मध्य प्रदेश के जिला टीकमगढ़ से बुआ का बवाल सामने आय़ा है। जिले के खरगापुर थाना क्षेत्र से एक बेहद संवेदनशील और गंभीर मामले से सभी को हैरान कर दिया है। माता-पिता की मृत्यु के बाद रिश्तेदारों के संरक्षण में रह रहे 15 वर्षीय नाबालिग ने अपनी ही सगी बुआ और परिवार के अन्य सदस्यों पर गंभीर आरोप लगाया है। टीकमगढ़ एसपी के पास पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई है।
बुआ ने करवा दी विधवा बहू से शादी 15 साल के रिश्तेदार का शादी
दरअसल माता-पिता की मौत के बाद 15 साल का नाबालिग लड़का बुआ के घर पर रहने लगा था। किशोर का आरोप है कि उसकी बुआ ने अपने दिवंगत बेटे की विधवा बहू की मांग उससे जबरन भरवाई। बाद में उसे उसी महिला के साथ पति-पत्नी की तरह रहने के लिए लगातार दबाव बनाया। मामले में पुलिस ने शिकायत प्राप्त होने की पुष्टि करते हुए जांच शुरू कर दी है।
सगी बुआ के पास रह रहा था नाबालिग
पीड़ित ने टीकमगढ़ एसपी को दिए आवेदन में कहा है कि माता-पिता के निधन के बाद वह अपनी सगी बुआ के पास रह रहा था। इसी दौरान बुआ और परिवार के अन्य सदस्यों ने कथित रूप से उसे मंदिर ले जाकर अपनी विधवा बहू की मांग जबरन भरवा दी। नाबालिग का कहना है कि उसे बताया गया कि अब उसका विवाह हो चुका है और उसे उसी महिला के साथ पति की तरह रहना होगा।
अपनी उम्र को लेकर दिया हवाला
किशोर का आरोप है कि उसने कई बार अपनी उम्र का हवाला देते हुए इसका विरोध किया, लेकिन उसकी किसी ने नहीं सुनी। उसने कहा कि विरोध करने पर उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और उसके साथ जबरन शारीरिक शोषण कराने का भी प्रयास किया गया। पीड़ित का कहना है कि उसकी बुआ का बेटा अब इस दुनिया में नहीं है और इसी कारण वह अपनी विधवा बहू को उसके साथ रखने का दबाव बना रही है। उसका कहना है कि इस पूरी घटना ने उसके बचपन, शिक्षा और भविष्य को संकट में डाल दिया है।
नाबालिग ने यह भी बताया कि उसने पहले संबंधित थाना पुलिस और 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन पर भी शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन उसे कोई प्रभावी राहत नहीं मिली। इसके बाद उसने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर विस्तृत आवेदन सौंपा और निष्पक्ष जांच, अपनी सुरक्षा तथा आरोपियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की।
इस संबंध में टीकमगढ़ के एएसपी विक्रम सिंह ने बताया कि शिकायत प्राप्त हुई है और मामले को विवेचना में ले लिया गया है। उन्होंने कहा कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
उत्तर प्रदेश के सतर्कता अधिष्ठान ने आय के ज्ञात स्रोतों के अनुपात में अधिक संपत्ति अर्जित करने के एक मामले में आगरा में तैनात रहे पूर्व सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) ललित कुमार के लखनऊ स्थित घर पर छापेमारी करके भारी मात्रा में सोना-चांदी और…
लखनऊ:
उत्तर प्रदेश के सतर्कता अधिष्ठान ने आय के ज्ञात स्रोतों के अनुपात में अधिक संपत्ति अर्जित करने के एक मामले में आगरा में तैनात रहे पूर्व सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) ललित कुमार के लखनऊ स्थित घर पर छापेमारी करके भारी मात्रा में सोना-चांदी और नकदी बरामद की।
सतर्कता अधिष्ठान की ओर से बुधवार को जारी एक बयान के मुताबिक अदालत से तलाशी वारंट मिलने बाद मंगलवार और बुधवार को अलीगंज की चंद्रलोक कॉलोनी में स्थित कुमार के घर पर की गई छापेमारी के दौरान एक करोड़ 62 लाख रुपये नकदी, 13 किलोग्राम सोना और नौ किलोग्राम चांदी के गहने बरामद किये गए। बयान में कहा गया है कि इसके अलावा चल—अचल संपत्ति से जुड़े दस्तावेज भी मिले, जिनकी कुल कीमत लगभग 35 करोड़ रुपये आंकी गई है।
अधिकारियों ने बताया कि जांच के दौरान कथित तौर पर पता चला था कि कुमार ने आय के ज्ञात स्रोतों के अनुताप में कहीं अधिक संपत्ति जमा की है, जिसके बाद उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार के निर्देश पर उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान इस मामले की जांच कर रहा है। बयान के अनुसार छापेमारी के दौरान मिले एक करोड़ 62 लाख रुपये घर के अंदर अलग-अलग स्थानों पर पैकेट में छुपाकर रखे गए थे, वहीं लगभग 13 किलो सोना और लगभग नौ किलो चांदी भी जब्त की गयी है।
अधिकारियों ने बताया कि छापेमारी के दौरान कई चल और अचल संपत्तियों में निवेश से जुड़े दस्तावेज भी बरामद किये गये हैं। बयान के मुताबिक, ये दस्तावेज लखनऊ में कई रिहायशी मकानों और भूखंड, लखनऊ, बाराबंकी और रायबरेली जिलों में कृषि भूमि और लखनऊ व नोएडा में फ्लैट की बुकिंग से संबंधित हैं, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 13 करोड़ रुपये है। बयान के अनुसार छापेमारी में बैंक में जमा राशि, डाकघर में निवेश, म्यूचुअल फंड और सावधि जमा में एक करोड़ रुपये से अधिक के निवेश से जुड़े दस्तावेज भी मिले हैं। अधिकारियों ने बताया कि मौके से दो कीमतें कारें और एक रिवॉल्वर भी बरामद की गई। उन्होंने बताया कि बरामद नकदी, कीमती धातुओं, गहनों, चल-अचल संपत्ति और निवेश की कुल कीमत लगभग 35 करोड़ रुपये आंकी गई है। बयान में यह भी कहा गया कि उत्तर प्रदेश सतर्कता अधिष्ठान के महानिदेशक ने यह छापेमारी और बरामदगी करने वाली टीम को एक लाख रुपये इनाम देने की घोषणा की है।
कोटेश्वर महादेव की अनकही गाथा: करोड़ों शिवलिंगों वाली रहस्यमयी गुफा का अद्भुत इतिहास
उत्तराखंड की पावन धरती को यूं ही देवभूमि नहीं कहा जाता। यहां कदम-कदम पर ऐसे प्राचीन मंदिर और आध्यात्मिक स्थल मौजूद हैं, जिनका इतिहास हजारों वर्षों पुरानी मान्यताओं और लोककथाओं से जुड़ा हुआ है। केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम की यात्रा के दौरान भी कई ऐसे स्थान आते हैं, जो अपनी दिव्यता और प्राकृतिक सुंदरता से श्रद्धालुओं का मन मोह लेते हैं। इन्हीं पवित्र स्थलों में एक है कोटेश्वर महादेव मंदिर, जो रुद्रप्रयाग से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर अलकनंदा नदी के किनारे स्थित एक प्राकृतिक गुफा में विराजमान है।
यह स्थान किसी भव्य मंदिर की तरह नहीं, बल्कि दो पहाड़ियों के बीच बनी एक प्राचीन गुफा के रूप में प्रसिद्ध है। गुफा के भीतर प्रवेश करते ही प्राकृतिक रूप से बने असंख्य शिवलिंग श्रद्धालुओं को अद्भुत आध्यात्मिक अनुभूति कराते हैं। यही कारण है कि कोटेश्वर महादेव को उत्तराखंड के सबसे रहस्यमयी शिवधामों में गिना जाता है।
क्या है कोटेश्वर महादेव की पौराणिक कथा?
कोटेश्वर महादेव से जुड़ी कई लोककथाएं प्रचलित हैं। सबसे प्रसिद्ध मान्यता यह है कि यहां भगवान शिव ने भस्मासुर से बचने के लिए शरण ली थी, लेकिन इस कथा का स्पष्ट उल्लेख प्रमुख प्राचीन ग्रंथों में नहीं मिलता। वहीं एक अन्य प्राचीन धार्मिक मान्यता के अनुसार इस स्थान का संबंध ब्रह्म राक्षसों के उद्धार से जुड़ा हुआ माना जाता है।
कहा जाता है कि प्राचीन काल में अनेक ब्रह्म राक्षस अपनी राक्षस योनि से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव की कठोर तपस्या करने लगे। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर महादेव प्रकट हुए और उन्हें वरदान मांगने का अवसर दिया।
राक्षसों ने भगवान शिव से दो वरदान मांगे। पहला, उन्हें राक्षस योनि से मुक्ति मिले और दूसरा, भविष्य में उनका स्मरण सम्मान के साथ किया जाए। भगवान शिव ने उनकी प्रार्थना स्वीकार करते हुए इसी स्थान पर दिव्य गुफा में शिवलिंग स्वरूप निवास करने का संकल्प लिया। साथ ही उन सभी मुक्त आत्माओं को भी शिवलिंग स्वरूप में अपने साथ स्थान दिया।
क्यों पड़ा नाम ‘कोटेश्वर’?
मान्यता है कि इस गुफा और आसपास के पर्वत में करोड़ों प्राकृतिक शिवलिंग प्रकट हुए। संस्कृत में ‘कोटि’ का अर्थ होता है करोड़, इसलिए इस स्थान का नाम कोटेश्वर महादेव पड़ा। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां का प्रत्येक पत्थर शिव स्वरूप है और गुफा का कण-कण भगवान शिव की दिव्य ऊर्जा से ओत-प्रोत है।
ऐसी भी मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से यहां भगवान शिव की आराधना करते हैं, उनकी मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होती हैं।
पांडवों और कोटेश्वर महादेव का संबंध
महाभारत काल से जुड़ी एक मान्यता के अनुसार, जब पांडव अपने कर्मों के प्रायश्चित के लिए भगवान शिव की खोज कर रहे थे, तब भगवान शिव उनसे अप्रसन्न होकर हिमालय की ओर चले गए। कहा जाता है कि इसी दौरान उन्होंने इस गुफा में कुछ समय के लिए आश्रय लिया और स्वयं को पहचान से बचाने के लिए हिरण का रूप धारण कर लिया।
स्थानीय परंपराओं में इस स्थान को ‘काखड़ पाली’ भी कहा जाता है, क्योंकि पहाड़ी भाषा में हिरण को ‘काखड़’ कहा जाता है। मान्यता है कि यहां से आगे भगवान शिव केदारनाथ की ओर प्रस्थान कर गए थे।
आध्यात्मिक महत्व
कोटेश्वर महादेव केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि गहन आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र भी माना जाता है। मंदिर के पास बहने वाली अलकनंदा नदी इस स्थान की पवित्रता को और अधिक बढ़ा देती है। कई श्रद्धालु मानते हैं कि यहां का शांत वातावरण, प्राकृतिक गुफा और शिवलिंगों की दिव्यता मन को ध्यान और भक्ति में लीन कर देती है।
केदारनाथ धाम की यात्रा करने वाले अनेक श्रद्धालु इस स्थान पर दर्शन कर अपनी यात्रा को पूर्ण मानते हैं।
प्राकृतिक सुंदरता
अलकनंदा नदी के किनारे स्थित यह गुफा चारों ओर से ऊंचे पहाड़ों और हरियाली से घिरी हुई है। गुफा के भीतर टपकता प्राकृतिक जल, ठंडा वातावरण और शांत परिवेश यहां आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को अलग ही अनुभव कराता है।
बरसात और सर्दियों के मौसम में इस स्थान की सुंदरता और भी अधिक बढ़ जाती है। नदी की कल-कल ध्वनि और पहाड़ों की नीरवता यहां आध्यात्मिक शांति का अनूठा एहसास कराती है।
कोटेश्वर महादेव कैसे पहुंचें?
कोटेश्वर महादेव मंदिर सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है।
सड़क मार्ग: यह मंदिर रुद्रप्रयाग जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-7 (NH-7) के पास स्थित है। ऋषिकेश, श्रीनगर, देहरादून और रुद्रप्रयाग से नियमित बस और टैक्सी सेवाएं उपलब्ध रहती हैं।
रेल मार्ग: सबसे निकट का प्रमुख रेलवे स्टेशन ऋषिकेश है। वहां से सड़क मार्ग द्वारा लगभग 138 किलोमीटर की यात्रा करके मंदिर पहुंचा जा सकता है।
हवाई मार्ग: सबसे निकट का हवाई अड्डा जॉलीग्रांट एयरपोर्ट (देहरादून) है, जहां से सड़क मार्ग द्वारा लगभग 250 किलोमीटर की दूरी तय करनी होती है।
क्यों करें कोटेश्वर महादेव के दर्शन?
यदि आप उत्तराखंड की चारधाम यात्रा पर जा रहे हैं या भगवान शिव के प्राचीन और रहस्यमयी मंदिरों को देखने की इच्छा रखते हैं, तो कोटेश्वर महादेव अवश्य जाएं। यहां की प्राकृतिक गुफा, करोड़ों शिवलिंगों की मान्यता, अलकनंदा नदी का शांत तट और सदियों पुरानी धार्मिक परंपराएं इस स्थान को एक अद्वितीय आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करती हैं।
कोटेश्वर महादेव केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि आस्था, प्रकृति और प्राचीन भारतीय परंपराओं का ऐसा संगम है, जहां पहुंचकर श्रद्धालु मन की शांति, आध्यात्मिक ऊर्जा और भगवान शिव की दिव्य उपस्थिति का अनुभव करते हैं।
बीते दिनों जयपुर में एक बेटे द्वारा मां की हत्या करवाने की बात सामने आई थी. अब राजस्थान के झुंझुनूं जिले में एक बेटे ने अपनी मां को चाकू से गोदकर मौत के घाट उतार दिया. आरोपी बेटा लोक निर्माण विभाग (PWD) में यूडीसी (UDC) के पद पर कार्यरत है और उसे पिता की मौत के बाद अनुकंपा नौकरी मिली थी. झुंझुनूं में पीडब्लूडी में सीनियर क्लर्क बेटे द्वारा मां की हत्या की घटना में एक चौंकाने वाली बात सामने आई है. आरोपी ने मां की हत्या के बाद अपनी बहन को फोन करके कहा कि मैंने मां को मार दिया है. फिलहाल पुलिस ने आरोपी को हिरासत में ले लिया और हत्या की जांच में जुट गई है.
चाकू मारकर बेटे ने की मां की हत्या
जानकारी के मुताबिक, हत्या की यह वारदात झुंझुनूं जिले के नवलगढ़ कस्बे में बुधवार-गुरुवार देर रात में हुई है. कृषि उपज मंडी क्षेत्र के सामने स्थित एक मकान में बेटे ने अपनी ही मां की चाकू से गोदकर हत्या कर दी. वारदात के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई. सूचना मिलते ही नवलगढ़ थाना पुलिस मौके पर पहुंची, आरोपी बेटे को हिरासत में लिया और जांच शुरू कर दी. पुलिस के अनुसार, मृतका की पहचान प्रभाती देवी, पत्नी स्वर्गीय शीशराम के रूप में हुई है.
परिवार मूल रूप से गुढ़ा थाना क्षेत्र के सिंगनोर गांव का रहने वाला है, लेकिन वर्तमान में नवलगढ़ में कृषि उपज मंडी के सामने निवास कर रहा था. आरोपी बेटा राजवीर PWD में यूडीसी के पद पर कार्यरत है. पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि देर रात किसी बात को लेकर मां-बेटे के बीच विवाद हुआ. इसके बाद आरोपी ने चाकू से मां पर ताबड़तोड़ वार कर दिए, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई. वारदात के बाद आरोपी ने अपनी एक बहन को फोन कर कहा कि मैंने मां को मार दिया है.
शराब का आदी है आरोपी
सूचना मिलने पर मृतका के दामाद और अन्य परिजन मौके पर पहुंचे और महिला को अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया. नवलगढ़ थानाधिकारी अजय सिंह ने बताया कि रात करीब 12 बजे घटना की सूचना मिली थी. पुलिस तुरंत अस्पताल और घटनास्थल पहुंची. मृतका के दामाद शिवकुमार की रिपोर्ट पर हत्या का मामला दर्ज कर लिया गया है. शव को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी में रखवाया गया है. पुलिस के अनुसार, आरोपी शराब का आदी बताया जा रहा है.
उसकी पत्नी से भी लंबे समय से मनमुटाव चल रहा था और वह अपने पांच वर्षीय बच्चे के साथ पीहर गई हुई थी. घटना के समय घर में केवल मां और बेटा ही मौजूद थे. घटनास्थल को सुरक्षित कर घर को सील कर दिया गया है. एफएसएल और एमओबी टीम को मौके पर बुलाकर साक्ष्य जुटाए जायेंगे हैं. पुलिस का कहना है कि हत्या के वास्तविक कारणों का खुलासा जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकेगा.
Interpol Operation First Light 2026:
ऑनलाइन ठगी और सोशल इंजीनियरिंग स्कैम के खिलाफ इंटरपोल ने भारत समेत 97 देशों के साथ मिलकर ऑपरेशन फर्स्ट लाइट-2026 चलाया. करीब साढ़े तीन महीने चले अभियान में 5,811 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, 15,606 संदिग्धों की पहचान हुई और 31,014 बैंक खाते ब्लॉक किए गए. कार्रवाई के दौरान 293 मिलियन डॉलर यानी लगभग 2,500 करोड़ रुपये की अवैध रकम अपराधियों तक पहुंचने से पहले रोक दी गई. फर्जी पुलिस अधिकारी, निवेश ठगी, रोमांस स्कैम और क्रिप्टो नेटवर्क इस ऑपरेशन के प्रमुख निशाने रहे.
क्या है मामला?
अगर आपके मोबाइल पर कभी बैंक अधिकारी, पुलिस अफसर, किसी सरकारी एजेंसी या निवेश कंपनी के नाम पर फोन आया हो और आपसे पैसे ट्रांसफर करने या बैंक डिटेल साझा करने के लिए कहा गया हो, तो समझ लीजिए कि यह उसी तरह के अपराध हैं जिनके खिलाफ इंटरपोल ने दुनिया का सबसे बड़ा अभियान चलाया है.
ऑनलाइन ठगी अब केवल किसी एक देश की समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध का रूप ले चुकी है. इसी खतरे से निपटने के लिए इंटरपोल ने भारत समेत 97 देशों की पुलिस और जांच एजेंसियों के साथ मिलकर *ऑपरेशन फर्स्ट लाइट-2026* चलाया, जिसके नतीजे बेहद चौंकाने वाले रहे. करीब साढ़े तीन महीने तक चले इस अभियान में दुनिया भर में फैले साइबर ठगी के नेटवर्क पर एक साथ शिकंजा कसा गया.
फर्जी पुलिस, निवेश और रोमांस स्कैम नेटवर्क का भंडाफोड़, 5,811 गिरफ्तार
इंटरपोल के मुताबिक इस दौरान 5,811 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, 15,606 संदिग्धों की पहचान हुई, 31,014 बैंक खातों को ब्लॉक किया गया, 99 इंटरपोल नोटिस और डिफ्यूजन जारी किए गए और 293 मिलियन अमेरिकी डॉलर, यानी भारतीय मुद्रा में लगभग 2,500 करोड़ रुपये की अवैध रकम को अपराधियों के हाथों में पहुंचने से रोक दिया गया.
इंटरपोल के मुताबिक यह अभियान 15 जनवरी 2026 से 30 अप्रैल 2026 तक चला. लेकिन इसकी तैयारी इससे पहले ही शुरू हो गई थी. सबसे पहले कई देशों की पुलिस और जांच एजेंसियों ने साइबर अपराधियों से जुड़ी खुफिया जानकारी साझा की.
अलग-अलग देशों में सक्रिय गैंग, उनके बैंक खाते, क्रिप्टो वॉलेट, फोन नंबर, फर्जी कंपनियां और डिजिटल नेटवर्क की पहचान की गई. इसके बाद एक तय रणनीति के तहत सभी देशों ने लगभग एक ही समय पर कार्रवाई शुरू की. इस दौरान हजारों जगहों पर छापेमारी की गई, संदिग्ध परिसरों को खंगाला गया, बैंक खातों को फ्रीज किया गया, क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट ब्लॉक किए गए और कई बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया गया.
साइबर अपराधियों पर सबसे बड़ी कार्रवाई
इंटरपोल का यह पूरा अभियान मुख्य रूप से सोशल इंजीनियरिंग स्कैम के खिलाफ था. यह साइबर अपराध का ऐसा तरीका है जिसमें अपराधी किसी तकनीकी कमजोरी का फायदा नहीं उठाते, बल्कि इंसान के भरोसे, डर, लालच या भावनाओं का इस्तेमाल करके उसे ठगते हैं. उदाहरण के तौर पर अपराधी खुद को बैंक मैनेजर, पुलिस अधिकारी, आयकर विभाग का कर्मचारी, कोर्ट का अधिकारी, सरकारी एजेंसी का प्रतिनिधि, निवेश सलाहकार या किसी रिश्तेदार के रूप में पेश करते हैं. कई मामलों में अपराधी वीडियो कॉल पर फर्जी वर्दी पहनकर बात करते हैं ताकि सामने वाले को यकीन हो जाए कि वह किसी सरकारी अधिकारी से बात कर रहा है.
Operation First Light 2026 Interpol: पकड़े गए आरोपी
इसके बाद पीड़ित को यह कहकर डराया जाता है कि उसके खिलाफ कोई केस दर्ज हो गया है, उसका बैंक खाता बंद होने वाला है, उसका आधार कार्ड किसी अपराध में इस्तेमाल हुआ है या फिर उसे किसी निवेश योजना में मोटा मुनाफा मिलेगा. जैसे ही व्यक्ति उनके झांसे में आता है, उससे पैसे ट्रांसफर करवा लिए जाते हैं या उसकी गोपनीय बैंकिंग जानकारी हासिल कर ली जाती है.
ऑपरेशन फर्स्ट लाइट के दौरान इंटरपोल और सदस्य देशों की एजेंसियों ने 1,42,000 से अधिक पीड़ितों की पहचान की. यानी केवल तीन महीने के दौरान ही इतनी बड़ी संख्या में लोग इन साइबर ठगों के निशाने पर आए थे.
जांच के दौरान 1,52,808 मामलों का विश्लेषण किया गया. इनमें से 23,715 मामलों को सुलझा लिया गया, जबकि 15,606 लोगों की पहचान संदिग्ध के रूप में हुई. इससे साफ है कि साइबर फ्रॉड का नेटवर्क बेहद संगठित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैला हुआ है.
नकली पुलिस स्टेशन से लेकर क्रिप्टो ठगी तक, इंटरपोल ने खोले बड़े राज
इस अभियान में इंटरपोल ने अपने विशेष सिस्टम I-GRIP (Global Rapid Intervention of Payments) का भी इस्तेमाल किया. यह ऐसा अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म है जिसके जरिए यदि किसी देश में साइबर ठगी की रकम दूसरे देश में भेजी जा रही हो, तो संबंधित देशों की एजेंसियां तुरंत अलर्ट होकर उस रकम को बैंक या क्रिप्टो वॉलेट तक पहुंचने से पहले ही रोक सकती हैं. यानी अगर किसी भारतीय के साथ ऑनलाइन ठगी होती है और पैसा कुछ मिनटों में किसी दूसरे देश के खाते में ट्रांसफर होने वाला हो, तो I-GRIP की मदद से उस रकम को समय रहते ब्लॉक किया जा सकता है.
इस ऑपरेशन का सबसे हैरान करने वाला खुलासा अफ्रीकी देश इस्वातिनी में हुआ. यहां पुलिस ने 82 लोगों को गिरफ्तार किया और एक ऐसे गैंग का पर्दाफाश किया जिसने ठगी के लिए पूरा का पूरा नकली ब्राजीलियन पुलिस स्टेशन तैयार कर रखा था.
इस फर्जी पुलिस स्टेशन में ब्राजील पुलिस जैसी वर्दियां, नेम प्लेट, सरकारी बोर्ड, ऑफिस का सेटअप और वीडियो कॉल की पूरी व्यवस्था मौजूद थी. जब किसी विदेशी नागरिक को फोन किया जाता था तो वीडियो कॉल पर सामने पुलिस की वर्दी पहने लोग दिखाई देते थे. पीड़ित को बताया जाता था कि उसका नाम किसी अपराध में सामने आया है और जांच पूरी होने तक उसे अपने पैसे सरकारी सुरक्षा खाते में जमा कराने होंगे. जैसे ही व्यक्ति पैसे ट्रांसफर करता, पूरी रकम अपराधियों के पास पहुंच जाती थी.
छापेमारी में 240 इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, विदेशी मुद्रा और बड़ी मात्रा में डिजिटल सबूत बरामद किए गए. डिजिटल साक्ष्यों की भारी मात्रा को देखते हुए इंटरपोल ने अपनी विशेष फॉरेंसिक टीम भी इस्वातिनी भेजी. थाईलैंड में जांच एजेंसियों ने दो लोगों को गिरफ्तार किया. इनमें एक आरोपी की उम्र केवल 20 साल थी.
जांच में सामने आया कि यह गिरोह रोमांस स्कैम के जरिए लोगों से ठगी करता था. बाद में इस पैसे को अलग-अलग क्रिप्टोकरेंसी में बदलकर कई ब्लॉकचेन नेटवर्क के जरिए घुमाया जाता था ताकि जांच एजेंसियां असली स्रोत तक न पहुंच सकें. सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस 20 साल के आरोपी के डिजिटल वॉलेट से केवल 10 महीनों में 122.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर का लेनदेन हुआ था.
सिंगापुर और ओमान में बड़ी वारदात टली
ऑपरेशन के दौरान इंटरपोल के I-GRIP सिस्टम की सबसे बड़ी सफलता सिंगापुर और ओमान में देखने को मिली. यहां अपराधियों ने एक कमोडिटी ट्रेडिंग कंपनी को निशाना बनाया. उन्होंने कंपनी के सप्लायर की फर्जी ई-मेल आईडी बनाकर भुगतान अपने खाते में ट्रांसफर कराने की कोशिश की. लेकिन समय रहते दोनों देशों की एजेंसियां सक्रिय हो गईं और 6.6 मिलियन डॉलर की रकम ट्रांसफर होने से पहले ही रोक दी गई. चीन के विशेष प्रशासनिक क्षेत्र मकाऊ में पुलिस साइबर फ्रॉड के खिलाफ जागरूकता अभियान चला रही थी. इसी दौरान एक व्यक्ति वहां पहुंचा जो पहले से ही ऑनलाइन ठगों के झांसे में था.
अपराधी खुद को सरकारी अधिकारी बताकर उससे लगभग 3 लाख 72 हजार डॉलर ट्रांसफर कराने वाले थे. लेकिन पुलिस ने समय रहते उसे समझाया और ठगी होने से बचा लिया.
प्रशांत महासागर के द्वीपीय देश पलाऊ में पुलिस ने दो होटलों में चल रहे साइबर स्कैम सेंटर का पर्दाफाश किया. यहां से 22 विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार कर बाद में देश से डिपोर्ट किया गया. ये लोग क्रिप्टोकरेंसी, अवैध जुआ वेबसाइटों और ऑनलाइन निवेश योजनाओं के जरिए दूसरे देशों के नागरिकों को निशाना बना रहे थे.
भारत समेत 97 देशों की संयुक्त कार्रवाई, साइबर ठगी नेटवर्क को तगड़ा झटका
ऑपरेशन फर्स्ट लाइट-2026 में भारत सहित 97 देशों और क्षेत्रों ने हिस्सा लिया. इसके अलावा यूरोपोल, ASEANAPOL और GCCPOL जैसी अंतरराष्ट्रीय पुलिस संस्थाओं ने भी इस अभियान में सहयोग किया. भारत पिछले कुछ सालों से डिजिटल अरेस्ट, निवेश ठगी, रोमांस स्कैम, फर्जी कॉल सेंटर, क्रिप्टोकरेंसी के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग और साइबर फ्रॉड के मामलों पर लगातार कार्रवाई कर रहा है. ऐसे में इंटरपोल के इस वैश्विक अभियान में भारत की भागीदारी को भी काफी अहम माना जा रहा है.
कोई भी देश अकेले इस समस्या से नहीं निपट सकता : टॉमोनोबू काया
इंटरपोल के फाइनेंशियल क्राइम एंड एंटी-करप्शन सेंटर के निदेशक टॉमोनोबू काया ने कहा कि साइबर ठग अब तकनीक से ज्यादा इंसानी सोच और भावनाओं का फायदा उठा रहे हैं. कोई भी देश अकेले इस समस्या से नहीं निपट सकता. इसलिए जरूरी है कि दुनिया भर की पुलिस एजेंसियां एक-दूसरे के साथ लगातार सूचना साझा करें और संयुक्त कार्रवाई करें. उन्होंने कहा कि इंटरपोल भविष्य में भी सदस्य देशों को तकनीकी सहायता, खुफिया जानकारी और समन्वित अभियान के जरिए ऐसे अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क को खत्म करने में मदद करता रहेगा.
Sikar News:
सीकर जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहाँ कुछ लोगों ने एक मानसिक रूप से कमजोर युवक की मजबूरी का फायदा उठाकर उसकी बेशकीमती जमीन और बैंक खाते पर कब्जा कर लिया. आरोपियों ने युवक के सरकारी दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ की और उसके खाते से लाखों रुपये उड़ा लिए. इस घटना ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है.
कोतवाली पुलिस थाना क्षेत्र में दर्ज रिपोर्ट के अनुसार, दुर्गापुरा निवासी रणवीर सिंह ने शिकायत दर्ज कराई है कि उनका भाई मदन सिंह मानसिक रूप से कमजोर है. उसका पिछले कई वर्षों से उपचार चल रहा है. मदन सिंह के नाम पर गांव में तीन बीघा से अधिक भूमि है. रणवीर सिंह का आरोप है कि गांव के ही रहने वाले गजसिंह, भंवरलाल और सुरेश कुमार ने मदन की मानसिक स्थिति का गलत लाभ उठाया.
आधार कार्ड और बैंक खाते में की धोखाधड़ी
आरोप है कि आरोपी गजसिंह ने मदन के आधार कार्ड में अपने खुद के मोबाइल नंबर जुड़वा दिए, ताकि युवक को किसी भी प्रकार की सूचना न मिल सके. इसके बाद, आरोपियों ने बैंक स्टाफ की मिलीभगत से मदन का कोटक महिंद्रा बैंक में एक नया खाता खुलवाया. इस खाते में भी गजसिंह ने अपने ही मोबाइल नंबर अपडेट करवा दिए, जिससे खाते की सारी जानकारी सीधे उसके पास आने लगी.
डीएलसी की राशि पर डाला हाथ
धोखाधड़ी का सिलसिला तब और बढ़ गया जब 3 अप्रैल को मदन के खाते में डीएलसी का 3.50 लाख रुपये का चेक जमा हुआ. जैसे ही यह राशि खाते में आई, आरोपी गजसिंह ने तुरंत चार अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए पूरी रकम अपने निजी खाते में ट्रांसफर कर लेनी. इससे पहले, आरोपियों ने 18 मार्च को मदन की मानसिक कमजोरी का फायदा उठाकर उसकी जमीन की रजिस्ट्री भी अपने नाम करवा ली थी. फिलहाल, पुलिस ने पीड़ित की रिपोर्ट पर मामला दर्ज कर लिया है और मामले की गहनता से जांच की जा रही है.
इंदौर में दूसरी शादी की उम्मीद लेकर पहुंचे एक किसान के साथ लाखों रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है. शादी कराने का झांसा देने वाले एक गिरोह ने किसान से पहले छह लाख रुपये वसूल लिए. इसके बाद अनुबंध के जरिए शादी कराई गई, लेकिन शादी के अगले ही दिन दुल्हन घर से फरार हो गई. पीड़ित की शिकायत और जांच के बाद पुलिस ने दुल्हन, उसकी मां, महिला दलाल समेत पांच लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
मामला देवास जिले के बागली क्षेत्र के पिपलिया साहब गांव का है जहां एक 28 साल के हरिनारायण हजारीलाल परारिया ने एमजी रोड थाना में शिकायत दर्ज कराई है. जिसके अनुसार किसान हरिनारायण की पहली शादी साल 2007 में तारा बाई महिला से हुई थी लेकिन शादी नहीं चल सकी और दोनों की बीच तलाक हो गया. जिसके बाद किसान दोबारा विवाह करना चाहता था इसी को लेकर उसके भाई ने हसीना बाई से संपर्क किया और उसके लिए दुल्हन तलाशने की बात कही…
शादी के बाद गायब हुई दुल्हन
आरोपियों ने भरोसा दिलाया कि वे उसकी शादी करा देंगे. इसके बदले उन्होंने किसान से कहा कि नंदनी की मां सुमन बाई लंबे समय से बीमार है और इलाज के लिए छह लाख रुपये की जरूरत है. शादी की जल्दबाजी और नई जिंदगी की उम्मीद में किसान आरोपियों की बातों में आ गया और तय रकम उन्हें दे दी.
एनबीटी की रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित किसान ने आरोप लगाया है कि शादी के अगले ही दिन नंदनी बिना किसी को बताए घर से गायब हो गई. काफी तलाश के बाद भी उसका कोई सुराग नहीं मिला. बाद में जानकारी जुटाने पर पता चला कि नंदनी और उसके साथी शादी के नाम पर लोगों को ठगने वाले गिरोह से जुड़े हैं.
शादी की खुशी ज्यादा देर तक नहीं टिक
30 जून को हरिनारायण अपने गांव के सरपंच जितेंद्र सिंह दरबार, मोहन जाट, ज्योति बाई जाट और अन्य लोगों के साथ इंदौर जिला कोर्ट पहुंचा. यहां एक लिखित एग्रीमेंट तैयार किया गया, एग्रीमेंट के बाद हरिनारायण ने आरोपियों को 6 लाख रुपये सौंप दिए. इसके बाद सभी लोग तुकोगंज क्षेत्र स्थित राम मंदिर पहुंचे, जहां धार्मिक रीति-रिवाज के साथ शादी की रस्में पूरी कराई गईं. शादी के बाद हरिनारायण ढोल-ताशों के साथ अपनी नई दुल्हन को गांव लेकर पहुंचा. परिवार में खुशियों का माहौल था, लेकिन यह खुशी ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी.
हरियाणा के हिसार से अजीबोगरीब प्रेम प्रसंग का एक ऐसा मामला प्रकाश में आया है, जिसने एक हंसते-खेलते परिवार को सड़क पर लाकर खड़ा कर दिया है. हिसार के गंगवा गांव में रहने वाला 42 वर्षीय विजय अपने 5 बच्चों और पत्नी को बेसहारा छोड़कर अपनी 50 साल की प्रेमिका के साथ रफूचक्कर हो गया है. पीड़ित पत्नी अब अपने बच्चों का पेट पालने के लिए ई-रिक्शा चलाने को मजबूर है. यह घटना 20 जून की है, लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी जब पति का कोई सुराग नहीं लगा, तो लाचार पत्नी ने पुलिस और मीडिया के सामने अपनी आपबीती बयां की है.
पीड़ित पत्नी माया देवी ने बताया कि उसकी शादी करीब 20 साल पहले विजय के साथ हुई थी. विजय पेशे से ड्राइवर है. पिछले कुछ समय से विजय का व्यवहार काफी बदल गया था. 20 जून को माया देवी को भनक लगी कि उसके पति का किसी दूसरी महिला के साथ चक्कर चल रहा है. जब वह अपने पति की गर्लफ्रेंड के घर ऋषिनगर पहुंची, तो वहां के पड़ोसियों ने बताया कि विजय पिछले कई महीनों से यहां आ रहा है और उस महिला ने आस-पास के लोगों को विजय को अपना पति बता रखा था.
बेटे को दी थी जानकारी
चौंकाने वाली बात यह है कि विजय ने यह बात अपने परिवार से भी नहीं छिपाई थी. वह अक्सर अपने बड़े बेटे और अपने भाई (माया के देवर) को कहता था कि “यह तेरी दूसरी मां है, यह मेरी सेटिंग है.” देवर को पिछले ढाई साल से इस बात की जानकारी थी, लेकिन विजय ने उसे जुबान खोलने पर जान से मारने की धमकी दे रखी थी.
रात 11 बजे घर से भागा पति; प्रेमिका के पहले से हैं दो पति
माया देवी ने जब 20 जून की रात को घर लौटे पति से उस महिला के बारे में पूछताछ की, तो दोनों के बीच विवाद हो गया. इसके बाद विजय रात करीब 11 बजे अपने घर से निकला और अपनी प्रेमिका कमलेश को साथ लेकर फरार हो गया. विजय अपना मोबाइल फोन घर पर ही छोड़ गया है, जबकि उसकी प्रेमिका का फोन लगातार बंद आ रहा है.
माया ने बताया कि जिस महिला कमलेश के साथ उसका पति भागा है, वह पहले ही दो शादियां कर चुकी है. उसका पहला पति मंदबुद्धि है और विजय उसकी जिंदगी में आने वाला तीसरा मर्द है. कमलेश की एक 18 साल की बेटी भी है, जिसे उसने भागने से ठीक पहले हरिद्वार भेज दिया था.
किराए का मकान, 5 बच्चे और ई-रिक्शा चलाने की मजबूरी
इस धोखे के बाद माया देवी के सामने आजीविका का बड़ा संकट खड़ा हो गया है. माया के 5 बच्चे हैं, जिनमें 3 बेटियां और 2 बेटे हैं. वह वर्तमान में ढाई हजार रुपये महीने के किराए के मकान में रहती है. पति के भाग जाने के बाद बच्चों के पालन-पोषण और घर के खर्च के लिए माया दिनभर हिसार की सड़कों पर ई-रिक्शा चलाती है. माया ने रुआंसे मन से कहा कि उसकी मां हमेशा कहती थी कि उसका पति ठीक इंसान नहीं है, उसे छोड़ दे, लेकिन उसने कभी मां की बात नहीं मानी. हालांकि, आज भी वह अपने बच्चों के भविष्य के लिए अपने पति की हर खता माफ कर उसे अपनाने को तैयार है, बशर्ते वह घर लौट आए.
पुलिस पर लगाया लापरवाही का आरोप
माया देवी का आरोप है कि पति के लापता होने के बाद जब वह न्याय की गुहार लेकर आजाद नगर थाने पहुंची, तो पुलिस ने बेहद संवेदनहीन रवैया अपनाया. माया के अनुसार, पुलिसकर्मियों ने उसकी शिकायत पर गंभीरता दिखाने के बजाय कह दिया कि “तेरा पति भाग गया तो भाग गया, हम इसमें क्या कर सकते हैं.” पुलिस के इस असहयोगात्मक रवैये के कारण परेशान महिला अब दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर है.
आज बदरीनाथ धाम को भगवान विष्णु के सबसे पवित्र चार धामों में गिना जाता है, लेकिन पौराणिक मान्यताओं के अनुसार एक समय ऐसा भी था जब यह स्थान भगवान शिव और माता पार्वती का निवास हुआ करता था. हिमालय की शांत वादियों के बीच स्थित यह स्थान शिव-पार्वती के तप, ध्यान और एकांत का प्रिय धाम माना जाता था. दोनों यहां लंबे समय तक निवास करते थे और कैलाश जाने से पहले भी इस स्थान पर समय बिताते थे.
माता लक्ष्मी की सलाह पर भगवान विष्णु ने रची लीला
कथा के अनुसार, भगवान विष्णु भी हिमालय की इसी पवित्र भूमि पर कठोर तपस्या करना चाहते थे. लेकिन जिस स्थान को उन्होंने चुना, वहां पहले से भगवान शिव और माता पार्वती का निवास था. ऐसे में माता लक्ष्मी ने भगवान विष्णु से कहा कि यदि उन्हें इसी स्थान पर तप करना है, तो उन्हें कोई ऐसी लीला करनी होगी जिससे शिव-पार्वती स्वयं यह स्थान छोड़ दें. इसके बाद भगवान विष्णु ने एक छोटे बालक का रूप धारण किया और बदरीनाथ में बैठकर जोर-जोर से रोने लगे.
जब भगवान शिव और माता पार्वती ने उस मासूम बालक के रोने की आवाज सुनी, तो दोनों उसके पास पहुंचे. माता पार्वती का हृदय उस रोते हुए बच्चे को देखकर द्रवित हो गया. उन्होंने उसे गोद में उठाया और प्यार से पूछा कि वह कौन है और यहां अकेला क्यों बैठा है. बालक बने भगवान विष्णु ने कोई उत्तर नहीं दिया, बल्कि लगातार रोते रहे. माता पार्वती ने सोचा कि इतने छोटे बच्चे को इस बर्फीले क्षेत्र में अकेला छोड़ना उचित नहीं है. उन्होंने भगवान शिव से कहा कि कुछ समय के लिए इस बालक को अपने आश्रय में रख लेना चाहिए. हालांकि भोलेनाथ विष्णु भगवान के इस लीला को समझ चुके थे. उन्होंने माता पार्वती को संकेत भी दिया था, लेकिन बालक को रोता देख मां कुछ समझ नहीं पाई और ममतामय हो गईं.
शिव-पार्वती के बाहर जाते ही बदल गया सब कुछ
कुछ समय बाद भगवान शिव और माता पार्वती स्नान के लिए पास के गर्म जलकुंड की ओर चले गए. जब वे लौटकर अपने निवास स्थान पर पहुंचे, तो देखा कि द्वार भीतर से बंद है. भगवान शिव ने दरवाजा खोलने के लिए आवाज लगाई, लेकिन तभी भीतर से भगवान विष्णु अपने वास्तविक स्वरूप में प्रकट हुए. उन्होंने विनम्रता से कहा कि अब उन्होंने इस स्थान को अपनी तपस्या के लिए चुन लिया है और यही उनका निवास रहेगा. भगवान शिव तो सब जानते ही थे कि यह सब भगवान विष्णु की दिव्य लीला थी. उन्होंने किसी प्रकार का विरोध नहीं किया और मुस्कुराते हुए इस स्थान को भगवान विष्णु को समर्पित कर दिया.
फिर कहां गए भगवान शिव और मां पार्वती?
बदरीनाथ धाम छोड़ने के बाद भगवान शिव और माता पार्वती उत्तर दिशा की ओर बढ़े और अंततः कैलाश पर्वत को अपना स्थायी निवास बनाया. इसके बाद कैलाश भगवान शिव का प्रमुख धाम माना जाने लगा, जबकि बदरीनाथ भगवान विष्णु की तपोभूमि और प्रमुख वैष्णव तीर्थ बन गया. मान्यता है कि भगवान विष्णु ने इसी स्थान पर हजारों वर्षों तक तपस्या की. तप के दौरान माता लक्ष्मी ने बदरी (जंगली बेर) के वृक्ष का रूप धारण कर उन्हें धूप, बर्फ और वर्षा से बचाया. इसी कारण इस स्थान का नाम बदरीनाथ पड़ा, अर्थात बदरी वन के स्वामी.
अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई के बीच राजस्थान में एक बार फिर गैंगस्टर रोहित गोदारा का नाम सामने आया है. जिस रोहित गोदारा के खिलाफ अमेरिकी न्याय विभाग ने चार्जशीट दाखिल की है, उसी गैंग के नाम पर बीकानेर जिले के एक कारोबारी से 5 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने का मामला सामने आया है. कारोबारी का आरोप है कि रकम नहीं देने पर पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी भी दी गई. शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है.
मामला बीकानेर जिले के श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र के दुलचासर गांव का है. जानकारी के अनुसार यहां के एक व्यवसायी को 5 और 7 जुलाई को फोन किए गए. आरोप है कि कॉल करने वाले ने खुद को रोहित गोदारा गैंग से जुड़ा बताते हुए 5 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी. कारोबारी को यह भी धमकी दी गई कि अगर रकम नहीं दी गई तो पूरे परिवार को जान से मार दिया जाएगा. घटना के बाद कारोबारी के भाई ने बीकानेर पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर पूरे परिवार की सुरक्षा की मांग की है. मामले को लेकर पुलिस को शिकायत दी गई है और सुरक्षा को लेकर भी गुहार लगाई गई है.
पुलिस ने शुरू की जांच
बीकानेर पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है. पुलिस कॉल डिटेल और दूसरे तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कॉल कहां से किए गए और इसके पीछे कौन लोग हैं. फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी है. इस घटना के बाद इलाके के व्यापारियों में भी चिंता बढ़ गई है.
अमेरिका में भी रोहित गोदारा पर बड़ी कार्रवाई
रोहित गोदारा का नाम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिकी न्याय विभाग ने हाल ही में ‘ऑपरेशन हार्ड बॉल’ के तहत भारतीय मूल के अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध नेटवर्क पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है. इस कार्रवाई में लॉरेंस बिश्नोई, गोल्डी बराड़, रोहित गोदारा और जग्गू भगवानपुरिया समेत 37 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है. संयुक्त अभियान के दौरान अमेरिका, कनाडा और यूरोप में 24 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 10 आरोपी अभी भी फरार बताए गए हैं. जांच एजेंसियों का आरोप है कि यह नेटवर्क हत्या, रंगदारी, ड्रग्स तस्करी, हथियारों की सप्लाई, मानव तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे अंतरराष्ट्रीय अपराधों में शामिल रहा है.
एक तरफ अंतरराष्ट्रीय जांच, दूसरी तरफ राजस्थान में रंगदारी का आरोप
अमेरिका में चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब राजस्थान में रोहित गोदारा गैंग के नाम पर रंगदारी मांगने का मामला सामने आने से यह नाम फिर चर्चा में है. फिलहाल बीकानेर पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है. यह भी जांच का विषय है कि कॉल करने वाला वास्तव में गैंग से जुड़ा था या गैंग का नाम लेकर कारोबारी को धमकाने की कोशिश की गई. पुलिस तकनीकी साक्ष्यों और शिकायत के आधार पर आगे की कार्रवाई में जुटी है.