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  • हर महिला को पता होने चाहिए गर्भाशय कैंसर के ये संभावित लक्षण, नजरअंदाज न करें ये संकेत..

    हर महिला को पता होने चाहिए गर्भाशय कैंसर के ये संभावित लक्षण, नजरअंदाज न करें ये संकेत..

    महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी कई ऐसी बीमारियां हैं, जिनका समय पर पता चलना बेहद जरूरी है। गर्भाशय से जुड़े कैंसर के मामले में भी शुरुआती संकेतों को पहचानना और सही समय पर डॉक्टर से सलाह लेना महत्वपूर्ण होता है। हालांकि, नीचे बताए गए लक्षण केवल कैंसर की वजह से ही हों, यह जरूरी नहीं है। कई अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी इनका कारण बन सकती हैं।

    भूख में कमी

    अगर लंबे समय तक भूख कम लग रही है या सामान्य मात्रा में खाना खाने के बावजूद पेट भरा-भरा महसूस हो रहा है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लगातार ऐसी समस्या रहने पर डॉक्टर से जांच कराएं।

    लगातार थकान

    बिना ज्यादा मेहनत किए लगातार थकान, कमजोरी या ऊर्जा की कमी महसूस होना कई स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकता है। अगर यह समस्या लंबे समय तक बनी रहे, तो चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।

    बिना वजह वजन कम होना

    बिना डाइटिंग या किसी खास वजह के लगातार वजन कम होना एक महत्वपूर्ण चेतावनी संकेत हो सकता है। अचानक वजन घटने की स्थिति में डॉक्टर से संपर्क करके कारण की जांच करानी चाहिए।

    पेशाब करते समय दर्द या परेशानी

    पेशाब के दौरान दर्द, जलन या बार-बार पेशाब आने जैसी समस्या को नजरअंदाज न करें। इसके पीछे यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन समेत कई कारण हो सकते हैं, इसलिए लगातार परेशानी होने पर डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

    एनीमिया या कमजोरी

    लगातार कमजोरी, चक्कर आना या एनीमिया होना शरीर में खून की कमी का संकेत हो सकता है। खासकर अगर असामान्य रक्तस्राव भी हो रहा हो, तो इसकी वजह जानने के लिए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

    असामान्य रक्तस्राव पर दें खास ध्यान

    मासिक धर्म के बीच रक्तस्राव, संभोग के बाद ब्लीडिंग या मेनोपॉज के बाद किसी भी तरह का रक्तस्राव असामान्य माना जाता है और इसकी जांच कराना जरूरी है।

    जरूरी बात: इन लक्षणों में से कोई एक लक्षण दिखाई देने का मतलब यह नहीं है कि महिला को कैंसर ही है। लेकिन अगर लक्षण लगातार बने रहें, बढ़ते जाएं या असामान्य रक्तस्राव जैसी समस्या हो, तो बिना देरी किए स्त्री रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें। समय पर जांच और सही चिकित्सकीय सलाह स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

  • जिस जिम में बना रहा था मस्कुलर बॉडी, वहीं जिंदगी ने छोड़ा साथ! पोज देते-देते आया हार्ट अटैक

    जिस जिम में बना रहा था मस्कुलर बॉडी, वहीं जिंदगी ने छोड़ा साथ! पोज देते-देते आया हार्ट अटैक

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    मसल्स दिखाने के दौरान आ गया हार्ट अटैक (इमेज- सोशल मीडिया)

    इन दिनों जिम में अचानक हार्ट अटैक आने के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं. सोशल मीडिया पर ऐसे कई सीसीटीवी और मोबाइल फुटेज वायरल हो रहे हैं जिनमें युवा वर्कआउट के दौरान या उसके तुरंत बाद बेहोश होकर गिरते दिखते हैं. इसी कड़ी में एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है. एक युवक जिम में अपने बाइसेप्स बनाकर पोज दे रहा था. वह अपनी मसल्स को फ्लेक्स करके कैमरे के सामने दिखा रहा था. अचानक उसे हार्ट अटैक आ गया और वह जिम के फर्श पर निढाल होकर गिर पड़ा।

    आसपास मौजूद लोग कुछ समझ पाते उससे पहले ही उसकी हालत गंभीर हो चुकी थी. इस घटना ने लोगों को हैरान कर दिया है. वायरल हो रहे वीडियो में साफ दिखता है कि युवक अपनी बॉडी को फ्लेक्स कर रहा है. वह दोनों हाथों से बाइसेप्स को टाइट करके पोज दे रहा है. उसके चेहरे पर मेहनत और गर्व की भावना साफ झलक रही है. लेकिन कुछ ही सेकंड में उसका शरीर कांपने लगता है. वह संतुलन खो देता है और सीधे फर्श पर गिर जाता है.

    आ गया हार्ट अटैक
    वीडियो में देख सकते हैं कि मोमेंट को रिकॉर्ड कर रहा शख्स तुरंत उसके पास पहुंचता है. लेकिन बताया जा रहा है कि उसकी हालत इतनी खराब हो चुकी थी कि तुरंत मेडिकल मदद की जरूरत पड़ गई. इस वीडियो को देखकर लोग हैरान रह गए हैं. कई लोगों ने कमेंट कर लिखा कि जिम अब सिर्फ फिटनेस की जगह नहीं रह गई बल्कि जानलेवा साबित हो रही है. विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे हादसों की संख्या इसलिए बढ़ रही है क्योंकि युवा भारी वर्कआउट के तुरंत बाद रील बनाने या फोटो खिंचवाने के लिए सांस रोककर लंबे समय तक मसल्स फ्लेक्स करते हैं. जब व्यक्ति भारी वजन उठाता है तो शरीर में ऑक्सीजन की मांग बढ़ जाती है. वर्कआउट के दौरान दिल तेज धड़कता है और ब्लड प्रेशर बढ़ता है. ऐसे में अगर व्यक्ति सांस रोककर पोज लेने लगे तो शरीर और दिल पर अत्यधिक दबाव पड़ता है. इसे वाल्सल्वा मैन्यूवर कहा जाता है. इसमें सांस रोकने से ब्लड फ्लो प्रभावित होता है और दिल पर अचानक बोझ पड़ जाता है. कई युवा बिना वार्म-अप के या ओवरट्रेनिंग करके भी यही गलती करते हैं. फिटनेस जरूरी है लेकिन दिखावे और सोशल मीडिया के दबाव में शरीर की सीमाओं को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है.

     

     

    बदल रहा है फिटनेस वर्ल्ड


    आजकल इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर लाखों फॉलोअर्स वाले फिटनेस इंफ्लुएंसर अपनी परफेक्ट बॉडी दिखाते हैं. युवा उन्हें देखकर जल्दी रिजल्ट पाने की होड़ में लग जाते हैं. कई लोग सप्लीमेंट्स का अंधाधुंध इस्तेमाल करते हैं. कुछ स्टेरॉयड जैसी चीजों का सहारा लेते हैं जो दिल के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती हैं. डिहाइड्रेशन, कम नींद, अनियमित खानपान और तनाव भी हार्ट अटैक के जोखिम को बढ़ा देते हैं. जिम में एसी की ठंडक में पसीना नहीं आने पर कई लोग पानी कम पीते हैं जिससे शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो जाती है. डॉक्टरों का कहना है कि 20 से 35 साल की उम्र के युवाओं में हार्ट अटैक के मामले पहले कम होते थे लेकिन अब ये तेजी से बढ़ रहे हैं. एक अध्ययन के अनुसार जिम में होने वाले कई कार्डियक इवेंट्स में ओवरएक्सर्शन और गलत तकनीक मुख्य वजह होती है. जब व्यक्ति भारी वजन उठाकर तुरंत पोज लेता है तो कोरोनरी आर्टरीज पर दबाव बढ़ता है. अगर किसी को पहले से हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल या फैमिली हिस्ट्री ऑफ हार्ट डिजीज है तो जोखिम और बढ़ जाता है. कई युवा नियमित चेकअप नहीं कराते. वे सोचते हैं कि जिम जाने से वे पूरी तरह स्वस्थ हैं. लेकिन जिम जाना स्वस्थ होने की गारंटी नहीं है.

  • मुंहासों पर लहसुन लगाना कितना सही? जानिए फायदे और जरूरी सावधानियां..

    मुंहासों पर लहसुन लगाना कितना सही? जानिए फायदे और जरूरी सावधानियां..

    मुंहासे यानी एक्ने त्वचा से जुड़ी बेहद आम समस्या है। हार्मोनल बदलाव, अतिरिक्त ऑयल, बंद पोर्स, तनाव और कई अन्य कारणों से चेहरे पर पिंपल्स हो सकते हैं। ऐसे में लोग घरेलू नुस्खों का सहारा लेते हैं, जिनमें लहसुन का इस्तेमाल भी शामिल है।

    लहसुन में कुछ ऐसे यौगिक पाए जाते हैं जिनमें एंटीमाइक्रोबियल गुण होते हैं, लेकिन कच्चे लहसुन को सीधे चेहरे पर लगाने से मुंहासे 10 मिनट में खत्म हो जाएंगे—इस दावे के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं। उल्टा, संवेदनशील त्वचा पर कच्चा लहसुन जलन, लालिमा या त्वचा को नुकसान पहुंचा सकता है।

    लहसुन का रस सीधे न लगाएं

    कच्चे लहसुन का रस त्वचा पर तेज जलन पैदा कर सकता है। इससे पिंपल ठीक होने के बजाय त्वचा पर लाल निशान या जलन बढ़ सकती है। इसलिए इसे सीधे चेहरे पर लगाने से बचना बेहतर है।

    लहसुन का पेस्ट भी जोखिम भरा हो सकता है

    लहसुन पीसकर चेहरे पर लगाने से भी त्वचा में irritation हो सकती है। खासकर संवेदनशील त्वचा या पहले से सूजन वाले मुंहासों पर इसका इस्तेमाल परेशानी बढ़ा सकता है।

    हल्दी, शहद या एलोवेरा के साथ मिलाने पर?

    लहसुन को हल्दी, शहद या एलोवेरा के साथ मिलाने से यह जरूरी नहीं कि मुंहासे तेजी से ठीक हो जाएं। प्राकृतिक चीजें होने का मतलब यह नहीं कि वे हर त्वचा के लिए सुरक्षित हों।

    मुंहासों के लिए क्या करें?

    हल्के मुंहासों में चेहरे को दिन में दो बार किसी सौम्य क्लींजर से साफ करना, पिंपल्स को न दबाना और नॉन-कॉमेडोजेनिक स्किनकेयर उत्पाद इस्तेमाल करना मददगार हो सकता है। जरूरत पड़ने पर त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेकर प्रमाणित एक्ने ट्रीटमेंट का इस्तेमाल किया जा सकता है।

    जरूरी सावधानी: अगर चेहरे पर दर्दनाक या गहरे मुंहासे हैं, बार-बार एक्ने हो रहा है या दाग पड़ रहे हैं, तो घरेलू नुस्खों के बजाय त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है। खासकर कच्चा लहसुन सीधे चेहरे पर लगाने से बचें।

  • जिसे बेटी की तरह पाला, उसकी मौत पर किया 13वीं का भोज! 600 लोगों को बुलाकर किसान ने रचा अनोखा उदाहरण..

    जिसे बेटी की तरह पाला, उसकी मौत पर किया 13वीं का भोज! 600 लोगों को बुलाकर किसान ने रचा अनोखा उदाहरण..

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    मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के सिरोंज क्षेत्र से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने इंसानियत और बेजुबान जानवरों के प्रति अटूट प्रेम की एक अनूठी और भावुक मिसाल कायम कर दी है. अमूमन शोक सभाएं और तेहरवीं के आयोजन अपनों और परिजनों के जाने पर किए जाते हैं, लेकिन यहां एक किसान ने अपनी 20 साल पुरानी पालतू बकरी के लिए वो सब किया जो अमूमन सगे परिजनों के देहांत पर किया जाता है.

    सिरोंज के भवानी नगर निवासी किसान नवल सिंह मालवीय की पालतू बकरी, जिसे पूरा परिवार और गांव प्यार से ‘कटोरी’ उर्फ ‘चमेली’ कहता था, 3 अगस्त को इस दुनिया को अलविदा कह गई. किसान नवल सिंह मालवीय के लिए ‘कटोरी’ महज एक मवेशी या जानवर नहीं थी, बल्कि परिवार की एक सदस्य और औलाद जैसी थी. कटोरी बीते 20 सालों से नवल सिंह के घर का अहम हिस्सा बनी हुई थी.

    घर की रानी: वह आम मवेशियों की तरह खूंटे से नहीं बांधी जाती थी, बल्कि बाकायदा घर के अंदर पलंग पर सोती थी और पूरे परिवार के सुख-दुख की साझीदार थी. जब 3 अगस्त को उसकी सांसे थमीं, तो पूरा मालवीय परिवार गमगीन हो गया और घर में चूल्हा तक नहीं जला.

    प्रशासन से अनुमति लेकर अंतिम संस्कार, पवित्र गंगा में अस्थि विसर्जन

    नवल सिंह ने अपनी ‘कटोरी’ को अंतिम विदाई देने में कोई कमी नहीं छोड़ी. स्थानीय प्रशासन से बाकायदा अनुमति लेकर कटोरी का पूरे हिंदू रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार किया गया. अंतिम संस्कार के बाद नवल सिंह खुद कटोरी की अस्थियां संचित कर पवित्र गंगा नदी पहुंचे और पूरे विधि-विधान के साथ अस्थि विसर्जन का कर्मकांड पूरा किया. रिश्तेदारों, परिचितों और ग्रामीणों को तेहरवीं में आमंत्रित करने के लिए बाकायदा शोक संदेश के कार्ड छपवाकर बांटे गए.

    तेहरवीं पर 600 लोगों का महाभोज, उमड़ा पूरा गांव

    13 दिनों के शोक के बाद 15 अगस्त को गंगाजली खोलने के साथ तेहरवीं का आयोजन किया गया. नवल सिंह ने अपनी प्यारी कटोरी की आत्मशांति और याद में एक विशाल भोज का आयोजन किया. इस तेहरवीं में रिश्तेदार, दोस्त और गांव के लगभग 600 लोग शामिल हुए. कार्यक्रम में पहुंचे हर एक व्यक्ति की आंखें इस दृश्य को देखकर नम हो गईं और सबने एक बेजुबान के प्रति नवल सिंह के इस असीम समर्पण और प्यार की जमकर तारीफ की.

    संवेदना की मिसाल बना नवल का यह कदम

    आज के आधुनिक दौर में जहां इंसान के पास इंसानों के लिए समय और संवेदनाएं कम पड़ती जा रही हैं, वहीं नवल सिंह मालवीय का यह कदम समाज के लिए एक आईना है. स्थानीय निवासियों का कहना है कि नवल सिंह का यह प्रयास दिखाता है कि जब प्यार सच्चा हो, तो बेजुबान और इंसान का रिश्ता रूहानी बन जाता है.

  • क्या आपका दोस्त भी सिर्फ मतलब का साथी है? चाणक्य के इन 5 टेस्ट से तुरंत पहचानें

    क्या आपका दोस्त भी सिर्फ मतलब का साथी है? चाणक्य के इन 5 टेस्ट से तुरंत पहचानें

    क्या आपका दोस्त भी सिर्फ मतलब का साथी है? चाणक्य के इन 5 टेस्ट से तुरंत पहचानें

    आचार्य चाणक्य के मुताबिक सच्चे मित्र की पहचान सुख में नहीं, बल्कि विपत्ति, विवाद, कानूनी उलझन और आर्थिक तंगी जैसे कठिन समय में होती है.

    आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में सोशल मीडिया पर सैकड़ों दोस्त होना बहुत आम बात है. किसी की पोस्ट पर लाइक करना या किसी पार्टी में शामिल होना बेहद आसान काम है.

    लेकिन असली परीक्षा तब होती है जब आपकी जिंदगी में अचानक कोई बड़ी मुसीबत आ जाए. आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति में साफ लिखा है कि सच्चे मित्र की पहचान सुख में नहीं बल्कि दुख और कठिन परिस्थितियों में होती है. आइए जानते हैं चाणक्य नीति के अनुसार वे कौन से 5 मौके हैं जो सच्चे दोस्त की पहचान कराते हैं.

    बड़े संकट और विपत्ति में न छोड़े साथ

    जिंदगी में मुसीबतें कभी भी बताकर नहीं आती हैं. अचानक नौकरी चले जाना, व्यापार में नुकसान होना या कोई पारिवारिक दुर्घटना इंसान को पूरी तरह से तोड़ देती है.

    ऐसे समय में ज्यादातर लोग धीरे धीरे दूरी बनाने लगते हैं. चाणक्य नीति कहती है कि जो मित्र आपकी विपत्ति सुनकर भागने के बजाय समस्या का समाधान खोजने में मदद करे, उसी पर आपको भरोसा करना चाहिए.

    किसी विवाद या शत्रु के संकट में बने ढाल

    जब आपके सामने कोई बड़ा विवाद या विरोधी खड़ा हो जाए, तब दोस्तों के असली चरित्र का पता चलता है. चाणक्य कहते हैं कि सच्चा दोस्त वह नहीं है जो आपकी हर गलत बात का समर्थन करे.

    सच्चा मित्र आपको सही और गलत का अंतर समझाता है. मुसीबत के समय वह आपके साथ खड़ा रहकर आपको सही मार्गदर्शन और संबल प्रदान करता है.

    कानूनी परेशानी में न मोड़े मुंह

    चाणक्य ने अपने श्लोक में राजद्वार का जिक्र किया है, जिसे आज के समय में कानूनी या कोर्ट कचहरी के मामलों से जोड़कर देखा जा सकता है.

    ऐसे मामलों में अक्सर लोग झंझट से बचने के लिए दूर भागते हैं. लेकिन जो दोस्त कानूनी उलझनों के दौरान सही सलाह दे और आपका मनोबल बनाए रखे, वही सच्चा दोस्त कहलाता है.

    आर्थिक तंगी में जब न बदले दोस्त का व्यवहार

    पैसा एक ऐसी चीज है जो किसी भी रिश्ते की असली सच्चाई सामने ला देती है. जब जेब भरी होती है तो दुनिया साथ खड़ी नजर आती है.

    लेकिन आर्थिक तंगी आते ही अक्सर परिचित लोग किनारा करने लगते हैं. चाणक्य के अनुसार सच्चा मित्र आपकी आर्थिक स्थिति देखकर अपना व्यवहार कभी नहीं बदलता. वह अपनी क्षमता के हिसाब से बिना किसी स्वार्थ के आपका साथ निभाता है.

  • शरीर में विटामिन की कमी के 5 संकेत, इन्हें नजरअंदाज न करें..

    शरीर में विटामिन की कमी के 5 संकेत, इन्हें नजरअंदाज न करें..

    आज की व्यस्त जीवनशैली और असंतुलित खान-पान के कारण शरीर को जरूरी पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाते। विटामिन और मिनरल्स की कमी होने पर शरीर कई तरह के संकेत दे सकता है। हालांकि, इनमें से कोई भी लक्षण केवल विटामिन की कमी के कारण हो, यह जरूरी नहीं है। सही कारण जानने के लिए जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह और जांच जरूरी है।

    1. मसूड़ों से बार-बार खून आना

    ब्रश करते समय या बिना किसी स्पष्ट कारण के मसूड़ों से बार-बार खून आना कई वजहों से हो सकता है। विटामिन C की कमी भी इसका एक कारण हो सकती है, लेकिन मसूड़ों की बीमारी और खराब ओरल हाइजीन जैसी समस्याएं भी जिम्मेदार हो सकती हैं।

    2. त्वचा में बदलाव

    त्वचा का अत्यधिक रूखा होना, घाव देर से भरना या त्वचा में असामान्य बदलाव पोषण की कमी समेत कई कारणों से हो सकते हैं। विटामिन A, C और कुछ अन्य पोषक तत्व त्वचा के सामान्य स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    3. लगातार बाल झड़ना

    बाल झड़ने के पीछे तनाव, हार्मोनल बदलाव, आनुवंशिक कारण, थायरॉइड की समस्या या आयरन और अन्य पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। केवल बाल झड़ने के आधार पर किसी एक विटामिन की कमी मान लेना सही नहीं है।

    4. हाथ-पैर में झुनझुनी

    हाथ-पैर में बार-बार झुनझुनी या सुन्नपन महसूस होना विटामिन B12 की कमी से जुड़ा हो सकता है। इसके अलावा नसों से जुड़ी समस्या, डायबिटीज या अन्य कारण भी हो सकते हैं। अगर यह समस्या लगातार बनी रहती है, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

    5. कमजोरी और लगातार थकान

    बिना ज्यादा मेहनत के थकान, कमजोरी या ऊर्जा की कमी महसूस होना शरीर में आयरन, विटामिन B12, फोलेट समेत कई पोषक तत्वों की कमी का संकेत हो सकता है। लेकिन इसके पीछे नींद की कमी या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं।

    क्या करें?

    अगर इनमें से कोई लक्षण लगातार बना हुआ है, तो खुद से विटामिन की गोलियां लेना शुरू करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लें। जरूरत पड़ने पर ब्लड टेस्ट के जरिए पोषक तत्वों की कमी का पता लगाया जा सकता है।

    ध्यान रखें: संतुलित आहार में हरी सब्जियां, फल, दालें, साबुत अनाज, दूध-दही, अंडे या अन्य उपयुक्त प्रोटीन स्रोत शामिल करना शरीर को जरूरी पोषक तत्व देने में मदद करता है।

  • दुनिया का सबसे सुखी इंसान कौन? महात्मा विदुर ने बताए खुशहाल जीवन के 6 मूलमंत्र..?

    दुनिया का सबसे सुखी इंसान कौन? महात्मा विदुर ने बताए खुशहाल जीवन के 6 मूलमंत्र..?

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    हर इंसान अपनी जिंदगी में सच्चा सुख और शांति पाना चाहता है. इसके लिए वह दिन-रात कड़ी मेहनत भी करता है. महाभारत काल के महान ज्ञानी महात्मा विदुर ने सुखद जीवन के कई रहस्य बताए हैं.

    उनकी नीतियां आज के समय में भी उतनी ही सच साबित होती हैं. विदुर नीति के अनुसार दुनिया में सबसे सुखी इंसान वही है जिसके पास स्वास्थ्य, सम्मान और अपनों का प्यार है. आइए जानते हैं महात्मा विदुर के वे 6 नियम जो जीवन को खुशहाल बना सकते हैं.

    निरोगी शरीर ही सबसे बड़ा धन है

    जीवन में सबसे पहला और बड़ा सुख इंसान का सेहतमंद रहना है. अगर शरीर में कोई बीमारी है तो दुनिया की हर खुशी बेकार लगने लगती है. बीमारी की वजह से इंसान का मन हमेशा चिंताओं से घिरा रहता है.

    बिना अच्छी सेहत के इंसान अपनी धन-दौलत का आनंद भी नहीं ले पाता. इसलिए महात्मा विदुर कहते हैं कि अपने शरीर और सेहत का ध्यान रखना सबसे पहला और जरूरी काम है.

    कर्ज से आजादी दिलाती है सच्चा सुकून

    जीवन में दूसरा सबसे बड़ा सुख कर्ज से मुक्त होना है. किसी से उधार या कर्ज लेकर जीने वाला इंसान कभी चैन की नींद नहीं सो पाता. कर्ज का बोझ इंसान का मानसिक सुकून और शांति पूरी तरह छीन लेता है.

    कमाई कम हो तो भी अपने खर्चों को सीमित रखना ही सबसे बड़ी समझदारी है. कर्ज से दूर रहकर ही इंसान समाज में सम्मान के साथ सिर उठाकर जी सकता है.

    अपनों का साथ और प्यार है असली ताकत

    महात्मा विदुर के अनुसार इंसान का सच्चा सुख अपनों के साथ में ही छिपा है. जिस घर में परिवार के सदस्यों का प्यार और सहयोग मिलता है, वहाँ हमेशा खुशियाँ बनी रहती हैं.

    जब अपनों का साथ होता है तो जीवन के कठिन से कठिन रास्ते भी बेहद आसान हो जाते हैं. अपनों का साथ इंसान को हर दुख-दर्द से लड़ने की हिम्मत देता है.

    सही रास्ते से की गई कमाई देती है शांति

    इंसान का चौथा सुख उसकी मेहनत और ईमानदारी की कमाई है. गलत या धोखे के रास्ते से कमाया गया पैसा ज्यादा दिन नहीं टिकता और अशांति लाता है.

    ईमानदारी की कमाई से घर में बरकत आती है और मन हमेशा शांत रहता है. मेहनत की कमाई इंसान को समाज में मान-सम्मान दिलाती है. सही तरीके से कमाया हुआ धन ही जीवन को सुरक्षित बनाता है.

    समझदार और संस्कारी जीवनसाथी का होना

    जीवन में एक समझदार और गुणी जीवनसाथी का होना बेहद जरूरी है. अच्छा जीवनसाथी सुख और दुख दोनों में बराबर का भागीदार बनता है.

    अगर जीवनसाथी संस्कारी और सुलझा हुआ है तो घर का माहौल हमेशा सुखद बना रहता है. विपरीत परिस्थितियों में सही सलाह देने वाला जीवनसाथी ही इंसान की सबसे बड़ी ताकत बनता है और जीवन को सफलता की ओर ले जाता है.

    ज्ञान और अच्छी संगति से मिलता है मान-सम्मान

    महात्मा विदुर के मुताबिक सही ज्ञान और अच्छी संगति जीवन का छठा सुख है. सही ज्ञान इंसान को सही और गलत का फर्क सिखाता है. अच्छे और सकारात्मक लोगों के साथ रहने से इंसान के विचार भी बेहतर बनते हैं.

    समझदार और सज्जन लोग समाज में हमेशा आदर पाते हैं. अपनी बुद्धि और अच्छी संगति के बल पर इंसान जीवन की हर बड़ी बाधा को आसानी से पार कर लेता है.

  • परिवार से बगावत कर दो लड़कियों ने रचाई शादी, बिहार में मचा बवाल! कोर्ट ने दिया ये आदेश..

    परिवार से बगावत कर दो लड़कियों ने रचाई शादी, बिहार में मचा बवाल! कोर्ट ने दिया ये आदेश..

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    बिहार की राजधानी पटना से प्यार, बगावत और सामाजिक मान्यताओं को तोड़ने वाली एक अनोखी खबर सामने आई है. यहाँ अदालतगंज इलाके की रहने वाली दो स्कूली छात्राओं ने आपस में शादी कर ली. दोनों के बीच प्यार इस कदर गहरा था कि उन्होंने न सिर्फ सामाजिक और पारिवारिक बंदिशों को दरकिनार किया, बल्कि धर्म के बंधनों को भी तोड़ दिया.

    अलग-अलग धर्मों से ताल्लुक रखने वाली ये दोनों लड़कियां पिछले तीन सालों से एक-दूसरे से प्यार करती थीं और अंततः घर से भागकर एक मंदिर में शादी के बंधन में बंध गईं. पुलिस जांच में सामने आया है कि दोनों लड़कियां पड़ोसी हैं और आपस में गहरी सहेलियां थीं. इनमें से एक लड़की 10वीं कक्षा में पढ़ती है, जबकि दूसरी 12वीं की छात्रा है. 10वीं की छात्रा के पिता सीआईडी (CID) में कार्यरत बताए जा रहे हैं.

    छात्राओं ने अपने रिश्ते को हमेशा के लिए शादी का रूप देने का फैसला किया और 7 अगस्त को बिना किसी को बताए घर से निकल गईं. उनके पास उस वक्त सिर्फ 3,500 रुपये थे. पटना से निकलकर दोनों सीधे खगड़िया पहुंचीं, जहाँ उन्होंने एक स्थानीय मंदिर में शादी की और उसके बाद एक होटल में ठहरीं.

    परिजनों ने दर्ज कराई गुमशुदगी, पुलिस ने खगड़िया से किया बरामद

    दोनों लड़कियों के एक साथ अचानक गायब होने से परिजनों में हड़कंप मच गया. 7 अगस्त को परिजनों ने पटना के कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कोतवाली थाने की महिला पुलिस पदाधिकारी पूनम कुमारी के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया. पुलिस ने सर्विलांस की मदद से दोनों को खगड़िया स्टेशन के पास से सकुशल बरामद कर लिया और पटना ले आई.

    “साथ रहेंगे, अलग नहीं होंगे…” थाने में अड़ गईं दोनों

    पटना महिला थाने और कोतवाली थाने लाने के बाद भी दोनों लड़कियों का रुख नहीं बदला. दोनों ने पुलिस और परिजनों के सामने साफ कह दिया कि वे एक-दूसरे से बेहद प्यार करती हैं और अब कभी अलग नहीं होंगी. दोनों में से कोई भी अपने-अपने परिजनों के साथ घर जाने को तैयार नहीं हुई.

    नाबालिग रिमांड होम भेजी गई, बालिग को मिली आजादी

    कोतवाली थाना प्रभारी अजय कुमार ने बताया कि जांच में एक लड़की के बालिग (18 वर्ष या उससे अधिक) और दूसरी के नाबालिग होने की पुष्टि हुई है. पुलिस ने दोनों को अदालत में पेश किया. अदालत के आदेश पर नाबालिग लड़की को सुरक्षा और देखरेख के लिए रिमांड होम (बाल गृह) भेज दिया गया है. कोर्ट ने बालिग लड़की को अपनी मर्जी से कहीं भी रहने और जाने की पूरी आजादी दी है.

  • सावन के दूसरे प्रदोष व्रत पर क्या हैं शुभ मुहूर्त? इस विधि से पूजा कर पाएं भूमि संबंधी बाधाओं से मुक्ति..

    सावन के दूसरे प्रदोष व्रत पर क्या हैं शुभ मुहूर्त? इस विधि से पूजा कर पाएं भूमि संबंधी बाधाओं से मुक्ति..

    सावन के दूसरे प्रदोष व्रत पर क्या हैं शुभ मुहूर्त? इस विधि से पूजा कर पाएं भूमि संबंधी बाधाओं से मुक्ति..

    Pradosh Vrat In Sawan 2026: सावन मास में पड़ने वाला भौम प्रदोष व्रत शिव जी उपासना के लिए समर्पित है. ध्यान दें सावन का महीना शिव जी को अति प्रिय है ऐसे में इस माह के प्रदोष व्रत पर शिव जी की पूजा करने से अति शुभ फलों की प्राप्ति हो सकती है. सावन माह का दूसरा प्रदोष व्रत कब है, इस दिन का शुभ मुहूर्त क्या है और इस व्रत पर किस विधि से भोलेनाथ की पूजा करें? इस बारे में आइए इस लेख में जानें.

    सावन माह का दूसरा प्रदोष व्रत 2026 कब है

    सावन माह में शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर दूसरा प्रदोष व्रत रखा जाएगा. इस माह की शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 25 अगस्त 2026 की सुबह 06 बजकर 20 मिनट से शुरू होगी और 26 अगस्त को सुबह 07 बजकर 59 मिनट पर तिथि समाप्त हो जाएगी. इस तरह 25 अगस्त 2026 को प्रदोष व्रत रखा जाएगा. यह प्रदोष व्रत मंगलवार को पड़ रहा है ऐसे में इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाएगा.

    सावन भौम प्रदोष व्रत पर शुभ मुहूर्त

    ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:27 बजे से लेकर 05:11 बजे तक.
    अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:57 बजे से लेकर दोपहर 12:49 बजे तक.
    विजय मुहूर्त: दोपहर 02:32 बजे से लेकर 03:24 बजे तक.
    प्रदोष काल: शाम 06:51 बजे से लेकर रात 09:04 बजे तक.

    भौम प्रदोष व्रत पर शिव जी और मां पार्वती की पूजा का महत्व

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भौम प्रदोष व्रत पर अगर विधि-विधान से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें तो उनकी कृपा प्राप्त होगी. इसके साथ ही मंगल ग्रह भी मजबूत होगा. इस दिन व्रत रखने व शिव जी की पूजा करने से मंगल दोष और भूमि संबंधी बाधाओं का अंत भी हो सकती है. सावन माह के प्रदोष व्रत का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है, ऐसे में इस दिन सही विधि से शिव जी की पूजा करें तो इससे भूमि संबंधी बाधाओं से मुक्ति मिल सकती है. आइए जानें शिव जी की किस विधि से पूजा करें.

    शिव जी की पूजा विधि

    भौम प्रदोष व्रत पर सुबह उठकर स्नान आदि कर सफेद वस्त्र पहने.
    शिव का ध्यान करें और प्रदोष व्रत का संकल्प करें.
    प्रदोष काल में फिर से स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करेंय
    शिव जी और माता पर्वती की प्रतिमा को एक चौकी पर स्थापित करें.
    चौकी के सामने आटे और हल्दी से स्वास्तिक बनाएं.
    भगवान शिव को धतूरा, मदार, बेलपत्र, दूध, दही, शहद चढ़ाएं.
    सफेज भोग जैसे सफेद मिठाई या खीर का भोग अर्पित करें.
    अब शिव जी का ध्यान कर मंत्र का जाप करें. मंत्र है- “ॐ नमः शिवाय”. 
    शिव चालीसा का पाठ करें और हो सकें तो रुद्राभिषेक करें.

  • मां पार्वती के एक मजाक से क्यों छा गया था ब्रह्मांड में अंधेरा? जानें महादेव की तीसरी आंख का रहस्य..

    मां पार्वती के एक मजाक से क्यों छा गया था ब्रह्मांड में अंधेरा? जानें महादेव की तीसरी आंख का रहस्य..

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    भगवान शिव को हम सब त्रिनेत्रधारी के नाम से भी जानते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि महादेव के पास तीन आंखें हैं. शिव पुराण में भोलेनाथ की इस तीसरी आंख का बहुत ही गहरा मतलब समझाया गया है. ये तीसरी आंख इंसान के भीतर छिपे अज्ञान, अहंकार और गलत विचारों को पूरी तरह खत्म करने की ताकत रखती है.

    लेकिन क्या आप जानते हैं कि महादेव के माथे पर यह तीसरी आंख आखिर आई कहां से और ये पहली बार कैसे प्रकट हुई? शिव पुराण और मत्स्य पुराण में इसकी बहुत ही सुंदर कहानी मिलती है. आइए आज आपको बताते हैं शिवजी के इस तीसरे नेत्र का पूरा रहस्य.

    जब मां पार्वती ने खेल-खेल में बंद कर दीं शिवजी की आंखें

    एक बार की बात है, भगवान शिव हिमालय पर्वत पर बैठकर ध्यान में लीन थे. तभी वहां माता पार्वती पहुंचीं. उन्होंने पीछे से आकर मजाक-मजाक में अपने दोनों हाथों से शिवजी की दोनों आंखें ढक लीं.

    माता पार्वती ने तो यह बस हंसी-मजाक में किया था, लेकिन इसका असर बहुत बड़ा हुआ. जैसे ही महादेव की आंखें बंद हुईं, पूरे ब्रह्मांड में पल भर में घना अंधेरा छा गया.

    पूरे संसार में मच गया हाहाकार

    भगवान शिव की आंखें बंद होते ही सूरज की रोशनी पूरी तरह गायब हो गई. पूरी सृष्टि अंधेरे में डूब गई और चारों तरफ सन्नाटा पसर गया. दुनिया के तमाम जीव-जंतु, इंसान और देवता घबराने लगे.

    रोशनी न होने की वजह से पूरी दुनिया पर एक बड़ा संकट आ खड़ा हुआ. चारों तरफ चीख-पुकार और हाहाकार मच गया कि अब इस दुनिया का क्या होगा.

    ऐसे प्रकट हुई महादेव की तीसरी आंख

    संसार को इस बड़े संकट से उबारने के लिए महादेव ने तुरंत कदम उठाया. उन्होंने अपने माथे के ठीक बीच में से एक बहुत ही तेज और चमकती हुई रोशनी पैदा की.

    यह रोशनी इतनी गर्म और चमकदार थी कि देखते ही देखते इसने एक आंख का रूप ले लिया. यही भगवान शिव की तीसरी आंख कहलाई. इस तीसरी आंख के खुलते ही पूरे ब्रह्मांड से अंधेरा छट गया और चारों तरफ फिर से उजाला और नई ऊर्जा फैल गई.

    तीनों आंखों के पीछे का क्या है असली रहस्य?

    धार्मिक मान्यताओं की मानें तो शिवजी की तीनों आंखें अलग-अलग चीजों को दर्शाती हैं. उनकी दाहिनी आंख को सूर्य माना गया है, बाईं आंख को चंद्रमा और माथे पर मौजूद तीसरी आंख को अग्नि यानी आग का रूप माना जाता है.

    जब भी यह तीसरी आंख खुलती है, तो इसकी गर्मी से बुराई, पाप और सारी अशुद्धियां जलकर राख हो जाती हैं. इसी वजह से भगवान शिव को त्रिनेत्रधारी कहा जाता है.

    भूत, वर्तमान और भविष्य की प्रतीक है ये आंख

    भोलेनाथ की ये तीन आंखें समय के तीनों रूपों को भी दिखाती हैं बीता हुआ कल, आज का दिन और आने वाला कल. इसका मतलब यह है कि महादेव हर समय और हर काल पर अपनी नजर रखते हैं. शिव पुराण की रुद्रसंहिता के तीसरे खंड (अध्याय 18 से 20) में भगवान शिव की इस तीसरी आंख का बहुत विस्तार से जिक्र किया गया है.