झारखंड हाईकोर्ट ने तलाक से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए पति की याचिका खारिज कर दी। पति ने अपनी पत्नी पर मानसिक रूप से अस्वस्थ होने का आरोप लगाते हुए तलाक की मांग की थी। उसका कहना था कि एक रात करीब 2 बजे उसने पत्नी को काजल और लिपस्टिक लगाते हुए देखा, जिसके बाद उसे पत्नी के व्यवहार पर शक हुआ।
अदालत ने साफ कहा कि देर रात मेकअप करना या सजना-संवरना अपने आप में मानसिक बीमारी का प्रमाण नहीं हो सकता। किसी व्यक्ति को मानसिक रूप से बीमार बताने के लिए ठोस मेडिकल साक्ष्य जरूरी हैं।
रात 2 बजे मेकअप करते देख पति को हुआ शक
मामला साल 2015 में हुई शादी से जुड़ा है। पति के मुताबिक, शादी के कुछ समय बाद एक रात करीब 2 बजे उसकी नींद खुली। उसने देखा कि उसकी पत्नी अलमारी के सामने खड़ी होकर काजल और लिपस्टिक लगा रही थी।
पति का दावा था कि पत्नी के इस व्यवहार से वह घबरा गया और उसे लगा कि वह मानसिक रूप से अस्वस्थ है। उसने यह भी आरोप लगाया कि शादी से पहले पत्नी की कथित बीमारी की जानकारी उससे छिपाई गई थी। इसी आधार पर उसने तलाक की मांग की।
कोर्ट ने कहा- मेडिकल सबूत कहां हैं?
मामला जब अदालत पहुंचा तो पति यह दावा करता रहा कि पत्नी का इलाज कई अस्पतालों में कराया गया था। लेकिन सुनवाई के दौरान वह किसी डॉक्टर की रिपोर्ट, पर्ची या अन्य मेडिकल रिकॉर्ड
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में 9वीं क्लास में पढ़ने वाली एक लड़की को उसकी मां ने बॉयफ्रेंड से बात करने के लिए डांट दिया तो वह 100 फीट ऊंची पानी टंकी पर चढ़ गई. लड़की 3 घंटे तक पानी टंकी पर बैठी रही. इसके बाद उसने वहां से छलांग लगा दी. लेकिन मौके पर मौजूद दारोगा ने लड़की को बचा लिया.
लड़की पानी की टंकी पर चढ़ गई- मां से नाराज लड़की पानी की टंकी पर चढ़ गई. ये देखकर लोगों की भीड़ जुट गई. किसी ने पुलिस को फोन किया और मौके पर पुलिस भी आ गई. पुलिस ने भी लड़की को काफी देर तक समझने का प्रयास किया. लेकिन वह नीचे आने को तैयार नहीं हुई.
20 मिनट तक हवा में लटकी रही लड़की- पुलिस की टीम में महिला दरोगा जागृति खरवार ने रिस्क लेकर पानी टंकी पर पहुंची और उसे पीछे से पकड़ लिया. पकड़े जाने के बाद लड़की टंकी से छलांग लगा दी. लेकिन महिला दरोगा ने उसका हाथ और कपड़ा मजबूती से पकड़ लिया था. करीब 20 मिनट तक वह हवा में लटकी रही और पीछे से आकर अन्य पुलिसकर्मियों ने लड़की को सुरक्षित ऊपर खींच लिया.
बॉयफ्रेंड से बात करने से रोका तो उठाया कदम- यह घटना दोपहर 1:00 बजे गोरखपुर महादेव झारखंडी कॉलोनी की है. लड़की की मां ने बॉयफ्रेंड से बात करने से मना कर दिया था. इसी बात से नाराज लड़की ने यह कदम उठाया था.
9वीं क्लास की छात्रा 15 साल की है. वो आवास विकास कॉलोनी शिवपुर की रहने वाली है. वह रोजाना अपने मोबाइल से बॉयफ्रेंड से बात किया करती थी. रविवार को मां ने लड़के से बातचीत करके मना कर दिया तो लड़की को यह बात नागवार गुजरी और उसने यह कदम उठा लिया.
महिला दारोगा ने बचाई जान- एम्स थाना अंतर्गत तैनात महिला दरोगा जागृति खरवार लड़की को बातचीत करते हुए टंकी पर पहुंची. किसी तरह उसे विश्वास में लिया. मौका मिलते ही उसने लड़की को पकड़ लिया. पकड़े जाने के बाद लड़की ने नीचे की ओर छलांग लगा दी. महिला दरोगा ने उसका हाथ और मजबूती से पकड़ लिया. जिससे लड़की नीचे नहीं गिरी और 20 मिनट तक हवा में लटका रही. इसके बाद दूसरे पुलिसकर्मी सीढ़ियों से ऊपर पहुंचे और उसे ऊपर खींच लिया. इसके बाद पुलिस कर्मियों ने स्थानीय लोगों की मदद से लड़की को नीचे उतारा.
WhatsApp Viral Message Fact Check: WhatsApp पर वायरल हो रहे उस मैसेज का सच सामने आ गया है, जिसमें दावा किया जा रहा था कि सरकार आपकी कॉल और चैट मॉनिटर कर रही है। PIB Fact Check ने इस दावे को फर्जी बताया है। जानिए Red Tick, Blue Tick और WhatsApp निगरानी से जुड़े वायरल दावे की पूरी सच्चाई।
WhatsApp Government Monitoring News:
अगर आप WhatsApp इस्तेमाल करते हैं तो आपने भी शायद ऐसा कोई मैसेज देखा होगा, जिसमें दावा किया जा रहा है कि सरकार अब आपकी WhatsApp कॉल और चैट पर नजर रख रही है।
वायरल मैसेज में कहा जा रहा है कि WhatsApp पर नए मॉनिटरिंग नियम लागू हो गए हैं। इसके तहत सरकार यूजर्स के निजी मैसेज पढ़ सकती है, कॉल सुन सकती है और कुछ खास तरह के टिक आने पर बातचीत की जानकारी मिल सकती है,लेकिन अब इस दावे की सच्चाई सामने आ गई है। सरकार की फैक्ट चेक एजेंसी PIB Fact Check ने इस वायरल मैसेज को पूरी तरह फर्जी बताया है।
WhatsApp मॉनिटरिंग के नाम पर फैलाया जा रहा झूठ
PIB Fact Check ने साफ किया है कि भारत सरकार की ओर से WhatsApp निगरानी को लेकर ऐसी कोई नई गाइडलाइन या नियम जारी नहीं किया गया है।वायरल मैसेज में किए गए दावे गलत हैं और लोगों को भ्रमित करने के लिए फैलाए जा रहे हैं।सरकार ने लोगों से अपील की है कि ऐसे मैसेज पर भरोसा न करें और बिना पुष्टि किए इन्हें आगे शेयर भी न करें।
Red Tick और Blue Tick को लेकर भी झूठा दावा
वायरल मैसेज में WhatsApp के टिक सिस्टम को लेकर भी कई दावे किए जा रहे हैं।इसमें कहा जा रहा है कि ज्यादा Blue Tick आने का मतलब सरकार ने मैसेज देख लिया है।Red Tick दिखने पर कार्रवाई हो सकती है।कुछ खास टिक से सरकारी निगरानी का पता चलता है।PIB Fact Check ने इन सभी दावों को गलत बताया है।WhatsApp के टिक केवल मैसेज की डिलीवरी और पढ़े जाने की स्थिति बताते हैं। इनका सरकार की किसी निगरानी व्यवस्था से कोई संबंध नहीं है।
क्या सरकार WhatsApp कॉल रिकॉर्ड कर रही है?
वायरल मैसेज का सबसे बड़ा दावा यही है कि सरकार WhatsApp कॉल रिकॉर्ड कर रही है।लेकिन फैक्ट चेक में सामने आया है कि ऐसा कोई आधिकारिक आदेश या नई व्यवस्था लागू नहीं की गई है।WhatsApp पर होने वाली बातचीत को लेकर इस तरह के दावे पहले भी कई बार वायरल हो चुके हैं, लेकिन उनकी पुष्टि नहीं हुई है,इसलिए सिर्फ किसी वायरल मैसेज के आधार पर यह मान लेना कि सरकार आपकी हर कॉल सुन रही है या चैट पढ़ रही है, गलत है।
क्या आप जानते हैं कि यूपी के किस जिले को ‘लस्सी का शहर’ कहा जाता है, ऐसा कहा जाता है कि यहां कि लस्सी का स्वाद इतना खास होता है कि इसे एक बार चखने वाला लंबे समय तक इसका स्वाद नहीं भूलता।
City of Lassi in UP:
उत्तर प्रदेश अपनी संस्कृति, खानपान और पारंपरिक स्वाद के लिए दुनियाभर में जाना जाता है। प्रदेश के अलग-अलग शहरों की अपनी खास पहचान है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यूपी के किस जिले को ‘लस्सी का शहर’ कहा जाता है? जवाब है वाराणसी, जहां की गाढ़ी, मलाईदार और कुल्हड़ में परोसी जाने वाली पारंपरिक लस्सी देश ही नहीं बल्कि विदेशी पर्यटकों के बीच भी काफी लोकप्रिय है। कहा जाता है कि बनारस की गलियों में मिलने वाली लस्सी का स्वाद इतना खास होता है कि इसे एक बार चखने वाला लंबे समय तक इसका स्वाद नहीं भूलता।
कुल्हड़ में मिलने वाली मलाईदार लस्सी है खास वाराणसी की पारंपरिक लस्सी अपनी गाढ़ी बनावट और ऊपर जमी मलाई के लिए जानी जाती है। यहां कई दुकानों पर लस्सी को मिट्टी के कुल्हड़ में परोसा जाता है, जो इसके स्वाद और अनुभव को और खास बना देता है। शहर में दशकों पुरानी कई दुकानें आज भी पारंपरिक तरीके से लस्सी तैयार करती हैं। यहां केसर, आम और सूखे मेवों समेत अलग-अलग फ्लेवर की लस्सी भी लोगों को खूब पसंद आती है।
गर्मियों में प्राकृतिक कूलिंग ड्रिंक लस्सी मुख्य रूप से दही से बनाई जाती है। ठंडी और ताजगी देने वाली यह ड्रिंक गर्मियों में काफी लोकप्रिय रहती है। दही आधारित होने के कारण इसे शरीर को ठंडक पहुंचाने वाला पारंपरिक पेय माना जाता है। गर्मियों में लोग इसे खाने के साथ या दिन के बीच में ताजगी के लिए पीना पसंद करते हैं। खासतौर पर उत्तर भारत के कई इलाकों में लस्सी गर्मी के मौसम का पसंदीदा पेय है।
पाचन के लिए भी मानी जाती है फायदेमंद दही में मौजूद प्रोबायोटिक तत्व पाचन तंत्र के लिए उपयोगी माने जाते हैं। लस्सी का सेवन पाचन को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकता है। हालांकि, इसके फायदे व्यक्ति की सेहत और उसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री पर भी निर्भर करते हैं।
पोषक तत्वों से भरपूर है लस्सी दही से बनने वाली लस्सी में कैल्शियम और पोटैशियम जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। ये पोषक तत्व शरीर के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। हालांकि, बाजार में मिलने वाली मीठी लस्सी में चीनी की मात्रा अधिक हो सकती है, इसलिए इसका सेवन संतुलित मात्रा में करना बेहतर माना जाता है।
दशकों पुरानी दुकानों में आज भी बरकरार है स्वाद वाराणसी की पहचान सिर्फ घाटों, मंदिरों और बनारसी संस्कृति तक सीमित नहीं है। यहां का पारंपरिक खानपान भी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। लस्सी की कई पुरानी दुकानें आज भी अपने पारंपरिक स्वाद के कारण स्थानीय लोगों और पर्यटकों के बीच लोकप्रिय हैं। अगर आप कभी काशी घूमने जाएं, तो यहां की गलियों में मिलने वाली गाढ़ी और मलाईदार कुल्हड़ वाली लस्सी का स्वाद जरूर चख सकते हैं। संभव है कि बनारस की यह मिठास आपको लंबे समय तक याद रहे।
उत्तराखंड के ऊंचे पहाड़ी इलाकों में कई ऐसी जड़ी-बूटियां और वनस्पतियां पाई जाती हैं, जिनका इस्तेमाल स्थानीय लोग लंबे समय से पारंपरिक उपचार और भोजन में करते आए हैं। इन्हीं में एक नाम बिच्छू घास का भी है। इसे कई जगहों पर कंडाली के नाम से जाना जाता है।
इस पौधे की खासियत यह है कि इसे छूने पर त्वचा में तेज चुभन, जलन और खुजली महसूस हो सकती है। यही वजह है कि लोग इससे दूरी बनाकर रखते हैं। हालांकि, सही तरीके से प्रसंस्करण करने के बाद इस पौधे का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से भोजन और कई अन्य उपयोगों में किया जाता रहा है।
छूते ही क्यों होती है जलन?
बिच्छू घास की पत्तियों और तनों पर बेहद बारीक बाल जैसे ढांचे होते हैं, जिन्हें ट्राइकोम कहा जाता है। इनके संपर्क में आने पर त्वचा में जलन और खुजली हो सकती है। इन संरचनाओं से निकलने वाले कुछ रसायन इस प्रतिक्रिया के लिए जिम्मेदार माने जाते हैं।
यह पौधे की प्राकृतिक सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा है, जो इसे जानवरों और कीड़ों से बचाने में मदद करती है।
पोषक तत्वों से भरपूर मानी जाती है बिच्छू घास
बिच्छू घास की पत्तियों में कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। इसमें आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम और विटामिन ए, सी व के जैसे पोषक तत्व मौजूद हो सकते हैं। इसमें प्रोटीन भी पाया जाता है।
इसी कारण कुछ पहाड़ी क्षेत्रों में इसकी पत्तियों को उचित तरीके से तैयार करके साग, सूप और अन्य पारंपरिक व्यंजनों में इस्तेमाल किया जाता है।
हालांकि, इसे सीधे कच्चा खाना या बिना सही तरीके से तैयार किए इस्तेमाल करना सुरक्षित नहीं माना जाता, क्योंकि इसके रेशों और बालों से त्वचा तथा मुंह में जलन हो सकती है।
पारंपरिक चिकित्सा में भी होता रहा है इस्तेमाल
पहाड़ी क्षेत्रों की पारंपरिक चिकित्सा में बिच्छू घास का इस्तेमाल लंबे समय से किया जाता रहा है। खासतौर पर जोड़ों और मांसपेशियों से जुड़ी तकलीफों के लिए इसके विभिन्न पारंपरिक प्रयोग बताए जाते हैं।
कुछ जगहों पर इसके पत्तों को प्रभावित हिस्से से संपर्क कराने की पारंपरिक विधि का भी उल्लेख मिलता है। माना जाता है कि इससे स्थानीय स्तर पर रक्त संचार बढ़ सकता है और दर्द में कुछ राहत महसूस हो सकती है।
हालांकि, ऐसे पारंपरिक उपायों को आधुनिक चिकित्सा का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
सूजन और अन्य स्वास्थ्य लाभों पर हो रही है रिसर्च
बिच्छू घास में कई जैव सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं और इसके संभावित एंटी-इंफ्लेमेटरी प्रभावों पर शोध हुआ है। कुछ अध्ययनों में इसके अर्क को सूजन और अन्य स्वास्थ्य स्थितियों के संदर्भ में जांचा गया है।
इसके अलावा, रक्त शर्करा, मूत्रवर्धक प्रभाव और त्वचा व बालों से जुड़े संभावित उपयोगों पर भी शोध मौजूद है। लेकिन इन सभी दावों को पक्के इलाज के रूप में पेश करना सही नहीं होगा। इंसानों में इसके प्रभाव, सही मात्रा और लंबे समय तक इस्तेमाल की सुरक्षा को लेकर अभी और वैज्ञानिक अध्ययन की जरूरत है।
कैंसर को लेकर क्या है दावा?
बिच्छू घास के कुछ यौगिकों पर प्रयोगशाला स्तर पर शोध हुआ है और उनमें संभावित जैविक गतिविधियां देखी गई हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि बिच्छू घास कैंसर का इलाज करती है।
कैंसर रोधी प्रभाव से जुड़े दावों के लिए अभी पर्याप्त मानव-आधारित प्रमाण नहीं हैं। इसलिए इसे कैंसर के इलाज या दवा के विकल्प के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
कपड़े और दूसरे उत्पादों में भी हो सकता है इस्तेमाल
बिच्छू घास की एक और खासियत इसके मजबूत रेशे हैं। इनसे धागे और कपड़ा तैयार करने की संभावनाओं पर भी काम हुआ है। पहाड़ी क्षेत्रों में इसके रेशों से पारंपरिक रूप से अलग-अलग वस्तुएं तैयार किए जाने की जानकारी मिलती है।
पर्यावरण के प्रति बढ़ती जागरूकता के बीच प्राकृतिक रेशों की मांग बढ़ रही है। ऐसे में बिच्छू घास भविष्य में स्थानीय लोगों के लिए छोटे स्तर के उद्योग और रोजगार का जरिया बन सकती है।
उत्तराखंड के ग्रामीण इलाकों के लिए बन सकता है रोजगार का साधन
अगर इसकी खेती, कटाई और प्रसंस्करण को वैज्ञानिक और टिकाऊ तरीके से विकसित किया जाए तो बिच्छू घास स्थानीय समुदायों के लिए अतिरिक्त आय का माध्यम बन सकती है।
इससे खाद्य उत्पाद, प्राकृतिक फाइबर और पारंपरिक उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। हालांकि, इसके लिए प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और सुरक्षित प्रसंस्करण पर विशेष ध्यान देना जरूरी होगा।
बिच्छू घास देखने में भले ही आम और चुभने वाला पौधा लगे, लेकिन इसके पोषण, पारंपरिक उपयोग और प्राकृतिक रेशों की वजह से इसमें कई संभावनाएं छिपी हैं। यही वजह है कि पहाड़ी इलाकों में पाई जाने वाली यह वनस्पति अब सिर्फ एक जंगली घास नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, खाद्य और स्थानीय रोजगार के लिहाज से संभावनाओं वाला पौधा मानी जा रही है।
भगढ़ की लक्ष्मण कॉलोनी निवासी मंजू (25) की शादी वर्ष 2020 में पलवल के सन्नी से हुई थी. वहीं, मंजू की बचपन की सहेली रीना की शादी भी 2020 में गुरुग्राम (पटौदी) के मुमताजपुर निवासी वेदपाल के साथ हुई थी.
हरियाणा में दो शादीशुदा सहेलियों के अपने पतियों और परिवार को छोड़कर एक साथ फरार होने का हैरान करने वाला मामला सामने आया है. दोनों महिलाएं अपने चार बच्चों के साथ घर से गायब हुई हैं. परिजनों का आरोप है कि वे अपने साथ करीब 9 लाख रुपए के सोने के गहने और नकदी भी ले गईं. पतियों का दावा है कि दोनों महिलाओं के बीच पिछले डेढ़ साल से प्रेम संबंध था और अब उन्होंने आपस में शादी कर ली है. हालांकि, पुलिस ने इस दावे की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है.
21 अगस्त को दोनों घरों से हुईं गायब पलवल के रहने वाले सन्नी की शादी 2020 में बल्लभगढ़ की लक्ष्मण कॉलोनी निवासी मंजू (25) से हुई थी. दोनों के दो बच्चे हैं. 21 अगस्त को मंजू अपने 4 साल के बेटे और 2 साल की बेटी के साथ अचानक घर से गायब हो गई. परिजनों के मुताबिक, वह करीब 4 लाख रुपए के गहने और नकदी भी साथ ले गई.
जब परिवार ने उसकी तलाश शुरू की तो मंजू की बचपन की सहेली रीना का भी पता नहीं चला. रीना की शादी 2020 में गुरुग्राम के पटौदी इलाके के मुमताजपुर निवासी वेदपाल से हुई थी. वह भी अपनी 4 साल की बेटी और डेढ़ साल के बेटे के साथ घर से गायब थी. परिवार का कहना है कि रीना करीब 5 लाख रुपए के गहने और नकदी लेकर गई.
WhatsApp चैट ने बढ़ाया शक दोनों महिलाओं के एक साथ गायब होने के बाद परिजनों को उनके रिश्ते पर शक हुआ. इसके बाद कॉल रिकॉर्ड और WhatsApp चैट की जांच की गई. पतियों के मुताबिक, चैट में दोनों एक-दूसरे को ‘माई क्यूट वाइफ’, ‘माई लव’ और ‘बाबू’ जैसे नामों से बुलाती थीं. दोनों के बीच घंटों बातचीत भी होती थी.
परिजनों के मुताबिक, मंजू और रीना 12वीं तक साथ पढ़ी थीं. इसलिए दोनों की दोस्ती को परिवार सामान्य मानता रहा. लेकिन चैट सामने आने के बाद पतियों ने दोनों के बीच प्रेम संबंध होने और शादी करने का दावा किया.
पति बोले- साथ रहें तो कोई ऐतराज नहीं दोनों पतियों ने कहा कि अगर उनकी पत्नियां साथ रहना चाहती हैं तो उन्हें इस पर ऐतराज नहीं है. उनकी सबसे बड़ी चिंता चारों बच्चों को लेकर है. उन्होंने पुलिस से बच्चों को सुरक्षित वापस लाने की गुहार लगाई है.
पुलिस कर रही मोबाइल लोकेशन की जांच मामले में पलवल की भवन कुंड चौकी और गुरुग्राम के पटौदी थाने में गुमशुदगी समेत संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया गया है. पुलिस दोनों महिलाओं की मोबाइल लोकेशन और दूसरे तकनीकी साक्ष्यों की मदद से तलाश कर रही है.
आज के समय में स्लिम और सुंदर दिखने की दीवानगी लोगों पर इस कदर हावी हो गई है कि वे अपनी सेहत की कीमत पर जानलेवा नुस्खे अपनाने से भी नहीं कतराते. हाल ही में चीन के हेनान प्रांत से एक ऐसी ही झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने सबको हैरान कर दिया है.
क्या है पूरा मामला?
5 फीट 3 इंच की एक 31 वर्षीय महिला का वजन 70 किलो था. उसे जल्दी वेट लॉस करना था. इसके लिए उसने ऐसा खतरनाक रास्ता चुना जिसने उससे उसका चलना-फिरना ही छीन लिया. महिला ने लगातार 15 दिनों तक बिना कुछ खाए सिर्फ पानी के सहारे रहने का फैसला किया. इस क्रैश डाइट से उसने 20 किलो वजन तो घटा लिया, लेकिन उसकी हालत ऐसी हो गई कि आज वह अपने पैरों पर ठीक से खड़ी भी नहीं हो पा रही है और उसकी चाल बिल्कुल पेंगुइन जैसी हो गई है.
जानलेवा बीमारी ‘वर्निके एन्सेफेलोपैथी’ का शिकार
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, जब हालत बिगड़ने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, तो डॉक्टरों की रिपोर्ट देख पैरों तले जमीन खिसक गई. महिला को ‘वर्निके एन्सेफेलोपैथी’ (Wernicke Encephalopathy) नाम की गंभीर दिमागी बीमारी हो गई थी. यह बीमारी शरीर में विटामिन B1 की भारी कमी और अत्यधिक कुपोषण की वजह से होती है. इसकी चपेट में आने के बाद महिला को भ्रम होने लगा, याददाश्त कमजोर हो गई, आंखों को हिलाने में दिक्कत आने लगी और शरीर का संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया.
क्या कभी ठीक हो पाएगी उसकी चाल?
डॉक्टरों के मुताबिक, लंबे समय तक भूखा रहने और पोषण न मिलने से महिला के नर्वस सिस्टम को बहुत गहरा नुकसान पहुंचा है. न्यूरोलॉजिस्ट का कहना है कि तमाम इलाज के बाद भी इस बात की आशंका है कि उसकी यह पेंगुइन जैसी चाल उम्रभर के लिए ऐसी ही बनी रह सकती है.
सोशल मीडिया पर चल रहा ये खतरनाक ट्रेंड
पूछताछ में पता चला कि वह महिला चीन की एक प्राचीन ताओवादी प्रथा ‘बिगु’ (Bigu) का पालन कर रही थी, जिसमें बिना खाना खाए सिर्फ हवा या ऊर्जा के सहारे जीने का दावा किया जाता है. आजकल सोशल मीडिया पर ऐसे एक्सट्रीम वाटर फास्टिंग ट्रेंड्स धड़ल्ले से वायरल हो रहे हैं, जिन्हें देखकर लोग बिना सोचे-समझे अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं
सेक्स के बाद शरीर को थोड़ा आराम और सामान्य होने का समय देना जरूरी होता है। इंटीमेसी के दौरान शरीर में कई तरह के शारीरिक और हार्मोनल बदलाव होते हैं। ऐसे में सेक्स खत्म होते ही कुछ आदतें आपकी परेशानी बढ़ा सकती हैं।
हालांकि, सोशल मीडिया और कई जगहों पर सेक्स के बाद ठंडा पानी पीने या गर्म पानी से नहाने को लेकर कई तरह के दावे किए जाते हैं। इनमें से हर दावा वैज्ञानिक रूप से साबित नहीं है। फिर भी कुछ सावधानियां ऐसी हैं, जिन्हें अपनाना आपकी सेहत और हाइजीन के लिहाज से बेहतर माना जाता है।
तुरंत सिगरेट पीने से बचें
कुछ लोगों को सेक्स के बाद सिगरेट पीने की आदत होती है। लेकिन यह शरीर के लिए किसी भी समय नुकसानदायक है। सेक्स के बाद शरीर कुछ समय के लिए शारीरिक मेहनत की स्थिति में होता है, ऐसे में धूम्रपान करने से हृदय और फेफड़ों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। इसलिए इस आदत से बचना बेहतर है।
बहुत गर्म पानी से न नहाएं
सेक्स के तुरंत बाद बहुत गर्म पानी से नहाने की जरूरत नहीं होती। ज्यादा गर्म पानी से कुछ लोगों को चक्कर, कमजोरी या ब्लड प्रेशर में बदलाव महसूस हो सकता है। अगर नहाना हो तो सामान्य या हल्के गुनगुने पानी का इस्तेमाल किया जा सकता है।
तुरंत हैवी वर्कआउट न करें
सेक्स भी एक तरह की शारीरिक गतिविधि है। इसके तुरंत बाद जिम में भारी वजन उठाने या बहुत ज्यादा इंटेंस वर्कआउट करने से थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है। इसलिए शरीर को थोड़ा आराम देना बेहतर है।
बहुत ठंडा पानी पीने से डरने की जरूरत नहीं, लेकिन…
सेक्स के बाद ठंडा पानी पीने से हार्ट अटैक होने या जान जाने जैसी बातों का कोई सामान्य वैज्ञानिक आधार नहीं है। अगर प्यास लगी है तो पानी जरूर पीना चाहिए। बहुत ज्यादा ठंडा पानी कुछ लोगों को असहज कर सकता है, इसलिए सामान्य तापमान का पानी लेना आसान विकल्प हो सकता है।
प्राइवेट पार्ट की सफाई रखें
सेक्स के बाद साफ-सफाई का ध्यान रखना जरूरी है। पेशाब करने से कुछ लोगों में यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (UTI) के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है, खासकर महिलाओं में।
बाहरी हिस्से को साफ पानी से धोया जा सकता है। योनि के अंदर साबुन, परफ्यूम या किसी तरह के केमिकल प्रोडक्ट का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इससे प्राकृतिक संतुलन बिगड़ सकता है और जलन या संक्रमण की समस्या हो सकती है।
आरामदायक कपड़े पहनें
सेक्स के बाद बहुत ज्यादा टाइट अंडरवियर या कपड़े पहनने के बजाय साफ और आरामदायक कपड़े पहनना बेहतर होता है। इससे नमी और घर्षण से होने वाली परेशानी कम हो सकती है।
कब डॉक्टर से संपर्क करें?
अगर सेक्स के बाद सीने में तेज दर्द, सांस लेने में परेशानी, बेहोशी, लगातार चक्कर, असामान्य रक्तस्राव या तेज दर्द जैसे लक्षण दिखाई दें तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज न करें। ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय मदद लेनी चाहिए।
कुल मिलाकर, सेक्स के बाद सबसे जरूरी चीज है आराम, पर्याप्त पानी और सही हाइजीन। डर फैलाने वाले दावों पर भरोसा करने के बजाय वैज्ञानिक और चिकित्सकीय सलाह को प्राथमिकता देना बेहतर है।
सेक्स को लेकर समाज में आज भी कई तरह के मिथक और गलत धारणाएं मौजूद हैं। इनमें एक आम धारणा यह है कि बेहतर सेक्स और पार्टनर को ज्यादा आनंद देने के लिए पुरुष का पेनिस बड़ा होना जरूरी है। इसी सोच के कारण कई पुरुष अपने शरीर को लेकर असुरक्षित महसूस करते हैं और दूसरों से तुलना करने लगते हैं।
लेकिन क्या वास्तव में यौन संतुष्टि सिर्फ पेनिस के आकार पर निर्भर करती है? विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसा मानना सही नहीं है।
क्या बड़ा साइज ही बेहतर सेक्स की गारंटी है?
पेनिस के आकार को लेकर लोगों में अक्सर अनावश्यक चिंता देखने को मिलती है। वास्तव में हर व्यक्ति के शरीर का आकार अलग होता है और सामान्य आकार की एक विस्तृत रेंज होती है।
यौन संतुष्टि को केवल पेनिस की लंबाई या मोटाई से जोड़ना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है। सेक्स का अनुभव कई शारीरिक और मानसिक पहलुओं पर निर्भर करता है।
महिला पार्टनर के लिए क्या ज्यादा महत्वपूर्ण है?
महिलाओं में यौन आनंद केवल योनि में प्रवेश से निर्धारित नहीं होता। क्लिटोरिस यौन आनंद का एक बेहद महत्वपूर्ण अंग है और इसकी उत्तेजना कई महिलाओं के लिए ऑर्गेज्म तक पहुंचने में अहम भूमिका निभाती है।
इसलिए केवल पेनिस का बड़ा होना यह तय नहीं करता कि पार्टनर को सेक्स के दौरान ज्यादा आनंद मिलेगा।
फिर अच्छे सेक्स के लिए क्या मायने रखता है?
अगर कपल अपनी सेक्स लाइफ को बेहतर बनाना चाहते हैं, तो इन चीजों पर ध्यान देना ज्यादा उपयोगी हो सकता है:
❤️ पार्टनर से खुलकर बातचीत: अपनी पसंद, नापसंद और आराम के स्तर के बारे में बात करना जरूरी है।
💋 फोरप्ले और सही स्टिम्युलेशन: जल्दबाजी करने के बजाय पार्टनर की प्रतिक्रिया और पसंद को समझना महत्वपूर्ण है।
🤝 भरोसा और सहजता: भावनात्मक सुरक्षा और एक-दूसरे के प्रति विश्वास सेक्स को ज्यादा आरामदायक बना सकता है।
💧 जरूरत पड़ने पर लुब्रिकेशन: पर्याप्त लुब्रिकेशन असहजता और घर्षण कम करने में मदद कर सकता है।
🧠 मानसिक आराम: तनाव, चिंता और प्रदर्शन का दबाव यौन अनुभव को प्रभावित कर सकता है। इसलिए खुद पर अनावश्यक दबाव डालने से बचना चाहिए।
साइज को लेकर इनसिक्योर होने की जरूरत नहीं
पेनिस का आकार व्यक्ति के शरीर की प्राकृतिक विशेषता है। केवल आकार के कारण खुद को कमतर समझना या लगातार तुलना करना आत्मविश्वास पर नकारात्मक असर डाल सकता है।
बेहतर सेक्स का आधार सिर्फ शरीर का कोई एक अंग नहीं, बल्कि आपसी सहमति, संवाद, आराम, उत्तेजना, भरोसा और पार्टनर की जरूरतों को समझना है।
अगर किसी व्यक्ति को अपने यौन स्वास्थ्य या सेक्सुअल फंक्शन को लेकर लगातार चिंता या परेशानी है, तो इंटरनेट के दावों या बिना सलाह वाले प्रोडक्ट्स पर भरोसा करने के बजाय योग्य डॉक्टर या सेक्सुअल हेल्थ विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर के बोरसर गांव में एक नया नियम लागू किया गया है, जिसके तहत अपशब्दों का इस्तेमाल करने पर 500 रुपए का जुर्माना या एक घंटे की गांव में सफाई करनी होगी। यह फैसला ग्राम पंचायत ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित करके लिया है। इस नियम की जानकारी देने वाले पोस्टर पूरे गांव में लगाए गए हैं।
इस पहल का उद्देश्य गांव में लोगों के व्यवहार को नियंत्रित करना और विवादों को सुलझाना है। उप सरपंच विनोद शिंदे ने कहा, हमारे गांव में हमने गाली-गलौज के इस्तेमाल को रोकने के लिए एक अच्छी पहल की है। पहले बच्चे और बड़े लोग, मां-बहनों के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल करते थे।
हमने ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करने वाले किसी भी व्यक्ति पर 500 रुपए का जुर्माना या एक घंटे गांव की सफाई करने की सजा भी तय की है। उन्होंने बताया कि इस पहल का नतीजा सकारात्मक रहा है और अब लोग अपशब्दों का इस्तेमाल करने से बच रहे हैं। उप-सरपंच ने यह भी बताया कि आसपास के गांव के लोग इस पहल का स्वागत कर रहे हैं। एक स्थानीय निवासी जयश्री ने कहा, अब कोई भी गाली-गलौज वाली भाषा का इस्तेमाल नहीं कर रहा है और अगर कोई ऐसा करता है, तो उसे जुर्माना भरना पड़ेगा।
इस नियम की वजह से, लोग अब ऐसी भाषा का इस्तेमाल नहीं करते, क्योंकि इसमें सजा का प्रावधान है। पहले हमारे गांव के बच्चे गाली-गलौज वाले शब्दों का इस्तेमाल करते थे और इसकी गंभीरता को नहीं समझते थे, भले ही माता-पिता उन्हें समझाने की कोशिश करते थे। एक युवक अश्विन पाटिल ने कहा, हमने अपने गांव में गाली मुक्त गांव नाम से एक पहल शुरू की है और हम मध्य प्रदेश में ऐसा करने वाला पहला गांव बन गए हैं।
इस पहल के तहत, अगर कोई व्यक्ति गाली-गलौज करते हुए पाया जाता है, तो उस पर 500 रुपए का जुर्माना लगाया जाता है या उसे एक घंटे तक गांव की सफाई करने का निर्देश दिया जाता है। यह विचार दो बातों को देखकर आया। पहली बात यह कि 12-13 साल के बच्चे, गाली-गलौज की गंभीरता को समझे बिना ही, आम बोलचाल में इसका इस्तेमाल कर रहे थे।
दूसरी बात यह समझ में आई कि किसी भी बड़े विवाद की जड़ गाली ही होती है। उन्होंने बताया कि यह उनका विचार था, जिसके बारे में सरपंच और उप-सरपंच से चर्चा की गई थी। उसके बाद गाली मुक्त गांव बनाने का फैसला लिया गया। हम सभी लोगों ने एक शपथ ली है और इस संबंध में पंचायत की ओर से भी एक पत्र जारी किया गया है।