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  • 150 से ज्यादा ‘बॉयफ्रेंड’ नहीं, ब्लैकमेलिंग का था खेल! खूबसूरती के जाल में फंसाती, वीडियो बनाती और फिर केस की धमकी देकर वसूलती थी लाखों..​​​​​​

    150 से ज्यादा ‘बॉयफ्रेंड’ नहीं, ब्लैकमेलिंग का था खेल! खूबसूरती के जाल में फंसाती, वीडियो बनाती और फिर केस की धमकी देकर वसूलती थी लाखों..​​​​​​

    गोरखपुर में एक लड़की की गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर उसके बारे में कई तरह की बातें सामने आने लगीं। कोई उसे ‘लेडी डॉन’ कह रहा था तो कोई दावा कर रहा था कि उसके 150 से ज्यादा बॉयफ्रेंड थे। लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, कहानी कुछ और ही सामने आती दिखी।

    आरोप है कि लड़की लोगों से दोस्ती करती, उन्हें अपने भरोसे में लेती और फिर वीडियो कॉल के दौरान उनकी निजी रिकॉर्डिंग कर लेती थी। इसके बाद शुरू होता था धमकी और पैसों की मांग का सिलसिला। सामने वाले को डराया जाता कि अगर उसने रकम नहीं दी तो उसके खिलाफ दुष्कर्म या पॉक्सो एक्ट जैसे गंभीर मामलों में शिकायत कर दी जाएगी।

    बताया जा रहा है कि लड़की मूल रूप से गोरखपुर के हरपुर बुदहट थाना क्षेत्र की रहने वाली है। परिवार से विवाद के बाद उसने संतकबीर नगर के खलीलाबाद में किराये का मकान ले लिया था। यहीं से उसने सोशल मीडिया के जरिए लोगों से संपर्क बढ़ाना शुरू किया।

    शुरुआत में बातचीत सामान्य होती थी। सामने वाले को लगता था कि वह एक युवती से दोस्ती कर रहा है। धीरे-धीरे बातचीत निजी होने लगती और फिर वीडियो कॉल तक पहुंच जाती। आरोप है कि इसी दौरान निजी पलों की रिकॉर्डिंग कर ली जाती थी। बाद में उसी वीडियो को दिखाकर पैसे मांगे जाते।

    पुलिस जांच में करीब 150 लोगों को निशाना बनाए जाने की बात सामने आई है। इनमें आम लोगों के साथ कुछ पुलिसकर्मियों के नाम भी बताए जा रहे हैं। अयोध्या में तैनात एक सीओ समेत करीब 15 पुलिसकर्मियों को भी कथित तौर पर इस जाल में फंसाने का दावा किया गया है।

    यह सिलसिला वर्ष 2021 के आसपास शुरू होने की बात कही जा रही है। पहला मामला देवरिया के एक युवक से जुड़ा बताया गया है। आरोप है कि उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के बाद समझौते के नाम पर रकम ली गई। इसके बाद इसी तरीके से दूसरे लोगों को भी डराकर पैसे वसूलने का आरोप है।

    हर मामले में तरीका लगभग एक जैसा बताया जा रहा है। पहले सोशल मीडिया पर संपर्क, फिर दोस्ती और भरोसा, उसके बाद वीडियो कॉल और अंत में मुकदमे में फंसाने की धमकी।

    खलीलाबाद में रहने के दौरान भी लड़की का विवादों से नाता जुड़ा रहा। मकान मालिक ने देर रात युवकों के आने-जाने पर आपत्ति जताई थी। आरोप है कि मकान खाली करने के बदले उससे दो लाख रुपये लिए गए।

    इसी दौरान सूरज सिंह समेत पांच लोगों के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कराने की बात सामने आई। आरोप है कि बाद में समझौते के नाम पर उनसे पैसे मांगे गए। खलीलाबाद के ही प्रियांशु सिंह से भी फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी देकर 50 हजार रुपये लेने का आरोप लगाया गया है।

    सोशल मीडिया पर भले ही इसे 150 बॉयफ्रेंड की कहानी बताया जा रहा हो, लेकिन जांच में इसे प्रेम संबंधों के बजाय कथित ब्लैकमेलिंग नेटवर्क के रूप में देखा जा रहा है। आरोप है कि लड़की ने कई लोगों से संपर्क बनाए, लेकिन उसका मकसद रिश्ते बनाना नहीं, बल्कि निजी जानकारी और वीडियो के जरिए उन्हें डराकर पैसे वसूलना था।

    गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब उसके मोबाइल फोन, सोशल मीडिया अकाउंट, चैट और बैंक खातों की जांच कर रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि वह इस काम में अकेली थी या उसके साथ कोई और भी शामिल था।

    अगर जांच में आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला सिर्फ एक लड़की की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सोशल मीडिया के जरिए चलाए जा रहे एक बड़े हनीट्रैप और सेक्सटॉर्शन नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।

    इस मामले ने यह भी दिखाया है कि सोशल मीडिया पर शुरू हुई दोस्ती कितनी जल्दी खतरे में बदल सकती है। निजी बातचीत और वीडियो साझा करने से पहले सावधानी न बरतने पर लोग ब्लैकमेलिंग का शिकार हो सकते हैं। हालांकि, लगाए गए सभी आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

  • सोशल मीडिया पर बिछा ‘डिजिटल देह व्यापार’ का जाल, वीडियो कॉल से सेक्स ट्रैप तक; पहले भरोसा, फिर पैसे की मांग और आखिर में ब्लैकमेलिंग का खेल​​​​​​

    सोशल मीडिया पर बिछा ‘डिजिटल देह व्यापार’ का जाल, वीडियो कॉल से सेक्स ट्रैप तक; पहले भरोसा, फिर पैसे की मांग और आखिर में ब्लैकमेलिंग का खेल​​​​​​

    कुछ साल पहले तक किसी अनजान व्यक्ति से मिलने या किसी सेवा के लिए संपर्क करने के लिए लोगों को कई तरह के जोखिम उठाने पड़ते थे। लेकिन स्मार्टफोन और सोशल मीडिया ने पूरी तस्वीर बदल दी। अब दोस्ती, बातचीत और मुलाकात से लेकर पैसे के लेनदेन तक सब कुछ मोबाइल स्क्रीन पर हो सकता है।

    इसी डिजिटल दुनिया में साइबर अपराधियों ने ठगी के नए तरीके भी खोज लिए हैं।

    सोशल मीडिया पर आकर्षक तस्वीरों वाली प्रोफाइल, डेटिंग ऐप्स पर दोस्ती के प्रस्ताव और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर निजी बातचीत—इन सबका इस्तेमाल कई मामलों में लोगों को सेक्सटॉर्शन और ऑनलाइन ठगी के जाल में फंसाने के लिए किया जा रहा है।

    यह कहानी किसी एक व्यक्ति या एक जगह की नहीं, बल्कि उस बदलते साइबर अपराध की है, जिसमें अपराधी लोगों की निजी इच्छाओं, जिज्ञासा और भरोसे को अपना हथियार बना लेते हैं।

    एक साधारण फ्रेंड रिक्वेस्ट से शुरू होती है कहानी

    मान लीजिए किसी व्यक्ति को सोशल मीडिया पर एक अनजान महिला की फ्रेंड रिक्वेस्ट आती है। प्रोफाइल पर आकर्षक तस्वीरें लगी हैं और कुछ सामान्य पोस्ट भी दिखाई देती हैं।

    पहले बातचीत शुरू होती है।

    कुछ दिनों तक सामान्य बातें होती हैं। सामने वाला व्यक्ति धीरे-धीरे भरोसा पैदा करता है। इसके बाद बातचीत निजी विषयों तक पहुंचने लगती है।

    यहीं से असली जाल शुरू हो सकता है।

    अपराधी सामने वाले की मानसिक स्थिति और उसकी रुचि को समझने के बाद उसे वीडियो कॉल का प्रस्ताव दे सकते हैं। कई बार बातचीत को जानबूझकर यौन विषयों की तरफ मोड़ा जाता है।

    सामने वाले को लगता है कि वह किसी निजी और भरोसेमंद व्यक्ति से बात कर रहा है।

    लेकिन दूसरी तरफ बैठे लोग उसकी हर गतिविधि रिकॉर्ड कर रहे होते हैं।

    वीडियो कॉल के कुछ मिनट और फिर बदल जाता है पूरा खेल

    कई साइबर ठगी के मामलों में आरोपियों द्वारा वीडियो कॉल का इस्तेमाल किया जाता है। कॉल के दौरान सामने वाले व्यक्ति को ऐसा माहौल दिया जाता है कि वह अपनी निजी गतिविधियां कैमरे के सामने करने लगे।

    उसे लगता है कि यह बातचीत सिर्फ दोनों के बीच है।

    लेकिन कॉल के दूसरी तरफ स्क्रीन रिकॉर्ड हो रही होती है।

    कुछ देर बाद कॉल अचानक कट जाती है।

    फिर फोन पर एक नया मैसेज आता है।

    “तुम्हारी वीडियो हमारे पास है।”

    इसके बाद धमकी शुरू होती है।

    आरोपी कहते हैं कि अगर पैसे नहीं दिए गए तो वीडियो परिवार, दोस्तों या सोशल मीडिया पर भेज दी जाएगी।

    जिस व्यक्ति ने कुछ मिनट पहले इसे निजी बातचीत समझा था, वह अचानक डर और शर्मिंदगी के बीच फंस जाता है।

    पहले छोटा भुगतान, फिर बढ़ती जाती है रकम

    कई मामलों में शुरुआत छोटी रकम से होती है।

    आरोपी कहते हैं कि पैसे भेज दो तो वीडियो डिलीट कर दी जाएगी।

    पीड़ित डरकर पैसे भेज देता है।

    लेकिन इसके बाद मामला खत्म नहीं होता।

    कुछ समय बाद फिर मैसेज आता है कि वीडियो की दूसरी कॉपी मौजूद है या उसे किसी और व्यक्ति तक भेज दिया गया है। फिर एक नई रकम मांगी जाती है।

    पीड़ित दोबारा भुगतान कर देता है।

    यही सिलसिला कई बार चलता रहता है।

    अपराधियों को जब पता चलता है कि व्यक्ति डर चुका है और पैसे देने के लिए तैयार है, तो वे उसकी मजबूरी का फायदा उठाकर लगातार वसूली की कोशिश कर सकते हैं।

    ‘वीडियो कॉल’ के नाम पर एडवांस पेमेंट का खेल

    साइबर ठगी का एक दूसरा तरीका भी सामने आया है।

    सोशल मीडिया या मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर किसी महिला की तस्वीर लगाकर प्रोफाइल बनाई जाती है। बातचीत के बाद वीडियो कॉल या किसी निजी मुलाकात का प्रस्ताव दिया जाता है।

    इसके लिए पहले एडवांस पैसे मांगे जाते हैं।

    कहा जाता है कि भुगतान करते ही कॉल शुरू होगी या मुलाकात तय कर दी जाएगी।

    जैसे ही पैसा भेजा जाता है, सामने वाला व्यक्ति गायब हो जाता है।

    नंबर ब्लॉक कर दिया जाता है और सोशल मीडिया अकाउंट भी बंद कर दिया जाता है।

    पीड़ित के पास केवल ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड और ठगी का एहसास बचता है।

    आकर्षक प्रोफाइल के पीछे कौन है?

    सबसे बड़ी समस्या यही है कि सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली तस्वीर हमेशा वास्तविक व्यक्ति की नहीं होती।

    साइबर अपराधी किसी दूसरे व्यक्ति की तस्वीर चुराकर फर्जी प्रोफाइल बना सकते हैं। कई बार अलग-अलग लोगों की तस्वीरों और जानकारियों का इस्तेमाल करके पूरी नकली पहचान तैयार की जाती है।

    अब एआई और डीपफेक तकनीक के दौर में यह खतरा और बढ़ गया है।

    इसलिए सिर्फ तस्वीर देखकर किसी ऑनलाइन प्रोफाइल पर भरोसा करना खतरनाक हो सकता है।

    ठगी का शिकार होने के बाद पीड़ित अक्सर चुप क्यों रहता है?

    इस तरह के मामलों में सबसे बड़ी समस्या सिर्फ आर्थिक नुकसान नहीं है।

    पीड़ित को डर रहता है कि अगर उसने पुलिस या परिवार को बताया तो उसकी निजी बातचीत या वीडियो सार्वजनिक हो सकती है।

    शर्म और सामाजिक बदनामी का डर उसे चुप रहने पर मजबूर कर सकता है।

    अपराधी इसी डर को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाते हैं।

    वे पीड़ित को यह महसूस कराने की कोशिश करते हैं कि अगर उसने उनकी बात नहीं मानी तो उसकी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी।

    लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे मामलों में अपराधियों को पैसे देना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। एक बार भुगतान करने के बाद भी वे दोबारा पैसे मांग सकते हैं।

    डेटिंग ऐप से लेकर सोशल मीडिया तक फैला खतरा

    आज साइबर ठगी के लिए किसी एक प्लेटफॉर्म की जरूरत नहीं है।

    सोशल मीडिया, डेटिंग ऐप्स, मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और फर्जी वेबसाइटों के जरिए लोगों तक पहुंच बनाई जा सकती है।

    अपराधी अलग-अलग तरीकों से लोगों का भरोसा जीतते हैं और फिर उन्हें निजी बातचीत या वीडियो कॉल की तरफ ले जाते हैं।

    यही कारण है कि ऑनलाइन रिश्तों और अनजान लोगों से बातचीत करते समय सावधानी बेहद जरूरी है।

    अगर ऐसी स्थिति में फंस जाएं तो क्या करें?

    सबसे पहले घबराकर तुरंत पैसे भेजने से बचें। अपराधी अक्सर डर पैदा करके जल्दबाजी में फैसला करवाना चाहते हैं।

    उनके संदेश, फोन नंबर, प्रोफाइल लिंक, भुगतान की जानकारी और स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें। चैट या वीडियो से जुड़े सबूतों को बिना सोचे डिलीट न करें, क्योंकि वे जांच में उपयोगी हो सकते हैं।

    किसी भरोसेमंद परिवार के सदस्य या मित्र को जानकारी दें और साइबर अपराध की शिकायत संबंधित सरकारी साइबर क्राइम व्यवस्था के जरिए करें।

    सबसे जरूरी बात यह है कि पीड़ित को खुद को दोषी मानकर चुप नहीं रहना चाहिए। सेक्सटॉर्शन और डिजिटल ब्लैकमेलिंग में अपराधी पीड़ित के डर का फायदा उठाते हैं।

    डिजिटल दुनिया में सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव

    इंटरनेट ने लोगों को एक-दूसरे से जोड़ना आसान बनाया है, लेकिन इसी सुविधा का इस्तेमाल अपराधी भी कर रहे हैं।

    किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर निजी वीडियो साझा करना, कैमरे के सामने संवेदनशील गतिविधि करना, एडवांस पैसे भेजना या बैंकिंग जानकारी देना भारी पड़ सकता है।

    आज डिजिटल दुनिया में भरोसा करने से पहले पहचान की पुष्टि करना उतना ही जरूरी है जितना वास्तविक जिंदगी में किसी अनजान व्यक्ति से सावधान रहना।

    क्योंकि साइबर अपराध का यह नया चेहरा पहले दोस्ती का हाथ बढ़ाता है, फिर भरोसा जीतता है और अंत में उसी भरोसे को ब्लैकमेलिंग का हथियार बना देता है।

    नोट: यह लेख साइबर अपराध के आम तौर-तरीकों को समझाने के उद्देश्य से पुनर्लिखा गया है। किसी विशेष व्यक्ति या घटना पर आरोप को तथ्य मानने से पहले संबंधित पुलिस या आधिकारिक रिकॉर्ड की पुष्टि जरूरी है।

  • खुद को भगवान का अवतार बताकर बनाता था शिकार, ‘मॉडर्न गुरुकुल’ में चलता था खौफ का खेल; यौनशोषण, ब्लैकमेलिंग और प्रताड़ना के आरोप में बाबा समेत 8 गिरफ्तार..​​​​​​

    खुद को भगवान का अवतार बताकर बनाता था शिकार, ‘मॉडर्न गुरुकुल’ में चलता था खौफ का खेल; यौनशोषण, ब्लैकमेलिंग और प्रताड़ना के आरोप में बाबा समेत 8 गिरफ्तार..​​​​​​

    पुणे के वाघोली में कथित आध्यात्मिक केंद्र पर पुलिस की छापेमारी से मचा हड़कंप, 15 साल से प्रताड़ना झेलने का महिला ने लगाया आरोप; सीसीटीवी से घिरा था आश्रम, गुप्त सुरंग और संदिग्ध दवाइयां मिलने से जांच और गहराई

    पुणे के वाघोली इलाके में 2026 को पुलिस की एक कार्रवाई ने एक कथित आध्यात्मिक केंद्र के पीछे छिपी ऐसी कहानी सामने ला दी, जिसने जांच अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। खुद को भगवान का अवतार बताने वाले राधामोहन मिश्रा उर्फ राधेश्याम मिश्रा और उसके सात सहयोगियों को पुलिस ने यौनशोषण, ब्लैकमेलिंग और अमानवीय प्रताड़ना के आरोपों में गिरफ्तार किया।

    पुलिस के सामने मामला तब आया, जब एक महिला ने शिकायत दर्ज कराई। महिला का आरोप था कि वह करीब 15 वर्षों से इस कथित बाबा के प्रभाव में थी और इस दौरान उसे मानसिक तथा शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया।

    जो जगह बाहर से आध्यात्मिक केंद्र या ‘मॉडर्न गुरुकुल’ के रूप में दिखाई देती थी, पुलिस की जांच में उसके भीतर कई ऐसी चीजें सामने आईं, जिनसे पूरे मामले पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।

    डॉक्टर परिवार की महिला ने दर्ज कराई शिकायत

    शिकायत करने वाली महिला उच्चशिक्षित बताई गई है और उसका संबंध डॉक्टर परिवार से था। महिला के अनुसार, वह वर्षों पहले बाबा के संपर्क में आई थी। धीरे-धीरे बाबा ने उस पर ऐसा मानसिक प्रभाव बना लिया कि वह उसके निर्देशों का विरोध करने की स्थिति में नहीं रही।

    महिला ने पुलिस को बताया कि उसके साथ लगातार मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना की जाती थी।

    आरोप है कि विरोध करने या बाबा की बात न मानने पर उसे बिजली के झटके दिए जाते थे। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि उसे अमानवीय तरीके से प्रताड़ित करते हुए बाबा का मूत्र पीने के लिए मजबूर किया जाता था।

    इन आरोपों ने पुलिस जांच को और गंभीर बना दिया।

    पति से तलाक और संपत्ति पर भी नजर

    महिला ने आरोप लगाया कि बाबा ने धीरे-धीरे उसका ब्रेनवॉश किया और उसे अपने पति से अलग होने के लिए मजबूर किया।

    इसके बाद कथित तौर पर उसकी संपत्ति और गहनों पर भी कब्जा कर लिया गया।

    महिला का दावा है कि बाबा और उसके सहयोगियों ने उसके निजी और आपत्तिजनक वीडियो भी बनाए थे। इन्हीं वीडियो का इस्तेमाल कथित तौर पर उसे ब्लैकमेल करने के लिए किया जाता था।

    यानी महिला के लिए यह सिर्फ धार्मिक आस्था का मामला नहीं रहा था। आरोपों के मुताबिक, धीरे-धीरे उसके निजी जीवन, रिश्तों और संपत्ति पर भी कथित तौर पर नियंत्रण स्थापित कर लिया गया।

    आश्रम में डर का माहौल बनाने का आरोप

    पुलिस के अनुसार, इस कथित आध्यात्मिक केंद्र में अनुयायियों पर मनोवैज्ञानिक नियंत्रण बनाए रखने के लिए डर का माहौल बनाया जाता था।

    आरोप है कि बाबा खुद को सामान्य इंसान नहीं बल्कि भगवान का अवतार बताता था। उसके अनुयायियों में ऐसी धारणा बनाई जाती थी कि उसके आदेशों पर सवाल उठाना या उसका विरोध करना नुकसानदायक हो सकता है।

    इसी मानसिक दबाव के कारण कई लोग कथित तौर पर लंबे समय तक उसके प्रभाव से बाहर नहीं निकल पाए।

    चारों तरफ लगे थे सीसीटीवी कैमरे

    पुलिस ने जब वाघोली स्थित कथित आश्रम में छापा मारा तो वहां सुरक्षा के नाम पर लगाए गए सीसीटीवी कैमरों की संख्या और उनकी व्यवस्था ने अधिकारियों का ध्यान खींचा।

    पूरे परिसर में कैमरे लगे होने की बात सामने आई। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन कैमरों का इस्तेमाल सामान्य सुरक्षा के लिए किया जाता था या फिर वहां रहने वाले लोगों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए।

    जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि क्या अनुयायियों और पीड़ितों को बाहरी दुनिया से संपर्क करने से रोकने के लिए इस व्यवस्था का इस्तेमाल किया जाता था।

    जमीन के नीचे बन रही थी गुप्त सुरंग

    छापेमारी के दौरान पुलिस को परिसर में एक गुप्त सुरंग भी मिली, जो निर्माणाधीन बताई गई।

    सुरंग का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाना था, यह अभी जांच का विषय है। पुलिस इस बात की पड़ताल कर रही है कि क्या इसका संबंध किसी संदिग्ध गतिविधि से था या इसके पीछे कोई दूसरा उद्देश्य था।

    सुरंग मिलने के बाद जांच अधिकारियों ने पूरे परिसर की संरचना और वहां मौजूद दूसरे कमरों की भी बारीकी से जांच शुरू की।

    सैकड़ों संदिग्ध दवाइयों की शीशियां मिलीं

    आश्रम से पुलिस को बड़ी संख्या में दवाइयों की शीशियां भी मिलीं। इन दवाइयों को लेकर भी जांच शुरू कर दी गई है।

    पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ये दवाइयां किसलिए इस्तेमाल होती थीं, किसने इन्हें मंगाया था और क्या वहां रहने वाले लोगों को इन्हें दिया जाता था।

    जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि कहीं अनुयायियों या कथित पीड़ितों को सुस्त या अचेत रखने के लिए किसी नशीले पदार्थ का इस्तेमाल तो नहीं किया जाता था।

    हालांकि, इसका सच फॉरेंसिक और मेडिकल जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

    बाहर से आध्यात्मिक केंद्र, अंदर से कथित नियंत्रण का तंत्र?

    मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, पुलिस कथित आश्रम की गतिविधियों और वहां रहने वाले लोगों के बीच संबंधों की भी पड़ताल कर रही है।

    सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर आरोप सही पाए जाते हैं, तो इतने वर्षों तक यह पूरा तंत्र कैसे चलता रहा और पीड़ित लोग समय रहते बाहर क्यों नहीं निकल पाए?

    मनोवैज्ञानिक नियंत्रण, डर, कथित ब्लैकमेलिंग और सामाजिक अलगाव जैसे तरीके किसी व्यक्ति को लंबे समय तक चुप रहने के लिए मजबूर कर सकते हैं। इसी पहलू को ध्यान में रखते हुए पुलिस आरोपों की अलग-अलग कड़ियों को जोड़ रही है।

    बाबा समेत आठ लोग गिरफ्तार

    पुणे पुलिस ने इस मामले में राधामोहन मिश्रा उर्फ राधेश्याम मिश्रा के साथ उसके सात सहयोगियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अब सभी आरोपियों से पूछताछ कर कथित आश्रम की गतिविधियों और शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच कर रही है।

    महिला द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के साथ-साथ पुलिस को मिले कथित इलेक्ट्रॉनिक और भौतिक साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।

    यह मामला एक बार फिर इस सवाल को सामने लाता है कि धार्मिक आस्था और अंधविश्वास के बीच की सीमा कब किसी व्यक्ति के शोषण का जरिया बन जाती है।

    किसी व्यक्ति को गुरु, साधु या आध्यात्मिक मार्गदर्शक मानना निजी आस्था का विषय हो सकता है, लेकिन जब कथित तौर पर डर, ब्लैकमेल, हिंसा या आर्थिक दबाव के जरिए किसी की जिंदगी पर नियंत्रण स्थापित किया जाए, तो मामला गंभीर अपराध का रूप ले सकता है।

    नोट: यह कहानी उपलब्ध शिकायतों, पुलिस कार्रवाई और लगाए गए आरोपों के आधार पर पुनर्लिखी गई है। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और अदालत के फैसले के बाद ही होगी।

  • एआई बना साइबर अपराधियों का नया हथियार, नकली आवाज से लेकर डीपफेक तक बढ़ा ठगी का खतरा; आने वाले समय में इंसान और मशीन में फर्क करना होगा मुश्किल​​​​​​

    एआई बना साइबर अपराधियों का नया हथियार, नकली आवाज से लेकर डीपफेक तक बढ़ा ठगी का खतरा; आने वाले समय में इंसान और मशीन में फर्क करना होगा मुश्किल​​​​​​

    बैंकिंग एक्सपर्ट्स ने जताई बड़ी चिंता: AI की मदद से साइबर ठगी हुई तेज, अपराधी कुछ ही समय में हजारों लोगों को बना सकते हैं निशाना; भारत में भी बढ़ रहे फ्रॉड के प्रयास

    आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई ने कुछ ही वर्षों में हमारी जिंदगी को काफी बदल दिया है। पढ़ाई से लेकर कारोबार, स्वास्थ्य, बैंकिंग और मनोरंजन तक, हर क्षेत्र में इसका इस्तेमाल बढ़ रहा है। लेकिन जिस तकनीक को इंसानों की सुविधा के लिए बनाया गया था, वही अब साइबर अपराधियों के हाथ में पहुंचकर एक गंभीर खतरा बनती जा रही है।

    पहले किसी व्यक्ति को ऑनलाइन ठगने के लिए अपराधियों को काफी तैयारी करनी पड़ती थी। उन्हें नकली संदेश लिखने, किसी की आवाज की नकल करने या लोगों का भरोसा जीतने में समय लगता था। अब एआई ने इन सभी कामों को काफी आसान बना दिया है।

    दुनिया भर के बैंक और साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ इसी बदलते खतरे को लेकर चिंतित हैं।

    सर्वे में सामने आई चिंताजनक तस्वीर

    साइबर सुरक्षा कंपनी बायोकैच की ओर से 25 देशों के 1,440 बैंकिंग और धोखाधड़ी रोकथाम विशेषज्ञों के बीच किए गए एक सर्वे में एआई और साइबर अपराध को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें सामने आईं।

    सर्वे में 84 प्रतिशत विशेषज्ञों ने माना कि अगले एक साल में एआई आधारित एजेंट साइबर अपराधियों के लिए सबसे बड़ा हथियार बन सकते हैं।

    वहीं 88 प्रतिशत विशेषज्ञों का कहना था कि एआई ने धोखाधड़ी को पहले ही ज्यादा खतरनाक बना दिया है। करीब 72 प्रतिशत विशेषज्ञों को आशंका है कि आने वाले समय में इंसान और एआई के बीच अंतर करना बेहद मुश्किल हो सकता है।

    सर्वे में शामिल 60 प्रतिशत विशेषज्ञों ने यह चिंता भी जताई कि एआई के कारण मौजूदा सुरक्षा उपाय कमजोर पड़ सकते हैं। इसके अलावा 76 प्रतिशत विशेषज्ञों ने अपने क्षेत्र में धोखाधड़ी की गति तेजी से बढ़ने की बात कही।

    भारत में भी बढ़ रहा साइबर फ्रॉड

    भारत में भी स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। सर्वे में शामिल भारतीय बैंकिंग अधिकारियों के मुताबिक पिछले एक साल में धोखाधड़ी के प्रयासों में बढ़ोतरी हुई है।

    करीब 90 प्रतिशत भारतीय बैंकिंग अधिकारियों ने कहा कि उनके क्षेत्र में फ्रॉड के प्रयास बढ़े हैं। वहीं 84 प्रतिशत अधिकारियों ने बताया कि धोखाधड़ी से होने वाला आर्थिक नुकसान भी बढ़ा है।

    इसका एक बड़ा कारण यह है कि अब अपराधियों के पास लोगों को निशाना बनाने के लिए पहले से कहीं ज्यादा तकनीकी साधन मौजूद हैं।

    नकली आवाज सुनकर भी लोग कर रहे हैं भरोसा

    एआई की मदद से किसी व्यक्ति की आवाज की नकल करना अब पहले की तुलना में काफी आसान हो गया है। साइबर अपराधी सोशल मीडिया या इंटरनेट पर उपलब्ध आवाज के नमूनों का इस्तेमाल कर नकली आवाज तैयार कर सकते हैं।

    इसी तरह वीडियो में भी किसी व्यक्ति की शक्ल और आवाज की नकल करके ऐसा कंटेंट तैयार किया जा सकता है, जो पहली नजर में वास्तविक दिखाई दे।

    कल्पना कीजिए कि अचानक आपके फोन पर किसी करीबी रिश्तेदार की आवाज में कॉल आए और वह कहे कि वह मुश्किल में है और तुरंत पैसे चाहिए। अगर आवाज बिल्कुल उसी व्यक्ति जैसी सुनाई दे, तो कई लोग बिना ज्यादा सोचे पैसा ट्रांसफर कर सकते हैं।

    यही एआई आधारित ठगी का सबसे खतरनाक पहलू है।

    अब नकली संदेश पहचानना भी आसान नहीं

    पहले साइबर ठगों के संदेशों में भाषा की गलतियां और अजीब वाक्य अक्सर दिखाई देते थे। इसी वजह से लोगों को कई बार समझ आ जाता था कि संदेश फर्जी है।

    लेकिन एआई ने यह कमजोरी भी काफी हद तक खत्म कर दी है।

    अब अपराधी एआई की मदद से बेहद साफ और स्वाभाविक भाषा में संदेश तैयार कर सकते हैं। ईमेल, मैसेज या सोशल मीडिया चैट को इस तरह लिखा जा सकता है कि वह किसी बैंक, कंपनी, अधिकारी या परिचित व्यक्ति की ओर से आया हुआ लगे।

    इससे आम लोगों के लिए फर्जी और असली संदेश में अंतर करना और कठिन हो सकता है।

    एक साथ हजारों लोगों को निशाना बना सकते हैं बॉट

    एआई आधारित बॉट साइबर अपराधियों के लिए एक और बड़ा हथियार बन सकते हैं।

    जहां पहले किसी अपराधी को एक-एक व्यक्ति से संपर्क करना पड़ता था, वहीं ऑटोमेशन और एआई की मदद से एक साथ बड़ी संख्या में लोगों को संदेश भेजे जा सकते हैं।

    इन संदेशों को अलग-अलग लोगों की जानकारी के आधार पर बदला भी जा सकता है। यानी हर व्यक्ति को एक जैसा संदेश भेजने के बजाय उसके नाम, काम, रुचि या ऑनलाइन गतिविधि के हिसाब से ज्यादा भरोसेमंद संदेश तैयार किया जा सकता है।

    इससे ठगी का दायरा और उसकी गति दोनों बढ़ सकती हैं।

    सोशल मीडिया की जानकारी भी बन सकती है हथियार

    आज लोग सोशल मीडिया पर अपनी जिंदगी से जुड़ी काफी जानकारी साझा करते हैं। तस्वीरें, वीडियो, नौकरी, परिवार, दोस्तों के नाम, यात्रा की जानकारी और रोजमर्रा की गतिविधियां अक्सर सार्वजनिक रहती हैं।

    साइबर अपराधी इसी डिजिटल जानकारी का इस्तेमाल किसी व्यक्ति की प्रोफाइल तैयार करने में कर सकते हैं।

    एआई बड़ी मात्रा में उपलब्ध जानकारी का विश्लेषण करके किसी व्यक्ति की डिजिटल पहचान और व्यवहार को समझने में मदद कर सकता है। इसके बाद उसी जानकारी के आधार पर अधिक विश्वसनीय धोखाधड़ी का प्रयास किया जा सकता है।

    खतरा सिर्फ बैंक खातों तक सीमित नहीं

    एआई आधारित साइबर अपराध का खतरा केवल बैंकिंग सेक्टर तक सीमित नहीं है।

    आम नागरिकों के साथ-साथ कंपनियां, सरकारी संस्थान और बड़े संगठन भी इसका निशाना बन सकते हैं। नकली पहचान, डीपफेक, फर्जी दस्तावेज, सोशल इंजीनियरिंग और डिजिटल ठगी जैसे तरीकों का इस्तेमाल अलग-अलग क्षेत्रों में किया जा सकता है।

    भविष्य में एआई का इस्तेमाल गलत सूचना फैलाने और लोगों की राय को प्रभावित करने जैसे मामलों में भी किया जा सकता है। यही वजह है कि साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ इसे केवल आर्थिक अपराध का मुद्दा नहीं मान रहे हैं।

    विदेशों में फर्जी साइबर फ्रॉड नेटवर्क भी चिंता का विषय

    दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ देशों में साइबर फ्रॉड नेटवर्क को लेकर पहले भी गंभीर आरोप सामने आते रहे हैं। कंबोडिया, वियतनाम और म्यांमार जैसे देशों में भारतीय युवाओं समेत कई लोगों को नौकरी का लालच देकर साइबर फ्रॉड नेटवर्क में फंसाने और उनसे जबरन काम कराने की खबरें सामने आई हैं।

    ऐसे नेटवर्क में फंसाए गए लोगों से बड़े पैमाने पर ऑनलाइन ठगी कराई जाती है। कई मामलों में उनके परिवारों को भी दबाव और आर्थिक प्रलोभन के जरिए इस पूरे नेटवर्क से जोड़ने की कोशिश की जाती है।

    एआई के बढ़ते इस्तेमाल से ऐसे संगठित साइबर अपराध नेटवर्क की क्षमता और भी बढ़ने की आशंका है।

    एआई दुश्मन नहीं, उसका गलत इस्तेमाल असली खतरा

    यह समझना जरूरी है कि एआई अपने आप में न तो अच्छा है और न बुरा। यह एक शक्तिशाली तकनीक है, जिसका इस्तेमाल इंसानों की सुविधा और विकास के लिए किया जा सकता है।

    समस्या तब पैदा होती है जब इसी तकनीक का इस्तेमाल अपराधी लोगों को नुकसान पहुंचाने के लिए करने लगते हैं।

    जिस एआई से बैंकिंग सुरक्षा मजबूत की जा सकती है, उसी से नकली पहचान भी बनाई जा सकती है। जिस तकनीक से आवाज को बेहतर बनाया जा सकता है, उसी से किसी की आवाज की नकल भी की जा सकती है।

    इसलिए आने वाले समय में सिर्फ तकनीक का विकास ही जरूरी नहीं होगा, बल्कि उसके दुरुपयोग से बचने के लिए मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और लोगों में जागरूकता भी उतनी ही जरूरी होगी।

    आने वाला दौर और ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकता है

    बायोकैच के सर्वे में सामने आए आंकड़े इस बात की ओर इशारा करते हैं कि साइबर अपराध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। एआई ने अपराधियों को तेज, ज्यादा व्यक्तिगत और बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी करने की क्षमता दे दी है।

    अब जरूरत इस बात की है कि सरकारें, बैंक, टेक कंपनियां और आम नागरिक मिलकर साइबर सुरक्षा को मजबूत करें।

    आम लोगों के लिए सबसे जरूरी है कि किसी भी अचानक आए फोन, वीडियो कॉल या मैसेज पर तुरंत भरोसा न करें। रिश्तेदार या अधिकारी की आवाज सुनाई देने पर भी पैसे भेजने से पहले दूसरे माध्यम से उसकी पुष्टि करें।

    क्योंकि आने वाले समय में सवाल सिर्फ यह नहीं होगा कि “यह आवाज किसकी है?” बल्कि यह भी होगा कि “क्या दूसरी तरफ सच में वही इंसान है?”

    एआई का भविष्य कितना सुरक्षित होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि समाज इस शक्तिशाली तकनीक के इस्तेमाल और उसके दुरुपयोग के बीच कितनी मजबूत सुरक्षा दीवार खड़ी कर पाता है।

  • पत्नी के चरित्र पर शक ने उजाड़ दिया पूरा परिवार, पति ने पुराने मकान में रची हत्या की साजिश;  फिर 5 दिन तक करता रहा गुमशुदगी का नाटक..​​​​​​

    पत्नी के चरित्र पर शक ने उजाड़ दिया पूरा परिवार, पति ने पुराने मकान में रची हत्या की साजिश; फिर 5 दिन तक करता रहा गुमशुदगी का नाटक..​​​​​​

    सूरत की खौफनाक वारदात: बेरोजगारी, हीनभावना और शक ने पति के मन में ऐसा जहर घोला कि जिस पत्नी के साथ 16 साल बिताए, उसी की जान ले ली; अंत में 13 साल के बेटे को लिखे पत्र से खुला पूरा राज

    सूरत की उस शाम को देखकर कोई अंदाजा नहीं लगा सकता था कि कुछ ही घंटों बाद एक हंसता-खेलता परिवार हमेशा के लिए बिखरने वाला है। घर में दो बच्चे थे, मां शिल्पा अपने काम और परिवार को संभाल रही थी और पिता विशाल सालवी भी कभी नौकरी कर परिवार की जिम्मेदारियां निभाता था। लेकिन बेरोजगारी ने धीरे-धीरे उसके भीतर ऐसी हीनभावना और शक पैदा कर दिया, जिसने आखिरकार एक दिन उसे अपनी ही पत्नी का हत्यारा बना दिया।

    यह कहानी सिर्फ एक हत्या की नहीं, बल्कि उस शक की है जिसने पहले पति-पत्नी के रिश्ते को तोड़ा और फिर दो मासूम बच्चों से उनकी मां और पिता दोनों छीन लिए।

    शादी के बाद जिंदगी बिल्कुल सामान्य थी

    सूरत के विशाल सालवी और शिल्पा की शादी साल 2010 में हुई थी। शुरुआती वर्षों में दोनों की जिंदगी सामान्य और खुशहाल रही। शिल्पा एक निजी अस्पताल में डायटिशियन के तौर पर काम करती थी और अपना क्लीनिक भी चलाती थी। विशाल एक हीरा फर्म में नौकरी करता था।

    समय के साथ परिवार बढ़ा और दोनों दो बच्चों के माता-पिता बने। बाहर से देखने पर सब कुछ ठीक नजर आता था।

    लेकिन वक्त के साथ परिस्थितियां बदलने लगीं।

    नौकरी छूटने के बाद बदलने लगा विशाल

    कुछ समय बाद विशाल ने अपनी नौकरी छोड़ दी। इसके बाद लंबे समय तक उसे कोई स्थायी काम नहीं मिला। घर का खर्च और बच्चों की जिम्मेदारी धीरे-धीरे शिल्पा के कंधों पर आ गई।

    शिल्पा चाहती थी कि विशाल दोबारा काम शुरू करे। वह जब भी उसे नौकरी तलाशने के लिए कहती, दोनों के बीच बहस हो जाती।

    बेरोजगारी और आर्थिक तनाव ने विशाल के स्वभाव में चिड़चिड़ापन बढ़ा दिया। वह घर में ज्यादा समय बिताने लगा। इसी दौरान उसके मन में एक और चीज ने जगह बना ली—पत्नी के चरित्र को लेकर शक।

    कोई सबूत नहीं था, फिर भी शक बढ़ता गया

    विशाल को लगने लगा कि शिल्पा का किसी दूसरे व्यक्ति के साथ संबंध है। शिल्पा ने इन आरोपों को नकार दिया, लेकिन विशाल का शक कम नहीं हुआ।

    बताया जाता है कि दोस्तों और आसपास के लोगों की बातें भी उसके मन पर असर डाल रही थीं। अपनी बेरोजगारी और असफलता से पैदा हुई हीनभावना धीरे-धीरे पत्नी के प्रति अविश्वास में बदलती चली गई।

    शिल्पा के लिए पति के ऐसे आरोप बेहद परेशान करने वाले थे। लेकिन उसे शायद यह अंदाजा नहीं था कि यही शक एक दिन उसकी जान ले लेगा।

    20 अप्रैल की वह दोपहर

    20 अप्रैल 2026 को विशाल ने शिल्पा से कहा कि पुराने पुश्तैनी मकान से कुछ सामान लाना है। शिल्पा उसके साथ सलाबतपुरा स्थित उस मकान में चली गई।

    उसे शायद लगा होगा कि रोज की तरह यह भी एक सामान्य काम है।

    लेकिन उस पुराने मकान में उस दिन जो हुआ, उसने पूरे परिवार की जिंदगी बदल दी।

    वहां दोनों के बीच फिर पत्नी के कथित अवैध संबंधों को लेकर बहस शुरू हो गई। शिल्पा ने आरोपों को खारिज किया। बहस बढ़ती चली गई और गुस्से में विशाल ने कथित तौर पर उसका गला दबा दिया।

    कुछ ही देर में शिल्पा की जिंदगी खत्म हो चुकी थी।

    हत्या के बाद शव को बक्से में छिपाया

    हत्या के बाद विशाल घबराया जरूर होगा, लेकिन उसने कथित तौर पर पुलिस से बचने के लिए शव को ठिकाने लगाने की योजना बनाई।

    उसने शिल्पा के शव को लकड़ी के एक बड़े बक्से में रख दिया। इसके बाद बक्से पर सीमेंट की मोटी परत चढ़ा दी, ताकि शव बाहर से दिखाई न दे और बदबू भी कम हो।

    जिस घर में कभी परिवार का सामान रखा जाता था, उसी मकान में अब एक ऐसा राज दफन था, जिसका पता किसी को नहीं था।

    घर लौटकर ऐसे पेश आया जैसे कुछ हुआ ही नहीं

    हत्या के बाद विशाल ने खुद को सामान्य दिखाने की कोशिश की। वह रिश्तेदारों के घर गया और फिर अपने घर लौट आया।

    परिवार और बच्चों के सामने उसने दावा किया कि वह शिल्पा को अस्पताल के पास छोड़कर आया था।

    घरवालों को उस समय शायद उसके चेहरे पर छिपे डर का अंदाजा भी नहीं हुआ।

    लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई थी।

    अगले दिन खुद थाने पहुंचा

    अगले दिन विशाल अपने ससुर प्रदीप कोस्टा के साथ थाने पहुंचा और शिल्पा की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई।

    इसके बाद उसने करीब पांच दिनों तक पत्नी को खोजने का दिखावा किया। वह ऐसा व्यवहार करता रहा जैसे उसे सचमुच अपनी पत्नी के गायब होने की चिंता हो।

    लेकिन पुलिस के अनुसार, इसी दौरान वह चोरी-छिपे पुराने मकान में जाता था।

    उसे डर था कि कहीं शव से आने वाली बदबू किसी को शक न करा दे। इसलिए वह वहां जाकर कथित तौर पर बक्से से निकल रहे तरल पदार्थ को साफ करता और कमरे में रूम फ्रेशनर छिड़कता था।

    हर बार वह यही कोशिश करता कि उस घर के अंदर छिपा सच बाहर न आए।

    पांचवें दिन खुद ही टूट गया

    लगातार पांच दिनों तक यह सब करने के बाद शायद विशाल को एहसास होने लगा कि अब वह ज्यादा समय तक पुलिस से नहीं बच पाएगा।

    फिर उसने एक ऐसा कदम उठाया, जिसने पूरी वारदात का पर्दाफाश कर दिया।

    उसने अपने 13 साल के बेटे को एक हस्तलिखित पत्र दिया।

    पत्र में उसने कथित तौर पर अपनी पत्नी की हत्या की बात स्वीकार की और यह भी लिखा कि शव कहां और किस तरह छिपाया गया है।

    बेटे के हाथ में पहुंचा वह कागज दरअसल उस खौफनाक राज की चाबी बन चुका था, जिसे विशाल पांच दिनों से छिपाने की कोशिश कर रहा था।

    सीमेंट के नीचे मिला मां का शव

    पत्र मिलने के बाद पुलिस पुराने मकान तक पहुंची। वहां जांच शुरू हुई तो सीमेंट से ढका लकड़ी का बक्सा मिला।

    बक्से को खोला गया तो अंदर शिल्पा का सड़ चुका शव बरामद हुआ।

    पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू की। जांच में मोबाइल लोकेशन समेत अन्य साक्ष्यों को भी शामिल किया गया और आखिरकार विशाल को गिरफ्तार कर लिया गया।

    पूछताछ में उसने कथित तौर पर पत्नी की हत्या की बात स्वीकार की और पुलिस को बताया कि पत्नी के चरित्र पर शक तथा अपनी मानसिक कुंठा के कारण उसने यह कदम उठाया।

    एक शक ने दो बच्चों का पूरा संसार उजाड़ दिया

    इस घटना का सबसे दर्दनाक पहलू यह था कि शिल्पा के दो मासूम बच्चे देखते ही देखते अपनी मां और पिता दोनों से दूर हो गए।

    जिस मां के साथ वे रोज की जिंदगी जीते थे, उसकी हत्या हो चुकी थी। और जिस पिता को वे अपना सहारा समझते थे, वह अब जेल पहुंच चुका था।

    आखिरकार बच्चों के नाना प्रदीप कोस्टा उन्हें अपने साथ ले गए।

    एक परिवार जो कभी पति-पत्नी और दो बच्चों के साथ सामान्य जिंदगी जी रहा था, वह कुछ ही दिनों में पूरी तरह बिखर गया।

    इस घटना ने एक बार फिर दिखाया कि बिना किसी ठोस आधार का शक जब जुनून बन जाता है, तो वह सिर्फ रिश्ते नहीं तोड़ता—कभी-कभी पूरे परिवार की जिंदगी तबाह कर देता है।

    नोट: यह कहानी उपलब्ध घटनाक्रम और पुलिस जांच में सामने आए कथित तथ्यों पर आधारित पुनर्लेखन है। किसी आरोपी का दोष अदालत के अंतिम फैसले के बाद ही कानूनी रूप से सिद्ध माना जाएगा।

  • 9 साल तक साबरमती में दफन रहा पत्नी की हत्या का राज, पति ने रची थी गुमशुदगी की झूठी कहानी; दूसरी शादी कर जी रहा था बेफिक्र जिंदगी..​​​​​​

    9 साल तक साबरमती में दफन रहा पत्नी की हत्या का राज, पति ने रची थी गुमशुदगी की झूठी कहानी; दूसरी शादी कर जी रहा था बेफिक्र जिंदगी..​​​​​​

    2017 में नदी से मिला था अज्ञात युवती का शव, पहचान नहीं होने पर कर दिया गया था अंतिम संस्कार; 9 साल बाद मुखबिर की सूचना से खुला राज, पिता ने तस्वीर देखकर पहचानी बेटी

    अहमदाबाद में साल 2017 में सामने आया एक ऐसा मामला, जिसका सच करीब नौ साल तक पुलिस रिकॉर्ड और साबरमती नदी की लहरों में दबा रहा। एक युवती का शव नदी से बरामद हुआ था, लेकिन पहचान नहीं होने के कारण मामला अनसुलझा रह गया। परिवार बेटी के लौटने की उम्मीद लगाए रहा, जबकि उसका पति कथित तौर पर उसकी हत्या के बाद सामान्य जिंदगी जी रहा था।

    करीब नौ साल बाद जून 2026 में अहमदाबाद क्राइम ब्रांच को मिली एक अहम सूचना ने इस पुराने मामले की फाइल दोबारा खोल दी। जांच आगे बढ़ी तो सामने आया कि नदी में मिला अज्ञात शव किसी और का नहीं, बल्कि कोमल सोलंकी का था। पुलिस के मुताबिक, उसकी हत्या उसके पति मिनेश सोलंकी ने की थी और वारदात को छिपाने के लिए पत्नी की गुमशुदगी की झूठी कहानी रची गई थी।

    रथयात्रा के अगले दिन नदी में मिला था युवती का शव

    घटना 26 जून 2017 की है। अहमदाबाद में भगवान जगन्नाथ की 140वीं रथयात्रा के बाद हुई बारिश के कारण साबरमती नदी का जलस्तर बढ़ गया था। अगले दिन सुबह रिवरफ्रंट इलाके में गश्त कर रही फायर ब्रिगेड की मोटरबोट के कर्मचारियों को नदी में एक युवती का शव दिखाई दिया।

    सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को बाहर निकाला गया। पोस्टमार्टम कराया गया, लेकिन युवती के पास ऐसा कोई सामान या दस्तावेज नहीं मिला, जिससे उसकी पहचान हो सके।

    पुलिस ने आसपास के थानों में सूचना भेजी। गुमशुदगी की रिपोर्ट भी खंगाली गई और अखबारों में युवती की पहचान के लिए खबर प्रकाशित कराई गई। इसके बावजूद कई दिनों तक कोई परिवार शव की पहचान करने नहीं पहुंचा।

    करीब सात दिन बाद शव को लावारिस मानते हुए उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया और मामला ठंडे बस्ते में चला गया।

    नौ साल बाद मुखबिर ने दी अहम जानकारी

    जून 2026 में अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के एसआई आरसी शर्मा को एक विश्वसनीय मुखबिर से जानकारी मिली। दावा किया गया कि 2017 में साबरमती नदी से बरामद अज्ञात युवती का शव दरअसल कोमल सोलंकी का था।

    मुखबिर ने यह भी बताया कि कोमल की हत्या उसके पति मिनेश सोलंकी ने की थी। आरोप था कि हत्या के बाद मिनेश ने पत्नी के लापता होने की झूठी शिकायत दर्ज कर पुलिस को गुमराह किया और बाद में दूसरी शादी कर सामान्य जीवन जीने लगा।

    सूचना को गंभीरता से लेते हुए इंस्पेक्टर जेबलिया के निर्देश पर क्राइम ब्रांच ने पुराने रिकॉर्ड खंगालने शुरू किए।

    एक गुमशुदगी की रिपोर्ट ने जोड़ दिए पुराने मामले के तार

    जांच के दौरान पुलिस को कालूपुर थाने में दर्ज कोमल की गुमशुदगी की रिपोर्ट मिली। इसके बाद रिवरफ्रंट पुलिस स्टेशन में 2017 में मिले अज्ञात युवती के शव की फाइल से उसका मिलान किया गया।

    पोस्टमार्टम रिपोर्ट, पुराने दस्तावेज और शव की तस्वीरों की जांच की गई। पुलिस ने तस्वीरें कोमल के पिता को दिखाईं।

    तस्वीर देखते ही पिता की आंखों के सामने नौ साल पुराना दर्द फिर से जिंदा हो गया। उन्होंने शव की पहचान अपनी बेटी कोमल के रूप में की। जिस बेटी के वापस लौटने की उम्मीद परिवार ने वर्षों तक नहीं छोड़ी थी, उसकी मौत की सच्चाई आखिरकार सामने आ गई।

    पुलिस ने चुपचाप पति पर रखी नजर

    पहचान सामने आने के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करने के बजाय आरोपी तक पहुंचने के लिए सावधानी से जांच आगे बढ़ाई। क्राइम ब्रांच ने मिनेश पर निगरानी रखी और उसके पुराने बयानों तथा घटनाक्रम की दोबारा पड़ताल की।

    हिरासत में लेकर पूछताछ की गई तो मिनेश ने शुरुआत में वही पुरानी कहानी दोहराई कि उसकी पत्नी घर छोड़कर चली गई थी। लेकिन पुलिस ने जब उसके सामने पुराने रिकॉर्ड और उपलब्ध साक्ष्य रखे तो पूछताछ का रुख बदल गया।

    पुलिस के अनुसार, इसके बाद मिनेश ने कथित तौर पर हत्या की बात स्वीकार कर ली।

    प्रेम विवाह के बाद शुरू हुआ था विवाद

    पूछताछ में सामने आई कहानी के मुताबिक, मिनेश और कोमल ने प्रेम विवाह किया था। शादी के कुछ समय बाद दोनों के बीच विवाद बढ़ने लगे थे। पुलिस के अनुसार, घरेलू कलह और पत्नी के शक से परेशान होकर मिनेश ने कथित तौर पर उसे रास्ते से हटाने की योजना बनाई।

    25 जून 2017 को भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के दिन मिनेश कोमल को घुमाने के बहाने साबरमती रिवरफ्रंट ले गया। वहां उसने अपने साझा मित्र भावेश को भी बुलाया। बताया गया कि भावेश के सामने ऐसा माहौल बनाया गया, जैसे दोनों के बीच चल रहे विवाद को सुलझाने की कोशिश की जा रही हो।

    रात के अंधेरे में नदी में धक्का देने का आरोप

    पुलिस के मुताबिक, रात बढ़ने के साथ भावेश कुछ दूरी पर चला गया। इसी दौरान मिनेश ने कथित तौर पर कोमल को साबरमती नदी में धक्का दे दिया।

    आरोप है कि कोमल ने मदद के लिए गुहार लगाई, लेकिन मिनेश ने उसे बचाने की कोशिश नहीं की। जब भावेश को घटना का पता चला तो कथित तौर पर उसे भी धमकी दी गई कि अगर उसने किसी को कुछ बताया तो उसकी जान को खतरा होगा।

    डर के कारण भावेश इतने वर्षों तक चुप रहा।

    अगले दिन दर्ज कराई गुमशुदगी की रिपोर्ट

    पुलिस के अनुसार, घटना के बाद मिनेश ने पत्नी के लापता होने की शिकायत दर्ज कराई। इसी दौरान साबरमती नदी से एक अज्ञात युवती का शव बरामद हुआ, लेकिन किसी को यह पता नहीं था कि वह कोमल थी।

    पहचान नहीं होने के कारण शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस तरह एक तरफ परिवार कोमल के लौटने का इंतजार करता रहा और दूसरी तरफ हत्या का राज सालों तक दबा रहा।

    भावेश ने भी पुलिस के सामने बताई पूरी कहानी

    क्राइम ब्रांच ने इस मामले में भावेश से भी पूछताछ की। पुलिस के अनुसार, भावेश ने घटना की पुष्टि की और बताया कि धमकी के कारण वह करीब नौ वर्षों तक सच सामने लाने की हिम्मत नहीं जुटा सका।

    उसके बयान, आरोपी के कथित कबूलनामे, पुरानी गुमशुदगी की रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों को जांच में शामिल किया गया। इसके बाद पुलिस ने मिनेश के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया।

    इस तरह करीब नौ साल तक अनसुलझा रहा कोमल की मौत का मामला फिर से सामने आया। जिस शव की 2017 में पहचान नहीं हो सकी थी, उसकी पहचान 2026 में हुई और पुलिस ने हत्या के आरोप में उसके पति को गिरफ्तार कर लिया।

    हालांकि, अंतिम दोष सिद्धि अदालत में साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगी।

  • पुरुषों की सेहत के लिए फायदेमंद है सहजन, यौन स्वास्थ्य को लेकर क्या कहती है रिसर्च?​​​​​​

    पुरुषों की सेहत के लिए फायदेमंद है सहजन, यौन स्वास्थ्य को लेकर क्या कहती है रिसर्च?​​​​​​

    सहजन यानी मोरिंगा को पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थ माना जाता है। इसमें कई विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट कंपाउंड पाए जाते हैं। पुरुषों की यौन और प्रजनन सेहत पर सहजन के संभावित प्रभावों को लेकर कुछ रिसर्च हुई हैं, लेकिन अभी इतने मजबूत मानव-आधारित प्रमाण नहीं हैं कि इसे यौनशक्ति बढ़ाने की पक्की दवा कहा जा सके।

    1. यौन स्वास्थ्य को सपोर्ट करने की संभावना

    कुछ पशु अध्ययनों में मोरिंगा की पत्तियों या उनके अर्क के सेवन से पुरुषों के यौन व्यवहार में सुधार देखा गया है। हालांकि, इन परिणामों को सीधे इंसानों पर लागू नहीं किया जा सकता।

    2. टेस्टोस्टेरोन पर हो सकता है असर

    कुछ प्रयोगों में मोरिंगा के अर्क के सेवन के बाद नर जानवरों में टेस्टोस्टेरोन और अन्य प्रजनन हार्मोन्स में बदलाव देखा गया। लेकिन इंसानों में टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने के लिए सहजन को प्रभावी उपचार मानने के लिए पर्याप्त प्रमाण अभी उपलब्ध नहीं हैं।

    3. शुक्राणुओं की सेहत पर रिसर्च

    मोरिंगा और पुरुष प्रजनन क्षमता पर हुई कुछ रिसर्च में शुक्राणुओं की संख्या, गतिशीलता और गुणवत्ता से जुड़े संभावित फायदे सामने आए हैं। वहीं, अलग-अलग अध्ययनों में परिणाम एक जैसे नहीं रहे हैं, इसलिए इसे पुरुष बांझपन का इलाज नहीं माना जा सकता।

    4. एंटीऑक्सीडेंट गुण हो सकते हैं फायदेमंद

    सहजन की पत्तियों में पॉलीफेनॉल और फ्लेवोनॉयड जैसे एंटीऑक्सीडेंट कंपाउंड पाए जाते हैं। एक लैब स्टडी में मोरिंगा के पत्ती अर्क ने मानव शुक्राणुओं में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से जुड़े कुछ संकेतकों को कम किया, लेकिन शोधकर्ताओं ने आगे अध्ययन की जरूरत बताई।

    5. सिर्फ सहजन पर निर्भर रहना सही नहीं

    यौन क्षमता और प्रजनन स्वास्थ्य पर नींद, तनाव, वजन, शारीरिक गतिविधि, शराब या धूम्रपान और कई स्वास्थ्य समस्याओं का प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए केवल सहजन खाने से यौनशक्ति में निश्चित रूप से बढ़ोतरी होगी, ऐसा दावा वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है।

    6. सहजन को डाइट का हिस्सा बना सकते हैं

    सहजन की पत्तियों या फलियों को संतुलित भोजन का हिस्सा बनाया जा सकता है। लेकिन किसी सप्लीमेंट या अर्क का अधिक मात्रा में सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है, क्योंकि अलग-अलग पौधों के हिस्सों और अर्क की मात्रा के अनुसार प्रभाव अलग हो सकते हैं।

    निष्कर्ष: सहजन पुरुषों के लिए पौष्टिक भोजन का हिस्सा हो सकता है और शुरुआती रिसर्च में इसके प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़े कुछ संभावित फायदे सामने आए हैं। लेकिन इसे “यौनशक्ति बढ़ाने की दवा” कहना अभी जल्दबाजी होगी। अगर लगातार सेक्सुअल कमजोरी, इरेक्शन की समस्या या प्रजनन संबंधी परेशानी है, तो इसके पीछे का कारण जानने के लिए डॉक्टर से जांच कराना ज्यादा उचित है।

  • आंखों के नीचे काले घेरे कैसे कम करें? अपनाएं ये आसान उपाय..​​​​​​

    आंखों के नीचे काले घेरे कैसे कम करें? अपनाएं ये आसान उपाय..​​​​​​

    आंखों के नीचे काले घेरे यानी डार्क सर्कल एक आम समस्या है। इसके पीछे नींद की कमी, आनुवंशिकता, बढ़ती उम्र, एलर्जी, डिहाइड्रेशन, आंखों को बार-बार रगड़ना और धूप में ज्यादा रहना जैसे कई कारण हो सकते हैं। इसलिए इन्हें कम करने के लिए सबसे पहले संभावित कारण पर ध्यान देना जरूरी है।

    1. रोज पर्याप्त नींद लें

    नींद पूरी न होने पर आंखों के नीचे की त्वचा अधिक थकी हुई और गहरी दिखाई दे सकती है। रोज करीब 7 घंटे या उससे अधिक की अच्छी नींद लेने की कोशिश करें। सोने और जागने का समय भी नियमित रखना फायदेमंद हो सकता है।

    2. आंखों पर ठंडी पट्टी रखें

    ठंडी पट्टी कुछ समय के लिए आंखों के आसपास की सूजन और डार्कनेस की उपस्थिति को कम करने में मदद कर सकती है। इसे बंद आंखों पर कुछ मिनट हल्के तरीके से रखा जा सकता है।

    3. आंखों को बार-बार न रगड़ें

    आंखों को लगातार रगड़ने या खुजाने से आसपास की त्वचा में सूजन और जलन हो सकती है। इससे आंखों के नीचे का हिस्सा और ज्यादा गहरा दिखाई दे सकता है। अगर एलर्जी के कारण आंखों में खुजली रहती है, तो उसके इलाज के लिए डॉक्टर से सलाह लें।

    4. धूप से त्वचा की सुरक्षा करें

    अत्यधिक धूप त्वचा में पिगमेंटेशन बढ़ा सकती है, जिससे आंखों के नीचे का हिस्सा ज्यादा गहरा दिखाई दे सकता है। चेहरे पर सनस्क्रीन लगाने और धूप में सनग्लास पहनने की आदत मददगार हो सकती है।

    5. शरीर को हाइड्रेट रखें

    पर्याप्त पानी न पीने पर त्वचा रूखी और फीकी दिखाई दे सकती है, जिससे डार्क सर्कल अधिक नजर आ सकते हैं। पूरे दिन पर्याप्त मात्रा में पानी और अन्य स्वस्थ तरल पदार्थ लेते रहें।

    6. कैफीन या अन्य उपयुक्त स्किनकेयर वाले प्रोडक्ट पर विचार करें

    कुछ अंडर-आई उत्पादों में कैफीन या रेटिनॉल जैसे ingredients होते हैं, जो कुछ लोगों में सूजन या डार्क सर्कल की appearance को कम करने में मदद कर सकते हैं। आंखों के आसपास की त्वचा संवेदनशील होती है, इसलिए कोई भी नया प्रोडक्ट इस्तेमाल करने से पहले सावधानी बरतें।

    7. ज्यादा नमक और अस्वस्थ आदतों पर नियंत्रण रखें

    आंखों के आसपास सूजन और पफीनेस में कुछ lifestyle factors भूमिका निभा सकते हैं। संतुलित डाइट लेना, धूम्रपान से बचना और शराब का अधिक सेवन न करना त्वचा और सामान्य स्वास्थ्य के लिए बेहतर है।

    कब डॉक्टर से संपर्क करें?

    अगर काले घेरे अचानक दिखाई देने लगे हों, सिर्फ एक आंख के नीचे हों, या उनके साथ ज्यादा सूजन, दर्द अथवा आंखों से जुड़ी दूसरी समस्या हो, तो डॉक्टर या आई स्पेशलिस्ट से जांच कराना बेहतर है।

    निष्कर्ष: डार्क सर्कल को पूरी तरह हटाना हर व्यक्ति में संभव नहीं होता, क्योंकि आनुवंशिकता और उम्र जैसे कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं। लेकिन पर्याप्त नींद, धूप से बचाव, हाइड्रेशन और सही स्किनकेयर से उनकी appearance को कम करने में मदद मिल सकती है।

  • महिलाओं के ब्रेस्ट में दूध कैसे बनता है? जानिए शरीर की यह प्राकृतिक प्रक्रिया..​​​​​​

    महिलाओं के ब्रेस्ट में दूध कैसे बनता है? जानिए शरीर की यह प्राकृतिक प्रक्रिया..​​​​​​

    बच्चे के जन्म के बाद मां के शरीर में ब्रेस्ट मिल्क बनने की प्रक्रिया हार्मोन और बच्चे के स्तनपान से जुड़ी होती है। गर्भावस्था के दौरान ही स्तनों में दूध बनाने वाली ग्रंथियां विकसित होने लगती हैं। डिलीवरी के बाद हार्मोनल बदलाव और बच्चे का स्तनपान दूध बनने और बाहर आने की प्रक्रिया को सक्रिय करते हैं।

    1. गर्भावस्था में ही तैयारी शुरू हो जाती है

    प्रेग्नेंसी के दौरान एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन स्तनों के ऊतकों और दूध बनाने वाली संरचनाओं को विकसित करने में मदद करते हैं। इस दौरान शरीर बच्चे के जन्म के बाद स्तनपान के लिए तैयार होता है।

    2. दूध बनाने का काम प्रोलैक्टिन करता है

    स्तन के अंदर छोटे-छोटे हिस्से होते हैं जिन्हें एल्वियोली कहा जाता है। इन्हीं कोशिकाओं में दूध बनता है। हार्मोन प्रोलैक्टिन दूध के निर्माण को बढ़ावा देता है। बच्चे के स्तनपान करने पर प्रोलैक्टिन का स्तर बढ़ता है, जिससे आगे के लिए दूध बनाने का संकेत मिलता है।

    3. डिलीवरी के बाद दूध बनने की प्रक्रिया तेज होती है

    बच्चे के जन्म के बाद प्लेसेंटा बाहर निकलने पर प्रोजेस्टेरोन और एस्ट्रोजन का स्तर तेजी से कम होता है। इससे प्रोलैक्टिन अपना प्रभाव अधिक प्रभावी ढंग से दिखा पाता है और दूध का उत्पादन बढ़ने लगता है। शुरुआत में मां के स्तनों से निकलने वाला पहला दूध कोलोस्ट्रम होता है, जो सामान्य दूध की तुलना में अलग संरचना वाला होता है।

    4. बच्चे के चूसने से दूध बनने का संकेत मिलता है

    जब बच्चा निप्पल को चूसता है, तो वहां मौजूद नसों के जरिए दिमाग तक संकेत पहुंचता है। इससे प्रोलैक्टिन और ऑक्सीटोसिन जैसे हार्मोन के स्राव में बदलाव होता है। नियमित और प्रभावी स्तनपान दूध की आपूर्ति बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

    5. ऑक्सीटोसिन दूध को बाहर निकालने में मदद करता है

    प्रोलैक्टिन मुख्य रूप से दूध बनाने में मदद करता है, जबकि ऑक्सीटोसिन स्तन के आसपास की मांसपेशी कोशिकाओं को सिकोड़ता है। इससे एल्वियोली में जमा दूध दूध की नलिकाओं के जरिए निप्पल की ओर पहुंचता है। इस प्रक्रिया को लेट-डाउन रिफ्लेक्स या मिल्क इजेक्शन रिफ्लेक्स कहा जाता है।

    6. जितना दूध निकलता है, शरीर उतना उत्पादन करने का संकेत पाता है

    स्तनपान के दौरान दूध का उत्पादन काफी हद तक सप्लाई और डिमांड से जुड़ा होता है। बच्चा जितनी नियमितता से दूध पीता है, या जरूरत पड़ने पर दूध निकाला जाता है, उतना ही शरीर को दूध बनाने का संकेत मिलता रहता है। इसके विपरीत लंबे समय तक दूध न निकलने पर उत्पादन कम हो सकता है।

    7. तनाव भी दूध के बाहर आने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है

    ऑक्सीटोसिन दूध के बाहर आने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कुछ शोधों में तनाव को ऑक्सीटोसिन रिलीज और मिल्क इजेक्शन पर असर डालने वाला कारक पाया गया है। इसलिए स्तनपान कराने वाली मां के लिए आरामदायक और सहयोगी वातावरण उपयोगी हो सकता है।

    निष्कर्ष: ब्रेस्ट मिल्क बनना एक जटिल लेकिन प्राकृतिक हार्मोनल प्रक्रिया है। इसमें गर्भावस्था के दौरान स्तनों का विकास, डिलीवरी के बाद हार्मोनल बदलाव और बच्चे का नियमित स्तनपान—तीनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अगर मां को दूध की मात्रा को लेकर चिंता हो, तो डॉक्टर या प्रमाणित लैक्टेशन कंसल्टेंट से सलाह लेना बेहतर है।

  • रिसर्च में सामने आया: शादीशुदा लोगों की सेहत पर पड़ सकता है सकारात्मक असर, जानिए कैसे..?​​​​​​

    रिसर्च में सामने आया: शादीशुदा लोगों की सेहत पर पड़ सकता है सकारात्मक असर, जानिए कैसे..?​​​​​​

    शादी सिर्फ सामाजिक और पारिवारिक रिश्ते का नाम नहीं है, बल्कि कई शोधों में वैवाहिक स्थिति और स्वास्थ्य के बीच संबंध भी देखा गया है। कुछ अध्ययनों के अनुसार शादीशुदा लोगों में मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक सहयोग और कुछ स्वास्थ्य परिणामों के मामले में फायदे देखने को मिल सकते हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि शादी हर व्यक्ति को स्वस्थ रखने की गारंटी देती है।

    1. मानसिक स्वास्थ्य को मिल सकता है सहारा

    एक अच्छे और सहयोगी वैवाहिक रिश्ते से व्यक्ति को भावनात्मक सहारा मिल सकता है। मुश्किल परिस्थितियों में पार्टनर का साथ तनाव और अकेलेपन से निपटने में मदद कर सकता है। शोधों में बेहतर वैवाहिक गुणवत्ता और बेहतर स्वास्थ्य के बीच संबंध भी पाया गया है।

    2. स्वस्थ आदतों को बढ़ावा मिल सकता है

    शादी के बाद पार्टनर एक-दूसरे को बेहतर खान-पान, नियमित एक्सरसाइज और अन्य स्वस्थ आदतों के लिए प्रेरित कर सकते हैं। कुछ शोधों में शादी और शराब के अत्यधिक सेवन में कमी के बीच संबंध भी देखा गया है। हालांकि, हर स्वास्थ्य व्यवहार पर शादी का प्रभाव एक जैसा नहीं होता।

    3. अकेलेपन से बचने में मिल सकता है फायदा

    एक भरोसेमंद साथी होने से व्यक्ति को नियमित सामाजिक और भावनात्मक जुड़ाव मिलता है। यह सामाजिक समर्थन मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। खासकर जीवन के कठिन दौर में करीबी रिश्ते व्यक्ति को बेहतर तरीके से परिस्थितियों का सामना करने में मदद कर सकते हैं।

    4. कुछ अध्ययनों में लंबी उम्र से जुड़ा संबंध

    कई शोधों में शादीशुदा लोगों में मृत्यु का जोखिम अविवाहित, तलाकशुदा या विधवा/विधुर लोगों की तुलना में कम पाया गया है। 2025 की एक अपडेटेड व्यवस्थित समीक्षा और मेटा-विश्लेषण में 12 कोहोर्ट अध्ययनों और करीब 17.9 लाख लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसमें अविवाहित स्थिति को कुल मृत्यु, हृदय रोग और कैंसर से होने वाली मृत्यु के अधिक जोखिम से जुड़ा पाया गया।

    5. आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी सहयोग मिल सकता है

    विवाह के बाद कई लोगों को आर्थिक, सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी मामलों में पार्टनर का सहयोग मिलता है। बीमारी या परेशानी के समय डॉक्टर से संपर्क करने, दवा लेने और स्वस्थ दिनचर्या बनाए रखने में साथी की भूमिका मददगार हो सकती है।

    6. लेकिन हर शादी सेहत के लिए फायदेमंद नहीं

    यह समझना बेहद जरूरी है कि सिर्फ शादीशुदा होना अच्छे स्वास्थ्य की गारंटी नहीं है। रिश्ते की गुणवत्ता बहुत मायने रखती है। तनावपूर्ण या अस्वस्थ वैवाहिक संबंध मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। शोध में भी बेहतर वैवाहिक गुणवत्ता को बेहतर स्वास्थ्य परिणामों से जोड़ा गया है।

    निष्कर्ष

    रिसर्च में शादी और बेहतर स्वास्थ्य के बीच संबंध जरूर देखा गया है, लेकिन इसे सीधे कारण-और-परिणाम के रूप में समझना सही नहीं होगा। व्यक्ति की जीवनशैली, सामाजिक सहयोग, आर्थिक स्थिति, मानसिक स्वास्थ्य और रिश्ते की गुणवत्ता जैसे कई कारक स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं। इसलिए स्वस्थ रिश्ता, अच्छी जीवनशैली और एक-दूसरे का सहयोग किसी भी शादी में ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।