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  • रातभर फोन चलाने की आदत पड़ सकती है भारी! कम नींद शरीर को पहुंचा सकती है गंभीर नुकसान.

    रातभर फोन चलाने की आदत पड़ सकती है भारी! कम नींद शरीर को पहुंचा सकती है गंभीर नुकसान.

    रातभर फोन चलाने की आदत पड़ सकती है भारी! कम नींद शरीर को पहुंचा सकती है गंभीर नुकसान.

    Sleep Disorder: ये नींद क्या है ? क्यों आती है नींद ? रात को जागने से लंबी बीमारियों से कैसे मौत के मुंह में जाता है इंसान ? जानिए नींद का वैज्ञानिक रहस्य. आजकल विज्ञान , कम्प्यूटर और नेट का जमाना है और पूरी दुनियां इंटरनेट से जुड़ गयी है. इसलिए मनुष्य रात और दिन काम करने लगा है. कॉल सेंटर और रात की शिफ्ट में काम करने वाले लोगों का बुरा हाल है. जवान बच्चे बहुत जल्दी नपुंसक और बूढ़े हो रहे हैं. दिनरात काम करने के कारण मनुष्य डिप्रेशन की भयंकर बीमारी और मानसिक रोगों का शिकार होने लगा है. बीमारियां कुकुरमुत्ते की तरह बढ़ रही हैं. रातभर जागना और दिन में सोना प्रकृति के नियमों के विरुद्ध है. जब-जब भी हम प्रकृति के नियमों का उल्लंघन करेंगे तब-तब तबाही के कगार पर आ जाएंगे.

    रातभर जागने के नुकसान

    आखिर क्यों रात को जागने से शुगर , उच्च रक्तचाप, किडनी फैलोर, कम उम्र में हार्ट अटैक , डिप्रेशन , सिरदर्द , बुद्धि का कमजोर होना , याद न रहना , और बुढ़ापा तथा हिजडापन जैसी बीमारियां आ रही हैं. नींद शरीर का एक ऑटोमैटिक सेंसर है, जो अपान प्राण के द्वारा संचालित है. पांचों प्राणों का संबंध शरीर की ऊर्जा शक्ति के साथ होता है. नींद का संबंध शरीर की ऊर्जा शक्ति के साथ साथ 72,72 ,10,202 नस-नाड़ियों के साथ होता है. जब शरीर में ऊर्जा की कमी होनी शुरू हो जाती है तो अपान प्राण नींद को संकेत कर देता है कि शरीर से काम लेना बंद कर दें और ऊर्जा की खपत को बंद कर दें क्योंकि शरीर थक चुका है. अन्यथा शरीर के अंगों पर दुष्प्रभाव पड़ेगा. प्राण सूर्य की किरणों से संचालित होते हैं. प्राण दिन में सूर्य से ऊर्जा एकत्रित कर लेते हैं.

    क्यों होती हैं बीमारियां?

    प्राण शरीर को इन्वर्टर की तरह चार्ज कर देते हैं. रात को प्राणों को ऊर्जा की सप्लाई नहीं हो पाती है, फिर भी रात भर जागने से शरीर तो काम करता है और ऊर्जा की खपत भी करता है. ऐसी स्थिति में समान प्राण शरीर को ऊर्जा की पूर्ति के लिए शरीर के चलायमान अंगो से ( लीवर, किडनी, फेफड़े, आंते, हृदय, मस्तिष्क , पेनक्रिया तथा पेट ) से ऊर्जा लेना शुरू कर देता है. शरीर में ऊर्जा की सप्लाई का काम समान प्राण के पास होता है. जब पूरी रात जागते हैं तो 1 हफ्ते में शरीर के ये अंग बहुत कमजोर हो जाते हैं और इन अंगो की ऊर्जा शक्ति समाप्त हो जाती है, जिसके कारण उपर लिखी हुई बीमारियां पैदा हो जाती हैं. जब ये शरीर के अंग कमजोर हो जाते हैं तो फिर समान प्राण शरीर के बाहरी हिस्से से ऊर्जा लेना शुरू कर देता है, जिसके कारण मनुष्य पहले अन्दर के अंगों से कमजोर होता है उसके बाद शरीर के बाहरी हिस्से से अंगो ( हिप्स , जांघे , हाथ , गाल , गर्दन ) से कमजोर होकर दुबला होना शुरू हो जाता है.

    रात को जागना क्यों हैं घातक?

    ज्यादा काम करने वाले लोगों को ज्यादा नींद आती है, क्योंकि शरीर में ऊर्जा की खपत ज्यादा हो जाती है और शरीर थक जाता है. शरीर में दुबारा ऊर्जा की आपूर्ति के लिए नींद शरीर को निष्क्रिय अवस्था में कर देती है या हम यह कह सकते हैं कि (Non Working Mode) पर डाल देती है, जिसके कारण शरीर अचेतन अवस्था में चला जाता है और सो जाता है . इसलिए नींद शरीर का एक ऑटोमैटिक ऊर्जा मापक यंत्र है, जो आपको समय-समय पर संकेत देता है कि अब आप सो जाओ अन्यथा अंग बीमार हो जाएंगे. अगर आप नींद की नहीं मानोगे तो वह आपके शरीर के अंगो को नुकसान (damage) कर देगी,  इसलिए रात को जागने वाले और दिन को सोने वाले लोग की उम्र आधी रह जाती है और लंबी बीमारी के कारण अचानक जल्दी म्रत्यु को प्राप्त हो जाते हैं. इसलिए स्वस्थ रहने के लिए मनुष्य को रात को पूरी नींद करनी चाहिए. गहरी नींद लेने का समय 10 से 4 बजे तक ही होता है.

  • गिरनार की सीढ़ियों पर बच्चे पर शेर का हमला, परिवार के सामने ले गया; घटना के बाद तीर्थयात्रा रोकी गई

    गिरनार की सीढ़ियों पर बच्चे पर शेर का हमला, परिवार के सामने ले गया; घटना के बाद तीर्थयात्रा रोकी गई

    गिरनार की सीढ़ियों पर बच्चे पर शेर का हमला, परिवार के सामने ले गया; घटना के बाद तीर्थयात्रा रोकी गई

    Gujarat News: गुजरात के गिरनार हिल्स से एक खौफनाक मामला सामने आया है. यहां रविवार तड़के अपने परिवार के साथ इस पहाड़ी पर चढ़ाई कर रहे एक 11 साल के लड़के को एक शेर ने घसीटकर मार डाला. इस घटना के बाद अधिकारियों ने तीर्थयात्रा को स्थगित कर दिया और तलाशी अभियान शुरू किया गया.

    घटना सुबह लगभग 5 बजकर 45 मिनट की बताई जा रही है. यहां खेड़ा जिले के मोदज गांव का यह परिवार पहाड़ी पर चढ़ रहा था, तभी सैकड़ों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में शेर ने अचानक उस पर हमला कर दिया.

    बच्चे को घसीटकर ले गया शेर

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शेर बच्चे को घसीटकर पास के जंगल में ले गया. बाद में शव के अवशेष घटनास्थल से लगभग 100 मीटर दूर मिले. अवशेषों को फॉरेंसिक इन्वेस्टिगेशन के लिए भेज दिया गया है. वन विभाग ने तुरंत श्रद्धालुओं को गिरनार की सीढ़ियों का इस्तेमाल करने से रोक दिया और ट्रैकर्स, फॉरेस्ट गार्ड्स और वेटर्निटी टीमों के साथ एक सर्च ऑपरेशन शुरू किया.

    शेरों को पकड़ा

    अधिकारियों ने लगभग 4 घंटों के अंदर शेर को पकड़ लिया. माना जा रहा था कि वही शेर हमले के लिए जिम्मेदार था. एहतियात के तौर पर इलाके में देखे गए 2 अन्य शेरों को भी पकड़ लिया गया और जांच के लिए सक्करबाग चिड़ियाघर भेज दिया गया. वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, हमले को अंजाम देने वाली संदिग्ध शेरनी ने जांच के दौरान उल्टी की और उल्टी में मानव अवशेष पाए गए, जिससे घटना में उसकी शामिल होने का संदेह और पुख्ता हो गया. वहीं, अन्य 2 शेरों की भी जांच की जा रही है.

    तीर्थयात्रा को किया बंद

    घटना को लेकर अधिकारियों ने बताया कि जांच के तहत घटनास्थल से जानवरों के पैरों के निशान, घसीटने के निशान और अन्य सबूत इकट्ठा कर लिए गए हैं. गिरनार तीर्थयात्रा मार्ग को अगली सूचना तक लोगों के लिए अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है. इस घटना से लोग सहमे हुए हैं.

  • पाकिस्तान में कजिन मैरिज पर नई रिसर्च ने चौंकाया, वैज्ञानिकों को मिले हजारों ‘स्विच ऑफ’ जीन

    पाकिस्तान में कजिन मैरिज पर नई रिसर्च ने चौंकाया, वैज्ञानिकों को मिले हजारों ‘स्विच ऑफ’ जीन

    पाकिस्तान में कजिन मैरिज पर नई रिसर्च ने चौंकाया, वैज्ञानिकों को मिले हजारों ‘स्विच ऑफ’ जीन

    क्या परिवार के भीतर होने वाली शादियां आने वाली पीढ़ियों की सेहत को प्रभावित कर सकती हैं? यह सवाल लंबे समय से वैज्ञानिकों के बीच चर्चा का विषय रहा है। अब एक नई रिसर्च ने इस बहस को फिर से सुर्खियों में ला दिया है।

    वैज्ञानिकों के अनुसार, करीबी रिश्तेदारों के बीच विवाह (कजिन मैरिज) से कुछ आनुवंशिक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसी विषय पर किए गए एक बड़े अध्ययन में पाकिस्तान के जीनोमिक डेटा से कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं।

    आखिर क्या है ‘ह्यूमन नॉकआउट’?

    शोधकर्ताओं के मुताबिक, अध्ययन के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे मामले मिले जिन्हें ह्यूमन नॉकआउट कहा जाता है। इसका मतलब है कि किसी व्यक्ति के शरीर में एक या अधिक जीन पूरी तरह काम करना बंद कर देते हैं या उनकी कार्यशील प्रतियां मौजूद नहीं रहतीं।

    हर व्यक्ति को हर जीन की दो प्रतियां मिलती हैं—एक मां से और दूसरी पिता से। यदि दोनों प्रतियों में एक जैसा हानिकारक बदलाव (म्यूटेशन) मौजूद हो, तो संबंधित जीन का सामान्य कार्य प्रभावित हो सकता है।

    कजिन मैरिज से क्यों बढ़ सकता है जोखिम?

    विशेषज्ञों के अनुसार, करीबी रिश्तेदारों में कुछ आनुवंशिक बदलाव समान होने की संभावना सामान्य आबादी की तुलना में अधिक होती है। ऐसे में यदि दोनों माता-पिता से बच्चे को एक ही परिवर्तित जीन मिलता है, तो कुछ दुर्लभ आनुवंशिक विकारों का जोखिम बढ़ सकता है। हालांकि इसका यह अर्थ नहीं है कि हर कजिन मैरिज से जन्म लेने वाले बच्चे में कोई बीमारी अवश्य होगी, बल्कि जोखिम सांख्यिकीय रूप से अधिक हो सकता है।

    रिसर्च में क्या सामने आया?

    नेचर जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, दक्षिण एशिया के 1,73,303 जीनोम का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि अध्ययन में शामिल पाकिस्तान जीनोम संसाधन के प्रतिभागियों में हर पांच में से लगभग एक व्यक्ति में कम से कम एक ऐसा जीन था, जो सामान्य रूप से कार्य नहीं कर रहा था। अध्ययन में करीब 6,500 जीन ऐसे मिले, जिनमें कार्यक्षमता प्रभावित होने के संकेत मिले।

    वैज्ञानिकों का मानना है कि इन निष्कर्षों से यह समझने में मदद मिलेगी कि अलग-अलग जीन शरीर में क्या भूमिका निभाते हैं और उनके निष्क्रिय होने से स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।

    दवाओं के विकास में मिल सकती है मदद

    शोधकर्ताओं का कहना है कि पहले ऐसे कई अध्ययन मुख्य रूप से चूहों पर किए जाते थे। लेकिन इंसानों और चूहों की आनुवंशिक संरचना में महत्वपूर्ण अंतर होने के कारण कई बार पशुओं पर सफल दवाएं इंसानों में अपेक्षित परिणाम नहीं दे पातीं।

    मानव जीनोम पर आधारित इस तरह के अध्ययन भविष्य में नई दवाओं के विकास, दुर्लभ आनुवंशिक बीमारियों की पहचान और बेहतर इलाज की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की रिसर्च से व्यक्तिगत चिकित्सा (Personalized Medicine) और जीन आधारित उपचार को भी नई दिशा मिल सकती है।

  • दक्षिण भारत के इन मंदिरों का अनोखा चमत्कार! कहीं मूर्ति की धड़कन महसूस होती है, तो कहीं आता है पसीना

    दक्षिण भारत के इन मंदिरों का अनोखा चमत्कार! कहीं मूर्ति की धड़कन महसूस होती है, तो कहीं आता है पसीना

    दक्षिण भारत के इन मंदिरों का अनोखा चमत्कार! कहीं मूर्ति की धड़कन महसूस होती है, तो कहीं आता है पसीना

    दक्षिण भारत के मंदिर सिर्फ पूजा पाठ की जगह नहीं हैं, ये पुराने जमाने की साइंस और कला का ऐसा बेजोड़ नमूना हैं जिसे देखकर आज के इंजीनियर्स का भी सिर चकरा जाता है. हमने मंदिरों के कई तरह के चमत्कारों के बारे में सुना है, लेकिन साउथ में तीन मंदिर ऐसे हैं जहां की मूर्तियां बिल्कुल किसी जीते जागते इंसान की तरह बर्ताव करती हैं.

    कहीं भगवान के सीने में धड़कन महसूस होती है, तो कहीं उन्हें हम इंसानों की तरह पसीना आता है. इन मंदिरों की कहानियां इतनी अनोखी हैं कि इन पर यकीन करना किसी के लिए भी मुश्किल हो जाता है.

    आइए आज आपको दक्षिण भारत के इन्हीं तीन सबसे अनोखे और रहस्यमयी मंदिरों की सैर पर ले चलते हैं, जहां का सच विज्ञान की समझ से भी कोसों दूर है.

    चिदंबरम नटराज मंदिर का महा रहस्य

    तमिलनाडु में स्थित चिदंबरम नटराज मंदिर भगवान शिव के सबसे खास धामों में से एक माना जाता है. यहां भगवान शिव की नटराज रूप में बेहद खूबसूरत मूर्ति स्थापित है.

    इस मंदिर को लेकर वैज्ञानिकों और रिसर्च करने वालों के बीच हमेशा से एक बड़ी बहस चलती आई है. दावा किया जाता है कि इस मंदिर की मुख्य मूर्ति के ठीक दिल वाली जगह पर अगर बहुत ध्यान से महसूस किया जाए, तो वहां लगातार एक धड़कन की आवाज सुनाई देती है.

    ये धड़कन बिल्कुल वैसी ही होती है जैसी किसी जीवित इंसान के सीने से आती है. यहां तक कि कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यह मंदिर पृथ्वी के चुंबकीय केंद्र पर बना हुआ है, जिसकी वजह से यहां एक बेहद शक्तिशाली ऊर्जा का अहसास होता है.

    इस रहस्य को समझने के लिए कई लोगों ने कोशिश की, लेकिन आज तक कोई भी इसके पीछे की असली वजह का पता नहीं लगा पाया है.

    थिरुमालीरुंचोलई मंदिर का सच

    अब बात करते हैं तमिलनाडु के ही तिरुनेलवेली में बने थिरुमालीरुंचोलई मंदिर की. यह पावन धाम भगवान विष्णु को समर्पित है और यहां का नजारा गर्मियों के दिनों में हर किसी को हैरान कर देता है.

    जब बाहर कड़ाके की धूप होती है और गर्मी का पारा चढ़ने लगता है, तो मंदिर के गर्भगृह में मौजूद भगवान विष्णु की पत्थर की मूर्ति को साक्षात पसीना आने लगता है.

    मूर्ति के चेहरे और शरीर पर पानी की छोटी छोटी बूंदें साफ दिखाई देने लगती हैं, बिल्कुल वैसे ही जैसे किसी आम इंसान को उमस भरे मौसम में पसीना आता है. इस अनोखी घटना को देखने के लिए दूर दूर से लोग आते हैं.

    मंदिर के पुजारी हर दिन सूती कपड़े से भगवान के इस पसीने को बहुत आदर के साथ पोंछते हैं. विज्ञान के पास इस बात का कोई जवाब नहीं है कि एक बंद और ठंडे गर्भगृह में रखे ठोस पत्थर से पानी की बूंदें इस तरह कैसे बाहर निकल सकती हैं.

    पेरूर पट्टेश्वरर मंदिर का अजूबा

    कोयंबटूर के पास स्थित पेरूर पट्टेश्वरर मंदिर अपने आप में प्राचीन कला का एक अद्भुत केंद्र है. लेकिन यहां की सबसे बड़ी चर्चा एक खास मूर्ति को लेकर होती है. इस मंदिर के परिसर में बनी एक मूर्ति की मूंछें समय के साथ अपने आप बड़ी होती जाती हैं.

    स्थानीय लोगों और मंदिर के पुराने पुजारियों का कहना है कि इस मूर्ति की मूंछों के बाल प्राकृतिक रूप से बढ़ते हैं, जिसके कारण एक निश्चित समय के बाद उन्हें हल्का सा तराशा या ठीक किया जाता है.

    निर्जीव पत्थर पर बालों का इस तरह से उगना और उनका बढ़ना किसी के भी रोंगटे खड़े करने के लिए काफी है. कई लोगों ने इसे महज़ एक वहम माना, लेकिन सालों से इस बदलाव को करीब से देखने वाले भक्त इसे भगवान का साक्षात चमत्कार ही मानते हैं.

    आस्था और विज्ञान की इस अनोखी जंग में जीत हमेशा श्रद्धा की ही होती है

    इन तीनों मंदिरों की अद्भुत घटनाएं यह सोचने पर मजबूर कर देती हैं कि क्या वाकई इन प्राचीन मूर्तियों में कोई दिव्य जीवन वास करता है. विज्ञान जहां इसे पत्थरों की खास बनावट, वातावरण की नमी या किसी खास रासायनिक प्रतिक्रिया का नाम देकर टालने की कोशिश करता है, वहीं भक्तों के लिए यह उनके आराध्य का साक्षात रूप है.

    हमारे पूर्वजों ने इन मंदिरों को किस तकनीक और सोच के साथ बनाया था, यह रहस्य आज भी उन ऐतिहासिक दीवारों के भीतर ही दफन है. लेकिन एक बात तो बिल्कुल साफ है भाई, इन मंदिरों में कदम रखते ही जो असीम शांति और चमत्कारों का अहसास होता है, उसे शब्दों में बयां कर पाना नामुमकिन है.

    यही वजह है कि सदियों बाद आज भी इन पवित्र जगहों के प्रति लोगों की आस्था रत्ती भर भी कम नहीं हुई है.

  • बौद्ध साधुओं को जाल में फंसाकर करोड़ों की उगाही! 80 हजार वीडियो ने खोला ‘मिस गोल्फ’ का चौंकाने वाला राज

    बौद्ध साधुओं को जाल में फंसाकर करोड़ों की उगाही! 80 हजार वीडियो ने खोला ‘मिस गोल्फ’ का चौंकाने वाला राज

    बौद्ध साधुओं को जाल में फंसाकर करोड़ों की उगाही! 80 हजार वीडियो ने खोला ‘मिस गोल्फ’ का चौंकाने वाला राज

    थाईलैंड में सब कुछ सामान्य चल रहा था, लेकिन अचानक एक प्रतिष्ठित बौद्ध भिक्षु ने बिना किसी स्पष्ट कारण के अपना संन्यास छोड़ दिया। यह फैसला धार्मिक समुदाय के लिए बेहद असामान्य था। सवाल उठने लगे कि आखिर ऐसा क्या हुआ, जिसने वर्षों से तप और अनुशासन का जीवन जी रहे एक भिक्षु को यह कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।

    जब पुलिस ने मामले की जांच शुरू की, तो धीरे-धीरे एक ऐसी कहानी सामने आई जिसने पूरे देश को हैरान कर दिया।

    जांच में पता चला कि एक महिला, जिसे स्थानीय मीडिया ने ‘मिस गोल्फ’ नाम दिया, कथित तौर पर कई बौद्ध भिक्षुओं के संपर्क में आई। आरोप है कि पहले वह उनसे करीबी संबंध बनाती, फिर निजी तस्वीरों और वीडियो के जरिए उन्हें ब्लैकमेल कर बड़ी रकम की मांग करती थी।

    मामला तब और गंभीर हो गया जब पुलिस को पता चला कि एक भिक्षु से कथित तौर पर यह कहकर करोड़ों रुपये मांगे गए कि महिला उसके बच्चे की मां बनने वाली है। इसी सुराग ने जांच को नई दिशा दी।

    इसके बाद जब पुलिस ने महिला के ठिकाने पर छापेमारी की, तो वहां से जो मिला उसने अधिकारियों को भी चौंका दिया। जांच एजेंसियों के अनुसार, डिजिटल उपकरणों और क्लाउड स्टोरेज से 80 हजार से अधिक फोटो और वीडियो बरामद किए गए। आरोप है कि इनका इस्तेमाल कथित तौर पर अलग-अलग लोगों को ब्लैकमेल करने के लिए किया जाता था।

    जांच के दौरान पुलिस के सामने कम से कम नौ बौद्ध भिक्षुओं के नाम आए। हालांकि अधिकारियों का मानना है कि इस मामले में शामिल लोगों की संख्या इससे अधिक भी हो सकती है। शुरुआती जांच के मुताबिक, पिछले तीन वर्षों में इस कथित नेटवर्क के जरिए 385 मिलियन थाई बात (भारतीय मुद्रा में 100 करोड़ रुपये से अधिक) का लेन-देन हुआ।

    यह मामला केवल कथित ब्लैकमेलिंग तक सीमित नहीं रहा। थाईलैंड में, जहां अधिकांश आबादी बौद्ध धर्म का पालन करती है, इस घटना ने धार्मिक संस्थाओं की पारदर्शिता और अनुशासन पर भी नई बहस छेड़ दी है।

    फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों, वित्तीय रिकॉर्ड और संबंधित लोगों के बयानों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में किसी भी व्यक्ति की संलिप्तता साबित होती है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

  • लग्जरी कार चोरी का मास्टरमाइंड निकला MBA ग्रेजुएट, 100 से ज्यादा गाड़ियां की थीं गायब..

    लग्जरी कार चोरी का मास्टरमाइंड निकला MBA ग्रेजुएट, 100 से ज्यादा गाड़ियां की थीं गायब..

    लग्जरी कार चोरी का मास्टरमाइंड निकला MBA ग्रेजुएट, 100 से ज्यादा गाड़ियां की थीं गायब..

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    Luxury Cars Thief Arrested: 20 साल तक पुलिस की पकड़ से दूर रहने वाला एक हाई-टेक कार चोर आखिरकार गिरफ्तार हो गया. वो सिर्फ चोर नहीं था, एक मास्टरमाइंड था, एमबीए डिग्रीधारी, आर्मी अफसर का बेटा, और देश के कई राज्यों में कार चोरियों का बेताज बादशाह. राजस्थान के सतेंद्र सिंह शेखावत ने इतने सुनियोजित तरीके से कारें चुराईं कि पुलिस को सालों तक उसके बारे में भनक तक नहीं लगी. लेकिन कहते हैं न हर जुर्म का एक दिन हिसाब होता है. और सतेंद्र का हिसाब चेन्नई के अन्ना नगर में हुई एक चोरी से शुरू हुआ.

    कैसे टूटा सतेंद्र का ‘स्मार्ट’ खेल? मामला मामूली लग सकता था, चेन्नई के एथिराज रथिनम ने अपनी महंगी लग्जरी कार घर के बाहर पार्क की, सुबह उठे तो कार गायब. लेकिन सीसीटीवी फुटेज ने एक नई कहानी शुरू की. एक प्रोफेशनल की तरह कार को कुछ ही मिनटों में लॉक तोड़ते, मॉडर्न टूल्स का इस्तेमाल करते एक व्यक्ति की तस्वीरें सामने आईं. पुलिस को अंदेशा हुआ कि यह कोई आम चोर नहीं है.

    पुडुचेरी में पकड़ा गया ‘कार सिंडिकेट’ का किंगपिन

    सीसीटीवी, मोबाइल ट्रेसिंग और पुराने रिकॉर्ड खंगालने के बाद पुलिस को सुराग मिला कि संदिग्ध पुडुचेरी में छिपा है. छापेमारी में सतेंद्र शेखावत गिरफ्तार हुआ और तभी सामने आई एक ऐसी कहानी जिसने पुलिस को भी हैरान कर दिया. वो 100 से ज्यादा लग्जरी कारें चुरा चुका था. तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और पुडुचेरी जैसे राज्यों में उसकी ‘एक्टिव फाइल्स’ थीं। वो चुराई गई कारें राजस्थान और नेपाल में बेचता था.

    एमबीए डिग्री, आर्मी परिवार

    जांच में खुलासा हुआ कि सतेंद्र एमबीए पास आउट है और एक प्रतिष्ठित परिवार से आता है. उसके पिता रिटायर्ड आर्मी अफसर हैं. लेकिन सतेंद्र ने अपनी पढ़ाई और संसाधनों का इस्तेमाल ग़लत दिशा में किया, और हाई-प्रोफाइल ऑटो चोर बन गया.

    पुलिस थाने में उमड़ी भीड़

    गिरफ्तारी की खबर फैलते ही तिरुमंगलम पुलिस स्टेशन में हड़कंप मच गया. 10 से ज़्यादा लोग, जिनकी कारें पहले चोरी हो चुकी थीं, अपनी उम्मीद लेकर पुलिस स्टेशन पहुंच गए, शायद उनकी गाड़ी भी इसी चोर के हाथों गई हो.

    अब सलाखों के पीछे सतेंद्र

    चेन्नई पुलिस ने सतेंद्र को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया है. अब पुलिस उसके नेटवर्क की जांच में जुटी है कि कौन-कौन उसके खरीदार  थे? कहां से आते थे चोरी के टूल्स? और क्या यह अकेले की करतूत थी या किसी बड़े सिंडिकेट का हिस्सा?

    हाईटेक अपराध का भी होता है क्लासिक अंजाम

    सतेंद्र भले ही मॉडर्न तकनीक का इस्तेमाल कर पुलिस को चकमा देता रहा, लेकिन एक सीसीटीवी कैमरे की नजर ने उसका खेल बिगाड़ दिया. हर अपराधी के लिए वक्त आता है जब कानून का हाथ उसके कंधे पर होता है और सतेंद्र का वो वक्त अब आ चुका है.

  • इतिहास का खौफनाक किलर! सिर्फ रुमाल के सहारे 900 लोगों की हत्या, जानिए कौन था वह?

    इतिहास का खौफनाक किलर! सिर्फ रुमाल के सहारे 900 लोगों की हत्या, जानिए कौन था वह?

    इतिहास का खौफनाक किलर! सिर्फ रुमाल के सहारे 900 लोगों की हत्या, जानिए कौन था वह?

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    World Most Dangerous Serial Killer: भारत का इतिहास सिर्फ महान सम्राटों और संतों का ही नहीं रहा है, बल्कि यहां कुछ ऐसे कुख्यात अपराधी भी हुए हैं जिनकी दास्तानें आज भी रूह कंपा देती हैं. 18वीं और 19वीं सदी के बीच एक ऐसा ही नाम सामने आया था जिसने मौत को ही अपना पेशा बना लिया था. उस सीरियल किलर का नाम ठग बेहराम था. ये नाम सुनते ही अंग्रेज अफसरों तक की रूह कांप उठती थी. रुमाल बना था हत्या का औजार ठग बेहराम की पहचान उसके खास तरीके से की जाती थी. वह किसी बंदूक या तलवार का इस्तेमाल नहीं करता था, बल्कि एक साधारण दिखने वाले रुमाल से अपने शिकार की जान ले लेता था. कहा जाता है कि उसने अपने इसी रुमाल से करीब 931 लोगों की गला घोंटकर हत्या की थी. बेहराम का यह तरीका इतना सफाई से किया जाता था कि शवों तक का पता नहीं चलता था. गिरोह के साथ बदलता था वेश बेहराम अकेला नहीं था. उसके साथ एक संगठित गिरोह था जिसमें करीब 200 से ज्यादा ठग शामिल थे. ये लोग व्यापारियों, तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के साथ हमसफर बन कर यात्रा करते थे. फिर जैसे ही मौका मिलता, सभी मिलकर शिकार पर टूट पड़ते और उसे मौत के घाट उतार कर सारा माल लूट लेते. लोगों में फैला ऐसा खौफ कि रास्ते सुनसान हो गए उस दौर में दिल्ली से लेकर ग्वालियर और जबलपुर तक के व्यापारी और यात्री रास्तों से गुजरने से कतराने लगे थे. कई बार पूरे काफिले गायब हो जाते थे और उनकी लाशें तक नहीं मिलती थीं. यह रहस्य बना ही रहता अगर कैप्टन विलियम स्लीमैन नाम के एक अंग्रेज अफसर ने इसकी जांच न की होती. 10 साल की मेहनत के बाद हुआ पर्दाफाश साल 1809 में कैप्टन स्लीमैन को इस मामले की तहकीकात की जिम्मेदारी सौंपी गई. वर्षों की खोजबीन के बाद उन्होंने यह पता लगाया कि यह सब ठग बेहराम और उसके गिरोह का काम था. उन्होंने कई सदस्यों को गिरफ्तार किया और आखिरकार ठग बेहराम को भी पकड़ा गया. उस वक्त उसकी उम्र करीब 75 साल थी. कई हत्याओं का दोषी ठहराए जाने के बाद वर्ष 1840 में ठग बेहराम को फांसी दे दी गई. उसका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दुनिया के सबसे खतरनाक सीरियल किलर के रूप में दर्ज किया गया.

  • पत्नी पर गंभीर आरोप: अश्लील वीडियो भेजने और सहेलियों से शारीरिक संबंध बनाने का दबाव, पति पहुंचा पुलिस के पास..

    पत्नी पर गंभीर आरोप: अश्लील वीडियो भेजने और सहेलियों से शारीरिक संबंध बनाने का दबाव, पति पहुंचा पुलिस के पास..

    पत्नी पर गंभीर आरोप: अश्लील वीडियो भेजने और सहेलियों से शारीरिक संबंध बनाने का दबाव, पति पहुंचा पुलिस के पास..

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    कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से पति-पत्नी के विवाद का एक अलग मामला सामने आया है। यहां एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी पर मानसिक और यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    शारीरिक संबंध बनाने के लिए दबाव डालने का आरोप

    पति का आरोप है कि उसकी पत्नी उस पर बार-बार शारीरिक संबंध बनाने का दबाव डालती थी। शिकायत में यह भी कहा गया है कि पत्नी कथित तौर पर उससे अपनी कुछ सहेलियों के साथ भी संबंध बनाने की मांग करती थी। पति का कहना है कि वह इन बातों से असहज था और कई बार मना करने के बावजूद उस पर लगातार दबाव बनाया जाता रहा।

    अश्लील वीडियो भेजने का भी लगाया आरोप

    शिकायत के अनुसार, पत्नी कथित तौर पर उसे अश्लील वीडियो भेजती थी और उसी तरह का व्यवहार अपनाने के लिए कहती थी। पति ने आरोप लगाया कि इन घटनाओं के कारण वह लंबे समय से मानसिक तनाव का सामना कर रहा था।

    पुराने रिश्तों का जिक्र कर परेशान करने का दावा

    पति का यह भी आरोप है कि पत्नी अक्सर अपने पुराने रिश्तों का जिक्र करती थी, जिससे उसे मानसिक रूप से परेशान होना पड़ता था। उसका कहना है कि जब भी वह पत्नी की मांगों का विरोध करता, तो उस पर और अधिक दबाव बनाया जाता था।

    गहनों को लेकर भी विवाद

    शिकायत में पति ने यह भी आरोप लगाया है कि उसने पत्नी को जो गहने दिए थे, उन्हें वापस करने से इनकार किया जा रहा है। उसका कहना है कि इस मुद्दे को लेकर भी दोनों के बीच लगातार विवाद चल रहा है।

    पुलिस कर रही मामले की जांच

    पीड़ित की शिकायत पर अमृतहल्ली थाना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे। जांच के दौरान सामने आने वाले साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • 324 सिम कार्ड के सहारे चल रहा था साइबर ठगी का खेल, STF ने किया बड़ा खुलासा…

    324 सिम कार्ड के सहारे चल रहा था साइबर ठगी का खेल, STF ने किया बड़ा खुलासा…

    324 सिम कार्ड के सहारे चल रहा था साइबर ठगी का खेल, STF ने किया बड़ा खुलासा…

    Lakhimpur Kheri : उत्तर प्रदेश एसटीएफ की टीम ने लखीमपुर खीरी में बड़ी कार्रवाई करते हुए साइबर ठगी और ऑनलाइन गेमिंग के जरिए लोगों को ठगने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। टीम ने आवास विकास कॉलोनी स्थित किराए के मकान पर छापा मारकर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। मौके से 324 सिम कार्ड, 8 मोबाइल फोन, 6 एटीएम कार्ड, फिंगरप्रिंट स्कैनर मशीन, आधार और पैन कार्ड, फोनपे आईडी कार्ड, दो दोपहिया वाहन तथा 58 हजार रुपये नकद बरामद किए गए। मामले में फरार एक अन्य आरोपी दीपक की तलाश की जा रही है।

    एसटीएफ की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में निघासन क्षेत्र के रायपुर निवासी नीरज वर्मा, शारदा नगर क्षेत्र के बेलवा निवासी आदेश वर्मा, सीतापुर जिले के लहरपुर थाना क्षेत्र के रमपुरवा निवासी अभिषेक वर्मा तथा पढ़ुआ थाना क्षेत्र के बुचवा निवासी रविदीप कुमार शामिल हैं। वहीं, गिरोह का एक अन्य सदस्य दीपक निवासी लखनऊ फरार हो गया।

    मुखबिर की सूचना पर हुई कार्रवाई

    एसटीएफ के उपनिरीक्षक पवन कुमार सिंह अपनी टीम के साथ साइबर अपराध की रोकथाम और सुरागरसी में निकले थे। इसी दौरान मुखबिर ने सूचना दी कि आवास विकास कॉलोनी में किराए के मकान में कुछ लोग साइबर ठगी का नेटवर्क संचालित कर रहे हैं। सूचना पर टीम ने मौके पर पहुंचकर दूसरी मंजिल पर बने कमरे में छापा मारा, जहां चार लोग मोबाइल फोन और अन्य उपकरणों के साथ मिले। पुलिस को देखते ही सभी घबरा गए, जिसके बाद उन्हें मौके पर ही पकड़ लिया गया।

    भोले-भाले लोगों के नाम पर बनाते थे सिम और यूपीआई

    पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे गरीब और भोले-भाले लोगों को सरकारी योजनाओं या अधिक लाभ का लालच देकर उनके नाम पर सिम कार्ड एक्टिवेट कराते थे। इसके बाद उन सिमों को एनएसडीएल खाते से लिंक कर यूपीआई आईडी तैयार की जाती थी। इन्हीं यूपीआई और सिम का इस्तेमाल ऑनलाइन गेमिंग, सट्टेबाजी और साइबर ठगी से आने वाले रुपये के लेनदेन के लिए किया जाता था।

    आरोपियों ने बताया कि इस तरीके से वे अपने नाम और मोबाइल नंबर का उपयोग नहीं करते थे, जिससे किसी राज्य की पुलिस जांच भी वास्तविक अपराधियों तक आसानी से नहीं पहुंच पाती थी। साइबर ठगी से मिलने वाली रकम को सभी सदस्य आपस में बांट लेते थे।

    मकान मालिक भी गिरोह में शामिल

    पूछताछ में निघासन निवासी नीरज वर्मा ने स्वीकार किया कि उसने अपना मकान गिरोह के सदस्यों को किराए पर दिया था। इसके बदले वह किराया लेने के साथ ऑनलाइन गेमिंग से होने वाली कमाई में भी हिस्सा लेता था। उसे गेमिंग के नाम पर हर महीने नौ हजार रुपये भी मिलते थे।

    324 सिम और कई दस्तावेज बरामद

    एसटीएफ के अनुसार, आरोपियों के कब्जे से कुल 324 सिम कार्ड बरामद हुए, जिनमें सक्रिय और निष्क्रिय दोनों प्रकार के सिम शामिल हैं। इसके अलावा 8 मोबाइल फोन, 6 एटीएम कार्ड, एक मार्को फिंगर मशीन, दो आधार कार्ड, एक पैन कार्ड, एक फोनपे आईडी कार्ड, दो दोपहिया वाहन और 58 हजार रुपये नकद भी बरामद किए गए। बरामद सामान को सील कर कब्जे में ले लिया गया है।

    वाहनों के दस्तावेज नहीं मिले

    गिरफ्तार आरोपियों ने बताया कि साइबर अपराध के संचालन में दो मोटरसाइकिलों का भी उपयोग किया जाता था। दोनों वाहनों के दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें सीज कर मोटर वाहन अधिनियम के तहत कार्रवाई की।

    इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा

    एसटीएफ की तहरीर पर आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और आईटी एक्ट की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस फरार आरोपी दीपक की तलाश में जुटी है। साथ ही बरामद मोबाइल, सिम कार्ड और बैंकिंग दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच कर साइबर ठगी के नेटवर्क की कड़ियां खंगाली जा रही हैं।

  • ब्रह्मपुत्र पर चीन बना रहा दुनिया की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना, विशेषज्ञों ने जताई कई गंभीर चिंताएं..

    ब्रह्मपुत्र पर चीन बना रहा दुनिया की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना, विशेषज्ञों ने जताई कई गंभीर चिंताएं..

    ब्रह्मपुत्र पर चीन बना रहा दुनिया की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना, विशेषज्ञों ने जताई कई गंभीर चिंताएं..

    चीन ब्रह्मपुत्र नदी (यारलुंग त्सांगपो) पर दुनिया की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं में से एक का निर्माण कर रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, इसकी बिजली उत्पादन क्षमता चीन के प्रसिद्ध थ्री गॉर्जेस डैम से भी लगभग तीन गुना अधिक हो सकती है। परियोजना के पूरी तरह तैयार होने के बाद हर वर्ष करीब 300 बिलियन किलोवॉट-घंटे बिजली उत्पादन का अनुमान लगाया जा रहा है। हालांकि, इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर वैज्ञानिकों और पर्यावरण विशेषज्ञों ने कई गंभीर आशंकाएं जताई हैं।

    भूकंप का खतरा बढ़ने की आशंका

    विशेषज्ञों का कहना है कि इतने बड़े जलाशय में भारी मात्रा में पानी जमा होने से पहाड़ी क्षेत्र की भूगर्भीय परतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। इससे ‘रिजर्वॉयर इंड्यूस्ड सिस्मिकिटी’ (Reservoir Induced Seismicity) यानी जलाशय के कारण भूकंपीय गतिविधियां बढ़ने का जोखिम पैदा हो सकता है। यदि किसी प्राकृतिक आपदा या भूकंप से बांध को नुकसान पहुंचता है, तो इसके गंभीर और दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।

    भारत और बांग्लादेश पर भी पड़ सकता है प्रभाव

    ब्रह्मपुत्र नदी भारत और बांग्लादेश के लिए भी जीवनरेखा मानी जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में बड़ी मात्रा में पानी अचानक छोड़ा जाता है, तो अरुणाचल प्रदेश, असम और बांग्लादेश के कई हिस्सों में भीषण बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। वहीं, यदि नदी के प्रवाह को नियंत्रित या मोड़ा जाता है, तो निचले क्षेत्रों में जल संकट, सिंचाई पर असर और कृषि संबंधी चुनौतियां पैदा हो सकती हैं। इसी वजह से इस परियोजना को लेकर पड़ोसी देशों की चिंता लगातार बनी हुई है।

    पर्यावरण और जैव विविधता पर संभावित असर

    पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, इस मेगा परियोजना से ब्रह्मपुत्र नदी की प्राकृतिक पारिस्थितिकी प्रभावित हो सकती है। नदी के साथ बहकर आने वाली प्राकृतिक गाद (सिल्ट) में कमी आने से असम और बांग्लादेश के उपजाऊ मैदानों की उर्वरता पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, नदी में रहने वाली दुर्लभ जलीय प्रजातियों, मछलियों और पूरे हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

    विशेषज्ञों की सलाह

    विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी अंतरराष्ट्रीय नदी पर बनने वाली परियोजनाओं में पारदर्शिता, पर्यावरणीय आकलन और पड़ोसी देशों के साथ समन्वय बेहद महत्वपूर्ण है। उनका कहना है कि संभावित जोखिमों को कम करने के लिए वैज्ञानिक अध्ययन, जल प्रबंधन और आपदा तैयारी पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।