतिष उपाय..

हथेली में सूर्य पर्वत और सूर्य रेखा पर तिल का क्या मतलब है? जानें ज्योतिष उपाय..
हथेली में सूर्य पर्वत और सूर्य रेखा पर तिल का क्या मतलब है? जानें ज्योतिष उपाय..

Surya Parvat Par Til Hona: हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, किसी भी व्यक्ति की हथेली में अनामिका अंगुली यानि रिंग फिंगर के नीचे के क्षेत्र को सूर्य पर्वत कहा जाता है. सूर्य का संबंध व्यक्ति के कार्यक्षेत्र, पद, प्रतिष्ठा, मान-सम्मान, धन, संपत्ति, राजकाज, सरकार से संबंध आदि को दर्शाता है. आज ह​म बात करने वाले हैं सूर्य रेखा पर तिल के बारे में. आमतौर पर हथेली पर तिल का होना शुभ नहीं होता है. तिल जहां पर होता है, उसके गुणों को दोषपूर्ण बना देता है, उसके प्रभावों को कम कर देता है. तिल का संबंध राहु से माना जाता है.

तिल जन्म से है या बाद में बना

हाथ में तिल दो प्रकार के ​होते हैं. एक जन्म के साथ ही हथेली पर तिल ​होता है. ऐसे तिल को अशुभ नहीं मानते हैं, लेकिन कोई तिल जन्म के बाद बना है तो उसका अशुभ प्रभाव होता है. उससे संभलकर रहने की जरूरत होती है.

सूर्य पर्वत या सूर्य रेखा पर तिल का निशान

  • यदि आपकी हथेली में सूर्य पर्वत पर या सूर्य की रेखा पर काले तिल का निशान है तो आपको अपने कार्यक्षेत्र में सावधान हो जाना चाहिए. करियर में लापरवाही न करें. इससे आपको हानि हो सकती है.
  • कार्यक्षेत्र में आप पर कोई झूठा या फिर सही का आरोप लगा सकता है.
  • इस समय में आपके सम्मान, पद, प्रतिष्ठा को ठेस पहुंच सकती है.
  • काले तिल के प्रभाव से आपको हड्डियों से जुड़ी कोई समस्या हो सकती है. पीठ और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी परेशानी हो सकती है.
  • सूर्य रेखा पर तिल का निशान होने से आपको चर्म रोग से सावधान रहना चाहिए.
  • कुछ लोगों के हाथ में हृदय रेखा पर काले तिल का निशान ठीक सूर्य पर्वत के नीचे हो तो उनको भी अपने पद, प्रतिष्ठा, स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहिए.
  • सूर्य पर्वत या सूर्य रेखा का तिल आपके पिता से संबंधों को भी प्रभावित कर सकता है.

सूर्य पर्वत के तिल का उपाय

  1. सूर्य पर्वत या सूर्य रेखा पर काला तिल है तो उससे परेशान न हों. आप कुछ ज्योतिष उपायों को करके उसके दुष्प्रभावों को कम या दूर कर सकते हैं.
  2. आप रविवार का व्रत रखें और सूर्य देव की पूजा करें. इस व्रत में नमक का सेवन न करें. इससे लाभ होगा.
  3. प्रतिदिन सूर्य देव को जल से अर्घ्य दें और नमस्कार करें.
  4. आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ कर सकते हैं. इससे सूर्य का प्रभाव बढ़ेगा.
  5. सूर्य का संबंध पिता से होता है. ऐसे में आप अपने पिता की सेवा करें. पिता नहीं हैं तो पिता के समान किसी व्यक्ति की सेवा करें.
  6. रविवार या संक्रांति के दिन सूर्य से संबंधित वस्तुओं जैसे गुड़, गेहूं, लाल फल, लाल रंग के कपड़े, तांबा या तांबे के बर्तन आदि का दान करें.

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