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  • मूली के साथ इन चीजों: का सेवन करने से बचने की सलाह, आयुर्वेद में बताया गया है विरुद्ध आहार का नियम.

    मूली के साथ इन चीजों: का सेवन करने से बचने की सलाह, आयुर्वेद में बताया गया है विरुद्ध आहार का नियम.

    मूली के साथ इन चीजों: का सेवन करने से बचने की सलाह, आयुर्वेद में बताया गया है विरुद्ध आहार का नियम.

    सर्दियों में मूली का सेवन काफी आम है। इसे सलाद, सब्जी और पराठे के साथ खाया जाता है। मूली में विटामिन C, फाइबर और कई एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो सामान्य तौर पर संतुलित डाइट का हिस्सा हो सकते हैं। हालांकि, आयुर्वेद में कुछ खाद्य पदार्थों को एक साथ खाने से बचने की सलाह दी जाती है।

    आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. प्रताप चौहान के अनुसार, मूली को कुछ खाद्य पदार्थों के साथ लेने से पाचन संबंधी परेशानी हो सकती है। आयुर्वेद में ऐसे खाद्य संयोजनों को ‘विरुद्ध आहार’ की अवधारणा से जोड़ा जाता है।

    आयुर्वेद में मूली की तासीर कैसी मानी गई है?

    आयुर्वेदिक मान्यताओं के अनुसार मूली की प्रकृति गर्म और तीखी मानी जाती है। इसे पाचन को बढ़ावा देने और कफ से जुड़े भारीपन को कम करने वाला खाद्य पदार्थ माना जाता है।

    हालांकि, हर व्यक्ति का पाचन और स्वास्थ्य अलग होता है। इसलिए किसी भी खाद्य संयोजन का असर व्यक्ति की स्थिति और मात्रा पर निर्भर कर सकता है।

    1. मूली और संतरा

    आयुर्वेदिक सलाह के अनुसार मूली के साथ संतरे का सेवन करने से बचना चाहिए। इस संयोजन को अनुकूल नहीं माना जाता। हालांकि, इसके नुकसान को लेकर मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं।

    2. मूली और करेला

    मूली और करेले को भी आयुर्वेद में एक साथ खाने से बचने की सलाह दी जाती है। दोनों के स्वाद और गुण अलग होने के कारण इस संयोजन को कुछ लोगों के लिए पाचन के लिहाज से भारी माना जाता है।

    3. मूली और दूध

    मूली के साथ दूध का सेवन भी आयुर्वेद में विरुद्ध आहार के उदाहरणों में बताया जाता है। अक्सर लोग मूली के पराठे या सब्जी के साथ दूध लेते हैं, लेकिन आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से इस संयोजन से बचने की सलाह दी जाती है।

    4. मूली और शहद

    आयुर्वेदिक मान्यताओं में मूली और शहद को भी एक साथ लेने से बचने की बात कही गई है। दोनों के गुणों में अंतर के कारण इस संयोजन को विरुद्ध आहार की श्रेणी में रखा जाता है।

    5. मूली और दही

    मूली के साथ दही खाने को लेकर भी आयुर्वेद में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। खासकर भोजन में मूली का सलाद और दही दोनों शामिल करने से बचने की सलाह कुछ आयुर्वेदिक विशेषज्ञ देते हैं।

    क्या मूली वाकई इन चीजों के साथ ‘जहर’ बन जाती है?

    ऐसा कहना सही नहीं होगा कि मूली इन खाद्य पदार्थों के साथ खाने पर ‘जहर’ बन जाती है। यह मुख्य रूप से आयुर्वेदिक ‘विरुद्ध आहार’ की अवधारणा से जुड़ी सलाह है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में इन सभी संयोजनों को जहरीला या खतरनाक साबित करने वाले पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।

    अगर किसी व्यक्ति को मूली या किसी अन्य खाद्य पदार्थ को खाने के बाद बार-बार गैस, पेट दर्द, ब्लोटिंग, एसिडिटी या एलर्जी जैसी समस्या होती है, तो उसे अपनी डाइट पर ध्यान देना चाहिए और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर या योग्य डाइटीशियन से सलाह लेनी चाहिए।

    डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से है। इसमें बताई गई आयुर्वेदिक मान्यताओं को चिकित्सीय सलाह या वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित उपचार न माना जाए। किसी बीमारी, एलर्जी या विशेष डाइट की स्थिति में डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लें।

  • 23 महीने 100% ‘ऑक्सीजन’ और वेंटिलेटर पर रहा 8 साल का बच्चा, PGIMS के डॉक्टरों ने बचाई जान

    23 महीने 100% ‘ऑक्सीजन’ और वेंटिलेटर पर रहा 8 साल का बच्चा, PGIMS के डॉक्टरों ने बचाई जान

    23 महीने 100% ‘ऑक्सीजन’ और वेंटिलेटर पर रहा 8 साल का बच्चा, PGIMS के डॉक्टरों ने बचाई जान

    रोहतक: हरियाणा के रोहतक स्थित PGIMS से एक बेहद चुनौतीपूर्ण इलाज का मामला सामने आया है। यहां एक 8 साल का बच्चा करीब 23 महीने तक 100 प्रतिशत ऑक्सीजन और वेंटिलेटर सपोर्ट पर रहने के बाद स्वस्थ होकर अपने घर लौटा। लंबे समय तक अस्पताल में इलाज और देखभाल के बाद जब बच्चे को डिस्चार्ज किया गया तो पीआईसीयू का पूरा स्टाफ भावुक हो गया।

    बच्चे को जब अस्पताल लाया गया था, तब उसकी उम्र महज 6 साल थी। उसकी हालत इतनी गंभीर थी कि वह अपने हाथ-पैर तक नहीं हिला पा रहा था। इसके बाद उसे पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट यानी पीआईसीयू में भर्ती किया गया और लगातार वेंटिलेटर व ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया।

    तेज बुखार के बाद बिगड़ी थी हालत

    पीआईसीयू इंचार्ज डॉ. कुंदन मित्तल के मुताबिक, बच्चा 5 अक्टूबर 2024 को अस्पताल पहुंचा था। उसे तेज बुखार था और शरीर में इतनी कमजोरी थी कि वह हाथ-पैर तक नहीं हिला पा रहा था।

    गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने तत्काल उसे पीआईसीयू में भर्ती किया। लंबे समय तक बच्चे को सांस लेने के लिए वेंटिलेटर और ऑक्सीजन की जरूरत बनी रही। इस दौरान उसकी स्थिति पर लगातार निगरानी रखी गई और उपचार में कई स्तरों पर सावधानी बरती गई।

    सिर्फ दवाओं पर निर्भर नहीं रहा इलाज

    बच्चे के इलाज में केवल दवाओं और वेंटिलेटर सपोर्ट पर ही निर्भर नहीं रहा गया। लंबे समय तक आईसीयू में रहने के कारण उसकी शारीरिक क्षमता को बनाए रखना भी बड़ी चुनौती थी।

    डॉक्टरों और नर्सिंग टीम ने उसके लिए लगातार फिजियोथेरेपी और पोषण संबंधी सपोर्ट की व्यवस्था की। उसकी स्थिति में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों पर भी नजर रखी गई। धीरे-धीरे उसकी हालत में सुधार आने लगा और अब वह अपने शरीर को हिला-डुला पा रहा है।

    पिता ने बेटे के लिए छोड़ दिया काम

    बच्चे के पिता सोमबीर दहिया दिल्ली में टैक्सी चलाते हैं और परिवार के मुख्य कमाने वाले सदस्य हैं। बेटे के लंबे इलाज के चलते उन्हें करीब दो साल तक अपना काम छोड़कर अस्पताल में रहना पड़ा।

    बच्चे की मां भी लगातार उसके साथ अस्पताल में मौजूद रहीं। लंबे इलाज के दौरान परिवार को आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा। मेडिकल टीम की ओर से परिवार की मदद करने के प्रयास भी किए गए।

    23 महीने बाद घर लौटने पर भावुक हुआ पूरा वार्ड

    जब बच्चा स्वस्थ होकर अस्पताल से घर जाने की स्थिति में पहुंचा तो पीआईसीयू में भावुक माहौल बन गया। पिता ने डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के प्रति आभार जताया। परिवार ने इस मौके पर केक काटा और मेडिकल टीम को सम्मानित भी किया।

    बच्चे के पिता का कहना था कि डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने उनके बेटे को लगभग दो साल तक अपने परिवार के सदस्य की तरह संभाला। इस दौरान अस्पताल उनके परिवार के लिए दूसरे घर जैसा बन गया।

    नर्सिंग स्टाफ के लिए भी खास था बच्चा

    करीब 23 महीने तक पीआईसीयू में रहने के कारण बच्चा वहां के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ से बेहद घुल-मिल गया था। स्टाफ के सदस्यों ने बताया कि लंबे समय तक साथ रहने के कारण वह उनके लिए परिवार के सदस्य जैसा बन चुका था।

    उसका जन्मदिन भी अस्पताल के स्टाफ ने मिलकर मनाया। परिवार के खास मौकों पर स्टाफ बच्चे और उसके परिजनों के साथ भावनात्मक रूप से जुड़ा रहा।

    लगभग दो साल तक चले इलाज, लगातार निगरानी, पोषण और फिजियोथेरेपी के बाद बच्चे का घर लौटना उसके परिवार के लिए किसी नई शुरुआत से कम नहीं है। यह मामला लंबे समय तक गंभीर स्थिति में रहने वाले बच्चों की देखभाल में मेडिकल टीम, परिवार और नर्सिंग स्टाफ के निरंतर सहयोग की अहमियत को भी दिखाता है।

  • अमावस्या की रात करें फिटकरी: का ये उपाय, वास्तु-ज्योतिष में माना जाता है धन और तरक्की के लिए शुभ

    अमावस्या की रात करें फिटकरी: का ये उपाय, वास्तु-ज्योतिष में माना जाता है धन और तरक्की के लिए शुभ

    अमावस्या की रात करें फिटकरी: का ये उपाय, वास्तु-ज्योतिष में माना जाता है धन और तरक्की के लिए शुभ

    नई दिल्ली: वास्तु और ज्योतिष में रोजमर्रा की कई चीजों को विशेष महत्व दिया जाता है। इन्हीं में फिटकरी भी शामिल है। आमतौर पर फिटकरी का इस्तेमाल पानी साफ करने या शेविंग के बाद किया जाता है, लेकिन ज्योतिष और लोक मान्यताओं में इसे नकारात्मकता दूर करने और घर में सकारात्मक वातावरण बनाए रखने से जोड़ा जाता है।

    मान्यता है कि अमावस्या की रात फिटकरी से जुड़ा एक आसान उपाय करने से आर्थिक परेशानियों और जीवन में आ रही रुकावटों को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इन उपायों का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है और इन्हें धार्मिक आस्था व परंपरागत मान्यताओं के रूप में ही देखना चाहिए।

    अमावस्या की रात फिटकरी का उपाय

    अमावस्या की रात फिटकरी का एक छोटा टुकड़ा लें। इसे हाथ में लेकर मन ही मन अपनी आर्थिक परेशानियों और जीवन में चल रही समस्याओं को याद करें। इसके बाद फिटकरी को घर के किसी ऐसे स्थान पर रख दें, जहां आमतौर पर लोगों की नजर न पड़े।

    ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, ऐसा करने से घर में मौजूद नकारात्मक ऊर्जा कम करने में मदद मिल सकती है और धन से जुड़ी परेशानियों में राहत के रास्ते बन सकते हैं।

    धन की स्थिरता के लिए फिटकरी की पोटली

    अगर लगातार मेहनत करने के बावजूद पैसे की बचत नहीं हो पा रही है तो ज्योतिष में एक अन्य उपाय भी बताया जाता है। गुरुवार या शुक्रवार को स्नान के बाद फिटकरी के छोटे टुकड़े को लाल कपड़े में बांधकर पोटली बना लें।

    इस पोटली को उस स्थान पर रखा जा सकता है जहां घर में धन या महत्वपूर्ण वित्तीय सामान रखा जाता है। मान्यता है कि इससे अनावश्यक खर्च को नियंत्रित करने और आर्थिक स्थिरता बढ़ाने में मदद मिलती है।

    राहु-शनि से जुड़े उपाय में भी फिटकरी का इस्तेमाल

    ज्योतिष में फिटकरी को राहु और शनि से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि अगर किसी व्यक्ति के काम बार-बार रुक रहे हों या जीवन में परेशानियां बढ़ रही हों तो नहाने के पानी में थोड़ी फिटकरी मिलाकर स्नान करने से नकारात्मक प्रभाव कम हो सकते हैं।

    हालांकि, त्वचा संवेदनशील होने पर फिटकरी का इस्तेमाल सावधानी से करें और किसी तरह की जलन या एलर्जी होने पर इसका उपयोग बंद कर दें।

    नौकरी और करियर में सफलता के लिए उपाय

    ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार, महत्वपूर्ण इंटरव्यू या मीटिंग के समय जेब में फिटकरी का छोटा टुकड़ा रखने का भी उपाय बताया जाता है।

    माना जाता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा से बचाव होता है और व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ता है। हालांकि, नौकरी या करियर में सफलता के लिए तैयारी, कौशल और मेहनत सबसे महत्वपूर्ण हैं।

    क्या फिटकरी सच में भाग्य बदल सकती है?

    फिटकरी से जुड़े ये उपाय धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं। इनके जरिए धन बढ़ने, ग्रह दोष कम होने या भाग्य बदलने का कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

    इसलिए इन्हें आस्था और परंपरा के तौर पर ही अपनाना चाहिए। आर्थिक समस्या होने पर बजट, बचत और वित्तीय योजना पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है।

    डिस्क्लेमर: इस लेख में बताए गए उपाय धार्मिक आस्था, ज्योतिष और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इन्हें किसी वित्तीय, स्वास्थ्य या अन्य व्यावहारिक समस्या का निश्चित समाधान न मानें।

  • ग्वालियर: सिंधिया राजघराने की संपत्ति विवाद में नया मोड़, हस्ताक्षरों पर प्रतिमा देवी ने उठाए सवाल; 14 अक्टूबर को फैसला.

    ग्वालियर: सिंधिया राजघराने की संपत्ति विवाद में नया मोड़, हस्ताक्षरों पर प्रतिमा देवी ने उठाए सवाल; 14 अक्टूबर को फैसला.

    ग्वालियर: सिंधिया राजघराने की संपत्ति विवाद में नया मोड़, हस्ताक्षरों पर प्रतिमा देवी ने उठाए सवाल; 14 अक्टूबर को फैसला.

    ग्वालियर: सिंधिया राजघराने की संपत्तियों के बंटवारे से जुड़े लंबे समय से चल रहे कानूनी विवाद में एक बार फिर नया मोड़ आया है। मामले की सुनवाई के दौरान राजघराने की सदस्य प्रतिमा देवी ने संपत्ति बंटवारे से जुड़े दस्तावेजों पर अपने हस्ताक्षरों की प्रक्रिया को लेकर आपत्ति जताई है। उनका दावा है कि दस्तावेजों पर हस्ताक्षर उनकी पूरी सहमति से नहीं, बल्कि कथित तौर पर धोखे से कराए गए थे।

    वहीं, ज्योतिरादित्य सिंधिया समेत परिवार के अन्य सदस्यों की ओर से इस दावे का विरोध किया गया है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अब अदालत 14 अक्टूबर 2026 को प्रतिमा देवी के अतिरिक्त आवेदन पर फैसला सुना सकती है।

    प्रतिमा देवी ने कोर्ट में दिया अतिरिक्त आवेदन

    प्रतिमा देवी की ओर से अदालत में दाखिल अतिरिक्त आवेदन में दावा किया गया है कि संपत्ति बंटवारे से संबंधित दस्तावेजों और न्यायालयीन नोटिस की उन्हें पूरी जानकारी नहीं दी गई।

    उनका कहना है कि कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज और नोटिस कथित तौर पर गलत पते पर भेजे गए, जिसके चलते उन्हें मामले की पूरी जानकारी समय पर नहीं मिल सकी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संपत्ति बंटवारे से जुड़े दस्तावेजों पर उनके हस्ताक्षर उनकी वास्तविक सहमति के आधार पर नहीं कराए गए।

    प्रतिमा देवी ने अदालत से अपने दावों के समर्थन में साक्ष्य पेश करने की अनुमति मांगी है।

    परिवार के अन्य सदस्यों ने किया विरोध

    प्रतिमा देवी की आपत्तियों का ज्योतिरादित्य सिंधिया, उषा राजे, वसुंधरा राजे और यशोधरा राजे की ओर से विरोध किया गया। परिवार की ओर से पेश वकीलों ने अदालत में दलील दी कि संबंधित दस्तावेजों पर हस्ताक्षर सहमति से किए गए थे और लगाए गए आरोपों से वे सहमत नहीं हैं।

    परिवार की ओर से यह भी दलील दी गई कि दस्तावेजों पर हस्ताक्षर होने के बाद परिवार के सदस्यों ने साथ में डिनर किया था। उस दौरान तस्वीरें भी ली गई थीं। इन तस्वीरों और घटनाक्रम को उस समय परिवार के बीच सहमति होने के संकेत के तौर पर पेश किया गया।

    दस्तावेजों की जानकारी को लेकर भी विवाद

    मामले की सुनवाई के दौरान यह सवाल भी उठा कि संपत्ति बंटवारे से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज प्रतिमा देवी को सही तरीके से उपलब्ध कराए गए थे या नहीं।

    प्रतिमा देवी इसी आधार पर अतिरिक्त आवेदन के जरिए साक्ष्य पेश करने की अनुमति चाहती हैं। दोनों पक्ष इस आवेदन पर अपनी दलीलें पूरी कर चुके हैं।

    अब अदालत यह तय करेगी कि प्रतिमा देवी की ओर से उठाई गई आपत्तियों और अतिरिक्त साक्ष्य पेश करने की मांग को स्वीकार किया जाए या नहीं।

    जयविलास पैलेस समेत कई संपत्तियां विवाद में

    सिंधिया परिवार की संपत्तियों के बंटवारे का मामला लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया में है। विवाद में जयविलास पैलेस समेत राजघराने की अन्य संपत्तियां भी शामिल हैं। इनके मूल्यांकन और बंटवारे की प्रक्रिया से जुड़े कई कानूनी पहलुओं पर भी कार्यवाही चल रही है।

    अब 14 अक्टूबर की तारीख इस मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसी दिन अदालत प्रतिमा देवी की ओर से दाखिल अतिरिक्त आवेदन और उनकी आपत्तियों पर अपना फैसला सुना सकती है।

    मामले में लगाए गए दावों और आरोपों पर अंतिम स्थिति अदालत के फैसले और आगे की न्यायिक प्रक्रिया से स्पष्ट होगी।

  • नालंदा: सिपाही भर्ती में 9 लाख की सेटिंग का खुलासा, ब्लूटूथ से नकल कराने के मामले में आरोपी गिरफ्तार.

    नालंदा: सिपाही भर्ती में 9 लाख की सेटिंग का खुलासा, ब्लूटूथ से नकल कराने के मामले में आरोपी गिरफ्तार.

    नालंदा: सिपाही भर्ती में 9 लाख की सेटिंग का खुलासा, ब्लूटूथ से नकल कराने के मामले में आरोपी गिरफ्तार.

    नालंदा: बिहार सिपाही भर्ती परीक्षा में कथित तौर पर अवैध तरीके से चयन कराने के लिए 9 लाख रुपये की सेटिंग किए जाने के मामले में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। मामला वर्ष 2023 में आयोजित सिपाही भर्ती लिखित परीक्षा से जुड़ा है। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर EOU ने पटना जिले के सिगौरी थाना क्षेत्र निवासी श्रवण कुमार को गिरफ्तार किया है।

    यह मामला नालंदा जिले के लहेरी थाना कांड संख्या 611/23 से संबंधित है। 1 अक्टूबर 2023 को केंद्रीय चयन परिषद (सिपाही भर्ती), बिहार की ओर से लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी।

    परीक्षा केंद्र पर पकड़ा गया था अभ्यर्थी

    परीक्षा के दौरान बिहारशरीफ के भैंसासुर स्थित आवासीय मॉडल मध्य विद्यालय केंद्र पर जांच के दौरान धनंजय कुमार पकड़ा गया था। उसके प्रवेश पत्र पर लगी तस्वीर उसके आधार कार्ड और चेहरे से मेल नहीं खा रही थी।

    जांच के दौरान उसके पास कथित तौर पर ब्लूटूथ के जरिए नकल करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला उपकरण भी मिला था। पूछताछ में धनंजय ने बताया था कि परीक्षा पास कराने के लिए उसके एडमिट कार्ड पर किसी दूसरे अभ्यर्थी की तस्वीर लगाई गई थी।

    9 लाख रुपये में हुई थी कथित सेटिंग

    EOU की जांच में श्रवण कुमार की भूमिका सामने आने के बाद उसे 7 अक्टूबर 2026 को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, श्रवण करीब 25 वर्ष का है और पटना जिले के सिगौरी थाना क्षेत्र के हादीनगर का रहने वाला है।

    जांच के मुताबिक, श्रवण ने अपने परिचित सेटर नीरज के माध्यम से धनंजय को सिपाही भर्ती परीक्षा में पास कराने के लिए कथित तौर पर 9 लाख रुपये में सेटिंग कराई थी। इसी व्यवस्था के तहत धनंजय के एडमिट कार्ड पर दूसरे स्कॉलर की तस्वीर लगाए जाने की बात सामने आई है।

    दूसरे स्कॉलर के नहीं पहुंचने पर खुद परीक्षा देने पहुंचा

    पुलिस के अनुसार, जिस स्कॉलर को धनंजय की जगह परीक्षा देने के लिए जाना था, वह परीक्षा केंद्र पर नहीं पहुंचा। इसके बाद धनंजय को ही परीक्षा देने के लिए भेजा गया। इस दौरान उससे कथित तौर पर फोन-पे के जरिए 20 हजार रुपये लिए गए थे।

    जांच में यह भी सामने आया कि नकल कराने के लिए धनंजय को सेटर के माध्यम से ब्लूटूथ डिवाइस उपलब्ध कराया गया था। हालांकि परीक्षा केंद्र में प्रवेश के दौरान जांच में वह पकड़ा गया।

    आरोपी न्यायिक हिरासत में भेजा गया

    धनंजय कुमार को इस मामले में पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। अब EOU ने श्रवण कुमार को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

    आर्थिक अपराध इकाई मामले से जुड़े अन्य लोगों और परीक्षा में कथित गड़बड़ी के पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। पुलिस के अनुसार जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • प्रेमी के साथ पकड़ी गई विवाहिता से ‘शुद्धिकरण’ के नाम पर अमानवीय हरकत, 9 गिरफ्तार.

    प्रेमी के साथ पकड़ी गई विवाहिता से ‘शुद्धिकरण’ के नाम पर अमानवीय हरकत, 9 गिरफ्तार.

    प्रेमी के साथ पकड़ी गई विवाहिता से ‘शुद्धिकरण’ के नाम पर अमानवीय हरकत, 9 गिरफ्तार.

    ** गुजरात के सुरेंद्रनगर जिले से विवाहिता के साथ कथित तौर पर अमानवीय व्यवहार और यौन उत्पीड़न का गंभीर मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार महिला को एक व्यक्ति के साथ पकड़े जाने के बाद कुछ लोगों ने उसे बंधक बनाकर प्रताड़ित किया। आरोप है कि ‘शुद्धिकरण’ के नाम पर महिला के साथ जबरदस्ती की गई और पूरी घटना की रिकॉर्डिंग कर उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित कर दिया गया।

    पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए 9 लोगों को गिरफ्तार किया है। सभी आरोपी सुरेंद्रनगर के दुधरेज गांव के रहने वाले बताए जा रहे हैं। मामले की जांच सुरेंद्रनगर सिटी ‘ए’ डिवीजन पुलिस कर रही है।

    कथित प्रेमी के साथ जाने के बाद बढ़ा विवाद

    पुलिस के मुताबिक, महिला मूल रूप से वापी की रहने वाली है। बताया गया है कि वह पहले भी एक व्यक्ति के साथ घर से चली गई थी। बाद में परिवार और समुदाय के लोगों के हस्तक्षेप के बाद समझौता हुआ और वह अपने पति के पास लौट आई।

    पुलिस के अनुसार बाद में महिला दोबारा उसी व्यक्ति के साथ चली गई। इसके बाद परिवार और समुदाय के कुछ लोगों ने दोनों को पकड़ लिया।

    दोनों को बंधक बनाकर प्रताड़ित करने का आरोप

    पुलिस के मुताबिक, महिला और उसके कथित प्रेमी को पकड़कर एक स्थान पर ले जाया गया। आरोप है कि वहां महिला को बंधक बनाकर उसके साथ जबरन यौन उत्पीड़न किया गया।

    वहीं महिला के साथ मौजूद युवक को भी कथित तौर पर बंधक बनाकर पीटा गया। पुलिस के अनुसार उसे पेड़ से बांधा गया था, जबकि महिला को एक कमरे में बंद रखा गया। आरोपियों पर दोनों के साथ मारपीट और अमानवीय व्यवहार करने के आरोप हैं।

    घटना की रिकॉर्डिंग कर सोशल मीडिया पर डाली

    पुलिस के अनुसार कथित घटना के दौरान मोबाइल फोन से रिकॉर्डिंग की गई और बाद में उसे Instagram पर प्रसारित कर दिया गया। सोशल मीडिया पर सामग्री सामने आने के बाद एक व्यक्ति ने पुलिस को इसकी जानकारी दी।

    इसके बाद पुलिस ने उपलब्ध जानकारी के आधार पर महिला की पहचान करने की कोशिश शुरू की।

    पुलिस ने महिला की पहचान कर दर्ज किया बयान

    एएसपी वेदिका दिहानी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने मामले की जांच शुरू की। पूछताछ और अन्य जानकारी के आधार पर पुलिस महिला तक पहुंची।

    पुलिस के मुताबिक, टीम जब महिला के घर पहुंची तो वह वहां मौजूद थी। पुलिस के सामने महिला ने कथित घटना के बारे में जानकारी दी। इसके बाद उसके बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई।

    9 आरोपी गिरफ्तार

    सुरेंद्रनगर सिटी ‘ए’ डिवीजन थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

    पुलिस के अनुसार आरोपियों पर BNS की धारा 70(1), धारा 115(2) और आईटी एक्ट की धारा 67(A) समेत संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई है। मामले में 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

    पुलिस अब घटना में शामिल अन्य लोगों की भूमिका, रिकॉर्डिंग बनाने और उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित करने से जुड़े पहलुओं की भी जांच कर रही है। मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

  • महासमुंद: वन अमले पर हमला, रेंजर और डिप्टी रेंजर को 5 घंटे बनाया बंधक; पुलिस ने छुड़ाया.

    महासमुंद: वन अमले पर हमला, रेंजर और डिप्टी रेंजर को 5 घंटे बनाया बंधक; पुलिस ने छुड़ाया.

    महासमुंद: वन अमले पर हमला, रेंजर और डिप्टी रेंजर को 5 घंटे बनाया बंधक; पुलिस ने छुड़ाया.

    महासमुंद: छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बागबाहरा वन क्षेत्र में रात के समय गश्त पर निकले वन विभाग के कर्मचारियों के साथ मारपीट और दो अधिकारियों को कई घंटे तक बंधक बनाए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि वन भूमि पर कथित कब्जे को लेकर विवाद के दौरान कुछ लोगों ने रेंजर और डिप्टी रेंजर पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया।

    घटना की जानकारी मिलने के बाद बागबाहरा और खल्लारी थाना पुलिस की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची और करीब रात 12:30 बजे दोनों अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकाला। घायल अधिकारियों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।

    जंगली सूअर के अवैध शिकार की सूचना पर निकली थी टीम

    बताया गया कि रेंजर अपने स्टाफ के साथ ढोंड परिसर के कक्ष क्रमांक 95 और 96 में जंगली सूअर के कथित अवैध शिकार और वन्यजीवों के मांस की बिक्री से जुड़ी सूचना की जांच के लिए रात में गश्त कर रहे थे।

    इसी दौरान टीम तमोरा क्षेत्र में पहुंची, जहां कुछ लोगों के साथ विवाद शुरू हो गया। आरोप है कि देखते ही देखते वहां मौजूद लोगों ने वन विभाग की टीम को घेर लिया और उनके साथ गाली-गलौज व मारपीट शुरू कर दी।

    कर्मचारियों ने भागकर बचाई जान

    बताया जा रहा है कि लाठी-डंडों से लैस लोगों की संख्या करीब एक दर्जन थी। स्थिति बिगड़ने पर वन विभाग के कुछ कर्मचारी किसी तरह वहां से निकल गए, लेकिन रेंजर और डिप्टी रेंजर मौके पर ही फंस गए।

    आरोप है कि दोनों अधिकारियों के साथ मारपीट की गई, जिससे उन्हें चोटें आईं। इस दौरान रेंजर का पर्स और डिप्टी रेंजर का मोबाइल फोन भी ले लिया गया।

    खेत के पास बने मकान में करीब 5 घंटे रखा बंधक

    आरोप है कि मारपीट के बाद दोनों अधिकारियों को तमोरा वनखंड से लगे एक खेत में बने छोटे से मकान में ले जाया गया। वहां उन्हें कथित तौर पर शाम करीब 7:30 बजे से रात 12:30 बजे तक बंद रखा गया।

    इस दौरान रेंजर ने किसी तरह वरिष्ठ अधिकारियों और पुलिस को आपात संदेश भेजा। सूचना मिलते ही बागबाहरा और खल्लारी थाने की पुलिस टीम वन विभाग के कर्मचारियों के साथ मौके पर पहुंची।

    पुलिस पहुंची तो आरोपियों ने किया विरोध

    पुलिस ने दोनों अधिकारियों को छोड़ने के लिए कहा, लेकिन आरोप है कि वहां मौजूद लोग पुलिस से भी उलझने लगे। इसके बाद पुलिस और वन विभाग की टीम ने सुरक्षा घेरा बनाकर दोनों अधिकारियों को बाहर निकाला।

    दोनों घायल अधिकारियों को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज कराया जा रहा है।

    9 लोगों के खिलाफ नामजद मामला

    पुलिस ने मामले में 9 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की है। पुलिस के अनुसार आरोपियों में प्रदीप ध्रुव, सुखराम, गणेश यादव, हेमिन बाई, चंदन, कलाबाई, लक्ष्मीबाई और संतकुमार समेत अन्य लोग शामिल हैं।

    घटना के बाद सभी आरोपी फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस उनकी तलाश में जुटी है।

    40 से 50 एकड़ वन भूमि पर खेती का दावा

    वन विभाग के अनुसार, जुलाई में तमोरा जंगल में पौधरोपण के दौरान करीब 89 एकड़ वन भूमि पर कब्जे की जानकारी सामने आई थी। विभाग का दावा है कि कुछ लोगों ने वहां धान की खेती शुरू कर दी थी।

    विभाग की कार्रवाई और समझाइश के बाद कुछ हिस्से से कब्जा हटाए जाने की बात कही गई है, लेकिन करीब 40 से 50 एकड़ क्षेत्र में अब भी धान की खेती किए जाने का दावा है।

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार, वन अमले को बंधक बनाए जाने की सूचना मिलने के बाद रात करीब 12:30 बजे दोनों अधिकारियों को सुरक्षित छुड़ा लिया गया। मामले में आरोपियों की तलाश जारी है और घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच की जा रही है।

  • क्या आंतों के बैक्टीरिया: बढ़ा सकते हैं अल्जाइमर का खतरा? नई रिसर्च में सामने आया गट-ब्रेन कनेक्शन.

    क्या आंतों के बैक्टीरिया: बढ़ा सकते हैं अल्जाइमर का खतरा? नई रिसर्च में सामने आया गट-ब्रेन कनेक्शन.

    क्या आंतों के बैक्टीरिया: बढ़ा सकते हैं अल्जाइमर का खतरा? नई रिसर्च में सामने आया गट-ब्रेन कनेक्शन.

    नई दिल्ली: हमारी आंतों में मौजूद खरबों सूक्ष्मजीव यानी गट माइक्रोबायोम सिर्फ पाचन प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करते, बल्कि शरीर की इम्यूनिटी, मेटाबॉलिज्म और कई अन्य जैविक प्रक्रियाओं में भी भूमिका निभाते हैं। वैज्ञानिक अब यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि आंतों के बैक्टीरिया और दिमाग के बीच मौजूद संबंध यानी गट-ब्रेन एक्सिस न्यूरोलॉजिकल बीमारियों को किस तरह प्रभावित कर सकता है।

    एक नए अध्ययन में आंतों के कुछ बैक्टीरिया से बनने वाले रसायन इमिडाजोल प्रोपियोनेट (Imidazole Propionate) और अल्जाइमर से जुड़े कुछ जैविक बदलावों के बीच संबंध पाया गया है। हालांकि, शोध से यह साबित नहीं होता कि यह रसायन अल्जाइमर रोग का कारण है। इस संबंध को समझने के लिए अभी और शोध की जरूरत है।

    क्या है इमिडाजोल प्रोपियोनेट?

    इमिडाजोल प्रोपियोनेट एक छोटा मॉलिक्यूल है, जिसे आंतों में मौजूद कुछ बैक्टीरिया प्रोटीन में पाए जाने वाले एक अमीनो एसिड के मेटाबॉलिज्म के दौरान बना सकते हैं।

    शोधकर्ताओं ने इंसानों और चूहों में इसके संभावित प्रभावों का अध्ययन किया। इंसानों में खून में इस रसायन के अधिक स्तर और अल्जाइमर से जुड़े कुछ जैविक संकेतकों के बीच संबंध देखा गया।

    करीब 1,200 लोगों के डेटा में क्या मिला?

    अध्ययन में 1,196 ऐसे वयस्कों को शामिल किया गया, जिन्हें अध्ययन के समय याददाश्त या सोचने-समझने से जुड़ी कोई स्पष्ट समस्या नहीं थी।

    शोधकर्ताओं ने पाया कि खून में ImP का स्तर अधिक होने वाले कुछ प्रतिभागियों ने याददाश्त और सोचने-समझने से जुड़े परीक्षणों में अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन किया। इनमें अल्जाइमर से जुड़े कुछ जैविक संकेत भी अधिक देखे गए।

    शोध में आंतों के कुछ ऐसे बैक्टीरिया की भी पहचान की गई जो ImP बनाने से जुड़े थे।

    लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है—किसी रसायन और बीमारी के बीच संबंध मिलना यह साबित नहीं करता कि वही रसायन बीमारी का कारण है। इसलिए खून में ImP का स्तर ज्यादा होने का मतलब यह नहीं है कि किसी व्यक्ति को भविष्य में अल्जाइमर जरूर होगा।

    चूहों पर प्रयोग में क्या सामने आया?

    इस संभावित संबंध को समझने के लिए शोधकर्ताओं ने चूहों पर भी प्रयोग किए। लंबे समय तक ImP के संपर्क में रहने वाले चूहों में अल्जाइमर से जुड़े कुछ जैविक बदलाव देखे गए।

    इनमें बीटा-एमिलॉयड और टाऊ प्रोटीन से संबंधित बदलाव शामिल थे। अल्जाइमर में बीटा-एमिलॉयड दिमाग में जमा होकर प्लाक बना सकता है, जबकि असामान्य टाऊ प्रोटीन तंत्रिका कोशिकाओं के भीतर उलझी हुई संरचनाओं से जुड़ा होता है।

    शोधकर्ताओं को यह संकेत भी मिले कि ImP का संबंध ब्लड-ब्रेन बैरियर में होने वाले बदलावों से हो सकता है।

    क्या होता है ब्लड-ब्रेन बैरियर?

    ब्लड-ब्रेन बैरियर दिमाग की एक महत्वपूर्ण सुरक्षा व्यवस्था है। यह नियंत्रित करती है कि खून में मौजूद कौन-से पदार्थ दिमाग के ऊतकों तक पहुंच सकते हैं।

    इस सुरक्षा प्रणाली में बदलाव या इसकी कमजोरी को उम्र बढ़ने और कुछ न्यूरोलॉजिकल स्थितियों से जुड़ी प्रक्रियाओं के साथ देखा गया है। हालांकि, ImP और ब्लड-ब्रेन बैरियर के बीच संबंध को पूरी तरह समझने के लिए अभी और अध्ययन जरूरी हैं।

    क्या प्रोबायोटिक्स लेने से अल्जाइमर से बच सकते हैं?

    अभी ऐसा कोई पुख्ता प्रमाण नहीं है कि किसी खास प्रोबायोटिक या एक-दो तरह के बैक्टीरिया का सेवन करने से अल्जाइमर का खतरा कम किया जा सकता है।

    गट माइक्रोबायोम बेहद जटिल होता है। इसमें मौजूद अलग-अलग बैक्टीरिया आपस में और शरीर के साथ कई तरह से प्रतिक्रिया करते हैं। इसलिए सिर्फ किसी एक बैक्टीरिया को बढ़ाने या घटाने से पूरे माइक्रोबायोम पर क्या असर पड़ेगा, यह निश्चित रूप से कहना संभव नहीं है।

    इसी तरह, इस अध्ययन में ऐसा कोई विशेष भोजन या डाइट नहीं बताई गई है जो शरीर से ImP को पूरी तरह खत्म कर सके।

    अल्जाइमर के प्रमुख जोखिम कारक क्या हैं?

    अल्जाइमर को किसी एक बैक्टीरिया या रसायन से जोड़कर देखना सही नहीं होगा। उम्र बढ़ना इसका सबसे प्रमुख ज्ञात जोखिम कारक है। इसके अलावा आनुवंशिक कारक, हृदय और रक्त वाहिकाओं की सेहत तथा जीवनशैली से जुड़े कई पहलू भी भूमिका निभा सकते हैं।

    हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल, शारीरिक निष्क्रियता, धूम्रपान, नींद की समस्या और संपूर्ण स्वास्थ्य जैसे कारकों पर ध्यान देना दिमाग और शरीर दोनों की सेहत के लिए महत्वपूर्ण है।

    गट-ब्रेन कनेक्शन पर अभी और रिसर्च की जरूरत

    यह अध्ययन आंतों के माइक्रोबायोम और दिमाग के बीच संभावित संबंध को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक संकेत दे सकता है। अब शोधकर्ताओं के सामने कई सवाल हैं—कौन से बैक्टीरिया ज्यादा ImP बनाते हैं, वे ऐसा क्यों करते हैं और शरीर में इस रसायन की मात्रा किन परिस्थितियों में बढ़ती है।

    सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि अगर शरीर में ImP का स्तर कम किया जाए, तो क्या अल्जाइमर से जुड़े मस्तिष्क के बदलावों में वास्तव में कमी आती है। इसका जवाब भविष्य के अध्ययनों से ही मिल सकेगा।

    डिस्क्लेमर: यह लेख वैज्ञानिक शोध के निष्कर्षों पर आधारित सामान्य स्वास्थ्य जानकारी है। अध्ययन में इमिडाजोल प्रोपियोनेट और अल्जाइमर से जुड़े कुछ जैविक बदलावों के बीच संबंध पाया गया है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि ImP अल्जाइमर का कारण है या इसे कम करने से बीमारी को रोका जा सकता है। किसी भी सप्लीमेंट, प्रोबायोटिक या उपचार को डॉक्टर की सलाह के बिना शुरू न करें।

  • कितने बीघा जमीन’ पर था अकबर का अधिकार? करोड़ों बीघा वाले दावे की क्या है सच्चाई:

    कितने बीघा जमीन’ पर था अकबर का अधिकार? करोड़ों बीघा वाले दावे की क्या है सच्चाई:

    कितने बीघा जमीन’ पर था अकबर का अधिकार? करोड़ों बीघा वाले दावे की क्या है सच्चाई:

    नई दिल्ली: मुगल सम्राट अकबर का नाम भारतीय इतिहास के सबसे बड़े शासकों में लिया जाता है। उसके शासनकाल में मुगल साम्राज्य का विस्तार काफी बड़े भूभाग तक हो गया था। यही वजह है कि अकबर की संपत्ति और उसके समय की जमीन व्यवस्था को लेकर आज भी कई सवाल लोगों के मन में आते हैं। इनमें एक सवाल यह भी है कि आखिर अकबर के पास कितनी जमीन थी और आज वह जमीन कहां है?

    हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। अकबर के साम्राज्य के कुल क्षेत्रफल को उसकी निजी खेती या निजी खेत कहना ऐतिहासिक रूप से सही नहीं होगा। उस दौर में जमीन पर शाही राजस्व अधिकार, जागीर, खालिसा और किसानों के खेती के अधिकार जैसी अलग-अलग व्यवस्थाएं मौजूद थीं।

    अकबर के साम्राज्य का क्षेत्र कितना बड़ा था?

    अकबर के शासनकाल के अंतिम वर्षों तक मुगल साम्राज्य का विस्तार उत्तर भारत के बड़े हिस्से के साथ-साथ गुजरात, बंगाल, बिहार, मालवा और दक्कन के कुछ क्षेत्रों तक हो चुका था। साम्राज्य का क्षेत्र अलग-अलग समय पर बदलता रहा और इसमें खेती योग्य जमीन के अलावा जंगल, पहाड़, नदियां और बंजर क्षेत्र भी शामिल थे।

    इसलिए पूरे साम्राज्य के क्षेत्रफल को बीघा में बदलकर यह कहना कि अकबर इतने करोड़ बीघा खेत का निजी मालिक था, सही निष्कर्ष नहीं होगा।

    क्या थी खालिसा जमीन?

    मुगल प्रशासन में खालिसा उन इलाकों को कहा जाता था जिनसे मिलने वाला राजस्व सीधे शाही खजाने में जाता था। इसका इस्तेमाल शाही प्रशासन और शासन के खर्चों को पूरा करने में किया जाता था।

    इसके अलावा बड़ी मात्रा में जमीन जागीर व्यवस्था के तहत अधिकारियों और सैन्य सरदारों को राजस्व वसूली के अधिकार के रूप में दी जाती थी। जागीर का मतलब यह नहीं था कि संबंधित व्यक्ति जमीन का आधुनिक अर्थों में निजी मालिक बन गया था।

    राजा टोडरमल की जमीन नापने की व्यवस्था

    अकबर के शासनकाल में राजस्व व्यवस्था को व्यवस्थित करने में राजा टोडरमल की महत्वपूर्ण भूमिका थी। जमीन की पैमाइश और उससे मिलने वाले राजस्व का आकलन करने के लिए एक अधिक व्यवस्थित प्रणाली विकसित की गई।

    इसी दौर में इलाही गज और जमीन की माप से जुड़ी इकाइयों का इस्तेमाल किया गया। हालांकि आज इस्तेमाल होने वाले बीघा का आकार पूरे भारत में एक जैसा नहीं है। अलग-अलग क्षेत्रों में बीघा का क्षेत्रफल अलग रहा है। इसलिए अकबर के समय के एक बीघा को सीधे आज के हर इलाके के बीघा या एक निश्चित एकड़ में बदलना भी सावधानी के बिना सही नहीं होगा।

    क्या अकबर के पास करोड़ों बीघा निजी खेत थे?

    इस दावे को समझने के लिए मुगलकालीन भूमि व्यवस्था को देखना जरूरी है। अकबर का साम्राज्य बहुत बड़ा था, लेकिन उस पूरे भूभाग को सम्राट की निजी कृषि भूमि नहीं माना जा सकता।

    उस समय किसान जमीन पर खेती करते थे और राज्य उनसे राजस्व वसूलता था। जमीन के अलग-अलग हिस्सों का प्रशासनिक दर्जा भी अलग था। इसलिए पूरे मुगल साम्राज्य के क्षेत्रफल को बीघा में बदलकर उसे अकबर के निजी खेतों का आंकड़ा बताना भ्रामक होगा।

    फिर आज वे जमीनें कहां हैं?

    मुगल साम्राज्य समाप्त होने के बाद उसकी प्रशासनिक और राजस्व व्यवस्था भी बदलती गई। ब्रिटिश शासन के दौरान भूमि व्यवस्था में कई बड़े बदलाव हुए। आजादी के बाद भारत के अलग-अलग राज्यों में जमींदारी उन्मूलन और भूमि सुधार कानून लागू हुए।

    इस प्रक्रिया के बाद जमीन के स्वामित्व और खेती के अधिकारों का स्वरूप काफी बदल गया। इसलिए आज किसी एक व्यक्ति या परिवार के पास अकबर के समय की करोड़ों बीघा जमीन मौजूद होने की बात नहीं कही जा सकती।

    ऐतिहासिक इमारतें जरूर आज भी मौजूद हैं

    अकबर के शासनकाल से जुड़ी कई महत्वपूर्ण इमारतें आज भी भारत की ऐतिहासिक धरोहर का हिस्सा हैं। आगरा किला, फतेहपुर सीकरी और अकबर से जुड़े कई अन्य स्मारक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और अन्य संबंधित संस्थाओं के संरक्षण में हैं।

    लेकिन इन स्मारकों के आसपास की हर जमीन को अकबर की निजी जमीन कहना भी सही नहीं होगा। आज उनका महत्व मुख्य रूप से ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर के रूप में है।

    इसलिए अगर सवाल यह है कि “अकबर के पास कितने बीघा खेत थे?”, तो इसका कोई विश्वसनीय एकल आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। हां, यह जरूर कहा जा सकता है कि उसके शासनकाल में मुगल साम्राज्य का विशाल भूभाग एक जटिल राजस्व व्यवस्था के तहत संचालित होता था और उसकी आय का बड़ा हिस्सा कृषि भूमि से मिलने वाले राजस्व पर निर्भर था।

  • कुंवारे रह जाएंगे लड़के! शादी से पहले सुनाने होंगे 7 पूर्वजों के नाम; कजाकिस्तान की इस रस्म ने दुनिया को किया हैरान..

    कुंवारे रह जाएंगे लड़के! शादी से पहले सुनाने होंगे 7 पूर्वजों के नाम; कजाकिस्तान की इस रस्म ने दुनिया को किया हैरान..

    कुंवारे रह जाएंगे लड़के! शादी से पहले सुनाने होंगे 7 पूर्वजों के नाम; कजाकिस्तान की इस रस्म ने दुनिया को किया हैरान..

    सोशल मीडिया पर इन दिनों कजाकिस्तान की एक प्राचीन शादी परंपरा‘झेति अता’ (Zheti Ata) वायरल हो रही है। इसका मतलब है ‘सात पूर्वज’, जहां शादी तय करने से पहले वर-वधू को अपने सात पीढ़ियों के पूर्वजों के नाम याद होने चाहिए। अगर दोनों पक्षों में सातवीं पीढ़ी तक कोई सामान्य पूर्वज मिल जाए, तो विवाह अमान्य माना जाता है। यह परंपरा न सिर्फ रक्त संबंधों से बचाती है, बल्कि आनुवंशिक बीमारियों को रोकने का वैज्ञानिक आधार भी रखती है।

    परंपरा का ऐतिहासिक महत्व

    झेति अता की जड़ें 16वीं-17वीं शताब्दी में हैं। कजाक खानेट के शासक येसिम खान ने सात पीढ़ियों तक रक्त संबंधी विवाह पर मौत की सजा का फरमान जारी किया था। बाद में तौके खान के ‘झेति झार्गी’ कानून में इसे शामिल किया गया, जो आदत और शरिया पर आधारित था। कजाक संस्कृति में ‘शेजिरे’ नामक मौखिक वंशावली प्रथा से हर व्यक्ति बचपन से ही अपने पूर्वजों के नाम रटता है। इसका उद्देश्य कबीले की शुद्धता बनाए रखना था। उल्लंघन पर कबीले से निष्कासन या कठोर सजा दी जाती थी।

    शादी की प्रक्रिया में भूमिका

    शादी तय होते ही दोनों पक्ष पूर्वजों की सूची साझा करते हैं। पिता, दादा से शुरू होकर सातवीं पीढ़ी तक जांच होती है। कभी-कभी 10 पीढ़ियों तक देखा जाता है। ग्रामीण इलाकों में आज भी यह सख्ती से निभाई जाती है, जबकि शहरों में कम। न जानने पर व्यक्ति को ‘अनाथ’ माना जाता है। यह परंपरा न केवल विवाह को वैध बनाती है, बल्कि सांस्कृतिक पहचान भी मजबूत करती है।

    अन्य अनोखी रस्में

    कजाकिस्तान की संस्कृति में शादियां फिल्मी अंदाज वाली हैं। अगर खर्च न हो, तो ‘अलाकाचू’ (Alakachu) रस्म अपनाई जाती है, जहां वधू की सहमति से ‘अपहरण’ होता है। दूल्हा दहेज नहीं लेता, बल्कि ‘खलीम’ (Khalim) के तहत वधू परिवार को उपहार देता है। यह सम्मान और आर्थिक क्षमता का प्रतीक है।

    सोशल मीडिया पर धूम

    वायरल वीडियो के बाद भारतीय नेटिजन्स ने इसे गुजरात या अरुणाचल की परंपराओं से जोड़ा। कुछ ने लिखा, “विज्ञान और परंपरा का कमाल!” ग्रामीण कजाकिस्तान में जीवित यह प्रथा आधुनिक कानूनों में कमजोर पड़ी है, लेकिन सांस्कृतिक रूप से प्रासंगिक बनी हुई है। यह दर्शाता है कि प्राचीन बुद्धिमत्ता आज भी प्रासंगिक है।