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  • अगर गट हेल्थ  ठीक  करना चाहते है, तो आज ही अपने नाश्ते में शामिल करें ये 5  चीजें..

    अगर गट हेल्थ ठीक करना चाहते है, तो आज ही अपने नाश्ते में शामिल करें ये 5 चीजें..

    अगर गट हेल्थ  ठीक  करना चाहते है, तो आज ही अपने नाश्ते में शामिल करें ये 5  चीजें..

    आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर जंक फूड और अनहेल्दी चीजों का ज्यादा सेवन करने लगे हैं। रोजाना हम जो खाना खाते हैं, उसका सीधा असर हमारे पाचन तंत्र पर पड़ सकता है।

    Gut Health Tips: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर जंक फूड और अनहेल्दी चीजों का ज्यादा सेवन करने लगे हैं। रोजाना हम जो खाना खाते हैं, उसका सीधा असर हमारे पाचन तंत्र पर पड़ सकता है। हमारी आंतों में कई तरह के बैक्टीरिया मौजूद होते हैं, जो पाचन को सही रखने में मदद करते हैं।

    इसे ही आमतौर पर गट हेल्थ कहा जाता है। गट हेल्थ बेहतर रहने पर पाचन को सपोर्ट मिल सकता है और गैस, पेट फूलने जैसी सामान्य समस्याओं से राहत पाने में भी मदद मिल सकती है। इसलिए डाइट में फाइबर और पोषक तत्वों से भरपूर चीजों को शामिल करना जरूरी है। सुबह का नाश्ता इसके लिए एक अच्छा मौका हो सकता है।

    यें पांच चीजें आज ही नाश्ते में करें शामिल

    1. दही

    दही गट हेल्थ के लिए एक अच्छा विकल्प माना जाता है। इसमें प्रोबायोटिक्स पाए जाते हैं, जो आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया को सपोर्ट करने में मदद कर सकते हैं। सुबह एक कटोरी दही को पोहा, पराठे या दूसरे नाश्ते के साथ खाया जा सकता है। अगर दही आपको आसानी से पचता है, तो इसे डाइट में शामिल कर सकते हैं।

    2. ओट्स

    ओट्स फाइबर का अच्छा स्रोत है और पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद हो सकता है। इसे दूध या दही के साथ बनाकर इसमें केला, सेब और थोड़े ड्राई फ्रूट्स मिलाए जा सकते हैं। इससे नाश्ता स्वादिष्ट होने के साथ पौष्टिक भी बन जाता है।

    3. दलिया

    दलिया भी फाइबर से भरपूर नाश्ता है। आप इसे दूध के साथ मीठा बनाकर या गाजर, मटर और बीन्स जैसी सब्जियां डालकर नमकीन बना सकते हैं। नियमित रूप से फाइबर वाली चीजें खाना पाचन के लिए अच्छा हो सकता है।

    4, अंकुरित मूंग खाएं

    अंकुरित मूंग में फाइबर और प्रोटीन दोनों पाए जाते हैं। इसे सलाद की तरह खाया जा सकता है। इसमें खीरा, टमाटर, नींबू और हल्के मसाले मिलाकर स्वाद बढ़ाया जा सकता है।

    5. केला

    केला आसानी से मिलने वाला फल है और इसमें फाइबर मौजूद होता है। इसे सीधे खाने के अलावा ओट्स या दही के साथ भी लिया जा सकता है। सुबह जल्दी में हों, तो केला एक आसान नाश्ता हो सकता है।

  • गणेश उत्सव 2026: गणेश चतुर्थी पर गणपति बप्पा को बिल्कुल भी न चढ़ाएं ये चीजें, जानें धार्मिक मान्यता

    गणेश उत्सव 2026: गणेश चतुर्थी पर गणपति बप्पा को बिल्कुल भी न चढ़ाएं ये चीजें, जानें धार्मिक मान्यता

    Ganesh Chaturthi 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रतिवर्ष भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी पूरे देश में धूमधाम से मनाई जाती है। वैसे हो हर मास की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी पड़ती है लेकिन भादो मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि काफी खास है, क्योंकि इस दिन से 10 दिनों का गणेश उत्सव आरंभ हो जाता है। इस दौरान गणपति बप्पा की मूर्ति को विधि-विधान से घर और पंडालों में स्थापित करते हैं। इसके साथ ही अनंत चतुर्दशी के साथ बप्पा को अगले वर्ष आने की कामना करते हुए जल में प्रवाहित किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गणेश उत्सव के दौरान प्रथम पूज्य की पूजा करने से सुख, समृद्धि, सौभाग्य और शांति का वास होता है। भगवान गणेश अत्यंत सहज और सरलता से प्रसन्न होने वाले देवता हैं। अगर आप भी गणेश जी की पूजा कर रहे हैं, तो कुछ चीजों को उन्हें अर्पित करने की मनाही होती है। इस साल गणेश उत्सव 14 सितंबर 2026, सोमवार से आरंभ हो रहा है। आइए जानते हैं गणेश उत्सव के दौरान गणपति बप्पा को किन चीजों को चढ़ाने की मनाही होती है…

    गणेश जी को न चढ़ाएं तुलसी

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार,गणेश जी को तुलसी दल चढ़ाने की मनाही होती है। इसके पीछे एक पौराणिक कथा प्रचलित है। इसके अनुसार एक बार देवी तुलसी ने भगवान गणेश को अपने पति के रूप में पाने की प्रबल इच्छा प्रकट की और उनसे विवाह का प्रस्ताव रखा। किंतु गणपति बप्पा ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। क्रोध और आक्रोश में आकर तुलसी जी ने भगवान गणेश को श्राप दे दिया कि उनका दो विवाह होंगे। इस श्राप को सुनकर गणेश जी भी क्रोधित हो उठे। उन्होंने प्रतिश्राप देते हुए कहा कि, “हे तुलसी! तुम्हें भी राक्षस से विवाह करना होगा और मेरी पूजा में तुम्हारा उपयोग कभी नहीं किया जाएगा। इसी के कारण तुलसी का इस्तेमाल गणेश जी की पूजा में नहीं किया जाता है।

    केतकी का फूल

    शंकर जी के अलावा गणेश जी को भी केतकी का फूल चढ़ाने की मनाही होती है। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी में कौन श्रेष्ठ है? इस बात को लेकर युद्ध हो रहा था। तब शिव जी ने एक रास्ता निकाला था। लेकिन केतकी के फूल के साथ मिलकर ब्रह्मा जी ने छल करना चहा। भगवान शिव ने ब्रह्मा जी के इस छल को समझ लिया और अत्यंत क्रोधित हुए। तभी उन्होंने केतकी के फूल को श्राप दिया कि अब से उनकी पूजा में यह फूल स्वीकार नहीं किया जाएगा। चूंकि भगवान गणेश, भगवान शिव के पुत्र हैं, इसलिए गणेश पूजा में भी केतकी के फूल को अर्पित करना वर्जित माना गया है।

    टूटा हुआ चावल

    भगवान गणेश को अर्पित किए जाने वाले चावल यानी अक्षत चढ़ाते समय थोड़ा ध्यान रखने की जरूरत है। कभी भी गणेश जी को टूटा हुआ चावल नहीं चढ़ाना चाहिए, क्योंकि यह अपूर्णता और विघ्न का संकेत देता है।

    गणेश जी को न चढ़ाएं सफेद चीजें

    पौराणिक कथाओं के अनुसार, चंद्रदेव अपनी सुंदरता और तेज के लिए प्रसिद्ध थे। वे स्वयं को ब्रह्मांड का सबसे सुंदर और मनोहर मानते थे। इस बात का उन्हें काफी अहंकार था। ऐसे में उन्होंने एक बार गणेश जी का मजाक उड़ा दिया। भगवान गणेश ने चंद्रमा के इस व्यवहार से रुष्ट होकर उन्हें श्राप दे दिया कि आज से जो भी तुम्हारा दर्शन करेगा, वह कलंकित होगा। उसे समाज में अपमान और बदनामी का सामना करना पड़ेगा। यही कारण है कि गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा का दर्शन करना निषिद्ध माना गया है। इसके अलावा चंद्रमा का रंग सफेद है। ऐसे में सफेद रंग की वस्तुएं गणेश जी को नहीं चढ़ाई जाती है।

    डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं और प्रचलित परंपराओं पर आधारित है। अलग-अलग क्षेत्रों, संप्रदायों और परिवारों में पूजा-पद्धति एवं मान्यताओं में अंतर हो सकता है। इसलिए यहां बताई गई बातों को अंतिम या सर्वमान्य धार्मिक नियम न माना जाए। पूजा के दौरान अपने परिवार की परंपरा अथवा स्थानीय विद्वान/पंडित की सलाह को प्राथमिकता दें।

  • इंसानों से भी VIP लाइफ जीती हैं इस मॉडल की 4 बिल्लियां, हर महीने पानी की तरह बहाती है ₹2 लाख!

    इंसानों से भी VIP लाइफ जीती हैं इस मॉडल की 4 बिल्लियां, हर महीने पानी की तरह बहाती है ₹2 लाख!

    इंसानों से भी VIP लाइफ जीती हैं इस मॉडल की 4 बिल्लियां, हर महीने पानी की तरह बहाती है ₹2 लाख!

    क्या आप सोच सकते हैं कि कोई इंसान अपनी लग्जरी लाइफ या चमचमाती स्पोर्ट्स कारों को छोड़कर सिर्फ अपनी बिल्लियों पर हर महीने लाखों रुपए खर्च कर सकता है? सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन शिकागो की रहने वाली 28 साल की मॉडल कैमी चैन (Cami Chan) ऐसा सच में कर रही हैं. जहां लोग करोड़ों कमाकर महंगे ब्रांडेड कपड़े और गाड़ियां खरीदते हैं, वहीं कैमी अपनी चार प्यारी बिल्लियों को किसी राजकुमारियों जैसी जिंदगी दे रही हैं. आइए जानते हैं इस अनोखी बिल्ली प्रेमी की कहानी के बारे में.

    लग्जरी कार नहीं, बिल्लियां हैं असली पसंद

    नीड टू नो की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कैमी चैन हर महीने लगभग 50,000 पाउंड (लगभग 65 लाख रुपए) की तगड़ी कमाई करती हैं. अगर वह चाहतीं तो अपनी कमाई से दुनिया भर के डिजाइनर कपड़े, महंगे वेकेशन और सुपरकार खरीद सकती थीं. लेकिन उनका कहना है कि उन्हें इन सब चीजों से ज्यादा खुशी अपनी चार बिल्लियों Artemis, Kerrigan, Jupiter और Mercury की देखभाल करने में मिलती है. ऑनलाइन सफलता मिलने के बाद उन्होंने सबसे पहले एक शुद्ध नस्ल की रैगडॉल बिल्ली ही खरीदी थी.

    हर महीने ₹2 लाख से ज्यादा का खर्च

    कैमी अपनी इन चारों बिल्लियों पर हर महीने 2,000 पाउंड (करीब 2.5 लाख रुपए) से ज्यादा खर्च करती हैं. इस बजट में बिल्लियों का प्रीमियम खाना, लिटर, ग्रूमिंग, रेगुलर मेडिकल चेक-अप और उनके ढेर सारे खिलौने शामिल हैं. वह उनके खाने-पीने के मामले में कभी कंजूसी नहीं करतीं और हमेशा बेस्ट क्वालिटी की चीजें चुनती हैं. उनके पास बिल्लियों के लिए सुंदर कपड़े और डिजाइनर बेड भी मौजूद हैं.

    हेल्थ और ट्रैवल में नो कॉम्प्रोमाइज

    कैमी कहती हैं कि बिल्लियों की सेहत के मामले में पैसे की कोई सीमा नहीं है. अगर उनमें से किसी की भी तबीयत खराब होती है, तो वह तुरंत अच्छे डॉक्टर के पास ले जाती हैं. इतना ही नहीं, जब कभी कैमी को शहर से बाहर जाना पड़ता है, तो वह अकेले जाने के बजाय एक्स्ट्रा पैसे खर्च करके अपनी बिल्लियों को भी साथ ले जाती हैं, ताकि उन्हें अकेलापन न महसूस हो.

    ‘लोग पागल कहें या कुछ भी, मुझे फर्क नहीं पड़ता’

    कैमी जानती हैं कि बहुत से लोगों को बिल्लियों पर हर महीने इतना पैसा खर्च करना पागलपन लग सकता है. लेकिन उनका साफ कहना है कि ये बिल्लियां उनके परिवार का हिस्सा हैं. वह कड़ी मेहनत करती हैं और अपने शौक के लिए इन्हें पालकर बेहद खुश हैं. जहां कुछ लोगों का सपना लैम्बोर्गिनी खरीदने का होता है, वहीं कैमी का कहना है कि वह हर बार अपनी बिल्लियों को ही चुनेंगी.

  • ड्रिल मशीन से जींस साफ करने लगी महिला, देसी जुगाड़ देखकर लोग बोले- कमाल है!

    ड्रिल मशीन से जींस साफ करने लगी महिला, देसी जुगाड़ देखकर लोग बोले- कमाल है!

    ड्रिल मशीन से जींस साफ करने लगी महिला, देसी जुगाड़ देखकर लोग बोले- कमाल है!

    सोशल मीडिया पर देसी जुगाड़ के कई अनोखे तरीके सामने आते रहते हैं। अब एक महिला का ऐसा ही जुगाड़ लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। महिला ने जींस साफ करने के लिए ऐसा तरीका अपनाया, जिसे देखकर लोग हैरान रह गए।

    तस्वीरों में महिला पीले रंग की साड़ी पहने जमीन पर गीली जींस लेकर बैठी नजर आती है। आमतौर पर कपड़ों पर जमी गंदगी साफ करने के लिए हाथ या ब्रश का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन महिला ने इसके लिए पावर ड्रिल मशीन का इस्तेमाल किया।

    महिला ने ड्रिल मशीन के आगे एक गोल स्क्रब ब्रश लगा रखा था। इसके बाद जींस पर पानी और डिटर्जेंट डालकर ड्रिल मशीन की मदद से कपड़े को रगड़ना शुरू किया। मशीन की तेज रफ्तार से जींस पर जमा गंदगी जल्दी साफ होती नजर आती है।

    सोशल मीडिया पर लोगों ने लिए मजे

    महिला का यह देसी जुगाड़ सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है। कई लोगों ने इसे भारतीय जुगाड़ की शानदार मिसाल बताया। वहीं कुछ यूजर्स ने मजेदार कमेंट करते हुए कहा कि घर में रखी टूलकिट का आखिरकार सही इस्तेमाल हो गया।

    हालांकि, कुछ लोगों ने इस तरीके को लेकर सावधानी बरतने की सलाह भी दी। उनका कहना है कि ड्रिल मशीन पर ज्यादा दबाव पड़ने से कपड़ा खराब हो सकता है। बिजली से चलने वाली मशीन का इस्तेमाल पानी के आसपास करना भी जोखिम भरा हो सकता है।

    कुल मिलाकर, महिला का यह अनोखा तरीका लोगों का ध्यान खींच रहा है और सोशल मीडिया पर देसी जुगाड़ को लेकर खूब चर्चा हो रही है।

  • जब भैंस बनी इंसान की जिंदगी का सहारा! बाढ़ के तेज बहाव में युवक को सुरक्षित पहुंचाया..

    जब भैंस बनी इंसान की जिंदगी का सहारा! बाढ़ के तेज बहाव में युवक को सुरक्षित पहुंचाया..

    जब भैंस बनी इंसान की जिंदगी का सहारा! बाढ़ के तेज बहाव में युवक को सुरक्षित पहुंचाया..

    नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बीच इंसान और जानवर के बीच भरोसे की एक तस्वीर लोगों का ध्यान खींच रही है। तेज बहाव वाले पानी में एक युवक फंस गया था। ऐसे मुश्किल समय में एक भैंस उसके लिए सहारा बन गई।

    बताया जा रहा है कि युवक ने भैंस की पीठ पर बैठकर बाढ़ के पानी को पार किया। पानी का बहाव काफी तेज था और चारों तरफ मटमैला पानी दिखाई दे रहा था। इसके बावजूद भैंस धीरे-धीरे आगे बढ़ती रही और युवक को सुरक्षित दिशा में ले गई।

    तेज बहाव के बीच भैंस पर बैठा युवक

    तस्वीरों में युवक भैंस की पीठ पर बैठा नजर आ रहा है। आसपास पानी का बहाव इतना तेज था कि पैदल चलना बेहद मुश्किल दिखाई दे रहा था। युवक ने भैंस को मजबूती से पकड़ा हुआ था, जबकि भैंस लगातार आगे बढ़ती रही।

    इस मुश्किल परिस्थिति में भैंस ने जिस तरह पानी के बीच रास्ता बनाया, उसने लोगों का ध्यान खींच लिया।

    सोशल मीडिया पर लोग कर रहे तारीफ

    इस घटना की तस्वीर सामने आने के बाद लोग भैंस की तारीफ कर रहे हैं। कई लोगों ने इसे बाढ़ जैसी आपदा के बीच इंसान और जानवर के बीच भरोसे की मिसाल बताया।

    लोगों का कहना है कि मुश्किल वक्त में यही भैंस युवक के लिए सबसे बड़ा सहारा बनी। इस घटना ने एक बार फिर दिखाया कि जानवर भी अपने व्यवहार से इंसानों के लिए कितने मददगार साबित हो सकते हैं।

    बाढ़ जैसी स्थिति में हालांकि तेज बहाव वाले पानी को पार करना बेहद खतरनाक हो सकता है। ऐसे हालात में बिना प्रशिक्षित बचाव दल की मदद के पानी में उतरने से बचना चाहिए।

  • 21 साल की पलक के ब्रश से कैनवास पर उतरती है मुगल कला की बारीकी, पिता से विरासत में मिला हुनर अब बना पहचान..

    21 साल की पलक के ब्रश से कैनवास पर उतरती है मुगल कला की बारीकी, पिता से विरासत में मिला हुनर अब बना पहचान..

    21 साल की पलक के ब्रश से कैनवास पर उतरती है मुगल कला की बारीकी, पिता से विरासत में मिला हुनर अब बना पहचान..

    कैनवास पर ब्रश चलता है और देखते ही देखते सफेद रंग की खाली सतह पर तस्वीर जीवंत हो उठती है. कहीं चेहरे की आंखों में भाव नजर आते हैं तो कहीं रंगों की बारीकी पूरी तस्वीर को खास बना देती है. यह हुनर है मुजफ्फरपुर की 21 साल की पलक वर्मा का, जिन्होंने बचपन के शौक को अब अपनी पहचान बना लिया है.

    पलक को पेंटिंग का शौक LKG से ही था. शुरुआत स्केचिंग से हुई और धीरे-धीरे एक्रिलिक पेंटिंग समेत अलग-अलग आर्ट फॉर्म सीखती चली गईं. आज वह मुगल आर्ट और मॉडर्न आर्ट के साथ मिनिएचर, पोस्टर, नेचर और एब्सट्रैक्ट आर्ट में भी प्रयोग कर रही हैं.

    तस्वीर बनाने से पहले बारीकी से समझती हैं हर डिटेल पलक के लिए पेंटिंग सिर्फ कैनवास पर रंग भरना नहीं है. किसी तस्वीर को पेंटिंग में बदलने से पहले वह उसकी हर छोटी-बड़ी डिटेल को ध्यान से देखती हैं. खासकर पोर्ट्रेट बनाते समय चेहरे के भाव और आंखों की बारीकियों पर उनका सबसे ज्यादा ध्यान रहता है.

    एक स्केच या पेंटिंग को पूरा करने में उन्हें दो से तीन दिन तक लग जाते हैं. पलक कहती हैं कि फिनिशिंग और डिटेलिंग में काफी समय लगता है. उनका लक्ष्य अलग-अलग तरह की आर्ट सीखकर अपनी कला को और बेहतर बनाना है.

    पिता ज्वेलरी आर्टिस्ट, बेटी ने उनसे सीखी बारीकी पलक की कला के पीछे उनके पिता की सीख भी बड़ी वजह है. उनके पिता खुद ज्वेलरी आर्टिस्ट हैं. यानी बारीक डिजाइन और कारीगरी उनके परिवार का हिस्सा रही है. बचपन से ही पिता ने पलक की पेंटिंग में रुचि को पहचाना और उसे निखारने में मदद की.

    पिता सिर्फ बेटी की तारीफ नहीं करते थे, बल्कि पेंटिंग में कमी दिखने पर उसे सुधारने की सलाह भी देते थे. शुरुआत में पलक को लगता था कि शायद पापा को उनकी पेंटिंग पसंद नहीं आती, लेकिन बाद में उन्हें समझ आया कि गलतियां बताने वाला ही असल में बेहतर बनाने में मदद करता है.

    राजा रवि वर्मा से प्रेरणा, पोर्ट्रेट पेंटिंग में खास दिलचस्पी पलक मशहूर चित्रकार राजा रवि वर्मा की कला से भी काफी प्रभावित हैं. खासकर उनके पोर्ट्रेट पेंटिंग के काम ने पलक को आकर्षित किया. यही वजह है कि वह चेहरों के भाव और आंखों की बारीकियों को कैनवास पर उतारना पसंद करती हैं.

    सोशल मीडिया से मिला प्लेटफॉर्म, अब मिलने लगे ऑर्डर पलक की कला अब घर और स्टूडियो तक सीमित नहीं है. सोशल मीडिया ने उनके हुनर को लोगों तक पहुंचाने का काम किया. उनकी बनाई पेंटिंग्स को पसंद करने वाले लोग अब उनसे तस्वीरों को पेंटिंग में बदलने के ऑर्डर भी दे रहे हैं. इन ऑर्डर से होने वाली कमाई से पलक अपनी कला से जुड़े खर्च निकाल रही हैं.

    वह रोज करीब चार से पांच घंटे पेंटिंग की प्रैक्टिस करती हैं. अर्जेंट ऑर्डर मिलने पर कभी-कभी दिन-रात काम करना पड़ता है. अब पलक का अगला सपना अपनी पेंटिंग्स की बड़ी एग्जीबिशन लगाना है. मुजफ्फरपुर की यह युवा कलाकार मानती हैं कि पहचान सिर्फ हुनर से नहीं, बल्कि लगातार अभ्यास से बनती है. उनके ब्रश का हर स्ट्रोक इसी मेहनत और बड़े सपने की कहानी कहता है.

  • 100 घर, 1500 आबादी… आजादी के दशकों बाद इस गांव में पहुंचा नल का पानी, लड़कों की शादी होनी तक हो गई थी बंद

    100 घर, 1500 आबादी… आजादी के दशकों बाद इस गांव में पहुंचा नल का पानी, लड़कों की शादी होनी तक हो गई थी बंद

    100 घर, 1500 आबादी… आजादी के दशकों बाद इस गांव में पहुंचा नल का पानी, लड़कों की शादी होनी तक हो गई थी बंद

    उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के लहुरियादह गांव की कहानी लंबे समय तक पानी की कमी के संघर्ष से जुड़ी रही। करीब 100 घरों और 1500 की आबादी वाले इस गांव में लोगों को पीने के पानी के लिए कई किलोमीटर तक जाना पड़ता था। हालात इतने मुश्किल थे कि पानी की समस्या के कारण गांव के कई लड़कों की शादी तक रुक गई थी।

    अब गांव की तस्वीर बदल चुकी है। जल जीवन मिशन के तहत संचालित हर घर नल योजना के जरिए घर-घर तक पानी पहुंचने लगा है। जिन लोगों को कभी एक-एक बूंद पानी के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता था, वे अब अपने घर की टोटी खोलकर पानी प्राप्त कर रहे हैं।

    तीन दिन बाद आता था पानी का नंबर

    मिर्जापुर की लालगंज तहसील के ड्रमंडगंज क्षेत्र में पहाड़ी पर स्थित लहुरियादह में कभी पानी का कोई स्थायी इंतजाम नहीं था। ग्रामीण पहाड़ पर मौजूद एक जलस्रोत से पानी इकट्ठा करके अपनी जरूरत पूरी करते थे।

    जलस्रोत पर पानी भरने के लिए लोगों की बारी तय होती थी। कई बार एक परिवार का नंबर करीब तीन दिन बाद आता था। गर्मियों में हालात और भी खराब हो जाते थे। पानी की कमी इतनी बढ़ जाती थी कि प्रशासन को टैंकर भेजकर लोगों तक पानी पहुंचाना पड़ता था।

    पांच किलोमीटर दूर से लाना पड़ता था पानी

    पानी की जरूरत पूरी करने के लिए ग्रामीणों को कई बार करीब पांच किलोमीटर दूर तक जाना पड़ता था। आसपास के इलाकों और पहाड़ के नीचे से पानी लाकर परिवार अपनी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करते थे।

    गर्मी के दिनों में स्थिति इतनी गंभीर हो जाती थी कि एक व्यक्ति को कई दिनों के इस्तेमाल के लिए बेहद सीमित मात्रा में पानी मिल पाता था। पानी की इसी समस्या ने गांव के लोगों की जिंदगी मुश्किल बना दी थी।

    पानी की कमी से शादियों पर भी पड़ा असर

    लहुरियादह में पानी की समस्या सिर्फ रोजमर्रा की जिंदगी तक सीमित नहीं रही। गांव में पानी की कमी इतनी बड़ी समस्या बन गई थी कि कई परिवारों के लिए शादी-ब्याह भी मुश्किल हो गया था।

    लोगों का कहना था कि जब किसी परिवार में बहू आती तो उसके लिए भी पानी की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती बन जाता था। इसी वजह से गांव में लड़कों की शादी तक रुकने की बात सामने आई।

    हर घर में लगी टोटी, बदल गई जिंदगी

    जल जीवन मिशन के तहत हर घर नल योजना ने ग्रामीणों की इस परेशानी को काफी हद तक बदल दिया। 31 अगस्त 2023 को पहली बार गांव में पाइपलाइन के जरिए नल से पानी पहुंचा।

    अब गांव के ज्यादातर घरों में नल लगे हैं और सुबह-शाम पानी की सप्लाई होती है। ग्रामीणों को पानी के लिए पहाड़ों और जंगलों में जाने की जरूरत नहीं पड़ती।

    गांव की रहने वाली सुघरी देवी बताती हैं कि पहले पानी के स्रोत के पास ही रात-दिन लोगों की लाइन लगी रहती थी। अपनी बारी आने का इंतजार करना पड़ता था। अब घर में नल लगा है और टोटी खोलते ही पानी मिल जाता है।

    वहीं छमा देवी के मुताबिक, शादी के बाद जब वह गांव आई थीं, तब पानी की समस्या सबसे बड़ी परेशानी थी। खाना बनाने और घर के दूसरे कामों के लिए भी दूर पहाड़ी जलस्रोत तक जाना पड़ता था। अब घर में ही पानी मिलने से उनकी जिंदगी काफी आसान हो गई है।

    लहुरियादह के ग्रामीणों के लिए घर तक पानी पहुंचना सिर्फ एक सरकारी योजना का लाभ नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही परेशानी से बड़ी राहत है। जिस पानी के लिए कभी पूरा गांव संघर्ष करता था, वही पानी अब घर की टोटी से मिलने लगा है।

  • 40 की उम्र में महिलाओं की हड्डियां कैसे रहें मजबूत? जानिए सही डाइट

    40 की उम्र में महिलाओं की हड्डियां कैसे रहें मजबूत? जानिए सही डाइट

    40 की उम्र में महिलाओं की हड्डियां कैसे रहें मजबूत? जानिए सही डाइट

    महिला 40 की उम्र तक पहुंची है तो हड्डियां कमजोर होने लगती है। इसकी वजह से जॉइंट पेन, हड्डियों का घनत्व कम हो जाता है। ऐसे में महिलाओं को अपने खान-पान में बदलाव करना जरूरी है। क्योंकि शरीर को भरपूर मात्रा में कैल्शियम, विटामिन डी, मैग्नीशियम और प्रोटीन को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए। तो आज हम आपको बताएंगे अच्छी डाइट को अपने खाने में शामिल कर कैसे महिलाएं अपनी हड्डियों को रखें मजबूत?

    Women Health :  महिलाओं के शरीर में उम्र के हर पड़ाव का बदलाव देखने को मिलते हैं। 15 से 16 साल की उम्र में मासिक धर्म की शुरुआत होती है, जिससे हार्मोंस के साथ-साथ शरीर में भी अहम बदलाव देखने को मिलते हैं। शादी के बाद जब महिला गर्भवती होती है तो पहली डिलीवरी के बाद भी कई तरह की परेशानियां महिलाओं के सामने आती है। जैसे जैसे महिला 40 की उम्र तक पहुंची है तो हड्डियां कमजोर होने लगती है। इसकी वजह से जॉइंट पेन, हड्डियों का घनत्व कम हो जाता है। ऐसे में महिलाओं को अपने खान-पान में बदलाव करना जरूरी है। क्योंकि शरीर को भरपूर मात्रा में कैल्शियम, विटामिन डी, मैग्नीशियम और प्रोटीन को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए। तो आज हम आपको बताएंगे अच्छी डाइट को अपने खाने में शामिल कर कैसे महिलाएं अपनी हड्डियों को रखें मजबूत?

    हड्डियां खो देती हैं घनत्व

    उम्र के साथ-साथ महिलाओं में आम तौर पर कई बदलाव होते हैं। इसमें वजन बढ़ना गंभीर बीमारियों को बढ़ावा देता है। कई बार महिलाओं की हड्डियां भी कमजोर होने लगती है। 40 की उम्र तक पहुंचते ही हड्डियों का घनत्व (Bone Density) कम हो जाता है। पैरों में दर्द होना, जोड़ो में दर्द होना एक आम बात है, लेकिन कई बार यही दर्द बड़ी परेशानी का रूप ले लेता है। ऐसे में महिलाएं डॉक्टर के पास जाती है। 2 से 3 दिन दवा खाने के बाद दर्द से राहत तो मिलती है। लेकिन फिर से दर्द की वापसी होती है।

    सिर्फ कैल्शियम ही हड्डियों को नहीं बनाता मजबूत

    महिलाओं की कमजोर हड्डियों को लेकर डॉक्टर बेहतरीन डाइट लेने की सलाह देते हैं। क्योंकि कैल्शियम खोने से ही हड्डियां कमजोर नहीं होती है। इसमें कई कारण हो सकते हैं। क्योंकि हड्डियों को मजबूत रखने के लिए महज कैल्शियम ही जरूरी नहीं है प्रोटीन और कैल्शियम के साथ-साथ कई अन्य चीजें भी महिलाओं की हड्डियों को मजबूत बनाने का काम करती है।

    हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए कैसी डाइट अपनाएं

    डॉक्टरों की ज्यादातर सलाह यही रहती है कि महिलाओं को 40 की उम्र में दूध, दही पनीर को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए। इसके साथ-साथ प्रोटीन और फाइबर को भी अपनी डाइट में शामिल करना जरूरी है। फैट लेने से जितना बच सके उतना बचने की सलाह दी जाती है। हड्डियों के लिए विटामिन D भी शामिल है। मैक्स हॉस्पिटल में आर्थोपेडिक विभाग में डायरेक्टर डॉ. एल तोमर के मुताबिक महिलाओं को अच्छी डाइट लेना जीतना जरूरी है उतना ही विटामिन डी भी जरूरी है।

    विटामिन डी के लिए सुबह की धूप है बेहतर सप्लीमेंट

    अगर विटामिन डी को नजरअंदाज करना सही नही। विटामिन डी महिलाओं के शरीर में कैल्शियम अवशोषित करने में मददगार होता है। लेकिन शरीर में विटामिन डी सही नहीं होता तो कैल्शियम का भी कोई खास फायदा नहीं होता। ऐसे में विटामिन डी को लेने के लिए सुबह की पहली धूप शरीर को लगाना बेहद जरूरी है। पहली धूप विटामिन डी का बेहतर सप्लीमेंट है। जो एक मुफ्त स्पलीमेंट भी होता है। और सुबह की पहली धूप शरीर पर लगने से कई तरह की बीमरियों से भी बचा जा सकता है, इसलिए महिलाओं को पहली धूप लेने की सलाह दी जाती है।

    कम खाने की आदत से करे बचाव

    40 की उम्र में महिलाएं अपने वजन को कम करने के लिए खाने से समझौता करती है। लेकिन ऐसा बिलकुल भी नहीं करना चाहिए। महिलाओं को अपनी डाइट में सही मात्रा में खाना जरूरी है। कम कैलोरी वाली डाइट लंबे समय शरीर में प्रोटीन ऐर पोषक तत्वों की कमी करता है। इससे महिलाओं के शरीर में हड्डियों पर सबसे ज्यादा इसका असर दिखाई देता है। इसलिए अच्छी डाइट के साथ एक्सरसाइज जैसे तेज चलना, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग भी बोनस को हेल्थी बनाने के लिए महत्वपूर्ण होती है। महिलाओं को धूम्रपान और अत्यधिक शराब के सेवन से भी बचना चाहिए।

    हड्डियों को मजबूत रखने के महिलाओं को अपनी डाइट में क्या शामिल करें?

    दूध और डेयरी उत्पाद: दूध,दही और पनीर कैल्शियम और प्रोटीन के बेहतरीन स्रोत हैं जो हड्डियों को मजबूती देते हैं।

    हरी पत्तेदार सब्जियां: पालक, ब्रोकली और केल जैसी सब्जियों में कैल्शियम, मैग्नीशियम और विटामिन K पाया जाता है,जो हड्डियों की सेहत के लिए जरूरी है।

    रागी और मखाना: रागी और मखाने में भरपूर मात्रा में कैल्शियम और फास्फोरस होता है, जिसे खाने से महिलाओं के जोड़ों और हड्डियों को मजबूत करने में मदद मिलती है।

    तिल और मेवे:बादाम और तिल के बीज मैग्नीशियम और कैल्शियम दोनों पाए जाते हैं। इससे महिलाओं के शरीर में खनिजों का बेलेंस बना रहता है।

    विटामिन डी : धूप जो शरीर में कैल्शियम को सोखने का काम करती हैं।

  • नीब करौरी बाबा को मानते थे हनुमान जी का अवतार, जानें बाबा अपने पैर क्यों नहीं छुलवाते थे और कैंची धाम का रहस्य..

    नीब करौरी बाबा को मानते थे हनुमान जी का अवतार, जानें बाबा अपने पैर क्यों नहीं छुलवाते थे और कैंची धाम का रहस्य..

    नीब करौरी बाबा को मानते थे हनुमान जी का अवतार, जानें बाबा अपने पैर क्यों नहीं छुलवाते थे और कैंची धाम का रहस्य..

    नीब करौरी बाबा एक आध्यात्मिक संत थे और वह हनुमान जी को अपना आराध्य मानते थे। साथ ही लोग बाबा को हनुमान की का अवतार तक बताते हैं। वहीं बाबा के भक्तों में देश- विदेश के तमाम दिग्गज शामिल हैं। जिनमें एपल के सीईओ स्टीव जॉब्स से लेकर हॉलीवुड की दिग्गज एक्ट्रेस जूलिया रॉबर्ट्स तक शामिल हैं। नीम करोली बाबा ने अपने जीवनकाल में करीब 108 हनुमान मंदिरों का निर्माण कराया लेकिन उत्तराखंड के नैनीताल के पास स्थित कैंची धाम आज भी उनके नाम से जुड़े प्रमुख आध्यात्मिक स्थलों में शामिल है। नीम करोली बाबा भले ही दुनिया में न हों, लेकिन उनके आश्रम कैंची धाम में अब भी भक्तों-श्रद्धालुओं का वैसा ही मजमा लगता है। बताया जाता है कि कैंची धाम की स्थापना बाबा ने साल 1964 में की थी।

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    किसी से पैर नहीं छुलवाते थे

    बताया जाता है नीब करौरी बाबा किसी से अपना पैर नहीं छुलवाते थे, जो कोई भी भक्त बाबा के पैर छूने के लिए आगे बढ़ता था वो उसको रोक देते थे। वो कहते थे कि मेरी जगह हनुमान जी का पैर छुओ…वही कल्याण करेंगे।

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    स्टीव जॉब्स भी जा चुके हैं कैंची धाम

    एप्पल के पूर्व सीईओ स्टीव जॉब्स 1973 में भारत की यात्रा पर आए थे। साथ ही वह कैंची धाम नीम करोली बाबा के दर्शन करने पहुंचे थे, लेकिन बाबा देहांत हो चुका था। बताया जाता है स्टीव जॉब्स कुछ दिन आश्रम में रुके और ध्यान- योग किया।

    कैसे प्रसिद्ध हुआ कैंची धाम?

    नीब करौरी बाबा का नाम सबसे ज्यादा उत्तराखंड के कैंची धाम से जुड़ा है। नैनीताल-अल्मोड़ा मार्ग पर स्थित यह आश्रम नैनीताल से करीब 17 किलोमीटर दूर है। कैंची धाम में हनुमान मंदिर की स्थापना बाबा से जुड़ी है और 15 जून को यहां स्थापना दिवस के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

    नीब करोरी बाबा क्यों कहा जाता है?

    बाबा का बचपन का नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा रखा गया है। वहीं लक्ष्मी नारायण बड़े हुए तो गृहस्थ छोड़कर साधु बन गए। वहीं घर त्यागने के बाद वह उत्तर प्रदेश के ही फर्रुखाबाद जिले में ‘नीब करोरी’गांव पहुंचे। साथ ही फिर एक गुफा में कठिन तपस्या करने लगे थे। इसी गांव के नाम पर भक्त उन्हें नीब करोरी बाबा कहकर पुकारने लगे।

    जानिए कौन थे नीब करौरी बाबा

    नीब करौरी बाबा का मूल नाम लक्ष्मण नारायण शर्मा था। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के अकबरपुर में हुआ था। नीब करौरी महाराज के पिता का नाम श्री दुर्गा प्रसाद शर्मा था। साथ ही बाबा के बचपन का नाम लक्ष्मी नारायण शर्मा था और बताया जाता। बाबा की प्रारंभिक शिक्षा अकबरपुर गांव में ही हुई थी। बाद में वे आध्यात्म की तरफ मुड़ गए। वहीं नीम करोली की मृत्यु 11 सितंबर 1973 को हुई थी। इस दिन बाबा की पुण्य तिथि मनाई जाती है।

  • मोबाइल पर नजरें गड़ाए चल रहा था शख्स, अगले ही पल सीधे छत से नीचे गिरा..

    मोबाइल पर नजरें गड़ाए चल रहा था शख्स, अगले ही पल सीधे छत से नीचे गिरा..

    मोबाइल पर नजरें गड़ाए चल रहा था शख्स, अगले ही पल सीधे छत से नीचे गिरा..

    सोशल मीडिया (Social Media) पर आए दिन ऐसे वीडियो वायरल होते रहते हैं, जिन्हें देखकर कुछ पल के लिए हम भी सोच में पड़ जाते हैं। इन दिनों ऐसा ही एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वायरल हो रहा है। वीडियो में एक शख्स के साथ कुछ ऐसा होता है, जिसे देखकर किसी की भी धड़कन बढ़ सकती है। यह वीडियो खास तौर पर उन लोगों के लिए एक चेतावनी जैसा है, जो चलते समय मोबाइल फोन में व्यस्त रहते हैं। वायरल वीडियो (Viral Video) को @gharkekalesh नाम के एक्स हैंडल से शेयर किया गया है। वीडियो के साथ लिखा गया है कि एक आदमी ऊपर की मंजिल से गिर गया। साथ ही लोगों को सावधानी से चलने और नीचे देखने की सलाह दी गई है।

    फोन ने भटकाया ध्यान, खुली जगह में जा गिरा शख्स

    वीडियो (Video) में देखा जा सकता है कि एक शख्स सीढ़ियों से ऊपर की ओर जा रहा है। उसके हाथ में मोबाइल फोन नजर आ रहा है। सीढ़ियां चढ़ते हुए एक पल के लिए उसका ध्यान मोबाइल की तरफ चला जाता है। इसके बाद जैसे ही वह आगे बढ़ता है, उसके कदम छत पर बनी एक खुली जगह की तरफ चले जाते हैं। अगले ही पल वह उस खुले हिस्से में जा गिरता है। घटना इतनी अचानक होती है कि वीडियो देखने वाला भी कुछ सेकंड के लिए हैरान रह जाता है। ऐसा लगता है कि मोबाइल पर ध्यान जाने की वजह से शख्स को सामने मौजूद खतरनाक जगह दिखाई नहीं दी। हालांकि, इस वीडियो में यह जानकारी नहीं दी गई है कि हादसे के बाद उस शख्स की हालत कैसी थी या उसके साथ आगे क्या हुआ इसलिए उसके बारे में किसी तरह का दावा करना सही नहीं होगा। वीडियो को शेयर करने का मकसद लोगों को सावधान करना ही नजर आता है।

    चलते हुए फोन चलाने की ऐसी कीमत? शख्स के साथ हुआ खतरनाक हादसा

    इस वीडियो (Video) के सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स भी अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि छत पर मौजूद इस तरह की खुली जगह को जाली या किसी मजबूत कवर से ढकना चाहिए था। वहीं, कुछ यूजर्स ने चलते समय मोबाइल इस्तेमाल करने की आदत को हादसे की बड़ी वजह बताया। कुछ लोगों ने निर्माण स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि ऐसी जगहों पर खुले हिस्सों को सुरक्षित तरीके से ढकना बेहद जरूरी है, ताकि किसी की नजर चूकने पर भी बड़ा हादसा न हो। फिर भी एहतियात के तौर पर लोगों को सीढ़ियों, छतों, सड़क या निर्माणाधीन जगहों पर चलते समय मोबाइल से दूरी बनाकर रहना चाहिए। कई बार सिर्फ एक सेकंड का ध्यान भटकना भी भारी पड़ सकता है।

    डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है। satyareport.com किसी भी प्रकार के दावे की पुष्टि नहीं करता है।