उत्तर प्रदेश के कुछ समय पहले स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा एक हैरान करने वाला मामला सामने आया था। विभागीय रिकॉर्ड की जांच के दौरान एक ही नाम, पिता का नाम और जन्मतिथि वाले छह कर्मचारियों का अलग-अलग जिलों में तैनात होने का मामला सामने आया। इसके बाद विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे।
बताया गया था कि मामला एक्स-रे टेक्नीशियन के पद पर हुई नियुक्तियों से जुड़ा था। वर्ष 2016 में स्वास्थ्य विभाग की भर्ती प्रक्रिया के तहत बड़ी संख्या में पदों पर नियुक्तियां की गई थीं। इसी सूची में एक व्यक्ति का नाम भी शामिल था, जिसे एक जिले में तैनाती मिली थी।
बाद में जब कर्मचारियों का विवरण मानव संपदा पोर्टल पर दर्ज किया गया तो रिकॉर्ड में एक जैसी जानकारियां देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। अलग-अलग जिलों में तैनात छह कर्मचारियों के नाम एक जैसे बताए गए थे। उनके पिता के नाम और जन्मतिथि भी समान थी। इनमें से कुछ कर्मचारियों का स्थायी पता भी एक जैसा दर्ज होने की बात सामने आई थी।
रिकॉर्ड में इन कर्मचारियों की तैनाती फर्रुखाबाद, बांदा, बलरामपुर, बदायूं, रामपुर और शामली समेत अलग-अलग जिलों में बताई गई थी। ऐसे में सवाल उठने लगा कि क्या ये वास्तव में अलग-अलग व्यक्ति हैं या एक ही पहचान का इस्तेमाल करके कई जगह नौकरी हासिल की गई।
मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब वेतन से जुड़े आंकड़ों की पड़ताल की गई। रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित पद पर तैनात कर्मचारी को हर महीने करीब 69 हजार रुपये वेतन मिलता था। इसी आधार पर अलग-अलग जिलों में सरकारी खजाने से बड़ी रकम के भुगतान का अनुमान सामने आया।
हालांकि, यह रकम वास्तव में फर्जीवाड़े के जरिए निकाली गई या रिकॉर्ड में किसी तकनीकी अथवा दस्तावेजी गड़बड़ी की वजह से ऐसा हुआ, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होना था। केवल एक जैसे नाम और विवरण सामने आने से किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना भी उचित नहीं था।
मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच के लिए अधिकारियों की एक टीम गठित की थी। अधिकारियों ने रिकॉर्ड की जांच कर पूरे मामले की वास्तविक स्थिति पता लगाने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की बात कही थी।
अब जांच में यह स्पष्ट होना था कि छह जिलों में एक जैसी पहचान वाले कर्मचारियों का रिकॉर्ड कैसे तैयार हुआ और वर्षों तक विभागीय स्तर पर इसकी जानकारी क्यों नहीं हो सकी। मामला सामने आने के बाद सरकारी नियुक्तियों और रिकॉर्ड सत्यापन की व्यवस्था पर भी सवाल उठे थे।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कुछ समय पहले भिखारियों को लेकर किए गए एक सर्वे के दौरान ऐसे आंकड़े सामने आए थे, जिन्होंने लोगों को हैरान कर दिया था। सर्वे में शहर के हजारों भिखारियों की स्थिति और उनकी आय से जुड़ी जानकारी जुटाई गई थी।
बताया गया था कि सर्वे का उद्देश्य भिक्षावृत्ति करने वाले लोगों की पहचान करना और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के साथ उनकी वास्तविक स्थिति का पता लगाना था। इस दौरान शहर के अलग-अलग इलाकों में बड़ी संख्या में लोगों से जानकारी जुटाई गई थी।
सर्वे में सामने आया था कि भीख मांगने वाले सभी लोग आर्थिक रूप से बेहद कमजोर नहीं थे। कुछ लोग नियमित तौर पर भीख मांगते थे और उनकी रोजाना की कमाई भी अच्छी खासी बताई गई थी। कुछ मामलों में यह रकम नौकरीपेशा लोगों की मासिक आय के बराबर या उससे अधिक होने का दावा किया गया था।
महिलाओं की कमाई को लेकर भी चौंकाने वाली जानकारी सामने आई थी। खास तौर पर छोटे बच्चों के साथ या गर्भवती महिलाओं द्वारा भीख मांगने पर लोगों की ओर से अधिक मदद मिलने की बात कही गई थी। कुछ मामलों में महिलाओं की रोजाना कमाई हजारों रुपये तक पहुंचने का दावा किया गया था।
सर्वे के दौरान यह भी सामने आया था कि कुछ लोगों के पास मोबाइल फोन और पहचान से जुड़े दस्तावेज मौजूद थे। इससे यह सवाल भी उठा था कि शहर में भीख मांगने का काम कितने लोगों के लिए मजबूरी था और कितने लोग इसे नियमित कमाई के साधन के रूप में कर रहे थे।
लखनऊ के व्यस्त इलाकों में भीख मांगने वालों की संख्या अधिक होने की बात सामने आई थी। खासकर रेलवे स्टेशन और प्रमुख बाजारों के आसपास रोजाना बड़ी संख्या में लोग भीख मांगते दिखाई देते थे। ऐसे स्थानों पर लोगों की आवाजाही अधिक होने के कारण कमाई भी अपेक्षाकृत ज्यादा होने का दावा किया गया था।
हालांकि, इन आंकड़ों को किसी व्यक्ति की वास्तविक और स्थायी आय मानना उचित नहीं होगा। भीख मांगने वालों की आमदनी स्थान, दिन और परिस्थितियों के हिसाब से काफी बदल सकती है। सर्वे में सामने आए आंकड़ों के आधार पर ही उनकी आर्थिक स्थिति का पूरा आकलन नहीं किया जा सकता।
भारत में किसी मिडिल क्लास फैमिली से जब आप उनके बड़े खर्चों के बारे में पूछेंगे तो बच्चों की पढ़ाई-लिखाई पर होने वाला खर्चा उसमें जरूर शामिल होगा। स्कूल की फीस, ट्यूशन की फीस और बच्चों के आने-जाने के लिए बस या फिर वैन पर होने वाले खर्चे का जिक्र जरूर किया जाएगा, लेकिन अगर आप दुबई में स्कूल की पढ़ाई पर होने वाले खर्च के बारे में जान लेंगे तो आपके होश उड़ जाएंगे।
जी हां, दुबई में रहने वाली एक महिली ने हाल फिलहाल में सोशल मीडिया पर एक वीडियो अपलोड कर अपनी बेटी के स्कूल खर्च की जानकारी सभी को दी है। महिला ने जो खर्चा बताया उसे सुनकर हर कोई हैरान रह गया।
दुबई में रहने वाली इस महिला की बेटी इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ती है और उसने बताया कि उसके ट्यूशन का सालाना खर्चा लगभग 14.34 लाख रुपये होता है। इसके अलावा बच्ची के ट्रांसपोर्ट पर वह महिला करीब 3.12 लाख रुपये खर्च करती है। महिला के इस दावे ने एक ऑनलाइन डिबेट शुरू कर दी है। लोगों का कहना है कि इससे अच्छा तो अपने बच्चों के यूएस या यूरोपीय देशों में पढ़ा लो।
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कौन सा स्कूल है इतना महंगा?
दुबई में रहने वाली इस महिला का नाम वेरोनिका है, महिला अपने इंस्टाग्राम पर रेगुलर तौर पर अपनी फैमिली लाइफ की कुछ बातें शेयर करती हैं। हाल ही में एक इंस्टाग्राम वीडियो में उसने अपनी बेटी को दुबई के GEMS इंटरनेशनल स्कूल में भेजने में आने वाले अलग-अलग खर्चों के बारे में बताया। उसने कहा कि माता-पिता को अपने बच्चे के असेसमेंट से पहले लगभग 13,000 रुपये की असेसमेंट फीस देनी होती है। फिर सालाना ट्यूशन लगभग 14.34 लाख रुपये है जिसे वह किस्तों में चुकाती है।
26 हजार यूनिफॉर्म का खर्चा
महिला ने बताया कि उसके यह खर्चे यहीं खत्म नहीं होते। स्कूल ट्रांसपोर्ट का खर्च भी 3.12 लाख रुपये सालाना होता है। वेरोनिका ने कहा कि बस सर्विस बच्चों को घर से पिक करती है और स्कूल के बाद उन्हें वापस छोड़ती है। इसके अलावा यूनिफॉर्म की कीमत भी लगभग 26 हजार रुपये है।
खाने के लिए स्कूल से कुछ नहीं मिलता
रजिस्ट्रेशन, री-एनरोलमेंट और एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज से कुल बिल में और खर्च जुड़ सकता है। एक खर्च जिसने उन्हें खास तौर पर हैरान किया है बच्ची का खाना जिसे ट्यूशन फीस में शामिल नहीं किया है। वह रोजना अपनी बेटी का लंच घर पर बनाती है और उसे हर दिन लंच बॉक्स साथ में देती है।
लोगों की प्रतिक्रियाएं
वेरोनिका के इस वीडियो ने लोगों को हैरान करने का काम किया है। इस वीडियो को देखने के बाद दुबई में इंटरनेशनल एजुकेशन के महंगे खर्च पर बहस शुरू हो गई है। एक यूजर ने लिखा है, “सिर्फ एक बच्चे के लिए यह बहुत सारा पैसा है; यह ऐसा है जैसे आप यूनिवर्सिटी ट्यूशन के लिए पैसे दे रहे हों।”
एक और अन्य यूजर ने लिखा, “क्रेजी, इससे तो USA में पढ़ाई करना सस्ता है, कभी-कभी तो यह फ्री भी होता है।” एक तीसरे ने कमेंट किया, “खाड़ी देशों में पढ़ाई बहुत महंगी है, इसीलिए हर कोई अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए यूरोप और US जा रहा है।”
कुछ यूजर्स ने इस खर्चे को सही ठहराया है। एक यूजर ने लिखा है कि इस तरह के स्कूल से निकलने वाले बच्चे कर्मचारी नहीं बनते या वो नौकरी नहीं करते बल्कि वह भविष्य के लिए एंटरप्रेन्योर और साइंटिस्ट बनाते हैं, यही हमारे बच्चों में असली इन्वेस्टमेंट है।
मुलायम, गुलाबी और हेल्दी होंठ चेहरे की खूबसूरती में चार चांद लगा देते हैं. हालांकि धूप, डिहाइड्रेशन, धूल-मिट्टी और बार-बार लिप प्रोडक्ट्स के इस्तेमाल से होंठ रूखे और बेजान नजर आने लगते हैं. ऐसे में महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स की जगह, आसान घरेलू नुस्खे भी कमाल कर सकते हैं. ग्लोबल आइकन प्रियंका चोपड़ा भी अपने होंठों की देखभाल के लिए एक आसान DIY लिप स्क्रब का इस्तेमाल करती हैं, जिसे समुद्री नमक, ग्लिसरीन और गुलाब जल से तैयार किया जाता है, लेकिन क्या सच में होंठों को मुलायम और गुलाबी बनाने में मदद कर सकता है. चलिए आपको बताते हैं इस DIY लिप स्क्रब के फायदे.
प्रियंका चोपड़ा का DIY लिप स्क्रब
इस आसान स्क्रब को बनाने के लिए समुद्री नमक, ग्लिसरीन और गुलाब जल को मिलाया जाता है. समुद्री नमक होंठों पर जमी मृत त्वचा को हटाने में मदद करता है, जबकि ग्लिसरीन नमी बनाए रखने का काम करती है. वहीं, गुलाब जल होंठों को ताजगी और हल्की ठंडक देने में मदद कर सकता है.
स्किन एक्सपर्ट क्या कहते हैं?
स्किन एक्सपर्ट डॉ. रुचि अग्रवाल ने बताया कि मैं न तो पूरी तरह इसके पक्ष में हूं और न ही इसके खिलाफ, लेकिन इसे समझदारी से इस्तेमाल करना चाहिए. सी सॉल्ट होंठों की ऊपरी डेड स्किन को हटाता है, ग्लिसरीन नमी को बनाए रखता है और गुलाब जल होंठों को आराम और हाइड्रेशन देता है. एक्सपर्ट के मुताबिक, इससे होंठ कुछ समय के लिए मुलायम और चमकदार लग सकते हैं, लेकिन लिप स्क्रब आपके होंठों का नेचुरल रंग नहीं बदलते. वे सिर्फ होंठों की ऊपरी सूखी और डेड स्किन को हटाते हैं. इसलिए अगर आपके होंठ काले हैं, तो इसकी वजह धूप में ज्यादा रहना, जेनेटिक्स या लगातार होने वाली जलन हो सकती है. स्क्रबिंग से यह ठीक नहीं होगा. असल में ज्यादा स्क्रबिंग से जलन बढ़ सकती है और पिगमेंटेशन भी और खराब हो सकता है. इसलिए अगर आप लिप स्क्रब का इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो इसे हर दो हफ्ते में सिर्फ एक बार ही करें.
इस्तेमाल करते समय किन बातों का रखें ध्यान
हफ्ते में 1 से 2 बार से ज्यादा स्क्रब न करें.
स्क्रब को हल्के हाथों से लगाएं.
स्क्रब के बाद लिप बाम जरूर लगाएं.
अगर होंठ पहले से कटे-फटे या बहुत संवेदनशील हैं, तो स्क्रब करने से बचें.
अजमेर के गोविंदगढ़ में रहने वाले दर्जी रेखराज ठाड़ा (62) को आयकर विभाग से 974 करोड़ 97 लाख 25 हजार 457 रुपये की टैक्स रिकवरी का नोटिस मिला. जिसे देखकर उनका सर चकरा गया. उन्होंने कहा कि महीने में 15 हजार रुपये कमाने वाला इतना टैक्स कैसे देगा. उनके पास नोटिस सूरत आयकर विभाग से आया. उन्होंने पुलिस से इसकी शिकायत की है.
पैन कार्ड का किया दुरुपयोग
जांच कराने पर खुलासा हुआ कि शातिर जालसाजों ने उनके पैन कार्ड का दुरुपयोग कर वर्ष 2011 से उन्हें ‘रूप रजत डायमंड प्राइवेट लिमिटेड’ का डायरेक्टर बना रखा था. पीड़ित का दावा है कि वे कभी गुजरात गए ही नहीं, और ना ही उन्हें इन कंपनियों की कोई जानकारी थी. यह मामला सीधे तौर पर पहचान की चोरी और बड़े पैमाने पर चल रहे सेल कंपनियों के नेटवर्क की पोल खोलता है.
पुलिस ने शुरू की जांच
आयकर नोटिस मिलने के बाद जब परिजनों ने एक सीए की मदद से पड़ताल कराई, तो रेखराज का नाम ‘जय बाबेरी डायम प्राइवेट लिमिटेड’ नाम की एक और फर्जी कंपनी में भी डायरेक्टर के तौर पर सामने आया. इसके बाद रेखराज ने पीसांगन थाने और अजमेर एसपी कार्यालय पहुंचकर एडिशनल एसपी ग्रामीण लालचंद कयाल को पूरी आपबीती सुनाई. पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए परिवाद दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. रेखराज ने नोटिस का स्पष्टीकरण ईमेल के जरिए आयकर विभाग को भेज दिया है.
जब आप गर्मियों की छुट्टियों में पॉकेट मनी कमाने के लिए मजदूरी कर रहे हों, और अचानक फावड़े के नीचे से ऐसा खजाना निकल आए, जिसकी आपने सपने में भी कल्पना न की हो तो सोचिए आपका क्या हाल होगा? बेल्जियम में एक 18 साल के छात्र के साथ बिल्कुल ऐसा ही हुआ हैय सीवेज खोदते वक्त इस लड़के के हाथ ऐसा खजाना लगा कि उसकी रातों-रात किस्मत ही चमक गई.
क्या है पूरा मामला?
द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, बेल्जियम के सिंट-गिलिस-डेंडर्मोंडे शहर में एक पूर्व शराब बनाने वाली पुरानी फैक्ट्री की जमीन पर री-डेलवपमेंट का काम चल रहा था. गर्मियों की छुट्टियों में कोबे नाम का 18 साल का एक छात्र वहां मजदूरी कर रहा था. वह सीवेज सिस्टम के लिए जमीन में गड्ढे खोद रहा था, तभी उसे जमीन के नीचे कुछ अजीब सी चीज दिखाई दी.
शुरुआत में कोबे और उसके साथियों को लगा कि शायद ये आम 1 यूरो के सिक्के हैं. लेकिन जैसे-जैसे उन्होंने मिट्टी हटाई और गहराई से खुदाई की, तो उनके होश उड़ गए. वहां ईंटों से बंद एक पुराने तहखाने की दीवार के अंदर छिपा हुआ सोने का भारी-भरकम जखीरा मिला. इस खजाने में सोने के सिक्के, सोने के टुकड़े और कई सोने की छड़ें शामिल थीं. विशेषज्ञों के मुताबिक, इस पूरे खजाने की कीमत करीब 90 लाख यूरो यानी लगभग 90 करोड़ रुपए है.
क्यों और कैसे छिपाया गया था यह खजाना?
जांच में सामने आया कि यह जगह 19वीं शताब्दी के अंत में फैक्ट्री के मालिक थियोफिलस वैन एशे के लिए बनाई गई थी. इतिहास के पन्नों को खंगालने पर पता चला कि यह पुरानी शराब की फैक्ट्री 1899 से 1970 के बीच चलती थी. अधिकारियों का मानना है कि सोने को किसी आम तिजोरी में रखने के बजाय जानबूझकर ईंटों की दीवार के पीछे बेहद चालाकी से सील किया गया था ताकि कोई इसे ढूंढ न सके.
अब आगे क्या होगा? कानूनी पेंच में फंसा खजाना
इस ऐतिहासिक और चौंकाने वाली खोज के बाद कोबे और उसके साथियों ने बिना देर किए तुरंत पुलिस और निर्माण कार्य की देखरेख कर रही संस्था को इसकी सूचना दी. फिलहाल, सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस ने सारा सोना ब्रुसेल्स की एक सुरक्षित जगह पर शिफ्ट कर दिया है.
अब अधिकारी इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या यह सोना किसी पुरानी चोरी, किसी आपराधिक गतिविधि या फिर किसी अनसुलझे वारिस के दावों से जुड़ा हुआ है. इतनी बड़ी रकम सामने आने के बाद अब यह तय माना जा रहा है कि इस खजाने के कानूनी मालिक को लेकर एक लंबी और पेचीदा कानूनी लड़ाई छिड़ने वाली है.
स्वस्थ रहने के लिए संतुलित और पौष्टिक आहार बेहद जरूरी है। हमारी रसोई में मौजूद कई मसाले स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ अपने संभावित स्वास्थ्य लाभों के लिए भी जाने जाते हैं। कलौंजी भी ऐसा ही एक मसाला है, जिसे लंबे समय से पारंपरिक घरेलू नुस्खों में इस्तेमाल किया जाता रहा है।
छोटे आकार और काले रंग वाली कलौंजी में कई जैविक सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं। शोधों में इसके एंटीऑक्सीडेंट, एंटीइंफ्लेमेटरी और अन्य संभावित गुणों का अध्ययन किया गया है। हालांकि, कलौंजी को किसी बीमारी का इलाज नहीं माना जाना चाहिए। गंभीर स्वास्थ्य समस्या होने पर डॉक्टर की सलाह और उचित उपचार जरूरी है।
कलौंजी के फायदे
1. कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने में मदद
कलौंजी का सेवन कोलेस्ट्रॉल के स्तर को संतुलित रखने में मदद कर सकता है। कुछ शोधों में पाया गया है कि नियमित रूप से कलौंजी का सेवन करने से अच्छे कोलेस्ट्रॉल यानी HDL में सुधार हो सकता है, जबकि कुल कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड और खराब कोलेस्ट्रॉल यानी LDL के स्तर में कमी देखने को मिल सकती है।
हालांकि, शोधों में इस्तेमाल की गई मात्रा को देखकर खुद से कलौंजी की खुराक तय नहीं करनी चाहिए। कोलेस्ट्रॉल की समस्या होने पर डॉक्टर या डाइटिशियन से सलाह लेना बेहतर है।
2. वजन कम करने में सहायक
वजन नियंत्रित करने में भी कलौंजी संभावित रूप से मददगार हो सकती है। कुछ अध्ययनों में इसके एंटी-ओबेसिटी प्रभाव का उल्लेख किया गया है।
इसके सेवन से शरीर के वजन, बॉडी मास इंडेक्स और कमर की चौड़ाई में कुछ कमी देखने को मिली है। हालांकि, सिर्फ कलौंजी खाने से वजन कम नहीं किया जा सकता। इसके लिए संतुलित डाइट और नियमित एक्सरसाइज जरूरी है।
3. एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर
शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और फ्री रेडिकल्स कई स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़े हो सकते हैं। कलौंजी में एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं, जो फ्री रेडिकल्स के प्रभाव को कम करने में मदद कर सकते हैं।
कलौंजी में मौजूद थाइमोक्विनोन इसके प्रमुख सक्रिय यौगिकों में से एक है, जिस पर वैज्ञानिक अध्ययनों में काफी ध्यान दिया गया है।
4. ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद
कलौंजी के संभावित एंटीडायबिटिक प्रभावों का भी अध्ययन किया गया है। कुछ शोधों के अनुसार, इसका सेवन फास्टिंग ब्लड ग्लूकोज को कम करने और लिपिड प्रोफाइल को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।
हालांकि, डायबिटीज के मरीजों को डॉक्टर द्वारा दी गई दवाओं की जगह कलौंजी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। ब्लड शुगर कम करने वाली दवाओं के साथ इसका सेवन करने से पहले चिकित्सकीय सलाह जरूरी है।
5. ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में सहायक
कलौंजी में एंटी-हाइपरटेंसिव प्रभाव होने की बात कुछ शोधों में सामने आई है। इसके सेवन से सिस्टोलिक और डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में संभावित मदद मिल सकती है।
इसमें मौजूद थाइमोक्विनोन अपने एंटीऑक्सीडेंट प्रभाव के कारण भी शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने में भूमिका निभा सकता है।
6. सूजन कम करने में मदद
शरीर में लंबे समय तक रहने वाली सूजन कई स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ी हो सकती है। कलौंजी में एंटीइंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जिसके कारण यह सूजन को कम करने में सहायक हो सकती है।
कलौंजी के तेल में भी ऐसे सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं, जिनके सूजनरोधी प्रभावों का अध्ययन किया गया है।
7. इम्यून सिस्टम को सपोर्ट करे
कलौंजी के बीजों में मौजूद कुछ यौगिक प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित कर सकते हैं। शोधों में इसके इम्यूनोमॉड्यूलेटरी गुणों का उल्लेख किया गया है।
इसका मतलब यह है कि कलौंजी शरीर की सामान्य प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को सपोर्ट करने में भूमिका निभा सकती है। हालांकि, इस संबंध में अभी और व्यापक मानव शोध की आवश्यकता है।
8. लिवर और किडनी के लिए संभावित लाभ
ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस लिवर और किडनी सहित शरीर के कई अंगों को प्रभावित कर सकता है। कलौंजी में मौजूद थाइमोक्विनोन और एंटीऑक्सीडेंट गुणों का लिवर की सुरक्षा के संदर्भ में अध्ययन किया गया है।
कुछ शोधों में किडनी की पथरी के आकार पर भी कलौंजी के संभावित प्रभाव देखे गए हैं। हालांकि, इसे लिवर या किडनी की बीमारी का इलाज नहीं माना जा सकता।
9. पुरुषों की प्रजनन क्षमता में संभावित मदद
कलौंजी के एंटीऑक्सीडेंट गुणों को पुरुष प्रजनन स्वास्थ्य के संदर्भ में भी अध्ययन किया गया है। ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस स्पर्म की गुणवत्ता और कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है।
कुछ शोधों के आधार पर कलौंजी के सेवन से स्पर्म काउंट और उसकी गुणवत्ता में संभावित सुधार की बात सामने आई है। हालांकि, इन दावों की पुष्टि के लिए और बेहतर मानव अध्ययनों की आवश्यकता है।
10. त्वचा के लिए फायदेमंद
कलौंजी का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से त्वचा से जुड़ी कई समस्याओं में किया जाता रहा है। इसमें एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल, एंटीइंफ्लेमेटरी और घाव भरने में मदद करने वाले संभावित गुण पाए जाते हैं।
मुंहासे, त्वचा की सूजन, घाव और कुछ संक्रमणों में इसके उपयोग पर शोध किया गया है। त्वचा पर कलौंजी या इसका तेल लगाने से पहले पैच टेस्ट जरूर करें, क्योंकि संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को एलर्जी हो सकती है।
कलौंजी में पाए जाने वाले पोषक तत्व
कलौंजी में ऊर्जा, प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट और आयरन जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 100 ग्राम कलौंजी में लगभग:
ऊर्जा: 400 कैलोरी
प्रोटीन: 16.67 ग्राम
वसा: 33.33 ग्राम
कार्बोहाइड्रेट: 50 ग्राम
आयरन: 12 मिलीग्राम
ध्यान रखें कि सामान्य तौर पर कलौंजी का सेवन इतनी बड़ी मात्रा में नहीं किया जाता है।
कलौंजी का सेवन कैसे करें?
कलौंजी को रोजमर्रा के भोजन में आसानी से शामिल किया जा सकता है।
सब्जियों में मसाले के रूप में इस्तेमाल करें।
दाल या पुलाव में थोड़ी मात्रा डाल सकते हैं।
नान, ब्रेड और अन्य बेक्ड फूड में इस्तेमाल कर सकते हैं।
अचार में कलौंजी मिलाई जा सकती है।
नमकीन या कुछ स्नैक्स में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है।
कलौंजी को पीसकर मसाले के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
कलौंजी कितनी मात्रा में खानी चाहिए?
कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों में अलग-अलग स्वास्थ्य स्थितियों के लिए प्रतिदिन लगभग 2 ग्राम कलौंजी का इस्तेमाल किया गया है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति को रोज इतनी ही मात्रा लेनी चाहिए।
कलौंजी की सही मात्रा व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और दवाओं पर निर्भर कर सकती है। इसलिए इसे औषधीय मात्रा में लेने से पहले डॉक्टर या आहार विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।
कलौंजी के नुकसान
कलौंजी सामान्य भोजन की मात्रा में कई लोगों के लिए ठीक हो सकती है, लेकिन अधिक मात्रा में या गलत तरीके से सेवन करने पर कुछ लोगों को परेशानी हो सकती है।
गर्भावस्था में सावधानी
गर्भावस्था के दौरान कलौंजी की अधिक या औषधीय मात्रा लेने की सुरक्षा को लेकर पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
ब्लीडिंग का जोखिम
कलौंजी में मौजूद थाइमोक्विनोन रक्त के थक्के बनने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। इसलिए जो लोग खून पतला करने वाली दवाएं लेते हैं, उन्हें कलौंजी का अधिक सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।
एलर्जी की संभावना
कुछ लोगों को कलौंजी या इसके तेल से एलर्जी हो सकती है। त्वचा पर लगाने पर लालिमा, खुजली या जलन महसूस हो तो इसका इस्तेमाल बंद कर दें।
निष्कर्ष
कलौंजी आकार में छोटी जरूर है, लेकिन इसमें कई जैविक सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं। शोधों के अनुसार यह कोलेस्ट्रॉल, ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर, वजन, सूजन और सामान्य इम्यून सपोर्ट के लिए संभावित रूप से फायदेमंद हो सकती है।
फिर भी इसे किसी बीमारी की दवा नहीं समझना चाहिए। संतुलित मात्रा में भोजन का हिस्सा बनाकर कलौंजी का सेवन करें और किसी बीमारी की स्थिति में डॉक्टर की सलाह को प्राथमिकता दें।
अगर कमाई अच्छी होने के बावजूद महीने के अंत तक पैसे खत्म हो जाते हैं, तो घर के माहौल पर भी ध्यान देना चाहिए। वास्तु शास्त्र में घर की व्यवस्था और कुछ दिशाओं को आर्थिक स्थिरता से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि कुछ आसान उपायों से घर में सकारात्मक वातावरण बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
महीने की शुरुआत में सैलरी या कारोबार की कमाई खाते में आते ही आर्थिक स्थिति अच्छी नजर आती है, लेकिन कुछ दिनों बाद बचत के नाम पर कुछ नहीं बचता। अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो केवल कम कमाई को इसकी वजह मानना सही नहीं है। खर्च करने की आदत और पैसों को संभालने की आदत भी इसमें बड़ी भूमिका निभाती है। वहीं, वास्तु शास्त्र में घर की ऊर्जा और व्यवस्था को भी आर्थिक समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में कुछ आसान वास्तु उपाय आजमाए जा सकते हैं।
आर्थिक समृद्धि के लिए अपनाएं ये वास्तु उपाय
मुख्य द्वार: वास्तु शास्त्र में घर के मुख्य द्वार को खास महत्व दिया गया है। घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश यहीं से होता है। इसलिए दरवाजे के आसपास कूड़ा, पुराने जूते, टूटे सामान या कबाड़ जमा न होने दें। मुख्य द्वार को साफ और रोशन रखें।
टूटी चीजें: घर में लंबे समय से पड़ी खराब या टूटी वस्तुओं को वास्तु की दृष्टि से शुभ नहीं माना जाता। टूटे बर्तन, बंद घड़ी, खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान, टूटा शीशा और बेकार पड़ी चीजें समय-समय पर हटा दें। इससे घर व्यवस्थित रहेगा और अनावश्यक सामान भी जमा नहीं होगा।
नमक: वास्तु और धार्मिक मान्यताओं में नमक को नकारात्मकता दूर करने से जोड़ा जाता है। कई लोग सप्ताह में एक बार पोछे के पानी में थोड़ा समुद्री नमक मिलाकर घर की सफाई करते हैं। हालांकि, इसे धन बढ़ाने का वैज्ञानिक उपाय नहीं माना जाता। इसे केवल पारंपरिक मान्यता के तौर पर ही अपनाएं।
उत्तर दिशा: वास्तु में उत्तर दिशा को कुबेर की दिशा माना जाता है और इसका संबंध धन-संपत्ति से जोड़ा जाता है। इसलिए इस हिस्से में भारी कबाड़ या अनुपयोगी सामान रखने से बचें। अगर यहां सामान रखा है तो उसे व्यवस्थित करें और बेकार चीजें हटा दें।
तिजोरी की दिशा: वास्तु मान्यताओं के अनुसार धन रखने वाली तिजोरी या अलमारी को सही दिशा में रखना महत्वपूर्ण माना जाता है। दक्षिण दिशा की दीवार के पास तिजोरी रखकर उसका मुंह उत्तर की ओर खुलना शुभ माना जाता है। हालांकि, घर की बनावट अलग-अलग होती है, इसलिए बड़ा बदलाव करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है। तिजोरी में फटे नोट, बेकार कागज और पुरानी रसीदें जमा न करें।
शाम को जलाएं दीपक: सनातन परंपरा में शाम के समय घर में दीपक जलाने की परंपरा रही है। मान्यता है कि इससे घर का वातावरण सकारात्मक रहता है और मां लक्ष्मी का आशीर्वाद बना रहता है। शाम के समय घर को साफ रखें और अनावश्यक अंधेरा न रहने दें।
बॉलीवुड और टीवी जगत की जानी-मानी अभिनेत्री श्वेता तिवारी ने हाल ही में ऑनलाइन ग्रॉसरी शॉपिंग के दौरान हुए एक बेहद अप्रिय अनुभव को प्रशंसकों के साथ साझा किया। अभिनेत्री ने जब क्विक-कॉमर्स डिलीवरी प्लेटफॉर्म से ड्रिंक मंगवाया तो उसके साथ एक जिंदा कॉकरोच भी उनके घर पहुंच गया। इस लापरवाही से नाराज श्वेता ने सोशल मीडिया का सहारा लेते हुए महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन के कमिश्नर तुकाराम मुंढे का ध्यान इस ओर आकर्षित किया।
सोफे पर टहलता दिखा कीड़ा, श्वेता ने शेयर किया वीडियो
श्वेता तिवारी ने अपने इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक वीडियो पोस्ट कर पूरी घटना का खुलासा किया। वीडियो में एक छोटा कॉकरोच उनके घर के सोफे और फर्नीचर पर घूमता हुआ साफ नजर आ रहा है। वीडियो साझा करते हुए उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि उन्होंने तो बस ड्रिंक का ऑर्डर दिया था, लेकिन साथ में यह बिन-बुलाया मेहमान भी आ गया, जो अब पूरे घर में भाग रहा है। जब उनके साथ मौजूद किसी शख्स ने उसे मारने की कोशिश की तो श्वेता ने उन्हें रोक दिया। इस पूरी स्थिति को उन्होंने और उनके दोस्तों ने थोड़े मजाकिया अंदाज में लिया, लेकिन खाद्य सुरक्षा पर सवाल भी उठाए।
Shweta tiwari posted an Instagram story explaining what to do when u see a cockroach 🪳
वीडियो के अंत में श्वेता ने सीधे एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंढे को टैग करते हुए उनसे इस लापरवाही पर कार्रवाई करने की अपील की। उन्होंने कहा कि अब ऑनलाइन डिलीवरी के जरिए घरों तक कॉकरोच पहुंच रहे हैं, इसलिए प्रशासन को इस दिशा में तुरंत ध्यान देना चाहिए। श्वेता के स्टाइलिस्ट विक्टर रोबिन्सन ने भी उनके साथ फोटो शेयर करते हुए इस घटना पर अपना विरोध दर्ज कराया।
चर्चा में हैं एफडीए कमिश्नर ‘असली सिंघम’ तुकाराम मुंढे
आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे इन दिनों खाद्य सुरक्षा और नियमों के सख्त पालन को लेकर पूरे महाराष्ट्र में बड़े पैमाने पर अभियान चला रहे हैं। होटलों, रेस्टोरेंटों और क्विक-कॉमर्स कंपनियों के वेयरहाउस में मिली कमियों के बाद वह लगातार कड़े कदम उठा रहे हैं। हाल ही में एफडीए की टीमों ने लाखों रुपये मूल्य के मिलावटी डेयरी उत्पाद और प्रतिबंधित सामग्रियां जब्त की थीं, जिसके चलते आम जनता उन्हें सोशल मीडिया पर ‘असली सिंघम’ कहकर बुला रही है।
श्वेता तिवारी के आगामी प्रोजेक्ट्स
काम की बात करें तो श्वेता तिवारी इन दिनों ओटीटी प्लेटफॉर्म के लोकप्रिय रियलिटी शो ‘द ट्रेटर्स इंडिया’ के दूसरे सीजन में नजर आ रही हैं। इससे पहले वह साल 2024 में ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘सिंघम अगेन’ और वेब सीरीज ‘इंडियन पुलिस फोर्स’ में अहम भूमिकाएं निभा चुकी हैं। आने वाले समय में वह सिद्धार्थ मल्होत्रा, तमन्ना भाटिया और सुनील ग्रोवर जैसे सितारों के साथ थ्रिलर फिल्म ‘वन – फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ में दिखाई देंगी।
फेस्टिव सीजन और छुट्टियों में फ्लाइट के टिकट के दाम अप्रतयाशित रूप से न बढ़ें, इसके लिए केंद्र सरकार नियम बनाने की तैयारी में है. केंद्र के मुताबिक, एयर फेयर यानी हवाई किराये और चार्जेस से जुड़े नियम बनाने की प्रक्रिया चल रही है और इसे तैयार होने में 3 हफ्ते का समय लग सकता है. इन नियमों में हवाई किराये और चार्जेस से जुड़े ऐसे प्रावधान शामिल होंगे, जिनसे हवाई यात्रियों को राहत मिलेगी. दरअसल, फ्लाइट्स टिकटों के दाम अचानक बढ़ने को लेकर एयर पैसेंजर्स लंबे समय से शिकायतें करते रहे हैं. जैसे कि नॉर्मल डेज यानी सामान्य दिनों में दिल्ली में मुंबई का किराया 6,000 रुपये है तो गर्मी की छुट्टियों या फिर दिवाली जैसे फेस्टिवल के टाइम यही टिकट 12 से 14 हजार रुपये का हो जाता है.
ऐसे मामलों की एक शिकायती याचिका पहुंची, सुप्रीम कोर्ट के पास और फिर कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए सरकार से रुख स्पष्ट करने को कहा. कोर्ट में सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ने बताया कि सरकार इस पर नियम बना रही है.
नियम नहीं मानें एयरलाइंस तो फ्लाइट्स रोक दें: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने त्योहारों में टिकटों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी को लेकर सख्ती से कहा है कि एयरलाइंस अगर नियम नहीं मानतें तो उनकी उड़ाने रोक दी जाएं. त्योहारों और छुट्टियों के दौरान हवाई टिकटों के दाम अचानक बढ़ने पर दायर सामाजिक कार्यकर्ता एस लक्ष्मीनारायणन की याचिका पर सोमवार को जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सुनवाई की. उन्होंने कहा कि यात्रियों के हित में जो व्यवस्थाएं बनाई गई हैं, उसके पालन और नियमन को लेकर फिलहाल स्थिति साफ नहीं है.
याचिकाकर्ता ने कहा यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि केंद्रीय नागर विमानन मंत्री ने संसद में कहा है कि हम कुछ नहीं कर सकते. हम कोई कैपिंग नहीं लगा सकते. पिछली सुनवाई में पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि किराया तय करने में एयरलाइंस कंपनियों की मनमानी यात्रियों का शोषण करने जैसा है और सरकार को यात्रियों को राहत देने के लिए कदम उठाने चाहिए.
7 सितंबर को अगली सुनवाई, सामने आ सकता है नियम
कोर्ट में सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) अनिल कौशिक ने बताया कि हवाई किराये और शुल्क से जुड़े नियम बनाने की प्रक्रिया अंतिम दौर में है. इसे पूरा होने में 3 हफ्तों का समय लगेगा. उन्होंने कहा कि अंतिम रूप में तैयार नियमों को कोर्ट के सामने रखा जाएगा. सुप्रीम कोर्ट ने तीन हफ्ते की मांग की दलील स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर तय कर दी है.
सामाजिक कार्यकर्ता एस लक्ष्मीनारायणन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर एयरलाइंस पर किराया तय करने में मनमानी का आरोप लगाते हुए कोर्ट के दखल की मांग की थी. याचिका में कहा गया है कि प्राइवेट एयरलाइंस कंपनियां अनुचित तरीके से हवाई किराया तय करती हैं. उनकी तरफ से कई अतिरिक्त शुल्क लगाए जाते हैं. इस बारे में स्पष्ट नियम बनाने और उन नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए एक नियामक संस्था के गठन की जरूरत है.