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  • अकेलापन दूर करने के लिए की दूसरी शादी, लेकिन 48 घंटे भी नहीं टिक पाया रिश्ता… दुल्हन के जाने के बाद जो पता चला, उसने उड़ा दिए होश..

    अकेलापन दूर करने के लिए की दूसरी शादी, लेकिन 48 घंटे भी नहीं टिक पाया रिश्ता… दुल्हन के जाने के बाद जो पता चला, उसने उड़ा दिए होश..

    अकेलापन दूर करने के लिए की दूसरी शादी, लेकिन 48 घंटे भी नहीं टिक पाया रिश्ता… दुल्हन के जाने के बाद जो पता चला, उसने उड़ा दिए होश..

    सोचिए… 62 साल की उम्र में कोई व्यक्ति यह सोचकर दोबारा शादी करे कि अब जिंदगी का बाकी सफर किसी साथी के साथ सुकून से कटेगा। लेकिन शादी के महज दो दिन बाद ही ऐसा झटका लगे कि सब कुछ बदल जाए।

    उत्तर प्रदेश के कानपुर से सामने आया एक मामला इन दिनों चर्चा में है। यहां एक सेवानिवृत्त कर्मचारी ने अकेलेपन से बाहर निकलने के लिए शादी की, लेकिन कुछ ही दिनों बाद उन्होंने पुलिस का दरवाजा खटखटाना पड़ गया।

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पीड़ित व्यक्ति कानपुर के चकेरी थाना क्षेत्र में किराये के मकान में रह रहे थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात पास में रहने वाली एक महिला से हुई। धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और साथ जीवन बिताने का फैसला किया गया।

    बताया जाता है कि दोनों ने आर्य समाज मंदिर में विवाह किया। शादी के बाद बुजुर्ग ने अपनी पत्नी को महंगे उपहार, आभूषण और नकदी भी दी। उन्हें उम्मीद थी कि अब उनकी जिंदगी में फिर से खुशियां लौट आएंगी।

    लेकिन आरोप है कि शादी के करीब दो दिन बाद ही महिला अचानक घर से चली गई। पीड़ित का दावा है कि उसके साथ घर में रखी करीब तीन लाख रुपये की नकदी और लाखों रुपये के आभूषण भी गायब थे।

    शुरुआत में उन्हें लगा कि शायद किसी कारणवश महिला कहीं चली गई होगी। उन्होंने करीब डेढ़ महीने तक अपने स्तर पर उसकी तलाश की और उसके परिचितों से भी संपर्क किया, लेकिन कोई जानकारी नहीं मिल सकी।

    जब सभी प्रयास विफल हो गए, तब उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि महिला नकदी और आभूषण लेकर चली गई है।

    पुलिस का कहना है कि शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है। आरोपों की जांच की जा रही है और महिला का पता लगाने के लिए उसके परिचितों और अन्य संभावित ठिकानों पर जानकारी जुटाई जा रही है।

    फिलहाल मामले की जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि सभी तथ्यों की पुष्टि और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में लगाए गए आरोपों की जांच पूरी होने के बाद ही पूरी सच्चाई सामने आ सकेगी।

  • दूध पर जमेगी इतनी मोटी मलाई कि घी भर-भरकर निकलेगा! बस दूध उबालते समय याद रखें ये 5 आसान टिप्स..

    दूध पर जमेगी इतनी मोटी मलाई कि घी भर-भरकर निकलेगा! बस दूध उबालते समय याद रखें ये 5 आसान टिप्स..

    दूध पर जमेगी इतनी मोटी मलाई कि घी भर-भरकर निकलेगा! बस दूध उबालते समय याद रखें ये 5 आसान टिप्स..

    घर का बना देसी घी स्वाद, खुशबू और शुद्धता के मामले में बाजार के घी से कहीं बेहतर माना जाता है। लेकिन कई लोगों की शिकायत होती है कि रोजाना दूध से मलाई निकालने के बावजूद घी बहुत कम बनता है। इसकी वजह अक्सर दूध को उबालने, ठंडा करने और मलाई जमा करने का गलत तरीका होता है।

    अगर आप चाहते हैं कि दूध पर मोटी मलाई जमे और उससे ज्यादा मात्रा में घी निकले, तो ये आसान किचन टिप्स आपके बहुत काम आ सकते हैं।

    1. हमेशा फुल क्रीम दूध का इस्तेमाल करें

    अगर मकसद ज्यादा मलाई और ज्यादा घी पाना है, तो फुल क्रीम दूध सबसे बेहतर विकल्प है। इसमें फैट की मात्रा अधिक होती है, जिससे मलाई मोटी और गाढ़ी बनती है। टोंड या डबल टोंड दूध में मलाई काफी कम जमती है।

    2. दूध को धीमी आंच पर उबालें

    दूध को तेज आंच पर उबालने की बजाय धीमी या मध्यम आंच पर धीरे-धीरे उबालें। इससे दूध की ऊपरी सतह पर अच्छी मलाई बनने में मदद मिलती है और उसका प्राकृतिक फैट भी बेहतर तरीके से सुरक्षित रहता है।

    3. उबालने के तुरंत बाद फ्रिज में न रखें

    दूध उबालने के बाद उसे पहले सामान्य तापमान तक ठंडा होने दें। उसके बाद ही फ्रिज में रखें। इससे दूध की सतह पर मलाई अच्छी तरह जमती है और उसकी परत मोटी बनती है।

    4. चौड़े मुंह वाले बर्तन में रखें दूध

    दूध को स्टोर करने के लिए चौड़े बर्तन का इस्तेमाल करें। इससे दूध की सतह ज्यादा होती है, जिस कारण मलाई भी बड़ी और मोटी परत के रूप में जमती है।

    5. मलाई को सही तरीके से इकट्ठा करें

    रोजाना निकाली गई मलाई को एक साफ और ढक्कन वाले कंटेनर में फ्रिज में जमा करते रहें। जब पर्याप्त मात्रा में मलाई इकट्ठी हो जाए, तब उससे मक्खन निकालकर घी बनाएं। इससे घी की मात्रा भी ज्यादा मिलेगी और स्वाद भी बेहतरीन रहेगा।

    घी बनाते समय रखें ये जरूरी बात

    मलाई से घी बनाते समय हमेशा धीमी आंच का इस्तेमाल करें। तेज आंच पर घी जल्दी जल सकता है, जिससे उसका स्वाद और खुशबू दोनों प्रभावित हो सकते हैं। धीमी आंच पर बना घी ज्यादा सुगंधित, स्वादिष्ट और लंबे समय तक सुरक्षित रहता है।

    निष्कर्ष

    अगर आप घर पर ज्यादा मात्रा में शुद्ध देसी घी बनाना चाहते हैं, तो सिर्फ अच्छी मलाई जमा करना ही काफी नहीं है। दूध उबालने से लेकर उसे स्टोर करने और घी बनाने तक हर कदम सही तरीके से करना जरूरी है। इन 5 आसान टिप्स को अपनाकर आप कम दूध से भी ज्यादा मलाई और भरपूर घी पा सकते हैं।

  • सफेद, काला या सेंधा नमक… कौन सा है सेहत के लिए सबसे बेहतर? डॉक्टर ने बताया पूरा सच..

    सफेद, काला या सेंधा नमक… कौन सा है सेहत के लिए सबसे बेहतर? डॉक्टर ने बताया पूरा सच..

    सफेद, काला या सेंधा नमक… कौन सा है सेहत के लिए सबसे बेहतर? डॉक्टर ने बताया पूरा सच..

    Which Salt Is Good for Health: आजकल हेल्थ को लेकर जागरूक लोग अपनी डाइट में कई बदलाव कर रहे हैं। इन्हीं बदलावों में एक बड़ा सवाल यह भी है कि आखिर सफेद नमक, काला नमक, सेंधा नमक या हिमालयन पिंक सॉल्ट में से कौन सा नमक स्वास्थ्य के लिए सबसे अच्छा है। सोशल मीडिया पर अक्सर दावा किया जाता है कि पिंक सॉल्ट या सेंधा नमक सामान्य सफेद नमक से ज्यादा फायदेमंद होता है। लेकिन क्या यह दावा वैज्ञानिक रूप से सही है? इस विषय पर कैंसर विशेषज्ञ (ऑन्कोलॉजिस्ट) डॉ. जयेश शर्मा ने अहम जानकारी साझा की है। बाजार में मिलने वाले अधिकांश नमक, चाहे वह सफेद हो, काला नमक, सेंधा नमक या हिमालयन पिंक सॉल्ट, सभी में लगभग 97 से 99 प्रतिशत तक सोडियम क्लोराइड होता है। यानी इनके मुख्य तत्व में बहुत बड़ा अंतर नहीं होता। ऐसे में सिर्फ नमक का रंग या नाम बदलने से वह ज्यादा हेल्दी नहीं हो जाता।

    क्या पिंक और सेंधा नमक में ज्यादा मिनरल्स होते हैं?

    पिंक सॉल्ट और सेंधा नमक में आयरन, मैग्नीशियम, पोटैशियम जैसे कुछ मिनरल्स जरूर पाए जाते हैं, लेकिन उनकी मात्रा बेहद कम होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ये मिनरल्स शरीर की रोजाना की जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। अगर कोई व्यक्ति सिर्फ मिनरल्स पाने के लिए ज्यादा नमक खाएगा तो शरीर में सोडियम की मात्रा बढ़ जाएगी, जिससे हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और किडनी संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

    एंटी-केकिंग एजेंट्स से डरने की जरूरत नहीं

    सोशल मीडिया पर कई बार यह दावा किया जाता है कि पैकेट वाले नमक में मिलाए जाने वाले एंटी-केकिंग एजेंट्स शरीर के लिए नुकसानदायक होते हैं। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि इनकी मात्रा बहुत कम होती है और इन्हें फूड सेफ्टी मानकों के अनुसार सुरक्षित माना जाता है। इसलिए केवल इस वजह से आयोडीन युक्त नमक छोड़ना सही फैसला नहीं है।

    आयोडीन युक्त नमक क्यों है जरूरी?

    विशेषज्ञों का कहना है कि नमक का सबसे बड़ा फायदा शरीर को आयोडीन उपलब्ध कराना है। आयोडीन की कमी से थायरॉयड संबंधी बीमारियां हो सकती हैं और बच्चों के मानसिक विकास पर भी असर पड़ सकता है। भारत के कई इलाकों में आज भी आयोडीन की कमी एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या बनी हुई है। इसलिए रोजमर्रा के भोजन में आयोडीन युक्त नमक का इस्तेमाल करना सबसे बेहतर माना जाता है।

    कौन सा नमक चुनें?

    अगर आपको स्वाद के लिए काला नमक या सेंधा नमक पसंद है तो सीमित मात्रा में इसका सेवन किया जा सकता है। लेकिन रोजाना इस्तेमाल के लिए आयोडीन युक्त नमक को प्राथमिकता देना अधिक लाभदायक माना जाता है। सबसे जरूरी बात यह है कि किसी भी प्रकार का नमक सीमित मात्रा में ही खाएं, क्योंकि ज्यादा सोडियम स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

  • लड़कियों में बढ़ती नशे की लत: कारण, दुष्प्रभाव और बचाव के प्रभावी उपाय..

    लड़कियों में बढ़ती नशे की लत: कारण, दुष्प्रभाव और बचाव के प्रभावी उपाय..

    लड़कियों में बढ़ती नशे की लत: कारण, दुष्प्रभाव और बचाव के प्रभावी उपाय..

    Drug Addiction in Girls: बदलती जीवनशैली, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और मानसिक तनाव के दौर में नशे की समस्या केवल पुरुषों तक सीमित नहीं रह गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ किशोरियों और युवतियों में भी नशीले पदार्थों की ओर आकर्षण बढ़ता दिखाई दे रहा है। हालांकि अधिकांश युवा महिलाएं स्वस्थ और सकारात्मक जीवनशैली अपनाती हैं, लेकिन मानसिक दबाव, गलत संगति और भावनात्मक चुनौतियां कुछ मामलों में नशे की शुरुआत का कारण बन सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या का समाधान डर या सजा नहीं, बल्कि जागरूकता, संवाद और समय पर सहयोग से संभव है।

    क्यों बढ़ रहा है नशे का खतरा?

    शिक्षाविद् एवं समाजसेवी डॉ. विजय गर्ग के अनुसार, आज की तेज रफ्तार जिंदगी में पढ़ाई, करियर और भविष्य को लेकर युवाओं पर मानसिक दबाव लगातार बढ़ रहा है। कई बार अकेलापन, असफलता का डर, चिंता या अवसाद जैसी स्थितियां कुछ युवाओं को गलत रास्ते की ओर धकेल देती हैं। शुरुआत अक्सर जिज्ञासा या दोस्तों के कहने पर होती है, लेकिन धीरे-धीरे यह आदत लत में बदल सकती है।

    साथियों और सोशल मीडिया का प्रभाव

    किशोरावस्था में दोस्ती और सामाजिक स्वीकार्यता की चाह स्वाभाविक होती है। ऐसे में कुछ युवा केवल अपने दोस्तों के बीच फिट होने या आधुनिक दिखने के लिए नशीले पदार्थों का सेवन शुरू कर देते हैं।

    इसके अलावा, सोशल मीडिया, फिल्मों और वेब सीरीज में कई बार नशे को ग्लैमरस या तनाव दूर करने के साधन के रूप में दिखाया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि युवाओं को मीडिया साक्षरता और सही मार्गदर्शन देना जरूरी है, ताकि वे वास्तविक जीवन और मनोरंजन के बीच का अंतर समझ सकें।

    नशे के दुष्प्रभाव

    नशीले पदार्थों का असर केवल शरीर पर ही नहीं, बल्कि मानसिक और सामाजिक जीवन पर भी पड़ता है। इसके कारण—

    • याददाश्त और एकाग्रता कमजोर हो सकती है।
    • पढ़ाई और करियर प्रभावित हो सकते हैं।
    • आत्मविश्वास में कमी आ सकती है।
    • चिंता और अवसाद जैसी मानसिक समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
    • परिवार और दोस्तों के साथ रिश्तों में दूरी आ सकती है।
    • लंबे समय में स्वास्थ्य और भविष्य दोनों पर गंभीर असर पड़ सकता है।

    परिवार की भूमिका सबसे अहम

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस चुनौती से निपटने में माता-पिता की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। बच्चों के साथ खुलकर बातचीत करना, उनकी भावनाओं को समझना और बिना डांट-फटकार के उनकी समस्याएं सुनना उन्हें गलत आदतों से बचाने में मदद कर सकता है।

    विश्वास, सहयोग और सकारात्मक माहौल बच्चों को मानसिक रूप से मजबूत बनाते हैं और उन्हें सही निर्णय लेने में सहायता करते हैं।

    स्कूल और समाज की जिम्मेदारी

    विद्यालयों और महाविद्यालयों में नियमित नशा विरोधी जागरूकता अभियान, काउंसलिंग सेवाएं और जीवन कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। साथ ही खेल, संगीत, कला, साहित्य और अन्य रचनात्मक गतिविधियों में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने से उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और वे सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ते हैं।

    सामूहिक प्रयास से ही मिलेगा समाधान

    सरकार, स्वास्थ्य संस्थानों, शिक्षण संस्थाओं और समाज को मिलकर नशा मुक्ति अभियान, मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं और पुनर्वास सुविधाओं को मजबूत करना होगा। जो लोग नशे की समस्या से जूझ रहे हैं, उन्हें सामाजिक कलंक का शिकार बनाने के बजाय उचित इलाज, परामर्श और पुनर्वास का अवसर दिया जाना चाहिए।

    जागरूकता, खुला संवाद, पारिवारिक सहयोग और समय पर सहायता ही वह रास्ता है, जिससे युवाओं को नशे की लत से बचाया जा सकता है और एक स्वस्थ, सुरक्षित एवं सकारात्मक समाज का निर्माण किया जा सकता है।

  • डायबिटीज है तो पीजिये एलोवेरा जूस, जान लें इसके फायदे…

    डायबिटीज है तो पीजिये एलोवेरा जूस, जान लें इसके फायदे…

    डायबिटीज है तो पीजिये एलोवेरा जूस, जान लें इसके फायदे…

    Diabetes Home Remedies : आज के समय में खराब लाइफस्टाइल और गलत खान-पान के कारण डायबिटीज एक बेहद आम लेकिन गंभीर समस्या बन चुकी है। इसे कंट्रोल में रखने के लिए लोग तरह-तरह की दवाओं और घरेलू उपायों का सहारा लेते हैं। लेकिन कुछ नेचुरल तरीके की मदद से इसे आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है। इन्हीं प्राकृतिक उपायों में से एक है एलोवेरा जूस। आयुर्वेद में एलोवेरा को औषधीय गुणों का खजाना माना गया है, और शोध भी यह बताते हैं कि यह ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में बेहद मददगार साबित हो सकता है। आइए जानते हैं कि डायबिटीज के मरीजों के लिए एलोवेरा जूस क्यों फायदेमंद है और इसके क्या-क्या बेनिफिट्स हैं।

    ब्लड शुगर लेवल करे कंट्रोल

    एलोवेरा में क्रोमियम, मैंगनीज और मैग्नीशियम जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर में इंसुलिन की संवेदनशीलता को बढ़ाते हैं। यह खून में ग्लूकोज के लेवल को तेजी से बढ़ने से रोकता है। कुछ अध्ययनों के अनुसार, नियमित रूप से एलोवेरा जूस का सेवन करने से फास्टिंग ब्लड शुगर के स्तर में कमी आती है।

    इंसुलिन प्रोडक्शन में मददगार

    एलोवेरा के पौधे में ‘फाइटोस्टेरॉल्स’ नामक यौगिक होते हैं। ये यौगिक शरीर में एंटी-हाइपरग्लाइसेमिक प्रभाव पैदा करते हैं, जो टाइप-2 डायबिटीज वाले लोगों के लिए बेहद फायदेमंद है। यह पेनक्रियाज की कोशिकाओं को सक्रिय कर इंसुलिन के नेचुरल प्रोडक्शन को बढ़ाने में मदद करता है।

    शरीर को करता है डिटॉक्स

    डायबिटीज के मरीजों का पाचन तंत्र अक्सर कमजोर हो जाता है। एलोवेरा जूस में प्रचुर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स और एंजाइम होते हैं, जो शरीर से हानिकारक टॉक्सिन्स को बाहर निकालते हैं। यह कब्ज, एसिडिटी और गैस जैसी समस्याओं से राहत दिलाकर पाचन क्रिया को दुरुस्त रखता है।

    घाव भरने में सहायक

    डायबिटीज के मरीजों में अक्सर देखा जाता है कि कोई भी चोट या घाव आसानी से नहीं भरता। एलोवेरा में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो शरीर की अंदरूनी हीलिंग पावर को बढ़ाते हैं और संक्रमण के खतरे को कम करते हैं।

    सेवन का सही तरीका

    डायबिटीज के मरीज सुबह खाली पेट एलोवेरा जूस को एक गिलास गुनगुने पानी में मिलाकर ले सकते हैं। इससे सेहत को काफी फायदा होगा।

  • आखिर लड़कियों को लंबे कद वाले लड़के क्यों पसंद आते हैं? जानिए इसके पीछे की वजह..

    आखिर लड़कियों को लंबे कद वाले लड़के क्यों पसंद आते हैं? जानिए इसके पीछे की वजह..

    आखिर लड़कियों को लंबे कद वाले लड़के क्यों पसंद आते हैं? जानिए इसके पीछे की वजह..

    रिश्तों में सबसे ज्यादा महत्व किसी व्यक्ति के स्वभाव, सम्मान, भरोसे और आपसी समझ का होता है। हालांकि, व्यक्तिगत पसंद-नापसंद भी अलग-अलग हो सकती है। कई सर्वे और सोशल मीडिया चर्चाओं में यह देखा गया है कि कुछ लड़कियां लंबे कद वाले लड़कों को पसंद करने की बात कहती हैं। इसके पीछे कई दिलचस्प वजहें बताई जाती हैं, लेकिन यह सभी पर लागू नहीं होतीं।

    सुरक्षा का एहसास

    कुछ लोगों का मानना है कि लंबे कद वाले साथी के साथ उन्हें अधिक सुरक्षित महसूस होता है। हालांकि यह केवल एक व्यक्तिगत धारणा है और किसी व्यक्ति की वास्तविक क्षमता या व्यक्तित्व का मापदंड नहीं है।

    हग करने का अनुभव

    कई लड़कियां बताती हैं कि लंबे कद वाले पार्टनर को गले लगाने का अनुभव उन्हें अच्छा लगता है। यह पूरी तरह व्यक्तिगत पसंद का विषय है।

    फैशन और स्टाइल

    कुछ लोगों को अपने पार्टनर की ओवरसाइज टी-शर्ट या हुडी पहनना पसंद होता है। सोशल मीडिया पर भी इस तरह का ट्रेंड काफी लोकप्रिय है, जिसकी वजह से यह पसंद और ज्यादा चर्चा में रहती है।

    छोटी-छोटी मदद

    ऊंचाई वाले लोग अक्सर ऊंची जगह पर रखी चीजें आसानी से उतार सकते हैं या घर के कुछ कामों में मदद कर सकते हैं। हालांकि, यह केवल एक व्यावहारिक सुविधा है और रिश्ते की सफलता से इसका कोई सीधा संबंध नहीं है।

    फिल्मों और सोशल मीडिया का प्रभाव

    फिल्मों, टीवी सीरियल्स और सोशल मीडिया पर लंबे कद वाले जोड़ों को अक्सर आकर्षक तरीके से दिखाया जाता है। इससे भी कई लोगों की पसंद प्रभावित हो सकती है।

    सबसे जरूरी है व्यक्तित्व

    यह याद रखना जरूरी है कि हर व्यक्ति की पसंद अलग होती है। कई लोग कद की बजाय स्वभाव, ईमानदारी, सम्मान, समझदारी, भरोसे और व्यवहार को ज्यादा महत्व देते हैं। इसलिए किसी भी रिश्ते की मजबूती केवल हाइट से नहीं, बल्कि आपसी सम्मान और विश्वास से तय होती है।

  • हर मुस्लिम घर में लोहे का कुंडा होने की बात कितनी सही है? जानिए इसके पीछे की परंपरा

    हर मुस्लिम घर में लोहे का कुंडा होने की बात कितनी सही है? जानिए इसके पीछे की परंपरा

    हर मुस्लिम घर में लोहे का कुंडा होने की बात कितनी सही है? जानिए इसके पीछे की परंपरा

    अक्सर सोशल मीडिया पर यह दावा किया जाता है कि हर मुस्लिम घर में छत या आंगन में लोहे का एक मजबूत कुंडा लगा होता है। इस दावे को लेकर लोगों के मन में कई तरह के सवाल उठते हैं। हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि हर मुस्लिम घर में ऐसा कुंडा होता है। यह प्रथा कुछ क्षेत्रों और परिवारों में देखने को मिलती है और इसका संबंध मुख्य रूप से ईद-उल-अजहा (बकरीद) के अवसर पर होने वाली कुर्बानी की प्रक्रिया से जुड़ा माना जाता है।

    क्या होता है लोहे का कुंडा?

    लोहे का कुंडा एक मजबूत धातु का हुक होता है, जिसे कुछ परिवार अपने घर की छत, आंगन या किसी मजबूत बीम में स्थायी या अस्थायी रूप से लगाते हैं। इसका उपयोग सामान्य दिनों में नहीं, बल्कि विशेष अवसरों पर किया जाता है।

    किस काम आता है यह कुंडा?

    ईद-उल-अजहा के दौरान जिन परिवारों में घर पर कुर्बानी की जाती है, वहां जानवर को जिबह करने के बाद उसे लटकाकर खाल उतारने और मांस को व्यवस्थित तरीके से अलग करने में इस कुंडे का उपयोग किया जाता है। इससे पूरी प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक हो जाती है।

    क्या हर मुस्लिम घर में होता है?

    नहीं। यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। कई मुस्लिम परिवारों के घरों में ऐसा कोई कुंडा नहीं होता। खासकर बड़े शहरों में अधिकांश लोग कुर्बानी अधिकृत स्थानों या कसाईखानों में कराते हैं, इसलिए घर पर ऐसे इंतजाम की आवश्यकता नहीं पड़ती। वहीं, कुछ ग्रामीण और छोटे शहरों के परिवार सुविधा के लिए इसे लगवाते हैं।

    क्या यह धार्मिक अनिवार्यता है?

    इस्लाम में कुर्बानी का महत्व है, लेकिन घर में लोहे का कुंडा लगवाना कोई धार्मिक अनिवार्यता नहीं है। कुरान या हदीस में ऐसा कोई निर्देश नहीं मिलता कि हर मुस्लिम घर में यह कुंडा होना चाहिए। यह एक व्यावहारिक व्यवस्था है, जो कुछ क्षेत्रों में समय के साथ परंपरा का रूप ले चुकी है।

    बदलते समय के साथ बदल रही है परंपरा

    आज के समय में कई लोग कुर्बानी के लिए अधिकृत बूचड़खानों या प्रशिक्षित कसाइयों की सेवाएं लेते हैं। ऐसे में घरों में स्थायी कुंडा लगाने की जरूरत पहले की तुलना में कम होती जा रही है। इसलिए यह व्यवस्था स्थान, परिवार और स्थानीय परंपराओं के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

  • जेब पर पड़ेगा कम बोझ! ब्रिटिश शराब से लेकर ब्रांडेड कपड़ों तक, आज से कई चीजें सस्ती

    जेब पर पड़ेगा कम बोझ! ब्रिटिश शराब से लेकर ब्रांडेड कपड़ों तक, आज से कई चीजें सस्ती

    जेब पर पड़ेगा कम बोझ! ब्रिटिश शराब से लेकर ब्रांडेड कपड़ों तक, आज से कई चीजें सस्ती

    भारत से फ्री ट्रेड एग्रीमेंट लागू, कई सेक्टर्स को होगा मुनाफा

    India UK FTA : अगर आप शराब के शौकीन हैं, कारों से आप का बड़ा लगाव है, विदेशी कपड़े पहनना चाहते हैं तो आपके लिए एक खुशखबरी है। भारत में UK की कारें, व्हिस्की, कपड़े और फुटवियर आज से सस्ते हो गये हैं। भारत-UK के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट लागू हो गया है। यानी अब भारत के 99% सामानों को UK में जीरो टैरिफ पर निर्यात किया जाएगा। वहीं UK के 99% सामान 3% एवरेज टैरिफ पर आयात होंगे।

    इससे 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना होकर 120 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। करीब तीन साल में 14 राउंड की बातचीत के बाद 24 जुलाई 2025 को वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और ब्रिटिश व्यापार मंत्री जोनाथन रेनॉल्ड्स ने PM नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर की मौजूदगी में इस समझौते पर साइन किए थे।

    ब्रिटिश हाई कमिश्नर ने कहा- ‘ऐतिहासिक क्षण’

    इस व्यापार समझौते के लागू होने से पहले भारत में UK की हाई कमिश्नर लिंडी कैमरन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, ‘उल्टी गिनती शुरू हो गई है! UK और भारत इस बात पर सहमत हैं कि फ्री ट्रेड एग्रीमेंट 15 जुलाई से लागू हो जाएगा। यह आधुनिक यूके-भारत पार्टनरशिप के लिए ऐतिहासिक पल है। यह दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए ग्रोथ के नए युग की शुरुआत करेगा।’

    भारत में क्या-क्या सस्ता होगा

    अब UK से आयात होने वाले सामानों पर औसत टैरिफ 15% से घटकर 3% होगा। 85% सामान 10 साल में पूरी तरह टैरिफ-मुक्त होंगे। इससे कई चीजें सस्ती होंगी। व्हिस्की और जिन: UK से आयात होने वाली स्कॉच व्हिस्की और जिन पर भारत का टैरिफ 150% से घटकर 75% हो जाएगा। बाद में समझौते के दसवें साल तक इसे घटाकर 40% कर दिया जाएगा। उदाहरण- 5000 रुपए की स्कॉच बॉटल 3500 रुपए में मिलेगी। UK की कारों (जैसे जगुआर लैंड रोवर, रोल्स रॉयस) पर टैरिफ 100% से कोटा सिस्टम के तहत 10% तक आ जाएगा। इससे ये कारें 20-30% सस्ती हो सकती हैं। UK से आयात होने वाले सैल्मन, लैंब, चॉकलेट, बिस्किट और सॉफ्ट ड्रिंक्स पर टैरिफ कम होगा। इससे ये उत्पाद सस्ते होंगे। UK के कॉस्मेटिक्स, मेडिकल उपकरण और एयरोस्पेस पार्ट्स पर कम टैरिफ से ये सामान सस्ते होंगे। टैरिफ 15% से घटकर 3% पर आ जाएगा। ब्रिटेन से आने वाले ब्रांडेड कपड़े, फैशन प्रोडक्ट्स और होमवेयर भी सस्ते होंगे। वहीं फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक्स भी कम कीमत पर मिलेंगे।

    भारत के इन सेक्टर्स को होगा फायदा?

    टेक्सटाइल से लेकर इंजीनियरिंग, मेडिकल और केमिकल जैसे सेक्टर्स को इस एग्रीमेंट से फायदा होगा। यूके में भारतीय कपड़ों और होम टेक्सटाइल्स जैसे चादर, परदे पर 8-12% टैक्स लगता था, वो अब पूरी तरह खत्म हो जाएगा। इससे हमारे कपड़े बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों के मुकाबले सस्ते और ज्यादा कॉम्पिटीटिव हो जाएंगे। तिरुप्पुर, सूरत और लुधियाना जैसे एक्सपोर्ट हब में अगले तीन साल में 40% तक की ग्रोथ हो सकती है। भारत से यूके जाने वाली ज्वेलरी और चमड़े के सामान जैसे बैग, जूतों पर अब कोई टैक्स नहीं लगेगा। इससे MSME और लग्जरी ब्रांड्स को बड़ा फायदा होगा।

    साथ ही यूके के रास्ते यूरोप में भारत का दबदबा और बढ़ेगा। यूके ने भारतीय मशीनरी, इंजीनियरिंग टूल्स और ऑटो पार्ट्स जैसे कार के पुर्जे पर लगने वाला इम्पोर्ट टैक्स खत्म कर दिया है। इससे भारत, यूके और यूरोप की इंडस्ट्रियल सप्लाई चेन और मजबूत होगी। पुणे, चेन्नई और गुड़गांव जैसे मैन्युफैक्चरिंग हब को फायदा होगा। भारतीय फार्मा कंपनियों को यूके में जेनेरिक दवाइयों के लिए आसान रजिस्ट्रेशन प्रोसेस मिलेगी।

    इससे भारत की दवाइयां यूके की NHS में आसानी से पहुंचेंगी और दवाओं का अप्रूवल भी जल्दी मिलेगा। बासमती चावल, झींगा जैसे समुद्री प्रोडक्ट, प्रीमियम चाय और मसालों पर यूके का इम्पोर्ट टैक्स खत्म हो जाएगा। इससे असम, गुजरात, केरल और पश्चिम बंगाल जैसे इलाकों की एक्सपोर्ट इंडस्ट्री को बड़ा बूस्ट मिलेगा। एग्रोकेमिकल्स, प्लास्टिक और स्पेशल केमिकल्स पर टैक्स कम होने से गुजरात और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख हब से निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। इस डील के तहत भारत का लक्ष्य है कि 2030 तक यूके में अपने केमिकल निर्यात को दोगुना

  • मेडिकल कॉलेज में खूनी वारदात: छात्रा पर चाकू से हमला, इलाज के दौरान तोड़ा दम..

    मेडिकल कॉलेज में खूनी वारदात: छात्रा पर चाकू से हमला, इलाज के दौरान तोड़ा दम..

    मेडिकल कॉलेज में खूनी वारदात: छात्रा पर चाकू से हमला, इलाज के दौरान तोड़ा दम..

    जिला अस्पताल में मंगलवार को सहपाठी छात्र ने एक पैरामेडिकल छात्रा की चाकू मारकर हत्या कर दी। बचाने आई एक महिला कर्मचारी भी इस हमले में घायल हो गईं। पुलिस ने आरोपी छात्र को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के जांच में प्रेम प्रसंग की बात सामने आई है।

    मिली जानकारी के अनुसार राजकीय मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में मंगलवार सुबह सहपाठी छात्र सागर सिंह ने पैरामेडिकल छात्रा कशिश पटेल पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। जिसमें वह गंभीर रुप से घायल हो गयी। गंभीर रूप से घायल बरेली निवासी छात्रा कशिश पटेल को चिकित्सकों की टीम की निगरानी में प्राथमिक उपचार के बाद तुरंत बरेली रेफर कर दिया। जहां इलाज के दौरान छात्रा ने दम तोड़ दिया। इस घटना से अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया। छात्रा को बचाने के लिए आगे आई सीटी स्कैन विभाग की महिला कर्मचारी पर भी आरोपी ने चाकू से हमला कर दिया। यह घटना जिला अस्पताल परिसर स्थित सीटी स्कैन रूम में हुई। हमले के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई और मरीजों व तीमारदारों में दहशत फैल गई। घटना के बाद मेडिकल कॉलेज परिसर में पैरामेडिकल छात्राएं धरने पर बैठ गईं

    घटना के बाद शोर-शराबा सुनकर मेडिकल कॉलेज के कर्मचारी और अन्य लोग मौके पर पहुंचे। उन्होंने आरोपी सागर सिंह को घेरकर पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण कर मामले की जानकारी जुटाई। प्रारंभिक जांच में घटना के पीछे प्रेम प्रसंग की बात सामने आई है। पुलिस अधीक्षक सुकीर्ति माधव ने बताया कि आरोपी छात्र को हिरासत में ले लिया गया है। उन्होंने कहा कि उससे पूछताछ की जा रही है और पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है।

  • शादी की पहली रात के बाद दुल्हन की बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में सामने आया चौंकाने वाला सच..

    शादी की पहली रात के बाद दुल्हन की बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में सामने आया चौंकाने वाला सच..

    शादी की पहली रात के बाद दुल्हन की बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में सामने आया चौंकाने वाला सच..

    उत्तर प्रदेश में शादी के अगले ही दिन एक नवविवाहिता की तबीयत अचानक बिगड़ गई। पेट में तेज दर्द होने पर परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि वह गर्भवती है और प्रसव का समय आ चुका है। यह सुनकर परिवार के लोग हैरान रह गए।

    सुहागरात के बाद शुरू हुआ तेज दर्द

    शादी के बाद दुल्हन अपने ससुराल पहुंची थी। अगले दिन घर में रिश्तेदार भी मौजूद थे। इसी दौरान रात में उसे पेट में तेज दर्द की शिकायत हुई। परिजनों ने पहले घरेलू उपाय किए, लेकिन दर्द कम नहीं हुआ तो उसे अस्पताल ले जाया गया।

    अस्पताल में सामने आया चौंकाने वाला सच

    अस्पताल में जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि महिला गर्भवती है और जल्द ही प्रसव होने वाला है। कुछ ही देर बाद उसने एक बच्चे को जन्म दिया।

    परिवार रह गया स्तब्ध

    यह जानकारी मिलते ही दूल्हा और उसके परिवार के लोग सकते में आ गए। इसके बाद दुल्हन के मायके पक्ष को सूचना दी गई और उन्हें अस्पताल बुलाया गया।

    नवजात के साथ मायके भेजी गई दुल्हन

    अगले दिन दुल्हन को नवजात शिशु के साथ उसके मायके भेज दिया गया। यह मामला इलाके में चर्चा का विषय बन गया।