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  • घर में गलत दिशा में लगा शीशा बन सकता है परेशानी की वजह, जानें 5 जरूरी नियम..

    घर में गलत दिशा में लगा शीशा बन सकता है परेशानी की वजह, जानें 5 जरूरी नियम..

    घर में गलत दिशा में लगा शीशा बन सकता है परेशानी की वजह, जानें 5 जरूरी नियम..

    Vastu Shastra For Mirror: घर की सजावट में शीशे का इस्तेमाल आम बात है। शीशा कमरे को बड़ा और रोशन दिखाने में मदद करता है। लेकिन वास्तु शास्त्र में शीशे की दिशा और उसकी स्थिति को काफी महत्वपूर्ण माना गया है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार, सही जगह पर लगा शीशा सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने में सहायक हो सकता है, जबकि गलत दिशा या गलत स्थान पर लगाया गया शीशा घर के माहौल की सकारात्मकता को खत्म कर सकता है।

    खास तौर पर बेडरूम, मुख्य द्वार और दक्षिण-पश्चिम दिशा में शीशा लगाते समय सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। आइए जानते हैं घर में शीशा लगाने के 5 जरूरी वास्तु नियम, जिन्हें ध्यान में रखना चाहिए।

    1. उत्तर या पूर्व दिशा में लगाएं शीशा

    वास्तु के अनुसार घर में शीशा लगाने के लिए उत्तर और पूर्व दिशा को सामान्यतः शुभ माना जाता है। उत्तर दिशा को धन और समृद्धि से तथा पूर्व दिशा को सूर्य के प्रकाश और सकारात्मकता से जोड़ा जाता है। इसलिए इन दिशाओं की दीवार पर शीशा लगाना बेहतर माना जाता है।

    2. मुख्य दरवाजे के ठीक सामने न लगाएं

    वास्तु मान्यताओं के अनुसार, घर के मुख्य प्रवेश द्वार के ठीक सामने शीशा लगाने से बचना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि दरवाजे से घर में आने वाली सकारात्मक ऊर्जा शीशे से वापस बाहर की ओर परावर्तित हो सकती है। इसलिए मुख्य द्वार के सामने शीशा लगाने के बजाय इसे किसी साइड की दीवार पर लगाना बेहतर माना जाता है।

    3. बेड के सामने शीशा लगाने से बचें

    बेडरूम में शीशे की स्थिति को लेकर वास्तु में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। बेड का प्रतिबिंब शीशे में दिखाई देना वास्तु की दृष्टि से उचित नहीं माना जाता। मान्यता है कि इससे बेचैनी और नींद में परेशानी जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं। यदि कमरे में ड्रेसिंग मिरर है, तो उसे इस तरह रखें कि उसमें बेड दिखाई न दे।

    4. टूटा या चटका हुआ शीशा घर में न रखें

    वास्तु मान्यताओं में टूटे, चटके शीशे को घर में रखना अशुभ माना जाता है। इसलिए अगर शीशा टूट गया है या उसमें दरार आ गई है, तो उसे जल्द बदल देना बेहतर है।

    5. दक्षिण-पश्चिम दिशा में शीशा लगाने से बचें

    वास्तु के अनुसार, शीशे के लिए दक्षिण और खासकर दक्षिण-पश्चिम दिशा को अच्छा नहीं माना जाता। इसके बजाय उत्तर या पूर्व दिशा की दीवार को प्राथमिकता देने की सलाह दी जाती है।

    शीशा लगाते समय इन बातों का भी रखें ध्यान

    शीशा हमेशा साफ और अच्छी स्थिति में रखें। वास्तु मान्यताओं के अनुसार शीशे में जो चीज दिखती है, उसका प्रभाव भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए कोशिश करें कि शीशे में कूड़ा, अव्यवस्था, टूटी-फूटी वस्तुएं या अस्त-व्यस्त जगह शीशे में नहीं दिखाई दें। इसके बजाय साफ-सुथरा और रोशन स्थान प्रतिबिंबित होना बेहतर माना जाता है।मेष राशि का वर्षफल 2026वृष राशि का वर्षफल 2026मिथुन राशि का वर्षफल 2026कर्क राशि का वर्षफल 2026सिंह राशि का वर्षफल 2026कन्या राशि का वर्षफल 2026तुला राशि का वर्षफल 2026वृश्चिक राशि का वर्षफल 2026धनु राशि का वर्षफल 2026मकर राशि का वर्षफल 2026कुंभ राशि का वर्षफल 2026मीन राशि का वर्षफल 2026

  •  ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने में खर्च हो गए 6 लाख, आखिर क्या है माजरा.? वायरल पोस्ट पर छिड़ी बहस

     ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने में खर्च हो गए 6 लाख, आखिर क्या है माजरा.? वायरल पोस्ट पर छिड़ी बहस

     ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने में खर्च हो गए 6 लाख, आखिर क्या है माजरा.? वायरल पोस्ट पर छिड़ी बहस

    भारत में तो दो-चार चक्कर गाड़ी आगे-पीछे करके आसानी से ड्राइविंग लाइसेंस (Driving Licence) मिल जाता है, लेकिन विदेश में यह किसी टेढ़ी खीर से कम नहीं है. नॉर्वे में रहने वाले एक भारतीय शख्स विनोद को वहां लाइसेंस पाने के लिए पूरे दो साल तक पापड़ बेलने पड़े और जेब से करीब 6 लाख रुपए (आज के समय में जिसकी वैल्यू 10 लाख से ज्यादा है) खर्च करने पड़ गए. सोशल मीडिया पर उनका यह किस्सा वायरल हो रहा है, जिस पर लोग तरह-तरह के कमेंट कर रहे हैं.

    बर्फ और पहाड़ों के बीच ड्राइविंग की कड़ी चुनौती

    साल 2011 में नॉर्वे शिफ्ट हुए विनोद को जल्द ही समझ आ गया कि वहां की कड़ाके की ठंड, बर्फबारी और खतरनाक पहाड़ी रास्तों पर जिंदा रहना है तो ड्राइविंग आनी ही चाहिए. उन्होंने गाड़ी चलाना सीख भी लिया, लेकिन नॉर्वे का सिस्टम इतना आसान नहीं है. वहां लाइसेंस के लिए केवल गाड़ी चलाना आना काफी नहीं होता, बल्कि कई अनिवार्य कोर्स, थ्योरी टेस्ट, कड़ा सुरक्षा प्रशिक्षण और बर्फीली सड़कों व सुरंगों में लंबा अभ्यास करना पड़ता है.

    पहली बार फेल, फिर दो महीने की एक्सट्रा मेहनत

    वहां के ड्राइविंग स्कूल एक-एक घंटे की ट्रेनिंग का मोटा पैसा वसूलते हैं, जिससे खर्च काफी बढ़ जाता है. कड़ी ट्रेनिंग लेने के बाद भी जब विनोद फाइनल टेस्ट में बैठे, तो वे पहली बार फेल हो गए. लेकिन हार न मानते हुए उन्होंने दो महीने और पसीना बहाया और तब जाकर दूसरी कोशिश में उन्हें कामयाबी हासिल हुई. इस पूरी प्रक्रिया में उन्हें दो साल लग गए.

    सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

    विनोद की यह आपबीती अब सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रही है. लोग भारत और नॉर्वे के नियमों की तुलना कर रहे हैं. भारत में बिना किसी खास ट्रेनिंग के आसानी से मिलने वाले लाइसेंस और देश में लगातार बढ़ते सड़क हादसों को लेकर इंटरनेट पर तीखी बहस छिड़ गई है. नॉर्वे की इस सख्त व्यवस्था का मुख्य मकसद सिर्फ आपकी ड्राइविंग स्किल परखना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि आप सड़क पर चलने वाले बाकी लोगों की जान के प्रति पूरी तरह जिम्मेदार हैं या नहीं.

  • मृत समझकर दिया तुलसी-गंगाजल, अस्पताल में डॉक्टर बोले..

    मृत समझकर दिया तुलसी-गंगाजल, अस्पताल में डॉक्टर बोले..

    मृत समझकर दिया तुलसी-गंगाजल, अस्पताल में डॉक्टर बोले..

    बलिया. यूपी के बलिया जिले के शिवपुर दियरी नंबरी गांव में चौंकाने वाला मामला सामने आया है. जिस बुजुर्ग व्यक्ति को परिजनों ने मृत मान लिया था, वही अस्पताल ले जाने पर जिंदा निकले. 65 वर्षीय विश्वनाथ पाल बेहोशी के हाथ-पैर बिल्कुल काम नहीं कर रहे थे. शरीर में हरकत ना होने पर परिजनों ने उनको तुलसी-गंगाजल भी दे दिया. परिजनों ने सोचा कि उनकी सांसें थम चुकी हैं. तुलसी-गंगाजल देने की खबर पूरे गांव में फैल गई. ग्रामीण रविंद्र बागड़ ने पूरे मामले की जानकारी दी.

    ग्रामीणों की भीड़ लग गई. इसी बीच कुछ लोगों ने बुजुर्ग विश्वनाथ पाल को एक बार अस्पताल ले जाने की सलाह दी. जैसे ही परिजन विश्वनाथ को अस्पताल लेकर पहुंचे, डॉक्टर ने जो कहा उसे सुनकर परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई. डॉक्टर ने कहा कि ‘बाबा तो अभी जिंदा हैं.’ जिस घर में मातम की तैयारी हो रही थी, वहां अचानक खुशी लौट आई. बेटा भी लगभग उम्मीद छोड़ चुका था लेकिन पिता की सांसें चलती देख उसकी आंखों से खुशी के आंसू आ गए. अब बेटा जिला अस्पताल में अपने पिता का इलाज करा रहा है.

    ‘इलाज के दौरान पिता जिंदा निकले’

    विश्वनाथ पाल के बेटे दयाशंकर पाल ने बताया, ‘मैं घर से बाहर था. अचानक सूचना मिली कि पिताजी का बोलचाल बंद हो गया था. हाथ-पैर भी काम करना बंद कर दिए हैं. घर आकर देखा कि भीड़ लगी है. परिजन रो रहे थे. यह सब देखकर मन दुखित हो गया. धीरे-धीरे विश्वास हो गया था कि उनके पिताजी इस दुनिया को छोड़कर चले गए हैं. फिर सोचा गया कि हॉस्पिटल चला जाए. प्राथमिक इलाज के दौरान पिता जिंदा निकले तो खुशी की लहर दौड़ गई.’

    ‘मुंह से शब्द नहीं निकले’

    दयाशंकर ने कहा, ‘हॉस्पिटल आने के बाद जो खुशी मिली है, उसे शब्दों में बयां नहीं जा सकता है. केवल अनुभव किया जा सकता है. जब डॉक्टर ने अचानक बोला कि यह तो अभी जिंदा है. उस समय कुछ देर तक मेरे मुंह से शब्द नहीं निकले. केवल आंखों से खुशी के आंसू बह रहे थे.’

  • कमर दर्द और रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाने के लिए 3 योगाभ्यास, बाबा रामदेव से जानें करते समय कौन सी सावधानियां रखें..

    कमर दर्द और रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाने के लिए 3 योगाभ्यास, बाबा रामदेव से जानें करते समय कौन सी सावधानियां रखें..

    कमर दर्द और रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाने के लिए 3 योगाभ्यास, बाबा रामदेव से जानें करते समय कौन सी सावधानियां रखें..

    गलत लाइफस्टाइल, घंटों एक ही जगह बैठकर काम करने और शारीरिक गतिविधि की कमी के कारण आजकल कमर दर्द और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्याएं बेहद आम हो गई हैं। अगर समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो यह समस्या क्रोनिक पेन का रूप ले सकती है। योग और प्राणायाम के नियमित अभ्यास से न केवल कमर के निचले हिस्से की मांसपेशियों में खिंचाव और मजबूती आती है, बल्कि रीढ़ की हड्डी का लचीलापन भी बेहतर होता है। योग गुरु बाबा रामदेव के अनुसार, सही तकनीक और सावधानियों के साथ किए गए योगाभ्यास कमर दर्द से राहत दिलाने और हड्डियों की कार्यक्षमता को बनाए रखने में काफी मददगार साबित हो सकते हैं। आइए बाबा रामदेव से जानते हैं ऐसे ही 3 प्रमुख योगासनों के बारे में और उन्हें करते समय कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए।

    कमर दर्द में भुजंगासन करें

    बाबा रामदेव ने बताया भुजंगासन (Cobra Pose) को कमर और रीढ़ के लिए उपयोगी योगासन माना जाता है। उनके अनुसार, नियमित रूप से सही तकनीक से भुजंगासन करने से कमर की मांसपेशियों में खिंचाव और मजबूती आने में मदद मिल सकती है। इस योगासन को करने से कमर की मांसपेशियों में खिंचाव आता है। भुजंगासन में धड़ को ऊपर उठाने से पीठ और कमर की मांसपेशियों में नियंत्रित स्ट्रेच आता है। यह योगासन रीढ़ को पीछे की ओर एक्सटेंशन देता है, जिससे उसकी गतिशीलता बनाए रखने में मदद मिल सकती है। नियमित अभ्यास से बैक मसल्स की ताकत और सहनशीलता बेहतर हो सकती है और पोश्चर में सुधार होता है। इसे रोज करने से मांसपेशियों की जकड़न और stiffness को कम करने में मदद मिल सकती है।

    इस बात का रखें ध्यान: भुजंगासन हर तरह के कमर दर्द का इलाज नहीं है। अगर दर्द बहुत तेज है, पैर में झनझनाहट, सुन्नपन या कमजोरी है, दर्द पैर तक जाता है, या रीढ़ की कोई समस्या है, तो बिना विशेषज्ञ की सलाह के यह आसन न करें। दर्द बढ़ने पर तुरंत रोक दें।

    बालासन कीजिए

    बाबा रामदेव के योग संबंधी अभ्यासों में बालासन (Child’s Pose) को कमर और पीठ की मांसपेशियों को आराम देने वाला आसन माना जाता है। उनके अनुसार, इसे नियमित और सही तरीके से करने से कमर की जकड़न कम होती है और रीढ़ और आसपास की मांसपेशियों को रिलैक्स करने में मदद मिल सकती है। बालासन में शरीर आगे की ओर झुकता है, जिससे पीठ और कमर की मांसपेशियों को हल्का स्ट्रेच मिलता है।

    लंबे समय तक बैठने या गलत पोश्चर के कारण होने वाली stiffness में यह आराम दे सकता है। इस योगासन को करने से  रीढ़ पर कम दबाव पड़ता है और पीठ को आराम मिलता है। इसका हल्का स्ट्रेच रीढ़ और आसपास के soft tissues की मोबिलिटी बनाए रखने में मददगार हो सकता है। ये एक आरामदायक योग मुद्रा है, इसलिए इससे शरीर और मन को रिलैक्स करने में मदद मिल सकती है।

    ध्यान रखें: बालासन हर तरह के कमर दर्द का इलाज नहीं है। अगर कमर दर्द बहुत तेज है, पैर में दर्द,सुन्नपन या कमजोरी है, चोट लगी है या दर्द लगातार बना हुआ है, तो योगासन करने से पहले डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह लेना बेहतर है।

    मकरासन कीजिए

    बाबा रामदेव ने बताया मकरासन (Crocodile Pose) को कमर और पीठ को आराम देने वाला योगासन माना जाता है। इसमें शरीर को पेट के बल आराम की स्थिति में रखा जाता है, जिससे कमर और रीढ़ पर अनावश्यक तनाव कम करने में मदद मिल सकती है। मकरासन में शरीर रिलैक्स रहता है, जिससे पीठ और कमर की मांसपेशियों के तनाव को कम करने में मदद मिल सकती है। लंबे समय तक बैठने या खड़े रहने से होने वाली stiffness को कम करने में यह योगासन मदद करता है।पेट के बल आराम की मुद्रा में रहने से पीठ को आराम मिलता है। मांसपेशियों की थकान कम होती है और शरीर रिलेक्स रहता है। धीमी और गहरी सांसों के साथ करने पर यह शरीर को शांत और तनाव मुक्त करने में सहायक हो सकता है।

    इस बात का रखें ध्यान: मकरासन को कमर दर्द का इलाज नहीं माना जाना चाहिए। अगर दर्द बहुत तेज है, पैर तक फैल रहा है या पैर में सुन्नपन, झनझनाहट या कमजोरी है, तो योगासन करने के बजाय डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह लें।

    डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य और योग संबंधी जागरूकता के लिए है। योगासन कमर दर्द के कारण और गंभीरता के अनुसार अलग-अलग प्रभाव डाल सकते हैं। इन्हें सही तकनीक और विशेषज्ञ की सलाह से ही करें। तेज दर्द, चोट, पैर में सुन्नपन,झनझनाहट या कमजोरी जैसी समस्या होने पर डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से परामर्श लें। योग किसी चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं है।

  • घर के ये 4 आसान वास्तु उपाय बदल सकते हैं किस्मत, खुलेंगे तरक्की और समृद्धि के रास्ते..

    घर के ये 4 आसान वास्तु उपाय बदल सकते हैं किस्मत, खुलेंगे तरक्की और समृद्धि के रास्ते..

    घर के ये 4 आसान वास्तु उपाय बदल सकते हैं किस्मत, खुलेंगे तरक्की और समृद्धि के रास्ते..

    Vastu Upay: कई बार कड़ी मेहनत के बावजूद मनचाही सफलता नहीं मिलती या घर में तनाव और आर्थिक समस्याएं बनी रहती हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार इसके पीछे घर में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा और वास्तु दोष भी एक कारण हो सकते हैं। मान्यता है कि कुछ सरल उपाय अपनाकर इन दोषों के प्रभाव को कम किया जा सकता है और सुख-समृद्धि के रास्ते खोले जा सकते हैं। यहां जानिए कुछ ऐसे ही आसान और असरदार उपायों के बारे में।

    मुख्य द्वार पर गणेश जी

    वास्तु शास्त्र में मुख्य द्वार को ऊर्जा का प्रवेश द्वार माना गया है। मान्यता है कि मुख्य दरवाजे पर भगवान गणेश की प्रतिमा लगाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और बाधाएं दूर होती हैं। इससे परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।

    बीम के नीचे न बैठें

    वास्तु शास्त्र के अनुसार बीम के ठीक नीचे बेड, सोफा या कार्यस्थल रखना उचित नहीं माना जाता। ऐसा करने से मानसिक तनाव और असहजता महसूस हो सकती है। यदि स्थान बदलना संभव न हो तो वास्तु उपायों की मदद ली जा सकती है।

    घर के कोने रखें साफ

    घर के कोनों में धूल, गंदगी या मकड़ी के जाले जमा होना शुभ नहीं माना जाता। इसलिए मुख्य द्वार, ब्रह्म स्थान और अन्य कोनों की नियमित सफाई करते रहें। घर की छत और सीढ़ियों को भी साफ-सुथरा रखें। टूटे-फूटे सामान, कबाड़ या सूखे पौधे नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ा सकते हैं। वहीं, साफ और व्यवस्थित स्थान सकारात्मक वातावरण बनाने में सहायक होता है।

    लीकेज और सीलन करें दूर

    वास्तु शास्त्र में पानी को समृद्धि का प्रतीक माना गया है। घर में पानी का रिसाव या दीवारों में सीलन होना वास्तु की दृष्टि से शुभ नहीं माना जाता। मान्यता है कि इससे आर्थिक परेशानियां बढ़ सकती हैं। इसलिए घर में कहीं भी लीकेज दिखाई दे तो उसे जल्द ठीक कराना बेहतर माना जाता है।

    (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

  • Pithori Amavasya 2026: 10 या 11 सितंबर कब है पिठोरी अमावस्या, जानें सही तिथि, मुहूर्त और महत्व

    Pithori Amavasya 2026: 10 या 11 सितंबर कब है पिठोरी अमावस्या, जानें सही तिथि, मुहूर्त और महत्व

    Pithori Amavasya 2026: 10 या 11 सितंबर कब है पिठोरी अमावस्या, जानें सही तिथि, मुहूर्त और महत्व

    Pithori Amavasya 2026 (कब है पिठोरी अमावस्या 2026): हिंदू धर्म में हर मास में पड़ने वाली अमावस्या तिथि का विशेष महत्व है। ऐसे ही भाद्रपद मास में पड़ने वाली अमावस्या को पिठोरी अमावस्या कहा जाता है। इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने के साथ दान करने का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पितरों का श्राद्ध और तर्पण करने से शुभ फलों की प्राप्ति हो सकती है। पितर प्रसन्न होकर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते सकते हैं। इस साल भादो अमावस्या तिथि दो दिन होने के कारण असमंसज की स्थिति बनी हुआ है कि किस दिन पिठोरी अमावस्या का व्रत रखें। इसे पिठोरी अमावस्या, भादो अमावस्या के अलावा कुशाग्रहणी और कुशोत्पाटिनी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। बता दें कि इस साल पिठोरी अमावस्या 10 सितंबर को मनाई जा रही है। जानिए पिठोरी अमावस्या की तिथि, शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व…

    पिठोरी अमावस्या 2026 की तिथि और मुहूर्त (Pithori Amavasya 2026 Muhurat)

    द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल भाद्रपद मास के  कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 10 सितंबर को सुबह 10:33 बजे से आरंभ हो रही है, जो 11 सितंबर को सुबह 8:56 बजे को समाप्त होगी। ऐसे में पिठोरी अमावस्या 10 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी।

    पिठोरी अमावस्या पर पूजा का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त- सुबह 06.07 बजे से लेकर सुबह 09.18 बजे तक
    पितरों के तर्पण और पिंडदान का समय- 10 सितंबर दोपहर 11.45 बजे से लेकर दोपहर 01.30 बजे तक

    पिठोरी व्रत प्रदोष मुहूर्त – 06:32 पी एम से 08:51 पी एम

    पिठोरी अमावस्या 2026 महत्व (Pithori Amavasya 2026 Significance)

    हिंदू धर्म में पिठोरी अमावस्या का विशेष महत्व है। इस दिन व्रत, तप और जप करने से संतान को सुख-समृद्धि, लंबी आयु के साथ परिवार में खुशहाली बनी रहती हैं। अमावस्या के दिन पवित्र नदी में स्नान करने के साथ भगवान शिव और पार्वती जी की पूजा करना शुभ माना जाता है। इस दिन आटे से64 योगिनियों/देवी-स्वरूपों की मूर्ति बनाकर पूजा करने का विधान है। इसी के कारण इसे पिठोरी अमावस्या कहा जाता है। इसके अलावा इस दिन पितरों का तर्पण,स्मरण करने के साथ-साथ दान करने से शुभ फलों की प्राप्ति हो सकती है।

    पिठोरी अमावस्या पर 64 देवियों की पूजा

    पिठोरी अमावस्या की एक विशेष लोक-परंपरा प्रचलित है। इस दिन 64 योगिनियों/देवी-स्वरूपों का पूजन किया जाता है। इसका मुख्य भाव संतान की रक्षा, संतान-सुख, परिवार की समृद्धि और मातृशक्ति का आशीर्वाद प्राप्त करना है। इस दिन आटे से इन्हें देवी स्वरूपों को बनाया जाता है और विधिवत पूजा की जाती है।

    पिठोरी अमावस्या 2026 मंत्र

    सामान्य पितृ मंत्र: इस मंत्र का पिठोरी अमावस्या के दिन 108 बार जाप करें- ॐ पितृ देवतायै नमः
    पितृ गायत्री मंत्र : ॐ पितृगणाय विद्महे जगत धारिणी धीमहि तन्नो पितृो प्रचोदयात्।
    तर्पण एवं स्वधा मंत्र: ॐ पितृभ्यः स्वधायिभ्यः स्वाहा या ॐ पितृभ्यः स्वधा नमः।

    डिसक्लेमर- इस लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। विभिन्न माध्यमों जैसे ज्योतिषियों, पंचांग, मान्यताओं या फिर धर्मग्रंथों से संग्रहित कर ये जानकारियां आप तक पहुंचाई गई हैं। हमारा उद्देश्य महज सूचना पहुंचाना है। इसके सही और सिद्ध होने की प्रामाणिकता नहीं दे सकते हैं। इसके किसी भी तरह के उपयोग करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।

  • महिला के सीने में उठा तेज दर्द… सर्जरी हुई तो पेट से निकले पेट से निकले 14 पेन, 5 चम्मच और एक मोमबत्ती.

    महिला के सीने में उठा तेज दर्द… सर्जरी हुई तो पेट से निकले पेट से निकले 14 पेन, 5 चम्मच और एक मोमबत्ती.

    महिला के सीने में उठा तेज दर्द… सर्जरी हुई तो पेट से निकले पेट से निकले 14 पेन, 5 चम्मच और एक मोमबत्ती.

    आंध्र प्रदेश के पलनाडु जिले के मुख्यालय नरसाराओपेट स्थित एक निजी अस्पताल से एक बेहद हैरान करने वाला और मेडिकल जगत को चकित कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां सीने में दर्द की शिकायत लेकर पहुंची 33 वर्षीय महिला की जब डॉक्टरों ने जांच की, तो उसके पेट के अंदर का नजारा देखकर सब हैरान रह गए. महिला के पेट में 14 पेन, 5 लकड़ी के चम्मच और एक मोमबत्ती मौजूद थी. डॉक्टरों की टीम ने तुरंत लैप्रोस्कोपिक सर्जरी कर इन सभी चीजों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है.

    जानकारी के अनुसार, पेटलुरिवारीपलेनी मंडल की रहने वाली 33 वर्षीय विवाहित महिला को पिछले कुछ समय से सीने में तेज दर्द की शिकायत थी. शनिवार को जब दर्द असहनीय हो गया, तो परिजन उसे आनन-फानन में नरसाराओपेट स्थित माताश्री अस्पताल ले गए. वहां डॉक्टरों ने जब कई तरह के मेडिकल टेस्ट और स्कैन किए, तो महिला के पेट के अंदर असामान्य वस्तुएं होने की पुष्टि हुई.

    लैप्रोस्कोपिक सर्जरी से निकाली गईं वस्तुएं

    मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉक्टरों ने महिला का ऑपरेशन करने का फैसला लिया. पेट में एक छोटा सा छेद करके (लैप्रोस्कोपिक सर्जरी) 14 पेन, 5 लकड़ी के चम्मच और 1 मोमबत्ती को सफलता पूर्वक बाहर निकाला गया.

    डॉक्टरों ने बताया कि इनमें से एक पेन का ढक्कन नहीं था, जिसकी वजह से वह पेट की अंदरूनी सतह पर चुभ रहा था और महिला को अत्यधिक दर्द हो रहा था. डॉक्टरों का कहना है कि किसी इंसान का एक साथ इतनी सारी ठोस चीजें निगल लेना बेहद दुर्लभ और असामान्य बात है.

    10 साल से मानसिक बीमारी से पीड़ित है पीड़िता

    घटना के बाद पीड़िता के पिता नोमुला हनुमंथा राव ने बताया कि उनकी बेटी पिछले 10 वर्षों से गंभीर मानसिक बीमारी से पीड़ित है, जिसके कारण उसके व्यवहार में असामान्य बदलाव आते रहते हैं. पिता ने यह भी बताया कि बीमारी और घरेलू तनाव की वजह से दो महीने पहले ही उसके पति ने उसे तलाक दे दिया था.

    सर्जरी के बाद डॉक्टरों ने बताया कि महिला की स्थिति फिलहाल स्थिर है और वह धीरे-धीरे ठीक हो रही है. डॉक्टरों ने सलाह दी है कि महिला को शारीरिक इलाज के साथ-साथ अब किसी वरिष्ठ मनोचिकित्सक की देखरेख और नियमित काउंसलिंग की सख्त जरूरत है.

  • दो साल बाद की दुनिया में फंस गया शख्स, 2028 में है 340 दिन से अटका..

    दो साल बाद की दुनिया में फंस गया शख्स, 2028 में है 340 दिन से अटका..

    दो साल बाद की दुनिया में फंस गया शख्स, 2028 में है 340 दिन से अटका..

    इन दिनों दुनिया भर में युद्ध, प्राकृतिक आपदाएं और अशांति की खबरें आम हो गई हैं. नेपाल की आपदा हो या अंतरराष्ट्रीय तनाव, कई लोग भविष्य को लेकर चिंतित दिखते हैं. ऐसे में सोशल मीडिया पर एक नया दावा चर्चा में है. इसमें एक व्यक्ति जो खुद को टाइम ट्रैवलर बता रहा है ने कहा कि वह भविष्य यानी 2028 से लौटा है और वहां उसने पूरे लगभग एक साल अकेले बिताए है.

    2028 में उसे पूरी पृथ्वी पर एक भी इंसान नहीं मिला. यह शख्स टिकटॉक पर सक्रिय है और अपना खाता @unicosobreviviente चलाता है जिसका मतलब है “इकलौता जीवित बचा हुआ”. उसका नाम जेवियर बताया जा रहा है और वह स्पेन में होने का दावा करता है. उसने वैलेंसिया, बार्सिलोना, मैड्रिड और सेविले जैसे शहरों के वीडियो अपलोड किए हैं जिनमें सड़कें पूरी तरह सुनसान दिखती हैं. गाड़ियां खड़ी हैं, इमारतें जैसी की तैसी हैं लेकिन कोई इंसान नजर नहीं आता.

    वीडियो में दिखाता है भविष्य
    जेवियर के वीडियो में भविष्य की झलक दिखती है. एक वीडियो में वह म्यूजियम के अंदर घूम रहा है जो आम दिनों में लोगों से भरा रहता है. दूसरे में समुद्र तट पर अकेला खड़ा है और ड्रोन शॉट्स भी हैं. जेवियर का कहना है कि वह भविष्य में फंस गया है और वापस आने का रास्ता ढूंढ रहा है. हाल के पोस्ट में उसने लिखा कि अकेले 340 दिन पूरे हो चुके हैं. वह शहरों का दौरा कर चुका है लेकिन कहीं कोई मानव जीवन नहीं मिला. वह खाना ढूंढकर खा रहा है और उम्मीद खोता जा रहा है. कुछ वीडियो में वह फॉलोअर्स से मदद की अपील भी करता है. दिलचस्प बात यह है कि भविष्य में भी बिजली और इंटरनेट चल रहा है जिससे वह वीडियो बनाकर अपलोड कर पा रहा है. जब यूजर्स ने इस बारे में सवाल किया तो उसने कहा कि शायद 2021 से 2027 के बीच कोई कनेक्शन है. यह जवाब कई लोगों को और संदिग्ध लगा.

    बढ़ रहे फॉलोवर्स
    टिकटॉक पर उसके लाखों फॉलोअर्स हो गए हैं. कुछ लोग उसकी कहानी को रोमांचक मानकर देख रहे हैं तो कई उसे झूठा करार दे रहे हैं. आलोचक कहते हैं कि सुनसान सड़कों के वीडियो सुबह जल्दी या कम आबादी वाले इलाकों में आसानी से बनाए जा सकते हैं. सावधानी से एडिटिंग और कोण चुनकर पूरी तरह खाली शहर का अहसास दिया जा सकता है. पूर्ण तबाही में बिजली, इंटरनेट और काम करते उपकरण कैसे बचेंगे, यह सवाल भी लाजमी है. टाइम ट्रैवल के दावे सोशल मीडिया पर नए नहीं हैं. पहले भी कई लोग भविष्य या अतीत से आने का दावा कर चुके हैं और बाद में वे प्रदर्शन, प्रैंक या ध्यान खींचने के तरीके साबित हुए. जेवियर का केस भी इसी श्रेणी में रखा जा रहा है. फिर भी उसकी वीडियोस की बनावट और लगातार अपडेट्स ने लोगों का ध्यान खींचा है.

  • एक कप छिले हुए अनार के दाने खाने से बॉडी को क्या मिलता है?

    एक कप छिले हुए अनार के दाने खाने से बॉडी को क्या मिलता है?

    एक कप छिले हुए अनार के दाने खाने से बॉडी को क्या मिलता है?

    अनार को सेहत के लिए सुपर फूड माना जाता है, जो विटामिन सी, पोटैशियम, आयरन और पावरफुल एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है। डेली डाइट में इसे शामिल करने से न केवल शरीर का ब्लड सर्कुलेशन और हीमोग्लोबिन स्तर बेहतर होता है, बल्कि यह दिल की सेहत और पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में भी काफी मददगार साबित होता है। हालांकि, किसी भी फल का पूरा फायदा तभी मिलता है जब उसका सेवन सही समय और सही मात्रा में किया जाए। अनार अपने चमकीले लाल रंग के जूस के लिए सबसे ज्यादा जाना जाता है, लेकिन यह फल सिर्फ स्वाद और रंग तक सीमित नहीं है। इसमें कई पोषक तत्व और जैव सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं, जो संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकते हैं।

    क्लीनिकल डायटीशियन जी सुषमा ने बताया कि अनार में कई तरह के कंपाउंड जैसे कि एंटीऑक्सीडेंट्स और पॉलिफिनॉल्स होते हैं जो ब्रेन की हेल्थ को दुरुस्त करते हैं। स्वास्थ्य और आहार विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित रूप से सही तरीके से अनार का सेवन करने से शरीर की इम्यूनिटी में सुधार होता है। आइए जानते हैं रोजाना एक कप अनार खाने से शरीर को कौन-कौन से मुख्य पोषक तत्व और फायदे मिलते हैं।

    पोषक तत्वों से भरपूर होता है अनार

    हेल्थलाइन के मुताबिक अनार में कैलोरी और वसा की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है, जबकि इसमें फाइबर, विटामिन और कई खनिज पाए जाते हैं। एक अनार में लगभग

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    कैलोरी: 234
    प्रोटीन: 4.7 ग्राम
    वसा: 3.3 ग्राम
    कार्बोहाइड्रेट: 52 ग्राम
    फाइबर: 11.3 ग्राम
    विटामिन C: दैनिक जरूरत का लगभग 32 प्रतिशत
    फोलेट: दैनिक जरूरत का लगभग 27 प्रतिशत
    मैग्नीशियम: दैनिक जरूरत का लगभग 8 प्रतिशत
    फॉस्फोरस: दैनिक जरूरत का लगभग 8 प्रतिशत
    पोटैशियम: दैनिक जरूरत का लगभग 13 प्रतिशत होता है।

    अनार के जूस में पूरे फल की तुलना में फाइबर बहुत कम होता है। पूरा अनार कम वसा वाला फाइबर, विटामिन और खनिजों से भरपूर फल है इसका सेवन दानों के रूप में करना फायदेमंद होता है।

    एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है अनार

    अनार में भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट और पॉली फेनोलिक यौगिक पाए जाते हैं। एंटीऑक्सीडेंट ऐसे यौगिक हैं जो शरीर की कोशिकाओं को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद करते हैं। अनार में प्यूनिकालाजिन्स (Punicalagins), एंथोसायनिन्स (Anthocyanins) और हाइड्रोलाइजेबल टैनिन्स (Hydrolyzable Tannins) जैसे जैव सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं। अनार को संतुलित डाइट का हिस्सा बनाना संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हो सकता है।

    सूजन कम करने में मदद कर सकता है

    शरीर में लंबे समय तक रहने वाली क्रोनिक इंफ्लेमेशन (Chronic Inflammation) कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ी हो सकती है, जिनमें हृदय रोग, टाइप-2 डायबिटीज और कुछ प्रकार के कैंसर शामिल हैं। अनार में मौजूद प्यूनिकालाजिन्स में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए गए हैं। कुछ अध्ययनों में अनार के जूस के सेवन से शरीर में सूजन से जुड़े कुछ मार्क्स में कमी देखी गई है।

    कैंसर से बचाव में करता है मदद

    अनार में मौजूद कुछ जैव सक्रिय यौगिकों पर कैंसर से जुड़े संभावित प्रभावों को लेकर रिसर्च किया गया है। कुछ प्रयोगशाला और पशु अध्ययनों में अनार के यौगिकों में एंटी-कैंसर प्रभाव देखे गए हैं। कुछ शोधों में यह भी संकेत मिला है कि अनार के अर्क से कुछ कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि या ट्यूमर के विकास पर प्रभाव पड़ सकता है।

    दिल की सेहत के लिए फायदेमंद हो सकता है अनार

    अनार में पाए जाने वाले पॉलीफेनोलिक यौगिक दिल की सेहत को दुरुस्त रखने के लिए फायदेमंद माने जाते हैं। कुछ अध्ययनों में अनार के जूस के सेवन के बाद ब्लड प्रेशर और हृदय स्वास्थ्य से जुड़े कुछ संकेतकों में सकारात्मक बदलाव देखे गए हैं। हृदय रोग से पीड़ित लोगों पर किए गए एक अध्ययन में अनार का जूस पीने से सीने में होने वाले दर्द और गंभीरता में कमी देखी गई।

    यूरिनरी और किडनी हेल्थ को कर सकता है सपोर्ट

    कुछ रिसर्च में ये बात साबित हो चुकी है कि अनार का जूस किडनी स्टोन (पथरी) बनने से रोकने में मददगार साबित होता है। एक अध्ययन में अनार के अर्क को बार-बार किडनी स्टोन बनने वाले लोगों में पथरी बनने से जुड़े एक तंत्र को प्रभावित करते हुए पाया गया। जानवरों पर की हई रिसर्च के मुताबिक अनार के अर्क का ऑक्सालेट, कैल्शियम और फॉस्फेट जैसे पदार्थों पर प्रभाव किडनी स्टोन के लिए जिम्मेदार हो सकता है।

    दिमाग की सेहत के लिए भी हो सकता है फायदेमंद

    डायटीशियन जी सुषमा ने बताया कि अनार में कई तरह के कंपाउंड मौजूद होते हैं जो ब्रेन की हेल्थ को दुरुस्त करते हैं अनार में एलैजिटैनिन्स (Ellagitannins) नामक एंटीऑक्सीडेंट यौगिक पाए जाते हैं। ये शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन को कम करने में संभावित भूमिका निभा सकते हैं।

    कुछ अध्ययनों में यह संभावना सामने आई है कि अनार में मौजूद ये यौगिक मस्तिष्क की कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव नुकसान से बचाने में मदद कर सकते हैं। एलैजिटैनिन्स से आंतों में यूरोलिथिन A (Urolithin A) नामक यौगिक बन सकता है, जिस पर मस्तिष्क में सूजन और उम्र से संबंधित संज्ञानात्मक समस्याओं के संदर्भ में शोध किया गया है। हालांकि, अल्जाइमर या पार्किंसन जैसी बीमारियों से बचाव या इलाज में अनार की भूमिका को साबित करने के लिए अभी और रिसर्च की जरूरत है।

    डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य और पोषण संबंधी जागरूकता के लिए है। अनार एक पौष्टिक फल है, लेकिन इसके सेवन से किसी बीमारी का इलाज या बचाव सुनिश्चित नहीं होता। किसी विशेष स्वास्थ्य समस्या, एलर्जी या चिकित्सकीय स्थिति में डाइट में बदलाव करने से पहले डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लें।

  • पश्चिम मुखी घर में कहां बनाएं किचन? गलत दिशा बिगाड़ सकती है घर का वास्तु, रसोई बनवाने से पहले जान लें नियम..

    पश्चिम मुखी घर में कहां बनाएं किचन? गलत दिशा बिगाड़ सकती है घर का वास्तु, रसोई बनवाने से पहले जान लें नियम..

    पश्चिम मुखी घर में कहां बनाएं किचन? गलत दिशा बिगाड़ सकती है घर का वास्तु, रसोई बनवाने से पहले जान लें नियम..

    वास्तु शास्त्र में घर की हर दिशा और उसमें बने कमरों का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि घर में रसोई की सही दिशा परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति से जुड़ी होती है। अगर आपका घर पश्चिम मुखी (West Facing) है, तो रसोई बनवाते समय कुछ वास्तु नियमों का ध्यान रखना जरूरी माना जाता है। आइए जानते हैं पश्चिम मुखी घर में किचन की सही दिशा और गलत स्थान पर रसोई होने से जुड़ी मान्यताएं।

    पश्चिम मुखी घर में कहां बनाएं रसोई?

    वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में रसोई की सही दिशा का चुनाव महत्वपूर्ण होता है। मान्यता है कि सही स्थान पर बनी रसोई घर में सकारात्मक वातावरण बनाए रखने में सहायक होती है । पश्चिम मुखी घर में रसोई के लिए दक्षिण-पूर्व दिशा सबसे सही मानी जाती है। इसे आग्नेय कोण कहा जाता है और यह दिशा अग्नि तत्व से जुड़ी मानी गई है। मान्यता है कि इस दिशा में रसोई होने से घर में पॉजिटिविटी बनी रहती है और परिवार की सुख-समृद्धि बढ़ती है।

    इसके अलावा पश्चिम मुखी घर में उत्तर-पश्चिम दिशा यानी वायव्य कोण में भी रसोई बनाई जा सकती है। वास्तु में इस दिशा को भी किचन के लिए उपयुक्त माना गया है। मान्यता है कि चंद्रमा से जुड़ी इस दिशा में रसोई होने से स्वास्थ्य संबंधी लाभ मिल सकते हैं।

    आर्थिक परेशानियां

    वास्तु मान्यताओं के अनुसार अगर रसोई सही दिशा में न हो तो इसका असर घर की आर्थिक स्थिति पर पड़ सकता है । ऐसी स्थिति में धन से जुड़ी परेशानियां बढ़ने की बात कही जाती है। नौकरी और व्यापार में भी रुकावट आने की मान्यता है।

    सेहत पर असर

    वास्तु के अनुसार रसोई की गलत दिशा का प्रभाव परिवार के स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है। मान्यता है कि ऐसी स्थिति में घर के सदस्यों को बार-बार स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

    पारिवारिक तनाव का कारण

    रसोई को परिवार की ऊर्जा से जोड़कर भी देखा जाता है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार गलत दिशा में बनी रसोई घर में तनाव और मतभेद का कारण बन सकती है। कई बार परिवार के सदस्यों के बीच दूरी बढ़ने की बात भी कही जाती है।

    (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।