Blog

  • झारखंड में साड़ी पहनकर: नंगे पांव 1600 मीटर दौड़ी कविता महतो, होमगार्ड बनने के जज्बे ने जीता लोगों का दिल.

    झारखंड में साड़ी पहनकर: नंगे पांव 1600 मीटर दौड़ी कविता महतो, होमगार्ड बनने के जज्बे ने जीता लोगों का दिल.

    झारखंड में साड़ी पहनकर: नंगे पांव 1600 मीटर दौड़ी कविता महतो, होमगार्ड बनने के जज्बे ने जीता लोगों का दिल.

    झारखंड: होमगार्ड भर्ती के दौरान एक महिला अभ्यर्थी ने साड़ी पहनकर और नंगे पांव 1600 मीटर की दौड़ पूरी की। कविता महतो नाम की इस महिला की मेहनत और हौसले की चर्चा अब झारखंड के साथ-साथ बिहार में भी हो रही है। सीमित संसाधनों के बावजूद भर्ती प्रक्रिया में शामिल होकर दौड़ पूरी करने की उनकी कोशिश ने लोगों का ध्यान खींचा है।

    कविता महतो को लेकर सामने आई जानकारी के मुताबिक, वह विधवा हैं और ईंट-भट्ठे पर मजदूरी करके अपने परिवार का पालन-पोषण करती हैं। आर्थिक परेशानियों के बीच उन्होंने सरकारी नौकरी हासिल करने का सपना देखा और होमगार्ड भर्ती के लिए मैदान में उतरीं।

    साड़ी संभालते हुए पूरी की 1600 मीटर दौड़

    भर्ती के दौरान कविता ने दौड़ के लिए अलग से स्पोर्ट्स ड्रेस या जूते नहीं पहने। वह साड़ी पहनकर ही मैदान में पहुंचीं और नंगे पांव 1600 मीटर की दौड़ पूरी की।

    दौड़ के दौरान उन्हें साड़ी भी संभालनी पड़ रही थी, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी और निर्धारित दूरी पूरी की। उनकी इसी कोशिश ने लोगों को प्रभावित किया और उनकी कहानी सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गई।

    पति की मौत के बाद खुद संभाला परिवार

    बताया जाता है कि कविता के पति का निधन हो चुका है। इसके बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने के लिए वह ईंट-भट्ठे पर मजदूरी करती हैं।

    मुश्किल आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद सरकारी नौकरी का सपना देखना और उसके लिए भर्ती प्रक्रिया में हिस्सा लेना उनके संघर्ष को दिखाता है। 1600 मीटर की दौड़ पूरी करना उनके लिए सिर्फ भर्ती का एक चरण नहीं, बल्कि बेहतर भविष्य की उम्मीद से जुड़ी कोशिश भी थी।

    दीपा मांझी ने भी की तारीफ

    कविता महतो की कहानी सामने आने के बाद गया जिले के इमामगंज की विधायक दीपा मांझी ने भी उनकी हिम्मत की तारीफ की। उन्होंने कविता को बधाई देते हुए कहा कि महिलाओं में मुश्किल परिस्थितियों का सामना करने की क्षमता होती है।

    दीपा मांझी ने कविता के संघर्ष को महिलाओं के साहस से जोड़ते हुए कहा कि ऐसी महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

    सम्मान और प्रोत्साहन की मांग

    दीपा मांझी ने झारखंड सरकार से कविता जैसी महिलाओं को प्रोत्साहित और सम्मानित करने की अपील की। उनका कहना है कि कविता ने जिस परिस्थिति में साड़ी पहनकर और नंगे पांव दौड़ पूरी की, वह उनके मजबूत इरादे को दर्शाता है।

    कविता की कहानी यह भी बताती है कि सीमित साधन किसी व्यक्ति के सपने को रोक नहीं सकते। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि होमगार्ड भर्ती की आगे की प्रक्रिया में कविता का चयन होता है या नहीं।

  • डांग: काम-धंधे को लेकर दो भाइयों में हुआ विवाद, छोटे भाई ने धारदार हथियार से बड़े भाई की हत्या की.

    डांग: काम-धंधे को लेकर दो भाइयों में हुआ विवाद, छोटे भाई ने धारदार हथियार से बड़े भाई की हत्या की.

    डांग: काम-धंधे को लेकर दो भाइयों में हुआ विवाद, छोटे भाई ने धारदार हथियार से बड़े भाई की हत्या की.

    डांग, गुजरात: जिले के आहवा तालुका में काम-धंधे को लेकर दो सगे भाइयों के बीच शुरू हुआ विवाद खूनी वारदात में बदल गया। पुलिस के मुताबिक, बहस बढ़ने के बाद छोटे भाई ने कथित तौर पर धारदार हथियार से अपने बड़े भाई पर हमला कर दिया। गंभीर चोट लगने से बड़े भाई की मौत हो गई। पुलिस ने आरोपी छोटे भाई को गिरफ्तार कर लिया है।

    खाना खाने के दौरान शुरू हुई थी बातचीत

    घटना आहवा तालुका के भवानदगढ़ इलाके की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, 26 वर्षीय रंजीत पवार मजदूरी करता था, जबकि उसका 28 वर्षीय बड़ा भाई गजेंद्र पवार बेरोजगार था।

    मंगलवार शाम रंजीत काम खत्म करके घर लौटा। इसके बाद परिवार के साथ दोनों भाई खाना खाने बैठे। इसी दौरान दोनों के बीच रोजगार और काम-धंधे को लेकर बातचीत शुरू हुई।

    बताया जा रहा है कि रंजीत ने अपने बड़े भाई को भी कोई काम शुरू करने की सलाह दी। शुरुआत में बातचीत सामान्य थी, लेकिन कुछ देर बाद दोनों के बीच बहस होने लगी।

    बहस बढ़ी तो मारपीट तक पहुंचा मामला

    पुलिस के अनुसार, दोनों भाइयों के बीच विवाद बढ़ने के बाद मारपीट शुरू हो गई। इसी दौरान रंजीत ने पास में मौजूद धारदार हथियार से गजेंद्र पर हमला कर दिया।

    हमले में गजेंद्र गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस के मुताबिक, उनकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया।

    हथियार के साथ आरोपी गिरफ्तार

    घटना की सूचना मिलने के बाद आहवा पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। पुलिस ने आरोपी रंजीत पवार को कथित तौर पर वारदात में इस्तेमाल हथियार के साथ गिरफ्तार कर लिया।

    पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।

    पहले से विवाद था या अचानक बिगड़ी बात?

    पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि दोनों भाइयों के बीच पहले से किसी बात को लेकर विवाद चल रहा था या घटना वाले दिन ही मामूली बातचीत के बाद मामला इतना बढ़ गया।

    जांच टीम आसपास के लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ कर रही है। पुलिस वारदात में इस्तेमाल हथियार और घटनास्थल से मिले अन्य साक्ष्यों की भी जांच कर रही है। शुरुआती जांच में काम-धंधे को लेकर हुई बातचीत के बाद विवाद बढ़ने की बात सामने आई है, जबकि हत्या की पूरी वजह जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी।

  • हाथों में दिखने वाले ये बदलाव: हो सकते हैं हाई ब्लड शुगर के संकेत, जानें किन लक्षणों पर देनी चाहिए ध्यान.

    हाथों में दिखने वाले ये बदलाव: हो सकते हैं हाई ब्लड शुगर के संकेत, जानें किन लक्षणों पर देनी चाहिए ध्यान.

    हाथों में दिखने वाले ये बदलाव: हो सकते हैं हाई ब्लड शुगर के संकेत, जानें किन लक्षणों पर देनी चाहिए ध्यान.

    डायबिटीज या लंबे समय तक बढ़ा हुआ ब्लड शुगर शरीर के अलग-अलग हिस्सों को प्रभावित कर सकता है। कुछ लोगों में इसके संकेत त्वचा, हाथों और उंगलियों पर भी दिखाई दे सकते हैं। हालांकि, हाथों में किसी एक बदलाव का नजर आना डायबिटीज की पुष्टि नहीं करता। इसके लिए ब्लड शुगर की जांच जरूरी होती है।

    एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कुछ त्वचा संबंधी बदलाव इंसुलिन रेजिस्टेंस या लंबे समय से बढ़े हुए ब्लड शुगर के साथ देखे जा सकते हैं। ऐसे संकेत लगातार नजर आएं तो उन्हें नजरअंदाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

    1. उंगलियों के जोड़ों का काला पड़ना

    अगर उंगलियों के जोड़ों की त्वचा सामान्य से ज्यादा गहरी, मोटी या मखमली दिखाई देने लगे तो यह इंसुलिन रेजिस्टेंस से जुड़ा हो सकता है। इस स्थिति को एकैंथोसिस नाइग्रिकन्स कहा जाता है।

    यह केवल हाथों पर ही नहीं, बल्कि गर्दन, बगल और शरीर की दूसरी जगहों पर भी दिखाई दे सकती है। हालांकि, भारतीय त्वचा में नकल्स का थोड़ा गहरा होना सामान्य भी हो सकता है। चिंता तब ज्यादा होती है जब रंग के साथ त्वचा मोटी या मखमली भी महसूस हो।

    2. हाथ या शरीर पर स्किन टैग्स

    स्किन टैग्स त्वचा पर दिखाई देने वाली छोटी और नरम लटकन जैसी संरचनाएं होती हैं। ये अक्सर गर्दन, बगल, पलकों और त्वचा की सिलवटों में दिखाई देती हैं।

    कुछ अध्ययनों में स्किन टैग्स और इंसुलिन रेजिस्टेंस के बीच संबंध देखा गया है। हालांकि, स्किन टैग्स सिर्फ डायबिटीज के कारण नहीं होते। इसलिए इन्हें देखकर खुद से डायबिटीज की पुष्टि नहीं करनी चाहिए।

    3. उंगलियों का अटकना या लॉक होना

    अगर उंगली मोड़ने के बाद अटकती है और सीधी करते समय झटके से खुलती है, तो इसे ट्रिगर फिंगर कहा जा सकता है। डायबिटीज वाले लोगों में इस समस्या का जोखिम कुछ अधिक हो सकता है।

    इसमें उंगली में दर्द, जकड़न या उसे मोड़ने-सीधा करने में परेशानी हो सकती है। हालांकि, ट्रिगर फिंगर के कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं।

    4. हाथ-पैरों में झुनझुनी या सुन्नपन

    लंबे समय तक ब्लड शुगर बढ़ा रहने पर नसों को नुकसान पहुंच सकता है, जिसे डायबिटिक न्यूरोपैथी कहा जाता है।

    इसमें हाथ-पैरों में झुनझुनी, जलन, सुन्नपन या चुभन जैसा महसूस हो सकता है। इसके लक्षण अक्सर पैरों से शुरू होते हैं और बाद में हाथों तक भी पहुंच सकते हैं।

    5. बिना चोट के फफोले

    डायबिटीज से जुड़ी एक दुर्लभ त्वचा समस्या बुलोसिस डायबिटिकरम है। इसमें बिना किसी स्पष्ट चोट या जलने के हाथों या पैरों पर फफोले दिखाई दे सकते हैं। ये फफोले कई बार दर्द रहित भी होते हैं।

    ऐसा फफोला दिखाई देने पर उसे खुद से फोड़ने से बचें और डॉक्टर से सलाह लें। डायबिटीज में त्वचा की चोट और संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है।

    6. हाथों पर छोटे पीले दाने

    हाथों, कोहनी या शरीर के दूसरे हिस्सों पर अचानक छोटे-छोटे पीले या मोती जैसे दाने गुच्छों में दिखाई दें तो यह इरेक्टिव जैंथोमास हो सकता है।

    इनका संबंध खून में बहुत ज्यादा ट्राइग्लिसराइड्स से हो सकता है। ऐसे बदलाव दिखाई देने पर डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है, क्योंकि बहुत ज्यादा ट्राइग्लिसराइड्स स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं।

    हाथों के इन बदलावों पर कौन सी जांच कराएं?

    अगर हाथों की त्वचा में असामान्य बदलाव के साथ ज्यादा प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, थकान, नजर धुंधली होना या वजन में बिना वजह बदलाव जैसे लक्षण भी दिखाई दे रहे हैं, तो डॉक्टर से ब्लड शुगर की जांच के बारे में बात करें।

    डायबिटीज और प्रीडायबिटीज की जांच के लिए आमतौर पर फास्टिंग ब्लड ग्लूकोज और HbA1c जैसे टेस्ट इस्तेमाल किए जाते हैं। डॉक्टर आपकी स्थिति के अनुसार दूसरे टेस्ट भी बता सकते हैं।

    सिर्फ हाथ देखकर डायबिटीज की पुष्टि नहीं होती

    हाथों पर काले निशान, स्किन टैग्स, उंगलियों का अटकना या झुनझुनी कई अन्य कारणों से भी हो सकती है। इसलिए किसी एक लक्षण को देखकर यह मान लेना सही नहीं है कि व्यक्ति को डायबिटीज है।

    अगर ऐसे बदलाव लगातार बने हुए हैं या उनके साथ दूसरे लक्षण भी दिखाई दे रहे हैं, तो समय पर डॉक्टर से जांच कराना बेहतर है।

    डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। हाथों या त्वचा में दिखने वाले किसी भी बदलाव को डायबिटीज की पक्की पहचान न मानें। सही स्थिति जानने के लिए ब्लड शुगर की जांच और डॉक्टर की सलाह जरूरी है।

  • क्या है ‘जिंदा ईंट’? मंगल ग्रह पर इसी तकनीक से बन सकते हैं इंसानों के घर, जानिए कैसे काम करेगी तकनीक.

    क्या है ‘जिंदा ईंट’? मंगल ग्रह पर इसी तकनीक से बन सकते हैं इंसानों के घर, जानिए कैसे काम करेगी तकनीक.

    क्या है ‘जिंदा ईंट’? मंगल ग्रह पर इसी तकनीक से बन सकते हैं इंसानों के घर, जानिए कैसे काम करेगी तकनीक.

    मंगल ग्रह: मंगल ग्रह पर इंसानी बस्ती बसाने की दिशा में वैज्ञानिक लगातार नई तकनीकों पर काम कर रहे हैं। सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक वहां रहने के लिए सुरक्षित और मजबूत ढांचे तैयार करना है। पृथ्वी से बड़ी मात्रा में सीमेंट, ईंट और निर्माण मशीनरी मंगल तक पहुंचाना बेहद मुश्किल और महंगा होगा। ऐसे में वैज्ञानिक ऐसी निर्माण सामग्री विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे स्थानीय संसाधनों की मदद से तैयार किया जा सके।

    इसी दिशा में हांगकांग के शोधकर्ताओं ने एक तरह की ‘लिविंग बिल्डिंग मटेरियल’ पर काम किया है, जिसे आम भाषा में ‘जिंदा ईंट’ कहा जा रहा है। इस तकनीक में जैविक सामग्री और स्थानीय संसाधनों को मिलाकर ऐसा मिश्रण तैयार करने की कोशिश की जाती है, जिसे भविष्य में 3D प्रिंटिंग के जरिए निर्माण में इस्तेमाल किया जा सके।

    मंगल पर घर बनाना इतनी बड़ी चुनौती क्यों है?

    मंगल की परिस्थितियां पृथ्वी से काफी अलग हैं। वहां वायुमंडलीय दबाव बहुत कम है और तापमान भी बेहद ठंडा हो सकता है। इसके अलावा मंगल की सतह पर मौजूद धूल और रेगोलिथ को सीधे पारंपरिक निर्माण सामग्री की तरह इस्तेमाल करना आसान नहीं है।

    पारंपरिक ईंटें बनाने के लिए गर्म करने और बड़ी मात्रा में ऊर्जा की जरूरत पड़ सकती है। मंगल पर भट्ठियां, भारी मशीनरी और निर्माण सामग्री पहुंचाना किसी भी अंतरिक्ष मिशन का वजन और लागत काफी बढ़ा सकता है।

    इसी वजह से वैज्ञानिक ऐसी तकनीक विकसित करने पर जोर दे रहे हैं जिसमें मंगल पर उपलब्ध सामग्री का अधिकतम इस्तेमाल हो और पृथ्वी से केवल जरूरी जैविक घटक ही ले जाने पड़ें।

    क्या होती है ‘जिंदा ईंट’?

    ‘जिंदा ईंट’ नाम सुनने में भले ही अजीब लगे, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि ईंट किसी जीव की तरह चलती या बढ़ती है। इसे लिविंग बिल्डिंग मटेरियल इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसकी संरचना में जैविक घटकों का इस्तेमाल किया जाता है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, इस तरह की सामग्री में रेत जैसे कणों के साथ जिलेटिन आधारित हाइड्रोजेल और विशेष रूप से तैयार यीस्ट का इस्तेमाल किया जाता है। यीस्ट की सतह पर ऐसा जैविक प्रोटीन इस्तेमाल किया गया है, जो चिपकने वाले पदार्थ की तरह काम कर सकता है।

    यह प्रोटीन आसपास के कणों को एक-दूसरे से जोड़ने में मदद करता है और मिश्रण को मजबूत संरचना में बदलने की क्षमता रखता है।

    मंगल पर कैसे बन सकता है घर?

    भविष्य में अगर इस तकनीक को मंगल के लिए सफलतापूर्वक विकसित किया जाता है, तो निर्माण प्रक्रिया कुछ इस तरह हो सकती है।

    सबसे पहले मंगल की सतह पर उपलब्ध रेगोलिथ या अन्य उपयुक्त स्थानीय सामग्री को एक जैविक मिश्रण के साथ मिलाया जाएगा। इसमें जरूरी मात्रा में हाइड्रोजेल और जैविक घटक शामिल किए जा सकते हैं।

    इसके बाद इस मिश्रण को रोबोटिक 3D प्रिंटर में डाला जा सकता है। कंप्यूटर में तैयार डिजाइन के मुताबिक प्रिंटर सामग्री की परत-दर-परत संरचना बनाकर दीवारें और दूसरे हिस्से तैयार करेगा।

    इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि निर्माण के लिए हर ईंट को पृथ्वी से मंगल तक ले जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

    क्या यह सामान्य ईंट जितनी मजबूत होगी?

    प्रयोगशाला में इस तरह की जैविक निर्माण सामग्री की मजबूती को लेकर परीक्षण किए गए हैं। रिपोर्ट में करीब 12 मेगापास्कल तक की कम्प्रेसिव स्ट्रेंथ का उल्लेख किया गया है। हालांकि प्रयोगशाला में प्राप्त मजबूती और वास्तविक मंगल परिस्थितियों में किसी भवन के प्रदर्शन को एक जैसा नहीं माना जा सकता।

    मंगल पर लंबे समय तक विकिरण, अत्यधिक ठंड, कम वायुदाब और धूल जैसी परिस्थितियों का सामना करना होगा। इसलिए किसी वास्तविक मानव आवास के लिए इस्तेमाल से पहले इस तकनीक के कई और परीक्षण जरूरी होंगे।

    क्या मंगल की मिट्टी से ही बन जाएगा पूरा घर?

    यह तकनीक अभी भविष्य के मंगल अभियानों के लिए एक संभावित विकल्प के तौर पर देखी जा रही है। मंगल की मिट्टी को सीधे पृथ्वी की ईंटों जैसा मान लेना सही नहीं होगा। वहां उपलब्ध रेगोलिथ के गुणों, मिश्रण की स्थिरता और तैयार संरचना की मजबूती का विस्तृत परीक्षण जरूरी होगा।

    फिर भी इस तरह की तकनीक अंतरिक्ष निर्माण के लिए एक महत्वपूर्ण विचार पेश करती है—पृथ्वी से भारी निर्माण सामग्री ले जाने के बजाय मंगल पर उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल करना।

    अगर भविष्य के परीक्षण सफल रहते हैं, तो जैविक सामग्री और रोबोटिक 3D प्रिंटिंग का संयोजन मंगल पर बेस, दीवारें और अन्य संरचनाएं तैयार करने में मदद कर सकता है। फिलहाल यह तकनीक प्रयोगात्मक चरण में है, लेकिन मंगल पर इंसानी बस्ती बसाने की लंबी दौड़ में ऐसे कम वजन और कम ऊर्जा वाले निर्माण विकल्प बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

  • बेडरूम में भूलकर भी: न रखें ये चीजें, वास्तु के अनुसार पति-पत्नी के रिश्ते पर पड़ सकता है असर

    बेडरूम में भूलकर भी: न रखें ये चीजें, वास्तु के अनुसार पति-पत्नी के रिश्ते पर पड़ सकता है असर

    बेडरूम में भूलकर भी: न रखें ये चीजें, वास्तु के अनुसार पति-पत्नी के रिश्ते पर पड़ सकता है असर

    नई दिल्ली: घर में बेडरूम को आराम और निजी जीवन से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। वास्तु शास्त्र में भी बेडरूम की दिशा, सजावट और वहां रखी चीजों को लेकर कई तरह की मान्यताएं बताई गई हैं। खासतौर पर पति-पत्नी के कमरे को लेकर कहा जाता है कि कुछ वस्तुओं को वहां रखने से बचना चाहिए।

    वास्तु मान्यताओं के अनुसार, बेडरूम में रखी कुछ चीजें नकारात्मक माहौल से जुड़ी मानी जाती हैं और इनका असर दंपति के बीच तनाव पर पड़ सकता है। हालांकि, इन बातों का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

    बेड के सामने आईना लगाने से बचें

    वास्तु शास्त्र में बेड के ठीक सामने आईना रखने को उचित नहीं माना जाता। मान्यता है कि सोते समय पति-पत्नी का प्रतिबिंब आईने में दिखाई देने से मानसिक बेचैनी और वैवाहिक जीवन में तनाव बढ़ सकता है।

    अगर आईना हटाना संभव न हो तो रात में उसे कपड़े से ढकने की सलाह दी जाती है।

    बेडरूम में कांटेदार पौधे न रखें

    वास्तु के अनुसार बेडरूम में कांटेदार पौधों को रखने से बचना चाहिए। गुलाब जैसे पौधों में भी कांटे होने के कारण इन्हें कमरे में रखने को लेकर वास्तु में अलग-अलग मत मिलते हैं।

    मान्यता है कि कांटेदार पौधे दंपति के रिश्ते में तनाव और कटुता का प्रतीक बन सकते हैं। इसलिए बेडरूम में पौधा रखना हो तो बिना कांटों वाले पौधों को प्राथमिकता दी जाती है।

    देवी-देवताओं की तस्वीरों को लेकर यह मान्यता

    वास्तु और धार्मिक परंपराओं में पति-पत्नी के निजी बेडरूम में मंदिर या देवी-देवताओं की मूर्तियां रखने से बचने की सलाह दी जाती है।

    इसके बजाय पूजा स्थल को घर में अलग और स्वच्छ स्थान देना बेहतर माना जाता है। हालांकि, यह धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यता है, इसे वैज्ञानिक नियम नहीं माना जा सकता।

    जरूरत से ज्यादा इलेक्ट्रॉनिक सामान न रखें

    टीवी, लैपटॉप और मोबाइल जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को बेडरूम में जरूरत से ज्यादा रखने से बचना व्यावहारिक रूप से भी अच्छा माना जाता है।

    सोने से पहले लंबे समय तक स्क्रीन देखने से नींद प्रभावित हो सकती है और पार्टनर के साथ बातचीत का समय भी कम हो सकता है। वास्तु मान्यताओं में भी बेडरूम को इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से कम से कम रखने की सलाह दी जाती है।

    युद्ध या दुख दर्शाने वाली तस्वीरों से बचें

    वास्तु के अनुसार बेडरूम में ऐसी तस्वीरें नहीं लगानी चाहिए जो हिंसा, युद्ध, दुख या तनाव को दर्शाती हों। महाभारत के युद्ध के दृश्य, शिकार के दृश्य या उदासी दिखाने वाली तस्वीरों को इसके उदाहरण के तौर पर बताया जाता है।

    इसी तरह पूर्वजों की तस्वीरों को भी निजी बेडरूम के बजाय घर में किसी उचित स्थान पर रखने की परंपरा बताई जाती है।

    बहते पानी की तस्वीर या फव्वारा

    कुछ वास्तु मान्यताओं में बेडरूम में बहते पानी की तस्वीर, फव्वारा या पानी से जुड़े शोपीस रखने से बचने की सलाह दी जाती है।

    इसी तरह कमरे में अनावश्यक सजावटी सामान जमा करने के बजाय जगह को साफ और व्यवस्थित रखना बेहतर माना जाता है।

    बेड के नीचे कबाड़ जमा न करें

    बेड के नीचे पुराने कपड़े, जूते-चप्पल, टूटे सामान, बेकार डिब्बे या कबाड़ जमा करना वास्तु के अनुसार उचित नहीं माना जाता।

    व्यावहारिक रूप से भी बेड के नीचे सामान जमा होने से धूल और गंदगी बढ़ सकती है। इसलिए इस जगह को साफ और खाली रखना बेहतर है।

    बंद घड़ी और टूटी चीजें भी हटाएं

    बेडरूम में बंद घड़ी, टूटा हुआ सामान, खराब इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं या लंबे समय से इस्तेमाल न होने वाली चीजें जमा करके रखने से बचना चाहिए।

    वास्तु मान्यताओं में ऐसी चीजों को ठहराव और नकारात्मकता से जोड़ा जाता है, जबकि व्यावहारिक तौर पर भी अनावश्यक सामान कमरे को अव्यवस्थित बना सकता है।

    रिश्ते में मधुरता के लिए कमरे का माहौल रखें शांत

    वास्तु मान्यताओं से अलग देखें तो पति-पत्नी के रिश्ते के लिए बेडरूम का शांत, साफ और आरामदायक होना वास्तव में उपयोगी हो सकता है। पर्याप्त नींद, निजी समय, खुलकर बातचीत और एक-दूसरे को समय देना रिश्ते को बेहतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

    डिस्क्लेमर: बेडरूम में वस्तुओं को रखने या हटाने से जुड़े ये नियम वास्तु शास्त्र, धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। पति-पत्नी के रिश्ते में तनाव होने पर केवल वास्तु उपायों पर निर्भर रहने के बजाय आपसी संवाद और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लेना उचित है।

  • घर के बाहर खेलते-खेलते 2 साल की बच्ची गायब, CCTV में महिला के साथ जाती दिखी; 3 लोग हिरासत में.

    घर के बाहर खेलते-खेलते 2 साल की बच्ची गायब, CCTV में महिला के साथ जाती दिखी; 3 लोग हिरासत में.

    घर के बाहर खेलते-खेलते 2 साल की बच्ची गायब, CCTV में महिला के साथ जाती दिखी; 3 लोग हिरासत में.

    पश्चिम चंपारण के मझौलिया थाना क्षेत्र में दो साल की बच्ची के अचानक लापता होने से हड़कंप मच गया। बच्ची घर के बाहर खेल रही थी, लेकिन कुछ देर बाद वह वहां दिखाई नहीं दी। परिवार ने आसपास काफी तलाश की, रिश्तेदारों और पड़ोसियों से पूछताछ की, लेकिन बच्ची का कोई पता नहीं चला। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।

    CCTV जांच में महिला के साथ जाती दिखी बच्ची

    मामले की जांच के दौरान पुलिस को CCTV फुटेज मिला। इसमें बच्ची एक महिला के साथ जाती हुई दिखाई दी। परिजनों ने महिला की पहचान गांव की ही रहने वाली एक युवती के रूप में की है।

    इसके बाद पुलिस ने महिला के साथ उसकी मां और भाई को भी हिरासत में लिया है। तीनों से बच्ची के लापता होने के संबंध में पूछताछ की जा रही है।

    दादी ने बताई उस दिन की पूरी घटना

    बच्ची की दादी के मुताबिक, वह उसे आंगनबाड़ी केंद्र से लेकर घर पहुंची थीं। इसी दौरान आरोपी महिला वहां पहुंची और कथित तौर पर बताया कि बच्ची की मां उसे बुला रही हैं। उसने यह भी कहा कि उसे घास लाने जाना है।

    दादी कुछ समय के लिए बाथरूम चली गईं। आरोप है कि इसी दौरान महिला बच्ची को अपने साथ लेकर चली गई।

    कुछ देर बाद महिला अकेली वापस लौटी। जब दादी ने बच्ची के बारे में पूछा तो कथित तौर पर उसने बताया कि बच्ची को दुकान से खाने की चीज दिलाने के बाद अपने दरवाजे के पास छोड़ दिया था। वहां बच्ची नहीं मिली तो परिवार के लोगों ने गांव में तलाश शुरू कर दी।

    अलग-अलग जगहों की जानकारी से बढ़ा संदेह

    पुलिस पूछताछ के दौरान महिला ने बच्ची के अलग-अलग स्थानों पर होने की जानकारी दी। पुलिस ने बताए गए स्थानों पर जाकर भी तलाश की, लेकिन बच्ची का कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद बसवारी इलाके में भी खोजबीन की गई।

    बच्ची के गायब होने की खबर फैलने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण मझौलिया थाने पहुंचे और बच्ची को जल्द बरामद करने की मांग की।

    पुलिस कई एंगल से कर रही जांच

    मझौलिया थाना पुलिस के मुताबिक, मामले में केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस CCTV फुटेज, पूछताछ और बच्ची के संभावित ठिकानों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है। हिरासत में लिए गए तीनों लोगों से लगातार पूछताछ की जा रही है।

    फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि बच्ची महिला के साथ कहां तक गई और उसके बाद वह कहां चली गई। पुलिस बच्ची की जल्द से जल्द बरामदगी के लिए संभावित स्थानों पर तलाश कर रही है। मामले में आगे की तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगी।

  • राजगढ़: 17 वर्षीय किशोरी की हत्या से सनसनी, संदिग्ध युवक की ट्रक की चपेट में आने से मौत; जंगल से मिला शव.

    राजगढ़: 17 वर्षीय किशोरी की हत्या से सनसनी, संदिग्ध युवक की ट्रक की चपेट में आने से मौत; जंगल से मिला शव.

    राजगढ़: 17 वर्षीय किशोरी की हत्या से सनसनी, संदिग्ध युवक की ट्रक की चपेट में आने से मौत; जंगल से मिला शव.

    राजगढ़, मध्य प्रदेश: जिले में नाबालिग किशोरी की गुमशुदगी के मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया, जब पुलिस को मलावर क्षेत्र के जंगल से उसका शव बरामद हुआ। पुलिस जांच के अनुसार, मामले में संदिग्ध 21 वर्षीय युवक की भी उसी दिन सड़क हादसे में मौत हो गई थी। कॉल डिटेल और मोबाइल लोकेशन की जांच के बाद पुलिस जंगल तक पहुंची, जहां किशोरी का शव मिला।

    30 सितंबर को दर्ज हुई थी गुमशुदगी की शिकायत

    मामला 30 सितंबर 2026 का है। किशोरी के परिजनों ने राजगढ़ कोतवाली थाने में उसके लापता होने की शिकायत दर्ज कराई थी। परिजनों ने गांव के ही एक 21 वर्षीय युवक पर किशोरी को अपने साथ ले जाने का संदेह जताया था।

    पुलिस मामले की जांच कर ही रही थी कि इसी दौरान मलावर थाना क्षेत्र के पगारी बंग्ला के पास एक सड़क हादसे में उक्त युवक की मौत हो गई। बताया गया कि उसकी बाइक ट्रक से टकरा गई थी।

    मोबाइल लोकेशन से जंगल तक पहुंची पुलिस

    शुरुआत में युवक की मौत को सड़क दुर्घटना माना गया, लेकिन किशोरी की तलाश के दौरान पुलिस ने उसके मोबाइल की कॉल डिटेल और लोकेशन की जांच की। जांच में उसकी आखिरी लोकेशन मलावर के जंगल की ओर मिली।

    इसके बाद पुलिस टीम ने जंगल में तलाश शुरू की। तलाशी के दौरान झाड़ियों के बीच किशोरी का करीब सात दिन पुराना शव बरामद हुआ। पुलिस ने मौके से कुछ अन्य सामान भी जब्त किया है, जिनमें आरी और रस्सी शामिल होने की बात सामने आई है। इन बरामद वस्तुओं की जांच की जा रही है।

    रिश्तेदार से पूछताछ में सामने आई अहम जानकारी

    जांच के दौरान पुलिस ने युवक के एक करीबी रिश्तेदार से भी पूछताछ की। पुलिस के अनुसार, रिश्तेदार ने बताया कि घटना वाले दिन युवक किशोरी को करेड़ी की ओर से मलावर के जंगल ले गया था।

    पूछताछ में कथित तौर पर यह भी सामने आया कि कुछ समय बाद युवक अकेला लौटा और काफी घबराया हुआ था। पुलिस के मुताबिक, उसने रिश्तेदार से किशोरी की हत्या करने की बात कही थी। इसके बाद युवक सड़क की ओर चला गया, जहां ट्रक की चपेट में आने से उसकी मौत हो गई।

    फॉरेंसिक टीम ने जुटाए साक्ष्य

    पुलिस ने किशोरी के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। घटनास्थल से मिले सामान और अन्य साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है।

    पुलिस अब गुमशुदगी, जंगल से शव बरामद होने और युवक की सड़क हादसे में हुई मौत के बीच संबंधों की जांच कर रही है। हत्या की वास्तविक वजह और घटनाक्रम को लेकर पुलिस सभी संभावित पहलुओं की पड़ताल में जुटी है।

  • एमसीबी: घर की बाड़ी में उगा रहा था गांजा, मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने दबिश देकर 14 पौधे किए जब्त.

    एमसीबी: घर की बाड़ी में उगा रहा था गांजा, मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने दबिश देकर 14 पौधे किए जब्त.

    एमसीबी: घर की बाड़ी में उगा रहा था गांजा, मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने दबिश देकर 14 पौधे किए जब्त.

    छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले के जनकपुर थाना क्षेत्र में पुलिस ने गांजे की अवैध खेती के मामले में कार्रवाई की है। ग्राम गांजर में एक व्यक्ति अपने घर की बाड़ी में गांजे के पौधे उगा रहा था। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने दबिश देकर वहां से 14 गांजे के पौधे बरामद किए।

    जनकपुर पुलिस को सूचना मिली थी कि ग्राम गांजर में एक व्यक्ति अपने घर की बाड़ी में गांजे के पौधे उगा रहा है। सूचना की पुष्टि के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और बाड़ी की तलाशी ली।

    पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने अपनी बाड़ी को चारों तरफ से कपड़े से घेरकर रखा था। तलाशी के दौरान वहां गांजे के कुल 14 पौधे मिले, जिनका कुल वजन 18 किलो 690 ग्राम बताया गया है। पुलिस ने सभी पौधों को जब्त कर लिया।

    मामले में पुलिस ने हरि लाल (52) को गिरफ्तार किया है। उसके खिलाफ NDPS एक्ट की धारा 20(ए) के तहत मामला दर्ज किया गया। आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।

    पुलिस अब मामले में आगे की कार्रवाई और जांच कर रही है।

  • बार-बार पेनकिलर और एंटीबायोटिक: लेने से किडनी पर पड़ सकता है असर, इन लोगों को ज्यादा सावधानी की जरूरत.

    बार-बार पेनकिलर और एंटीबायोटिक: लेने से किडनी पर पड़ सकता है असर, इन लोगों को ज्यादा सावधानी की जरूरत.

    बार-बार पेनकिलर और एंटीबायोटिक: लेने से किडनी पर पड़ सकता है असर, इन लोगों को ज्यादा सावधानी की जरूरत.

    सिरदर्द, बदन दर्द या हल्का बुखार होने पर कई लोग बिना डॉक्टर से सलाह लिए पेनकिलर या एंटीबायोटिक लेना शुरू कर देते हैं। कभी-कभार सही दवा का इस्तेमाल आमतौर पर बड़ी समस्या नहीं होता, लेकिन लंबे समय तक या जरूरत से ज्यादा दवाओं का सेवन कुछ लोगों में किडनी समेत शरीर के दूसरे अंगों पर नुकसान का जोखिम बढ़ा सकता है।

    खासकर कुछ दर्द निवारक दवाएं, जैसे NSAIDs, किडनी में रक्त के प्रवाह को प्रभावित कर सकती हैं। वहीं कुछ एंटीबायोटिक्स भी कुछ परिस्थितियों में किडनी पर प्रतिकूल असर डाल सकती हैं। इसलिए इन दवाओं का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह के अनुसार करना जरूरी है।

    पेनकिलर किडनी को कैसे प्रभावित कर सकती है?

    किडनी शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने और शरीर में पानी व खनिजों का संतुलन बनाए रखने का काम करती है। कुछ पेनकिलर, खासकर NSAIDs, किडनी में रक्त प्रवाह को कम कर सकती हैं। इससे कुछ लोगों में किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होने का खतरा बढ़ सकता है।

    किडनी को नुकसान की खास बात यह है कि शुरुआती चरण में कई बार कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। समस्या का पता कभी-कभी ब्लड टेस्ट में क्रिएटिनिन बढ़ने के बाद चलता है।

    कितनी बार पेनकिलर लेना जोखिम बढ़ा सकता है?

    अगर कोई स्वस्थ व्यक्ति कभी-कभार थोड़े समय के लिए डॉक्टर या दवा के निर्देश के अनुसार पेनकिलर लेता है तो जोखिम आमतौर पर कम होता है। लेकिन लंबे समय तक या बार-बार खुद से दवा लेने पर खतरा बढ़ सकता है।

    डिहाइड्रेशन, अधिक उम्र, पहले से किडनी की समस्या और कुछ अन्य बीमारियां इस जोखिम को और बढ़ा सकती हैं। इसलिए अगर किसी व्यक्ति को लगातार या बार-बार दर्द के लिए पेनकिलर की जरूरत पड़ रही है, तो दर्द की वजह जानने के लिए डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

    एंटीबायोटिक का गलत इस्तेमाल भी हो सकता है नुकसानदायक

    हर बुखार या संक्रमण में एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती। खासकर वायरल संक्रमण में एंटीबायोटिक आमतौर पर काम नहीं करतीं। इसके बावजूद कई लोग सर्दी-जुकाम या वायरल बीमारी में खुद से एंटीब

  • नाना पाटेकर का ‘असली’ नाम क्या था? बचपन में मिला था ‘नाना’ नाम, ऐसे बनी यही उनकी पहचान:

    नाना पाटेकर का ‘असली’ नाम क्या था? बचपन में मिला था ‘नाना’ नाम, ऐसे बनी यही उनकी पहचान:

    नाना पाटेकर का ‘असली’ नाम क्या था? बचपन में मिला था ‘नाना’ नाम, ऐसे बनी यही उनकी पहचान:

    गोवा: दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। 8 अक्टूबर 2026 की सुबह गोवा स्थित अपने घर पर उन्हें गंभीर कार्डियक अरेस्ट आया। अस्पताल ले जाने के बाद उन्हें बचाया नहीं जा सका। उनके निधन की खबर से हिंदी और मराठी फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर है।

    नाना पाटेकर ने अपने दमदार अभिनय, प्रभावशाली आवाज और अलग अंदाज से सिनेमा में खास पहचान बनाई। ‘क्रांतिवीर’, ‘परिंदा’, ‘तिरंगा’, ‘प्रहार’ और ‘वेलकम’ जैसी फिल्मों में उनके किरदार आज भी दर्शकों को याद हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस नाम से उन्हें पूरी दुनिया जानती थी, वह उनका जन्म के समय रखा गया नाम नहीं था?

    विश्वनाथ पाटेकर था उनका असली नाम

    नाना पाटेकर का पूरा नाम विश्वनाथ दीनकर पाटेकर था। आधिकारिक रिकॉर्ड में भी उनका नाम इसी रूप में दर्ज रहा है और इसके साथ ‘नाना पाटेकर’ नाम से उनकी सार्वजनिक पहचान बनी।

    उनके नाम को लेकर खुद नाना पाटेकर ने भी एक इंटरव्यू में बताया था कि ‘नाना’ कोई बाद में अपनाया गया फिल्मी नाम नहीं था। उन्होंने कहा था कि बचपन से ही उनका नाम नाना था और उनके पासपोर्ट पर भी यही नाम दर्ज था।

    बचपन में ऐसे पड़ा ‘नाना’ नाम

    नाना नाम उनके बचपन से ही उनके साथ जुड़ गया था। परिवार और करीबियों के बीच उन्हें इसी नाम से पुकारा जाने लगा। धीरे-धीरे यह नाम इतना प्रचलित हो गया कि आगे चलकर यही उनकी सार्वजनिक और फिल्मी पहचान बन गया।

    उनके पुराने परिचित उन्हें कभी-कभी ‘विशू’ जैसे नाम से भी जानते थे। नाना पाटेकर ने बताया था कि जब कोई उन्हें विश्वनाथ या विशू कहकर बुलाता था तो उन्हें अंदाजा हो जाता था कि सामने वाला उनके पुराने दौर का परिचित है। बाकी लोगों के लिए वह हमेशा ‘नाना’ ही रहे।

    थिएटर से शुरू हुआ था अभिनय का सफर

    नाना पाटेकर ने अभिनय की दुनिया में सीधे फिल्मों से शुरुआत नहीं की थी। उनका जुड़ाव थिएटर से रहा और इसके बाद 1978 में फिल्म ‘गमन’ के जरिए उन्होंने सिनेमा में कदम रखा। आगे चलकर उन्होंने हिंदी और मराठी फिल्मों में कई बेहद प्रभावशाली किरदार निभाए।

    ‘परिंदा’ और ‘क्रांतिवीर’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को काफी सराहना मिली। वहीं ‘वेलकम’ में उदय शेट्टी का किरदार उनके करियर के सबसे लोकप्रिय किरदारों में शामिल हो गया।

    तीन बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित

    नाना पाटेकर को अपने अभिनय के लिए तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिले। उन्हें 2013 में पद्म श्री से भी सम्मानित किया गया था।

    उनका अभिनय सिर्फ हिंदी सिनेमा तक सीमित नहीं रहा। मराठी सिनेमा और थिएटर में भी उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। गंभीर भूमिकाओं से लेकर हास्य और नकारात्मक किरदारों तक, उन्होंने अलग-अलग तरह के चरित्रों को पर्दे पर प्रभावी ढंग से निभाया।

    ‘नाना’ नाम ही बन गया उनकी पहचान

    फिल्मी दुनिया में आने के बाद विश्वनाथ पाटेकर के बजाय ‘नाना पाटेकर’ नाम ही लोगों की जुबान पर चढ़ गया। यह नाम इतना लोकप्रिय हुआ कि आने वाली पीढ़ियां भी उन्हें इसी नाम से जानने लगीं।

    इस तरह ‘नाना’ उनके लिए सिर्फ एक उपनाम नहीं रहा, बल्कि वही नाम उनकी दशकों लंबी फिल्मी यात्रा और दर्शकों की यादों का हिस्सा बन गया। 75 साल की उम्र में उनके निधन के साथ भारतीय सिनेमा ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया, जिसकी आवाज, संवाद अदायगी और अभिनय शैली की अलग पहचान थी।