सैलरी आते ही घर की ईएमआई, रेंट, क्रेडिट कार्ड्स के बिल और रोजमर्रा के खर्चे जोड़-जोड़कर लोग अक्सर परेशान हो जाते हैं. कई बार लोग बढ़ती महंगाई को देखकर अपने घर की रोजमर्रा के खर्चों के बारे में बार-बार सोचते रहते हैं, जिसका असर न सिर्फ हमारी सेहत पर भी पड़ने लगता है. कई हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि लंबे समय तक अगर आप आर्थिक तनाव से जूझते हैं, तो इससे शरीर में स्ट्रेस हार्मोन बढ़ता है. ऐसी स्थिति में नींद, कमजोर इम्यूनिटी और मेंटल हेल्थ प्रभावित हो सकता है. यह हम आपको विस्तार से समझाएंगे कि फाइनेंशियल हेल्थ आपके शरीर को किस तरह से प्रभावित करता है?
फाइनेंशियल स्ट्रेस शरीर को कैसे प्रभावित करता है?
एक्सपर्ट का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति पैसों को लेकर परेशान रहता है, तो उसके शरीर में कॉर्टिसोल नामक स्ट्रेस हार्मोन का स्तर बढ़ने लगता है. कुछ समय में य जाता है. थोड़े समय के लिए बाद ये नॉर्मल हो जाता है, लेकिन आप लंबे समय तक पैसों को लेकर सोचते रहते हैं, तो इसकी वजह से कई तरह की परेशानियां होने का खतरा रहता है, जैसे-
अनिद्रा की होती है शिकायत
कमजोर हो सकती है इम्यूनिटी
एसिडिटी, ब्लोटिंग और मतली जैसी पाचन से जुड़ी परेशानी
लगातार थकान होना
बार-बार सिरदर्द की शिकायत
तनाव न सिर्फ हेल्थ बल्कि फाइनेंशियल डिसीजन पर भी डालता है असर
फाइनेंशियल प्रेशर न सिर्फ हेल्थ पर असर डालती है, बल्कि फाइनेंशियल डिसीजन लेने की क्षमता पर भी असर डाल सकती है. दरअसल, स्ट्रेस की वजह से अक्सर लग खर्चों को इग्नोर करने लग जाते हैं, वो डर की वजह से अकाउंट या बिल चेक करने से बचते हैं और कई बार जरूरी फैसले भी टाल देते हैं. इससे फाइनेंशियल स्थिति और खराब हो सकती है, जो फिर स्ट्रोस को बढ़ा सकती है.
फाइनेंशियल स्ट्रेस को कैसे करें कम?
अगर आप फाइनेंशियल स्ट्रेस को कम करना चाहते हैं, तो आपको कुछ बातों पर ध्यान देने की जरूरत होती है, जैसे-
महीने के शुरुआत में बनाएं बजट
जब भी सैलरी आए या फिर आने वाली हो, तो सबसे पहले एक बजट तैयार कर लें. हर व्यक्ति को अपने महीनेभर का हिसाब अच्छे से पता होना चाहिए. कोशिश करें कि हर महीने आने और जाने वाले पैसों का रिकॉर्ड रखें. इससे आपको ये समझने में आसानी होती है कि आपका पैसा कहां और कितना खर्च हो रहा है और आप कहां के खर्चों की कटौती कर सकते हैं.
इमरजेंसी फंड करें तैयार
सैलरी कम हो या ज्यादा हर किसी को इमरजेंसी फंड तैयार करके रखनी चाहिए. भले ही इसकी शुरुआत छोटी रकम से करें. अगर आप हर महीने धीरे-धीरे महीनों के खर्च से बचत करके इमर्जेंसी फंड जमा करते हैं, तो फ्यूचर में अचानक से होने वाली परेशानी से निपटना आसान हो जाता है.
हर सप्ताह करें फाइनेंशियल रिव्यू
अधिकतर एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि अगर आप फाइनेंशियल स्ट्रेस से बचना चाहते हैं, तो हर सप्ताह फाइनेंशियल रिव्यू करने की आदत डालें. कोशिश करें कि सप्ताह में एक बार अपने बैंक खाते, खर्चों और बचत के रिव्यू के लिए कुछ समय निकालें. इससे अनिश्चितता कम होती है और फाइनेंशियल कंट्रोल महसूस होता है
समय पर भरें बिल
कभी भी बिल भरने में टाल-मटोल न करें. हमेशा किराया, ईएमआई, बिजली का बिल समय पर भरें. कोशिश करें कि ऑटो-पे जैसी सुविधा का इस्तेमाल करें. इससे आप लेट फीस और अतिरिक्त स्ट्रेस से बच सकते हैं.
उपलब्ध सुविधाओं का पूरा करें इस्तेमाल
हेल्थ इंश्योरेंस, फाइनेंशियल एडवाइजरी सर्विसेज और बैंकिंग ऐप्स में उपलब्ध बजटिंग टूल्स का इस्तेमाल करें. ऐसा करने से आर्थिक और मानसिक तनाव कम करने में मददगार मिल सकती है.
अदरक में एंटीऑक्सीडेंट, एंटीइंफ्लेमेटरी और एंटीमाइक्रोबियल जैसे कई गुण पाए जाते हैं। यही वजह है कि इसे पारंपरिक रूप से पाचन, मतली, दर्द, सर्दी-जुकाम और कई अन्य सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं में इस्तेमाल किया जाता रहा है।
हालांकि, अदरक किसी बीमारी का इलाज नहीं है। इसे केवल एक सहायक घरेलू उपाय के तौर पर देखा जाना चाहिए। गंभीर बीमारी या लगातार बने रहने वाले लक्षणों में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
अदरक खाने के फायदे
1. पाचन तंत्र को बेहतर रखने में मदद
अदरक का सबसे चर्चित फायदा पाचन से जुड़ा है। इसमें ऐसे गुण पाए जाते हैं जो गैस्ट्रिक एसिड और पाचन एंजाइम की गतिविधि को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।
इसकी वजह से अपच, गैस, पेट की ऐंठन, मरोड़ और कब्ज जैसी सामान्य परेशानियों में राहत मिल सकती है। यानी भोजन को पचाने और पाचन तंत्र को बेहतर तरीके से काम करने में अदरक सहायक हो सकता है।
2. कैंसर के जोखिम से बचाव में संभावित मदद
अदरक में एंटीइंफ्लेमेटरी और एंटी-कैंसर गुण पाए जाने की बात शोधों में सामने आई है। कुछ अध्ययनों में इसके सक्रिय यौगिकों को कैंसर कोशिकाओं की गतिविधि पर संभावित प्रभाव डालते हुए देखा गया है।
हालांकि, ये परिणाम मुख्य रूप से शुरुआती या पशु अध्ययनों पर आधारित हैं। इसलिए अदरक को कैंसर की दवा या इलाज नहीं माना जा सकता।
ध्यान दें: कैंसर गंभीर बीमारी है। इसके इलाज के लिए योग्य डॉक्टर की सलाह और निर्धारित चिकित्सा जरूरी है।
3. अल्जाइमर में संभावित रूप से मददगार
अल्जाइमर एक न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी है, जिसमें याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
अदरक में जिंजरोल, शोगोल और जिंजरोन जैसे फाइटोकेमिकल्स पाए जाते हैं। शोधों में इन यौगिकों के एंटीऑक्सीडेंट और एंटीइंफ्लेमेटरी प्रभावों का अध्ययन किया गया है, जो मस्तिष्क की कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने में संभावित भूमिका निभा सकते हैं।
हालांकि, अल्जाइमर के इलाज के लिए अदरक की प्रभावशीलता साबित करने के लिए अभी और मानव अध्ययनों की जरूरत है।
4. मतली और उल्टी से राहत
अदरक का इस्तेमाल मतली और उल्टी की समस्या में लंबे समय से किया जाता रहा है। इसमें एंटीमेटिक प्रभाव पाया जाता है, जिसके कारण यह कुछ परिस्थितियों में मतली कम करने में मदद कर सकता है।
विशेष रूप से गर्भावस्था के दौरान होने वाली सामान्य मतली और कुछ मामलों में कीमोथेरेपी के बाद होने वाली मतली में अदरक के संभावित लाभ देखे गए हैं।
5. दर्द कम करने में सहायक
अदरक में दर्द कम करने और सूजन घटाने वाले गुण पाए जाते हैं। इसी वजह से यह व्यायाम या अधिक शारीरिक मेहनत के बाद होने वाले मांसपेशियों के दर्द में कुछ राहत दे सकता है।
अदरक का इस्तेमाल मासिक धर्म के दौरान होने वाले दर्द को कम करने में भी मददगार पाया गया है।
6. पीरियड्स के दर्द में राहत
मासिक धर्म के दौरान पेट के निचले हिस्से में दर्द और ऐंठन की समस्या कई महिलाओं को होती है। अदरक में मौजूद एंटीइंफ्लेमेटरी और दर्द निवारक गुण इस तरह के दर्द को कम करने में सहायक हो सकते हैं।
हालांकि, बहुत ज्यादा या असामान्य दर्द होने पर डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है।
7. माइग्रेन में संभावित राहत
अदरक के दर्दनिवारक गुण माइग्रेन से जुड़े दर्द में भी कुछ लोगों को राहत दे सकते हैं। कुछ शोधों में अदरक के सेवन को माइग्रेन के तीव्र दर्द को कम करने में संभावित रूप से प्रभावी पाया गया है।
लेकिन बार-बार माइग्रेन होने पर केवल घरेलू उपायों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।
8. दिल की सेहत के लिए फायदेमंद
अदरक में एंटीऑक्सीडेंट और एंटीइंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं। इसके अलावा यह ब्लड प्रेशर, लिपिड प्रोफाइल और रक्त के थक्के बनने की प्रक्रिया पर भी प्रभाव डाल सकता है।
इन गुणों की वजह से संतुलित मात्रा में अदरक का सेवन हृदय स्वास्थ्य के लिए सहायक हो सकता है।
9. कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद
कुछ शोधों में अदरक के सेवन को ब्लड प्रेशर और रक्त में मौजूद लिपिड यानी वसा के स्तर को नियंत्रित करने में संभावित रूप से उपयोगी पाया गया है।
इससे बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर को मैनेज करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, अगर आप इन समस्याओं की दवा लेते हैं तो अदरक को दवा का विकल्प न समझें।
10. गठिया और जोड़ों के दर्द में सहायक
गठिया में जोड़ों के आसपास सूजन और दर्द की समस्या हो सकती है। अदरक के एंटीइंफ्लेमेटरी और दर्दनिवारक गुण इन लक्षणों को कम करने में कुछ हद तक मदद कर सकते हैं।
हालांकि, इस संबंध में अभी और बेहतर शोध की आवश्यकता है।
11. ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में संभावित मदद
कुछ अध्ययनों में अदरक के सेवन से ब्लड शुगर और इंसुलिन की सक्रियता पर सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला है।
इस वजह से अदरक डायबिटीज मैनेजमेंट में सहायक हो सकता है। लेकिन डायबिटीज के मरीज इसे अपनी दवाओं का विकल्प बिल्कुल न बनाएं और नियमित रूप से ब्लड शुगर की निगरानी करते रहें।
12. वजन घटाने में मददगार
वजन कम करने के लिए भी अदरक का इस्तेमाल किया जाता है। कुछ शोधों में अदरक को शरीर के मेटाबॉलिज्म, भूख और फैट मेटाबॉलिज्म पर संभावित प्रभाव डालते हुए देखा गया है।
हालांकि, केवल अदरक खाने या अदरक की चाय पीने से वजन कम नहीं होगा। इसके लिए संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और नियमित व्यायाम भी जरूरी है।
13. इम्युनिटी को सपोर्ट करे
अदरक में एंटीऑक्सीडेंट और एंटीइंफ्लेमेटरी गुण मौजूद होते हैं। इसके कुछ सक्रिय यौगिक शरीर की सामान्य प्रतिरोधक क्षमता को सपोर्ट करने में मदद कर सकते हैं।
इसी वजह से अदरक को चाय, काढ़े या भोजन में शामिल किया जाता है।
14. संक्रमण से बचाव में संभावित मदद
अदरक में एंटीमाइक्रोबियल गुण पाए जाते हैं। प्रयोगशाला अध्ययनों में इसके कुछ यौगिकों को विभिन्न सूक्ष्मजीवों के खिलाफ सक्रिय पाया गया है।
इससे यह संकेत मिलता है कि अदरक कुछ संक्रमणों से बचाव में भूमिका निभा सकता है। हालांकि, किसी संक्रमण के इलाज के लिए केवल अदरक पर निर्भर रहना उचित नहीं है।
15. त्वचा के लिए उपयोगी
अदरक के एंटीऑक्सीडेंट और एंटीमाइक्रोबियल गुण त्वचा के स्वास्थ्य के लिए भी संभावित रूप से फायदेमंद हो सकते हैं।
हालांकि, त्वचा पर सीधे अदरक लगाने से जलन या एलर्जी हो सकती है। इसलिए बिना विशेषज्ञ की सलाह के इसका सीधे त्वचा पर इस्तेमाल करने से बचना बेहतर है।
16. बालों के लिए संभावित फायदा
अदरक में एंटीमाइक्रोबियल गुण पाए जाते हैं और कुछ लोगों द्वारा इसका इस्तेमाल बालों की देखभाल में भी किया जाता है।
हालांकि, बाल झड़ने को रोकने या नए बाल उगाने के लिए अदरक के प्रभाव के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। बाल झड़ने की समस्या लगातार बनी रहे तो इसके पीछे पोषण की कमी, हार्मोनल समस्या या अन्य कारण हो सकते हैं, इसलिए विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।
अदरक का सेवन कैसे करें?
अदरक को अपनी रोजमर्रा की डाइट में कई तरीकों से शामिल किया जा सकता है।
चाय में अदरक डालकर
सब्जी और दाल में मसाले के रूप में
अदरक की चटनी बनाकर
गुनगुने पानी में थोड़ी मात्रा मिलाकर
सर्दियों में अदरक वाली चाय या काढ़े के रूप में
अदरक की मात्रा हमेशा संतुलित रखें। अधिक मात्रा में सेवन करने से फायदा होने के बजाय नुकसान हो सकता है।
अदरक खाते समय किन बातों का ध्यान रखें?
अगर आपको पित्ताशय की पथरी, ब्लीडिंग की समस्या है या आप खून पतला करने वाली दवाएं लेते हैं, तो अदरक का अधिक सेवन करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
गर्भावस्था या किसी गंभीर बीमारी की स्थिति में भी चिकित्सकीय सलाह के बाद ही इसे औषधीय मात्रा में इस्तेमाल करना बेहतर है।
निष्कर्ष
अदरक सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ाने वाला मसाला नहीं है, बल्कि इसमें कई ऐसे प्राकृतिक यौगिक पाए जाते हैं जो शरीर के लिए उपयोगी हो सकते हैं। पाचन, मतली, मांसपेशियों के दर्द, पीरियड्स के दर्द और सामान्य स्वास्थ्य को सपोर्ट करने में अदरक मददगार हो सकता है।
फिर भी यह समझना जरूरी है कि अदरक किसी बीमारी का इलाज नहीं है। इसे संतुलित आहार का हिस्सा बनाकर ही इस्तेमाल करें और किसी गंभीर या लगातार बनी रहने वाली समस्या में डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
घर के मुख्य दरवाजा सिर्फ आने-जाने का रास्ता नहीं होता, बल्कि वास्तु शास्त्र में इसे ऊर्जा के प्रवेश का प्रमुख स्थान माना गया है। मान्यता है कि शाम का समय घर में शुभता के आगमन का होता है। ऐसे में इस समय मुख्य द्वार से जुड़ी छोटी-छोटी गलतियां घर की सुख-समृद्धि को प्रभावित कर सकती हैं। आइए जानते हैं वास्तु के अनुसार शाम को घर का दरवाजा बंद रखना क्यों शुभ नहीं माना जाता है।
शाम के समय क्यों नहीं बंद करते मुख्य द्वार
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शाम का समय बेहद शुभ माना जाता है। इस समय मां लक्ष्मी के घर में आगमन की मान्यता है। कहते हैं कि अगर इस समय मुख्य द्वार बंद रखा जाए तो घर की समृद्धि और शुभ ऊर्जा के प्रवेश में बाधा आ सकती है।
वास्तु की माने तो लंबे समय तक शाम के समय मुख्य द्वार बंद रखने से घर में नकारात्मकता बढ़ सकती है और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
सकारात्मक ऊर्जा के लिए जरूरी
वास्तु शास्त्र
के अनुसार, सूर्यास्त के समय वातावरण में ऊर्जा का बदलाव होता है। ऐसे में घर का मुख्य द्वार कुछ समय के लिए खुला रखने से सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश की मान्यता है। माना जाता है कि इससे घर का माहौल शांत और खुशहाल बना रहता है।
मुख्य द्वार पर करें ये उपाय
शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाने की परंपरा काफी पुरानी है। मान्यता है कि दीपक की रोशनी से घर में शुभता आती है।
इसके अलावा मुख्य द्वार पर गंगाजल या साफ जल का छिड़काव करना शुभ माना जाता है। इससे नेगेटिविटी दूर होने और घर में सकारात्मक माहौल बने रहने की मान्यता है।
ध्यान रखें ये बातें
घर के मुख्य द्वार पर गंदगी, अव्यवस्था और अंधेरा नहीं रखना चाहिए। वास्तु अनुसार, साफ-सुथरा और रोशनी से भरा मुख्य द्वार घर में शुभ ऊर्जा को आकर्षित करता है, इसलिए इस स्थान को हमेशा साफ और व्यवस्थित रखने की सलाह दी जाती है। शाम के समय इन नियमों का ध्यान रखना घर-परिवार की बरकत और खुशहाली के लिए भी बेहद शुभ माना जाता है।
आज के समय में भले ही महिलाएं अपने दम पर हर मुकाम हासिल कर रही हैं, लेकिन शादी के मार्केट में आज भी पुरानी सोच का दबदबा कायम है. चीन के एक फेमस ब्राइड मार्केट से सामने आए इस वीडियो ने इसी कड़वी सच्चाई को दिखाया है. यहां एक 38 साल की महिला अपने लिए लाइफ पार्टनर ढूंढने आई थी, लेकिन स्ट्रांगली फाइनेंशियली इंडिपेंडेंट होने के बाद भी उसका दिल टूट ही गया.
58 लाख का पैकेज भी नहीं दिला पाया जीवनसाथी (High Salary of 58 Lakhs Fails to Find Match)
वायरल वीडियो में दिखाया गया है कि, महिला काफी एजुकेटेड है और एक बड़ी कंपनी में काम करती है. उसके पास अपना घर, शानदार कार और करीब 58 लाख रुपये का सालाना पैकेज है, लेकिन जब वो अपनी डिटेल्स लेकर मंडी में पहुंची, तो वहां मौजूद लड़कों और उनके फैमिली मेंबर्स ने उसकी एज सुनते ही शादी से मना कर दिया. इस सोशल शेमिंग (Social Shaming) और रिजेक्शन से दुखी होकर वो सबके सामने ही फफक-फफक कर रो पड़ी.
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क्या है चीन का ‘ब्राइड मार्केट’ और कैसे करता है काम? (What is China’s ‘Bride Market’ and How Does Work?)
चीन का ब्राइड मार्केट (Marriage Market) पब्लिक पार्कों में लगने वाला एक ट्रेडिशनल मार्केट है, जहां पैरेंट्स अपने बैचलर (Bachelor) बच्चों (खासकर 25 से 30 साल से अधिक उम्र के) के लिए लाइफ पार्टनर की तलाश करते हैं. सबसे फेमस ब्राइड मार्केट शंघाई के पीपुल्स पार्क (People’s Park) में हर वीकेंड को ये लगता है. यहां काम करने का तरीका बेहद यूनिक है. पैरेंट्स एक छाते पर अपने बेटे या बेटी का पूरा बायोडाटा (जैसे एज, हाइट, एजुकेशन, जॉब, सैलरी, घर और कार की डिटेल) कागज पर लिखकर टांग देते हैं. इसके बाद वो पार्क में घूम-घूमकर दूसरे बायोडाटा पढ़ते हैं. आपस में बातचीत करते हैं और सब कुछ मैच होने पर ही बात आगे बढ़ाते हैं, लेकिन यहां यूथ और कम उम्र की महिलाओं को पहली प्राथमिकता मिलती है, जबकि 30 पार कर चुकी सक्सेस महिलाओं को शेंग नू (Sheng Nu) यानी ‘लेफ्टओवर वुमन’ मानकर अक्सर रिजेक्ट कर दिया जाता है.
इस वीडियो के सामने आते ही सोशल मीडिया पर लोगों के बीच बहस छिड़ गई कि, ‘समाज में महिलाओं की सक्सेस को शादी के बीच क्यों लाया जाता है. कई लोगों ने महिला का सपोर्ट करते हुए कहा कि, ‘एज के आधार पर किसी की कैपेबिलिटी को रिजेक्ट गलत है.’ वहीं कुछ लोग ट्रेडिशन सोच का बचाव करते दिखे कि, ‘शादी में उम्र और परिवार बसाने की कैपेसिटी सबसे ज्यादा मायने रखती है.’
क्या आप जानते हैं कि डायबिटीज में सिर्फ आपने क्या खाया यह महत्वपूर्ण नहीं है…
बल्कि खाना खाने के बाद आपने क्या किया, यह भी आपकी blood sugar management में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
जी हां।
आज मैं आपको ना कोई महंगी दवा बताने वाला हूं, ना कोई जड़ी-बूटी और ना ही कोई महंगा supplement।
बस खाना खाने के बाद की एक छोटी सी आदत के बारे में बात करेंगे।
और वह आदत है—
खाना खाने के बाद 10–15 मिनट की हल्की WALK!
“भाई, मैं तो सुबह-शाम walk करता ही हूं… खाना खाने के बाद walk करने में ऐसा क्या खास है?”
यही बात समझना बहुत जरूरी है।
सुबह 30 मिनट walk करना अच्छी आदत है।
लेकिन खाना खाने के आसपास थोड़ी physical activity करना post-meal blood glucose को कम करने में विशेष रूप से मदद कर सकता है।
क्यों?
चलिए बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं।
खाना खाने के बाद शरीर में क्या होता है?
मान लीजिए आपने रोटी, चावल या कोई दूसरा carbohydrate वाला भोजन खाया।
पाचन के दौरान carbohydrate टूटकर glucose में बदलता है और blood glucose बढ़ने लगता है।
स्वस्थ व्यक्ति में pancreas से insulin निकलता है और शरीर glucose को इस्तेमाल करने में मदद करता है।
लेकिन type 2 diabetes में insulin resistance या insulin production में बदलाव के कारण blood glucose ज्यादा देर तक बढ़ा हुआ रह सकता है।
और यहीं पर हमारी मांसपेशियां काम आती हैं।
जब आप walk करते हैं तो पैरों की muscles को energy चाहिए।
Physical activity के दौरान muscles blood से glucose को इस्तेमाल करने लगती हैं।
इसी वजह से खाने के बाद हल्की walk post-meal blood sugar rise को कम करने में मदद कर सकती है।
यानी…
खाने के बाद सिर्फ बैठने के बजाय थोड़ा चलना आपके लिए एक छोटी लेकिन उपयोगी habit हो सकती है।
लेकिन WALK कब करनी है?
यह बात बहुत महत्वपूर्ण है।
खाना खत्म करने के बाद बहुत लंबा gap मत रखिए।
अपनी सुविधा और स्वास्थ्य के अनुसार खाने के थोड़ी देर बाद 10–15 मिनट की हल्की walk शुरू कर सकते हैं।
आपको marathon नहीं दौड़ना है।
कोई race नहीं लगानी है।
बस सामान्य गति से चलना है।
घर के अंदर…
छत पर…
गली में…
या जहां सुरक्षित जगह मिले वहां।
10 मिनट से शुरुआत करना भी ठीक है।
धीरे-धीरे अपनी क्षमता के अनुसार duration बढ़ाया जा सकता है।
रात के खाने के बाद वाली WALK भी क्यों अच्छी आदत हो सकती है?
बहुत से लोग रात को खाना खाते हैं…
फिर सीधे sofa पर बैठते हैं…
फिर मोबाइल देखते हैं…
फिर TV देखते हैं…
और कुछ देर बाद सीधे बिस्तर पर चले जाते हैं।
अगर इसकी जगह आप खाना खाने के बाद कुछ देर हल्की walk कर लें, तो यह आपकी daily physical activity बढ़ाने और post-meal glucose management में मदद कर सकती है।
लेकिन एक बात याद रखिए—
Walk diabetes की दवा का replacement नहीं है।
अगर डॉक्टर ने आपको medication दी है तो उसे अपनी मर्जी से बंद या कम मत कीजिए।
अब इसके साथ 3 छोटी आदतें और जोड़ लीजिए
खाने का ORDER थोड़ा बदलें
पहले salad और vegetables…
फिर protein वाला हिस्सा…
और carbohydrate जैसे roti/rice को बाद में लेने की strategy कुछ लोगों में meal के बाद glucose rise को कम करने में मदद कर सकती है।
लेकिन आपकी पूरी diet balanced होना जरूरी है।
2️⃣ खाना खाने के तुरंत बाद लेटने की आदत छोड़ें
खाने के बाद थोड़ा चलिए।
फिर आराम से बैठिए।
और उसके बाद सोने जाइए।
खासकर अगर आपको acidity या reflux की समस्या रहती है तो खाना खाने के तुरंत बाद लेटना परेशानी बढ़ा सकता है।
मीठे drinks से बचिए
खाने के साथ या बाद में—
sugary soda packaged juice बहुत ज्यादा चीनी वाली चाय मिठाई
लेने से blood glucose तेजी से बढ़ सकता है।
प्यास लगी है?
सादा पानी सबसे simple.
Disclaimer
यह पोस्ट सामान्य स्वास्थ्य एवं diabetes management की जानकारी के लिए है। खाना खाने के बाद हल्की physical activity कई लोगों में post-meal blood glucose control में मदद कर सकती है, लेकिन इसका असर व्यक्ति-व्यक्ति में अलग हो सकता है। Diabetes की दवा या insulin बिना डॉक्टर की सलाह के बंद/कम न करें। अगर आपको exercise से जुड़ी कोई medical restriction है, तो पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें।
अजवाइन का पानी पीने के फायदे: पाचन से लेकर वजन और त्वचा तक के लिए फायदेमंद, जानें सही तरीका
भारतीय रसोई में अजवाइन का इस्तेमाल सिर्फ खाने का स्वाद और खुशबू बढ़ाने के लिए नहीं किया जाता, बल्कि इसे कई घरेलू नुस्खों में भी शामिल किया जाता है। पेट से जुड़ी परेशानियों से लेकर सर्दी-जुकाम तक में दादी-नानी के नुस्खों में अजवाइन का इस्तेमाल लंबे समय से होता आया है।
इसी तरह अजवाइन का पानी भी एक लोकप्रिय घरेलू उपाय है। अजवाइन को पानी में उबालकर या भिगोकर तैयार किया गया यह पेय पाचन को बेहतर रखने और कुछ सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं में राहत देने में मदद कर सकता है।
हालांकि, अजवाइन का पानी किसी बीमारी का इलाज नहीं है। अगर कोई स्वास्थ्य समस्या लंबे समय से बनी हुई है या गंभीर है, तो घरेलू नुस्खे आजमाने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
क्या अजवाइन का पानी सेहत के लिए फायदेमंद है?
अजवाइन में कई ऐसे गुण पाए जाते हैं, जिनकी वजह से इसे पारंपरिक रूप से स्वास्थ्य के लिए उपयोगी माना जाता है। इन्हीं गुणों का कुछ हिस्सा अजवाइन के पानी में भी मौजूद हो सकता है।
शोध के अनुसार, अजवाइन का पानी पाचन तंत्र और श्वसन तंत्र के लिए उपयोगी हो सकता है। इसके अलावा, अस्थमा, मांसपेशियों में ऐंठन, दर्द, सूजन और गठिया जैसी समस्याओं में भी इसके संभावित लाभ बताए गए हैं।
हालांकि, इन सभी फायदों को लेकर वैज्ञानिक प्रमाण हर मामले में पर्याप्त नहीं हैं। इसलिए इसे केवल एक सहायक घरेलू उपाय के तौर पर ही देखना चाहिए।
अजवाइन का पानी पीने के फायदे
1. पाचन को बेहतर रखने में मदद
अजवाइन का पानी पाचन तंत्र के लिए उपयोगी माना जाता है। इसमें मौजूद कुछ सक्रिय तत्व गैस्ट्रिक एसिड और पाचन एंजाइम की गतिविधि को बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।
इस वजह से भोजन को पचाने में सहायता मिल सकती है। कुछ शोधों में यह भी संकेत मिला है कि अजवाइन पाचन से जुड़े संक्रमणों से बचाव में मदद कर सकती है।
2. एसिडिटी से राहत में सहायक
एसिडिटी और पेट में जलन की समस्या से परेशान लोगों के लिए भी अजवाइन का पानी उपयोगी हो सकता है।
अजवाइन में एंटी-हाइपरएसिडिटी प्रभाव होने की बात सामने आई है, जो पेट में बनने वाली अतिरिक्त एसिडिटी को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। हालांकि, बार-बार एसिडिटी होना किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकता है।
3. दांत दर्द में मिल सकती है राहत
अजवाइन का इस्तेमाल दांत और मुंह से जुड़ी समस्याओं में भी पारंपरिक रूप से किया जाता है। इसमें एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो मुंह में मौजूद कुछ हानिकारक बैक्टीरिया से बचाव में मदद कर सकते हैं।
गुनगुने पानी में अजवाइन मिलाकर कुल्ला करने से दांत दर्द या मसूड़ों की परेशानी में अस्थायी राहत मिल सकती है। लेकिन तेज या लगातार दांत दर्द होने पर डेंटिस्ट को दिखाना जरूरी है।
4. वजन नियंत्रित करने में मददगार
अजवाइन का पानी वजन कम करने वाले घरेलू नुस्खों में काफी लोकप्रिय है। अजवाइन में फाइबर और कुछ ऐसे गुण पाए जाते हैं, जो पाचन और मल त्याग की प्रक्रिया को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।
हालांकि, केवल अजवाइन का पानी पीने से वजन तेजी से कम नहीं होता। वजन घटाने के लिए संतुलित आहार और नियमित शारीरिक गतिविधि जरूरी है।
5. अस्थमा और श्वसन संबंधी समस्या में सहायक
अजवाइन का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से खांसी और सांस से जुड़ी परेशानियों में किया जाता रहा है। कुछ शोधों में अजवाइन के संभावित श्वसन संबंधी लाभों का भी उल्लेख मिलता है।
यह अस्थमा या खांसी में कुछ राहत देने में सहायक हो सकता है, लेकिन अस्थमा जैसी गंभीर बीमारी में डॉक्टर की दवा को छोड़कर केवल अजवाइन के पानी पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।
6. कब्ज में राहत
कब्ज की समस्या में भी अजवाइन का पानी उपयोगी हो सकता है। अजवाइन में लैक्सेटिव प्रभाव होने की बात सामने आई है, जो मल त्याग को आसान बनाने में मदद कर सकता है।
इसके साथ पर्याप्त पानी पीना और फाइबर युक्त भोजन लेना भी जरूरी है।
7. सर्दी-जुकाम में आराम
सर्दी और फ्लू जैसी सामान्य समस्याओं में अजवाइन का इस्तेमाल घरेलू नुस्खे के तौर पर किया जाता है। अजवाइन का पानी गले और श्वसन तंत्र को कुछ राहत देने में मदद कर सकता है।
हालांकि, तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी या लक्षण लंबे समय तक बने रहने पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
8. त्वचा के लिए भी उपयोगी
अजवाइन में एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण पाए जाने की बात शोधों में सामने आई है। इसी वजह से यह त्वचा को कुछ प्रकार के संक्रमणों से बचाने में मदद कर सकती है।
हालांकि, त्वचा पर अजवाइन का पानी लगाने से पहले पैच टेस्ट करना बेहतर है, क्योंकि संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को जलन या एलर्जी हो सकती है।
अजवाइन का पानी कैसे बनाएं?
अजवाइन का पानी बनाना बेहद आसान है।
सामग्री
आधा चम्मच अजवाइन
1 गिलास पानी
बनाने की विधि
एक पैन में एक गिलास पानी डालें।
इसमें आधा चम्मच अजवाइन डालें।
पानी को कुछ मिनट तक अच्छी तरह उबालें।
गैस बंद करके इसे थोड़ा ठंडा होने दें।
पानी को छानकर गुनगुना होने पर पी सकते हैं।
एक अन्य तरीके में अजवाइन को पानी में कुछ समय के लिए भिगोकर भी इसका पानी तैयार किया जाता है।
अजवाइन का पानी कब और कैसे पिएं?
अजवाइन के पानी का सेवन सामान्य तौर पर सुबह या भोजन के बाद किया जाता है। हालांकि, इसे कितनी मात्रा में और कितनी बार पीना चाहिए, यह व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है।
अगर आपको एसिडिटी, पेट की बीमारी, एलर्जी या कोई अन्य स्वास्थ्य समस्या है, तो नियमित रूप से इसका सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
अजवाइन के पानी के नुकसान
अजवाइन का पानी सामान्य मात्रा में कई लोगों के लिए ठीक हो सकता है, लेकिन इसका अधिक सेवन नुकसान भी पहुंचा सकता है।
अजवाइन से एलर्जी वाले लोगों को इसका सेवन नहीं करना चाहिए।
ज्यादा मात्रा में लेने से पेट में जलन या अन्य पाचन संबंधी परेशानी हो सकती है।
अजवाइन में मूत्रवर्धक प्रभाव होने के कारण अधिक सेवन से बार-बार पेशाब आने की समस्या हो सकती है।
गर्भावस्था के दौरान अजवाइन का अधिक या औषधीय मात्रा में सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूरी है।
किन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए?
गर्भवती महिलाएं, छोटे बच्चे, किसी बीमारी की दवा लेने वाले लोग और अजवाइन से एलर्जी वाले लोगों को इसका सेवन शुरू करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।
निष्कर्ष
अजवाइन का पानी भारतीय घरेलू नुस्खों में लंबे समय से इस्तेमाल किया जाता रहा है। यह पाचन, कब्ज, एसिडिटी, सर्दी-जुकाम और कुछ अन्य सामान्य समस्याओं में राहत देने में सहायक हो सकता है।
लेकिन इसे किसी बीमारी का इलाज नहीं माना जाना चाहिए। सही मात्रा में और अपनी स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए ही इसका सेवन करें। अगर कोई समस्या बार-बार हो रही है या गंभीर लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो घरेलू नुस्खे पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से जांच करवाना सबसे बेहतर विकल्प है।
वास्तु शास्त्र की मानें तो घर का हर कोना हमारे जीवन पर प्रभाव डालता है। इसलिए वास्तु के नियमों का पालन करके हम अगर सही दिशा में सही वस्तुएं रखते हैं तो जीवन में सकारात्मकता बनी रहती है। ऐसे में आज हम आपको बताने वाले हैं कि ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में क्या चीजें रखने से आपके घर में सुख-शांति आती है, आर्थिक लाभ मिलता है और भाग्य का भी आपको साथ मिलने लगता है।
ईशान कोण में रखें ये चीजें
ईशान कोण के देवता भगवान शिव हैं वहीं देवगुरु बृहस्पति को इस दिशा का स्वामी ग्रह माना जाता है। ऐसे में अगर आप ईशान कोण में गुरु यंत्र या फिर भगवान शिव की प्रतिमा रखते हैं तो घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है। ऐसा करने से आपको करियर और आर्थिक पक्ष में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते है। गुरु ग्रह को संपन्नता का कारक माना जाता है ऐसे में अगर आप गुरु यंत्र ईशान कोण में स्थापित करते हैं तो आपकी तिजोरी पैसों से भर सकती है।
ईशान कोण में शंख रखना भी अच्छा माना गया है। भगवान विष्णु के प्रतीक शंख को अगर आप ईशान कोण में रखते हैं तो आपको सुख-समृद्धि की प्राप्ति हो सकती है। हालांकि इस दिशा में रखे शंख की आपको पूजा करनी चाहिए और इसे घर के लोगों के अलावा किसी और को नहीं छूने देने चाहिए। इस शंख का इस्तेमाल बजाने के लिए आपको नहीं करना चाहिए।
कलश को भी आप घर के ईशान कोण में रख सकते हैं। कलश को दैवीय शक्तियों का आह्वान करने का स्रोत माना जाता है। ऐसे में अगर आप घर के ईशान कोण में कलश रखते हैं तो देवी-देवताओं की कृपा आप पर बनी रहती है। इसके साथ ही वास्तु से संबंधित दोष भी दूर होते हैं। ईशान कोण में कलश रखने से आरोग्य की आपको प्राप्ति होती है और साथ ही आर्थिक रूप से भी आप संपन्न होते हैं।
घर के ईशान कोण में आपको श्रीफल रखने से भी बेहद शुभ फल मिल सकते हैं। श्रीफल को माता लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है ऐसे में अगर आप ईशान कोण में श्रीफल रखते हैं तो धन-धान्य की आपके जीवन में कोई कमी नहीं रहती। श्रीफल के प्रभाव से घर में मौजूद नकारात्मकता भी दूर होने लगती है। श्रीफल रखने से घर का वातावरण भी पवित्र और सात्विक बना रहता है। अगर आप विस्तार से जानना चाहते हैं कि ईशान कोण को शुभ क्यों माना जाता है और इस दिशा में पूजा करना लाभकारी क्यों है तो हमारी वेबसाइट पर विस्तार से पढ़ सकते हैं।
आजकल खराब खान-पान और बदलती लाइफस्टाइल की वजह से मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल और पाचन संबंधी समस्याएं आम होती जा रही हैं। ऐसे में अपनी डाइट में कुछ पौष्टिक चीजों को शामिल करना फायदेमंद हो सकता है। इन्हीं में से एक है अलसी (Flax Seeds)।
आकार में छोटे दिखने वाले अलसी के बीज पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। इनमें फाइबर, ओमेगा-3 फैटी एसिड और कई अन्य जरूरी तत्व पाए जाते हैं। यही वजह है कि अलसी का इस्तेमाल लंबे समय से खान-पान के साथ-साथ पारंपरिक चिकित्सा में भी किया जाता रहा है।
हालांकि, अलसी किसी बीमारी का इलाज नहीं है। किसी गंभीर बीमारी या दवा के सेवन की स्थिति में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
क्या होती है अलसी?
अलसी एक रेशेदार पौधा है। इसके बीजों से तेल भी निकाला जाता है। भारत में इसे अलसी या तीसी के नाम से जाना जाता है, जबकि अंग्रेजी में इसे Flax Seeds कहा जाता है।
अलसी मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है—
भूरी अलसी
पीली या सुनहरी अलसी
दोनों प्रकार की अलसी में ओमेगा-3 फैटी एसिड और कई पोषक तत्व पाए जाते हैं।
अलसी खाने के फायदे
1. वजन कम करने में मददगार
अलसी में भरपूर मात्रा में फाइबर पाया जाता है। फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराने में मदद कर सकता है। इससे बार-बार खाने की इच्छा कम हो सकती है और वजन को नियंत्रित करने में सहायता मिल सकती है।
हालांकि, केवल अलसी खाने से वजन कम नहीं होता। इसके साथ संतुलित डाइट और नियमित व्यायाम भी जरूरी है।
2. ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में सहायक
अलसी में मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड, फाइबर और लिग्नैन जैसे तत्व ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद कर सकते हैं। इसलिए हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों की डाइट में सीमित मात्रा में अलसी को शामिल किया जा सकता है।
3. डायबिटीज में हो सकती है फायदेमंद
अलसी में मौजूद फाइबर और अन्य पोषक तत्व ब्लड शुगर और इंसुलिन के स्तर को नियंत्रित रखने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, डायबिटीज के मरीज इसे अपनी दवाओं का विकल्प न समझें और सेवन से पहले डॉक्टर की सलाह लें।
4. कोलेस्ट्रॉल कम करने में मदद
बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल दिल की सेहत के लिए जोखिम बढ़ा सकता है। अलसी में मौजूद फाइबर और ओमेगा-3 फैटी एसिड कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं।
5. दिल के लिए फायदेमंद
अलसी में मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड और लिग्नैन जैसे तत्व हृदय स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। यह ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में भी सहायक हो सकती है।
6. कब्ज से राहत दिलाने में सहायक
अलसी फाइबर का अच्छा स्रोत है। इसका सीमित सेवन मल को नरम करने और bowel movement को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। इसलिए कब्ज की समस्या में अलसी उपयोगी हो सकती है।
7. पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद
फाइबर की मौजूदगी के कारण अलसी पाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकती है। इसे दही, दलिया या सलाद में मिलाकर खाया जा सकता है।
8. त्वचा के लिए उपयोगी
अलसी में मौजूद पोषक तत्व त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में मदद कर सकते हैं। इसके सेवन से त्वचा की नमी और सामान्य स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहायता मिल सकती है।
9. बालों के लिए भी लाभकारी
अलसी में मौजूद पोषक तत्व बालों के स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हो सकते हैं। अलसी के तेल का इस्तेमाल भी बालों की देखभाल के लिए किया जाता है।
10. लिवर की सेहत के लिए मददगार
कुछ शोधों में संतुलित डाइट और जीवनशैली के साथ अलसी के सेवन को फैटी लिवर जैसी स्थितियों में संभावित रूप से फायदेमंद पाया गया है। हालांकि, इसे लिवर की बीमारी का इलाज नहीं माना जा सकता।
अलसी खाने का सही तरीका क्या है?
अलसी के बीजों को सीधे खाने के बजाय पीसकर खाना ज्यादा सुविधाजनक माना जाता है। इसे कई तरह से डाइट में शामिल किया जा सकता है।
अलसी को पीसकर पाउडर बना लें।
इसे दही या दलिया में मिलाकर खा सकते हैं।
स्मूदी में अलसी पाउडर मिलाया जा सकता है।
सलाद के ऊपर अलसी डाल सकते हैं।
अलसी के लड्डू बनाकर भी खाए जा सकते हैं।
कुछ लोग अलसी को पानी में भिगोकर भी सेवन करते हैं।
अलसी खाते समय पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरूरी है।
सुबह खाना बेहतर माना जाता है
अलसी का सेवन सुबह नाश्ते के साथ किया जा सकता है। हालांकि, इसे खाने का कोई एक अनिवार्य समय नहीं है। आपकी डाइट और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार इसका सेवन किया जा सकता है।
सामान्य तौर पर लेख में करीब 40 ग्राम प्रतिदिन तक अलसी के सेवन का उल्लेख किया गया है, लेकिन किसी बीमारी या विशेष स्वास्थ्य स्थिति में सही मात्रा डॉक्टर से पूछना बेहतर है।
अलसी के लड्डू कैसे बनाएं?
अलसी के लड्डू बनाने के लिए आपको चाहिए—
200 ग्राम अलसी
100 ग्राम गेहूं का आटा
250 ग्राम देशी घी
आधा कटोरी गोंद
50 ग्राम पोस्ता दाना
1 कप कटे हुए मेवे
300 ग्राम गुड़
बनाने की विधि
सबसे पहले कड़ाही गर्म करके उसमें अलसी को अच्छी तरह भून लें। इसके बाद अलसी को अलग निकाल लें।
अब उसी कड़ाही में आटा डालकर अच्छी तरह भूनें। जब आटे से खुशबू आने लगे और उसका रंग हल्का बदल जाए तो इसे भी अलग रख दें।
इसके बाद घी गर्म करके उसमें गोंद को भून लें।
अब भुनी हुई अलसी को मिक्सर में डालकर पीस लें। इसमें घी, भुना हुआ आटा, पोस्ता दाना, मेवे और गुड़ डालकर अच्छी तरह मिला लें।
मिश्रण तैयार होने के बाद हाथों से छोटे-छोटे लड्डू बना लें। इन्हें ठंडा होने के बाद एयरटाइट डिब्बे में रख सकते हैं।
डायबिटीज के मरीज गुड़ वाले अलसी के लड्डू खाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
अलसी को कैसे स्टोर करें?
अलसी के बीजों को एयरटाइट कंटेनर में रखकर फ्रिज में स्टोर किया जा सकता है। अगर अलसी को पीसकर पाउडर बना लिया है तो उसे भी अच्छी तरह बंद डिब्बे में रखकर फ्रिज में रखना बेहतर है।
अलसी खरीदते समय पैकेट की पैकिंग और एक्सपायरी डेट जरूर जांच लें। अगर इसका इस्तेमाल कम करते हैं तो छोटा पैकेट खरीदना बेहतर रहेगा।
किन लोगों को अलसी खाने से सावधान रहना चाहिए?
कुछ लोगों के लिए अलसी का सेवन सावधानी के साथ करना जरूरी है।
लो ब्लड प्रेशर वाले लोग
लो ब्लड शुगर वाले लोग
दस्त या डायरिया से परेशान लोग
खून पतला करने वाली दवा लेने वाले लोग
किसी खाद्य पदार्थ से एलर्जी वाले लोग
गर्भावस्था या स्तनपान के दौरान अलसी का सेवन करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
ज्यादा अलसी खाने के नुकसान
किसी भी चीज की तरह अलसी का जरूरत से ज्यादा सेवन नुकसान पहुंचा सकता है। अधिक मात्रा में खाने से कब्ज, दस्त या पेट से जुड़ी अन्य समस्याएं हो सकती हैं।
खून पतला करने वाली दवाएं लेने वाले लोगों में ज्यादा सेवन से ब्लीडिंग का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए ऐसे लोगों को अलसी को डाइट में शामिल करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
कच्ची अलसी का बहुत अधिक सेवन भी नहीं करना चाहिए।
निष्कर्ष
अलसी पोषक तत्वों से भरपूर एक उपयोगी खाद्य पदार्थ है। इसमें मौजूद फाइबर और ओमेगा-3 फैटी एसिड इसे संतुलित डाइट का हिस्सा बना सकते हैं। वजन को नियंत्रित करने, पाचन बेहतर रखने, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में यह मददगार हो सकती है।
लेकिन यह याद रखना जरूरी है कि अलसी किसी बीमारी की दवा या इलाज नहीं है। किसी स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं या नियमित दवाएं लेते हैं तो अलसी का सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
अभिनेता राजपाल यादव पिछले कई वर्षों से पैसों के लेन-देन से जुड़े कानूनी मामलों को लेकर चर्चा में हैं। सोशल मीडिया पर उनके नाम से कई चेक वायरल होने और अलग-अलग लोगों द्वारा पैसे वापस न करने के आरोप लगाए जाने के बाद अब अभिनेता ने इस पूरे मामले पर खुलकर बात की है।
एक खास बातचीत में राजपाल यादव ने बताया कि पिछले करीब 25 वर्षों में उनके ऊपर कुल मिलाकर लगभग 25-30 करोड़ रुपये की देनदारी रह गई है। उन्होंने यह भी कहा कि एक समय यह रकम करीब 50 करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी, लेकिन समय के साथ उन्होंने कई मामलों का निपटारा किया।
’25-30 करोड़ रुपये अभी बाकी हैं’
जब राजपाल यादव से पूछा गया कि पिछले 25 वर्षों में उनका कितना पैसा बकाया रह गया है, तो उन्होंने कहा कि कई लोगों के साथ उनका लेन-देन रहा है। कुछ लोगों का भुगतान उन्होंने कर दिया, जबकि कुछ मामले अभी बाकी हैं।
उन्होंने बताया कि फिलहाल करीब 25-30 करोड़ रुपये की देनदारी बाकी है। राजपाल के मुताबिक, इसमें कोर्ट में चल रहे मामले भी शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि पिछले 15-20 वर्षों में एक समय उनकी देनदारी करीब 50 करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी, लेकिन धीरे-धीरे कई मामलों का निपटारा होता गया।
‘मैं डूबा नहीं हूं, उलझा हुआ हूं’
राजपाल यादव ने अपनी स्थिति को लेकर एक खास बात कही। उन्होंने कहा कि वह पिछले कई वर्षों से यही कहते आए हैं कि ‘मैं उलझा हुआ हूं, डूबा हुआ नहीं हूं।’
उनका कहना है कि उनके पास संपत्ति और काम दोनों हैं, लेकिन कई कानूनी और आर्थिक मामलों के चलते वह लंबे समय से परेशानियों में उलझे हुए हैं।
उन्होंने हाल में उनकी शाहजहांपुर की संपत्ति की नीलामी की खबर का जिक्र करते हुए कहा कि कम से कम इससे लोगों को यह तो पता चला कि उनके पास संपत्ति है और वह पूरी तरह से डूबे हुए नहीं हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे चेक पर क्या बोले?
राजपाल यादव ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे उनके नाम के चेक को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि अगर किसी को चेक दिया गया है या कोई एग्रीमेंट हुआ है तो यह इस बात का संकेत है कि लेन-देन दस्तावेजों के साथ हुआ है।
उन्होंने कहा कि जिंदगी में बड़ा काम करने के दौरान आर्थिक उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। उनके मुताबिक, उन्होंने कई लोगों से पैसे लिए भी हैं और कई लोगों को पैसे दिए भी हैं। कई लेन-देन पूरे हुए, जबकि कुछ अभी बाकी हैं।
‘जिसने मदद की, उसका धन्यवाद’
राजपाल यादव से जब पूछा गया कि मुश्किल वक्त में कई कलाकारों ने उनकी आर्थिक मदद की और सोशल मीडिया पर 70-80 करोड़ रुपये मिलने की बातें सामने आई थीं, तो उन्होंने इसका सीधा आंकड़ा बताने के बजाय कहा कि जिन लोगों ने मदद की, वह उनके आभारी हैं।
उन्होंने कहा कि बच्चों से लेकर बुजुर्गों और युवाओं तक कई लोगों ने उनका साथ दिया। इसी मदद ने उन्हें मुश्किल दौर में हौसला दिया।
राजपाल ने यह भी स्पष्ट किया कि मदद का सही इस्तेमाल किया गया है और यह मदद वापस भी की जाएगी।
‘पैसों का लेन-देन जिंदगी का हिस्सा है’
राजपाल यादव ने कहा कि आज के दौर में बिजनेस और जिंदगी में पैसों का लेन-देन आम बात है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि छोटे कारोबार से लेकर बड़ी कंपनियों, बैंकों और रियल एस्टेट तक हर जगह आर्थिक लेन-देन होता है।
उनके मुताबिक, परेशानी तब होती है जब किसी कारोबार या प्रोजेक्ट में पैसा फंस जाता है। ऐसे मामलों में भुगतान करने में समय लग सकता है।
30-35 मुकदमों का सामना करने का दावा
राजपाल यादव ने बताया कि पिछले करीब 15 वर्षों में उन्हें अलग-अलग जगहों पर करीब 30-35 मुकदमों का सामना करना पड़ा। इनमें कुछ मामले उनकी पत्नी से जुड़े होने की बात भी उन्होंने कही।
उन्होंने कहा कि मुश्किलें धीरे-धीरे कम होती गईं और कई मामलों का समाधान भी हुआ।
राजपाल यादव की बातों से साफ है कि…
उनके मुताबिक वर्तमान में करीब 25-30 करोड़ रुपये की देनदारी बाकी है।
एक समय यह रकम करीब 50 करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी।
पिछले वर्षों में उन्होंने कई मामलों का निपटारा किया।
सोशल मीडिया पर वायरल चेक और नए मामलों को लेकर उन्होंने अपनी स्थिति स्पष्ट की।
उनका कहना है कि वह आर्थिक रूप से डूबे नहीं हैं, बल्कि कानूनी और वित्तीय मामलों में उलझे हुए हैं।
मुश्किल वक्त में मिली आर्थिक मदद के लिए उन्होंने लोगों का आभार जताया और कहा कि मदद वापस की जाएगी।
कंगना रनौत और बाबा रामदेव के बीच जुबानी जंग तेज होती नजर आ रही है। मामला कंगना के Gen Z को ‘जेनरेशन गटर’ कहने वाले बयान से शुरू हुआ था। अब बाबा रामदेव की टिप्पणी पर कंगना ने सोशल मीडिया के जरिए उन्हें तीखा जवाब दिया है।
Gen Z वाले बयान पर शुरू हुआ विवाद
दरअसल, कंगना रनौत ने हाल ही में कुछ Gen Z युवाओं और महिलाओं को लेकर टिप्पणी करते हुए उन्हें ‘जेनरेशन गटर’ कहा था। उनके इस बयान पर सोशल मीडिया से लेकर सार्वजनिक मंचों तक काफी चर्चा हुई।
कंगना के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए बाबा रामदेव ने कथित तौर पर उनके बयान और सोच पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि किसी पीढ़ी को ‘जेनरेशन गटर’ कहना सही सोच नहीं है। उन्होंने कंगना के बचपन, जवानी और पिछली उपलब्धियों का भी जिक्र किया।
कंगना ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर दिया जवाब
बाबा रामदेव की टिप्पणी कंगना को पसंद नहीं आई। उन्होंने 19 अगस्त को अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए बाबा रामदेव पर निशाना साधा।
कंगना ने तंज कसते हुए कहा कि बाबा जी उनकी जवानी और बेडरूम को लेकर दिन में सपने न देखें। उन्होंने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति के बारे में अफवाहों और गपशप के आधार पर अंदाजा लगाना सही नहीं है।
कंगना ने आगे बाबा रामदेव को उनके पुराने विवाद की याद दिलाते हुए कहा कि उन्हें चरित्र का पाठ पढ़ाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने दावा किया कि उनके चरित्र को लेकर किसी तरह की धोखाधड़ी सामने नहीं आई है।
कंगना ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने मामले का भी किया जिक्र
कंगना ने अपने जवाब में 2024 में सामने आए पतंजलि के भ्रामक विज्ञापनों से जुड़े सुप्रीम कोर्ट मामले का भी जिक्र किया।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने भ्रामक विज्ञापनों से जुड़े मामले में बाबा रामदेव और पतंजलि के प्रबंध निदेशक आचार्य बालकृष्ण को अदालत के आदेशों का पालन न करने को लेकर तलब किया था। बाद में बाबा रामदेव ने अदालत से बिना शर्त माफी मांगी थी।
कंगना ने इसी पुराने मामले को अपने जवाब का हिस्सा बनाते हुए बाबा रामदेव पर तंज कसा।
बाबा रामदेव ने कंगना के बयान पर क्या कहा था?
रिपोर्ट के मुताबिक, बाबा रामदेव से जब कंगना के Gen Z से जुड़े बयान पर सवाल किया गया तो उन्होंने इसे ‘बिगड़ी हुई सोच’ बताया था। उन्होंने कहा कि युवाओं की पूरी पीढ़ी को ‘जेनरेशन गटर’ कहना उचित नहीं है।
अब कंगना के पलटवार के बाद दोनों के बीच यह बयानबाजी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है।
मामला क्या है?
कंगना ने Gen Z को लेकर विवादित टिप्पणी की थी।
उनके बयान पर बाबा रामदेव ने प्रतिक्रिया दी।
बाबा रामदेव की टिप्पणी पर कंगना ने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए जवाब दिया।
कंगना ने अपने जवाब में बाबा रामदेव के पुराने सुप्रीम कोर्ट मामले का भी जिक्र किया।
दोनों की बयानबाजी के बाद यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में है।