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  • पितृ पक्ष में पूर्वजों का ‘पिंडदान’ करना क्यों होता है जरूरी? जान लीजिए इसकी सही विधि और धार्मिक महत्व’

    पितृ पक्ष में पूर्वजों का ‘पिंडदान’ करना क्यों होता है जरूरी? जान लीजिए इसकी सही विधि और धार्मिक महत्व’

    पितृ पक्ष में पूर्वजों का ‘पिंडदान’ करना क्यों होता है जरूरी? जान लीजिए इसकी सही विधि और धार्मिक महत्व’

    पितृ पक्ष पितरों को समर्पित होता है। पितृ पक्ष में पूर्वजों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने से पितरों की आत्मा को शांति और मोक्ष मिलता है। समयानुसार  पितरों का श्राद्ध करने से कुल में कोई दुःखी नहीं रहता। पितरों की पूजा से मनुष्य आयु, पुत्र, यश, कीर्ति, स्वर्ग, पुष्टि, बल, श्री, सुख-सौभाग्य और धन-धान्य प्राप्त करता है। देवकार्य से भी पितृकार्य का विशेष महत्व है। देवताओं से पहले पितरों को प्रसन्न करना अधिक कल्याणकारी माना जाता है।

    बता दें कि हर पीढ़ी के भीतर मातृकुल और पितृकुल दोनों की पहले पीढ़ियों के गुणसूत्र उपस्थित होते हैं। चावल के पिंड जो पिता, दादा, परदादा और पितामह के शरीरों का प्रतीक हैं, उन्हें आपस में मिलाकर फिर अलग बांटते हैं। जिन-जिन लोगों के गुणसूत्र (जीन्स) श्राद्ध करने वाले की देह में हैं, उन सबकी तृप्ति के लिएयह अनुष्ठान किया जाता है।

    पिंडदान की विधि

    पिंडदान दाहिने हाथ में लेकर करना चाहिए और मंत्र के साथ पितृतीर्थ मुद्रा से दक्षिणाभिमुख होकर पिंड किसी थाली या पत्तल में स्थापित करें। पितृतीर्थ मुद्रा में दक्षिण दिशा में मुख करके बायां घुटना मोड़कर बैठा जाता है। इसके बाद 12 पिंड निकाले जाते हैं। ये सभी 12 पिंड अलग-अलग दिवंगत आत्माओं के लिए निकाला जाता है, जिसके बारे में यहां बताया गया है।

    • पहला पिंड- देवताओं के लिए
    • दूसरा पिंड- ऋषियों के लिए
    • तीसरा पिंड- दिव्य मानवों के लिए
    • चौथा पिंड- दिव्य पितरों के लिए
    • पांचवां पिंड- यम के लिए
    • छठा पिंड- मनुष्य-पितरों के नाम
    • सातवां पिंड- मृतात्मा के नाम
    • आठवां पिंड- पुत्रदारा रहितों के नाम
    • नौवां पिंड- उच्छिन्न कुलवंश वालों के नाम
    • दसवां पिंड- गर्भपात से मर जाने वालों के नाम
    • ग्यारहवां और बारहवां पिंड- इस जन्म या अन्य जन्म के बंधुओं के निमित

    इस तरह से बारह पिंड निकाले जाते हैं और उन पर क्रमशः दूध, दही और मधु चढ़ाकर पितरों से तृप्ति की प्रार्थना की जाती है और मंत्र का जप किया जाता है। मंत्र है- ऊं पयः पृथ्वियां पय ओषधीय, पयो दिव्यन्तरिक्षे पयोधाः। पयस्वतीः प्रदिशः सन्तु मह्यम।।  गरुड़ पुराण के हवाले से श्री कृष्ण का वचन उद्घृत है- कुर्वीत समये श्राद्धं कुले कश्चिन्न सीदति। आयुः पुत्रान्यशः स्वर्गं कीर्तिं पुष्टिं बलं श्रियम्।। पशून् सौख्यं धनं धान्यं प्राप्नुयात् पितृपूजनात्। देवकार्यादपि सदा पितृकार्यं विशिष्यते।। देवताभ्यः पितृणां हिपूर्वमाप्यायनं शुभम्।।

    पितृ पक्ष में श्राद्ध का धार्मिक महत्व

    श्राद्ध के दिन पितरों के निमित खीर, पूड़ी, सब्जी और साथ ही उनके पितर की कोई मनपसंद चीज और एक अन्य सब्जी बनाई जाती है। फिर इस भोजन को गोबर से बने उपले या कंडलों की कोर पर रखकर पितरो को भोग लगाया जाता है और सीधे हाथ से कोर के दाहिनी तरफ पानी छोड़ा जाता है। इसे ही पिंडदान कहा जाता है। लेकिन कुछ शास्त्रों के अनुसार श्राद्ध-कर्म में पके हुए चावल, दूध और तिल को मिश्रित करके पिण्ड बनाए जाते हैं और उसे सपिण्डीकरण कहते हैं। यहां पिण्ड का अर्थ है- शरीर। श्राद्ध में पूर्वज़ों के निमित पिंड बनाकर उनसे अपने आने वाले जीवन की शुभेच्छा की प्रार्थना की जाती है। पिण्डदान करने वाले को उसके पूर्वज़ों के आशीर्वाद से संतति, संपत्ति, विद्या और हर प्रकार की सुख-समृद्धि मिलती है।

    श्राद्ध में कौओं के लिए भोजन जरूर निकालें?

    कौवों को पितृ का प्रतीक माना जाता है। श्राद्ध में कौओं को भोजन खिलाने या उनके निमित भोजन निकालने से पितरों को खाना मिलता है, उनकी तृप्ति होती है- ऐसा माना जाता है । इसलिए श्राद्ध में कौओं के नाम का भोजन जरूर निकालना चाहिए। पितृ पक्ष के प्रथम दिन पहला न्योता, दूसरा पूर्वज की मृत्यु की तिथि पर, तीसरा आमंत्रण नवमी तिथि और अंतिम बार पितृ विसर्जन कौओं को आमंत्रित कर भोजन कराने की या उनके निमित भोजन निकालने की परंपरा है।

    (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

  • कब्ज़ से चाहिए राहत: तो डाइट में शामिल करें शकरकंद, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट. ने बताया खान

    कब्ज़ से चाहिए राहत: तो डाइट में शामिल करें शकरकंद, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट. ने बताया खान

    कब्ज़ से चाहिए राहत: तो डाइट में शामिल करें शकरकंद, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट. ने बताया खान

    अगर आपको भी कब्ज की समस्या रहती है तो या अपनी गट हेल्थ को बेहतर बनाना चाहते हैं तो अपनी डाइट में शकरकंद को शामिल करें। नैचुरल और फाइबर से भरपूर शकरकंद डाइट में शामिल करने से पाचन और पेट साफ़ होने में मदद मिलता है। हालाँकि, आप इसे कैसे बनाते और खाते हैं, इसका भी पाचन पर पड़ने वाले फ़ायदे पर असर पड़ सकता है। फ़्लोरिडा के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट और हेल्थ कंटेंट क्रिएटर डॉ. सलहाब, ने शकरकंद बनाने का एक आसान तरीका बताया है जिससे गट हेल्थ बेहतर हो सकती है और कब्ज़ से राहत मिल सकती है।

    शकरकंद कब्ज में क्यों हैं फायदेमंद?

    डॉक्टर जोसेफ़ सलहाब कहते हैं शकरकंद में घुलनशील और अघुलनशील फाइबर भी होते हैं, जो मल को नरम करने, उसे भारी बनाने और पाचन तंत्र को सुचारू रूप से चलाने में मदद करते हैं। और इनमें नैचुरली मैनिटोल होता है, जो एक तरह का शुगर अल्कोहल है। यह आंतों में पानी खींच सकता है और मल को नरम करने व पेट साफ़ करने में मदद कर सकता है।

    शकरकंद रेसिपी के लिए सामग्री

    1 मध्यम आकार की शकरकंद, थोड़ा सा ऑलिव ऑयल, स्वादानुसार काली मिर्च

    गट हेल्थ के लिए शकरकंद की रेसिपी कैसे बनाएं?

    • पहला स्टेप: शकरकंद को आधा काट लें, उसमें थोड़ा ऑलिव ऑयल और काली मिर्च डालें, फिर कटे हुए हिस्से को नीचे की तरफ़ करके पार्चमेंट पेपर पर रखें।

    • दूसरा स्टेप: अब, इसे 45 मिनट तक नरम होने तक बेक करें। जब यह बेक हो जाए तो उसे 24 घंटे के लिए फ्रिज में रखें। अब इसे लगभग 24 घंटे बाद, दोबारा गर्म करें और फिर उसके बाद खाएं

    यह तरीका क्यों है फायदेमंद?

    डॉक्टर जोसेफ़ सलहाब कहते हैं जब शकरकंद ठंडा होता है, तो उसका कुछ स्टार्च ‘रेसिस्टेंट स्टार्च’ में बदल जाता है। वह रेसिस्टेंट स्टार्च आपकी आंतों में आगे तक पहुँचता है, जहाँ अच्छे गट बैक्टीरिया उसे खाते हैं। यह मल को भारी बनाने और पेट साफ़ होने की प्रक्रिया को नियमित करने में भी मदद कर सकता है।

    Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

  • मधेपुरा में महिला लापता, मायके: वालों ने पति पर हत्या कर नहर में शव फेंकने का लगाया आरोप

    मधेपुरा में महिला लापता, मायके: वालों ने पति पर हत्या कर नहर में शव फेंकने का लगाया आरोप

    मधेपुरा में महिला लापता, मायके: वालों ने पति पर हत्या कर नहर में शव फेंकने का लगाया आरोप

    मधेपुरा के कुमारखंड प्रखंड में एक महिला के संदिग्ध परिस्थितियों में लापता होने का मामला सामने आया है। श्रीनगर थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली पूनम देवी गुरुवार रात से गायब हैं। उनके मायके वालों ने पति और ससुराल पक्ष के कुछ लोगों पर गंभीर आरोप लगाते हुए महिला की हत्या कर शव नहर में फेंकने की आशंका जताई है।

    परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और महिला की तलाश शुरू कर दी है। पुलिस नहर, आसपास के खेतों और जलभराव वाले इलाकों में गोताखोरों की मदद से खोजबीन कर रही है।

    रात में पति के साथ जाने की बात

    मायके पक्ष की ओर से दी गई शिकायत के अनुसार पूनम देवी और उनके पति अनिल राम के बीच कुछ समय से विवाद चल रहा था। आरोप है कि गुरुवार रात करीब 11 से 12 बजे के बीच बच्चों को सुलाने के बाद अनिल राम पूनम को अपने साथ कहीं ले गया।

    परिजनों का आरोप है कि इसके बाद पूनम वापस घर नहीं लौटीं। शिकायत में मारपीट करने और गला काटकर हत्या करने के बाद शव को पानी में फेंकने का भी आरोप लगाया गया है। हालांकि महिला का शव अभी बरामद नहीं हुआ है और इन आरोपों की पुलिस जांच कर रही है।

    पति समेत कई लोगों पर केस

    मायके पक्ष की शिकायत के आधार पर पुलिस ने अनिल राम समेत कई लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। मामले में नामजद लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

    पुलिस ने आरोपी पति और ससुराल पक्ष के लोगों की तलाश में छापेमारी शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार कुछ लोग फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं।

    नहर और आसपास के इलाकों में तलाश

    महिला की तलाश के लिए पुलिस ने आरोपी के घर के पश्चिम में स्थित स्कूल के पास से गुजरने वाली नहर के आसपास अभियान चलाया है। नहर के साथ-साथ चौर क्षेत्र में भी खोजबीन की जा रही है।

    गोताखोरों की मदद से पानी के अंदर भी तलाश की जा रही है। पुलिस का कहना है कि महिला के बरामद होने और जांच के बाद ही घटना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

    पुलिस सभी पहलुओं की कर रही जांच

    श्रीनगर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच टीम महिला के लापता होने से पहले की गतिविधियों, पति-पत्नी के बीच विवाद और घटना के समय मौजूद लोगों के बारे में जानकारी जुटा रही है।

    फिलहाल पूनम देवी का कोई पता नहीं चल पाया है। पुलिस उनकी तलाश के साथ-साथ लगाए गए हत्या के आरोपों की भी जांच कर रही है।

  • घर में सीढ़ियों के नीचे: भूलकर भी न रखें ये चीजें, वरना बढ़ सकता है वास्तु दोष और आर्थिक नुकसान.

    घर में सीढ़ियों के नीचे: भूलकर भी न रखें ये चीजें, वरना बढ़ सकता है वास्तु दोष और आर्थिक नुकसान.

    घर में सीढ़ियों के नीचे: भूलकर भी न रखें ये चीजें, वरना बढ़ सकता है वास्तु दोष और आर्थिक नुकसान.

    Stairs Vastu Niyam: वास्तु शास्त्र के मुताबिक घर के हर हिस्से का विशेष महत्व है। इसमें सीढ़ियां भी घर की ऊर्जा को प्रभावित करने वाला एक अहम भाग होती हैं। खासतौर पर सीढ़ियों के नीचे मौजूद खाली जगह का सही उपयोग घर में सकारात्मकता बनाए रखने में मदद कर सकता है। वहीं, कुछ गलतियां वास्तु दोष का कारण बनती हैं। तो चलिए जानते हैं सीढ़ियों के नीचे कौन-सी वस्तुएं रखना शुभ होता है और किन चीजों से नकारात्मक प्रभाव बढ़ता है।

    क्यों महत्वपूर्ण है सीढ़ियों के नीचे की जगह?

    वैदिक परंपरा की मान्यता है कि अगर वास्तु नियमों के अनुसार घर बनवाया जाए तो परिवार में सुख, शांति बनी रहती है। वहीं, वास्तु दोष होने पर आर्थिक परेशानियां, तनाव और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। ऐसे में सीढ़ियों के नीचे मौजूद खाली स्थान के उपयोग के बारे में भी पता होना चाहिए।

    रखें पूरी साफ-सफाई

    वास्तु अनुसार, सीढ़ियों के नीचे की जगह हमेशा स्वच्छ और व्यवस्थित रखनी चाहिए। यहां गंदगी या अव्यवस्था भी नकारात्मक प्रभाव बढ़ा सकती है। इस स्थान पर केवल जरूरी और हल्का सामान ही रखें।

    पौधे बढ़ाते हैं सकारात्मकता

    अगर सीढ़ियों के नीचे पर्याप्त जगह हो तो वहां छोटे और सकारात्मक ऊर्जा देने वाले पौधे लगाएं। हरियाली घर के वातावरण को बेहतर बनाती है और वास्तु दोष की संभावना को कम करती है।

    ये है अच्छा विकल्प

    सीढ़ियों के नीचे की खाली जगह का उपयोग छोटी बुक शेल्फ या सजावटी कॉर्नर के रूप में किया जा सकता है। यह ध्यान रखें कि वहां बेकार या अनुपयोगी सामान जमा न हो। हल्का सजावटी सामान घर में आकर्षक और सकारात्मक माहौल बनाने में सहायक होता है।

    मंदिर बनाने से बचें

    वास्तु शास्त्र में सीढ़ियों के नीचे मंदिर बनाना उचित नहीं माना गया है। मान्यता है कि यह स्थान पूजा-पाठ के लिए अनुकूल नहीं होता, इसलिए पूजा का अपेक्षित शुभ फल नहीं मिल पाता।

    रसोई और बाथरूम न बनवाएं

    सीढ़ियों के नीचे रसोई या बाथरूम का निर्माण भी वास्तु के अनुसार शुभ नहीं माना जाता। ऐसा करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ने और पारिवारिक तनाव की स्थिति बनने की आशंका रहती है।

    ये चीजें रखने से करें परहेज

    टूटा-फूटा सामान, भारी कबाड़ या अनुपयोगी वस्तुएं सीढ़ियों के नीचे नहीं रखनी चाहिए। इसके अलावा इस स्थान पर तिजोरी या धन रखने की व्यवस्था भी वास्तु के अनुसार सही नहीं मानी जाती। मान्यता है कि इससे आर्थिक अस्थिरता और धन हानि की स्थिति बन सकती है।

    (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

  • 30+ महिलाओं को साल: में जरूर कराना चाहिए ये 6 ब्लड टेस्ट, डायबिटीज से लेकर इन बीमारियो

    30+ महिलाओं को साल: में जरूर कराना चाहिए ये 6 ब्लड टेस्ट, डायबिटीज से लेकर इन बीमारियो

    30+ महिलाओं को साल: में जरूर कराना चाहिए ये 6 ब्लड टेस्ट, डायबिटीज से लेकर इन बीमारियो

    बढ़ती उम्र के साथ महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव आते हैं। 30 की उम्र के बाद शरीर में होने वाले बदलाव हमेशा लक्षणों के रूप में सामने नहीं आते। कई बार ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल, थायरॉइड या हीमोग्लोबिन में बदलाव काफी समय तक बिना किसी स्पष्ट लक्षण के रहते हैं। यही कारण है कि उम्र बढ़ने के साथ नियमित हेल्थ चेकअप जरूरी है। हालांकि हर महिला के लिए हर टेस्ट साल में कराना जरूरी नहीं होता। जांच की जरूरत उम्र, परिवार के इतिहास, वजन, मेंस्ट्रुअल साइकिल, प्रेग्नेंसी के इतिहास पर निर्भर करती है। लेकिन डॉ.बता रहे हैं कि 30 की उम्र पार कर चुकी महिलाओं को कौन कौन से टेस्ट जरूर करवाने चाहिए।

    1. HbA1c और फास्टिंग ब्लड शुगर

    डायबिटीज शुरुआत में अक्सर बिना स्पष्ट लक्षण के रह सकती है। ऐसे में HbA1c पिछले लगभग दो से तीन महीनों में औसत ब्लड शुगर की जानकारी देता है, जबकि फास्टिंग ब्लड शुगर उस समय ब्लड में मौजूद ग्लूकोज का लेवल बताता है। 2026 के American Diabetes Association स्टैंडर्ड के अनुसार सामान्य जोखिम वाली महिलाओं में डायबिटीज की स्क्रीनिंग 35 साल की उम्र से शुरू करने की सलाह दी जाती है। इससे पहले भी अधिक वजन, परिवार में डायबिटीज, PCOS, हाई ब्लड प्रेशर या गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज का इतिहास होने पर जांच की जरूरत हो सकती है।

    2. लिपिड प्रोफाइल
    इसमें LDL, HDL, ट्राइग्लिसराइड और कुल कोलेस्ट्रॉल की जांच होती है। बढ़ा हुआ LDL अक्सर किसी तरह का लक्षण नहीं देता, लेकिन लंबे समय तक धमनियों में प्लाक बनने का कारण बन सकता है और हार्ट अटैक तथा स्ट्रोक का खतरा बढ़ा सकता है। WHO के अनुसार 2023 में बढ़ा हुआ LDL वर्ल्ड लेवल पर अनुमानित 36 लाख मौतों से जुड़ा था।

    3. CBC और हीमोग्लोबिन
    महिलाओं में आयरन की कमी और एनीमिया एक कॉमन प्रॉब्लम हो सकती है, खासकर जिन महिलाओं में पीरियड्स के दौरान बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होती है। CBC से हीमोग्लोबिन के साथ रेड और व्हाइट ब्लड सेल्स तथा प्लेटलेट्स की स्थिति का पता चलता है। लगातार थकान, कमजोरी, चक्कर या सांस फूलने जैसी समस्याओं में यह जांच फायदेमंद हो सकती है। वहीं जिन महिलाओं को एनीमिया की शिकायत है उन्हें फेरिटिन और आयरन प्रोफाइल जैसी जांच भी करानी चाहिए।

    4. TSH
    थायरॉइड हार्मोन में बदलाव महिलाओं में वजन, मासिक धर्म, एनर्जी, नींद और प्रजनन स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। केवल उम्र के आधार पर हर महिला में हर साल TSH कराना आवश्यक नहीं माना जाता। लेकिन थायरॉइड की बीमारी का पारिवारिक इतिहास, मासिक धर्म में बदलाव, वजन में अचानक बदलाव, बहुत ज्यादा थकान या गर्भधारण होने पर डॉक्टर इसकी सलाह दे सकते हैं।

    5. किडनी फंक्शन टेस्ट
    क्रिएटिनिन और eGFR जैसी जांचें किडनी की कार्यक्षमता का आकलन करने में मदद करती हैं। खासकर डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, किडनी की बीमारी या लंबे समय से कुछ दवाएं लेने वाली महिलाओं में इनकी जरूरत बढ़ जाती है। किडनी की बीमारी शुरुआती चरण में बिना लक्षण के रह सकती है, इसलिए जोखिम वाले लोगों में समय पर जांच जरूरी है।

    6. लिवर फंक्शन टेस्ट
    ALT, AST, बिलिरुबिन और अन्य मापदंडों से लिवर की स्थिति का प्रारंभिक आकलन किया जाता है। मोटापा, डायबिटीज, ट्राइग्लिसराइड, शराब का सेवन या कुछ दवाओं के लंबे समय तक इस्तेमाल में लिवर से जुड़ी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर लिवर फंक्शन की जांच के साथ आगे की जांच भी सलाह दे सकते हैं।

  • गोतनियों की लड़ाई में उजड़ गया घर, दो साल के मासूम प्रिंस की हत्या; औरंगाबाद में चाची ने खोला वारदात का राज

    गोतनियों की लड़ाई में उजड़ गया घर, दो साल के मासूम प्रिंस की हत्या; औरंगाबाद में चाची ने खोला वारदात का राज

    गोतनियों की लड़ाई में उजड़ गया घर, दो साल के मासूम प्रिंस की हत्या; औरंगाबाद में चाची ने खोला वारदात का राज

    औरंगाबाद के दाउदनगर थाना क्षेत्र के गंगा बिगहा गांव में पारिवारिक विवाद ने दो साल के मासूम की जान ले ली। घर के बाहर खेल रहे प्रिंस कुमार उर्फ भोला कुमार के अचानक गायब होने के बाद परिवार में अफरातफरी मच गई। स्वजन ने काफी तलाश की, लेकिन बच्चे का पता नहीं चला। इसके बाद थाने में अपहरण की प्राथमिकी दर्ज कराई गई और पुलिस ने जांच शुरू की।

    खोजबीन के दौरान नहर में मिला मासूम का शव

    एक अक्टूबर की शाम बच्चे के लापता होने के बाद पुलिस और स्वजन उसकी तलाश में जुटे रहे। शुक्रवार सुबह घर के पास स्थित नहर से प्रिंस का शव बरामद किया गया।

    पानी का बहाव रोकने के बाद पुलिस ने शव को बाहर निकलवाया। मासूम का शव मिलते ही गांव में मातम पसर गया और परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।

    जांच आगे बढ़ी तो चाची पर आया शक

    मामले की जांच के दौरान पुलिस को बच्चे की चाची नीतू कुमारी की भूमिका पर संदेह हुआ। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की।

    थानाध्यक्ष विकास कुमार के अनुसार, पूछताछ में नीतू ने घटना में अपनी संलिप्तता स्वीकार की और पुलिस को वारदात से जुड़ी जानकारी दी। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

    गोतनी के बीच चल रहे विवाद में प्रतिशोध का आरोप

    पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में नीतू ने बताया कि उसका अपनी गोतनी से पारिवारिक विवाद चल रहा था। आरोप है कि जेठ-जेठानी द्वारा उसके पति को भड़काए जाने को लेकर दोनों के बीच काफी समय से तनाव था। पुलिस का कहना है कि इसी पारिवारिक विवाद और कथित प्रतिशोध में प्रिंस को निशाना बनाया गया।

    घर के बाहर खेल रहा था मासूम

    पुलिस के अनुसार, घटना के समय प्रिंस घर के बाहर खेल रहा था। इसी दौरान उसकी चाची ने उसे अपने साथ लिया और बाद में वह लापता हो गया।

    बच्चे के घर नहीं लौटने पर परिवार ने उसकी तलाश शुरू की थी। शुरुआती जांच में पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ अपहरण का मामला दर्ज किया था, लेकिन जांच के बाद मामला हत्या में बदल गया।

    पुलिस को अब तक किसी और की भूमिका नहीं मिली

    थानाध्यक्ष ने बताया कि आरोपित चाची को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। पुलिस के अनुसार, अब तक की जांच में घटना में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने नहीं आई है।

  • बार-बार खराब हो: रहे हैं फ्रिज, AC और पंखे? तो घर में हो सकता है भयंकर वास्तु दोष, तुरंत करें ये उपाय

    बार-बार खराब हो: रहे हैं फ्रिज, AC और पंखे? तो घर में हो सकता है भयंकर वास्तु दोष, तुरंत करें ये उपाय

    वास्तु शास्त्र के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का बार-बार खराब होना घर में मौजूद गंभीर वास्तु दोष या फिर खराब राहु-केतु का संकेत देता है। ऐसे में सावधान हो जाएं, नहीं तो आपको इसके भयंकर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। वास्तु की मानें तो बिजली से चलने वाले सामान का संबंध घर में मौजूद अग्नि तत्व और राहु ग्रह से होता है। ऐसे में अगर इलेक्ट्रॉनिक सामान गलत दिशा में रख दिए जाएं तो उससे घर में नकारात्मक ऊर्जा तेजी से बढ़ने लगती है। वहीं अगर राहु की स्थिति भी कमजोर हो तो इससे भी बिजली से जुड़ी चीजें बार-बार खराब होने लगती हैं। तो चलिए जानते हैं ऐसे में किन उपायों को करके आप इस समस्या से मुक्ति पा सकते हैं।

    बिजली के सामान बार-बार हो रहें हैं खराब, तो करें ये उपाय

    1. सबसे पहले तो इस बात का ध्यान रखें कि घर के ईशान कोण में बिजली के उपकरण जैसे फ्रिज और AC नहीं रखें क्योंकि इससे उनके खराब होने की संभावना बढ़ जाती है।
    2. इसके अलावा अगर घर के भारी उपकरण दक्षिण-पश्चिम दिशा में गलत तरीके से रख दिए जाएं तो भी वास्तु दोष उत्पन्न होता है, जिससे बिजली के सामान खराब होने लगते हैं।
    3. कोशिश करें कि घर में ज्यादा से ज्यादा बिजली के उपकरण दक्षिण-पूर्व दिशा में रखें जाएं, क्योंकि ये अग्नि की दिशा होती है। ऐसे में इस दिशा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण रखने से वो लंबे समय तक चलते हैं यानी कि खराब नहीं होते। लेकिन अगर AC या फ्रिज इस दिशा में रख पाना नामुमकिन हो तो उसे उत्तर-पूर्व दिशा में छोड़कर अन्य कोई दिशा में रख सकते हैं। लेकिन उत्तर-पूर्व दिशा में ये चीजें भूलकर भी न रखें।
    4. घर में खराब पड़ा इलेक्ट्रॉनिक सामान भी भयंकर वास्तु दोष उत्पन्न करता है, ऐसे में इसे तुरंत ही घर से निकाल दें। वास्तु की मानें तो कबाड़ की तरह घर में पड़ा ये सामान राहु को भी खराब करता है। जिससे बिजली उपकरण तेजी से खराब होने लगते हैं।
    5. घर के वास्तु दोष को दूर करने के लिए पानी में थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाकर घर में पोछा लगाएं। इससे आपको जरूर राहत मिलेगी।
    6. घर के मुख्य दरवाजे पर सिंदूर से स्वास्तिक का चिह्न बनाएं। कहते हैं इससे भी वास्तु दोष से छुटकारा मिलता है और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का खराब होना कम हो जाता है।

    (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।

  • A, B, AB और O, किस ब्लड ग्रुप वालों को रहता है डायबिटीज का सबसे ज्यादा खतरा?

    A, B, AB और O, किस ब्लड ग्रुप वालों को रहता है डायबिटीज का सबसे ज्यादा खतरा?

    A, B, AB और O, किस ब्लड ग्रुप वालों को रहता है डायबिटीज का सबसे ज्यादा खतरा?

    डायबिटीज एक बहुत कॉमन बीमारी है। आज के समय में ज्यादातर लोग आपको इस बीमारी की चपेट में दिखेंगे। यंगस्टर्स और बच्चे भी इस बीमारी की चपेट में हैं। डायबिटीज का खतरा आमतौर पर बढ़ती उम्र, ज्यादा वजन, शारीरिक गतिविधि की कमी, खानपान, पारिवारिक इतिहास और लाइफस्टाइल जैसे कारणों से जुड़ा माना जाता है। लेकिन पिछले कुछ सालों में हुए शोध ने ब्लड ग्रुप और टाइप 2 डायबिटीज के खतरे के बीच एक संभावित संबंध की तरफ भी लोगों का ध्यान खींचा है। डॉ. बता रहे हैं कि किन ब्लड ग्रुप वाले लोगों को रहता है सबसे ज्यादा डायबिटीज का खतरा।

    क्या कहते हैं अनुपम बिस्वास

    रिसर्च के अनुसार, बी ब्लड ग्रुप वाले लोगों में टाइप 2 डायबिटीज का खतरा अन्य ब्लड ग्रुप की तुलना में सबसे ज्यादा रहता है। 2024 में प्रकाशित एक अध्ययन में कई पूर्व अध्ययनों के परिणामों का विश्लेषण किया गया। इसमें बी ब्लड ग्रुप और टाइप 2 डायबिटीज के बीच संबंध पाया गया। अध्ययन के अनुसार, बी ब्लड ग्रुप वाले लोगों में अन्य ब्लड ग्रुप वाले लोगों की तुलना में डायबिटीज का खतरा लगभग 28 प्रतिशत ज्यादा पाया गया। हालांकि, इसका मतलब यह बिल्कुल भी नहीं है कि बी ब्लड ग्रुप होने से किसी व्यक्ति को डायबिटीज होना तय है। ब्लड ग्रुप केवल एक संभावना को बताता है। अलग अलग अध्ययनों में ए, एबी और ओ ब्लड ग्रुप को लेकर परिणाम पूरी तरह एक जैसे नहीं रहे हैं। कुछ अध्ययनों में ओ ब्लड ग्रुप वाले लोगों में टाइप 2 डायबिटीज का खतरा कम देखा गया है, लेकिन इसके पीछे के कारण अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं।

    ब्लड ग्रुप और डायबिटीज के बीच यह संबंध क्यों दिखाई देता है, इसका निश्चित जवाब अभी उपलब्ध नहीं है। एबी, ओ ब्लड ग्रुप शरीर में ब्लड वेसल्स और कुछ बायोलॉडिकल प्रोसेस से जुड़ा होता है। सूजन, ब्लड में थक्के बनाने की प्रक्रिया और ब्लड वेसल्स के काम करने के तरीके पर इसके संभावित प्रभावों का अध्ययन किया जा रहा है। हालांकि, इन संभावित संबंधों को डायबिटीज का सीधा कारण नहीं माना जा सकता। सबसे जरूरी बात यह है कि ब्लड ग्रुप को बदला नहीं जा सकता, लेकिन डायबिटीज के कई प्रमुख जोखिम कारकों को नियंत्रित किया जा सकता है। हेल्दी वेट बनाए रखना, नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद और समय समय पर ब्लड शुगर लेवल की जांच डायबिटीज से बचाव और उसकी समय पर पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जिन लोगों के परिवार में डायबिटीज का इतिहास रहा है, जिनका वजन अधिक है, पेट के आसपास चर्बी अधिक है या जिन्हें हाई ब्लड प्रेशर और बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल की समस्या है, उनके लिए नियमित जांच महत्वपूर्ण है।

    कब बढ़ सकता है खतरा
    डायबिटीज की गंभीरता इस बात पर निर्भर करती है कि लंबे समय तक ब्लड में शुगर का लेवल बढ़ा रहने से शरीर के ब्लड वेसल्स और नसों को नुकसान पहुंच सकता है। इससे हृदय रोग, गुर्दे की बीमारी, आंखों की रोशनी से जुड़ी समस्याएं और नसों को नुकसान होने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए ब्लड ग्रुप ए हो, बी हो, एबी हो या ओ, डायबिटीज की रोकथाम और समय पर पहचान सभी के लिए महत्वपूर्ण है।

  • शादी के चार महीने बाद: दूसरी पत्नी की पीटकर हत्या, पति पर आरोप; पहली पत्नी ने की थी आत्महत्या.

    शादी के चार महीने बाद: दूसरी पत्नी की पीटकर हत्या, पति पर आरोप; पहली पत्नी ने की थी आत्महत्या.

    शादी के चार महीने बाद: दूसरी पत्नी की पीटकर हत्या, पति पर आरोप; पहली पत्नी ने की थी आत्महत्या.

    बुलंदशहर के नरौरा थाना क्षेत्र के एक गांव में महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। आरोप है कि उसके पति ने लाठी-डंडों से पीटकर उसकी जान ले ली। महिला की शादी आरोपी से करीब चार महीने पहले हुई थी। घटना के बाद से पति फरार बताया जा रहा है।

    मृतका की पहचान 27 वर्षीय खुशबू के रूप में हुई है, जो मेरठ की रहने वाली थी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।

    चार महीने पहले हुआ था निकाह

    जानकारी के अनुसार गांव निवासी फहमुद्दीन ऑटो चलाता है। उसकी पहली पत्नी की करीब आठ महीने पहले मौत हो गई थी। बताया गया कि पहली पत्नी ने फांसी लगाकर आत्महत्या की थी। पहली पत्नी से उसके दो बेटियां और एक बेटा हैं।

    पहली पत्नी की मौत के बाद फहमुद्दीन ने मेरठ के लिसाड़ी गेट क्षेत्र की रहने वाली खुशबू से दूसरा निकाह किया था। खुशबू भी पहले से तलाकशुदा बताई जा रही है। दोनों की शादी को अभी करीब चार महीने ही हुए थे।

    शादी के बाद से विवाद की बात

    परिजनों के अनुसार खुशबू का वैवाहिक जीवन शुरू से ही ठीक नहीं चल रहा था। आरोप है कि पति आए दिन उसके साथ मारपीट करता था। शुक्रवार रात भी दोनों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ।

    आरोप है कि कहासुनी के दौरान फहमुद्दीन ने लाठी-डंडों से खुशबू की बेरहमी से पिटाई कर दी। गंभीर चोट लगने के कारण उसकी मौत हो गई। घटना के बाद पति मौके से फरार हो गया।

    सूचना मिलते ही पहुंची पुलिस

    घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और महिला के शव को कब्जे में लिया। शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल की मोर्चरी भेज दिया गया है।

    घटना की सूचना मिलने पर खुशबू के मायके पक्ष के लोग भी उसकी ससुराल पहुंचे। हालांकि खबर लिखे जाने तक थाने में परिवार की ओर

  • घर में पौधे लगा रखे हैं: तो न करें ये 5 वास्तु गलतियां, वरना बढ़ सकता है अशुभ प्रभाव.

    घर में पौधे लगा रखे हैं: तो न करें ये 5 वास्तु गलतियां, वरना बढ़ सकता है अशुभ प्रभाव.

    घर में पौधे लगा रखे हैं: तो न करें ये 5 वास्तु गलतियां, वरना बढ़ सकता है अशुभ प्रभाव.

    घर में हरियाली लाने के लिए लोग तरह-तरह के पौधे लगाते हैं। ज्यादातर लोग पौधे इसलिए भी लगाते हैं कि घर में बरकत और खुशहाली बनी रहे, लेकिन कई बार अनजाने में की गई छोटी-छोटी गलतियां उनके शुभ प्रभाव को कम कर सकती हैं। वास्तु शास्त्र में पौधों की दिशा, उनकी स्थिति और देखभाल को भी महत्वपूर्ण माना गया है। ऐसे में अगर आप भी प्लांट लवर हैं, तो इन सामान्य गलतियों से बचना जरूरी माना जाता है।

    1: गलत दिशा में पौधे रखना

    अगर पौधे बिना दिशा का ध्यान रखे कहीं भी रख दिए जाएं, तो उनका सकारात्मक प्रभाव कम हो सकता है। छत पर रखे पौधे घर की खूबसूरती बढ़ाने के साथ ही मन को सुकून भी देते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार, छत पर पौधों को दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व दिशा की ओर रखना शुभ माना जाता है।

    2: मनी प्लांट कहीं भी रख देना

    मनी प्लांट को अक्सर लोग जहां जगह मिलती है, वहीं रख देते हैं। जबकि इसे बहुत सोच-समझकर और अच्छी सी जगह पर लगाया जाना चाहिए। वास्तु मान्यताओं के अनुसार, दक्षिण-पूर्व दिशा में रखना अधिक शुभ माना गया है। कहा जाता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि और आर्थिक उन्नति के योग बनते हैं।

    3: बोनसाई प्लांट्स

    बोनसाई पौधे देखने में आकर्षक लगते हैं, लेकिन वास्तु शास्त्र में इन्हें घर के अंदर रखना उचित नहीं माना गया है। मान्यता है कि यह विकास की धीमी गति का प्रतीक होता है, इसलिए इसे खुले स्थान पर रखना बेहतर माना जाता है।

    4: तुलसी की गलत जगह

    तुलसी का पौधा धार्मिक और वास्तु दोनों दृष्टि से बेहद शुभ माना जाता है। इसे ईशान कोण या पूर्व दिशा में रखने की सलाह दी जाती है। तुलसी का पौधा वायु को भी शुद्ध करता है। वहीं, इस सही दिशा में रखे तो घर में पॉजिटिव एनर्जी और सुख-शांति हमेशा बनी रहती है।

    5: सूखे पौधों को न हटाना

    कई लोग सूख चुके या मुरझाए पौधों को लंबे समय तक घर में ही रखते हैं। वास्तु अनुसार, ऐसे पौधे नकारात्मक ऊर्जा का कारण बन सकते हैं। इसलिए समय-समय पर उन्हें हटाना और पौधों की देखभाल करना जरूरी माना जाता है।

    (Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।