Author: contact.satyareport@gmail.com

  • राम की नगरी अयोध्या में लगता है यमराज का मेला ! जानिए अनोखी परंपरा..

    राम की नगरी अयोध्या में लगता है यमराज का मेला ! जानिए अनोखी परंपरा..

    राम की नगरी अयोध्या में लगता है यमराज का मेला ! जानिए अनोखी परंपरा..

    अयोध्या, । भगवान श्रीराम की पावन नगरी अयोध्या वैसे तो हर दिन भक्ति, आस्था और अध्यात्म का केंद्र बनी रहती है, लेकिन दीपावली के तीसरे दिन यहां एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है। इस दिन भक्त यमराज यानी मृत्यु के देवता की पूजा करते हैं। यह अनोखा आयोजन न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है, बल्कि पौराणिक कथा और पारिवारिक प्रेम का भी प्रतीक है। मान्यता है कि जब भगवान श्रीराम ने पृथ्वी से वैकुंठ गमन का निश्चय किया, तब यमराज स्वयं उन्हें लेने अयोध्या आए थे।

    कहा जाता है कि उन्होंने जमथरा घाट पर विश्राम किया था और वहीं से आगे बढ़कर भगवान श्रीराम ने गुप्तार घाट पर जल समाधि ली थी। इसी स्मृति में हर वर्ष कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि, जिसे यम द्वितीया कहा जाता है, अयोध्या के सरयू तट स्थित यमथरा घाट पर भव्य पूजा और मेला आयोजित किया जाता है। प्रातःकाल से ही श्रद्धालु सरयू नदी में स्नान कर भयमुक्त और दीर्घायु जीवन की कामना करते हैं। भक्तों का विश्वास है कि इस दिन यमराज की पूजा करने से व्यक्ति को यमभय से मुक्ति और मृत्यु पर विजय का आशीर्वाद मिलता है।


    खासतौर पर बहनें इस दिन व्रत रखती हैं और अपने भाइयों की दीर्घायु और कल्याण के लिए यमराज से प्रार्थना करती हैं। यह दिन भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक भी माना जाता है।


    कहा जाता है कि यमराज ने यह तपोस्थली स्वयं अयोध्या माता से प्राप्त की थी, इसलिए यहां की पूजा का महत्व अन्य स्थानों से कहीं अधिक है। यमथरा घाट पर इस दिन भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ता है। आरती, भजन, दीपदान और मेला पूरे वातावरण को आध्यात्मिक बना देते हैं। दीपावली के तीसरे दिन अयोध्या का यह आयोजन सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि आस्था, प्रेम और पौराणिक इतिहास का संगम है।
    श्रद्धालु यह मानते हैं कि यमराज की आराधना करने से न केवल मृत्यु का भय दूर होता है, बल्कि जीवन में संतुलन, अनुशासन और कर्म की चेतना भी बढ़ती है।

  • अजनार नदी को साफ करने निकला MP का युवक, मेहनत की गूंज पहुंची विदेश तक..

    अजनार नदी को साफ करने निकला MP का युवक, मेहनत की गूंज पहुंची विदेश तक..

    अजनार नदी को साफ करने निकला MP का युवक, मेहनत की गूंज पहुंची विदेश तक..

    26 जनवरी को अजनार नदी की सफाई से शुरू हुई उनकी कोशिश कुछ ही महीनों में सोशल मीडिया की चर्चा बनी। फिर आनंद महिंद्रा ने तारीफ की, मुख्यमंत्री से मुलाकात हुई और अब The Ocean Cleanup के फाउंडर की ओर से काम करने का न्योता मिल गया।

    मध्य प्रदेश: कहते हैं कि बदलाव की शुरुआत किसी बड़े मंच से नहीं, बल्कि एक छोटी-सी कोशिश से होती है। मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा के रहने वाले सुरेंद्र सिंह चौधरी, जिन्हें सोशल मीडिया पर ‘Bittu Tabahi’ के नाम से जाना जाता है, ने इस बात को सच कर दिखाया है। जिस नदी में गंदगी और प्लास्टिक का अंबार देखकर लोग आगे बढ़ जाते थे, उसी नदी में यह युवक खुद उतर गया और सफाई का काम शुरू कर दिया। अजनार नदी की सफाई से शुरू हुई यह मुहिम देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। उनकी मेहनत की चर्चा देशभर में हुई और उद्योगपति आनंद महिंद्रा से लेकर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव तक ने उनके प्रयास की सराहना की। लेकिन कहानी का सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब उनकी मुहिम की चर्चा विदेश तक पहुंची और The Ocean Cleanup के फाउंडर और CEO Boyan Slat ने उन्हें अपनी संस्था के साथ काम करने का न्योता दे दिया।

    कौन हैं ‘Bittu Tabahi’?
    ‘Bittu Tabahi’ का असली नाम सुरेंद्र सिंह चौधरी है। वह मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा क्षेत्र से हैं और पढ़ाई के साथ पर्यावरण को लेकर काम कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर उनके सफाई अभियान के वीडियो सामने आने के बाद लोग उन्हें ‘Bittu Tabahi’ के नाम से पहचानने लगे। उनकी खासियत यह रही कि उन्होंने नदी की खराब हालत देखकर केवल शिकायत नहीं की, बल्कि खुद सफाई के लिए नदी में उतरने का फैसला किया।

    26 जनवरी से शुरू हुई सफाई की मुहिम
    रिपोर्ट्स के मुताबिक सुरेंद्र ने 26 जनवरी 2026 से अजनार नदी की सफाई का काम शुरू किया। नदी में प्लास्टिक की बोतलें, पॉलिथीन, कचरा और काई जैसी गंदगी जमा थी। उन्होंने धीरे-धीरे इसे अपने हाथों से निकालना शुरू किया। शुरुआत में कुछ दोस्तों ने भी उनका साथ दिया, लेकिन बाद में यह जिम्मेदारी लगभग अकेले सुरेंद्र ने संभाल ली। उनका मकसद सिर्फ नदी के किनारे को साफ करना नहीं था, बल्कि लोगों को यह समझाना भी था कि जिस नदी से उन्हें पानी और जीवन मिलता है, उसमें कचरा डालना आखिरकार उसी समाज के लिए नुकसानदायक है।

    अपनी जेब से खर्च किए हजारों रुपये
    इस मुहिम के दौरान सुरेंद्र ने सफाई से जुड़े सामान और डस्टबिन जैसी चीजों पर अपनी जेब से भी पैसा खर्च किया। रिपोर्ट्स में उनके करीब 30 हजार रुपये तक खर्च करने की बात सामने आई है। यानी न कोई बड़ा बजट, न कोई बड़ी टीम और न ही किसी बड़े अभियान का इंतजार। उन्होंने जितना संभव हुआ, उतना खुद किया और लगातार अपने काम के वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करते रहे।

    गंदे पानी और मुश्किलों के बीच भी नहीं छोड़ा काम
    नदी की सफाई करना कैमरे पर जितना आसान दिखाई देता है, असल में उतना ही मुश्किल है। गंदे पानी, कीचड़ और जमा कचरे के बीच घंटों काम करना पड़ता था। रिपोर्ट्स के मुताबिक सुरेंद्र को इस दौरान स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों और संक्रमण जैसी दिक्कतों का भी सामना करना पड़ा। यहां तक कि उन्हें नदी में सांपों का भी सामना करना पड़ा।

    पहले और बाद की तस्वीरों ने खींचा लोगों का ध्यान
    सुरेंद्र अपनी मुहिम के वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट करते रहे। वीडियो में नदी की पहले की हालत और सफाई के बाद आया बदलाव दिखाई देता था। यही तस्वीरें और वीडियो लोगों को सबसे ज्यादा प्रभावित करने लगे। धीरे-धीरे उनकी कहानी सोशल मीडिया पर वायरल हुई और देशभर में लोग उनके बारे में बात करने लगे।

    आनंद महिंद्रा ने भी की तारीफ
    जब सुरेंद्र की कहानी सोशल मीडिया पर तेजी से फैली तो यह उद्योगपति आनंद महिंद्रा तक भी पहुंची। उन्होंने उनके प्रयास की सराहना की और उनकी कहानी को प्रेरणादायक बताया। इसके बाद ‘Bittu Tabahi’ नाम सोशल मीडिया पर और ज्यादा चर्चा में आ गया। एक सामान्य युवा द्वारा अपने आसपास की समस्या के खिलाफ शुरू की गई मुहिम अब हजारों लोगों तक पहुंच चुकी थी।

    CM मोहन यादव से हुई मुलाकात
    सुरेंद्र की मुहिम की चर्चा मध्य प्रदेश सरकार तक भी पहुंची। इसके बाद उनकी मुलाकात मुख्यमंत्री मोहन यादव से हुई। मुख्यमंत्री ने उनके प्रयास की तारीफ की और नदी व जल स्रोतों को बचाने के लिए ऐसे प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया। इस मुलाकात ने सुरेंद्र की मुहिम को एक और बड़ा मंच दिया। लेकिन शायद उन्हें खुद भी अंदाजा नहीं था कि उनकी कहानी जल्द ही भारत की सीमाओं से बाहर जाने वाली है।

    विदेश से आया जिंदगी बदलने वाला ऑफर
    सुरेंद्र की कहानी का सबसे बड़ा मोड़ अब सामने आया है। दुनिया भर में नदियों और समुद्रों से प्लास्टिक प्रदूषण हटाने के लिए काम करने वाली संस्था The Ocean Cleanup के फाउंडर और CEO Boyan Slat ने सुरेंद्र के वीडियो और उनके काम को देखा। उनकी मेहनत से प्रभावित होकर Boyan Slat ने सुरेंद्र को अपनी संस्था के साथ काम करने का न्योता दिया। यानी जिस युवक ने अपने शहर की एक नदी को साफ करने से शुरुआत की थी, अब उसके काम पर दुनिया के एक बड़े पर्यावरण संगठन की नजर पड़ी है।

    हालांकि विदेशी ऑफर के बाद सुरेंद्र आगे क्या फैसला लेते हैं, यह अभी देखना बाकी है। लेकिन इतना जरूर है कि अजनार नदी के किनारे शुरू हुई एक युवक की छोटी-सी मुहिम अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंच चुकी है। और शायद यही इस कहानी की सबसे बड़ी सीख है—बदलाव के लिए हमेशा बड़ी टीम, बड़ा बजट या बड़ा पद जरूरी नहीं होता। कभी-कभी एक इंसान का पहला कदम ही पूरी कहानी बदल देता है।

  • रिटायरमेंट के 23 साल बाद भी फ्री में करते हैं इलाज, दान देते हैं पेंशन… मशहूर डॉ. लहरी के साथ मारपीट का आरोप..

    रिटायरमेंट के 23 साल बाद भी फ्री में करते हैं इलाज, दान देते हैं पेंशन… मशहूर डॉ. लहरी के साथ मारपीट का आरोप..

    रिटायरमेंट के 23 साल बाद भी फ्री में करते हैं इलाज, दान देते हैं पेंशन… मशहूर डॉ. लहरी के साथ मारपीट का आरोप..

    वाराणसी में बीएचयू के मशहूर डॉक्टर टीके लहरी के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आया है. उनके परिजनों ने आरोप लगाया है कि इलाज के दौरान उनके साथ डॉक्टर अरविंद पांडेय ने मारपीट की. परिवार का आरोप है कि इसकी के एक हफ्ते बाद तक भी बीएचयू प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की.

    लाखों मरीजों के जीवन को दान देने वाले गरीबों के मसीहा पद्मश्री तपन कुमार लहरी से कथित मारपीट का आरोप परिजनों ने लगाया है. लेकिन इसकी शिकायत काशी हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति कुल सचिव सहित दर्जनों अधिकारियों को मेल करके दी गई है. अर्जुन ने आरोप लगाया कि 29 अगस्त की घटना है. हफ्ता भर हो जाने के बाद भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है. लोगों को घटना की जानकारी होते ही आक्रोश फैल गया. लोग कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं. वहीं, एसोसिएशन प्रोफेसर ने BHU के ऑफिशियल आईएमएस ग्रुप में शक्ति इस्तेमाल करने की बात की है, जबकि थप्पड़ मारने से इनकार किया है.

    इलाज के दौरान हुआ विवाद- पिछले कई महीने से बीमार होने के कारण डॉ. लहरी को BHU के कार्डियोलॉजिक विभाग के आईसीयू में भर्ती कराया गया था. जहां पर एसोसिएट प्रोफेसर की डॉक्टर लहरी से किसी बात को लेकर विवाद हुआ. जिसके बाद उनके साथ कथित मारपीट का आरोप परिजनों ने लगाया है. परिजनों ने एक फोटो जारी किया है. जिसमें डॉ. लहरी के गालों पर उंगलियों के निशान, आंखों में ब्लड और आंखों के ऊपर काले निशान दिखाई दे रहे हैं.

    आरोपी डॉक्टर पर कार्रवाई की हो रही मांग- डॉ. टीके लहरी के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं. आरोप है कि अस्पताल परिसर में उनके ही विभाग के चिकित्सक डॉ. अरविंद पांडेय ने डॉ. लहरी के साथ मारपीट की. घटना को लेकर शिकायत किए जाने के बावजूद करीब एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी प्राथमिकी दर्ज नहीं होने का आरोप लगाया जा रहा है. टीके लहरी के साथ मारपीट की घटना मीडिया में आने के बाद लोगों में आक्रोश है. इसको लेकर पुलिस में मुकदमा दर्ज करने कार्रवाई की मांग तेज हो गई है.

    BHU प्रशासन की भूमिका पर सवाल- इस पूरे मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. BHU के हृदय विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष एवं सीनरी कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर ओम शंकर ने आरोप लगाया जा रहा है कि BHU प्रशासन आरोपी चिकित्सक के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने के बजाय मामले को टालने का प्रयास कर रहा है. उन्होंने आगे कहा कि एसोसिएशन प्रोफेसर ने खुद आईएमएस के ग्रुप में बताया है कि वह लहरी के साथ सख्ती से पेश आए थे. लेकिन वह इस घटना से इनकार नहीं कर रहे हैं. इसका आशय है कि वह घटना के समय वहां पर थे, इसकी जांच किया जाना चाहिए कि कैसे इतनी गंभीर चोट टीके लहरी को आई है. अगर आईसीयू में सीसीटीवी लगा है तो सारी चीजें सामने आ सकती हैं, अब यह पता लगाना होगा कि सीसीटीवी वहां लगी है कि नहीं?

    रिटायर होने के बाद भी फ्री में करते हैं इलाज- काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) स्थित चिकित्सा संस्थान में पद्मश्री कार्डियोथोरेसिक सर्जन के रूप में कार्यरत 2003 रिटायर्ड है. उसके बाद भी वो लगातार BHU के सर सुंदरलाल अस्पताल में अपनी सेवाएं निशुल्क दे रहे हैं. यही नहीं, डॉक्टर लहरी अपनी पेंशन को भी काशी हिंदू विश्वविद्यालय को दान कर देते हैं. सिर्फ वह अपने खर्चे का पैसा अपने पास रखते हैं.

  • कैफे कारोबार में हुआ नुकसान तो उतरे जुर्म की दुनिया में… पहले वारदात, फिर करते थे पार्टी… लिव-इन में रहने वाले कपल का किस्सा..?

    कैफे कारोबार में हुआ नुकसान तो उतरे जुर्म की दुनिया में… पहले वारदात, फिर करते थे पार्टी… लिव-इन में रहने वाले कपल का किस्सा..?

    कैफे कारोबार में हुआ नुकसान तो उतरे जुर्म की दुनिया में… पहले वारदात, फिर करते थे पार्टी… लिव-इन में रहने वाले कपल का किस्सा..?

    उत्तर प्रदेश के नोएडा में पुलिस ने एक चोर गिरोह का पर्दाफाश किया है. पुलिस ने कपल समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. ये कपल पहले कैफे चलाते थे, लेकिन कारोबार में नुकसान हुआ तो क्राइम का रास्ता अपना लिया. ये गिरोह पहले चोरी करते थे, उसके बाद बार-रेस्तरां में पार्टी करते थे.

    उत्तर प्रदेश के नोएडा में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. एक प्रेमी जोड़ा पहले कैफे चलाता था. लेकिन जब कारोबार में नुकसान हुआ तो इस कपल ने अपराध का रास्ता चुन लिया. ये कपल चोरी की वारदातों को अंजाम देने लगा. अब प्रेमी जोड़े समेत 3 लोग पुलिस की गिरफ्त में हैं.

    प्रेमी युगल समेत 3 गिरफ्तार- कैफे के कारोबार में नुकसान होने के बाद चोरी की वारदातों को अंजाम देने वाले एक प्रेमी जोड़े समेत तीन आरोपियों को नोएडा पुलिस ने गिरफ्तार किया है. थाना सेक्टर-113 पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चोरी की ज्वेलरी, 3.5 लाख रुपये नकद, पांच लैपटॉप, दो टैबलेट, छह मोबाइल फोन और वारदात में इस्तेमाल की जाने वाली एक अर्टिगा कार बरामद की है. कार पर कथित तौर पर फर्जी नंबर प्लेट लगी हुई थी.

    एडीसीपी मनीषा सिंह ने बताया कि आरोपियों की पहचान कैलाश उर्फ दिवाकर, इरफान उर्फ इमरान और सोनाली के रूप में हुई है. पुलिस ने तीनों आरोपियों को सेक्टर-123 स्थित श्मशान घाट के पास से गिरफ्तार किया.

    बंद पड़े घरों को बनाते थे निशाना- पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि आरोपी अर्टिगा कार में सवार होकर शहर के हाईराइज सोसाइटी और अन्य इलाकों में मकानों की रेकी करते थे. इसके बाद बंद पड़े घरों को निशाना बनाकर ज्वेलरी, नकदी, लैपटॉप और अन्य कीमती सामान चोरी कर लेते थे. फिर चोरी किए गए सामान और नकदी को तीनों आरोपी आपस में बांट लेते थे.

    लिव-इन रिलेशन में रहते थे दो चोर- पुलिस जांच में सामने आया कि दिवाकर और सोनाली प्रेमी-प्रेमिका हैं और लिव-इन रिलेशनशिप में रहते हैं. पुलिस के अनुसार, सोनाली गैंग को लीड करने और रेकी के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थी, जबकि दिवाकर और उनका साथी इरफान चोरी की वारदातों को अंजाम देने में शामिल थे.

    कैफे कारोबार में नुकसान ने बनाया चोर- पुलिस के अनुसार, प्रेमी जोड़े ने पहले गाजियाबाद और बाद में नोएडा में कैफे का कारोबार किया था. कैफे के बिजनेस में नुकसान होने के बाद दोनों आर्थिक संकट में आ गए और इसके बाद चोरी की घटनाओं को अंजाम देने लगे. जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी दिन के समय चोरी की वारदातों को अंजाम देते थे और रात में रेस्तरां और बार में पार्टी करते थे.

    लैपटॉप, टैबलेट, फोन, कैश बरामद- पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चोरी की ज्वेलरी के अलावा पांच लैपटॉप, दो टैबलेट, छह मोबाइल फोन और 3.5 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं. इसके अलावा चोरी की घटनाओं में इस्तेमाल की जाने वाली अर्टिगा कार को भी कब्जे में लिया गया है. फिलहाल अब थाना सेक्टर-113 पुलिस आरोपियों के आपराधिक इतिहास और उनसे जुड़े अन्य चोरी के मामलों की जांच कर रही है.

  • आपको भी किताब खोलते ही आती है नींद? तो सुस्त या आलसी नहीं आप… ये 5 बातें भी हो सकती है कारण.

    आपको भी किताब खोलते ही आती है नींद? तो सुस्त या आलसी नहीं आप… ये 5 बातें भी हो सकती है कारण.

    आपको भी किताब खोलते ही आती है नींद? तो सुस्त या आलसी नहीं आप… ये 5 बातें भी हो सकती है कारण.

    कई लोगों के साथ होता है कि जैसे ही वह किताब खोलते हैं, उन्हें नींद आने लगती है. ऐसे में लोग कहते हैं कि ये तो आलसी है, पढ़ना ही नहीं चाहता. लेकिन दरअसल कई बार कुछ ऐसी वजह भी होती हैं, जो पढ़ाई और नींद के बीच कनेक्शन बनकर सामने आती है.

    अक्सर लोग जैसे ही पढ़ाई करने बैठते हैं, उन्हें नींद आने लगती है. यह कोई नई नहीं, बल्कि आम बात है. कई बार स्टूडेंट्स पूरे मन से पढ़ाई करना शुरू करते हैं. लेकिन कुछ देर बाद आंखें भारी होने लगती हैं. किताब सामने होती है, लेकिन ध्यान पढ़ाई से हटने लगता है. लेकिन किताबों और नींद के बीच का कनेक्शन आखिर क्या है?

    दिमाग पर बढ़ने लगता है प्रेशर

    जब हम लंबे समय तक पढ़ाई करते हैं तो हमारा दिमाग लगातार एक्टिवली काम करता रहता है. खासकर जब कोई नया और टफ सब्जेक्ट समझना हो, तब दिमाग को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. लगातार ध्यान लगाने से लोग मेंटली थक जाते हैं. इसका असर नींद और सुस्ती के रूप में दिखाई दे सकता है.

    सिर्फ रट्टू तोता बनना भी है परेशानी

    अगर आप लंबे समय तक केवल किताब पढ़ते हैं और खुद से सवाल नहीं करते, तो पढ़ाई थोड़ी बोरिंग लग सकती है. ऐसी पढ़ाई में दिमाग की एक्टिवनेस कम हो सकती है. इसी वजह से नींद आने लगती है. पढ़ाई को मजेदार बनाने के लिए जरूरी बातें लिखें, खुद से सवाल पूछें और पढ़े हुए टॉपिक को अपनी लैंग्वेज में समझाने की कोशिश करें.

    जगह का भी पड़ता है असर

    कई बार बिस्तर पर बैठकर या लेटकर पढ़ने से भी नींद जल्दी आ सकती है. बहुत आरामदायक जगह शरीर को आराम करने का इशारा देती है. इससे दिमाग पढ़ाई के बजाय आराम और नींद की तरफ जाने लगता है. इसलिए पढ़ाई के लिए टेबल और कुर्सी जैसी जगह बेहतर रहती है. ऐसी जगह बैठकर जब आप पढ़ते हैं, तो कमर सीधी रहते हैं, पोस्चर भी ठीक होता है और नींद भी नहीं आती.

    पढ़ाई के लिए नींद पूरी करना है जरूरी

    अगर रात में आपकी नींद पूरी नहीं हुई है तो दिन में पढ़ाई करते समय नींद आना आम बात है. लगातार कम सोने से शरीर की थकान जमा होती रहती है. इसका असर ध्यान लगाने और नई चीजें याद रखने की पावर पर साफ तौर पर दिखाई देता है. इसलिए एग्जाम की तैयारी के दौरान रातभर जागने के बजाय अच्छी नींद लेना जरूरी है.

    टेंशन हैं एक बड़ी वजह

    कई बार पढ़ाई का प्रेशर और एग्जाम की टेंशन भी शरीर और दिमाग को थका सकती है. कई बार टेंशन के कारण व्यक्ति खुद को लगातार थका हुआ महसूस करता है. ऐसे में किताब खोलते ही ध्यान लगाने में परेशानी हो सकती है और नींद आने लगती है.

  • भगवान कृष्ण को क्यों माना जाता है सबसे अच्छा मित्र? कैसे बनाएं उन्हें अपना दोस्त…?

    भगवान कृष्ण को क्यों माना जाता है सबसे अच्छा मित्र? कैसे बनाएं उन्हें अपना दोस्त…?

    भगवान कृष्ण को क्यों माना जाता है सबसे अच्छा मित्र? कैसे बनाएं उन्हें अपना दोस्त…?

    भगवान कृष्ण को मित्रता निभाने के लिए जाना जाता है. अर्जुन, सुदामा और उद्धव के साथ उनकी मित्रता काफी खास और गहरी थी. जानें कृष्ण से सच्चे दोस्त की तरह जुड़ने का आसान तरीका.

    भगवान कृष्ण को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है. मान्यता है कि कृष्ण अपने इस अवतार में सोलह कलाओं से पूर्ण थे. कृष्ण नाम का एक अर्थ ऐसा भी माना जाता है, जो पूरी सृष्टि को अपनी ओर आकर्षित करता है. उनके जीवन और व्यक्तित्व ने सच में लोगों को अपनी ओर खींचा. उन्होंने अलग-अलग रूपों में अपने भक्तों का साथ दिया और उनकी मनोकामनाएं पूरी कीं. इन सभी रूपों में मित्र के रूप में भगवान कृष्ण का स्वरूप सबसे अधिक करीब और अपनापन देने वाला माना जाता है.

    कृष्ण के साथ मित्रता का रिश्ता क्यों है खास?

    भगवान कृष्ण ने अपने जीवन में कई लोगों के साथ मित्रता निभाई. इनमें अर्जुन, उद्धव और सुदामा का नाम सबसे खास है. इन तीनों के साथ उनकी दोस्ती अलग-अलग रूप में दिखाई देती है. उद्धव के साथ कृष्ण की मित्रता ने जीवन और उसके सत्य को समझने का रास्ता दिखाया. वहीं सुदामा के साथ उनकी दोस्ती प्रेम और अपनापन की मिसाल बन गई. सुदामा जब कृष्ण से मिलने पहुंचे तो कृष्ण ने बिना किसी भेदभाव के अपने मित्र का स्वागत किया और उनकी गरीबी दूर कर दी.

    अर्जुन के साथ कृष्ण की मित्रता तो पूरी दुनिया के लिए ज्ञान का माध्यम बन गई. महाभारत के युद्ध के समय कृष्ण ने अर्जुन का मार्गदर्शन किया और उन्हें श्रीमद्भगवद्गीता का ज्ञान दिया. इस तरह कृष्ण के साथ मित्रता केवल प्रेम और भक्ति तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह ज्ञान और मुक्ति का रास्ता भी बनी.

    भगवान कृष्ण से मित्रता कैसे करें?

    कृष्ण को अपना मित्र बनाने के लिए सबसे जरूरी चीज ईमानदारी है. जिस तरह हम अपने सबसे अच्छे दोस्त से अपने मन की बात खुलकर कहते हैं, उसी तरह कृष्ण से भी अपनी परेशानियां, दुख और सुख साझा किए जा सकते हैं. उनसे बात करते समय मन में किसी तरह का दिखावा नहीं होना चाहिए.

    अपनी समस्याएं कृष्ण के सामने रखने के बाद मन को शांत करें और अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनें. जो समाधान भीतर से सही लगे, उसे स्वीकार करने की कोशिश करें. कृष्ण के साथ मित्रता का अर्थ अपनी हर इच्छा पूरी करवाना नहीं है. इस रिश्ते में विश्वास, सच्चाई और प्रेम होना जरूरी है.

    कृष्ण को मित्र बनाने का संदेश

    भगवान कृष्ण के साथ मित्रता हमें सिखाती है कि सच्चा मित्र वही है जो मुश्किल समय में सही रास्ता दिखाए. इसलिए कृष्ण को केवल भगवान के रूप में नहीं, बल्कि अपने सच्चे मित्र के रूप में याद करना भी मन को शांति और जीवन को सही दिशा दे सकता है.

  • डिलीवरी बॉय बना फरिश्ता, -20 डिग्री के फ्रीजर में फंसी थी महिला; जान बचाने वाले को मिला कंपनी में हिस्सा.

    डिलीवरी बॉय बना फरिश्ता, -20 डिग्री के फ्रीजर में फंसी थी महिला; जान बचाने वाले को मिला कंपनी में हिस्सा.

    डिलीवरी बॉय बना फरिश्ता, -20 डिग्री के फ्रीजर में फंसी थी महिला; जान बचाने वाले को मिला कंपनी में हिस्सा.

    कहते हैं कि सही समय पर की गई छोटी सी मदद किसी की जिंदगी बचा सकती है। चीन से सामने आई एक ऐसी ही घटना इन दिनों चर्चा में है, जहां एक डिलीवरी बॉय ने अपनी सूझबूझ और हिम्मत दिखाते हुए एक महिला की जान बचा ली। महिला एक बेहद ठंडे फ्रीजर के अंदर फंस गई थी और बाहर निकलने का कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था। मदद करने वाले डिलीवरी बॉय को महिला ने बाद में ऐसा इनाम देने का फैसला किया, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।

    सामान की छंटाई के दौरान फ्रीजर में फंसी महिला

    मामला चीन के हुनान प्रांत का बताया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, चेन नाम की एक महिला अपनी कोल्ड-चेन लॉजिस्टिक्स कंपनी के फ्रीजर में सामान की जांच और छंटाई कर रही थी।

    महिला ने फ्रीजर का दरवाजा खोलकर अंदर काम करना शुरू किया था, लेकिन इसी दौरान दरवाजा अचानक लॉक हो गया। अंदर मौजूद बैकअप स्विच भी काम नहीं कर रहा था। सबसे बड़ी परेशानी यह थी कि महिला के पास मोबाइल फोन भी नहीं था, जिससे वह किसी को तुरंत मदद के लिए बुला सके।

    अंदर का तापमान था करीब -20 डिग्री

    जिस फ्रीजर में महिला फंसी थी, उसका तापमान लगभग -20 डिग्री सेल्सियस बताया गया है। महिला गर्मियों के कपड़ों में थी, इसलिए ठंड बढ़ने के साथ उसकी हालत लगातार खराब होने लगी।

    उसने बाहर निकलने के लिए आवाज लगाने और दरवाजा खटखटाने की कोशिश की, लेकिन शुरुआत में उसकी आवाज किसी तक नहीं पहुंची। काफी देर तक मदद का इंतजार करने के बाद उसकी परेशानी और बढ़ने लगी।

    डिलीवरी बॉय ने सुन ली मदद की आवाज

    इसी दौरान डिलीवरी बॉय लियू जू वहां से गुजर रहा था। बताया जाता है कि उसने फ्रीजर के अंदर से आने वाली आवाज सुनी। वह तुरंत वहां पहुंचा और महिला को बाहर निकालने की कोशिश शुरू कर दी।

    करीब 20 मिनट की मशक्कत के बाद वह फ्रीजर का दरवाजा खोलने में सफल रहा और महिला को बाहर निकाल लिया। बाहर आने के बाद महिला ठंड से बुरी तरह कांप रही थी। सामान्य स्थिति में लौटने में उसे करीब दो घंटे का समय लगा।

    महिला ने दिया ऐसा इनाम, सुनकर हर कोई हैरान

    जान बचने के बाद महिला ने डिलीवरी बॉय लियू जू का आभार जताया। उसने कहा कि अगर लियू ने समय रहते उसकी आवाज नहीं सुनी होती तो उसकी जान जा सकती थी।

    महिला ने अपनी कृतज्ञता जताने के लिए लियू को अपनी कंपनी में हिस्सेदारी देने का ऐलान किया। एक साधारण डिलीवरी बॉय के लिए यह सम्मान और इनाम बेहद खास माना जा रहा है।

    यह घटना सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है। कहानी यह भी दिखाती है कि किसी मुश्किल परिस्थिति में समय पर की गई मदद कितनी महत्वपूर्ण हो सकती है।

  • इस छोटे से देश के PM को मिलती है सबसे ज्यादा सैलरी..?

    इस छोटे से देश के PM को मिलती है सबसे ज्यादा सैलरी..?

    इस छोटे से देश के PM को मिलती है सबसे ज्यादा सैलरी..?

    सिंगापुर सरकार ने प्रधानमंत्री, मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की सैलरी बढ़ाने का फैसला किया है. इस फैसले के बाद प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग की सालाना कमाई में बड़ा इजाफा होने जा रहा है. नई व्यवस्था लागू होने के बाद उनका सालाना पैकेज करीब 36 लाख सिंगापुर डॉलर यानी लगभग 27 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है.

    फिलहाल वोंग को करीब 22 लाख सिंगापुर डॉलर, यानी लगभग 16 करोड़ रुपये सालाना मिलते हैं. प्रस्तावित बढ़ोतरी के बाद उनकी कमाई में 60 फीसदी से ज्यादा का इजाफा होगा. इससे सिंगापुर के प्रधानमंत्री दुनिया में सबसे ज्यादा वेतन पाने वाले राजनीतिक नेताओं में और ऊपर पहुंच जाएंगे.

    मंत्रियों की सैलरी भी बढ़ेगी

    सिर्फ प्रधानमंत्री ही नहीं, बल्कि सिंगापुर के मंत्रियों के वेतन में भी बढ़ोतरी की गई है. अभी एक मंत्री को करीब 11 लाख सिंगापुर डॉलर यानी लगभग 8.20 करोड़ रुपये सालाना मिलते हैं. नई व्यवस्था में यह राशि करीब 12 लाख सिंगापुर डॉलर यानी लगभग 8.95 करोड़ रुपये हो जाएगी.

    प्रधानमंत्री वोंग के मुताबिक, मौजूदा सरकार का कार्यकाल पूरा होने तक ज्यादातर मंत्रियों की सालाना कमाई करीब 13.5 लाख सिंगापुर डॉलर यानी लगभग 10 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है. खास बात यह है कि वेतन का कुछ हिस्सा सरकार के प्रदर्शन से भी जुड़ा रहेगा. यानी रोजगार बढ़ाने, लोगों की आय में सुधार और GDP ग्रोथ जैसे तय लक्ष्यों को हासिल करने पर मंत्रियों को कई लाभ मिल सकते है.

    भ्रष्टाचार रोकने में मददगार है ज्यादा सैलरी

    सिंगापुर सरकार लंबे समय से अपने नेताओं को ऊंची सैलरी देने की नीति का समर्थन करती रही है. सरकार का तर्क है कि अगर मंत्रियों को अच्छा वेतन दिया जाए, तो राजनीति में प्रतिभाशाली और योग्य लोग आने के लिए आकर्षित होंगे. साथ ही इससे भ्रष्टाचार से दूरी बनाए रखने में भी मदद मिल सकती है. सिंगापुर को दुनिया के कम भ्रष्ट देशों में गिना जाता है और सरकार अपनी वेतन व्यवस्था को इसके पीछे के महत्वपूर्ण कारणों में से एक मानती है.

    आम लोगों के बीच उठे सवाल

    हालांकि, इतनी बड़ी सैलरी बढ़ोतरी को लेकर देश में बहस भी शुरू हो गई है. आम नागरिकों की आय नेताओं के मुकाबले काफी कम है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, सिंगापुर में औसत सालाना आय करीब 5,775 सिंगापुर डॉलर यानी लगभग 4.30 लाख रुपये बताई गई है.

    सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि महंगाई, रोजगार और युवाओं की नौकरी जैसी समस्याओं पर ज्यादा ध्यान दिया जाना चाहिए. वहीं, कुछ लोग इस फैसले के समर्थन में भी हैं. उनका मानना है कि देश की जिम्मेदारी संभालने वाले लोगों को उनकी क्षमता और जिम्मेदारी के अनुरूप वेतन मिलना जरूरी है. हालाकि,  यह खबर भी सोशल मीडिया पर उपलब्ध जानकारी पर आधारित है

    Satareport.com इस से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता है.

  • रात में बिस्तर पर बदलते रहते हैं करवट? जल्दी नहीं आती नींद… तो आज से ही अपनाएं ये 5 आसान आदतें

    रात में बिस्तर पर बदलते रहते हैं करवट? जल्दी नहीं आती नींद… तो आज से ही अपनाएं ये 5 आसान आदतें

    रात में बिस्तर पर बदलते रहते हैं करवट? जल्दी नहीं आती नींद… तो आज से ही अपनाएं ये 5 आसान आदतें

    रात में जल्दी नींद नहीं आती तो अपनी कुछ आदतों में बदलाव करना जरूरी है. बेहतर नींद के लिए रोज एक समय पर सोना, सोने से पहले मोबाइल से दूरी बनाना और कमरे को शांत रखना मददगार हो सकता है. नींद का पूरा न होना शरीर पर गलत प्रभाव डाल सकता है.

    आजकल बहुत से लोग रात में बिस्तर पर जाने के बाद भी जल्दी सो नहीं पाते. फोन चलाना, देर रात तक काम करना और सोने का समय बदलते रहना जैसे कारण नींद पर असर डाल सकते हैं. अच्छी नींद, शरीर और दिमाग दोनों के लिए जरूरी है. कुछ आसान आदतों को रोज के लाइफस्टाइल में शामिल करने से नींद की क्वालिटी को बढ़ाया जा सकता है.

    नींद का बनाएं तय समय

    अच्छी नींद के लिए सोने और उठने का समय तय रखना मददगार हो सकता है. कोशिश करें कि रोज लगभग एक ही समय पर बिस्तर पर जाएं और सुबह भी तय समय के आसपास उठें. इससे शरीर को सोने का एक नियमित समय समझने में मदद मिलती है.

    सोने से पहले फोन से बनाएं दूरी

    रात में बिस्तर पर लेटकर मोबाइल चलाने की आदत नींद में देरी कर सकती है. फोन, टीवी और कंप्यूटर की तेज रोशनी दिमाग को जागने का संकेत दे सकती है. इसलिए सोने से पहले कुछ समय स्क्रीन से दूर रहना बेहतर है.

    रात में दिमाग को दें आराम

    अगर सोने के समय दिमाग में दिनभर की बातें चलती रहती हैं, तो नींद आने में परेशानी हो सकती है. सोने से पहले खुद को शांत करने की कोशिश करें. हल्की किताब पढ़ना, शांत बैठना या आराम से सांस लेना जैसी आसान आदतें मदद कर सकती हैं.

    सोने का माहौल आरामदायक रखें

    बेडरूम में ज्यादा रोशनी और शोर नींद को प्रभावित कर सकते हैं. इसलिए कमरे को शांत और आरामदायक रखें. बिस्तर का इस्तेमाल मुख्य रूप से सोने के लिए करें. इससे दिमाग को आराम और नींद के बीच बेहतर संबंध बनाने में मदद मिल सकती है.

    देर रात की आदतों पर दें ध्यान

    सोने से ठीक पहले बहुत भारी खाना, ज्यादा कैफीन लेना या लंबे समय तक स्क्रीन देखना नींद में परेशानी पैदा कर सकता है. रात की लाइफस्टाइल को जितना सरल और शांत रखेंगे, शरीर को आराम मिलने में उतनी आसानी हो सकती है.

  • क्यों खास हैं भगवान कृष्ण के ये 3 अस्त्र? सुदर्शन चक्र, बांसुरी और सम्मोहन… क्या है इन तीनों की महिमा?

    क्यों खास हैं भगवान कृष्ण के ये 3 अस्त्र? सुदर्शन चक्र, बांसुरी और सम्मोहन… क्या है इन तीनों की महिमा?

    क्यों खास हैं भगवान कृष्ण के ये 3 अस्त्र? सुदर्शन चक्र, बांसुरी और सम्मोहन… क्या है इन तीनों की महिमा?

    श्री कृष्ण कई चमत्कारी अस्त्र हैं. भगवान कृष्ण के सबसे प्रभावशाली अस्त्र सुदर्शन चक्र, बांसुनी और सम्मोहन है. जानिए कौन सा अस्त्र जीवन में मधुरता लाता है.

    भगवान कृष्ण को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है. श्री हरि के अवतारों में कृष्ण को पूर्ण अवतार माना गया है. उनके जीवन में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिनसे उनकी दिव्य शक्ति का पता चलता है. कृष्ण अपने हर रूप से भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं. यही कारण है कि उन्हें कृष्ण कहा जाता है. मान्यता है कि वे भक्तों के दुख दूर करके उन्हें मुक्ति और मोक्ष का रास्ता दिखाते हैं.

    श्रीकृष्ण के पास कई अस्त्र और शक्तियां थीं. लेकिन इनमें सुदर्शन चक्र, बांसुरी और सम्मोहन को खास माना जाता है. मान्यता है कि कृष्ण ने इनका सही समय पर उपयोग करके अधर्म का नाश किया और धर्म की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

    सुदर्शन चक्र क्या है?

    सुदर्शन चक्र को भगवान कृष्ण का सबसे शक्तिशाली अस्त्र माना जाता है. चक्र एक खास तरह का हथियार है, जिसका कई देवी-देवताओं से संबंध बताया जाता है. मान्यता के अनुसार सुदर्शन चक्र बेहद शक्तिशाली है और श्रीकृष्ण इसे धारण करते थे.

    कहा जाता है कि सुदर्शन चक्र का निर्माण भगवान शिव ने किया था. इसे एक ऐसे चक्र के रूप में भी समझा जाता है, जो लक्ष्य पर प्रहार करने के बाद वापस लौट आता है. सुदर्शन चक्र को श्रीहरि के प्रतीक के रूप में भी पूजा जाता है. धार्मिक मान्यता है कि घर के मुख्य द्वार पर शंख और चक्र की आकृति लगाने से नकारात्मक प्रभाव और दुर्घटनाओं से रक्षा होती है.

    भगवान कृष्ण की बांसुरी की क्या महिमा है?

    कृष्ण को संगीत और कला का भी बड़ा ज्ञाता माना जाता है. उनकी बांसुरी उनके व्यक्तित्व का सबसे प्यारा प्रतीक है. बांस से बनी बांसुरी में हवा के जरिए मधुर आवाज निकलती है. कृष्ण की बांसुरी की धुन से जुड़ी कई धार्मिक मान्यताएं हैं.

    मान्यता है कि बांसुरी की मधुर ध्वनि आसपास की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करती है. बांसुरी के छेदों को शरीर के चक्रों से भी जोड़ा जाता है. जन्माष्टमी पर कृष्ण को बांसुरी अर्पित करने से संतान सुख मिलने की मान्यता है. घर में बांसुरी रखने को भी शुभ माना जाता है.

    क्या है कृष्ण का सम्मोहन?

    सम्मोहन का अर्थ किसी व्यक्ति के मन और सोच को विशेष तरीके से प्रभावित करना माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं में भगवान कृष्ण के पास अद्भुत सम्मोहन शक्ति होने की बात कही जाती है. महाभारत में जयद्रथ वध की घटना को इसका उदाहरण माना जाता है.

    कृष्ण की भक्ति करने वाले लोगों में भी आकर्षण और प्रभाव बढ़ने की मान्यता है. हालांकि, किसी भी शक्ति का गलत इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. शक्ति का सही उद्देश्य हमेशा धर्म, भलाई और दूसरों की सहायता होना चाहिए.

    तीनों शक्तियों का महत्व

    सुदर्शन चक्र कृष्ण की शक्ति का, बांसुरी उनके प्रेम और मधुरता का, जबकि सम्मोहन उनके प्रभाव का प्रतीक माना जाता है. यही तीनों रूप भगवान कृष्ण के अलग-अलग गुणों को सामने लाते हैं.