Blog

  • मीट कारोबारी ने सोती हुई पत्नी और बेटी के काट डाले गले, गाजियाबाद के खोड़ा में डबल मर्डर से सनसनी..

    मीट कारोबारी ने सोती हुई पत्नी और बेटी के काट डाले गले, गाजियाबाद के खोड़ा में डबल मर्डर से सनसनी..

    गाजियाबाद के खोड़ा थाना क्षेत्र के लोकप्रिय विहार में शनिवार तड़के एक मीट कारोबारी ने अपनी पत्नी और बेटी की मीट काटने वाले धारदार हथियार ‘बुगदे’ से गला काटकर हत्या कर दी। इसके बाद उसने दूसरी बेटी पर भी हमला किया, लेकिन वह बचकर भाग गई। शोर सुनकर मौके पर पहुंचे पड़ोसियों द्वारा सूचना दिए जाने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने घायल बेटी को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया। पुलिस ने आरोपी व्यक्ति को भी हिरासत में ले लिया है।

    लोकप्रिय विहार में नूरानी मस्जिद के पास रहने वाला मोहम्मद राजा अंसारी मीट कारोबारी है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी का अपनी पत्नी 40 वर्षीय बेबी तबस्सुम से झगड़ा हुआ था। काफी देर तक हुए झगड़े के बाद सभी से गए। कुछ देर बाद आरोपी ने घर में रखा बुगदा निकाला और पहले पत्नी का गला काटा और फिर 18 वर्षीय बेटी सना तबस्सुम की भी गला काटकर हत्या कर दी। मां और बहन की चीख सुनकर छोटी बेटी जोया भी जाग गई। इसके बाद आरोपी ने उस पर भी हमला कर दिया, मगर वह बचकर वहां से भागने लगी तो आरोपी ने उस पर बुगदा फेंककर मारा, जो जोया की जांघ पर जा लगा। मगर वह किसी तरह से बचकर घर से बाहर निकली और अपनी जान बचाई।

    पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस और फोरेंसिक विभाग की टीमों ने घटनास्थल पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाए। पुलिस की अब तक की शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी का शुक्रवार रात पत्नी और बेटियों से किसी बात को लेकर विवाद हुआ था। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर छानबीन‌शुरू कर दी है।

  • छत्तीसगढ़ में दूल्हा-दुल्हन की ‘अग्निपरीक्षा’, अंगारों पर 7 फेरे; जानें वजह..

    छत्तीसगढ़ में दूल्हा-दुल्हन की ‘अग्निपरीक्षा’, अंगारों पर 7 फेरे; जानें वजह..

    Featured Image

    रायगढ़. छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के भूपदेवपुर से एक ऐसी अनोखी परंपरा सामने आई है, जिसे देखकर आप भी हैरान रह जाएंगे. जहां आज के आधुनिक दौर में शादी की रस्में बदल रही हैं, वहीं भूपदेवपुर के बिलासपुर गांव में सदियों पुरानी एक ऐसी परंपरा आज भी निभाई जा रही है, जिसमें नई नवेली दुल्हन को अपने ससुराल में प्रवेश करने से पहले जलते हुए अंगारों पर चलना पड़ता है. यहां राठिया परिवार में बहू का गृह प्रवेश किसी साधारण रस्म से नहीं बल्कि अग्नि परीक्षा से होता है. हाल ही में जयप्रकाश राठिया की शादी बाड़ादरहा गांव में संपन्न हुई और जब बारात दुल्हन को लेकर बिलासपुर गांव पहुंची, तो पूरे गांव की नजरें उस खास पल पर टिक गईं, जब दूल्हा-दुल्हन को घर के आंगन में बिछाए गए जलते अंगारों पर 7 फेरे लेने थे.

    परंपरा के अनुसार, बहू के आगमन से पहले परिवार उपवास रखता है, यहां तक कि पानी की एक बूंद तक ग्रहण नहीं की जाती. गांव पहुंचने पर नवविवाहित जोड़े का पारंपरिक स्वागत किया गया, नए वस्त्र और आभूषण भेंट किए गए और फिर शुरू हुई सबसे रोमांचक रस्म. दूल्हे के पिता मेहत्तर राठिया पर कथित रूप से देवता का आह्वान हुआ. उन्होंने मंडप के बीच दहकते अंगार बिछाए और खुद उनपर नृत्य किया. इसके बाद दूल्हा और दुल्हन ने हाथों में हाथ डालकर उन्हीं जलते अंगारों पर 7 फेरे लिए.

    परंपरा को पूरी श्रद्धा से निभा रहे गंधेल गोत्र के परिवार
    हैरानी की बात यह रही कि आग की तपिश और दहकते कोयलों के बावजूद दोनों पूरी तरह सुरक्षित रहे. गांववालों के मुताबिक, यह परंपरा 100 वर्षों से भी अधिक पुरानी है और गंधेल गोत्र के परिवार आज भी इसे पूरी श्रद्धा से निभा रहे हैं. मान्यता है कि जो नवविवाहित जोड़ा इस अग्नि परीक्षा को पार कर लेता है, वो जीवन की हर कठिनाई को साथ मिलकर पार करने की शक्ति प्राप्त करता है. आस्था, परंपरा और विश्वास का यह अद्भुत संगम रायगढ़ के बिलासपुर गांव को एक अलग पहचान देता है.

  • पहले हत्या फिर गोवा की सैर… लाखों के लालच में 2 छात्रों ने कर दी प्रिंसिपल की हत्या; दिल दहला देने वाली घटना

    पहले हत्या फिर गोवा की सैर… लाखों के लालच में 2 छात्रों ने कर दी प्रिंसिपल की हत्या; दिल दहला देने वाली घटना

    पहले हत्या फिर गोवा की सैर... लाखों के लालच में 2 छात्रों ने कर दी प्रिंसिपल की हत्या; दिल दहला देने वाली घटना

    तेलंगाना के नालगोंडा जिले से मानवता शर्मसार करने वाला मामला सामने आया था, जहां पर एक स्कूल की प्रिसिंपल का शव उसके ही फ्लैट पर मिला था. इस घटना ने इलाके में सनसनी फैला दी थी. इस हत्या की गुत्थी को पुलिस ने सुलझा लिया है. पुलिस ने प्रकरण को सुलझाते हुए दो छात्रों को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि इन दोनों छात्रों ने ही कथित तौर पर पैसे और आलीशान जीवन शैली के लिए अपराध की योजना बनाई थी.

    दरअसल, कोंडमल्लेपल्ली स्थित नागार्जुन पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्या कल्लू रूपा रेड्डी की शव अपने घर में मिला था. पुलिस ने पाया कि उनके शरीर पर कम से कम 27 बारत चाकू से हमला किया गया था. घटना के वक्त उनके पति घर पर नहीं थे. जब उन्होंने कई बार अपनी पत्नी के फोन पर कॉल किया, तो जवाब नहीं मिला. इसके बाद उन्होंने पड़ोसियों को बताया, जिसके बाद घटना की जानकारी सामने आई.

    पड़ोसियों ने पुलिस को दी जानकारी

    पड़ोसियों ने पूरे घटना की जानकारी पुलिस को दी. पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया. पुलिस ने पाया कि मृतका के शरीर पर 27 बार चाकू से वार किया गया. मामले की जांच के लिए पांच टीमें बनाईं और सीसीटीवी फुटेज, फोरेंसिक साक्ष्य, फिंगरप्रिंट, टेक्नीकल डेटा और संदिग्धों की गतिविधियों की जांच की. इस दौरान 80 से अधिक लोगों से पूछताछ की गई.

    छात्रों ने क्यों कर दी अपने ही शिक्षक की हत्या

    मामले की जांच कर रहे अधिकारियों को सुराग तब मिला, जब उन्हें पता चला कि फोन बंद होने से पहले रूपा रेड्डी ने अपनी चाची से फोन पर बात करते समय ‘बाबू’ शब्द का इस्तेमाल किया था. बुधवार को सीनियर पुलिस अधिकारी शरथ चंद्र पवार ने बताया कि उसकी बातचीत के दौरान रिकॉर्ड किया गया आखिरी शब्द ‘बाबू’ था. हमने इस बात की जांच की कि वह किसका जिक्र कर रही थी और इससे हमें स्कूल के छात्रों की ओर संकेत मिला.

    कैसे हत्यारों तक पहुंची पुलिस?

    इसके बाद पुलिस ने छात्रों से व्यक्तिगत रूप से पूछताछ की और कक्षा 10 के उन पांच छात्रों पर फोकस किया, जो घटना वाले दिन स्कूल नहीं आए थे. पुलिस ने इस दौरान पाया कि इनमें से दो छात्र पिछले कुछ समय में खूब पार्टियां कर रहे थे और पैसे खर्च कर रहे थे.

    पवार ने कहा कि उन दोनों छात्रों को बुधवार को हिरासत में लिया गया. पूछताछ के दौरान छात्रों ने कबूल किया कि उन्होंने ही एक योजना के अनुसार रूपा रेड्डी की हत्या की थी.

    क्यों प्रधानाचार्य को उतारा मौत के घाट

    मामले की जांच कर रहे अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों को कुछ दिन पहले प्रिंसिपल ने फटकार लगाई थी, जब उनके छात्रावास के बैग से कुछ नकदी और मोबाइल फोन मिला था. इसके बाद प्रिंसिपल ने छात्रों के माता-पिता को सूचित किया और उन्हें हॉस्टल से निकाल दिया गया. पुलिस को संदेह है कि इससे प्रधानाचार्य के प्रति असंतोष पैदा हुआ है और छात्रों ने यह कदम उठाया.

    दस्ताने खरीद कर छिपाई पहचान

    छात्रावास ने निष्कासित होने के बाद छात्रों ने पांच दिनों तक चोरी की योजना बनाई. बाद में उन्होंने अपने प्रिंसिपल के घर की रेकी की. सबसे खास बात है इन छात्रों ने अपनी पहचान छिपाने के लिए दस्ताने खरीदे, जिससे पुलिस को जांच के दौरान साक्ष्य न मिल सके. जिस दिन हत्या हुई, उस दिन एक छात्र बंदर टोपी और दस्ताने पहने हुए घर में घुसा. छात्र ने शयनकक्ष में रखे 25 लाख रुपये देखा और लेकर भागने लगा.

    हालांकि, बंदर टोपी फिसल गई और रूपा रेड्डी ने उसे पहचान लिया. उसे डर था कि वह उन्हें पहचान लेगी,इसलिए उसने अपनी प्रिंसिपल पर चाकू से 27 बार वार किया. हत्या के बाद आरोपियों ने नकदी ली और खून से सने कपड़े और टोपी को दफनाकर सबूत को मिटाने की कोशिश की. कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया वह गोवा की यात्रा पर गए थे.

    पुलिस ने नकदी बरामद की

    गौरतलब है कि पुलिस ने आरोपियों से करीब 1.54 लाख रुपये नकदी बरामद की है, जिसमें खून के धब्बे लगे कुछ नोट, आरोपियों की ओर से खींचा गया आईफोन और रूपा रेड्डी का फोन शामिल है. आरोपियों को हिरासत में लेने के बाद पुलिस आगे की जांच में जुट गई है.

  • महाभारत के अनसुलझे रहस्य, जिनका जवाब विज्ञान भी आज तक नहीं ढूंढ पाया..?

    महाभारत के अनसुलझे रहस्य, जिनका जवाब विज्ञान भी आज तक नहीं ढूंढ पाया..?

    Mahabharat Facts: हिंदू धर्म में महाभारत को पंचम वेद माना जाता है. यह विश्व के सबसे बड़े महाकाव्यों में से एक है. महाभारत में दिया गया ज्ञान आज भी उतना ही मान्य है, जितना उस समय था. लेकिन क्या महाभारत जितनी हमारे सामने रखी गई है, उतनी ही है? या फिर इससे जुड़े ऐसे कुछ रहस्य हैं, जिनसे आज तक पर्दा नहीं उठ सका है?

    महाभारत से जुड़े ऐसे रहस्यों के बारे में जानने की कोशिश करेंगे, जिनके बारे में अधिकांश लोगों को जानकारी नहीं है. तो चलिए, बिना देरी किए आज की इस वीडियो को शुरू करते हैं.

    18 का रहस्य

    महाभारत का युद्ध हुए यूं तो हजारों वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन आज भी लोगों में इसके प्रति जिज्ञासा बनी हुई है. आज भी इससे जुड़े कई ऐसे रहस्य हैं, जिन पर चर्चा होती रहती है. ऐसा ही एक रहस्य 18 अंक से जुड़ा है. दरअसल, महाभारत में 18 अंक का विशेष महत्व बताया जाता है. महाभारत का युद्ध 18 दिनों तक चला था, जिसमें लाखों योद्धा मारे गए. इसके अलावा कौरवों और पांडवों की कुल 18 अक्षौहिणी सेना थी, जिसमें कौरवों की 11 और पांडवों की 7 अक्षौहिणी सेना थी.

    यही नहीं, ऋषि वेदव्यास द्वारा रचित महाभारत में कुल 18 पर्व बताए गए हैं. हिंदू धर्म में 18 पुराणों का भी विशेष महत्व है. श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता का ज्ञान युद्ध के दौरान दिया और गीता में भी 18 अध्याय हैं. इसके अलावा, महाभारत का युद्ध समाप्त होने के बाद कुल 18 प्रमुख योद्धाओं के जीवित बचने की बात कही जाती है. यह सब जानने के बाद इतना तो साफ है कि महाभारत और 18 अंक का गहरा नाता है. लेकिन ऐसा क्यों था, यह आज भी एक रहस्य है.

    क्या आज भी जीवित हैं अश्वत्थामा?

    महाभारत काल का एक ऐसा व्यक्ति, जिसके बारे में माना जाता है कि वह आज भी जीवित है, वह है अश्वत्थामा. अश्वत्थामा कौरवों और पांडवों के गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र थे. उन्होंने महाभारत के युद्ध में कौरवों की ओर से युद्ध किया था. लेकिन युद्ध के अंत में किए गए अपने कर्मों के कारण उन्हें श्राप मिला था.

    पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अश्वत्थामा ने ब्रह्मास्त्र का गलत प्रयोग किया था. इससे भगवान श्रीकृष्ण क्रोधित हो गए और उन्होंने अश्वत्थामा को श्राप दिया कि वह अपने किए गए पापों का बोझ उठाते हुए हजारों वर्षों तक पृथ्वी पर भटकता रहेगा. कहा जाता है कि इसी श्राप के कारण अश्वत्थामा आज भी जीवित हैं और निर्जन स्थानों पर भटक रहे हैं. आज भी कई जगहों पर अश्वत्थामा को देखे जाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन इन दावों की सत्यता का कोई प्रमाण नहीं है.

    विमान और परमाणु अस्त्रों का उपयोग

    ऐसा कहा जाता है कि महाभारत काल में विमान और परमाणु अस्त्रों जैसे शक्तिशाली हथियारों का उपयोग किया गया था. हालांकि, इन दावों को लेकर इतिहासकारों और वैज्ञानिकों के बीच मतभेद हैं. मोहनजोदड़ो की खुदाई में कुछ ऐसे कंकाल मिलने के दावे किए गए हैं, जिनमें रेडिएशन का असर होने की बात कही जाती है. कुछ लोग इसे महाभारत में बताए गए ब्रह्मास्त्र से जोड़ते हैं.

    कहा जाता है कि दुनिया का सबसे पहला परमाणु बम जैसा अस्त्र यानी ब्रह्मास्त्र अश्वत्थामा ने छोड़ा था. यही नहीं, महाभारत के सौप्तिक पर्व में ब्रह्मास्त्र और उसके प्रभाव से जुड़े प्रसंग मिलते हैं. हालांकि, महाभारत काल में वास्तव में विमान या परमाणु बम जैसे आधुनिक अस्त्रों का उपयोग हुआ था या नहीं, यह आज भी रहस्य और बहस का विषय है.

    गांधारी के 100 पुत्र और एक पुत्री का रहस्य

    महाभारत में गांधारी के 100 पुत्रों और एक पुत्री का उल्लेख मिलता है. हालांकि, गांधारी के पुत्रों को लेकर कई लोगों के मन में सवाल रहता है कि आखिर उनका जन्म कैसे हुआ था. महाभारत की कथा के अनुसार, गांधारी ने महल में ऋषि वेदव्यास की सेवा की थी. उनकी सेवा से प्रसन्न होकर वेदव्यास ने उन्हें 100 पुत्रों का वरदान दिया था. लेकिन, जब समय आया तो गांधारी लंबे समय तक गर्भवती रहीं. अंत में उन्होंने एक बड़े मांस-पिंड को जन्म दिया. इसे देखकर गांधारी बहुत दुखी हुईं और उसे फेंकने का विचार किया.

    तब वेदव्यास ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया और उस मांस-पिंड को 100 टुकड़ों में बांटकर अलग-अलग घड़ों में रखने को कहा. गांधारी ने एक पुत्री की भी इच्छा व्यक्त की, जिसके बाद 101 टुकड़े किए गए. कुछ समय बाद इन घड़ों से 100 कौरव राजकुमारों और एक पुत्री का जन्म हुआ. महाभारत में कौरवों की इस बहन का नाम दुश्शला बताया गया है. बाद में उसका विवाह सिंधु नरेश जयद्रथ से हुआ.

    विदेशों के योद्धाओं ने भी लिया था युद्ध में हिस्सा?

    ऐसा भी कहा जाता है कि महाभारत के युद्ध में सिर्फ भारत के ही नहीं, बल्कि दूसरे क्षेत्रों के योद्धाओं ने भी हिस्सा लिया था. महाभारत में अलग-अलग जनपदों और दूर-दराज के क्षेत्रों से आए योद्धाओं और राजाओं का उल्लेख मिलता है. हालांकि, ग्रीस, रोम या अमेरिका जैसे आधुनिक देशों से योद्धाओं के महाभारत युद्ध में शामिल होने का दावा ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित नहीं है. इसी वजह से महाभारत को लेकर यह दावा भी किया जाता है कि यह एक तरह का विश्वव्यापी युद्ध था, लेकिन इसे प्रमाणित करने वाले ठोस ऐतिहासिक साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं.

    तीन चरणों में लिखी गई महाभारत

    महाभारत एक विशाल महाकाव्य है, जिसे तैयार होने में लंबा समय लगा. परंपरा और कुछ विद्वानों के अनुसार, महाभारत के विकास को अलग-अलग चरणों में समझा जाता है. कहा जाता है कि शुरुआती रूप में इसमें 8,800 श्लोक थे, जिसे ‘जय’ कहा गया. इसके बाद इसका विस्तार ‘भारत’ के रूप में हुआ, जिसमें लगभग 24,000 श्लोक बताए गए. अंततः इसका विस्तृत रूप ‘महाभारत’ बना, जिसमें करीब एक लाख श्लोक बताए जाते हैं. इसी वजह से महाभारत को विश्व के सबसे विशाल महाकाव्यों में से एक माना जाता है.

    क्या महाभारत काल में राशियां नहीं थीं?

    ज्योतिष के इतिहास को लेकर यह बात कही जाती है कि प्राचीन भारतीय परंपरा में नक्षत्रों का विशेष महत्व था. वैदिक ज्योतिष में 27 नक्षत्रों का उल्लेख मिलता है. कुछ लोगों का दावा है कि महाभारत काल में आज की तरह 12 राशियों का उपयोग नहीं होता था और ज्योतिष मुख्य रूप से नक्षत्रों पर आधारित था. हालांकि, प्राचीन भारतीय ज्योतिष में राशि और नक्षत्र दोनों की परंपराओं का विकास अलग-अलग चरणों में हुआ है. इसलिए यह कहना कि महाभारत काल में राशियां बिल्कुल अस्तित्व में नहीं थीं, पूरी तरह सही नहीं माना जा सकता. महाभारत और वैदिक साहित्य में ग्रहों, नक्षत्रों और खगोलीय घटनाओं के कई उल्लेख मिलते हैं.

    अभिमन्यु की मौत का सच

    आप यह तो जानते ही होंगे कि अर्जुन के बेटे अभिमन्यु की हत्या चक्रव्यूह में हुई थी. लेकिन इससे जुड़ी कई बातें ऐसी हैं, जिन पर अक्सर चर्चा होती है. महाभारत के अनुसार, अभिमन्यु ने चक्रव्यूह में प्रवेश किया और बेहद वीरता से युद्ध किया. उन्होंने कई योद्धाओं को पराजित किया. अंत में कई महारथियों ने मिलकर उन पर हमला किया.

    कथा के अनुसार, अभिमन्यु के पास उस समय अपने बचाव के लिए पर्याप्त अस्त्र-शस्त्र नहीं बचे थे. इसी दौरान दुर्योधन के पुत्र लक्ष्मण की मृत्यु भी अभिमन्यु के हाथों हुई. इससे कौरव पक्ष और अधिक क्रोधित हो गया था. अंततः द्रोणाचार्य, कर्ण, कृपाचार्य, अश्वत्थामा और कृतवर्मा समेत कई योद्धाओं ने मिलकर अभिमन्यु को घेर लिया. इसके बाद दुशासन के पुत्र ने अभिमन्यु पर अंतिम प्रहार किया और उनकी मृत्यु हो गई.

    महान योद्धा बर्बरीक ने देखा था पूरा युद्ध

    क्या आप उस महान योद्धा के बारे में जानते हैं, जिसके शीश ने महाभारत का पूरा युद्ध देखा था? वह महान योद्धा कोई और नहीं, बल्कि भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक थे. पौराणिक मान्यता के अनुसार, बर्बरीक ने प्रण लिया था कि वह महाभारत के युद्ध में हमेशा हारने वाले पक्ष की ओर से लड़ेंगे. उनके पास तीन ऐसे बाण थे, जिनकी शक्ति असाधारण मानी जाती थी. कहा जाता है कि बर्बरीक की शक्ति को देखकर भगवान श्रीकृष्ण ने ब्राह्मण का भेष धारण करके उनसे दान में उनका शीश मांग लिया.

    बर्बरीक ने बिना किसी संकोच के अपना शीश दान कर दिया. इसके बाद उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से प्रार्थना की कि वह अंत तक महाभारत का युद्ध देखना चाहते हैं. श्रीकृष्ण ने उनकी इच्छा स्वीकार कर ली. पौराणिक कथा के अनुसार, उन्होंने बर्बरीक के शीश को एक ऊंचे स्थान पर स्थापित कर दिया, जहां से बर्बरीक ने महाभारत का पूरा युद्ध देखा. इसी मान्यता के कारण बर्बरीक को आज कई स्थानों पर खाटू श्याम के रूप में पूजा जाता है.

  • 10 मिनट के लिए मरकर दोबारा जिंदा हुआ शख्स, अब मौत को लेकर किया ऐसा खुलासा..

    10 मिनट के लिए मरकर दोबारा जिंदा हुआ शख्स, अब मौत को लेकर किया ऐसा खुलासा..

    Featured Image

    क्या आप जानते हैं कि मौत के बाद की दुनिया कैसी दिखती है? इस सवाल का जवाब खोजने के लिए लोग सदियों से रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन रोमफोर्ड, ईस्ट लंदन के रहने वाले मैथ्यू एलिक के पास इस बारे में एक ऐसा जवाब है, जो आपको निराश कर सकता है. यकीनन, बहुत कम लोगों को पता होगा कि 43 साल के मैथ्यू, जो एक पिता, एक्टर और मॉडल हैं, अगस्त 2023 में करीब 10 मिनट के लिए क्लीनिकली डेड घोषित कर दिए गए थे. उस वक्त उन्हें एक बहुत बड़ा हार्ट अटैक आया था, जिसके बाद उनकी सांसें थम गईं और दिल ने धड़कना बंद कर दिया था.

    मैथ्यू को सांस लेने में दिक्कत और पैरों में सूजन की वजह से अस्पताल ले जाया गया था. डॉक्टरों ने पाया कि उनके दिल और फेफड़ों में क्रिकेट की गेंद के आकार के खून के थक्के जम गए थे. पल्मोनरी एम्बोलिज्म की वजह से उन्हें कार्डियक अरेस्ट हुआ और वे वहीं गिर पड़े. डॉक्टरों ने उन्हें वापस लाने के लिए डिफिब्रिलेटर का इस्तेमाल किया और इतनी ताकत से सीपीआर दिया कि उनके शरीर के अंदर ब्लीडिंग होने लगी. लगभग 10 मिनट तक क्लीनिकली डेड रहने के बाद आखिरकार डॉक्टरों ने उन्हें होश में ला दिया और फिर वे तीन दिनों तक कोमा में रहे.

    मौत का वो ‘निराश’ करने वाला अनुभव
    मैथ्यू जब कोमा से बाहर आए, तो उनसे सबसे पहला सवाल यही पूछा गया कि उन्होंने ‘दूसरी दुनिया’ में क्या देखा? मैथ्यू का जवाब सुनकर सब हैरान रह गए. उन्होंने कहा कि उन्हें कुछ भी याद नहीं है. उनके मुताबिक, मौत का अनुभव किसी दिव्य रोशनी या स्वर्ग जैसा नहीं था, बल्कि यह एक बेहद शांतिपूर्ण नींद से जागने जैसा महसूस हुआ. मैथ्यू का यह खुलासा उन लोगों के लिए निराशाजनक हो सकता है, जो मौत के बाद किसी जादुई दुनिया की उम्मीद करते हैं.

    जिंदगी की चुनौतियों से मुकाबला
    मौत के मुंह से वापस आने के बाद मैथ्यू की जिंदगी आसान नहीं थी. पिछले दो सालों में उन्होंने एक रिश्ता टूटने, नौकरी जाने, आर्थिक तंगी और अपने बेटे की खराब सेहत जैसी कई बड़ी चुनौतियों का सामना किया. लेकिन मैथ्यू का कहना है कि जब आप मौत को हरा देते हैं, तो कोई भी चुनौती आपको डरा नहीं सकती. उन्होंने रोने और हार मानने के बजाय खुद को दोबारा खड़ा करने का फैसला किया. आज वे अपनी बेस्ट फ्रेंड से सगाई कर चुके हैं, दोनों ने अपना घर खरीद लिया है और उनके बच्चे भी लाइफ में अच्छा कर रहे हैं.

    किताब के जरिए दी नई प्रेरणा
    मैथ्यू ने अपनी मौत और उसके बाद के 18 महीनों के संघर्ष को एक किताब ‘लाइफ आफ्टर बीइंग क्लीनिकली डेड’ बताया है. डिस्लेक्सिया (पढ़ने-लिखने की बीमारी) होने के बावजूद उन्होंने डिक्टाफोन में बोलकर अपनी कहानी लिखी और आज उनकी किताब की 1,000 से ज्यादा प्रतियां बिक चुकी हैं. मैथ्यू अब मोटिवेशनल स्पीच देते हैं और ब्लड फाउंडेशन के साथ काम करते हैं, क्योंकि 7 बार खून चढ़ने की वजह से ही उनकी जान बच पाई थी. मैथ्यू की सेहत अब पहले जैसी नहीं रही और उन्हें पूरी उम्र खून पतला करने वाली दवा लेनी होगी, लेकिन वे अपनी कमियों पर नहीं बल्कि अपनी काबिलियत पर ध्यान दे रहे हैं. उनका मानना है कि जिंदगी बहुत छोटी है और हमें हर पल का लुत्फ उठाना चाहिए.

  • हजारों साल पुराना लकड़ी का ये बाजार देख हक्के-बक्के रह गए लोग, खूबसूरती बना देगी दीवाना..

    हजारों साल पुराना लकड़ी का ये बाजार देख हक्के-बक्के रह गए लोग, खूबसूरती बना देगी दीवाना..

    Featured Image
    हजारों साल पुराना लकड़ी का ये बाजार देख हक्के-बक्के रह गए लोग, खूबसूरती बना देगी दीवाना 

    मिस्र यानी इजिप्ट की राजधानी काहिरा अपनी हिस्ट्री और आर्किटेक्चर के लिए दुनियाभर में जानी जाती है. इन दिनों इंटरनेट पर काहिरा के एक बिजी मार्केट में हजारों साल पुराना एक ऐसा ऐतिहासिक ढांचा मौजूद है, जिसकी छत पूरी तरह से लकड़ी की बनी हुई है. इस लकड़ी की छत की ऊंचाई जमीन से लगभग 25 से 30 फीट है. इतने सालों बाद भी लकड़ी का ये काम बिना किसी नुकसान और बिना किसी मरम्मत के वैसे ही बेहद खूबसूरती से नजर आ रहा है. शायद यही वजह है कि, ये वीडियो लोगों का ध्यान खींच रहा है.

    वायरल हो रहे इस वीडियो में देखा जा सकता है कि, इस पुरानी इमारत की दीवारों पर पत्थरों की बहुत बारीक और सुंदर नक्काशी की गई है. स्थानीय लोगों के मुताबिक, ये पुराना ढांचा और उसकी लकड़ी की छत लगभग हजारों साल पुरानी है. खास बात ये है कि इस पुरानी इमारत में अब तक कोई बड़ा मरम्मत का काम नहीं हुआ है. बावजूद इसके ये आज भी अपनी पुरानी चमक और मजबूती बनाए हुए है.

     

     
    आपके

    वीडियो में देखा जा सकता है कि, इमारत के नीचे के एरिया में आज दुकानें और मार्केट सज रहे हैं, जबकि इसके अंदर मदरसा भी मौजूद है. पत्थरों का महीन काम और ऊपर से लकड़ी की बड़ी सी छत इसे देखने आने वाले हर शख्स को हैरान कर देती है.

  • पत्नी को वापस पाने की चाह में नरबलि; पड़ोसी की हत्या कर शव का सिर पूजा घर में दफनाया,

    पत्नी को वापस पाने की चाह में नरबलि; पड़ोसी की हत्या कर शव का सिर पूजा घर में दफनाया,

    ओडिशा के बोलांगीर जिले से एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां पत्नी को वापस पाने की इच्छा एक व्यक्ति को कथित तौर पर जघन्य अपराध की ओर ले गई. पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि अपनी पत्नी से अलग रह रहे एक व्यक्ति ने पड़ोसी गांव के रहने वाले एक व्यक्ति की हत्या कर दी और उसका सिर काटकर अपने घर के पूजा कक्ष में दफना दिया. मामला तब उजागर हुआ जब कई दिनों से लापता व्यक्ति का सिर कटा शव एक तालाब से बरामद हुआ. जांच आगे बढ़ी तो पुलिस आरोपी तक पहुंच गई और पूछताछ में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए.

    तालाब से मिला सिर कटा शव

    बोलांगीर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अभिलाष ने कहा कि “आरोपी और मृतक एक-दूसरे को पहले से नहीं जानते थे. संतोष खरसेल से मुलाकात के बाद शत्रुघ्न साहू उसे अपने घर ले गया और उसकी हत्या कर दी.”

    पुलिस के मुताबिक, तेबादामुंडा गांव के रहने वाले 45 वर्षीय संतोष खरसेल 18 अगस्त से लापता थे. परिजन और स्थानीय लोग उनकी तलाश कर रहे थे, लेकिन उनका कोई पता नहीं चल रहा था.

    पिछले सप्ताह मामला उस समय गंभीर हो गया, जब बगड़ा गांव के एक तालाब से संतोष खरसेल का सिर कटा शव बरामद हुआ. शव मिलने की सूचना के बाद पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू की.

    आखिरी बार आरोपी के साथ देखा गया था मृतक

    जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि संतोष खरसेल को आखिरी बार 40 वर्षीय शत्रुघ्न साहू के साथ देखा गया था. इसी आधार पर पुलिस ने साहू को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की. प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि शराब के नशे में हुई बहस के दौरान हत्या हुई थी. हालांकि पुलिस ने जब उससे विस्तृत पूछताछ की तो कहानी का दूसरा पहलू सामने आया.

    पत्नी को वापस पाने की थी चाह

    पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पूछताछ में शत्रुघ्न साहू ने स्वीकार किया कि उसकी पत्नी करीब तीन साल पहले उसे छोड़कर चली गई थी. आरोप है कि वह पत्नी को वापस पाने के लिए तंत्र-मंत्र और अंधविश्वास से जुड़ी गतिविधियों में शामिल हो गया था. इसी क्रम में उसने संतोष खरसेल की हत्या की और उसका सिर काटकर अपने पूजा घर में दफना दिया. पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि आरोपी ने यह कदम किसी अंधविश्वासी सलाह या तांत्रिक प्रभाव में उठाया था या नहीं.

    पूजा रूम से बरामद हुआ सिर

    आरोपी के बयान के आधार पर पुलिस उसके घर पहुंची. तलाशी के दौरान घर के पूजा कक्ष में खुदाई की गई, जहां से मृतक का सिर बरामद कर लिया गया. इसके बाद पुलिस ने आरोपी को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया और हत्या में इस्तेमाल हथियार भी बरामद कर लिया.

    पुलिस ने कहा नरबलि एंगल सामने आया

    एसपी ने कहा, “हमने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और हत्या में इस्तेमाल किया गया हथियार भी बरामद कर लिया है.” उन्होंने आगे बताया, “शुरुआत में हमें संदेह था कि आरोपी ने पुलिस को गुमराह करने के लिए मृतक का सिर कहीं फेंक दिया होगा. लेकिन पूजा कक्ष से खुदाई कर सिर बरामद होने के बाद मानव बलि (नरबलि) की आशंका से जुड़ा पहलू सामने आया.”

  • बेजुबान के लिए बुजुर्ग का ऐसा प्यार देख नम हो गईं आंखें, घायल डॉगी को अस्पताल ले जाकर बने सहारा

    बेजुबान के लिए बुजुर्ग का ऐसा प्यार देख नम हो गईं आंखें, घायल डॉगी को अस्पताल ले जाकर बने सहारा

    Featured Image

    कहते हैं कि इंसानियत के लिए न तो दौलत जरूरी है और न ही कोई बड़ा पद। सच्ची संवेदना हो तो इंसान किसी भी जीव के दर्द को अपना समझ सकता है। ऐसा ही एक भावुक कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक बुजुर्ग ने घायल आवारा कुत्ते के लिए जो किया, उसने लोगों का दिल जीत लिया।

    दरअसल, बुजुर्ग को सड़क पर एक घायल आवारा डॉगी मिला। उसकी हालत देखकर उन्होंने उसे अकेला छोड़ने के बजाय इलाज कराने का फैसला किया। वह डॉगी को लेकर पशु अस्पताल पहुंचे और उसके इलाज के दौरान लगातार उसके पास खड़े रहे।

    इलाज के दौरान डॉगी के पास खड़े रहे बुजुर्ग

    अस्पताल में डॉक्टर जब घायल डॉगी की जांच और इलाज कर रहे थे, उस दौरान बुजुर्ग उसके बिल्कुल पास खड़े रहे। वह लगातार इस बात का ख्याल रखते नजर आए कि घायल जानवर इलाज के दौरान खुद को अकेला या असहाय महसूस न करे।

    बुजुर्ग का यह व्यवहार बताता है कि इंसानियत सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं है। किसी बेजुबान के दर्द को समझना और मुश्किल वक्त में उसका साथ देना भी सच्ची संवेदनशीलता की निशानी है।

    लोगों ने जमकर की बुजुर्ग की तारीफ

    घटना की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने बुजुर्ग की जमकर तारीफ की। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने कहा कि असली अमीरी इंसान के बैंक बैलेंस में नहीं, बल्कि उसके दिल में मौजूद दया और करुणा में होती है।

    कुछ लोगों ने घायल डॉगी के इलाज में आर्थिक मदद करने की इच्छा भी जताई। इस घटना ने एक बार फिर दिखा दिया कि किसी बेजुबान के लिए किया गया छोटा सा प्रयास भी लोगों के दिल को छू सकता है।

    यह घटना हमें यही संदेश देती है कि किसी जरूरतमंद जीव की मदद करने के लिए बड़े साधनों की नहीं, बल्कि एक संवेदनशील दिल की जरूरत होती है।

  • यूपी में बेटे की सरकारी नौकरी लगते ही पिता ने दिखाई राजाओं वाली शान, हाथी पर बैठाकर निकाला जुलूस

    यूपी में बेटे की सरकारी नौकरी लगते ही पिता ने दिखाई राजाओं वाली शान, हाथी पर बैठाकर निकाला जुलूस

    Featured Image

    उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद में हरैया थाना क्षेत्र के अंतर्गत केशवपुर गांव के रहने वाले अवनीश पाण्डेय ने ग्राम पंचायत अधिकारी के पद पर चयनित होकर पूरे जिले का नाम रोशन किया है. बेटे की इस शानदार सफलता पर पिता महेंद्र कुमार पाण्डेय की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. अपनी इस खुशी का इजहार करने के लिए पिता ने एक अनोखा और शाही तरीका अपनाया, जिसकी चर्चा अब पूरे इलाके में हो रही है. 

    संसारीपुर चौराहे पर गाजे-बाजे के साथ एक भव्य स्वागत समारोह आयोजित किया गया. यहां पिता महेंद्र कुमार पाण्डेय ने नवचयनित अधिकारी बेटे अवनीश को बाकायदा हाथी पर बैठाकर पूरे गाजे-बाजे के साथ विजय जुलूस निकाला. ढोल-नगाड़ों की थाप और ग्रामीणों के उल्लास के बीच निकला यह जुलूस हर किसी के लिए कौतूहल और आकर्षण का केंद्र बना रहा.

    स्थानीय लोगों ने फूल-मालाओं से किया स्वागत 

    स्थानीय लोगों ने इस खुशी के मौके पर बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जगह-जगह फूल-मालाओं से अवनीश का स्वागत किया और परिजनों को बधाइयाँ दीं. सोशल मीडिया पर भी पिता-पुत्र के इस खास पल का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे लोग एक पिता के गर्व और सफलता के जश्न का सबसे खूबसूरत दृश्य बता रहे हैं. अवनीश की यह उपलब्धि स्थानीय युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है.

    पूरे गांव में जश्न सा माहौल 

    ग्राम पंचायत अधिकारी के पद पर चयनित हुए अवनीश पाण्डेय को जब उनके पिता महेंद्र कुमार पाण्डेय ने संसारीपुर चौराहे पर हाथी पर बैठाकर ढोल-नगाड़ों के साथ गाँव में प्रवेश कराया, तो यह केवल एक पारिवारिक जश्न भर नहीं रहा. यह ग्रामीण समाज में सफलता, संघर्ष और सम्मान के बदलते आयामों को बयां करती एक ऐतिहासिक घटना बन गई. भारतीय समाज में, विशेषकर ग्रामीण अंचलों में, एक पिता अपनी पूरी ज़िंदगी बच्चों की पढ़ाई और उनके भविष्य को संवारने में खपा देता है. जब वर्षों की वह तपस्या रंग लाती है, तो खुशी का बाँध टूटना स्वाभाविक है.

    पिता का यह बादशाही अंदाज दिखावा नहीं, बल्कि उस अथक परिश्रम और उम्मीदों की जीत का उत्सव है, जो एक साधारण परिवार ने वर्षों तक संजोया था. हाथी की सवारी कोई धन-दौलत का प्रदर्शन नहीं, बल्कि उस असीम गर्व की अभिव्यक्ति है जो एक पिता को उसके बेटे की योग्यता ने दी है.

    औरों के लिए बने प्रेरणा 

    यह वायरल होता वीडियो उन सभी युवाओं की आँखों में एक नया सपना बोता है कि अगर मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो एक दिन उनके माता-पिता का मस्तक भी इसी तरह गर्व से ऊँचा होगा. ग्राम पंचायत अधिकारी के रूप में अवनीश अब व्यवस्था का एक हिस्सा बनने जा रहे हैं. मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि उनकी इस सफलता का सच्चा उत्सव तब और सार्थक होगा जब वह अपने इस पद का उपयोग अपने गाँव और क्षेत्र के विकास के लिए पूरी निष्ठा से करेंगे. फिलहाल, यह पल एक पिता के त्याग और बेटे के समर्पण की उस जीत का है, जिसने बस्ती ही नहीं, पूरे प्रदेश के युवाओं को प्रेरित किया है.

  • ‘बदसूरती’ के मिले लाखों रुपये! इस डॉगी ने चमकाई मालकिन की किस्मत

    ‘बदसूरती’ के मिले लाखों रुपये! इस डॉगी ने चमकाई मालकिन की किस्मत

    Featured Image

    दुनियाभर में अक्सर खूबसूरती के चर्चे होते हैं, लेकिन कैलिफोर्निया में एक ऐसा कंपटीशन (competition) होता है, जहां डॉग्स की अनोखी बनावट और उनकी सादगी को सेलिब्रेट किया जाता है. कैलिफोर्निया (California) के सांता रोजा (Santa Rosa) में 14 अगस्त को आयोजित 50वें ‘वर्ल्ड्स अग्लिएस्ट डॉग कॉन्टेस्ट’ में 6 साल की पग ‘जिनी लू’ ने बाजी मारते हुए ये खिताब अपने नाम कर लिया है.

    जिनी लू (Jinny Lu) की मालकिन मिशेल ग्रेडी (Michelle Grady) के मुताबिक, जिनी लू पिछले तीन सालों से इस कंपटीशन में हिस्सा ले रही थी, लेकिन जीत उसे फोर्थ अटेम में मिली. कंपटीशन में दूसरा स्थान चिहुआहुआ-पोमेरेनियन मिक्स (Chihuahua-Pomeranian mix) ‘पिंकी’ (Pinky) को मिला, जबकि तीसरा स्थान ‘ऑटो’ (Otto) नाम के डॉगी ने हासिल किया.

    जिनी लू को करीब 4 साल पहले पग रेस्क्यू के जरिए गोद लिया गया था, तब से वो अपनी मालकिन मिशेल की लाइफ में खुशियां भर रही है. कंपटीशन के ऑर्गनाइजरों का कहना है कि, ‘इस कॉन्टेस्ट का मकसद किसी जानवर का मजाक उड़ाना नहीं, बल्कि पालतू जानवरों को गोद लेने के प्रति जागरूकता फैलाना है.’