
बिहार के सारण जिले से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक होमगार्ड जवान पर युवती को शादी का भरोसा देकर लंबे समय तक उसका यौन शोषण करने, निजी सामग्री के जरिए ब्लैकमेल करने और उसके परिजनों से 4 लाख रुपये लेने का आरोप लगाया गया है। मामले में पीड़िता ने न्यायालय में परिवाद दायर कर आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
नाबालिग होने के दौरान संपर्क में आने का आरोप
मामला अमनौर थाना क्षेत्र से जुड़ा बताया गया है। न्यायालय में दायर परिवाद के अनुसार, जुलाई 2020 में जब युवती नाबालिग थी, तब आरोपी ने उससे बातचीत शुरू की थी।
पीड़िता ने आरोप लगाया कि 30 मई 2021 को आरोपी उसके घर में घुसा और जबरन शारीरिक संबंध बनाए। इस दौरान निजी सामग्री तैयार करने का भी आरोप लगाया गया है। शिकायत के मुताबिक, बाद में उसे सार्वजनिक करने की धमकी देकर युवती पर दबाव बनाया जाता रहा।
ये सभी आरोप परिवाद में दर्ज दावों पर आधारित हैं। मामले की वास्तविक परिस्थितियों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होनी है।
शादी की बात के बाद रुपये देने का दावा
पीड़िता के अनुसार, बालिग होने के बाद आरोपी से शादी की बात तय हुई थी। इसी सिलसिले में उसके परिजनों ने आरोपी के पिता को 29 अक्टूबर 2024 और 24 मार्च 2025 को दो अलग-अलग किस्तों में 2-2 लाख रुपये दिए थे। इस तरह कुल 4 लाख रुपये दिए जाने का दावा किया गया है।
शिकायत में आरोप है कि रकम लेने के बाद आरोपी पक्ष ने शादी करने से इनकार कर दिया। जब युवती के परिजनों ने रुपये वापस मांगे, तो उनके साथ गाली-गलौज और मारपीट की गई तथा जान से मारने की धमकी भी दी गई।
न्यायालय से कार्रवाई की मांग
पीड़िता ने अपने परिवाद में भारतीय न्याय संहिता (BNS), पॉक्सो अधिनियम और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की है।
अब मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और आरोपों की जांच महत्वपूर्ण होगी। उपलब्ध जानकारी में आरोपी का पक्ष या आरोपों पर उसका आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है। इसलिए शिकायत में लगाए गए आरोपों को फिलहाल सिद्ध अपराध नहीं माना जा सकता।
मामले में आगे क्या होगा?
न्यायालय में दायर परिवाद के आधार पर आगे की प्रक्रिया संबंधित कानूनी प्रावधानों के अनुसार चलेगी। जांच में जुटाए गए साक्ष्य, संबंधित पक्षों के बयान और न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत सामग्री के आधार पर मामले की स्थिति स्पष्ट होगी।
डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध समाचार रिपोर्ट और न्यायालय में दायर परिवाद में बताए गए आरोपों पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में दोष या निर्दोष होने का अंतिम निर्णय सक्षम न्यायालय की प्रक्रिया के बाद ही माना जाएगा।

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