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  • सौंदर्य ही नहीं सेहत और किस्मत भी संवारता है ‘सोलह श्रृंगार’, जानें सिंदूर से बिछिया तक सभी 16 चीजों का धार्मिक व ज्योतिषीय महत्व.

    सौंदर्य ही नहीं सेहत और किस्मत भी संवारता है ‘सोलह श्रृंगार’, जानें सिंदूर से बिछिया तक सभी 16 चीजों का धार्मिक व ज्योतिषीय महत्व.

    सौंदर्य ही नहीं सेहत और किस्मत भी संवारता है ‘सोलह श्रृंगार’, जानें सिंदूर से बिछिया तक सभी 16 चीजों का धार्मिक व ज्योतिषीय महत्व.

    भारतीय परंपरा में ‘सोलह श्रृंगार’ केवल रूप-सौंदर्य तक सीमित नहीं है. धार्मिक व ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, सिर से पैर तक धारण किए जाने वाले ये आभूषण ग्रहों को मजबूती प्रदान करते हैं, सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाते हैं और सेहत को संतुलित रखते हैं.

    हर महिला की एक ख्वाहिश होती है कि वह सुंदर और आकर्षक नजर आए. अपने रूप को निखारने के लिए वह कई तरह के श्रृंगार करती है, लेकिन भारतीय संस्कृति में श्रृंगार का मतलब सिर्फ सुंदर दिखना नहीं है. महिला और श्रृंगार का रिश्ता शारीरिक सुंदरता तक सीमित नहीं माना गया है, बल्कि इसका संबंध भारतीय संस्कृति, परंपरा और स्वास्थ्य से भी जुड़ा हुआ है. ज्योतिष के जानकारों की मानें तो महिलाओं के श्रृंगार का उनकी किस्मत से भी सीधा संबंध माना जाता है. कहा जाता है कि श्रृंगार करने से ग्रहों को मजबूती मिलती है और जीवन में खुशियों का संचार होता है.

    इसी वजह से सनातन परंपरा में सोलह श्रृंगार को सुहागिन महिलाओं के लिए खास माना गया है. मान्यता है कि इन सोलह श्रृंगारों से न सिर्फ रूप-सौंदर्य में निखार आता है, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और नकारात्मक ऊर्जा से भी रक्षा होती है. तो आइए जानते हैं सोलह श्रृंगार में शामिल उन खास चीजों के बारे में, जिन्हें लेकर मान्यताएं प्रचलित है.

    सुहागिनों का खास आभूषण है सोलह श्रृंगार भारतीय संस्कृति में सोलह श्रृंगार को विवाहित स्त्री के सुहाग और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है. सोलह तरह की ये श्रृंगार सामग्री अलग-अलग आभूषणों और वस्तुओं के रूप में होती है, जिन्हें सौभाग्यवती महिलाएं धारण करती हैं. मान्यता है कि सिर से लेकर पैर तक किए जाने वाले इन श्रृंगारों का संबंध महिला के रूप-सौंदर्य के साथ-साथ शरीर के संतुलन से भी है. इसी वजह से सोलह श्रृंगार को केवल सजने-संवरने की चीज नहीं माना गया है.

    सिंदूर पति के प्रेम और समर्पण का प्रतीक सोलह श्रृंगार में सिंदूर का अपना खास स्थान माना जाता है. इसे पति के प्रेम और समर्पण का प्रतीक माना जाता है. मान्यता है कि सिंदूर मस्तिष्क को शांत रखने में भी मदद करता है. सुहागिन महिलाओं के लिए सिंदूर को उनके वैवाहिक जीवन और सुहाग से जोड़कर देखा जाता है.

    बिंदी आज्ञा चक्र से जुड़ी मान्यता माथे के बीचों-बीच लगाई जाने वाली बिंदी भी सोलह श्रृंगार का अहम हिस्सा है. इसे दोनों भौहों के बीच लगाया जाता है. मान्यता है कि भौहों के बीच का यह स्थान आज्ञा चक्र से जुड़ा होता है और बिंदी इसे जागृत करने में सहायक मानी जाती है.

    मांग टीका मन को एकाग्र करने वाला श्रृंगार मांग के बीचों-बीच पहना जाने वाला मांग टीका भी महिलाओं के श्रृंगार को पूरा करता है. इसे सिर्फ खूबसूरती बढ़ाने वाला आभूषण नहीं माना जाता. मान्यता के अनुसार, मांग टीका मन को नियंत्रित करने और एकाग्रता बढ़ाने से जुड़ा है.

    काजल से बढ़ता है आंखों का सौंदर्य आंखों की खूबसूरती बढ़ाने के लिए काजल लगाया जाता है. इससे आंखों का आकर्षण और बढ़ जाता है. मान्यता है कि काजल महिलाओं को बुरी नजर से भी बचाता है. यही वजह है कि इसे भी पारंपरिक श्रृंगार का खास हिस्सा माना गया है.

    नथ चेहरे की खूबसूरती में लगाती है चार चांद नाक में पहनी जाने वाली नथ महिला के चेहरे की सुंदरता को और बढ़ाती है. इसे खासतौर पर सुहागिनों के पारंपरिक श्रृंगार से जोड़कर देखा जाता है. मान्यता के अनुसार, नथ पहनने से पीड़ा में राहत मिलती है. इसके साथ ही यह चेहरे के रूप-सौंदर्य को भी निखारती है.

    झुमके सुंदरता के साथ एक्यूप्रेशर से जुड़े कानों में पहने जाने वाले झुमके चेहरे की सुंदरता बढ़ाने वाले आभूषणों में शामिल हैं. पारंपरिक रूप से यह महिलाओं के श्रृंगार का अहम हिस्सा रहे हैं. मान्यता है कि झुमके एक्यूप्रेशर के माध्यम से भी लाभ पहुंचाते हैं. इसी वजह से इन्हें सिर्फ आभूषण नहीं, बल्कि श्रृंगार की खास सामग्री माना जाता है.

    मंगलसूत्र पति-पत्नी के अटूट रिश्ते का प्रतीक मंगलसूत्र को पति-पत्नी के अटूट बंधन का प्रतीक माना जाता है. विवाहित महिलाओं के लिए इसका धार्मिक और पारंपरिक महत्व खास है. मान्यता है कि मंगलसूत्र सकारात्मक ऊर्जा से भरा होता है. इसे वैवाहिक जीवन और पति के साथ रिश्ते मजबूत होते हैं.

    बाजूबंद रक्त संचार से जुड़ा है भुजाओं में पहना जाने वाला बाजूबंद भी सोलह श्रृंगार में शामिल माना जाता है. यह महिलाओं की पारंपरिक पोशाक और श्रृंगार को और आकर्षक बनाता है. मान्यता के अनुसार, बाजूबंद रक्त संचार को नियमित रखने में सहायक होता है.

    मेहंदी सौभाग्य और प्रेम का प्रतीक हाथों और पैरों में रचाई जाने वाली मेहंदी महिलाओं के श्रृंगार को खास बना देती है. इसे सौभाग्य और प्रेम का प्रतीक माना जाता है. मेहंदी की ठंडक को तनाव दूर करने में सहायक माना जाता है. यही कारण है कि त्योहारों और खास मौकों पर महिलाओं के श्रृंगार में मेहंदी की खास जगह होती है.

    चूड़ियां खुशहाली और ऊर्जा का प्रतीक हाथों में खनकती चूड़ियां महिलाओं के श्रृंगार की पहचान मानी जाती हैं. इन्हें खुशहाली, सौभाग्य और ऊर्जा के संचार से जोड़कर देखा जाता है. मान्यता है कि चूड़ियां रक्त संचार को बेहतर बनाने में भी सहायक होती हैं.

    अंगूठी प्रेम और विश्वास का बंधन उंगली में पहनी जाने वाली अंगूठी प्रेम और विश्वास के बंधन को दर्शाती है. सोलह श्रृंगार में इसका भी खास महत्व बताया गया है. मान्यता के अनुसार, तर्जनी या अनामिका उंगली में पहनी जाने वाली अंगूठी रक्त संचार को सुधारने में सहायक होती है.

    कमरबंद शरीर की ऊर्जा को संतुलित करता है कमर में पहना जाने वाला कमरबंद भी महिलाओं के पारंपरिक श्रृंगार का हिस्सा है. यह आभूषण सुंदरता बढ़ाने के साथ शरीर के पोस्चर से भी जुड़ा माना जाता है. मान्यता है कि कमरबंद शरीर का पोस्चर सही रखने और शरीर में ऊर्जा को संतुलित करने में मदद करता है.

    पायल की मधुर आवाज भी है खास पैरों में पहनी जाने वाली चांदी की पायल चलने पर मधुर ध्वनि पैदा करती है. यही ध्वनि इसे महिलाओं के श्रृंगार में अलग पहचान देती है. मान्यता है कि चांदी शरीर की गर्मी को सोखती है और रक्त प्रवाह को संतुलित रखने में सहायक होती है.

    बिछिया हार्मोनल संतुलन से जुड़ी मान्यता पैरों की उंगलियों में पहनी जाने वाली बिछिया भी सोलह श्रृंगार का हिस्सा मानी जाती है. खासतौर पर विवाहित महिलाओं के पारंपरिक श्रृंगार में इसका महत्व बताया गया है. मान्यता के अनुसार, बिछिया महिलाओं में हार्मोनल संतुलन बनाए रखने और मासिक चक्र को नियमित रखने में सहायक होती है.

    गजरा देता है खुशबू और ताजगी बालों में लगाया जाने वाला गजरा प्राकृतिक सुगंध और ताजगी प्रदान करता है. फूलों से बनी इसकी खुशबू पूरे श्रृंगार को और आकर्षक बना देती है. मान्यता है कि गजरे की प्राकृतिक सुगंध स्नायु तंत्र को शांत करती है. इससे मन प्रसन्न और ऊर्जावान बना रहता है.

    शुभ रंगों के वस्त्र भी हैं श्रृंगार का हिस्सा सोलह श्रृंगार को पूरा करने के लिए विशेष परिधान भी पहने जाते हैं. महिलाएं लाल, गुलाबी या पीले रंग के शुभ वस्त्र पहन सकती हैं. इन रंगों के वस्त्रों को भी पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है और महिला के पूरे श्रृंगार में इनका खास स्थान बताया गया है.

    सोलह श्रृंगार से जुड़ी हैं कई मान्यताएं इस तरह सोलह श्रृंगार में शामिल हर सामग्री के साथ अपनी-अपनी मान्यताएं जुड़ी हुई हैं. कहीं इसे पति के प्रेम और वैवाहिक रिश्ते का प्रतीक माना जाता है तो कहीं स्वास्थ्य, सकारात्मक ऊर्जा, सौभाग्य और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है. ज्योतिष के जानकारों के मुताबिक, महिलाओं का श्रृंगार उनकी किस्मत को संवारने में भी भूमिका निभा सकता है. मान्यता है कि इससे ग्रहों को मजबूती मिलती है और जीवन में खुशियों का संचार होता है.

  • जगन्नाथ मंदिर का झंडा हवा के विपरीत दिशा में क्यों लहराता है? जानिए रहस्य

    जगन्नाथ मंदिर का झंडा हवा के विपरीत दिशा में क्यों लहराता है? जानिए रहस्य

    जगन्नाथ मंदिर का झंडा हवा के विपरीत दिशा में क्यों लहराता है? जानिए रहस्य

    पुरी,। पुरी का जगन्नाथ मंदिर अपनी भव्यता और आस्था के लिए विश्व प्रसिद्ध है, लेकिन इससे जुड़े कई रहस्य और परंपराएं भी हैं जो आपको हैरान कर देंगी। इसी में से एक है इस मंदिर का झंडा जो हवा की दिशा के विपरीत लहराता है। आम तौर पर झंडा हवा के साथ उड़ता है, लेकिन यहां ऐसा नहीं होता।

    यही बात इस मंदिर को रहस्यमयी और अद्भुत बनाती है। आज तक कोई पता नहीं लगा पाया है कि मंदिर का झंडा हवा के विपरीत दिशा में क्यों लहराता है। स्थानीय लोग इसे भगवान जगन्नाथ की दैवीय शक्ति का संकेत मानते हैं। कहा जाता है कि मंदिर के ऊपर लहराता झंडा नकारात्मक ऊर्जाओं को खत्म करता है और पूरे वातावरण में सकारात्मकता फैलाता है।

    इस झंडे को हर दिन बदला जाता है, लेकिन यह काम कोई साधारण नहीं है, बल्कि भगवान के प्रति भक्ति और विश्वास का प्रतीक माना जाता है। हर शाम, लगभग सूर्यास्त के समय, पुराना झंडा उतारकर नया त्रिकोणीय झंडा लगाया जाता है। सर्दियों में यह काम करीब 5 बजे और गर्मियों में 6 बजे के आसपास किया जाता है। ऐसा भी है कि अगर किसी दिन झंडा नहीं बदला गया, तो मंदिर 18 सालों तक बंद हो सकता है। इसलिए चाहे बारिश हो या तूफान, यह परंपरा एक दिन के लिए भी नहीं रुकती।झंडा बदलने का यह कार्य एक विशेष परिवार, जिसे चुनरा सेवक या चोला परिवार कहा जाता है, के हाथों से ही होता है। इस परिवार के लोग लगभग पिछले 800 सालों से यह पवित्र जिम्मेदारी निभा रहे हैं। सबसे हैरानी की बात यह है कि वे बिना किसी सुरक्षा उपकरण के 214 फुट ऊंचे मंदिर के शिखर पर चढ़ते हैं और वहां झंडा बदलते हैं। कहा जाता है कि आज तक इस परिवार के किसी भी सदस्य को इस काम के दौरान कोई चोट नहीं लगी।

    पुराने झंडे को नकारात्मक ऊर्जा को सोखने वाला माना जाता है, इसलिए हर दिन नया झंडा लगाकर भगवान जगन्नाथ के प्रति श्रद्धा व्यक्त की जाती है। यह झंडा केवल एक कपड़ा नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और सुरक्षा का प्रतीक है। जगन्नाथ मंदिर का यह रहस्य भले ही विज्ञान से परे हो, लेकिन श्रद्धालुओं के लिए यह भगवान की शक्ति और कृपा का जीवंत प्रमाण है।

  • 1.2 लाख सैलरी, फिर भी जेब खाली! 28 साल के युवक की आपबीती सुनकर चौंक जाएंगे आप..

    1.2 लाख सैलरी, फिर भी जेब खाली! 28 साल के युवक की आपबीती सुनकर चौंक जाएंगे आप..

    1.2 लाख सैलरी, फिर भी जेब खाली! 28 साल के युवक की आपबीती सुनकर चौंक जाएंगे आप..

    आज के दौर में जहां अच्छी सैलरी को सफलता का पैमाना माना जाता है, वहीं एक 28 साल के युवक की कहानी ने सोशल मीडिया पर सनसनी मचा दी है. Reddit पर वायरल हुई इस पोस्ट ने उन लाखों कॉर्पोरेट कर्मचारियों के दर्द को बयां किया है जो भारी-भरकम सैलरी पाने के बाद भी महीने के आखिर में खुद को कंगाल पाते हैं. महज कुछ साल पहले 25,000 रुपए महीने कमाने वाले इस युवक की आज सैलरी 1.2 लाख रुपए है, लेकिन हालात ऐसे हैं कि महीने के अंत में उसके पास केवल 5 से 8 हजार रुपए ही बच पाते हैं.

    किराया, SIP और अचानक आए खर्चे

    युवक ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि जैसे-जैसे आमदनी बढ़ी, वैसे-वैसे खर्चे भी कई गुना बढ़ गए. आज उसकी सैलरी का बड़ा हिस्सा महंगे किराए, परिवार की जिम्मेदारियों, म्यूचुअल फंड एसआईपी और रोजमर्रा की भागदौड़ में खर्च हो जाता है. जो थोड़ी बहुत रकम बचती है, वह अचानक आने वाले मेडिकल या अन्य खर्चों की भेंट चढ़ जाती है. युवक यह दर्द साफ दिखाता है कि कैसे लाइफस्टाइल से जुड़ी महंगाई लोगों की जेब चुपचाप खाली कर रही है.

    सोशल मीडिया पर यूजर्स की तीखी प्रतिक्रियाएं

    यह पोस्ट सामने आते ही रेडिट पर बहस छिड़ गई. इंटरनेट यूजर्स ने इस समस्या पर खुलकर अपने विचार रखे और इसे मैनेज करने के कुछ तरीके भी सुझाए. एक यूजर ने सलाह दी कि लोग अक्सर बाहर खाने और छोटी-छोटी चीजों पर बिना सोचे-समझे हजारों रुपए उड़ा देते हैं. तीन महीने तक अपने हर एक खर्चे को ट्रैक करें, असली तस्वीर खुद-ब-खुद सामने आ जाएगी.

    एक अन्य यूजर ने लिखा कि जब आपकी सैलरी अचानक बढ़े, तो कम से कम एक साल तक ऐसे जिएं जैसे आप पुरानी सैलरी पर ही जी रहे हैं. इससे खर्चों की आदतें नियंत्रण में रहती हैं. कई लोगों ने याद दिलाया कि एसआईपी (SIP) बचत का हिस्सा है, न कि खर्चा. इसलिए इसे अपनी कटौती में शामिल न करें.

     

     

     
     
  • एलीफेंटा गुफाओं को देखकर हैरान रह जाएंगे आप, आज ही बना लें घूमने का प्लान.?

    एलीफेंटा गुफाओं को देखकर हैरान रह जाएंगे आप, आज ही बना लें घूमने का प्लान.?

    एलीफेंटा गुफाओं को देखकर हैरान रह जाएंगे आप, आज ही बना लें घूमने का प्लान.?

    महाराष्ट्र अपने पर्यटक स्थलों के कारण दुनिया में बहुत ही प्रसिद्ध है। अगर आप भी आगामी समय में कही पर घूमने का प्लान बना रहे हैं तो यहां पर जा सकते हैं। आज हम आपको यहां की एलीफेंटा गुफाओं के बारे में जानकारी देने जा रहे है, जो मुंबई शहर से लगभग 11 किलोमीटर की दूरी पर घारपुरी द्वीप पर स्थित हैं। इन्हें यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों की सूची में भी जगह मिल चुकी है।

    इनमें आपको मध्ययुगीन काल से रॉक-कट कला और वास्तुकला का दीदार भी करने का मौका मिलेगा। इन्हें मूल रूप से घारपुरिची लेनि के नाम से भी जाना जाता हैं। इस गुफा मंदिर का अधिकांश भाग भगवान शंकर को समर्पित हैं। आप इन गुफाओं को देखकर हैरान रह जाएंगे।

    मुंबई के गेटवे ऑफ इण्डिया से नौका यात्रा के माध्यम से आप एलीफेंटा की गुफा तक पहुंच सकते हैं। आपको आज ही यहां पर घूमने का  प्लान बना लेना चाहिए। यहां का टूर आपके लिए यादगार साबित होगा।

  • शरीर में आयोडीन की कमी है? थकान और वजन बढ़ने को न करें नजरअंदाज, डाइट में शामिल करें ये 5 चीजें!

    शरीर में आयोडीन की कमी है? थकान और वजन बढ़ने को न करें नजरअंदाज, डाइट में शामिल करें ये 5 चीजें!

    शरीर में आयोडीन की कमी है? थकान और वजन बढ़ने को न करें नजरअंदाज, डाइट में शामिल करें ये 5 चीजें!

    आयोडीन का सबसे महत्वपूर्ण काम थायराइड हार्मोन के निर्माण में मदद करना है. ये हार्मोन शरीर में ऊर्जा के इस्तेमाल और मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने के साथ सामान्य शारीरिक विकास में भी अहम भूमिका निभाते हैं.

    आयोडीन शरीर के लिए जरूरी खनिजों में शामिल है. इसकी जरूरत भले ही कम मात्रा में होती है, लेकिन शरीर को स्वस्थ रखने में इसकी भूमिका बेहद अहम है. आयोडीन थायराइड हार्मोन बनाने में मदद करता है, जो मेटाबॉलिज्म, ऊर्जा, विकास और शरीर के कई जरूरी कामों को नियंत्रित करते हैं. खासतौर पर बच्चों के दिमागी विकास और गर्भावस्था के दौरान आयोडीन की पर्याप्त मात्रा बेहद जरूरी मानी जाती है.

    थायराइड के लिए क्यों जरूरी है आयोडीन आयोडीन का सबसे महत्वपूर्ण काम थायराइड हार्मोन के निर्माण में मदद करना है. ये हार्मोन शरीर में ऊर्जा के इस्तेमाल और मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने के साथ सामान्य शारीरिक विकास में भी अहम भूमिका निभाते हैं. बच्चों में पर्याप्त आयोडीन दिमाग के विकास और सीखने-समझने की क्षमता के लिए जरूरी होता है.

    वहीं गर्भावस्था के दौरान इसकी कमी भ्रूण के विकास को प्रभावित कर सकती है.कमी होने पर दिख सकते हैं ये संकेत Cleveland Clinic के अनुसार, शरीर में लंबे समय तक आयोडीन की कमी रहने पर कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं. इसकी वजह से थायराइड ग्रंथि बढ़ सकती है, जिसे घेंघा कहा जाता है. इसके अलावा थायरॉइड हार्मोन कम बनने पर थकान, वजन बढ़ना और ठंड अधिक महसूस होना जैसी परेशानियां हो सकती हैं. बच्चों में आयोडीन की कमी उनके विकास और मानसिक क्षमता पर भी असर डाल सकती है.

    एकाग्रता और याददाश्त से जुड़ी समस्याएं भी देखने को मिल सकती हैं.इन चीजों से मिलेगा आयोडीन आयोडीन की कमी से बचने का सबसे आसान तरीका आयोडीन युक्त नमक का इस्तेमाल करना है. हालांकि नमक का सेवन जरूरत से ज्यादा नहीं करना चाहिए. इसलिए अतिरिक्त नमक खाने के बजाय रोजाना के खाने में आयोडीन युक्त नमक का इस्तेमाल करना बेहतर विकल्प है.

    समुद्री खाद्य पदार्थ भी आयोडीन के अच्छे स्रोत माने जाते हैं. मछली और समुद्री शैवाल में आयोडीन पाया जाता है. इसके अलावा दूध, दही और चीज जैसे डेयरी उत्पाद भी आयोडीन की जरूरत पूरी करने में मदद कर सकते हैं. अंडे में भी आयोडीन के साथ प्रोटीन पाया जाता है. आलू में भी कुछ मात्रा में आयोडीन मौजूद होता है.

  • साइबर फ्रॉड पर गृह मंत्रालय का अलर्ट, फर्जी APK ऐप्स और सोशल मीडिया विज्ञापनों से ऐसे बचें..

    साइबर फ्रॉड पर गृह मंत्रालय का अलर्ट, फर्जी APK ऐप्स और सोशल मीडिया विज्ञापनों से ऐसे बचें..

    साइबर फ्रॉड पर गृह मंत्रालय का अलर्ट, फर्जी APK ऐप्स और सोशल मीडिया विज्ञापनों से ऐसे बचें..

    गृह मंत्रालय की साइबर विंग द्वारा जारी एडवाइजरी के बीच मोबाइल फोन पर फर्जी ऐप्स, फिशिंग लिंक्स और थर्ड-पार्टी एपीके फाइलों के माध्यम से बढ़ते साइबर फ्रॉड और वित्तीय धोखाधड़ी पर विशेषज्ञों ने डिजिटल सुरक्षा से जुड़े नियमों व सावधानियों की जानकारी दी है.

    विशेषज्ञों के अनुसार, सोशल मीडिया विज्ञापनों, फर्जी ट्रैफिक चालान या गैस पाइपलाइन बिल के नाम पर भेजे जाने वाले अनजान लिंक्स से फोन हैक कर कैमरा, माइक्रोफोन, एसएमएस और कॉल्स का एक्सेस ले लिया जाता है. इसके बाद

    वेरिफिकेशन के नाम पर आधार, पैन कार्ड और यूपीआई पिन जैसी गोपनीय जानकारी हासिल कर बैंक खातों से धोखाधड़ी की जाती है. इसके साथ ही फर्जी लोन ऐप्स और डेटा ब्रीच से जुड़े खतरों से बचने के लिए अज्ञात स्रोतों से ऐप डाउनलोड न करने, ऐप परमिशन सीमित रखने, रेटिंग व रिव्यू जांचने और सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं.

  • गड्ढे में पलटी कार तो खुला राज, अंदर भरी थी शराब; खबर मिलते ही उमड़ी भीड़, कोई पैक लेकर भागा तो कोई दोनों हाथों से ले गया..

    गड्ढे में पलटी कार तो खुला राज, अंदर भरी थी शराब; खबर मिलते ही उमड़ी भीड़, कोई पैक लेकर भागा तो कोई दोनों हाथों से ले गया..

    गड्ढे में पलटी कार तो खुला राज, अंदर भरी थी शराब; खबर मिलते ही उमड़ी भीड़, कोई पैक लेकर भागा तो कोई दोनों हाथों से ले गया..

    समस्तीपुर: बिहार के समस्तीपुर में सड़क हादसे के बाद ऐसा मामला सामने आया, जिसने वहां मौजूद लोगों को हैरान कर दिया। एक कार सड़क किनारे गड्ढे में पलट गई। हादसे के बाद जब लोगों को पता चला कि कार के अंदर शराब के टेट्रा पैक भरे हुए हैं, तो मौके पर बड़ी संख्या में भीड़ जुट गई।

    पुलिस के पहुंचने से पहले ही कई लोग कार से शराब के पैक निकालकर अपने साथ ले गए। जब पुलिस मौके पर पहुंची तो कार तो वहां मिली, लेकिन उसके अंदर शराब का कोई पैक नहीं बचा था।

    तेज बारिश में अनियंत्रित होकर गड्ढे में पलटी कार

    मामला समस्तीपुर के दलसिंहसराय थाना क्षेत्र में एनएच-28 पर पगड़ा गांव के पास का बताया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, एक कार समस्तीपुर की ओर से बरौनी की तरफ जा रही थी।

    इसी दौरान तेज बारिश के कारण सड़क पर फिसलन थी। पगड़ा चौक के पास चालक ने कार से नियंत्रण खो दिया और वाहन अनियंत्रित होकर सड़क किनारे बने गड्ढे में जा गिरा।

    हादसे के बाद कार में सवार चालक और अन्य लोग वाहन को मौके पर छोड़कर वहां से निकल गए।

    कार के अंदर शराब देखकर जुटने लगी भीड़

    हादसे के बाद आसपास के लोग कार को देखने के लिए मौके पर पहुंचने लगे। इसी दौरान पता चला कि कार के अंदर शराब के टेट्रा पैक रखे हुए हैं।

    यह जानकारी फैलते ही मौके पर लोगों की भीड़ बढ़ने लगी। इसके बाद कई लोग गड्ढे में उतरकर कार के अंदर से शराब के पैक निकालने लगे।

    कुछ लोग एक-दो पैक लेकर वहां से निकल गए, जबकि कुछ लोग दोनों हाथों में कई पैक भरकर ले जाते नजर आए। देखते ही देखते कार के आसपास शराब लेने वालों की भीड़ जमा हो गई।

    पुलिस पहुंची तो कार खाली मिली

    घटना की सूचना मिलने के बाद दलसिंहसराय पुलिस मौके पर पहुंची। लेकिन तब तक कार से शराब के अधिकांश टेट्रा पैक निकाले जा चुके थे।

    पुलिस को मौके पर कार मिली, लेकिन उसके अंदर शराब की एक भी बोतल या टेट्रा पैक नहीं मिला। इसके बाद कार को गड्ढे से बाहर निकालने के लिए क्रेन बुलाई गई।

    काफी मशक्कत के बाद कार को बाहर निकाला गया और पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।

    पुलिस ने लोगों से शराब लौटाने को कहा

    दलसिंहसराय के अपर थानाध्यक्ष मनीष कुमार के मुताबिक, पुलिस को पगड़ा चौक के पास कार पलटने की सूचना मिली थी। टीम जब मौके पर पहुंची तो कार गड्ढे में पड़ी हुई थी।

    पुलिस के अनुसार, वाहन को बाहर निकालने के दौरान उसमें शराब नहीं मिली। पुलिस के पहुंचने से पहले ही आसपास मौजूद लोग शराब के पैक लेकर जा चुके थे।

    पुलिस ने लोगों से शराब वापस करने की अपील की है और चेतावनी दी है कि शराब अपने पास रखने या उसे वापस नहीं करने की स्थिति में कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

    फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कार में शराब कहां से लाई जा रही थी और इसे कहां पहुंचाया जाना था। मामले में कार मालिक, चालक और शराब की खेप से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है।

  • बारिश में क्यों एक जगह ठहर जाते हैं बौद्ध भिक्षु? जानिए 2500 साल पुरानी वर्षावास की परंपरा.

    बारिश में क्यों एक जगह ठहर जाते हैं बौद्ध भिक्षु? जानिए 2500 साल पुरानी वर्षावास की परंपरा.

    बारिश में क्यों एक जगह ठहर जाते हैं बौद्ध भिक्षु? जानिए 2500 साल पुरानी वर्षावास की परंपरा.

    बारिश का मौसम शुरू होते ही बौद्ध धर्म में एक विशेष परंपरा की शुरुआत होती है, जिसे वर्षावास कहा जाता है. इस दौरान बौद्ध भिक्षु तीन महीने तक एक ही स्थान पर रहकर भगवान बुद्ध का ध्यान, साधना और पूजा-अर्चना करते हैं.

    बारिश का मौसम शुरू होते ही बौद्ध धर्म में एक विशेष परंपरा की शुरुआत होती है, जिसे वर्षावास कहा जाता है. इस दौरान बौद्ध भिक्षु तीन महीने तक एक ही स्थान पर रहकर भगवान बुद्ध का ध्यान, साधना और पूजा-अर्चना करते हैं. भगवान बुद्ध के समय से चली आ रही यह परंपरा अहिंसा और सभी जीव-जंतुओं के प्रति करुणा की भावना से जुड़ी हुई है. बौद्ध धर्म के अनुसार बारिश के मौसम में जमीन पर बड़ी संख्या में छोटे-छोटे जीव-जंतु निकलते हैं. ऐसे में भिक्षुओं के लगातार भ्रमण करने से अनजाने में किसी जीव के पैर के नीचे आने और उसकी मृत्यु होने की आशंका रहती है.

    इसी वजह से वर्षावास के दौरान भिक्षु एक ही स्थान पर रहकर ध्यान और साधना करते हैं. इस अवधि में वे सुबह और शाम प्रवचन भी करते हैं, जिसे सुनने के लिए आसपास के श्रद्धालु पहुंचते हैं.तीन महीने तक एक ही स्थान पर रहते हैं भिक्षु महाबोधि मंदिर के केयरटेकर बौद्ध भिक्षु दीनानाथ के अनुसार, वर्षावास बौद्ध भिक्षुओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण परंपरा है. बारिश के तीन महीनों के दौरान भिक्षु एक स्थान पर रहकर भगवान बुद्ध की शिक्षाओं का पालन करते हैं.

    इस दौरान ध्यान, साधना, पूजा और प्रवचन का विशेष महत्व होता है. बौद्ध भिक्षुओं के साथ उपासक और श्रद्धालु भी इस परंपरा में शामिल होते हैं.वर्षावास पूरा होने के बाद होता है कठिन चीवर दान तीन महीने का वर्षावास पूरा होने के बाद कठिन चीवर दान की परंपरा निभाई जाती है. कई उपासक मेहनत से बौद्ध भिक्षुओं के लिए चीवर यानी वस्त्र तैयार करते हैं और वर्षावास समाप्त होने के बाद उन्हें दान करते हैं.

    वर्षावास समाप्त होने के एक महीने के भीतर यह दान किया जाता है. इन्हीं वस्त्रों का इस्तेमाल भिक्षु आगे पूरे वर्ष करते हैं.भगवान बुद्ध ने श्रावस्ती में किए थे 24 वर्षावास बौद्ध परंपरा के अनुसार, भगवान बुद्ध ने भी वर्षावास का पालन किया था. बताया जाता है कि उन्होंने श्रावस्ती में एक ही स्थान पर सबसे अधिक 24 वर्षावास बिताए थे. भिक्षुओं के लिए वर्षावास की संख्या का विशेष महत्व माना जाता है और इसी के आधार पर उनका पद निर्धारित होता है. यह परंपरा भगवान बुद्ध के समय से आज तक चली आ रही है.

  • शादी में पहनने के लिए दिया था ब्लाउज, समय पर नहीं मिला तो पहुंची उपभोक्ता अदालत; दर्जी पर लगा 7 हजार से ज्यादा का जुर्माना.

    शादी में पहनने के लिए दिया था ब्लाउज, समय पर नहीं मिला तो पहुंची उपभोक्ता अदालत; दर्जी पर लगा 7 हजार से ज्यादा का जुर्माना.

    शादी में पहनने के लिए दिया था ब्लाउज, समय पर नहीं मिला तो पहुंची उपभोक्ता अदालत; दर्जी पर लगा 7 हजार से ज्यादा का जुर्माना.

    शादी-ब्याह की तैयारियों में कपड़ों की फिटिंग और सिलाई का काम समय पर पूरा होना बेहद जरूरी होता है। लेकिन गुजरात के अहमदाबाद में एक महिला के साथ ऐसा मामला सामने आया, जहां उसने शादी में पहनने के लिए ब्लाउज सिलने को दिया, एडवांस रकम भी चुकाई, लेकिन तय समय तक उसे ब्लाउज नहीं मिल सका। मामला इतना बढ़ा कि महिला को उपभोक्ता अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

    अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद दर्जी की सेवा में कमी मानते हुए महिला को उसकी दी गई रकम ब्याज समेत लौटाने और मानसिक परेशानी व मुकदमे के खर्च के लिए अतिरिक्त रकम देने का आदेश दिया।

    शादी के लिए दिया था ब्लाउज सिलने का ऑर्डर

    यह मामला 24 दिसंबर 2024 के आसपास का बताया जाता है। महिला ने अपने एक रिश्तेदार की शादी में पहनने के लिए ब्लाउज सिलवाने का ऑर्डर दिया था। इसके लिए उसने दर्जी को 4,395 रुपये एडवांस के तौर पर दे दिए।

    महिला ने अपनी पसंद और डिजाइन के मुताबिक ब्लाउज तैयार करने के लिए कहा था। लेकिन जब वह तय समय पर ब्लाउज लेने पहुंची तो उसकी परेशानी बढ़ गई। ब्लाउज उसकी बताई गई डिजाइन के अनुसार तैयार नहीं हुआ था।

    गलती सुधारने का दिया भरोसा, लेकिन समय भी निकल गया

    बताया जाता है कि ब्लाउज में कमी सामने आने के बाद दर्जी ने उसे ठीक करके देने का भरोसा दिया। महिला को उम्मीद थी कि शादी से पहले उसकी ड्रेस तैयार हो जाएगी।

    लेकिन तय समय बीतता गया और ब्लाउज तैयार नहीं हुआ। शादी का दिन नजदीक आने के कारण महिला की परेशानी भी बढ़ती गई। आखिरकार उसे अपनी पसंद का ब्लाउज समय पर नहीं मिल सका।

    महिला का कहना था कि दर्जी की लापरवाही के कारण उसे शादी के कार्यक्रम में असुविधा और शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा।

    मामला पहुंचा उपभोक्ता अदालत

    जब समस्या का समाधान नहीं हुआ तो महिला ने अहमदाबाद की अतिरिक्त उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में शिकायत दर्ज कराई। उसने अपनी एडवांस रकम वापस करने के साथ मानसिक परेशानी और मुकदमे में हुए खर्च की भरपाई की मांग की।

    मामले की सुनवाई के दौरान दर्जी अदालत में पेश नहीं हुआ। उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आयोग ने माना कि ग्राहक से पैसे लेने के बाद तय समय और अपेक्षित तरीके से सेवा उपलब्ध नहीं कराना सेवा में कमी के दायरे में आता है।

    अदालत ने दिया रकम लौटाने का आदेश

    उपभोक्ता आयोग ने दर्जी को महिला से ली गई 4,395 रुपये की मूल रकम 7 प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ लौटाने का आदेश दिया।

    इसके अलावा महिला को हुई मानसिक परेशानी के लिए 2,000 रुपये और मुकदमे के खर्च के रूप में 500 रुपये अतिरिक्त देने को कहा गया।

    इस तरह दर्जी को मूल रकम के अलावा ब्याज और अतिरिक्त मुआवजा भी देना पड़ा।

    छोटी सी लापरवाही पड़ गई भारी

    यह मामला इस बात की याद दिलाता है कि किसी सेवा के लिए ग्राहक से एडवांस रकम लेने के बाद तय समय पर काम पूरा करना कितना जरूरी है। शादी जैसे महत्वपूर्ण मौके पर कपड़े समय पर तैयार न होने से ग्राहक को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

    इस मामले में ब्लाउज की सिलाई भले ही एक छोटा काम लग रहा हो, लेकिन समय पर सेवा नहीं मिलने की वजह से विवाद उपभोक्ता अदालत तक पहुंच गया। अदालत के फैसले के बाद यह मामला उन लोगों के लिए भी सबक माना जा रहा है, जो ग्राहकों से एडवांस लेकर काम को समय पर पूरा नहीं करते।

  • हनुमान जी का भजन बजते ही मंदिर पहुंचा कुत्ता, मूर्ति के सामने झूमने लगा तो देखते रह गए लोग

    हनुमान जी का भजन बजते ही मंदिर पहुंचा कुत्ता, मूर्ति के सामने झूमने लगा तो देखते रह गए लोग

    हनुमान जी का भजन बजते ही मंदिर पहुंचा कुत्ता, मूर्ति के सामने झूमने लगा तो देखते रह गए लोग

    सोशल मीडिया पर जानवरों से जुड़े कई वीडियो अक्सर लोगों का ध्यान खींचते हैं, लेकिन कुछ वीडियो ऐसे होते हैं जो अपनी मासूमियत और अनोखे अंदाज की वजह से देखते ही देखते वायरल हो जाते हैं। इन दिनों एक कुत्ते का ऐसा ही वीडियो सोशल मीडिया पर लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो में कुत्ता हनुमान जी के भजन की धुन सुनते ही मंदिर में पहुंचता है और मूर्ति के सामने खड़े होकर झूमने लगता है।

    भजन बजा तो मंदिर में पहुंच गया कुत्ता

    वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि मंदिर में हनुमान जी की मूर्ति स्थापित है। इसी दौरान वहां भजन बज रहा होता है। भजन की आवाज सुनते ही एक कुत्ता मंदिर के अंदर पहुंच जाता है और सीधे हनुमान जी की मूर्ति के सामने जाकर खड़ा हो जाता है।

    इसके बाद कुत्ता अपने शरीर को लय के साथ हिलाने लगता है। उसका अंदाज देखकर ऐसा लगता है जैसे वह भजन की धुन पर झूम रहा हो। कुछ देर तक कुत्ता इसी तरह मूर्ति के सामने खड़ा होकर अपनी हरकतों से वहां मौजूद लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचता रहता है।

    मंदिर में मौजूद लोगों ने इस अनोखे पल को अपने कैमरे में रिकॉर्ड कर लिया। इसके बाद यह वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया गया, जहां इसे देखने वाले लोग भी कुत्ते के अंदाज को देखकर हैरान रह गए।

    लोगों को पसंद आई कुत्ते की मासूमियत

    वीडियो सोशल मीडिया पर पहुंचते ही लोगों की प्रतिक्रियाएं आने लगीं। कई यूजर्स ने कुत्ते की मासूमियत और उसके अनोखे अंदाज की तारीफ की। कुछ लोगों ने इसे बेहद प्यारा पल बताया, जबकि कई यूजर्स ने कहा कि कुत्ते का इस तरह भजन की धुन पर झूमना देखने में काफी दिलचस्प है।

    हालांकि, किसी जानवर के व्यवहार को सीधे उसकी धार्मिक भावना से जोड़कर निश्चित निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। संभव है कि कुत्ता भजन की आवाज, संगीत की लय या मंदिर के माहौल पर प्रतिक्रिया दे रहा हो। इसके बावजूद कैमरे में कैद उसका यह अंदाज लोगों को खूब पसंद आ रहा है।

    Instagram पर शेयर किया गया वीडियो

    बताया जा रहा है कि यह वीडियो Instagram के @itz_royal_pandit अकाउंट से शेयर किया गया था। वीडियो में कुत्ते को हनुमान जी की मूर्ति के सामने झूमते हुए देखा जा सकता है। सोशल मीडिया पर शेयर होने के बाद यह वीडियो तेजी से लोगों का ध्यान खींच रहा है और यूजर्स इसे जमकर पसंद कर रहे हैं।