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  • पत्नी सिर्फ बच्चों पर ध्यान देती थी…’ इस छोटी सी जलन में पति ने 20 साल तक घर में नहीं बोला एक भी शब्द

    पत्नी सिर्फ बच्चों पर ध्यान देती थी…’ इस छोटी सी जलन में पति ने 20 साल तक घर में नहीं बोला एक भी शब्द

    जापान के नारा में रहने वाले ओटो कातायामा ने पत्नी से जलन के कारण 1 छत के नीचे रहते हुए 20 साल तक बातचीत बंद रखी. जानें 18 साल के बेटे ने उनका किस तरह से पैचअप करवाया.

    पत्नी सिर्फ बच्चों पर ध्यान देती थी…’ इस छोटी सी जलन में पति ने 20 साल तक घर में नहीं बोला एक भी शब्द

    ‘पत्नी सिर्फ बच्चों पर ध्यान देती थी…’ इस छोटी सी जलन में पति ने 20 साल तक घर में नहीं बोला एक भी शब्द

    Zara Hatke News: जापान के नारा शहर में रहने वाले ओटो कातायामा ने अपनी पत्नी युमी से पूरे 20 साल तक सिर्फ इसलिए बातचीत नहीं की क्योंकि उन्हें अपने ही नवजात बच्चों से जलन (Jealousy) होने लगी थी. साल 1997 से शुरू हुआ यह अजीबोगरीब सिलसिला तब खुला जब उनके 18 वर्षीय सबसे छोटे बेटे योशिकी ने 2017 में एक टेलीविजन रियलिटी शो ‘टीवी होक्काइडो’ को पत्र लिखकर मदद मांगी. बेटे को डर था कि उसके पिता ओटो अब नौकरी से रिटायर होने वाले हैं और अगर यह चुप्पी नहीं टूटी, तो चौबीसों घंटे घर में रहने से पूरा परिवार मानसिक रूप से तबाह हो जाएगा.

     

     

    ‘खामोशी के बीच हुआ तीसरे बच्चे का जन्म’

    इस दो दशक लंबे गतिरोध के दौरान दोनों एक ही छत के नीचे रहे, तीन बच्चों की परवरिश की और रोज साथ खाना भी खाया. यहां तक कि इस खामोशी के बीच ही उनके तीसरे बच्चे का जन्म भी हुआ था. लेकिन बातचीत के नाम पर ओटो अपनी पत्नी के सवालों का जवाब कभी वाक्यों में नहीं देते थे. वे केवल अपना सिर हिलाते या सिर्फ ‘कूं-कूं’ (Grunts) जैसी अधूरी आवाजें निकालकर रह जाते थे. इसके विपरीत, वे अपने बच्चों से बिल्कुल सामान्य और हंसकर बात करते थे, जिससे घर का माहौल और भी अजीब हो जाता था.

    पहली रोमांटिक डेट वाली बेंच पर बैठकर मांगी माफी

    स्ट्रेट्स टाइम्स के अनुसार, रिश्ते की यह बर्फ साल 2017 में तब पिघला जब टीवी शो के मेकर्स दोनों को नारा पार्क (Nara Park) की उसी पुरानी बेंच पर ले गए जहां दशकों पहले वे अपनी पहली रोमांटिक डेट पर मिले थे. छिपे हुए कैमरों और रोते हुए बच्चों के सामने ओटो ने 20 साल बाद अपना पहला वाक्य बोला- ‘कुछ ऐसा समय हो गया है जब हमने आपस में बात की थी.’ उन्होंने स्वीकार किया कि पत्नी का पूरा ध्यान बच्चों पर चले जाने से वे खुद को उपेक्षित (Neglected) महसूस कर रहे थे और इसी बचकाने अहंकार में उन्होंने बोलना बंद कर दिया था.

    आपके लिए और..

     साइलेंट ट्रीटमेंट पार्टनर को सजा देने जैसा…

    जापान में इस वायरल मामले ने रिटायर्ड हस्बैंड सिंड्रोम (Retired Husband Syndrome) और रिश्तों में दिए जाने वाले साइलेंट ट्रीटमेंट (Silent Treatment) के मेंटल साइड इफेक्ट्स पर एक गंभीर बहस छेड़ दी है. एक्सपर्ट्स के अनुसार, पार्टनर को सजा देने के लिए इस तरह सालों तक खामोश रहना एक प्रकार का गंभीर भावनात्मक शोषण (Emotional Abuse) है, जो किसी भी हंसते-खेलते परिवार को भीतर से खोखला कर सकता है.

    दोस्तों से शादी करना पसंद कर रहे जापानी

    इस कहानी ने जापान में रिश्तों के बदलते ट्रेंड्स की ओर भी ध्यान खींचा. उसी दौरान, ‘द इंडिपेंडेंट’ की रिपोर्ट में बताया गया कि कुछ लोग पारंपरिक रोमांटिक रिश्तों के बजाय करीबी दोस्तों से शादी करना पसंद कर रहे थे. 2017 में जारी एक सरकारी सर्वे में यह भी पाया गया कि 69 प्रतिशत जापानी पुरुषों और 59 प्रतिशत जापानी महिलाओं का कोई पार्टनर नहीं था.

  • शादी जिससे होनी है उसी से होगी क्या सच में शादी प्रारब्ध से तय होती है..

    शादी जिससे होनी है उसी से होगी क्या सच में शादी प्रारब्ध से तय होती है..

    शादी जिससे होनी है उसी से होगी क्या सच में शादी प्रारब्ध से तय होती है..

    भारतीय दर्शन और आध्यात्मिक परंपरा में यह माना जाता है कि जीवन की कुछ महत्वपूर्ण घटनाएं प्रारब्ध से जुड़ी होती हैं। विवाह भी उनमें से एक माना जाता है। इस दृष्टिकोण के अनुसार जिससे और जिस समय विवाह होना होता है वही संयोग अपने समय पर बनता है।

    इस विचार को समझने के लिए एक सरल उदाहरण लिया जाता है।

    क्या आपने अपने माता पिता को चुना था

    नहीं।

    जब आपने जन्म लिया तो माता पिता पहले से आपके जीवन का हिस्सा थे। उसी तरह यह माना जाता है कि भाई बहन मित्र पति पत्नी और संतान जैसे कई रिश्ते भी जीवन में अपने समय पर आते हैं।

    आज के समय में बहुत से लोग अपने लिए जीवनसाथी खोजने की कोशिश करते हैं। कई बार रिश्ते बनते हैं लंबे समय तक चलते हैं और फिर किसी कारण टूट भी जाते हैं। ऐसे अनुभव व्यक्ति को दुख और निराशा दे सकते हैं।

    आध्यात्मिक दृष्टिकोण यह कहता है कि यदि कोई रिश्ता आपके जीवन के लिए नियत नहीं है तो वह किसी न किसी कारण समाप्त हो जाएगा। और जो रिश्ता आपके प्रारब्ध में है वह उचित समय पर आपके जीवन में अवश्य आएगा।

    इसका अर्थ यह नहीं है कि व्यक्ति प्रयास करना छोड़ दे। इसका अर्थ केवल इतना है कि परिणाम को लेकर अत्यधिक चिंता और बेचैनी न रखें।

    जब व्यक्ति केवल जीवनसाथी की तलाश में ही उलझा रहता है तो कई बार वह अपने महत्वपूर्ण कार्यों जैसे पढ़ाई करियर आत्मविकास और परिवार की जिम्मेदारियों से दूर हो जाता है। गलत लोगों पर विश्वास करने से मानसिक आघात भी मिल सकता है और लोगों पर से भरोसा कम होने लगता है।

    भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में एक विचार यह भी है कि जीवन में जो कर्म वर्तमान में आपके सामने हैं उन पर पूरी निष्ठा से ध्यान देना चाहिए। यदि इस समय आपका कर्तव्य पढ़ाई है तो पढ़ाई करें। यदि नौकरी है तो उसे ईमानदारी से करें। यदि सेवा का अवसर है तो सेवा करें।

    समय आने पर धन संबंधी अवसर भी मिलते हैं और उचित जीवनसाथी का संयोग भी बनता है। इसलिए वर्तमान कर्म पर ध्यान देना और परिणाम को ईश्वर पर छोड़ देना मानसिक शांति का मार्ग माना गया है।

    हालांकि यह एक आध्यात्मिक और दार्शनिक दृष्टिकोण है। विवाह जीवन का महत्वपूर्ण निर्णय है इसलिए केवल भाग्य के भरोसे रहने के बजाय सही जानकारी लेना परिवार से विचार करना और समझदारी से निर्णय लेना भी उतना ही आवश्यक है।

    जीवन में कर्म और धैर्य दोनों का अपना महत्व है। वर्तमान में अपना श्रेष्ठ कर्म करते रहें और भविष्य को लेकर अनावश्यक चिंता करने के बजाय सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखें।

  • शादी की पहली रात के बाद दुल्हन की बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में सामने आया चौंकाने वाला सच..

    शादी की पहली रात के बाद दुल्हन की बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में सामने आया चौंकाने वाला सच..

    शादी की पहली रात के बाद दुल्हन की बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में सामने आया चौंकाने वाला सच..

    उत्तर प्रदेश में शादी के अगले ही दिन एक नवविवाहिता की तबीयत अचानक बिगड़ गई। पेट में तेज दर्द होने पर परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि वह गर्भवती है और प्रसव का समय आ चुका है। यह सुनकर परिवार के लोग हैरान रह गए।

    सुहागरात के बाद शुरू हुआ तेज दर्द

    शादी के बाद दुल्हन अपने ससुराल पहुंची थी। अगले दिन घर में रिश्तेदार भी मौजूद थे। इसी दौरान रात में उसे पेट में तेज दर्द की शिकायत हुई। परिजनों ने पहले घरेलू उपाय किए, लेकिन दर्द कम नहीं हुआ तो उसे अस्पताल ले जाया गया।

    अस्पताल में सामने आया चौंकाने वाला सच

    अस्पताल में जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि महिला गर्भवती है और जल्द ही प्रसव होने वाला है। कुछ ही देर बाद उसने एक बच्चे को जन्म दिया।

    परिवार रह गया स्तब्ध

    यह जानकारी मिलते ही दूल्हा और उसके परिवार के लोग सकते में आ गए। इसके बाद दुल्हन के मायके पक्ष को सूचना दी गई और उन्हें अस्पताल बुलाया गया।

    नवजात के साथ मायके भेजी गई दुल्हन

    अगले दिन दुल्हन को नवजात शिशु के साथ उसके मायके भेज दिया गया। यह मामला इलाके में चर्चा का विषय बन गया।

  • रात में लड़कियां गूगल पर क्या सर्च करती हैं? जानिए वो वायरल चीजें जो रहती हैं ट्रेंड में

    रात में लड़कियां गूगल पर क्या सर्च करती हैं? जानिए वो वायरल चीजें जो रहती हैं ट्रेंड में

    रात में लड़कियां गूगल पर क्या सर्च करती हैं? जानिए वो वायरल चीजें जो रहती हैं ट्रेंड में

    आज के समय में किसी भी जानकारी के लिए सबसे पहले लोग गूगल का सहारा लेते हैं। चाहे बात फैशन की हो, पढ़ाई की हो, मनोरंजन की या फिर सोशल मीडिया पर चल रहे ट्रेंड्स की, इंटरनेट हर सवाल का जवाब देने का सबसे आसान माध्यम बन चुका है। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल भी आता है कि रात के समय लड़कियां गूगल पर सबसे ज्यादा क्या सर्च करती हैं। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि हर व्यक्ति की पसंद और सर्च आदतें अलग होती हैं, इसलिए इसे सभी पर लागू नहीं माना जा सकता।

    वायरल रील्स और ट्रेंडिंग वीडियो

    रात के समय कई लोग सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे रील्स, ट्रेंडिंग वीडियो और नए कंटेंट को देखना पसंद करते हैं। गूगल पर अक्सर लोग ऐसे गानों, डायलॉग्स और वीडियो ट्रेंड्स की जानकारी खोजते हैं जो अभी इंटरनेट पर छाए हुए हों।

    सेलिब्रिटी न्यूज और गॉसिप

    कई लोग रात में अपने पसंदीदा स्टार्स, एक्ट्रेस, इन्फ्लुएंसर या वायरल पर्सनैलिटी से जुड़ी खबरें सर्च करते हैं। कौन क्या पहन रहा है, किसका नया फोटोशूट आया है, कौन सा वीडियो वायरल हुआ है—ऐसी चीजें भी काफी ट्रेंड में रहती हैं।

    फैशन, मेकअप और वायरल हैक्स

    रात के समय फैशन और ब्यूटी से जुड़े वायरल हैक्स भी खूब सर्च किए जाते हैं। जैसे— आसान मेकअप टिप्स, स्किन ग्लो के घरेलू उपाय, वायरल आउटफिट आइडियाज, और सोशल मीडिया पर चल रहे नए स्टाइल ट्रेंड्स।

    हर व्यक्ति की पसंद होती है अलग

    यह कहना सही नहीं होगा कि सभी लड़कियां या सभी लोग एक जैसी चीजें ही सर्च करते हैं। किसी की रुचि पढ़ाई में होती है, कोई करियर, हेल्थ, रेसिपी, ट्रैवल या टेक्नोलॉजी से जुड़ी जानकारी खोजता है। गूगल पर सर्च की जाने वाली चीजें व्यक्ति की उम्र, जरूरत, रुचि और परिस्थितियों के अनुसार बदलती रहती हैं।

  • पति हुआ गायब तो सास ने देवर से करवा दी शादी.. 25 साल बाद लौटा ‘सुहाग’.. उलझन के साथ आई खुशी

    पति हुआ गायब तो सास ने देवर से करवा दी शादी.. 25 साल बाद लौटा ‘सुहाग’.. उलझन के साथ आई खुशी

    पति हुआ गायब तो सास ने देवर से करवा दी शादी.. 25 साल बाद लौटा ‘सुहाग’.. उलझन के साथ आई खुशी

    बिजनौर (उत्तर प्रदेश): एक ऐसी कहानी जो खुशी और गहरी उलझन दोनों को साथ लेकर आई है। उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के नहटौर कस्बे में 25 साल पहले लापता हुए एक व्यक्ति का अचानक मिलना पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गया है।

    तीन दिन पहले नहटौर के नया बाजार में फटे कपड़ों और लंबी दाढ़ी वाले एक अधेड़ व्यक्ति को बदहवास हालत में घूमते देख स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी। थाना प्रभारी रविंद्र प्रताप सिंह ने जब उस व्यक्ति से बात की, तो उसने टूटी-फूटी भाषा में अपना नाम हंसा सिंह बताया और घर का पता पंजाब के कपूरथला जिले के शिवदयाल वाला गांव बताया।

    पुलिस ने गूगल मैप्स और पंजाबी भाषा जानने वालों की मदद से कड़ी जोड़ी। पंजाब पुलिस से संपर्क किया गया। मात्र 72 घंटों के अंदर हंसा सिंह के छोटे भाई और गांव के सरपंच नहटौर पहुंच गए। शुरुआत में भाई भी हंसा को पहचान नहीं पाए, लेकिन जब हंसा ने बचपन की कई यादें और परिवार के नाम बताए, तो सबकी आंखें नम हो गईं।

    हंसा सिंह की शादी को मात्र दो साल ही हुए थे कि वे अचानक लापता हो गए। परिवार ने तीन साल तक उनका इंतजार किया। जब कोई सुराग नहीं मिला तो परिजनों ने उन्हें मृत मान लिया और हंसा की पत्नी विमला देवी का विवाह उनके छोटे भाई सुखा सिंह (देवर) से कर दिया। पिछले 22 साल से विमला देवी सुखा सिंह के साथ सुखी गृहस्थी बसा रही हैं। उनके तीन बच्चे हैं और एक बेटी की शादी भी हो चुकी है।

    उलझन के साथ आई खुशी

    अब 25 साल बाद असली पति हंसा सिंह के लौट आने से पूरे परिवार में खुशी के साथ-साथ गहरी उलझन भी पैदा हो गई है। विमला देवी इस वक्त दोहरी भावनाओं से गुजर रही हैं। एक तरफ पहला पति जिंदा मिलने की खुशी है, तो दूसरी तरफ 22 साल से साथ निभा रहे पति और तीन बच्चों का भविष्य।

    मां हुई भावुक,कहा-चैन से मर सकूंगी

    हंसा सिंह की बुजुर्ग मां जट्टो कौर ने फोन पर बेटे की आवाज सुनकर रोते हुए कहा, “मरने से पहले मेरा बेटा मिल गया… अब मैं चैन से मर सकूंगी।”नहटौर पुलिस की इस संवेदनशीलता की हर तरफ तारीफ हो रही है। पुलिस ने न सिर्फ उस व्यक्ति को ढूंढकर परिवार से मिलाया, बल्कि उसे नहलाया-धुलाया, नए कपड़े पहनाए और घंटों धैर्यपूर्वक उसकी याददाश्त ताजा करने की कोशिश की।फिलहाल हंसा सिंह अपने भाई और सरपंच के साथ पंजाब रवाना हो गए हैं।

  • सुहागरात पर दुल्हन की ‘परीक्षा’! इस कुप्रथा में कमरे के बाहर इंतजार करता था पूरा गांव

    सुहागरात पर दुल्हन की ‘परीक्षा’! इस कुप्रथा में कमरे के बाहर इंतजार करता था पूरा गांव

    सुहागरात पर दुल्हन की ‘परीक्षा’! इस कुप्रथा में कमरे के बाहर इंतजार करता था पूरा गांव

    दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में शादी से जुड़े कई तरह के रीति-रिवाज देखने को मिलते हैं। इनमें कुछ परंपराएं सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा हैं, जबकि कुछ ऐसी भी रही हैं जिनकी मानवाधिकार संगठनों और समाज के बड़े वर्ग ने कड़ी आलोचना की है। ऐसी ही एक प्रथा भारत के एक विशेष समुदाय से जुड़ी रही है, जिसे लेकर वर्षों से विवाद होता रहा है।

    क्या थी यह परंपरा?

    रिपोर्टों के अनुसार, इस समुदाय में विवाह के बाद नवविवाहित जोड़े को एक सफेद चादर दी जाती थी। माना जाता था कि पहली रात के बाद इस चादर को समुदाय के कुछ लोगों के सामने देखा जाता था और उसके आधार पर दुल्हन के चरित्र को लेकर निष्कर्ष निकाले जाते थे।

    कमरे के बाहर इंतजार करते थे लोग

    बताया जाता है कि इस प्रक्रिया के दौरान समुदाय के कुछ सदस्य और पंचायत से जुड़े लोग कमरे के बाहर मौजूद रहते थे। अगली सुबह चादर की जांच की जाती थी। इस प्रथा को कथित तौर पर दुल्हन की तथाकथित “पवित्रता” से जोड़कर देखा जाता था।

    लंबे समय से होती रही आलोचना

    सामाजिक कार्यकर्ताओं, महिला अधिकार संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों ने इस परंपरा की लंबे समय से आलोचना की है। उनका कहना है कि किसी महिला की “वर्जिनिटी” का इस तरह परीक्षण करना न केवल वैज्ञानिक रूप से गलत है, बल्कि उसकी गरिमा, निजता और मौलिक अधिकारों का भी उल्लंघन है।

    बदल रहा है समाज

    समय के साथ इस प्रथा का व्यापक विरोध हुआ और कई स्थानों पर इसके खिलाफ अभियान भी चलाए गए। आज समाज में जागरूकता बढ़ने के साथ ऐसी परंपराओं को समाप्त करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। कानून और सामाजिक संस्थाएं भी महिलाओं की गरिमा और समान अधिकारों की रक्षा पर जोर देती हैं।

    यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि समाज में मौजूद कुछ पुरानी परंपराओं की समय-समय पर समीक्षा और सुधार आवश्यक है, ताकि सभी लोगों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा की जा सके।

  • 38 वर्षीय दूल्हे से होने वाली थी शादी, लेकिन ऐन वक्त पर लापता हो गई 20 वर्षीय युवती…

    38 वर्षीय दूल्हे से होने वाली थी शादी, लेकिन ऐन वक्त पर लापता हो गई 20 वर्षीय युवती…

    38 वर्षीय दूल्हे से होने वाली थी शादी, लेकिन ऐन वक्त पर लापता हो गई 20 वर्षीय युवती…
    1. गुमला में शादी से छह दिन पहले दुल्हन लापता।

    2. 20 वर्षीय युवती 15 दिन से दूल्हे के घर रह रही थी।

    3. दूल्हे के परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।

    डुमरडीह गांव निवासी 38 वर्षीय बिजला उरांव की एक 20 वर्षीय युवती से तय हुई थी। दोनों परिवारों की सहमति के बाद युवती करीब 15 दिन पहले दूल्हे के घर आकर रह रही थी।

    पांच जुलाई को मड़वा और छह जुलाई को विवाह होना था। शादी की लगभग सभी तैयारियां पूरी कर ली गई थीं। दूल्हा-दुल्हन के कपड़े, भोजन की व्यवस्था और मेहमानों के स्वागत की तैयारियां भी पूरी हो चुकी थीं।

    स्वजन के अनुसार सोमवार की शाम युवती घर से कुछ सामान खरीदने की बात कहकर निकली, लेकिन देर रात तक वापस नहीं लौटी। काफी खोजबीन के बाद भी उसका कोई सुराग नहीं मिलने पर दूल्हे के स्वजन युवती के पिता और शादी के अगुवा के साथ सदर थाना पहुंचे तथा युवती की सकुशल बरामदगी की मांग की। पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है।

    स्वजन ने बताया कि युवती का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है। इसी कारण विवाह का खर्च वहन करने में कठिनाई होने पर आपसी सहमति से युवती को शादी से पहले ही दूल्हे के घर भेज दिया गया था, जहां से विवाह संपन्न होना था।

    वहीं दूल्हे के परिवार का कहना है कि युवती ने कभी शादी से इनकार नहीं किया और पिछले 15 दिनों से घर में सामान्य रूप से रह रही थी। ऐसे में शादी से ठीक पहले उसका अचानक लापता हो जाना पूरे परिवार के लिए चिंता का विषय बन गया है। वहीं दूल्हे की उम्र अधिक होने के कारण ग्रामीणों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं भी हो रही हैं।

  • प्रेमी से मिलने पहुंची महिला के टूट गए सारे अरमान, घर पहुंचते ही हुआ बड़ा खुलासा…

    प्रेमी से मिलने पहुंची महिला के टूट गए सारे अरमान, घर पहुंचते ही हुआ बड़ा खुलासा…

    प्रेमी से मिलने पहुंची महिला के टूट गए सारे अरमान, घर पहुंचते ही हुआ बड़ा खुलासा…

    (इमेज- सोशल मीडिया)

    दिल की धड़कन बढ़ाने वाली मुलाकात कभी-कभी दिल तोड़ देने वाली भी साबित हो सकती है. ऐसी ही एक घटना सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है जिसमें एक प्रेमिका बन-ठन कर अपने प्रेमी के घर पहुंची लेकिन गंदगी देखकर उसके सारे अरमान चूर-चूर हो गए. एनी नाम की युवती अपने प्रेमी क्रिस से बेहद प्यार करती थी. दोनों की मुलाकातें बाहर होती रहती थीं. रोमांटिक बातें, घूमना-फिरना और सपने देखना जारी था. एनी सोचती थी कि एक दिन क्रिस के घर जाकर उनके रिश्ते को और मजबूत बनाएगी. आखिरकार वह दिन आ गया.

    एनी खूब सज-संवर कर, उम्मीदों से भरी अपने प्रेमी के घर पहुंची थी. लेकिन दरवाजा खुलते ही जो नजारा सामने आया, उसने एनी को सन्न कर दिया. घर के अंदर कबाड़ और गंदगी का अंबार लगा हुआ था. कमरा पूरी तरह अस्त-व्यस्त था. कपड़े, खाने के बर्तन, कचरा और अनगिनत सामान बिखरा पड़ा था. सफाई का नामोनिशान तक नहीं था. एनी के पैरों तले से जमीन खिसक गई. वह कुछ पल तो स्तब्ध रह गई. टीएलसी के एक शो में इस पूरी घटना को टेलीकास्ट किया गया.

    टूट गए अरमान
    एनी ने इस घटना को शेयर करते हुए कहा, “मैं बन-ठन कर गई थी, सपने देख रही थी कि हम साथ समय बिताएंगे. लेकिन अंदर घुसते ही गंदगी देखकर मेरा दिल टूट गया. क्रिस गंदगी में रहने का आदी था. उसका कमरा कबाड़खाना बन गया था.” उसने कुछ तस्वीरें भी पोस्ट की हैं जिनमें गंदगी साफ नजर आ रही है.

    रिश्तों पर असर
    साफ-सफाई ना सिर्फ स्वास्थ्य के लिए जरूरी है बल्कि व्यक्तित्व को भी दर्शाती है. मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, गंदगी में रहने वाले लोग अक्सर अनुशासनहीन या तनावग्रस्त होते हैं. एनी जैसी कई लड़कियां रिश्ते में आने से पहले दूसरी आदतों पर ध्यान नहीं दे पाती. बाहर मिलने पर सब कुछ परफेक्ट लगता है, लेकिन घर की सच्चाई अलग होती है. सोशल मीडिया यूजर्स इस पोस्ट पर भारी प्रतिक्रिया दे रहे हैं. एक यूजर ने लिखा, “प्यार अंधा नहीं होना चाहिए, घर देखकर ही अंदाजा लग जाता है कि इंसान कैसा है?” दूसरे ने कहा, “एनी भाग गई तो सही किया, गंदगी में रहने वाला साथ नहीं निभा सकता.” कई लड़कियां अपनी कहानियां शेयर कर रही हैं जहां उन्हें प्रेमी के घर की गंदगी का सामना करना पड़ा.

    क्रिस की आदतें
    क्रिस गंदगी में रहने का आदि था. उसके कमरे में बर्तन दिन-दिन भर पड़े रहते थे. कपड़े धोने की बजाय नये खरीद लेता था. सफाई का कोई समय नहीं था. एनी ने बताया कि वह कई बार क्रिस को सफाई के लिए कह चुकी थी लेकिन उसने गंभीरता नहीं दिखाई. यह घटना युवाओं के लिए सबक है. आज की भागती जिंदगी में कई लोग घर को नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन जब रिश्ता गंभीर होने लगता है तो छोटी-छोटी आदतें बड़ी समस्या बन जाती हैं. लोग सफाई को रिश्तों की बुनियाद बताते हुए कह रहे हैं कि गंदा इंसान ना सिर्फ खुद को बल्कि पार्टनर को भी प्रभावित करता है. स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी जोर देकर कह रहे हैं कि गंदे माहौल में रहने से तनाव, बीमारियां और डिप्रेशन बढ़ता है. एनी अब इस रिश्ते पर दोबारा सोच रही है. उसने कहा, “प्यार तो है लेकिन गंदगी बर्दाश्त नहीं हो सकती.”

  • कैसे बना आगरे का ‘पागलखाना’, क्यों हैं इतना मशहूर; जानिए इसका इतिहास..

    कैसे बना आगरे का ‘पागलखाना’, क्यों हैं इतना मशहूर; जानिए इसका इतिहास..

    कैसे बना आगरे का ‘पागलखाना’, क्यों हैं इतना मशहूर; जानिए इसका इतिहास..

    आगरा: आप सभी ने ताजमहल तो देखा होगा परंतु आगरे का पागलखाना नहीं देखा होगा. आखिर क्या वजह है कि आगरे का पागलखाना इतना मशहूर है? हमने इसके इतिहास के बारे में जानने की कोशिश की. आगरा ताजमहल, पेठा और जूते के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है. पर क्या आप जानते हैं कि पहले इसे पागलखाने के नाम से जाना जाता था?

    अब मानसिक आरोग्यशाला कहिए
    आपको बता दें कि अब इसे मानसिक आरोग्यशाला के नाम से जाना जाता है. इसके निर्माण की कहानी भी एकदम अलग है. ऐसा कहा जाता है कि क्रांतिकारियों के विद्रोह के चलते एक अंग्रेज अफसर पागल हो गए. इसके साथ उस अंग्रेज अफसर को हैजा हो गया और उसकी मौत हो गई. इसी रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने यह निर्णय लिया आगरा में मानसिक आरोग्यशाला का निर्माण कराया जाए.

    लेफ्टिनेंट जनरल जॉन रेचल केल्विन विद्रोह से घबरा गया
    आगरा क्रांतिकारियों का गढ़ पहले से ही रहा है. 1857 की लड़ाई शुरू हो गई थी. झांसी में रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों को लोहे के चने चबा दिए थे. इधर मेरठ में सैनिक विद्रोही हो गए थे और आगरा में भी विद्रोह के बादल गरज रहे थे. विद्रोह देख आगरा किले का प्रभारी और लेफ्टिनेंट जनरल जॉन रेचल केल्विन पूरी तरह घबरा गया.

    केल्विन पागल हो गया
    क्रांतिकारियों की रणनीति से केल्विन पागल हो गया और उसकी दिमागी हालत खराब हो गई और फिर कुछ दिनों बाद उसकी मौत हो जाती है. अंग्रेज अफसरों ने केल्विन को आगरा किले में ही दफना दिया. आज भी उसकी कब्र आगरा किले के दीवाने आम के सामने मौजूद है.

    कोलकाता में जन्मे कैल्विन
    केल्विन का जन्म 19 मई 1807 को कोलकाता में हुआ था. तब कोलकाता बंगाल प्रेसिडेंसी का हिस्सा था. केल्विन का परिवार एग्लो इंडियन मूल का था. केल्विन की पढ़ाई ईस्ट इंडिया कंपनी कॉलेज में हर्डफोटशायर से इंग्लैंड में हुई.

    क्वीन विक्टोरिया ने बनवाया अस्पताल
    मानसिक चिकित्सालय क्वीन विक्टोरिया ने बनवाया था. इतिहासकार राजकिशोर राज्य के मुताबिक क्रांतिकारियों के डर से घबराए अंग्रेज अफसरों ने कैल्विन को आगरा किला में दफना दिया. कब्र के पास एक ब्रिटिश जमाने की तोप भी रखी हुई है.

  • 9 पत्नियों का एक पति, सबको बराबर वक्त देने के लिए बनाया टाइम टेबल; अब गिफ्ट को लेकर बढ़ी परेशानी.

    9 पत्नियों का एक पति, सबको बराबर वक्त देने के लिए बनाया टाइम टेबल; अब गिफ्ट को लेकर बढ़ी परेशानी.

    9 पत्नियों का एक पति, सबको बराबर वक्त देने के लिए बनाया टाइम टेबल; अब गिफ्ट को लेकर बढ़ी परेशानी.

    दुनिया में रिश्तों को लेकर तरह-तरह के मामले सामने आते रहते हैं, लेकिन इस शख्स की शादीशुदा जिंदगी की कहानी कुछ अलग ही है। उसकी एक या दो नहीं, बल्कि नौ पत्नियां हैं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि सभी को समय देने के लिए उसने बाकायदा एक रूटीन तक बना रखा था।

    शुरुआत में उसे लगा कि इस तरीके से वह अपनी सभी पत्नियों के साथ बराबर समय बिता पाएगा और किसी को शिकायत का मौका नहीं मिलेगा। लेकिन कुछ समय बाद यही व्यवस्था उसके लिए परेशानी का कारण बन गई।

    बताया जाता है कि यह शख्स खुद को खुले रिश्तों की सोच रखने वाला व्यक्ति मानता है। इसी सोच के चलते उसने अलग-अलग महिलाओं के साथ विवाह किया। जब पत्नियों की संख्या बढ़ती गई तो सभी के लिए समय निकालना उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती बन गया।

    इसके बाद उसने एक टाइम टेबल तैयार किया।

    किस दिन किस पत्नी के साथ समय बिताना है, किसके साथ बाहर जाना है और किसके साथ निजी वक्त गुजारना है, इसका पूरा हिसाब रखने की कोशिश की गई। उसका मकसद था कि किसी पत्नी को ऐसा न लगे कि उसे बाकी के मुकाबले कम महत्व दिया जा रहा है।

    लेकिन कुछ समय बाद उसे महसूस हुआ कि रिश्तों को सिर्फ एक तय रूटीन के हिसाब से चलाना उतना आसान नहीं है।

    उसने बताया कि शुरुआत में यह व्यवस्था ठीक लग रही थी, लेकिन धीरे-धीरे उसे ऐसा महसूस होने लगा जैसे वह अपनी इच्छा से नहीं बल्कि एक तय कार्यक्रम के दबाव में रिश्ते निभा रहा हो।

    आखिरकार उसने इस टाइम टेबल को छोड़ दिया।

    हालांकि टाइम टेबल खत्म होने के बाद भी उसकी परेशानियां पूरी तरह खत्म नहीं हुईं। अब उसके सामने एक नई समस्या खड़ी हो गई है—तोहफों को लेकर।

    अगर वह किसी एक पत्नी के लिए महंगा या खास गिफ्ट खरीदता है तो दूसरी पत्नियों को बुरा लगने लगता है। उसे डर रहता है कि कहीं किसी को यह महसूस न हो कि उसे कम महत्व दिया जा रहा है।

    यानी नौ रिश्तों को बराबरी से संभालने की कोशिश में अब सबसे मुश्किल काम यह तय करना हो गया है कि किसे क्या दिया जाए।

    मामला इतना बढ़ चुका है कि एक पत्नी के नाराज होकर अलग होने की धमकी देने की बात भी सामने आई है।

    इस पूरी कहानी में सबसे दिलचस्प बात यही है कि जिस व्यक्ति ने अपने रिश्तों को व्यवस्थित रखने के लिए टाइम टेबल बनाया था, वही व्यवस्था आखिरकार उसके लिए तनाव का कारण बन गई। अब वह बिना किसी तय शेड्यूल के अपनी शादीशुदा जिंदगी को संभालने की कोशिश कर रहा है।