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  • मखाना के 10 फायदे, उपयोग और नुकसान..?

    मखाना के 10 फायदे, उपयोग और नुकसान..?

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    सूखे मेवे में शामिल होने वाले मखाना को भारत के साथ-साथ पूरी दुनिया में इस्तेमाल में किया जाता है। बहुत से लोग इसे भून कर खाना पसंद करते हैं। वहीं, कई लोग इसे फ्राई कर इस्तेमाल में लाते हैं। कुछ ऐसे भी हैं, जो इसकी खीर बनाकर इसका सेवन करते हैं। इन तीनों ही तरीकों से, इसके भिन्न-भिन्न स्वाद का लुत्फ उठाया जा सकता है। वहीं, आपको यह जानकर हैरानी होगी कि स्वाद के साथ ही यह सेहत के लिए भी अत्यधिक लाभकारी है। स्टाइलक्रेज के इस लेख में हम आपको मखाना के फायदे और उपयोग के बारे में विस्तार से बताएंगे। साथ ही इस बात की जानकारी भी विस्तार से देंगे कि मखाना खाने से क्या होता है।

    मखाना क्या है?

    मखाना, कमल के बीज को कहते हैं। यह एक स्वादिष्ट और पौष्टिक खाद्य पदार्थ है। इसे कई नामों से जाना जाता है, जैसे फॉक्स नट, फूल-मखाना, लोटस सीड और गोर्गन नट (1)। वहीं, इसके बीजों को भूनने के बाद इसका उपयोग कई प्रकार की खाद्य सामग्री में किया जाता है। इसके अलावा, यह कई प्रकार के पोषक तत्वों से भरपूर होता है, जो सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं। नीचे स्वास्थ्य के लिए मखाना के फायदों को विस्तार से बताया गया।

    मखाना में कौन से औषधीय गुण मौजूद हैं?

    मखाना में कई प्रकार के औषधीय गुण पाए जाते हैं, जो स्वास्थ के लिए फायदेमंद हो सकते हैं। एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इनफार्मेशन) की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध के अनुसार, मखाने में एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी ट्यूमर प्रभाव पाए जाते हैं। इसके अलावा, इसका सेवन बुखार, पाचन तंत्र सुधारने में और दस्त के लिए भी किया जा सकता है। इसके अलावा, यह कई खास एल्कलॉइड से भी समृद्ध होता है। ये सभी गुण और प्रभाव मखाने को स्वास्थ्य के लिए उपयोगी बनाने का काम करते हैं (1)।

    मखाने के फायदे – Benefits of Makhana in Hindi

    नीचे हम शरीर के लिए मखाने के फायदे बता रहे हैं। जानिए मखाने का सेवन किस प्रकार स्वास्थ्य लाभ पहुंचाने का काम कर सकता है। साथ ही इस बात का ध्यान रखें कि मखाना लेख में शामिल किसी भी बीमारी का डॉक्टरी इलाज नहीं है। इसका सेवन केवल शारीरिक समस्या से बचाव और शरीर को स्वस्थ रखने का एक तरीका हो सकता है।

    1. वजन कम करने के लिए मखाने के लाभ

    वजन घटाने में मखाने के फायदे की बात करें, तो इसका उपयोग मोटापे की समस्या से छुटकारा दिलाने में मददगार साबित हो सकता है। एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित शोध के मुताबिक, कमल के बीज (मखाना) का एथेनॉल अर्क शरीर में फैट सेल्स को नियंत्रित करने में मददगार साबित हो सकता है। साथ ही यह फैट सेल्स के वजन को भी कम कर सकता है। इसलिए, ऐसा कहा जा सकता है कि इसका उपयोग वजन को कम करने में सहायक साबित हो सकता है

    2. ब्लड प्रेशर में लाभदायक मखाना के गुण

    बात करें, ब्लड प्रेशर में मखाने के फायदे की, तो माना जाता है कि मखाने के नियमित इस्तेमाल से इस गंभीर समस्या से काफी हद तक राहत पाई जा सकती है। कारण यह है कि इसमें पाया जाने वाला एल्कलॉइड हाइपरटेंशन यानी हाई ब्लड प्रेशर की समस्या को नियंत्रित करने का काम कर सकता है। इसलिए, बीपी की समस्या को नियंत्रित करने के लिए मखाने का सेवन किया जा सकता है

    3. डायबिटीज में मखाने के फायदे

    डायबिटीज की समस्या से राहत पाने के लिए भी मखाने का उपयोग किया जा सकता है। एक शोध के आधार पर इस बात की पुष्टि की गई है कि मखाने में पाए जाने वाले रेसिस्टेंट स्टार्च में हाइपोग्लाइसेमिक (ब्लड शुगर को कम करने वाला) प्रभाव पाया जाता है। यह प्रभाव मधुमेह की समस्या को नियंत्रित करने में सहायक साबित हो सकता है। इसके अलावा, यह इंसुलिन को भी नियंत्रित करने में मददगार हो सकता है

    4. हृदय के लिए मखाना का गुण

    जैसा कि हमने ऊपर बताया कि मखाने का सेवन उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने का काम कर सकता है (3)। इसके अलावा, यह मधुमेह और बढ़ते वजन को भी नियंत्रित कर सकता है (2) (4)। वहीं, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और मोटापे को हृदय रोग का जोखिम कारक माना जाता है (5)। इस आधार पर कहा जा सकता है कि मखाने का सेवन इन समस्याओं से बचाव कर इनसे होने वाले हृदय रोग के जोखिम को कम कर सकता है। वहीं, एक अन्य शोध में जिक्र मिलता है कि कमल का बीज यानी मखाना कार्डियोवस्कुलर रोग (हृदय संबंधी) से बचाव का काम कर सकता है (1)।

    5. प्रोटीन का अच्छा स्रोत

    मखाने में प्रोटीन की मात्रा पाई जाती है। 100 ग्राम मखाने में लगभग 10.71 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है (6)।इसलिए, ऐसा कहा जा सकता है कि मखाना खाने के फायदों में प्रोटीन की कमी को पूरा करना भी शामिल है। इसके नियमित उपयोग से शरीर में प्रोटीन की आवश्यक मात्रा की पूर्ति के साथ, उसकी कमी से होने वाली कई समस्याओं को भी दूर किया जा सकता है।

    6. गर्भावस्था में मखाना खाने के फायदे

    गर्भावस्था में मखाना का सेवन करना फायदेमंद हो सकता है। गर्भावस्था में महिलाओं के लिए मखाने का उपयोग कई प्रकार के पकवानों में मिलाकर किया जाता है। एक शोध के अनुसार, मखाने का उपयोग गर्भावस्था के दौरान और प्रसव के बाद की होने वाली कमजोरियों को दूर करने के लिए किया जा सकता है। इसके अलावा, इसमें कई प्रकार के पोषक तत्व जैसे की आयरन, प्रोटीन, मैग्नीशियम और पाेटेशियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो गर्भावस्था के दौरान महिला को स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं

    7. अनिद्रा में मखाने के लाभ

    अनिद्रा यानी नींद न आने की समस्या में मखाना के लाभ देखे जा सकते हैं।इससे जुड़े एक शोध में जिक्र मिलता है कि अनिद्रा की समस्या के लिए मखाने का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से किया जाता है (1)। हालांकि, इस लाभ के पीछे मखाने का कौन-सा गुण जिम्मेदार होता है, फिलहाल इससे जुड़ा सटीक वैज्ञानिक शोध उपलब्ध नहीं है।

    8. मसूड़ों के लिए मखाना खाने के फायदे

    शोध में पाया गया है कि मखाने में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-माइक्रोबियल प्रभाव पाए जाते हैं (1) (8)। मखाने में पाए जाने वाले ये दोनों गुण मसूड़े संबंधित सूजन और बैक्टीरियल प्रभाव के कारण होने वाली दांतों की सड़न को रोकने में मददगार साबित हो सकते हैं। इस कारण माना जा सकता है कि मखाने में पाए जाने वाले ये गुण मसूड़ों की सूजन के लिए फायदेमंद हो सकते हैं। हालांकि, इस विषय पर सीधे तौर पर कोई शोध उपलब्ध नहीं है।

    9. किडनी के लिए बेनिफिट्स ऑफ मखाना

    मखाने का उपयोग किडनी के लिए भी फायदेमंद हो सकता है। एनसीबीआई के एक शोध में जिक्र मिलता है कि मखाने का सेवन अन्य समस्याओं जैसे दस्त के साथ किडनी से जुड़ी परेशानियों से बचाव का काम कर सकता है (9)। फिलहाल, यहां यह स्पष्ट नहीं है कि इसका कौन-सा गुण किडनी की समस्या को ठीक करने में लाभदायक हो सकता है।

    10. एंटी-एजिंग बेनिफिट्स ऑफ मखाना

    त्वचा से संबंधित समस्याओं में मखाने के उपयोग पर किए गए एक शोध में पता चला है कि मखाना एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होता है। यह गुण त्वचा पर आने वाले एजिंग के प्रभाव जैसे झुर्रियों को दूर करने में मददगार साबित हो सकता है

  • घर में हनुमान जी की ये 5 तस्वीरें लगाना माना जाता है बेहद शुभ, वास्तु के अनुसार जानें इनके फायदे..

    घर में हनुमान जी की ये 5 तस्वीरें लगाना माना जाता है बेहद शुभ, वास्तु के अनुसार जानें इनके फायदे..

    श्रीराम के परम भक्त हनुमान जी को शक्ति, साहस और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। मंगलवार, शनिवार समेत रामनवमी, हनुमान जन्मोत्सव जैसे खास मौकों पर मंदिर में उनके श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ती है। वहीं, बात करें घर के देवस्थान की तो वास्तु में भी घर में हनुमान जी की तस्वीर रखना शुभ बताया है। घर में हनुमान जी की 5 तस्वीरें लगाना बहुत लाभदायी माना जाता है। चलिए जानते हैं कौन सी फोटो घर में रखना चाहिए और इसके क्या लाभ हैं।

    इस दिशा में लगाएं तस्वीर

    सबसे पहले जान लेते हैं कि हनुमान जी की फोटो किस दिशा में रखना फायदेमंद होता है। वास्तु शास्त्र  के अनुसार हनुमान जी की तस्वीर दक्षिण दिशा में लगाना शुभ माना जाता है। खासतौर पर लाल रंग में बैठे हुए हनुमान जी का चित्र इस दिशा के लिए उपयुक्त माना जाता है। इससे दक्षिण दिशा से आने वाली नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव कम होने की मान्यता है।

    राम भक्ति करते हनुमान

    भगवान राम की पूजा या भजन-कीर्तन करते हुए हनुमान जी की तस्वीर घर में लगाना पूरे परिवार के लिए शुभ होता है। मान्यता है कि इससे घर के सदस्यों के बीच प्रेम, आपसी समझ और अपनापन बढ़ता है और वातावरण में सुख-शांति बनी रहती है।

    पर्वत उठाए बजरंगबली

    हाथ में पर्वत उठाए हुए हनुमान जी का चित्र साहस और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। वास्तु अनुसार ऐसी तस्वीर घर में रखने से व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास और नई ऊर्जा का संचार होता है। इसे मुश्किल परिस्थितियों का सामना करने की प्रेरणा से भी जोड़ा जाता है।

    उड़ते हुए हनुमान

    आकाश में उड़ते हुए हनुमान जी की तस्वीर को प्रगति और सफलता से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि इसे घर में रखने से व्यक्ति के लिए आगे बढ़ने के नए अवसर बनते हैं और मुश्किल कामों को पूरा करने का आत्मविश्वास मिलता है।

    लाल रूप में विराजमान

    दक्षिण दिशा में लाल रंग में बैठे हनुमान जी की तस्वीर लगाने की भी विशेष मान्यता है। इसे घर की परेशानियों और नकारात्मक प्रभावों को दूर करने वाला माना जाता है। साथ ही, ऐसी तस्वीर घर में सुरक्षा और सकारात्मक माहौल बनाए रखने से जोड़ी जाती है।

    पंचमुखी हनुमान

    वास्तु में मुख्य दरवाजे पर पंचमुखी हनुमान जी की तस्वीर या प्रतिमा लगाना भी शुभ बताया है। मान्यता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा और बुरी शक्तियां घर में प्रवेश नहीं कर पातीं। इस स्वरूप को हनुमान जी का विराट स्वरूप माना जाता है।

  • ‘साहब चले गए हैं…’, पिछले एक साल से ट्राई साइकिल के लिए ऑफिसों के चक्कर लगा रहा दिव्यांग

    ‘साहब चले गए हैं…’, पिछले एक साल से ट्राई साइकिल के लिए ऑफिसों के चक्कर लगा रहा दिव्यांग

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    उत्तर प्रदेश में एक ऐसा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जो सरकारी सिस्टम से जुड़ा है. इस वीडियो में एक दिव्यांग है, जो ट्राई साइकिल के लिए पिछले एक साल से कलेक्ट्रेट का चक्कर लगा रहा है. लेकिन अब तक उसको सिर्फ आश्वासन ही मिला है. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. ये वायरल वीडियो सरकारी सिस्टम पर एक सवाल बन गया है.

    ‘साहब चले गए गए हैं’
    इस वायरल वीडियो में दिव्यांग अपना दर्द सुना रहा है. इस दिव्यांग का मानना है कि अधिकारियों की तरफ से सिर्फ आश्वासन मिलता है. दिव्यांग का आरोप है कि हर बार ऑफिस पहुंचने पर उसे एक ही जवाब मिलता है कि “साहब चले गए हैं”.

    एक साल पहले किया था आवेदन- दिव्यांग
    ये मामला कौशांबी जिलाधिकारी अमित पाल कार्यालय के बाहर की हैं, जहां एक दिव्यांग व्यक्ति अपनी परेशानी वीडियो में बयां कर रहा है. सिराथू तहसील के निजामपुर नौगिरा निवासी दीनानाथ मिश्र का कहना है कि उसने ट्राई साइकिल के लिए करीब एक साल पहले आवेदन किया था, लेकिन अभी तक उसे ट्राई साइकिल नहीं मिल सकी.

    वायरल वीडियो में दिव्यांग दीनानाथ कहते नजर आ रहे हैं कि वह कई बार कलेक्ट्रेट आ चुके हैं, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ यही कहा जाता है कि अधिकारी मौजूद नहीं हैं या साहब चले गए हैं.

    8 साल पहले मिली थी ट्राई साइकिल-
    दीनानाथ का कहना है कि करीब 8 साल पहले तत्कालीन डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने उन्हें ट्राई साइकिल दी थी, जो अब खराब हो चुकी है. मजबूरी में वह नई ट्राई साइकिल के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं.

    जल्द उपलब्ध कराई जाएगी ट्राई साइकिल- प्रशासन
    इस मामले में ज़ब विकलांग कल्याण अधिकारी विकास वर्मा से फोन पर बात की गई तो उन्होंने बताया की 13/7/2026 को इनका फॉर्म भरवा दिया गया था और 3 अगस्त को इनका शारीरिक परीक्षण करवाया गया है. जैसे ही हमें साइकिल प्राप्त होती है, इन्हें सबसे पहले उपलब्ध कराई जाएगी.

  • सूरत में नकली घी बनाने वाले नेटवर्क का भंडाफोड़, पाम ऑयल और वनस्पति तेल से तैयार कर रहे थे ‘गाय का घी’

    सूरत में नकली घी बनाने वाले नेटवर्क का भंडाफोड़, पाम ऑयल और वनस्पति तेल से तैयार कर रहे थे ‘गाय का घी’

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    सूरत ग्रामीण पुलिस ने नकली घी बनाने और उसे असली गाय का घी बताकर बेचने वाले एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है. कामरेज तहसील के धोरण पारडी गांव स्थित एक इंडस्ट्रियल यूनिट में पाम ऑयल, वनस्पति तेल और सोयाबीन तेल से घी तैयार किया जा रहा था. पुलिस ने छापेमारी कर 52.79 लाख रुपये से अधिक का सामान जब्त किया है.

    गुप्त सूचना पर पुलिस ने मारा छापा
    सूरत ग्रामीण पुलिस अधीक्षक राजेश गढिया के मार्गदर्शन में लोकल क्राइम ब्रांच की टीम नकली और मिलावटी उत्पादों के खिलाफ अभियान चला रही थी. इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली कि धोरण पारडी गांव की सीमा में हिंदवा ड्रीम्स इंडस्ट्रीज के प्लॉट नंबर G-01 में संदिग्ध घी बनाने और पैक करने का काम चल रहा है. सूचना के आधार पर PSI जे.एल. पटेल के नेतृत्व में टीम ने 15 अगस्त को यूनिट पर छापेमारी की.

    लाइसेंस लेकर कर रहा था मिलावट का कारोबार
    छापेमारी के दौरान यूनिट का मालिक अंकितकुमार राजेशकुमार मोदी मौके पर मिला. पूछताछ में उसने बताया कि उसने ‘कैवल फूड प्रोडक्ट’ के नाम से घी बनाने का लाइसेंस लिया था. पुलिस के मुताबिक, इसी लाइसेंस की आड़ में वह डेयरी प्रोडक्ट की जगह पाम ऑयल, वनस्पति घी और सोयाबीन तेल को मिलाकर संदिग्ध घी तैयार करता था. इसके बाद इस उत्पाद को ‘Shri ANMOL RATNA COW’s GHEE’ के नाम से अलग-अलग पैकिंग में गाय का घी बताकर बेचा जाता था.

    5 टन से ज्यादा माल बरामद
    पुलिस ने मौके से पाम ऑयल, वनस्पति तेल और संदिग्ध घी समेत 5 टन से ज्यादा सामग्री बरामद की. जब्त किए गए पूरे मुद्दामाल की कीमत करीब 52,79,761 रुपये बताई गई है. मामले की गंभीरता को देखते हुए फूड एंड ड्रग्स विभाग के अधिकारियों को मौके पर बुलाया गया. अधिकारियों ने जरूरी सैंपल लेकर उन्हें लैब जांच के लिए भेज दिया है.

    एक साल से चल रहा था कारोबार
    प्राथमिक पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी करीब एक साल से यह कारोबार कर रहा था और तैयार माल आसपास के इंडस्ट्रियल इलाकों में सप्लाई करता था. पुलिस ने आरोपी के खिलाफ फूड सेफ्टी एक्ट और धोखाधड़ी की धाराओं में मामला दर्ज किया है. अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि नकली घी किन-किन इलाकों और दुकानों तक पहुंचाया गया.

  • नारियल तेल असली है या मिलावटी? घर पर इन 4 आसान तरीकों से करें पहचान

    नारियल तेल असली है या मिलावटी? घर पर इन 4 आसान तरीकों से करें पहचान

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    नारियल तेल का इस्तेमाल लगभग हर घर में होता है, कोई इसे खाना बनाने के लिए रखता है, तो कोई बालों और त्वचा की देखभाल के लिए. लेकिन क्या जो नारियल तेल आप इस्तेमाल कर रहे हैं, वह वाकई शुद्ध है? बाजार में कई बार मिलावट वाला तेल भी मिल सकता है. तो चलिए आपको कुछ ऐसे तरीकों के बारे में बताते हैं जिससे आप असली और नकली नारियल तेल की पहचान कर सकते हैं.

    फ्रिज टेस्ट से करें जांच
    नारियल तेल को आप फ्रिज टेस्ट कर सकते हैं. इसके लिए थोड़ा सा तेल साफ कांच की कटोरी में डालकर कुछ घंटों के लिए फ्रिज में रखें. शुद्ध नारियल तेल ठंडे तापमान में जमने लगता है और सफेद या ठोस दिखाई देता है. हालांकि, केवल इस टेस्ट से तेल की शुद्धता तय नहीं की जा सकती, क्योंकि तापमान और तेल की प्रोसेसिंग का भी असर पड़ता है.

    रंग और बनावट पर दें ध्यान
    नारियल तेल सामान्य तौर पर साफ और एक समान दिखाई देता है. ठंडे मौसम में यह सफेद और ठोस हो सकता है, जबकि गर्म वातावरण में पारदर्शी या हल्का पीला नजर आ सकता है. तेल को पारदर्शी कांच के बर्तन में डालकर रोशनी में देखें. अगर इसमें असामान्य कण, गंदगी या बहुत ज्यादा अलग-अलग परतें नजर आएं, तो सावधान रहें.

    खुशबू से भी मिल सकता है संकेत
    वर्जिन या अनरिफाइंड नारियल तेल में नारियल की प्राकृतिक खुशबू होती है. थोड़ी मात्रा हथेली पर लेकर हल्का गर्म करें और इसकी गंध महसूस करें. अगर तेल से तेज केमिकल जैसी गंध, बासीपन या कोई असामान्य महक आ रही है, तो इसकी क्वालिटी पर सवाल उठ सकता है. वहीं, रिफाइंड नारियल तेल की खुशबू काफी हल्की हो सकती है.

    कागज पर डालकर देखें
    एक साफ सफेद कागज पर नारियल तेल की कुछ बूंदें डालकर थोड़ी देर छोड़ दें. इसके फैलने और बचे हुए अवशेष को देखें. अगर असामान्य रंग या गंदा अवशेष नजर आए, तो यह गुणवत्ता को लेकर संकेत हो सकता है. हालांकि, यह भी केवल शुरुआती घरेलू जांच है.

    तेल खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
    नारियल तेल खरीदते समय पैकेट पर लिखे Ingredients जरूर पढ़ें. पैक की सील, एक्सपायरी डेट, बैच नंबर और FSSAI से जुड़ी जानकारी भी जांचें. सबसे जरूरी बात यह है कि घरेलू टेस्ट मिलावट की पक्की पुष्टि नहीं करते. अगर तेल की गंध, स्वाद या बनावट असामान्य लगे, तो खाने या त्वचा पर लगाने से बचें.

  • बहन की शादी के लिए कर्ज, मां बीमार, टीचर की नौकरी छोड़ी… नियुक्तियां रद्द होने से सड़क पर आने वालों का दर्द

    बहन की शादी के लिए कर्ज, मां बीमार, टीचर की नौकरी छोड़ी… नियुक्तियां रद्द होने से सड़क पर आने वालों का दर्द

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    रांची में जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में छात्रों के प्रदर्शन के बाद झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने TDPL समेत कई दूसरी परीक्षाओं को रद्द कर दिया. सरकार ने परीक्षाएं रद्द किए जाने की अधिसूचना भी जारी कर दी है. लेकिन अब परीक्षाओं में पास हुए अभ्यर्थी सड़क पर उतर गए हैं. झारखंड मंत्रालय के बाहर सरकार द्वारा TDPL समेत अन्य परीक्षाओं के रद्द किए जाने के अधिसूचना के बाद माहौल बिल्कुल गमगीन है.

    पास अभ्यर्थियों का रो रोहकर बुरा हाल
    एक उम्मीदवार मनीषा का रो रो कर बुरा हाल है. पहले स्टेशन मास्टर के पद पर रेलवे में नियुक्ति मिली थी. वहां से नौकरी छोड़कर आई. मनीषा हमारी टीम के कैमरे के सामने ही बेहोश होकर गिर पड़ी. उनको दोस्तों ने संभालने की कोशिश की. इनका महिला सुपरवाइजर में भी नियुक्ति मिली थी. फिलहाल ASO वित्त विभाग में हैं. मनीषा हजारीबाग की रहने वाली हैं. 15दिनों से तनाव में थी. कर्नाटक में नौकरी में थी. ट्रेनिंग कर रही हैं. मानसिक तनाव इसलिए भी कि आरोप गड़बड़ी के लगे थे. यानी कलंक लगे थे. ब उसे मिटाना है. इळ्जाम और कलंक को झेलने में मुश्किल है.

    भीड़तंत्र में आगे झुक गई सरकार- उम्मीदवार
    एक उम्मीदवार का कहना है कि प्रतिभा रो रही है और भीड़तंत्र के दबाव में सरकार झुक रही है. गुड्डू कुमार राय साहेबगंज से हैं और पुलिस मुख्यालय में कार्यरत थे. सहायक प्रशाखा अधिकारी थे. लेकिन अब उसी दफ्तर में नहीं घुसने दिया जा रहा है. भारतीय रेल में सीनियर गुड्स ट्रेन मैनेजर की नौकरी छोड़कर आए थे. शादी हो गई है. कोर्ट ने कहा था, जिसके खिलाफ सबूत होंगे, उन्हीं को नौकरी से निकाला जाएगा. ये कोर्ट की अवमानना है.

    नौकरी छोड़कर बने थे अधिकारी- उम्मीदवार
    एक  उम्मीदवार पहले 2014 से ही  शिक्षक थे. लेकिन नौकरी छोड़कर ग्रामीण विकास विभाग में सहायक प्रशाखा अधिकारी बने थे. ये सोचकर कि ये नौकरी को मिनी IAS कहा जाता है. अब तक सड़क पर हैं.

    बहन की शादी के  लिए लिया कर्ज- उम्मीदवार
    श्याम सुंदर मंडल कहते है कि वो भी रेलवे में ऑफिस सुपरिंटेंडेंट थे. यहां एग्जाम दिया कि रांची में रहेंगे, लेकिन अब तो कहीं नहीं है. सबको नौकरी से निकाला जाएगा. शादी हुई है, लेकिन आगे पूरी जिंदगी है, पूरे परिवार का बोझ है, कैसे जीवन चलेगा, पता नहीं. बहन की शादी के लिए कर्ज भी ले रखा है. कोर्ट के शरण में जाएंगे.

    मां को नहीं बता सकता नौकरी चली गई- विकास
    हज़ारीबगा के विकास कुमार की भी कहानी मिलती जुलती है. ये लेबर इन्फोर्समेंट ऑफिसर थे. इनकी माँ की तबियत खराब रहती है. लिहाजा मां को नौकरी जाने की बात बताई ही नहीं है. अगर उन्हें पता चला तो सदमा लगेगा. हार्ट अटैक भी आ सकता है. उसकी जिम्मेवारी क्या सरकार लेगी?

  • पहले असली सोना गिरवी रखकर जीता भरोसा, फिर नकली गहनों के बदले ले गए कैश और ज्वैलरी… ज्वैलर को ऐसे लगाया 8 लाख का चूना..

    पहले असली सोना गिरवी रखकर जीता भरोसा, फिर नकली गहनों के बदले ले गए कैश और ज्वैलरी… ज्वैलर को ऐसे लगाया 8 लाख का चूना..

    उत्तराखंड के पौड़ी जिले में पुलिस ने नकली सोने के जरिए ज्वैलर्स से ठगी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है. पुलिस ने राजस्थान के अलवर निवासी तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 6 लाख रुपए नकद और 4 सोने की चेन बरामद की हैं. मामले में एक अन्य आरोपी अभी फरार है, जिसकी तलाश जारी है.

    कोटद्वार के जौनपुर निवासी ज्वैलर विभाष अग्रवाल ने को पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी. उन्होंने बताया कि आरोपी रघुवीर पहले कई बार असली सोने की अंगूठी गिरवी रखकर पैसे लेता और समय पर ब्याज सहित लौटाकर अंगूठी छुड़ा लेता था. इसी तरह कई लेन-देन के बाद उसने ज्वैलर का भरोसा जीत लिया.

    बेटी की शादी के लिए मांगे पैसे
    इसके बाद रघुवीर अपने एक साथी के साथ दुकान पहुंचा और बेटी की शादी के लिए पैसों की जरूरत बताई. उसने कुछ सोने के पेंडल देकर बदले में करीब 8 लाख रुपए नकद और तैयार सोने के आभूषण ले लिए. बाद में जांच कराने पर पता चला कि गिरवी रखे गए गहने नकली थे. आरोपी से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उसका मोबाइल बंद मिला. इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की.

    170 CCTV फुटेज से मिला सुराग
    एसएसपी सर्वेश पंवार के निर्देश पर गठित पुलिस टीम ने घटनास्थल और आसपास के इलाकों में लगे करीब 170 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली. जांच में पता चला कि आरोपी बस से कोटद्वार आए थे और वारदात के बाद नजीबाबाद चले गए. सर्विलांस और मुखबिर की सूचना के आधार पर पुलिस ने रेलवे स्टेशन कोटद्वार से तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया.

    पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे पहले असली सोने के गहने गिरवी रखकर ज्वैलर्स का भरोसा जीतते थे. 5-6 बार सफल लेन-देन के बाद वे सोने की परत चढ़े नकली गहने गिरवी रखकर उनके बदले असली ज्वैलरी और नकदी लेकर फरार हो जाते थे. पुलिस के मुताबिक, आरोपी एक अन्य ज्वैलर को भी इसी तरह निशाना बनाने की तैयारी में थे, लेकिन उससे पहले ही गिरफ्तार कर लिए गए. फिलहाल पुलिस फरार आरोपी की तलाश में जुटी है.

  • वजन घटाने से लेकर मसल्स बनाने तक… सोया चंक्स की ये 4 हाई-प्रोटीन रेसिपीज करेंगी आपकी डाइट को बेहतर..

    वजन घटाने से लेकर मसल्स बनाने तक… सोया चंक्स की ये 4 हाई-प्रोटीन रेसिपीज करेंगी आपकी डाइट को बेहतर..

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    आजकल फिटनेस और हेल्दी लाइफस्टाइल को लेकर लोगों की जागरूकता तेजी से बढ़ रही है. यही वजह है कि लोग अपनी डाइट में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाने पर खास ध्यान दे रहे हैं. खासकर जिम जाने वाले, वर्कआउट करने वाले, वजन नियंत्रित रखने की कोशिश कर रहे लोग और शाकाहारी भोजन करने वाले लोग ऐसे विकल्प तलाशते हैं जो प्रोटीन से भरपूर होने के साथ स्वादिष्ट भी हों. ऐसे में सोया चंक्स एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है. इसमें प्रोटीन के अलावा फाइबर, आयरन और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं. अच्छी बात यह है कि इसे कई तरह की स्वादिष्ट और हेल्दी रेसिपीज में आसानी से शामिल किया जा सकता है.

    सोया चंक्स सलाद
    अगर आप हल्का और पौष्टिक स्नैक चाहते हैं तो सोया चंक्स सलाद अच्छा विकल्प है. उबले हुए सोया चंक्स में खीरा, टमाटर, प्याज, गाजर, शिमला मिर्च और हरा धनिया मिलाएं. ऊपर से नींबू का रस, काली मिर्च और थोड़ा काला नमक डालें. यह सलाद प्रोटीन और फाइबर से भरपूर होता है.

    सोया चंक्स पुलाव
    सोया चंक्स का पुलाव स्वाद और पोषण दोनों का बेहतरीन मेल है. सबसे पहले सोया चंक्स को गर्म पानी में भिगोकर अच्छी तरह निचोड़ लें. इसके बाद चावल, मटर, गाजर, बीन्स और हल्के मसालों के साथ पुलाव तैयार करें. यह लंच या डिनर के लिए हेल्दी विकल्प है.

    सोया चंक्स टिक्की
    शाम की हल्की भूख के लिए सोया चंक्स टिक्की बनाई जा सकती है. उबले हुए सोया चंक्स को बारीक काटकर उसमें उबला आलू, गाजर, हरा धनिया और हल्के मसाले मिलाएं. टिक्की बनाकर तवे पर कम तेल में सेंक लें. इसे हरी चटनी या दही के साथ परोस सकते हैं.

    सोया चंक्स भुर्जी
    अगर जल्दी बनने वाली हाई-प्रोटीन डिश चाहिए तो सोया चंक्स भुर्जी बढ़िया विकल्प है. भीगे हुए सोया चंक्स को बारीक काटकर प्याज, टमाटर, शिमला मिर्च और मसालों के साथ भूनें. यह रोटी, पराठे या ब्रेड के साथ स्वादिष्ट लगती है.

    सोया चंक्स बनाते समय रखें ये बातें
    सोया चंक्स को इस्तेमाल करने से पहले 10 से 15 मिनट तक गर्म पानी में भिगोना और फिर अच्छी तरह निचोड़ना जरूरी है. इससे इसका स्वाद और बनावट बेहतर हो जाती है. इसे ज्यादा तेल और मसालों में पकाने से बचें ताकि इसकी पौष्टिकता बनी रहे. साथ ही इसमें ताजी सब्जियां मिलाने से पोषण और बढ़ जाता है. बेहतर स्वाद और अधिक पोषण के लिए सोया चंक्स की रेसिपी हमेशा ताजा बनाकर ही खाएं.

  • 100 साल पुराने आम के बाग ने दिलाया इस किसान को अवॉर्ड, इनकी खूबियां भी जान लीजिए…

    100 साल पुराने आम के बाग ने दिलाया इस किसान को अवॉर्ड, इनकी खूबियां भी जान लीजिए…

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    लखनऊ में आयोजित प्रदेश स्तरीय आम महोत्सव में सहारनपुर के मुजफ्फराबाद ब्लॉक के गांव रणडौल के किसान बसंत कुमार ने जिले का नाम पूरे प्रदेश में रोशन कर दिया. बागवानी की बेहतरीन तकनीक, दुर्लभ आम की किस्मों के संरक्षण और प्राकृतिक तरीके से बागों की देखरेख के लिए उन्हें प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें ट्रॉफी, प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया. इस उपलब्धि से पूरे जिले में खुशी का माहौल है.

    100 साल पुराने पुश्तैनी बाग की करते हैं देखभाल
    72 वर्षीय बसंत कुमार ने बताया कि वे अपने बागों की देखभाल बच्चों की तरह करते हैं. उनके पास करीब ढाई एकड़ में फैला 100 साल से भी अधिक पुराना पुश्तैनी आम का बाग है, जिसे उनके पिता ने लगाया था और जो आज भी भरपूर फल दे रहा है. उन्होंने बताया कि वे बागों में प्रतिबंधित कीटनाशकों का प्रयोग नहीं करते. समय-समय पर जुताई, खरपतवार की सफाई और प्राकृतिक तरीकों से पौधों की सुरक्षा करते हैं. पुराने पेड़ों को बचाने के साथ-साथ उनकी कलम तैयार कर नई पौध भी विकसित कर रहे हैं, ताकि यह विरासत आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रह सके.

    1984 से तैयार किए 130 बीघा में आम के बाग
    बसंत कुमार ने बताया कि वर्ष 1984 से उन्होंने खुद बाग तैयार करने का काम शुरू किया था. आज उनके हाथों से करीब 130 बीघा क्षेत्र में आम के बाग विकसित हो चुके हैं. उनके बागों में आम की 20 से अधिक प्रजातियां मौजूद हैं. लखनऊ आम महोत्सव में वे अपने भतीजे योगेश और समधी विनोद पुंडीर के साथ 16 किस्म के आम लेकर पहुंचे थे. इनमें फजली, तोतापरी, मलियागिरि, मल्लिका, रामकेला, जाफरान, मालदा, लंगड़ा, चौसा, हाथीफूल समेत कई दुर्लभ और उत्कृष्ट किस्में शामिल थीं. जिला उद्यान अधिकारी द्वारा निरीक्षण और रिपोर्ट भेजे जाने के बाद लखनऊ से आई टीम ने भी उनके बाग का दौरा किया था.

    ‘यह सम्मान पूरे जिले और गांव के किसानों का है’
    सम्मान मिलने के बाद भावुक हुए बसंत कुमार ने कहा कि सबसे बड़ी खुशी इस बात की है कि मुख्यमंत्री ने मंच से सबसे पहले उनके गांव रणडौल और सहारनपुर का नाम लिया. उन्होंने कहा कि वे खुद को एक छोटा किसान मानते हैं, लेकिन यह सम्मान पूरे जिले और गांव के किसानों का सम्मान है. मुख्यमंत्री ने उन्हें शील्ड, प्रशस्ति पत्र और एक पौधा भी भेंट किया. बसंत कुमार का कहना है कि उनकी कोशिश रहेगी कि पारंपरिक बागवानी, आम की पुरानी दुर्लभ किस्मों के संरक्षण और प्राकृतिक खेती को आगे बढ़ाते हुए नई पीढ़ी को भी इससे जोड़ा जाए.

  • मृत्यु के बाद क्या होता है आत्मा के साथ… क्यों 13 दिनों तक आत्मा अपने ही घर में रहती है… जानें क्या कहता है गरुड़ पुराण..?

    मृत्यु के बाद क्या होता है आत्मा के साथ… क्यों 13 दिनों तक आत्मा अपने ही घर में रहती है… जानें क्या कहता है गरुड़ पुराण..?

    हिंदू धर्म में ऐसा माना जाता है कि भले ही किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है लेकिन आत्मा अमर है. किसी व्यक्ति की मृत्यु होने के बाद आत्मा का नया सफर शुरू हो जाता है. गरुड़ पुराण में बताया गया है कि आत्मा का क्या होता है. अधिकांश लोग यह सोचते हैं कि किसी व्यक्ति की मृत्यु होने के बाद आत्मा तुरंत स्वर्ग या नर्क चली जाती है लेकिन गरुण पुराण के मुताबिक ऐसा नहीं होता है. किसी व्यक्ति की मौत के बाद आत्मा शरीर से बाहर निकलकर 13 दिनों तक अपने ही घर में अपने परिवार वालों के बीच रहती है.

    यमलोक से यमदूत आते हैं आत्मा को लेने
    गरुड़ पुराण के मुताबिक किसी व्यक्ति की मौत के बाद तुरंत यमलोक से दो यमदूत आत्मा को लेने के लिए आ जाते हैं. यमदूत आत्मा को अपने संग लेकर यमलोक चले जाते हैं. गरुण पुराण के मुताबिक आत्मा को यमलोक ले जाने का उद्देश्य महज इतना ही होता है कि उसे उसके जीवनभर के अच्छे और बुरे कर्मों का हिसाब-किताब दिखाया जा सके. यमराज के दरबार में आत्मा को उसके कर्मों की झलक दिखाई जाती है. इसके बाद यमदूत आत्मा को वापस उसी के घर पर छोड़ देते हैं, जहां वह रहती थी. आत्मा को यमलोक ले जाने और उसके कर्मों की झलक दिखाने में लगभग 24 घंटे यानी एक दिन का समय लग जाता है. आत्मा को इसके बाद अगले 13 दिनों तक अपने परिवार के बीच रहना पड़ता है.

    अपनो के बीच घर में क्या करती है आत्मा
    गरुड़ पुराण के मुताबिक आत्मा जब यमलोक से अपने घर आती है तो उसे अपने परिवार और अपनी चीजों से लगाव अधिक महसूस होने लगता है. वह दूर से अपने मृत पड़े शरीर को देखती है और घरवालों को भी रोते हुए पाती है. इससे आत्मा परेशान हो जाती है. वह अपने घरवालों को चुप कराने की कोशिश करती है, उनसे बात करना चाहती है और उन्हें आवाज भी देती है. हालांकि वह पूरी तरह से हवा जैसी एनर्जी बन चुकी होती है. ऐसे में कोई भी आत्मा को देख या फिर सुन नहीं सकता है. कई बार आत्मा अपने पुराने शरीर के अंदर घुसने की कोशिश भी करती है, लेकिन नियमों की वजह से वह अपने शरीर में वापस नहीं जा पाती.

    ऐसे आत्मा की भूख और प्यास होती है शांत
    शरीर से निकलने के बाद आत्मा खुद को बहुत कमजोर महसूस करती है. उसे भूख और प्यास भी लगती है. गरुड़ पुराण के मुताबिक मौत के बाद के पहले 10 दिनों तक घर के लोग जो पिंडदान यानी चावल या जौ के आटे से बने गोल लड्डू का दान करते हैं, वह आत्मा के लिए काफी जरूरी होता है. रोज पिंडदान किया जाता है, उससे आत्मा की भूख व प्यास शांत होती है. इसी पिंडदान की ताकत से आत्मा को एक नया अदृश्य शरीर मिलता है, ताकि वह आगे का सफर तय कर सके. रोज के पिंडदान से इस नए शरीर के अलग-अलग हिस्से बनते हैं, जिससे आत्मा को आगे की यात्रा के लिए ताकत मिलती है.

    आत्मा के नए अदृश्य शरीर को मिलती है ताकत
    किसी व्यक्ति के मरने के 11वें और 12वें दिन घर में जो खास पूजा-पाठ और पिंडदान किए जाते हैं, वे आत्मा के अदृश्य शरीर को मजबूत और स्थिर बनाते हैं. इन दो दिनों में परिवार के लोग जो प्रार्थना करते हैं, उससे आत्मा को बहुत शांति मिलती है. आत्मा को यह अहसास हो जाता है कि अब उसका इस दुनिया का सफर पूरी तरह से खत्म हो चुका है और उसे आगे बढ़ना ही होगा. इन दिनों की पूजा से आत्मा को वह ताकत मिलती है जिससे वह पृथ्वी लोक को छोड़कर यमलोक के कठिन रास्ते पर आसानी से चल सके.

    इस तरह से आत्मा की होती है अंतिम विदाई
    आत्मा के लिए 13वां दिन विशेष होता है. इस दिन को तेरहवीं भी कहते हैं. तेरहवीं के दिन घर पर विशेष पूजा-पाठ होती है, पंडितों को भोजन कराया जाता है और गरीबों को दान दिया जाता है. गरुड़ पुराण के मुताबिक तेरहवीं के दिन जो भी चीजें दान की जाती हैं, उनका फायदा सीधे तौर पर आत्मा को यमलोक के सफर में भोजन, पानी और रास्ते की सुख-सुविधाओं के रूप में प्राप्त होता है. तेरहवीं की पूरी प्रक्रिया पूरी होते ही यमदूत दोबारा आते हैं. गरुण पुराण के मुताबिक इसके बाद आत्मा का धरती और अपने परिवार से नाता हमेशा के लिए टूट जाता है. आत्मा यमलोक की यात्रा पर निकल पड़ती है. इस यात्रा को पूरा करने में आत्मा को लगभग एक साल का समय लग जाता है.