Author: contact.satyareport@gmail.com

  • शरीर में विटामिन्स की कमी के 5 संकेत, इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें..​​​​​​

    शरीर में विटामिन्स की कमी के 5 संकेत, इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें..​​​​​​

    हमारा शरीर कई जरूरी विटामिन और मिनरल्स पर निर्भर करता है। जब डाइट से पर्याप्त पोषक तत्व नहीं मिलते, तो शरीर कुछ संकेतों के जरिए इसकी जानकारी दे सकता है। हालांकि, ये लक्षण हमेशा विटामिन की कमी के कारण ही हों, ऐसा जरूरी नहीं है। सही कारण जानने के लिए डॉक्टर की सलाह और जरूरत पड़ने पर ब्लड टेस्ट जरूरी हो सकता है।

    1. हर समय थकान और कमजोरी महसूस होना

    अगर पर्याप्त आराम के बावजूद लगातार थकान, कमजोरी या चक्कर जैसी समस्या रहती है, तो यह कुछ पोषक तत्वों की कमी से जुड़ी हो सकती है। खासकर विटामिन B12, B6 और फोलेट की कमी से एनीमिया हो सकता है, जिसके कारण थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है।

    2. बाल झड़ना और नाखून कमजोर होना

    बालों का लगातार झड़ना या नाखूनों का कमजोर और भंगुर होना कई कारणों से हो सकता है। कुछ मामलों में बायोटिन जैसे पोषक तत्वों की कमी भी इसकी वजह बन सकती है। हालांकि, केवल इन लक्षणों के आधार पर विटामिन की कमी की पुष्टि नहीं की जा सकती।

    3. मुंह में छाले या होंठों के किनारों पर दरारें

    बार-बार मुंह में छाले होना, जीभ में जलन या होंठों के कोनों पर दरारें पड़ना कुछ B-विटामिन्स, आयरन या अन्य पोषक तत्वों की कमी से जुड़ा हो सकता है। लेकिन संक्रमण और दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी ऐसे लक्षण पैदा कर सकती हैं।

    4. मसूड़ों से खून आना या आसानी से चोट लगना

    बिना किसी स्पष्ट कारण के मसूड़ों से खून आना या शरीर पर आसानी से नीले निशान पड़ना भी पोषण संबंधी कमी का संकेत हो सकता है। विशेष रूप से गंभीर विटामिन C की कमी में मसूड़ों से खून आने और आसानी से चोट लगने जैसे लक्षण देखे जा सकते हैं।

    5. हाथ-पैर में झनझनाहट या सुन्नपन

    हाथ-पैर में बार-बार झनझनाहट, सुन्नपन या संतुलन बिगड़ने जैसी समस्या को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। विटामिन B12 की कमी लंबे समय तक रहने पर नसों को प्रभावित कर सकती है और ऐसे लक्षण पैदा हो सकते हैं।

    क्या करें?

    अगर इनमें से कोई लक्षण लगातार बना हुआ है, तो खुद से विटामिन की गोलियां या हाई-डोज सप्लीमेंट लेना शुरू न करें। संतुलित डाइट लें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से जांच करवाएं। क्योंकि एक जैसे लक्षण कई अलग-अलग कारणों से हो सकते हैं और सप्लीमेंट की जरूरत व्यक्ति की वास्तविक कमी पर निर्भर करती है।

    ध्यान रखें: विटामिन की कमी की पुष्टि केवल लक्षण देखकर नहीं की जा सकती। डॉक्टर आपकी स्थिति के अनुसार जांच की सलाह दे सकते हैं।

  • खुदाई में मिली 200 साल पुरानी शराब फैक्ट्री, पहाड़ों की गहराई में होता था धंधा..

    खुदाई में मिली 200 साल पुरानी शराब फैक्ट्री, पहाड़ों की गहराई में होता था धंधा..

    Featured Image

    स्कॉटलैंड की दुर्गम पहाड़ियों और गहरे नालों के बीच पुरातत्वविदों ने एक ऐसा राज खोज निकाला है, जो पिछले 200 सालों से दुनिया की नजरों से ओझल था. पर्थशायर के ‘बेन लॉयर्स नेशनल नेचर रिजर्व’ में खुदाई के दौरान एक अवैध व्हिस्की डिस्टिलरी (शराब बनाने का कारखाना) के अवशेष मिले हैं. यह खोज उस दौर की याद दिलाती है, जब टैक्स से बचने के लिए लोग गुपचुप तरीके से पहाड़ों के बीच व्हिस्की तैयार किया करते थे. इस सीक्रेट जगह से तांबे के स्टिल का एक हिस्सा, पत्थर की संरचनाएं और लकड़ी के खंभे बरामद हुए हैं. जानकारों का मानना है कि यह एक बोथी (Bothy) यानी एक छोटा सा झोंपड़ा था, जिसे विशेष रूप से शराब बनाने के उपकरणों को छिपाने के लिए बनाया गया था.

    बता दें कि 1788 के एक्साइज एक्ट के बाद जब छोटे घरेलू उपकरणों पर प्रतिबंध लगा दिया गया, तब 18वीं और 19वीं शताब्दी के दौरान स्कॉटलैंड में अवैध व्हिस्की का व्यापार चरम पर था. नेशनल ट्रस्ट फॉर स्कॉटलैंड (NTS) के पुरातत्वविदों के अनुसार, इस कारखाने को बहुत ही चालाकी से ‘लॉयर्स बर्न’ नामक झरने के पास एक संकरे नाले में बनाया गया था. जगह का चुनाव इस तरह किया गया था कि झरने का मोड़ इसे ऊपर और नीचे दोनों तरफ से पूरी तरह ढंक लेता था. खुदाई में पत्थर के फर्श के नीचे एक नाली, एक चूल्हा और छत को सहारा देने वाला लकड़ी का खंभा मिला है. सबसे रोमांचक खोज तांबे के मिश्र धातु का वह टुकड़ा है, जो शराब बनाने वाली मशीन के दो हिस्सों को जोड़ने के काम आता था.

    जल्दबाजी में छूटा सबूत: तस्करों और अधिकारियों के बीच चूहे-बिल्ली का खेल
    पुरातत्व प्रमुख डेरेक अलेक्जेंडर का कहना है कि यह खोज शराब तस्करों और आबकारी अधिकारियों के बीच चलने वाले दिमागी युद्ध की गवाह है. अगर अधिकारियों ने इस ठिकाने पर छापा मारा होता, तो वे पूरे उपकरण को नष्ट कर देते. लेकिन वहां तांबे का हिस्सा मिलना यह संकेत देता है कि तस्करों को अधिकारियों के आने की भनक लग गई थी और वे जल्दबाजी में अपना सामान समेटकर भाग निकले. अफरा-तफरी में वे मशीन का यह छोटा सा हिस्सा वहीं भूल गए, जो आज 200 साल बाद इतिहास की गवाही दे रहा है. उस दौर में पहाड़ियों में अवैध व्हिस्की बनाना केवल एक व्यापार नहीं, बल्कि सरकारी कानूनों के खिलाफ ‘सामुदायिक प्रतिरोध’ का एक तरीका माना जाता था. तस्कर बहुत कम सामान के साथ यात्रा करते थे ताकि पकड़े जाने पर कोई सबूत न मिले, इसलिए ऐसे अवशेषों का मिलना बेहद दुर्लभ है.

    स्कॉटलैंड के अन्य हिस्सों में भी दबे मिले हैं ऐसे ही राज
    यह पहली बार नहीं है जब स्कॉटलैंड की धरती ने अपने नशीले इतिहास को उगला हो. इससे पहले 2008 में ग्लेन एफ्रिक में वानिकी कर्मचारियों को एक छोटी इमारत की नींव मिली थी, जिसे बाद में राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित किया गया. वहीं 2019 में लोच लोमोंड नेशनल पार्क में भी दो पुराने फार्मस्टेड की पहचान अवैध डिस्टिलरी के रूप में की गई थी. बेन लॉयर्स रिजर्व में अब तक पांच ऐसे ठिकाने मिल चुके हैं, लेकिन यह पहली बार है जब किसी साइट से व्हिस्की स्टिल का कोई वास्तविक हिस्सा बरामद हुआ है. ऐसे में ये खोजें साबित करती हैं कि स्कॉटलैंड की पहाड़ियों में सदियों पहले तस्करी का एक समानांतर साम्राज्य फलता-फूलता था.

  • असली डिब्बा… लेकिन दवा नकली! कैंसर मैडिसिन के नाम पर जहर परोस रहा था ‘डेथ सिंडिकेट’, पकड़े गए 17 आरोपी..?

    असली डिब्बा… लेकिन दवा नकली! कैंसर मैडिसिन के नाम पर जहर परोस रहा था ‘डेथ सिंडिकेट’, पकड़े गए 17 आरोपी..?

    असली डिब्बा... लेकिन दवा नकली! कैंसर मैडिसिन के नाम पर जहर परोस रहा था 'डेथ सिंडिकेट', पकड़े गए 17 आरोपी

    दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है. पुलिस के इंटर स्टेट सेल ने महंगी एंटी-कैंसर दवाओं की खरीद-फरोख्त करने वाले गिरोह के 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. यह गिरोह अवैध तरीके से अस्पतालों व सरकारी संस्थानों से निकाली गई कैंसर रोधी दवाओं के साथ ही नकली दवाओं को भी बेचते थे. पुलिस ने उनके ठिकानों से करीब 9 करोड़ रुपये कीमत की दवाएं बरामद की हैं.

    पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के पास से 588 भरी हुई एंटी-कैंसर इंजेक्शन की शीशियां, 6 खाली वायल, 7 खाली दवाओं के डिब्बे और दूसरी तरह की 3021 दवाएं मिली हैं. इसके अलावा करीब 50 लाख रुपये नकद, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, रजिस्टर, डायरी और दवाओं की पैकिंग में इस्तेमाल होने वाला सामान भी बरामद हुआ है.

    अस्पतालों से दवाएं निकालकर बाजार में बेचते थे

    जांच में सामने आया है कि गिरोह तीन तरीकों से महंगी कैंसर की दवाएं जुटाता था. कुछ दवाएं गैरकानूनी और अनधिकृत स्रोतों से खरीदी जाती थीं, जबकि कुछ दवाएं अस्पतालों में कैंसर मरीजों के लिए रखी होती थीं. उन्हें चोरी-छिपे बाहर निकालकर बेच दिया जाता था. इसके अलावा सरकारी संस्थानों और गोदामों से सप्लाई होने वाली दवाओं को भी अवैध तरीके से डायवर्ट किया जाता था.

    आरोपी बिना वैध बिल, खरीद रिकॉर्ड, ड्रग लाइसेंस और दूसरे जरूरी दस्तावेजों के दवाओं का कारोबार कर रहे थे. इन दवाओं को दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, हैदराबाद, हरियाणा, उत्तर प्रदेश समेत कई इलाकों में अलग-अलग लोगों के जरिए पहुंचाया जाता था.

    असली डिब्बों में पैक कर बाजार में खपाते थे

    पुलिस की जांच में यह भी पता चला कि गिरोह के सदस्य दवाओं के पुराने और खाली डिब्बों को संभालकर रखते थे. बाद में इन्हीं डिब्बों का इस्तेमाल दोबारा पैकिंग में किया जाता था. दवाओं की पहचान छिपाने के लिए बैच नंबर, एमआरपी और अन्य जानकारी को केमिकल की मदद से हटाने की कोशिश की जाती थी.

    दवाओं की खेप तैयार करने के लिए थर्माकोल बॉक्स, बबल रोल, टेप और पॉलीथिन जैसी पैकिंग सामग्री का इस्तेमाल किया जाता था. दवाओं की खरीद-बिक्री और नकद लेनदेन का हिसाब रजिस्टर और डायरियों में रखा जाता था.

    ऐसे खुला गिरोह का राज

    क्राइम ब्रांच को 22 जून 2026 को इस गिरोह के बारे में गुप्त सूचना मिली थी. जांच के दौरान ईस्ट दिल्ली, रोहिणी और मुंबई में कई संदिग्ध ठिकानों का पता चला. इसके बाद 11 जुलाई को इंटर स्टेट सेल की सात टीमों ने दिल्ली और नवी मुंबई में ड्रग्स विभाग तथा स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर एक साथ छापेमारी की.

    छापेमारी में Darzalex, Imfinzi, Erbitux, Opdyta, Gazyva, Bavencio, Adcetris और Keytruda जैसी महंगी एंटी-कैंसर दवाएं बरामद हुईं. इसके बाद मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई गई. गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और उनकी निशानदेही पर लगातार छापेमारी करते हुए अब तक 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया है.

    अस्पताल के कर्मचारी भी जांच के घेरे में

    जांच में अस्पतालों से जुड़े कुछ कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आई है. पुलिस के अनुसार, कुछ आरोपी अस्पतालों में काम करते थे और मरीजों के लिए रखे गए एंटी-कैंसर इंजेक्शन को बाहर निकालकर गिरोह के दूसरे सदस्यों तक पहुंचाते थे. एक नर्सिंग इंचार्ज और अस्पताल में काम करने वाले अन्य लोगों की गिरफ्तारी भी इसी कड़ी में हुई है.

    एक आरोपी अस्पताल के ऑन्कोलॉजिस्ट के निजी सहायक के तौर पर काम कर चुका था. उसके घर से 108 एंटी-कैंसर वायल और 6.50 लाख रुपये नकद बरामद किए गए.

    337 इंजेक्शन एक आरोपी के पास मिले

    जांच के दौरान नोएडा के एक आरोपी के ठिकाने से अकेले 337 एंटी-कैंसर वायल और बड़ी मात्रा में दूसरी दवाएं बरामद हुईं. वहीं गुरुग्राम के एक आरोपी के वाहन से 12 वायल, अन्य दवाएं, पैकिंग सामग्री और 16.50 लाख रुपये नकद मिले.

    पुलिस के मुताबिक, गिरोह में मेडिकल स्टोर संचालक, दवा कारोबारी, अस्पताल कर्मचारी और बिचौलिये शामिल थे. आरोपी एक-दूसरे के जरिए दवाओं की सप्लाई आगे बढ़ाते थे.

    मरीजों की जान से खिलवाड़

    पुलिस का कहना है कि इस पूरे नेटवर्क की सबसे गंभीर बात यह है कि इसमें ऐसी दवाओं का अवैध कारोबार किया जा रहा था, जिनका इस्तेमाल कैंसर मरीजों के इलाज में होता है. नकली या संदिग्ध दवा मरीज की जान के लिए बेहद खतरनाक हो सकती है. यही वजह है कि पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह ने अब तक कितनी दवाएं बाजार में खपाईं और इनके खरीदार कौन-कौन थे.

    क्राइम ब्रांच अब गिरोह के बाकी सदस्यों, दवाओं के असली स्रोत, सप्लाई की पूरी कड़ी और पैसों के लेनदेन का पता लगा रही है. पुलिस को आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां तथा बरामदगी होने की उम्मीद है.

    (

  • क्या करीब आ गया कलयुग का अंत? जानें कालज्ञानम में दर्ज दुनिया के महाविनाश की डरावनी भविष्यावाणियां..?

    क्या करीब आ गया कलयुग का अंत? जानें कालज्ञानम में दर्ज दुनिया के महाविनाश की डरावनी भविष्यावाणियां..?

    Hindu Dharam: क्या करीब आ गया कलयुग का अंत? जानें कालज्ञानम में दर्ज दुनिया के महाविनाश की डरावनी भविष्यावाणियां

    भारत की धरती पर ऐसे कई संत और भविष्यवक्ता हुए हैं, जिनके बारे में माना जाता है कि उन्होंने आने वाले हजारों वर्षों से जुड़ी घटनाओं की भविष्यवाणियां की थीं. खास बात यह है कि इन भविष्यवाणियों को नास्त्रेदमस या बाबा वेंगा की भविष्यवाणियों की तरह रहस्यमय और सांकेतिक भाषा में नहीं, बल्कि अपेक्षाकृत स्पष्ट रूप में बताया गया है.

    इन्हीं प्रसिद्ध भविष्यवक्ताओं में आंध्र प्रदेश के सिद्ध संत श्री पोतुलूरी वीर ब्रह्मेंद्र स्वामी का नाम भी प्रमुखता से लिया जाता है. माना जाता है कि स्वामी वीर ब्रह्मेंद्र का जन्म वर्ष 1608 में हुआ था. उन्होंने तेलुगु भाषा में कालज्ञानम नामक ग्रंथ की रचना की थी. इस ग्रंथ में भविष्य में होने वाली कई घटनाओं का उल्लेख होने का दावा किया जाता है. समय के साथ कालज्ञानम से जुड़ी भविष्यवाणियां सोशल मीडिया और इंटरनेट पर काफी चर्चा में आने लगी हैं. यही वजह है कि भविष्यवाणियों को लेकर लोगों की दिलचस्पी लगातार बढ़ रही है.

    आने वाले समय से जुड़ी भविष्यवाणियां

    कालज्ञानम से जुड़ी कई ऐसी भविष्यवाणियां भी प्रचलित हैं, जिन्हें भविष्य में होने वाली घटनाओं से जोड़कर देखा जाता है. इनमें प्राकृतिक आपदाओं, जलवायु परिवर्तन, धार्मिक घटनाओं, महामारियों और बड़े युद्धों तक का उल्लेख होने का दावा किया जाता है. हालांकि इन दावों की व्याख्या अलग-अलग स्रोतों में अलग तरीके से मिलती है और इनकी प्रामाणिकता पर भी मतभेद हैं. लोकप्रिय रूप से बताई जाने वाली प्रमुख भविष्यवाणियां इस प्रकार हैं.

    लाल बारिश और समुद्र का बढ़ता जलस्तर

    कहा जाता है कि भविष्य में आसमान से लाल रंग की वर्षा होगी. साथ ही समुद्र का जलस्तर बढ़ने के कारण कई तटीय शहरों के डूबने की भविष्यवाणी का भी उल्लेख मिलता है. इसे कुछ लोग जलवायु परिवर्तन, समुद्री स्तर में वृद्धि और प्राकृतिक आपदाओं से जोड़कर देखते हैं.

    बढ़ता तापमान और दो सूरज जैसा दृश्य एक कथित भविष्यवाणी में धरती के अत्यधिक गर्म होने और पहाड़ों से आग निकलने जैसी घटना का वर्णन बताया जाता है. इसके साथ आकाश में ‘दो सूरज’ दिखाई देने की बात भी कही जाती है. इसे प्राकृतिक घटनाओं, ज्वालामुखीय गतिविधियों या असामान्य आकाशीय घटनाओं की प्रतीकात्मक व्याख्या माना जाता है.

    दिन में दिखाई देंगे तारे कालज्ञानम से जुड़ी कुछ व्याख्याओं में कहा जाता है कि एक समय ऐसा आएगा जब दिन के उजाले में भी तारे दिखाई देंगे. इसके बाद कुछ क्षेत्रों की आबादी के पूरी तरह समाप्त होने की बात कही जाती है. इसे किसी बड़ी प्राकृतिक आपदा या वातावरण में होने वाले असाधारण बदलाव से जोड़कर देखा जाता है.

    तिरुपति बालाजी की वैश्विक प्रसिद्धि कहा जाता है कि आने वाले समय में तिरुपति बालाजी मंदिर की ख्याति पूरी दुनिया में फैल जाएगी और अलग-अलग धर्मों को मानने वाले लोग भी यहां दर्शन के लिए पहुंचेंगे. इसे मंदिर की बढ़ती वैश्विक लोकप्रियता से जोड़कर देखा जाता है.

    108 वर्षों तक संघर्ष और उथल-पुथल एक लोकप्रिय दावे के अनुसार, कलियुग के पांच हजार वर्ष पूरे होने के बाद अधर्म के अंत से पहले दुनिया को लगभग 108 वर्षों तक संघर्ष, अशांति और बड़े बदलावों का सामना करना पड़ेगा. इसे मानव सभ्यता के एक बड़े संक्रमणकाल के रूप में समझा जाता है.

    शनि के मीन और मेष राशि में गोचर के समय भीषण युद्ध एक अन्य भविष्यवाणी में कहा जाता है कि जब शनि मीन और मेष राशि से संबंधित विशेष स्थिति में होगा, तब दुनिया में एक भयंकर और निर्णायक युद्ध हो सकता है. इस दावे को ज्योतिषीय घटनाओं और वैश्विक राजनीतिक परिस्थितियों से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इसे किसी निश्चित भविष्य की घटना मानना उचित नहीं है.

    विश्ववसु संवत्सर में कल्कि अवतार सबसे चर्चित दावों में से एक यह है कि ‘विश्ववसु’ नामक संवत्सर में भगवान कल्कि का अवतार होगा. मान्यता के अनुसार भगवान कल्कि अधर्म और अत्याचार का अंत करके धर्म की पुनर्स्थापना करेंगे. हालांकि संवत्सर की गणना और इस भविष्यवाणी के समय को लेकर अलग-अलग मत और व्याख्याएं मिलती हैं.

  • अजब है ये पक्षी! सांपों का शौकीन और किसानों का रखवाला, नाम सुन यकीन नहीं होगा​..

    अजब है ये पक्षी! सांपों का शौकीन और किसानों का रखवाला, नाम सुन यकीन नहीं होगा​..

    Featured Image

    Neelkanth Bird: भारत में कई ऐसे पक्षी हैं, जिनका संबंध सिर्फ प्रकृति से नहीं बल्कि धार्मिक मान्यताओं से भी जुड़ा हुआ है। नीलकंठ पक्षी भी इनमें से एक है। अपनी खूबसूरत उड़ान और नीले रंग वाले पंखों के कारण यह लोगों का ध्यान खींचता है। खास बात यह है कि नीलकंठ को किसानों के लिए भी काफी उपयोगी माना जाता है, क्योंकि यह खेतों में मौजूद कई तरह के कीड़े-मकोड़ों को खाता है।

    नीलकंठ को लेकर बुंदेलखंड में खास मान्यता

    बुंदेलखंड में नीलकंठ को लेकर एक पुरानी मान्यता प्रचलित है। कहा जाता है कि अगर किसी व्यक्ति को नीलकंठ दिखाई दे जाए और वह मन से कोई प्रार्थना करे, तो उसकी मनोकामना पूरी हो सकती है।

    इसी वजह से नीलकंठ को शुभ संकेत और सौभाग्य से जोड़कर देखा जाता है। दशहरे के दिन इसके दर्शन को तो विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

    महादेव से जुड़ा है नीलकंठ का नाम

    नीलकंठ का नाम भगवान शिव से भी जोड़ा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को भगवान शिव ने अपने कंठ में धारण किया था, जिसके कारण उनका कंठ नीला हो गया और उन्हें नीलकंठ कहा गया।

    इसी धार्मिक जुड़ाव की वजह से इस पक्षी को भी शुभ और पवित्र माना जाने लगा। हालांकि पक्षी का पूरा कंठ नीला नहीं होता। उड़ान के दौरान जब यह अपने पंख फैलाता है, तो उनमें मौजूद नीला रंग बेहद खूबसूरत दिखाई देता है।

    किसानों के लिए भी काफी मददगार

    नीलकंठ को किसानों का दोस्त भी कहा जाता है। यह खेतों के आसपास पाए जाने वाले कई तरह के कीड़े-मकोड़े और झींगुर खाता है। इससे फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों की संख्या कम करने में मदद मिल सकती है।

    इसके भोजन में छोटे जीव और कुछ छोटे सांप भी शामिल हो सकते हैं। यही वजह है कि खेतों के आसपास नीलकंठ की मौजूदगी किसानों के लिए फायदेमंद मानी जाती है।

    भारत समेत कई इलाकों में पाया जाता है

    नीलकंठ को इंडियन रोलर के नाम से भी जाना जाता है। यह भारत के अलावा एशिया के कई हिस्सों में पाया जाता है। इसकी खूबसूरत बनावट और उड़ते समय नजर आने वाले नीले पंख इसे दूसरे पक्षियों से अलग बनाते हैं।

    बुंदेलखंड जैसे क्षेत्रों में भी यह पक्षी दिखाई देता है, हालांकि इसकी आबादी कम होने की वजह से पहले की तुलना में इसके दर्शन आसान नहीं रहे हैं।

    दशहरे पर नीलकंठ दिखना क्यों माना जाता है शुभ?

    नीलकंठ को दशहरे से जोड़ने वाली धार्मिक मान्यता भगवान राम से संबंधित है। कहा जाता है कि भगवान राम ने रावण के वध से पहले नीलकंठ पक्षी के दर्शन किए थे। इसके बाद उन्होंने रावण का वध किया।

    इसी मान्यता के चलते दशहरे के दिन नीलकंठ का दिखाई देना शुभ माना जाता है। लोकविश्वास है कि इस दिन इसके दर्शन होने से व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि आती है, धन लाभ के अवसर बनते हैं और भाग्य का साथ मिलता है।

    हालांकि, नीलकंठ के दर्शन से धन लाभ या किस्मत बदलने की बातें धार्मिक और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं, इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाता।

  • हजारों साल पुरानी ममी के पेट से मिला रहस्यमयी कागज, खुलासे से वैज्ञानिक भी दंग..

    हजारों साल पुरानी ममी के पेट से मिला रहस्यमयी कागज, खुलासे से वैज्ञानिक भी दंग..

    Featured Image

    इतिहास की परतों में न जाने कितने ऐसे रहस्य दबे हैं, जो आज भी इंसानी दिमाग को चकरा देते हैं. हाल ही में मिस्र के अल-बहासा में पुरातत्वविदों को एक ऐसी ममी मिली है, जिसने अब तक की सभी मान्यताओं को हिलाकर रख दिया है. आमतौर पर जब भी कोई प्राचीन ममी मिलती है, तो उसके साथ जादुई मंत्र या धार्मिक ग्रंथ पाए जाते हैं, ताकि परलोक में उसकी आत्मा को शांति मिले. इसके अलावा सोने-चांदी के गहने-जेवरात भी होते हैं. लेकिन इस बार वैज्ञानिकों के हाथ कुछ ऐसा लगा, जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी. इस ममी के पेट के अंदर से एक प्राचीन कागज (पपायरस) निकला, जिस पर दुनिया की सबसे मशहूर युद्ध कथाओं में से एक का हिस्सा लिखा हुआ था. जांच के दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि ममी के पेट में दबा यह कागज असल में महान कवि होमर की सुप्रसिद्ध रचना ‘इलियड’ का एक अंश है.

    इसमें प्राचीन यूनानी सेनाओं और उनके जहाजों का विस्तृत विवरण दिया गया है, जो पौराणिक ट्रोजन युद्ध की ओर बढ़ रहे थे. पुरातत्वविदों के लिए यह खोज किसी चमत्कार से कम नहीं है, क्योंकि पूरी दुनिया में यह अपनी तरह का पहला मामला है, जहां किसी ममी के शरीर के भीतर से कोई साहित्यिक कृति बरामद हुई हो. इस खोज ने प्राचीन काल में शवों को दफनाने की परंपराओं पर एक नई बहस छेड़ दी है. इस रहस्यमयी पपायरस को हाल ही में की गई खुदाई के दौरान निकाला गया था. वैज्ञानिकों की टीम ने जब ग्रीक भाषा में लिखे इस पाठ का अध्ययन किया, तो वे दंग रह गए कि हजारों साल बाद भी यह सुरक्षित कैसे रहा. आमतौर पर ममी बनाने की प्रक्रिया के दौरान शरीर को रसायनों से भरा जाता है, लेकिन इस ममी को अनोखे तरीके से दफनाया गया.

    ममी के अंदर किसी साहित्यिक कविता का होना यह संकेत देता है कि उस समय के लोगों के लिए साहित्य का महत्व सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं था, बल्कि उसे परलोक की यात्रा के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता था. इस खुदाई के दौरान सिर्फ यह अनोखी ममी ही नहीं मिली, बल्कि कई और चौंकाने वाले राज भी सामने आए हैं. पुरातत्वविदों को ऐसी ममी भी मिली हैं, जिनकी जीभ सोने की बनी हुई थी. प्राचीन मिस्र के लोगों का मानना था कि सोने की जीभ लगाने से मृत व्यक्ति मरने के बाद देवताओं से बात कर पाएगा. इसके अलावा वहां से सजे हुए ताबूत और कई प्राचीन कलाकृतियां भी बरामद की गई हैं, जो उस दौर की आलीशान जीवनशैली और उनकी अजीबोगरीब धार्मिक मान्यताओं को उजागर करती हैं. यह ऐतिहासिक मिशन बार्सिलोना विश्वविद्यालय के नेतृत्व में चलाया गया था, जो काहिरा से करीब 190 किलोमीटर दूर ऑक्सीरहिन्चस नामक प्राचीन शहर में स्थित है.

  • एक सेल्फी से खाली हो सकता है बैंक खाता, भूलकर भी न खिंचवाएं ऐसे फोटोज!..

    एक सेल्फी से खाली हो सकता है बैंक खाता, भूलकर भी न खिंचवाएं ऐसे फोटोज!..

    Featured Image

    आज के डिजिटल युग में जहां हम अपनी सुरक्षा के लिए बायोमेट्रिक्स और फिंगरप्रिंट लॉक पर सबसे ज्यादा भरोसा करते हैं, वहीं एक ताजा चेतावनी ने स्मार्टफोन यूजर्स की नींद उड़ा दी है. साइबर सिक्युरिटी एक्सपर्ट्स ने आगाह किया है कि सोशल मीडिया पर ‘V’ साइन (तर्जनी और मध्यमा उंगली को बाहर की ओर फैलाकर) दिखाते हुए सेल्फी पोस्ट करना आपके लिए भारी मुसीबत बन सकता है. आधुनिक हाई-डेफिनिशन कैमरों और उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सॉफ्टवेयर के आने से अब यह तकनीकी रूप से संभव हो गया है कि आपकी तस्वीरों से आपके फिंगरप्रिंट की विस्तृत जानकारी चुराई जा सके और इसका उपयोग आपके बायोमेट्रिक सुरक्षा सिस्टम को भेदने के लिए किया जा सके. साथ ही उंगलियों के निशान से साइबर अपराधी बैंक खाता भी खाली कर सकते हैं.

    चीनी सिक्युरिटी एक्सपर्ट ली चांग ने हाल ही में एक रियलिटी शो के दौरान एक मशहूर हस्ती की सेल्फी का उदाहरण देते हुए यह दिखाया कि ‘V’ पोज वाली फोटो में उंगलियां कितनी स्पष्ट दिखाई देती हैं. चांग के विश्लेषण के अनुसार, यदि तस्वीर 1.5 मीटर से कम की दूरी से ली गई है और उंगलियां सीधे कैमरे के सामने हैं, तो फिंगरप्रिंट की जानकारी पूरी तरह से निकाली जा सकती है. सेल्फी के मामले में यह दूरी और भी कम होती है, जो इसे विशेष रूप से खतरनाक बनाती है. हैरान करने वाली बात यह है कि 3 मीटर तक की दूरी से ली गई तस्वीरों से भी लगभग आधे फिंगरप्रिंट डेटा को आसानी से निकाला जा सकता है. इस खतरे को और भी अधिक वास्तविक बनाता है आधुनिक AI तकनीक का विकास.

    एक टीवी शो में ली चांग ने दर्शकों को तब चौंका दिया, जब उन्होंने फोटो एडिटिंग सॉफ्टवेयर और AI की मदद से उन फिंगरप्रिंट्स को बहुत करीब से साफ-साफ दिखाया, जो खुली आंखों से देखने पर धुंधले नजर आ रहे थे. ‘चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज’ के क्रिप्टोग्राफी प्रोफेसर जिंग जिउ ने भी इस बात की पुष्टि की है कि हाई-डेफिनिशन कैमरों की मदद से केवल ‘V’ पोज का उपयोग करके हाथ की जानकारी निकाली जा सकती है और उसके फिंगरप्रिंट्स भी बनाए जा सकते हैं. हालांकि, इस खबर के वायरल होने के बाद कुछ एक्सपर्ट्स ने स्पष्ट किया है कि फिंगरप्रिंट चोरी करना और उसका गलत इस्तेमाल करना इतना आसान भी नहीं है.

    आसान नहीं है फिंगरप्रिंट्स कॉपी करना
    उन्होंने कहा कि किसी के बायोमेट्रिक्स को सफलतापूर्वक कॉपी करने के लिए रोशनी की स्थिति, कैमरे का फोकस और इमेज की स्पष्टता जैसे कई कारक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. साथ ही, पहचान चुराने वालों को सटीक मिलान के लिए एक ही व्यक्ति की कई अलग-अलग तस्वीरों की जरूरत पड़ सकती है. फिर भी, तकनीक जिस रफ्तार से आगे बढ़ रही है, उसे देखते हुए सुरक्षा विशेषज्ञ इसे एक उभरते हुए और गंभीर खतरे के रूप में देख रहे हैं. ऐसे में यदि आप अपनी बायोमेट्रिक सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, लेकिन सेल्फी में ‘V’ साइन बनाने की अपनी आदत को भी नहीं छोड़ पा रहे हैं, तो विशेषज्ञ ली चांग ने इसके लिए कुछ आसान उपाय सुझाए हैं.

    कैसे बचें ठगी से?
    उनका सुझाव है कि सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीरें पोस्ट करने से पहले डिजिटल एडिटिंग टूल्स का उपयोग करके अपनी उंगलियों के पोरों को ‘ब्लर’ (धुंधला) कर दें या अपने फिंगरप्रिंट के निशानों को स्मूथ (सपाट) कर दें. सुरक्षा के लिहाज से यह एक छोटी सी सावधानी आपके डिजिटल डेटा और वित्तीय खातों को सुरक्षित रखने में बड़ी भूमिका निभा सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में जैसे-जैसे कैमरे और अधिक शक्तिशाली होंगे, हमें अपनी ऑनलाइन प्राइवेसी को लेकर और भी अधिक जागरूक होना होगा. हालांकि, इस तरह की ठगी से बचने का सबसे बेहतर उपाय है कि वी सेप में उंगलियों के साथ फोटो ही न शेयर करें.

  • इस भारतीय को भगवान मानता है पूरा चीन, राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी झुकाते हैं सिर, फैमिली से बिना मिले नहीं लौटते देश..?

    इस भारतीय को भगवान मानता है पूरा चीन, राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी झुकाते हैं सिर, फैमिली से बिना मिले नहीं लौटते देश..?

    Featured Image

    एक ऐसा हिंदुस्तानी, जिसे खुद उसका अपना देश लगभग भूल चुका है. लेकिन सरहद पार हमारा पड़ोसी मुल्क चीन, आज भी उसे किसी मसीहा की तरह पूजता है. वहां के बच्चों को स्कूलों में उनकी कहानी पढ़ाई जाती है. उनके चेहरे वाले डाक टिकट जारी होते हैं. उनके नाम पर मेडिकल कॉलेज चलते हैं. यकीन मानिए, अगर इस जाबांज डॉक्टर की जिंदगी को आज के सिनेमाई परदे पर उतारा जाए, तो पूरी दुनिया दांतों तले उंगली दबा लेगी.

    बात शुरू होती है साल 1938 की. उस वक्त जापान ने चीन पर धावा बोल दिया था. चारों तरफ तबाही थी, चीख-पुकार थी और लाखों चीनी नागरिक और सैनिक लहूलुहान पड़े थे. मगर इलाज करने वाले डॉक्टर उंगलियों पर गिनने लायक भी नहीं थे. ऐसे में चीन के सेनापति जनरल झू दे ने पंडित जवाहरलाल नेहरू को एक ख़त लिखा- ‘दोस्त, हमारी मदद करो, कुछ डॉक्टर भेजो’. तब का चीन आज जैसा ताकतवर और अमीर मुल्क नहीं था. नेहरू ने इस पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस से मशविरा किया, जो उस समय कांग्रेस के अध्यक्ष हुआ करते थे.

    नेताजी ने तुरंत पहल की और भारत के लोगों से पाई-पाई जोड़कर 22,000 रुपये का फंड इकट्ठा किया. फिर क्या था, पांच जाबांज हिंदुस्तानी डॉक्टरों की एक टीम समंदर के रास्ते चीन के लिए रवाना हो गई.

    Dr Dwarkanath Kotnis indian Doctor Hero in China Story

    पिता की मौत, लेकिन डॉक्टर का ईमान

    चीन गए तो पांच डॉक्टर थे, लेकिन जब जंग खत्म हुई तो लौटे सिर्फ चार. डॉक्टर कोटनीस वहीं रुक गए. उन्होंने वहां हजारों दम तोड़ते चीनी लोगों को मौत के मुंह से बाहर निकाला. इसी बीच भारत से खबर आई कि उनके पिता का साया हमेशा के लिए सिर से उठ गया है. कोई और होता तो घर भाग आता, लेकिन कोटनीस नहीं लौटे. उन्होंने रोते हुए भी यही कहा कि इस वक्त चीन के इन बेबस मरीजों को मेरी सबसे ज्यादा जरूरत है और मरीजों को बीच में छोड़ना एक डॉक्टर के ईमान के खिलाफ है.

    Dr Dwarkanath Kotnis indian Doctor Hero in China Story

    72-72 घंटे लगातार ड्यूटी

    कोटनीस सीधे जंग के मैदान में कूद पड़े. पहाड़ों की कड़कड़ाती ठंड और पत्थरों की गुफाओं में, जहां बुनियादी दवाइयां तक नसीब नहीं थीं, उन्होंने एक के बाद एक कई ऑपरेशन किए. कई-कई बार तो वो लगातार 72-72 घंटे बिना पलक झपकाए मरीजों की जान बचाते रहे. इस अकेले मोर्चे पर उन्होंने करीब 800 चीनी सैनिकों की जान बचाई. चीनी लोग उन्हें आदर से ‘के दिहुआ’ (Ke Dihua) पुकारने लगे, इसके मतलब था भारत की भूमि से आया हुआ उपकारी.

    लगातार बिना सोए काम करना, खराब मौसम और कम साधनों के बीच दिन-रात मरीजों की सेवा करने का असर डॉक्टर कोटनीस की सेहत पर पड़ने लगा. उनका शरीर थक चुका था. दिसंबर 1942 में, अपने बेटे के जन्म के महज तीन महीने बाद, सिर्फ 32 साल की उम्र में इस मसीहा ने हमेशा के लिए अपनी आंखें मूंद लीं. उनकी मौत की खबर से पूरा चीन सदमे में डूब गया. खुद माओ त्से तुंग ने बेहद भावुक होकर लिखा- “आज चीन ने अपना एक अनमोल दोस्त खो दिया है. हम उनके इस बलिदान को कभी नहीं भूलेंगे. उनका नाम हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहेगा.”

    Dr Dwarkanath Kotnis indian Doctor Hero in China Story

    मगर यह कहानी यहां खत्म नहीं होती. चीन के सबसे बड़े नेता माओ त्से तुंग ने खुद अपने हाथों से उनके सम्मान में शोक संदेश लिखा था. उन्होंने कहा था- ‘हमारी सेना ने अपना एक मजबूत हाथ खो दिया है और हमारे देश ने अपना सबसे सच्चा दोस्त गंवा दिया है’.

    आज भी चीन के शीजियाझुआंग (Shijiazhuang) शहर में उनकी एक भव्य समाधि और स्मारक है. उनके नाम पर वहां एक मेडिकल स्कूल चलाया जाता है. आज भी जब उस मेडिकल स्कूल के छात्र डॉक्टर बनकर निकलते हैं, तो वे डॉक्टर कोटनीस के नाम की शपथ लेते हैं.

    साल 2009 में जब चीन में वोटिंग हुई, तो वहां की जनता ने डॉक्टर कोटनीस को सदी के ‘टॉप 10 विदेशी नायकों’ में चुना. दशकों तक तो यह परंपरा ही बन गई थी कि चीन का कोई भी बड़ा नेता जब भी भारत के दौरे पर आता, तो डॉक्टर कोटनीस के परिवार से मिलने उनके घर जरूर जाता था. डॉक्टर कोटनीस को किसी सरहद या नक्शे से प्यार नहीं था, उन्हें तो बस इंसानों की जान बचाने से सरोकार था. सचमुच, इंसानी जज्बे की ऐसी मिसालें हर सदी में पैदा होनी चाहिए.

  • इलाज के पैसे खत्म हुए तो पिता ने खोदी 2 साल की बेटी की कब्र, सालों बाद उसी जगह खिले सूरजमुखी के फूल..?

    इलाज के पैसे खत्म हुए तो पिता ने खोदी 2 साल की बेटी की कब्र, सालों बाद उसी जगह खिले सूरजमुखी के फूल..?

    Featured Image

    जिंदगी और मौत की जंग से जुड़ी कभी-कभी ऐसी कहानियां सामने आ जाती हैं, जो इंसान की हिम्मत और उम्मीद पर भरोसा पक्का कर देती हैं. एक ऐसा ही मामला इन दिनों लोगों की आंखों से आंसू छलका रहा है. दरअसल, चीन (China) के सिचुआन प्रांत के नीजियांग में रहने वाले झांग लियॉन्ग की 2 साल की बेटी झांग शिनलेई (Zhang Xinlei) गंभीर थैलेसीमिया (thalassaemia) बीमारी से जूझ रही थी. इलाज के लिए हर महीने खून (blood) चढ़ाना पड़ता था, लेकिन फैक्ट्री में मामूली मजदूरी करने वाले पिता के पास जब सारे पैसे खत्म हो गए, तो उन्होंने एक ऐसा कदम उठाया, जिसने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया. पढ़ें पूरी खबर.

    साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट (SCMP) के मुताबिक, जून 2017 में जब मेडिकल बिल 1,40,000 युआन से ऊपर चले गए, तो मजबूर पिता ने अपनी जमीन पर एक कब्र खोदी. वो रोजाना अपनी बेटी को वहां ले जाते और उसके साथ लेटकर खेलते थे, ताकि अगर कल को मौत आ भी जाए, तो मासूम डर न महसूस करे. इस दर्दनाक तस्वीर के सामने आते ही कुछ लोगों ने पिता के दर्द को समझा, तो कई लोगों ने इसे गलत भी बताया, लेकिन इंटरनेट पर वायरल हुई इस लाचारी ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया.

    Latest and Breaking News on NDTV

    सोशल मीडिया पर खबर फैलते ही क्राउडफंडिंग के जरिए मदद का सैलाब आ गया. इसके साथ ही स्थानीय सरकार ने भी मेडिकल खर्च उठाया. इसी बीच अगस्त 2017 में शिनलेई की छोटी बहन का जन्म हुआ. वैज्ञानिकों ने छोटी बहन के कॉर्ड ब्लड से स्टेम सेल का ट्रांसप्लांट किया. 8 घंटे तक चले इस मुश्किल ऑपरेशन के बाद शिनलेई की सेहत में ऐसा सुधार हुआ कि, उसे अब बार-बार खून चढ़ाने की जरूरत ही नहीं पड़ती. आज शिनलेई प्राइमरी स्कूल में पढ़ती है, पेंटिंग करती है और डांस भी सीखती है. जिस जगह कभी पिता ने बेबसी में उसकी कब्र खोदी थी, आज वहां उसके माता-पिता ने सूरजमुखी का एक खूबसूरत बगीचा बना दिया है, जिसे वो मैजिक गार्डेन कहते हैं.

  • मुंबई में NRI के लॉकर से 82 लाख के सोने के गहने गायब, बैंक का डिप्टी मैनेजर गिरफ्तार..

    मुंबई में NRI के लॉकर से 82 लाख के सोने के गहने गायब, बैंक का डिप्टी मैनेजर गिरफ्तार..

    Featured Image

    मुंबई के कांदिवली में NRI के बैंक लॉकर से 82 लाख रुपये के सोने के गहने गायब होने से हड़कंप मच गया. इस मामले में पुलिस ने बैंक के डिप्टी ब्रांच मैनेजर कुलदीप साहनी को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस ने उसके कब्जे से गहने भी बरामद कर लिए हैं. पढ़ें इस मैनेजर की करतूत.

    पुलिस ने आरोपी डिप्टी मैनेजर को गिरफ्तार कर लिया है (फोटो-ITG)

    मुंबई के कांदिवली में एक निजी बैंक के लॉकर से 82 लाख रुपये के सोने के गहने गायब होने का मामला सामने आया है. इस मामले में पुलिस ने बैंक के डिप्टी ब्रांच मैनेजर कुलदीप साहनी को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि उसने बैंक लॉकर में रखे NRI के सोने के गहनों का गलत तरीके से इस्तेमाल किया और उन्हें अलग-अलग गोल्ड मॉर्गेज फर्मों के पास गिरवी रख दिया. पुलिस ने आरोपी के खिलाफ क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट यानी आपराधिक विश्वासघात का केस दर्ज किया है.

    पुलिस के मुताबिक, इस मामले में शिकायत करने वाले व्यक्ति की उम्र 72 साल है और वह पिछले पांच दशक से ज्यादा समय से अपने परिवार के साथ दुबई में रह रहे हैं. उनका मुंबई में एक निजी बैंक में अकाउंट है और कांदिवली में उनका एक फ्लैट भी मौजूद है. इसी बैंक की कांदिवली शाखा में उन्होंने अपना लॉकर लिया था. लंबे समय तक विदेश में रहने की वजह से वह नियमित रूप से लॉकर चेक नहीं कर पाए.

    शिकायतकर्ता ने मार्च 2024 में बैंक के लॉकर में करीब 610 ग्राम सोने के गहने रखे थे. उस समय इन गहनों की अनुमानित कीमत करीब 81.8 लाख रुपये थी, जो बाद में करीब 82 लाख रुपये बताई गई. करीब दो साल बाद जब वह मुंबई आए और बैंक की शाखा में जाकर लॉकर चेक किया, तो उनके होश उड़ गए. लॉकर में रखा पूरा सोना गायब था और इसकी जानकारी उन्होंने बैंक अधिकारियों से मांगी.

    बैंक से पूछताछ के बाद भी जब सोने के गहनों के बारे में कोई संतोषजनक जानकारी नहीं मिली, तो शिकायतकर्ता ने पुलिस का रुख किया. उन्होंने 12 अगस्त को इस मामले में शिकायत दर्ज कराई. इसके बाद कांदिवली पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू की. चूंकि गहने करीब दो साल पहले लॉकर से गायब हुए थे, इसलिए पुलिस के सामने पुरानी CCTV फुटेज हासिल करना एक बड़ी चुनौती थी.

    जांच के दौरान पुलिस ने बैंक के कर्मचारियों से पूछताछ की और लॉकर से जुड़े पुराने रिकॉर्ड खंगाले. जांच में सामने आया कि शिकायतकर्ता के लॉकर को बैंक की ओर से डिप्टी ब्रांच मैनेजर कुलदीप साहनी ने उपलब्ध कराया था. पुलिस को इस जानकारी के बाद साहनी की भूमिका पर शक हुआ. इसके बाद जांच टीम ने उसके पिछले दो साल के बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की बारीकी से पड़ताल शुरू की.

    डीसीपी की निगरानी में पुलिस टीम ने आरोपी के बैंक ट्रांजैक्शन की जांच की. जांच में पता चला कि पिछले दो वर्षों के दौरान उसके बैंक खाते से करीब 9 करोड़ रुपये तक के लेनदेन हुए थे. पुलिस के मुताबिक, इन ट्रांजैक्शन का बड़ा हिस्सा ऐसी कंपनियों के साथ था, जो सोने को गिरवी रखकर लोन या मॉर्गेज का कारोबार करती हैं. इससे पुलिस का शक और मजबूत हो गया.

    पुलिस ने उन सभी कंपनियों से संपर्क किया, जिनके साथ आरोपी के वित्तीय लेनदेन सामने आए थे. जांच टीम ने इन फर्मों से साहनी द्वारा गिरवी रखे गए सोने के गहनों की तस्वीरें मांगीं. तस्वीरों की जांच के दौरान पुलिस को ऐसे गहने दिखाई दिए, जो शिकायतकर्ता के लॉकर में रखे गहनों से मेल खाते थे. इसके बाद पुलिस ने इन गहनों की पहचान और बरामदगी की कार्रवाई शुरू की.

    पुलिस ने जांच आगे बढ़ाते हुए शिकायतकर्ता के सोने के गहनों को बरामद कर लिया. इसके साथ ही कुलदीप साहनी को भी गिरफ्तार कर लिया गया. पुलिस के मुताबिक, FIR दर्ज होने के महज चार दिन के भीतर आरोपी तक पहुंचने और गहने बरामद करने में सफलता मिली. फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस मामले में उसके साथ कोई और व्यक्ति या बैंक कर्मचारी भी शामिल था या नहीं.