Guru Chandra Gajkesari Rajyog August 2026:
गुरु-चंद्र का गजकेसरी राजयोग 11 अगस्त को बनने वाला है जिससे 4 राशि के लोगों को बड़ा लाभ होने वाला है. आइए इस बारे में जानें कि ये 4 राशियां कौन सी है.
गजकेसरी राजयोग
Guru Chandra Gajkesari Rajyog 2026: गुरु बृहस्पति ग्रह ज्ञान और भाग्य का कारक ग्रह है. वहीं, चंद्रमा मन और माता के कारक है. इस साल 11 अगस्त 2026 को कर्क राशि में चंद्रमा और गुरु युति कर गजकेसरी राजयोग का निर्माण करने वाले हैं. जिसका प्रभाव सभी 12 राशियों पर पड़ने वाला है. यह योग 13 अगस्त तक बना रहेगा. जिसका शुभ प्रभाव 4 राशियों पर पड़ने वाला है. आइए यहां जानें किन जातकों को सुख और मानसिक शांति प्राप्त होगी.
कर्क राशि
गुरु-चंद्र का गजकेसरी राजयोग कर्क राशि के लोगों के लिए आत्मविश्वास बढ़ाने वाला सिद्ध होगा. नौकरीपेशा करने वालों को प्रमोशन मिल सकता है. आय के रास्ते खुलेंगे. बिजनेस में तरक्की की संभावना है. शुभ समाचार मिल सकता है. परिवार का साथ प्राप्त होगा.
कन्या राशि
गजकेसरी राजयोग कन्या राशि के लोगों के लिए शुभ और लाभकारी सिद्ध होगा. जातकों के जीवन में सुख, संपत्ति बढ़ेगी. नौकरी पाने के नए मौके प्राप्त होंगे. लंबे समय से रुका काम पूरा होगा. पुरानी इच्छाएं पूरी हो सकती हैं. जातकों को समाज में सम्मान प्राप्त होगा.
धनु राशि
गजकेसरी राजयोग धनु राशि के लोगों के लिए शुभ परिणाम लेकर आएगा. पदोन्नति, इंक्रीमेंट और बोनस पाने का मौका मिल सकता है. नई रणनीति से काम शुरू करने का यह समय बहुत अच्छा है. माता की सेहत में सुधार की संभावना है. जातकों का मन शांत होगा.
मीन राशि
मीन राशि के लोगों को गजकेसरी राजयोग से विशेष लाभ प्राप्त होगा. नई नौकरी के लिए यह शुभ योग है. परिवार में जातकों का सम्मान बढ़ेगा. आर्थिक मामलों को सुलझाने का मौका मिलेगा. मानसिक शांति प्राप्त होगी. उच्च शिक्षा पाने के लिए की गई कोशिश पूरी होगी.
रिलेशनशिप में कई बार लोगों के मन में ख्याल आता है उसने मेरा मैसेज देख लिया, लेकिन रिप्लाई नहीं किया, कहीं वो मुझसे बोर हो गया है? कल रात उसने की बात में प्यार का लहजा नहीं था. कहीं उसका चक्कर तो नहीं चला रहा? वो मुझे छोड़ तो नहीं देगा. कुछ लोगों का रिश्ता बहुत अच्छा होता है लेकिन किसी एक मन में ख्याल रहता है कि कहीं रिश्ता खत्म ना हो जाए. इस कंडीशन को रिलेशनशिप एंग्यायटी कहते हैं.
ओवरथिंकिंग
ओवरथिंकिंग की वजह से रिश्ते पर ज्यादा असर पड़ता है. दरअसल ओवरथिंकिंग की वजह से पार्टनर के हर छोटे एक्शन और बात का काफी गहरा मतलब निकाल लेते हैं. जैसे गुड नाइट के साथ हार्ट इमोजी नहीं भेजा, मेरे प्यार भरे मैसेज में हार्ट का इमोजी क्यों नहीं भेजा. इसका मतलब है कि कुछ गड़बड़ है.
बार-बार पूछना
अपने पार्टनर से बार-बार सवाल करना या पूछना कि तुम मुझसे प्यार करते हो या नहीं? तुम मुझे छोड़ तो नहीं दोगे? बार पर इस तरह के सवाल आने की वजह से भी रिश्ता कमजोर होने लगता है.
पार्टनर के मूड से खुद का मूड तय करना
अगर आपके पार्टनर का दिन खराब रहा है वो शांत है तो आप अगर मान लेते है को वह अपने नाराज है. फिर आप अपना मूड भी खराब कर लेते हैं. इससे आपका रिश्ता मजबूत नहीं बल्कि और ज्यादा खराब हो जाएगा.
लड़ाई-झगड़े से डरना
रिश्ते में छोटी-मोटी बहस होना बेहद आम है. लेकिन रिलेशनशिप एंग्जायटी से परेशान लोग छोटी सी बहसको ब्रेकअप मान लेते हैं. उनको लगता है कि ये छोटी सी लड़ाई ब्रेकअप बन सकती है.
रिलेशनशिप एंग्जायटी के नुकसान
रिलेशनशिप एंग्जायटी ना केवल आपने मेंटल हेल्थ बल्कि पार्टनर के मेंटल हेल्थ के लिए भी खराब है. इससे आपका पार्टनर भी मानसिक रूप से थक जाता है. जिससे रिश्ते की नींव कमजोर होने लगती है.
रिलेशनशिप एंग्जायटी से छुटकारा कैसे मिलेगा
आपके मन में जो भी चल रहा है, जो भी अजीब सा डर है उसे लकर पार्टनर के साथ खुलकर बात करनी चाहिए. ताकि पार्टनर को आपके बारे में पता चल पाए.
खुद को बिजी रखना चाहिए. जिम जाना चाहिए, दोस्तों से मिलना-जुलना चाहिए.
हर देवी-देवता की पूजा के अलग नियम हैं. महादेव की पूजा के भी नियम शिव पुराण समेत कई अन्य धर्म-शास्त्रों में बताए गए हैं. इन नियमों का पालन लोग भगवान शिव की पूजा करते समय करते हैं. हालांकि इनके पीछे की वजह बहुत कम लोग जानते हैं. जैसे- भगवान शिव को उल्टा बेलपत्र (चिकनी सतह शिवलिंग की ओर) क्यों चढ़ाते हैं, या फिर शिव पूजा में शंख क्यों नहीं बजाया जाता?
इन दोनों परंपराओं के पीछे धार्मिक मान्यताएं है और पौराणिक कथाएं भी जुड़ी हुई हैं. आइए आज जानते हैं इनके पीछे की वजह.
बेलपत्र उल्टा क्यों चढ़ाते हैं?
बेलपत्र उल्टा चढ़ाने से मतलब है कि आमतौर पर बेलपत्र की जो चिकनी सतह होती है उसे बेलपत्र का ऊपरी भाग या सीधा हिस्सा माना जाता है. वहीं खुरदुरी/उभरी हुई नसों वाले भाग को पीछे की सतह माना जाता है. जब शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाते हैं तो बेलपत्र के चिकने हिस्से को नीचे की ओर रखा जाता है ताकि वह सीधे शिवलिंग के संपर्क में आए.
धार्मिक और वैज्ञानिक मान्यताओं के अनुसार, बेलपत्र की चिकनी सतह ऊर्जा और सकारात्मक स्पंदन को सबसे ज्यादा अवशोषित करती है, जिससे पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है. इसलिए कई पूजा परंपराओं में बेलपत्र उल्टा चढ़ाया जाता है.
बेलपत्र से जुड़े ये नियम भी जरूरी
भगवान शिव को बेहद प्रिय बेलपत्र के तीन पत्तों को त्रिदेव/त्रिगुण/भगवान शिव के विभिन्न स्वरूपों से जोड़कर देखा जाता है. बेलपत्र चढ़ाते समय उसे उल्टा या सीधा रखने के अलावा भी कुछ अन्य नियमों का ध्यान रखना जरूरी होता है.
– शिव जी को केवल अखंड बेलपत्र ही अर्पित करें यानी कि बेलपत्र टूटा या फटा न हो. साथ ही बेलपत्र हमेशा धोकर ही अर्पित करें. ताकि बेलपत्र साफ हो.
– बेलपत्र की डंडी को अपनी ओर या मध्य भाग से पकड़कर भगवान शिव को समर्पित करना शुभ माना जाता है.
– कुछ पूजा परंपराओं में भगवान शिव की पूजा में चक्र और वज्र के निशान वाले बेलपत्र का उपयोग भी वर्जित माना गया है. वज्र बेलपत्र के अंत में मोटा सख्त हिस्सा जो गांठ की तरह होता है, उसे कहा जाता है. हमेशा वज्र को तोड़कर ही बेलपत्र अर्पित करने की मान्यता है.
– बेलपत्र की पत्तियों पर यदि सफेद रंग के टेढ़े-मेढ़े या गोल निशान, धारी हों तो उन्हें चक्र कहते हैं. ऐसे बेलपत्र को भी कीड़ों द्वारा दूषित किया गया और अशुद्ध माना जाता है. इसलिए इन्हें भी शिवलिंग पर चढ़ाने की मनाही की जाती है.
शिव पूजा में शंख क्यों नहीं बजाते?
शिव पूजा में आमतौर पर शंख नहीं बजाया जाता है. इसके पीछे एक पौराणिक कथा है, जिसके अनुसार भगवान शिव ने शंखचूड़ नाम के असुर का वध किया था. माना जाता है कि शंखचूड़ की हड्डियों से ही शंख की उत्पत्ति हुई है इसलिए शिव पूजा में शंख नहीं बजाया जाता, न ही शंख से जल चढ़ाया जाता है. इसके अलावा यह भी मान्यता है कि शिव जी हमेशा ध्यान में लीन रहते हैं, लिहाजा शंख की ध्वनि ध्यान में बाधा न डाले इसलिए शंख नहीं बजाते हैं.
हालांकि, कुछ अन्य पौराणिक कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान निकले रत्नों में शंख भी शामिल है. जिसे भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का बेहद प्रिय माना गया है. इस कारण विष्णु जी और लक्ष्मी जी की पूजा में शंख का प्रयोग प्रमुखता से किया जाता है.
Disclaimer- इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित पूजा परंपराओं पर आधारित है.
साल की सभी मासिक शिवरात्रि में सावन शिवरात्रि सबसे खास है. इस दिन शिवलिंग पर कांवड़ में लाया गया गंगाजल अर्पित करने, विशेष पूजा-अर्चना करने की परंपरा है. साथ ही पूरी रात जागकर 4 प्रहर की पूजा भी की जाती है. क्या आप जानते हैं कि सावन शिवरात्रि की रात जागरण करने और 4 प्रहर की पूजा करने के पीछे क्या वजह है? साथ ही आज 11 अगस्त 2026 को सावन शिवरात्रि पर जल चढ़ाने का समय क्या है?
4 प्रहर क्या हैं?
हिन्दू काल गणना के अनुसार, एक दिन और रात में कुल आठ प्रहर होते हैं, जिसमें दिन के 4 प्रहर और रात के 4 प्रहर होते हैं. इस तरह हर प्रहर में करीब 3 घंटे होते हैं, जिन्हें मिलाकर 24 घंटे बनते हैं. रात के 4 प्रहर का समय और उनके नाम.
पहला प्रहर (प्रदोष काल): शाम 6:00 बजे से रात 9:00 बजे तक
दूसरा प्रहर (निशिथ काल का पूर्व भाग): रात 9:00 बजे से रात्रि 12:00 बजे तक
तीसरा प्रहर (त्रियामा): रात्रि 12:00 बजे से तड़के 3:00 बजे तक
चौथा प्रहर (उषा काल): तड़के 3:00 बजे से सुबह 6:00 बजे तक
सावन शिवरात्रि पर 4 प्रहर की पूजा क्यों?
मान्यता है कि सावन शिवरात्रि पर रातभर जागकर 4 प्रहर की पूजा करने से शरीर, मन और आत्मा की शुद्धि होती है. दरअसल, रात में शांति होती है, साथ ही व्यक्ति अपने अंदर के कोलाहल को भी शांत करके अपना ध्यान और आंतरिक ऊर्जा भगवान पर केंद्रित कर पाता है. साथ ही वह भगवान की भक्ति के लिए नींद का त्याग करता है. जो उसके संयम और धैर्य की परीक्षा है.
धार्मिक मान्यता है कि सावन शिवरात्रि की रात में जागकर की गई पूजा का कई गुना ज्यादा फल मिलता है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
सावन शिवरात्रि 2026 के 4 प्रहर पूजा मुहूर्त
द्रिक पंचांग के अनुसार, इस बार चतुर्दशी तिथि 11 अगस्त को सुबह 04:53 बजे आरंभ होगी और 12 अगस्त को देर रात 01:52 बजे खत्म होगी. चूंकि सावन शिवरात्रि के दिन महाशिवरात्रि की तरह रात्रि के चारों प्रहर में पूजा की जाती है, जो कि 11 अगस्त की रात को ही मिल रहे हैं. इसलिए 11 अगस्त को सावन शिवरात्रि मनाई जा रही है. इसके 4 प्रहर पूजा मुहूर्त –
प्रथम प्रहर की पूजा- शाम 07:04 बजे से रात 09:45 बजे तक
द्वितीय प्रहर की पूजा- रात 09:45 बजे से रात 12:26 बजे तक
तृतीय प्रहर की पूजा- रात 12:26 बजे से सुबह 03:07 बजे तक
चतुर्थ प्रहर की पूजा- सुबह 03:07 बजे से सुबह 05:49 बजे तक
किस प्रहर में कैसी पूजा?
प्रथम प्रहर (प्रदोष काल) : रात के पहले प्रहर में सावन शिवरात्रि की रात शिवलिंग पर कच्चा दूध अर्पित करें. मान्यता है कि ऐसा करने से सुख-शांति और समृद्धि मिलती है.
दूसरा प्रहर (निशिथ काल का पूर्व भाग): दूसरे प्रहर में शिवलिंग पर दही अर्पित करें. ऐसा करने से धन-ऐश्वर्य मिलता है. साथ ही संतान सुख प्राप्त होता है.
तीसरा प्रहर (त्रियामा): तीसरे प्रहर में शिवलिंग पर गाय का घी अर्पित करें. ऐसा करने से बीमारियां दूर होती हैं, आरोग्य का आशीर्वाद मिलता है. साथ ही पाप नष्ट करने और आध्यात्मिक ऊर्जा पाने के लिए भी यह कारगर है.
चौथा प्रहर (उषा काल): सुबह के इस प्रहर में शिवलिंग पर शहद या शक्कर अर्पित करें. इससे वाणी का प्रभाव और कोमलता बढ़ती है. जीवन में मिठास बढ़ती है. जो लोग कर्ज से परेशान हैं, उन्हें इस प्रहर की पूजा में कर्ज मुक्ति की प्रार्थना करें.
सावन शिवरात्रि जल टाइम
सावन शिवरात्रि पर जल चढ़ाने का समय बहुत ज्यादा सर्च किया जाता है. कई किलोमीटर की पैदल यात्रा के बाद पवित्र तीर्थों से लाए गए गंगाजल को शुभ मुहूर्त में शिवलिंग पर अर्पित किया जाता है. इस साल सावन शिवरात्रि पर जलाभिषेक की कुल अवधि सुबह 04:54 बजे से देर रात 01:52 बजे तक है. इसमें 3 शुभ मुहूर्त प्रमुख हैं.
सर्वोत्तम ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05:23 से 06:00 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:06 से 12:58 बजे तक
निशिता काल (रात्रि पूजा): रात 11:59 से 12:43 बजे तक
Disclaimer-यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं व पौराणिक परंपराओं पर आधारित है.
महाभारत के समय महात्मा विदुर को अपनी बुद्धिमत्ता और दूरदर्शिता के लिए जाना जाता था. उनकी कही बातें आज के दौर में भी बिल्कुल सटीक बैठती हैं. महाभारत काल में जब राजा धृतराष्ट्र अपने मन की अशांति के कारण परेशान थे, तब उन्होंने विदुर जी से पूछा था कि इंसान की नींद किन वजहों से उड़ जाती है.
तब महात्मा विदुर ने नीति शास्त्र में ऐसी 5 परिस्थितियों का जिक्र किया था, जो इंसान का दिमागी सुकून छीन लेती हैं. अगर कोई व्यक्ति इन बातों को समझ ले, तो वह अपने जीवन में तनाव और चिंता से काफी हद तक बच सकता है.
कामुकता और अनियंत्रित वासना
महात्मा विदुर के अनुसार जब किसी इंसान के दिमाग पर कामुकता या वासना हावी हो जाती है, तो उसकी रातों की नींद गायब हो जाती है. ऐसा व्यक्ति हर वक्त उसी सोच में डूबा रहता है. वासना के हावी होने से इंसान का मन कभी शांत नहीं रह पाता है.
उसके सोचने समझने की क्षमता कम होने लगती है. मन की यह चंचलता और बेचैनी उसे पूरी रात सोने नहीं देती. इंसान अपनी इन इच्छाओं के चक्कर में दिन रात खुद को थकाता रहता है.
ताकतवर इंसान से दुश्मनी का डर
विदुर जी ने बताया कि अगर किसी कमजोर व्यक्ति की दुश्मनी अपने से बहुत ज्यादा शक्तिशाली इंसान से हो जाए, तो उसकी नींद उड़ जाती है. उसे हर पल यही डर सताता रहता है कि सामने वाला उस पर कब हमला कर दे.
अनहोनी का यह खौफ उसके दिमाग में हर समय चलता रहता है. इस डर और असुरक्षा के कारण वह रात भर करवटें बदलता रहता है. भय से भरा मन इंसान को कभी चैन की नींद सोने नहीं देता है.
सब कुछ खो देने का डर और चोरी का भय
जब कोई इंसान बहुत सारी धन दौलत जमा कर लेता है या उसकी तरक्की हो जाती है, तो उसे उसे खोने का डर सताने लगता है. जिस व्यक्ति के पास चोरों का डर होता है, वह रात भर जागकर अपने धन की चिंता करता रहता है.
उसे हर आहट पर लगता है कि कोई उसकी संपत्ति चुराने आ रहा है. महात्मा विदुर कहते हैं कि ज्यादा धन का मोह और उसे खोने का डर इंसान की सुख शांति को पूरी तरह से निगल जाता है.
चोरी की भावना या गलत नीयत
महात्मा विदुर के अनुसार जो व्यक्ति किसी दूसरे की चीज या धन हड़पने की नीयत रखता है, वह कभी शांति से नहीं सो सकता. किसी दूसरे का हक मारने या चोरी करने की योजना बनाने वाला इंसान हमेशा मानसिक तनाव में रहता है.
उसका दिमाग लगातार यही साजिश रचने में लगा रहता है कि काम को कैसे अंजाम दिया जाए. इस तरह का आपराधिक और गलत विचार इंसान के मन को अंदर ही अंदर बेचैन रखता है और उसकी नींद छीन लेता है.
बीमारी और शारीरिक पीड़ा
नींद न आने का पांचवां और सबसे बड़ा कारण इंसान का बीमार होना या किसी शारीरिक कष्ट से गुजरना है. जब शरीर किसी रोग की चपेट में आता है या इंसान अंदर से कमजोर हो जाता है, तो उसे रात में आराम नहीं मिलता.
बीमारी का दर्द और उससे जुड़ी चिंता इंसान को रात भर जगाए रखती है. विदुर जी के अनुसार एक स्वस्थ शरीर ही चैन की नींद का आधार होता है. बीमार व्यक्ति का मन और शरीर दोनों ही अशांत रहते हैं.
डिस्क्लेमर:
यह लेख महाभारत के विदुर नीति और धार्मिक पौराणिक मान्यताओं पर आधारित है. इसे केवल पाठकों तक जीवन प्रबंधन और जीवन शैली से जुड़ी पौराणिक जानकारियों को पहुंचाने के उद्देश्य से लिखा गया है.
Sawan Shivratri 2026:
इस साल 11 अगस्त 2026 को मंगलवार के दिन सावन शिवरात्रि पर्व मनाया जाएगा. सावन शिवरात्रि का व्रत रखने से शिव जी प्रसन्न होते हैं और जीवन के बड़े से बड़े कष्टों को दूर करते हैं. इस लेख में आइए उन 5 शक्तिशाली उपायों के बारे में जानें जिनको करने से सभी ग्रह के दोषों से मुक्ति मिलती है और कालसर्प दोष से लेकर मानसिक-आर्थिक दिक्कतें कोसों दूर हो जाती हैं.
शमी पत्र और अक्षत का उपाय
सावन शिवरात्रि पर शिव जी को जल अर्पित करें. इसके अलावा 5 या 11 शमी के पत्ते और अक्षत शिवलिंग पर चढ़ाएं. इस एक उपाय को करने से एक साथ शिव जी और शनिदेव दोनों की कृपा प्राप्त होगी. इस उपाय को करने से ग्रह दोष दूर होगा और धन प्राप्ति हो सकती है.
महामृत्युंजय मंत्र का जाप
सावन शिवरात्रि पर्व पर शिव मंदिर जाएं और शिवलिंग के सामने बैठ जाएं. इसके बाद ध्यान करते हुए 108 बार महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें. ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप भी कर सकते हैं. इस उपाय को शाम के समय करने से कालसर्प दोष, पितृ दोष के साथ ही अकाल मृत्यु का भय दूर होता है. लंबी बीमारी भी ठीक हो जाती है.
धतूरा और भांग शिव जी को चढ़ाएं
सावन शिवरात्रि की पूजा करें और शिव जी को धतूरा, भांग और मदार के फूल चढ़ाएं. इस एक उपाय को करने से व्यक्ति के जीवन की सभी नकारात्मक ऊर्जा, भय और गुप्त शत्रुओं का नाश होता है. इस उपाय से जीवन में स्थिरता आती है.
नंदी जी के कान में करें प्रार्थना
सावन शिवरात्रि पर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर अपना मुख करके शिव जी की पूजा करें और वहीं विराजमान नंदी महाराज को प्रणाम करें. इसके बाद नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामना को कहें. इसके बाद जरूरतमंदों के बीच गरीबों को अन्न, वस्त्र और काले तिल का दान करें. इस उपाय को करने से शिव जी अति प्रसन्न होंगे और मनोकामना को पूर्ण करेंगे. इस उपाय से पाप और दरिद्रता का नाश होने लगता है.
पंचामृत और बेलपत्र का उपाय
सावन शिवरात्रि पर तांबे के लोटे से गंगाजल लें और उसमें मिश्रित शुद्ध जल, दूध, दही, घी, शहद व शक्कर मिलाकर पंचामृत बना लें. इसके बाद इसे शिवलिंग पर अर्पित करें. अब 11 या 21 साफ और साबूत बेलपत्र भी चढ़ा दें और मन ही मन अपनी मनोकामना को दोहराएं. मनोकामना पूरी होगी, मानसिक तनाव दूर होगा और मन शांत होगा. कुंडली में चंद्रमा और सभी नवग्रह शुभ प्रभाव देंगे.
(डिस्क्लेमर- यह जानकारी पारंपरिक धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है.
आज के समय में मार्केट में मिलने वाली मेहंदी का रंग बहुत ही आसानी से चढ़ जाता है. मेहंदी में केमिकल का इस्तेमाल किया जाता है. केमिकल वाली मेहंदी लगाने से 2 दिन बाद मेहंदी पपड़ी की तरह हाथ से उतरने लगती है. जिसकी वजह से हाथ रफ हो जाते हैं. इस तरह उतरती हुई मेहंदी बेहद खराब लगती है. ऐसे में आप घर पर मेहंदी बना सकते हैं.
घर पर बनी मेहंदी का रंग नहीं चढ़ता है लेकिन इन चीजों को मिलाने से मेहंदी का रंग गहरा आएगा. होममेड मेहंदी को लगाने से हाथ पर चढ़ा रंग कई दिनों पर हल्का होता है. आइए जानते हैं घर पर कैसे बनाएं मेहंदी.
घर पर बनाएं मेहंदी कोन
तीन छोटे चम्मच चीनी
तीनी छोटे चम्मच चाय की पत्ती
2 छोटे चम्मच कॉफी
लौंग
मेहंदी का पाउडर
पानी
इस तरह बनाएं मेहंदी
एक बर्तन लें, इसमें पानी डालकर पानी को गर्म कर लें. इसके बाद इसमें चीनी, चाय की पत्ती, लौंग और कॉफी डाल दें.
अब इस पानी को अच्छे से उबाल लें, जैसे ही पानी डार्क ब्राउन हो जाए तो गैस बंद कर दें.
अब इस पानी को मेहंदी पाउडर में मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बना लें. मेहंदी का घोल ना ज्यादा पतला और ना ही ज्यादा गाढ़ा होना चाहिए.
अब तैयार करें मेहंदी का कोन
मेहंदी का पेस्ट बनकर तैयार है. इसके बाद मेहंदी को कुछ घंटों के लिए ढककर रख दें. इसके बाद प्लास्टिक की शीट लें. इस को कोन की शेप दें. इस कोन में मेहंदी भर दें. लीजिए आपकी होममेड मेहंदी कोन बनकर तैयार है.
होममेड मेहंदी लगाने के फायदे
चाय की पत्ती और लौंग का पानी मिलाने से मेहंदी का रंग गाढ़ा आता है. कॉफी मिलाने से भी मेहंदी का रंग हाथों पर बेहद खूबसूरत आता है.
चीनी मिलाने से मेहंदी लगाने के बाद जल्दी सूखकर हटती नहीं है.
होममेड मेहंदी लगाने के बाद इसे जल्दी नहीं धोना चाहिए.
मेहंदी सूखने के बाद हल्के हाथों से मेहंदी हटाना चाहिए
हरियाली अमावस्या बेहद खास है. प्रकृति की रक्षा के इस पर्व के दिन भगवान शिव की पूजा करने और पितरों का तर्पण करने का विधान है. लेकिन इस साल इसी अमावस्या पर सूर्य ग्रहण लग रहा है. हिंदू धर्म में ग्रहण काल और उसके सूतक में पूजा-पाठ, शुभ कार्य वर्जित होते हैं. लिहाजा लोग उलझन में हैं कि ग्रहण कब लगेगा, सूतक काल कब से कब तक होगा और पूजा-पाठ, स्नान-दान कब कैसे किया जाए? आइए जानते हैं 12 अगस्त 2026 को पड़ रही अमावस्या और सूर्य ग्रहण से जुड़े सारे सवालों के जवाब.
हरियाली अमावस्या कब है?
साल 2026 में श्रावण मास की अमावस्या तिथि द्रिक पंचांग के अनुसार 11 व 12 अगस्त की देर रात 01:52 बजे से प्रारंभ होगी और 12 अगस्त की रात 11:06 बजे तक रहेगी. लिहाजा 12 अगस्त को हरियाली अमावस्या है.
…इसलिए भी खास है ये दिन
हरियाली अमावस्या इस साल इसलिए भी विशेष है क्योंकि इसी दिन 12 अगस्त 2026 को पूर्ण सूर्य ग्रहण भी लग रहा है.
सूर्य ग्रहण कब लगेगा?
भारतीय समय के अनुसार, 12 अगस्त 2026 का सूर्य ग्रहण रात 9 बजकर 4 मिनट पर शुरू होगा और अगले दिन सुबह 4 बजकर 25 मिनट पर समाप्त होगा. करीब 7 घंटे के इस ग्रहण का पीक रात 11 बजकर 17 मिनट पर होगा.
भारत में ग्रहण दिखेगा?
भारत में साल 2026 का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण नहीं दिखाई देगा. लिहाजा इसका सूतक काल भी नहीं माना जाएगा. वरना हिंदू धर्म-शास्त्रों के अनुसार सूर्य ग्रहण का सूतक ग्रहण शुरू होने से 12 घंटे पहले लग जाता है और ग्रहण खत्म होने के साथ ही समाप्त होता है.
हरियाली अमावस्या के अनुष्ठानों पर क्या असर?
चूंकि सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा और सूतक काल भी नहीं माना जाएगा, लिहाजा हरियाली अमावस्या के दिन स्नान-दान, पितृ तर्पण, पौधारोपण और शिव पूजा जैसे तमाम अनुष्ठानों पर कोई असर नहीं होगा. बिना रुकावट के ये सारे कार्य किए जा सकेंगे.
सूर्य ग्रहण और अमावस्या साथ होने पर क्या करें?
सूर्य ग्रहण और अमावस्या दोनों एक साथ पड़ें तो इस दिन का महत्व बढ़ जाता है. लिहाजा अपनी सामर्थ्य अनुसार जरूरतमंदों को दान करें. जितना ज्यादा संभव हो सके मंत्र जाप करें, भगवान का ध्यान करें.
वहीं गलती से भी तामसिक चीजों का सेवन न करें, किसी का अपमान न करें, मन में नकारात्मक विचार न लाएं. कोई भी अनैतिक कार्य न करें. हरियाली अमावस्या के दिन किसी भी पौधे को नुकसान पहुंचाने की भारी भूल न करें.
(Disclaimer-यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पंचांग परंपराओं पर आधारित है. अलग-अलग स्थानों और पंचांगों के अनुसार नियम व मुहूर्त में अंतर हो सकता है.)
एक शांत इलाके में मिले एक युवक के शव ने पूरे शहर को हिला कर रख दिया था। शुरुआत में यह मामला एक रहस्यमयी ब्लाइंड मर्डर लग रहा था, लेकिन जैसे-जैसे पुलिस की जांच आगे बढ़ी, वैसे-वैसे एक ऐसी साजिश सामने आई जिसने सभी को हैरान कर दिया।
पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि इस हत्या की मास्टरमाइंड कोई और नहीं बल्कि मृतक की अपनी सास थी, जिसने अपने दामाद को रास्ते से हटाने की कथित साजिश रची। इस मामले में पुलिस ने सास, मृतक की पत्नी और दो अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
जानकारी के अनुसार, युवक का शव एक सुनसान जगह से बरामद हुआ था और उसकी पहचान छिपाने की भी कोशिश की गई थी। शुरुआती दौर में पुलिस के पास कोई ठोस सुराग नहीं था, जिससे केस बेहद पेचीदा बन गया था।
इसके बाद पुलिस ने विशेष टीम बनाकर जांच शुरू की और 100 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। साथ ही मुखबिरों से मिली जानकारी ने जांच को नई दिशा दी और धीरे-धीरे आरोपी पुलिस के शिकंजे में आते गए।
पूछताछ में जो कहानी सामने आई, उसने सभी को चौंका दिया। पुलिस के मुताबिक, मृतक पर शराब के नशे में अपनी पत्नी के साथ मारपीट करने के आरोप थे। लगातार घरेलू विवाद से परेशान होकर पत्नी ने यह बातें अपनी मां यानी सास को बताईं।
आरोप है कि इसी के बाद सास ने गुस्से और बदले की भावना में दामाद की हत्या की योजना बनाई। इसके लिए दो लोगों को कथित तौर पर एक लाख रुपये की सुपारी दी गई, जिसमें कुछ रकम पहले ही दे दी गई थी।
इसके बाद पूरी साजिश को अंजाम दिया गया और युवक की हत्या कर दी गई। पुलिस ने इस मामले में तेजी से कार्रवाई करते हुए चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
फिलहाल पुलिस सभी आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है और मामले की आगे की जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि सबूतों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
नोट: यह खबर पुलिस जांच और प्रारंभिक तथ्यों पर आधारित है। अंतिम निर्णय न्यायालय की प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
राजस्थान के जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, एक महिला पर अपने पति को कानूनी मामले में फंसाने और बदनाम करने के उद्देश्य से कथित तौर पर अपना निजी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कराने की साजिश रचने का आरोप है। मामले में पुलिस ने महिला को गिरफ्तार कर आगे की जांच शुरू कर दी है।
वीडियो वायरल होने के बाद पति पर लगाए आरोप
पुलिस के मुताबिक, सोशल मीडिया पर एक निजी वीडियो वायरल होने के बाद महिला ने आरोप लगाया कि उसके पति ने चोरी-छिपे वीडियो बनाकर उसे इंटरनेट पर साझा किया है। शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू की गई।
पति ने पुलिस से की निष्पक्ष जांच की मांग
पति ने आरोपों से इनकार करते हुए पुलिस से साइबर जांच कराने की मांग की। उसका कहना था कि उसे बदनाम करने और कानूनी कार्रवाई में फंसाने के लिए सुनियोजित साजिश रची गई है। उसने यह भी दावा किया कि पहले भी उसके खिलाफ कई शिकायतें दर्ज कराई जा चुकी थीं।
साइबर जांच में मिले अहम सुराग
पुलिस के अनुसार, तकनीकी जांच में पता चला कि वीडियो एक फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट से अपलोड किया गया था। जांच में इस्तेमाल किए गए सिम कार्ड और डिजिटल गतिविधियों की पड़ताल के बाद पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग मिले।
प्रेमी की कथित भूमिका भी आई सामने
पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान महिला और उसके कथित प्रेमी के बीच हुई ऑनलाइन बातचीत तथा अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच की गई। पूछताछ में प्रेमी ने कथित तौर पर साजिश में अपनी भूमिका स्वीकार की, जिसके बाद महिला को भी गिरफ्तार कर लिया गया।
मामले की जांच जारी
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले में सभी डिजिटल और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि कथित षड्यंत्र में अन्य कोई व्यक्ति शामिल था या नहीं। पुलिस ने कहा है कि जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।