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  • सर्दियों में गुड़ खाने से मिल सकते हैं ये फायदे, जानें कितनी मात्रा है सही’

    सर्दियों में गुड़ खाने से मिल सकते हैं ये फायदे, जानें कितनी मात्रा है सही’

    सर्दियों में गुड़ खाने से मिल सकते हैं ये फायदे, जानें कितनी मात्रा है सही’

    सर्दियों के मौसम में गुड़ का सेवन कई घरों में बढ़ जाता है। इसका स्वाद और ऊर्जा देने की क्षमता इसे ठंड के दिनों में लोकप्रिय बनाती है। गुड़ में मुख्य रूप से शर्करा होती है। इसके अलावा, इसमें कुछ मात्रा में आयरन और अन्य खनिज भी पाए जा सकते हैं। हालांकि, इसे सेहत के लिए फायदेमंद मानकर जरूरत से ज्यादा खाना ठीक नहीं है।

    1. शरीर को मिलती है ऊर्जा

    गुड़ में मौजूद कार्बोहाइड्रेट शरीर को ऊर्जा देते हैं। ठंड के मौसम में इसे सीमित मात्रा में खाने से ऊर्जा मिल सकती है। लेकिन इसमें चीनी की मात्रा भी काफी अधिक होती है, इसलिए इसका सेवन संतुलित रखना जरूरी है।

    2. आयरन की कुछ मात्रा मिल सकती है

    गुड़ में थोड़ी मात्रा में आयरन पाया जाता है, हालांकि इसकी मात्रा गुड़ के प्रकार और निर्माण प्रक्रिया पर निर्भर करती है। इसे खाने से शरीर को कुछ आयरन मिल सकता है, लेकिन खून की कमी यानी एनीमिया का इलाज केवल गुड़ से नहीं किया जा सकता। आयरन की कमी होने पर डॉक्टर की सलाह और उचित आहार जरूरी है।

    3. गले को मिल सकती है अस्थायी राहत

    सर्दियों में गले में खराश या खांसी होने पर कुछ लोग गुड़ को अदरक या गुनगुने पेय के साथ लेते हैं। गर्म पेय गले को आराम पहुंचा सकता है, लेकिन गुड़ के सेवन से सर्दी-जुकाम ठीक होने या संक्रमण दूर होने के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं।

    4. पाचन के लिए क्या है सही?

    कुछ लोग भोजन के बाद गुड़ खाते हैं, लेकिन यह मानना सही नहीं है कि गुड़ हर व्यक्ति की पाचन संबंधी समस्याओं को दूर कर देता है। कब्ज या अन्य परेशानी होने पर पर्याप्त पानी, फाइबर से भरपूर भोजन और नियमित शारीरिक गतिविधि पर ध्यान देना ज्यादा उपयोगी है।

    5. गुड़ खाते समय इन बातों का रखें ध्यान

    • गुड़ को सीमित मात्रा में खाएं, क्योंकि इसमें शर्करा और कैलोरी अधिक होती हैं।
    • डायबिटीज से पीड़ित लोग इसे बिना सोचे-समझे चीनी का सुरक्षित विकल्प न मानें। गुड़ भी ब्लड शुगर बढ़ा सकता है।
    • खून की कमी होने पर गुड़ को आयरन की दवा या डॉक्टर द्वारा बताए गए उपचार का विकल्प न बनाएं।
    • रोजाना के आहार में दालें, हरी पत्तेदार सब्जियां, फल, साबुत अनाज और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करें।

    डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। गुड़ के कई पारंपरिक उपयोग प्रचलित हैं, लेकिन सर्दी-जुकाम ठीक करने या एनीमिया दूर करने जैसे दावों को प्रमाणित इलाज नहीं माना जाना चाहिए। किसी स्वास्थ्य समस्या में डॉक्टर की सलाह लें।

  • PF खाताधारकों के लिए बड़ी खबर: EPFO ने निकासी के नियम किए आसान, जरूरत पड़ने पर निकाल सकेंगे पैसा.

    PF खाताधारकों के लिए बड़ी खबर: EPFO ने निकासी के नियम किए आसान, जरूरत पड़ने पर निकाल सकेंगे पैसा.

    PF खाताधारकों के लिए बड़ी खबर: EPFO ने निकासी के नियम किए आसान, जरूरत पड़ने पर निकाल सकेंगे पैसा.

    नई दिल्ली: कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) खाताधारकों के लिए पीएफ से जुड़ी निकासी के नियमों को लेकर अहम खबर सामने आई है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की ओर से निकासी प्रक्रिया को आसान बनाने और जरूरत के समय कर्मचारियों को अपने खाते से पैसा निकालने की सुविधा देने के लिए नियमों में बदलाव की जानकारी सामने आई है।

    जरूरत पड़ने पर पीएफ का पैसा निकालना होगा आसान

    पीएफ खाते में जमा रकम कर्मचारियों की बचत का अहम हिस्सा होती है। इसका इस्तेमाल रिटायरमेंट के साथ-साथ नियमों के तहत कुछ जरूरी परिस्थितियों में भी किया जा सकता है। निकासी की प्रक्रिया आसान होने से कर्मचारियों को इलाज, पारिवारिक जरूरतों और अन्य पात्र परिस्थितियों में आर्थिक मदद मिल सकती है।

    क्या हर कर्मचारी निकाल सकेगा पूरी रकम?

    पीएफ खाते से पैसा निकालने की सुविधा का मतलब यह नहीं है कि हर कर्मचारी किसी भी समय बिना शर्त पूरी जमा राशि निकाल सकता है। निकासी की पात्रता, उपलब्ध राशि और लागू शर्तें संबंधित नियमों पर निर्भर करती हैं। इसलिए पैसा निकालने से पहले अपने खाते की स्थिति और लागू प्रावधानों की जानकारी लेना जरूरी है।

    कर्मचारियों को क्या करना चाहिए?

    पीएफ निकासी के लिए आवेदन करने से पहले कर्मचारी अपना UAN, केवाईसी और बैंक खाते से जुड़ी जानकारी सही रखें। साथ ही, निकासी से संबंधित नवीनतम नियमों की पुष्टि EPFO की आधिकारिक वेबसाइट या संबंधित कार्यालय से करें।

    ध्यान देने वाली बात: उपलब्ध सामग्री में नियमों में हुए बदलावों, निकासी की सीमा और लागू होने की तारीख का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए यह दावा कि कर्मचारी अब किसी भी जरूरत पर आसानी से पैसा निकाल सकेंगे, आधिकारिक अधिसूचना की पुष्टि के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट होगा।

    डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध शीर्षक और रिपोर्ट की जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। EPFO के नवीनतम नियमों और पात्रता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है। पीएफ निकासी से जुड़ा कोई भी निर्णय लेने से पहले आधिकारिक दिशा-निर्देश जरूर देखें।

  • “पापा, मुझे बचा ल” फोन पर बेटी की आखिरी गुहार के बाद मौत, पति और ससुराल वालों पर दहेज हत्या का आरोप.

    “पापा, मुझे बचा ल” फोन पर बेटी की आखिरी गुहार के बाद मौत, पति और ससुराल वालों पर दहेज हत्या का आरोप.

    “पापा, मुझे बचा ल” फोन पर बेटी की आखिरी गुहार के बाद मौत, पति और ससुराल वालों पर दहेज हत्या का आरोप.

    गुरुग्राम: “पापा, मुझे बचा लो, पति और ससुराल के लोग मुझे बहुत मार रहे हैं।” एक पिता के मुताबिक, बेटी भावना शर्मा ने फोन पर ये बातें कहकर कॉल काट दी थी। कुछ देर बाद उसके पति ने फोन कर बताया कि भावना ने जहर खा लिया है। फिर दोबारा फोन आया कि उसकी मौत हो गई है। बेटी की मौत की खबर सुनकर परिवार हापुड़ से गुरुग्राम पहुंचा, जहां शव पर गले पर निशान देखकर उन्होंने पुलिस को सूचना दी। अब परिजनों ने पति समेत ससुराल के चार सदस्यों पर दहेज के लिए हत्या करने का आरोप लगाया है।

    शादी के बाद दहेज मांगने का आरोप

    हापुड़ निवासी अनिल शर्मा के अनुसार, उनकी 24 वर्षीय बेटी भावना की शादी करीब दो साल पहले गुरुग्राम के फर्रूखनगर निवासी गौतम शर्मा से हुई थी। पिता का आरोप है कि शादी के बाद से ही भावना को दहेज के लिए परेशान किया जाने लगा और ससुराल पक्ष की ओर से 25 लाख रुपये की मांग की गई।

    अनिल शर्मा ने बताया कि कुछ महीने पहले उन्होंने ढाई लाख रुपये दिए थे, लेकिन इसके बावजूद बेटी को कथित तौर पर प्रताड़ित किया जाता रहा। परिवार के मुताबिक, परेशानी बढ़ने के कारण भावना पिछले चार महीने से मायके में रह रही थी। कुछ दिन पहले ही वह वापस ससुराल गई थी।

    फोन पर मदद मांगने के बाद मिली मौत की खबर

    परिजनों की शिकायत के मुताबिक, 13 अक्टूबर की शाम करीब चार बजे भावना ने अपने पिता को फोन कर बताया कि उसका पति गौतम, ससुर बिजेंद्र, सास और देवर उसके साथ मारपीट कर रहे हैं। करीब डेढ़ घंटे बाद गौतम ने फोन करके बताया कि भावना ने जहर खा लिया है और उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

    परिवार हापुड़ से गुरुग्राम के लिए रवाना हुआ, लेकिन रास्ते में ही उन्हें दोबारा फोन आया कि भावना की मौत हो गई है। अस्पताल पहुंचने पर पिता ने बेटी के गले पर निशान देखे और पुलिस को सूचना दी। हालांकि, इन निशानों की वजह और मौत की वास्तविक परिस्थितियां जांच का विषय हैं।

    पुलिस पर कार्रवाई में देरी का आरोप

    भावना के परिजनों ने आरोप लगाया कि सूचना देने के बाद भी पुलिस ने देर रात तक कार्रवाई नहीं की। परिवार का कहना है कि अस्पताल में विरोध जताने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और कार्रवाई का आश्वासन दिया। पिता के मुताबिक, बुधवार सुबह पुलिस ने उनसे शिकायत लेकर जांच शुरू करने की बात कही।

    परिजनों ने भावना के पति गौतम शर्मा, ससुर बिजेंद्र, सास और देवर अंशु शर्मा के खिलाफ दहेज के लिए हत्या करने के आरोप में शिकायत दी है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद ससुराल पक्ष के लोग वहां से चले गए और भावना का नौ महीने का बच्चा भी पति अपने साथ ले गया।

    पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

    पुलिस के अनुसार, शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और मामले की जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि मौत के कारणों के बारे में पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल, दहेज उत्पीड़न और हत्या से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि भावना की मौत किन परिस्थितियों में हुई।

    डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट और मृतका के परिजनों की शिकायत में लगाए गए आरोपों पर आधारित है। मौत के कारणों और कथित अपराध की पुष्टि जांच तथा पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी।

  • जीरा पानी पीने से पाचन: को मिल सकता है फायदा, जानें सेवन का सही तरीका और जरूरी सावधानियां

    जीरा पानी पीने से पाचन: को मिल सकता है फायदा, जानें सेवन का सही तरीका और जरूरी सावधानियां

    जीरा पानी पीने से पाचन: को मिल सकता है फायदा, जानें सेवन का सही तरीका और जरूरी सावधानियां

    जीरा भारतीय रसोई में इस्तेमाल होने वाला एक आम मसाला है, जो खाने का स्वाद बढ़ाने के साथ पाचन से जुड़ी कुछ परेशानियों में भी मदद कर सकता है। जीरे को पानी में उबालकर पीने का चलन भी काफी पुराना है। हालांकि, जीरा पानी को लिवर की सफाई या तेजी से वजन घटाने का कोई चमत्कारी उपाय मानना सही नहीं है।

    पाचन के लिए हो सकता है फायदेमंद

    जीरे में कुछ ऐसे प्राकृतिक यौगिक पाए जाते हैं, जो पाचन प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं। पारंपरिक रूप से इसका इस्तेमाल गैस, पेट फूलने और अपच जैसी परेशानियों में किया जाता रहा है। हालांकि, इन समस्याओं में जीरा पानी कितना प्रभावी है, इसे लेकर अभी और वैज्ञानिक शोध की जरूरत है।

    क्या जीरा पानी लिवर को डिटॉक्स करता है?

    अक्सर दावा किया जाता है कि जीरा पानी लिवर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। लेकिन इस दावे के समर्थन में पर्याप्त ठोस वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। शरीर में हानिकारक पदार्थों को संसाधित करने का काम मुख्य रूप से लिवर और किडनी करते हैं। संतुलित आहार, पर्याप्त पानी, नियमित शारीरिक गतिविधि और शराब से दूरी लिवर की सेहत बनाए रखने में ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।

    वजन नियंत्रित करने में कितनी मदद?

    जीरा पानी में कैलोरी बहुत कम होती है। यदि इसे मीठे पेय पदार्थों की जगह लिया जाए, तो कुल कैलोरी सेवन कम करने में मदद मिल सकती है। लेकिन केवल जीरा पानी पीने से वजन कम होने की गारंटी नहीं है। वजन नियंत्रित करने के लिए संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद जरूरी हैं।

    घर पर कैसे तैयार करें जीरा पानी?

    जीरा पानी बनाने के लिए ये आसान तरीका अपना सकते हैं:

    1. एक गिलास पानी में आधा चम्मच जीरा डालें।
    2. पानी को कुछ मिनट तक उबालें।
    3. इसके बाद इसे छानकर गुनगुना होने पर पी लें।

    जीरे को रातभर पानी में भिगोना भी एक घरेलू तरीका है, लेकिन ऐसा करना जरूरी नहीं है। इसे पीने के लिए सुबह या रात का कोई खास समय वैज्ञानिक रूप से अनिवार्य साबित नहीं हुआ है।

    इन बातों का रखें ध्यान

    • जीरा पानी को किसी बीमारी का इलाज या लिवर डिटॉक्स करने का प्रमाणित तरीका न मानें।
    • इसका अधिक सेवन करने से कुछ लोगों को पेट में परेशानी या एसिडिटी महसूस हो सकती है।
    • यदि आपको कोई पुरानी बीमारी है, आप नियमित दवाएं लेते हैं या जीरे से एलर्जी है, तो नियमित रूप से इसका सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
    • पीलिया, लगातार पेट दर्द या पाचन संबंधी गंभीर समस्या होने पर घरेलू उपायों के भरोसे इलाज में देरी न करें।

    डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। जीरा पानी के संभावित लाभों से जुड़े सभी दावों की पुष्टि पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाणों से नहीं हुई है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए डॉक्टर की सलाह को प्राथमिकता दें।

  • दो दिन से लापता 12 साल की संजना का मिला शव, पट्टीदार पर हत्या का आरोप; जांच में जुटी पुलिस.

    दो दिन से लापता 12 साल की संजना का मिला शव, पट्टीदार पर हत्या का आरोप; जांच में जुटी पुलिस.

    दो दिन से लापता 12 साल की संजना का मिला शव, पट्टीदार पर हत्या का आरोप; जांच में जुटी पुलिस.

    गोपालगंज: बिहार के गोपालगंज जिले में 12 वर्षीय बच्ची की मौत से इलाके में सनसनी फैल गई। थावे प्रखंड की लछवार पंचायत के खानपुर अजमत गांव में बुधवार सुबह संजना कुमारी का शव मिलने से परिवार में कोहराम मच गया। बच्ची पिछले दो दिनों से लापता थी। परिजनों ने अपने ही पट्टीदार पर हत्या की आशंका जताई है। पुलिस और फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की टीम मामले की जांच में जुटी है।

    दो दिन से लापता थी संजना, परिवार करता रहा तलाश

    जानकारी के मुताबिक, संजना कुमारी दो दिन पहले अचानक बथान से लापता हो गई थी। बच्ची के गायब होने के बाद परिवार के लोगों ने अपने स्तर पर काफी तलाश की, लेकिन उसका कोई पता नहीं चल सका। परिजन लगातार उसकी खोजबीन कर रहे थे।

    इसी बीच बुधवार सुबह करीब तीन बजे गांव में एक व्यक्ति के घर के पास बच्ची का शव मिलने की सूचना सामने आई। खबर मिलते ही ग्रामीण मौके पर जुटने लगे। संजना के परिजन भी घटनास्थल पर पहुंचे। बच्ची की मौत की खबर सुनकर परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।

    घर के पास शव मिलने से गहराया संदेह

    संजना का शव मिलने के बाद घटना को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। परिजनों ने हत्या की आशंका जताते हुए अपने ही पट्टीदार पर आरोप लगाया है। हालांकि, घटना के पीछे की वजह क्या थी और इसमें किसकी भूमिका है, इसकी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    पुलिस सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। मामले में किसी को दोषी ठहराने से पहले जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्कर्ष सामने आना जरूरी है।

    पुलिस और FSL टीम ने जुटाए साक्ष्य

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। इसके साथ ही फॉरेंसिक साइंस लैब की टीम ने भी मौके पर पहुंचकर जरूरी साक्ष्य जुटाए। जांच टीम घटनास्थल से मिले तथ्यों और अन्य परिस्थितियों के आधार पर घटना की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

    पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू की, ताकि बच्ची की मौत के कारणों का पता लगाया जा सके। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच से मामले में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है।

    परिवार ने की कार्रवाई की मांग

    12 साल की संजना की मौत से गांव में शोक और चिंता का माहौल है। परिजन मामले की निष्पक्ष जांच कराने और आरोपित के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

    फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। बच्ची की मौत कैसे हुई और इसके पीछे क्या वजह थी, इसकी स्पष्ट जानकारी जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेगी।

    डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के आधार पर तैयार की गई है। परिजनों की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। घटना से जुड़े अंतिम तथ्य पुलिस जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर स्पष्ट होंगे।

  • दोस्त के घर घड़ी तलाशते समय अलमारी में मिली गन, अचानक चली गोली से 12 वर्षीय देविक की मौत.

    दोस्त के घर घड़ी तलाशते समय अलमारी में मिली गन, अचानक चली गोली से 12 वर्षीय देविक की मौत.

    दोस्त के घर घड़ी तलाशते समय अलमारी में मिली गन, अचानक चली गोली से 12 वर्षीय देविक की मौत.

    हिसार: हरियाणा के हिसार जिले के मंडी आदमपुर में एक दर्दनाक हादसे में 12 वर्षीय छात्र देविक गोयल की गोली लगने से मौत हो गई। सातवीं कक्षा में पढ़ने वाला देविक अपने दोस्त के घर गया था। शुरुआती जानकारी के अनुसार, दोनों घर में घड़ी तलाश रहे थे, तभी अलमारी में किताबों के बीच रखे एक छोटे बॉक्स में गन मिली। इसी दौरान अचानक गोली चल गई, जो देविक के माथे में लगी।

    घड़ी तलाशते समय अलमारी में मिली गन

    मिली जानकारी के मुताबिक, देविक एक निजी स्कूल में पढ़ता था। बताया जा रहा है कि अगले दो से चार दिनों में उसके स्कूल का टूर प्रस्तावित था। इसी सिलसिले में वह अपने दोस्त के घर पहुंचा था। दोस्त ने उसे घड़ी नहीं मिलने की बात बताई, जिसके बाद दोनों उसे तलाशने लगे।

    घड़ी खोजते हुए दोनों ने घर की एक अलमारी खोली। वहां किताबों के बीच रखे छोटे बॉक्स में गन मिली। गन को लेकर बातचीत के दौरान अचानक गोली चल गई और देविक गंभीर रूप से घायल हो गया। गोली लगने से उसकी मौत हो गई।

    घटना से परिवार और आसपास के लोगों में शोक का माहौल है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, परिजन भी फिलहाल यह स्पष्ट नहीं कर पाए हैं कि गोली किन परिस्थितियों में चली।

    पुलिस जांच में जुटी, गन के मालिक का पता लगाया जा रहा

    घटना की सूचना मिलने पर आदमपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए हिसार के नागरिक अस्पताल भेजा।

    पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि गन किसकी थी और गोली चलने की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं। मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम और जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंपे जाने की बात कही गई है।

    घर में हथियार रखना क्यों हो सकता है खतरनाक?

    यह घटना घरों में हथियारों को बच्चों की पहुंच से दूर और सुरक्षित तरीके से रखने की अहमियत याद दिलाती है। बच्चों को किसी अनजान हथियार को छूने या उसके साथ प्रयोग करने से रोकना जरूरी है। हथियार को सुरक्षित लॉक में रखना और उसकी चाबी बच्चों की पहुंच से दूर रखना भी महत्वपूर्ण है।

    डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट पर आधारित है। गोली चलने की परिस्थितियों और हथियार के स्वामित्व की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगी।

  • अनार के छिलके से बनाएं घर पर फेस पैक, त्वचा को मुलायम रखने में मिल सकती है मदद

    अनार के छिलके से बनाएं घर पर फेस पैक, त्वचा को मुलायम रखने में मिल सकती है मदद

    अनार के छिलके से बनाएं घर पर फेस पैक, त्वचा को मुलायम रखने में मिल सकती है मदद

    अनार का इस्तेमाल आमतौर पर सेहत के लिए किया जाता है, लेकिन इसके छिलके में भी कई प्राकृतिक वनस्पति यौगिक और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। कुछ लोग अनार के छिलके के पाउडर का इस्तेमाल त्वचा की देखभाल के लिए फेस पैक के रूप में करते हैं। वहीं, दही त्वचा को कुछ समय के लिए मुलायम महसूस कराने में मदद कर सकता है।

    हालांकि, अनार के छिलके से डार्क स्पॉट्स हटने या त्वचा की रंगत में स्थायी सुधार होने के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इसका इस्तेमाल करते समय त्वचा की संवेदनशीलता का ध्यान रखना जरूरी है।

    1. त्वचा की देखभाल में हो सकता है उपयोगी

    अनार के छिलके में पॉलीफेनॉल जैसे प्राकृतिक यौगिक पाए जाते हैं, जिनमें एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं। इन यौगिकों पर त्वचा की देखभाल के संदर्भ में शोध किया गया है। हालांकि, घर पर तैयार किए गए छिलके के पाउडर को चेहरे पर लगाने से कितनी मात्रा में फायदा मिलता है, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

    2. रूखी त्वचा के लिए दही के साथ बनाएं फेस पैक

    अगर आप घरेलू फेस पैक आजमाना चाहते हैं, तो अनार के छिलके के बारीक पाउडर और सादे दही का मिश्रण इस्तेमाल कर सकते हैं।

    फेस पैक बनाने का तरीका:

    • एक साफ कटोरी में एक चम्मच अनार के छिलके का बारीक पाउडर लें।
    • इसमें लगभग डेढ़ चम्मच सादा दही मिलाएं।
    • दोनों चीजों को अच्छी तरह मिलाकर मुलायम पेस्ट तैयार करें।
    • इसे साफ चेहरे पर पतली परत में लगाएं और करीब 5–10 मिनट तक रखें।
    • इसके बाद सामान्य या हल्के गुनगुने पानी से बिना रगड़े धो लें।

    दही त्वचा को अस्थायी रूप से मुलायम महसूस करा सकता है। हालांकि, यह फेस पैक हर तरह की त्वचा के लिए उपयुक्त हो, ऐसा जरूरी नहीं है।

    3. इस्तेमाल से पहले इन सावधानियों को न भूलें

    • फेस पैक लगाने से पहले त्वचा के छोटे हिस्से पर पैच टेस्ट करें।
    • चेहरे पर कट, घाव, जलन या सक्रिय मुंहासे हों, तो इसका इस्तेमाल न करें।
    • अनार के छिलके के पाउडर को स्क्रब की तरह जोर से न रगड़ें, क्योंकि इससे त्वचा में जलन हो सकती है।
    • खुजली, लालिमा या जलन होने पर तुरंत धोकर इस्तेमाल बंद कर दें।
    • डार्क स्पॉट्स से बचाव और त्वचा की देखभाल के लिए सनस्क्रीन का नियमित इस्तेमाल भी महत्वपूर्ण है।

    क्या इससे चेहरे के दाग-धब्बे दूर हो जाएंगे?

    अनार के छिलके का फेस पैक लगाने से डार्क स्पॉट्स या पिगमेंटेशन पूरी तरह खत्म होने की गारंटी नहीं है। यदि चेहरे पर लगातार दाग-धब्बे, खुजली या मुंहासों की समस्या बनी रहती है, तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।

    डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य ब्यूटी और स्किन केयर जानकारी पर आधारित है। घरेलू फेस पैक के प्रभाव के वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं। संवेदनशील त्वचा वाले लोग विशेष सावधानी बरतें और किसी भी तरह की प्रतिक्रिया होने पर इस्तेमाल बंद कर दें।

  • पश्चिम मेदिनीपुर: भाई को बचाने टैंक में उतरी बहन, फिर मां की तलाश में पहुंचा बेटा; जहरीली गैस से चार लोगों की मौत.

    पश्चिम मेदिनीपुर: भाई को बचाने टैंक में उतरी बहन, फिर मां की तलाश में पहुंचा बेटा; जहरीली गैस से चार लोगों की मौत.

    पश्चिम मेदिनीपुर: भाई को बचाने टैंक में उतरी बहन, फिर मां की तलाश में पहुंचा बेटा; जहरीली गैस से चार लोगों की मौत.

    पश्चिम मेदिनीपुर: पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले में दुर्गा पूजा की खुशियां उस समय मातम में बदल गईं, जब एक नए सेप्टिक टैंक में हुए हादसे में चार लोगों की जान चली गई। शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, टैंक के भीतर जमा जहरीली गैस हादसे की वजह बनी। घटना के दौरान एक-दूसरे को बचाने की कोशिश में लोग बारी-बारी से टैंक के अंदर उतरते चले गए और चारों की मौत हो गई।

    भाई को बचाने उतरी बहन, फिर मां के लिए दौड़ा बेटा

    रिपोर्ट के मुताबिक, हादसे की शुरुआत टैंक के भीतर एक व्यक्ति के फंसने या बेहोश होने से हुई। उसे बचाने के लिए उसकी बहन टैंक में उतर गई। इसके बाद परिवार के अन्य सदस्य भी मदद के लिए आगे आए। मां को बचाने की कोशिश में बेटा भी टैंक में पहुंच गया। इस तरह एक के बाद एक लोग जहरीली गैस की चपेट में आते चले गए।

    अस्पताल पहुंचने पर चारों को मृत घोषित किया गया

    हादसे के बाद प्रभावित लोगों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन चारों की जान नहीं बचाई जा सकी। इस घटना ने पूरे इलाके में शोक का माहौल पैदा कर दिया। एक-दूसरे को बचाने की कोशिश में परिवार के सदस्यों की जान जाने से गांव के लोग भी स्तब्ध हैं।

    सेप्टिक टैंक में जहरीली गैस बन सकती है जानलेवा

    सेप्टिक टैंक और बंद गड्ढों में मीथेन तथा हाइड्रोजन सल्फाइड जैसी ख

  • काली मिर्च खाने से पाचन: को मिल सकता है फायदा, जानें इसके इस्तेमाल के तरीके और जरूरी सावधानियां

    काली मिर्च खाने से पाचन: को मिल सकता है फायदा, जानें इसके इस्तेमाल के तरीके और जरूरी सावधानियां

    काली मिर्च खाने से पाचन: को मिल सकता है फायदा, जानें इसके इस्तेमाल के तरीके और जरूरी सावधानियां

    काली मिर्च भारतीय रसोई में इस्तेमाल होने वाला एक लोकप्रिय मसाला है। खाने का स्वाद बढ़ाने के साथ इसमें पिपेरिन नामक प्राकृतिक यौगिक भी पाया जाता है। सीमित मात्रा में काली मिर्च को संतुलित आहार का हिस्सा बनाया जा सकता है। हालांकि, इसे हर बीमारी का इलाज मानना सही नहीं है।

    1. पाचन के लिए हो सकती है उपयोगी

    भारी भोजन के बाद कुछ लोगों को पेट में भारीपन या गैस की परेशानी महसूस होती है। काली मिर्च अपने तीखे स्वाद और प्राकृतिक यौगिकों के कारण भोजन का हिस्सा बन सकती है, लेकिन यह साबित करने के लिए पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं कि इससे गैस या अपच का इलाज हो जाता है। लगातार परेशानी होने पर इसके पीछे की वजह जानना जरूरी है।

    2. शरीर को एंटीऑक्सीडेंट मिल सकते हैं

    काली मिर्च में पिपेरिन और अन्य वनस्पति यौगिक पाए जाते हैं। इन पर उनके संभावित एंटीऑक्सीडेंट प्रभावों को लेकर शोध किया गया है। हालांकि, सामान्य मात्रा में काली मिर्च खाने से किसी खास बीमारी से बचाव होने का दावा अभी नहीं किया जा सकता।

    3. जोड़ों के दर्द में तेल की मालिश कितनी कारगर है?

    कुछ पारंपरिक घरेलू उपायों में काली मिर्च मिले तेल का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन जोड़ों के दर्द, गठिया या अन्य गंभीर समस्याओं में इससे लाभ होने के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं। त्वचा पर ऐसा तेल लगाने से जलन या एलर्जी भी हो सकती है। इसे लगाने से पहले त्वचा के छोटे हिस्से पर जांच करें और जलन होने पर तुरंत इस्तेमाल बंद कर दें।

    4. क्या काली मिर्च आंखों की रोशनी बढ़ाती है?

    काली मिर्च को आंखों की रोशनी बढ़ाने या आंखों की बीमारियों का इलाज करने वाला उपाय मानने के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं। आंखों की रोशनी में बदलाव होने पर नेत्र विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी है।

    5. काली मिर्च का सेवन कैसे करें?

    • दाल, सब्जी और सूप में स्वाद के अनुसार थोड़ी काली मिर्च डाल सकते हैं।
    • इसे सलाद या अन्य व्यंजनों में मसाले के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
    • बहुत अधिक मात्रा में सेवन करने से बचें, क्योंकि इससे कुछ लोगों को पेट में जलन या परेशानी हो सकती है।
    • काली मिर्च के सप्लीमेंट लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लें, खासकर यदि आप नियमित दवाएं लेते हैं।

    किन बातों का रखें ध्यान?

    काली मिर्च में मौजूद पिपेरिन कुछ दवाओं के शरीर में अवशोषण और उनके असर को प्रभावित कर सकता है। इसलिए किसी बीमारी के इलाज के लिए इसका अधिक मात्रा में सेवन या सप्लीमेंट लेना उचित नहीं है। बुखार, लगातार पेट की परेशानी, जोड़ों में सूजन या मासिक धर्म न आने जैसी समस्याओं में घरेलू नुस्खों के बजाय चिकित्सकीय सलाह लें।

    डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के लिए है। काली मिर्च किसी बीमारी की प्रमाणित दवा नहीं है। स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर योग्य चिकित्सक से परामर्श लें।

  • स्मार्टफोन यूजर्स सावधान! कॉल फॉरवर्डिंग के नाम पर हो सकती है साइबर ठगी, ये गलतियां पड़ सकती हैं भारी.

    स्मार्टफोन यूजर्स सावधान! कॉल फॉरवर्डिंग के नाम पर हो सकती है साइबर ठगी, ये गलतियां पड़ सकती हैं भारी.

    स्मार्टफोन यूजर्स सावधान! कॉल फॉरवर्डिंग के नाम पर हो सकती है साइबर ठगी, ये गलतियां पड़ सकती हैं भारी.

    आज के समय में स्मार्टफोन का इस्तेमाल केवल बातचीत के लिए नहीं, बल्कि बैंकिंग, ऑनलाइन पेमेंट और निजी कामों के लिए भी किया जाता है। ऐसे में मोबाइल की सुरक्षा से जुड़ी छोटी-सी लापरवाही भी परेशानी खड़ी कर सकती है। साइबर ठग कभी कूरियर डिलीवरी के नाम पर, तो कभी बैंक अधिकारी बनकर लोगों को अपने जाल में फंसाने की कोशिश करते हैं।

    धोखाधड़ी के कुछ मामलों में ठग लोगों से ऐसे कोड डायल करवाते हैं, जिनसे फोन की कॉल फॉरवर्डिंग सेटिंग बदल सकती है। इसलिए किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर मोबाइल में कोई कोड डायल करने या संदिग्ध लिंक खोलने से पहले उसकी सत्यता जांचना जरूरी है।

    कूरियर डिलीवरी के नाम पर ठगी से रहें सावधान

    साइबर ठग खुद को कूरियर कंपनी का कर्मचारी बताकर फोन कर सकते हैं। वे पार्सल की डिलीवरी रोकने, पता बदलने या डिलीवरी की पुष्टि करने का बहाना बनाकर आपसे निजी जानकारी मांग सकते हैं।

    कुछ मामलों में वे SMS या WhatsApp पर संदिग्ध लिंक भेजते हैं। ऐसे लिंक पर जानकारी भरने, अनजान ऐप इंस्टॉल करने या OTP साझा करने से आपकी निजी और वित्तीय सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।

    अगर किसी पार्सल को लेकर संदेह हो, तो संबंधित कूरियर कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या सत्यापित ग्राहक सेवा के जरिए ही जानकारी लें।

    कॉल फॉरवर्डिंग कोड के नाम पर कैसे हो सकती है धोखाधड़ी?

    कॉल फॉरवर्डिंग एक सामान्य मोबाइल सुविधा है, जिसकी मदद से आने वाली कॉल किसी दूसरे नंबर पर भेजी जा सकती है। साइबर ठग इसी सुविधा का गलत इस्तेमाल करने के लिए लोगों को कुछ विशेष कोड डायल करने के लिए कह सकते हैं।

    उदाहरण के तौर पर, *21* से शुरू होने वाले कुछ कोड का इस्तेमाल नेटवर्क और सेवा के अनुसार कॉल फॉरवर्डिंग सक्रिय करने के लिए किया जा सकता है। यदि कोई अनजान व्यक्ति आपको ऐसा कोड डायल करने और उसके बाद अपना नंबर दर्ज करने के लिए कहता है, तो पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच करें।

    ध्यान दें कि कॉल फॉरवर्डिंग सक्रिय होने का अर्थ यह नहीं है कि आपके सभी SMS या बैंक OTP भी दूसरे नंबर पर पहुंचने लगेंगे। कॉल और SMS अलग-अलग सेवाएं हैं। फिर भी, कॉल फॉरवर्डिंग का दुरुपयोग करके ठग कुछ परिस्थितियों में खाता रिकवरी या फोन-आधारित सत्यापन प्रक्रिया का फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं।

    क्या *21*, *61* और *67* हमेशा खतरनाक हैं?

    नहीं। इन कोड का काम मोबाइल नेटवर्क और सेवा प्रदाता के अनुसार अलग हो सकता है। कुछ कोड कॉल फॉरवर्डिंग या कॉल संबंधी अन्य सुविधाओं से जुड़े होते हैं। केवल कोड का उल्लेख होने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि फोन हैक हो जाएगा।

    खतरा तब बढ़ता है, जब कोई ठग आपको अपनी बातों में फंसाकर ऐसा कोड डायल करवाता है जिससे आपकी कॉल किसी अनजान नंबर पर फॉरवर्ड हो जाए। इसलिए किसी अनजान व्यक्ति के निर्देश पर कोड डायल न करें।

    अगर गलती से कॉल फॉरवर्डिंग चालू हो जाए तो क्या करें?

    अगर आपको संदेह है कि आपकी कॉल किसी दूसरे नंबर पर फॉरवर्ड हो रही है, तो ये कदम उठाएं:

    • अपने फोन की कॉल सेटिंग में जाकर Call Forwarding की स्थिति जांचें।
    • अपने मोबाइल ऑपरेटर से संपर्क करके पता करें कि कोई अनजान नंबर कॉल फॉरवर्डिंग के लिए सेट तो नहीं है।
    • जरूरत होने पर ऑपरेटर के निर्देशों के अनुसार कॉल फॉरवर्डिंग बंद करवाएं। ##002# कुछ नेटवर्क पर सभी कॉल फॉरवर्डिंग सेटिंग्स हटाने के लिए काम कर सकता है, लेकिन यह हर नेटवर्क पर एक जैसा काम करे, इसकी गारंटी नहीं है।
    • यदि आपने बैंकिंग जानकारी या OTP किसी के साथ साझा किया है, तो तुरंत बैंक से संपर्क करें और खाते की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएं।

    साइबर ठगी से बचने के लिए अपनाएं ये सावधानियां

    • अनजान व्यक्ति के कहने पर कोई USSD कोड डायल न करें।
    • कूरियर या बैंक के नाम से आए संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें।
    • OTP, UPI PIN, पासवर्ड और कार्ड की गोपनीय जानकारी किसी से साझा न करें।
    • फोन में अनजान ऐप इंस्टॉल करने या रिमोट एक्सेस देने से बचें।
    • किसी भी समस्या की पुष्टि संबंधित कंपनी या बैंक के आधिकारिक माध्यम से करें।

    साइबर फ्रॉड होने पर कहां करें शिकायत?

    यदि आपके खाते से बिना अनुमति पैसे निकल गए हैं, तो तुरंत अपने बैंक को सूचित करें और 1930 साइबर वित्तीय धोखाधड़ी हेल्पलाइन पर संपर्क करें। आप राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कर सकते हैं। जल्द शिकायत करने से संबंधित लेन-देन पर समय रहते कार्रवाई की संभावना बढ़ सकती है, हालांकि पैसे वापस मिलने की गारंटी नहीं होती।

    डिस्क्लेमर: यह लेख साइबर सुरक्षा से जुड़ी सामान्य जानकारी पर आधारित है। मोबाइल कोड का व्यवहार नेटवर्क और सेवा प्रदाता के अनुसार अलग हो सकता है। किसी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में अपने मोबाइल ऑपरेटर और बैंक से संपर्क करें।