सोशल मीडिया पर इन दिनों कर्नाटक के बंटवाल से आई एक ऐसी खबर छाई हुई है, जो दिल को छू लेने के साथ-साथ सोचने पर भी मजबूर कर देती है. बीसी रोड पर जब एक चमचमाती सफेद रंग की टोयोटा फॉर्च्यूनर आकर रुकी, तो सबको लगा कि कोई बड़ा अफसर या नेता उतरा होगा. लेकिन गाड़ी का दरवाजा खुला, तो हाथ में झाड़ू थामे और चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान लिए सेसप्पा बाहर निकले.
एक वक्त ऐसा भी था, जब कफन तक के पैसे नहीं थे
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आज फॉर्च्यूनर में घूमने वाले सेसप्पा की जिंदगी हमेशा ऐसी नहीं थी. उनका अतीत बहुत दर्दनाक और संघर्षों से भरा रहा है. साल 1996 में जब उन्होंने बंटवाल नगर परिषद में नौकरी शुरू की थी, तब उन्हें रोजाना सिर्फ 50 रुपए दिहाड़ी मिलती थी.
महज तीसरी क्लास तक पढ़े सेसप्पा का परिवार इतनी गरीबी में था कि कई बार भूखे पेट सोना पड़ता था. उनके जीवन का सबसे काला दिन तब आया, जब उनके पिता का निधन हो गया. परिवार के पास अंतिम संस्कार के लिए भी पैसे नहीं थे. मजबूरी में उन्हें अपने पिता के पार्थिव शरीर को नेत्रावती नदी के किनारे ले जाकर खुद विसर्जन करना पड़ा था. उस दिन उन्होंने ठान लिया कि हालात चाहे जैसे हों, वे अपने परिवार को इस लाचारी से बाहर निकालकर रहेंगे.
एक पुलिसवाले की सलाह ने बदल दी तकदीर
गरीबी और तनाव की वजह से एक वक्त सेसप्पा को शराब की लत लग गई थी. लेकिन साल 2005 में बंटवाल के तत्कालीन सब-इंस्पेक्टर के.यू. बेलियप्पा की एक बात ने उनकी जिंदगी पलट दी. उन्होंने तुरंत शराब छोड़ दी और अपनी पूरी ताकत मेहनत करने में झोंक दी.
नगर निगम की ड्यूटी के बाद वे खाली नहीं बैठते थे. उन्होंने खेती की, दूध बेचने का काम किया और पंचायत में पानी सप्लाई का जिम्मा भी उठाया. वे अपनी छोटी-छोटी बचत और लोन के जरिए धीरे-धीरे आगे बढ़े. उन्होंने पहले मारुति 800 और फिर स्कॉर्पियो जैसी गाड़ियां चलाईं और आखिरकार मेहनत के दम पर एक सेकंड हैंड फॉर्च्यूनर खरीद ही ली.
‘काम कोई छोटा नहीं होता’
नगर निगम के अधिकारी भी सेसप्पा की सादगी और मेहनत के कायल हैं. सुबह-सुबह अपनी लग्जरी गाड़ी से आने के बाद भी वे बिना किसी अहंकार के झाड़ू उठाते हैं और पूरी ईमानदारी से अपनी सफाई की ड्यूटी निभाते हैं.
రోజూ ఫార్చునర్ కారులో పనికి వస్తున్న పారిశుద్ధ్య కార్మికుడు
కర్ణాటకలోని బంట్వాళలో రోజూ ఫార్చునర్ కారులో పనికి వస్తున్న పారిశుద్ధ్య కార్మికుడు శేషప్పణ్ణ
1996 నుంచి శానిటేషన్ వర్కర్గా పనిచేస్తున్న శేషప్పణ్ణ
Vishwakarma Jayanti 2026: हिंदू धर्म में भगवान विश्वकर्मा को देवताओं के शिल्पकार, वास्तुकार और निर्माण कला के जनक के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा ने देवताओं के लिए भव्य महलों, अस्त्र-शस्त्रों और दिव्य नगरों का निर्माण किया था। इसलिए विश्वकर्मा पूजा के दिन विशेष रूप से कारखानों, मशीनों, औजारों, दुकानों और कार्यस्थलों में पूजा-अर्चना की जाती है। यह पर्व कारीगरों, इंजीनियरों, शिल्पकारों, तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों और व्यवसायियों के लिए विशेष महत्व रखता है। हर वर्ष कन्या संक्रांति के अवसर पर विश्वकर्मा पूजा मनाई जाती है। आइए जानते हैं इस साल कब है विश्वकर्मा पूजा और शुभ मुहूर्त…
विश्वकर्मा पूजा 2026 तारीख और शुभ मुहूर्त
फ्यूचर पंचांग के अनुसार विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। पूजा के लिए शुभ समय सुबह 7:58 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक रहेगा। वहीं अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:51 बजे से दोपहर 12:40 बजे तक रहेगा, जिसे पूजा के लिए विशेष शुभ माना जाता है।
विश्वाकर्मा पूजा- विधि
पूजा स्थल की सफाई करें और चौकी पर साफ कपड़ा बिछाकर भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। कलश स्थापना करें और भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करते हुए पूजा का संकल्प लें। भगवान को जल, अक्षत, रोली, चंदन, फूल और माला अर्पित करें। धूप और दीपक जलाएं तथा भगवान विश्वकर्मा को फल, मिठाई और अन्य नैवेद्य अर्पित करें। भगवान विश्वकर्मा की पूजा के साथ औजारों, मशीनों, वाहन और काम में आने वाले उपकरणों की भी पूजा करें। विश्वकर्मा भगवान की कथा सुनें या पढ़ें और उनके मंत्रों का जाप करें। अंत में भगवान विश्वकर्मा की आरती करें और परिवार के सदस्यों या कर्मचारियों के साथ प्रसाद बांटें।
विश्वकर्मा पूजा का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विश्वकर्मा सृजन, निर्माण और तकनीकी कौशल के प्रतीक हैं। कहा जाता है कि उन्होंने इंद्रपुरी, द्वारका और लंका जैसे दिव्य नगरों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने से कार्यक्षेत्र में सफलता, उन्नति और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। मशीनों और उपकरणों की पूजा करने से काम में आने वाली बाधाएं दूर होने और व्यवसाय में तरक्की होने की भी धार्मिक मान्यता है।मेष राशि का वर्षफल 2026वृष राशि का वर्षफल 2026मिथुन राशि का वर्षफल 2026कर्क राशि का वर्षफल 2026सिंह राशि का वर्षफल 2026कन्या राशि का वर्षफल 2026तुला राशि का वर्षफल 2026वृश्चिक राशि का वर्षफल 2026धनु राशि का वर्षफल 2026मकर राशि का वर्षफल 2026कुंभ राशि का वर्षफल 2026मीन राशि का वर्षफल 2026
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कोलंबिया की एक महिला ने मोहल्ले की गॉसिप बेचकर खड़ा किया अनोखा बिजनेस. चुगली और पड़ोसियों के राज बेचकर खरीद लिए दो-दो मकान; पढ़ें दिलचस्प खबर.
क्या आपने कभी सोचा है कि दूसरों के घरों की खबरें रखना या मोहल्ले की चुगली करना कभी किसी का बिजनेस बन सकता है? आमतौर पर लोग इसे वक्त की बर्बादी या सिर्फ फालतू टाइमपास मानते हैं, लेकिन कोलंबिया की एक 67 साल की दादी ने इस काम को ऐसा गजब का स्टार्टअप बना दिया कि अच्छे-अच्छे बिजनेसमैन भी हैरान रह जाएं. जी हां, इन्होंने दूसरों के सीक्रेट्स और चुगलियों का ऐसा बाजार सजाया कि कमाई के पैसों से दो-दो मकान खड़े कर लिए.
कान लगाकर सुनती हैं दूसरों के राज
गल्फ टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, कोलंबिया के आर्मेनिया शहर में रहने वाली 67 वर्षीय मिरियम (Miryam) ने साबित कर दिया है कि दिमाग हो तो किसी भी चीज से पैसा कमाया जा सकता है. मिरियम का यह अनोखा कारोबार इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है. उनका काम बस इतना है कि वे अपने घर के बाहर कुर्सी डालकर बैठ जाती हैं और पूरे मोहल्ले की हर छोटी-बड़ी हलचल पर पैनी नजर रखती हैं. किसके घर में क्या पक रहा है, किसका किससे झगड़ा हुआ और कौन किससे छिपाकर मिल रहा है, इनकी पल-पल की खबर मिरियम के पास होती है.
चुगली बेचने का अनोखा बिजनेस मॉडल
मिरियम ने अपनी इस आदत को एक प्रोफेशनल बिजनेस में बदल दिया है. वे खुद को गर्व से पेशेवर चिस्मोसा यानी गॉसिप क्वीन कहती हैं. मोहल्ले के लोगों को जब भी किसी दूसरे पड़ोसी के बारे में कोई चटपटी खबर जाननी होती है, वे सीधे मिरियम के पास दौड़कर आते हैं. मिरियम भी मुफ्त में एक पत्ता तक नहीं हिलने देतीं. छोटी-मोटी खबरों के लिए वे 5,000 से 10,000 कोलंबियन पेसो (करीब 150 रुपए से 300 रुपए) वसूलती हैं और अगर मामला किसी बड़े राज का हो, तो उसकी कीमत भी उसी हिसाब से भारी-भरकम होती है. अपनी सबसे महंगी चुगली के बारे में बताते हुए मिरियम ने कहा कि एक आदमी अपनी पत्नी के बाहर जाने पर उसे धोखा देता था, इस राज को छिपाने के लिए उन्होंने उससे 7 लाख कोलंबियन पेसो (लगभग 21,000 रुपए) लिए थे.
पक्की सबूतों वाली नोटबुक और गॉसिप बोर्ड
मिरियम का काम सिर्फ हवा में तीर चलाना नहीं है, बल्कि वे पत्रकारों के अंदाज में काम करती हैं. उनके पास एक खास नोटबुक होती है, जिसमें वे हर तारीख और समय के साथ गॉसिप नोट करती हैं. इतना ही नहीं, उनके घर के अंदर एक बकायदा गॉसिप बोर्ड भी लगा है, जिस पर तस्वीरों, कागजों और धागों के जरिए पड़ोसियों के सीक्रेट्स जोड़े गए हैं. हालांकि, इस हरकत की वजह से कई पड़ोसी उनसे खफा रहते हैं, लेकिन मजाल है कि कोई अपनी जिज्ञासा रोक पाए, खबर लेने हर कोई उन्हीं के दरवाजे पर पहुंचता है
जब भी हम किसी के घर की कल्पना करते हैं, तो हमारे दिमाग में ईंट, सीमेंट और छत से बनी एक ऐसी इमारत आती है, जो जमीन के ऊपर खड़ी होती है. लेकिन दुनिया में एक ऐसी जगह भी है, जहां लोग जमीन के ऊपर घर बनाने के बजाय जमीन के अंदर गड्ढा खोदकर रहते हैं. ये बिल्कुल पाताल लोक का अहसास दिलाता है. हम बात कर रहे हैं ट्यूनीशिया के दक्षिणी इलाके में बसे मातमाता (Matmata) नाम के एक छोटे से गांव की, जो अपनी इसी अनोखी बनावट की वजह से पूरी दुनिया में जाना जाता है. आमतौर पर गर्म इलाकों में लोग गर्मी से बचने के लिए पहाड़ों को काटकर गुफाएं बनाते हैं. लेकिन मातमाता गांव के बर्बर समुदाय के लोगों ने बिल्कुल अलग तरीका अपनाया. उन्होंने पहाड़ की दीवारों को काटने के बजाय सीधी जमीन में ही एक बहुत बड़ा और गहरा गड्ढा खोद दिया.
इस बड़े गड्ढे को वे अपने घर का आंगन बनाते हैं और फिर उस गड्ढे की अंदरूनी दीवारों को खोदकर चारों तरफ कमरे तैयार करते हैं. कई बार तो आसपास बने ऐसे कई गड्ढों को आपस में जोड़ने के लिए जमीन के नीचे ही खंदक जैसी सुरंगें बना दी जाती हैं, जिससे यह पूरा इलाका एक बड़ी भूलभुलैया जैसा लगता है. अब सवाल यह उठता है कि जमीन के अंदर इतने बड़े गड्ढे और कमरे खोदना कैसे आसान हुआ? दरअसल, मातमाता का यह पूरा इलाका बलुआ पत्थर की एक ऐसी परत पर बसा है जो बहुत ही नरम होती है. इसे हाथ के साधारण औजारों से भी आसानी से खोदा जा सकता है. लेकिन खास बात यह है कि यह पत्थर जितना खोदने में आसान है, सदियों तक बिना गिरे टिके रहने में उतना ही मजबूत भी है. बर्बर समुदाय के लोग पिछले एक हजार से भी ज्यादा सालों से इसी तरीके से जमीन के अंदर अपने आशियाने बनाते आ रहे हैं.
आखिर क्यों बनाए पाताल लोक में घर?
इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि यह इलाका लीबिया और ट्यूनीशिया के बीच का एकमात्र मैदानी रास्ता हुआ करता था. इस वजह से पुराने जमाने में विदेशी हमलावर बार-बार यहां से गुजरते थे और लूटपाट मचाते थे. हमलावरों से अपनी जान और माल बचाने के लिए बर्बर समुदाय के लोगों ने सुरक्षा के लिहाज से जमीन के नीचे एक तरह से पाताल लोक में छिपकर रहना शुरू किया. शुरुआत में वे पहाड़ियों पर छिपते थे, लेकिन बाद में जब अरब हमलावरों के साथ उनके रिश्ते सुधरे, तो वे नीचे के मैदानी इलाकों में आए और जमीन के अंदर गड्ढे वाले ये घर बनाने लगे. मातमाता गांव की एक और बड़ी पहचान यह भी है कि इसका कनेक्शन हॉलीवुड से बहुत गहरा है.
दुनिया भर में मशहूर फिल्म स्टार वॉर्स की शूटिंग इसी गांव में हुई थी. फिल्म के मुख्य किरदार ल्यूक स्काईवॉकर का जो घर पर्दे पर दिखाया गया था, वह असल में मातमाता का ही एक अंडरग्राउंड होटल है, जिसका नाम सिदी द्रिस है. आज भी इस गांव में बहुत से लोग जमीन के नीचे बने इन पारंपरिक घरों में रह रहे हैं. बाहर चाहे कितनी भी भीषण गर्मी या झुलसाने वाली धूप हो, इन गड्ढे वाले मकानों के अंदर का तापमान हमेशा एकदम ठंडा और सुहावना बना रहता है, जो कुदरत और इंसान की समझदारी का एक बेजोड़ नमूना है.
यूरिक एसिड शरीर में बनने वाला एक अपशिष्ट पदार्थ है, जो मुख्य रूप से प्यूरीन (Purine) के टूटने से बनता है। आमतौर पर किडनी इसे फिल्टर करके पेशाब के रास्ते शरीर से बाहर निकाल देती है। लेकिन जब शरीर में यूरिक एसिड ज्यादा बनने लगे या किडनी इसे पर्याप्त मात्रा में बाहर न निकाल पाए, तो इसका स्तर खून में बढ़ सकता है। लंबे समय तक यूरिक एसिड बढ़ा रहने पर कुछ लोगों में इसके क्रिस्टल जोड़ों में जमा हो सकते हैं, जिससे गाउट, दर्द, लालिमा और सूजन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। शरीर में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ने से न केवल जोड़ों और उंगलियों में तेज दर्द, सूजन और अकड़न की समस्या होती है, बल्कि आगे चलकर यह गाउट (Gout) और किडनी स्टोन का रूप भी ले सकता है। खान-पान की अनहेल्दी आदतों और प्यूरीन से भरपूर चीजों के सेवन से खून में यूरिक एसिड तेजी से जमा होने लगता है। ऐसे में कई लोग इसे प्राकृतिक तरीकों से कंट्रोल करने के लिए रसोई में मौजूद मसालों का सहारा लेते हैं।
आयुर्वेद में मेथी दाना को कई समस्याओं का असरदार इलाज माना गया है, लेकिन क्या यह यूरिक एसिड के मरीजों के लिए सच में सुरक्षित और फायदेमंद है? आयुर्वेदिक और यूनानी दवाओं के एक्सपर्ट डॉक्टर सलीम जैदी ने बताया यूरिक एसिड कंट्रोल करने के लिए मेथी दाना का सेवन असरदार साबित होता है। अगर आप मेथी दाना का सेवन उसका ड्रिंक बनाकर करें तो ये जोड़ों के दर्द और सूजन को कंट्रोल कर सकता है। इस ड्रिंक में हल्दी, धनिया के बीज, जीरा, मेथी और काली मिर्च को शामिल किया जाता है। इस खास मिश्रण को रोजाना पीने से यूरिक एसिड कम करने में मदद मिल सकती है।
मेथी दाना कैसे यूरिक एसिड कंट्रोल करने में करता है मदद?
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के मुताबिक मेथी दाने में फाइबर, सैपोनिन, फ्लेवोनॉयड्स और अन्य बायोएक्टिव यौगिक पाए जाते हैं, जिनमें एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण देखे गए हैं। यही वजह है कि मेथी को पारंपरिक रूप से जोड़ों की सेहत के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है। मेथी शरीर को डिटॉक्स करके यूरिक एसिड बाहर निकालने में मदद करती है और किडनी को भी सपोर्ट करती है। मेथी के बीजों और पत्तियां में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण और कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होती है जो बॉडी में होने वाली सूजन और दर्द को कंट्रोल करने में मदद करते हैं।
धनिया, जीरा और मेथी दाना कैसे करता है असर?
धनिया के बीज को प्राकृतिक डाइयूरेटिक, जीरा को पाचन और किडनी हेल्थ के लिए उपयोगी और मेथी को ‘डिटॉक्सिफायर’ बताया गया है। किचन में मौजूद ये तीनों मसाले यूरिक एसिड को शरीर से ‘फ्लश’ करने या किडनी को ‘क्लीन’ करने में मदद करता है।
इस ड्रिंक को बनाने का तरीका
इस ड्रिंक को बनाने के लिए दो कप पानी में आधा चम्मच हल्दी, एक चम्मच धनिया के बीज, आधा चम्मच जीरा और रातभर भिगोए हुए मेथी के बीज डालकर करीब 10 मिनट तक पकाएं। अंत में एक चुटकी काली मिर्च डालकर इसे छान लें। स्वाद के लिए नींबू या थोड़ी मात्रा में शहद मिला सकते हैं। खाली पेट या रोजाना निश्चित मात्रा में चार से छह सप्ताह तक इस ड्रिंक का सेवन करने से यूरिक एसिड कंट्रोल करने में मदद मिलती है।
यूरिक एसिड में पानी पीना है बहुत जरूरी
पर्याप्त पानी पीना शरीर में सामान्य हाइड्रेशन बनाए रखने के लिए जरूरी है और इससे किडनी को पेशाब के जरिए अपशिष्ट पदार्थ बाहर निकालने में मदद मिलती है। किडनी या हृदय की बीमारी वाले लोगों को पानी की मात्रा डॉक्टर की सलाह के अनुसार तय करनी चाहिए।
यूरिक एसिड बढ़ने पर किन चीजों से करें परहेज
अगर यूरिक एसिड या गाउट की समस्या है तो ऑर्गन मीट, अत्यधिक लाल मांस, कुछ सीफूड, शराब और ज्यादा मीठे पेय का सेवन सीमित करें। वजन को कंट्रोल करें, नियमित शारीरिक गतिविधि करना और संतुलित डाइट लेना भी जरूरी है।
क्या घरेलू नुस्खे यूरिक एसिड की दवा की जगह ले सकते हैं?
अगर किसी व्यक्ति को गाउट के बार-बार अटैक आते हैं या यूरिक एसिड लगातार बढ़ा हुआ है, तो डॉक्टर से तुरंत इलाज कराएं। डॉक्टर आवश्यकतानुसार दवाएं और नियमित जांच की सलाह दे सकते हैं। घरेलू ड्रिंक या हर्बल नुस्खे डॉक्टर द्वारा दी गई दवा को अपने आप बंद करने या बदलने का विकल्प नहीं हैं।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। मेथी दाना यूरिक एसिड कम करने या गाउट का इलाज करने के लिए प्रमाणित उपचार नहीं है। यूरिक एसिड बढ़ा होने या जोड़ों में दर्द-सूजन की समस्या होने पर डॉक्टर से सलाह लें और बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा बंद या शुरू न करें।
दिल्ली मेट्रो का नाम सुनते ही हमेशा लोगों के दिमाग में भीड़, सीट को लेकर बहस, अजीबोगरीब हरकतें और वायरल रील्स की तस्वीरें आने लगती हैं. लेकिन इसी मेट्रो से कभी-कभी ऐसी तस्वीरें भी सामने आती हैं, जो लोगों को कुछ अच्छा सोचने पर मजबूर कर देती हैं. इन दिनों एक ऐसी ही तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसमें एक लड़के की छोटी-सी हरकत ने लोगों का दिल जीत लिया.
दरअसल वायरल हो रहे पोस्ट के मुताबिक, एक लड़का दिल्ली मेट्रो में सफर कर रहा था. उसके कानों में इयरफोन लगे थे और वह अपने बैग से पानी की बोतल निकालने की कोशिश कर रहा था. इसी दौरान उसका टिफिन बॉक्स हाथ से छूट गया और उसमें रखा पूरा खाना मेट्रो के फर्श पर बिखर गया. ऐसे समय में ज्यादातर लोग पहले अपने आसपास देखते हैं कि किसी ने उन्हें देखा तो नहीं. कई बार लोग शर्मिंदगी के कारण वहां से हट जाते हैं या गिरी हुई चीज को साफ करने की जिम्मेदारी किसी और पर छोड़ देते हैं. लेकिन इस लड़के ने ऐसा बिल्कुल भी नहीं किया.
नोटबुक का पन्ना फाड़कर समेटा खाना खाना फर्श पर गिरते ही लड़का उसे उठाने में जुट गया. उसने अपनी नोटबुक का एक पन्ना फाड़ा और उससे फर्श पर बिखरे खाने को सावधानी से समेटना शुरू कर दिया. उसने इस बात की परवाह नहीं की कि आसपास के लोग उसे देख रहे हैं या नहीं. खाने को समेटने के बाद भी उसने अपना काम अधूरा नहीं छोड़ा. उसने जेब से रुमाल निकाला और जिस जगह खाना गिरा था, उस हिस्से को अच्छी तरह साफ कर दिया. उसकी कोशिश यही थी कि उसके कारण मेट्रो के दूसरे यात्रियों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना ना करना पड़े.
At Delhi Metro, a young boy wearing earphones was taking a water bottle out of his bag when his tiffin box accidentally fell, spilling all the food onto the floor.
Without hesitation, he tore a page from his notebook and carefully gathered the spilled food. He then took out his… pic.twitter.com/n0tnKijAzL
राधा अष्टमी का पर्व राधारानी को समर्पित है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह पावन पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन बरसाना में राधारानी का प्राकट्य हुआ था। राधा अष्टमी के दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं, राधा-कृष्ण की पूजा करते हैं और राधारानी से सुख, प्रेम, समृद्धि तथा भक्ति का आशीर्वाद मांगते हैं। इस साल राधा अष्टमी का त्योहार 19 सितंबर को मनाया जाएगा। आइए जानते हैं तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त…
कब है राधा अष्टमी 2026 (Kab Hai Radha Ashtami 2026)
फ्यूचर पंचांग के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 18 सितंबर, शुक्रवार को दोपहर 1 बजकर 2 मिनट पर होगी। वहीं, अगले दिन यानी 19 सितंबर, शनिवार के दिन दोपहर के 3 बजकर 28 मिनट तक अष्टमी तिथि व्याप्त रहेगी। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, 19 सितंबर को राधा अष्टमी मनाई जाएगी और इसी दिन व्रत करना भी शास्त्र सम्मत होगा।
राधा अष्टमी शुभ मुहूर्त
शुभ चौघड़िया : सुबह 7 बजकर 39 मिनट से 9 बजकर 11 मिनट तक
लाभ चौघड़िया : दोपहर में 1 बजकर 46 मिनट से 3 बजकर 18 मिनट तक
अमृत चौघड़िया : दोपहर में 3 बजकर 18 मिनट से 4 बजकर 50 मिनट तक
लाभ चौघड़िया : शाम को 6 बजकर 22 मिनट से 7 बजकर 50 मिनट तक
राधा अष्टमी का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं में राधारानी को प्रेम, करुणा और भक्ति का स्वरूप माना गया है। कहा जाता है कि राधा नाम का स्मरण करने और श्रद्धापूर्वक राधारानी की पूजा करने से भक्त को भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त होती है। राधा अष्टमी पर राधा-कृष्ण का पूजन, राधारानी का अभिषेक, श्रृंगार और भजन-कीर्तन करने की विशेष परंपरा है।
मान्यता है कि इस दिन राधारानी की आराधना करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और वैवाहिक जीवन में प्रेम बढ़ता है। भक्त राधारानी से अपने जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति की प्रार्थना करते हैं। विशेष रूप से बरसाना और वृंदावन में राधा अष्टमी का पर्व बड़े उत्साह और भक्ति भाव के साथ मनाया जाता है।मेष राशि का वर्षफल 2026वृष राशि का वर्षफल 2026मिथुन राशि का वर्षफल 2026कर्क राशि का वर्षफल 2026सिंह राशि का वर्षफल 2026कन्या राशि का वर्षफल 2026तुला राशि का वर्षफल 2026वृश्चिक राशि का वर्षफल 2026धनु राशि का वर्षफल 2026मकर राशि का वर्षफल 2026कुंभ राशि का वर्षफल 2026मीन राशि का वर्षफल 2026
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यूके के नॉटिंघम में 35 साल की हॉली विफेन के साथ स्काईडाइविंग के दौरान बड़ा हादसा, हवा में सिर पर लगी चोट, 150 की स्पीड से गिरीं फिर भी चमत्कारिक रूप से बची जान. देखें वायरल वीडियो.
10 हजार फीट की ऊंचाई और नीचे जमीन…सोचकर ही दिल दहल जाता है. अगर पैराशूट धोखा दे जाए, तो बचना नामुमकिन है. लेकिन यूके में एक महिला के साथ ऐसा चमत्कार हुआ जिसके बारे में जानकर हर कोई हैरान है. इतनी ऊंचाई से गिरने के बाद भी यह महिला जिंदा बच गई. सोशल मीडिया पर वीडियो भी सामने आया है, जिसे देखकर लोगों के रोंगटे खड़े हो गए.
दिल दहला देने वाला ये हादसा नॉटिंघम के लैंगर एयरफील्ड में हुआ. डेवोन के ओकहैम्पटन की रहने वाली 35 साल की हॉली विफेन (Holly Wiffen) अपने दोस्तों के साथ स्काईडाइविंग करने गई थीं. सभी 12 हजार फीट की ऊंचाई से प्लेन से कूदे थे.
हवा में ही बेहोश होकर गिरने लगीं
मिरर यूके की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हवा में ही ट्रैकिंग करते वक्त एक दूसरे स्काईडाइवर का पैर जोर से हॉली के सिर पर लग गया. टक्कर इतनी तेज थी कि हॉली हवा में ही बेहोश हो गईं और 150 की स्पीड से नीचे गिरने लगीं. उनके साथी ने उन्हें पकड़ने की कोशिश की, पर पकड़ नहीं पाया.
पेड़ ने बचा ली जान
किस्मत अच्छी थी कि नीचे एक घना पेड़ था. हॉली सीधे जमीन पर गिरने की जगह पेड़ से टकरा गईं. पेड़ की टहनियों ने गिरने की रफ्तार को कम कर दिया और उनकी जान बच गई. जब होश आया तो वो जमीन पर पड़ी थीं और उनका पैर मुड़ा हुआ था.
होश आते ही बोली- फिर करूंगी स्काईडाइविंग
इस हादसे में हॉली की रीढ़ की हड्डी टूट गई और पैर में भी गंभीर चोटें आईं. हालांकि, मौत को इतने करीब से देखने के बाद भी हॉली का हौसला नहीं टूटा है. उनका कहना है कि ठीक होते ही वो दोबारा स्काईडाइविंग करेंगी
😱 WATCH IT IF YOU DARE. A SKYDIVER GETS KNOCKED OUT COLD AND PLUMMETS 10,000FT WITH NO CHUTE OPEN… AND WALKS AWAY ALIVE! 🪂
A skydiver gets knocked UNCONSCIOUS in mid-air and then drops 10,000ft with no parachute open. Her fellow jumpers can only watch, helpless, as she… pic.twitter.com/8AcObCurxS
खराब खानपान और बिगड़ती जीवनशैली का असर अब सिर्फ वयस्कों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बच्चों और बुजुर्गों की सेहत भी इससे प्रभावित हो रही है। कम उम्र में ही बच्चों में मोटापा, प्रीडायबिटीज और टाइप-2 डायबिटीज जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में फिट रहने और वजन कंट्रोल करने के लिए लोग कई तरह के शॉर्टकट अपना रहे हैं जिनमें से एक है रस्सी कूदना। इन दिनों सोशल मीडिया पर रस्सी कूदने (Rope Skipping) से जुड़े वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें दावा किया जाता है कि रोजाना रस्सी कूदने से वजन कम होता है, हाइट बढ़ती है और शरीर पूरी तरह फिट रहता है। लेकिन क्या इन दावों के पीछे वैज्ञानिक आधार भी है या यह सिर्फ आधी-अधूरी जानकारी है?
होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. मनदीप दहिया के अनुसार रस्सी कूदना एक बेहतरीन कार्डियो एक्सरसाइज है,जो केवल वजन घटाने या हाइट बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे शरीर को सक्रिय रखने वाली एक प्रभावी कार्डियो एक्सरसाइज है। नियमित रूप से रस्सी कूदने से हृदय, फेफड़े, मांसपेशियां और शरीर की कार्यक्षमता बेहतर हो सकती है। हालांकि, वीडियो में किए गए कुछ दावों के वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं। आइए जानते हैं कि रोजाना 100 बार रस्सी कूदने से शरीर पर क्या असर पड़ता है, किन फायदों के पीछे वैज्ञानिक आधार मौजूद है और किन दावों को सावधानी के साथ समझने की जरूरत है।
लिंफेटिक सिस्टम रहता है एक्टिव
रोजाना अगर आप रस्सी कूदते हैं तो लिंफेटिक सिस्टम एक्टिव रहता है। यह सिस्टम शरीर से अतिरिक्त तरल पदार्थ, अपशिष्ट और संक्रमण से लड़ने वाली कोशिकाओं के परिवहन में भूमिका निभाता है। वैज्ञानिक रूप से यह सही है कि शारीरिक गतिविधि और मांसपेशियों की गतिविधि लिंफ के प्रवाह को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है, लेकिन यह कहना सही नहीं होगा कि रस्सी कूदने से शरीर के सभी संक्रमण खत्म हो जाते हैं। Journal of Applied Physiology और हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के शोध के अनुसार जब हम रस्सी कूदते हैं, तो शरीर में ऊपर-नीचे की गति होती है। यह मोशन लिंफेटिक वाल्व्स को तेजी से खोलने और बंद करने में मदद करता है, जिससे शरीर के टॉक्सिन और संक्रमण से लड़ने वाली WBCs (श्वेत रक्त कोशिकाएं) पूरे शरीर में तेजी से सर्कुलेट होती हैं। हालांकि,यह सभी संक्रमणों का इलाज नहीं है, बल्कि यह आपकी आंतरिक सुरक्षा प्रणाली को सक्रिय करता है।
वजन घटाने और बॉडी को फिट रखने में मिलती है मदद
Harvard Health Publishing के डेटा के अनुसार, रस्सी कूदने को दुनिया के सबसे कुशल कैलोरी-बर्निंग वर्कआउट्स में गिना जाता है। रस्सी कूदना हाई-इंटेंसिटी कार्डियो एक्सरसाइज है, जिससे कैलोरी तेजी से बर्न होती है। अगर इसे संतुलित आहार और नियमित व्यायाम के साथ किया जाए तो वजन कम करने और शरीर की फिटनेस सुधारने में मदद मिल सकती है। यह मेटाबॉलिज्म बढ़ाने और स्टेमिना बूस्ट करने में असरदार साबित होती है।
रस्सी कूदने से बच्चों की बढ़ सकती है हाइट
रस्सी कूदने से थायरॉयड और पिट्यूटरी ग्लैंड बेहतर काम करते हैं, जिससे हाइट बढ़ सकती है। हालांकि मेडिकल साइंस के मुताबिक किसी व्यक्ति की लंबाई खासतौर पर आनुवंशिक (Genetics) और ग्रोथ प्लेट्स पर निर्भर करती है। ग्रोथ प्लेट्स बंद होने के बाद केवल रस्सी कूदने से लंबाई नहीं बढ़ती।
मेंटल हेल्थ और एनर्जी के स्तर पर पड़ता है असर
नियमित रस्सी कूदने से शरीर में एंडोर्फिन जैसे फील गुड हार्मोन निकलते हैं, जिससे तनाव कम हो सकता है और मूड बेहतर हो सकता है। यह एकाग्रता बढ़ाने, थकान कम करने और मानसिक सेहत सुधारने में मदद कर सकती है। हालांकि मेडिकल साइंस रस्सी कूदने को डिप्रेशन या दूसरी मानसिक रोगों का इलाज नहीं बताता।
हार्मोनल हेल्थ पर होता है असर
American Journal of Psychiatry और वैश्विक पीसीओएस (PCOS) गाइडलाइन के अनुसार, रस्सी कूदने जैसी हाई-इंटेंसिटी एक्सरसाइज शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस को कम करती है। इंसुलिन का स्तर सुधारने से PCOS, PCOD के लक्षण और हार्मोनल असंतुलन को मैनेज करने में मदद मिलती है।रस्सी कूदने से थायराइड समेत हार्मोनल असंतुलन जैसी समस्याएं ठीक हो सकती हैं। वैज्ञानिक दृष्टि से नियमित व्यायाम हार्मोनल हेल्थ को बेहतर बनाने में मददगार हो सकता है और पीसीओएस में वजन कंट्रोल रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि रस्सी कूदना इन बीमारियों का इलाज नहीं है, इन स्थितियों में डॉक्टर की सलाह और उचित उपचार जरूरी है।
इम्यूनिटी मजबूत करने में मिलती है मदद
नियमित रूप से रस्सी कूदने से इम्यूनिटी मजबूत होती है। रोज अगर आप रस्सी कूदते हैं तो रक्त संचार बढ़ता है और बॉडी एक्टिव रहती है। लेकिन यह दावा करना कि इससे कैंसर, अस्थमा या हर तरह के संक्रमण ठीक हो जाते हैं, वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है।
रस्सी कूदने का सही तरीका
डॉ. मनदीप के अनुसार रस्सी कूदने की शुरुआत सुबह खाली पेट या शाम को भोजन से लगभग तीन घंटे पहले की जा सकती है। शुरुआत में 10–20 जंप करें और धीरे-धीरे संख्या बढ़ाएं। एक्सरसाइज से पहले पर्याप्त पानी पीना जरूरी है।
किन लोगों को बरतनी चाहिए सावधानी?
यदि किसी व्यक्ति को हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, जोड़ों की गंभीर समस्या या दूसरी हेल्थ प्रॉब्लम हैं तो रस्सी कूदना शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। जिन लोगों को गंभीर हृदय रोग, हार्ट वाल्व की समस्या, घुटनों या टखनों में गंभीर दर्द, ऑस्टियोपोरोसिस या हाल ही में सर्जरी हुई हो, उन्हें बिना चिकित्सीय सलाह के रस्सी कूदना शुरू नहीं करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को भी डॉक्टर की सलाह के बाद ही ऐसी एक्सरसाइज करनी चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह लेख वीडियो में दिए गए दावों और उपलब्ध वैज्ञानिक जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। किसी भी बीमारी के उपचार या नई एक्सरसाइज शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।
रूस में एक ऐसी खोज हुई है जिसने इतिहासकारों को भी हैरान कर दिया है. मॉस्को से तकरीबन 114 किलोमीटर दूर कोलोम्ना नाम के शहर में खुदाई चल रही थी, तभी जमीन के अंदर से एक मिट्टी का मटका निकला. इस मटके के अंदर था चांदी के 2600 सिक्कों का खजाना, जिसे देखकर ऐसा लगता है कि इसे किसी ने बड़ी ही सावधानी के साथ जमीन में छुपाया था.
रूस की एकेडमी ऑफ साइंसेज के आर्कियोलॉजी इंस्टीट्यूट का कहना है कि यह खजाना 14वीं-15वीं सदी का है और सबसे दिलचस्प बात ये कि इसमें 350 से ज्यादा सिक्के तो ऐसे हैं जिनका डिजाइन पहले कभी दुनिया के सामने आया ही नहीं.
क्या है इस सिक्के की कहानी?
उस जमाने में कोलोम्ना कोई मामूली शहर नहीं था, बल्कि आसपास के इलाके का दूसरा सबसे रईस और ताकतवर शहर हुआ करता था. एक्सपर्ट्स का अंदाजा है कि इतनी बड़ी दौलत किसी बहुत बड़े व्यापारी की या फिर किसी बड़े सरकारी अफसर की रही होगी.
शायद उसे किसी खतरे का अंदेशा हुआ और उसने अपना सारा पैसा जमीन में छुपा दिया. खजाने में ज्यादातर सिक्के ‘देंगा’ नाम की पुरानी मुद्रा के हैं. ये सिक्के मॉस्को की राजशाही ने 14वीं सदी के अंत में ढालने शुरू किए थे. हिसाब कुछ ऐसा था दो देंगा से एक कोपेक बनता था, और सौ कोपेक मिलकर एक रूबल. रिसर्चर्स बताते हैं कि इस खजाने के ज्यादातर सिक्के कोलोम्ना में ही ढाले गए थे.
ये सिक्के ग्रैंड प्रिंस वासिली प्रथम (1389-1425) और वासिली द्वितीय (1425-1462) के राज के हैं. उस दौर में मॉस्को और उसके आसपास का पूरा क्षेत्र एक तरह से खुदमुख्तार रियासत की तरह चलता था. इस पूरे खजाने में एक सिक्का सबसे ज्यादा ध्यान खींच रहा है – इस पर उड़ते हुए एक पक्षी की तस्वीर बनी है, और यह वासिली प्रथम के शासन के आखिरी दिनों का बताया जा रहा है.
600 साल बाद खुला राज
इसके अलावा जो 350 से ज्यादा सिक्के मिले हैं, वो इतने अनोखे हैं कि इनका जिक्र आज तक किसी पुराने रिकॉर्ड में नहीं मिलता. अभी एक्सपर्ट्स की टीम इन सिक्कों की धातु और बनावट को बारीकी से परख रही है, क्योंकि ये सिक्के 600 साल पुरानी रूसी अर्थव्यवस्था और व्यापार के कई राज खोल सकते हैं. इतिहासकारों के सामने सबसे बड़ी उलझन यही थी कि आखिर इतनी बड़ी दौलत को कोई जमीन में गाड़कर भूल कैसे सकता है. जवाब सिक्कों की तारीखों में ही छुपा मिला.
मटके में मिले सबसे नए सिक्के 1420 के दशक के आखिरी सालों के हैं और इतिहास पर नजर डालें तो पता चलता है कि 1424 से 1427 के बीच रूस की रियासतों में एक भयानक प्लेग फैला था. जाहिर है, खजाने के मालिक ने महामारी से डरकर अपनी सारी दौलत सुरक्षित रखने के लिए जमीन में गाड़ी होगी. लेकिन बदकिस्मती से वह खुद उसी महामारी की चपेट में आ गया, और उसका यह राज 600 साल तक चुपचाप जमीन के अंदर ही दबा रहा.