आंतों में मल सूखने पर शरीर में दिखते हैं ये 10 लक्षण? आयुर्वेदिक एक्सपर्ट के बताए 4 घरेलू नुस्खे, जो दिला सकते हैं कब्ज से राहत..

आंतों में मल सूखने पर शरीर में दिखते हैं ये 10 लक्षण? आयुर्वेदिक एक्सपर्ट के बताए 4 घरेलू नुस्खे, जो दिला सकते हैं कब्ज से राहत..
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असंतुलित खान-पान, पानी की कमी और सुस्त लाइफस्टाइल का सीधा असर हमारे पाचन तंत्र (Digestive System) पर पड़ता है। जब पाचन धीमा हो जाता है, तो आंतों में मल सूखने लगता है, जिससे न केवल पेट में भारीपन रहता है बल्कि शरीर कई तरह के संकेत और लक्षण भी देने लगता है। समय रहते ध्यान न देने पर यह समस्या क्रोनिक कब्ज का रूप ले सकती है। मेडिकल साइंस और आयुर्वेद दोनों का मानना है कि आंतों में नमी की कमी के कारण मल कड़ा और शुष्क हो जाता है। अगर शरीर में इसके लक्षण शुरुआती चरण में ही पहचान लिए जाएं, तो गंभीर पेट संबंधी समस्याओं से बचा जा सकता है। आयुर्वेद में आंतों की नमी बनाए रखने और पाचन क्रिया को दुरुस्त करने के कई पारंपरिक उपाय मौजूद हैं। आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के मुताबिक, रसोई में मौजूद कुछ प्राकृतिक चीजें पाचन अग्नि को संतुलित कर कब्ज में राहत दे सकती हैं।

वरिष्ठ आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. अखिलेश शर्मा (BAMS, ND, PhD) के मुताबिक, कब्ज को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उनका कहना है कि कब्ज से तुरंत राहत दिलाने वाली कोई ‘जादुई पुड़िया’ नहीं होती। सही खानपान, पर्याप्त पानी, नियमित शारीरिक गतिविधि और कुछ घरेलू उपायों को अपनाकर अधिकांश लोगों को आंतों में जमा सूखे मल से राहत मिल सकती है। आइए डॉ. अखिलेश शर्मा से जानते हैं कि कब्ज से राहत पाने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

लंबे समय तक कब्ज या आंतों में मल जमा होने पर दिख सकते हैं ये लक्षण

  • बार-बार कब्ज होना और कई दिनों तक पेट साफ न होना।
  • पेट में भारीपन या फूलने की शिकायत रहना।
  • पेट में दर्द या ऐंठन महसूस होना।
  • मल त्याग के दौरान जोर लगाना और फिर भी पूरी तरह पेट साफ न होने का एहसास।
  • भूख कम लगना या खाना खाने का मन न करना।
  • मतली आना और गंभीर मामलों में उल्टी होना।
  • बार-बार गैस बनना या पेट में असहजता महसूस होना।
  • हर समय थकान या सुस्ती महसूस होना।
  • ध्यान केंद्रित करने में परेशानी, चिड़चिड़ापन या मूड खराब रहना।
  • सांस से बदबू आना या मुंह का स्वाद खराब रहना शामिल है।

सौंफ वाला दूध पिएं

आयुर्वेद विशेषज्ञ के मुताबिक, लंबे समय से कब्ज की समस्या होने पर सौंफ वाला दूध फायदेमंद हो सकता है। इसके लिए एक गिलास दूध में 1 चम्मच हल्की कुटी हुई सौंफ डालकर 2–3 बार उबालें। इसके बाद दूध को छान लें और स्वाद के लिए चीनी की जगह थोड़ा-सा गुड़ मिला सकते हैं। सौंफ पाचन को बेहतर बनाने और गैस व पेट फूलने की समस्या कम करने में मदद कर सकती है। बायोमेडिसिन एंड फार्माकोथेरेपी में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार सौंफ में एनेथोल नामक एक खास कम्पाउंड पाया जाता है। यह पेट और आंतों की मांसपेशियों को आराम पहुंचाता है, जिससे पेट की ऐंठन और गैस कम होती है। सौंफ पाचन एंजाइम्स के स्राव को बढ़ाती है। जब इसे गर्म दूध के साथ लिया जाता है, तो दूध में मौजूद फैट और सौंफ के वोलेटाइल ऑयल आंतों में लुब्रिकेशन पैदा करते हैं, जिससे सुबह मल त्याग (Stool Pass) आसानी से होता है।

हल्दी और काली मिर्च वाला दूध

अगर कब्ज के साथ पाचन भी कमजोर रहता है, तो एक गिलास दूध में आधा चम्मच हल्दी और 3–4 कुटी हुई काली मिर्च डालकर उबालें। गुनगुना होने पर इसका सेवन किया जा सकता है। हल्दी और काली मिर्च में मौजूद प्राकृतिक तत्व पाचन तंत्र को सहारा देने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, यह कब्ज का इलाज नहीं बल्कि एक सहायक उपाय है। बायोमेडिसिन एंड फार्माकोथेरेपी में प्रकाशित रिसर्च के अनुसार, सौंफ में एनेथोल नामक एक खास कम्पाउंड पाया जाता है। यह पेट और आंतों की मांसपेशियों को आराम पहुंचाता है, जिससे पेट की ऐंठन और गैस कम होती है। सौंफ पाचन एंजाइम्स के स्राव को बढ़ाती है। जब इसे गर्म दूध के साथ लिया जाता है, तो दूध में मौजूद फैट और सौंफ के वोलेटाइल ऑयल आंतों में लुब्रिकेशन यानी चिकनाहट पैदा करते हैं, जिससे सुबह मल त्याग आसानी से होता है।

एलोवेरा जेल का सीमित मात्रा में सेवन करें

एक्सपर्ट के अनुसार, ताजा एलोवेरा जेल का सीमित मात्रा में सेवन कुछ लोगों में कब्ज से राहत दिलाने में मदद कर सकता है। इसके लिए एलोवेरा की पत्ती से लगभग 20–25 मि.ली. जेल निकालकर सुबह खाली पेट या रात को सोने से पहले लिया जा सकता है। हालांकि, एलोवेरा का अधिक सेवन दस्त, पेट दर्द या इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन का कारण बन सकता है। गर्भवती महिलाओं और कुछ बीमारियों से पीड़ित लोगों को इसका सेवन डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए। नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (NCBI) की रिसर्च के मुताबिक, एलोवेरा में एन्थ्राक्विनोन और ऐलोइन नाम के तत्व होते हैं। ये तत्व शक्तिशाली ‘लैक्सेटिव के रूप में काम करते हैं। एलोवेरा जेल आंतों में पानी की मात्रा को बढ़ाता है (Hydration), जिससे सूखा मल नरम हो जाता है और आंतों की सफाई (Detoxification) बहुत आसानी से हो जाती है।

फाइबर से भरपूर हल्की सब्जियां खाएं

कब्ज से राहत पाने के लिए रोजाना फाइबर युक्त और आसानी से पचने वाली सब्जियों को भोजन में शामिल करें। जैसे

  • तोरी
  • टिंडा
  • कद्दू
  • शलजम
  • ग्रीन बीन्स
  • पालक और अन्य हरी पत्तेदार सब्जियां

इन सब्जियों में मौजूद फाइबर मल को मुलायम बनाने और आंतों की सामान्य गति बनाए रखने में मदद करता है। बेहतर परिणाम के लिए इनके साथ पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरूरी है। द अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रिशन की एक बड़ी रिसर्च के अनुसार, लौकी, तोरी, कद्दू, टिंडा और शलजम जैसी सब्जियों में पानी की मात्रा 90%+ और सॉल्यूबल फाइबर भरपूर होता है। फाइबर मल में भारीपन (Bulk) और नमी लाता है। यह आंतों के लिए ‘झाड़ू’ की तरह काम करता है, जो दीवारों पर चिपकी पुरानी गंदगी को खुरचकर बाहर निकाल देता है। इन सब्जियों में मौजूद प्रीबायोटिक (Prebiotics) पेट के अच्छे बैक्टीरिया का पोषण करते हैं, जिससे पाचन क्रिया परमानेंटली मजबूत होती है।

डिस्क्लेमर :यह जानकारी केवल सामान्य जागरूकता के लिए है, इसे मेडिकल सलाह न मानें। किसी भी नुस्खे या डाइट को अपनाने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।

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