गुजरात: नवरात्रि का त्योहार आते ही गरबा और डांडिया की धूम शुरू हो जाती है। लोग पारंपरिक कपड़े पहनकर गरबा खेलने की तैयारियों में जुट जाते हैं। लेकिन इस दौरान कई सिंगल लोगों के मन में एक सवाल रहता है कि आखिर गरबा खेलने के लिए पार्टनर कहां से लाएं? अब इसी परेशानी का एक अनोखा और मजेदार समाधान सामने आया है, जिसने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच लिया है।
गुजरात के इंस्टाग्राम यूजर कृष मिस्त्री ने ‘रेंट-ए-गरबा पार्टनर’ नाम से एक अनोखा आइडिया शेयर किया है। इसमें गरबा खेलने के लिए अलग-अलग कीमतों पर पार्टनर के साथ समय बिताने के पैकेज बताए गए हैं। इन पैकेज की शुरुआती कीमत 1000 रुपये रखी गई है।
₹1000 के सिल्वर पैकेज में क्या मिलेगा?
कृष मिस्त्री की ओर से साझा की गई जानकारी के मुताबिक, सिल्वर पैकेज की कीमत 1000 रुपये है। इसमें दो घंटे तक गरबा खेलने का मौका मिलेगा। इसके साथ मैचिंग आउटफिट, गरबा के बेसिक स्टेप्स सीखने और सेल्फी लेने जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
यह पैकेज उन लोगों के लिए पेश किया गया है, जो गरबा खेलने के लिए साथी तलाश रहे हैं और कम समय के लिए इस अनुभव का हिस्सा बनना चाहते हैं।
₹1500 के गोल्ड पैकेज में फिल्मी अंदाज
गोल्ड पैकेज की कीमत 1500 रुपये बताई गई है। इसके तहत चार घंटे तक गरबा खेलने का मौका मिलेगा। इसके अलावा पहली मुलाकात को फिल्मी अंदाज देने और सोशल मीडिया के लिए रील बनाने जैसी सुविधाओं का भी जिक्र किया गया है।
यानी इस पैकेज में गरबा खेलने के साथ-साथ यादगार पल बनाने का विकल्प भी शामिल किया गया है।
₹2000 के प्लैटिनम पैकेज में पूरे दिन का साथ
सबसे महंगा प्लैटिनम पैकेज 2000 रुपये का है। पोस्ट में इसके तहत पूरे दिन गरबा खेलने और कुछ अतिरिक्त सुविधाएं देने की बात कही गई है।
इस पैकेज में माथे पर प्यार भरा किस, दुपट्टा और झुमके ठीक करने में मदद तथा कार्यक्रम के बाद घर तक सुरक्षित छोड़ने जैसी सुविधाओं का उल्लेख किया गया है।
सोशल मीडिया पर लोगों ने लिए जमकर मजे
कृष मिस्त्री का यह अनोखा आइडिया सामने आते ही सोशल मीडिया पर लोगों ने मजेदार प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं। कुछ लोगों ने पैकेज की जानकारी लेने में दिलचस्पी दिखाई, तो कुछ यूजर्स ने इसे साइड बिजनेस का अनोखा विचार बताया।
वहीं, कई लोगों ने इस पूरे कॉन्सेप्ट को मजाकिया अंदाज में लिया और तरह-तरह के कमेंट किए। नवरात्रि के दौरान गरबा पार्टनर किराए पर देने का यह आइडिया लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
फिलहाल यह जानकारी कृष मिस्त्री की सोशल मीडिया पोस्ट में साझा किए गए आइडिया और पैकेज पर आधारित है।
नोएडा: स्कूल के दिनों की यादें अक्सर उम्र बढ़ने के साथ और भी खास लगने लगती हैं। ब्लैकबोर्ड, रोल नंबर, क्लासरूम, लाइब्रेरी और टीचर की डांट जैसी कई चीजें आज भी लोगों के जेहन में बसी होती हैं। अगर आप भी अपने स्कूल के दिनों को दोबारा महसूस करना चाहते हैं, तो नोएडा का एक अनोखा कैफे आपको कुछ देर के लिए उसी दौर में वापस ले जा सकता है।
नोएडा के सेक्टर-63 में स्थित The Attendance Sheet Cafe का पूरा कॉन्सेप्ट स्कूल की यादों पर आधारित है। यहां कदम रखते ही सामान्य कैफे के बजाय क्लासरूम जैसा माहौल नजर आता है।
टेबल नंबर नहीं, मिलेगा रोल नंबर
इस कैफे में टेबल को सामान्य नंबर देने के बजाय स्कूल की तरह रोल नंबर दिए गए हैं। अंदर ब्लैकबोर्ड, ग्रीन बोर्ड, डेस्क और किताबों की लाइब्रेरी जैसी चीजें कैफे के माहौल को और खास बनाती हैं।
कैफे के फाउंडर आशीष पांडे ने इसके कॉन्सेप्ट को इस तरह तैयार किया है कि अलग-अलग उम्र के लोग यहां आकर अपने स्कूल के दिनों की यादें ताजा कर सकें।
मार्कशीट जैसा है मेन्यू कार्ड
कैफे की सबसे खास चीज इसका मेन्यू कार्ड है। यहां खाने की लिस्ट किसी सामान्य रेस्टोरेंट के मेन्यू की तरह नहीं, बल्कि मार्कशीट के अंदाज में तैयार की गई है।
ग्राहकों को अपनी पसंद की डिश पर टिक लगाकर यह ‘मार्कशीट’ स्टाफ को देनी होती है। खाने के नाम भी स्कूल थीम के हिसाब से रखे गए हैं। इनमें होमवर्क तड़का मैगी, ट्यूशन वाली मैगी, स्टाफ रूम प्रिंसिपल चाय, केमिस्ट्री साइंस लैब मॉकटेल्स और बैकबेंचर मोमोज जैसे नाम शामिल हैं।
अपनी अटेंडेंस भी लगा सकते हैं
कैफे में एक खास Attendance Wall भी बनाई गई है। यहां ग्राहक अपनी पसंदीदा डिश खाने के बाद चॉक से अपना नाम, स्कूल का रोल नंबर और पसंदीदा स्नैक लिखकर खुद को ‘Present’ मार्क कर सकते हैं।
कैफे के अंदर स्कूल से जुड़ी कई पुरानी यादों को भी थीम का हिस्सा बनाया गया है। ‘May I come in, Sir?’, ‘Stand up on the bench’, ‘Silence in the class’ और होमवर्क चेक करवाने जैसे अनुभवों को सजावट और माहौल के जरिए दोबारा दिखाने की कोशिश की गई है।
साइंस लैब और लाइब्रेरी भी मौजूद
कैफे में साइंस लैब और लाइब्रेरी जैसी जगहें भी बनाई गई हैं। साइंस लैब में स्कूल प्रोजेक्ट की तरह अलग-अलग मॉडल रखे गए हैं, जबकि लाइब्रेरी वाला हिस्सा पूरे माहौल को और ज्यादा स्कूल जैसा एहसास देता है।
इसके अलावा यहां एक Confession Board भी है, जहां लोग अपने स्कूल के दिनों से जुड़ी ऐसी याद लिख सकते हैं, जिसे उन्होंने कभी किसी के साथ साझा नहीं किया।
खाना खाने के साथ बचपन की यादों का अनुभव
The Attendance Sheet Cafe का कॉन्सेप्ट सिर्फ खाने-पीने तक सीमित नहीं है। यहां मेन्यू को मार्कशीट, टेबल को रोल नंबर और कैफे के माहौल को क्लासरूम का रूप दिया गया है।
यही वजह है कि यहां आने वाले लोगों को कुछ समय के लिए ऐसा महसूस हो सकता है जैसे वे दोबारा अपने स्कूल के दिनों में पहुंच गए हों। बच्चों के साथ-साथ बड़े लोगों के लिए भी यह जगह पुरानी यादों को ताजा करने वाला अलग तरह का अनुभव बन सकती है।
दिल को सेहतमंद रखने के लिए किचन में मौजूद छोटी-छोटी चीजें बेहद असरदार साबित हो सकती है। इन्हीं में से एक है टमाटर जो दिल को हेल्दी रखने में काफी अहम किरदार निभाता है। टमाटर में मौजूद ‘लाइकोपीन’ नाम का एंटीऑक्सीडेंट दिल को सेहतमंद रखने में बेहद असरदार साबित होता है। एम्स के पूर्व कंसल्टेंट और साओल हार्ट सेंटर के फाउंडर एंड डायरेक्टर डॉ बिमल झाजर के मुताबिक टमाटर रोजाना की डाइट में शामिल की जाने वाली ऐसी सब्जी है, जिसमें फाइबर, विटामिन, मिनरल और कई तरह के प्लांट कंपाउंड पाए जाते हैं।
डॉक्टर के मुताबिक टमाटर में मौजूद लाइकोपीन एक प्रमुख कैरोटीनॉयड और एंटीऑक्सीडेंट है जो दिल को हेल्दी रखने में बेहद उपयोगी हो सकता है। अब सवाल ये उठता है कि टमाटर में ऐसा क्या है जो हमारे बॉडी के इस अहम अंग को हेल्दी रखने में मदद करता है? टमाटर कैसे खाएं कि बॉडी को इसका पूरा फायदा मिले और दिल भी हेल्दी रहे। कार्डियोलॉजिस्ट्स से जानते हैं कि दिल की देखभाल के लिए टमाटर खाने का सही तरीका क्या है।
लाइकोपीन क्या है और हार्ट के लिए ये क्यों है जरूरी?
लाइकोपीन टमाटर में पाया जाने वाला एक कैरोटीनॉयड है, जिसकी वजह से टमाटर का लाल रंग दिखाई देता है। यह एक एंटीऑक्सीडेंट कंपाउंड है। शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाव के लिए एंटीऑक्सीडेंट युक्त खाद्य पदार्थों को संतुलित डाइट का हिस्सा माना जाता है। टमाटर एक ऐसी सब्जी है जिसमें कैलोरी न के बराबर होती है। लगभग 100 ग्राम कच्चे लाल टमाटर में करीब 18 कैलोरी होती हैं जो इसे दिल के लिए उपयोगी बनती है। टमाटर का सेवन वजन को कंट्रोल करने में भी मददगार साबित होता है। इसमें पानी की मात्रा भी काफी अधिक होती है। इसके अलावा टमाटर में फाइबर, विटामिन C और पोटैशियम भी मौजूद होते हैं जो बीपी के मरीजों के लिए भी इसे हेल्दी बनाता है। टमाटर में मौजूद डाइटरी फाइबर और दूसरे प्लांट कंपाउंड संतुलित डाइट का हिस्सा होने के कारण हार्ट हेल्थ के लिए उपयोगी हो सकते हैं।
पोटैशियम और ब्लड प्रेशर का क्या कनेक्शन?
टमाटर में पोटैशियम भी पाया जाता है। डाइट में पर्याप्त पोटैशियम लेना ब्लड प्रेशर को मैनेज करने में मदद कर सकता है, खासकर जब इसे कम सोडियम वाली बैलेंस डाइट के साथ लिया जाए। हालांकि, हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों को डॉक्टर की सलाह से अपनी पूरी डाइट और दवाओं का ध्यान रखना चाहिए।
हार्ट को हेल्दी रखने के लिए टमाटर कैसे खाएं?
दिल को हेल्दी रखने के लिए आप टमाटर का सेवन कच्चा और पका कर दोनों तरह कर सकते हैं। पकाने से टमाटर में मौजूद लाइकोपीन की उपलब्धता बढ़ सकती है, जबकि कच्चे टमाटर से विटामिन C जैसे कुछ पोषक तत्व अच्छी मात्रा में मिलते हैं। विटामिन सी बॉडी के लिए बहुत जरूरी है। डाइट में टमाटर का सेवन कच्चा और पका कर दोनों तरह से करने से सेहत को फायदा होता है।कच्चे टमाटर को सलाद, सैंडविच या रैप में शामिल किया जा सकता है। अगर टमाटर को पका कर खाना चाहते हैं तो आप इसे सूप, सब्जी या करी में इस्तेमाल कर सकते हैं।
टमाटर ओवर ऑल सेहत पर कैसे करता है असर?
टमाटर एक ऐसी सब्जी है जो ना सिर्फ दिल के लिए हेल्दी है बल्कि हमारी ओवर ऑल बॉडी के लिए फायदेमंद है। टमाटर में लाइकोपीन और पोटैशियम जैसे पोषक तत्व होते हैं, जो दिल के लिए जरूरी हैं। टमाटर का सेवन स्किन को हेल्दी रखने में भी मददगार साबित होता है। इसमें मौजूद विटामिन C और लाइकोपीन स्किन को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाने में मदद कर सकता हैं। पानी और फाइबर से भरपूर टमाटर का सेवन पाचन को दुरुस्त करता है। इसका सेवन करने से कब्ज जैसी समस्या का इलाज होता है। टमाटर आंखों की सेहत के लिए भी उपयोगी है। इसमें ल्यूटिन और बीटा-कैरोटीन जैसे कैरोटीनॉयड पाए जाते हैं, जो आंखों के हेल्दी रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। इसमें मौजूद विटामिन C इम्यूनिटी को मजबूत करता है और बॉडी को हेल्दी रखता है।
एक दिन में कितना टमाटर खाना सही है?
टमाटार दिल के लिए और बॉडी के लिए फायदेमंद है इसका मतलब ये नहीं है कि आप इसे भर-भर कर खाएं आप टमाटर का सीमित सेवन करें आपको फायदा होगा। इसे अपनी कुल डाइट, उम्र, हेल्थ और अपनी हेल्थ कंडीशन को ध्यान में रखते हुए ही खाएं। सामान्य तौर पर टमाटर को सब्जियों और अन्य पौधों से मिलने वाले खाद्य पदार्थों के साथ संतुलित डाइट में शामिल किया जा सकता है।
डिस्क्लेमर: टमाटर संतुलित डाइट का हिस्सा हो सकता है, लेकिन यह किसी हृदय रोग या हाई बीपी का इलाज नहीं है। किसी खास स्वास्थ्य स्थिति में डॉक्टर की सलाह लें।
देशभर में गणेश उत्सव की धूम के बीच नागपुर के प्रसिद्ध गणेश टेकड़ी मंदिर में आज भगवान गणेश को 1101 किलो का विशाल महालड्डू अर्पित किया गया. भक्तों ने विधिवत पूजा-अर्चना के बाद इस महालड्डू का भोग भगवान गणेश को लगाया.
गणपति बप्पा को भोग लगाने के लिए नागपुर में ऐसा महालड्डू तैयार किया गया, जिसे देखकर हर कोई हैरान रह गया. गणेश टेकड़ी मंदिर में भगवान गणेश को 1101 किलो का विशाल लड्डू चढ़ाया गया. करीब 5 फीट ऊंचे इस महालड्डू को तैयार करने में 22 कारीगरों ने 6 दिनों तक दिन-रात मेहनत की. मंदिर में पहुंचे श्रद्धालुओं के लिए भी यह महालड्डू आकर्षण का सबसे बड़ा केंद्र बना रहा.
6 दिन में तैयार हुआ विशाल लड्डू इस खास महालड्डू को तैयार करने के लिए 22 कारीगरों ने लगातार 6 दिनों तक दिन-रात मेहनत की. आयोजकों के मुताबिक, इसे बनाने में बूंदी और सूखे मेवों की कुल 7 परतें लगाई गईं. इन परतों को खास तरीके से जोड़कर लड्डू को विशाल गोल आकार दिया गया.320 किलो बेसन और 320 किलो घी का इस्तेमाल इतने बड़े महालड्डू को बनाने में बड़ी मात्रा में सामग्री का इस्तेमाल किया गया है. इसमें करीब 320 किलो बेसन, 260 किलो शक्कर, 320 किलो देसी घी और 61 किलो सूखे मेवे डाले गए हैं. सूखे मेवों में पिस्ता, बादाम, काजू और किशमिश शामिल हैं. इसके अलावा लड्डू में केसर और गुलाब जल भी मिलाया गया है.
चांदी के वर्क से सजाया गया महालड्डू को सिर्फ स्वादिष्ट ही नहीं, बल्कि देखने में भी खास बनाया गया. इसकी सजावट के लिए ऊपर से चांदी का वर्क लगाया गया. विशाल आकार और खास सजावट के कारण यह महालड्डू मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा. भगवान गणेश को महालड्डू का भोग लगाए जाने के दौरान मंदिर में भक्तों की बड़ी भीड़ नजर आई. श्रद्धालुओं ने गणपति के दर्शन किए और महालड्डू के साथ तस्वीरें भी लीं.
थायराइड के मरीजों में अक्सर यह भ्रम रहता है कि उनके लिए कौन सा नमक सही है। क्या आयोडीन युक्त नमक लेना चाहिए या फिर सेंधा नमक (Rock Salt)? खासकर हाइपोथायरायडिज्म में वजन बढ़ने और हाइपरथायराइडिज्म में वजन घटने जैसी समस्याओं के कारण लोग नमक को लेकर कई तरह की धारणाएं बना लेते हैं। हालांकि, शरीर में आयोडीन की कमी या जरूरत से ज्यादा आयोडीन, दोनों ही कुछ परिस्थितियों में थायराइड के कामकाज को प्रभावित कर सकते हैं।
मुंबई की एंडोक्राइनोलॉजिस्ट (हार्मोन विशेषज्ञ) डॉ. तनवी मयूर पटेल के अनुसार, थायराइड के मरीजों के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि उन्हें आयोडाइज्ड नमक खाना चाहिए या नॉन-आयोडाइज्ड नमक। थायराइड ग्रंथि T3 और T4 हार्मोन बनाती है और इनके निर्माण के लिए आयोडीन जरूरी होता है। हमारा शरीर खुद आयोडीन नहीं बनाता, इसलिए इसकी पूर्ति भोजन के जरिए करनी पड़ती है। अब सवाल उठता है कि शरीर में आयोडीन की पर्याप्त मात्रा बनाए रखने के लिए कौन सा नमक लेना चाहिए? क्या थायराइड के मरीजों को आयोडाइज्ड नमक छोड़कर सेंधा नमक लेना चाहिए? आइए एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. तनवी मयूर पटेल से जानते हैं।
बॉडी में आयोडीन की कमी होने पर कैसा होता है असर
थायराइड की बीमारी कम या ज्यादा नमक खाने से सीधे नहीं होती, लेकिन शरीर में आयोडीन की कमी या जरूरत से ज्यादा आयोडीन थायराइड के कामकाज को प्रभावित कर सकता है। शरीर में आयोडीन की कमी होने पर थायराइड हार्मोन का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। लंबे समय तक गंभीर आयोडीन की कमी रहने पर गॉइटर और हाइपोथायराइडिज्म जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। वहीं, जरूरत से ज्यादा आयोडीन का सेवन भी कुछ लोगों में थायराइड के कामकाज को प्रभावित कर सकता है। बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए पर्याप्त आयोडीन खासतौर पर जरूरी है, क्योंकि थायराइड हार्मोन शरीर के विकास में अहम भूमिका निभाते हैं।
शरीर के लिए कितनी मात्रा में आयोडीन जरूरी है?
आयोडीन की दैनिक जरूरत उम्र और स्थिति के अनुसार अलग अलग होती है। बच्चों में इसकी जरूरत कम होती है, जबकि 12 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए करीब 150 माइक्रोग्राम प्रतिदिन की जरूरत होती है। गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान आयोडीन की जरूरत बढ़ जाती है और यह करीब 250 माइक्रोग्राम प्रति दिन तक हो सकती है।
आयोडीन के दूसरे स्रोत कौन से हैं?
आयोडीन सिर्फ नमक से ही नहीं मिलता। समुद्री खाद्य पदार्थ, मछली, झींगा और कुछ समुद्री शैवाल इसके स्रोत हो सकते हैं। इसके अलावा दूध और कुछ डेयरी प्रोडक्ट से भी आयोडीन मिल सकता है। हालांकि, भोजन से मिलने वाली आयोडीन की मात्रा अलग-अलग हो सकती है।
क्या ज्यादा आयोडीन भी थायराइड के लिए नुकसानदायक है?
आयोडीन की कमी की तरह इसकी अत्यधिक मात्रा भी कुछ लोगों में थायराइड को प्रभावित कर सकती है। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के आयोडीन सप्लीमेंट लेना सही नहीं माना जाता। कुछ दवाओं और मेडिकल प्रक्रियाओं में भी आयोडीन की मात्रा अधिक हो सकती है, इसलिए थायराइड के मरीजों को अपने डॉक्टर को ऐसी दवाओं या जांच के बारे में जानकारी देनी चाहिए।
क्या थायराइड के मरीज आयोडाइज्ड नमक खा सकते हैं?
डॉक्टर ने बताया थायराइड के मरीज आयोडाइज्ड नमक खा सकते हैं या नहीं यह इस बात पर निर्भर करता है कि थायराइड की समस्या किस वजह से है और व्यक्ति को भोजन से कितना आयोडीन मिल रहा है। अगर आयोडीन की कमी है, तो आयोडाइज्ड नमक उपयोगी हो सकता है। वहीं, जिन लोगों को भोजन या अन्य स्रोतों से पर्याप्त आयोडीन मिल रहा है, उनको अतिरिक्त आयोडीन की जरूरत नहीं होती। इसलिए थायराइड की बीमारी होने पर नमक को पूरी तरह बदलने या आयोडीन सप्लीमेंट लेने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है।
हिमालयन पिंक सॉल्ट या सेंधा नमक कितना सही है?
हिमालयन पिंक सॉल्ट, रॉक सॉल्ट या सेंधा नमक को लोग अक्सर सामान्य नमक से ज्यादा हेल्दी मानते हैं। लेकिन इनमें आयोडीन की मात्रा आयोडाइज्ड नमक की तरह सुनिश्चित नहीं होती। अगर कोई व्यक्ति सिर्फ नॉन-आयोडाइज्ड नमक इस्तेमाल करता है और भोजन से भी पर्याप्त आयोडीन नहीं मिल रहा है, तो आयोडीन की कमी हो सकती है। थायराइड के साथ-साथ नमक की कुल मात्रा पर भी ध्यान देना जरूरी है। ज्यादा नमक खाने से शरीर में सोडियम की मात्रा बढ़ सकती है, जिससे हाई ब्लड प्रेशर और पानी रुकने जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए केवल यह देखना पर्याप्त नहीं है कि नमक आयोडाइज्ड है या नहीं, बल्कि रोजाना कुल कितना नमक लिया जा रहा है यह भी जरूरी है।
पैकेट और प्रोसेस्ड फूड से भी बढ़ सकता है नमक का सेवन
नमक का सेवन आप सिर्फ खाने में ही नहीं करते बल्कि आप इसे चिप्स, पापड़, अचार, इंस्टेंट और अन्य पैकेज्ड या प्रोसेस्ड फूड में भी काफी मात्रा में कंज्यूम करते हैं। इन फूड्स के जरिए व्यक्ति जरूरत से ज्यादा नमक का सेवन कर सकता है।
थायराइड मरीज नमक को लेकर क्या सावधानी रखें?
थायराइड होने के बाद हर व्यक्ति को नॉन-आयोडाइज्ड नमक पर स्विच करने की जरूरत नहीं होती। आयोडाइज्ड नमक को पूरी तरह छोड़ने से पहले यह देखना जरूरी है कि शरीर को आयोडीन की पर्याप्त मात्रा दूसरे खाद्य स्रोतों से मिल रही है या नहीं। साथ ही, नमक की कुल मात्रा सीमित रखना भी जरूरी है। कौन सा नमक लेना है और आयोडीन की अतिरिक्त जरूरत है या नहीं, यह व्यक्ति की बीमारी, खान-पान और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर कर सकता है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। थायराइड मरीज नमक या आयोडीन की मात्रा में बदलाव करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
बुधवार को 124वें श्री नंदा देवी महोत्सव के नगर भ्रमण के दौरान सरोवर नगरी का पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा. हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ मां नंदा-सुनंदा के डोले के साथ चलती रही. बारिश आई, लेकिन आस्था के कदम नहीं रुके.
बुधवार को नैनीताल में 124वें श्री नंदा देवी महोत्सव का नगर भ्रमण आस्था और भक्ति के रंग में डूबा नजर आया. मां नंदा-सुनंदा के डोले के साथ हजारों श्रद्धालु बारिश के बीच भी चलते रहे. मंदिर से लेकर शहर की सड़कों तक हर तरफ जयकारे, ढोल-नगाड़े और भक्तों की भीड़ दिखाई दी.पूजा के बाद निकला मां का डोला नयना देवी मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद मां नंदा-सुनंदा का डोला नगर भ्रमण के लिए निकला.
मंदिर के मुख्य द्वार पर डोले पर पुष्पवर्षा की गई. श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर मां के दर्शन किए और आशीर्वाद लिया. इसके बाद डोला डीएसए मैदान, मस्जिद, शारदा संघ होते हुए माल रोड से तल्लीताल की ओर बढ़ा. बारिश की बूंदों के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ.
महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग और युवा बड़ी संख्या में डोले के साथ चलते रहे. रास्ते में कई जगह आरती उतारी गई और पुष्पवर्षा की गई. ढोल-दमाऊं, बैंड-बाजे और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की गूंज ने माहौल को और भव्य बना दिया. पारंपरिक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने कुमाऊं की लोक संस्कृति की झलक भी दिखाई.जगह-जगह लगे सेवा के द्वार नगर भ्रमण में आस्था के साथ सेवा का भाव भी देखने को मिला. श्रद्धालुओं के लिए जगह-जगह भंडारे लगाए गए. लोगों को हलवा-पूरी, पानी, फ्रूटी और प्रसाद बांटा गया. बारिश के बीच स्थानीय लोग और स्वयंसेवक श्रद्धालुओं की सेवा में जुटे रहे.कैलाश के लिए विदा होंगी मां तल्लीताल पहुंचने के बाद डोले को फिर मल्लीताल लाया जाएगा. देर शाम ठंडी सड़क स्थित गोलू देवता मंदिर के पास से मां नंदा-सुनंदा के डोले का नैनी झील में विसर्जन किया जाएगा. इसके साथ ही मां अपने मायके नैनीताल से कैलाश के लिए विदा होंगी. इस दौरान पूरा शहर एक बार फिर ‘जय मां नंदा, जय मां सुनंदा’ के जयकारों से गूंज उठेगा.
नॉर्थ इंडिया के कुछ राज्यों के पुरुष, जो नौकरी की तलाश कर रहे है, उनके लिए ये खबर निराशा जनक हो सकती है. दरअसल बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप ‘A1 Sports World’ के फाउंडर और CEO कार्तिक एसजी (Karthik SG) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक बेहद विवादित ऐलान किया है. CEO के अनुसार, अब उनकी कंपनी में उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश के पुरुष उम्मीदवारों के लिए नौकरी की कोई जगह नहीं है.
नौकरी की तलाश कर रहे लोगों के लिए किसी कंपनी की भर्ती नीति काफी मायने रखती है. लेकिन बेंगलुरु की एक कंपनी के CEO ने ऐसा फैसला बताया है, जिसने सोशल मीडिया पर नई बहस शुरू कर दी है. A1 Sports World के फाउंडर और CEO कार्तिक एसजी ने कहा है कि उनकी कंपनी में अब उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश से आने वाले पुरुष उम्मीदवारों के लिए कोई जगह नहीं है. वह इन राज्यों के पुरुषों को नौकरी पर नहीं रखेंगे. हालांकि ये भी सच है कि इन राज्यों के युवा सबसे ज्यादा दूसरे राज्यों में नौकरी के लिए माइग्रेट करते हैं. हालांकि उन्होंने अपने इस फैसले के पीछे तर्क भी रखा है. उनका कहना है कि उनके इस फैसले के पीछे एक पूर्व घटना है जो एक कर्मचारी से जुड़ा है और साथ ही वजह महिला कर्मचारियों की सुरक्षा को बताया गया.
22 सितंबर को सामने आया CEO का पोस्ट कार्तिक एसजी ने 22 सितंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस फैसले की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि कंपनी में काफी चर्चा और बहस के बाद यह निर्णय लिया गया है. उन्होंने जिन चार राज्यों का नाम लिया, उनमें उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार और मध्य प्रदेश शामिल हैं.
कार्तिक ने अपनी पोस्ट में यह भी बताया कि कंपनी में राजस्थान की एक महिला कर्मचारी पहले से काम कर रही हैं और उन्होंने भी कंपनी के इस फैसले का पूरी तरह समर्थन किया है. हालांकि कार्तिक का ये फैसला सोशल मीडिया पर भी खूब अटेंशन पा रहा. लोगों के बीच ये फैसला चर्चा की वजह बना हुआ है, और इसने एक नई बहस नॉर्थ इंडिया में छेड़ दी है.
एक कर्मचारी के मामले से जुड़ा है फैसला बाद में CEO ने अपने फैसले को लेकर ज्यादा जानकारी शेयर की. कार्तिक के मुताबिक, करीब दो सप्ताह पहले उनकी कंपनी के एक कर्मचारी को नौकरी से निकाला गया था. वह कर्मचारी इन्हीं चार राज्यों में से किसी एक राज्य से था.
कार्तिक का आरोप है कि महिला कर्मचारियों के साथ कथित गलत व्यवहार को लेकर उस कर्मचारी को दो बार चेतावनी दी गई थी. इसके बावजूद उसके व्यवहार में बदलाव नहीं आया. CEO ने आगे दावा किया कि उस कर्मचारी ने एक महिला कर्मचारी के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश भी की थी. उन्होंने अपनी कंपनी के काम करने के माहौल का जिक्र करते हुए कहा कि वहां काफी कम उम्र के लोगों के साथ काम होता है और ऐसे में टीम की सुरक्षा उनके लिए प्राथमिकता है.
नौकरी के समय सामान्य था बैकग्राउंड कार्तिक के अनुसार, जिस कर्मचारी को नौकरी से हटाया गया, वह MBA ग्रेजुएट था. कंपनी में भर्ती के समय उसका रिज्यूमे और बैकग्राउंड सामान्य और साफ नजर आया था. हालांकि, CEO का कहना है कि कंपनी में काम शुरू करने के करीब दो महीने बाद उसके व्यवहार को लेकर परेशानी सामने आने लगी. महिला कर्मचारियों के साथ कथित बदतमीजी के मामले में चेतावनी देने के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ.
कंपनी में 32 लोग, 14 महिलाएं कार्तिक ने अपनी कंपनी की टीम का आंकड़ा भी बताया है. उनके मुताबिक, A1 Sports World में कुल 32 कर्मचारी काम करते हैं और इनमें 14 महिलाएं हैं. उन्होंने बताया कि कंपनी में अलग-अलग राज्यों के लोग काम करते हैं. CEO के अनुसार, 20 कर्मचारी दूसरे राज्यों से हैं और इनमें 12 कर्मचारी दक्षिण भारत के राज्यों से बाहर के हैं. उन्होंने यह भी कहा कि उनकी कंपनी में अलग-अलग धर्म और पृष्ठभूमि के लोग काम करते हैं. कार्तिक ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कंपनी के काम करने के तरीके और कर्मचारियों की सुरक्षा को अपनी प्राथमिकता बताया है. उनके मुताबिक, कंपनी अलग-अलग राज्यों और समुदायों के लोगों के साथ काम करती है, लेकिन हालिया घटना के बाद उन्होंने यह कदम उठाया है.
फैसले पर सोशल मीडिया में अलग-अलग राय CEO के ऐलान के बाद सोशल मीडिया पर इस फैसले को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं. कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि एक कर्मचारी के व्यवहार को उसके राज्य से आने वाले सभी पुरुष उम्मीदवारों से जोड़ना किस हद तक उचित है. वहीं, कुछ लोगों ने कंपनी की महिला कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर CEO की चिंता का समर्थन भी किया. इस तरह सोशल मीडिया पर चर्चा सिर्फ भर्ती के फैसले तक सीमित नहीं रही, बल्कि नौकरी में क्षेत्रीय पहचान, व्यक्तिगत व्यवहार और कार्यस्थल की सुरक्षा जैसे मुद्दों तक पहुंच गई है.
हम जो कुछ भी खाते हैं, शरीर उसमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट को पचाकर ग्लूकोज में बदलता है। यह ग्लूकोज शरीर के लिए ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है। डायबिटीज में इंसुलिन की कमी या उसके प्रभावी ढंग से काम न करने के कारण ग्लूकोज कोशिकाओं में ठीक से नहीं पहुंच पाता। ऐसे में खाना खाने के बाद खून में ग्लूकोज का स्तर बढ़ सकता है और यह सामान्य से ज्यादा समय तक बढ़ा हुआ रह सकता है। कुछ भी खाने के बाद डायबिटीज मरीजों के शरीर में ग्लूकोज का स्तर तेजी से बढ़ता है, जिसे मेडिकल भाषा में ‘पोस्टप्रांडियल ब्लड शुगर स्पाइक’ (Postprandial Blood Sugar Spike) कहा जाता है। डायबिटीज रोगियों और इंसुलिन रेजिस्टेंस से जूझ रहे लोगों के लिए यह स्थिति काफी जोखिम भरी हो सकती है।
एक्सरसाइज स्पेशलिस्ट रिचर्ड के अनुसार, खाने के तुरंत बाद बिस्तर पर लेटने या लंबे समय तक बैठे रहने के बजाय सिर्फ 10 से 15 मिनट की हल्की बॉडी एक्टिविटी मांसपेशियों द्वारा ग्लूकोज के अवशोषण को बढ़ा देती है। वॉक या स्कैट्स जैसी एक्सरसाइज खाने के बाद ब्लड में शुगर का स्तर कंट्रोल करने में मदद करती हैं। आइए, एक्सपर्ट्स से जानते हैं कि कौन-कौन सी 4 आसान एक्सरसाइज खाने के बाद ब्लड शुगर को अचानक बढ़ने से रोक सकती हैं।
खाने के बाद ब्लड शुगर कैसे बढ़ता है?
खाना खाने के बाद शरीर भोजन को पचाकर उसमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट को ग्लूकोज में बदलता है। इससे ब्लड शुगर बढ़ता है और Pancreas से इंसुलिन निकलता है। इंसुलिन ग्लूकोज को शरीर की कोशिकाओं तक पहुंचाने में मदद करता है, जहां इसका इस्तेमाल ऊर्जा के लिए किया जाता है। भोजन के बाद ब्लड शुगर में यह बढ़ोतरी आमतौर पर करीब 2 से 3 घंटे तक रह सकती है।
इंसुलिन रेजिस्टेंस में क्यों बढ़ सकती है ब्लड शुगर?
इंसुलिन रेजिस्टेंस में शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति कम प्रतिक्रिया देती हैं, जो टाइप-2 डायबिटीज का एक प्रमुख कारण है। खाने के बाद बार-बार ब्लड शुगर में तेज बढ़ोतरी लंबे समय में सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है। हाई HbA1c दिल के लिए खतरा बढ़ा सकता है।
खाने के बाद कब एक्सरसाइज करें?
खाने के बाद ब्लड शुगर नॉर्मल रखना चाहते हैं तो आप खाने के बाद वॉक करें। खाने के बाद शुरुआती 45 से 90 मिनट में ब्लड शुगर में बढ़ोतरी देखी जा सकती है। इसलिए खाना खाने के करीब 10 से 30 मिनट बाद हल्की शारीरिक गतिविधि शुरू करना उपयोगी हो सकता है। एक्सरसाइज के दौरान मांसपेशियां ग्लूकोज का इस्तेमाल करती हैं, जिससे ब्लड शुगर में होने वाली बढ़ोतरी कम हो सकती है।
खाना खाने के बाद 10 मिनट टहलें
खाने के बाद हल्की से मध्यम गति से करीब 10 मिनट पैदल चलना एक बेहतरीन आसान एक्सरसाइज है। 10 मिनट की वॉक से भोजन के बाद ब्लड शुगर बढ़ने में करीब 10% तक कमी देखी गई। बहुत धीमी चाल के बजाय सामान्य से थोड़ी तेज गति से चलना बेहतर हो सकता है। आप वॉक ऑफिस के बाहर, घर के अंदर भी कर सकते हैं।
सीढ़ी पर स्टेप-अप करें
दूसरा विकल्प स्टेप-अप एक्सरसाइज है। इसके लिए सीढ़ी की सबसे निचली सीढ़ी या किसी सुरक्षित स्टेप का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें लगातार ऊपर-नीचे कदम रखना होता है। इससे पैरों और खासकर ग्लूट मसल्स की गतिविधि बढ़ती है, जिससे मांसपेशियां ब्लड में मौजूद ग्लूकोज का इस्तेमाल करती हैं जिससे ब्लड में शुगर का स्तर नॉर्मल होता है। खाने के बाद करीब 3 मिनट के स्टेप-अप से ब्लड शुगर बढ़ने में लगभग 18% की कमी आती है। ऊंचे स्टेप से एक्सरसाइज की तीव्रता बढ़ सकती है, लेकिन इसे अपनी क्षमता के अनुसार ही करना चाहिए।
स्टेप-अप करते समय किन लोगों को सावधानी रखनी चाहिए?
स्टेप-अप करने के लिए सुरक्षित सीढ़ी या स्टेप का ही इस्तेमाल करें। यह एक्सरसाइज सामान्य वॉक की तुलना में ज्यादा मेहनत वाली हो सकती है और सांस फूलने की समस्या हो सकती है। जिन लोगों को फेफड़ों से जुड़ी बीमारी है या जो लंबे समय से एक्सरसाइज नहीं कर रहे हैं, उन्हें इसे शुरू करने से पहले विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।
स्क्वाट करें
तीसरा विकल्प स्क्वाट है। धीरे और नियंत्रित तरीके से बॉडी-वेट स्क्वाट करने से पैरों और ग्लूट्स की कई मांसपेशियां सक्रिय होती हैं। करीब 1 मिनट स्क्वाट करने से भोजन के बाद ब्लड शुगर बढ़ने में लगभग 21% की कमी आती है। अगर आपके घुटने में दर्द है तो आप स्क्वाट की जगह सिट टू स्टैंड जैसी एक्सरसाइज करें।
कुर्सी पर बैठकर हील लिफ्ट करें
चौथा विकल्प उन लोगों के लिए है जो खाना खाने के बाद उठकर चलना या स्क्वाट करना नहीं चाहते। इस एक्सरसाइज को बैठकर किया जा सकता है। इसमें कुर्सी पर बैठकर पैरों को जमीन पर रखते हुए एड़ियों को धीरे-धीरे ऊपर उठाकर नीचे लाना होता है। इसे सीटेट हील लिफ्ट या ‘सोलियस पुश-अप’ के नाम से जाना जाता है। इसमें पिंडली की मांसपेशी सोलियस (Soleus) सक्रिय होती है। यह मांसपेशी लंबे समय तक काम कर सकती है और ग्लूकोज के इस्तेमाल में योगदान दे सकती है।
डायबिटीज और इंसुलिन लेने वाले लोग रखें खास ध्यान
अगर कोई व्यक्ति डायबिटीज के लिए इंसुलिन लेता है, तो एक्सरसाइज से ब्लड शुगर पर असर पड़ सकता है। इसलिए नियमित रूप से एक्सरसाइज शुरू करने पर ब्लड शुगर की निगरानी करना जरूरी है। इंसुलिन की खुराक में खुद से बदलाव नहीं करना चाहिए; जरूरत होने पर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
खाने के तुरंत बाद भारी एक्सरसाइज न करें
एक्सपर्ट ने बताया खाने के तुरंत बाद बहुत ज्यादा मेहनत वाली एक्सरसाइज या पूरी तरह से हार्ड वर्कआउट करने से बचें। भोजन के बाद हल्की गतिविधि जैसे वॉक, स्टेप-अप या अन्य आसान एक्सरसाइज की जा सकती है, लेकिन ज्यादा तीव्र वर्कआउट कुछ समय बाद करना बेहतर हो सकता है, ताकि पेट में ऐंठन या असहजता का जोखिम कम रहे।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी और एक्सपर्ट की सलाह पर आधारित है। डायबिटीज, इंसुलिन रेजिस्टेंस या किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे लोग खाने के बाद एक्सरसाइज शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लें।
इंदौर की झांकी परंपरा का इतिहास 150 साल से भी ज्यादा पुराना बताया जाता है. शहर में सार्वजनिक गणेश उत्सव की शुरुआत 1900 से पहले हुई थी. 21 सितंबर को हुई बैठक के मुताबिक शाम 6 बजे डीआरपी लाइन से झांकी कारवां शुरू होगा. इस बार समारोह में डीजे पर प्रतिबंध रहेगा.
इंदौर की अनंत चतुर्दशी की झांकियां सिर्फ गणेश विसर्जन का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि ये शहर की 150 साल से ज्यादा पुरानी सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा हैं. इस साल 25 सितंबर को निकलने वाले झांकी चल समारोह की तैयारियां अंतिम दौर में हैं. 21 सितंबर को हुई बैठक के मुताबिक शाम 6 बजे डीआरपी लाइन से झांकी कारवां शुरू होगा.
इस बार समारोह में डीजे पर प्रतिबंध रहेगा. झांकी चल समारोह में सबसे आगे खजराना गणेश मंदिर की झांकी रहेगी. इसके बाद शास्त्री कॉर्नर नवयुवक मंडल, आईडीए, नगर निगम, होप टेक्सटाइल, कल्याण मिल, मालवा मिल, हुकुमचंद मिल, स्वदेशी मिल, राजकुमार मिल और स्पूतनिक ट्यूटोरियल एकेडमी की झांकियां शामिल होंगी.
रोशनी से सजी ये झांकियां शहर की सड़कों से गुजरेंगी.मिल मजदूरों ने शुरू की थी परंपरा इंदौर की झांकी परंपरा का इतिहास 150 साल से भी ज्यादा पुराना बताया जाता है. शहर में सार्वजनिक गणेश उत्सव की शुरुआत 1900 से पहले हुई थी. इसी दौरान मिल मजदूरों ने झांकी बनाने की परंपरा को आगे बढ़ाया. हुकुमचंद मिल से निकली शुरुआती झांकी के बाद यह सिलसिला लगातार बढ़ता गया और अनंत चतुर्दशी का झांकी चल समारोह इंदौर की पहचान बन गया. शुरुआत में झांकियां दिन में निकाली जाती थीं. अंधेरा होने पर गैस बत्तियों से रोशनी की जाती थी.
बाद में बिजली के बल्ब और जनरेटर का इस्तेमाल शुरू हुआ. समय के साथ झांकियों में भी कई बदलाव आए.मिलें बंद हुईं, लेकिन कारीगरों ने नहीं छोड़ी विरासत आज इंदौर की कई मिलें बंद हो चुकी हैं, लेकिन झांकियां बनाने वाले कारीगर इस परंपरा को अब भी जिंदा रखे हुए हैं. झांकी निर्माता असलम बताते हैं कि उनके पिता ने उन्हें यह कला सिखाई. उनके परिवार के लिए झांकी बनाना सिर्फ कमाई का जरिया नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही जिम्मेदारी है. पहले मिल मजदूरों को झांकी बनाने के लिए लकड़ी और लोहा जैसी सामग्री मिल परिसर से मिल जाती थी. अब मिलें बंद होने के बाद ज्यादातर सामान बाजार से खरीदना पड़ता है.
मोटर, मशीन और चलित पुतलों जैसी तकनीक ने झांकियों को आकर्षक बनाया है, लेकिन इससे खर्च भी बढ़ा है.धार्मिक आयोजन से आगे बनी सांस्कृतिक पहचान झांकी परंपरा को करीब से देखने वाले महेश गौहर के मुताबिक पहले झांकियों में मिल मजदूरों की मेहनत और हाथों का हुनर साफ नजर आता था. समय के साथ मिलें बंद हुईं और तकनीक बदली, लेकिन लोगों का उत्साह कायम रहा. धीरे-धीरे झांकियों में सामाजिक, राष्ट्रीय और समसामयिक विषय भी शामिल होने लगे.
सेहत डेस्क: सिरदर्द, बदन दर्द, बुखार या किसी दूसरी तकलीफ के दौरान कई लोग तुरंत राहत पाने के लिए खुद ही पेनकिलर खा लेते हैं। कुछ लोग तो दर्द दोबारा होने पर बार-बार दवा लेने लगते हैं। लेकिन बिना जरूरत और गलत तरीके से दवाओं का इस्तेमाल सेहत के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है।
देश के ड्रग रेगुलेटर सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) ने पेनकिलर और एंटीबायोटिक के गलत, जरूरत से ज्यादा या लंबे समय तक इस्तेमाल को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है। इसके मुताबिक, कुछ दवाओं का अनुचित इस्तेमाल किडनी से जुड़ी गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ा सकता है। वहीं, एंटीबायोटिक का गलत इस्तेमाल एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) की समस्या को बढ़ावा दे सकता है।