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  • ‘एक कॉफी पर घंटों बैठना पड़ेगा महंगा!’ बेंगलुरु के कैफे ने लगाया 99 रुपये प्रति घंटे का वर्कस्पेस चार्ज..

    ‘एक कॉफी पर घंटों बैठना पड़ेगा महंगा!’ बेंगलुरु के कैफे ने लगाया 99 रुपये प्रति घंटे का वर्कस्पेस चार्ज..

    ‘एक कॉफी पर घंटों बैठना पड़ेगा महंगा!’ बेंगलुरु के कैफे ने लगाया 99 रुपये प्रति घंटे का वर्कस्पेस चार्ज..

    बेंगलुरु: अगर आप भी कैफे में सिर्फ एक कप कॉफी लेकर घंटों लैपटॉप पर काम करते हैं, तो यह खबर आपके लिए है। बेंगलुरु के इंदिरानगर स्थित एक कैफे ने लंबे समय तक टेबल घेरकर बैठने वाले ग्राहकों के लिए नया नियम लागू किया है। अब ऐसे ग्राहकों से 99 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से वर्कस्पेस रेंटल चार्ज लिया जाएगा।

    यह मामला तब चर्चा में आया, जब टेक उद्यमी कार्तिक सुरोजू ने कैफे के बाहर लगे बोर्ड की तस्वीर LinkedIn पर साझा की। बोर्ड पर साफ लिखा था, “Workspace Rental: ₹99 per hour.” पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर इस फैसले को लेकर बहस छिड़ गई।

    कार्तिक ने अपनी पोस्ट में दावा किया कि जब वह कैफे पहुंचे, तब वहां ज्यादा भीड़ नहीं थी। उनका मानना है कि इस तरह का बोर्ड संभावित ग्राहकों को आकर्षित करने के बजाय उन्हें दूर कर सकता है।

    हालांकि, सोशल मीडिया पर इस फैसले को लेकर लोगों की राय बंटी हुई है। कुछ यूजर्स का कहना है कि एक कप कॉफी खरीदकर कई घंटों तक टेबल पर कब्जा जमाए रखना कैफे के कारोबार को नुकसान पहुंचाता है, क्योंकि इससे अन्य ग्राहकों को बैठने की जगह नहीं मिलती।

    वहीं, कई लोगों का तर्क है कि अधिकांश ग्राहक काम के दौरान समय-समय पर खाने-पीने का ऑर्डर भी देते हैं। ऐसे में कुछ लोगों की वजह से सभी ग्राहकों पर अतिरिक्त शुल्क लगाना उचित नहीं है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में अब ‘टाइम कैफे’ का कॉन्सेप्ट तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इस मॉडल में ग्राहक खाने-पीने की चीजों के बजाय कैफे में बिताए गए समय के आधार पर भुगतान करते हैं। पुणे और कोच्चि जैसे शहरों में पहले से ऐसे कैफे संचालित हो रहे हैं, जहां समय के हिसाब से शुल्क लिया जाता है और चाय, कॉफी या वाई-फाई जैसी सुविधाएं पैकेज का हिस्सा होती हैं।

    फिलहाल बेंगलुरु के इस कैफे का नया नियम सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। कुछ लोग इसे व्यवसाय के लिहाज से सही कदम बता रहे हैं, जबकि अन्य का मानना है कि ग्राहकों के लिए ‘लैपटॉप-फ्री जोन’ या सीमित समय जैसी वैकल्पिक व्यवस्था बेहतर विकल्प हो सकती है।

  • Vastu Tips: घर की ये छोटी-छोटी गलतियां बन सकती हैं आर्थिक परेशानियों की वजह! जानें वास्तु के आसान उपाय..

    Vastu Tips: घर की ये छोटी-छोटी गलतियां बन सकती हैं आर्थिक परेशानियों की वजह! जानें वास्तु के आसान उपाय..

    Vastu Tips: घर की ये छोटी-छोटी गलतियां बन सकती हैं आर्थिक परेशानियों की वजह! जानें वास्तु के आसान उपाय..

    Vastu Tips: वास्तु शास्त्र में घर की दिशा, साफ-सफाई और वस्तुओं की सही व्यवस्था को महत्वपूर्ण माना गया है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, यदि घर में कुछ वास्तु नियमों की अनदेखी की जाए तो इसका असर सुख-समृद्धि और सकारात्मक वातावरण पर पड़ सकता है। वहीं कुछ आसान उपाय अपनाकर घर में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने की बात भी कही जाती है। आइए जानते हैं किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

    वास्तु के अनुसार किन कारणों से बढ़ सकती हैं परेशानियां?

    उत्तर दिशा में भारी सामान

    वास्तु शास्त्र में उत्तर दिशा को धन और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि इस दिशा में भारी फर्नीचर, कूड़ादान या अन्य भारी वस्तुएं रखने से आर्थिक प्रगति प्रभावित हो सकती है।

    दक्षिण-पश्चिम दिशा में गड्ढा या जल स्रोत

    मान्यताओं के अनुसार घर की दक्षिण-पश्चिम दिशा में गड्ढा, बोरिंग या पानी का स्थायी स्रोत होना आर्थिक अस्थिरता और अन्य समस्याओं का कारण माना जाता है।

    मुख्य द्वार की अनदेखी

    वास्तु के अनुसार घर का मुख्य द्वार साफ, मजबूत और व्यवस्थित होना चाहिए। टूटा-फूटा या गंदा मुख्य द्वार तथा उसके आसपास फैली अव्यवस्था को शुभ नहीं माना जाता।

    रसोई से जुड़ी बातें

    मान्यता है कि रातभर रसोई में गंदे बर्तन छोड़ना या किचन को अस्वच्छ रखना सकारात्मक ऊर्जा को प्रभावित कर सकता है। इसलिए रसोई की नियमित सफाई का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।

    मुख्य द्वार पर जूते-चप्पलों का ढेर

    मुख्य प्रवेश द्वार पर बिखरे जूते-चप्पल या अनावश्यक सामान रखने से घर का प्रवेश क्षेत्र अव्यवस्थित दिखाई देता है। वास्तु में इसे शुभ नहीं माना गया है।

    दीवारों में सीलन और बंद घड़ियां

    घर की दीवारों में सीलन, दरारें या लंबे समय से बंद पड़ी घड़ियों को भी वास्तु में नकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। साथ ही ये घर की देखभाल की आवश्यकता का भी संकेत हो सकते हैं।

    सकारात्मक ऊर्जा के लिए आसान वास्तु उपाय

    • घर को हमेशा साफ-सुथरा और व्यवस्थित रखें।
    • ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) को हल्का और स्वच्छ रखने की सलाह दी जाती है।
    • घर की दक्षिण-पश्चिम दिशा को अपेक्षाकृत ऊंचा और मजबूत रखना शुभ माना जाता है।
    • नियमित रूप से सुबह-शाम पूजा करें और श्रद्धा अनुसार कपूर या दीपक जलाएं।
    • घर में तुलसी का पौधा लगाना शुभ माना जाता है।
    • कई लोग पोछा लगाने के पानी में थोड़ा सा साधारण नमक मिलाने की परंपरा अपनाते हैं, जिसे सकारात्मकता से जोड़ा जाता है।
    • घर में प्राकृतिक रोशनी और ताजी हवा का पर्याप्त प्रवेश सुनिश्चित करें, जिससे वातावरण भी बेहतर बना रहता है।

    नोट: यह जानकारी वास्तु शास्त्र और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है। इन मान्यताओं का वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। इन्हें व्यक्तिगत आस्था और विश्वास के आधार पर ही अपनाएं। घर की स्वच्छता, उचित वेंटिलेशन और नियमित रखरखाव स्वास्थ्य और बेहतर जीवनशैली के लिए हमेशा लाभदायक होते हैं।

  • ज्यादा चीनी सिर्फ सेहत ही नहीं, आपकी Skin भी कर सकती है खराब! जानें कैसे बचाएं त्वचा की Natural Glow..

    ज्यादा चीनी सिर्फ सेहत ही नहीं, आपकी Skin भी कर सकती है खराब! जानें कैसे बचाएं त्वचा की Natural Glow..

    ज्यादा चीनी सिर्फ सेहत ही नहीं, आपकी Skin भी कर सकती है खराब! जानें कैसे बचाएं त्वचा की Natural Glow..

    Sugar Skin Damage: अगर आपको लगता है कि चेहरे पर मुंहासे, झुर्रियां या बेजान त्वचा की वजह सिर्फ स्किन केयर की कमी है, तो ऐसा जरूरी नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार, जरूरत से ज्यादा चीनी (Sugar) का सेवन भी त्वचा की सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकता है। चाय, कॉफी, मिठाइयों, कोल्ड ड्रिंक, पैकेज्ड जूस और प्रोसेस्ड फूड के जरिए कई लोग अनजाने में रोज जरूरत से अधिक चीनी का सेवन कर लेते हैं।

    ज्यादा चीनी त्वचा को कैसे नुकसान पहुंचाती है?

    1. मुंहासे और ऑयली स्किन की समस्या बढ़ सकती है

    अधिक चीनी खाने पर शरीर में ब्लड शुगर तेजी से बढ़ता है, जिससे इंसुलिन का स्तर भी बढ़ जाता है। इसका असर त्वचा की ऑयल ग्रंथियों पर पड़ सकता है और अतिरिक्त तेल बनने से पिंपल व मुंहासों की समस्या बढ़ सकती है।

    2. शरीर में सूजन बढ़ सकती है

    अधिक चीनी वाले खाद्य पदार्थों का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) अधिक होता है। इनका ज्यादा सेवन शरीर में सूजन (Inflammation) बढ़ा सकता है, जिसका असर त्वचा की चमक और स्वास्थ्य पर भी दिखाई दे सकता है।

    3. समय से पहले झुर्रियां आ सकती हैं

    विशेषज्ञों के अनुसार, ज्यादा चीनी खाने से शरीर में ग्लाइकेशन (Glycation) की प्रक्रिया बढ़ जाती है। इससे त्वचा के लिए जरूरी कोलेजन (Collagen) और इलास्टिन (Elastin) प्रभावित हो सकते हैं। परिणामस्वरूप त्वचा की कसावट कम होने लगती है और समय से पहले झुर्रियां दिखाई देने लगती हैं।

    ये संकेत बताते हैं कि चीनी आपकी त्वचा को प्रभावित कर रही हो सकती है

    यदि आपकी त्वचा में लगातार ये बदलाव दिखाई दें, तो अधिक चीनी का सेवन भी एक कारण हो सकता है—

    • गाल और माथे पर जल्दी झुर्रियां दिखना
    • ठुड्डी और जॉलाइन के आसपास त्वचा ढीली पड़ना
    • बार-बार मुंहासे निकलना
    • चेहरे पर लालपन बने रहना
    • त्वचा के पोर्स बड़े दिखाई देना
    • चेहरा बेजान, फीका या थका हुआ नजर आना

    ध्यान रखें कि ये लक्षण अन्य कारणों से भी हो सकते हैं। सही कारण जानने के लिए जरूरत पड़ने पर त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लें।

    त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?

    • अतिरिक्त चीनी और मीठे पेय पदार्थों का सेवन सीमित करें।
    • मिठाई, कोल्ड ड्रिंक और प्रोसेस्ड फूड कम खाएं।
    • प्राकृतिक मिठास के लिए मौसमी फलों को प्राथमिकता दें।
    • भोजन में बेरीज, पालक, ब्रोकोली, ग्रीन टी और अन्य एंटीऑक्सीडेंट युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करें।
    • पर्याप्त पानी पिएं ताकि त्वचा हाइड्रेटेड रहे।
    • नियमित व्यायाम करें और पर्याप्त नींद लें।
    • रोजाना सनस्क्रीन और अपनी त्वचा के अनुसार स्किनकेयर रूटीन अपनाएं।

    नोट: केवल चीनी कम करने से सभी त्वचा संबंधी समस्याएं खत्म नहीं होतीं। अगर मुंहासे, झुर्रियां या त्वचा में अन्य बदलाव लंबे समय तक बने रहें, तो त्वचा विशेषज्ञ (Dermatologist) से सलाह लेना बेहतर रहेगा।

  • Vastu Tips: घर के Main Door पर स्वास्तिक बनाने से क्या होता है? जानें वास्तु के अनुसार शुभ नियम और मान्यताएं..

    Vastu Tips: घर के Main Door पर स्वास्तिक बनाने से क्या होता है? जानें वास्तु के अनुसार शुभ नियम और मान्यताएं..

    Vastu Tips: घर के Main Door पर स्वास्तिक बनाने से क्या होता है? जानें वास्तु के अनुसार शुभ नियम और मान्यताएं..

    Vastu Tips: हिंदू धर्म और वास्तु शास्त्र में स्वास्तिक को अत्यंत शुभ प्रतीक माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह भगवान श्रीगणेश का प्रतीक है और इसे सुख, समृद्धि तथा मंगल का संकेत माना जाता है। यही वजह है कि पूजा-पाठ, गृह प्रवेश और अन्य शुभ कार्यों से पहले स्वास्तिक बनाने की परंपरा है। आइए जानते हैं मुख्य द्वार पर स्वास्तिक बनाने से जुड़ी मान्यताएं और इसके नियम।

    मुख्य द्वार पर स्वास्तिक बनाने का महत्व

    वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का मुख्य द्वार सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश का प्रमुख स्थान माना जाता है। मान्यता है कि मुख्य द्वार पर स्वास्तिक बनाने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और घर में शुभ वातावरण बना रहता है।

    भगवान श्रीगणेश का प्रतीक

    धार्मिक मान्यता के अनुसार स्वास्तिक भगवान श्रीगणेश का प्रतीक माना जाता है। इसलिए घर के प्रवेश द्वार पर इसे बनाने से विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं और शुभ कार्यों में सफलता मिलने की कामना की जाती है।

    सुख-समृद्धि का प्रतीक

    मान्यता है कि मुख्य द्वार पर स्वास्तिक बनाने से घर में सुख-शांति, सौभाग्य और सकारात्मकता का वातावरण बना रहता है। कई लोग इसे मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने का भी शुभ प्रतीक मानते हैं।

    वास्तु दोष के लिए क्या कहते हैं मान्यताएं?

    वास्तु शास्त्र के अनुसार यदि घर में वास्तु दोष महसूस हो रहा हो, तो मुख्य द्वार पर हल्दी, रोली या कुमकुम से स्वास्तिक बनाने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और शुभ फल प्राप्त होते हैं।

    स्वास्तिक बनाने के नियम

    • स्वास्तिक हमेशा रोली, कुमकुम या हल्दी से बनाना शुभ माना जाता है।
    • इसकी चारों भुजाएं घड़ी की दिशा (Clockwise) में मुड़ी हुई होनी चाहिए।
    • मुख्य द्वार के दोनों ओर स्वास्तिक बनाना शुभ माना जाता है।
    • परंपराओं के अनुसार इसे दाहिने हाथ की अनामिका उंगली से बनाना श्रेष्ठ माना गया है।
    • स्वास्तिक के चारों भागों के बीच एक-एक बिंदु अवश्य लगाएं।
    • स्वास्तिक के साथ “शुभ-लाभ” लिखने की भी परंपरा है।

    इन बातों का रखें ध्यान

    • स्वास्तिक को कभी भी जमीन पर नहीं बनाना चाहिए।
    • बाथरूम, गंदे स्थान या अपवित्र जगहों पर स्वास्तिक बनाने से बचें।
    • स्वास्तिक हमेशा साफ-सुथरा और सही आकार में बनाएं, इसे टेढ़ा-मेढ़ा नहीं बनाना चाहिए।

    नोट: यह जानकारी धार्मिक और वास्तु शास्त्र की पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है। इन दावों का वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। इन्हें व्यक्तिगत आस्था और विश्वास के आधार पर ही अपनाएं।

  • इस देश में कब्र से पूर्वजों के अवशेष निकालकर मनाया जाता है उत्सव, जानिए ‘फामादिहाना’ परंपरा का इतिहास…

    इस देश में कब्र से पूर्वजों के अवशेष निकालकर मनाया जाता है उत्सव, जानिए ‘फामादिहाना’ परंपरा का इतिहास…

    इस देश में कब्र से पूर्वजों के अवशेष निकालकर मनाया जाता है उत्सव, जानिए ‘फामादिहाना’ परंपरा का इतिहास…

    नई दिल्ली: दुनिया भर में अलग-अलग संस्कृतियों और समुदायों की अपनी अनूठी परंपराएं हैं। इन्हीं में से एक है ‘फामादिहाना’ (Famadihana), जिसे दुनिया की सबसे अनोखी अंतिम संस्कार संबंधी परंपराओं में गिना जाता है। यह परंपरा अफ्रीकी द्वीपीय देश मैडागास्कर (Madagascar) के कुछ समुदायों में आज भी निभाई जाती है।

    क्या है फामादिहाना परंपरा?

    फामादिहाना का अर्थ है “हड्डियों को पलटना” (Turning of the Bones)। इस रस्म के दौरान परिवार के लोग कुछ वर्षों के अंतराल पर अपने पूर्वजों के अवशेषों को पारिवारिक समाधि (कब्र) से सम्मानपूर्वक बाहर निकालते हैं, उन्हें नए रेशमी कफन में लपेटते हैं और फिर धार्मिक व पारिवारिक अनुष्ठान करते हैं।

    शोक नहीं, यादों का उत्सव

    इस परंपरा के दौरान परिवार और रिश्तेदार एकत्रित होकर संगीत, नृत्य और सामूहिक भोज का आयोजन करते हैं। कई लोग पूर्वजों के अवशेषों को कंधे पर उठाकर पारंपरिक संगीत के बीच सम्मानपूर्वक जुलूस भी निकालते हैं। इसका उद्देश्य शोक मनाना नहीं, बल्कि अपने पूर्वजों को सम्मान देना और उनकी स्मृतियों का उत्सव मनाना होता है।

    क्यों निभाई जाती है यह रस्म?

    मैडागास्कर के कुछ समुदायों की मान्यता है कि मृत्यु के बाद भी पूर्वज परिवार का हिस्सा बने रहते हैं। उनका विश्वास है कि पूर्वजों का सम्मान करने और समय-समय पर उन्हें याद करने से परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है। इसी कारण फामादिहाना को प्रेम, सम्मान और पारिवारिक जुड़ाव का प्रतीक माना जाता है।

    हर जगह नहीं निभाई जाती यह परंपरा

    ध्यान देने वाली बात यह है कि फामादिहाना पूरे मैडागास्कर में नहीं, बल्कि मुख्य रूप से मेरिना (Merina) और बेटसिलियो (Betsileo) जैसे कुछ समुदायों द्वारा ही निभाई जाती है। आधुनिक समय में आर्थिक, सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी कारणों से इस परंपरा का प्रचलन कुछ क्षेत्रों में कम भी हुआ है, लेकिन यह अब भी मैडागास्कर की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।

    फामादिहाना दुनिया की उन परंपराओं में शामिल है, जो यह दिखाती हैं कि अलग-अलग संस्कृतियों में पूर्वजों को याद करने और सम्मान देने के तरीके कितने विविध और अनोखे हो सकते हैं।

  • 6 दिनों से भीतर-ही-भीतर सुलग रहा महुआ .न धुआं, न लपटें… फिर भी जल रहा महुआ का पेड़, बलिया की घटना बनी रहस्य..

    6 दिनों से भीतर-ही-भीतर सुलग रहा महुआ .न धुआं, न लपटें… फिर भी जल रहा महुआ का पेड़, बलिया की घटना बनी रहस्य..

    6 दिनों से भीतर-ही-भीतर सुलग रहा महुआ .न धुआं, न लपटें… फिर भी जल रहा महुआ का पेड़, बलिया की घटना बनी रहस्य..

    बलिया (उत्तर प्रदेश): बलिया जिले के चिलकहर ब्लॉक के नरावं गांव में एक महुआ का पेड़ इन दिनों लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों का दावा है कि यह हरा-भरा पेड़ पिछले छह दिनों से अंदर ही अंदर सुलग रहा है। हैरानी की बात यह है कि बारिश होने के बावजूद पेड़ की गर्माहट कम नहीं हुई और बाहर से धुआं भी दिखाई नहीं दे रहा। इस अनोखी घटना को देखने के लिए दूर-दूर से लोग गांव पहुंच रहे हैं।

    स्थानीय लोगों के बीच इस घटना को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं हैं। कुछ इसे प्रकृति का अनोखा रहस्य मान रहे हैं, जबकि कई लोग इसे चमत्कार और दैवीय संकेत बताकर पेड़ की पूजा-अर्चना करने लगे हैं। पेड़ के नीचे लाल कपड़ा, ईंटें और चढ़ावा रखा गया है तथा कुछ लोगों ने यहां मंदिर बनाने की भी बात कही है।

    पूर्व सैनिक संघ के अध्यक्ष महात्मा सिंह ने बताया कि सोशल मीडिया पर पेड़ में आग लगने की खबर देखने के बाद वे मौके पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों के अनुसार पेड़ में बीच-बीच में आग जैसी लपट दिखाई देती है, लेकिन धुआं नहीं निकलता। उनके मुताबिक, इस तरह की घटना की वास्तविक वजह वैज्ञानिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

    ग्रामीण अवधेश पांडेय ने पेड़ के पास त्रिशूल स्थापित कर दिया है। उनका कहना है कि लोग इस पेड़ को अब ‘महुआ बाबा’ के रूप में मानने लगे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि घटना के पीछे कोई प्राकृतिक या वैज्ञानिक कारण भी हो सकता है और जांच से जो तथ्य सामने आएंगे, उन्हें स्वीकार किया जाना चाहिए।

    वहीं, कई अन्य ग्रामीण इसे अपनी आस्था से जोड़ रहे हैं। गांव में कीर्तन और सुंदरकांड पाठ का आयोजन भी शुरू हो गया है तथा श्रद्धालु पेड़ के पास पहुंचकर पूजा और चढ़ावा चढ़ा रहे हैं।

    ग्रामीणों का कहना है कि इस घटना की वैज्ञानिक जांच कराई जानी चाहिए ताकि यह पता चल सके कि पेड़ के भीतर लगातार गर्मी या सुलगने जैसी स्थिति किस कारण बनी हुई है। फिलहाल यह रहस्यमयी घटना पूरे इलाके में कौतूहल और चर्चा का विषय बनी हुई है।

  • आर्टिफिशियल ज्वेलरी पहनते हैं? खरीदने से पहले जान लें ये जरूरी बातें, रिसर्च में सामने आया चौंकाने वाला दावा..

    आर्टिफिशियल ज्वेलरी पहनते हैं? खरीदने से पहले जान लें ये जरूरी बातें, रिसर्च में सामने आया चौंकाने वाला दावा..

    आर्टिफिशियल ज्वेलरी पहनते हैं? खरीदने से पहले जान लें ये जरूरी बातें, रिसर्च में सामने आया चौंकाने वाला दावा..

    Artificial Jewellery Health Risk: आर्टिफिशियल ज्वेलरी कम कीमत, आकर्षक डिजाइन और आसान उपलब्धता के कारण लाखों लोगों की पहली पसंद बन चुकी है। लेकिन हाल ही में ब्रिटेन में हुई एक जांच ने कुछ ऑनलाइन बिकने वाले आर्टिफिशियल ज्वेलरी उत्पादों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। जांच में दावा किया गया कि कुछ नमूनों में कैडमियम (Cadmium) नामक जहरीली भारी धातु निर्धारित सीमा से हजारों गुना अधिक मात्रा में पाई गई। विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक कैडमियम के संपर्क में रहना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।

    जांच में क्या सामने आया?

    ब्रिटेन के The Sunday Times की जांच के अनुसार, कुछ लोकप्रिय ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से खरीदी गई आर्टिफिशियल अंगूठियों, नेकलेस और इयररिंग्स की लैब जांच में कई नमूनों में कैडमियम की मात्रा यूके की तय सीमा से हजारों गुना अधिक पाई गई।

    यूके के नियमों के अनुसार, आर्टिफिशियल ज्वेलरी में कैडमियम की अधिकतम मात्रा 0.01% होनी चाहिए। जांच के बाद संबंधित उत्पादों को बाजार से हटाने (रिकॉल) की प्रक्रिया शुरू की गई।

    925 सिल्वर के नाम पर मिला कैडमियम

    जांच में एक अंगूठी को “925 सिल्वर” बताकर बेचा जा रहा था। सामान्यतः इसका मतलब होता है कि उसमें 92.5% चांदी होती है। लेकिन लैब परीक्षण में दावा किया गया कि उस नमूने में लगभग 92% कैडमियम मौजूद था। इसी तरह एक ब्रेसलेट में भी कैडमियम की मात्रा तय सीमा से कई हजार गुना अधिक बताई गई।

    कैडमियम कितना खतरनाक हो सकता है?

    कैडमियम एक भारी धातु (Heavy Metal) है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक इसके अत्यधिक संपर्क में रहने से कई स्वास्थ्य जोखिम बढ़ सकते हैं, जिनमें शामिल हैं—

    • किडनी को नुकसान
    • लिवर पर असर
    • हड्डियों का कमजोर होना
    • कुछ प्रकार के कैंसर का बढ़ा हुआ जोखिम (लंबे समय तक और पर्याप्त मात्रा में संपर्क होने पर)

    हालांकि जोखिम इस बात पर भी निर्भर करता है कि व्यक्ति कैडमियम के संपर्क में किस रूप और कितनी मात्रा में आता है।

    इयररिंग्स से अधिक सावधानी क्यों?

    विशेषज्ञों का मानना है कि इयररिंग्स में जोखिम अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है क्योंकि वे सीधे कान के छेद और त्वचा के संपर्क में रहती हैं। यदि धातु की गुणवत्ता खराब हो, तो लंबे समय तक उपयोग करने पर संवेदनशील लोगों में त्वचा संबंधी समस्याएं या अन्य जोखिम बढ़ सकते हैं।

    क्या हर आर्टिफिशियल ज्वेलरी खतरनाक है?

    नहीं। यह जांच कुछ विशेष उत्पादों और नमूनों पर आधारित थी। इसका यह अर्थ नहीं है कि बाजार में उपलब्ध हर आर्टिफिशियल ज्वेलरी असुरक्षित है। कई प्रतिष्ठित कंपनियां और ब्रांड अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों का पालन करते हैं और सुरक्षित सामग्री का उपयोग करते हैं।

    ज्वेलरी खरीदते समय रखें इन बातों का ध्यान

    • हमेशा विश्वसनीय ब्रांड या प्रमाणित विक्रेता से खरीदारी करें।
    • बहुत सस्ती और बिना ब्रांड वाली ज्वेलरी खरीदने से पहले सावधानी बरतें।
    • ऑनलाइन खरीदारी करते समय मटेरियल, सर्टिफिकेशन और ग्राहक रिव्यू जरूर देखें।
    • यदि ज्वेलरी पहनने के बाद खुजली, लालपन, जलन या एलर्जी हो, तो उसका इस्तेमाल तुरंत बंद करें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लें।
    • बच्चों के लिए आर्टिफिशियल ज्वेलरी खरीदते समय अतिरिक्त सावधानी बरतें।

    नोट: यह रिपोर्ट ब्रिटेन में जांचे गए कुछ विशेष उत्पादों पर आधारित है। इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि सभी आर्टिफिशियल ज्वेलरी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। सुरक्षित खरीदारी के लिए हमेशा विश्वसनीय और गुणवत्ता-प्रमाणित उत्पादों को प्राथमिकता दें।

  • Vastu Tips: इस दिशा की दीवार में सीलन हो सकती है अशुभ! वास्तु के अनुसार जानें कारण और आसान उपाय..

    Vastu Tips: इस दिशा की दीवार में सीलन हो सकती है अशुभ! वास्तु के अनुसार जानें कारण और आसान उपाय..

    Vastu Tips: इस दिशा की दीवार में सीलन हो सकती है अशुभ! वास्तु के अनुसार जानें कारण और आसान उपाय..

    Vastu Tips: घर की दीवारों पर सीलन या नमी दिखना केवल निर्माण संबंधी समस्या नहीं, बल्कि वास्तु शास्त्र में इसे नकारात्मक ऊर्जा का संकेत भी माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, लंबे समय तक सीलन रहने से घर का वातावरण प्रभावित हो सकता है और परिवार के सदस्यों की मानसिक शांति, स्वास्थ्य व आर्थिक स्थिति पर असर पड़ सकता है। आइए जानते हैं कि अलग-अलग दिशाओं में सीलन को लेकर वास्तु क्या कहता है और इससे जुड़े आसान उपाय क्या हैं।

    सेहत पर पड़ सकता है असर

    दीवारों पर लगातार नमी रहने से फंगस और फफूंदी पनप सकती है, जिससे घर की हवा प्रभावित होती है। इससे एलर्जी, सांस संबंधी दिक्कत, अस्थमा और संक्रमण जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। साथ ही घर का वातावरण भी भारी और तनावपूर्ण महसूस हो सकता है।

    किस दिशा में सीलन का क्या माना जाता है प्रभाव?

    उत्तर दिशा

    वास्तु मान्यताओं के अनुसार उत्तर दिशा में सीलन होने से व्यापार और करियर में नए अवसर मिलने में बाधा आ सकती है। आर्थिक प्रगति की गति भी धीमी पड़ सकती है।

    दक्षिण-पश्चिम दिशा

    इस दिशा को स्थिरता और आर्थिक मजबूती से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि यहां सीलन होने पर अनावश्यक खर्च बढ़ सकते हैं और परिवार में तनाव या रिश्तों में खटास आने की आशंका रहती है।

    दक्षिण-दक्षिण-पश्चिम दिशा

    वास्तु के अनुसार इस दिशा में नमी या रिसाव होने पर ऊर्जा का स्तर प्रभावित हो सकता है। साथ ही फिजूल खर्च और पाचन संबंधी समस्याओं से भी इसे जोड़ा जाता है।

    पूर्व दिशा

    पूर्व दिशा में सीलन को सामाजिक प्रतिष्ठा और पारिवारिक संबंधों पर प्रभाव डालने वाला माना जाता है। मान्यता है कि इससे पिता-पुत्र के रिश्तों में भी तनाव आ सकता है।

    पश्चिम दिशा

    वास्तु मान्यताओं के अनुसार पश्चिम दिशा में सीलन होने से मेहनत का पूरा फल मिलने में बाधा आ सकती है और लाभ के अवसर प्रभावित हो सकते हैं।

    वास्तु दोष दूर करने के आसान उपाय

    कपूर रखें

    जिस स्थान पर सीलन हो, वहां अच्छी तरह सफाई करने के बाद एक कटोरी में कपूर रख दें। मान्यता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा और बदबू कम होती है।

    सेंधा नमक वाले पानी से पोछा

    सप्ताह में 2–3 बार पानी में सेंधा नमक मिलाकर पोछा लगाने की सलाह दी जाती है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार इससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। हालांकि गुरुवार के दिन पोछा लगाने से बचने की बात कही जाती है।

    धूप और हवा आने दें

    सीलन वाले कमरे में पर्याप्त धूप और वेंटिलेशन रखें। सूर्य की रोशनी नमी कम करने के साथ फफूंदी बनने से भी रोकने में मदद करती है।

    लीकेज तुरंत ठीक कराएं

    यदि दीवार के भीतर पाइप से पानी रिस रहा हो या नल लगातार टपक रहा हो, तो उसे जल्द ठीक करवाएं। इससे न केवल घर की दीवारें सुरक्षित रहेंगी, बल्कि नमी और फंगस की समस्या भी कम होगी।

    नोट: यह जानकारी वास्तु शास्त्र और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है। वैज्ञानिक दृष्टि से सीलन का मुख्य कारण निर्माण संबंधी समस्याएं, पानी का रिसाव और खराब वेंटिलेशन हो सकते हैं। घर में सीलन दिखाई देने पर आवश्यक तकनीकी मरम्मत कराना भी जरूरी है।

  • Skin पर दिख रहे हैं ये संकेत? नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी, लिवर डैमेज का हो सकता है इशारा

    Skin पर दिख रहे हैं ये संकेत? नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी, लिवर डैमेज का हो सकता है इशारा

    Skin पर दिख रहे हैं ये संकेत? नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी, लिवर डैमेज का हो सकता है इशारा

    Liver Health: लिवर शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। यह भोजन से मिलने वाले पोषक तत्वों को ऊर्जा में बदलने, शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने और कई जरूरी जैविक प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने का काम करता है। लेकिन फैटी लिवर, मोटापा, अत्यधिक शराब का सेवन और अस्वस्थ जीवनशैली के कारण लिवर संबंधी बीमारियों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, लिवर की बीमारी शुरुआती चरण में अक्सर बिना स्पष्ट लक्षणों के आगे बढ़ती है, लेकिन त्वचा और शरीर में होने वाले कुछ बदलाव इसकी ओर इशारा कर सकते हैं।

    त्वचा क्यों देती है लिवर की सेहत का संकेत?

    लिवर शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने और कई महत्वपूर्ण प्रोटीन व एंजाइम बनाने का काम करता है। जब इसकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है, तो इसका असर केवल पाचन तंत्र पर ही नहीं बल्कि त्वचा, आंखों और पूरे शरीर पर भी दिखाई दे सकता है। इसलिए लंबे समय तक त्वचा में होने वाले असामान्य बदलावों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

    1. त्वचा और आंखों का पीला पड़ना

    त्वचा और आंखों के सफेद हिस्से का पीला पड़ना पीलिया (Jaundice) का प्रमुख लक्षण हो सकता है। यह तब होता है जब लिवर बिलीरुबिन नामक पदार्थ को सही तरीके से शरीर से बाहर नहीं निकाल पाता। यदि ऐसा अचानक दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

    2. लगातार खुजली होना

    यदि बिना किसी एलर्जी, संक्रमण या त्वचा रोग के लंबे समय तक पूरे शरीर या किसी हिस्से में लगातार खुजली बनी रहे, तो यह भी लिवर की समस्या का संकेत हो सकता है। ऐसे मामलों में चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है।

    3. हल्की चोट पर भी जल्दी नीले निशान पड़ना

    लिवर ऐसे प्रोटीन बनाता है जो खून को जमने में मदद करते हैं। जब लिवर ठीक से काम नहीं करता, तो मामूली चोट पर भी त्वचा पर आसानी से नीले या काले निशान पड़ सकते हैं।

    4. त्वचा पर मकड़ी के जाले जैसे लाल निशान

    कुछ लिवर रोगों में त्वचा पर छोटे-छोटे लाल धब्बे या नसों का जाल दिखाई दे सकता है, जिन्हें स्पाइडर एंजियोमा (Spider Angioma) कहा जाता है। ये अक्सर चेहरे, गर्दन, छाती और कंधों के आसपास दिखाई देते हैं।

    लिवर की बीमारी के अन्य संभावित लक्षण

    त्वचा के अलावा ये लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं—

    • लगातार थकान या कमजोरी
    • भूख कम लगना
    • मतली या उल्टी
    • पेट में दर्द या सूजन
    • पैरों और टखनों में सूजन
    • गहरे रंग का पेशाब
    • हल्के रंग का मल
    • अचानक वजन कम होना
    • गंभीर मामलों में भ्रम या मानसिक असमंजस

    ध्यान दें कि ये लक्षण अन्य बीमारियों में भी हो सकते हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर निष्कर्ष न निकालें।

    किन लोगों में अधिक रहता है खतरा?

    विशेषज्ञों के अनुसार इन लोगों में लिवर रोग का जोखिम अधिक हो सकता है—

    • अत्यधिक शराब का सेवन करने वाले
    • मोटापा या फैटी लिवर से पीड़ित लोग
    • हेपेटाइटिस संक्रमण वाले मरीज
    • मधुमेह (Diabetes) या हाई कोलेस्ट्रॉल वाले लोग
    • लंबे समय तक बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयां लेने वाले

    लिवर को स्वस्थ रखने के लिए अपनाएं ये आदतें

    • संतुलित और पौष्टिक भोजन करें।
    • तला-भुना, मीठा और प्रोसेस्ड फूड सीमित मात्रा में खाएं।
    • नियमित व्यायाम करें और वजन नियंत्रित रखें।
    • शराब से परहेज करें।
    • बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयों का लंबे समय तक सेवन न करें।
    • पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
    • जोखिम होने पर समय-समय पर Liver Function Test (LFT) और डॉक्टर की सलाह अनुसार जांच कराएं।

    नोट: यदि त्वचा या शरीर में ऊपर बताए गए किसी भी लक्षण का लगातार अनुभव हो, तो स्वयं इलाज करने के बजाय डॉक्टर या गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से सलाह लें। केवल लक्षणों के आधार पर लिवर रोग की पुष्टि नहीं की जा सकती; सही निदान के लिए चिकित्सकीय जांच आवश्यक होती है।

  • Shani Rahu Effects: ससुराल से ये Gift लाना पड़ सकता है भारी! वास्तु के अनुसार बढ़ सकता है राहु-शनि का प्रभाव..

    Shani Rahu Effects: ससुराल से ये Gift लाना पड़ सकता है भारी! वास्तु के अनुसार बढ़ सकता है राहु-शनि का प्रभाव..

    Shani Rahu Effects: ससुराल से ये Gift लाना पड़ सकता है भारी! वास्तु के अनुसार बढ़ सकता है राहु-शनि का प्रभाव..

    Shani Rahu Effects: वास्तु शास्त्र में घर, परिवार और रिश्तों से जुड़े कई ऐसे नियम बताए गए हैं, जिन्हें सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि से जोड़ा जाता है। मान्यताओं के अनुसार, शादी के बाद कुछ वस्तुओं का लेन-देन सोच-समझकर करना चाहिए। खासकर ससुराल से बिना आवश्यकता या मुफ्त में कुछ चीजें लेना शुभ नहीं माना जाता। कहा जाता है कि इससे मानसिक तनाव, आर्थिक परेशानियां और ग्रह दोष बढ़ने की आशंका हो सकती है। आइए जानते हैं किन चीजों को ससुराल से उपहार के रूप में लेने से बचने की सलाह दी जाती है।

    इलेक्ट्रॉनिक सामान

    वास्तु मान्यताओं के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं का संबंध राहु ग्रह से माना जाता है। कहा जाता है कि बिना जरूरत ससुराल से मुफ्त में इलेक्ट्रॉनिक सामान लेने से राहु का नकारात्मक प्रभाव बढ़ सकता है। इसके कारण अचानक खर्चे बढ़ने और आर्थिक अस्थिरता का सामना करना पड़ सकता है।

    काले रंग की वस्तुएं

    वास्तु में काले रंग को शनि ग्रह से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि ससुराल से काले कपड़े, कंबल या अन्य काले रंग की वस्तुएं उपहार में लेने से जीवन में संघर्ष बढ़ सकता है। साथ ही कार्यों में बाधाएं और मानसिक तनाव भी बढ़ने की संभावना बताई जाती है।

    झाड़ू

    झाड़ू को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि महिलाओं को मायके से झाड़ू लाकर ससुराल में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से घर की बरकत और आर्थिक समृद्धि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

    नुकीली और लोहे की वस्तुएं

    वास्तु शास्त्र के अनुसार महिलाओं को मायके से कैंची, चाकू या अन्य नुकीली वस्तुएं लाने से बचना चाहिए। ऐसी चीजों को रिश्तों में तनाव और विवाद का कारण माना जाता है। वहीं पुरुषों को भी ससुराल से भारी लोहे का सामान मुफ्त में लेने से बचने की सलाह दी जाती है।

    पुराना और बेकार सामान

    वास्तु मान्यताओं के अनुसार मायके या ससुराल से पुराने अखबार, रद्दी, बेकार किताबें या अनुपयोगी सामान घर लाना शुभ नहीं माना जाता। कहा जाता है कि इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है और निर्णय लेने में भ्रम तथा मानसिक तनाव का सामना करना पड़ सकता है.

    नोट: यह जानकारी वास्तु शास्त्र और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है। इसका कोई सार्वभौमिक वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। इन मान्यताओं को अपनाना या न अपनाना व्यक्ति की व्यक्तिगत आस्था पर निर्भर करता है।