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  • विनीत मिनोचा हत्याकांड में बड़ा खुलासा, बेटे सुब्रत पर हत्या की साजिश रचने का आरोप; पत्नी शालू की भूमिका पर भी जांच जारी.

    विनीत मिनोचा हत्याकांड में बड़ा खुलासा, बेटे सुब्रत पर हत्या की साजिश रचने का आरोप; पत्नी शालू की भूमिका पर भी जांच जारी.

    विनीत मिनोचा हत्याकांड में बड़ा खुलासा, बेटे सुब्रत पर हत्या की साजिश रचने का आरोप; पत्नी शालू की भूमिका पर भी जांच जारी.

    कानपुर के चर्चित दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड में जांच के दौरान बड़ा मोड़ सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, कारोबारी के बेटे सुब्रत मिनोचा पर अपने पिता की हत्या की साजिश रचने का आरोप है। जांच में करीब 40 लाख रुपये के कर्ज और संपत्ति को लेकर आशंका को हत्या की साजिश के पीछे की वजहों में शामिल बताया जा रहा है।

    मामले में शुरुआत में विनीत मिनोचा की बहू शालू को भी आरोपी बनाया गया था। हालांकि, पुलिस की मौजूदा जांच में उसके खिलाफ अब तक पुष्ट सबूत सामने नहीं आने की बात कही गई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शालू की भूमिका को लेकर जांच अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है और अंतिम निर्णय उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा।

    करीब तीन महीने पहले रची गई थी साजिश

    पुलिस जांच के अनुसार, सुब्रत पर आरोप है कि उसने अपने पिता की हत्या की योजना घटना से कई महीने पहले बनाई थी। जांच में सामने आया कि उस पर करीब 40 लाख रुपये का कर्ज था और हर महीने बड़ी रकम की किस्त चुकानी पड़ती थी।

    पुलिस के मुताबिक, सुब्रत को यह भी आशंका थी कि उसके पिता अपनी संपत्ति किसी दूसरी महिला के नाम कर सकते हैं। इसी आर्थिक दबाव और संपत्ति को लेकर कथित चिंता के बीच उसने हत्या की साजिश रची।

    कुछ रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि सुब्रत ने पिता की हत्या के लिए अपने पुराने कर्मचारी विशाल गौतम से संपर्क किया था। पुलिस के अनुसार, विशाल ने पूछताछ में सुब्रत पर हत्या के लिए रकम देने का आरोप लगाया है। इस दावे को पुलिस इलेक्ट्रॉनिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से भी जांच रही है।

    डुप्लीकेट चाबी से घर में पहुंचने का आरोप

    जांच में सामने आया कि घर की डुप्लीकेट चाबी तैयार कराई गई थी।

  • साहिल वाकोडे केस में पुलिस के लिए सिरदर्द बना iPhone 17, 47 मिनट का राज तलाश रही क्राइम ब्रांच..

    साहिल वाकोडे केस में पुलिस के लिए सिरदर्द बना iPhone 17, 47 मिनट का राज तलाश रही क्राइम ब्रांच..

    साहिल वाकोडे केस में पुलिस के लिए सिरदर्द बना iPhone 17, 47 मिनट का राज तलाश रही क्राइम ब्रांच..

    महाराष्ट्र के IIT बॉम्बे के छात्र साहिल वाकोडे की मौत की जांच में उसका iPhone 17 पुलिस के लिए बड़ी परेशानी बन गया है. फोन पैटर्न लॉक है और इसका पैटर्न किसी को पता नहीं है. ऐसे में पुलिस अभी फोन का डेटा नहीं निकाल पा रही है.

    पुलिस को उम्मीद है कि अगर फोन खुल गया तो जांच में कई अहम बातें सामने आ सकती हैं. खासकर 18 सितंबर को परीक्षा के दौरान साहिल ने फोन पर क्या सर्च किया था, इसकी जानकारी मिल सकती है. यही वजह है कि क्राइम ब्रांच फोन को जांच की अहम कड़ी मान रही है.

    परीक्षा हॉल से हॉस्टल तक 47 मिनट में क्या हुआ?

    मामला 18 सितंबर का है. उस दिन परीक्षा के दौरान साहिल पर मोबाइल इस्तेमाल करने का आरोप लगा था. CCTV फुटेज में दिखा कि प्रोफेसर सूर्यनारायण दूल्ला ने साहिल को परीक्षा हॉल से बाहर जाने के लिए कहा था. रिकॉर्ड के मुताबिक साहिल करीब 12:38 बजे परीक्षा हॉल से बाहर निकला. इसके बाद करीब 1:25 बजे वह अपने हॉस्टल के कमरे में पहुंचा. यानी परीक्षा हॉल से हॉस्टल पहुंचने के बीच करीब 47 मिनट का समय था.

      अब पुलिस इसी 47 मिनट की पूरी कहानी समझने में जुटी है. साहिल इस दौरान कहां था और उसके साथ क्या हुआ, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है. इसके लिए परीक्षा हॉल से हॉस्टल तक के रास्ते में लगे सभी CCTV कैमरों की फुटेज देखी जा रही है. पुलिस इन फुटेज के जरिए साहिल की पूरी गतिविधि समझने की कोशिश कर रही है.

       iPhone 17 खुल नहीं रहा, जांच में आई रुकावट

      साहिल का फोन iPhone 17 है और वह पैटर्न लॉक से बंद है. फोन का पैटर्न पुलिस को पता नहीं है. इसके अलावा फोन का डेटा एन्क्रिप्टेड है. पुलिस के पास मौजूद फॉरेंसिक टूल भी इस नए मॉडल का डेटा नहीं निकाल पा रहे हैं. ये टूल पुराने iPhone मॉडल से डेटा निकाल सकते हैं, लेकिन नए मॉडल में दिक्कत आ रही है. अब क्राइम ब्रांच ऐसी दूसरी एजेंसियों से मदद लेने पर विचार कर रही है, जिनके पास एडवांस डिजिटल फॉरेंसिक तकनीक है.

       लैपटॉप भी पुलिस ने जब्त किया

      जांच को आगे बढ़ाने के लिए पुलिस ने साहिल का लैपटॉप भी जब्त कर लिया है. इसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है. इसके साथ ही परीक्षा हॉल, कैंपस और हॉस्टल में लगे CCTV कैमरों की फुटेज भी देखी जा रही है. मामले में सबसे पहले पवई पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज हुई थी. इसके बाद जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई. अब तक 20 से ज्यादा लोगों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं. इनमें छात्र और संस्थान के कर्मचारी शामिल हैं.

      फिलहाल क्राइम ब्रांच की जांच का फोकस साहिल के लॉक iPhone, लैपटॉप और CCTV फुटेज पर है. पुलिस खास तौर पर परीक्षा हॉल से हॉस्टल तक के उन 47 मिनट की पूरी कहानी पता करने में जुटी है.

    • जयपुर की ‘लेडी डॉन’ मिंटू चौधरी की हत्या का खुलासा, पति और बेटे ने गला घोंटकर कुएं में फेंका शव.

      जयपुर की ‘लेडी डॉन’ मिंटू चौधरी की हत्या का खुलासा, पति और बेटे ने गला घोंटकर कुएं में फेंका शव.

      जयपुर की ‘लेडी डॉन’ मिंटू चौधरी की हत्या का खुलासा, पति और बेटे ने गला घोंटकर कुएं में फेंका शव.

      राजस्थान की राजधानी जयपुर में करीब डेढ़ साल से लापता महिला सीमा उर्फ मिंटू चौधरी की हत्या का पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक, मिंटू चौधरी की हत्या किसी गैंग या बाहरी दुश्मन ने नहीं, बल्कि उसके पति और बेटे ने मिलकर की थी। आरोप है कि पारिवारिक विवाद और महिला के अवैध संबंधों को लेकर शक के चलते पिता-पुत्र ने उसकी हत्या कर शव को सूखे कुएं में फेंक दिया था।

      करीब डेढ़ साल बाद 23 सितंबर को मुहाना थाना क्षेत्र के बनखड़ी बालाजी चौराहे के पास एक पुराने कुएं से महिला का शव बरामद हुआ। शव काफी खराब हालत में था। परिजनों ने कपड़ों के आधार पर उसकी पहचान सीमा उर्फ मिंटू चौधरी के रूप में की।

      घर में हत्या के बाद कुएं में फेंका शव

      पुलिस जांच के अनुसार, 25 मई 2025 की रात मिंटू चौधरी के पति लालाराम और बेटे हरिओम ने कथित तौर पर घर में ही उसकी हत्या कर दी। आरोप है कि पारिवारिक कलह और महिला के अवैध संबंधों को लेकर शक के चलते दोनों ने उसका गला घोंट दिया।

      इसके बाद शव को कपड़े में लपेटा गया और मिंटू के ही ऑटो में रखकर करीब 4 से 5 किलोमीटर दूर ले जाया गया। वहां शव को एक सूखे कुएं में फेंक दिया गया।

      वारदात के बाद आरोपियों ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश भी की। पिता-पुत्र खुद मुहाना थाने पहुंचे और मिंटू की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। इसके अलावा रिश्तेदारों और परिचितों के बीच यह बात फैलाई गई कि मिंटू किसी मामले में दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है।

      पुलिस जांच में खुला हत्या का राज

      मामले की जांच के दौरान पुलिस की स्पेशल टीम और स्थानीय थाना पुलिस ने तकनीकी जानकारी और स्थानीय स्तर

    • महिला को कार में खींच” रहे थे किडनैपर… चीख सुनी तो झाड़ू लेकर दौड़ीं सफाईकर्मी, देहरादून में हौसले की कहानी

      महिला को कार में खींच” रहे थे किडनैपर… चीख सुनी तो झाड़ू लेकर दौड़ीं सफाईकर्मी, देहरादून में हौसले की कहानी

      महिला को कार में खींच” रहे थे किडनैपर… चीख सुनी तो झाड़ू लेकर दौड़ीं सफाईकर्मी, देहरादून में हौसले की कहानी

      सुबह का वक्त था. सड़क पर रोज की तरह सफाई चल रही थी. एक महिला स्कूटी से जा रही थी. तभी एक कार उसके पास रुकी. कुछ लोग उतरे और महिला को जबरन कार में खींचने लगे. महिला चीखी… चीख सुनकर सड़क साफ कर रही तीन महिलाएं झाड़ू लेकर दौड़ीं और आरोपियों से भिड़ गईं. देहरादून की इस घटना की पूरी कहानी अब सामने आई है.

      देहरादून में सुबह-सुबह एक महिला अपनी बेटी को कॉलेज बस तक छोड़कर स्कूटर से घर लौट रही थी. रास्ते में एक काले रंग की कार उसके पास आकर रुकी. इसके बाद कार सवार कुछ युवकों ने महिला को पकड़कर गाड़ी के अंदर खींचने की कोशिश की. महिला ने शोर मचा दिया. आवाज सुनी तो आसपास के लोग दौड़ पड़े. और इसी बीच सड़क पर सफाई कर रहीं तीन महिला सफाईकर्मी भी वहां पहुंच गईं. उनके हाथ में झाड़ू थी. उन्होंने आव देखा न ताव, झाड़ू उठाई और आरोपियों को पीटना शुरू कर दिया.

      अचानक हुए इस विरोध से आरोपी घबरा गए और मौके से भाग निकले. पुलिस अब CCTV फुटेज के जरिए आरोपियों की पहचान करने में जुटी है. मामला देहरादून के सहस्त्रधारा रोड स्थित नालापानी चौक का है. पुलिस के मुताबिक, 45 साल की महिला अपनी बेटी को कॉलेज की बस तक छोड़ने गई थी. बेटी को बस में बैठाने के बाद वह स्कूटी से अपने घर की तरफ लौट रही थी. महिला नालापानी चौक के पास पहुंची ही थी कि एक काले रंग की कार स्कूटी के पास आकर रुकी. आरोप है कि कार में मौजूद युवकों ने महिला को पकड़ लिया और जबरन कार के अंदर खींचने की कोशिश करने लगे.

      महिला ने खुद को बचाने के लिए शोर मचाना शुरू कर दिया. महिला की आवाज सुनकर आसपास मौजूद लोग घटनास्थल की तरफ भागे. इसी दौरान वहां सड़क की सफाई कर रहीं तीन महिला सफाईकर्मियों ने भी शोर सुना. वे भी झाड़ू लेकर मौके पर पहुंच गईं. पुलिस के मुताबिक, महिला सफाईकर्मियों ने आरोपियों का विरोध किया और झाड़ू से उनकी पिटाई शुरू कर दी. आसपास के लोगों के पहुंचने और सफाईकर्मियों के इस अचानक विरोध के बाद आरोपियों के हौसले पस्त हो गए.

      वे महिला को छोड़कर मौके से भाग निकले. जिस महिला को कुछ लोग जबरन कार में बैठाने की कोशिश कर रहे थे, उसी महिला की मदद के लिए कुछ ही देर में आसपास के लोग और तीन महिला सफाईकर्मी पहुंची थीं. इन सफाईकर्मियों के हाथ में उस वक्त कोई हथियार नहीं था. सिर्फ वही झाड़ू थी, जिससे वे सड़क साफ कर रही थीं.

      कितने लोग थे, अभी साफ नहीं

      पुलिस के मुताबिक, घटना में तीन से चार युवकों के शामिल होने की बात सामने आई है. हालांकि अभी किसी आरोपी की पहचान नहीं हो सकी है. पीड़ित महिला की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है. अब आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है. पुलिस कार और उसमें मौजूद लोगों की पहचान करने की कोशिश कर रही है.

      फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों ने महिला को कार में खींचने की कोशिश क्यों की थी और उनका मकसद क्या था. पुलिस ने बताया कि घटना बुधवार सुबह हुई. शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी गई है. CCTV फुटेज के जरिए आरोपियों की पहचान की जा रही है और उनकी तलाश की जा रही है.

    • ज्यादा ही नहीं, कम नमक: भी हो सकता है खतरा! डॉक्टर से जानें बॉडी में सॉल्ट की कमी के लक्षण

      ज्यादा ही नहीं, कम नमक: भी हो सकता है खतरा! डॉक्टर से जानें बॉडी में सॉल्ट की कमी के लक्षण

      ज्यादा ही नहीं, कम नमक: भी हो सकता है खतरा! डॉक्टर से जानें बॉडी में सॉल्ट की कमी के लक्षण

      अधिकांश लोग हाई ब्लड प्रेशर के डर से नमक कम खाने की सलाह देते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि शरीर में नमक (सोडियम) का स्तर जरूरत से ज्यादा गिरना भी बेहद खतरनाक और जानलेवा साबित हो सकता है? डॉक्टरों के मुताबिक मेडिकल भाषा में इसे हाइपोनेट्रेमिया (Hyponatremia) कहा जाता है। जब खून में सोडियम का स्तर कम होता है, तो यह दिमाग और शरीर की कोशिकाओं में सूजन पैदा कर सकता है, जिससे शरीर के अंग प्रभावित होने लगते हैं। अगर समय रहते इसके संकेतों को न पहचाना जाए, तो स्थिति गंभीर रूप ले सकती है

      आकाश हेल्थकेयर के सीनियर कंसल्टेंट-इंटरनल मेडिसिन डॉ. प्रभात रंजन सिन्हा ने बताया नमक सोडियम का एक प्रमुख स्रोत है। यह सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ाने वाला पदार्थ नहीं है, बल्कि शरीर में तरल पदार्थों का संतुलन बनाए रखने, नसों के सही तरीके से काम करने और मांसपेशियों की गतिविधियों के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हमें अक्सर सोडियम का सेवन कम करने की सलाह दी जाती है, लेकिन यह शरीर के लिए जरूरी खनिज है, जिसे हमारा शरीर खुद नहीं बना सकता। शरीर में सोडियम का स्तर संतुलित रखने और अतिरिक्त सोडियम को किडनी के जरिए बाहर निकालने की प्राकृतिक व्यवस्था होती है।

      खासकर गर्म मौसम में, ज्यादा पसीना आने, एक्सरसाइज करने या शरीर से अधिक मात्रा में तरल पदार्थ निकलने पर शरीर को सिर्फ पानी ही नहीं, बल्कि सोडियम जैसे जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स की भी जरूरत पड़ सकती है। डॉ. सिन्हा के अनुसार, सोडियम शरीर में ब्लड वॉल्यूम बनाए रखने, ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने, नसों के जरिए संकेतों के संचार और मांसपेशियों के सिकुड़ने के लिए जरूरी है।

      डॉ. सिन्हा बताते हैं कि लंबे समय तक सोडियम का सेवन बहुत कम रहने पर अचानक मीठा खाने की इच्छा, ब्लड प्रेशर कम होना और शरीर के तरल पदार्थों को कंट्रोल करने में किडनी की क्षमता प्रभावित होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। समय के साथ इससे शरीर के हार्मोनल सिस्टम पर दबाव पड़ सकता है। इनमें रेनिन-एंजियोटेंसिन-एल्डोस्टेरोन सिस्टम भी शामिल है, जो शरीर में सोडियम को बचाकर रखने में मदद करता है।

      बॉडी में सॉल्ट की कमी के लक्षण?

      डॉ. सिन्हा के मुताबिक, नमक की मात्रा अचानक और बहुत ज्यादा कम करने पर शरीर में कुछ लक्षण दिखाई दे सकते हैं। सोडियम नसों तक संकेत पहुंचाने और मांसपेशियों के संकुचन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सोडियम का स्तर तेजी से कम होने पर ब्लड प्रेशर गिर सकता है, जिससे मस्तिष्क तक ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित हो सकता है और बॉडी में कुछ समस्याएं भी हो सकती हैं जैसे चक्कर आना, सिर हल्का लगना और थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

      वयस्कों के लिए रोजाना कितना नमक लेना है जरूरी

      इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स के सीनियर कंसल्टेंट-इंटरनल मेडिसिन डॉ. राकेश गुप्ता के अनुसार, वयस्कों के लिए रोजाना सोडियम की आदर्श मात्रा लगभग 1,500 से 2,300 मिलीग्राम के बीच हो सकती है। इसकी ज्यादातर मात्रा नमक से मिलती है। हालांकि, प्रोसेस्ड और पैकेज्ड फूड के अधिक सेवन के कारण लोग अक्सर जरूरत से ज्यादा सोडियम ले लेते हैं, जिससे हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और स्ट्रोक जैसी हेल्थ प्रोब्लम का जोखिम बढ़ सकता है।

      विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) रोजाना 2,000 मिलीग्राम नमक का सेवन करने की सलाह देता है, जबकि अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन बेहतर हार्ट हेल्थ के लिए 1,500 मिलीग्राम तक सोडियम लेने की सलाह देता है। डॉ. गुप्ता के अनुसार, गंभीर मामलों में लंबे समय तक सोडियम की कमी से हाइपोनेट्रेमिया हो सकता है। यह ऐसी स्थिति है जिसमें खून में सोडियम का स्तर खतरनाक रूप से कम हो जाता है। इससे मस्तिष्क की कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है और भ्रम, कमजोरी, शारीरिक क्षमता में कमी और व्यायाम या शारीरिक गतिविधि के दौरान प्रदर्शन प्रभावित होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

      बॉडी में नमक का स्तर कम होने पर क्या करना चाहिए?

      डॉ. सिन्हा ने बताया नमक के सेवन पर कंट्रोल रखना बेहद जरूरी है। लोगों को प्रोसेस्ड और पैकेज्ड फूड से मिलने वाले अतिरिक्त सोडियम पर कंट्रोल करना चाहिए, इन फूड्स से बॉडी में जरुरत से ज्यादा सोडियम पहुंचता है। डॉक्टर ने बताया घर के बने नॉर्मल खाने से मिलने वाले नेचुरल सोडियम को पूरी तरह खत्म करने की जरूरत नहीं है। डॉ. सिन्हा ने बताया शरीर को सोडियम की जरूरत मौसम, शारीरिक गतिविधि और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। लगातार थकान, चक्कर आना या मांसपेशियों में ऐंठन जैसे संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है। जिन लोगों को ब्लड प्रेशर या किडनी से जुड़ी समस्या है, उन्हें नियमित जांच और डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही नमक का सेवन कितनी मात्रा में करना है ये तय करना चाहिए।

      डिस्क्लेमर: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और विशेषज्ञों की राय के आधार पर तैयार किया गया है। सोडियम या नमक का सेवन व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और जरूरत के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। हाई ब्लड प्रेशर, किडनी या हृदय संबंधी समस्या होने पर नमक की मात्रा में बदलाव करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

    • दिमाग को शांत कर: सकते हैं ये 4 योगासन, रोज करें तो ब्रेन को मिलेगी ऑक्सीजन, योग गुरु से जानिए कैसे

      दिमाग को शांत कर: सकते हैं ये 4 योगासन, रोज करें तो ब्रेन को मिलेगी ऑक्सीजन, योग गुरु से जानिए कैसे

      दिमाग को शांत कर: सकते हैं ये 4 योगासन, रोज करें तो ब्रेन को मिलेगी ऑक्सीजन, योग गुरु से जानिए कैसे

      भागदौड़ भरी जिंदगी, लगातार काम का दबाव और अनियंत्रित दिनचर्या के कारण मानसिक तनाव व मानसिक थकान होना बेहद आम बात हो गई है। जब दिमाग को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन और रक्त संचार (Blood Circulation) नहीं मिलता, तो एकाग्रता में कमी और चिड़चिड़ापन बढ़ने लगता है। योग विशेषज्ञों के अनुसार कुछ विशेष योगासनों का नियमित अभ्यास मस्तिष्क में ऑक्सीजन के प्रवाह को बेहतर बनाने और नर्वस सिस्टम को शांत करने में बहुत मददगार साबित हो सकता है।

      योग गुरु बाबा रामदेव ने बताया अगर आप हर दिन सुबह उठकर कुछ योगासन कर लें तो आप अपने दिमाग को रिलैक्स और तनाव मुक्त कर सकते हैं। कुछ योगासन ब्रेन की बेहतरीन एक्सरसाइज हैं। अगर आप भी दिनभर की मानसिक थकावट से राहत पाना चाहते हैं, तो योग गुरु से जानिए वे 4 प्रमुख योगासन जो आपके दिमाग को शांत रखकर उसमें नई ऊर्जा का संचार कर सकते हैं।

      भस्त्रिका प्राणायाम करें

      योग गुरु बाबा रामदेव ने बताया भस्त्रिका में तेज और गहरी सांस लेने-छोड़ने की प्रक्रिया होती है। इसमें सांस पर लगातार ध्यान देना पड़ता है, इसलिए मन को इधर-उधर भटकने से रोकने में मदद मिल सकती है। नियमित और सही तरीके से रोज अभ्यास करने पर इंसान ज्यादा एनर्जेटिक और एक्टिव महसूस करता है। इसे करने के लिए तेज सांस लेने और छोड़ने की तकनीक का इस्तेमाल होता है जिससे कुछ लोगों में उत्तेजना या चक्कर जैसी परेशानी हो सकती है। इसलिए शुरुआत में ये प्राणायाम कम ही करें और गति धीरे-धीरे ही बढ़ाएं।

      कपालभाति करें

      कपालभाति में पेट की मांसपेशियों की मदद से सांस को जोर से बाहर छोड़ा जाता है, जबकि सांस अंदर सामान्य रूप से आती है। इस दौरान व्यक्ति को सांस की गति और शरीर की गतिविधि पर ध्यान देना होता है, जिससे एकाग्रता बढ़ाने और मन को शांत करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, कपालभाति भी तेज श्वसन वाला अभ्यास है, इसलिए इसे बहुत तेज या लंबे समय तक करने से बचना चाहिए। तेज तेज करने से चक्कर या असहजता महसूस हो सकती है। इस योगासन को आराम से और सही तकनीक के साथ करना चाहिए।

      अनुलोम-विलोम प्राणायाम करें

      अनुलोम-विलोम एक ऐसा प्राणायाम है जिसमें बारी-बारी से एक-एक नाक से सांस लेना और दूसरी से छोड़ना शामिल होता है। इसे करने के लिए रीढ़ सीधी रखी जाती है और कंधे रिलैक्स रखे जाते हैं। इसे करने के लिए एक नासिका से सांस लेकर दूसरी से सांस छोड़ी जाती है और फिर प्रक्रिया को उल्टा किया जाता है। इसकी धीमी और नियंत्रित गति व्यक्ति का ध्यान सांस पर केंद्रित करती है। धीमी सांस लेने से शरीर के रिलैक्सेशन रिस्पॉन्स को बढ़ावा मिल सकता है, जिससे तनाव के समय दिल की धड़कन और सांस की गति को सामान्य करने में मदद मिल सकती है। यही वजह है कि इसे तनाव और मानसिक बेचैनी के समय किया जाने वाला सरल श्वसन अभ्यास माना जाता है।

      चंद्रभेदन प्राणायाम करें

      चंद्रभेदन प्राणायाम है भी एक ऐसा प्राणायाम है जिसमें आमतौर पर सांस बाईं नासिका से लेकर दाईं नासिका से सांस छोड़ी जाती है। योग परंपरा में बाईं नासिका को शांत और शीतल प्रभाव से जोड़ा जाता है। इस अभ्यास में सांस धीमी और कंट्रोल रहती है, जिससे व्यक्ति अपना ध्यान सांसों पर लगाता है और कुछ समय के लिए तनाव पैदा करने वाले विचारों से दूरी बना सकता है। योग गुरु ने बताया आप रोजाना इसे करें तो दिमाग रिलैक्स और मन शांत महसूस करेगा।

      ये प्राणायाम मन को शांत करने में कैसे मदद कर सकता हैं?

      इन सभी अभ्यासों में दिमाग को रिलैक्स और मन को शांत करने के लिए सांस से जुड़ी एक्सरसाइज करने पर ज़ोर दिया गया है। जब व्यक्ति तनाव में होता है, तो सांस तेज और उथली हो सकती है। इसके विपरीत, धीमी और नियंत्रित सांस लेने से शरीर को आराम की स्थिति में जाने में मदद मिलती है।

      डिस्कलेमर : यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी और योग जागरूकता के उद्देश्य से साझा की गई है। अगर आपको गर्दन, रीढ़ की हड्डी, उच्च ब्लड प्रेशर या कोई दूसरी हेल्थ प्रॉब्लम है तो इन योगासनों का अभ्यास करने से पहले किसी प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह लें।

    • कब्ज से राहत पाने: के लिए लैक्सेटिव पर न रहें निर्भर, डाइट से लेकर योग तक ये 7 आदतें बना सकती हैं पेट की सेहत बेहतर.

      कब्ज से राहत पाने: के लिए लैक्सेटिव पर न रहें निर्भर, डाइट से लेकर योग तक ये 7 आदतें बना सकती हैं पेट की सेहत बेहतर.

      कब्ज से राहत पाने: के लिए लैक्सेटिव पर न रहें निर्भर, डाइट से लेकर योग तक ये 7 आदतें बना सकती हैं पेट की सेहत बेहतर.

      क्या आप भी कब्ज से परेशान रहते हैं और पेट साफ करने के लिए और कब्ज (Constipation) से तुरंत राहत पाने के लिए हर सुबह लैक्सेटिव या गोलियों का सहारा लेते हैं? गैस्ट्रोएंट्रोलोजिस्ट के मुताबिक लंबे समय तक इन दवाइयों पर निर्भर रहना आपकी आंतों की कार्यप्रणाली को कमजोर बना सकता है। पाचन तंत्र को स्वस्थ और पेट को नेचुरल तरीके से साफ करने के लिए दवाइयों से ज्यादा आपकी डाइट और लाइफस्टाइल मायने रखता है। डाइट, पर्याप्त पानी और नियमित योग जैसे छोटे लेकिन प्रभावी बदलाव न केवल कब्ज की समस्या को जड़ से दूर कर सकते हैं, बल्कि आपकी आंतों की सेहत (Gut Health) को भी मजबूत बनाते हैं।

      भारतीय योग गुरु, लेखक, शोधकर्ता और टीवी पर्सनालिटी डॉक्टर हंसा योगेंद्र के मुताबिक कब्ज आजकल एक आम समस्या बन गई है। कई लोग सुबह पेट साफ न होने पर तुरंत हर्बल चाय, अरंडी का तेल या दूसरी लैक्सेटिव दवाओं का सहारा लेने लगते हैं जिसके सेहत पर साइड इफेक्ट होते हैं। एक्सपर्ट ने बताया कब्ज से राहत पाने के लिए सबसे पहले रोज की दिनचर्या, खानपान, पानी और शारीरिक गतिविधियों पर ध्यान देना जरूरी है। कुछ लोगों में नियमित रूप से फाइबर युक्त भोजन, पर्याप्त पानी और हल्की एक्सरसाइज करने से मल त्याग को नियमित रखने में मदद मिल सकती है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि ऐसी कौन-कौन सी 5 आदतें है जो कब्ज का इलाज कर सकती है और पाचन को दुरुस्त कर सकती हैं।

      सुबह की शुरुआत करें पानी से

      हंसा जी योगेंद्र ने बताया अगर आप कब्ज से परेशान रहते हैं तो आप सुबह उठते ही एक गिलास गुनगुना पानी पिएं। रात भर सोने के बाद सुबह पानी का सेवन बॉडी को हाइड्रेट करता है और पाचन को दुरुस्त करता है। पानी पीने के बाद आप हल्की पेट की एक्सरसाइज या मूवमेंट कर सकते हैं। सुबह शौचालय जाने के लिए नियमित समय तय करना भी कब्ज से राहत दिलाने में मददगार हो सकता है। अगर तुरंत मल त्याग न हो तो ज्यादा जोर न लगाएं। शरीर को धीरे-धीरे नियमित रूटीन की आदत डालने की कोशिश करें।

      खाने में फाइबर की मात्रा बढ़ाएं

      कब्ज से बचाव के लिए डाइट में पर्याप्त फाइबर लेना बेहद जरूरी है। रोज करीब 25-30 ग्राम फाइबर का सेवन करें। हालांकि फाइबर का सेवन व्यक्ति की उम्र, लिंग और स्वास्थ्य के अनुसार अलग हो सकता है। फाइबर के लिए आप खाने में सब्जियां, दालें, साबुत अनाज और फलों का सेवन करें। नाश्ते में वेजिटेबल ओट्स या दलिया, वेजिटेबल पोहा, इडली-सांभर या सब्जियों से बना बेसन या मूंग दाल के चीला का सेवन करें। मूंग, मसूर, चना, राजमा और हरी मटर जैसी दालें और फलियां भी फाइबर के स्रोत हैं। इसके अलावा गेहूं की रोटी, ब्राउन राइस और मिलेट्स को डाइट में शामिल करें कब्ज से बचाव में मददगार साबित होंगे।

      कब्ज से परेशान हैं तो रोज एक फल खाएं

      अगर आप कब्ज से परेशान हैं तो रोजाना एक फल का सेवन करें। फलों में आप पपीता, अमरूद, नाशपाती, अंजीर, कीवी और प्रून जैसे फलों का सेवन कर सकते हैं। साथ ही थोड़ी मात्रा में नट्स, बीज और सूखे मेवे भी डाइट में शामिल करें।

      मुनक्का और अंजीर का करें सेवन

      अगर आप कब्ज से परेशान रहते हैं तो रोज मुनक्का और अंजीर का सेवन सुबह खाली पेट करें। रात भर भिगोए हुए 8-10 काली किशमिश या मुनक्का सुबह खाएं। दो सूखे अंजीर सुबह खाने से फायदा होता है। ध्यान रखें कि फाइबर बढ़ाने के साथ पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थों का भी सेवन करें। फाइबर अचानक बहुत ज्यादा बढ़ाने से कुछ लोगों में गैस और ब्लोटिंग की समस्या हो सकती है, इसलिए इसे धीरे-धीरे बढ़ाना बेहतर है।

      त्रिफला और इसबगोल का करें सेवन

      कब्ज से राहत पाना चाहते हैं तो आप त्रिफला और इसबगोल का सेवन करें। त्रिफला हरड़, बहेड़ा और आंवला से तैयार किया जाता है और आयुर्वेद में इसे पाचन तथा मल त्याग को सपोर्ट करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। कुछ दिनों तक त्रिफला या इसबगोल खाने से आपको कब्ज से राहत मिल सकती है। इसबगोल एक घुलनशील फाइबर है। यह पानी को सोखकर मल को नरम और भारी बनाने में मदद कर सकता है। इसका सेवन पर्याप्त पानी के साथ करना जरूरी है।

      अरंडी के तेल का करें सेवन

      कब्ज को दूर करने के लिए आप अरंडी के तेल का सेवन करें। अरंडी का तेल यानी Castor oil दूसरे उपायों से अलग है। यह एक stimulant laxative है और मल त्याग करा सकता है, लेकिन इससे पेट में ऐंठन, मितली या दस्त जैसी परेशानी हो सकती है इसलिए रोजाना इसका सेवन नहीं करें।

      कब्ज में मदद कर सकते हैं ये योगासन

      पाचन और पेट की गतिविधियों को सपोर्ट करने के लिए कुछ हल्के योग अभ्यास भी आपकी मदद कर सकते हैं। योगा एक्सपर्ट ने बताया आप कब्ज को दूर करने के लिए रोजाना मार्जरी आसन-बितिलासन (Cat-Cow Pose), पवनमुक्तासन, हल्का स्पाइनल ट्विस्ट, पेट से गहरी सांस लेने का अभ्यास, शवासन और निस्पंद भाव करने से आपको राहत मिल सकती है। इन अभ्यासों को अपनी क्षमता के अनुसार आराम से करना चाहिए और किसी भी आसन में दर्द या असहजता होने पर उसे रोक देना चाहिए। भोजन के बाद हल्की वॉक करना भी रोज की शारीरिक गतिविधि बढ़ाने का आसान तरीका हो सकता है।

      बार-बार कब्ज हो तो वजह समझना जरूरी

      अगर अच्छी डाइट, पर्याप्त पानी और नियमित शारीरिक गतिविधि के बावजूद कब्ज बार-बार हो रही है तो केवल घरेलू नुस्खे बदलते रहने के बजाय आप कब्ज के कारण का पता लगाएं। कुछ दवाएं, शरीर में पानी की कमी, कम शारीरिक गतिविधि और दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी कब्ज में योगदान दे सकती हैं। तनाव और चिंता भी कुछ लोगों में पाचन संबंधी समस्याओं को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए पर्याप्त आराम, नियमित नींद, हल्की एक्सरसाइज और तनाव कम करने वाली गतिविधियों को अपनी डेली लाइफ में शामिल करें आपको फायदा होगा।

      डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। कब्ज लंबे समय तक रहने, बार-बार होने या गंभीर लक्षणों के साथ होने पर डॉक्टर से सलाह लें। किसी भी आयुर्वेदिक उपाय, सप्लीमेंट या लैक्सेटिव का नियमित इस्तेमाल विशेषज्ञ की सलाह के बिना न करें।

    • लिवर खराब होने के 7 शुरुआती लक्षण; गैस्ट्रोएंट्रोलोजिस्ट से जानें पेशाब के रंग में बदलाव को क्यों न करें इग्नोर..

      लिवर खराब होने के 7 शुरुआती लक्षण; गैस्ट्रोएंट्रोलोजिस्ट से जानें पेशाब के रंग में बदलाव को क्यों न करें इग्नोर..

      लिवर खराब होने के 7 शुरुआती लक्षण; गैस्ट्रोएंट्रोलोजिस्ट से जानें पेशाब के रंग में बदलाव को क्यों न करें इग्नोर..

      लिवर हमारे शरीर का एक ऐसा महत्वपूर्ण अंग है, जो शुरुआती समस्याओं या बीमारी के दौरान अक्सर कोई स्पष्ट संकेत नहीं देता। यही वजह है कि इसके खराब होने या फैटी लिवर जैसी स्थितियों का पता आसानी से और जल्दी नहीं चलता। हालांकि, शरीर छोटे-छोटे संकेतों के ज़रिए सजग करने की कोशिश करता है जिनमें से एक प्रमुख संकेत पेशाब (Urinary System) के रंग, मल या पेट के पाचन में बदलाव से जुड़ा होता है।

      AIIMS, हार्वर्ड और स्टैनफोर्ड से प्रशिक्षित,बोर्ड-सर्टिफाइड गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट एवं हेपेटोलॉजिस्ट,डॉ. सौरभ सेठी ने बताया अगर आपके पेशाब का रंग गहरा पीला, लाल या असामान्य दिखता है, तो इसे सामान्य डिहाइड्रेशन मानकर नज़रअंदाज़ करना जोखिम भरा हो सकता है। लिवर की बीमारी के गंभीर लक्षणों का इंतजार करने के बजाय अपने जोखिम कारकों को समझना और जरूरत पड़ने पर समय पर जांच कराना ज्यादा जरूरी है। आइए एक्सपर्ट्स से समझते हैं लिवर से जुड़े 7 शुरुआती लक्षण कौन-कौन से हैं और पेशाब का बदला रंग आपके लिवर की सेहत के बारे में क्या संकेत देता है।

      पेशाब का रंग गहरा होना नजरअंदाज न करें

      डॉक्टर सौरव ने बताया लिवर में परेशानी होने पर यूरिन और मल के रंग में बदलाव हो सकता है। हालांकि पेशाब का गहरा रंग कई बार शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन की वजह से हो सकता है। इसी तरह कभी-कभार मल का थोड़ा हल्का या तैरता हुआ होना हमेशा चिंता का कारण नहीं होता। लेकिन अगर पर्याप्त पानी पीने के बावजूद पेशाब लगातार बहुत गहरा रहे और मल बार-बार सफेद, ग्रे या मिट्टी जैसे रंग का दिखाई दे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पित्त मल को उसका सामान्य भूरा रंग देने में भूमिका निभाता है। अगर पित्त आंतों तक सामान्य तरीके से नहीं पहुंच पाता, तो मल का रंग फीका हो सकता है। वहीं बिलीरुबिन बढ़ने पर यह पेशाब में पहुंचकर उसे चाय या कोला जैसे गहरे रंग का बना सकता है। ऐसा लिवर में सूजन या बाइल डक्ट में रुकावट जैसी स्थितियों में हो सकता है। अगर इसके साथ खुजली या आंखों में पीलापन भी दिखाई दे, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

      बिना किसी दाने के लगातार खुजली होना

      शरीर में खुजली होने के कई कारण हो सकते हैं लेकिन लिवर में परेशानी होने पर भी बॉडी में खुजली की दिक्कत हो सकती है। लिवर और बाइल डक्ट यानी पित्त नली से जुड़ी बीमारियों में पित्त के सामान्य प्रवाह में रुकावट आ सकती है, जिससे स्किन पर किसी भी तरह का दाना दिखे बिना ही तेज खुजली हो सकती है। इसे कोलेस्टेटिक प्रुरिटस (Cholestatic Pruritus) कहा जाता है। यह खुजली शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकती है, लेकिन हथेलियों और तलवों में ज्यादा परेशानी हो सकती है। कई लोगों में यह रात के समय अधिक महसूस हो सकती है। अगर खुजली लगातार बनी हुई है और इसका कोई स्पष्ट कारण समझ नहीं आ रहा है, खासकर अगर इसके साथ दूसरे लक्षण भी मौजूद हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

      स्किन पर मकड़ी जैसी छोटी लाल नसें दिखाई देना

      स्किन पर मकड़ी के आकार जैसी छोटी-छोटी लाल रक्त वाहिकाओं को स्पाइडर एंजियोमा (Spider Angioma) कहा जाता है। इसमें बीच में एक लाल बिंदु होता है और वहां से छोटी रक्त वाहिकाएं बाहर की तरफ फैलती हुई दिखाई देती हैं। एक-दो स्पाइडर एंजियोमा हेल्दी लोगों में भी हो सकते हैं, इसलिए इन्हें देखकर घबराने की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर ऐसी कई नई रक्त वाहिकाएं दिखाई देने लगें, खासकर चेहरे, कंधों और छाती के ऊपरी हिस्से पर, तो उसे नजरअंदाज नहीं करें। कुछ मामलों में इनका संबंध क्रॉनिक लिवर डिजीज या सिरोसिस से हो सकता है।

      हथेलियों का लाल होना आम नहीं

      हथेलियों का जरूरत से ज्यादा लाल दिखाई देना पाल्मर एरिथेमा (Palmar Erythema) कहलाता है। इसमें खासतौर पर अंगूठे और छोटी उंगली के आधार के आसपास हथेलियों में रेडनेस दिखाई दे सकती है। हालांकि ये सिर्फ लिवर की बीमारी का संकेत नहीं है। गर्भावस्था, थायरॉयड से जुड़ी समस्या और रूमेटाइड आर्थराइटिस जैसी दूसरी स्थितियों में भी हथेलियां लाल हो सकती हैं। इसलिए केवल लाल हथेलियों के आधार पर लिवर की बीमारी का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। लेकिन अगर इसके साथ स्पाइडर एंजियोमा और लिवर टेस्ट में असामान्यता जैसे दूसरे संकेत भी हों, तो डॉक्टर इसकी वजह की जांच कर सकते हैं।

      अचानक आसानी से चोट लगना या खून निकलना

      अगर पहले की तुलना में शरीर पर आसानी से नीले निशान पड़ने लगे हैं या बिना स्पष्ट कारण के खून निकलने जैसी समस्या होने लगी है, तो इसे गंभीरता से लेना जरूरी है। लिवर शरीर में सामान्य ब्लड क्लॉटिंग यानी खून जमने की प्रक्रिया में शामिल कई महत्वपूर्ण प्रोटीन बनाता है। गंभीर या एडवांस्ड लिवर डिजीज में इस प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है।

      पेट में लगातार सूजन या पानी भरना

      पेट का लगातार बढ़ना, खासकर जब इसके साथ पैरों और टखनों में सूजन भी हो, लिवर की गंभीर बीमारी में देखा जा सकता है। एडवांस सिरोसिस में पेट के अंदर तरल पदार्थ जमा हो सकता है। इसे असाइटिस (Ascites) कहा जाता है। इसके कारण पेट का आकार धीरे-धीरे बढ़ सकता है। सिरोसिस के शुरुआती चरण में लिवर अपनी जरूरी प्रक्रियाएं काफी हद तक संभाल सकता है, लेकिन जब पेट में असाइटिस जैसी जटिलताएं विकसित होने लगती हैं, तो यह बीमारी के गंभीर होने का संकेत हो सकता है। अगर पेट लगातार बढ़ रहा है और साथ में पैरों में सूजन, सांस लेने में परेशानी, पेट दर्द या बुखार भी है, तो तुरंत मेडिकल मदद लेनी चाहिए।

      आंखों का पीला होना या अचानक भ्रम की स्थिति

      आंखों के सफेद हिस्से का पीला पड़ना पीलिया (Jaundice) कहलाता है। शरीर में बिलीरुबिन जमा होने के कारण ऐसा हो सकता है। पीलिया का मतलब हमेशा एंड-स्टेज सिरोसिस नहीं होता। एक्यूट हेपेटाइटिस, कुछ दवाओं से होने वाली लिवर इंजरी और बाइल डक्ट में रुकावट जैसी कई अन्य स्थितियां भी पीलिया का कारण बन सकती हैं। फिर भी अगर आंखें या स्किन अचानक पीली पड़ने लगे, तो इसकी वजह जानने के लिए जल्द डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। अगर लिवर की बीमारी से जूझ रहा व्यक्ति अचानक कंफ्यूज होने लगे, बहुत ज्यादा नींद आने लगे, चीजें भूलने लगे या उसके व्यवहार में असामान्य बदलाव दिखाई दे, तो यह हेपेटिक एन्सेफैलोपैथी जैसी गंभीर जटिलता का संकेत हो सकता है।

      डिस्क्लेमर: ये जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। इनमें से किसी एक लक्षण का होना लिवर की बीमारी की पुष्टि नहीं करता। लक्षणों के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। लगातार या गंभीर लक्षण होने पर डॉक्टर से जांच और उचित सलाह लें।

    • नेचुरल डायजेस्टिव टॉनिक का काम करता है अजवाइन का पानी, पेट की गैस और ब्लोटिंग से दे सकता है राहत, हंसाजी योगेंद्र ने बताया इसे बेस्ट सप्लीमेंट..

      नेचुरल डायजेस्टिव टॉनिक का काम करता है अजवाइन का पानी, पेट की गैस और ब्लोटिंग से दे सकता है राहत, हंसाजी योगेंद्र ने बताया इसे बेस्ट सप्लीमेंट..

      नेचुरल डायजेस्टिव टॉनिक का काम करता है अजवाइन का पानी, पेट की गैस और ब्लोटिंग से दे सकता है राहत, हंसाजी योगेंद्र ने बताया इसे बेस्ट सप्लीमेंट..

      गलत खान-पान, अनियमित खानेका समय, ज्यादा तला-भुना भोजन और खराब लाइफस्टाइल के कारण गैस, अपच और पेट फूलने जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। ऐसे में कुछ लोग घरेलू उपायों का सहारा लेते हैं। अजवाइन का पानी भी ऐसा ही एक पारंपरिक घरेलू नुस्खा है, जिसका इस्तेमाल लंबे समय से पाचन संबंधी परेशानियों में किया जाता रहा है। योग और वेलनेस एक्सपर्ट हंसाजी योगेंद्र के अनुसार, अजवाइन में थाइमोल (Thymol) जैसे यौगिक पाए जाते हैं, जो पाचन तंत्र पर असर डाल सकते हैं, पेट की ऐंठन या असहजता में मदद कर सकते हैं।

      हंसाजी योगेंद्र ने बताया ये पानी पेट की गैस और ब्लोटिंग को कंट्रोल करता है। अजवाइन में मौजूद कुछ सक्रिय यौगिक पाचन प्रक्रिया को सपोर्ट कर सकते हैं, जिससे कुछ लोगों को गैस और ब्लोटिंग में राहत महसूस हो सकती है। अजवाइन में पाया जाने वाला थाइमोल इसके प्रमुख सक्रिय यौगिकों में से एक है जो पाचन को सपोर्ट करता है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि अजवाइन का पानी कैसे पाचन को दुरुस्त करता है।

      अजवाइन का पानी कैसे गैस, ब्लोटिंग और भारीपन में देता है राहत

      अजवाइन में मौजूद कुछ यौगिक पाचन प्रक्रिया को सपोर्ट कर सकते हैं। इसका पानी गैस और पेट फूलने जैसी पाचन से जुड़ी दिक्कतों में राहत दे सकता है। खासकर भारी खाना खाने के बाद अजवाइन का सेवन पेट के भारीपन को कम करने में मददगार माना जाता है। अजवाइन का इस्तेमाल पेट में होने वाली हल्की ऐंठन और मरोड़ के लिए भी घरेलू उपाय के तौर पर किया जाता है। इसमें मौजूद कुछ यौगिक पाचन तंत्र की मांसपेशियों को रिलैक्स करने में मदद कर सकते हैं। अजवाइन में मौजूद थाइमोल जैसे यौगिकों में एंटीमाइक्रोबियल गुण पाए गए हैं। कई रिसर्च में ये बात साबित हो चुकी है कि ये पानी पेट में मौजूद हानिकारक सूक्ष्मजीवों के खिलाफ प्रभावी असर दिखाता है।

      अजवाइन के पानी पर क्या कहती है रिसर्च

      अजवाइन में थाइमोल और गैस्ट्रिक एंजाइम का स्राव होता है। फार्माकोलॉजिकल स्टडीज जैसे Journal of Ethnopharmacology और Evidence Based Complementary and Alternative Medicine के अनुसार थाइमोल पेट में Gastric Acid, पित्त और पाचन एंजाइमों जैसे एमाइलेज और लाइपेज के स्राव को उत्तेजित करता है। जब एंजाइम सही मात्रा में बनते हैं, तो खाना तेजी से और ठीक से पचता है, जिससे भोजन सड़ता नहीं है और गैस या पेट फूलने की समस्या नहीं बनती।

      अजवाइन में एंटीस्पास्मोडिक और कार्मिनेटिव गुण मौजूद होते हैं जो गैस बाहर निकालने वाले माने जाते हैं। लैब अध्ययनों और इन-विवो (In-vivo) स्टडीज से पता चला है कि थाइमोल आंतों की चिकनी मांसपेशियों पर कैल्शियम चैनल ब्लॉक करने का काम करता है। इससे पेट और आंतों की मांसपेशियों में आने वाली ऐंठन, मरोड़ और ब्लोटिंग दूर होती है। इसका सेवन करने से पेट में फंसी हुई गैस आसानी से बाहर निकल जाती है और पेट का भारीपन व ऐंठन मिनटों में कम हो जाती है।

      अजवाइन के वाष्पशील तेलों में थाइमोल और गामा-टेरपीनेने (γ-terpinene) जैसे एंटीमाइक्रोबियल यौगिक होते हैं। Journal of Food Science और कई माइक्रोबायोलॉजिकल अध्ययनों में यह साबित हुआ है कि अजवाइन का अर्क पेट और आंतों में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया जैसे E. coli, Salmonella और Helicobacter pylori के विकास को रोकता है। जब पेट में खराब बैक्टीरिया पनपते हैं, तो वे भोजन को फॉर्मेट करके अत्यधिक गैस पैदा करते हैं। अजवाइन का पानी इन हानिकारक सूक्ष्मजीवों को कंट्रोल कर गैस बनने से रोकता है। कई रिसर्च में पाया गया है कि अजवाइन पेट खाली होने की दर (Gastric Emptying Time) में सुधार करती है। यानी जब आप बहुत भारी या तला-भुना खाना खाते हैं, तो अजवाइन का पानी पेट में भोजन को रुकने नहीं देता और इसे आंतों की ओर तेजी से बढ़ाता है, जिससे भारीपन की शिकायत नहीं होती।

      अजवाइन का पानी बनाने के दो आसान तरीके

      अजवाइन का पानी बनाने के लिए एक तरीका है कि एक चम्मच अजवाइन को एक गिलास पानी में रातभर भिगोकर सुबह छानकर पिया जाए। दूसरे तरीके में एक चम्मच अजवाइन को दो कप पानी में करीब 5 मिनट तक उबालकर, ठंडा होने दें और उसके बाद छानकर उसका सेवन कर लें। स्वाद के लिए इसमें थोड़ी मात्रा में काला नमक या नींबू भी मिला सकते हैं।

      डिस्क्लेमर: अजवाइन का पानी गैस, अपच या एसिडिटी का इलाज नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लगातार बने रहने पर डॉक्टर से सलाह लें।

    • डायबिटीज में सेब खाएं या अंगूर, कौन सा फल Blood Sugar के लिए बेहतर? जानें डायटीशियन की राय..

      डायबिटीज में सेब खाएं या अंगूर, कौन सा फल Blood Sugar के लिए बेहतर? जानें डायटीशियन की राय..

      डायबिटीज में सेब खाएं या अंगूर, कौन सा फल Blood Sugar के लिए बेहतर? जानें डायटीशियन की राय..

      डायबिटीज से पीड़ित मरीजों के लिए खानपान का सही चुनाव करना हमेशा एक बड़ी चुनौती होता है, खासकर जब बात फलों के सेवन की आए। मीठे स्वाद और प्राकृतिक शुगर के कारण अक्सर मरीज दुविधा में रहते हैं कि अंगूर खाएं या सेब। जहां सेब में भरपूर फाइबर और लो-ग्लाइसेमिक इंडेक्स होता है, जो शुगर स्पाइक को रोकने में मदद करता है; वहीं अंगूर में शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट मौजूद होते हैं, लेकिन इसका ग्लाइसेमिक लोड थोड़ा अलग हो सकता है। अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) के फूड डेटा सेंट्रल के अनुसार, अंगूर में भी कई पोषक तत्व पाए जाते हैं जो सेहत को फायदा पहुंचाते हैं। डायबिटीज कंट्रोल करने और ब्लड शुगर के स्तर को कंट्रोल रखने के लिए इन दोनों में से कौन सा फल अधिक सुरक्षित है, किसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स बेहतर है और इन्हें खाने का सही तरीका क्या होना चाहिए? सभी बातों की जानकारी होना जरूरी है।

      हेल्थडॉटकॉम में रजिस्टर्ड डायटीशियन, ब्रियाना टोब्रिट्ज़होफर के प्रकाशित लेख में डायटीशियन ने बताया ब्लड शुगर को मैनेज करने के मामले में सेब (Apple) अंगूर की तुलना में थोड़ा बेहतर विकल्प हो सकता है, क्योंकि इसमें अंगूर के मुकाबले ज्यादा फाइबर होता है। एक मीडियम साइज के सेब में लगभग 4 ग्राम फाइबर होता है, जबकि एक कप अंगूर में करीब 1.5 ग्राम फाइबर पाया जाता है। फाइबर कार्बोहाइड्रेट के पाचन और शरीर में इसके अवशोषण की प्रक्रिया को धीमा करने में मदद करता है। इससे खाना खाने के बाद ब्लड शुगर धीरे-धीरे बढ़ता है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि डायबिटीज मरीजों के लिए अंगूर का सेवन ज्यादा फायदेमंद है या फिर सेब का।

      डायबिटीज में सेब और अंगूर कैसे करता है असर?

      सेब में पेक्टिन (Pectin) नाम का एक घुलनशील फाइबर भी होता है। यह पाचन तंत्र में जेल जैसी संरचना बना सकता है। पेक्टिन पाचन को बेहतर रखने में मदद करता है। इसके अलावा ये ब्लड शुगर कंट्रोल करने और हार्ट हेल्थ को दुरुस्त रखने में भी अहम किरदार निभा सकता है। इसका मतलब यह नहीं है कि अंगूर सेहत के लिए खराब विकल्प हैं। अंगूर में पॉलीफेनॉल (Polyphenols) पाए जाते हैं। ये प्राकृतिक पौधों के यौगिक हैं, जो कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने वाली सूजन से बचाने में मदद कर सकते हैं। अंगूर में मौजूद रेस्वेराट्रोल (Resveratrol) और एंथोसायनिन (Anthocyanins) जैसे कुछ यौगिक ब्लड शुगर को नॉर्मल रखने में मददगार हो सकते हैं।

      कोई भी खाना कितनी तेजी से ब्लड शुगर का स्तर बढ़ा सकता है इसका अंदाजा शोधकर्ता उस फूड के ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) से लगाते हैं। GI कार्बोहाइड्रेट वाले खाद्य पदार्थों को इस आधार पर रैंक करता है कि वो तय भोजन की तुलना में ब्लड शुगर कितनी तेजी से बढ़ाते हैं। आमतौर पर कम GI वाले खाद्य पदार्थ ब्लड शुगर को ज्यादा धीरे बढ़ाते हैं, जबकि ज्यादा GI वाले खाद्य पदार्थ ब्लड शुगर को तेजी से बढ़ा सकते हैं। सेब को लो-GI फूड माना जाता है। इसका GI आमतौर पर 36 से 40 के बीच होता है। वहीं, अंगूर का GI थोड़ा ज्यादा होता है और यह आमतौर पर 43 से 53 के बीच हो सकता है। यह अंतर अंगूर की किस्म के आधार पर बदल सकता है। हालांकि, दोनों ही फल लो से मॉडरेट GI रेंज में आते हैं और इनका GI सफेद ब्रेड, कैंडी या मीठे पेय जैसे खाद्य पदार्थों की तुलना में काफी कम होता है।

      फलों की बनावट भी ब्लड शुगर को कर सकती है प्रभावित

      फलों की बनावट भी इस बात को प्रभावित कर सकती है कि शरीर उसे कितनी तेजी से पचाता है। सेब सख्त होता है और इसे खाने के लिए ज्यादा चबाना पड़ता है। इसमें अंगूर की तुलना में अधिक फाइबर भी होता है। ये दोनों कारण खाना खाने के बाद ब्लड शुगर में होने वाली बढ़ोतरी को अपेक्षाकृत धीमा करने में मदद कर सकते हैं। साबुत अंगूर और साबुत सेब खाने पर इसमें मौजूद फाइबर बना रहता है लेकिन अगर फलों का सेवन उसका जूस बनाकर किया जाए तो उसमें से फाइबर की मात्रा बहुत कम या लगभग खत्म हो जाती है। जिस भी फूड या लिक्विड में फाइबर की मात्रा कम हो जाती है उसे खाने के बाद ब्लड में शुगर का स्तर तेजी से बढ़ने लगता है।

      सेब और अंगूर के पोषक तत्व

      एक कप अंगूर और एक मध्यम आकार के सेब में पोषक तत्व

      हालांकि सेब में फाइबर ज्यादा होता है, लेकिन अंगूर में विटामिन K और पोटैशियम जैसे कुछ पोषक तत्व अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। दोनों ही फलों में कई तरह के विटामिन, मिनरल और प्राकृतिक पौधों के यौगिक मौजूद होते हैं। इसलिए किसी एक पोषक तत्व पर ध्यान देने के बजाय, दोनों फलों के पूरे पोषण प्रोफाइल को देखना ज्यादा बेहतर है। संतुलित डाइट में सेब और अंगूर दोनों ही पौष्टिक विकल्प हो सकते हैं।

      ब्लड शुगर कंट्रोल रखने के लिए सेब और अंगूर का सेवन कैसे करें?

      आप सेब खाएं या अंगूर, कुछ आसान आदतें खाने के बाद ब्लड शुगर को ज्यादा समय तक नॉर्मल रखने में मदद कर सकती हैं।

      फल के साथ प्रोटीन वाली चीजें लें तो आपका ब्लड में शुगर का स्तर नॉर्मल रहेगा। फल को नट्स, दही, बीज या चीज जैसे प्रोटीन और हेल्दी फैट वाले खाद्य पदार्थों के साथ खाया जा सकता है। फल के साथ इन चीजों को लेने से पाचन धीमा हो सकता है और स्नैक या भोजन ज्यादा संतुलित बन सकता है जिससे ब्लड शुगर में अचानक बढ़ोतरी नहीं होती।

      जूस की जगह साबुत फल खाएं। साबुत सेब और अंगूर में प्राकृतिक रूप से फाइबर मौजूद होता है, जबकि जूस में शुगर ज्यादा होती है और शरीर इसे तेजी से अवशोषित कर लेता है। इसलिए आमतौर पर जूस की तुलना में साबुत फल बेहतर विकल्प होते हैं।

      अलग-अलग फलों को डाइट में शामिल करें। अलग-अलग फलों में अलग-अलग तरह के विटामिन, मिनरल और पौधों से मिलने वाले यौगिक पाए जाते हैं। इसलिए डाइट में कई तरह के फलों को शामिल करने से न्यूट्रिशन प्रोफाइल बेहतर हो सकती है।

      फल की मात्रा का ध्यान रखें।कोई भी पौष्टिक भोजन ज्यादा मात्रा में खाने पर ब्लड शुगर बढ़ा सकता है। इसलिए एक मध्यम सेब या लगभग एक कप अंगूर एक उपयोगी सर्विंग के तौर पर देखा जा सकता है। ब्लड शुगर को मैनेज करने में इस तरह के छोटे और लगातार किए जाने वाले बदलाव महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

      डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। डायबिटीज में डाइट को लेकर अपने डॉक्टर या डायटीशियन की सलाह जरूर लें।