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  • गर्लफ्रेंड को 10 मिनट तक किस करता रहा शख्स, अचानक कान में उठा तेज दर्द और चली गई सुनने की क्षमता!

    गर्लफ्रेंड को 10 मिनट तक किस करता रहा शख्स, अचानक कान में उठा तेज दर्द और चली गई सुनने की क्षमता!

    गर्लफ्रेंड को 10 मिनट तक किस करता रहा शख्स, अचानक कान में उठा तेज दर्द और चली गई सुनने की क्षमता!

    किसी से प्यार का इजहार करना आम बात है, लेकिन चीन से सामने आया एक मामला लोगों को हैरान करने वाला है। रिपोर्ट के मुताबिक, एक युवक अपनी गर्लफ्रेंड को करीब 10 मिनट तक किस करता रहा। इसी दौरान उसके कान में अचानक तेज दर्द हुआ और कुछ ही समय बाद उसे सुनाई देना लगभग बंद हो गया।

    घटना के बाद युवक को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसके कान के पर्दे (eardrum) में छेद होने की बात बताई। यह मामला सोशल मीडिया और मीडिया रिपोर्ट्स में काफी चर्चा में रहा था।

    डेट पर गर्लफ्रेंड को कर रहा था किस

    रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना चीन के पूर्वी हिस्से के झेजियांग प्रांत में हुई थी। युवक अपनी गर्लफ्रेंड के साथ डेट पर गया था।

    दोनों एक-दूसरे को किस कर रहे थे। इसी दौरान युवक को अपने कान में तेज दर्द महसूस हुआ। इसके बाद उसके कान में एक अजीब आवाज सुनाई दी और धीरे-धीरे उसकी सुनने की क्षमता प्रभावित होने लगी।

    स्थिति बिगड़ने पर उसे अस्पताल ले जाया गया।

    डॉक्टरों ने बताई कान के पर्दे में छेद की वजह

    अस्पताल में जांच के दौरान डॉक्टरों ने बताया कि युवक के कान के पर्दे में छेद हो गया था।

    कान का पर्दा बेहद नाजुक झिल्ली होती है, जो कान में आने वाली ध्वनि के कंपन को आगे पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके क्षतिग्रस्त होने पर सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।

    रिपोर्ट में डॉक्टरों के हवाले से बताया गया कि बहुत जोरदार तरीके से किस करने के दौरान पैदा होने वाला दबाव कान पर असर डाल सकता है।

    हालांकि, किसी व्यक्ति के किस करने मात्र से कान का पर्दा फट जाना आम घटना नहीं है। कान में दर्द या अचानक सुनाई कम देने के कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं।

    अचानक कैसे बंद हो गई सुनाई देना?

    रिपोर्ट के अनुसार, युवक को किस करते समय पहले कान में तेज दर्द महसूस हुआ। इसके बाद उसकी सुनने की क्षमता कम होने लगी।

    कान के पर्दे में चोट या छेद होने पर कान में दर्द, सुनने में कमी, कान से आवाज आना या अन्य लक्षण दिखाई दे सकते हैं। गंभीर स्थिति में चिकित्सकीय जांच जरूरी होती है।

    इसी वजह से युवक को डॉक्टरों ने आराम करने और कान को ठीक होने का समय देने की सलाह दी।

    पूरी तरह ठीक होने में लग सकते हैं कई सप्ताह

    मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि डॉक्टरों ने युवक को पूरी तरह ठीक होने में करीब दो महीने तक का समय लगने की बात बताई थी।

    कान के पर्दे की चोट कितनी गंभीर है, इसके आधार पर ठीक होने में लगने वाला समय अलग-अलग हो सकता है। कुछ मामलों में पर्दा अपने आप भी ठीक हो सकता है, जबकि गंभीर चोट में विशेषज्ञ उपचार की जरूरत पड़ सकती है।

    क्या किस करने से कोई भी व्यक्ति बहरा हो सकता है?

    इस घटना का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि सामान्य किस करने से व्यक्ति बहरा हो जाएगा।

    किसिंग के दौरान कान के पर्दे को नुकसान पहुंचना बेहद असामान्य स्थिति है। इस मामले में भी मीडिया रिपोर्ट्स ने इसे एक असामान्य घटना के तौर पर ही पेश किया था।

    कान की संरचना और चोट की स्थिति के आधार पर डॉक्टर ही यह बता सकते हैं कि सुनने की समस्या किस वजह से हुई।

    पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला

    रिपोर्ट्स में इससे पहले भी चीन में किस करने के बाद सुनने की क्षमता प्रभावित होने का एक मामला सामने आने का उल्लेख किया गया था।

    इसी तरह के पुराने मामलों की खबरें समय-समय पर सामने आती रही हैं, लेकिन ये बेहद दुर्लभ घटनाएं हैं। इन्हें सामान्य किसिंग के साथ होने वाली समस्या नहीं माना जा सकता।

    कान में तेज दर्द या अचानक सुनाई कम दे तो क्या करें?

    अगर किसी व्यक्ति को अचानक कान में तेज दर्द हो, कान से आवाज आने लगे या सुनने की क्षमता कम हो जाए, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

    ऐसी स्थिति में कान में खुद से कोई वस्तु डालने, दवा या तेल डालने या कान को जोर से साफ करने से बचना चाहिए। ENT विशेषज्ञ से जांच कराना सबसे सुरक्षित विकल्प है।

    इस घटना से क्या सीख मिलती है?

    चीन का यह मामला भले ही सोशल मीडिया पर मजेदार या चौंकाने वाली खबर के तौर पर वायरल हुआ हो, लेकिन इसके पीछे कान की संवेदनशील संरचना को समझना जरूरी है।

    कान का पर्दा बहुत नाजुक होता है और किसी भी तरह की चोट या अचानक दबाव से उसे नुकसान पहुंच सकता है। हालांकि, किस करने से कान का पर्दा फट जाना बेहद दुर्लभ है और इसे सामान्य घटना नहीं माना जाना चाहिए।

    इसलिए अगर कान में अचानक दर्द या सुनने की क्षमता में कमी महसूस हो, तो सोशल मीडिया के घरेलू नुस्खों पर भरोसा करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

    डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट्स और सामान्य चिकित्सकीय जानकारी पर आधारित है। कान से जुड़ी किसी समस्या, दर्द या अचानक सुनाई कम देने की स्थिति में योग्य ENT विशेषज्ञ से जांच और सलाह लेना जरूरी है।

  • डॉक्टरों ने कर दिया था मृत घोषित, 24 मिनट बाद जिंदा हो गई मह‍िला, जानें पूरा मामला..

    डॉक्टरों ने कर दिया था मृत घोषित, 24 मिनट बाद जिंदा हो गई मह‍िला, जानें पूरा मामला..

    डॉक्टरों ने कर दिया था मृत घोषित, 24 मिनट बाद जिंदा हो गई मह‍िला, जानें पूरा मामला..

    Lauren Canaday Viral Story: अमेरिका में एक बेहद ही हैरान करने वाला मामला सामने आया जहां एक महिला मृत घोषित किए जाने के 24 मिनट बाद फिर से जिंदा हो गई. अब वह अपनी कहानी खुद साझा कर रही है.

    Viral News: हम सबने यही सुना है कि मरने के बाद कोई जिंदा नहीं लौटता. अमेरिका में एक महिला ने मरने के बाद ज‍िंदा होकर इस कथन को गलत साब‍ित कर द‍िया है. दिलचस्प और हैरान करने वाली बात तो यह है क‍ि मह‍िला अब मौत के बाद के अनुभव को खुद बयान भी कर रही है. दावा है कि महिला की दिल की धड़कन बंद हो जाने के बाद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था लेकिन अपनी मौत के 24 मिनट बाद उसने फिर से जिंदा होकर सबको चौंका द‍िया है.

    मिरर की रिपोर्ट के मुताबिक, लॉरेन कैनाडे नाम की एक मह‍िला ने सोशल मीडिया साइट रेडिट पर अपनी कहानी शेयर की है. महिला ने कहा कि पिछले फरवरी में मुझे घर पर अचानक कार्डियक अरेस्ट हुआ था. मेरे पति ने 911 पर कॉल किया और सीपीआर देना शुरू किया. डॉक्‍टर आए और मुझे मृत घोषित कर दिया लेकिन करीब 24 मिनट के बाद मैं फ‍िर जिंदा हो गई.

    चार मिनट तक पति ने दिया सीपीआर

    महिला ने बताया कि उस वक्‍त मेरे साथ क्‍या-क्‍या हुआ, मुझे सब कुछ साफ और अच्‍छे तरीके से याद है. कार्डियक अरेस्ट के बाद मेरे पति ने 4 मिनट तक मुझे सीपीआर दिया. मेरे आसपास अफरा- तफरी मची हुई थी. आनन-फानन में मुझे अस्पताल ले जाया गया. इस दौरान मैं कोमा में चली गई थी. 2 दिन तक कोमा में रही. जब मैं उठी तो बहुत उलझन में थी. कई दिनों तक मुझे पुरानी चीजें याद नहीं थीं. आईसीयू में मेरे साथ क्‍या-क्‍या हुआ कुछ नहीं पता.

    दिलचस्प है पूरा मामला

    महिला ने बताया कि उसे मरने के बाद भी सब कुछ दिख रहा था. उसमें अस्पताल के कर्मचारी और डॉक्टर्स भी शामिल थे जिनको उन्होंने पहले कभी नहीं देखा था. न्यूयॉर्क पोस्ट ने कहा कि कैनाडे का मामला दिलचस्प इसलिए है क्योंकि इस तरह के मामले में अधिकांश लोग लंबे समय तक जीवित नहीं रहते हैं. 1982 और 2018 के बीच दर्ज किए गए 65 मामलों में से केवल 18 लोग ही पूरी तरह ठीक हो पाए.

  • तीन कुत्ते और तीन इंसान…इस पूरे देश में सिर्फ इतने ही लोग रहते हैं.?

    तीन कुत्ते और तीन इंसान…इस पूरे देश में सिर्फ इतने ही लोग रहते हैं.?

    तीन कुत्ते और तीन इंसान…इस पूरे देश में सिर्फ इतने ही लोग रहते हैं.?

    ये माइक्रोनेशन मोलोसिया 11 एकड़ में बसा है. इसे ग्रैंड रिपब्लिक ऑफ गोल्डस्टीन भी कहते हैं. इसकी स्थापना 1977 में हुई थी. मौजूदा समय में यहां सिर्फ तीन कुत्ते और तीन इंसान ही रहते हैं.

    पूरी दुनिया में इस वक्त 225 देश हैं. कोई देश बहुत बड़ा है तो कोई बहुत छोटा. किसी देश में अरबों लोग रहते हैं तो कुछ देशों में महज़ कुछ हजार या लाख लोग रहते हैं. हालांकि, हम जिस देश की बात कर रहे हैं वहां इस वक्त मात्र तीन कुत्ते और तीन इंसान ही रहते हैं. चलिए इसके बारे में आपको पूरी जानकारी देते हैं.

    कहां है ये देश

    हम जिस देश की बात कर रहे हैं…वह वास्तव में एक देश तो नहीं है लेकिन आप इसे एक माइक्रोनेशन कह सकते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि इसके पास अपनी नौसेना, नौसेना अकादमी, डाक सेवा, बैंक, अंतरिक्ष कार्यक्रम, रेलमार्ग और ऑनलाइन रेडियो स्टेशन है. ये देश संयुक्त राज्य अमेरिका के नेवादा में स्थित है.

    कितना बड़ा है ये देश

    ये माइक्रोनेशन 11 एकड़ में बसा है. इसे दुनिया ग्रैंड रिपब्लिक ऑफ गोल्डस्टीन या फिर मोलोसिया गणराज्य कहती है. इसकी स्थापना 1977 में हुई थी. इस देश की आबादी की बात करें तो ये मात्र 38 है. हालांकि, मौजूदा समय में यहां सिर्फ तीन कुत्ते और तीन इंसान ही रहते हैं. मोलोसिया गणराज्य भले अपने आप को देश कहता हो, लेकिन इसे अभी तक संयुक्त राष्ट्र से मान्यता प्राप्त नहीं है.

    इस देश के राष्ट्रपति का नाम है केविन वॉघ. इस देश में जब आप पहुंचेंगे तो वहां आपको राष्ट्रपति केविन वॉघ के नाम के नीचे जो पूरा शीर्षक लिखा मिलेगा वो है- हिज़ एक्सिलेंसी ग्रैंड एडमिरल कर्नल डॉक्टर केविन बॉघ, मोलोसिया के राष्ट्रपति और रईस, राष्ट्र के रक्षक और लोगों के संरक्षक. वहीं इस देश में घूमने वाले लोगों को एक चीज का बहुत ख़याल रखना पड़ता है. दरअसल, इस देश में कैटफिश और प्याज बिल्कुल बैन है. यानी आप यहां ये दो चीजें ले कर नहीं जा सकते. अगर आपने ऐसा किया तो आपको जेल में डाल दिया जाएगा.

  • नोटों की गड्डी को खाना समझकर खा गया कुत्ता, एक झटके में हुआ लाखों का नुकसान..

    नोटों की गड्डी को खाना समझकर खा गया कुत्ता, एक झटके में हुआ लाखों का नुकसान..

    नोटों की गड्डी को खाना समझकर खा गया कुत्ता, एक झटके में हुआ लाखों का नुकसान..

    Dog Chews Lakh Of Cash: अमेरिका के पेंसिल्वेनिया में एक कुत्ते ने मालिक को एक झटके में लाखों का नुकसान पहुंचाया है. कुत्ता नोटों की गड्डी को खाना समझकर खा गया है

    Viral News: अमेरिका के पेंसिल्वेनिया में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक कुत्ते ने मालिक को एक झटके में लाखों का नुकसान पहुंचाया है. दरअसल, पालतू कुत्ते ने नोटों की गड्डी (Dog eats cash USA) को खाना समझकर खा लिया है. जिससे कुत्ते के मालिक को लाखों का नुकसान हो गया.

    गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, पेंसिलवेनिया की रहने वाली 33 वर्षीय कैरी लॉ और उनके पार्टनर क्लेटन ने सेसिल नाम का सात साल का कुत्ता पाल रखा है. ये कपल अपने कुत्ते का बेहद ख्याल रखता है. लेकिन पिछले महीने इस कपल के साथ जो घटना हुई उससे ये दोनों सदमे में हैं. दरअसल, सेसिल ने पिछले महीने किसी काम के लिए अलग रखे गए पैसों के लिफाफे को खाना समझ खा लिया, जिससे कैरी लॉ को 4,000 डॉलर (3.32 लाख रुपये) का नुकसान एक झटके में हो गया.

    किचन में रखे थे पैसे

    गार्जियन से बात करते हुए कैरी ने कहा कि रुपये घर के किचन में बने काउंटर पर रखे हुए थे. हमने कभी इस बात की कल्पना नहीं की थी कि ऐसा हो सकता है. ये यह सबकुछ आधे घंटे के अंदर हुआ. कैरी ने घटना को लेकर बताया कि अचानक क्लेटन ने चिल्लाते हुए कहा कि सेसिल ने रुपये खा लिए. ये सुनकर पहले तो मुझे यकीन नहीं हुआ लेकिन जब मैंने जाकर अपनी आंखों से देखा तो मैं हैरान रह गई.

     

     

     

     

    कैरी में बताया कि यह पैसे हमने जरुरी काम के लिए रखा था लेकिन जब सेसिल उन्हें खा गया तो हमें कुछ सूझ नहीं रहा था. ऐसे में हमने कुत्ते से उल्टी कराने की कोशिश की लेकिन ऐसा नहीं हो पाया. हमने घण्टों उसके मल का इंतजार किया लेकिन कुछ भी हासिल नहीं हुआ. जिसके बाद उसे दिखाने के लिए डॉक्टर को बुलाया गया. डॉक्टर ने बताया कि ‘वह बिल्कुल ठीक है. कैरी ने बताया कि सेसिल आमतौर पर अच्छा व्यवहार करता है, लेकिन इस घटना ने करारा झटका दिया है.

  • “मैं इन्हीं के साथ रहूंगी…” 3 महीने की शादी के बाद प्रेमी के पास पहुंची नवविवाहिता, पंचायत में हुआ ऐसा फैसला कि गांव में मच गया हंगामा.

    “मैं इन्हीं के साथ रहूंगी…” 3 महीने की शादी के बाद प्रेमी के पास पहुंची नवविवाहिता, पंचायत में हुआ ऐसा फैसला कि गांव में मच गया हंगामा.

    “मैं इन्हीं के साथ रहूंगी…” 3 महीने की शादी के बाद प्रेमी के पास पहुंची नवविवाहिता, पंचायत में हुआ ऐसा फैसला कि गांव में मच गया हंगामा.

    उत्तर प्रदेश के जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरे इलाके में चर्चा छेड़ दी है। शादी को अभी महज तीन महीने ही हुए थे, लेकिन नवविवाहिता ने अपने पति के साथ रहने से इनकार कर दिया। महिला का कहना था कि वह अपने प्रेमी के साथ ही रहना चाहती है। मामला जब गांव की पंचायत तक पहुंचा तो वहां ऐसा फैसला सुनाया गया, जिसे सुनकर कई लोग हैरान रह गए।

    बताया जा रहा है कि मनियर थाना क्षेत्र के एक गांव में रहने वाली महिला की शादी कुछ महीने पहले हुई थी। शुरुआत में सब कुछ सामान्य चल रहा था, लेकिन बाद में महिला के किसी दूसरे युवक के साथ संबंध होने की बात सामने आने लगी। जब पति को इस बारे में जानकारी मिली तो मामला परिवार से निकलकर गांव की पंचायत तक पहुंच गया।

    तीन महीने पहले हुई थी शादी

    जानकारी के मुताबिक, महिला की शादी करीब तीन महीने पहले हुई थी। शादी के बाद वह अपने ससुराल में रह रही थी। इसी दौरान परिवार को उसके एक युवक के साथ संबंध होने की जानकारी मिली। पति को जब इस रिश्ते के बारे में पता चला तो दोनों के बीच विवाद बढ़ गया।

    मामला इतना बढ़ा कि परिवार के लोगों और ग्रामीणों की मौजूदगी में पंचायत बुलाने का फैसला किया गया। पंचायत में महिला से उसके पति के साथ रहने को लेकर बात की गई, लेकिन महिला अपने फैसले पर कायम रही।

    उसने कथित तौर पर साफ कर दिया कि वह पति के साथ नहीं, बल्कि अपने प्रेमी के साथ रहना चाहती है।

    पंचायत में जुटे सैकड़ों लोग

    मामले को सुलझाने के लिए गांव में पंचायत बुलाई गई। इसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। महिला और उसके पति के पक्ष को सुना गया। बताया जा रहा है कि पंचायत में महिला ने अपनी इच्छा दोहराते हुए प्रेमी के साथ रहने की बात कही।

    पति की ओर से भी पत्नी से अलग होने की इच्छा जताई गई। इसके बाद पंचायत में मौजूद लोगों के बीच इस रिश्ते को लेकर चर्चा हुई।

    मामले में ग्राम प्रधान की भूमिका भी सामने आई। बताया गया कि पंचायत के दौरान एक पंचनामा तैयार किया गया और ग्राम प्रधान के लेटरहेड पर एक प्रमाणपत्र भी जारी किया गया।

    पंचायत ने दे दी प्रेमी के साथ रहने की इजाजत

    सबसे ज्यादा चर्चा पंचायत के फैसले को लेकर हो रही है। ग्राम प्रधान के मुताबिक, महिला और उसका प्रेमी दोनों एक-दूसरे के साथ रहना चाहते थे। ऐसे में पंचायत ने उनके फैसले को स्वीकार करते हुए महिला को प्रेमी के साथ रहने की अनुमति दे दी।

    इसके बाद पंचायत में मौजूद लोगों से दस्तखत भी कराए गए। महिला को उसके परिजनों के साथ वहां से विदा कर दिया गया।

    इस फैसले के बाद गांव में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। कुछ लोग इसे महिला की अपनी जिंदगी को लेकर लिया गया फैसला बता रहे हैं, जबकि कुछ लोगों ने पंचायत के इस तरह के फैसले पर सवाल भी उठाए।

    पति-पत्नी के रिश्ते पर उठे सवाल

    इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि शादी के महज तीन महीने बाद ही महिला ने पति के साथ रहने से इनकार क्यों कर दिया। हालांकि, महिला के प्रेम संबंध की बात सामने आने के बाद विवाद बढ़ा था, लेकिन इस मामले में दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग बातें सामने आ सकती हैं।

    स्थानीय स्तर पर पंचायत ने मामले को बातचीत के जरिए खत्म करने की कोशिश की, लेकिन पंचायत के फैसले को लेकर कानूनी स्थिति अलग हो सकती है। किसी विवाह को खत्म करने या वैवाहिक रिश्ते से जुड़े अधिकारों का फैसला केवल पंचायत के स्तर पर नहीं किया जा सकता।

    फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम ने गांव में नई बहस छेड़ दी है। तीन महीने पहले हुई शादी, प्रेम संबंध का खुलासा और फिर पंचायत में महिला का अपने प्रेमी के साथ रहने की जिद—इन सबने इस मामले को इलाके में चर्चा का विषय बना दिया है।

  • 6 फीट 10 इंच की महिला को देखते ही घूरने लगते हैं लोग, लव लाइफ पर पूछते हैं ऐसे सवाल कि हो जाती हैं परेशान.

    6 फीट 10 इंच की महिला को देखते ही घूरने लगते हैं लोग, लव लाइफ पर पूछते हैं ऐसे सवाल कि हो जाती हैं परेशान.

    6 फीट 10 इंच की महिला को देखते ही घूरने लगते हैं लोग, लव लाइफ पर पूछते हैं ऐसे सवाल कि हो जाती हैं परेशान.

    आम जिंदगी में अगर कोई महिला बाकी लोगों से काफी ज्यादा लंबी हो, तो लोगों की नजर उस पर जाना स्वाभाविक है। लेकिन अमेरिका की 6 फीट 10 इंच यानी करीब 208 सेंटीमीटर लंबी नैंसी मुल्की के लिए लोगों की यह दिलचस्पी कई बार परेशानी का कारण बन जाती है। उनकी लंबाई इतनी ज्यादा है कि वह जहां भी जाती हैं, लोग उन्हें देखने लगते हैं और कई बार बिना झिझक उनकी निजी जिंदगी से जुड़े सवाल भी पूछ बैठते हैं।

    नैंसी अमेरिका के टेक्सास की रहने वाली हैं और बास्केटबॉल से जुड़ी रही हैं। वह खिलाड़ी के तौर पर भी खेल चुकी हैं और अब कोचिंग करती हैं। उनकी असाधारण लंबाई की वजह से सोशल मीडिया पर भी उनकी अच्छी-खासी पहचान बन चुकी है।

    सबसे ज्यादा परेशान करता है लोगों का एक सवाल

    नैंसी ने सोशल मीडिया पर अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि अजनबी लोग अक्सर उनकी लंबाई देखकर सवालों की झड़ी लगा देते हैं। इनमें सबसे आम सवाल होता है कि उनके माता-पिता कितने लंबे हैं।

    इसके बाद लोग उनके भाई-बहनों की लंबाई, बचपन में उनकी हाइट कितनी थी और उनके जूतों का साइज क्या है, जैसी बातें भी पूछने लगते हैं। नैंसी के मुताबिक, कई बार ऐसा महसूस होता है जैसे सामने वाला उनकी जिंदगी की पूरी जेनेटिक्स रिपोर्ट जानना चाहता हो।

    उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि लोगों की जिज्ञासा समझ में आती है, लेकिन बार-बार एक जैसे सवाल सुनना काफी थका देने वाला होता है।

    लव लाइफ पर भी नहीं बचते सवाल

    नैंसी के लिए सिर्फ उनकी लंबाई ही चर्चा का विषय नहीं है। लोग उनकी डेटिंग और लव लाइफ को लेकर भी कई तरह के सवाल करते हैं।

    कई लोग उनसे पूछते हैं कि इतनी लंबी होने के कारण डेटिंग में परेशानी होती है या नहीं। कुछ लोग यह भी जानना चाहते हैं कि उन्हें अपने से छोटे पुरुष पसंद हैं या लंबे।

    नैंसी ने बताया कि वह ऐसे कई पुरुषों से मिल चुकी हैं जिनकी लंबाई उनसे कम थी, लेकिन उनका आत्मविश्वास काफी ज्यादा था। उनके मुताबिक, सिर्फ कद किसी इंसान की पूरी पर्सनैलिटी तय नहीं करता।

    ‘कद नहीं, पर्सनैलिटी भी मायने रखती है’

    नैंसी का मानना है कि जेनेटिक्स को इंसान बदल नहीं सकता, लेकिन अपने व्यवहार, आत्मविश्वास, ड्रेसिंग और पर्सनैलिटी पर काम जरूर कर सकता है।

    उनका कहना है कि कई बार मजबूत व्यक्तित्व और आत्मविश्वास लंबाई के अंतर को भी पीछे छोड़ देता है। इसलिए किसी व्यक्ति को सिर्फ उसकी हाइट देखकर आंकना सही नहीं है।

    बास्केटबॉल में फायदा, रोजमर्रा की जिंदगी में चुनौती

    नैंसी की लंबाई उनके खेल करियर में काफी फायदेमंद रही है। वह पहले WNBA की लास वेगास एसेस टीम के लिए खेल चुकी हैं और अब टेक्सास A&M एगीज महिला बास्केटबॉल प्रोग्राम से कोच के तौर पर जुड़ी हैं।

    हालांकि, रोजमर्रा की जिंदगी में इतनी लंबी हाइट कई मुश्किलें भी पैदा करती है। कपड़े सही साइज के मिलना, कार में आराम से बैठना और भीड़भाड़ वाली जगहों पर चलना उनके लिए आम लोगों से अलग अनुभव है।

    सबसे बड़ी बात यह है कि उनकी लंबाई उन्हें आसानी से भीड़ में अलग पहचान देती है। लोग कई बार उन्हें लगातार घूरते रहते हैं। कभी-कभी उन्हें यह दिलचस्प लगता है, लेकिन कई मौकों पर यही चीज उन्हें असहज भी कर देती है।

    नैंसी की कहानी यह दिखाती है कि किसी की अलग पहचान उसे मशहूर तो बना सकती है, लेकिन उसके साथ रोजमर्रा की जिंदगी में कई ऐसी चुनौतियां भी आती हैं जिन्हें बाहर से देखने वाला व्यक्ति शायद समझ ही नहीं पाता।

  • शादी से सिर्फ 4 दिन पहले प्रेमी संग घर से निकल गई रचना, मंडप की तैयारियों के बीच मचा हड़कंप; बचपन के प्यार के सामने परिवार ने तय कर दी थी दूसरी शादी..​​​​​​

    शादी से सिर्फ 4 दिन पहले प्रेमी संग घर से निकल गई रचना, मंडप की तैयारियों के बीच मचा हड़कंप; बचपन के प्यार के सामने परिवार ने तय कर दी थी दूसरी शादी..​​​​​​

    शादी से सिर्फ 4 दिन पहले प्रेमी संग घर से निकल गई रचना, मंडप की तैयारियों के बीच मचा हड़कंप; बचपन के प्यार के सामने परिवार ने तय कर दी थी दूसरी शादी..​​​​​​

    खजुराहो के पास बमीठा इलाके का एक छोटा-सा गांव। फरवरी की ठंडी सुबहें थीं और भैरो पटेल के घर में शादी की तैयारियां जोर-शोर से चल रही थीं। आंगन में रिश्तेदारों की आवाजाही थी, घर की महिलाएं रस्मों की तैयारी में जुटी थीं और हर किसी की जुबान पर एक ही बात थी—11 फरवरी को रचना की शादी है।

    18 साल की रचना की शादी पास के गांव हीरापुर में तय हुई थी। परिवार अपनी हैसियत के मुताबिक शादी की तैयारियों में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहता था। कपड़े आ चुके थे, मेहमानों के आने का सिलसिला शुरू हो गया था और घर में शादी से पहले होने वाली रस्मों की तैयारी चल रही थी।

    लेकिन इसी घर में एक ऐसी कहानी भी पल रही थी, जिसकी भनक परिवार को शायद पूरी तरह नहीं थी।

    रचना बचपन से ही नीरज को जानती थी। दोनों एक ही इलाके के रहने वाले थे। बचपन की दोस्ती कब एक-दूसरे के लिए गहरी भावनाओं में बदल गई, शायद उन्हें भी पता नहीं चला। समय बीतता गया और दोनों का रिश्ता मजबूत होता गया।

    रचना के लिए नीरज कोई अचानक आया हुआ रिश्ता नहीं था। वह उसके बचपन का साथी था, जिसे वह लंबे समय से जानती और समझती थी।

    लेकिन परिवार ने रचना के लिए किसी और को चुन लिया था।

    घर में शादी की तैयारियां चल रही थीं, मगर रचना के मन में कुछ और ही उथल-पुथल थी। एक तरफ परिवार की इच्छा थी, दूसरी तरफ वह रिश्ता था, जो उसके साथ बचपन से चला आ रहा था।

    शादी में अब सिर्फ चार दिन बाकी थे।

    घर में महिलाएं ‘छई माटी’ की रस्म की तैयारी कर रही थीं। बुंदेलखंड के गांवों में यह रस्म शादी से पहले बड़े उत्साह से निभाई जाती है। महिलाएं खेत से मिट्टी लेने जाती हैं, गीत गाती हैं और आने वाली शादी के लिए पूजा-पाठ करती हैं।

    भैरो पटेल के घर में भी ऐसा ही माहौल था। किसी को अंदाजा नहीं था कि जिस बेटी की शादी के गीत गाए जा रहे हैं, वह कुछ ही घंटों बाद घर में नहीं होगी।

    फिर अचानक रचना गायब हो गई।

    पहले परिवार को लगा कि वह किसी रिश्तेदार या पड़ोसी के यहां गई होगी। लेकिन जब काफी देर तक उसका कोई पता नहीं चला तो घरवालों ने तलाश शुरू की। रिश्तेदारों से पूछा गया, आसपास के घरों में खोजा गया और गांव में भी खबर भेजी गई।

    तभी परिवार को पता चला कि रचना नीरज के साथ घर से चली गई है।

    यह खबर मिलते ही शादी वाले घर का माहौल पूरी तरह बदल गया। जहां कुछ देर पहले तक हंसी-खुशी और रस्मों की बातें हो रही थीं, वहां अब घबराहट और तनाव था। शादी की तैयारियां रुक गईं और परिवार बेटी की तलाश में जुट गया।

    गांव में भी यह बात तेजी से फैल गई कि रचना अपनी शादी से सिर्फ चार दिन पहले बचपन के प्रेमी के साथ चली गई है।

    लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। कोई इसे परिवार की इज्जत से जोड़कर देख रहा था, तो कोई कह रहा था कि रचना ने अपने पुराने प्यार को चुना है।

    लेकिन इस कहानी का सबसे बड़ा सवाल यही था कि अगर रचना और नीरज एक-दूसरे से प्यार करते थे, तो परिवार को इसकी जानकारी क्यों नहीं थी? और अगर जानकारी थी, तो रचना की शादी किसी और जगह क्यों तय की गई?

    भैरो पटेल अपनी बेटी की शादी ऐसे परिवार में करना चाहते थे, जिसे वे अपनी हैसियत और सामाजिक स्थिति के मुताबिक मानते थे। उनके लिए यह शादी परिवार की प्रतिष्ठा से जुड़ी थी। दूसरी तरफ रचना के लिए यह उसके पूरे जीवन का फैसला था।

    शायद यही वजह थी कि उसने आखिरी समय में वह कदम उठाया, जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी।

    रचना के घर से जाने के बाद परिवार के सामने सिर्फ बेटी को ढूंढने की चिंता नहीं थी। शादी की तारीख नजदीक थी, रिश्तेदार घर पर थे और गांव में हर कोई इस घटना की चर्चा कर रहा था।

    जिस आंगन में बेटी की डोली उठने वाली थी, वहां अब सन्नाटा पसरा था।

    रचना और नीरज की कहानी को गांव में लोग अलग-अलग नजरिए से देख रहे थे। कुछ लोगों के लिए यह परिवार के खिलाफ उठाया गया कदम था, तो कुछ के लिए यह दो पुराने प्रेमियों का साथ रहने का फैसला।

    लेकिन सच यह था कि दोनों का रिश्ता अचानक नहीं बना था। वे बचपन से एक-दूसरे को जानते थे। उनके बीच समय के साथ भरोसा और लगाव बढ़ा था। रचना के सामने जब दूसरी शादी का फैसला रखा गया, तो शायद उसे लगा कि अगर अब उसने कुछ नहीं किया, तो वह अपने पुराने रिश्ते को हमेशा के लिए खो देगी।

    और फिर शादी से चार दिन पहले उसने घर छोड़ दिया।

    इस घटना ने पूरे गांव को सोचने पर मजबूर कर दिया। क्या परिवारों को बच्चों की पसंद के बारे में समय रहते बात करनी चाहिए? क्या रचना अपनी बात परिवार के सामने खुलकर रख पाई थी? क्या सामाजिक दबाव ने दोनों को ऐसा कदम उठाने पर मजबूर किया?

    इन सवालों के जवाब शायद उस समय किसी के पास नहीं थे।

    भैरो पटेल के घर में शादी की तैयारियां जिस उत्साह से शुरू हुई थीं, वह कुछ ही घंटों में चिंता में बदल गईं। रिश्तेदारों के बीच फुसफुसाहट शुरू हो गई। गांव के लोग घर के बाहर जमा होने लगे और हर कोई यही जानना चाहता था कि रचना कहां गई और अब आगे क्या होगा।

    एक तरफ परिवार बेटी को वापस लाने की कोशिश कर रहा था, दूसरी तरफ रचना अपने बचपन के प्यार के साथ चली गई थी।

    यह कहानी सिर्फ एक लड़की के घर से चले जाने की नहीं थी। यह उस टकराव की कहानी थी, जिसमें एक तरफ परिवार की उम्मीदें थीं और दूसरी तरफ दो लोगों का पुराना रिश्ता।

    रचना की शादी 11 फरवरी को होनी थी, लेकिन उससे चार दिन पहले ही उसने अपनी जिंदगी का रास्ता खुद चुन लिया।

    जिस घर में शादी के गीत गूंजने वाले थे, वहां अचानक सवालों और सन्नाटे ने जगह ले ली।

    और गांव में लंबे समय तक लोग यही कहते रहे—रचना ने शादी से भागकर सिर्फ एक घर नहीं छोड़ा, उसने अपने बचपन के प्यार को बचाने के लिए परिवार और समाज के सामने एक बड़ा फैसला रख दिया था।

  • आंखों के नीचे काले घेरे कैसे कम करें? अपनाएं ये आसान उपाय..​​​​​​

    आंखों के नीचे काले घेरे कैसे कम करें? अपनाएं ये आसान उपाय..​​​​​​

    आंखों के नीचे काले घेरे कैसे कम करें? अपनाएं ये आसान उपाय..​​​​​​

    आंखों के नीचे काले घेरे यानी डार्क सर्कल एक आम समस्या है। इसके पीछे नींद की कमी, आनुवंशिकता, बढ़ती उम्र, एलर्जी, डिहाइड्रेशन, आंखों को बार-बार रगड़ना और धूप में ज्यादा रहना जैसे कई कारण हो सकते हैं। इसलिए इन्हें कम करने के लिए सबसे पहले संभावित कारण पर ध्यान देना जरूरी है।

    1. रोज पर्याप्त नींद लें

    नींद पूरी न होने पर आंखों के नीचे की त्वचा अधिक थकी हुई और गहरी दिखाई दे सकती है। रोज करीब 7 घंटे या उससे अधिक की अच्छी नींद लेने की कोशिश करें। सोने और जागने का समय भी नियमित रखना फायदेमंद हो सकता है।

    2. आंखों पर ठंडी पट्टी रखें

    ठंडी पट्टी कुछ समय के लिए आंखों के आसपास की सूजन और डार्कनेस की उपस्थिति को कम करने में मदद कर सकती है। इसे बंद आंखों पर कुछ मिनट हल्के तरीके से रखा जा सकता है।

    3. आंखों को बार-बार न रगड़ें

    आंखों को लगातार रगड़ने या खुजाने से आसपास की त्वचा में सूजन और जलन हो सकती है। इससे आंखों के नीचे का हिस्सा और ज्यादा गहरा दिखाई दे सकता है। अगर एलर्जी के कारण आंखों में खुजली रहती है, तो उसके इलाज के लिए डॉक्टर से सलाह लें।

    4. धूप से त्वचा की सुरक्षा करें

    अत्यधिक धूप त्वचा में पिगमेंटेशन बढ़ा सकती है, जिससे आंखों के नीचे का हिस्सा ज्यादा गहरा दिखाई दे सकता है। चेहरे पर सनस्क्रीन लगाने और धूप में सनग्लास पहनने की आदत मददगार हो सकती है।

    5. शरीर को हाइड्रेट रखें

    पर्याप्त पानी न पीने पर त्वचा रूखी और फीकी दिखाई दे सकती है, जिससे डार्क सर्कल अधिक नजर आ सकते हैं। पूरे दिन पर्याप्त मात्रा में पानी और अन्य स्वस्थ तरल पदार्थ लेते रहें।

    6. कैफीन या अन्य उपयुक्त स्किनकेयर वाले प्रोडक्ट पर विचार करें

    कुछ अंडर-आई उत्पादों में कैफीन या रेटिनॉल जैसे ingredients होते हैं, जो कुछ लोगों में सूजन या डार्क सर्कल की appearance को कम करने में मदद कर सकते हैं। आंखों के आसपास की त्वचा संवेदनशील होती है, इसलिए कोई भी नया प्रोडक्ट इस्तेमाल करने से पहले सावधानी बरतें।

    7. ज्यादा नमक और अस्वस्थ आदतों पर नियंत्रण रखें

    आंखों के आसपास सूजन और पफीनेस में कुछ lifestyle factors भूमिका निभा सकते हैं। संतुलित डाइट लेना, धूम्रपान से बचना और शराब का अधिक सेवन न करना त्वचा और सामान्य स्वास्थ्य के लिए बेहतर है।

    कब डॉक्टर से संपर्क करें?

    अगर काले घेरे अचानक दिखाई देने लगे हों, सिर्फ एक आंख के नीचे हों, या उनके साथ ज्यादा सूजन, दर्द अथवा आंखों से जुड़ी दूसरी समस्या हो, तो डॉक्टर या आई स्पेशलिस्ट से जांच कराना बेहतर है।

    निष्कर्ष: डार्क सर्कल को पूरी तरह हटाना हर व्यक्ति में संभव नहीं होता, क्योंकि आनुवंशिकता और उम्र जैसे कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं। लेकिन पर्याप्त नींद, धूप से बचाव, हाइड्रेशन और सही स्किनकेयर से उनकी appearance को कम करने में मदद मिल सकती है।

  • हजारों साल पुरानी ममी के पेट से मिला रहस्यमयी कागज, खुलासे से वैज्ञानिक भी दंग..

    हजारों साल पुरानी ममी के पेट से मिला रहस्यमयी कागज, खुलासे से वैज्ञानिक भी दंग..

    हजारों साल पुरानी ममी के पेट से मिला रहस्यमयी कागज, खुलासे से वैज्ञानिक भी दंग..

    इतिहास की परतों में न जाने कितने ऐसे रहस्य दबे हैं, जो आज भी इंसानी दिमाग को चकरा देते हैं. हाल ही में मिस्र के अल-बहासा में पुरातत्वविदों को एक ऐसी ममी मिली है, जिसने अब तक की सभी मान्यताओं को हिलाकर रख दिया है. आमतौर पर जब भी कोई प्राचीन ममी मिलती है, तो उसके साथ जादुई मंत्र या धार्मिक ग्रंथ पाए जाते हैं, ताकि परलोक में उसकी आत्मा को शांति मिले. इसके अलावा सोने-चांदी के गहने-जेवरात भी होते हैं. लेकिन इस बार वैज्ञानिकों के हाथ कुछ ऐसा लगा, जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी. इस ममी के पेट के अंदर से एक प्राचीन कागज (पपायरस) निकला, जिस पर दुनिया की सबसे मशहूर युद्ध कथाओं में से एक का हिस्सा लिखा हुआ था. जांच के दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि ममी के पेट में दबा यह कागज असल में महान कवि होमर की सुप्रसिद्ध रचना ‘इलियड’ का एक अंश है.

    इसमें प्राचीन यूनानी सेनाओं और उनके जहाजों का विस्तृत विवरण दिया गया है, जो पौराणिक ट्रोजन युद्ध की ओर बढ़ रहे थे. पुरातत्वविदों के लिए यह खोज किसी चमत्कार से कम नहीं है, क्योंकि पूरी दुनिया में यह अपनी तरह का पहला मामला है, जहां किसी ममी के शरीर के भीतर से कोई साहित्यिक कृति बरामद हुई हो. इस खोज ने प्राचीन काल में शवों को दफनाने की परंपराओं पर एक नई बहस छेड़ दी है. इस रहस्यमयी पपायरस को हाल ही में की गई खुदाई के दौरान निकाला गया था. वैज्ञानिकों की टीम ने जब ग्रीक भाषा में लिखे इस पाठ का अध्ययन किया, तो वे दंग रह गए कि हजारों साल बाद भी यह सुरक्षित कैसे रहा. आमतौर पर ममी बनाने की प्रक्रिया के दौरान शरीर को रसायनों से भरा जाता है, लेकिन इस ममी को अनोखे तरीके से दफनाया गया.

    ममी के अंदर किसी साहित्यिक कविता का होना यह संकेत देता है कि उस समय के लोगों के लिए साहित्य का महत्व सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं था, बल्कि उसे परलोक की यात्रा के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता था. इस खुदाई के दौरान सिर्फ यह अनोखी ममी ही नहीं मिली, बल्कि कई और चौंकाने वाले राज भी सामने आए हैं. पुरातत्वविदों को ऐसी ममी भी मिली हैं, जिनकी जीभ सोने की बनी हुई थी. प्राचीन मिस्र के लोगों का मानना था कि सोने की जीभ लगाने से मृत व्यक्ति मरने के बाद देवताओं से बात कर पाएगा. इसके अलावा वहां से सजे हुए ताबूत और कई प्राचीन कलाकृतियां भी बरामद की गई हैं, जो उस दौर की आलीशान जीवनशैली और उनकी अजीबोगरीब धार्मिक मान्यताओं को उजागर करती हैं. यह ऐतिहासिक मिशन बार्सिलोना विश्वविद्यालय के नेतृत्व में चलाया गया था, जो काहिरा से करीब 190 किलोमीटर दूर ऑक्सीरहिन्चस नामक प्राचीन शहर में स्थित है.

  • ‘बदसूरती’ के मिले लाखों रुपये! इस डॉगी ने चमकाई मालकिन की किस्मत

    ‘बदसूरती’ के मिले लाखों रुपये! इस डॉगी ने चमकाई मालकिन की किस्मत

    ‘बदसूरती’ के मिले लाखों रुपये! इस डॉगी ने चमकाई मालकिन की किस्मत

    दुनियाभर में अक्सर खूबसूरती के चर्चे होते हैं, लेकिन कैलिफोर्निया में एक ऐसा कंपटीशन (competition) होता है, जहां डॉग्स की अनोखी बनावट और उनकी सादगी को सेलिब्रेट किया जाता है. कैलिफोर्निया (California) के सांता रोजा (Santa Rosa) में 14 अगस्त को आयोजित 50वें ‘वर्ल्ड्स अग्लिएस्ट डॉग कॉन्टेस्ट’ में 6 साल की पग ‘जिनी लू’ ने बाजी मारते हुए ये खिताब अपने नाम कर लिया है.

    जिनी लू (Jinny Lu) की मालकिन मिशेल ग्रेडी (Michelle Grady) के मुताबिक, जिनी लू पिछले तीन सालों से इस कंपटीशन में हिस्सा ले रही थी, लेकिन जीत उसे फोर्थ अटेम में मिली. कंपटीशन में दूसरा स्थान चिहुआहुआ-पोमेरेनियन मिक्स (Chihuahua-Pomeranian mix) ‘पिंकी’ (Pinky) को मिला, जबकि तीसरा स्थान ‘ऑटो’ (Otto) नाम के डॉगी ने हासिल किया.

    जिनी लू को करीब 4 साल पहले पग रेस्क्यू के जरिए गोद लिया गया था, तब से वो अपनी मालकिन मिशेल की लाइफ में खुशियां भर रही है. कंपटीशन के ऑर्गनाइजरों का कहना है कि, ‘इस कॉन्टेस्ट का मकसद किसी जानवर का मजाक उड़ाना नहीं, बल्कि पालतू जानवरों को गोद लेने के प्रति जागरूकता फैलाना है.’