‘गुड़ का खान’ कहलाता भारत​​​​​ का ये जिला, हर घर में चलता है गुड़ का कारोबार; विदेशों तक पहुंचती है मिठास..

‘गुड़ का खान’ कहलाता भारत​​​​​ का ये जिला, हर घर में चलता है गुड़ का कारोबार; विदेशों तक पहुंचती है मिठास..
‘गुड़ का खान’ कहलाता भारत​​​​​ का ये जिला, हर घर में चलता है गुड़ का कारोबार; विदेशों तक पहुंचती है मिठास..

भारत का हर शहर अपनी किसी न किसी खास पहचान के लिए जाना जाता है। यहां बनने वाला देशी गुड़ देश के कई राज्यों और विदेशों तक पहुंचता है। यही वजह है कि इस जिले को ‘गुड़ की खान’ के नाम से भी जाना जाता है। जिले की पहचान गुड़ के बड़े उत्पादन और कारोबार से जुड़ी हुई है। यहां की गुड़ मंडी को एशिया की बड़ी गुड़ मंडियों में गिना जाता है। खास बात यह है कि इस जिले का गुड़ एक जिला एक उत्पाद (ODOP) योजना में भी शामिल है।

कौन सा जिला है?
यूपी के मुजफ्फरनगर जिले को गुड़ उत्पादन के लिए खास तौर पर जाना जाता है। यहां पर नुनाखेड़ा गांव में 50 से ज्यादा गुड़ के कोल्हू संचालित होने की बात कही जाती है। यहां लगभग हर परिवार किसी न किसी रूप में गुड़ के कारोबार से जुड़ा हुआ है। गांव में प्रवेश करते ही जगह-जगह कोल्हू और गुड़ तैयार करने की प्रक्रिया दिखाई देती है। कई इकाइयों में लंबे समय तक काम चलता है और कारीगर शिफ्ट में गुड़ तैयार करते हैं।

गन्ने से तैयार होता है देसी गुड़
पश्चिमी यूपी गन्ने की खेती के लिए देश के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल है। खेतों से गन्ना आने के बाद उसे कोल्हू में पेरकर रस निकाला जाता है। इसके बाद रस को गर्म कर साफ किया जाता है और धीरे-धीरे उसे गाढ़ा करके गुड़ का रूप दिया जाता है । मुजफ्फरनगर में अलग-अलग स्वाद और आकार के गुड़ की कई किस्में तैयार की जाती हैं। स्थानीय स्तर पर तैयार होने वाला गुड़ व्यापारियों के जरिए देश के दूसरे हिस्सों तक पहुंचता है।

देश के कई राज्यों में जाती है मुजफ्फरनगर की मिठास
मुजफ्फरनगर का गुड़ राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, पंजाब, हरियाणा, बिहार और आंध्र प्रदेश समेत कई राज्यों में भेजा जाता है। इसकी मांग देश के बाहर भी है और गुणवत्ता व स्वाद के कारण इसका निर्यात भी किया जाता है। जिले में गुड़ के कारोबार का पुराना इतिहास है। यहां गुड़ की थोक मंडी की स्थापना 1954 में की गई थी। इसके बाद धीरे-धीरे मुजफ्फरनगर देश के बड़े गुड़ व्यापार केंद्रों में अपनी पहचान बनाता गया।

सिर्फ कारोबार नहीं, पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा
मुजफ्फरनगर और आसपास के गांवों में गुड़ बनाना केवल रोजगार का साधन नहीं है, बल्कि कई परिवारों के लिए पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा भी है। गन्ने के सीजन में कोल्हुओं पर काम तेज हो जाता है और गांवों में गुड़ बनाने की भट्टियों की गर्माहट के साथ इसकी खास खुशबू भी चारों तरफ महसूस होती है। यही वजह है कि मुजफ्फरनगर को गुड़ के कारोबार से जोड़कर देखा जाता है। गन्ने से शुरू होकर कोल्हू और मंडी के रास्ते देश-विदेश तक पहुंचने वाली यही मिठास मुजफ्फरनगर की खास पहचान बन चुकी है।

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