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  • महाभारत के अनसुलझे रहस्य, जिनका जवाब विज्ञान भी आज तक नहीं ढूंढ पाया..?

    महाभारत के अनसुलझे रहस्य, जिनका जवाब विज्ञान भी आज तक नहीं ढूंढ पाया..?

    Mahabharat Facts: हिंदू धर्म में महाभारत को पंचम वेद माना जाता है. यह विश्व के सबसे बड़े महाकाव्यों में से एक है. महाभारत में दिया गया ज्ञान आज भी उतना ही मान्य है, जितना उस समय था. लेकिन क्या महाभारत जितनी हमारे सामने रखी गई है, उतनी ही है? या फिर इससे जुड़े ऐसे कुछ रहस्य हैं, जिनसे आज तक पर्दा नहीं उठ सका है?

    महाभारत से जुड़े ऐसे रहस्यों के बारे में जानने की कोशिश करेंगे, जिनके बारे में अधिकांश लोगों को जानकारी नहीं है. तो चलिए, बिना देरी किए आज की इस वीडियो को शुरू करते हैं.

    18 का रहस्य

    महाभारत का युद्ध हुए यूं तो हजारों वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन आज भी लोगों में इसके प्रति जिज्ञासा बनी हुई है. आज भी इससे जुड़े कई ऐसे रहस्य हैं, जिन पर चर्चा होती रहती है. ऐसा ही एक रहस्य 18 अंक से जुड़ा है. दरअसल, महाभारत में 18 अंक का विशेष महत्व बताया जाता है. महाभारत का युद्ध 18 दिनों तक चला था, जिसमें लाखों योद्धा मारे गए. इसके अलावा कौरवों और पांडवों की कुल 18 अक्षौहिणी सेना थी, जिसमें कौरवों की 11 और पांडवों की 7 अक्षौहिणी सेना थी.

    यही नहीं, ऋषि वेदव्यास द्वारा रचित महाभारत में कुल 18 पर्व बताए गए हैं. हिंदू धर्म में 18 पुराणों का भी विशेष महत्व है. श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान युद्ध के दौरान दिया और गीता में भी 18 अध्याय हैं. इसके अलावा, महाभारत का युद्ध समाप्त होने के बाद कुल 18 प्रमुख योद्धाओं के जीवित बचने की बात कही जाती है. यह सब जानने के बाद इतना तो साफ है कि महाभारत और 18 अंक का गहरा नाता है. लेकिन ऐसा क्यों था, यह आज भी एक रहस्य है.

    क्या आज भी जीवित हैं अश्वत्थामा?

    महाभारत काल का एक ऐसा व्यक्ति, जिसके बारे में माना जाता है कि वह आज भी जीवित है, वह है अश्वत्थामा. अश्वत्थामा कौरवों और पांडवों के गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र थे. उन्होंने महाभारत के युद्ध में कौरवों की ओर से युद्ध किया था. लेकिन युद्ध के अंत में किए गए अपने कर्मों के कारण उन्हें श्राप मिला था.

    पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अश्वत्थामा ने ब्रह्मास्त्र का गलत प्रयोग किया था. इससे भगवान श्रीकृष्ण क्रोधित हो गए और उन्होंने अश्वत्थामा को श्राप दिया कि वह अपने किए गए पापों का बोझ उठाते हुए हजारों वर्षों तक पृथ्वी पर भटकता रहेगा. कहा जाता है कि इसी श्राप के कारण अश्वत्थामा आज भी जीवित हैं और निर्जन स्थानों पर भटक रहे हैं. आज भी कई जगहों पर अश्वत्थामा को देखे जाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन इन दावों की सत्यता का कोई प्रमाण नहीं है.

    विमान और परमाणु अस्त्रों का उपयोग

    ऐसा कहा जाता है कि महाभारत काल में विमान और परमाणु अस्त्रों जैसे शक्तिशाली हथियारों का उपयोग किया गया था. हालांकि, इन दावों को लेकर इतिहासकारों और वैज्ञानिकों के बीच मतभेद हैं. मोहनजोदड़ो की खुदाई में कुछ ऐसे कंकाल मिलने के दावे किए गए हैं, जिनमें रेडिएशन का असर होने की बात कही जाती है. कुछ लोग इसे महाभारत में बताए गए ब्रह्मास्त्र से जोड़ते हैं.

    कहा जाता है कि दुनिया का सबसे पहला परमाणु बम जैसा अस्त्र यानी ब्रह्मास्त्र अश्वत्थामा ने छोड़ा था. यही नहीं, महाभारत के सौप्तिक पर्व में ब्रह्मास्त्र और उसके प्रभाव से जुड़े प्रसंग मिलते हैं. हालांकि, महाभारत काल में वास्तव में विमान या परमाणु बम जैसे आधुनिक अस्त्रों का उपयोग हुआ था या नहीं, यह आज भी रहस्य और बहस का विषय है.

    गांधारी के 100 पुत्र और एक पुत्री का रहस्य

    महाभारत में गांधारी के 100 पुत्रों और एक पुत्री का उल्लेख मिलता है. हालांकि, गांधारी के पुत्रों को लेकर कई लोगों के मन में सवाल रहता है कि आखिर उनका जन्म कैसे हुआ था. महाभारत की कथा के अनुसार, गांधारी ने महल में ऋषि वेदव्यास की सेवा की थी. उनकी सेवा से प्रसन्न होकर वेदव्यास ने उन्हें 100 पुत्रों का वरदान दिया था. लेकिन, जब समय आया तो गांधारी लंबे समय तक गर्भवती रहीं. अंत में उन्होंने एक बड़े मांस-पिंड को जन्म दिया. इसे देखकर गांधारी बहुत दुखी हुईं और उसे फेंकने का विचार किया.

    तब वेदव्यास ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया और उस मांस-पिंड को 100 टुकड़ों में बांटकर अलग-अलग घड़ों में रखने को कहा. गांधारी ने एक पुत्री की भी इच्छा व्यक्त की, जिसके बाद 101 टुकड़े किए गए. कुछ समय बाद इन घड़ों से 100 कौरव राजकुमारों और एक पुत्री का जन्म हुआ. महाभारत में कौरवों की इस बहन का नाम दुश्शला बताया गया है. बाद में उसका विवाह सिंधु नरेश जयद्रथ से हुआ.

    विदेशों के योद्धाओं ने भी लिया था युद्ध में हिस्सा?

    ऐसा भी कहा जाता है कि महाभारत के युद्ध में सिर्फ भारत के ही नहीं, बल्कि दूसरे क्षेत्रों के योद्धाओं ने भी हिस्सा लिया था. महाभारत में अलग-अलग जनपदों और दूर-दराज के क्षेत्रों से आए योद्धाओं और राजाओं का उल्लेख मिलता है. हालांकि, ग्रीस, रोम या अमेरिका जैसे आधुनिक देशों से योद्धाओं के महाभारत युद्ध में शामिल होने का दावा ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित नहीं है. इसी वजह से महाभारत को लेकर यह दावा भी किया जाता है कि यह एक तरह का विश्वव्यापी युद्ध था, लेकिन इसे प्रमाणित करने वाले ठोस ऐतिहासिक साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं.

    तीन चरणों में लिखी गई महाभारत

    महाभारत एक विशाल महाकाव्य है, जिसे तैयार होने में लंबा समय लगा. परंपरा और कुछ विद्वानों के अनुसार, महाभारत के विकास को अलग-अलग चरणों में समझा जाता है. कहा जाता है कि शुरुआती रूप में इसमें 8,800 श्लोक थे, जिसे ‘जय’ कहा गया. इसके बाद इसका विस्तार ‘भारत’ के रूप में हुआ, जिसमें लगभग 24,000 श्लोक बताए गए. अंततः इसका विस्तृत रूप ‘महाभारत’ बना, जिसमें करीब एक लाख श्लोक बताए जाते हैं. इसी वजह से महाभारत को विश्व के सबसे विशाल महाकाव्यों में से एक माना जाता है.

    क्या महाभारत काल में राशियां नहीं थीं?

    ज्योतिष के इतिहास को लेकर यह बात कही जाती है कि प्राचीन भारतीय परंपरा में नक्षत्रों का विशेष महत्व था. वैदिक ज्योतिष में 27 नक्षत्रों का उल्लेख मिलता है. कुछ लोगों का दावा है कि महाभारत काल में आज की तरह 12 राशियों का उपयोग नहीं होता था और ज्योतिष मुख्य रूप से नक्षत्रों पर आधारित था. हालांकि, प्राचीन भारतीय ज्योतिष में राशि और नक्षत्र दोनों की परंपराओं का विकास अलग-अलग चरणों में हुआ है. इसलिए यह कहना कि महाभारत काल में राशियां बिल्कुल अस्तित्व में नहीं थीं, पूरी तरह सही नहीं माना जा सकता. महाभारत और वैदिक साहित्य में ग्रहों, नक्षत्रों और खगोलीय घटनाओं के कई उल्लेख मिलते हैं.

    अभिमन्यु की मौत का सच

    आप यह तो जानते ही होंगे कि अर्जुन के बेटे अभिमन्यु की हत्या चक्रव्यूह में हुई थी. लेकिन इससे जुड़ी कई बातें ऐसी हैं, जिन पर अक्सर चर्चा होती है. महाभारत के अनुसार, अभिमन्यु ने चक्रव्यूह में प्रवेश किया और बेहद वीरता से युद्ध किया. उन्होंने कई योद्धाओं को पराजित किया. अंत में कई महारथियों ने मिलकर उन पर हमला किया.

    कथा के अनुसार, अभिमन्यु के पास उस समय अपने बचाव के लिए पर्याप्त अस्त्र-शस्त्र नहीं बचे थे. इसी दौरान दुर्योधन के पुत्र लक्ष्मण की मृत्यु भी अभिमन्यु के हाथों हुई. इससे कौरव पक्ष और अधिक क्रोधित हो गया था. अंततः द्रोणाचार्य, कर्ण, कृपाचार्य, अश्वत्थामा और कृतवर्मा समेत कई योद्धाओं ने मिलकर अभिमन्यु को घेर लिया. इसके बाद दुशासन के पुत्र ने अभिमन्यु पर अंतिम प्रहार किया और उनकी मृत्यु हो गई.

    महान योद्धा बर्बरीक ने देखा था पूरा युद्ध

    क्या आप उस महान योद्धा के बारे में जानते हैं, जिसके शीश ने महाभारत का पूरा युद्ध देखा था? वह महान योद्धा कोई और नहीं, बल्कि भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक थे. पौराणिक मान्यता के अनुसार, बर्बरीक ने प्रण लिया था कि वह महाभारत के युद्ध में हमेशा हारने वाले पक्ष की ओर से लड़ेंगे. उनके पास तीन ऐसे बाण थे, जिनकी शक्ति असाधारण मानी जाती थी. कहा जाता है कि बर्बरीक की शक्ति को देखकर भगवान श्रीकृष्ण ने ब्राह्मण का भेष धारण करके उनसे दान में उनका शीश मांग लिया.

    बर्बरीक ने बिना किसी संकोच के अपना शीश दान कर दिया. इसके बाद उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से प्रार्थना की कि वह अंत तक महाभारत का युद्ध देखना चाहते हैं. श्रीकृष्ण ने उनकी इच्छा स्वीकार कर ली. पौराणिक कथा के अनुसार, उन्होंने बर्बरीक के शीश को एक ऊंचे स्थान पर स्थापित कर दिया, जहां से बर्बरीक ने महाभारत का पूरा युद्ध देखा. इसी मान्यता के कारण बर्बरीक को आज कई स्थानों पर खाटू श्याम के रूप में पूजा जाता है.

  • पत्नी को वापस पाने की चाह में नरबलि; पड़ोसी की हत्या कर शव का सिर पूजा घर में दफनाया,

    पत्नी को वापस पाने की चाह में नरबलि; पड़ोसी की हत्या कर शव का सिर पूजा घर में दफनाया,

    ओडिशा के बोलांगीर जिले से एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां पत्नी को वापस पाने की इच्छा एक व्यक्ति को कथित तौर पर जघन्य अपराध की ओर ले गई. पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि अपनी पत्नी से अलग रह रहे एक व्यक्ति ने पड़ोसी गांव के रहने वाले एक व्यक्ति की हत्या कर दी और उसका सिर काटकर अपने घर के पूजा कक्ष में दफना दिया. मामला तब उजागर हुआ जब कई दिनों से लापता व्यक्ति का सिर कटा शव एक तालाब से बरामद हुआ. जांच आगे बढ़ी तो पुलिस आरोपी तक पहुंच गई और पूछताछ में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए.

    तालाब से मिला सिर कटा शव

    बोलांगीर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अभिलाष ने कहा कि “आरोपी और मृतक एक-दूसरे को पहले से नहीं जानते थे. संतोष खरसेल से मुलाकात के बाद शत्रुघ्न साहू उसे अपने घर ले गया और उसकी हत्या कर दी.”

    पुलिस के मुताबिक, तेबादामुंडा गांव के रहने वाले 45 वर्षीय संतोष खरसेल 18 अगस्त से लापता थे. परिजन और स्थानीय लोग उनकी तलाश कर रहे थे, लेकिन उनका कोई पता नहीं चल रहा था.

    पिछले सप्ताह मामला उस समय गंभीर हो गया, जब बगड़ा गांव के एक तालाब से संतोष खरसेल का सिर कटा शव बरामद हुआ. शव मिलने की सूचना के बाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की.

    आखिरी बार आरोपी के साथ देखा गया था मृतक

    जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि संतोष खरसेल को आखिरी बार 40 वर्षीय शत्रुघ्न साहू के साथ देखा गया था. इसी आधार पर पुलिस ने साहू को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की. प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि शराब के नशे में हुई बहस के दौरान हत्या हुई थी. हालांकि पुलिस ने जब उससे विस्तृत पूछताछ की तो कहानी का दूसरा पहलू सामने आया.

    पत्नी को वापस पाने की थी चाह

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ में शत्रुघ्न साहू ने स्वीकार किया कि उसकी पत्नी करीब तीन साल पहले उसे छोड़कर चली गई थी. आरोप है कि वह पत्नी को वापस पाने के लिए तंत्र-मंत्र और अंधविश्वास से जुड़ी गतिविधियों में शामिल हो गया था. इसी क्रम में उसने संतोष खरसेल की हत्या की और उसका सिर काटकर अपने पूजा घर में दफना दिया. पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि आरोपी ने यह कदम किसी अंधविश्वासी सलाह या तांत्रिक प्रभाव में उठाया था या नहीं.

    पूजा रूम से बरामद हुआ सिर

    आरोपी के बयान के आधार पर पुलिस उसके घर पहुंची. तलाशी के दौरान घर के पूजा कक्ष में खुदाई की गई, जहां से मृतक का सिर बरामद कर लिया गया. इसके बाद पुलिस ने आरोपी को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया और हत्या में इस्तेमाल हथियार भी बरामद कर लिया.

    पुलिस ने कहा नरबलि एंगल सामने आया

    एसपी ने कहा, “हमने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और हत्या में इस्तेमाल किया गया हथियार भी बरामद कर लिया है.” उन्होंने आगे बताया, “शुरुआत में हमें संदेह था कि आरोपी ने पुलिस को गुमराह करने के लिए मृतक का सिर कहीं फेंक दिया होगा. लेकिन पूजा कक्ष से खुदाई कर सिर बरामद होने के बाद मानव बलि (नरबलि) की आशंका से जुड़ा पहलू सामने आया.”

  • यूपी में बेटे की सरकारी नौकरी लगते ही पिता ने दिखाई राजाओं वाली शान, हाथी पर बैठाकर निकाला जुलूस

    यूपी में बेटे की सरकारी नौकरी लगते ही पिता ने दिखाई राजाओं वाली शान, हाथी पर बैठाकर निकाला जुलूस

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    उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद में हरैया थाना क्षेत्र के अंतर्गत केशवपुर गांव के रहने वाले अवनीश पाण्डेय ने ग्राम पंचायत अधिकारी के पद पर चयनित होकर पूरे जिले का नाम रोशन किया है. बेटे की इस शानदार सफलता पर पिता महेंद्र कुमार पाण्डेय की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. अपनी इस खुशी का इजहार करने के लिए पिता ने एक अनोखा और शाही तरीका अपनाया, जिसकी चर्चा अब पूरे इलाके में हो रही है. 

    संसारीपुर चौराहे पर गाजे-बाजे के साथ एक भव्य स्वागत समारोह आयोजित किया गया. यहां पिता महेंद्र कुमार पाण्डेय ने नवचयनित अधिकारी बेटे अवनीश को बाकायदा हाथी पर बैठाकर पूरे गाजे-बाजे के साथ विजय जुलूस निकाला. ढोल-नगाड़ों की थाप और ग्रामीणों के उल्लास के बीच निकला यह जुलूस हर किसी के लिए कौतूहल और आकर्षण का केंद्र बना रहा.

    स्थानीय लोगों ने फूल-मालाओं से किया स्वागत 

    स्थानीय लोगों ने इस खुशी के मौके पर बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जगह-जगह फूल-मालाओं से अवनीश का स्वागत किया और परिजनों को बधाइयाँ दीं. सोशल मीडिया पर भी पिता-पुत्र के इस खास पल का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे लोग एक पिता के गर्व और सफलता के जश्न का सबसे खूबसूरत दृश्य बता रहे हैं. अवनीश की यह उपलब्धि स्थानीय युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है.

    पूरे गांव में जश्न सा माहौल 

    ग्राम पंचायत अधिकारी के पद पर चयनित हुए अवनीश पाण्डेय को जब उनके पिता महेंद्र कुमार पाण्डेय ने संसारीपुर चौराहे पर हाथी पर बैठाकर ढोल-नगाड़ों के साथ गाँव में प्रवेश कराया, तो यह केवल एक पारिवारिक जश्न भर नहीं रहा. यह ग्रामीण समाज में सफलता, संघर्ष और सम्मान के बदलते आयामों को बयां करती एक ऐतिहासिक घटना बन गई. भारतीय समाज में, विशेषकर ग्रामीण अंचलों में, एक पिता अपनी पूरी ज़िंदगी बच्चों की पढ़ाई और उनके भविष्य को संवारने में खपा देता है. जब वर्षों की वह तपस्या रंग लाती है, तो खुशी का बाँध टूटना स्वाभाविक है.

    पिता का यह बादशाही अंदाज दिखावा नहीं, बल्कि उस अथक परिश्रम और उम्मीदों की जीत का उत्सव है, जो एक साधारण परिवार ने वर्षों तक संजोया था. हाथी की सवारी कोई धन-दौलत का प्रदर्शन नहीं, बल्कि उस असीम गर्व की अभिव्यक्ति है जो एक पिता को उसके बेटे की योग्यता ने दी है.

    औरों के लिए बने प्रेरणा 

    यह वायरल होता वीडियो उन सभी युवाओं की आँखों में एक नया सपना बोता है कि अगर मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो एक दिन उनके माता-पिता का मस्तक भी इसी तरह गर्व से ऊँचा होगा. ग्राम पंचायत अधिकारी के रूप में अवनीश अब व्यवस्था का एक हिस्सा बनने जा रहे हैं. मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि उनकी इस सफलता का सच्चा उत्सव तब और सार्थक होगा जब वह अपने इस पद का उपयोग अपने गाँव और क्षेत्र के विकास के लिए पूरी निष्ठा से करेंगे. फिलहाल, यह पल एक पिता के त्याग और बेटे के समर्पण की उस जीत का है, जिसने बस्ती ही नहीं, पूरे प्रदेश के युवाओं को प्रेरित किया है.

  • पड़ोसियों के घरों को लॉक किया, फिर 70 साल की महिला के घर में लूटपाट, हत्‍या..

    पड़ोसियों के घरों को लॉक किया, फिर 70 साल की महिला के घर में लूटपाट, हत्‍या..

    दिल्‍ली के जंगपुरा इलाके में एक बुजुर्ग महिला की उनके घर में घुसकर हत्‍या कर दी गई. दिल्‍ली पुलिस मामला दर्ज कर जांच में जुट गई है. (फाइल फोटो)

    Delhi Crime News: राजधानी दिल्ली के पॉश इलाके जंगपुरा के पंतनगर में सीनियर सिटीजन महिला की लूटपाट के बाद हुई हत्या से इलाके में हड़कंप मच गया है. मृतक महिला की पहचान प्रीति कुमार के रूप में हुई है, जिनकी उम्र 70 साल बताई जा रही है. वे अकेले अपने घर पर रह रही थीं. सुबह जब उनकी बेटी घर पर पहुंचीं तो देखा कि घर का दरवाजा खुला हुआ है और वह अंदर लहू लुहान हालत में पड़ी हुई हैं. घर से सामान भी गायब थे फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है और आसपास के सीसीटीवी कैमरे को खंगाल रही है, ताकि अपराधियों का पता लगाया जा सके.

    वहीं, इस घटना के बाद सुबह मौके पर पहुंचीं मृतका कि बेटी विजेता अरोड़ा बताती हैं कि सुबह जब वह अपनी मां से मिलने के लिए पंतनगर स्थित घर पहुंचीं तो जो उन्होंने देखा उससे उनके होश उड़ गए. उन्होंने देखा कि मां का पीछे से हाथ बंधा हुआ है और वे बिस्तर पर लहू लुहान पड़ी हुई हैं. घर में सारा सामान बिखरा हुआ था. घर में रखा ज्वेलरी भी गायब था. विजेता बताती हैं कि मेरी मां यहां अकेले रहती थीं. हम लोग मां से मिलने के लिए कभी-कभी यहां आते रहते थे. मेरी मां ने आरोपियों से लड़ने का पूरा प्रयास किया होगा. विजेता ने आगे कहा कि उन्‍हें पूरा विश्वास है कि आरोपी ने उनकी मां का हाथ बांधकर उनका गला दबाकर उन्हें मार दिया है. उसके बाद लूटपाट की वारदात को अंजाम देकर यहां से फरार हो गए. विजेता ने बताया कि उनकी मां की उम्र 70 साल थी.

    1985 से इसी घर में रह रही थीं बुजुर्ग महिला

    मृतक बुजुर्ग की बेटी विजेता ने बताया कि 1985 से उनकी मां यहां पर अकेले ही रह रही थीं. वे बताती हैं कि जब वे लोग छोटे-छोटे थे तब उनके पिताजी का देहांत हो गया था. उसके बाद उनकी मां ने ही यहां अकेले रहकर उनका पालन-पोषण किया. पढ़ा-लिखा कर शादी कर दी. इसके बाद भी वह यहां अकेले ही रहा करती थीं. वहीं, आसपास के लोगों ने बताया कि अपराधियों ने इस अपराध को अंजाम देने से पहले आसपास के कई मकान का गेट बाहर से बंद कर दिया था. उसके बाद उसने इस वारदात को अंजाम दिया. इस घटना के बाद से पास-पड़ोस के लोग बेहद डरे हुए हैं.

    CCTV कैमरों को खंगाल रही पुलिस

    बेटियों की शादी के बाद बुजुर्ग महिला अकेले रह रही थीं. घटना के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है. आसपास के सीसीटीवी कैमरों को खंगाला जा रहा है. पुलिस लूटपाट और हत्या से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है. फिलहाल घटना को लेकर इलाके में सनसनी फैली हुई है. पुलिस मामले की जांच में जुटी है और वारदात से जुड़े सुराग तलाशे जा रहे हैं. जंगपुरा जैसे पॉश इलाके में एक बुजुर्ग महिला की हत्या के बाद सीनियर सिटीजन की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. मृतका के दामाद दीपक ने बताया कि सीनियर सिटीजन की सुरक्षा के लिए सरकार को कुछ करना चाहिए. प्रीति कुमार ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा इसी घर में बिताया था. पति की मौत के बाद उन्होंने अकेले अपनी दोनों बेटियों को पाला और उनकी शादी की.

  • ‘बुरी नजर’ उतारने के बहाने ट्रांसजेंडर बनकर घर में घुसा, फिर बेडरूम में ले जाकर किया एयर होस्टेस का यौन उत्पीड़न, 4 घंटे में गिरफ्तारी..

    ‘बुरी नजर’ उतारने के बहाने ट्रांसजेंडर बनकर घर में घुसा, फिर बेडरूम में ले जाकर किया एयर होस्टेस का यौन उत्पीड़न, 4 घंटे में गिरफ्तारी..

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    मुंबई के पवई इलाके में एक 25 वर्षीय एयर होस्टेस के साथ कथित तौर पर यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया है. आरोप है कि एक शख्स ट्रांसजेंडर बनकर महिला के फ्लैट में दाखिल हुआ था. उसने महिला और उसके अस्पताल में भर्ती पति पर कथित ‘बुरी नजर’ का असर होने की बात कही और उसे दूर करने का दावा किया. इसी बहाने आरोपी महिला के घर के अंदर पहुंचा और फिर बेडरूम में ले जाकर उसके साथ यौन हिंसा की.

    घटना 18 अगस्त को दोपहर करीब 12.20 बजे से 12.50 बजे के बीच की बताई जा रही है. आरोपी की पहचान 28 वर्षीय अनिल शेषराव शिंदे के रूप में हुई है. पुलिस के मुताबिक, वह ट्रांसजेंडर व्यक्ति होने का दिखावा करके भीख मांगता था और कलवा के खारेगांव इलाके में रहता है. उसने पहले बिल्डिंग के सिक्योरिटी गार्ड का भरोसा हासिल किया और फिर कई फ्लैट्स के दरवाजे खटखटाए. इसके बाद तीसरी मंजिल पर रहने वाली महिला ने उसका दरवाजा खोला.

    महिला ने पुलिस को बताया कि आरोपी ने घर में आने के बाद ‘बुरी नजर’ उतारने की बात कही. आरोप है कि उसने महिला पर पानी छिड़का और उसके सिर पर हाथ रखा. इसके बाद वह उसे बेडरूम में ले गया और आंखें बंद करके बिस्तर पर लेटने को कहा. महिला के मुताबिक, इसके बाद आरोपी ने उसकी इच्छा के खिलाफ उसका यौन उत्पीड़न किया. महिला के चीखने पर आरोपी वहां से भाग निकला और जाते समय उससे 200 रुपये भी ले गया.

    घटना के बाद महिला काफी सदमे में थी. वह रात करीब 11 बजे पवई पुलिस स्टेशन पहुंची और रोते हुए वहां मौजूद महिला पुलिसकर्मी को पूरी बात बताई. शुरुआत में वह इतनी परेशान थी कि घटना के बारे में ठीक से बोल नहीं पा रही थी. एक महिला पुलिस अधिकारी ने उसे भरोसे में लिया और सुरक्षित माहौल में उसकी बात सुनी.

    इसके बाद पुलिस ने तुरंत आरोपी की तलाश शुरू कर दी और जांच टीम को उसकी पहचान तथा लोकेशन पता लगाने के लिए लगाया गया. पुलिस ने हाउसिंग सोसायटी और आसपास के इलाकों में लगे 100 से ज्यादा CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली. फुटेज में आरोपी को बिल्डिंग से बाहर निकलते और ऑटोरिक्शा से जाते हुए देखा गया. पुलिस ने CCTV के साथ तकनीकी निगरानी और ह्यूमन इंटेलिजेंस की मदद से उसके मूवमेंट को ट्रैक किया.

    जांच में पता चला कि वह ऑटोरिक्शा से सीधे कलवा के एक झुग्गी इलाके की तरफ गया था. इसके बाद पुलिस टीम ने वहां दबिश देकर आरोपी को हिरासत में ले लिया. पुलिस के मुताबिक, शिकायत मिलने के बाद पूरी नाइट ड्यूटी टीम को आरोपी की तलाश में लगाया गया था. करीब चार घंटे के भीतर पुलिस ने उसकी लोकेशन ट्रेस कर ली और उसे पकड़ लिया. आरोपी को 19 अगस्त को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया.

    पवई पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64(1) और 351(2) के तहत केस दर्ज किया है. धारा 64(1) रेप से संबंधित है, जबकि धारा 351(2) आपराधिक धमकी से जुड़ी है. पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने महिला को यह भी धमकी दी थी कि वह उसे नुकसान पहुंचा सकता है. जांच के दौरान पुलिस को यह भी पता चला कि आरोपी वास्तव में ट्रांसजेंडर व्यक्ति नहीं था, बल्कि ट्रांसजेंडर व्यक्ति का रूप धारण करके भीख मांगता था.

    पुलिस अब यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी ने इससे पहले इस तरह की कोई वारदात तो नहीं की. अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी ने पुलिस को बताया कि उसका परिवार भी ट्रांसजेंडर व्यक्तियों का रूप धारण कर भीख मांगने का काम करता है. पुलिस उससे जुड़े पुराने मामलों और उसके संपर्कों की भी जांच कर रही है. पुलिस का कहना है कि मामले में जरूरत पड़ने पर कथित अंधविश्वास या काला जादू से संबंधित प्रावधान भी जोड़े जा सकते हैं.

    मुंबई पुलिस ने इस घटना के बाद लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है. पुलिस ने कहा है कि किसी भी अनजान व्यक्ति को बिना पहचान और उसके घर आने की वजह की पुष्टि किए फ्लैट के अंदर प्रवेश न दें. खास तौर पर भीख मांगने या किसी धार्मिक अनुष्ठान के नाम पर आने वाले लोगों के बारे में पहले सुरक्षा गार्ड या आसपास के लोगों से जानकारी लेनी चाहिए. पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि संदिग्ध गतिविधि नजर आने पर तुरंत पुलिस को इसकी सूचना दें.

  • पत्नी को वापस पाने के लिए नरबलि…खाना खाने के बहाने शख्स को बुलाया, फिर सिर धड़ से कर दिया अलग..

    पत्नी को वापस पाने के लिए नरबलि…खाना खाने के बहाने शख्स को बुलाया, फिर सिर धड़ से कर दिया अलग..

    पत्नी को वापस पाने के लिए नरबलि...खाना खाने के बहाने शख्स को बुलाया, फिर सिर धड़ से कर दिया अलग

    ओडिशा के बोलांगीर ज़िले में देवगांव पुलिस थाना क्षेत्र के बगदा गांव में एक 40 साल के व्यक्ति की कथित तौर पर हत्या कर दी गई और उसका सिर धड़ से अलग कर दिया गया. पुलिस ने इस मामले में 5 लोगों को गिरफ़्तार किया है. मृतक की पहचान बोलांगीर ज़िले के तुसुरा पुलिस थाना क्षेत्र के तेबदमुंडा गांव के रहने वाले संतोष खारसेल के तौर पर हुई है. पुलिस का दावा है कि हत्याकांड को अंजाम पत्नी को वापस पाने के लिए दिया गया.

    खाना खाने के लिए बुलाया और सिर धड़ से कर दिया अलग बोलांगीर के एसपी जी. अभिलाष के मुताबिक मुख्य आरोपी शत्रुघ्न साहू ने कथित तौर पर 18 अगस्त को संतोष को खाना खाने के बहाने अपने घर बुलाया था. पुलिस को शक है कि संतोष के सो जाने के बाद, साहू और उसके कुछ साथियों ने उस पर हमला किया और उसकी हत्या कर दी. जिसके बाद उसका सिर धड़ से अलग कर दिया. जांचकर्ताओं को शक है कि यह अपराध नरबलि और तंत्र-मंत्र से जुड़ा हो सकता है.

    हत्या के बाद आरोपी संतोष के शव को गांव के बाहर ले गए और एक तालाब में फेंक दिया. जबकि उसका कटा हुआ सिरे साहू के घर के पूजा कक्ष में छिपाकर रखा गया था. गुरुवार को स्थानीय लोगों ने तालाब के पास बिना सिर वाला शव देखा और पुलिस को सूचना दी. जिसके बाद देवगांव पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की.

    पुलिस पहुंची तो कर रहा था मेडिटेशन जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि संतोष को आखिरी बार शत्रुघ्न साहू के साथ देखा गया था. इस जानकारी के आधार पर पुलिस की एक टीम साहू के घर पहुंची. उस समय साहू कथित तौर पर घर के अंदर ध्यान (मेडिटेशन) कर रहा था. शुरुआती पूछताछ में उसने पुलिस को बताया कि शराब पीने को लेकर हुए विवाद के बाद संतोष की हत्या की गई थी. हालांकि, आगे की पूछताछ में उसने कथित तौर पर बताया कि संतोष का कटा हुआ सिर पूजा कक्ष में छिपाया गया था.

    इसके बाद आरोपी पुलिस को उस जगह ले गया जहां सिर दबाया गया था. पुलिस ने उस जगह की खुदाई की और संतोष का कटा हुआ सिर बरामद किया. अपराध में इस्तेमाल किया गया खून से सना धारदार हथियार भी ज़ब्त किया गया है. पुलिस ने हत्या के मामले में मुख्य आरोपी शत्रुघ्न साहू समेत 5 लोगों को गिरफ़्तार किया है. साहू की मां, भाई और भाभी को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है, क्योंकि जांचकर्ता घटनाक्रम का पूरा ब्योरा पता लगाने और यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या इसमें और लोग भी शामिल थे.

    पत्नी को वापस पाने के लिए दी बलि पुलिस को शक है कि यह हत्या अंधविश्वास और कथित तंत्र-मंत्र की वजह से की गई हो सकती है. पूछताछ के दौरान, साहू ने कथित तौर पर जांचकर्ताओं को बताया कि उसने अपनी अलग हो चुकी पत्नी को वापस पाने की उम्मीद में यह बलि दी थी. जांच के अनुसार साहू की पत्नी पिछले करीब 10 सालों से अपने बेटे और बेटी के साथ उससे अलग रह रही थी. पुलिस को शक है कि उसके तंत्र-मंत्र या जादू-टोने में शामिल होने की वजह से ही परिवार उससे दूर रहा होगा.

    पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या कथित मानव बलि की योजना साहू ने अकेले बनाई थी या इसमें किसी और की भी मदद ली थी. SP अभिलाष ने बताया कि मुख्य आरोपी ने पूछताछ के दौरान अपना जुर्म कबूल कर लिया है. पुलिस ने आरोपी के घर से पीड़ित का कटा हुआ सिर भी बरामद किया है और जांच के तहत घटनाक्रम को फिर से दोहराकर (री-कंस्ट्रक्शन) जांच की है.

  • पटना में अश्लील वीडियो के काले कारोबार का भंडाफोड़, 1200 से ज्यादा वीडियो के नेटवर्क का ऐसे हुआ खुलासा..

    पटना में अश्लील वीडियो के काले कारोबार का भंडाफोड़, 1200 से ज्यादा वीडियो के नेटवर्क का ऐसे हुआ खुलासा..

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    Bihar Crime: पटना में साइबर अपराधियों के एक ऐसे काले कारोबार का भंडाफोड़ हुआ है, जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। टेलीग्राम ग्रुप्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए आपत्तिजनक और अश्लील वीडियो की खरीद-बिक्री करने वाले एक बड़े रैकेट का खुलासा करते हुए साइबर थाना पुलिस ने एक कपड़ा दुकानदार को धर दबोचा है। आरोपित की पहचान पालीगंज थाना क्षेत्र के धरहरा निवासी अशोक कुमार के रूप में हुई है, जो महज 20 से 30 रुपये के लालच में इस घिनौने दलदल में उतर गया था।

      साइबर डीएसपी सह थानाध्यक्ष संगीता कुमारी ने पूरे मामले का खुलासा करते हुए बताया कि दिल्ली स्थित नेशनल साइबर क्राइम यूनिट (CCUS) से पटना सीसीयूएस को एक संदिग्ध युवक के बारे में गुप्त सूचना और उसका लिंक प्राप्त हुआ था। तकनीकी सर्विलांस और डिजिटल जांच के आधार पर साइबर थाना पुलिस ने तुरंत जाल बिछाया और पालीगंज के धरहरा इलाके में छापेमारी कर अशोक कुमार को रंगेहाथों दबोच लिया। पुलिस ने उसके पास से वह मोबाइल भी बरामद कर लिया है, जिसका इस्तेमाल वीडियो डाउनलोड, अपलोड और शेयर करने के लिए किया जाता था।

      पुलिसिया पूछताछ में आरोपी अशोक ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उसने स्वीकार किया कि वह शुरुआत में खुद पैसे देकर एक टेलीग्राम ग्रुप से जुड़ा था, जिसके बाद उसे दूसरे सिंडिकेट ग्रुप्स में जोड़ दिया गया। इसी नेटवर्क के माध्यम से वह आपत्तिजनक वीडियो खरीदने और बेचने के काले कारोबार में लिप्त हो गया।

      आरोपी सोशल मीडिया पर वीडियो अपलोड या शेयर करने के एवज में 20 से 30 रुपये वसूलता था।पूछताछ में आरोपी ने अब तक 1200 से अधिक ऐसे आपत्तिजनक वीडियो की खरीद-बिक्री करने की बात कबूल की है।वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए हमेशा नए ग्राहकों और खरीदारों की तलाश में रहता था और सैकड़ों वीडियो बेचकर काफी मुनाफा कमा चुका है।

      साइबर पुलिस अब आरोपी के बैंक खातों, यूपीआई ट्रांजैक्शन और डिजिटल वॉलेट की बारीकी से जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसने इस अवैध धंधे से अब तक कुल कितनी दौलत कमाई है और वह कब से इस रैकेट से जुड़ा था। पुलिस इस बात का भी पता लगा रही है कि इस सिंडिकेट के पीछे कौन-से बड़े चेहरे और मास्टरमाइंड छिपे हैं, जिन्हें जल्द ही शिकंजे में लिया जाएगा।

    • सोशल मीडिया से एडमिशन के नाम पर ठगी, पुणे में दो फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, 10 इंजीनियर गिरफ्तार..

      सोशल मीडिया से एडमिशन के नाम पर ठगी, पुणे में दो फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, 10 इंजीनियर गिरफ्तार..

      सोशल मीडिया से एडमिशन के नाम पर ठगी, पुणे में दो फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, 10 इंजीनियर गिरफ्तार

      मुंबई की पवई पुलिस ने देश के नामी इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन दिलाने के नाम पर चल रहे एक बड़े ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है. पुलिस ने पुणे के वडगांव शेरी-लोहगांव और खराड़ी इलाके में चल रहे दो फर्जी कॉल सेंटर पर छापेमारी कर 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है.

      हैरानी की बात यह है कि गिरफ्तार सभी आरोपी इंजीनियरिंग बैकग्राउंड से हैं और इनमें पांच B.Tech इंजीनियर हैं. पुलिस ने आरोपियों के पास से करीब 1 करोड़ 35 लाख रुपये की संपत्ति जब्त की है. यह गिरोह इंस्टाग्राम, फेसबुक समेत दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एडमिशन से जुड़े विज्ञापन देकर छात्रों और अभिभावकों को अपने जाल में फंसाता था.

      पुलिस के मुताबिक आरोपी सोशल मीडिया विज्ञापनों के जरिए इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन की तलाश कर रहे छात्रों और उनके माता-पिता के मोबाइल नंबर और दूसरी जानकारी जुटाते थे. इसके बाद फर्जी नाम और पहचान के जरिए संपर्क कर उन्हें प्रतिष्ठित कॉलेजों में एडमिशन दिलाने का भरोसा दिया जाता था.

      आरोपी खास तौर पर मैनेजमेंट कोटा और एनआरआई कोटा में सीट दिलाने का दावा करते थे और PICT, NSUT, DTU, IIIT Hyderabad समेत कई नामी संस्थानों का नाम इस्तेमाल करते थे. ठगी का तरीका भी बेहद शातिर था। पहले प्रोसेसिंग फीस ली जाती और फिर एडमिशन के अलग-अलग चरण बताकर लगातार रकम वसूली जाती. कुछ मामलों में पीड़ितों को कॉलेज कैंपस तक ले जाकर भरोसा दिलाया जाता था और आरोपी खुद अधिकारियों से मीटिंग के बहाने अंदर चले जाते थे.

      पवई इलाके की एक महिला से उसके बेटे को IIIT Hyderabad में एडमिशन दिलाने के नाम पर करीब 16.50 लाख रुपये ठगे गए. पुलिस के अनुसार यह रकम एक बार में नहीं, बल्कि एडमिशन प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों में ली गई और आखिरी भुगतान जुलाई के अंत में कराया गया. शुरुआती जांच में पुलिस को शक है कि मार्च के पहले सप्ताह से जुलाई के अंत तक करीब 30 से 35 छात्र और अभिभावक इस गिरोह के शिकार हुए.

      पुलिस को संभावित पीड़ितों के मोबाइल नंबरों की एक सूची भी मिली है और अब इन नंबरों तथा आरोपियों के बैंक खातों का विश्लेषण किया जा रहा है. पुलिस का कहना है कि गिरोह कम से कम 2024 से सक्रिय था और मुंबई, नागपुर, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और गुजरात में दर्ज छह मामलों से इसका कनेक्शन सामने आया है.

      पुलिस की जांच में सामने आया कि गिरोह हर एडमिशन सीजन में अलग जगह फर्जी कॉल सेंटर खोलता था और नए मोबाइल नंबर व SIM कार्ड इस्तेमाल करता था. एडमिशन प्रक्रिया खत्म होने या कॉलेजों की अंतिम सूची जारी होने से पहले आरोपी मोबाइल और सिम बंद कर फरार हो जाते थे और अगले सीजन में नया सेटअप शुरू कर देते थे.

      करीब एक महीने की तकनीकी निगरानी और मानवीय सूचनाओं के बाद पुलिस ने नकली कस्टमर बनकर आरोपियों से संपर्क किया और फिर 14 अगस्त को पुणे में कार्रवाई की. Neon Homes और City Vista स्थित दोनों कॉल सेंटर से 22 मोबाइल फोन, लैपटॉप, हार्ड डिस्क, JioBook, डेबिट कार्ड, 23 SIM कार्ड और कॉलेजों से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए. BMW, Jaguar और Ciaz समेत वाहन भी जब्त किए गए हैं.

      पुलिस के मुताबिक ठगी की रकम नकद, ATM और POS मशीनों के जरिए निकाली जाती थी और Cryptocurrency में निवेश किए जाने की बात भी सामने आई है. गिरफ्तार 10 आरोपियों को 15 अगस्त को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 20 अगस्त तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया.

      अब पुलिस फर्जी SIM और बैंक खाते उपलब्ध कराने वालों, सोशल मीडिया विज्ञापन चलाने वालों और संभावित कॉलेज कनेक्शन की जांच कर रही है. कुछ और ठिकानों की जानकारी भी पुलिस को मिली है, जहां आने वाले दिनों में छापेमारी हो सकती है.

    • इन 8 लोगों से कभी नहीं करनी चाहिए दुश्मनी, बढ़ सकती हैं मुश्किलें

      इन 8 लोगों से कभी नहीं करनी चाहिए दुश्मनी, बढ़ सकती हैं मुश्किलें

      आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र में मानव जीवन से जुड़े तमाम पहलुओं का वर्णन किया है। चाणक्य की नीतियां आज भी लोगों के बीच प्रासंगिक है और इन्हें अपनाकर सफलता का रास्ता आसान बनाते हैं। चाणक्य नीति के लिए कहा जाता है कि इसे अपनाना मुश्किल होता है, लेकिन जिसने भी अपना लिया उसे सफलता जरूर प्राप्त होती है। चाणक्य ने नीति शास्त्र में बताया है कि व्यक्ति को किन लोगों से दुश्मनी मोल लेना चुनौतीपूर्ण सिद्ध हो सकता है। चाणक्य कहते हैं कि जीवन में सही रणनीति वही है जहां व्यक्ति को पता होता है कि कौन उसका हितैषी है और कौन दुश्मन। जानें चाणक्य नीति के अनुसार किनसे दुश्मनी नहीं करनी चाहिए।

      1. अग्नि, सर्प, राजा और मूर्ख व्यक्ति:

      श्लोक: राजा अग्निर्महासर्पो मूर्खश्च बहुनायकः।

      अहर्निशं न सेव्यन्तः शीघ्रं कुर्वन्ति सङ्क्षयम्॥

      श्लोक का अर्थ:

      चाणक्य के अनुसार, राजा (प्रशासनिक शक्ति), अग्नि, विषैला सर्प और मूर्ख लोगों से कभी बैर या असावधानी नहीं रखनी चाहिए। यह किसी भी पल विनाश का कारण बन सकते हैं।

      2. भेद को जानने वाला मित्र या रिश्तेदार

      श्लोक: परोक्षे कार्यहन्तारं प्रत्यक्षे प्रियवादिनम्।

      वर्जयेत्तादृशं मित्रं विषकुम्भं पयोमुखम्॥

      श्लोक का अर्थ:

      चाणक्य कहते हैं कि ऐसा व्यक्ति जो सामने मीठी-मीठी बातें करता हो, लेकिन पीठ पीछे काम बिगाड़ता हो, ऐसे लोगों से शत्रुता या लड़ाई नहीं करना परेशानी भरा हो सकता है। चाणक्य कहते हैं कि ऐसे लोग दूध से ढके विष के घड़े के समान हैं। चाणक्य कहते हैं कि जब कोई व्यक्ति आपका भेद जानता हो, तो उससे सीधे तौर पर बैर करने की बजाए उचित दूरी बना लेना समझदारी भरा होता है।

      3. ज्ञानी, वैद्य और शस्त्रधारी:

      चाणक्य कहते हैं कि कभी भी ज्ञानी व्यक्ति, वैद्य और जिस व्यक्ति के पास शस्त्र हो उससे शत्रुता नहीं करनी चाहिए। चाणक्य के अनुसार, वैद्य या डॉक्टर आपकी स्वास्थ्य की हर कमजोरी जानता है और आपके मर्ज के हिसाब से दवा देता है। लेकिन जब आप शत्रुता मान लेते हैं, तो वैद्य के पास जाना छोड़ सकते हैं, जिससे सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। चाणक्य कहते हैं कि ज्ञानी व्यक्ति से दुश्मनी मोल लेना अच्छा नहीं होता है, क्योंकि हो सकता है वह आपको ज्ञान की बातें बताना बंद कर दे। इसी तरह जिस व्यक्ति के पास तुरंत नुकसान या हानि पहुंचाने का साधन या बल हो, उससे टकराव करना आत्मघाती हो सकता है।

    • ओडिशा के गांव में बिगड़ी अमेरिकी टूरिस्ट की तबीयत, इलाज के बाद बिल देखकर रह गए दंग,

      ओडिशा के गांव में बिगड़ी अमेरिकी टूरिस्ट की तबीयत, इलाज के बाद बिल देखकर रह गए दंग,

      अमेरिकी फिल्म निर्देशक माइक नून की ओडिशा यात्रा के दौरान अचानक से तबीयत खराब हो गई। उन्हें तत्काल एक सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनको उचित देखभाल समय पर मिली। माइक ने बताया कि यदि यह स्थिति अमेरिका में होती, तो इलाज की लागत हजारों डॉलर तक पहुंच सकती थी। यह अनुभव भारत की ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करता है।

      माइक नून की ओडिशा यात्रा के दौरान तबीयत बिगड़ गई

      भारत घूमने आए अमेरिकी फिल्ममेकर माइक नून की ओडिशा यात्रा का एक अनुभव सोशल मीडिया पर चर्चा में है। घूमने के दौरान उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और उन्हें इलाज के लिए एक ग्रामीण सरकारी अस्पताल ले जाया गया। जहाँ एक तरफ वह अस्पताल की सुविधाओं और भाषा से बिल्कुल अनजान थे, वहीं दूसरी तरफ उन्हें समय पर इलाज मिला। ठीक होने के बाद उन्होंने इस अनुभव को सोशल मीडिया पर साझा किया और भारत में इलाज की लागत की तुलना अमेरिका से की।

      माइक के मुताबिक़, भारत आने के महज़ पाँचवें दिन उनकी तबीयत बिगड़ी। करीब 12 घंटे तक उन्हें लगातार उल्टियाँ होती रहीं और एक समय ऐसा आया जब लगभग हर 15 मिनट में उल्टी हो रही थी। इसके बाद उन्हें ओडिशा के एक ग्रामीण सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में उन्हें आईवी फ्लूइड, उल्टी रोकने की दवा और इंजेक्शन दिए गए। इलाज के दौरान उन्होंने अस्पताल के बिस्तर से वीडियो बनाकर अपनी स्थिति के बारे में बताया।

      गाँव के अस्पताल तक कैसे पहुँचा अमेरिकी पर्यटक?

      माइक ने बताया कि वह जिस अस्पताल में पहुँचे, वह ग्रामीण इलाक़े में था और वहाँ लिखी भाषा तक उनके लिए समझना मुश्किल थी। इसके बावजूद उन्हें इलाज मिला और उनकी हालत में सुधार हुआ। उन्होंने यह भी साफ़ किया कि उनकी तबीयत खराब होने की वजह फूड पॉइज़निंग नहीं थी। उनके मुताबिक़, उन्हें स्थानीय खाना इतना पसंद आया कि उन्होंने जरूरत से ज़्यादा खा लिया। इसके बाद उन्हें उल्टी और दूसरी परेशानियां शुरू हो गईं।

      यह अनुभव इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि आम तौर पर ग्रामीण सरकारी अस्पतालों को लेकर चर्चा स्थानीय आबादी की स्वास्थ्य सुविधाओं और पहुँच के संदर्भ में होती है। इस मामले में एक विदेशी पर्यटक ने भी ऐसे ही अस्पताल में इलाज मिलने का अपना अनुभव सामने रखा।

      इलाज के बाद अमेरिका के खर्च से की तुलना

      माइक ने वीडियो में बताया कि भारत में इलाज मिलने के बाद उन्हें सबसे ज़्यादा हैरानी इसके खर्च को लेकर हुई। उन्होंने कहा कि अमेरिका में आईवी फ्लूइड, उल्टी रोकने वाली दवा और इंजेक्शन जैसी चिकित्सा सुविधाओं पर उन्हें हज़ारों डॉलर तक खर्च करना पड़ सकता था। इसके उलट, उनके मुताबिक़ जिस ग्रामीण सरकारी अस्पताल में उनका इलाज हुआ, वहां उनसे इलाज के लिए कोई पैसा नहीं लिया गया। उन्होंने इस बात को अपने अंदाज़ में बताया और भारतीय स्वास्थ्य व्यवस्था की तुलना अमेरिका की महंगी चिकित्सा व्यवस्था से की।

      सोशल मीडिया पर वायरल हुआ अनुभव

      माइक के इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी आने लगीं। कई यूज़र्स ने भारत में कम लागत वाली सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की तारीफ़ की। कुछ लोगों ने उन्हें ओडिशा में मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं के बारे में बताया, तो कुछ ने बीमारी के बाद खान-पान को लेकर सलाह दी। हालांकि, इस एक अनुभव के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि हर विदेशी नागरिक को भारत के हर सरकारी अस्पताल में हर तरह का इलाज मुफ़्त मिलता है। अस्पताल और इलाज के प्रकार के हिसाब से नियम और शुल्क अलग हो सकते हैं।

      ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की भी दिखी एक तस्वीर

      माइक का अनुभव केवल एक वायरल वीडियो की कहानी नहीं है। यह ग्रामीण भारत के सरकारी अस्पतालों की उस भूमिका की ओर भी ध्यान खींचता है, जहाँ स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आने वाले लोगों को भी ज़रूरत पड़ने पर चिकित्सा सहायता मिल सकती है।

      ओडिशा में घूमने आए एक विदेशी पर्यटक का ग्रामीण अस्पताल तक पहुँचना और वहाँ इलाज पाना इस बात को सामने लाता है कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाएँ ग्रामीण इलाक़ों में कितनी अहम भूमिका निभाती हैं। माइक के लिए यह यात्रा का एक अप्रत्याशित पड़ाव था, लेकिन उनके अनुभव ने सोशल मीडिया पर भारत की ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था और इलाज की लागत को लेकर एक नई चर्चा जरूर शुरू कर दी है।