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  • पत्नी की आंखों में बस गया दूसरा शख्स, पति की जिंदगी में मचा तूफान; 4 बच्चों का परिवार और पुराना रिश्ता कैसे पहुंचा खतरनाक मोड़ पर?​​​​​​

    पत्नी की आंखों में बस गया दूसरा शख्स, पति की जिंदगी में मचा तूफान; 4 बच्चों का परिवार और पुराना रिश्ता कैसे पहुंचा खतरनाक मोड़ पर?​​​​​​

    छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार जिले के पलारी थाना क्षेत्र का छेरकापुर गांव। गांव की जिंदगी अपनी रफ्तार से चल रही थी। इसी गांव में भकला आडिल अपने परिवार के साथ रहता था। उसका बेटा सुमेर आडिल कभी गलत संगत में पड़कर बिगड़ गया था। गांव की बहू-बेटियों पर उसकी बुरी नजर रहने लगी थी। पिता को चिंता थी कि अगर उसे समय रहते जिम्मेदारी का एहसास नहीं कराया गया तो वह पूरी तरह बर्बादी की राह पर चला जाएगा।

    इसी सोच के साथ भकला ने सुमेर की शादी पड़ोस के गांव की रहने वाली तोपबाई से कर दी।

    भकला को उम्मीद थी कि शादी के बाद पत्नी और परिवार की जिम्मेदारी सुमेर को बदल देगी। उसकी यह उम्मीद काफी हद तक पूरी भी हुई।

    नई दुल्हन आई और बदल गया सुमेर

    शादी के बाद सुमेर का ज्यादातर समय घर में बीतने लगा। नई-नई शादी थी और पत्नी तोपबाई के साथ उसका लगाव बढ़ता गया। दोस्तों के साथ घूमने-फिरने और आवारागर्दी का सिलसिला कम हो गया।

    करीब डेढ़ साल बाद घर में बेटी की किलकारी गूंजी। सुमेर पिता बन गया।

    अब उसके ऊपर पत्नी के साथ बच्चे की जिम्मेदारी भी आ गई थी। धीरे-धीरे परिवार बढ़ता गया और देखते ही देखते सुमेर चार बच्चों का पिता बन गया।

    जिस युवक को उसका पिता कभी गलत संगत से निकालने के लिए शादी के बंधन में बांधना चाहता था, वह अब एक बड़े परिवार की जिम्मेदारी संभाल रहा था।

    पिता की मौत के बाद बढ़ गई जिम्मेदारियां

    समय किसी के लिए नहीं रुकता। सुमेर के पिता भकला की भी मौत हो गई।

    पिता के जाने के बाद परिवार की जिम्मेदारियां और बढ़ गईं। सुमेर अब घर-गृहस्थी और बच्चों के बीच पूरी तरह उलझ गया था।

    उसकी पुरानी कई आदतें जरूर छूट गई थीं, लेकिन शराब पीने की आदत नहीं गई।

    उधर उसके बच्चे भी बड़े होने लगे थे। उसकी बड़ी बेटी हेमलता 18 साल की हो चुकी थी।

    सुमेर की जिंदगी अब घर, परिवार और अपनी आदतों के बीच गुजर रही थी।

    उसे शायद अंदाजा भी नहीं था कि उसके घर के आसपास की दुनिया में एक ऐसा रिश्ता धीरे-धीरे आकार ले रहा है, जो आगे चलकर परिवार के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।

    पड़ोस में रहता था दूध कारोबारी का परिवार

    सुमेर के घर से कुछ दूरी पर संतरू यादव का घर था। संतरू दूध का कारोबार करता था।

    उसका बेटा नरसिंह यादव उर्फ शेरा भी पिता के साथ इसी काम में हाथ बंटाता था।

    नरसिंह का मन पढ़ाई में नहीं लगा तो संतरू ने उसकी पढ़ाई छुड़वा दी और उसे अपने दूध के कारोबार में लगा लिया।

    संतरू का एक और बेटा था, जो रायपुर चला गया था और वहां किसी कंपनी में नौकरी करता था। उसके दूर चले जाने के बाद घर और कारोबार में शेरा ही पिता का मुख्य सहारा रह गया था।

    सुमेर का परिवार और संतरू का परिवार पड़ोस में रहते थे। गांव में रहने वाले परिवारों के बीच मेलजोल होना कोई असामान्य बात नहीं थी।

    लेकिन इसी पड़ोसी रिश्ते के बीच आगे चलकर ऐसी परिस्थितियां पैदा हुईं, जिन्होंने सुमेर और तोपबाई के दांपत्य जीवन को सवालों के घेरे में ला दिया।

    घर की चारदीवारी के भीतर बदलने लगी कहानी

    समय के साथ तोपबाई और नरसिंह के बीच नजदीकियों की चर्चा होने लगी।

    पति-पत्नी के रिश्ते में जब किसी तीसरे व्यक्ति की मौजूदगी का शक पैदा होता है तो घर का माहौल बदलने लगता है। छोटी-छोटी बातों पर विवाद होने लगते हैं और पति-पत्नी के बीच भरोसा कमजोर पड़ने लगता है।

    सुमेर के परिवार में भी परिस्थितियां इसी दिशा में बढ़ती दिखाई दीं।

    जिस घर में कभी चार बच्चों की आवाजें और रोजमर्रा की जिंदगी की हलचल हुआ करती थी, वहां अब रिश्तों को लेकर तनाव का साया मंडराने लगा।

    एक तरफ परिवार, दूसरी तरफ कथित प्रेम

    तोपबाई के सामने एक तरफ उसका पति और चार बच्चों का परिवार था, तो दूसरी तरफ नरसिंह के साथ कथित नजदीकी की कहानी सामने आने लगी।

    सुमेर के लिए यह स्थिति बेहद मुश्किल थी।

    उसने जिंदगी का बड़ा हिस्सा परिवार की जिम्मेदारियां निभाते हुए गुजार दिया था। चार बच्चों की परवरिश और घर की जरूरतों के बीच उसकी अपनी जिंदगी भी बदल चुकी थी।

    लेकिन पत्नी के कथित दूसरे रिश्ते की बात सामने आने के बाद उसके सामने सिर्फ पति-पत्नी का विवाद नहीं था, बल्कि पूरे परिवार के भविष्य का सवाल खड़ा हो गया।

    गांव में रिश्तों की चर्चा होने लगी

    गांव में ऐसी बातें ज्यादा देर तक छिपी नहीं रहतीं। लोगों के बीच कानाफूसी शुरू हो जाती है और एक घर की बात धीरे-धीरे पूरे गांव तक पहुंच जाती है।

    सुमेर और तोपबाई के परिवार में भी कथित रिश्ते को लेकर चर्चाएं होने लगीं।

    हालांकि, किसी भी रिश्ते या आरोप की सच्चाई को केवल चर्चाओं के आधार पर तय नहीं किया जा सकता। लेकिन इतना जरूर था कि पति-पत्नी के बीच विश्वास की स्थिति पहले जैसी नहीं रह गई थी।

    कहानी यहां से हुई और भी गंभीर

    सुमेर की जिंदगी में कभी गलत संगत थी, फिर शादी के बाद उसने खुद को परिवार में समेट लिया था। पत्नी के साथ उसका घर बसा, चार बच्चे हुए और जिम्मेदारियां बढ़ती गईं।

    लेकिन अब वही परिवार एक नए संकट से घिर गया था।

    तोपबाई की जिंदगी में नरसिंह की कथित मौजूदगी ने पति-पत्नी के रिश्ते को प्रभावित किया और घर का माहौल तनावपूर्ण होता चला गया।

    एक तरफ सुमेर था, जिसने परिवार की जिम्मेदारियों में अपनी जिंदगी लगा दी थी। दूसरी तरफ पत्नी के कथित प्रेम संबंध की चर्चा थी।

    आगे इस रिश्ते ने क्या मोड़ लिया और आखिरकार यह मामला किस खतरनाक अंजाम तक पहुंचा, यही इस कहानी का सबसे बड़ा सवाल था।

    नोट: यह कहानी उपलब्ध मूल सामग्री के आधार पर पुनर्लिखी गई है। इसमें आगे की घटना से जुड़े ऐसे तथ्य नहीं जोड़े गए हैं जो आपके दिए गए स्रोत में मौजूद नहीं थे।

  • शादी के 10 दिन बाद ही दुल्हन ने खिलाया ऐसा नशीला खाना कि पूरा परिवार बेहोश, फिर लाखों के गहने लेकर हो गई फरार; पुलिस ने खोला ‘लुटेरी दुल्हन’ गिरोह का राज..​​​​​​

    शादी के 10 दिन बाद ही दुल्हन ने खिलाया ऐसा नशीला खाना कि पूरा परिवार बेहोश, फिर लाखों के गहने लेकर हो गई फरार; पुलिस ने खोला ‘लुटेरी दुल्हन’ गिरोह का राज..​​​​​​

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    उत्तर प्रदेश के गोंडा में दिसंबर की एक रात एक परिवार के लिए जिंदगी भर न भूलने वाली घटना बन गई। कुछ दिन पहले ही जिस लड़की को परिवार ने धूमधाम से बहू बनाकर घर में प्रवेश कराया था, वही कथित तौर पर घर के लोगों को नशीला पदार्थ खिलाकर लाखों रुपये के जेवर और सामान लेकर फरार हो गई।

    सुबह जब परिवार के लोगों को होश आया तो घर का नजारा देखकर उनके होश उड़ गए। बहू गायब थी और घर में रखा कीमती सामान भी नहीं था।

    मामला पुलिस तक पहुंचा तो जांच शुरू हुई और धीरे-धीरे इस कथित ‘लुटेरी दुल्हन’ के पीछे चल रहे गिरोह की कहानी सामने आने लगी।

    शादी के लिए परेशान था परिवार

    गोंडा के खरगूपुर थाना क्षेत्र के रहने वाले बृजभूषण पांडेय की शादी लंबे समय से नहीं हो पा रही थी। परिवार चाहता था कि किसी तरह उनके घर में बहू आए।

    इसी दौरान जोखू नाम का एक बिचौलिया उनके संपर्क में आया। उसने लखीमपुर खीरी की रहने वाली शिवानी उर्फ गोमती देवी नाम की युवती के बारे में बताया।

    बात आगे बढ़ी और दोनों परिवारों के बीच शादी की सहमति बन गई।

    17 दिसंबर को बृजभूषण और शिवानी की शादी धूमधाम से कर दी गई।

    परिवार को उस समय जरा भी अंदाजा नहीं था कि शादी के कुछ ही दिनों बाद उनके घर में ऐसी घटना होने वाली है।

    शादी के बाद शुरू हुए रस्मों के कार्यक्रम

    शादी के बाद घर में सामान्य माहौल था। 21 दिसंबर को विवाह से जुड़े कुछ रस्मोरिवाजों का कार्यक्रम भी रखा गया।

    इस दौरान नवविवाहिता की तरफ से उसका कथित भाई और कुछ अन्य लोग भी घर पहुंचे।

    परिवार के लिए ये लोग मेहमान थे। किसी को उनके इरादों पर संदेह नहीं हुआ।

    दिनभर घर में शादी की खुशियां और रस्मों का माहौल बना रहा।

    लेकिन रात होते-होते कहानी ने अचानक दूसरा मोड़ ले लिया।

    रात के खाने के बाद एक-एक कर बेहोश होने लगे लोग

    पुलिस के मुताबिक, आरोप है कि रात में शिवानी ने अपने पति और ससुराल के दूसरे सदस्यों को खाने में नशीला पदार्थ मिला दिया।

    खाना खाने के बाद परिवार के लोग धीरे-धीरे बेहोशी की हालत में पहुंच गए।

    घर में जब कोई होश में नहीं था, उसी दौरान कथित तौर पर शिवानी ने अपने साथियों को बुलाया।

    इसके बाद घर से शादी का सामान, नकदी और कीमती जेवर निकाल लिए गए।

    आरोप है कि लाखों रुपये के जेवर लेकर नवविवाहिता अपने साथियों के साथ वहां से निकल गई।

    सुबह आंख खुली तो दुल्हन और सामान दोनों गायब

    जब परिवार के लोगों को होश आया तो उन्हें कुछ भी समझ नहीं आया।

    घर में अफरातफरी मच गई।

    सबसे पहले लोगों ने शिवानी को तलाशना शुरू किया, लेकिन वह कहीं नहीं मिली।

    इसके बाद घर में रखे सामान की जांच हुई तो कीमती जेवर और अन्य सामान भी गायब था।

    तब परिवार को समझ आया कि उनके साथ बड़ी धोखाधड़ी हो चुकी है।

    उन्होंने तत्काल पुलिस से शिकायत की।

    पुलिस ने शुरू की जांच

    शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने शादी से जुड़े लोगों, बिचौलिए और नवविवाहिता के संपर्कों की जानकारी जुटानी शुरू की।

    जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को शक हुआ कि यह सिर्फ एक महिला का किया हुआ अपराध नहीं है।

    मामले में कई लोग शामिल हो सकते हैं।

    इसके बाद पुलिस ने शिवानी को गिरफ्तार कर लिया। उसके साथ चार अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया गया।

    तलाशी में मिलीं नशीली गोलियां

    पुलिस के अनुसार, आरोपियों के कब्जे से लूटे गए कथित जेवर और घर का सामान बरामद किया गया।

    इसके अलावा करीब 350 नशीली गोलियां और एक मोबाइल फोन भी बरामद होने की बात सामने आई।

    नशीली गोलियों की बरामदगी ने जांच को और गंभीर बना दिया, क्योंकि पुलिस को शक था कि परिवार को बेहोश करने के लिए इसी तरह के पदार्थ का इस्तेमाल किया गया था।

    बरामद सामान को पुलिस ने जांच का हिस्सा बनाया और आरोपियों से पूछताछ शुरू की।

    पूछताछ में सामने आया कथित गिरोह

    पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि वे एक संगठित गिरोह के तौर पर काम करते थे।

    आरोप है कि गिरोह शादी के लिए परिवार तलाशता था, फिर बिचौलियों के जरिए रिश्ता तय कराया जाता था।

    शादी के बाद मौका देखकर घर में मौजूद लोगों को नशीला पदार्थ खिलाकर बेहोश करने और कीमती सामान लेकर फरार होने की योजना बनाई जाती थी।

    अगर जांच में यह पूरा नेटवर्क सही साबित होता है, तो गोंडा की घटना किसी एक परिवार के साथ हुई अकेली वारदात नहीं बल्कि एक बड़े आपराधिक तरीके का हिस्सा हो सकती है।

    कुछ दिनों की दुल्हन और फिर पुलिस की गिरफ्त

    जिस लड़की को परिवार ने 17 दिसंबर को धूमधाम से बहू बनाकर घर में लाया था, वही कुछ दिनों बाद पुलिस की गिरफ्त में थी।

    परिवार के लिए यह घटना इसलिए भी सदमे वाली थी क्योंकि उन्होंने जिस रिश्ते पर भरोसा करके शादी की थी, उसी रिश्ते के जरिए कथित तौर पर उनके घर को निशाना बनाया गया।

    शादी के बाद घर में आई बहू पर परिवार ने भरोसा किया था। इसी भरोसे का कथित तौर पर फायदा उठाया गया।

    शादी के नाम पर होने वाली ठगी से सावधान

    ऐसे मामलों के बाद शादी के लिए रिश्ते तय करने वाले परिवारों के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वे सामने वाले व्यक्ति की पहचान और पारिवारिक पृष्ठभूमि की अच्छी तरह जांच करें।

    सिर्फ किसी बिचौलिए की बात पर भरोसा करके शादी का फैसला करना जोखिम भरा हो सकता है। पहचान पत्र, स्थायी पता, परिवार और पुराने रिकॉर्ड की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना जरूरी है।

    गोंडा की यह घटना भी यही बताती है कि कभी-कभी अपराधी रिश्ते और भरोसे जैसी भावनात्मक चीजों का इस्तेमाल ही अपने अपराध के लिए हथियार बना लेते हैं।

    नोट: यह कहानी उपलब्ध पुलिस कार्रवाई और आरोपों के आधार पर पुनर्लिखी गई है। आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

  • प्रेम से शुरू हुई थी कहानी, परिवार की रजामंदी से हुई शादी और दो बेटियां भी हुईं; फिर रिश्ते में आई दरारों ने ऐसा मोड़ लिया कि पति की जिंदगी ही खत्म हो गई..​​​​​​

    प्रेम से शुरू हुई थी कहानी, परिवार की रजामंदी से हुई शादी और दो बेटियां भी हुईं; फिर रिश्ते में आई दरारों ने ऐसा मोड़ लिया कि पति की जिंदगी ही खत्म हो गई..​​​​​​

    उत्तर प्रदेश के बदायूं शहर में एक समय ऐसा परिवार था, जिसे देखकर किसी को अंदाजा नहीं होता था कि आने वाले दिनों में उसके भीतर इतनी बड़ी उथल-पुथल मचने वाली है। पति राजकुमार पादरी था और पत्नी निशा एक स्कूल में पढ़ाती थी। दोनों की जिंदगी अपनी दो बेटियों के साथ सामान्य तरीके से चल रही थी।

    राजकुमार की ड्यूटी बदायूं जिला मुख्यालय से करीब 23 किलोमीटर दूर वजीरगंज की एक चर्च में थी। चर्च में जब काम ज्यादा होता तो उसे वहीं रात रुकना पड़ता था। दूसरी ओर निशा सिविल लाइंस इलाके के होली चाइल्ड स्कूल में पढ़ाती थी और स्कूल परिसर में मिले कमरे में परिवार के साथ रहती थी।

    लेकिन जिस रिश्ते की शुरुआत पसंद और पारिवारिक सहमति से हुई थी, वह आगे चलकर गंभीर विवादों से घिर गया।

    ट्रेनिंग के दौरान हुई थी पहली मुलाकात

    राजकुमार और निशा की पहली मुलाकात लखनऊ में हुई थी। दोनों वहां पादरी के काम से जुड़ी ट्रेनिंग के सिलसिले में पहुंचे थे।

    राजकुमार बरेली के रहने वाले रघुवीर मसीह का बेटा था। उसके पिता पुलिस विभाग में वायरलेस मैसेंजर के पद पर बदायूं में तैनात रह चुके थे।

    निशा मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली थी और उसके पिता दयाशंकर भी पादरी थे।

    दोनों की मुलाकातें बढ़ीं तो एक-दूसरे के प्रति लगाव पैदा हो गया। परिवारों के बीच भी पहले से रिश्तेदारी का संबंध था। निशा की बड़ी बहन शारदा की शादी राजकुमार के बड़े भाई दिलीप से हुई थी।

    इसी पारिवारिक रिश्ते के कारण राजकुमार और निशा एक-दूसरे के करीब आए और दोनों ने अपनी पसंद की बात परिवार के सामने रख दी।

    परिवार की सहमति से हुई शादी

    राजकुमार ने लखनऊ में अपनी ट्रेनिंग पूरी कर ली, जबकि निशा किन्हीं कारणों से ट्रेनिंग बीच में ही छोड़कर वापस चली गई।

    इसके बाद दोनों परिवारों की सहमति से वर्ष 2014 में राजकुमार और निशा की शादी हो गई।

    शादी के बाद परिवार बढ़ा और दोनों दो बेटियों के माता-पिता बने। निशा ने स्कूल में नौकरी शुरू की और राजकुमार चर्च की जिम्मेदारियां संभालता रहा।

    शुरुआती समय सामान्य तरीके से गुजरता रहा।

    अलग-अलग जिम्मेदारियों के बीच बढ़ने लगी दूरी

    राजकुमार की ड्यूटी अक्सर घर से दूर रहती थी। वजीरगंज की चर्च में काम होने पर वह रात में वहीं रुक जाता था।

    निशा दूसरी ओर बदायूं में स्कूल की जिम्मेदारी संभालती थी। दोनों अपनी-अपनी जगह व्यस्त रहते थे।

    ऐसे में पति-पत्नी के बीच समय कम मिलने लगा।

    यहीं से रिश्ते में गलतफहमियों और तनाव की शुरुआत होने की बात सामने आती है।

    फिर रिश्ते पर उठने लगे सवाल

    समय बीतने के साथ राजकुमार और निशा के संबंधों में कथित तौर पर तनाव बढ़ता गया। पत्नी के किसी दूसरे व्यक्ति से संबंध होने का शक राजकुमार के मन में पैदा होने की बात कही गई।

    यह शक कितना सही था और इसके पीछे वास्तविक कारण क्या थे, यह जांच का विषय रहा। लेकिन इतना जरूर था कि पति-पत्नी के बीच विश्वास कमजोर पड़ चुका था।

    किसी भी रिश्ते में जब भरोसे की जगह शक ले लेता है तो छोटी-सी बात भी बड़े विवाद का कारण बन सकती है।

    राजकुमार और निशा के मामले में भी हालात धीरे-धीरे गंभीर होते चले गए।

    परिवार के बीच भी बढ़ने लगी बेचैनी

    राजकुमार के परिवार में उसके तीन भाई और दो बहनें थीं। सबसे बड़े भाई रवि की शादी बाराबंकी निवासी अनुराधा से हुई थी। दूसरे भाई दिलीप की शादी निशा की बड़ी बहन शारदा से हुई थी।

    यानी दोनों परिवार पहले से एक-दूसरे से जुड़े हुए थे।

    इस वजह से पति-पत्नी के बीच होने वाले विवाद का असर सिर्फ दोनों तक सीमित नहीं रहता था। परिवार के दूसरे सदस्य भी इस तनाव से प्रभावित होते थे।

    एक सामान्य परिवार अचानक चर्चा में आ गया

    जिस घर में दो बेटियों की हंसी गूंजती थी, वहां अब पति-पत्नी के रिश्ते को लेकर सवाल उठने लगे।

    राजकुमार चर्च में पादरी के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभाता था और निशा स्कूल में अध्यापन करती थी। बाहर से दोनों का जीवन व्यवस्थित दिखाई देता था।

    लेकिन अंदर ही अंदर रिश्ते में क्या चल रहा था, इसकी पूरी तस्वीर बाद की घटनाओं से सामने आई।

    पति की मौत ने पूरे मामले को अचानक गंभीर बना दिया।

    पत्नी पर लगे आरोपों ने मामले को और उलझाया

    राजकुमार की मौत के बाद उसकी पत्नी निशा के कथित संबंधों को लेकर सवाल उठने लगे। आरोप लगाया गया कि पत्नी के किसी अन्य व्यक्ति से संबंध थे और इसी वजह से पति-पत्नी के बीच तनाव पैदा हुआ था।

    हालांकि, किसी भी व्यक्ति पर लगाए गए ऐसे आरोपों को बिना जांच और कानूनी पुष्टि के सच नहीं माना जा सकता।

    पुलिस जांच का उद्देश्य यही होता है कि मौत के पीछे वास्तविक कारण क्या था, किन परिस्थितियों में घटना हुई और उसमें कौन जिम्मेदार था।

    इस कहानी का सबसे दर्दनाक हिस्सा दो बेटियां थीं

    राजकुमार और निशा की दो बेटियां थीं।

    पति की मौत और उसके बाद परिवार में पैदा हुए विवादों का सबसे गहरा असर इन्हीं मासूम बच्चों पर पड़ा।

    बच्चों के लिए मां और पिता का विवाद समझना वैसे ही मुश्किल होता है, लेकिन जब मामला मौत तक पहुंच जाए तो उनकी पूरी दुनिया बदल जाती है।

    एक परिवार, जिसकी शुरुआत आपसी पसंद और पारिवारिक सहमति से हुई थी, समय के साथ ऐसे मोड़ पर पहुंच गया जहां रिश्तों से ज्यादा सवाल और आरोप रह गए।

    शक रिश्ते को किस हद तक ले जा सकता है?

    राजकुमार और निशा की कहानी का सबसे बड़ा सवाल यही है कि किसी रिश्ते में शक पैदा होने के बाद उसे बातचीत और विश्वास से दूर किया जाए या आरोपों और टकराव से।

    पति-पत्नी के रिश्ते में विश्वास टूटने के बाद हालात तेजी से बिगड़ सकते हैं। लेकिन किसी भी गंभीर घटना की जिम्मेदारी तय करने के लिए सिर्फ शक या आरोप पर्याप्त नहीं होते।

    इस मामले ने परिवार, रिश्तों और भरोसे से जुड़े कई सवाल खड़े किए।

    कभी जिस रिश्ते की शुरुआत दो लोगों की पसंद से हुई थी, उसी रिश्ते में बाद में अविश्वास की जगह बन गई। दो बेटियों के माता-पिता बने राजकुमार और निशा की जिंदगी जिस मोड़ पर पहुंची, उसने पूरे परिवार को झकझोर दिया।

    नोट: यह कहानी उपलब्ध सामग्री के आधार पर कहानी शैली में पुनर्लिखी गई है। पत्नी के कथित संबंधों या किसी व्यक्ति की भूमिका से जुड़े आरोपों को न्यायिक पुष्टि के बिना तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।

  • सोशल मीडिया पर बिछा ‘डिजिटल देह व्यापार’ का जाल, वीडियो कॉल से सेक्स ट्रैप तक; पहले भरोसा, फिर पैसे की मांग और आखिर में ब्लैकमेलिंग का खेल​​​​​​

    सोशल मीडिया पर बिछा ‘डिजिटल देह व्यापार’ का जाल, वीडियो कॉल से सेक्स ट्रैप तक; पहले भरोसा, फिर पैसे की मांग और आखिर में ब्लैकमेलिंग का खेल​​​​​​

    कुछ साल पहले तक किसी अनजान व्यक्ति से मिलने या किसी सेवा के लिए संपर्क करने के लिए लोगों को कई तरह के जोखिम उठाने पड़ते थे। लेकिन स्मार्टफोन और सोशल मीडिया ने पूरी तस्वीर बदल दी। अब दोस्ती, बातचीत और मुलाकात से लेकर पैसे के लेनदेन तक सब कुछ मोबाइल स्क्रीन पर हो सकता है।

    इसी डिजिटल दुनिया में साइबर अपराधियों ने ठगी के नए तरीके भी खोज लिए हैं।

    सोशल मीडिया पर आकर्षक तस्वीरों वाली प्रोफाइल, डेटिंग ऐप्स पर दोस्ती के प्रस्ताव और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर निजी बातचीत—इन सबका इस्तेमाल कई मामलों में लोगों को सेक्सटॉर्शन और ऑनलाइन ठगी के जाल में फंसाने के लिए किया जा रहा है।

    यह कहानी किसी एक व्यक्ति या एक जगह की नहीं, बल्कि उस बदलते साइबर अपराध की है, जिसमें अपराधी लोगों की निजी इच्छाओं, जिज्ञासा और भरोसे को अपना हथियार बना लेते हैं।

    एक साधारण फ्रेंड रिक्वेस्ट से शुरू होती है कहानी

    मान लीजिए किसी व्यक्ति को सोशल मीडिया पर एक अनजान महिला की फ्रेंड रिक्वेस्ट आती है। प्रोफाइल पर आकर्षक तस्वीरें लगी हैं और कुछ सामान्य पोस्ट भी दिखाई देती हैं।

    पहले बातचीत शुरू होती है।

    कुछ दिनों तक सामान्य बातें होती हैं। सामने वाला व्यक्ति धीरे-धीरे भरोसा पैदा करता है। इसके बाद बातचीत निजी विषयों तक पहुंचने लगती है।

    यहीं से असली जाल शुरू हो सकता है।

    अपराधी सामने वाले की मानसिक स्थिति और उसकी रुचि को समझने के बाद उसे वीडियो कॉल का प्रस्ताव दे सकते हैं। कई बार बातचीत को जानबूझकर यौन विषयों की तरफ मोड़ा जाता है।

    सामने वाले को लगता है कि वह किसी निजी और भरोसेमंद व्यक्ति से बात कर रहा है।

    लेकिन दूसरी तरफ बैठे लोग उसकी हर गतिविधि रिकॉर्ड कर रहे होते हैं।

    वीडियो कॉल के कुछ मिनट और फिर बदल जाता है पूरा खेल

    कई साइबर ठगी के मामलों में आरोपियों द्वारा वीडियो कॉल का इस्तेमाल किया जाता है। कॉल के दौरान सामने वाले व्यक्ति को ऐसा माहौल दिया जाता है कि वह अपनी निजी गतिविधियां कैमरे के सामने करने लगे।

    उसे लगता है कि यह बातचीत सिर्फ दोनों के बीच है।

    लेकिन कॉल के दूसरी तरफ स्क्रीन रिकॉर्ड हो रही होती है।

    कुछ देर बाद कॉल अचानक कट जाती है।

    फिर फोन पर एक नया मैसेज आता है।

    “तुम्हारी वीडियो हमारे पास है।”

    इसके बाद धमकी शुरू होती है।

    आरोपी कहते हैं कि अगर पैसे नहीं दिए गए तो वीडियो परिवार, दोस्तों या सोशल मीडिया पर भेज दी जाएगी।

    जिस व्यक्ति ने कुछ मिनट पहले इसे निजी बातचीत समझा था, वह अचानक डर और शर्मिंदगी के बीच फंस जाता है।

    पहले छोटा भुगतान, फिर बढ़ती जाती है रकम

    कई मामलों में शुरुआत छोटी रकम से होती है।

    आरोपी कहते हैं कि पैसे भेज दो तो वीडियो डिलीट कर दी जाएगी।

    पीड़ित डरकर पैसे भेज देता है।

    लेकिन इसके बाद मामला खत्म नहीं होता।

    कुछ समय बाद फिर मैसेज आता है कि वीडियो की दूसरी कॉपी मौजूद है या उसे किसी और व्यक्ति तक भेज दिया गया है। फिर एक नई रकम मांगी जाती है।

    पीड़ित दोबारा भुगतान कर देता है।

    यही सिलसिला कई बार चलता रहता है।

    अपराधियों को जब पता चलता है कि व्यक्ति डर चुका है और पैसे देने के लिए तैयार है, तो वे उसकी मजबूरी का फायदा उठाकर लगातार वसूली की कोशिश कर सकते हैं।

    ‘वीडियो कॉल’ के नाम पर एडवांस पेमेंट का खेल

    साइबर ठगी का एक दूसरा तरीका भी सामने आया है।

    सोशल मीडिया या मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर किसी महिला की तस्वीर लगाकर प्रोफाइल बनाई जाती है। बातचीत के बाद वीडियो कॉल या किसी निजी मुलाकात का प्रस्ताव दिया जाता है।

    इसके लिए पहले एडवांस पैसे मांगे जाते हैं।

    कहा जाता है कि भुगतान करते ही कॉल शुरू होगी या मुलाकात तय कर दी जाएगी।

    जैसे ही पैसा भेजा जाता है, सामने वाला व्यक्ति गायब हो जाता है।

    नंबर ब्लॉक कर दिया जाता है और सोशल मीडिया अकाउंट भी बंद कर दिया जाता है।

    पीड़ित के पास केवल ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड और ठगी का एहसास बचता है।

    आकर्षक प्रोफाइल के पीछे कौन है?

    सबसे बड़ी समस्या यही है कि सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली तस्वीर हमेशा वास्तविक व्यक्ति की नहीं होती।

    साइबर अपराधी किसी दूसरे व्यक्ति की तस्वीर चुराकर फर्जी प्रोफाइल बना सकते हैं। कई बार अलग-अलग लोगों की तस्वीरों और जानकारियों का इस्तेमाल करके पूरी नकली पहचान तैयार की जाती है।

    अब एआई और डीपफेक तकनीक के दौर में यह खतरा और बढ़ गया है।

    इसलिए सिर्फ तस्वीर देखकर किसी ऑनलाइन प्रोफाइल पर भरोसा करना खतरनाक हो सकता है।

    ठगी का शिकार होने के बाद पीड़ित अक्सर चुप क्यों रहता है?

    इस तरह के मामलों में सबसे बड़ी समस्या सिर्फ आर्थिक नुकसान नहीं है।

    पीड़ित को डर रहता है कि अगर उसने पुलिस या परिवार को बताया तो उसकी निजी बातचीत या वीडियो सार्वजनिक हो सकती है।

    शर्म और सामाजिक बदनामी का डर उसे चुप रहने पर मजबूर कर सकता है।

    अपराधी इसी डर को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाते हैं।

    वे पीड़ित को यह महसूस कराने की कोशिश करते हैं कि अगर उसने उनकी बात नहीं मानी तो उसकी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी।

    लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे मामलों में अपराधियों को पैसे देना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। एक बार भुगतान करने के बाद भी वे दोबारा पैसे मांग सकते हैं।

    डेटिंग ऐप से लेकर सोशल मीडिया तक फैला खतरा

    आज साइबर ठगी के लिए किसी एक प्लेटफॉर्म की जरूरत नहीं है।

    सोशल मीडिया, डेटिंग ऐप्स, मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और फर्जी वेबसाइटों के जरिए लोगों तक पहुंच बनाई जा सकती है।

    अपराधी अलग-अलग तरीकों से लोगों का भरोसा जीतते हैं और फिर उन्हें निजी बातचीत या वीडियो कॉल की तरफ ले जाते हैं।

    यही कारण है कि ऑनलाइन रिश्तों और अनजान लोगों से बातचीत करते समय सावधानी बेहद जरूरी है।

    अगर ऐसी स्थिति में फंस जाएं तो क्या करें?

    सबसे पहले घबराकर तुरंत पैसे भेजने से बचें। अपराधी अक्सर डर पैदा करके जल्दबाजी में फैसला करवाना चाहते हैं।

    उनके संदेश, फोन नंबर, प्रोफाइल लिंक, भुगतान की जानकारी और स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें। चैट या वीडियो से जुड़े सबूतों को बिना सोचे डिलीट न करें, क्योंकि वे जांच में उपयोगी हो सकते हैं।

    किसी भरोसेमंद परिवार के सदस्य या मित्र को जानकारी दें और साइबर अपराध की शिकायत संबंधित सरकारी साइबर क्राइम व्यवस्था के जरिए करें।

    सबसे जरूरी बात यह है कि पीड़ित को खुद को दोषी मानकर चुप नहीं रहना चाहिए। सेक्सटॉर्शन और डिजिटल ब्लैकमेलिंग में अपराधी पीड़ित के डर का फायदा उठाते हैं।

    डिजिटल दुनिया में सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव

    इंटरनेट ने लोगों को एक-दूसरे से जोड़ना आसान बनाया है, लेकिन इसी सुविधा का इस्तेमाल अपराधी भी कर रहे हैं।

    किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर निजी वीडियो साझा करना, कैमरे के सामने संवेदनशील गतिविधि करना, एडवांस पैसे भेजना या बैंकिंग जानकारी देना भारी पड़ सकता है।

    आज डिजिटल दुनिया में भरोसा करने से पहले पहचान की पुष्टि करना उतना ही जरूरी है जितना वास्तविक जिंदगी में किसी अनजान व्यक्ति से सावधान रहना।

    क्योंकि साइबर अपराध का यह नया चेहरा पहले दोस्ती का हाथ बढ़ाता है, फिर भरोसा जीतता है और अंत में उसी भरोसे को ब्लैकमेलिंग का हथियार बना देता है।

    नोट: यह लेख साइबर अपराध के आम तौर-तरीकों को समझाने के उद्देश्य से पुनर्लिखा गया है। किसी विशेष व्यक्ति या घटना पर आरोप को तथ्य मानने से पहले संबंधित पुलिस या आधिकारिक रिकॉर्ड की पुष्टि जरूरी है।

  • खुद को भगवान का अवतार बताकर बनाता था शिकार, ‘मॉडर्न गुरुकुल’ में चलता था खौफ का खेल; यौनशोषण, ब्लैकमेलिंग और प्रताड़ना के आरोप में बाबा समेत 8 गिरफ्तार..​​​​​​

    खुद को भगवान का अवतार बताकर बनाता था शिकार, ‘मॉडर्न गुरुकुल’ में चलता था खौफ का खेल; यौनशोषण, ब्लैकमेलिंग और प्रताड़ना के आरोप में बाबा समेत 8 गिरफ्तार..​​​​​​

    पुणे के वाघोली में कथित आध्यात्मिक केंद्र पर पुलिस की छापेमारी से मचा हड़कंप, 15 साल से प्रताड़ना झेलने का महिला ने लगाया आरोप; सीसीटीवी से घिरा था आश्रम, गुप्त सुरंग और संदिग्ध दवाइयां मिलने से जांच और गहराई

    पुणे के वाघोली इलाके में 2026 को पुलिस की एक कार्रवाई ने एक कथित आध्यात्मिक केंद्र के पीछे छिपी ऐसी कहानी सामने ला दी, जिसने जांच अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। खुद को भगवान का अवतार बताने वाले राधामोहन मिश्रा उर्फ राधेश्याम मिश्रा और उसके सात सहयोगियों को पुलिस ने यौनशोषण, ब्लैकमेलिंग और अमानवीय प्रताड़ना के आरोपों में गिरफ्तार किया।

    पुलिस के सामने मामला तब आया, जब एक महिला ने शिकायत दर्ज कराई। महिला का आरोप था कि वह करीब 15 वर्षों से इस कथित बाबा के प्रभाव में थी और इस दौरान उसे मानसिक तथा शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया।

    जो जगह बाहर से आध्यात्मिक केंद्र या ‘मॉडर्न गुरुकुल’ के रूप में दिखाई देती थी, पुलिस की जांच में उसके भीतर कई ऐसी चीजें सामने आईं, जिनसे पूरे मामले पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।

    डॉक्टर परिवार की महिला ने दर्ज कराई शिकायत

    शिकायत करने वाली महिला उच्चशिक्षित बताई गई है और उसका संबंध डॉक्टर परिवार से था। महिला के अनुसार, वह वर्षों पहले बाबा के संपर्क में आई थी। धीरे-धीरे बाबा ने उस पर ऐसा मानसिक प्रभाव बना लिया कि वह उसके निर्देशों का विरोध करने की स्थिति में नहीं रही।

    महिला ने पुलिस को बताया कि उसके साथ लगातार मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना की जाती थी।

    आरोप है कि विरोध करने या बाबा की बात न मानने पर उसे बिजली के झटके दिए जाते थे। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि उसे अमानवीय तरीके से प्रताड़ित करते हुए बाबा का मूत्र पीने के लिए मजबूर किया जाता था।

    इन आरोपों ने पुलिस जांच को और गंभीर बना दिया।

    पति से तलाक और संपत्ति पर भी नजर

    महिला ने आरोप लगाया कि बाबा ने धीरे-धीरे उसका ब्रेनवॉश किया और उसे अपने पति से अलग होने के लिए मजबूर किया।

    इसके बाद कथित तौर पर उसकी संपत्ति और गहनों पर भी कब्जा कर लिया गया।

    महिला का दावा है कि बाबा और उसके सहयोगियों ने उसके निजी और आपत्तिजनक वीडियो भी बनाए थे। इन्हीं वीडियो का इस्तेमाल कथित तौर पर उसे ब्लैकमेल करने के लिए किया जाता था।

    यानी महिला के लिए यह सिर्फ धार्मिक आस्था का मामला नहीं रहा था। आरोपों के मुताबिक, धीरे-धीरे उसके निजी जीवन, रिश्तों और संपत्ति पर भी कथित तौर पर नियंत्रण स्थापित कर लिया गया।

    आश्रम में डर का माहौल बनाने का आरोप

    पुलिस के अनुसार, इस कथित आध्यात्मिक केंद्र में अनुयायियों पर मनोवैज्ञानिक नियंत्रण बनाए रखने के लिए डर का माहौल बनाया जाता था।

    आरोप है कि बाबा खुद को सामान्य इंसान नहीं बल्कि भगवान का अवतार बताता था। उसके अनुयायियों में ऐसी धारणा बनाई जाती थी कि उसके आदेशों पर सवाल उठाना या उसका विरोध करना नुकसानदायक हो सकता है।

    इसी मानसिक दबाव के कारण कई लोग कथित तौर पर लंबे समय तक उसके प्रभाव से बाहर नहीं निकल पाए।

    चारों तरफ लगे थे सीसीटीवी कैमरे

    पुलिस ने जब वाघोली स्थित कथित आश्रम में छापा मारा तो वहां सुरक्षा के नाम पर लगाए गए सीसीटीवी कैमरों की संख्या और उनकी व्यवस्था ने अधिकारियों का ध्यान खींचा।

    पूरे परिसर में कैमरे लगे होने की बात सामने आई। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन कैमरों का इस्तेमाल सामान्य सुरक्षा के लिए किया जाता था या फिर वहां रहने वाले लोगों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए।

    जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि क्या अनुयायियों और पीड़ितों को बाहरी दुनिया से संपर्क करने से रोकने के लिए इस व्यवस्था का इस्तेमाल किया जाता था।

    जमीन के नीचे बन रही थी गुप्त सुरंग

    छापेमारी के दौरान पुलिस को परिसर में एक गुप्त सुरंग भी मिली, जो निर्माणाधीन बताई गई।

    सुरंग का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाना था, यह अभी जांच का विषय है। पुलिस इस बात की पड़ताल कर रही है कि क्या इसका संबंध किसी संदिग्ध गतिविधि से था या इसके पीछे कोई दूसरा उद्देश्य था।

    सुरंग मिलने के बाद जांच अधिकारियों ने पूरे परिसर की संरचना और वहां मौजूद दूसरे कमरों की भी बारीकी से जांच शुरू की।

    सैकड़ों संदिग्ध दवाइयों की शीशियां मिलीं

    आश्रम से पुलिस को बड़ी संख्या में दवाइयों की शीशियां भी मिलीं। इन दवाइयों को लेकर भी जांच शुरू कर दी गई है।

    पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ये दवाइयां किसलिए इस्तेमाल होती थीं, किसने इन्हें मंगाया था और क्या वहां रहने वाले लोगों को इन्हें दिया जाता था।

    जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि कहीं अनुयायियों या कथित पीड़ितों को सुस्त या अचेत रखने के लिए किसी नशीले पदार्थ का इस्तेमाल तो नहीं किया जाता था।

    हालांकि, इसका सच फॉरेंसिक और मेडिकल जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

    बाहर से आध्यात्मिक केंद्र, अंदर से कथित नियंत्रण का तंत्र?

    मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, पुलिस कथित आश्रम की गतिविधियों और वहां रहने वाले लोगों के बीच संबंधों की भी पड़ताल कर रही है।

    सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो इतने वर्षों तक यह पूरा तंत्र कैसे चलता रहा और पीड़ित लोग समय रहते बाहर क्यों नहीं निकल पाए?

    मनोवैज्ञानिक नियंत्रण, डर, कथित ब्लैकमेलिंग और सामाजिक अलगाव जैसे तरीके किसी व्यक्ति को लंबे समय तक चुप रहने के लिए मजबूर कर सकते हैं। इसी पहलू को ध्यान में रखते हुए पुलिस आरोपों की अलग-अलग कड़ियों को जोड़ रही है।

    बाबा समेत आठ लोग गिरफ्तार

    पुणे पुलिस ने इस मामले में राधामोहन मिश्रा उर्फ राधेश्याम मिश्रा के साथ उसके सात सहयोगियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अब सभी आरोपियों से पूछताछ कर कथित आश्रम की गतिविधियों और शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच कर रही है।

    महिला द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के साथ-साथ पुलिस को मिले कथित इलेक्ट्रॉनिक और भौतिक साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।

    यह मामला एक बार फिर इस सवाल को सामने लाता है कि धार्मिक आस्था और अंधविश्वास के बीच की सीमा कब किसी व्यक्ति के शोषण का जरिया बन जाती है।

    किसी व्यक्ति को गुरु, साधु या आध्यात्मिक मार्गदर्शक मानना निजी आस्था का विषय हो सकता है, लेकिन जब कथित तौर पर डर, ब्लैकमेल, हिंसा या आर्थिक दबाव के जरिए किसी की जिंदगी पर नियंत्रण स्थापित किया जाए, तो मामला गंभीर अपराध का रूप ले सकता है।

    नोट: यह कहानी उपलब्ध शिकायतों, पुलिस कार्रवाई और लगाए गए आरोपों के आधार पर पुनर्लिखी गई है। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और अदालत के फैसले के बाद ही होगी।

  • एआई बना साइबर अपराधियों का नया हथियार, नकली आवाज से लेकर डीपफेक तक बढ़ा ठगी का खतरा; आने वाले समय में इंसान और मशीन में फर्क करना होगा मुश्किल​​​​​​

    एआई बना साइबर अपराधियों का नया हथियार, नकली आवाज से लेकर डीपफेक तक बढ़ा ठगी का खतरा; आने वाले समय में इंसान और मशीन में फर्क करना होगा मुश्किल​​​​​​

    बैंकिंग एक्सपर्ट्स ने जताई बड़ी चिंता: AI की मदद से साइबर ठगी हुई तेज, अपराधी कुछ ही समय में हजारों लोगों को बना सकते हैं निशाना; भारत में भी बढ़ रहे फ्रॉड के प्रयास

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई ने कुछ ही वर्षों में हमारी जिंदगी को काफी बदल दिया है। पढ़ाई से लेकर कारोबार, स्वास्थ्य, बैंकिंग और मनोरंजन तक, हर क्षेत्र में इसका इस्तेमाल बढ़ रहा है। लेकिन जिस तकनीक को इंसानों की सुविधा के लिए बनाया गया था, वही अब साइबर अपराधियों के हाथ में पहुंचकर एक गंभीर खतरा बनती जा रही है।

    पहले किसी व्यक्ति को ऑनलाइन ठगने के लिए अपराधियों को काफी तैयारी करनी पड़ती थी। उन्हें नकली संदेश लिखने, किसी की आवाज की नकल करने या लोगों का भरोसा जीतने में समय लगता था। अब एआई ने इन सभी कामों को काफी आसान बना दिया है।

    दुनिया भर के बैंक और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ इसी बदलते खतरे को लेकर चिंतित हैं।

    सर्वे में सामने आई चिंताजनक तस्वीर

    साइबर सुरक्षा कंपनी बायोकैच की ओर से 25 देशों के 1,440 बैंकिंग और धोखाधड़ी रोकथाम विशेषज्ञों के बीच किए गए एक सर्वे में एआई और साइबर अपराध को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें सामने आईं।

    सर्वे में 84 प्रतिशत विशेषज्ञों ने माना कि अगले एक साल में एआई आधारित एजेंट साइबर अपराधियों के लिए सबसे बड़ा हथियार बन सकते हैं।

    वहीं 88 प्रतिशत विशेषज्ञों का कहना था कि एआई ने धोखाधड़ी को पहले ही ज्यादा खतरनाक बना दिया है। करीब 72 प्रतिशत विशेषज्ञों को आशंका है कि आने वाले समय में इंसान और एआई के बीच अंतर करना बेहद मुश्किल हो सकता है।

    सर्वे में शामिल 60 प्रतिशत विशेषज्ञों ने यह चिंता भी जताई कि एआई के कारण मौजूदा सुरक्षा उपाय कमजोर पड़ सकते हैं। इसके अलावा 76 प्रतिशत विशेषज्ञों ने अपने क्षेत्र में धोखाधड़ी की गति तेजी से बढ़ने की बात कही।

    भारत में भी बढ़ रहा साइबर फ्रॉड

    भारत में भी स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। सर्वे में शामिल भारतीय बैंकिंग अधिकारियों के मुताबिक पिछले एक साल में धोखाधड़ी के प्रयासों में बढ़ोतरी हुई है।

    करीब 90 प्रतिशत भारतीय बैंकिंग अधिकारियों ने कहा कि उनके क्षेत्र में फ्रॉड के प्रयास बढ़े हैं। वहीं 84 प्रतिशत अधिकारियों ने बताया कि धोखाधड़ी से होने वाला आर्थिक नुकसान भी बढ़ा है।

    इसका एक बड़ा कारण यह है कि अब अपराधियों के पास लोगों को निशाना बनाने के लिए पहले से कहीं ज्यादा तकनीकी साधन मौजूद हैं।

    नकली आवाज सुनकर भी लोग कर रहे हैं भरोसा

    एआई की मदद से किसी व्यक्ति की आवाज की नकल करना अब पहले की तुलना में काफी आसान हो गया है। साइबर अपराधी सोशल मीडिया या इंटरनेट पर उपलब्ध आवाज के नमूनों का इस्तेमाल कर नकली आवाज तैयार कर सकते हैं।

    इसी तरह वीडियो में भी किसी व्यक्ति की शक्ल और आवाज की नकल करके ऐसा कंटेंट तैयार किया जा सकता है, जो पहली नजर में वास्तविक दिखाई दे।

    कल्पना कीजिए कि अचानक आपके फोन पर किसी करीबी रिश्तेदार की आवाज में कॉल आए और वह कहे कि वह मुश्किल में है और तुरंत पैसे चाहिए। अगर आवाज बिल्कुल उसी व्यक्ति जैसी सुनाई दे, तो कई लोग बिना ज्यादा सोचे पैसा ट्रांसफर कर सकते हैं।

    यही एआई आधारित ठगी का सबसे खतरनाक पहलू है।

    अब नकली संदेश पहचानना भी आसान नहीं

    पहले साइबर ठगों के संदेशों में भाषा की गलतियां और अजीब वाक्य अक्सर दिखाई देते थे। इसी वजह से लोगों को कई बार समझ आ जाता था कि संदेश फर्जी है।

    लेकिन एआई ने यह कमजोरी भी काफी हद तक खत्म कर दी है।

    अब अपराधी एआई की मदद से बेहद साफ और स्वाभाविक भाषा में संदेश तैयार कर सकते हैं। ईमेल, मैसेज या सोशल मीडिया चैट को इस तरह लिखा जा सकता है कि वह किसी बैंक, कंपनी, अधिकारी या परिचित व्यक्ति की ओर से आया हुआ लगे।

    इससे आम लोगों के लिए फर्जी और असली संदेश में अंतर करना और कठिन हो सकता है।

    एक साथ हजारों लोगों को निशाना बना सकते हैं बॉट

    एआई आधारित बॉट साइबर अपराधियों के लिए एक और बड़ा हथियार बन सकते हैं।

    जहां पहले किसी अपराधी को एक-एक व्यक्ति से संपर्क करना पड़ता था, वहीं ऑटोमेशन और एआई की मदद से एक साथ बड़ी संख्या में लोगों को संदेश भेजे जा सकते हैं।

    इन संदेशों को अलग-अलग लोगों की जानकारी के आधार पर बदला भी जा सकता है। यानी हर व्यक्ति को एक जैसा संदेश भेजने के बजाय उसके नाम, काम, रुचि या ऑनलाइन गतिविधि के हिसाब से ज्यादा भरोसेमंद संदेश तैयार किया जा सकता है।

    इससे ठगी का दायरा और उसकी गति दोनों बढ़ सकती हैं।

    सोशल मीडिया की जानकारी भी बन सकती है हथियार

    आज लोग सोशल मीडिया पर अपनी जिंदगी से जुड़ी काफी जानकारी साझा करते हैं। तस्वीरें, वीडियो, नौकरी, परिवार, दोस्तों के नाम, यात्रा की जानकारी और रोजमर्रा की गतिविधियां अक्सर सार्वजनिक रहती हैं।

    साइबर अपराधी इसी डिजिटल जानकारी का इस्तेमाल किसी व्यक्ति की प्रोफाइल तैयार करने में कर सकते हैं।

    एआई बड़ी मात्रा में उपलब्ध जानकारी का विश्लेषण करके किसी व्यक्ति की डिजिटल पहचान और व्यवहार को समझने में मदद कर सकता है। इसके बाद उसी जानकारी के आधार पर अधिक विश्वसनीय धोखाधड़ी का प्रयास किया जा सकता है।

    खतरा सिर्फ बैंक खातों तक सीमित नहीं

    एआई आधारित साइबर अपराध का खतरा केवल बैंकिंग सेक्टर तक सीमित नहीं है।

    आम नागरिकों के साथ-साथ कंपनियां, सरकारी संस्थान और बड़े संगठन भी इसका निशाना बन सकते हैं। नकली पहचान, डीपफेक, फर्जी दस्तावेज, सोशल इंजीनियरिंग और डिजिटल ठगी जैसे तरीकों का इस्तेमाल अलग-अलग क्षेत्रों में किया जा सकता है।

    भविष्य में एआई का इस्तेमाल गलत सूचना फैलाने और लोगों की राय को प्रभावित करने जैसे मामलों में भी किया जा सकता है। यही वजह है कि साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ इसे केवल आर्थिक अपराध का मुद्दा नहीं मान रहे हैं।

    विदेशों में फर्जी साइबर फ्रॉड नेटवर्क भी चिंता का विषय

    दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ देशों में साइबर फ्रॉड नेटवर्क को लेकर पहले भी गंभीर आरोप सामने आते रहे हैं। कंबोडिया, वियतनाम और म्यांमार जैसे देशों में भारतीय युवाओं समेत कई लोगों को नौकरी का लालच देकर साइबर फ्रॉड नेटवर्क में फंसाने और उनसे जबरन काम कराने की खबरें सामने आई हैं।

    ऐसे नेटवर्क में फंसाए गए लोगों से बड़े पैमाने पर ऑनलाइन ठगी कराई जाती है। कई मामलों में उनके परिवारों को भी दबाव और आर्थिक प्रलोभन के जरिए इस पूरे नेटवर्क से जोड़ने की कोशिश की जाती है।

    एआई के बढ़ते इस्तेमाल से ऐसे संगठित साइबर अपराध नेटवर्क की क्षमता और भी बढ़ने की आशंका है।

    एआई दुश्मन नहीं, उसका गलत इस्तेमाल असली खतरा

    यह समझना जरूरी है कि एआई अपने आप में न तो अच्छा है और न बुरा। यह एक शक्तिशाली तकनीक है, जिसका इस्तेमाल इंसानों की सुविधा और विकास के लिए किया जा सकता है।

    समस्या तब पैदा होती है जब इसी तकनीक का इस्तेमाल अपराधी लोगों को नुकसान पहुंचाने के लिए करने लगते हैं।

    जिस एआई से बैंकिंग सुरक्षा मजबूत की जा सकती है, उसी से नकली पहचान भी बनाई जा सकती है। जिस तकनीक से आवाज को बेहतर बनाया जा सकता है, उसी से किसी की आवाज की नकल भी की जा सकती है।

    इसलिए आने वाले समय में सिर्फ तकनीक का विकास ही जरूरी नहीं होगा, बल्कि उसके दुरुपयोग से बचने के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और लोगों में जागरूकता भी उतनी ही जरूरी होगी।

    आने वाला दौर और ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकता है

    बायोकैच के सर्वे में सामने आए आंकड़े इस बात की ओर इशारा करते हैं कि साइबर अपराध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। एआई ने अपराधियों को तेज, ज्यादा व्यक्तिगत और बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी करने की क्षमता दे दी है।

    अब जरूरत इस बात की है कि सरकारें, बैंक, टेक कंपनियां और आम नागरिक मिलकर साइबर सुरक्षा को मजबूत करें।

    आम लोगों के लिए सबसे जरूरी है कि किसी भी अचानक आए फोन, वीडियो कॉल या मैसेज पर तुरंत भरोसा न करें। रिश्तेदार या अधिकारी की आवाज सुनाई देने पर भी पैसे भेजने से पहले दूसरे माध्यम से उसकी पुष्टि करें।

    क्योंकि आने वाले समय में सवाल सिर्फ यह नहीं होगा कि “यह आवाज किसकी है?” बल्कि यह भी होगा कि “क्या दूसरी तरफ सच में वही इंसान है?”

    एआई का भविष्य कितना सुरक्षित होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि समाज इस शक्तिशाली तकनीक के इस्तेमाल और उसके दुरुपयोग के बीच कितनी मजबूत सुरक्षा दीवार खड़ी कर पाता है।

  • पत्नी के चरित्र पर शक ने उजाड़ दिया पूरा परिवार, पति ने पुराने मकान में रची हत्या की साजिश;  फिर 5 दिन तक करता रहा गुमशुदगी का नाटक..​​​​​​

    पत्नी के चरित्र पर शक ने उजाड़ दिया पूरा परिवार, पति ने पुराने मकान में रची हत्या की साजिश; फिर 5 दिन तक करता रहा गुमशुदगी का नाटक..​​​​​​

    सूरत की खौफनाक वारदात: बेरोजगारी, हीनभावना और शक ने पति के मन में ऐसा जहर घोला कि जिस पत्नी के साथ 16 साल बिताए, उसी की जान ले ली; अंत में 13 साल के बेटे को लिखे पत्र से खुला पूरा राज

    सूरत की उस शाम को देखकर कोई अंदाजा नहीं लगा सकता था कि कुछ ही घंटों बाद एक हंसता-खेलता परिवार हमेशा के लिए बिखरने वाला है। घर में दो बच्चे थे, मां शिल्पा अपने काम और परिवार को संभाल रही थी और पिता विशाल सालवी भी कभी नौकरी कर परिवार की जिम्मेदारियां निभाता था। लेकिन बेरोजगारी ने धीरे-धीरे उसके भीतर ऐसी हीनभावना और शक पैदा कर दिया, जिसने आखिरकार एक दिन उसे अपनी ही पत्नी का हत्यारा बना दिया।

    यह कहानी सिर्फ एक हत्या की नहीं, बल्कि उस शक की है जिसने पहले पति-पत्नी के रिश्ते को तोड़ा और फिर दो मासूम बच्चों से उनकी मां और पिता दोनों छीन लिए।

    शादी के बाद जिंदगी बिल्कुल सामान्य थी

    सूरत के विशाल सालवी और शिल्पा की शादी साल 2010 में हुई थी। शुरुआती वर्षों में दोनों की जिंदगी सामान्य और खुशहाल रही। शिल्पा एक निजी अस्पताल में डायटिशियन के तौर पर काम करती थी और अपना क्लीनिक भी चलाती थी। विशाल एक हीरा फर्म में नौकरी करता था।

    समय के साथ परिवार बढ़ा और दोनों दो बच्चों के माता-पिता बने। बाहर से देखने पर सब कुछ ठीक नजर आता था।

    लेकिन वक्त के साथ परिस्थितियां बदलने लगीं।

    नौकरी छूटने के बाद बदलने लगा विशाल

    कुछ समय बाद विशाल ने अपनी नौकरी छोड़ दी। इसके बाद लंबे समय तक उसे कोई स्थायी काम नहीं मिला। घर का खर्च और बच्चों की जिम्मेदारी धीरे-धीरे शिल्पा के कंधों पर आ गई।

    शिल्पा चाहती थी कि विशाल दोबारा काम शुरू करे। वह जब भी उसे नौकरी तलाशने के लिए कहती, दोनों के बीच बहस हो जाती।

    बेरोजगारी और आर्थिक तनाव ने विशाल के स्वभाव में चिड़चिड़ापन बढ़ा दिया। वह घर में ज्यादा समय बिताने लगा। इसी दौरान उसके मन में एक और चीज ने जगह बना ली—पत्नी के चरित्र को लेकर शक।

    कोई सबूत नहीं था, फिर भी शक बढ़ता गया

    विशाल को लगने लगा कि शिल्पा का किसी दूसरे व्यक्ति के साथ संबंध है। शिल्पा ने इन आरोपों को नकार दिया, लेकिन विशाल का शक कम नहीं हुआ।

    बताया जाता है कि दोस्तों और आसपास के लोगों की बातें भी उसके मन पर असर डाल रही थीं। अपनी बेरोजगारी और असफलता से पैदा हुई हीनभावना धीरे-धीरे पत्नी के प्रति अविश्वास में बदलती चली गई।

    शिल्पा के लिए पति के ऐसे आरोप बेहद परेशान करने वाले थे। लेकिन उसे शायद यह अंदाजा नहीं था कि यही शक एक दिन उसकी जान ले लेगा।

    20 अप्रैल की वह दोपहर

    20 अप्रैल 2026 को विशाल ने शिल्पा से कहा कि पुराने पुश्तैनी मकान से कुछ सामान लाना है। शिल्पा उसके साथ सलाबतपुरा स्थित उस मकान में चली गई।

    उसे शायद लगा होगा कि रोज की तरह यह भी एक सामान्य काम है।

    लेकिन उस पुराने मकान में उस दिन जो हुआ, उसने पूरे परिवार की जिंदगी बदल दी।

    वहां दोनों के बीच फिर पत्नी के कथित अवैध संबंधों को लेकर बहस शुरू हो गई। शिल्पा ने आरोपों को खारिज किया। बहस बढ़ती चली गई और गुस्से में विशाल ने कथित तौर पर उसका गला दबा दिया।

    कुछ ही देर में शिल्पा की जिंदगी खत्म हो चुकी थी।

    हत्या के बाद शव को बक्से में छिपाया

    हत्या के बाद विशाल घबराया जरूर होगा, लेकिन उसने कथित तौर पर पुलिस से बचने के लिए शव को ठिकाने लगाने की योजना बनाई।

    उसने शिल्पा के शव को लकड़ी के एक बड़े बक्से में रख दिया। इसके बाद बक्से पर सीमेंट की मोटी परत चढ़ा दी, ताकि शव बाहर से दिखाई न दे और बदबू भी कम हो।

    जिस घर में कभी परिवार का सामान रखा जाता था, उसी मकान में अब एक ऐसा राज दफन था, जिसका पता किसी को नहीं था।

    घर लौटकर ऐसे पेश आया जैसे कुछ हुआ ही नहीं

    हत्या के बाद विशाल ने खुद को सामान्य दिखाने की कोशिश की। वह रिश्तेदारों के घर गया और फिर अपने घर लौट आया।

    परिवार और बच्चों के सामने उसने दावा किया कि वह शिल्पा को अस्पताल के पास छोड़कर आया था।

    घरवालों को उस समय शायद उसके चेहरे पर छिपे डर का अंदाजा भी नहीं हुआ।

    लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई थी।

    अगले दिन खुद थाने पहुंचा

    अगले दिन विशाल अपने ससुर प्रदीप कोस्टा के साथ थाने पहुंचा और शिल्पा की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई।

    इसके बाद उसने करीब पांच दिनों तक पत्नी को खोजने का दिखावा किया। वह ऐसा व्यवहार करता रहा जैसे उसे सचमुच अपनी पत्नी के गायब होने की चिंता हो।

    लेकिन पुलिस के अनुसार, इसी दौरान वह चोरी-छिपे पुराने मकान में जाता था।

    उसे डर था कि कहीं शव से आने वाली बदबू किसी को शक न करा दे। इसलिए वह वहां जाकर कथित तौर पर बक्से से निकल रहे तरल पदार्थ को साफ करता और कमरे में रूम फ्रेशनर छिड़कता था।

    हर बार वह यही कोशिश करता कि उस घर के अंदर छिपा सच बाहर न आए।

    पांचवें दिन खुद ही टूट गया

    लगातार पांच दिनों तक यह सब करने के बाद शायद विशाल को एहसास होने लगा कि अब वह ज्यादा समय तक पुलिस से नहीं बच पाएगा।

    फिर उसने एक ऐसा कदम उठाया, जिसने पूरी वारदात का पर्दाफाश कर दिया।

    उसने अपने 13 साल के बेटे को एक हस्तलिखित पत्र दिया।

    पत्र में उसने कथित तौर पर अपनी पत्नी की हत्या की बात स्वीकार की और यह भी लिखा कि शव कहां और किस तरह छिपाया गया है।

    बेटे के हाथ में पहुंचा वह कागज दरअसल उस खौफनाक राज की चाबी बन चुका था, जिसे विशाल पांच दिनों से छिपाने की कोशिश कर रहा था।

    सीमेंट के नीचे मिला मां का शव

    पत्र मिलने के बाद पुलिस पुराने मकान तक पहुंची। वहां जांच शुरू हुई तो सीमेंट से ढका लकड़ी का बक्सा मिला।

    बक्से को खोला गया तो अंदर शिल्पा का सड़ चुका शव बरामद हुआ।

    पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू की। जांच में मोबाइल लोकेशन समेत अन्य साक्ष्यों को भी शामिल किया गया और आखिरकार विशाल को गिरफ्तार कर लिया गया।

    पूछताछ में उसने कथित तौर पर पत्नी की हत्या की बात स्वीकार की और पुलिस को बताया कि पत्नी के चरित्र पर शक तथा अपनी मानसिक कुंठा के कारण उसने यह कदम उठाया।

    एक शक ने दो बच्चों का पूरा संसार उजाड़ दिया

    इस घटना का सबसे दर्दनाक पहलू यह था कि शिल्पा के दो मासूम बच्चे देखते ही देखते अपनी मां और पिता दोनों से दूर हो गए।

    जिस मां के साथ वे रोज की जिंदगी जीते थे, उसकी हत्या हो चुकी थी। और जिस पिता को वे अपना सहारा समझते थे, वह अब जेल पहुंच चुका था।

    आखिरकार बच्चों के नाना प्रदीप कोस्टा उन्हें अपने साथ ले गए।

    एक परिवार जो कभी पति-पत्नी और दो बच्चों के साथ सामान्य जिंदगी जी रहा था, वह कुछ ही दिनों में पूरी तरह बिखर गया।

    इस घटना ने एक बार फिर दिखाया कि बिना किसी ठोस आधार का शक जब जुनून बन जाता है, तो वह सिर्फ रिश्ते नहीं तोड़ता—कभी-कभी पूरे परिवार की जिंदगी तबाह कर देता है।

    नोट: यह कहानी उपलब्ध घटनाक्रम और पुलिस जांच में सामने आए कथित तथ्यों पर आधारित पुनर्लेखन है। किसी आरोपी का दोष अदालत के अंतिम फैसले के बाद ही कानूनी रूप से सिद्ध माना जाएगा।

  • 9 साल तक साबरमती में दफन रहा पत्नी की हत्या का राज, पति ने रची थी गुमशुदगी की झूठी कहानी; दूसरी शादी कर जी रहा था बेफिक्र जिंदगी..​​​​​​

    9 साल तक साबरमती में दफन रहा पत्नी की हत्या का राज, पति ने रची थी गुमशुदगी की झूठी कहानी; दूसरी शादी कर जी रहा था बेफिक्र जिंदगी..​​​​​​

    2017 में नदी से मिला था अज्ञात युवती का शव, पहचान नहीं होने पर कर दिया गया था अंतिम संस्कार; 9 साल बाद मुखबिर की सूचना से खुला राज, पिता ने तस्वीर देखकर पहचानी बेटी

    अहमदाबाद में साल 2017 में सामने आया एक ऐसा मामला, जिसका सच करीब नौ साल तक पुलिस रिकॉर्ड और साबरमती नदी की लहरों में दबा रहा। एक युवती का शव नदी से बरामद हुआ था, लेकिन पहचान नहीं होने के कारण मामला अनसुलझा रह गया। परिवार बेटी के लौटने की उम्मीद लगाए रहा, जबकि उसका पति कथित तौर पर उसकी हत्या के बाद सामान्य जिंदगी जी रहा था।

    करीब नौ साल बाद जून 2026 में अहमदाबाद क्राइम ब्रांच को मिली एक अहम सूचना ने इस पुराने मामले की फाइल दोबारा खोल दी। जांच आगे बढ़ी तो सामने आया कि नदी में मिला अज्ञात शव किसी और का नहीं, बल्कि कोमल सोलंकी का था। पुलिस के मुताबिक, उसकी हत्या उसके पति मिनेश सोलंकी ने की थी और वारदात को छिपाने के लिए पत्नी की गुमशुदगी की झूठी कहानी रची गई थी।

    रथयात्रा के अगले दिन नदी में मिला था युवती का शव

    घटना 26 जून 2017 की है। अहमदाबाद में भगवान जगन्नाथ की 140वीं रथयात्रा के बाद हुई बारिश के कारण साबरमती नदी का जलस्तर बढ़ गया था। अगले दिन सुबह रिवरफ्रंट इलाके में गश्त कर रही फायर ब्रिगेड की मोटरबोट के कर्मचारियों को नदी में एक युवती का शव दिखाई दिया।

    सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को बाहर निकाला गया। पोस्टमार्टम कराया गया, लेकिन युवती के पास ऐसा कोई सामान या दस्तावेज नहीं मिला, जिससे उसकी पहचान हो सके।

    पुलिस ने आसपास के थानों में सूचना भेजी। गुमशुदगी की रिपोर्ट भी खंगाली गई और अखबारों में युवती की पहचान के लिए खबर प्रकाशित कराई गई। इसके बावजूद कई दिनों तक कोई परिवार शव की पहचान करने नहीं पहुंचा।

    करीब सात दिन बाद शव को लावारिस मानते हुए उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया और मामला ठंडे बस्ते में चला गया।

    नौ साल बाद मुखबिर ने दी अहम जानकारी

    जून 2026 में अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के एसआई आरसी शर्मा को एक विश्वसनीय मुखबिर से जानकारी मिली। दावा किया गया कि 2017 में साबरमती नदी से बरामद अज्ञात युवती का शव दरअसल कोमल सोलंकी का था।

    मुखबिर ने यह भी बताया कि कोमल की हत्या उसके पति मिनेश सोलंकी ने की थी। आरोप था कि हत्या के बाद मिनेश ने पत्नी के लापता होने की झूठी शिकायत दर्ज कर पुलिस को गुमराह किया और बाद में दूसरी शादी कर सामान्य जीवन जीने लगा।

    सूचना को गंभीरता से लेते हुए इंस्पेक्टर जेबलिया के निर्देश पर क्राइम ब्रांच ने पुराने रिकॉर्ड खंगालने शुरू किए।

    एक गुमशुदगी की रिपोर्ट ने जोड़ दिए पुराने मामले के तार

    जांच के दौरान पुलिस को कालूपुर थाने में दर्ज कोमल की गुमशुदगी की रिपोर्ट मिली। इसके बाद रिवरफ्रंट पुलिस स्टेशन में 2017 में मिले अज्ञात युवती के शव की फाइल से उसका मिलान किया गया।

    पोस्टमार्टम रिपोर्ट, पुराने दस्तावेज और शव की तस्वीरों की जांच की गई। पुलिस ने तस्वीरें कोमल के पिता को दिखाईं।

    तस्वीर देखते ही पिता की आंखों के सामने नौ साल पुराना दर्द फिर से जिंदा हो गया। उन्होंने शव की पहचान अपनी बेटी कोमल के रूप में की। जिस बेटी के वापस लौटने की उम्मीद परिवार ने वर्षों तक नहीं छोड़ी थी, उसकी मौत की सच्चाई आखिरकार सामने आ गई।

    पुलिस ने चुपचाप पति पर रखी नजर

    पहचान सामने आने के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करने के बजाय आरोपी तक पहुंचने के लिए सावधानी से जांच आगे बढ़ाई। क्राइम ब्रांच ने मिनेश पर निगरानी रखी और उसके पुराने बयानों तथा घटनाक्रम की दोबारा पड़ताल की।

    हिरासत में लेकर पूछताछ की गई तो मिनेश ने शुरुआत में वही पुरानी कहानी दोहराई कि उसकी पत्नी घर छोड़कर चली गई थी। लेकिन पुलिस ने जब उसके सामने पुराने रिकॉर्ड और उपलब्ध साक्ष्य रखे तो पूछताछ का रुख बदल गया।

    पुलिस के अनुसार, इसके बाद मिनेश ने कथित तौर पर हत्या की बात स्वीकार कर ली।

    प्रेम विवाह के बाद शुरू हुआ था विवाद

    पूछताछ में सामने आई कहानी के मुताबिक, मिनेश और कोमल ने प्रेम विवाह किया था। शादी के कुछ समय बाद दोनों के बीच विवाद बढ़ने लगे थे। पुलिस के अनुसार, घरेलू कलह और पत्नी के शक से परेशान होकर मिनेश ने कथित तौर पर उसे रास्ते से हटाने की योजना बनाई।

    25 जून 2017 को भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के दिन मिनेश कोमल को घुमाने के बहाने साबरमती रिवरफ्रंट ले गया। वहां उसने अपने साझा मित्र भावेश को भी बुलाया। बताया गया कि भावेश के सामने ऐसा माहौल बनाया गया, जैसे दोनों के बीच चल रहे विवाद को सुलझाने की कोशिश की जा रही हो।

    रात के अंधेरे में नदी में धक्का देने का आरोप

    पुलिस के मुताबिक, रात बढ़ने के साथ भावेश कुछ दूरी पर चला गया। इसी दौरान मिनेश ने कथित तौर पर कोमल को साबरमती नदी में धक्का दे दिया।

    आरोप है कि कोमल ने मदद के लिए गुहार लगाई, लेकिन मिनेश ने उसे बचाने की कोशिश नहीं की। जब भावेश को घटना का पता चला तो कथित तौर पर उसे भी धमकी दी गई कि अगर उसने किसी को कुछ बताया तो उसकी जान को खतरा होगा।

    डर के कारण भावेश इतने वर्षों तक चुप रहा।

    अगले दिन दर्ज कराई गुमशुदगी की रिपोर्ट

    पुलिस के अनुसार, घटना के बाद मिनेश ने पत्नी के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई। इसी दौरान साबरमती नदी से एक अज्ञात युवती का शव बरामद हुआ, लेकिन किसी को यह पता नहीं था कि वह कोमल थी।

    पहचान नहीं होने के कारण शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस तरह एक तरफ परिवार कोमल के लौटने का इंतजार करता रहा और दूसरी तरफ हत्या का राज सालों तक दबा रहा।

    भावेश ने भी पुलिस के सामने बताई पूरी कहानी

    क्राइम ब्रांच ने इस मामले में भावेश से भी पूछताछ की। पुलिस के अनुसार, भावेश ने घटना की पुष्टि की और बताया कि धमकी के कारण वह करीब नौ वर्षों तक सच सामने लाने की हिम्मत नहीं जुटा सका।

    उसके बयान, आरोपी के कथित कबूलनामे, पुरानी गुमशुदगी की रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों को जांच में शामिल किया गया। इसके बाद पुलिस ने मिनेश के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया।

    इस तरह करीब नौ साल तक अनसुलझा रहा कोमल की मौत का मामला फिर से सामने आया। जिस शव की 2017 में पहचान नहीं हो सकी थी, उसकी पहचान 2026 में हुई और पुलिस ने हत्या के आरोप में उसके पति को गिरफ्तार कर लिया।

    हालांकि, अंतिम दोष सिद्धि अदालत में साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगी।

  • पुरुषों की सेहत के लिए फायदेमंद है सहजन, यौन स्वास्थ्य को लेकर क्या कहती है रिसर्च?​​​​​​

    पुरुषों की सेहत के लिए फायदेमंद है सहजन, यौन स्वास्थ्य को लेकर क्या कहती है रिसर्च?​​​​​​

    सहजन यानी मोरिंगा को पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थ माना जाता है। इसमें कई विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट कंपाउंड पाए जाते हैं। पुरुषों की यौन और प्रजनन सेहत पर सहजन के संभावित प्रभावों को लेकर कुछ रिसर्च हुई हैं, लेकिन अभी इतने मजबूत मानव-आधारित प्रमाण नहीं हैं कि इसे यौनशक्ति बढ़ाने की पक्की दवा कहा जा सके।

    1. यौन स्वास्थ्य को सपोर्ट करने की संभावना

    कुछ पशु अध्ययनों में मोरिंगा की पत्तियों या उनके अर्क के सेवन से पुरुषों के यौन व्यवहार में सुधार देखा गया है। हालांकि, इन परिणामों को सीधे इंसानों पर लागू नहीं किया जा सकता।

    2. टेस्टोस्टेरोन पर हो सकता है असर

    कुछ प्रयोगों में मोरिंगा के अर्क के सेवन के बाद नर जानवरों में टेस्टोस्टेरोन और अन्य प्रजनन हार्मोन्स में बदलाव देखा गया। लेकिन इंसानों में टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने के लिए सहजन को प्रभावी उपचार मानने के लिए पर्याप्त प्रमाण अभी उपलब्ध नहीं हैं।

    3. शुक्राणुओं की सेहत पर रिसर्च

    मोरिंगा और पुरुष प्रजनन क्षमता पर हुई कुछ रिसर्च में शुक्राणुओं की संख्या, गतिशीलता और गुणवत्ता से जुड़े संभावित फायदे सामने आए हैं। वहीं, अलग-अलग अध्ययनों में परिणाम एक जैसे नहीं रहे हैं, इसलिए इसे पुरुष बांझपन का इलाज नहीं माना जा सकता।

    4. एंटीऑक्सीडेंट गुण हो सकते हैं फायदेमंद

    सहजन की पत्तियों में पॉलीफेनॉल और फ्लेवोनॉयड जैसे एंटीऑक्सीडेंट कंपाउंड पाए जाते हैं। एक लैब स्टडी में मोरिंगा के पत्ती अर्क ने मानव शुक्राणुओं में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से जुड़े कुछ संकेतकों को कम किया, लेकिन शोधकर्ताओं ने आगे अध्ययन की जरूरत बताई।

    5. सिर्फ सहजन पर निर्भर रहना सही नहीं

    यौन क्षमता और प्रजनन स्वास्थ्य पर नींद, तनाव, वजन, शारीरिक गतिविधि, शराब या धूम्रपान और कई स्वास्थ्य समस्याओं का प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए केवल सहजन खाने से यौनशक्ति में निश्चित रूप से बढ़ोतरी होगी, ऐसा दावा वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है।

    6. सहजन को डाइट का हिस्सा बना सकते हैं

    सहजन की पत्तियों या फलियों को संतुलित भोजन का हिस्सा बनाया जा सकता है। लेकिन किसी सप्लीमेंट या अर्क का अधिक मात्रा में सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है, क्योंकि अलग-अलग पौधों के हिस्सों और अर्क की मात्रा के अनुसार प्रभाव अलग हो सकते हैं।

    निष्कर्ष: सहजन पुरुषों के लिए पौष्टिक भोजन का हिस्सा हो सकता है और शुरुआती रिसर्च में इसके प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़े कुछ संभावित फायदे सामने आए हैं। लेकिन इसे “यौनशक्ति बढ़ाने की दवा” कहना अभी जल्दबाजी होगी। अगर लगातार सेक्सुअल कमजोरी, इरेक्शन की समस्या या प्रजनन संबंधी परेशानी है, तो इसके पीछे का कारण जानने के लिए डॉक्टर से जांच कराना ज्यादा उचित है।

  • महिलाओं के ब्रेस्ट में दूध कैसे बनता है? जानिए शरीर की यह प्राकृतिक प्रक्रिया..​​​​​​

    महिलाओं के ब्रेस्ट में दूध कैसे बनता है? जानिए शरीर की यह प्राकृतिक प्रक्रिया..​​​​​​

    बच्चे के जन्म के बाद मां के शरीर में ब्रेस्ट मिल्क बनने की प्रक्रिया हार्मोन और बच्चे के स्तनपान से जुड़ी होती है। गर्भावस्था के दौरान ही स्तनों में दूध बनाने वाली ग्रंथियां विकसित होने लगती हैं। डिलीवरी के बाद हार्मोनल बदलाव और बच्चे का स्तनपान दूध बनने और बाहर आने की प्रक्रिया को सक्रिय करते हैं।

    1. गर्भावस्था में ही तैयारी शुरू हो जाती है

    प्रेग्नेंसी के दौरान एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन स्तनों के ऊतकों और दूध बनाने वाली संरचनाओं को विकसित करने में मदद करते हैं। इस दौरान शरीर बच्चे के जन्म के बाद स्तनपान के लिए तैयार होता है।

    2. दूध बनाने का काम प्रोलैक्टिन करता है

    स्तन के अंदर छोटे-छोटे हिस्से होते हैं जिन्हें एल्वियोली कहा जाता है। इन्हीं कोशिकाओं में दूध बनता है। हार्मोन प्रोलैक्टिन दूध के निर्माण को बढ़ावा देता है। बच्चे के स्तनपान करने पर प्रोलैक्टिन का स्तर बढ़ता है, जिससे आगे के लिए दूध बनाने का संकेत मिलता है।

    3. डिलीवरी के बाद दूध बनने की प्रक्रिया तेज होती है

    बच्चे के जन्म के बाद प्लेसेंटा बाहर निकलने पर प्रोजेस्टेरोन और एस्ट्रोजन का स्तर तेजी से कम होता है। इससे प्रोलैक्टिन अपना प्रभाव अधिक प्रभावी ढंग से दिखा पाता है और दूध का उत्पादन बढ़ने लगता है। शुरुआत में मां के स्तनों से निकलने वाला पहला दूध कोलोस्ट्रम होता है, जो सामान्य दूध की तुलना में अलग संरचना वाला होता है।

    4. बच्चे के चूसने से दूध बनने का संकेत मिलता है

    जब बच्चा निप्पल को चूसता है, तो वहां मौजूद नसों के जरिए दिमाग तक संकेत पहुंचता है। इससे प्रोलैक्टिन और ऑक्सीटोसिन जैसे हार्मोन के स्राव में बदलाव होता है। नियमित और प्रभावी स्तनपान दूध की आपूर्ति बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

    5. ऑक्सीटोसिन दूध को बाहर निकालने में मदद करता है

    प्रोलैक्टिन मुख्य रूप से दूध बनाने में मदद करता है, जबकि ऑक्सीटोसिन स्तन के आसपास की मांसपेशी कोशिकाओं को सिकोड़ता है। इससे एल्वियोली में जमा दूध दूध की नलिकाओं के जरिए निप्पल की ओर पहुंचता है। इस प्रक्रिया को लेट-डाउन रिफ्लेक्स या मिल्क इजेक्शन रिफ्लेक्स कहा जाता है।

    6. जितना दूध निकलता है, शरीर उतना उत्पादन करने का संकेत पाता है

    स्तनपान के दौरान दूध का उत्पादन काफी हद तक सप्लाई और डिमांड से जुड़ा होता है। बच्चा जितनी नियमितता से दूध पीता है, या जरूरत पड़ने पर दूध निकाला जाता है, उतना ही शरीर को दूध बनाने का संकेत मिलता रहता है। इसके विपरीत लंबे समय तक दूध न निकलने पर उत्पादन कम हो सकता है।

    7. तनाव भी दूध के बाहर आने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है

    ऑक्सीटोसिन दूध के बाहर आने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कुछ शोधों में तनाव को ऑक्सीटोसिन रिलीज और मिल्क इजेक्शन पर असर डालने वाला कारक पाया गया है। इसलिए स्तनपान कराने वाली मां के लिए आरामदायक और सहयोगी वातावरण उपयोगी हो सकता है।

    निष्कर्ष: ब्रेस्ट मिल्क बनना एक जटिल लेकिन प्राकृतिक हार्मोनल प्रक्रिया है। इसमें गर्भावस्था के दौरान स्तनों का विकास, डिलीवरी के बाद हार्मोनल बदलाव और बच्चे का नियमित स्तनपान—तीनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अगर मां को दूध की मात्रा को लेकर चिंता हो, तो डॉक्टर या प्रमाणित लैक्टेशन कंसल्टेंट से सलाह लेना बेहतर है।