आज के समय में मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल दोस्तों, परिवार और काम से जुड़े लोगों से बातचीत करने के लिए किया जाता है। लेकिन कई बार लोग अपनी प्राइवेसी को लेकर चिंतित रहते हैं और नहीं चाहते कि हर किसी के पास उनका निजी मोबाइल नंबर पहुंच जाए। ऐसे में Telegram का यूजरनेम फीचर काफी काम आ सकता है।
इस फीचर की मदद से आप अपना मोबाइल नंबर बताए बिना भी दूसरे यूजर्स से संपर्क कर सकते हैं। इसके लिए कुछ सेटिंग्स का ध्यान रखना जरूरी है।
Telegram पर यूजरनेम से कैसे करें चैट?
स्टेप 1: Telegram ऐप खोलें
अपने मोबाइल में Telegram खोलें और सेटिंग्स में जाएं। यहां अपनी प्रोफाइल से जुड़ी जानकारी देख सकते हैं।
स्टेप 2: यूजरनेम सेट करें
प्रोफाइल में Username का विकल्प तलाशें। यदि आपने पहले से यूजरनेम नहीं बनाया है, तो अपनी पसंद का उपलब्ध यूजरनेम सेट कर सकते हैं।
स्टेप 3: यूजरनेम शेयर करें
अब आप बातचीत करने वाले व्यक्ति को अपना Telegram यूजरनेम बता सकते हैं। दूसरा यूजर Telegram पर उस नाम को खोजकर आपकी प्रोफाइल तक पहुंच सकता है और चैट शुरू कर सकता है।
स्टेप 4: फोन नंबर की प्राइवेसी सेटिंग जांचें
Telegram की Settings में जाकर Privacy and Security के विकल्प पर जाएं। यहां Phone Number से जुड़ी सेटिंग्स में यह नियंत्रित किया जा सकता है कि आपका नंबर कौन देख सकता है। उपलब्ध विकल्पों के अनुसार इसे सीमित करें।
क्या यूजरनेम इस्तेमाल करने से नंबर पूरी तरह छिप जाता है?
यूजरनेम से चैट करने पर सामने वाले व्यक्ति को आपका मोबाइल नंबर बताना जरूरी नहीं होता। हालांकि, यदि किसी के पास आपका नंबर पहले से सेव है या आपकी प्राइवेसी सेटिंग्स इसकी अनुमति देती हैं, तो वह नंबर देख सकता है। इसलिए केवल यूजरनेम बनाना ही पर्याप्त नहीं है; फोन नंबर की प्राइवेसी सेटिंग्स भी जांचना जरूरी है।
Telegram इस्तेमाल करते समय इन बातों का रखें ध्यान
अपना यूजरनेम केवल उन्हीं लोगों के साथ साझा करें जिनसे संपर्क करना चाहते हैं।
अनजान लोगों से आने वाले संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें।
अपने अकाउंट की सुरक्षा के लिए टू-स्टेप वेरिफिकेशन चालू करने पर विचार करें।
किसी को भी OTP या लॉगिन कोड न बताएं।
Telegram का यूजरनेम फीचर निजी नंबर साझा किए बिना बातचीत करने का उपयोगी तरीका है। सही प्राइवेसी सेटिंग्स के साथ इसका इस्तेमाल करके आप अपनी व्यक्तिगत जानकारी पर बेहतर नियंत्रण रख सकते हैं।
डिस्क्लेमर: Telegram के फीचर्स और सेटिंग्स ऐप के संस्करण के अनुसार अलग हो सकते हैं। अपनी प्राइवेसी सुनिश्चित करने के लिए ऐप में उपलब्ध मौजूदा विकल्पों की जांच करें।
एप्पल साइडर विनेगर (Apple Cider Vinegar) का इस्तेमाल आजकल सेहत को बेहतर बनाए रखने के लिए काफी चर्चा में है। सेब से तैयार किए जाने वाले इस सिरके में एसिटिक एसिड होता है। कुछ अध्ययनों में इसके सेवन से ब्लड शुगर और वजन को नियंत्रित रखने में संभावित मदद के संकेत मिले हैं। हालांकि, इसे किसी बीमारी का इलाज या उससे बचाव का पक्का तरीका नहीं माना जा सकता।
1. वजन नियंत्रित रखने में मिल सकती है मदद
कुछ शोधों के अनुसार, एप्पल साइडर विनेगर का सेवन कुछ लोगों में थोड़े समय के लिए पेट भरा होने का एहसास बढ़ा सकता है। इससे भोजन की मात्रा कम रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि, वजन घटाने में इसका प्रभाव सीमित हो सकता है। संतुलित आहार और नियमित शारीरिक गतिविधि वजन नियंत्रित रखने के लिए अधिक महत्वपूर्ण हैं।
2. ब्लड शुगर पर पड़ सकता है असर
एप्पल साइडर विनेगर में मौजूद एसिटिक एसिड कुछ लोगों में भोजन के बाद ब्लड शुगर बढ़ने की गति को प्रभावित कर सकता है। लेकिन इसका असर हर व्यक्ति में एक जैसा नहीं होता। डायबिटीज से पीड़ित लोगों को इसे दवा का विकल्प नहीं मानना चाहिए और डॉक्टर की सलाह के बिना अपनी दवाएं बंद या कम नहीं करनी चाहिए।
3. कोलेस्ट्रॉल और दिल की सेहत
दिल की सेहत के मामले में भी एप्पल साइडर विनेगर पर शोध किए गए हैं। कुछ छोटे अध्ययनों में कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर पर संभावित लाभ के संकेत मिले हैं, लेकिन इस संबंध में अभी पर्याप्त मजबूत प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इसे हृदय रोगों से बचाव का प्रमाणित उपाय मानना सही नहीं होगा।
4. सेवन करते समय इन बातों का रखें ध्यान
एप्पल साइडर विनेगर को सीधे पीने से दांतों के इनेमल को नुकसान पहुंच सकता है और गले या पेट में जलन हो सकती है। इसका अधिक सेवन कुछ लोगों में पाचन संबंधी परेशानी भी पैदा कर सकता है। यदि इसका इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो इसे पानी में अच्छी तरह मिलाकर सीमित मात्रा में लें। एसिडिटी, किडनी संबंधी समस्या या डायबिटीज की दवाएं लेने वाले लोग पहले चिकित्सकीय सलाह लें।
सेहतमंद रहने के लिए क्या करें?
दिल को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, धूम्रपान से दूरी और ब्लड प्रेशर व कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच जरूरी है। एप्पल साइडर विनेगर को इन आदतों का विकल्प न बनाएं।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। एप्पल साइडर विनेगर के संभावित लाभों पर शोध अभी सीमित हैं। किसी बीमारी के इलाज या बचाव के लिए इसका इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर की सलाह लें।
कवर्धा: छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में सार्वजनिक स्थानों पर धारदार हथियार लहराकर लोगों को डराने-धमकाने के दो अलग-अलग मामलों में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। एक आरोपी पीजी कॉलेज ग्राउंड में लोहे का फरसा लेकर लोगों को धमका रहा था, जबकि दूसरा पुराने बस स्टैंड के पास चाकू लहराकर राहगीरों को मारने की धमकी देने के आरोप में पकड़ा गया। पुलिस ने दोनों के पास से हथियार जब्त कर आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई की है। न्यायालय के आदेश पर दोनों को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।
पीजी कॉलेज ग्राउंड में फरसा लेकर धमकाने का आरोप
पुलिस के मुताबिक, पहली कार्रवाई कवर्धा के पीजी कॉलेज ग्राउंड में की गई। पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि एक व्यक्ति हाथ में धारदार लोहे का फरसा लेकर लोगों के साथ गाली-गलौज कर रहा है और उन्हें मारने की धमकी दे रहा है।
सूचना मिलने पर सिटी कोतवाली पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और घेराबंदी कर संदिग्ध को पकड़ लिया। उसकी पहचान कवर्धा निवासी हाफिस खान (24), पिता याकूब खान, के रूप में बताई गई है।
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से मुठ सहित करीब 18.5 इंच लंबा लोहे का फरसा जब्त किया है। मामले में नियमानुसार कार्रवाई की गई।
पुराने बस स्टैंड के पास चाकू लहराने का मामला
दूसरी कार्रवाई कवर्धा के पुराने बस स्टैंड स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल कॉम्प्लेक्स के पास की गई। यहां एक अन्य व्यक्ति पर धारदार चाकू लहराकर राहगीरों को धमकाने और मारने की धमकी देने का आरोप है।
पुलिस ने इस मामले में भी आरोपी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से हथियार जब्त किया। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में दूसरे आरोपी का नाम और उसकी गिरफ्तारी से जुड़ी विस्तृत जानकारी स्पष्ट नहीं है।
आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई, न्यायिक अभिरक्षा में भेजे गए आरोपी
कोतवाली थाना प्रभारी निरीक्षक लालजी सिन्हा के अनुसार, सार्वजनिक स्थानों पर हथियार लेकर लोगों को डराने-धमकाने की सूचना मिलने पर पुलिस ने दोनों मामलों में कार्रवाई की। आरोपियों के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।
पुलिस की कार्रवाई के बाद दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेजने का आदेश दिया गया।
डिस्क्लेमर: यह समाचार उपलब्ध पुलिस संबंधी रिपोर्ट के आधार पर तैयार किया गया है। आरोपों से जुड़े अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होंगे।
टाटा मोटर्स की कार खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों के लिए डिस्काउंट से जुड़ी खबर सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी की कुछ कारों पर 3 लाख रुपये से ज्यादा तक के फायदे मिल सकते हैं। इसके अलावा, पुरानी गाड़ियों की खरीद और इलेक्ट्रिक एसयूवी Tata Harrier EV पर भी ऑफर की चर्चा है। हालांकि, ग्राहकों को ध्यान रखना चाहिए कि छूट की वास्तविक रकम मॉडल, वेरिएंट, शहर, डीलरशिप और उपलब्ध स्टॉक के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है।
किन कारों पर मिल सकता है बड़ा डिस्काउंट?
टाटा मोटर्स की ओर से मिलने वाले ऑफर्स में कैश डिस्काउंट, एक्सचेंज बोनस, कॉर्पोरेट बेनिफिट और अन्य डीलरशिप ऑफर शामिल हो सकते हैं। कुछ मामलों में इन सभी लाभों को जोड़ने पर कुल छूट की रकम काफी बड़ी दिखाई देती है। लेकिन हर ग्राहक को सभी ऑफर मिलना जरूरी नहीं है। इसलिए कार खरीदने से पहले अधिकृत डीलर से ऑफर की शर्तें स्पष्ट कर लेना बेहतर रहेगा।
पुरानी गाड़ी बदलने वालों को भी फायदा
अगर आप अपनी पुरानी कार के बदले नई टाटा कार खरीदना चाहते हैं, तो एक्सचेंज ऑफर आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। एक्सचेंज में मिलने वाली रकम पुरानी कार की उम्र, मॉडल, किलोमीटर, कंडीशन और बाजार में उसकी मांग पर निर्भर करती है। डीलर से मिलने वाले एक्सचेंज बोनस और पुरानी कार की वास्तविक कीमत को अलग-अलग समझना जरूरी है, ताकि आपको पता रहे कि कुल बचत कितनी हो रही है।
Tata Harrier EV पर भी नजर
टाटा की इलेक्ट्रिक एसयूवी Harrier EV को खरीदने की सोच रहे ग्राहकों को भी उपलब्ध ऑफर्स की जानकारी लेनी चाहिए। इलेक्ट्रिक कार पर मिलने वाला लाभ डीलरशिप, वेरिएंट और उस समय लागू योजनाओं के अनुसार बदल सकता है। इसके साथ ही चार्जिंग की सुविधा, रोजाना चलने की दूरी और इलेक्ट्रिक कार के रखरखाव जैसे पहलुओं पर भी विचार करना चाहिए।
कार खरीदने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
डिस्काउंट की अंतिम रकम लिखित कोटेशन में जरूर लें।
कैश डिस्काउंट और एक्सचेंज बोनस को अलग-अलग समझें।
ऑफर की अंतिम तारीख और पात्रता की शर्तें पूछें।
अलग-अलग डीलरशिप से कीमत की तुलना करें।
बीमा, एक्सेसरीज और अन्य शुल्क जोड़ने के बाद ऑन-रोड कीमत देखें।
निष्कर्ष: टाटा की कारों पर बड़ा डिस्काउंट मिलने की खबर ग्राहकों के लिए आकर्षक हो सकती है, लेकिन 3 लाख रुपये से अधिक की बचत हर मॉडल या हर खरीदार के लिए उपलब्ध हो, यह जरूरी नहीं है। खरीदारी से पहले अपने शहर की अधिकृत डीलरशिप से मौजूदा ऑफर और अंतिम ऑन-रोड कीमत की पुष्टि जरूर करें।
डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध कराई गई रिपोर्ट के आधार पर तैयार किया गया है। मौजूदा डिस्काउंट, कीमतों और ऑफर्स की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है। खरीदारी से पहले टाटा मोटर्स की आधिकारिक वेबसाइट या अधिकृत डीलरशिप से जानकारी प्राप्त करें।
दुर्गा पूजा और दिवाली के बीच कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने अक्टूबर के वेतन और महंगाई भत्ते को लेकर दी जानकारी
पश्चिम बंगाल के सरकारी कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते (DA) और अक्टूबर महीने के वेतन को लेकर अहम जानकारी सामने आई है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कर्मचारियों को 15 अक्टूबर तक वेतन दिए जाने की घोषणा की है। इसके साथ ही निर्धारित 20 प्रतिशत महंगाई भत्ते का लाभ भी देने की बात कही गई है। त्योहारों के मौसम में इस घोषणा से कर्मचारियों को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।
15 अक्टूबर तक वेतन देने की घोषणा
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कोलकाता के नेताजी इंडोर स्टेडियम में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सरकारी कर्मचारियों के वेतन को लेकर जानकारी दी। यह कार्यक्रम पुलिसकर्मियों को नियुक्ति पत्र देने के लिए आयोजित किया गया था।
रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने कहा कि अक्टूबर महीने का वेतन 15 अक्टूबर तक कर्मचारियों के खातों में पहुंच जाएगा। इसके साथ ही निर्धारित 20 प्रतिशत महंगाई भत्ता भी दिया जाएगा। हालांकि, वास्तविक भुगतान की स्थिति संबंधित विभाग के आदेश और वेतन जारी होने की प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
कर्मचारियों को मिलेगा 20 प्रतिशत महंगाई भत्ता
महंगाई भत्ता कर्मचारियों को बढ़ती कीमतों के असर से राहत देने के लिए दिया जाता है। पश्चिम बंगाल में सरकारी कर्मचारियों के लिए 20 प्रतिशत DA को लेकर पहले घोषणा किए जाने की बात रिपोर्ट में कही गई है।
अब अक्टूबर के वेतन के साथ इस भत्ते का लाभ दिए जाने की जानकारी सामने आई है। इससे कर्मचारियों को मिलने वाली कुल राशि में बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, प्रत्येक कर्मचारी की वास्तविक वेतन राशि उसके पद, मूल वेतन और लागू नियमों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
DA के अंतर को धीरे-धीरे कम करने की बात
रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री ने महंगाई भत्ते के अंतर को धीरे-धीरे कम करने की बात भी कही। कर्मचारियों के लिए DA का मुद्दा लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है, क्योंकि इससे उनकी मासिक आय और बढ़ती महंगाई के बीच संतुलन बनाने में मदद मिलती है।
सरकार की ओर से घोषित व्यवस्था के तहत कर्मचारियों को कितना लाभ मिलेगा और भुगतान किस प्रक्रिया से होगा, इसकी स्पष्ट जानकारी संबंधित आधिकारिक आदेश से ही मिलेगी।
त्योहारों के बीच कर्मचारियों को राहत की उम्मीद
दुर्गा पूजा और दिवाली के आसपास वेतन मिलने की तारीख कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण होती है। समय पर वेतन और महंगाई भत्ते का भुगतान होने से घरेलू खर्चों तथा त्योहारों की तैयारियों में मदद मिल सकती है।
फिलहाल, उपलब्ध रिपोर्ट में 15 अक्टूबर तक वेतन भुगतान और 20 प्रतिशत DA दिए जाने की घोषणा का उल्लेख है। कर्मचारियों को अंतिम पुष्टि के लिए राज्य सरकार के आधिकारिक आदेश या अपने विभाग की सूचना पर ध्यान देना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। वेतन भुगतान और महंगाई भत्ते से संबंधित अंतिम जानकारी के लिए पश्चिम बंगाल सरकार के आधिकारिक आदेश की पुष्टि करें।
चित्रकूट: प्रेम प्रसंग को लेकर शुरू हुआ विवाद एक परिवार के लिए दर्दनाक घटना में बदल गया। आरोप है कि युवती के परिजनों की ओर से पुलिस में शिकायत किए जाने से नाराज एक युवक तमंचा लेकर उसके घर पहुंचा और वहां मौजूद चाचा-चाची पर गोली चला दी। गोली लगने से चाची की मौत हो गई, जबकि चाचा गंभीर रूप से घायल हो गए। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। पुलिस उसकी तलाश में जुट गई।
प्रेम प्रसंग को लेकर पहले भी हुआ था विवाद
यह मामला उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले के मऊ थाना क्षेत्र के जोरवारा गांव का बताया गया है। पुलिस के मुताबिक, गांव के निवासी श्यामधर मिश्रा उर्फ बबुआ का एक युवती के साथ प्रेम प्रसंग था। युवती के परिजनों ने पहले भी इस मामले को लेकर पुलिस से शिकायत की थी।
पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह के अनुसार, एक दिन युवती घर की छत से कूदकर कहीं चली गई थी। परिजनों ने उसकी तलाश की तो वह घर से कुछ दूरी पर खड़े एक ट्रक में युवक के साथ मिली। इसके बाद परिवार ने डायल 112 पर सूचना देकर पुलिस को बुलाया और युवक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।
बताया गया कि मामला पुलिस तक पहुंचने के बाद दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ गया था। हालांकि, घटना के पीछे की पूरी वजह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
देर शाम घर पहुंचा युवक, फायरिंग से मची अफरातफरी
रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार देर शाम करीब साढ़े आठ बजे आरोपी तमंचा लेकर युवती के घर पहुंचा। आरोप है कि वहां उसने युवती के चाचा और चाची पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। गोली लगने से दोनों गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़े।
अचानक हुई फायरिंग से घर में चीख-पुकार मच गई। गोली चलने की आवाज सुनकर परिजन और आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। इस बीच आरोपी वहां से फरार हो गया।
परिजन आनन-फानन में दोनों घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रामनगर लेकर पहुंचे। वहां चिकित्सकों ने करीब 35 वर्षीय चाची को मृत घोषित कर दिया। वहीं, लगभग 40 वर्षीय चाचा की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें बेहतर इलाज के लिए प्रयागराज रेफर कर दिया गया।
पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा
घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। महिला के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू करते हुए आरोपी की तलाश तेज कर दी।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, युवती के परिवार की ओर से पहले की गई शिकायत और उसके बाद हुई इस वारदात समेत सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।
शिकायत से नाराजगी की बात, जांच में सामने आएगी पूरी सच्चाई
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, पुलिस में शिकायत दर्ज होने से नाराजगी को वारदात की संभावित वजह बताया जा रहा है। हालांकि, घटना के पीछे की वास्तविक परिस्थितियों और आरोपी की
जबलपुर: मध्य प्रदेश के जबलपुर में घरेलू विवाद से जुड़ी एक घटना ने इलाके में सनसनी फैला दी। गोरखपुर थाना क्षेत्र के कैलाशपुरी गुप्तेश्वर में एक व्यक्ति की कुल्हाड़ी से हमला कर हत्या किए जाने का मामला सामने आया। हत्या का आरोप उसकी पत्नी पर लगा, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इस घटना का सबसे संवेदनशील पहलू दंपती का तीन साल का मासूम बेटा है, जिसकी देखभाल को लेकर परिवार और आसपास के लोगों की चिंता बढ़ गई।
घरेलू विवाद के बाद पति पर हमले का आरोप
मृतक की पहचान नितिन जायसवाल के रूप में बताई गई है। वह पुताई का काम करता था। पुलिस से मिली प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, पति-पत्नी के बीच लंबे समय से घरेलू विवाद चल रहा था। आरोप है कि पति के शराब पीने और नशे की हालत में मारपीट करने को लेकर दोनों के बीच अक्सर झगड़े होते थे।
घटना वाले दिन भी दंपती के बीच विवाद होने की बात सामने आई है। बताया गया कि दोपहर में झगड़ा हुआ था, जो कुछ समय बाद शांत हो गया। हालांकि, शाम को दोनों के बीच दोबारा विवाद शुरू हो गया। इसी दौरान पत्नी पर कुल्हाड़ी से पति के सिर और चेहरे पर कई वार करने का आरोप है। गंभीर चोटों के कारण नितिन की मौत हो गई।
फिलहाल विवाद के दौरान क्या-क्या हुआ और हमला किन परिस्थितियों में किया गया, इसकी जांच पुलिस कर रही है।
शोर सुनकर पहुंचे पड़ोसी, घर के अंदर मिला शव
घर से चीख-पुकार और शोर सुनाई देने पर पड़ोसी मौके पर पहुंचे। वहां नितिन खून से लथपथ हालत में पड़ा मिला। घटना की जानकारी पुलिस को दी गई, जिसके बाद गोरखपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की।
पुलिस ने आरोपी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया। घटनास्थल से वारदात में इस्तेमाल की गई बताई जा रही कुल्हाड़ी भी जब्त की गई है। पुलिस अब घटना से जुड़े साक्ष्यों और आसपास के लोगों से मिली जानकारी के आधार पर मामले की पड़ताल कर रही है।
सात साल पहले हुई थी शादी, तीन साल का है बेटा
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नितिन और उसकी पत्नी की शादी करीब सात साल पहले हुई थी। दोनों का एक तीन वर्षीय बेटा है। बताया जाता है कि पति-पत्नी के बीच पहले भी कई बार विवाद हुआ करता था और पड़ोसियों ने कुछ मौकों पर बीच-बचाव भी किया था।
हालांकि, पूर्व में घरेलू हिंसा को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज हुई थी या नहीं, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। पति के शराब पीने और कथित मारपीट से संबंधित आरोपों की भी जांच की जानी है।
बेटे की देखभाल को लेकर कही गई यह बात
घटना के बाद सामने आई जानकारी के मुताबिक, आरोपी महिला ने पड़ोसियों से अपने परिवार को सूचना देने की बात कही थी, ताकि वे उसके तीन साल के बेटे की देखभाल कर सकें।
बताया गया कि उसने पति के साथ होने वाले विवादों और कथित मारपीट से परेशान होने की बात भी कही थी। हालांकि, महिला के कथित बयान का पूरा विवरण और उसकी परिस्थितियों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
इस घटना के बाद मासूम बच्चे की देखभाल का सवाल महत्वपूर्ण हो गया है। पिता की मौत और मां की गिरफ्तारी के बीच बच्चे की जिम्मेदारी किसे सौंपी गई है, इसकी आधिकारिक जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है।
पुलिस जांच के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई
पुलिस ने हत्या के आरोप में महिला को गिरफ्तार कर मामले की जांच शुरू कर दी है। जब्त किए गए हथियार, घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्य, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और प्रत्यक्षदर्शियों की जानकारी जांच में महत्वपूर्ण हो सकती है।
फिलहाल पति की हत्या के पीछे घरेलू विवाद को संभावित पृष्ठभूमि बताया जा रहा है। हालांकि, घटना की पूरी परिस्थितियों और लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगी।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर तैयार की गई है। घटना से जुड़े आरोपों और कथित बयानों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है। मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही तय होंगे।
साइबर ठगी के मामलों में अपराधी हमेशा अपने बैंक खाते का इस्तेमाल नहीं करते। कई बार ठगी से मिली रकम को आम लोगों के बैंक खातों में मंगवाया जाता है और फिर वहां से दूसरे खातों में भेज दिया जाता है। ऐसे खातों को म्यूल अकाउंट (Mule Account) कहा जाता है। कुछ लोग कमीशन कमाने के लालच में खुद अपना खाता ठगों को दे देते हैं, जबकि कई लोगों के खाते धोखे से इस्तेमाल किए जाते हैं। परेशानी तब बढ़ती है, जब ठगी की रकम का लेनदेन सामने आने पर जांच एजेंसियां सबसे पहले खाते के असली मालिक तक पहुंचती हैं।
बिहार के पटना और उत्तर प्रदेश के देवरिया समेत कई जगहों से म्यूल अकाउंट से जुड़े मामले सामने आने की रिपोर्टें आई हैं। कुछ मामलों में खातों से बड़ी रकम के लेनदेन का पता चला। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि म्यूल अकाउंट क्या होता है, साइबर ठग इसका इस्तेमाल कैसे करते हैं और आम लोग इस जाल से कैसे बच सकते हैं।
क्या होता है म्यूल अकाउंट?
अंग्रेजी में ‘म्यूल’ का अर्थ खच्चर होता है, जो बोझ ढोता है। साइबर अपराध की दुनिया में म्यूल अकाउंट उस बैंक खाते को कहा जाता है, जिसका इस्तेमाल ठगी से हासिल पैसे को प्राप्त करने, एक जगह से दूसरी जगह भेजने या नकद निकालने के लिए किया जाता है।
उदाहरण के लिए, मान लीजिए किसी व्यक्ति से ऑनलाइन ठगी करके 50 हजार रुपये ले लिए गए। ठग यह रकम अपने खाते में लेने के बजाय किसी दूसरे व्यक्ति के बैंक खाते में मंगवाते हैं। फिर उस खाते से पैसा कई अन्य खातों में भेजा जाता है या नकद निकाल लिया जाता है। इस तरह रकम का रास्ता जटिल हो जाता है और असली अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है।
म्यूल अकाउंट का मालिक हमेशा ठगी में शामिल व्यक्ति ही हो, ऐसा जरूरी नहीं है। कुछ लोगों को कमीशन का लालच देकर खाता इस्तेमाल करने की अनुमति ली जाती है। वहीं, कुछ मामलों में पहचान संबंधी दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल करके या धोखे से खाता खुलवाया जा सकता है।
कमीशन के लालच में कैसे फंसते हैं लोग?
साइबर अपराधी अक्सर ऐसे लोगों को निशाना बनाते हैं, जिन्हें जल्दी पैसे कमाने की जरूरत होती है या जो बैंकिंग से जुड़े जोखिमों से पूरी तरह परिचित नहीं होते। बेरोजगार युवाओं, ग्रामीणों और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को अलग-अलग बहाने से फंसाने की कोशिश की जा सकती है।
ठग इन तरीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं:
घर बैठे कमाई का ऑफर: कहा जाता है कि अपना बैंक खाता इस्तेमाल करने दें और हर लेनदेन पर कमीशन पाएं।
नौकरी का झांसा: नौकरी दिलाने या दस्तावेजों के सत्यापन के बहाने बैंक खाते की जानकारी मांगी जाती है।
लोन या सरकारी योजना का लालच: खाते या कंपनी के नाम पर लेनदेन कराने का प्रस्ताव दिया जाता है।
ATM और बैंकिंग जानकारी लेना: खाते के साथ ATM कार्ड, PIN, चेकबुक, इंटरनेट बैंकिंग या खाते से जुड़े मोबाइल नंबर का नियंत्रण हासिल करने की कोशिश की जाती है।
ऐसे प्रस्तावों में व्यक्ति को लग सकता है कि वह केवल किसी का पैसा आगे भेज रहा है। लेकिन यदि उसके खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम घुमाने के लिए होता है, तो उसे बैंक और पुलिस की जांच का सामना करना पड़ सकता है।
ठगी का पैसा कई खातों से क्यों घुमाया जाता है?
साइबर ठगी करने वाले अपने असली बैंक खातों और पहचान को जांच से दूर रखने की कोशिश कर सकते हैं। इसके लिए रकम को कई खातों में बांटकर भेजा जाता है। कुछ मामलों में डिजिटल वॉलेट, अलग-अलग बैंक खाते और नकद निकासी जैसे तरीकों का भी इस्तेमाल किया जाता है।
इस प्रक्रिया में म्यूल अकाउंट एक तरह की कड़ी बन जाता है। जब पीड़ित व्यक्ति बैंक या साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करता है, तो जांच के दौरान सबसे पहले उस खाते की जानकारी सामने आ सकती है, जिसमें पैसा पहुंचा था।
यदि रकम तेजी से कई खातों में भेज दी गई हो, तो उसका पूरा रास्ता पता लगाने में समय लग सकता है। यही वजह है कि बैंकिंग लेनदेन का रिकॉर्ड और समय पर की गई शिकायत जांच के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।
एक खाते में करोड़ों रुपये का लेनदेन कैसे हो सकता है?
म्यूल अकाउंट से जुड़े मामलों में कभी-कभी बहुत बड़ी रकम के लेनदेन की जानकारी सामने आती है। उपलब्ध रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ के सूरजपुर से जुड़े एक मामले का उल्लेख है, जिसमें पुलिस के मुताबिक एक संस्था के खाते से 21 राज्यों के करीब 150 लोगों से कथित तौर पर ठगी गई 113 करोड़ रुपये से अधिक की रकम के लेनदेन का पता चला था।
यह आंकड़ा उस मामले में बताए गए लेनदेन से जुड़ा है। इसे किसी एक व्यक्ति की कमाई या खाते में मौजूद शेष राशि नहीं समझना चाहिए। किसी खाते से गुजरने वाली कुल रकम और उसमें बची हुई रकम अलग-अलग होती हैं।
इसी तरह बिहार के पटना में ग्रामीणों के नाम पर बड़ी संख्या में खाते खुलवाए जाने के मामले की रिपोर्ट सामने आई थी। ऐसे मामलों में जांच का उद्देश्य यह पता लगाना होता है कि खाते किसने खुलवाए, उनका वास्तविक संचालन कौन कर रहा था और उनमें आने वाली रकम कहां से आई तथा आगे कहां भेजी गई।
म्यूल अकाउंट में खाता देने वाला भी मुसीबत में पड़ सकता है
कई लोगों को लगता है कि उन्होंने केवल अपना बैंक खाता इस्तेमाल करने दिया है, इसलिए किसी अपराध की जिम्मेदारी उनकी नहीं होगी। लेकिन मामला इतना सीधा नहीं है।
यदि किसी खाते का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम प्राप्त करने या आगे भेजने में होता है, तो बैंक लेनदेन की जांच कर सकता है। संदिग्ध गतिविधि मिलने पर खाते पर रोक लग सकती है और संबंधित व्यक्ति से पूछताछ भी हो सकती है। यदि किसी व्यक्ति की भूमिका या जानकारी सामने आती है, तो उसके खिलाफ लागू कानूनों के तहत कार्रवाई हो सकती है।
हालांकि, किसी खाते में संदिग्ध रकम आने मात्र से यह अपने आप साबित नहीं होता कि खाताधारक अपराध में जानबूझकर शामिल था। जांच में यह देखा जाता है कि खाते का इस्तेमाल कैसे हुआ, व्यक्ति की भूमिका क्या थी और उसे लेनदेन की जानकारी थी या नहीं।
इसलिए किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना बैंक खाता, ATM कार्ड, PIN, OTP या बैंकिंग ऐप का नियंत्रण देना गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।
म्यूल अकाउंट से कैसे बचें? ये सावधानियां जरूर अपनाएं
1. अपना बैंक खाता किसी दूसरे को इस्तेमाल न करने दें। कोई व्यक्ति कमीशन देने का वादा करे या कहे कि केवल पैसा आगे भेजना है, तब भी ऐसा प्रस्ताव स्वीकार न करें।
2. ATM कार्ड, PIN और OTP साझा न करें। बैंक कर्मचारी होने का दावा करने वाला व्यक्ति भी आपसे OTP या गोपनीय PIN मांगने का अधिकारी नहीं है।
3. खाते में अनजान रकम आए तो सतर्क रहें। रकम को खुद खर्च न करें और न ही किसी के कहने पर दूसरे खाते में भेजें। तुरंत अपने बैंक को सूचित करें और आधिकारिक निर्देश लें।
4. नौकरी या लोन के नाम पर बैंकिंग नियंत्रण न सौंपें। किसी भर्ती, सरकारी योजना या कर्ज की प्रक्रिया में खाते का नियंत्रण देने की मांग हो, तो उसकी वैधता की पुष्टि करें।
5. अपने नाम पर जारी सिम की जांच करें। भारत सरकार के संचार साथी पोर्टल पर अपने नाम से जारी मोबाइल कनेक्शनों की जानकारी देखी जा सकती है। किसी अनजान कनेक्शन की जानकारी मिले, तो आधिकारिक प्रक्रिया से शिकायत करें।
6. बैंक के अलर्ट पर ध्यान दें। खाते में अनजान लेनदेन या असामान्य गतिविधि का संदेश आए तो उसे नजरअंदाज न करें। बैंक से उसके आधिकारिक नंबर या शाखा के जरिए संपर्क करें।
7. परिवार और आसपास के लोगों को जागरूक करें। खासकर बुजुर्गों, ग्रामीणों और नौकरी तलाश रहे युवाओं को समझाएं कि आसान कमाई के नाम पर बैंक खाता देना भारी पड़ सकता है।
अगर म्यूल अकाउंट के जरिए ठगी हो जाए तो क्या करें?
यदि आपके खाते से अनधिकृत लेनदेन हो गया है या आपको पता चलता है कि आपके खाते में ठगी की रकम आई है, तो देर न करें।
तुरंत अपने बैंक से संपर्क करके संदिग्ध लेनदेन की सूचना दें।
भारत में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत के लिए 1930 पर कॉल करें।
आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
बैंक के संदेश, लेनदेन की रसीदें, कॉल विवरण और संबंधित चैट जैसे उपलब्ध सबूत सुरक्षित रखें।
यदि आपके खाते का इस्तेमाल आपकी जानकारी के बिना हुआ है, तो बैंक और पुलिस को यह बात स्पष्ट रूप से बताएं।
जल्दी शिकायत करने से संबंधित खाते या रकम पर समय रहते कार्रवाई होने की संभावना बढ़ सकती है, हालांकि पैसे की वापसी की गारंटी नहीं होती।
याद रखें, बैंक खाता आपकी जिम्मेदारी है
म्यूल अकाउंट का जाल इसलिए खतरनाक है क्योंकि इसमें असली साइबर अपराधी पर्दे के पीछे रह सकते हैं, जबकि बैंक खाते का नाम सामने आ जाता है। कुछ हजार रुपये के कमीशन के लिए अपना खाता या बैंकिंग जानकारी सौंपना लंबे समय तक परेशानी का कारण बन सकता है।
साफ नियम है: अपने खाते में किसी अनजान व्यक्ति का पैसा मंगवाने और उसे आगे भेजने का काम न करें। बैंक खाता केवल अपने वैध लेनदेन के लिए इस्तेमाल करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत बैंक तथा संबंधित अधिकारियों को दें।
डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध रिपोर्टों और सामान्य साइबर सुरक्षा संबंधी जानकारी पर आधारित है। इसमें बताए गए मामलों के आंकड़े संबंधित रिपोर्टों में किए गए दावों के अनुसार हैं; किसी विशेष मामले की अंतिम स्थिति आधिकारिक जांच से ही स्पष्ट होगी।
हैदराबाद: तेलंगाना के हैदराबाद में एक 29 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर की ऊंची इमारत से गिरने के बाद मौत हो गई। घटना नानकरामगुड़ा स्थित गोल्फ एज अपार्टमेंट की है, जहां इंजीनियर महज दो दिन पहले ही किराए के फ्लैट में रहने आया था। अचानक हुई इस घटना से अपार्टमेंट परिसर में हड़कंप मच गया।
मृतक की पहचान उप्पला भरत के रूप में हुई है। वह तेलंगाना के सूर्यापेट जिले का रहने वाला था और बेंगलुरु की एक सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करता था।
30वीं मंजिल से गिरकर कार पर जा गिरा इंजीनियर
जानकारी के मुताबिक, सोमवार को भरत अपार्टमेंट की 30वीं मंजिल से नीचे गिर गया। बताया गया है कि वह परिसर के पार्किंग क्षेत्र में खड़ी एक कार पर जा गिरा। इस दौरान उसे गंभीर चोटें आईं।
घटना के बाद स्थानीय लोगों और अपार्टमेंट प्रबंधन की मदद से उसे तुरंत नजदीकी निजी अस्पताल पहुंचाया गया। हालांकि, डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।
दो दिन पहले ही किराए पर लिया था फ्लैट
उप्पला भरत मूल रूप से सूर्यापेट जिले का निवासी था और बेंगलुरु की एक सॉफ्टवेयर कंपनी में कार्यरत था। रिपोर्ट के अनुसार, वह हाल ही में हैदराबाद आया था और घटना से महज दो दिन पहले ही गोल्फ एज अपार्टमेंट में किराए पर रहने लगा था।
नए फ्लैट में शिफ्ट होने के कुछ ही समय बाद हुई इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि वह 30वीं मंजिल से किन परिस्थितियों में नीचे गिरा।
रिश्तेदार की शिकायत पर मामला दर्ज
घटना के बाद भरत के रिश्तेदार उप्पला किशोर की शिकायत पर साइबराबाद के गाचीबौली पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए उस्मानिया जनरल अस्पताल भेज दिया है।
फिलहाल पुलिस घटना की परिस्थितियों की जांच कर रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि भरत के गिरने की वजह क्या थी और घटना के समय वहां क्या परिस्थितियां थीं। जांच पूरी होने के बाद ही मौत के कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के आधार पर तैयार की गई है। घटना से जुड़े तथ्यों और मौत की परिस्थितियों की पुष्टि जांच के निष्कर्षों के बाद ही हो सकेगी।
लखनऊ में शिवा शर्मा हत्याकांड की जांच के बीच आरोपी श्रद्धा दुबे और उसकी बहन रश्मि दुबे की तलाश तेज हो गई है। पुलिस दोनों को पकड़ने के लिए लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। इस बीच कथित VIP संपर्कों, सोशल मीडिया गतिविधियों, आर्थिक लेनदेन और नेपाल सीमा तक पहुंचने की चर्चाओं ने मामले को और पेचीदा बना दिया है। हालांकि, हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग नेटवर्क से जुड़े आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग के आरोपों की जांच
पुलिस जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, इस बात की पड़ताल की जा रही है कि क्या श्रद्धा दुबे का किसी कथित ब्लैकमेलिंग नेटवर्क से संबंध था। यह भी जांच का विषय है कि कहीं प्रभावशाली लोगों से संपर्कों का इस्तेमाल दबाव बनाने या आर्थिक लाभ लेने के लिए तो नहीं किया गया।
फिलहाल इन आरोपों को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। पुलिस विभिन्न दावों और संभावित कड़ियों की जांच कर रही है।
हत्याकांड के बाद VIP संपर्कों पर चर्चा
शिवा शर्मा हत्याकांड में श्रद्धा का नाम सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर उसके कथित संपर्कों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कुछ प्रभावशाली लोगों ने उसे सोशल मीडिया पर अनफॉलो कर दिया है। इनमें एक वरिष्ठ नौकरशाह का नाम भी चर्चा में बताया जा रहा है।
इसके अलावा, कुछ राजनीतिक नेताओं से उसके संपर्क होने के दावे भी सामने आए हैं। हालांकि, इन संपर्कों का किसी कथित गैरकानूनी गतिविधि से संबंध होने की पुष्टि नहीं हुई है।
चार पुलिस टीमें तलाश में जुटीं
श्रद्धा दुबे और रश्मि दुबे की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने चार टीमें लगाई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, लखनऊ के अलावा सीतापुर और रायबरेली में भी संभावित ठिकानों पर दबिश दी गई है।
पुलिस नेपाल सीमा से जुड़े संभावित रास्तों की भी जांच कर रही है। हालांकि, दोनों बहनों के नेपाल में छिपे होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
रिजवान के बयान से सामने आया रूपईडीहा का नाम
जांच के दौरान श्रद्धा के पुराने परिचित रिजवान ने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि वह दोनों बहनों को नेपाल सीमा के पास रूपईडीहा तक छोड़कर आया था।
उसके दावे के अनुसार, श्रद्धा ने अस्पताल से फोन कर उसे बुलाया था। इसके बाद वह अपनी कार से दोनों को रूपईडीहा तक ले गया और फिर वापस लौट आया। उसने यह भी दावा किया कि वहां से श्रद्धा किसी अन्य व्यक्ति के साथ आगे जाने वाली थी।
पुलिस इस बयान की सत्यता की जांच कर रही है। यह स्पष्ट होना अभी बाकी है कि दोनों बहनें इसके बाद कहां गईं और क्या किसी अन्य व्यक्ति ने उनकी मदद की।
कौन है श्रद्धा दुबे?
उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, श्रद्धा दुबे मेकअप आर्टिस्ट, मॉडल और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के रूप में जानी जाती है। बताया गया है कि वह कुछ साल पहले अपने पति से अलग होकर लखनऊ में रहने लगी थी। उसका एक बेटा भी है, जो अपने पिता के साथ रहता है।
शिवा शर्मा के साथ उसके संबंधों और व्यक्तिगत संपर्कों को लेकर अब पुलिस जांच कर रही है। हालांकि, उसके पेशे या सोशल मीडिया पर पहचान को किसी कथित अपराध का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
छह महीने पहले हुई थी शिवा से मुलाकात
रिपोर्ट के मुताबिक, शिवा शर्मा और श्रद्धा दुबे की मुलाकात करीब छह महीने पहले एक क्लब में हुई थी। इसके बाद दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और वे पिछले चार महीनों से लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे थे।
परिजनों का दावा है कि शिवा इस रिश्ते को लेकर गंभीर था और श्रद्धा को अपने परिवार से भी मिलवा चुका था। परिवार के अनुसार, शादी की चर्चा के बाद दोनों के बीच तनाव बढ़ने लगा था। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि उनके रिश्ते में विवाद की वजह क्या थी और उसका हत्याकांड से कोई संबंध था या नहीं।
पुराने विवाद और आर्थिक लेनदेन भी जांच के दायरे में
मामले में शिवा के पुराने आपराधिक मामले का भी जिक्र सामने आया है। परिजनों ने आरोप लगाया है कि पुराने मामले और कुछ निजी विवादों को लेकर दोनों के बीच तनाव था। चेन और ब्रेसलेट से जुड़े विवाद का भी उल्लेख किया गया है।
पुलिस इन दावों की पड़ताल कर रही है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कथित आर्थिक विवादों और हत्या की घटना के बीच क्या संबंध था।
गिरफ्तारी के बाद खुल सकते हैं कई राज
शिवा शर्मा हत्याकांड में अब तक कई सवालों के जवाब मिलना बाकी है। श्रद्धा और रश्मि कहां हैं? रूपईडीहा तक पहुंचने में किसकी भूमिका थी? कथित VIP संपर्कों और आर्थिक लेनदेन की वास्तविकता क्या है? इन सवालों का जवाब पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों से ही सामने आएगा।
फिलहाल पुलिस दोनों बहनों की तलाश कर रही है। मामले में लगाए गए आरोपों और कथित संपर्कों को जांच पूरी होने तक पुष्ट तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के आधार पर तैयार की गई है। इसमें शामिल आरोपों और दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और साक्ष्यों के आधार पर ही तय होंगे।